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कनाडा की धरती से अजित डोभाल के नाम धमकी, इंतजार जारी

कनाडा कनाडा में गिरफ्तार हुआ खालिस्तानी आतंकवादी इंदरजीत सिंह गोसाल जेल से बाहर आ चुका है। खबर है कि बाहर आते ही उसने भारत को धमकी दी है। इसके अलावा SFJ यानी सिख्स फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को चेतावनी दी है। गोसाल और 2 अन्य को 19 सितंबर को हथियारों से जुड़े अपराध में गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, गोसाल जेल से बाहर आ गया है। जेल से बाहर आते ही उसने पन्नू को समर्थन देने की बात कही है। रिपोर्ट के अनुसार, गोसाल ने वीडियो में कहा, 'भारत, मैं बाहर आ गया हूं। गुरपतवंत सिंह पन्नू को समर्थन देने और 23 नवंबर 2025 को खालिस्तान रेफरेंडम आयोजित करने के लिए। दिल्ली बनेगा खालिस्तान।' रिपोर्ट के मुताबिक पन्नू ने कहा, 'अजित डोभाल, तुम क्यों कनाडा, अमेरिका या किसी यूरोपीय देश में नहीं जाते और गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण की कोशिश करते। डोभाल, मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।' भारतीय सैनिकों को भड़काया हाल ही में NIA यानी नेशनल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने अमेरिका में रहने वाले पन्नू के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस साल स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रध्वज फहराने से रोकने के लिए इनाम की पेशकश करने और 'भारत के खिलाफ सिखों में असंतोष फैलाने' का आरोप शामिल है। FIR के अनुसार, पन्नू ने 10 अगस्त को पाकिस्तान के लाहौर प्रेस क्लब में मीट द प्रेस कार्यक्रम के दौरान ईनाम की घोषणा की थी। वॉशिंगटन से एक वीडियो संबोधन में पन्नू ने उन सिख सैनिकों को 11 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी, जो मोदी को दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा फहराने से रोकेंगे। FIR में यह भी कहा गया है कि इस कार्यक्रम में पन्नू ने एक नए खालिस्तान के मानचित्र का अनावरण किया और कहा कि पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश खालिस्तान में शामिल होंगे। पन्नू ने दावा किया था कि SFJ ने भारत के खिलाफ लड़ने के लिए एक शहीद जत्था बनाया है।  

अमित शाह का दावा: 2026 चुनाव के बाद साकार होगा ‘सोनार बांग्ला’ का सपना

कोलकाता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोलकाता के मशहूर संतोष मित्रा स्क्वायर दुर्गा पूजा पंडाल का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने बंगाल और देशवासियों को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं दीं और कहा कि नौ दिनों तक चलने वाला शक्ति की उपासना का यह पर्व आज पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गया है। साथ ही उन्होंने इस दौरान मां दुर्गा से प्रार्थना की कि 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद बंगाल में ऐसी सरकार बने, जो राज्य को फिर से ‘सोनार बांग्ला’ (स्वर्णिम बंगाल) बना सके। शाह ने कहा कि मैंने मां दुर्गा से प्रार्थना की है कि बंगाल में ऐसी सरकार आए जो राज्य को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाए, जैसा कि रवींद्रनाथ टैगोर ने सपना देखा था। शाह ने कहा कि मैंने मां दुर्गा से प्रार्थना की है कि इस चुनाव के बाद बंगाल में ऐसी सरकार बने जो 'सोनार बांग्ला' (स्वर्णिम बंगाल) की स्थापना करे। उन्होंने बंगाल को एक बार फिर शांति, सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक बनाने की बात कही। ईश्वरचंद्र विद्यासागर को दी श्रद्धांजलि अमित शाह ने समाज सुधारक और शिक्षाविद ईश्वरचंद्र विद्यासागर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि विद्यासागर जी का महिला शिक्षा और समाज सुधार में योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसके साथ ही गृह मंत्री ने दुर्गा पूजा की शुरुआत में हुई भारी बारिश और इससे हुई मौतों पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि दस से ज्यादा लोगों की जान चली गई, हम सभी भाजपा कार्यकर्ता पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं।

