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चुनाव कर्मियों के मानदेय में वृद्धि, निर्वाचन आयोग का बड़ा कदम

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने पीठासीन अधिकारियों, मतदान अधिकारियों, मतगणना कर्मियों, माइक्रो ऑब्जर्वर और चुनाव से जुड़े अन्य कर्मियों के मानदेय में वृद्धि की घोषणा की है। चुनाव के दौरान अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा को सम्मानजनक तरीके से पुरस्कृत करने के लिए आयोग ने यह बड़ा कदम उठाया है। चुनाव कार्य में केंद्रीय एवं राज्य सरकार के कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, लोक प्राधिकरण के सदस्य, सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी आदि शामिल होते हैं। चुनाव के दौरान ये कर्मी कई महीनों से लगातार कई घंटों तक काम करते हैं ताकि मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग कर सकें और अपनी पसंद के प्रतिनिधि का चुनाव कर सकें। आयोग ने बताया कि इससे पहले 2014 से 2016 के बीच अंतिम बार मानदेय में वृद्धि की गई थी, जिसे अब सुधारते हुए नई दरें लागू की गई हैं। मानदेय में प्रमुख वृद्धि के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: पीठासीन अधिकारी एवं मतगणना पर्यवेक्षक: अब उन्हें प्रतिदिन या इसके भाग के लिए 500 रुपए या 2 हजार रुपए एकमुश्त मानदेय मिलेगा। पहले यह 350 रुपए था। मतदान अधिकारी: अब 400 रुपए प्रतिदिन या उसके हिस्से के लिए 1600 रुपए एकमुश्त, जो पहले 250 रुपए था। मतगणना सहायक: 450 रुपए प्रतिदिन या उसके हिस्से के लिए 1350 रुपए एकमुश्त, पहले 250 रुपए। क्लास-4 कर्मचारी (विभिन्न कर्तव्यों के लिए): अब 350 रुपए प्रतिदिन या उसके हिस्से के लिए 1400 रुपए एकमुश्त, पहले 200 रुपए। कॉल सेंटर / कंट्रोल रूम के क्लास-4 कर्मचारी: 1000 रुपए एकमुश्त, पहले 200 रुपए प्रतिदिन। वीडियो निगरानी टीम, मीडिया मॉनिटरिंग कमिटी, फ्लाइंग स्क्वाड आदि के क्लास I/II कर्मचारी को अब 3 हजार रुपए एकमुश्त (पहले 1200 रुपए)। वहीं, क्लास III के कर्मचारी को 2 हजार रुपए एकमुश्त (पहले 1000 रुपए) माइक्रो ऑब्जर्वर: 2000 रुपए एकमुश्त, पहले 1000 रुपए। मतदान स्थल/मतगणना केंद्र पर तैनात पुलिस, होम गार्ड, वन रक्षक, एनसीसी कैडेट, स्वयंसेवक आदि को भोजन/रिफ्रेशमेंट के लिए अब 500 रुपए प्रतिदिन मिलेंगे। पहले 150 रुपए मिलते थे। डिप्टी जिला निर्वाचन अधिकारी को अब कम से कम संबंधित कर्मचारी के एक महीने के बेसिक वेतन के बराबर भुगतान होगा, जबकि पहले कोई वेतन नहीं दिया जाता था। सीएपीएफ के गजेटेड अधिकारी को 15 दिन या उससे कम के लिए 4 हजार रुपए, 15 दिन से अधिक के लिए प्रति सप्ताह 2 हजार रुपए मिलेंगे। (पहले क्रमशः 2500 रुपए व 1250 रुपए)। अधीनस्थ अधिकारी (इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर आदि) के लिए 3000 रुपए 15 दिन तक, 1500 रुपए प्रति सप्ताह 15 दिन से अधिक (पहले 2000 व 1000 रुपए)। वहीं, अन्य रैंक (हेड कॉन्स्टेबल, कॉन्स्टेबल आदि) के लिए 2500 रुपए 15 दिन तक, 1250 रुपए प्रति सप्ताह 15 दिन से अधिक के लिए।। सहायक व्यय पर्यवेक्षक / सेक्टर अधिकारी / सेक्टर पुलिस अधिकारी: अब पूर्णकालीन चुनाव ड्यूटी के लिए 10,000 रुपए या प्रोराटा आधार पर भुगतान होगा, जो पहले 7,500 रुपए था।  

