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CAA : केंद्र ने लिया महत्वपूर्ण निर्णय, अल्पसंख्यक नागरिकों की भारत में रहने की अवधि बढ़ी

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने धार्मिक उत्पीड़न से बचकर भारत आए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों को बड़ी राहत दी है. गृह मंत्रालय ने एक आदेश में कहा कि हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के वे लोग, जो 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए हैं, उन्हें पासपोर्ट या अन्य ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स के बिना भी देश में रहने की अनुमति दी जाएगी. यह आदेश इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्टर, 2025 के तहत जारी किया गया है. इसके तहत उन लोगों को राहत मिलेगी जो मान्य पासपोर्ट और वीजा के बिना भारत में आए या जिनके डॉक्यूमेंट्स की वैधता खत्म हो चुकी है. गृह मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि ऐसे लोग जो धार्मिक उत्पीड़न या उसके भय से भारत आए और 31 दिसंबर 2024 तक देश में दाखिल हुए, उन्हें पासपोर्ट और वीजा रखने के नियम से छूट दी जाएगी. पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए अल्पसंख्यकों के पासपोर्ट नियमों में बदलाव किया गया है। गृह मंत्रालय ने आदेश जारी करते हुए कहा कि 31 दिसंबर 2024 से पहले इन तीन देशों से भारत आने वाले अल्पसंख्यकों को पासपोर्ट दिखाने की जरूरत नहीं है। वो बिना पासपोर्ट के भी देश में रह सकते हैं। यह आदेश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए 6 अल्पसंख्यकों – हिंदू, ईसाई, सिक्ख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के लोगों पर लागू होगा। अगर यह लोग 21 दिसंबर 2024 से पहले भारत में आए हैं, तो ये बिना पासपोर्ट के यहां रह सके हैं। नेपाल-भूटान के नागरिकों पर भी लागू होगा नियम गृह मंत्रालय ने  Immigration and Foreigners (Exemption) Order 2025 जारी किया है। इस आदेश के अनुसार, 1959 से 30 मई 2003 तक नेपाल, भूटान और तिब्बत से भारत आए लोगों को विदेशी रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के पास अपना नाम रजिस्टर करवाना होगा, जिसके बाद वो भी बिना पासपोर्ट के भारत में रह सकते हैं। हालांकि, चीन, मकाउ, हांगकांग और पाकिस्तान से भारत आने वाले नेपाली और भूटानी नागरिकों पर यह नियम लागू नहीं होंगे। गौरतलब है कि सीएए, पिछले साल लागू हुआ था. इसके तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों – हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई – को, अगर वे 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ चुके हैं, तो भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. कई लोग 2014 के बाद भी धार्मिक उत्पीड़न से बचकर भारत आए थे. इनमें खासतौर पर पाकिस्तान से आए हिंदुओं की संख्या अधिक है. ऐसे लोगों के लिए यह आदेश बड़ी राहत लेकर आया है क्योंकि अब उन्हें देश में रहने के लिए पासपोर्ट या वीजा की वैधता दिखाने की जरूरत नहीं होगी. गृह मंत्रालय ने आदेश में क्या कहा?     31 दिसंबर 2024 तक भारत आए अल्पसंख्यक समुदायों को पासपोर्ट और वीजा की अनिवार्यता से छूट दी जाएगी.     चाहे वे लोग बिना डॉक्यूमेंट्स आए हों या वैध डॉक्यूमेंट्स लेकर आए हों जिनकी अब वैधता समाप्त हो चुकी है.     यह छूट विशेष रूप से उन लोगों को दी गई है जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है. क्यों अहम है यह फैसला? यह कदम हजारों लोगों की चिंता दूर करेगा, खासकर पाकिस्तान से आने वाले हिंदू परिवारों को राहत मिलेगी. अब वे देश में बिना किसी कानूनी डर के रह सकेंगे. हालांकि, नागरिकता का अधिकार फिलहाल CAA के प्रावधानों के अनुसार 2014 तक आने वालों को ही मिलेगा, लेकिन 2014 के बाद आए लोगों के लिए यह आदेश भारत में रहने को लेकर एक बड़ी सुरक्षा कवच साबित होगा.

