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भारत ने ₹36000 करोड़ की डील के तहत QRSAM सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी

नई दिल्ली पूरी दुनिया ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य ताकत का नजारा देख चुका है. भारत ने तीन दिन के भीतर ही पाकिस्तानी सेना की कमर तोड़ दी थी. ब्रह्मोस मिसाइलों और एस-400 जैसे डिफेंस सिस्टम की बदौलत पाकिस्तान कुछ घंटों की भी मार नहीं झेल पाया था. लेकिन, ऑपरेशन के दौरान भारत को भी कुछ सीखने को मिला. अब भारत ने उस कमी को दूर करने के लिए एक-दो हजार करोड़ नहीं बल्कि एक मुश्त 36 हजार करोड़ रुपये की डील को मंजूरी दी है. इस पैसे से फिलहाल के लिए बेबी एस-400 के तीन रेजिमेंट तैयार किए जाएंगे. हालांकि भारतीय सेना ऐसे 11 रेजिमेंट्स की डिमांड कर रही है. अगर ये पूरे रेजिमेंट्स सेना को मिल जाते हैं तो देश एक तरह से किले में तब्दील हो जाएगा. इस पूरे 11 रेजिमेंट्स पर करीब 1.30 लाख करोड़ खर्च होंगे. दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर गंभीर घाव किया था. दूसरी तरफ भारत के आकाश मिसाइल डिफेंस और एस-400 जैसे सुरक्षा कवच ने भारत की किलेबंदी कर दी. बावजूद इसके पाकिस्तान ने तुर्की से हासिल किए ड्रोन से भारत पर खूब हमले किए. एक तरह से उसने ड्रोन की बारिश कर दी, लेकिन भारत का डिफेंस सिस्टम तगड़ा था और करीब 99 फीसदी ड्रोन को समय रहने खत्म कर दिया गया. बावजूद इसके भारत को एक खास डिफेंस सिस्टम की जरूरत महसूस हुई. भारत के पास जो एस-400 सुरक्षा कवच है वो तो अल्टीमेट है. एस-400 फाइटर जेट्स और मिसाइल हमलों को करीब 400 किमी दूर से डिटेक्ट कर उसे खत्म करने में सक्षम है. लेकिन, आधुनिक युद्ध में ड्रोन एक नई चुनौती बनकर उभरे हैं. ये अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और उनको डिटेक्ट करना थोड़ा मुश्किल काम होता है. ऐसे में भारत देसी बेसी एस-400 की खरीद कर रहा है. इस बेबी एस-400 का नाम है QRSAM सिस्टम. क्या है QRSAM? भारत सरकार ने पिछले दिनों अपने एयर डिफेंस को मजबूती देने के लिए QRSAM सिस्टम को खरीद की मंजूरी दे दी. इसे देश में ही विकसित किया गया है. इसका पूरा नाम क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल यानी QRSAM है. इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है. इसके तीन रेजिमेंट की खरीद को मंजूरी दी गई है. इस पर 36 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. यानी एक रेजिमेंट पर करीब 12 हजार करोड़ रुपये. भारतीय सेना ने सरकार से ऐसे 11 रेजिमेंट्स की मांग की है. QRSAM एक बेहद एडवांस मोबाइल मिसाइल सिस्टम है. ये मिसाइलों दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोनों और अन्य हवाई खतरों को 30 किमी के दायरे के भीतर नष्ट कर सकती हैं. इन मिसाइलों को इनकी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता के लिए जाना जाता है. ये सिस्टम युद्ध के मौजूदा तरीकों में बेहद कारगर हैं. QRSAM में बेहद एडवांस रडार सिस्टम, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम लगे हैं. इससे यह बेहद सटीक तरीके से अपने लक्ष्य को ट्रैक और नष्ट कर सकता है. इसकी सफलता की दर 95 से 100 फीसदी तक है. ऑपरेशन सिंदूर इस साल 7 से 10 मई के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपने शानदार डिफेंस सिस्टम का नजारा पेश किया था. इस दौरान पाकिस्तान की ओर से खूब तुर्की निर्मित ड्रोन और चीन निर्मित मिसाइलें दागी गईं लेकिन भारत के मल्टी लेयर डिफेंस सिस्टम ने इन सभी को समय रहते नष्ट कर दिया. इस दौरान भारतीय डिफेंस सिस्टम की सफलता करीब 100 फीसदी थी. इसमें QRSAM ने भी अहम भूमिका निभाई थी. ऑपरेशन के दौरान QRSAM के परफॉर्मेंस ने सभी का दिल जीत लिया था. ऐसे में सेना अब QRSAM के दो-तीन नहीं बल्कि कुल 11 रेजिमेंट बनाने वाली है. इस वक्त भारत के सुरक्षा कवच में QRSAM में आकाश, बराक-8 और अन्य स्वदेशी प्रणालियों के साथ मिलकर एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करेगा.