केंद्र सरकार ने ई-बसों, ट्रकों और एम्बुलेंस के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना को 2 साल के लिए बढ़ाया आगे

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक बसों, एम्बुलेंस और ट्रकों के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना को दो साल के लिए बढ़ाकर मार्च 2028 कर दिया है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, यह योजना अब मार्च 2026 के बजाय मार्च 2028 में समाप्त हो जाएगी। अधिसूचना के अनुसार, इस योजना के लिए फंड आवंटन 10,900 करोड़ रुपए पर बरकरार रखा गया है और योजना के तहत कोई अतिरिक्त आवंटन नहीं किया जाएगा। अधिसूचना के अनुसार, इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए प्रोत्साहन मार्च 2026 तक समाप्त हो जाएंगे। पीएम ई-ड्राइव योजना, देश भर में लगभग 5,600 ई-ट्रकों को इलेक्ट्रिक ट्रकों में बदलने के लिए 9.6 लाख रुपए तक के प्रोत्साहन के साथ कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करती है। पिछले महीने, सरकार ने पीएम ई-ड्राइव पहल के तहत इलेक्ट्रिक ट्रकों (ई-ट्रकों) के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु एक अभूतपूर्व योजना शुरू की, जिसमें अधिकतम प्रोत्साहन राशि 9.6 लाख रुपए प्रति वाहन निर्धारित की गई है। यह पहली बार है जब सरकार इलेक्ट्रिक ट्रकों को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान कर रही है, जिसका उद्देश्य देश में क्लीन, कुशल और सस्टेनेबल फ्रेट मोबिलिटी की ओर ट्रांजिशन को गति प्रदान करना है। इस योजना से देश भर में लगभग 5,600 ई-ट्रकों की तैनाती को समर्थन मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के अनुसार, डीजल ट्रक, कुल वाहन संख्या का केवल 3 प्रतिशत होने के बावजूद, परिवहन से संबंधित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 42 प्रतिशत का योगदान करते हैं और वायु प्रदूषण को काफी बढ़ा देते हैं। इस योजना के तहत, केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (सीएमवीआर) के तहत परिभाषित एन2 और एन3 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों पर भी मांग प्रोत्साहन लागू किया जाएगा। एन2 श्रेणी में 3.5 टन से अधिक और 12 टन तक के ग्रॉस व्हीकल वेट (जीवीडब्ल्यू) वाले ट्रक शामिल हैं। एन3 श्रेणी में 12 टन से अधिक और 55 टन तक के जीवीडब्ल्यू वाले ट्रक शामिल हैं। आर्टिकुलेटेड वाहनों के मामले में, प्रोत्साहन केवल एन3 श्रेणी के पुलर ट्रैक्टर पर लागू होंगे। ये प्रोत्साहन खरीद मूल्य में अग्रिम कटौती के रूप में दिए जाएंगे और पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर पीएम ई-ड्राइव पोर्टल के माध्यम से ओईएम को प्रतिपूर्ति की जाएगी।  

पूर्वोत्तर क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार में एकजुट रणनीति का महत्व: ज्योतिरादित्य सिंधिया की टिप्पणी