नाटो प्रमुख का दावा: पीएम मोदी ने पुतिन से पूछा यूक्रेन युद्ध का अगला कदम

नई दिल्ली पश्चिमी सैन्य गठबंधन नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने भारत पर अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के प्रभावों पर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के टैरिफ की वजह से भारत ने  रूस से उसकी यूक्रेन स्ट्रैटेजी पर स्पष्टीकरण मांगा है. नाटो चीफ ने कहा कि ट्रंप की ओर से भारत पर लगा गए टैरिफ की वजह से रूस पर बड़ा असर पड़ रहा है. रूटे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर  पुतिन से बात कर रहे हैं. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर सीएनएन से बात करते हुए रूटे ने कहा कि भारत पर ट्रंप के टैरिफ का रूस पर बड़ा असर हो रहा है. भारत की ओर से पुतिन से बात की जा रही है. पीएम मोदी रूस से यूक्रेन पर अपनी रणनीति स्पष्ट करने को कह रहे हैं क्योंकि भारत को टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. बता दें कि ट्रंप ने पिछले महीने भारत पर 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था. इसके साथ ही रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से भारत पर अमेरिका ने 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया था. अमेरिकी सरकार का कहना है कि रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर टैरिफ लगाया गया है. अमेरिका का कहना है कि रूस से तेल खरीदने की वजह से यूक्रेन के खिलाफ रूस को मदद मिल रही है. ट्रंप ने इस दौरान नाटो देशों से भी चीन पर टैरिफ लगाने को कहा था कि ताकि रूस का तेल कम खरीदा जा सके.

संविधान के प्रहरी का संदेश: हिंदू समाज को कमतर आंकना स्वीकार नहीं – सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि वह हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के प्रावधानों को दी गई चुनौतियों पर विचार करते समय सावधानी बरतेगा। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ 1956 अधिनियम के तहत उत्तराधिकार के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा, 'हिंदू समाज की जो संरचना पहले से मौजूद है, उसे कमतर मत कीजिए। एक अदालत के रूप में, हम आपको सावधान कर रहे हैं। एक हिंदू सामाजिक संरचना है और आप इसे गिरा नहीं सकते… हम नहीं चाहते कि हमारा फैसला किसी ऐसी चीज को नष्ट दे जो हजारों सालों से चली आ रही है।' शीर्ष अदालत ने कहा कि यद्यपि महिलाओं के अधिकार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन 'सामाजिक संरचना और महिलाओं को अधिकार देने के बीच संतुलन' होना चाहिए। पीठ ने व्यापक मुद्दों पर विचार किए जाने तक समाधान की संभावना तलाशने के लिए संबंधित पक्षों को उच्चतम न्यायालय के मध्यस्थता केंद्र में भेज दिया। याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनौती दिए गए प्रावधान महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण हैं। सिब्बल ने कहा कि महिलाओं को केवल परंपराओं के कारण समान उत्तराधिकार के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अधिनियम का बचाव करते हुए कहा कि यह 'समुचित ढंग से तैयार किया गया' अधिनियम है और आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता 'सामाजिक ढांचे को नष्ट' करना चाहते हैं। शीर्ष अदालत के समक्ष विचारणीय मुद्दा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15 और 16 है, जो बिना वसीयत के या बिना वसीयत के मरने वाली हिंदू महिलाओं की संपत्ति के हस्तांतरण को नियंत्रित करती है। अधिनियम की धारा 15 के अनुसार, जब किसी हिंदू महिला की बिना वसीयत के मृत्यु हो जाती है, तो उसकी संपत्ति उसके माता-पिता से पहले उसके पति के उत्तराधिकारियों को मिलती है।

कर्नाटक सीएम की अपील पर अजीम प्रेमजी का जवाब – विप्रो सरजापुर कैंपस जनता के लिए बंद रहेगा