1 साल के भीतर 75 सांसद होंगे राज्‍यसभा से रिटायर? क्‍या इन नेताओं की होगी वापसी?

नईदिल्ली  सरकार ने पिछले दिनों चार लोगों को राज्‍यसभा के लिए मनोनीत किया है. ये सब ऐसे वक्‍त पर हो रहा है जब अगले एक साल के भीतर राज्‍यसभा की करीब 75 सीटें खाली होने वाली हैं. नवंबर-अप्रैल 2026 के बीच कई बड़े नेता राज्‍यसभा से रिटायर होंगे. कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, एचडी देवगौड़ा, शरद पवार, जेडीयू सांसद हरिवंश, सपा नेता रामगोपाल यादव, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह कई बड़े नाम इस फेहरिस्‍त में शामिल हैं. इन सीटों को भरने के लिए अलग-अलग राज्‍यों में चुनाव होंगे.  राज्‍यसभा की सदस्‍य संख्‍या चार नए सदस्‍यों के मनोनीत होने से राज्‍यसभा की मौजूदा संख्‍या बढ़कर 240 हो गई है. इसी साल 24 जुलाई को इनमें से छह सदस्‍य रिटायर होंगे. रिटायर होने वालों में पीएमके नेता अंबुमणि रामदास और डीएमके नेता विल्‍सन शामिल हैं. एचडी देवगौड़ा, हरिवंश और शरद पवार अप्रैल, 2026 में रिटायर होंगे. मल्लिकार्जुन खरगे 25 जून, 2026 को रिटायर होंगे. महाराष्‍ट्र से प्रियंका चतुर्वेदी और रामदास अठावले समेत सात सदस्‍य रिटायर होंगे.  राज्यसभा से रिटायर होने वाले नेताओं की लिस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, भाजपा नेता हरदीप पुरी, जेडीयू सांसद हरीवंश, सपा सांसद राम गोपाल यादव, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, प्रियंका चतुर्वेदी और आरएलडी नेता उपेंद्र कुशवाहा जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं। इन सीटों को भरने के लिए राज्यों में चुनाव होंगे। राज्यसभा में कुल 75 सीटें खाली होने वाली हैं, जिन्हें भरने के लिए अलग-अलग राज्यों में चुनाव कराए जाएंगे। 24 जुलाई को रिटायर होंगे दो सदस्य 2026 में इन नेताओं के रिटायर होने से पहले इन साल मॉनसून सत्र के शुरू होने के तीन दिन बाद ही 24 जुलाई को डीएमके के विल्सन और पीएमके के डॉ. अंबुमणि रामदास समेत छह नेता रिटायर होंगे। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चार सदस्यों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। इससे राज्यसभा की संख्या 236 से बढ़कर 240 हो गई है लेकिन 24 जुलाई को छह सदस्यों के रिटायर होने के बाद यह संख्या फिर से 235 हो जाएगी। 25 जून 2026 को रिटायर होंगे मल्लिकार्जुन खरगे वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 25 जून 2026 को रिटायर होंगे। एचडी देवेगौड़ा और हरिवंश 9 अप्रैल 2026 को रिटायर होंगे। एनसीपी नेता शरद पवार भी अप्रैल में ही रिटायर होंगे। महाराष्ट्र से सात सदस्य रिटायर होंगे, जिनमें प्रियंका चतुर्वेदी और रामदास अठावले शामिल हैं। जेएमएम के शिबू सोरेन और कांग्रेस के शक्तिसिंह गोहिल भी 2026 में रिटायर होंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और दिग्विजय सिंह जैसे सांसद भी रिटायर हो रहे हैं। कांग्रेस को इन नेताओं को दोबारा चुनकर लाने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि देश की सबसे पुरानी पार्टी के पास कर्नाटक और हिमाचल के साथ-साथ तेलंगाना में ही सरकार है। ऐसे में कुछ सीटों पर दावेदार ज्यादा होंगे। देखना रोचक होगा कि कांग्रेस क्या कदम उठाएगी। अभिषेक पाण्डेय कांग्रेस की दिक्‍कत खरगे के अलावा कांग्रेस के दिग्‍गज नेता दिग्विजय सिंह भी राज्‍यसभा से रिटायर होंगे. कांग्रेस के सामने समस्‍या ये है कि उसके कई नेता रिटायर होंगे लेकिन उनको दोबारा उच्‍च सदन में भेजने के लिए पार्टी को दिक्‍कतों का सामना करना पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्‍योंकि कांग्रेस की इस वक्‍त हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में ही राज्‍य सरकारें हैं. उसके कई नेता पहले से ही उच्‍च सदन में जाने का रास्‍ता देख रहे हैं ऐसे में यदि दिग्‍गजों को लगातार फिर से पार्टी उच्‍च सदन में भेजने का सोचती है तो उसके कोटे में आने वाली हर सीट पर पार्टी के भीतर से ही एक से अधिक दिग्‍गज चेहरे होंगे. ऐसे में ये देखना दिलचस्‍प होगा कि पार्टी किस फॉर्मूले के तहत प्रत्‍याशियों का चयन करेगी? 