लुटियंस दिल्ली का ऐतिहासिक नेहरू बंगला अब नया मालिक पा चुका है

नई दिल्ली देश की राजधानी के बेहद वीवीआईपी इलाके लुटियंस बंगलो ज़ोन में स्थित एक बंगला इन दिनों खूब सुर्खियों में है. यह बंगला देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का पहला आधिकारिक आवास था. लुटियंस दिल्ली के 17 मोतीलाल नेहरू मार्ग (पहले यॉर्क रोड) पर स्थित यह बंगला इस 14,973 वर्ग मीटर (करीब 3.7 एकड़) में फैला है. इस बंगले को अब बेच दिया गया है. यह सौदा देश की अब तक की सबसे महंगी प्रॉपर्टी डील बताई जा रही है. 1100 करोड़ में हुई डील अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया, इस बंगले के मालिकों ने 1,400 करोड़ रुपये मांगे थे. हालांकि भारतीय पेय उद्योग (beverage industry) से जुड़े एक बड़े कारोबारी ने लगभग 1,100 करोड़ रुपये में डील को फाइनल कर दिया है. कौन हैं इस बंगले के मालिक? राजकुमारी कक्कड़ और बीना रानी इस बंगले की मौजूदा मालिक है. ये दोनों राजस्थान के एक शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं. अखबार के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया के अंतिम चरण के तहत एक नामी लॉ फर्म ने सार्वजनिक नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है, ‘हमारे क्लाइंट इस संपत्ति (प्लॉट नंबर 5, ब्लॉक नंबर 14, 17, मोतीलाल नेहरू मार्ग) को खरीदने के इच्छुक हैं. इस संपत्ति के मौजूदा मालिक राजकुमारी कक्कड़ और बीना रानी हैं. अगर किसी अन्य व्यक्ति का इस संपत्ति पर कोई हक या दावा है तो वह सात दिनों के भीतर दस्तावेज़ी सबूत के साथ हमें सूचित करें. वरना यह माना जाएगा कि इस संपत्ति पर किसी का कोई विरोधी दावा नहीं है.’ साल भर से चल रही थी बात करीब 24,000 वर्ग फुट में बनी इस विशाल संपत्ति को बेचने को लेकर साल भर से बातचीत चल रही थी. एक जानकार के अनुसार, ‘इसकी लोकेशन, वीवीआईपी स्टेटस और आकार को देखते हुए यह बेहद कीमती संपत्ति है. लेकिन कीमत के चलते सिर्फ अरबपति खरीदार ही इसमें रुचि दिखा सकते थे.’ यह संपत्ति लुटियंस बंगलो ज़ोन में स्थित है, जिसे ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस ने 1912 से 1930 के बीच डिजाइन किया था. करीब 28 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में लगभग 3,000 बंगले हैं, जिनमें ज्यादातर मंत्री, जज और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी रहते हैं. यहां लगभग 600 निजी संपत्तियां भी हैं, जो भारत के सबसे अमीर लोगों की झोली में हैं. इस डील के पूरा होने के बाद 17 मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित यह बंगला देश की सबसे महंगी आवासीय प्रॉपर्टी बिक्री का नया रिकॉर्ड कायम करेगा.

असम के आदिवासी बहुल जिले में जमीन विवाद, हाईकोर्ट ने पूछा: निजी कंपनी इतनी बड़ी जमीन कैसे खरीद सकती है?