नई दिल्ली विप्रो के संस्थापक और अध्यक्ष अजीम प्रेमजी ने कंपनी के परिसर को बाहरी यातायात के लिए खोलने से इनकार कर दिया है, क्योंकि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने क्षेत्र में सड़कों पर भीड़भाड़ कम करने के लिए सहयोग मांगा था। बेंगलुरु शहर यातायात की समस्या से जूझ रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में पूछा था कि क्या विप्रो अपना सरजापुर परिसर सार्वजनिक वाहनों के लिए खोल सकता है। प्रेमजी ने इस मुद्दे की गंभीरता को स्वीकार किया और बेंगलुरू के आउटर रिंग रोड पर यातायात की भीड़ से निपटने के लिए कॉर्पोरेट सहयोग हेतु सिद्धारमैया की अपील की सराहना की। अजीम प्रेमजी ने क्या कहा? हालांकि, विप्रो के चेयरमैन ने बताया कि सरजापुर स्थित परिसर को विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) घोषित किया गया है और वैश्विक सेवा प्रतिबद्धताओं के कारण यह सख्त प्रवेश नियंत्रण नियमों से बंधा हुआ है। प्रेमजी ने पत्र में कहा, "हमारे सरजापुर परिसर से सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही की अनुमति देने के विशिष्ट सुझाव के संबंध में हमें गंभीर कानूनी, प्रशासनिक और वैधानिक चुनौतियों की आशंका है, क्योंकि यह एक सूचीबद्ध कंपनी के स्वामित्व वाली एक विशेष निजी संपत्ति है, जो सार्वजनिक आवागमन के लिए नहीं है।" 'दीर्घकालिक समाधान के रूप में नहीं होगा प्रभावी' प्रेमजी ने आगे कहा, "इसके अलावा, यह भी सराहनीय होगा कि हमारा सरजापुर परिसर एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) है जो वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करता है। हमारी संविदात्मक शर्तों में प्रशासन और अनुपालन के लिए कड़े, अपरक्राम्य प्रवेश नियंत्रण मानदंड अनिवार्य हैं। इसके अलावा, निजी संपत्ति के माध्यम से सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही एक स्थायी, दीर्घकालिक समाधान के रूप में प्रभावी नहीं होगी।"  

‘एज ऑफ कंसेंट’ कम करना कितना सुरक्षित? जानिए दिमागी परिपक्वता, सामाजिक खतरे और वैश्विक अनुभव

