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नेपाल की सियासत में नया मोड़: सुशीला को मिल सकती है पीएम की कुर्सी, सेना ने पलटी चाल

काठमांडू  नेपाल में सियासी संकट बरकरार है. Gen-Z प्रदर्शन के बाद नेपाल की कमान किसके हाथों में होगी, अब तक सस्पेंस से पर्दा नहीं हट पाया है. Gen-Z के विरोध प्रदर्शन के बाद ओली की सरकार गिर गई. केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद अंतरिम पीएम की तलाश जारी है. अंतरिम नेता चुनने को लेकर संवैधानिक संकट का समाधान ढूंढा जा रहा है. इस बीच नेपाल में एक और यूटर्न देखने को मिला है. नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की एक बार फिर नेपाली अंतरिम पीएम की रेस में आगे हो गई हैं. नेपाल में आधी रात को हुई एक बैठक में बाजी पलट गई. जी हां, नेपाल में अंतरिम सरकार के गठन को लेकर कवायद जारी है. सूत्रों का कहना है कि इसे लेकर गुरुवार देर रात एक सीक्रेट बैठक हुई. यह बैठक राष्ट्रपति भवन में हुई, जिसे शीतल निवास के नाम से जाना जाता है. इस अहम बैठक में नेपाली आर्मी चीफ अशोक राज सिग्देल और सुशीला कार्की मौजूद थीं. उनके अलावा, स्पीकर, राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायण दहल और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस प्रकाश सिंह राउत भी थे. इस मीटिंग में कई मसलों पर अलग-अलग संविधान विशेषज्ञों से बात हुई. बताया गया कि इस बैठक में भी यह सहमति बनी है कि सुशीला कार्की को ही नेपाल की कमान दी जाए. आधी रात वाली मीटिंग में बदली बाजी! सूत्रों का कहना है कि सुशीला कार्की पर ही अब तक सहमति बनती दिख रही है. नेपाल में ओली की सरकार को उखाड़ने वाले Gen-Z की भी पहली पसंद सुशीला कार्की ही हैं. शीर्ष सूत्रों के अनुसार, सुशीला कार्की के प्रधानमंत्री बनने की प्रबल संभावना है और गुरुवार रात ही इस पर सहमति बनी है. आज यानी शुक्रवार को इसका ऐलान हो सकता है. काठमांडू के मेयर बालेन उर्फ बालेंद्र शाह का भी सुशीला कार्की को समर्थन है. सूत्रों का दावा है कि बालेन शाह चुनाव जीत कर पीएम बनना चाहते हैं. यही कारण है कि उन्होंने खुद अंतरिम पीएम बनने के प्रस्ताव को ठुकराया है और सुशीला कार्की का समर्थन किया है. कैसे पीएम बनेंगी सुशीला कार्की? सूत्रों के मुताबिक, नेपाल सरकार चलाने के लिए अंतरिम प्रमुख के चयन को लेकर गतिरोध को दूर करने के लिए आधी रात को संकट प्रबंधन दल की बैठक हुई. इस अशांति के बीच राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने गुरुवार को शांति की अपील की और कहा कि उनका लक्ष्य संवैधानिक ढांचे के भीतर राजनीतिक संकट का समाधान खोजना है. सूत्रों ने न्यूज18 को बताया कि सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा और पहले उन्हें संसद के उच्च सदन में पेश किया जाएगा. आज होगा आधिकारिक ऐलान! सूत्रों ने बताया कि पौडेल 2015 के संविधान के आधार पर समाधान पर जोर दे रही हैं. उन्होंने बताया कि हालांकि राजनीतिक अंतरिम प्रधानमंत्री का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन कार्की को उच्च सदन में नामित करके एक जगह बनाई जाएगी और फिर उन्हें प्रधानमंत्री बनाया जाएगा. सूत्रों ने बताया कि इस प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति आवश्यक प्रावधान करने के लिए एक अध्यादेश जारी कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि यह घोषणा आज होने की संभावना है. सुशीला का हां ना और फिर  हां दरअसल, गुरुवार को दिन में खबर आई थी कि सुशीला कार्की ने पीएम की रेस से अपना नाम वापस ले लिया है. इसके बाद जेन जी ने कुलमन घिसिंग का नाम आगे बढ़ाया था. मगर कुलमन घिसिंग के नाम पर भी सहमति नहीं बनी. बताया जा रहा है कि आर्मी चीफ ने सुशीला कार्की को करीब 15 घंटे तक मनाया. फिलहाल, नेपाल में अब भी उथल-पुथल जारी है. आज का दिन नेपाल की सियासत में अहम है. आज आधिकारिक तौर पर ऐलान हो सकता है कि नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री कौन होगा? यहां एक बात और सामने आई है कि नेपाल में अगले 6 महीने में चुनाव कराने की जिम्मेवारी अंतरिम सरकार पर ही होगी. नेपाल में आपस में ही भिड़े Gen-Z के गुट, सेना ने कर दिया 'खेला' नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर बैन के बाद भड़की Gen-Z ने सड़कों पर उतरकर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सत्ता की कुर्सी से उतरने पर मजबूर कर दिया. देश में जारी हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अंतरिम सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है. केपी ओली ने मंगलवार (9 सितंबर 2025) को अपने पद से इस्तीफा दिया और तब से अंतरिम पीएम को लेकर कई नामों पर सियासी पारा चढ़ा हुआ है. आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर भिड़े युवा काठमांडू में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन के बाद अब नेपाल के युवा अंतरिम प्रधानमंत्री के नाम पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं. आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर उम्मीदवारों के नाम पर युवाओं के बीच हाथापाई हुई. 9 सितंबर को काठमांडू के मेयर और रैपर बैलेन शाह, 10 सितंबर को पूर्व चीफ जस्टिस सुशील कार्की और 11 सितंबर को कुलमान घीसिंग का नाम अंतरिम पीएम रेस में सबसे आगे रहा. अब इस लिस्ट में धरान के वर्तमान मेयर हरका राज संपांग राय उर्फ हरका संपांग का नाम भी शामिल हो गया है. पत्रकार से राजनेता बने रबी लामिछाने भी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं, जिन्हें विरोध प्रदर्शन के दौरान जेल से छुड़ाया गया था. अंतरिम पीएम के नामों को लेकर मचा घमासान नेपाली मीडिया के मुताबिक कई युवा चाहते हैं कि बालेन, सुशीला कार्की या संपांग को अंतरिम पीएम बनाया जाए, जिसे लेकर गुरुवार (11 सितंबर 2025) को युवाओं में झड़प भी हुई. हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. फिलहाल Gen-Z, प्रतिनिधियों, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख के बीच बातचीत चल रही है. पौडेल ने कहा, "मैं सभी पक्षों से अपील करता हूं कि वे इस बात पर विश्वास रखें कि आंदोलनकारी नागरिकों की मांगों को पूरा करने के लिए समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकाला जा रहा है. संयम के साथ देश में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।" कई लोगों को उम्मीद थी कि राष्ट्रपति इस घटना के बाद सार्वजनिक रूप से सामने आएंगे और राष्ट्र को संबोधित करेंगे. आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर इंतजार कर रहे युवा न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबकि सेना के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम अलग-अलग लोगों के साथ कई … Read more

उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली सीपी राधाकृष्णन ने, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के 53 दिन बाद दिखे सार्वजनिक रूप से

नई दिल्ली   सी पी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को भारत के उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राधाकृष्णन को उप राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। इस दौरान पूर्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी अपनी पत्नी के साथ मौजूद थे। राधाकृष्णन के शपथ के बाद धनखड़ लगातार ताली बजाकर स्वागत करते दिखे। पूर्व उपराष्ट्रपति कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के साथ बैठे हुए थे। धनखड़ के बाई तरफ उनकी पत्नी बैठी थीं। लंबे समय बाद सार्वजनिक कार्यक्रम में हुए शामिल पूर्व उपराष्ट्रपति लंबे समय बाद किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए। जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से वह लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। इसके साथ ही उनका किसी भी तरह का कोई बयान सामने नहीं आया था। विपक्ष ने धनखड़ के नजरबंद होने के भी आरोप लगाए थे। धनखड़ की चुप्पी पर उठाए थे सवाल कांग्रेस ने उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी जगदीप धनखड़ की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को कहा था कि देश पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे पर उनके बयान का इंतजार कर रहा है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा था कि पिछले 50 दिनों से जगदीप धनखड़ ने अपनी असामान्य चुप्पी साध रखी है। वेणुगोपाल का कहना था कि जब उनके उत्तराधिकारी के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो रही है, तब भी देश उनके ऐतिहासिक और अप्रत्याशित इस्तीफे पर बयान का इंतजार कर रहा है। जब उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से किसानों की घोर उपेक्षा, सत्ता में बैठे लोगों के 'अहंकार' से पैदा होने वाले खतरों और अन्य मुद्दों पर चिंता व्यक्त की थी। NDA उम्मीदवार को कितने वोट मिले? एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति के प्रत्याशी सीपी राधाकृष्णन को 452 मत प्राप्त हुए। वहीं, विपक्षी उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को 300 मत मिले। 9 सितंबर को ही वोटिंग के बाद परिणामों में घोषणा की गई। उपराष्ट्रपति परिणामों की घोषणा के बाद पीएम मोदी ने सीपी राधाकृष्णन को बधाई दी। पीएम मोदी में विश्वास जताया कि नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति भारत के संवैधानिक मूल्यों को और मजबूत करेंगे तथा संसदीय संवाद में सकारात्मक योगदान देंगे। महाराष्ट्र के राज्यपाल थे सीपी राधाकृष्णन बता दें कि सीपी राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल थे। अब चूंकि वह देश के उपराष्ट्रपति बन गए हैं। इस स्थिति में महाराष्ट्र में गवर्नर का पद खाली हो गया। नए राज्यपाल की नियुक्ति तक गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को अपने कर्तव्यों के अतिरिक्त, महाराष्ट्र के राज्यपाल के कार्यों का भी कार्यभार सौंपा गया है। राष्ट्रपति ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान भी जारी किया है। राधाकृष्णन ने एक दिन पहले राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया अपनी नई जिम्मेदारी की तैयारी में राधाकृष्णन ने गुरुवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की गई है। उनके इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। राधाकृष्णन को उम्मीद से ज्यादा 14 वोट ज्यादा मिले राज्यसभा के महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी के मुताबिक 781 में से 767 सांसदों ने वोट डाले, वोटिंग 98.2% हुई। इनमें से 752 मत वैलिड और 15 इनवैलिड थे। एनडीए को 427 सांसदों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन YSRCP के 11 सांसदों ने भी राधाकृष्णन का समर्थन किया। 13 सांसदों ने चुनाव में मतदान से परहेज किया। इनमें बीजू जनता दल (BJD) के सात सांसद, भारत राष्ट्र समिति (BRS) के चार, शिरोमणि अकाली दल का एक सांसद और एक निर्दलीय सांसद शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि एनडीए उम्मीदवार को उम्मीद से 14 वोट ज्यादा मिले, जिससे विपक्षी खेमे में क्रॉस-वोटिंग की अटकलें हैं।  

