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प्रधानमंत्री का दौरा टला, आपदाग्रस्त जिलों पर निगाह बनाए रखी उच्च स्तरीय बैठक

देहरादून प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। मौसम अनुकूल न होने के कारण प्रधानमंत्री मोदी का आपदा प्रभावित धराली क्षेत्र के हवाई सर्वेक्षण का कार्यक्रम टल गया। प्रधानमंत्री अभी जोलीग्रांट एयरपोर्ट स्थित गेस्ट हाउस में उच्च स्तरीय बैठक ले रहे हैं। इसके बाद वह राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए आपदा प्रभावितों और राहत व बचाव में लगी टीमों के सदस्यों से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री का जनपद चमोली के प्रभावित क्षेत्र का हवाई दौरा फिलहाल मौसम खराब होने से स्थगित हो गया है। यह जानकारी पुलिस चौकी प्रभारी मानवेन्द्र गुसाईं द्वारा दी गई है। वहीं एयरपोर्ट जा रहे महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला समेत कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रायपुर स्थित महाराणा प्रताप कॉलेज चौक पर रोक लिया।

भ्रष्टाचार पर CBI का वार, EPFO अधिकारी को रिश्वत लेते पकड़ा गया

नई दिल्ली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के क्षेत्रीय अधिकारी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान जगदीश तांबे के रूप में हुई, जो पश्चिमी दिल्ली में ईपीएफओ के क्षेत्रीय आयुक्त के पद पर थे। सीबीआई ने जानकारी दी कि क्षेत्रीय आयुक्त जगदीश तांबे को शिकायतकर्ता से 1.50 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सीबीआई ने 9 सितंबर को आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने एक व्यक्ति के खिलाफ आरडीए कार्यवाही को अनुकूल तरीके से निपटाने के लिए 3 लाख रुपए की अवैध रिश्वत की मांगी थी। बातचीत के बाद आरोपी अधिकारी ने शिकायतकर्ता से डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत लेने पर सहमति व्यक्त की। इसी बीच, व्यक्ति ने सीबीआई को मामले की जानकारी दी। सीबीआई ने बुधवार को जाल बिछाया और आरोपी क्षेत्रीय आयुक्त को शिकायतकर्ता से 1.5 लाख रुपए की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।फिलहाल, सीबीआई इस मामले में आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है। इस प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के प्रति उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसके साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि जिन नागरिकों को भ्रष्टाचार के मामले देखने को मिलते हैं या जिनसे अधिकारी रिश्वत मांगते हैं, वे सीबीआई दफ्तर पहुंचकर या मोबाइल नंबर (9650394847) पर सूचना दे सकते हैं। इससे पहले, सीबीआई ने राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल को शिकायतकर्ता से एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। सीबीआई ने 25 अगस्त को दिल्ली के अशोक विहार थाने में तैनात हेड कांस्टेबल और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि सब-इंस्पेक्टर (एसआई) और आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज न करने के लिए उससे 3 लाख रुपए की मांग की थी। बातचीत के बाद आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायत को बंद करने के लिए शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपए की रिश्वत लेने पर सहमति जताई। आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता को 25 अगस्त को ही 1 लाख रुपए का आंशिक भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी हेड कांस्टेबल को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।

पीयूष गोयल का बड़ा बयान: भारत और अमेरिका की ट्रेड डील की बातचीत सफल, नवंबर में पहला फाइनल चरण