नई दिल्ली तीन साल पहले तक फिलीपींस में यौन रिश्तों के लिए सहमति की उम्र महज 12 साल थी. ईसाई देश में यौन शोषण का ग्राफ इतना ऊपर पहुंच गया कि हर पांच में से एक बच्चा एक्सट्रीम हालात का शिकार होने लगा. भारी हंगामों के बाद आखिरकार साल 2022 में इसे बढ़ाते हुए 16 कर दिया गया. जापान में भी यौन संबंधों पर सहमति की उम्र 13 साल थी, जिसे कुछ वक्त पहले ही बढ़ाया गया. क्या वजह है कि बाकी देश एज ऑफ कंसेंट को बढ़ा रहे हैं और क्यों हमारे यहां इसे घटाने की चर्चा हो रही है? फिलीपींस, दुनिया के उन गिने-चुने देशों में रहा है जहां यौन सहमति की उम्र बेहद कम, केवल 12 साल थी. साल 1930 से वहां यही नियम रहा. असल में इससे पहले ये देश अमेरिकी कॉलोनी था. उसके बाद पीनल कोड रिवाइज हुआ. उस दौर के लोग मानते थे कि 12 साल की उम्र बचपन से युवावस्था की तरफ बढ़ने वाली उम्र है और लड़की शादी के लिए तैयार हो सकती है.  धर्म का भी रहा एंगल ये कैथोलिक-बहुल देश है  चर्च का मानना रहा कि शादी के बाद ही यौन संबंध बनना चाहिए. यही वजह है कि लड़कियों की जल्दी शादियां होने लगीं और उम्र बढ़ाने को लेकर गंभीर बहस नहीं हो सकी. अस्सी के दशक में पहली बार महिला अधिकारों की बात शुरू हुई लेकिन तब भी सरकार इस मुद्दे पर चुप रही. चूंकि चर्च गर्भनिरोधक और यौन शिक्षा के विरोध में रही तो एज ऑफ कंसेंट बढ़ाने की मांग दबी ही रही.  क्या नुकसान दिखने लगा टीन-एज प्रेग्नेंसी लगातार बढ़ने लगी. कोई वयस्क 13 या 14 साल की लड़की के साथ संबंध बनाकर भी साफ बच निकलता था. अब शादियां तो नहीं हो रही थीं, लेकिन रेप बढ़ रहे थे. नतीजा ये हुआ कि लाखों लड़कियां नाबालिग लड़कियां मां बन गईं. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि फिलीपींस दक्षिण-पूर्व एशिया में टीन-एज प्रेग्नेंसी कैपिटल बन चुका था. खुद स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि साल 2020 में हर दिन लगभग 500 बच्चियां गर्भवती हो रही थीं. उनके स्कूल छूट गए और जिंदगी ठहर गई.  यूएन एजेंसियां लगातार दबाव बनाने लगीं कि फिलीपींस अपना नियम बदले. साल 2021 में यूएन की कमेटी ऑन द राइट्स ऑफ द चाइल्ड ने साफ कहा कि 12 साल में कंसेंट इंटरनेशनल मानकों के खिलाफ है. अब देश पर प्रेशर था कि उसने बात न सुनी तो मुश्किल पड़ सकती है. मातृत्व और शिशु मृत्यु दर भी बढ़ चुकी थी. तब तक 9 दशक बीत चुके थे. अब जाकर फिलीपींस को लगा कि यह कानून न सिर्फ पुराना है, बल्कि खतरनाक भी है. 12 साल की उम्र को कानूनी सहमति मानना असल में अपराधियों को बचने का रास्ता देना था. साल 2022 में इसे बढ़ाते हुए 16 साल किया गया.  विकसित देश जापान के हाल भी अलग नहीं रहे वहां का क्रिमिनल कोड 1907 से चला आ रहा था, जिसमें सहमति की उम्र 13 साल तय थी. इसका मतलब यह था कि कानूनन 13 साल की बच्ची भी यौन संबंध के लिए सहमति दे सकती थी. अगर कोई मामला अदालत में जाता, तो यौन अपराधी झूठ बोलकर बच निकलता था. यहां तक कि वहां रेप की परिभाषा तक बहुत सीमित थी. कानून कहता था कि बलात्कार तभी माना जाएगा जब जबरन यौन संबंध बनाया गया हो. पीड़िता को साबित करना पड़ता था कि उसने पूरी ताकत से विरोध किया, लेकिन फिर भी खुद को बचा नहीं पाई. अगर लड़की डर गई, चुप रही, या विरोध करने की स्थिति में न हो तो कोर्ट मान लेती थी कि ये रेप नहीं, सहमति है.  वैसे जापान में टीन-एज प्रेग्नेंसी उतनी ज्यादा नहीं थी जितनी फिलीपींस में, लेकिन छोटी बच्चियों का ऑनलाइन शोषण तेज हो चुका था. अपराधी जानते थे कि वे बच निकलेंगे. साल 2020 के समय वहां यौन अपराधों के खिलाफ भारी प्रोटेस्ट हुए. यूएन ने भी दबाव डाला कि वो सहमति की उम्र को ग्लोबल मानकों के आसपास लाए. आखिरकार दो साल पहले जापान की संसद ने नया कानून पास किया, जिसमें सहमति की उम्र 13 से बढ़ाकर 16 साल कर दी गई. साथ ही, नशे में या दबाव में बनाए गए संबंधों को रेप की कैटेगरी में डाला गया.  16 साल में कितना विकसित हो पाता है मस्तिष्क अब कई देश कंसेंट की आयु 16 से बढ़ाते हुए 18 तक जाने की सोच रहे हैं, वहीं भारत में इसे कम करने की बात हो रही है. इस पक्ष की दलील है कि कई बार टीन-एजर्स रोमांटिक रिश्ते में होते हैं लेकिन उम्र की वजह से इसे भी रेप की श्रेणी में डाल दिया जाता है और लड़कों को कड़ी सजा मिलती है.  हालांकि इसका दूसरा पहलू ज्यादा गंभीर है. 16 साल की उम्र में बच्चे शारीरिक तौर पर तो बड़े हो चुके होते हैं लेकिन ब्रेन अभी पूरी तरह डेवलप नहीं हुआ होता. खासकर, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स,जो फैसला लेने, जोखिम समझने और भावनाओं को कंट्रोल करने का काम करता है, वो पूरी तरह बना ही नहीं होता. यानी इस उम्र के लोग इमोशनली तैयार नहीं हो सकते कि वे पूरी समझदारी से यौन संबंध बनाएं. हो सकता है कि इसके बाद वो गिल्ट ट्रिप पर चला जाए, डिप्रेशन का शिकार हो जाए या लगातार गलत रिश्तों में फंसता चला जाए. अगर एक पार्टनर बड़ी उम्र का हो तो दूसरा कम उम्र के चलते प्रेशर का शिकार भी हो सकता है. पढ़ाई छूटती है, सो अलग. यही वजह है कि सेंटर खुद मौजूदा आयु सीमा को बनाए रखने पर जोर दे रहा है.