80 साल के पूर्व राष्ट्रपति को खाली करना पड़ा सरकारी महल, श्रीलंका में बदला नियम

 कोलंबो  श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के पॉश इलाके सिनामैन गार्डेन में मौजूद भव्य और महल जैसे दिखने वाले एक घर में सामान समेटे जा रहे हैं. यहां हलचल है. 10 सालों से ये घर पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का निवास था. महिंदा राजपक्षे आने वाले नवंबर में 80 साल के हो जाएंगे, लेकिन बुढ़ापे में उन्हें अपना घर खाली करना पड़ रहा है. ये श्रीलंका में हाल ही में पास हुए एक कानून का असर है.  श्रीलंका में पूर्व राष्ट्रपतियों की सारी सुविधाएं छीन लेने वाला नया कानून Presidents' Entitlement (Repeal) Act पास हो गया है. इसके बाद पूर्व राष्ट्रपतियों और उनकी विधवाओं को आधिकारिक आवास, मासिक भत्ता, सुरक्षा स्टाफ, वाहन, सचिवालय सुविधाएं और अन्य लाभ मिलने बंद हो गए हैं. अब देश के सभी पूर्व राष्ट्रपतियों को सरकारी आवास खाली करना पड़ रहा है.  ऐसा ही माहौल पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमार तुंगा के घर भी है. हालांकि उन्होंने मौजूदा सरकार से कुछ मोहलत मांग ली है. वे अपना घर 2 महीने में खाली करेंगी. दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुके श्रीलंका में जब पिछले साल चुनाव हुए थे तो राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे अनुरा कुमारा दिसानायके ने देश के लोगों से वादा किया था कि वे पूर्व राष्ट्रपतियों की शाहखर्ची पर लगाम लगाएंगे. महंगाई और नेताओं के मनमानी खर्चे से त्रस्त श्रीलंका की जनता ने अनुरा दिसानायके के इस चुनावी वादे को सपोर्ट किया.  राष्ट्रपति बनने के बाद अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस बिल पर काम शुरू किया. श्रीलंका सरकार का एक आंकड़ा कहता है कि 2024 में पूर्व राष्ट्रपतियों के ताम-झाम में सरकारी खजाने से 11 अरब श्रीलंकाई रुपये खर्च हुए.  यह विधेयक जुलाई 2025 में कैबिनेट ने मंजूर किया और 31 जुलाई को गजट में प्रकाशित हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने राजपक्षे परिवार की चुनौती को खारिज करते हुए 9 सितंबर को इसे साधारण बहुमत से पारित करने की मंजूरी दी. संसद ने 10 सितंबर को 151-1 के मतों से इसे पारित किया.  अब श्रीलंका में पूर्व राष्ट्रपतियों को सिर्फ पेंशन मिला करेगी. उनके सभी लाभ समाप्त हो गए हैं.   इसी के साथ पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने 11 सितंबर को कोलंबो का आधिकारिक निवास खाली कर दिया है. महिंदा राजपक्षे अब कोलंबो से 190 किलोमीटर दूर तंगाल्ले में रहेंगे. तंगाल्ले स्थित कार्लटन हाउस ही वह जगह है जहां राजपक्षे ने 1970 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. श्रीलंका की पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमार तुंगा ने नया कानून लागू होने के बाद कहा है कि उन्हें कोलंबो में एक घर मिल गया है. इस घर का अभी नवीनीकरण चल रहा है. उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार सरकारी घर में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को घर खाली करने से पहले तीन महीने का नोटिस देना ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई है.  हालाकि उन्होंने कहा कि उन्हें घर खाली करने में दो महीने से ज़्यादा समय नहीं लगेगा.  चंद्रिका कुमार तुंगा ने कहा है कि तीन हफ्ते पहले वे गिर गई थीं और इस दौरान उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई. उन्होंने श्रीलंका के अंग्रेजी अखबार डेली मिरर से बात करते हुए कहा, "मेरे कूल्हे की सर्जरी हुई. यह एक गंभीर सर्जरी है. मुझे दिन में दो-तीन बार फ़िज़ियोथेरेपी करवानी पड़ती है. इसलिए मैं इस समय उस नए घर में न तो जा सकती हूँ और न ही कोई काम कर सकती हू." चंद्रिका कुमार तुंगा ने नए कानून के लागू होने तक राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को पत्र लिखकर सरकार द्वारा निर्धारित किराया देकर जीवन भर इसी जगह रहने की अनुमति मांगी थी. लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया.  तब तुंगा ने कहा था कि वह नई व्यवस्था के तहत उसी जगह पर और रहने की इच्छा रखती है क्योंकि बुढ़ापे में और 15 सालों में दो बार कैंसर से जूझने के बाद उनके लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल था.  श्रीलंका में वर्तमान में पांच जीवित पूर्व राष्ट्रपति हैं. हालांकि जब सरकार ने संसद में विधेयक पेश किया था तब उनमें से केवल तीन ही इन सुविधाओं का लाभ उठा रहे थे. 