पुणे पोर्श हादसे में नया मोड़, आरोपी पर किशोर के तौर पर चलेगी सुनवाई

पुणे  पुणे पोर्श एक्सीडेंट के बहुचर्चित मामले में अब एक अहम मोड़ सामने आया है। किशोर न्याय बोर्ड ने मंगलवार को यह स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में 17 वर्षीय आरोपी पर नाबालिग की तरह मुकदमा चलाया जाएगा, न कि वयस्क की तरह, जैसा कि पुणे पुलिस की मांग थी। यह हादसा 19 मई को पुणे में हुआ था, जहां एक तेज रफ्तार पोर्श कार ने मोटरसाइकिल सवार दो आईटी प्रोफेशनल्स, अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा, को कुचल दिया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। आरोपी किशोर कथित तौर पर नशे की हालत में था और बगैर ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चला रहा था। पुणे पुलिस ने इस घटना को जघन्य अपराध करार देते हुए किशोर पर एक वयस्क की तरह मुकदमा चलाने की मांग की थी। पुलिस का तर्क था कि केवल दो लोगों की जान लेना ही नहीं, बल्कि आरोपी ने सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश भी की थी, जिससे उसकी मंशा और गंभीरता साफ जाहिर होती है। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि उसे नाबालिग की तरह ही देखा जाना चाहिए। इसके बाद, किशोर न्याय बोर्ड ने पुलिस की याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया कि आरोपी पर नाबालिग की तरह ही मुकदमा चलेगा। बोर्ड के फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि आरोपी पर एक नाबालिग की तरह मुकदमा चलेगा। यह मामला शुरुआत से ही विवादों में रहा है। घटना के बाद जब आरोपी को सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने जैसी शर्तों के साथ जमानत दी गई, तो देशभर में भारी आलोचना हुई। सोशल मीडिया से लेकर राजनैतिक गलियारों तक इस पर सवाल उठे। आलोचना के बाद आरोपी की जमानत रद्द करते हुए उसे सुधार गृह में भेज दिया गया था। इस बीच, 25 जून 2024 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने किशोर न्याय बोर्ड के सुधार गृह भेजने के फैसले को अवैध करार देते हुए लड़के की तत्काल रिहाई के आदेश दिए। अदालत ने कहा कि किशोरों के मामलों में कानून का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और न्याय प्रक्रिया में कोई जल्दबाजी या दबाव नहीं होना चाहिए।