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील का पहला चरण नवंबर तक फाइनल हो सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच चर्चा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों पक्ष अब तक की प्रगति से संतुष्ट हैं। पत्रकारों से बातचीत के दौरान गोयल ने कहा कि फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मंत्रियों को इस समझौते पर काम करने और इस साल नवंबर तक पहले चरण को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया था। गोयल ने आगे कहा कि इस ट्रेड डील का पहला चरण नवंबर 2025 तक पूरा हो जाना चाहिए, और मार्च से ही इस विषय पर बहुत अच्छे माहौल में बहुत गंभीरता से चर्चा चल रही है और प्रगति हो रही है। साथ ही कहा कि इस प्रगति से दोनों पक्ष संतुष्ट हैं। गोयल का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब सोशल मीडिया पर डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक संवाद हुआ है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि वह दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत से खुश हैं और उन्हें विश्वास है कि दोनों देश एक सफल निष्कर्ष पर पहुंचेंगे। ट्रंप ने आगे कहा, "मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत और अमेरिका, दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए बातचीत जारी रखे हुए हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि वह आने वाले हफ्तों में अपने "बहुत अच्छे दोस्त" प्रधानमंत्री मोदी से बात करने के लिए उत्सुक हैं। एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका को अपना घनिष्ठ मित्र और स्वाभाविक साझेदार बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रेड डील भारत-अमेरिका साझेदारी की असीम संभावनाओं को उजागर करने में मदद करेगी और आश्वासन दिया कि दोनों टीमें चर्चाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। बाद में ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के पोस्ट को फिर से शेयर किया, जो दिखाता है कि ट्रेड डील को लेकर दोनों देशों में सकारात्मक रुख बना हुआ है।

व्यापार बाधाओं को खत्म करने के लिए मणिपुर सरकार ने यूनाइटेड नगा काउंसिल से की अपील