नई दिल्ली केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में तेजी लाने के लिए यूनिफाइड एप्रोच की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के गैप को भरने के लिए पांच सुझाव दिए, जिसमें एक क्षेत्रीय मास्टर प्लान तैयार करके पूर्वोत्तर क्षेत्र की इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रिड को मिलाना, एनईआर के लिए प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए एक निगरानी तंत्र की स्थापना, विभिन्न कर और अन्य रियायतों की पेशकश के माध्यम से मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क के लिए नीति को आगे बढ़ाना, पड़ोसी देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सीमा पार कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना और डिजिटल कनेक्टिविटी और पावर ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना है। ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी’ पर हाई-लेवल टास्क फोर्स (एचएलटीएफ) में बोलते हुए, सिंधिया ने आगे कहा कि भविष्य की परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र की सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर मैप किया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने सभी पूर्वोत्तर राज्यों से कहा कि वे अपनी स्टेट लॉजिस्टिक्स पॉलिसी को मंत्रालय द्वारा देश भर में सर्वोत्तम प्रथाओं के आधार पर तैयार किए गए मानकों के अनुसार, अपटेड करें। उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्र के तीव्र आर्थिक विकास के लिए परिवहन गलियारों के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा सकते हैं। एचएलटीएफ बैठक में हाईवे, रेलवे, जलमार्ग, वायुमार्ग, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल संपर्क जैसे सेक्टर्स में पूर्वोत्तर क्षेत्र में मौजूदा क्रिटिकल गैप पर ध्यान केंद्रित किया गया। पूर्वोत्तर में इन्फ्रास्ट्रक्चर अंतर को पाटने के लिए, एचएलटीएफ बैठक में एक व्यापक इन्फ्रास्ट्रक्चर मास्टरप्लान तैयार करने का निर्णय लिया गया। यह योजना सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के परामर्श से विकसित की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय विकास के लिए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण सुनिश्चित होगा। बैठक के दौरान चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में राज्य-विशिष्ट बाधाओं और चुनौतियों की पहचान, महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी गैप और प्राथमिकता वाली इन्फ्रास्ट्रक्चर जरूरतें, पूंजी निर्माण के लिए राज्य बजट और राष्ट्रीय निवेश का एकीकरण और 2047 तक विकसित पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक रोडमैप का कार्यान्वयन शामिल था। इस वर्ष की शुरुआत में केंद्र ने आठ हाई-लेवल टास्क फोर्स (एचएलटीएफ) का गठन किया था, जिनमें से प्रत्येक का नेतृत्व पूर्वोत्तर राज्य के एक मुख्यमंत्री द्वारा किया जाता है, जिसमें केंद्रीय मंत्री और अन्य राज्यों के तीन मुख्यमंत्री सदस्य होते हैं।  