गौहाटी  गौहाटी हाई कोर्ट ने असम के आदिवासी बहुल दीमा हसाओ जिले में एक प्राइवेट सीमेंट कंपनी को 3,000 बीघा (करीब 1,000 एकड़) जमीन आवंटित किए जाने पर नाराजगी जाहिर की है और पूछा है कि एक निजी कंपनी 3,000 बीघा जमीन कैसे खरीद सकती है। हाई कोर्ट ने छठी अनुसूची के तहत आने वाले इस क्षेत्र के 22 निवासियों की एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि एक निजी कंपनी द्वारा इतने बड़े भू-भाग की खरीद से ‘परेशान और स्तब्ध’ हैं। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या इस परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी ली गई है। रिट याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार मेधी और राज्य के महाधिवक्ता देबोजीत सैकिया के बीच इस बात पर लंबी बहस हुई कि क्या छठी अनुसूची क्षेत्र के उमरंगसो में कारखाना स्थापित करने के लिए महाबल सीमेंट को इतनी अधिक जमीन दी जानी चाहिए। सुनवाई का यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण इस सुनवाई का हाई कोर्ट के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण किया गया। सुनवाई के दौरान जस्टिस मेधी ने कहा, "अदालत 3,000 बीघा जमीन के आवंटन से परेशान है। हम सिर्फ़ यह रिकॉर्ड देखना चाहते हैं कि नीति कैसे बनाई गई।" इस दौरान असम के महाधिवक्ता सैकिया ने अदालत को बताया कि एक सीमेंट कंपनी ने 2 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से जमीन खरीदी है। महाधिवक्ता के बार-बार अनुरोध के बाद, अदालत ने सरकार से 3 सितंबर को अपना हलफनामा दाखिल करने को कहा। जज बोले- मैं तो हैरान-परेशान सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार मेधी 3,000 बीघा की बात सुनकर हैरान रह गए! "पूरा जिला? क्या हो रहा है? एक निजी कंपनी को 3,000 बीघा जमीन दी जा रही है।" इस दौरान एनसी हिल्स स्वायत्त परिषद (NCHAC) के वकील, जिनके पास भूमि का अधिकार क्षेत्र है, ने दीमा हसाओ में एक सीमेंट कारखाने को 3,000 बीघा भूमि के आवंटन से संबंधित कुछ कागजात प्रस्तुत किए, लेकिन कोर्ट ने उन्हें पूरी फाइल पेश करने का निर्देश दिया, जिसमें छठी अनुसूची क्षेत्र में भूमि के बड़े हिस्से को निजी फर्म को आवंटित करने का निर्णय शामिल है। पूरी फाइल पेश करने का आदेश रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस मेधी ने कहा, "NCHAC के वकील ने कुछ कागजात पेश किए। पिछले आदेश का उद्देश्य कुछ कागजात देखना नहीं था, बल्कि उस फाइल को देखना था जिसमें जमीन के बड़े हिस्से को आवंटित करने का निर्णय शामिल है।" उन्होंने NCHAC को अगली सुनवाई में फाइल पेश करने का निर्देश दिया। महाधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी और उसने रिपोर्ट सौंप दी है।

वेनेजुएला जहाज पर अमेरिकी हमला, ड्रग तस्करी के आरोप में 11 की हुई जान

कैरेकस अमेरिका ने वेनेजुएला के जहाज पोत पर सैन्य हमला कर दिया है. इस हमले में 11 की मौत हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट कर खुद इसकी जानकारी दी. ट्रंप ने कहा कि आज सुबह मेरे आदेश पर अमेरिकी सैन्यबलों ने SOUTHCOM क्षेत्र में Tren de Aragua नार्को गैंग पर सैन्य कार्रवाई की. टीडीए एक विदेशी आतंकी संगठन है, जो निकोलस मादुरो के नियंत्रण में काम करता है और जिसने सामूहिक हत्याओं, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और अमेरिका एवं पूरे पश्चिमी गोलार्ध में हिंसा व आतंक की घटनाओं को अंजाम दिया है. ट्रंप ने बताया कि ये सैन्य कार्रवाई उस समय की गई, जब आतंकी अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नशीले पदार्थों की खेप लेकर अमेरिका की ओर जा रहे थे. इस हमले में 11 आतंकियों को मार गिराया गया है. इस कार्रवाई में अमेरिकी सेना को किसी तरह की क्षति नहीं पहुंची. यह संदेश हर उस व्यक्ति के लिए चेतावनी है, जो अमेरिका में ड्रग्स लाने के बारे में सोच भी रहा है. सावधान हो जाइए! इस मामले पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद. बता दें कि मौजूदा समय में अमेरिकी नौसेना की एक बड़ी टुकड़ी कैरीबिया में तैनात है, जो उस जगह के पास है, जहां से वेनेजुएला के जहाज पर स्ट्राइक की गई. 4500 नौसैनिकों के साथ चार विध्वंसक और टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों को तैनात किया गया है. मादुरो पर अमेरिका सरकार पर आरोप वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिका पर उनकी सरकार के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का आरोप लगाया है. उन्होंने एक सितंबर को कहा था कि ट्रंप सरकार सैन्य धमकियों के जरिए वेनेजुएला में सरकार बदलना चाहती है. मादुरो ने कहा था कि हम अमेरिका के किसी भी तरह के हमले का मुकाबा करने के लिए तैयार हैं.