धमकियों से नहीं झुकेगा रूस, ट्रंप के 50 दिन वाले बयान पर बड़ा बयान

मॉस्को, ब्लूमबर्ग अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने धमकी दी है कि अगर रूस 50 दिनों के भीतर यूक्रेन पर हमला बंद नहीं करता, तो अमेरिका उसकी अर्थव्यवस्था पर 100% तक के भारी टैरिफ लगाएगा। लेकिन रूस ने इस चेतावनी को सिरे से खारिज कर दिया है। रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने सरकारी समाचार एजेंसी TASS से बातचीत में कहा, “हम किसी भी तरह के अल्टीमेटम को स्वीकार नहीं करते।” क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि ट्रंप की टिप्पणी “गंभीर” है और मास्को इसे विस्तार से समझने की कोशिश करेगा। ट्रंप ने क्या कहा था वाइट हाउस में नाटो प्रमुख मार्क रुट्टे के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा, “अगर 50 दिन में समझौता नहीं हुआ तो हम बेहद कड़े टैरिफ लगाएंगे, लगभग 100% तक।” ट्रंप ने यह भी बताया कि यूक्रेन को हथियारों की एक नई खेप भेजी जाएगी, जिसमें Patriot एयर डिफेंस सिस्टम शामिल होगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका इसके लिए भुगतान नहीं करेगा। किन देशों पर पड़ेगा असर? ट्रंप की योजना में ‘सेकेंडरी टैरिफ’ यानी उन देशों पर टैक्स लगाना भी शामिल है, जो रूसी तेल और गैस खरीदते हैं — जैसे कि चीन और भारत। यह प्रस्ताव कांग्रेस में पेश एक द्विदलीय बिल से मेल खाता है, जो ऐसे देशों पर 500% तक के टैरिफ लगाने की सिफारिश करता है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लटकनिक ने कहा कि ट्रंप के पास टैरिफ और प्रतिबंध दोनों विकल्प हैं, और वो इनमें से कोई भी इस्तेमाल कर सकते हैं। चीन ने जताई नाराज़गी चीन ने अमेरिका की आलोचना करते हुए इसे “लॉन्ग-आर्म जुरिस्डिक्शन” बताया। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका को बीजिंग और मास्को के बीच ऊर्जा संबंधों में दखल नहीं देना चाहिए। इस बीच, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मुलाकात भी हुई, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी। रूस की प्रतिक्रिया ट्रंप के बयान के बाद रूस ने साफ कर दिया है कि वह किसी तरह की धमकी या दबाव में नहीं झुकेगा। रयाबकोव ने कहा कि मास्को डिप्लोमैटिक बातचीत को प्राथमिकता देगा, लेकिन उसे पश्चिम से “लोहे जैसे ठोस आश्वासन” चाहिए, खासकर इस बात पर कि यूक्रेन नाटो का हिस्सा नहीं बनेगा। यूक्रेन को क्या मिला? यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने सोमवार को X पर बताया कि उन्होंने ट्रंप से फोन पर बात की और नई सैन्य मदद और शांति प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “हम हरसंभव उत्पादक तरीके से शांति स्थापित करने के लिए तैयार हैं।”  

कार्टून विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, हेमंत मालवीय को अंतरिम राहत