इंफाल  मणिपुर सरकार ने राज्य में नगा समुदाय की शीर्ष संस्था यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) से नगा बहुल क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनिश्चितकालीन 'व्यापार प्रतिबंध' हटाने का अनुरोध किया है। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। यूएनसी और अन्य नगा संगठनों ने भारत-म्यांमार अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने और मुक्त आवागमन व्यवस्था (एफएमआर) को समाप्त करने का विरोध करते हुए 8 सितंबर की मध्यरात्रि से सभी नगा आबादी वाले क्षेत्रों में व्यापार प्रतिबंध लागू कर दिया। इंफाल में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंफाल-जिरीबाम राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-37) और इंफाल-दीमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-2) पर विभिन्न स्थानों पर सैकड़ों माल से लदे और खाली ट्रक, साथ ही परिवहन ईंधन ले जाने वाले टैंकर फंसे हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि मणिपुर के मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने यूएनसी अध्यक्ष एनजी लोरहो को लिखे एक पत्र में अनुरोध किया कि जनहित में अपना आंदोलन वापस ले लें और गृह मंत्रालय (एमएचए) ने नगा संगठनों के साथ अपनी बातचीत जारी रखी। मुख्य सचिव ने यूएनसी अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में कहा: "गृह मंत्रालय, नगा बहुल क्षेत्रों में भारत और म्यांमार के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के मुद्दे पर यूएनसी के साथ बातचीत कर रहा है। राज्य सरकार को इस विषय पर आपके ज्ञापन और अभ्यावेदन भी प्राप्त हुए हैं।" पत्र में आगे कहा गया है, "यह सूचित किया जाता है कि केंद्र सरकार ने यूएनसी और अन्य हितधारकों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर ध्यान दिया है। तदनुसार, केंद्र सरकार बाड़ लगाने का काम शुरू करने से पहले यूएनसी और अन्य हितधारकों के साथ पूर्व परामर्श के लिए बातचीत कर रही है और करती रहेगी। यूएनसी के साथ अगली त्रिपक्षीय बैठक पारस्परिक रूप से तय की गई तिथि और स्थान पर होगी।" इस बीच, गृह मंत्रालय के अधिकारियों और मणिपुर के तीन नगा समूहों के नेताओं ने 26 अगस्त को दिल्ली में पुरानी एफएमआर को बहाल करने और भारत-म्यांमार सीमा पर चल रही बाड़ लगाने की कार्रवाई को रोकने की मांग पर एक बैठक की थी। ये बैठक बेनतीजा रही। गृह मंत्रालय की आधिकारिक टीम का नेतृत्व डॉ. के.पी. मिश्रा कर रहे हैं, जो पूर्वोत्तर मामलों पर गृह मंत्रालय के सलाहकार हैं, जबकि 11 सदस्यीय नागा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूएनसी अध्यक्ष एनजी लोरहो ने किया और इसमें यूएनसी, ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर (एएनएसएएम) और नागा महिला संघ (एनडब्ल्यूयू) के प्रतिनिधि शामिल थे। यूएनसी ने पहले केंद्र सरकार को एक अल्टीमेटम दिया था और 16 अगस्त को मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के साथ बैठक की थी, जिसमें पुराने एफएमआर को बहाल करने और मणिपुर से लगी भारत-म्यांमार सीमा के 398 किलोमीटर पर बाड़ लगाने पर रोक लगाने पर चर्चा की गई थी। यूएनसी और अन्य नागा संगठन पिछले साल से अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं और "एफएमआर को एकतरफा रूप से रद्द करने और भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने" का विरोध कर रहे हैं। व्यापार प्रतिबंध और मालवाहक वाहनों के रोके जाने के कारण, सोमवार से इस पूर्वोत्तर राज्य में राज्य के बाहर से आवश्यक वस्तुओं और खाद्यान्नों की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। आर्थिक नाकेबंदी ने राज्य के कई हिस्सों में आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर दिया है, जिससे इंफाल घाटी और दक्षिणी कुकी-बहुल पहाड़ी जिलों पर असर पड़ा है। व्यापार प्रतिबंध का सेनापति, उखरुल और तामेंगलोंग जिलों पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जहां आवश्यक वस्तुओं से लदे ट्रक विभिन्न चौकियों पर फंसे हुए हैं। नगा संगठनों के अनुसार, सीमा पर बाड़ लगाने और एफएमआर को निरस्त करने के सरकार के फैसले से मणिपुर, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार में रहने वाली नगा जनजातियां भौतिक रूप से विभाजित हो जाएंगी, जिससे उनकी सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक और पैतृक संबंधों को खतरा होगा। पिछले साल गृह मंत्रालय ने घोषणा की थी कि एफएमआर, जो पहले भारत-म्यांमार सीमा पर रहने वाले लोगों को बिना पासपोर्ट और वीजा के एक-दूसरे के क्षेत्र में 16 किलोमीटर तक यात्रा करने की अनुमति देता था, को समाप्त कर दिया जाएगा। इसके बजाय, गृह मंत्रालय ने सीमा पार आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सीमा के दोनों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले भारत और म्यांमार दोनों के सीमावर्ती निवासियों को पास जारी करने की एक नई योजना अपनाने का फैसला किया था। नागालैंड और मिजोरम की सरकारें और दोनों पूर्वोत्तर राज्यों के कई राजनीतिक दल और नागरिक समाज सीमा पर बाड़ लगाने और पुराने एफएमआर को खत्म करने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। चार पूर्वोत्तर राज्य—अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम – म्यांमार के साथ 1,643 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली सीमा साझा करते हैं। गृह मंत्रालय ने पहले 31,000 करोड़ रुपये की लागत से हथियारों, गोला-बारूद, नशीले पदार्थों और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी के लिए जानी जाने वाली पूरी सीमा पर बाड़ लगाने का फैसला किया था।

ब्रिटेन पीएम की कार्रवाई: एपस्टीन कनेक्शन के कारण अमेरिका में राजदूत मैंडेलसन हटाए गए