चार्ली कर्क पर जानलेवा हमला: गर्दन पर वार, कैमरे में कैद हुई वारदात

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जिगरी दोस्त चार्ली कर्क (Charlie Kirk) की हत्या ने गन वायलेंस और सिक्योरिटी को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है. कर्क की यूटा यूनिवर्सिटी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. अब शूटर का मौके से फरार होते एक वीडियो वायरल हो रहा है. कर्क की हत्या की जांच कर रही एफबीआई की टीम ने एक नया वीडिया जारी किया है, जिसमें कर्क की हत्या के कुछ सेकंड बाद ही एक एक संदिग्ध को यूटा यूनिवर्सिटी की छत से भागते देखा जा सकता है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि संदिग्ध पहले तो भागता है और फिर कैंपस से छत से छलांग लगा देता है. कंजरवेटिव चार्ली कर्क की यूटा वैली यूनिवर्सिटी में उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई, जब वह छात्रों के सवालों का जवाब दे रहे थे. उन्हें सुनने के लिए कैंपस में लगभग तीन हजार लोग जुटे थे. यह कार्यक्रम कैंपस में खुले में हो रहा था.  एफबीआई का कहना है कि यह काम किसी स्किल्ड शूटर का है, जो काले कपड़ों में छत पर छिपा था. FBI ने इसे प्रोफेशनल हिट बताया, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं है. एफबीआई ने एक लाख डॉलर का इनाम घोषित किया है.  चार्ली कर्क टर्निंग पॉइंट यूएसए (TPUSA) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे. यह एक छात्र संगठन है जिसका मकसद लिबरल अमेरिकी कॉलेजों में कंजर्वेटिव विचारधारा का प्रचार-प्रसार करना है. वह 32 साल के थे और ट्रंप के करीबियों में से एक थे. वह अमेरिका के सबसे हाई प्रोफाइल कंजर्वेटिव एक्टिविस्ट और मीडिया पर्सनैलिटीज में से एक थे।. कर्क के पिता आर्किटेक्ट थे. उन्होंने शिकागो के एक कॉलेज से पढ़ाई की लेकिन राजनीति में आने के लिए पढ़ाई छोड़ दी. कर्क ने 2020 में 'The Maga Doctrine' किताब लिखी थी, जिसमें ट्रंप के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' का भी जिक्र था. चार्ली और उनकी टीम ने पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप और रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने में भी अहम भूमिका निभाई थी.  कर्क अपने विवादित बयानबाजी के लिए हमेशा चर्चा में रहते थे. उनके धुर दक्षिणपंथी विचारों की वजह से वह हमेशा लिबरल्स के निशाने पर रहते थे. वह स्लेवरी से लेकर गर्भपात, महिला विरोधी बयानों और रंगभेद पर की गई अपनी टिप्पणियों की वजह से विवादित थे. कैसे दिया हत्या को अंजाम घटनास्थल के वीडियो में दिख रहा है कि चार्ली एक बड़ी भीड़ को संबोधित कर रहे हैं, तभी एक गोली चलने की आवाज आई. कैमरे के तेजी से हिलने से पहले चार्ली अपनी कुर्सी पर गिरता हुआ दिखे और दर्शकों में घबराहट की आवाजें आने लगीं. जांचकर्ताओं ने कहा कि उनका मानना ​​है कि गोली कैंपस की छत से चली थी, जो काले कपड़े पहने किसी व्यक्ति द्वारा चलाई गई थी. यह एक टारगेट बनाकर हत्या करने का मामला प्रतीत होता है. इस इवेंट में मौजूद यूटाह के पूर्व कांग्रेसी जेसन चाफेट्ज ने फॉक्स न्यूज को बताया कि गोली तब चली जब चार्ली कर्क भीड़ के साथ सवाल-जवाब सेशन कर रहे थे. बुरी तरह से सहमे हुए चाफेट्ज ने नेटवर्क को बताया, "पहला सवाल धर्म के बारे में था. वह लगभग 15-20 मिनट तक बोलते रहे. दिलचस्प बात यह है कि दूसरा सवाल ट्रांसजेंडर शूटर्स, सामूहिक शूटर्स के बारे में था और उसी के बीच में गोली चल गई… जैसे ही वह गोली चली, वह पीछे गिर गया. हर कोई डेक से टकराया… बहुत सारे लोग चिल्लाने लगे और फिर सभी लोग भागने लगे."