धनतेरस, दिवाली, दशहरा समेत अक्टूबर के सभी व्रत-त्योहारों की तारीखें एक क्लिक में

नईदिल्ली  साल 2025 का अक्टूबर  भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में बेहद खास रहने वाला है. इसी महीने 1 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र का समापन होगा. इसके बाद करवा चौथ, दशहरा, धनतेरस, दिवाली और छठ महापर्व भी मनाए जाएंगे. देश के हर हिस्से में ये सभी त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाए जाते हैं. आइए अक्टूबर में आने वाले व्रत त्योहारों पर एक नजर डालते हैं. अक्टूबर में आने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट 1 अक्टूबर 2025 – महानवमी शारदीय नवरात्र की महानवमी 1 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस दिन नवमी तिथि का कन्या पूजन किया जएगा. 2 अक्टूबर 2025 – दशहरा/विजयादशमी दशहरा अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है. इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया और माता दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त की. देशभर में रावण दहन और विजयादशमी उत्सव बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं. यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है. 3 अक्टूबर 2025 – पापांकुशा एकादशी सनातन धर्म में पापांकुशा एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की उपासना से समस्त पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है. 4 अक्टूबर 2025 – शनि प्रदोष व्रत शनि प्रदोष व्रत का महत्व ग्रह शांति और आयु वृद्धि में होता है. इस दिन शनि देव की पूजा और हनुमानजी की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है. 6 अक्टूबर 2025 – शरद पूर्णिमा शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होकर अमृत की वर्षा करता है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होते हैं. कोजागर पूजा के दौरान देवी लक्ष्मी की आराधना से धन, वैभव और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. 7 अक्टूबर 2025 – वाल्मीकि जयंती / मीराबाई जयंती संत वाल्मीकि और भक्ति मार्ग की आदर्श महिला मीराबाई की जयंती इस दिन मनाई जाती है. ये हमें सच्चे भक्ति भाव और जीवन में नैतिकता का महत्व सिखाते हैं. 8 अक्टूबर 2025 – कार्तिक माह प्रारंभ कार्तिक माह धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है. इस महीने में किए जाने वाले व्रत और पूजा विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं. 10 अक्टूबर 2025 – करवा चौथ / संकष्टी चतुर्थी करवा चौथ विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती हैं. संकष्टी चतुर्थी भी इस दिन विशेष महत्व रखती है. 13 अक्टूबर 2025 – अहोई अष्टमी अहोई अष्टमी व्रत माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस व्रत में माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन के लिए कामना करती हैं. 17 अक्टूबर 2025 – रमा एकादशी / तुला संक्रांति रमा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है. तुला संक्रांति के दिन सूर्य तुला राशि में प्रवेश करता है, जो कृषक और व्यापारियों के लिए शुभ माना जाता है. 18 अक्टूबर 2025 – शनि प्रदोष व्रत / धनतेरस / यम दीपम धनतेरस पर मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है. इस दिन धातु और गहनों की खरीदारी शुभ मानी जाती है. यम दीपम का उत्सव यमराज के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए मनाया जाता है. 