ब्रिटेन  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने गुरुवार को जेफरी एपस्टीन से संबंधों के कारण अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत पीटर मैंडेलसन को पद से हटा दिया। 'हाउस ऑफ कॉमन्स' में विदेश कार्यालय मंत्री स्टीफन डौटी ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय मैंडेलसन द्वारा एपस्टीन को भेजे गए ईमेल के सामने आने के बाद लिया गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मैंडेलसन द्वारा लिखे गए ईमेल में नई जानकारी के आधार पर, प्रधानमंत्री ने विदेश सचिव से उन्हें राजदूत पद से हटाने का अनुरोध किया। बयान में कहा गया कि ईमेल से पता चलता है कि मैंडेलसन और एपस्टीन के बीच संबंध उनकी नियुक्ति के समय ज्ञात जानकारी से कहीं अधिक गहरे थे। मैंडेलसन और एपस्टीन के गहरे संबंध गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लेबर नेता मैंडेलसन को एपस्टीन के साथ अपने संबंधों को लेकर सवालों का सामना करना पड़ा था। एक जन्मदिन पर लिखी गई पुस्तक के विमोचन के दौरान उनका एक पत्र सामने आया, जिसमें उन्होंने एपस्टीन को 'मेरा सबसे अच्छा दोस्त' कहा था। ब्रिटिश विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की कि नए ईमेल, जो मैंडेलसन और एपस्टीन के गहरे संबंधों को दर्शाते हैं, के आधार पर प्रधानमंत्री स्टार्मर ने विदेश सचिव जेम्स क्लेवरली को उन्हें पद से हटाने का निर्देश दिया। 'द सन' का चौंकाने वाला खुलासा मंत्रालय ने कहा कि ये ईमेल मैंडेलसन के राजदूत नियुक्ति के समय ज्ञात संबंधों से कहीं अधिक घनिष्ठता दर्शाते हैं। सबसे चौंकाने वाला खुलासा 'द सन' अखबार की रिपोर्ट से आया, जिसमें प्रकाशित ईमेल में दिखाया गया कि मैंडेलसन एपस्टीन को 'शीघ्र रिहाई के लिए लड़ने' के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। एक ईमेल में मैंडेलसन ने एपस्टीन से कहा था कि मैं तुम्हारे बारे में बहुत सोचता हूं। एपस्टीन मामला क्या है? जेफरी एपस्टीन एक करोड़पति फाइनेंसर था। उस पर किशोरियों के यौन शोषण और तस्करी के आरोप थे। 2019 में उसे गिरफ्तार किया गया, लेकिन मैनहटन जेल में मुकदमे से पहले उसने आत्महत्या कर ली। इससे पहले 2008 में उसे एक नाबालिग से वेश्यावृत्ति कराने के लिए 18 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी। उस पर नाबालिग लड़कियों को मसाज के बहाने पैसे देकर यौन शोषण करने का आरोप था।

स्वदेशी तकनीक ने दिखाई ताकत: ऑपरेशन सिंदूर में ‘संभव’ फोन से आतंकवादियों को मात

नई दिल्ली  भारतीय सेना ने हाल ही में एक खुफिया और सफल मिशन 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया है, जिसने भारत की सुरक्षा क्षमताओं में एक नया मील का पत्थर जोड़ा है। इस ऑपरेशन में, जवानों ने विदेशी ऐप्स जैसे व्हाट्सएप (WhatsApp) की जगह स्वदेशी और पूरी तरह से सुरक्षित 'संभव' फोन का इस्तेमाल किया। यह कदम भारत की सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। 'ऑपरेशन सिंदूर' क्या था? मई 2025 में हुए इस ऑपरेशन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेना था। इस हमले में 26 पर्यटक मारे गए थे। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और गुलाम कश्मीर में घुसकर 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस ऑपरेशन को 'ग्रे जोन' ऑपरेशन बताया, जिसमें थल सेना, वायु सेना और नौसेना ने मिलकर काम किया। 'संभव' फोन क्यों बना हीरो? किसी भी खुफिया ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती होती है, संचार को सुरक्षित रखना। पहले भारतीय सेना के अधिकारी बातचीत के लिए व्हाट्सएप जैसे विदेशी ऐप्स का इस्तेमाल करते थे, जिससे जासूसी और डेटा लीक होने का खतरा बना रहता था। 'संभव' (Secure Army Mobile Bharat Version) फोन ने इस खतरे को खत्म कर दिया। यह फोन पूरी तरह से भारत में बनाया गया है और इसकी सुरक्षा इतनी मजबूत है कि इसे हैक करना लगभग नामुमकिन है। 'एम-सिग्मा' (M-Sigma) ऐप: इस फोन में एक खास ऐप है, जो बिल्कुल व्हाट्सएप की तरह काम करता है, लेकिन यह पूरी तरह से सुरक्षित है। जवान इसके जरिए बिना किसी डर के मैसेज, फोटो और वीडियो भेज सकते हैं। अटूट कनेक्शन: यह 5G टेक्नोलॉजी पर काम करता है और किसी भी नेटवर्क पर बिना रुकावट के चलता है। मल्टी-लेयर एन्क्रिप्शन: इसमें कई स्तरों की सुरक्षा कोडिंग है, जो बातचीत को पूरी तरह से गोपनीय रखती है। सेना प्रमुख ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान कमांडरों से लेकर जवानों तक, सभी ने बातचीत और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए केवल 'संभव' फोन का ही इस्तेमाल किया, जिससे ऑपरेशन को गुप्त रखने और तेजी से काम करने में मदद मिली।  