‘ज्ञान भारतम् पोर्टल’ का शुभारंभ आज, पीएम मोदी लेंगे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दिल्ली के विज्ञान भवन में 'ज्ञान भारतम्' पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य भारत की अमूल्य पांडुलिपि धरोहर को फिर से जीवंत बनाना और उसे वैश्विक ज्ञान संवाद के केंद्र में लाना है। पीएम मोदी इस अवसर पर 'ज्ञान भारतम् पोर्टल' का शुभारंभ करेंगे, जो पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, संरक्षण और सार्वजनिक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा। सम्मेलन का आयोजन 11 सितंबर से शुरू हुआ है, जो 13 सितंबर तक चलेगा और इसका मुख्य विषय है "पांडुलिपि धरोहर के माध्यम से भारत के ज्ञान धरोहर को पुनः प्राप्त करना।" इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रमुख विद्वान, संरक्षणकर्मी, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और नीति विशेषज्ञ एकत्र होंगे। वे भारत की बेजोड़ पांडुलिपि धरोहर को पुनर्जीवित करने के रास्तों पर चर्चा करेंगे और उसे वैश्विक ज्ञान चर्चा में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने के लिए विचार-विमर्श करेंगे। सम्मेलन के दौरान एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें दुर्लभ पांडुलिपियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा, पांडुलिपि संरक्षण, डिजिटलीकरण प्रौद्योगिकियां, मेटाडेटा मानक, कानूनी ढांचे, सांस्कृतिक कूटनीति, और प्राचीन लिपियों का लेखन विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विद्वानों द्वारा प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत के प्राचीन ज्ञान और संस्कृति को पुनः जागृत करना है। पांडुलिपियां हमारे ऐतिहासिक ज्ञान, विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और दर्शन का अमूल्य स्रोत हैं, जिन्हें सुरक्षित रखने और उन्हें डिजिटल रूप में दुनिया भर में उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से, पांडुलिपियों को डिजिटलीकरण के जरिये संरक्षित किया जाएगा, जिससे उन्हें कहीं से भी एक्सेस किया जा सकेगा और उनकी जानकारी दुनिया भर में साझा हो सकेगी। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान, सरकार के इस कदम को लेकर संस्कृति, तकनीकी विकास और शोध जगत में एक नई दिशा दिखने की उम्मीद जताई जा रही है।