सरकार LPG दाम स्थिर रखने के लिए तेल कंपनियों को ₹30000Cr की सब्सिडी देगी

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को एक अहम मीटिंग के दौरान 52,667 करोड़ रुपए के पैकेज को मंजूरी दी. जिसमें LPG, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर विशेष जोर दिया गया है. इस पैकेज के तहत प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को मजबूत करने के लिए 12,060 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा घरेलू रसोई गैस को सस्ता करने के लिए 30,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी संस्थानों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए 4,200 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं.  कैबिनेट मीटिंग में पूर्वोत्तर राज्यों पर विशेष फोकस करते हुए असम और त्रिपुरा के लिए 4,250 करोड़ रुपए का स्पेशल विकास पैकेज स्वीकृत किया गया है.वहीं, दक्षिण भारत में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के लिए मरक्कनम–पुडुचेरी फोर-लेन हाईवे के निर्माण और डेवलपमेंट के लिए 2,157 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. तकनीकी शिक्षा संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए ₹4,200 करोड़ मंजूर हुए हैं. इससे युवाओं को बेहतर ट्रेनिंग और रोजगार के मौके मिलेंगे. इसके अलावा, असम और त्रिपुरा के लिए ₹4,250 करोड़ का विशेष विकास पैकेज भी स्वीकृत हुआ है. मरक्कानम–पुडुचेरी के बीच 4-लेन हाईवे के लिए ₹2,157 करोड़ मंजूर किए गए हैं. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, कैबिनेट की बैठक में 5 अहम फैसले लिए गए हैं। इसके लिए कुल ₹52,667 करोड़ के फंड्स/प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट बैठक हुई। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, कैबिनेट की बैठक में 5 अहम फैसले लिए गए हैं। इसके लिए कुल ₹52,667 करोड़ के फंड्स/प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 2025-26 में भी सब्सिडी दी जाएगी, जिसके लिए ₹12,060 करोड़ मंजूर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पीएम उज्ज्वला योजना को समावेशी विकास (सबके लिए विकास) के लिए वैश्विक स्तर पर सराहना मिली है। इसका मकसद लोगों की जिंदगी में बदलाव लाना है। कैबिनेट मीटिंग में पूर्वोत्तर राज्यों पर विशेष फोकस करते हुए असम और त्रिपुरा के लिए 4,250 करोड़ रुपए का स्पेशल विकास पैकेज स्वीकृत किया गया है. वहीं, दक्षिण भारत में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के लिए मरक्कनम–पुडुचेरी फोर-लेन हाईवे के निर्माण और डेवलपमेंट के लिए 2,157 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. बैठक में तीन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को घरेलू एलपीजी बिक्री पर हुए घाटे की भरपाई के लिए 30000 करोड़ के मुआवजे को मंजूरी दी गई.ये मुआवजा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा इन कंपनियों के बीच वितरित किया जाएगा और इसका भुगतान 12 किश्तों में किया जाएगा. घरेलू एलपीजी सिलेंडर सार्वजनिक क्षेत्र की इन कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को नियंत्रित कीमतों पर उपलब्ध कराए जाते हैं. वर्ष 2024-25 के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, लेकिन उपभोक्ताओं पर कीमतों का बोझ नहीं डालने के लिए सरकार ने इन्हें स्थिर रखा. इस वजह से IOCL, BPCL और HPCL को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा. इसके बावजूद इन कंपनियों ने देशभर में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रखी. सरकार का मानना है कि ये मुआवजा तेल विपणन कंपनियों को कच्चे तेल और एलपीजी की खरीद, कर्ज अदायगी और पूंजीगत व्यय जैसी आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा. इससे देशभर के घरों तक सिलेंडर की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी. रेल मंत्री में बताया कि मीटिंग में तय हुआ है कि घरेलू एलपीजी पर घाटे की भरपाई के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को ₹30,000 करोड़ का मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, तकनीकी शिक्षा में सुधार के लिए MERITE योजना को ₹4,200 करोड़ की मदद दी जाएगी। इसके अलावा असम और त्रिपुरा के लिए विशेष विकास पैकेज की मौजूदा योजना के तहत 4 नए प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है, जिन पर कुल ₹4,250 करोड़ खर्च होंगे। वहीं, तमिलनाडु में मरकानम–पुडुचेरी के बीच 46 किमी लंबा चार लेन हाईवे बनाया जाएगा, जिस पर ₹2,157 करोड़ की लागत आएगी। 31 जुलाई- बैठक में 6 अहम फैसले लिए गए इससे पहले 31 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई थी। इसके बाद केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था, 'मोदी कैबिनेट की बैठक में 6 अहम फैसले लिए गए हैं। इनमें 2 किसानों और फूड सेक्टर से जुड़े हैं। वहीं चार फैसले नॉर्थ-ईस्टर्न सेक्टर में रेलवे नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए हैं। 16 जुलाई- प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी केंद्रीय कैबिनेट ने 16 जुलाई को हुई बैठक में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी है। 1 फरवरी 2025 को बजट के दौरान वत्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस योजना की घोषणा थी। योजना 2025-26 से शुरू होकर अगले 6 साल तक चलेगी। इसके तहत देश के 100 कम कृषि उत्पादन वाले जिलों के किसानों को विशेष सुविधाएं दी जाएंगी। इसमें 1.7 करोड़ किसानों को लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है। इसका मकसद इन जिलों में ज्यादा उत्पादन, फसल विविधता, टिकाऊ खेती, आधुनिक भंडारण और हर किसान को किफायती कर्ज देना है। कैबिनेट ने 2 बड़े प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी     सरकार ने नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन (NIPC) को और ताकत देने के लिए 20,000 करोड़ रुपए का स्पेशल फंड दिया है। इस फंड का इस्तेमाल रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स जैसे सोलर, विंड, ग्रीन हाइड्रोजन में निवेश के लिए किया जाएगा।     नेशनल क्लीन इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (NCIL) को क्लीन टेक्नोलॉजी और इनोवेटिव स्टोरेज के लिए 7,000 करोड़ रुपए की नई पूंजी मिलेगी। इससे नई तकनीक, इनोवेटिव एनर्जी स्टोरेज, बैटरी, स्मार्ट ग्रिड में इन्वेस्टमेंट किया जाएगा।