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और आरएसएस कार्यकर्ताओं के कथित आपत्तिजनक कार्टून सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोपी एक कार्टूनिस्ट के माफीनामे के बाद, गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने सोशल मीडिया पर बढ़ती आपत्तिजनक पोस्ट पर भी चिंता व्यक्त की और इस पर अंकुश लगाने के लिए न्यायिक आदेश पारित करने की आवश्यकता पर बल दिया। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने कहा, ‘लोग किसी को भी, कुछ भी कह देते हैं। हमें इस बारे में कुछ करना होगा।’ इस बीच, पीठ ने कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को मध्य प्रदेश में दर्ज प्राथमिकी के मद्देनजर राज्य की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया। मालवीय की वकील वृंदा ग्रोवर ने आश्वासन दिया कि इस मामले में माफी मांग ली गई है। हालांकि, पीठ ने आगाह किया कि अगर कार्टूनिस्ट सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डालते रहे, तो राज्य सरकार कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने ‘एक्स’ पर न्यायपालिका के खिलाफ भी मालवीय के कुछ अन्य पोस्ट का जिक्र किया, जिसके बाद पीठ ने कहा, ‘यदि याचिकाकर्ता सोशल मीडिया पर कोई आपत्तिजनक पोस्ट डालते हैं, तो प्रतिवादी राज्य (मध्य प्रदेश) को कानून के अनुसार आगे बढ़ने की स्वतंत्रता होगी।’ ग्रोवर ने विधि अधिकारी की दलील का विरोध करते हुए कहा, ‘इससे तो समस्याओं का पिटारा खुल जाएगा।’ ग्रोवर ने इससे पहले सुनवाई में कहा, ‘यह खराब और गंदी भाषा का मामला है। मैं खुद से पूछती हूं कि क्या यह आपराधिक मामला है या अवैध भाषा का मामला है।’ पीठ ने कहा, ‘मुद्दा यह है कि आपने कोई बात किस तरह कही। आपने जो किया, वो स्पष्ट रूप से अपराध है।’ शीर्ष अदालत ने मालवीय के एक ट्वीट का जिक्र करते हुए कहा कि इस पर ‘सभी तरह के दंडनीय प्रावधान लागू हो सकते हैं’। इस बीच, पीठ ने कार्टूनिस्ट की सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की याचिका स्वीकार नहीं की और सुनवाई अगस्त में तय कर दी। कार्टूनिस्ट मालवीय ने तीन जुलाई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार करने के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। वकील और आरएसएस कार्यकर्ता विनय जोशी द्वारा दायर एक शिकायत पर मई में इंदौर के लसूड़िया थाने में मालवीय के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जोशी ने आरोप लगाया कि मालवीय ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करके हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ा। दलील दी गई कि यह मुद्दा कोविड-19 महामारी के दौरान 2021 में बनाए गए एक कार्टून से संबंधित है। उन्होंने कहा, ‘यह अरुचिकर हो सकता है। मैं कहती हूं कि यह अशोभनीय है। मैं यह भी कहने को तैयार हूं। लेकिन क्या यह अपराध है? माननीय न्यायाधीश ने कहा है, यह आपत्तिजनक हो सकता है, लेकिन यह अपराध नहीं है। मैं सिर्फ कानून की बात कर रही हूं। मैं किसी भी चीज को सही ठहराने की कोशिश नहीं कर रही हूं।’ ग्रोवर ने कथित आपत्तिजनक पोस्ट को हटाने पर सहमति जताई। जस्टिस धूलिया ने तब कहा, ‘हम इस मामले में चाहे जो भी करें, लेकिन यह निश्चित रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग है।’ प्राथमिकी में कई ‘आपत्तिजनक’ पोस्ट का ज़िक्र है, जिनमें भगवान शिव पर कथित रूप से अनुचित टिप्पणियों के साथ-साथ कार्टून, वीडियो, तस्वीरें और मोदी, आरएसएस कार्यकर्ताओं व अन्य लोगों के बारे में टिप्पणियां शामिल हैं।  

पिथौरागढ़ हादसा: खाई में समाई टैक्सी, 8 की गई जान, कई घायल

पिथौरागढ़ उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में मंगलवार को भीषण हादसा हुआ है। पुल के पास से सीधे करीब 300 मीटर नीचे खाई में वाहन गि‍रने से आठ लोगों की मौत हो गई, जबक‍ि चार लोगों के घायल होने की खबर है। पिथौरागढ़ SP रेखा यादव ने जानकारी देते हुए बताया क‍ि मुवानी कस्बे में सुनी पुल के पास 13 लोगों को ले जा रहा एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 8 लोगों की मृत्यु हो गई है। पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और बचाव कार्य जारी है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन और राहत एवं बचाव दलों को बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने घायलों को समय पर उचित और निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को कहा है।

1200 लोगों पर किए गए अध्ययन से पता चला है कि 21 फीसदी दुर्घटनाएं नींद के कारण हुईं