अब न अमेरिका पर निर्भरता, न फ्रांस पर… भारत के फाइटर जेट को मिलेगा स्वदेशी इंजन

नई दिल्ली भारत हमेशा से अपने फाइटर जेट इंजन को स्वदेशी बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि अमेरिका या अन्य देशों पर निर्भरता खत्म हो. हाल ही में फ्रांस की कंपनी साफरान (Safran) के साथ 120 kN थ्रस्ट वाले इंजन के विकास का समझौता हुआ है, जो एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए बनेगा.  यह प्रोजेक्ट 61,000 करोड़ रुपये का है. 10 साल में पूरा होगा. आइए, समझतें हैं कि यह प्रोजेक्ट भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है?  भारत की इंजन समस्या: विदेशी निर्भरता भारत के फाइटर जेट्स जैसे तेजस, सुखोई-30 और राफेल में ज्यादातर इंजन विदेशी हैं. तेजस में GE F404 (अमेरिका) और सुखोई में AL-31FP (रूस) लगे हैं. कावेरी इंजन प्रोजेक्ट 1980 के दशक से चल रहा है, लेकिन यह 90-100 kN थ्रस्ट नहीं दे पाया. कावेरी को तेजस से अलग कर दिया गया. अब इसका डेरिवेटिव वर्जन ड्रोन (Ghatak UCAV) के लिए इस्तेमाल हो रहा है. कावेरी पर 35 साल और 400 मिलियन डॉलर खर्च हुए, लेकिन तकनीकी चुनौतियां (जैसे सिंगल क्रिस्टल ब्लेड और थर्मल कोटिंग) ने इसे रोक दिया. इस निर्भरता से समस्या बढ़ी. 2021 में GE F404 इंजन की डिलीवरी में देरी हुई, जिससे तेजस Mk1A प्रोडक्शन रुका. रूस-यूक्रेन युद्ध ने AL-31FP की सप्लाई प्रभावित की. AMCA (5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर) के लिए 110-120 kN इंजन चाहिए, जो स्वदेशी न होने से देरी हो रही है. साफरान प्रोजेक्ट इसी समस्या का समाधान है. साफरान प्रोजेक्ट: क्या है और कैसे काम करेगा? साफरान (फ्रांस की कंपनी, जो राफेल के M88 इंजन बनाती है) के साथ यह प्रोजेक्ट 22 अगस्त 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषित किया. यह 120 kN थ्रस्ट वाला टर्बोफैन इंजन AMCA Mk2 के लिए बनेगा. लागत 7 बिलियन डॉलर (लगभग 61,000 करोड़ रुपये) है. 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा. समझौते की मुख्य बातें     10 साल का विकास: 2035 तक इंजन तैयार. AMCA के साथ एकीकृत.     सह-विकास: GTRE (DRDO का लैब) और साफरान मिलकर डिजाइन करेंगे.     स्वदेशी निर्माण: भारत में ही इंजन बनेंगे, जिसमें सिंगल क्रिस्टल ब्लेड, थर्मल बैरियर कोटिंग और एडवांस्ड कॉम्बस्टर जैसी तकनीकें शामिल.     निर्यात संभावना: AMCA के साथ निर्यात बढ़ेगा, क्योंकि स्वदेशी इंजन से लागत कम होगी. रक्षा मंत्रालय ने साफरान को चुना क्योंकि इसका प्रस्ताव सबसे फायदेमंद था. अमेरिका की GE और ब्रिटेन की Rolls-Royce भी दौड़ में थे, लेकिन साफरान ने 100% ट्रांसफर और कावेरी से लिंकेज का वादा किया. साफरान पहले कावेरी पर सहयोग कर चुकी है (2016 में €1 बिलियन का ऑफर). साफरान प्रोजेक्ट का महत्व: आत्मनिर्भर भारत के लिए मील का पत्थर यह प्रोजेक्ट भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी है. इसके फायदे… विदेशी निर्भरता खत्म: कावेरी की असफलता के बाद भारत GE, Safran और Rolls-Royce पर निर्भर था. अब AMCA, TEDBF और भविष्य के फाइटर जेट्स के लिए स्वदेशी इंजन मिलेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह 5th जेनरेशन फाइटर के लिए बड़ा कदम है. AMCA प्रोग्राम को गति: AMCA (5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर) 2035 तक तैयार होगा. पहले GE F414 इंजन इस्तेमाल होगा, लेकिन साफरान इंजन से AMCA Mk2 स्वदेशी बनेगा. लागत 15,000 करोड़ रुपये की और 5 प्रोटोटाइप बनेंगे. तकनीकी आत्मनिर्भरता: इंजन सबसे जटिल भाग है. साफरान से 100% ट्रांसफर मिलने से भारत सिंगल क्रिस्टल ब्लेड, लेजर ड्रिलिंग और हॉट-एंड कोटिंग जैसी तकनीक सीखेगा. कावेरी का अनुभव (49 kN थ्रस्ट) साफरान प्रोजेक्ट को मदद करेगा. आर्थिक और निर्यात लाभ: इंजन 40% लागत होता है. स्वदेशी इंजन से AMCA सस्ता बनेगा. निर्यात बढ़ेगा. HAL और GTRE को नया बिजनेस मिलेगा. MSMEs को भी अवसर. रणनीतिक सुरक्षा: युद्ध या प्रतिबंध के समय विदेशी इंजन की सप्लाई रुक सकती है. स्वदेशी इंजन से भारत सुरक्षित रहेगा. चुनौतियां और भविष्य प्रोजेक्ट में चुनौतियां हैं: फंडिंग (केवरी पर 35 साल में $400 मिलियन खर्च, लेकिन असफल), तकनीकी जटिलताएं और समय (10 साल). लेकिन साफरान का अनुभव (M88 इंजन) मदद करेगा. कावेरी डेरिवेटिव इंजन अब ड्रोन (Ghatak UCAV) के लिए इस्तेमाल हो रहा है. भविष्य में कावेरी 2 (90-110 kN) और कावेरी 3 (125 kN) साफरान से प्रेरित होंगे. 2025 में साफरान हैदराबाद में मेंटेनेंस सेंटर खोलेगा.