अल-अक्सा मस्जिद के मुफ्ती पर इजरायल का बैन, गाजा को लेकर की गई थी मुखर बात

तेल अवीव इजरायल ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर के ग्रैंड मुफ्ती शेख मोहम्मद हुसैन की एंट्री पर ही पाबंदी लगा दी है। वे मस्जिद परिसर में नहीं घुस सकते। गाजा को लेकर उन्होंने एक तकरीर दी थी, जिसमें इजरायल की नीतियों की आलोचना की थी। इसी के चलते इजरायल ने उनके ऊपर पाबंदी लगाई है। शेख हुसैन के वकील का कहना है कि पहले 8 दिन की पाबंदी उन पर लगाई गई थी। इसके बाद मुफ्ती पर पाबंदी की मियाद 6 महीनों के लिए और बढ़ा दी गई है। जुलाई के आखिरी में जुमे के मौके पर नमाज अदा किए जाने के बाद शेख मोहम्मद हुसैन ने एक तकरीर की थी। इसमें उन्होंने इजरायल की उस नीति का विरोध किया था, जिसके तहत गाजा में जरूरी चीजों, भोजन और दवा की सप्लाई नहीं हो पा रही थी। इसके चलते 20 लाख फिलिस्तीनियों के आगे भुखमरी तक का संकट पैदा हो गया था। अब इसी मामले में खबर के अनुसार इजरायल ने ऐक्शन लिया है। इजरायली अथॉरिटीज ने मुफ्ती को 27 जुलाई को समन जारी किया था। उन्हें कहा गया था कि वे अगले 8 दिनों तक यहां ना आएं। इस दौरान मस्जिद में कुछ काम भी हो सकता है। बुधवार को 8 दिन की लिमिट खत्म हुई तो अब इसे 6 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। फिलिस्तीन ने इजरायल सरकार के इस फैसले की निंदा की है। फिलिस्तीन का कहना है कि इजरायल की तरफ से लगाया गया यह बैन अल-अक्सा मस्जिद पर नियंत्रण का प्रयास है। फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने कहा कि इस तरह से अल-अक्सा मस्जिद से जुड़ी मजहबी अथॉरिटीज को किनारे लगाने की तैयारी हो रही है, जो इजरायल की नीतियों का विरोध करती रहती है। बता दें अल-अक्सा मस्जिद को लेकर सदियों से विवाद रहा है। इसके एक हिस्से पर इस्लाम के लोगों का दावा है तो वहीं यहूदी भी इसे पवित्र स्थल मानते हैं और एक हिस्से माउंट टेंपल कहते हैं।  

मजबूत मुस्लिम देश ने नेतन्याहू के गाजा प्लान को रोका, ब्रिटेन, रूस और ऑस्ट्रेलिया ने भी दिखाई सहमति

अंकारा मिडिल-ईस्ट के हालात एक बार फिर तेजी से बिगड़ने लगे हैं। एक तरफ इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गाजा शहर पर सैन्य नियंत्रण लेने की योजना को मंजूरी दे दी है, तो दूसरी तरफ ताकतवर मुस्लिम देश तुर्की ने नेतन्याहू की योजना में टांग अड़ा दिया है। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि तुर्की गाजा सिटी पर नियंत्रण करने की इजरायल की योजना की कड़े शब्दों में निंदा करता है। इता ही नहीं तुर्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से इस योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का आह्वान किया है। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इजरायल को अपनी युद्ध योजनाओं को तुरंत रोकना चाहिए और गाज़ा में युद्धविराम पर सहमत होना चाहिए। तुर्की ने ये भी कहा कि इजरायल को द्वि-राज्य समाधान के लिए बातचीत शुरू करनी चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि इजरायल द्वारा गाजा पट्टी में नरसंहार और फ़िलिस्तीनी भूमि पर कब्ज़े के कदम ने वैश्विक सुरक्षा को भारी झटका दिया है। ब्रिटिश पीएम ने नेतन्याहू से पुनर्विचार का आग्रह किया इस बीच, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी तुर्की की हां में हां मिलाया है और इजरायल से गाजा पर पूर्ण नियंत्रण करने के अपने फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिटेन 'दो-राज्य समाधान' के तहत शांति स्थापना चाहता है। ऑस्ट्रेलिया ने भी इजरायल से अपनी इस योजना से पीछे हटने का आग्रह किया है। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि "स्थायी रूप से जबरन विस्थापन अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।" इजरायल के अंदर भी हो रहा विरोध उधर, संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत दिमित्री पोलियांस्की ने नेतन्याहू की इस योजना को बिल्कुल गलत दिशा में उठाया गया और एक बहुत बुरा कदम बताया है। मॉस्को ने भी गाज़ा में इजरायल की कार्रवाइयों की बार-बार आलोचना की है और युद्ध शुरू होने के बाद से ही युद्धविराम का आह्वान किया है। इजरायल के अंदर भी नेतन्याहू के इस प्लान का विरोध हो रहा है। इजरायली विपक्षी नेता यायर लापिड ने कहा कि यह योजना सैन्य और रक्षा प्रतिष्ठान की स्थिति के बिल्कुल विपरीत है, और इसमें लड़ाकू सैनिकों की थकान और थकावट को ध्यान में नहीं रखा गया है। नेतन्याहू का इरादा जातीय सफाया? उधर, फ़िलिस्तीनी राजनेता मुस्तफ़ा बरघौती ने कहा है कि इजरायल का यह फ़ैसला युद्ध अपराध की घोषणा है। उन्होंने कहा कि यह कदम दर्शाता है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार का असली इरादा गाज़ा पट्टी में सभी फ़िलिस्तीनी लोगों का जातीय सफ़ाया है। गाजा और मिडिल-ईस्ट में युद्ध और भड़कने की आशंका गाजा शहर पर नियंत्रण करने का विवादास्पद निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पूरे इजरायल में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें युद्ध को तत्काल समाप्त करने और हमास द्वारा बंधक बनाए गए लोगों की तत्काल वापसी सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा, ‘‘सुरक्षा कैबिनेट के मंत्रियों का बहुमत से यह मानना है कि सुरक्षा कैबिनेट को सौंपी गई वैकल्पिक योजना से न तो हमास की हार होगी और न ही बंधकों की वापसी होगी।’’ यह मंजूरी उस पांच सूत्री लक्ष्य के तहत दी गई जिसका मुख्य उद्देश्य हमास को ‘‘निरस्त्र’’ करना है। इस निर्णय ने इस क्षेत्र में लगभग दो साल से जारी युद्ध के और तीव्र होने की आशंका पैदा कर दी है।  