20 अक्टूबर 2025 – नरक चतुर्दशी / लक्ष्मी पूजा / दिवाली दीवाली का पर्व इस साल 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा. यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है. इस दिन घरों में दीप जलाए जाते हैं और मां लक्ष्मी की पूजा कर धन, समृद्धि और सुख की प्राप्ति की जाती है. इस वर्ष दिवाली का पूजा मुहूर्त शाम 07:08 से 08:18 बजे तक रहेगा. 21 अक्टूबर 2025 – कार्तिक अमावस्या कार्तिक अमावस्या को पितरों की स्मृति में तर्पण और पितृपक्ष संबंधित धार्मिक कर्म किए जाते हैं. 22 अक्टूबर 2025 – गोवर्धन पूजा गोवर्धन पूजा पर गोवर्धन पर्वत की पूजा कर जीवन में संपन्नता और खुशहाली की कामना की जाती है. 23 अक्टूबर 2025 – भाई दूज भाई दूज भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पर्व है. बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. 25 अक्टूबर 2025 – विनायक चतुर्थी गणपति भगवान की पूजा इस दिन की जाती है. यह दिन विशेष रूप से व्यापारियों और गृहस्थों के लिए मंगलकारी माना जाता है. 27 अक्टूबर 2025 – छठ पूजा छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होती है. यह व्रत स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार में खुशहाली लाने वाला माना जाता है. 31 अक्टूबर 2025 – अक्षय नवमी अक्षय नवमी को अक्षय संपत्ति और अक्षय लाभ की कामना के साथ मनाया जाता है. इस दिन की गई पूजा और दान स्थायी लाभ प्रदान करता है.

अंतरिक्ष संघर्ष: भारत की खोज पर विराम, चंद्रमा पर टकराव और पृथ्वी का जिम्मा

  चंद्रमा, जो हमेशा से शांत और निर्जीव ग्रह के रूप में जाना जाता रहा है, वहां जंग लगने की घटना ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। चांद पर हवा का अभाव होने के बावजूद हेमेटाइट नामक लौह-समृद्ध खनिज की मौजूदगी ने इस रहस्य को और बढ़ा दिया है। हेमेटाइट आमतौर पर ऑक्सीजन और पानी के संपर्क में आने से बनता है, लेकिन चंद्रमा पर दोनों तत्व सीमित मात्रा में हैं। भारत के चंद्रयान-1 मिशन की रिसर्च ने भी इसी दिशा में संकेत दिए थे, जिससे अब इस खोज को और पुष्टिप्राप्ति मिली है।  नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक, जंग तब बनती है जब लोहा ऑक्सीजन और पानी के संपर्क में आता है। हाल ही में हुए अध्ययनों में चंद्रमा की सतह, विशेषकर ध्रुवीय क्षेत्रों में, हेमेटाइट पाए गए हैं। यह खोज चंद्रमा पर जंग लगने की प्रक्रिया को समझने में नए आयाम खोलती है।साल 2020 में भारतीय चंद्रयान-1 मिशन ने चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में हेमेटाइट की उपस्थिति की पुष्टि की थी। इस मिशन ने चंद्रमा की सतह से डेटा इकट्ठा किया, जिसमें पानी के अणुओं के प्रमाण भी शामिल हैं। नासा और हवाई इंस्टीट्यूट ऑफ जियोफिजिक्स एंड प्लैनेटोलॉजी के शोधकर्ताओं ने इस डेटा का विश्लेषण किया और हेमेटाइट के संकेत पाए। वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा पर जंग लगने में पृथ्वी का योगदान हो सकता है। चंद्रमा पृथ्वी की चुंबकीय पूंछ के संपर्क में आता है, जो ऑक्सीजन अणुओं को चंद्रमा तक ले जाने में मदद करती है। चंद्रमा के 28 दिन के चक्र में लगभग छह दिनों तक पूर्णिमा के समय यह प्रक्रिया सबसे प्रभावी होती है। यह ऑक्सीजन के स्रोत को समझाने में मदद करती है, हालांकि पानी की भूमिका अभी भी रहस्यमय बनी हुई है। जिलियांग और उनकी टीम ने प्रयोगशाला में पृथ्वी की हवा की नकल कर यह देखा कि कैसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन आयनों से चंद्रमा के लौह-समृद्ध खनिज क्रिस्टल हेमेटाइट में बदल सकते हैं। कुछ क्रिस्टलों में यह प्रक्रिया उलटकर भी होती है, जिससे लोहे में परिवर्तन होता है। यह प्रयोग चंद्रमा पर जंग लगने की संभावित प्रक्रियाओं को समझने में मददगार साबित हुआ है।  