देशी तकनीक से सशक्त हुई नौसेना, पहला 3D एयर रडार कमीशन — हवाई खतरे होंगे नाकाम

नई दिल्ली टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने स्पेन की डिफेंस कंपनी इंद्रा के साथ मिलकर भारतीय नौसेना के लिए पहला 3D एयर सर्विलांस रडार (3D-ASR) – लांजा-एन कमीशन किया है. यह रडार एक भारतीय नौसेना के युद्धपोत पर लगाया गया है. यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है. लांजा-एन रडार क्या है? लांजा-एन इंद्रा का लांजा 3D रडार का नौसैनिक संस्करण है, जो दुनिया के सबसे एडवांस लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस और एंटी-मिसाइल रडार में से एक है. यह रडार हवा और सतह दोनों के लक्ष्यों को 3D में ट्रैक करता है. इसकी रेंज 254 नॉटिकल माइल्स (लगभग 470 किमी) है. यह ड्रोन, सुपरसोनिक फाइटर जेट, एंटी-रेडिएशन मिसाइल, और नौसैनिक प्लेटफॉर्म को पकड़ सकता है. यह खराब मौसम में भी काम करता है और दुश्मन के हमलों को रोकने में माहिर है. यह पहली बार है जब लांजा-एन रडार स्पेन के बाहर काम करेगा. इंद्रा ने इसे भारतीय महासागर की नमी और गर्मी के लिए अनुकूलित किया है. रडार को युद्धपोत के सभी सिस्टम से जोड़ा गया है. सख्त समुद्री परीक्षणों के बाद इसे स्वीकार किया गया. परीक्षणों में विभिन्न नौसैनिक और हवाई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया. टाटा और इंद्रा का सहयोग यह उपलब्धि टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TASL) और इंद्रा के बीच 2020 में हुए समझौते का नतीजा है. इस समझौते में 23 रडारों की डिलीवरी का प्रावधान है, जिनमें से तीन पूरे इंद्रा से आएंगे. बाकी 20 टाटा भारत में असेंबल करेगा. टाटा ने कर्नाटक में एक रडार असेंबली, इंटीग्रेशन और टेस्टिंग फैसिलिटी बनाई है, जो डिलीवरी को तेज करेगी. TASL के CEO और MD सुकर्ण सिंह ने कहा कि इंद्रा के साथ हमारा सहयोग भारत में रडार निर्माण क्षमता को मजबूत करने का प्रतीक है. हम स्थानीय सप्लाई चेन और तकनीकी विशेषज्ञता से उन्नत रक्षा प्रणालियों का इकोसिस्टम बना रहे हैं. इंद्रा के नेवल बिजनेस यूनिट की हेड आना बुएंडिया ने कहा कि यह प्रोजेक्ट रडार डिलीवरी से आगे है. हमने बेंगलुरु में टाटा के साथ रडार फैक्ट्री बनाई, जो हमें स्थानीय उत्पादन और सेवा प्रदान करने में मदद करेगी.  भारतीय नौसेना के लिए महत्व यह रडार भारतीय नौसेना के फ्रिगेट, डिस्ट्रॉयर और एयरक्राफ्ट कैरियर पर लगाया जाएगा. पहले कमीशंड रडार एक युद्धपोत पर लगाया गया है. बाकी जल्द ही आएंगे. यह नौसेना की निगरानी क्षमता को मजबूत करेगा. खासकर दुश्मन के ड्रोन, जेट और मिसाइलों के खिलाफ.  इंद्रा का लांजा-एन रडार मॉड्यूलर, सॉलिड-स्टेट और पल्स्ड टैक्टिकल रडार है, जो सभी प्रकार के हवाई और सतही लक्ष्यों को ट्रैक करता है. यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है. टाटा पहली भारतीय कंपनी बनी जो नेक्स्ट-जनरेशन नेवल सर्विलांस रडार बना और इंटीग्रेट कर रही है. 50% से ज्यादा लोकलाइजेशन होगा, जो ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देगा.

दोबारा ऐसा ना हो: कतर संकट पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, नेतन्याहू को किया फोन

तेल अवीव  बीते दो सालों से गाजा में हमास और इजरायल के बीच जारी जंग पहले ही कई देशों तक पहुंच चुकी है। लेबनान, ईरान जैसे देशों से इजरायल सीधे जंग में उतर चुका है, लेकिन मंगलवार को उसने हैरान कर दिया। इजरायली सेना ने कतर की राजधानी दोहा पर ही हमले कर दिए और हमास के आतंकियों को टारगेट करने का दावा किया। यह वही कतर है, जहां पर हमास के साथ मध्यस्थता की मीटिंगें होती रही हैं। ऐसे में शांति वार्ता का मंच बने देश के अंदर ही घुसकर हमले करने से पूरे मिडल ईस्ट के ही हालात बिगड़ने की आशंका है। रविवार और सोमवार को कतर ने इस्लामिक और अरब देशों की समिट बुला ली है। इस समिट में इजरायल के हमले से पैदा हालातों पर चर्चा होगी। इस बीच खबर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इजरायल की इस हरकत पर खफा हैं। Axios ने सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने फोन करके बेंजामिन नेतन्याहू से कहा है कि ऐसी हरकत दोबारा नहीं होनी चाहिए। ट्रंप ने कहा कि यह एकदम स्वीकार नहीं किया जा सकता। मैं कह रहा हूं कि आप ऐसी हरकत फिर नहीं करेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कतर की राजधानी में हमले से डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार भी भौंचक्के रह गए। इसी को लेकर जब बात हुई तो ट्रंप ने नेतन्याहू और उनके सलाहकारों के काम पर हैरानी जताई और कहा कि आखिर आप ऐसा कैसे कर सकते हैं। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई है। डोनाल्ड ट्रंप के ऐतराज और मुस्लिम देशों के भड़कने के बाद भी बेंजामिन नेतन्याहू अपने रुख पर अडिग हैं। उन्होंने एक बार फिर दोहराया है कि कतर समेत आतंकियों को पालने वाले देशों पर हम हमले करते रहेंगे। उन्होंने कतर की सीधा और खुला चैलेंज देते हुए कहा है कि या तो वह आतंकियों को निकाल बाहर करे या फिर हमलों के लिए तैयार रहे। इस बीच लेबनान में एक बार फिर से इजरायल की सेना ने हमले किए हैं। सेना का कहना है कि हमने हिजबुल्ला के ठिकानों को तबाह किया है। ये हमले लेबनान की बेका घाटी में हुए हैं, जिसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर चल रहे हैं। सीरिया ने खुद किए हिजबुल्ला के ठिकानों पर अटैक, इजरायल को सफलता इजरायली सेना ने कहा कि हमने बेका घाटी में हिजबुल्ला के ऐसे ठिकानों पर हमले किए हैं, जहां उसने हथियारों का जखीरा रखा है। यहां पहले भी इजरायल हमले करता रहा है। इस बीच इजरायल को एक सफलता यह मिली है कि सीरिया ने खुद ही अपने देश में स्थित हिजबुल्ला के ठिकानों को टारगेट किया है। दरअसल सीरिया के मौजूदा राष्ट्रपति अहमद अल शारा को हिजबुल्ला के खिलाफ माना जाता है। वहीं पहले के राष्ट्रपति बशर अल असद को हिजबुल्ला समर्थक माना जाता था।  