GST रेट कट का बड़ा ऐलान कल, रोजमर्रा की चीजें और इलेक्ट्रॉनिक्स हो सकते हैं सस्ते

नई दिल्ली देश में जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स में सुधार को लेकर तैयारियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीते 15 अगस्त को लाल किले से किए गए ऐलान के बाद से ही तेज हैं, अब आज से जीएसटी काउंसिल की बैठक शुरू हो रही है और दो दिवसीय इस बैठक में जीएसटी रेट्स में बदलाव से लेकर चार की जगह दो टैक्स स्लैब को लेकर अंतिम मुहर लगेगी. जीएसटी रिफॉर्म के जरिए सरकार का लक्ष्य दरअसल, टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाना और उपभोक्ताओं को सीधा फायदा पहुंचाना है. उम्मीद है कि नए बदलाव के बाद रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध-पनीर से लेकर टीवी-एसी और कार-बाइक तक की कीमतें कम हो सकती हैं.  जीएसटी सुधारों पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?  बता दें कि देश में तमाम अलग-अलग टैक्स को खत्म करते हुए जीएसटी 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था. हालांकि, विपक्ष इस गुड्स एंड सर्विस टैक्स को हमेशा से ही 'गब्बर सिंह टैक्स' कहकर सरकार पर निशाना साधती रही है, लेकिन केंद्र सरकार इसे आर्थिक सुधार की दिशा में उठाया गया अपना बड़ा कदम करार देती है. अब इसे और आसान बनाने की तैयारी के तहत इसमें शामिल टैक्स स्लैब की संख्या को घटाने और तमाम रेट्स को युक्तिसंगत बनाने के लिए आज से तमाम प्रस्तावों पर मंथन शुरू हो रहा है. बैठक शुरू होने से पहले मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी सुधारों को लेकर बड़ा बयान दिया था और कहा कि इसका लक्ष्‍य अर्थव्‍यवस्‍था को पूरी तरह से खोलना और पारदर्शिता लाना है, जिससे छोटे उद्योगों की बड़ी मदद होगी. चार स्लैब नहीं, अब रहेंगे सिर्फ दो केंद्र सरकार ने जीएसटी के तहत आने वाले चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18%, और 28%)  को कम करके 12% और 28% टैक्स को हटाने की की तैयारी की है. मतलब सिर्फ 5% और 18% वाले जीएसटी स्लैब बचेंगे. पीएम नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद हुई मंत्री समूह (GoM) की बैठक में भी 12% और 28% स्लैब को खत्म करने के प्रपोजल को मंजूरी दी जा चुकी है. प्रधानमंत्री ने इस जीएसटी सुधार को देशवासियों के लिए दिवाली गिफ्ट के तौर पर संबोधित किया है. हालांकि, सरकार द्वारा किए जाने वाले जीएसटी रेट्स में इन बदलाव से रेवेन्यू का करीब 40,000 करोड़ के नुकसान का अनुमान जताया गया है, लेकिन ये देश के आम आदमी के लिए बड़ी राहत भरे सुधार साबित होंगे.   क्या-क्या चीजें हो सकती हैं सस्ती?  जीएसटी रिफॉर्म से जुड़े प्रस्ताव लागू होते हैं, तो फिर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले तमाम सामान सस्ते हो जाएंगे, जिनमें दूध-पनीर, से लेकर नमकीन, साबुन, तेल, कपड़े शामिल हैं, इसके साथ ही स्लैब चेंज होने पर जूते, TV, AC, मोबाइल और कार-बाइक्स के दाम में भी बड़ी कमी देखने को मिल सकती है. प्रस्ताव के तहत जिन सामानों पर जीएसटी स्लैब को 12 फीसदी से कम करते 5 फीसदी के दायरे में लाने की तैयारी यानी इन्हें सस्ता करने का प्लान है, उनमें पैकेज्ड फूड्स जैसे: नमकीन (भुजिया), चिप्स, पास्ता, नूडल्स, जैम, Ketchup, पैकेज्ड जूस, कंडेंस्ड मिल्क, घी, मक्खन, चीज और दूध से बने बेवरेजेस हैं.  