सीएम धामी ने उत्तरकाशी में बचाव कार्यों की समीक्षा की, कहा- रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर तेज़ी से चल रहा है

देहरादून उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उत्तरकाशी में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा की। उन्होंने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तरकाशी में आज (शुक्रवार) प्रातः काल धराली में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। हेली सेवा, एमआई 17 और चिनूक हेलीकॉप्टरों की मदद से सुबह से ही युद्ध स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित वापस लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार से पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। इस दौरान अधिकारियों से सड़क, संचार और बिजली की बहाली के साथ-साथ खाद्यान्न आपूर्ति पर उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। हम शीघ्र से शीघ्र सभी प्रभावितों को सुरक्षित निकालने और सामान्य जनजीवन को बहाल करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे पहले गुरुवार को भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहत एवं बचाव कार्य की समीक्षा की थी। उन्होंने उत्तरकाशी के आपदा नियंत्रण कक्ष पहुंचकर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया था। मुख्यमंत्री ने पौड़ी गढ़वाल जिले का दौरा किया, जहां पाबौ और थलीसैंण ब्लॉकों में बादल फटने से कई लोगों की जान गई थी और घरों, सड़कों और पुलों को व्यापक नुकसान पहुंचा था। इस दौरान अधिकारियों को विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के प्रति अतिरिक्त संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया था कि अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि यदि किसी भी स्तर पर प्रदेश सरकार से विशेष सहयोग की आवश्यकता हो, तो तुरंत अवगत कराएं। प्रभावित क्षेत्रवासियों की समस्याओं का समाधान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसके लिए हम हर ज़रूरी कदम उठाने को पूरी तरह तैयार हैं। धराली में, 5 अगस्त को बादल फटने से आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन के बाद से करीब 50 नागरिक, आठ जवान और एक जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) अभी भी लापता हैं। बादल फटने के बाद, यह इलाका काफी हद तक दुर्गम बना हुआ है, और बरतवारी, लिंचीगाड, गंगरानी, हर्षिल और धराली में प्रमुख सड़क संपर्क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान फंसे हुए पर्यटकों को भोजन, चिकित्सा सहायता और आश्रय प्रदान कर रहे हैं। पुनर्स्थापना के प्रयास जारी हैं, लेकिन मौसम और भू-भाग संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। सेना के अनुसार, वापसी उड़ानों में पर्यटकों को नेलोंग हेलीपैड से निकाला जा रहा है। हर्षिल स्थित सैन्य हेलीपैड पूरी तरह से चालू है।  