पीएम मोदी ने उत्तराखंड के लिए घोषित किया 1200 करोड़ का पैकेज, अनाथ बच्चों के कल्याण पर जोर

देहरादून  हिमाचल,पंजाब और उत्तराखंड पर इस बार का मॉनसून का कहर बनकर टूटा। हिमाचल में भूस्खलन, बाढ़ की तबाही ने वो मंजर दिखाया जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। उत्तराखंड में बादल फटने, दरकते पहाड़ों ने लोगों को जिंदगी तहस-नहस कर दी तो वहीं पंजाब में कई गांवों को बाढ़ ने डुबो दिया। हिमाचल, पंजाब के बाद आज पीएम मोदी उत्तराखंड पहुंचे थे। पीएम ने मौसम की मार झेले लोगों से मुलाकात की और प्रदेश के लिए 1200 करोड़ के आर्थिक मदद की घोषणा की। हिमाचल को 1600, पंजाब को 1500 करोड़ की मदद पीएम पहले ही देने की बात कह चुके हैं। पीएम ने इसके अलावा अनाथ बच्चों का विशेष ख्याल रखने की बात कही है। उत्तराखंड के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी ने आज खराब मौसम की वजह से हवाई सर्वे नहीं किया, हालांकि उन्होंने मॉनसूनी तबाही से पीड़ित लोगों से जरूर बात की। इसके अलावा उन्होंने प्रजेंटेशन के जरिए बाढ़ से हुए नुकसान की भी समीक्षा की। इस दौरान उनके साथ सीएम पुष्कर सिंह धामी और बाकी मंत्री,अधिकारी मौजूद रहे। पीएम मोदी ने प्रदेश को आपदा राहत के लिए 1200 करेाड़ रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है। मोदी ने आपदा में अपनों को खोने वाले परिवारजनों को केंद्र सरकार की तरफ से दो लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने का वादा किया है। अनाथ हुए बच्चों के विशेष ख्याल के लिए पीएम केयर फॉर चिल्ड्रंस स्कीम के तहत सहारा दिया जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए केंद्र सरकार से हर मुमकिन सहयोग का आश्वासन भी दिया। पीएम ने इस दौरान धराली की त्रासदी झेल रहे पीड़ितों से भी बात की। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बैठक में मौजूद थे। इसके अलावा, पीएम मोदी ने उत्तराखंड में बचाव और राहत कार्यों का जायजा लेते हुए बाढ़ प्रभावित लोगों और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के कर्मियों के साथ भी बातचीत की। इससे पहले पीएम मोदी को रिसीव करने के लिए खुद प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी पहुंचे थे। देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर सीएम ने उनका स्वागत किया जिसके बाद वह आगे के कार्यक्रम के लिए निकले।  