जीएसटी की बैठक में  जीरो जीएसटी स्लैब के दायरे में भी सरकार द्वारा इजाफा करने की उम्मीद जताई जा रही है और ऐसे में इस लिस्ट में कई रोजमर्रा के जरूरी सामानों को शामिल किया जा सकता है, जो फिलहाल 5% और 18% जीएसटी के दायरे में आते हैं. बीते दिनों आई बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट की मानें, तो इन सामानों में खासतौर पर फूड प्रोडक्ट शामिल होंगे, जिनमें यूएचटी दूध, प्री-पैकेज्ड पनीर, पिज्जा ब्रेड और रोटी को Zero GST स्लैब में लाया जा सकता है. इसके अलावा पराठा भी शामिल हो सकता है, जिस पर 18% जीएसटी लागू है. कोको बेस्ड चॉकलेट, फ्लेक्स, पेस्ट्री से लेकर आइसक्रीम तक पर लागू जीएसटी स्लैब में बदलाव किया जा सकता है और ये 18% से कम करते हुए 5% हो सकता है.  GST Reforms में क्या-क्या बदलेगा? GST Reforms में होने वाले बदलावों को अगर कम शब्दों में बताए तो जीएसटी के तहत चार स्लैब कम होकर दो स्लैब रह जाएंगे। इसकी वजह से कई चीजों पर टैक्स कम हो जाएगा। ये टैक्स 10 फीसदी तक घट सकता है। वहीं कुछ वस्तु ऐसे भी होने वाले हैं, जिनमें कोई टैक्स नहीं देना होगा। अब उन वस्तुओं के बारे में बात करते हैं, जिनमें शून्य टैक्स लग सकता है। इसका मतलब है कि इन वस्तुओं के खरीद पर जल्द कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। GST Rate Cut किन वस्तुओं पर नहीं है कोई टैक्स? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार GST Reforms के बाद रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुओं पर शून्य टैक्स हो जाएगा। देश में बहुत जल्द जीएसटी के तहत चार टैक्स स्लैब की जगह अब दो टैक्स स्लैब ही रहने वाले हैं। अब 5% और 12% के दो टैक्स स्लैब होंगे। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जरूरी वस्तुएं जैसे पनीर, पिज्जा ब्रेड, खाखरा, चपाती और रोटी जैसी खाद्य वस्तुओं पर कोई टैक्स नहीं लगेगा या फिर 5 फीसदी टैक्स लगाया जा सकता है। ऐसे ही स्टेशनरी, चिकित्सा उपकरण और दवाइयों पर कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा या फिर 5 फीसदी टैक्स लिया जा सकता है। किस पर कितना टैक्स, क्या-क्या सस्ता? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी टैक्स स्लैब में कुछ इस तरह से बदलाव हो सकता है-     12 फीसदी टैक्स स्लैब वाले 99 फीसदी प्रोडक्ट 5 फीसदी वाली कैटेगरी आ जाएंगे।     28 फीसदी टैक्स स्लैब में आने वाली वस्तु 18 फीसदी टैक्स स्लैब में शामिल हो जाएंगे। इस तरह से 10 फीसदी तक टैक्स कम हो जाएगा। वहीं लग्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर 40 फीसदी टैक्स लगेगा। इसकी साथ ही पेट्रोलियम और सोने और हीरों जैसी वस्तु पर पहले जैसे ही टैक्स लगेगा। हालांकि सरकार की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। शिक्षा से जुड़े सामान भी हो सकते हैं जीएसटी फ्री   सरकार के पास शिक्षा से जुड़ी तमाम चीजों को भी जीएसटी से फ्री करने का भी प्रस्ताव है. काउंसिल की बैठक में  मानचित्र, वॉटर सर्वे चार्ट, एटलस, दीवार मानचित्रों, ग्लोब, मुद्रित शैक्षिक चार्ट, पेंसिल-शार्पनर के साथ ही प्रैक्टिस बुक, ग्राफ बुक और लैबोरेटरी नोटबुक को जीएसटी से छूट मिल सकती है, … Read more