‘फैसला सिर्फ तथ्यों पर, न कि खबरों पर’ – सुनवाई में CJI गवई के तीखे शब्द

नई दिल्ली मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने 7 अगस्त, 2025 को एक मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वे यूट्यूब  नहीं देखते और न ही किसी मामले का निर्णय इंटरव्यूज या प्रेस रिपोर्ट्स के आधार पर करते हैं. उन्होंने बताया कि उनकी दिनचर्या में केवल अखबार पढ़ना शामिल है. यह टिप्पणी उस समय आई जब अदालत में यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि बड़े नेताओं के घरों पर छापेमारी के दौरान यूट्यूब चैनलों पर इंटरव्यूज के माध्यम से एक विशेष नैरेटिव तैयार किया जाता है. सीजेआई बी आर गवई, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड के लिए जेएसडब्ल्यू स्टील की समाधान योजना से संबंधित एक समीक्षा याचिका पर सुनवाई की. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेश के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें समाधान योजना को अस्वीकृत किया गया था. कमेटी फोर क्रेडिटर्स की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में जानकारी दी कि प्रवर्तन निदेशालय ने 23 हजार करोड़ रुपये का जब्त किया गया कालाधन उन लोगों में वितरित किया है जो फ्रॉड का शिकार हुए हैं. इस दौरान, मुख्य न्यायाधीश गवई ने एसजी मेहता से यह सवाल किया कि ईडी की दोषसिद्धी दर क्या है, यानी कितने आरोपियों को दोषी ठहराया गया है. तुषार मेहता ने सीजेआई गवई के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि यह एक अलग विषय है. उन्होंने ईडी का बचाव करते हुए बड़े पैमाने पर होने वाली वसूली का उल्लेख किया. मेहता ने यह भी बताया कि मीडिया के कारण एजेंसी की इन सफलताओं की जानकारी आम जनता तक नहीं पहुँच पाती है. एसजी तुषार मेहता ने बताया कि दंडनीय अपराधों में दोषसिद्धी की दर अत्यंत कम है, और उन्होंने इसे देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में मौजूद खामियों का परिणाम बताया. सुनवाई के दौरान उपस्थित सीनियर लॉ ऑफिसर ने उल्लेख किया कि कुछ मामलों में नेताओं के ठिकानों पर छापे के दौरान भारी मात्रा में नकदी मिलने के कारण उनकी नोट गिनने वाली मशीनें काम करना बंद कर गईं, जिसके चलते उन्हें नई मशीनें खरीदनी पड़ीं. उन्होंने यह भी कहा कि जब बड़े नेता पकड़े जाते हैं, तो यूट्यूब इंटरव्यूज के माध्यम से कुछ नैरेटिव्स स्थापित किए जाते हैं. सीजेआई बी आर गवई ने इस विषय पर स्पष्ट किया कि वे मामलों का निर्णय नैरेटिव्स के आधार पर नहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि वे न्यूज चैनल नहीं देखते और केवल सुबह 10-15 मिनट अखबारों की सुर्खियों पर नजर डालते हैं. लॉ ऑफिसर ने भी यह बताया कि जज सोशल मीडिया और अदालतों के बाहर बने नैरेटिव्स के आधार पर निर्णय नहीं लेते हैं. सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न बेंचें, विशेषकर विपक्षी नेताओं से संबंधित धनशोधन मामलों में प्रवर्तन निदेशालय की कथित मनमानी पर अपनी चिंता व्यक्त करती रही हैं. सीजेआई बी आर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने 21 जुलाई को एक अन्य मामले में यह टिप्पणी की थी कि प्रवर्तन निदेशालय अपनी सीमाओं को पार कर रहा है.