शंकराचार्य की भविष्यवाणी का सच: नेपाल की घटनाओं ने जताया भारत के लिए संदेश

नई दिल्ली  नेपाल में चल रहे राजनीतिक संकट और हिंसक प्रदर्शनों के बीच, 2018 में जगद्गुरु शंकराचार्य की एक भविष्यवाणी अचानक चर्चा का विषय बन गई है। उन्होंने कहा था,  “विश्व में स्वस्थ क्रांति की संरचना नेपाल से प्रारंभ होगी।”  आज, नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता और युवाओं के आंदोलनों को देखते हुए, यह भविष्यवाणी प्रासंगिक प्रतीत हो रही है। नेपाल में युवाओं का लोकतंत्र के प्रति समर्थन और नई राजनीतिक व्यवस्था की मांग, शंकराचार्य की भविष्यवाणी की ओर इशारा करती है। यदि नेपाल में एक स्वस्थ और समावेशी राजनीतिक क्रांति होती है, तो यह न केवल नेपाल, बल्कि समूचे दक्षिण एशिया के लिए एक सकारात्मक बदलाव का संकेत होगा।    क्या थी भविष्यवाणी ? 2018 में, शंकराचार्य ने नेपाल की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता को रेखांकित करते हुए यह भविष्यवाणी की थी। उनका मानना था कि नेपाल, जो भगवान पशुपतिनाथ की भूमि है, में एक नई राजनीतिक और सामाजिक क्रांति की संभावना है। उनका यह भी कहना था कि भारत को नेपाल से प्रेरणा लेकर अपने आंतरिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।   नेपाल में वर्तमान राजनीतिक स्थिति हाल के वर्षों में, नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है। 2025 में, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद, देश में हिंसक प्रदर्शनों और युवाओं के आंदोलनों में वृद्धि हुई है। प्रदर्शनकारी नए संविधान की मांग कर रहे हैं और प्रतिनिधि सभा को भंग करने की अपील कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों ने नेपाल की राजनीतिक परिपाटी को चुनौती दी है और यह संकेत दिया है कि नेपाल में एक नई राजनीतिक क्रांति की शुरुआत हो सकती है। भारत-नेपाल संबंध नेपाल और भारत के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं, जिसे "रोटी-बेटी का रिश्ता" कहा जाता है। हालांकि, हाल के वर्षों में सीमा विवाद, नागरिकता कानून और चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण रिश्तों में तनाव आया है। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि नेपाल को अपनी आंतरिक समस्याओं को हल करने के लिए स्वतंत्रता की आवश्यकता है, और भारत को नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचना चाहिए।

नेपाल की सियासत में नया नाम! जानिए कौन हैं कुलमान घिसिंग, जिनके PM बनने की चर्चा तेज

नेपाल  नेपाल में कई दिनों तक चले खूनी प्रदर्शनों के बाद अब हिंसा में कमी आई है। जेन-जी प्रदर्शनकारी नई सरकार के गठन में लग गए हैं। अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए हर दिन नया नाम सामने आ रहा है। काठमांडू मेयर बालेन शाह, पूर्व सीजेआई सुशीला कार्की के बाद अब 54 वर्षीय कुलमान घिसिंग रेस में सबसे आगे हो गए हैं। पहले बालेन शाह ने अपना नाम वापस ले लिया तो वहीं, सुशीला कार्की की उम्र उनके प्रमुख बनने के आड़े आ रही है। कुलमान घिसिंग नेपाल के बिजली बोर्ड के पूर्व प्रमुख हैं। उन्हें पड़ोसी देश की बिजली व्यवस्था को सुधारने का श्रेय दिया जाता है। उनके ही नेतृत्व में नेपाल को बिजली की कमी से छुटकारा मिला और उन्हें जेन-जी प्रदर्शनकारियों का विश्वास भी हासिल है। घिसिंग ने एक अंतरिम सरकार के गठन की मांग की है, जिसमें स्वच्छ छवि वाले व्यक्ति हों और उसमें जेन-जी युवाओं को भी शामिल किया जाए। इसके साथ ही तत्काल चुनावों की घोषणा भी की जाए। इसी वजह से प्रदर्शनकारी जेन-जी समूह ने के वे फेवरेट बन गए और अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए उनके नाम पर विचार हो रहा। इससे पहले, पूर्व सीजेआई सुशीला कार्की का नाम रेस में सबसे आगे था। हालांकि, अब लगता है कि प्रदर्शनकारियों का एक गुट उनके नाम से सहमत नहीं है। उनका मानना है कि चूंकि सुशीला कार्की की उम्र 73 साल है तो ऐसे में वह नेपाल का नेतृत्व करने के लिए बहुत बुजुर्ग हैं। साथ ही, संविधान पूर्व जजों को प्रधानमंत्री बनाने से भी रोकता है। ऐसे में उनके नाम की जगह कुलमान घिसिंग को चुना गया है। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। कौन हैं कुलमान घिसिंग 25 नवंबर 1970 को बेथन, रामेछाप में जन्मे घिसिंग ने भारत के जमशेदपुर में क्षेत्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में नेपाल में पुलचौक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई की। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अपने नेतृत्व कौशल को बढ़ाने के लिए एमबीए की पढ़ाई भी की। नेपाल के अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे आगे चल रहे 54 वर्षीय कुलमान घिसिंग देश के बिजली बोर्ड के पूर्व प्रमुख हैं। काठमांडू घाटी में लंबे समय से चली आ रही बिजली कटौती को खत्म करने के लिए उन्हें व्यापक प्रशंसा मिली थी। उन्होंने साल 1994 में एनईए में एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू किया।  