सेमीकंडक्टर में भारत की बड़ी छलांग, 2047 से पहले बन सकता है ग्लोबल लीडर

नई दिल्ली भारत तेजी से घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है और मंगलवार को सेमीकॉन इंडिया 2025 में इंडस्ट्री लीडर्स ने कहा कि देश 2047 से पहले दुनिया का सेमीकंडक्टर पावरहाउस बन सकता है। सेमीकॉन इंडिया के साइडलाइन में समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए इंडस्ट्री लीडर्स ने कहा कि भारत की मजबूत प्रतिभा, सहायक नीतियां और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां इस परिवर्तन को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं। एसईएमआई (सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट एंड मटेरियल्स इंटरनेशनल) के सीईओ और प्रेसिडेंट ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तेज वृद्धि के रास्ते पर है। उन्होंने आईएएनएस से कहा, "अगर भारत की मौजूदा रफ्तार जारी रहती है, तो देश 2047 तक सेमीकंडक्टर का पावरहाउस बना सकता है।" चिप निर्माण में वैश्विक परस्पर निर्भरता के महत्व पर जोर देते हुए, मनोचा ने कहा कि भारत को वैल्यू चेन में अपना सही स्थान खोजना होगा, जिसकी शुरुआत असेंबली और परीक्षण से होगी, जबकि आने वाले वर्षों में बड़े वेफर फैब आने की उम्मीद है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण "भारत की सबसे छोटी चिप सबसे बड़ा बदलाव लाएगी" का भी समर्थन किया और बताया कि सेमीकंडक्टर अब आधुनिक जीवन का आधार हैं। मीडियाटेक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकु जैन ने कहा कि सेमीकॉन इंडिया 2025 देश के लिए एक मील का पत्थर है। इससे सेमीकंडक्टर क्षेत्र में देश को घरेलू स्तर पर क्षमताएं विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, "भारत में घरेलू स्तर पर बनी चिप्स 2025 के अंत तक बाजार में आ जाएंगी और 1.60 लाख करोड़ रुपए की वैल्यू के 10 फेब्रिकेशन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी गई है। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री विकसित करके भारत केवल एक इंडस्ट्री का निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि अरबों लोगों तक टेक्नोलॉजी को पहुंचा रहा है।" जैन ने कहा कि भारत एक तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। अधिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट टैलेंट का विशाल पूल, सपोर्टिव इकोसिस्टम, देश को मीडियाटेक के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बनाते हैं। गति शक्ति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनोज चौधरी ने कहा कि भारत अभी सेमीकंडक्टर निर्माण के शुरुआती चरण में है, लेकिन प्रगति तेजी से हो रही है। उन्होंने कहा, "अगले 10-20 वर्षों में, भारत वैश्विक स्तर पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाएगा। दुनिया की 20 प्रतिशत डिजाइन टैलेंट पहले से ही यहां मौजूद हैं और डीएलआई जैसी योजनाओं से मिलने वाले समर्थन के साथ, स्वदेशी चिप डिजाइन और निर्माण को काफी बढ़ावा मिलेगा।" एमर्सन के कंट्री हेड और डायरेक्टर शीतेंद्र भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार सही नीति बनाकर इंडस्ट्री को सपोर्ट कर रही है और स्थानीय कंपनियां इनोवेशन पर फोकस कर रही है। मुझे लगता है कि अगले 10 वर्षों में देश इनोवेशन में काफी आगे बढ़ सकता है। इससे आत्मनिर्भरता में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि देश के पास एक बड़ा बाजार है। हर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद में सेमीकंडक्टर का उपयोग होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद हर व्यक्ति की जरूरत है ऐसे में आने वाले समय में सेमीकंडक्टर सेक्टर देश की जीडीपी में बढ़ा योगदान देगा। कायन्स सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ रघु पैनिकर ने कहा कि यह इवेंट बहुत बड़ा मौका है। इससे उत्पादकों को इंडस्ट्री के लोगों से मिलने और अपना प्रोडक्ट दिखाने का अवसर मिलता है, जिससे विकास के नए अवसर खुलते हैं। उन्होंने आगे कहा कि देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का विकसित करने पर सरकार का फोकस होना बहुत अच्छा संकेत है, क्योंकि आज के समय में सीलिंग फैन से लेकर कार और रेलवे आदि में सेमीकंडक्टर का उपयोग हो रहा है। ऐसे में अगर इनका उत्पादन स्थानीय स्तर पर होता है तो प्रोडक्ट्स की लागत में कमी आएगी। डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के बिजनेस हेड- इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन एसबीपी डॉ. संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि आज के समय में हर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट में सेमीकंडक्टर का उपयोग किया जा रहा है। भारत भी एक बड़ा बाजार है। ऐसे में यह इंडस्ट्री 2047 तक विकसित भारत बनाने में काफी योगदान देगी। 