उत्तरकाशी धराली आपदा: 367 लोगों को बचाने में जुटी राहत टीमें, हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

उत्तरकाशी उत्तराखंड के धराली इलाके में अब तक 367 लोगों का रेस्क्यू हो चुका है। पिछले दिनों धराली में बादल फटने के बाद पहाड़ों से आए सैलाब ने तबाही मचाई थी। कई घर ध्वस्त हो गए और इस दौरान सैकड़ों लोग इस इलाके में फंसे थे। फिलहाल, युद्धस्तर पर चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए 367 लोगों को निकाला गया है। उत्तराखंड में मौसम साफ होने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन ने रफ्तार पकड़ी है। चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से प्रभावित इलाकों में मदद पहुंचाई जा रही है। भारी मशीनरी व रसद सामग्री वहां भेजी जा रही है। एमआई 17 समेत 8 निजी हेलीकॉप्टर भी रेस्क्यू में जुटे हैं। इनकी मदद से 112 लोगों को एयरलिफ्ट कर देहरादून पहुंचाया गया। 5 अगस्त को आई प्राकृतिक आपदा के बाद से धराली इलाके में अभी भी कुछ लोगों के लापता होने की आशंकाएं हैं। उत्तराखंड पुलिस ने बताया कि आपदा स्थल पर पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, फायर और राजस्व की टीमें राहत व बचाव कार्य में जुटी हैं। आपदाग्रस्त क्षेत्र में फंसे लोगों को सुबह से हेली के माध्यम से आईटीबीपी मातली पहुंचाने का सिलसिला निरंतर जारी है। उत्तराखंड पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “उत्तरकाशी आपदा राहत अभियान के तहत एक ओर उत्तराखंड पुलिस के जवान प्रभावितों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं, घायलों को प्राथमिक उपचार व सहायता दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राहत सामग्री को दुर्गम इलाकों तक पहुंचाने का संकल्प भी पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।” पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि गंगनानी से 3 किमी आगे पुल ध्वस्त होने से रास्ता बंद हो गया था। बीआरओ की टीम ने नया पुल निर्माण शुरू किया है। एसडीआरएफ ने स्टील वायर से एलाइनमेंट तय किया।  

पश्चिम बंगाल में आरजी कर बलात्कार-हत्या बरसी पर प्रदर्शन का आह्वान, आज से एक सप्ताह तक चलेगा संघर्ष

कोलकाता पिछले साल कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की एक महिला जूनियर डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या की पहली बरसी पर शुक्रवार से पश्चिम बंगाल में फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू होने वाले हैं। विभिन्न समूहों द्वारा आयोजित ये विरोध प्रदर्शन 15 अगस्त तक चलेंगे। बलात्कार-हत्या की शिकार हुई जूनियर डॉक्टर का शव 9 अगस्त की सुबह अस्पताल के सेमिनार हॉल में मिला था। मुख्य आरोपी संजय रॉय को निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, लेकिन इस अपराध में एक बड़ी साजिश के आरोप लगाए गए। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इस पहलू से भी जांच कर रही थी। हालांकि, केंद्रीय एजेंसी अपराध के पीछे कथित ‘बड़ी साजिश’ की अपनी जांच पूरी नहीं कर पाई। बलात्कार और हत्या की पहली बरसी पर होने वाला यह प्रदर्शन, प्रदेश सरकार और सीबीआई की जांच पूरी न होने को लेकर है। पीड़िता के माता-पिता ने 9 अगस्त को ‘नबन्ना अभिजन (राज्य सचिवालय तक मार्च)’ का आह्वान किया है और सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे अपनी बेटी की पुण्यतिथि पर न्याय की मांग करते हुए बिना झंडे के इस जुलूस में शामिल हों। दंपति इस मामले में केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जा रही जांच की प्रगति पर अपनी शिकायतें व्यक्त करने के लिए सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद से मिलने नई दिल्ली पहुंचे। राष्ट्रीय राजधानी रवाना होने से पहले पीड़िता के पिता ने कहा, “हम सीबीआई निदेशक और सर्वोच्च न्यायालय में हमारी वकील करुणा नंदी से मिलने नई दिल्ली जा रहे हैं। इस बात की प्रबल संभावना है कि हमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने का मौका मिले। हमने पहले ही समय मांगा है। हम सीबीआई निदेशक से अनुरोध करेंगे कि केंद्रीय एजेंसी हमारी बेटी के दुखद अंत के पीछे की बड़ी साजिश में शामिल लोगों के खिलाफ तुरंत एक पूरक आरोप पत्र दाखिल करे।” हालांकि, उन्होंने पुष्टि की कि वे 9 अगस्त की सुबह ‘नबन्ना अभिजन’ में भाग लेने के लिए कोलकाता लौट आएंगे।