नितिन गडकरी का पलटवार: एथनॉल विवाद पर बोले, मेरे खिलाफ चल रहा है पेड कैम्पेन

नई दिल्ली केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि 20 फीसदी एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) के खिलाफ सोशल मीडिया पर पूर्वाग्रस से ग्रसित पैड कैम्पेन चलाया जा रहा है, ताकि उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा सके। एक कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि E20 पेट्रोल रोलआउट कार्यक्रम को लेकर उनके खिलाफ चलाई गई पेड मुहिम अब अब झूठी साबित चुकी है। केंद्रीय मंत्री ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स सोसायटी के वार्षिक सम्मेलन में प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे, जब उनसे पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण से संबंधित चिंताओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया पर यह मेरे खिलाफ पेड मुहिम थी, ताकि सियासी रूप से मुझे निशाना बनाया जा सके। यह मुहिम अब झूठी साबित हो रही है।" गडकरी ने आगे कहा कि उन्होंने वित्त मंत्री से पुराने वाहनों को स्क्रैप करके नई कार खरीदने वाले ग्राहकों के लिए GST में राहत पर विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस तरह के कदम से उपभोक्ताओं और ऑटो उद्योग दोनों को फायदा होगा। पेट्रोल लॉबी बहुत समृद्ध ई-20 (पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण) को लेकर सोशल मीडिया पर बढ़ती चिंता पर प्रतिक्रिया देते हुए, गडकरी ने कहा कि पेट्रोलियम क्षेत्र इस कदम के खिलाफ काम कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हर जगह लॉबी होती हैं, हित होते हैं…पेट्रोल लॉबी बहुत समृद्ध है।’’ प्रदूषण के दृष्टिकोण से E20 के असर पर बोलते हुए, उन्होंने कहा, “दुनिया इस बात पर सहमत है कि प्रदूषण कम करना ज़रूरी है। एक रिपोर्ट में पाया गया है कि अगर प्रदूषण का यही स्तर जारी रहा तो दिल्ली के निवासियों की ज़िंदगी के 10 साल कम हो जाएंगे।” प्रदूषण मुक्त और स्वदेशी है E20 केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऑटोमोबाइल निर्माता और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया जैसी संस्थाओं ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने पर अपने निष्कर्ष साझा किए हैं। मंत्री ने कहा, “आपका उद्योग जिस तरह काम करता है, राजनीति भी उसी तरह काम करती है। सोशल मीडिया अभियान पैसे लेकर चलाया गया था; यह मुझे राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए था। इसमें कोई तथ्य नहीं है; सब कुछ स्पष्ट है। (एथनॉल मिलाना) आयात का विकल्प है, लागत प्रभावी है, प्रदूषण मुक्त है और स्वदेशी है।” E20 पेट्रोल 80% पेट्रोल और 20% एथनॉल का मिश्रण बता दें कि E20 पेट्रोल 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण को कहते हैं। हालाँकि सरकार इस बात पर ज़ोर देती है कि E20 मिश्रण कार्बन उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन के आयात को कम करने में एक क्रांतिकारी बदलाव है, लेकिन वाहन मालिकों का दावा है कि इससे ईंधन दक्षता कम हुई है और टूट-फूट बढ़ी है, जिससे वाहनों की उम्र कम हो रही है।