रेलवे की बड़ी खुशखबरी, जल्द शुरू होगी वंदे भारत की स्लीपर सर्विस

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे रेलयात्रियों को जल्द ही एक खास तोहफा देने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक रेलवे इसी महीने देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू कर सकता है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रेल से सफर करने वाले यात्री काफी समय से पहले वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में यह उनके एक बड़ी खुशखबरी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वंदे भारत ट्रेनों की तरह स्लीपर ट्रेनों के कोच को भी यात्रियों के आराम का ख्याल रखते हुए तैयार किया गया है। वहीं नवीनतम तकनीक पर ध्यान केंद्रित करते हुए, वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को लंबी और मध्यम दूरी की यात्राओं के लिए तैयार किया गया है। इसमें कई खास फीचर्स भी होंगे, जो अब तक किसी ट्रेन में देखने को नहीं मिले हैं। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की खासियतें वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अधिकतम 180 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ने में सक्षम होगी। वहीं इसमें कई वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी भी होंगी। इनमें यूएसबी चार्जिंग सुविधा के साथ, पब्लिक अकाउंसमेंट सिस्टम और इनसाइड डिस्प्ले पैनल, सीसीटीवी कैमरे और मॉड्यूलर पैंट्री शामिल हैं। वहीं दिव्यांग यात्रियों के लिए खास बर्थ और शौचालय की भी सुविधा होगी। इसके अलावा प्रथम श्रेणी एसी कोच में गर्म पानी से शॉवर की सुविधा भी मिलेगी। रेल मंत्री ने क्या बताया? पिछले महीने गुजरात के भावनगर में एक कार्यक्रम में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की थी कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द ही शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा था, "वंदे भारत स्लीपर बहुत जल्द, सितंबर में आ रही है।" इससे पहले 25 जुलाई, 2025 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में रेल मंत्री ने बताया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पहला रेक चालू होने वाला है। वैष्णव ने कहा था, "वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का पहला प्रोटोटाइप पहले ही तैयार हो चुका है। परीक्षणों और उससे प्राप्त अनुभव के आधार पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पहला रेक जेल ही शुरू होने वाला है।" हालांकि इन ट्रेनों के लॉन्च की तारीख अभी फाइनल नहीं हो पाई है। वहीं रूट को लेकर जानकारी भी सामने नहीं आई है। मार्ग पर अंतिम निर्णय रेलवे बोर्ड द्वारा लिया जाएगा।  