देहरादून उत्तराखंड में सड़क हादसों का कारण नींद और इससे संबंधित बीमारियां हैं। एम्स के मनोरोग विभाग के शोध में यह बात सामने आई है। अक्टूबर 2021 से अप्रैल 2022 तक 1200 लोगों पर किए गए अध्ययन से पता चला है कि 21 फीसदी दुर्घटनाएं नींद आने या नींद से संबंधित समस्या के कारण हुईं हैं। नशे को दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण माना जाता रहा है, लेकिन इस शोध ने नींद को एक अहम कारक बताया है।  मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एम्स के मनोरोग विभाग के निद्रा प्रभाग के चिकित्सकों के शोध में यह बात सामने आई है। उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण नशे को माना जाता है। चिकित्सकों ने शोध से साफ कर दिया किया है कि नींद व नींद से संबंधित समस्या उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि 32 फीसदी दुर्घटनाओं का कारण नशा था, लेकिन इनमें से कई चालक नींद की समस्या से पीड़ित थे, जिससे नशा करने पर उनकी समस्या और बढ़ गई।  डॉक्‍टरों ने अक्टूबर 2021 से अप्रैल 2022 तक करीब 1200 लोगों पर शोध किया। ये सभी लोग कई इलाकों में वाहन दुर्घटना में घायल हुए थे, जो इलाज के लिए एम्स में भर्ती हुए थे। इनमें से 575 घायल वाहन चालक थे। इन वाहन चालकों में 75 फीसदी संख्या दोपहिया व तिपहिया वाहन चालकों की थी। शोध निर्देशक व डॉक्टर ने बताया कि 21 फीसदी दुर्घटनाएं वाहन चलाते समय नींद आना या नींद से संबंधित समस्या के चलते हुई। वहीं अत्यधिक थकान से आने वाली नींद भी 26 फीसदी दुर्घटनाओं का कारण बनी। 32 फीसदी दुर्घटनाओं का कारण नशा था, लेकिन इनमें ज्यादातर वे चालक शामिल थे जो नींद व नींद से संबंधित समस्या से भी ग्रसित थे और नशा करने से उनकी यह समस्या और अधिक बढ़ गई और दुर्घटना का कारण बनी।  शोध में कहा गया है कि नींद की समस्या के चलते होने वाली करीब 68 फीसदी दुर्घटनाएं सीधी सपाट व रोजमर्रा में प्रयोग होने वाली सड़कों पर हुई हैं। ज्यादातर दुर्घटनाएं शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच हुईं। क्योंकि कुछ लोग शाम को शराब का सेवन भी करते हैं और ऐसे में नींद से संबंधित समस्या और बढ़ जाती है। शोध के मुताबिक 68 फीसदी दुर्घटनाएं सीधी सड़कों पर हुईं। प्रशासन नशे के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाता है। अभियान के तहत एल्कोमीटर से वाहन चालकों की जांच की जाती है। यह शोध अमेरिका के क्यूरियस मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।  

कर्नाटक सरकार का बड़ा कदम: भेदभाव रोकने के लिए आएगा रोहित वेमुला बिल

बेंगलुरु कर्नाटक की कांग्रेस सरकार एक ऐसा बिल लाने जा रही है जो अल्पसंख्यकों और एससी-एसटी के लोगों को भेदभाव से बचाएगा। इस बिल में भेदभाव करने वालों को जेल और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साल 2016 में आत्महत्या करने वाले दलित पी एचडी छात्र रोहित वेमुला के नाम पर यह विधेयक विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान पेश हो सकता है। खबर है कि इसमें भेदभाव करने के दोषियों के खिलाफ भारी सजा के प्रावधान हैं। हालांकि, इसके प्रावधानों को लेकर लेकर राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कर्नाटक रोहित वेमुला (बहिष्कार या अन्याय निवारण) (शिक्षा और सम्मान का अधिकार) विधेयक, 2025 मॉनसून सत्र के दौरान पेश किया जा सकता है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक शामिल होंगे। खबर है कि बिल का मकसद एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षा का अधिकार और शिक्षा तक पहुंच मुहैया कराना है। रिपोर्ट के अनुसार, मसौदे में कहा गया है कि इसके तहत अपराध साबित होने पर जमानत नहीं हो सकेगी। साथ ही अगर कोई भेदभाव करता है या भेदभाव में सहयोग करता है या उकसाता है, तो उसे सजा दी जाएगी। पहली बार अपराध करने पर एक साल की जेल और 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही अदालत मुआवजा को सीधे पीड़ित को देने की अनुमति दे सकती हैं। यह धनराशि 1 लाख तक जा सकती है। बार-बार अपराध करने पर तीन साल की जेल और 1 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। खबर है कि अगर कोई संस्थान सभी वर्गों, जातियों, पंथों, लिंगों या राष्ट्रों के लिए शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, तो उसपर भी ऐसा ही दंड लगेगा। रिपोर्ट के अनुसार, बिल में बताया गया है कि राज्य सरकार की तरफ से ऐसे संस्थानों को आर्थिक मदद या अनुदान नहीं दिया जाएगा। हैदराबाद विश्विद्यालय के छात्र रहे रोहित वेमुला ने जनवरी, 2016 में कथित जातिगत भेदभाव के कारण आत्महत्या कर ली थी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर ‘रोहित वेमुला अधिनियम’लागू करने के लिए कहा था।  