यात्रियों के लिए बड़ी खबर: त्रिभुवन हवाई अड्डा फिर से संचालन में, नेपाल में हालात सामान्य

वीरगंज (नेपाल) नेपाल में आंदोलन के कारण बंद पड़ा काठमांडू का त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा गुरुवार की सुबह से पुनः संचालन में आ गया है। लगभग 24 घंटे के बाद उड़ानों की शुरुआत होने से यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। जानकारी के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से प्रतिदिन लगभग 300 उड़ानों का संचालन होता है, जिसमें 200 घरेलू और 100 अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें शामिल हैं। प्रतिदिन 14-16 हजार यात्री घरेलू और 12-14 हजार यात्री अंतरराष्ट्रीय यात्रा करते हैं। हवाई अड्डा बंद होने के कारण हजारों यात्री विभिन्न गंतव्यों पर फंसे रहे। हवाई अड्डे के महाप्रबंधक हंसराज पांडे ने बताया कि संचालन शुरू होने के साथ ही पहले चरण में नेपाल एयरलाइंस कार्पोरेशन और हिमालय एयरलाइंस की चार उड़ानें रवाना हुईं। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य सेवाएं भी बहाल की जा रही हैं। नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (सीएएएन) के महानिदेशक प्रदीप अधिकारी ने बताया कि यात्रियों की परेशानी और शिकायतों को देखते हुए सुरक्षा समिति के साथ बैठक के बाद परिचालन की अनुमति दी गई। सीएएएन ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी हवाई अड्डों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। साथ ही एयरलाइंस और ट्रैवल एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि टिकट जांच और सुरक्षा प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही यात्रियों को यात्रा की अनुमति दी जाए। इस बीच, घरेलू एयरलाइंस बुद्धा, यति और श्री एयरलाइंस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए यात्रियों से हवाई अड्डे पर पहुंचने का आग्रह किया है। गुरुवार सुबह से उड़ानों का संचालन सामान्य रूप से शुरू हो गया है।

फ्लोरिडा में ट्रंप अटैक केस: आरोपी ने लिया फैसला, खुद लड़ेगा मुकदमा

नई दिल्ली राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे टर्म के लिए प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले के आरोपी के खिलाफ अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सुनवाई गुरुवार से शुरू हो गई। ट्रंप पर ये हमला दक्षिण फ्लोरिडा में गोल्फ खेलने के दौरान हुआ था। आरोपित रेयान रूथ ने अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज एलीन कैनन के सामने खुद ही अपनी बात रखने का फैसला किया, जिसके बाद अदालत ने नियुक्त किए वकीलों को हटाने की अनुमति दे दी। हालांकि, वे अदालत कक्ष में मौजूद रहेंगे और अगर रूथ को किसी तरह की मदद की जरूरत होगी तो वे सहायता देंगे। रूथ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को किया खारिज रूथ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है, जिसमें हथियार कानून का उल्लंघन करके राष्ट्रपति पद के बड़े उम्मीदवार और एक संघीय अधिकारी पर हत्या के इरादे से हमला करने की बात कही गई है। सरकारी वकीलों ने क्या लगाया आरोप? सरकारी वकीलों ने आरोप लगाया कि 59 साल के रूथ ने 15 सितंबर 2024 को घात लगाकर ट्रंप की हत्या करने की कोशिश की थी। ट्रंप अपने वेस्ट पाम बीच कंट्री क्लब में गोल्फ खेल रहे थे। उन दिनों वह राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार के तौर पर अपना प्रचार भी कर रहे थे। उस हमले से नौ हफ्ते पहले भी ट्रंप पर पेन्सिलवानिया राज्य में कातिलाना हमला हुआ था। उस दौरान बंदूकधारी ने ट्रंप पर आठ राउंड फायर किए थे, जिसमें एक गोली ट्रंप के कानों को छूकर निकल गई थी।