एसएमएस-ओटीपी पर निर्भरता खत्म: अप्रैल 2026 से आरबीआई के नए भुगतान प्रमाणीकरण नियम

 नई दिल्ली डिजिटल भुगतान पर नए नियम, जो एसएमएस-आधारित वन-टाइम पासवर्ड से परे दो-कारक प्रमाणीकरण (2एफए) का अनुपालन करने के अधिक तरीकों की अनुमति देते हैं, 1 अप्रैल से लागू होंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को यह एलान किया। केंद्रीय बैंक ने कहा कि प्रमाणीकरण का आधार "यूजर्स के पास कुछ है", "यूजर जो जानता है" या "यूजर जो है" हो सकते हैं। इसमें अन्य बातों के साथ-साथ पासवर्ड, एसएमएस-आधारित ओटीपी, पासफ्रेज, पिन, कार्ड हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर टोकन, फिंगरप्रिंट या बायोमेट्रिक्स का कोई अन्य रूप (डिवाइस-नेटिव या आधार-आधारित) शामिल हो सकते हैं। भारत दुनिया के उन बाजारों में से एक है जो 2FA पर जोर देते हैं। इसके तहत वित्तीय क्षेत्र के खिलाड़ी लेनदेन को निष्पादित करने के लिए एसएमएस-आधारित अलर्ट पर भरोसा करते रहे हैं। आरबीआई ने (डिजिटल भुगतान लेनदेन के लिए प्रमाणीकरण तंत्र) निर्देश, 2025 लॉन्च किया है। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि 2FA अनिवार्य बना रहेगा और एसएमएस ओटीपी का भी उपयोग किया जा सकता है। केंद्रीय बैंक ने पहली बार फरवरी 2024 में इस कदम की घोषणा की थी ताकि भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को वैकल्पिक प्रमाणीकरण तंत्र को लागू करने के लिए तकनीकी प्रगति का लाभ उठाने में सक्षम बनाया जा सके। आरबीआई ने कहा कि जोखिम प्रबंधन के नजरिए से वित्तीय प्रणाली के हितधारक लेनदेन के स्थान, उपयोगकर्ता के व्यवहार पैटर्न, डिवाइस विशेषताओं, ऐतिहासिक लेनदेन प्रोफाइल आदि के आधार पर मूल्यांकन के लिए लेनदेन की पहचान कर सकते हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि यदि इन निर्देशों का पालन किए बिना किए गए लेनदेन से कोई नुकसान होता है, तो जारीकर्ता को बिना किसी आपत्ति के ग्राहक को नुकसान की पूरी भरपाई करनी होगी। इसमें कार्ड जारीकर्ताओं से गैर-आवर्ती, सीमा-पार कार्ड नॉट प्रेजेंट (सीएनपी) लेनदेन को मान्य करने के लिए एक तंत्र स्थापित करने को भी कहा गया है। इसके तहत 1 अक्टूबर, 2026 से विदेशी व्यापारी या विदेशी अधिग्रहणकर्ता की आरे से प्रमाणीकरण के लिए अनुरोध किया जा सकेगा।