मुंबई एयरपोर्ट पर एक भारतीय महिला को 62.6 करोड़ रुपए की कोकीन के साथ गिरफ्तार किया

मुंबई विदेश से तस्करी करने वाले तरह-तरह की जुगाड़ से तस्करी करते हैं और पकड़े भी जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें मुंबई एयरपोर्ट पर एक भारतीय महिला को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों को उसके पास से ओरियो और चॉकलेट के डिब्बे मिले हैं, जिसके अंदर 62.6 करोड़ रुपए मूल्य की कोकीन जब्त की गई है। मीडिया रिपोर्ट में डीआरआई मुंबई के अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट पर एक महिला को 300 कैप्सूल में भरे 6 किलोग्राम से अधिक कोकीन के साथ गिरफ्तार किया है। इसकी अनुमानित कीमत 62.6 करोड़ रुपए है। उन्होंने बताया कि कैप्सूल ओरियो बिस्कुट के छह डिब्बों और चॉकलेट के तीन डिब्बों में पैक थे। महिला दोहा से मुंबई पहुंची थी। डीआरआई अधिकारियों को गुप्त सूचना मिली थी कि मुंबई आने वाली फ्लाइट से कोकिन की तस्करी की जा रही है।  जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए, डीआरआई मुंबई के अधिकारियों ने सोमवार को मुंबई हवाई अड्डे से महिला यात्री को रोका उसके सामान की गहन जांच के बाद 6 ओरियो बॉक्स और 3 चॉकलेट बॉक्स बरामद किए। खोलने पर सभी नौ बॉक्सों में से एक सफेद पाउडर जैसा पदार्थ मिला। जांच अधिकारियों को समझ में नहीं आ रहा था आखिर क्या है। तब जाकर सभी कैप्सूलों का फील्ड टेस्ट किट की मदद से जांच किया गया तो कन्फर्म हुआ कि वह कोकीन है।  अधिकारियों ने बताया कि ब्लैक मार्केट में इसकी अनुमानित 62.6 करोड़ रुपए है। कोकीन एनडीपीएस के तहत जब्त कर ली गई अधिकारियों ने बताया कि महिला यात्री को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। बता दें इससे पहले महाराष्ट्र के ठाणे जिले में 120 बोतल कोडीन सिरप रखने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार लोगों में दो कर्नाटक राज्य के थे। जब्त की गई सिरप की कीमत 27000 रुपये बताई गई थी।   

बांग्लादेशी सीमा में प्रवेश करने के बाद 34 भारतीय मछुआरों को बांग्लादेश ने हिरासत में लिया

दक्षिण 24 परगना बंगाल की खाड़ी में मछली पकड़ने के दौरान गलती से बांग्लादेशी सीमा में प्रवेश करने के बाद 34 भारतीय मछुआरों को बांग्लादेश कोस्ट गार्ड ने हिरासत में ले लिया है। रविवार रात करीब 2 बजे ट्रॉलर में सवार 34 भारतीय मछुआरों को बांग्लादेश तटरक्षकों ने हिरासत में ले लिया। यह घटना मोंगला बंदरगाह से करीब 77 नॉटिकल मील दूर समुद्र में हुई। मछुआरा संगठनों से मिली जानकारी के अनुसार, ये सभी मछुआरे पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सुंदरबन क्षेत्र के निवासी हैं। रोजी-रोटी की तलाश में समुद्र में गए ये मछुआरे अंधेरा और खराब मौसम की वजह से रास्ता भटक गए और गलती से बांग्लादेश की समुद्री सीमा में प्रवेश कर गए। बांग्लादेशी तटरक्षकों ने मछुआरों के दोनों ट्रॉलरों और बाकी सामान भी जब्त कर लिए। फिलहाल दोनों ट्रॉलरों को मोंगला थाने को सौंप दिया गया है। मछुआरा संगठन के अधिकारी भारत सरकार से लगातार संपर्क में हैं ताकि इन मछुआरों को जल्द से जल्द रिहा करवाया जा सके।