कर्मचारियों को बड़ी राहत: जनवरी से ATM के ज़रिए मिलेगी PF की सुविधा

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) के मेंबर्स के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है. ईपीएफओ जनवरी 2026 से एटीएम से पैसा निकालने की सर्विस शुरू कर सकता है. खबरों के मुताबिक, ईपीएफओ की सर्वोच निर्णय लेने वाली संस्‍था CBT अक्‍टूबर के दूसरे सप्‍ताह में होने वाली अपनी आगामी बोर्ड बैठक में ATM से पैसे निकालने की सुविधा को मंजूरी दे सकती है.  ATM से पैसा निकालने की सुविधा से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी. उन्‍हें पैसा निकालने के लिए किसी तरह के ऑनलाइन क्‍लेम की आवश्‍यकता नहीं पड़ेगी. साथ ही लंबे इंतजार की भी जरूरत खत्‍म हो जाएगी. कर्मचारी सीधे एटीएम ब्रांच जाकर ATM से पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं.   सीबीटी के एक सदस्य ने मनीकंट्रोल को बताया कि हमें पता चला है कि ईपीएफओ का आईटी ढांचा ATM जैसे ट्रांजेक्‍शन की अनुमति देने के लिए तैयार है. उन्होंने आगे कहा कि एटीएम से पैसे निकालने की एक सीमा होगी, लेकिन इस पर चर्चा होनी बाकी है.  मंत्रालय ने आरबीआई से की बात  लेबर मिनिस्‍ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ने ईपीएफओ एटीएम की सुविधा शुरू करने के लिए बैंकों के साथ-साथ, RBI से भी बात की है. अधिकारी ने कहा कि एटीएम सुविधा को एक जरूरत के तौर पर देखा जा रहा है, क्‍योंकि सरकार लोगों को उनके पीएफ अकाउंट तक ज्‍यादा पहुंच देना चाहती है.  ईपीएफओ के पास कुल 28 लाख करोड़ ईपीएफओ के तहत अभी 7.8 करोड़ लोग रजिस्‍टर्ड हैं, जिन्‍होंने मिलकर EPFO के पास 28 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा डिपॉजिट किया है. 2014 में यह आंकड़ा- 7.4 लाख करोड़ रुपये और 3.3 करोड़ था.  PF विड्रॉल के लिए जारी होगा कार्ड  सूत्रों ने बताया कि संभावना है कि EPFO अपने सदस्यों को एक विशेष कार्ड जारी करेगा, जिससे वे ATM से अपनी राशि का एक हिस्सा निकाल सकेंगे. इस साल की शुरुआत में EPFO ने कस्‍टमर्स के लिए पैसे की उपलब्‍धता को आसान बनाने के लिए ऑटोमैटिव क्‍लेम सेटलमेंट अमाउंट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया था. इस प्रॉसेस के तहत ऑटोमैटिक सिस्‍टम क्‍लेम की पात्रता की पुष्टि के लिए डिजिटल जांच और एल्‍गोरिदम के एक सेट का उपयोग करती है. पूरी प्रक्रिया सिस्टम-संचालित है और सदस्य के केवाईसी विवरण पर आधारित है.  विशेषज्ञों का कहना है कि ATM के माध्यम से ईपीएफओ फंड विड्रॉल की अनुमति देने से सदस्यों के लिए धन तक पहुंच अधिक सुविधाजनक हो जाएगी. खासतौर से इमरजेंसी के समय में, क्योंकि वर्तमान में विड्रॉल में अक्सर प्रक्रियागत देरी और कागजी कार्रवाई शामिल होती है.