डोनाल्ड ट्रंप को दिखाई हकीकत! जर्मनी बोला- भारत के बिना अधूरी है दुनिया

बेंगलुरु ऐसे वक्त में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर टैरिफ ठोक रहे हैं, तो ठीक उसी वक्त जर्मनी ने दुनिया को दिखा दिया है कि भारत की ताकत और अहमियत को नज़रअंदाज़ करना असंभव है. जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल बेंगलुरु पहुंचे, जिससे भारत के साथ उनके दो दिवसीय आधिकारिक दौरे की शुरुआत हुई. विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार उनका यह दौरा 2 से 3 सितंबर तक चलेगा. भारत रवाना होने से पहले ही वाडेफुल ने भारत को ‘हिन्द-प्रशांत में एक अहम साझेदार’ बताया और कहा कि दोनों देशों के रिश्ते राजनीति, अर्थव्यवस्था और संस्कृति सभी स्तरों पर बेहद करीबी हैं. उन्होंने कहा, ‘सुरक्षा सहयोग से लेकर नवाचार (Innovation), प्रौद्योगिकी और कुशल श्रमिकों की भर्ती तक… हमारी रणनीतिक साझेदारी के विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं.’ जर्मन विदेश मंत्री ने बताई भारत आने की वजह वाडेफुल ने बेंगलुरु से अपने कार्यक्रम की शुरुआत की, जहां वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का दौरा करेंगे. इसके बाद वे दिल्ली जाएंगे, जहां 3 सितंबर को वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे. उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका पर जोर देते हुए कहा, ‘भारत की आवाज़, जो दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश और सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इंडो-पैसिफिक के रणनीतिक क्षेत्र से कहीं आगे तक सुनी जाती है. इसी कारण मैं यहां वार्ता के लिए आ रहा हूं.’ जर्मन मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और जर्मनी साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर खड़े हैं और आज की भूराजनीतिक चुनौतियों के दौर में दोनों देशों को मिलकर नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बचाना होगा. यूरोप में भारत का सबसे करीबी साझेदार जर्मनी यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब जर्मनी इंडो-पैसिफिक में आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने, तकनीकी साझेदारी बढ़ाने और भारत से कुशल श्रमिकों की भर्ती पर जोर दे रहा है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे करीबी साझेदार है. दोनों देशों के रिश्ते 1951 से हैं और 2021 में उन्होंने 70 साल पूरे किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ पिछले दो वर्षों में छह बार मिल चुके हैं, जो इस रिश्ते की गहराई को दर्शाता है. साफ है कि जब अमेरिका भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जर्मनी जैसे यूरोपीय दिग्गज देश दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि ‘भारत वैश्विक व्यवस्था के लिए अनिवार्य है और दिल्ली की ताकत को कोई नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता.’

Su-57 अब भारत में होगा मैन्युफैक्चर, अमेरिकी F-35 की डील पर मंडराया खतरा

नई दिल्ली चीन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्‍ट्रपत‍ि व्‍लाद‍िमीर पुत‍िन की मुलाकात देख अमेर‍िका परेशान हो ही रहा था क‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप की नींदें उड़ाने वाली एक और खबर आ गई. एक रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस अपने पांचवीं पीढ़ी के सबसे एडवांस्ड लड़ाकू विमान सुखोई Su-57 को भारत में बनाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है. यह कदम न केवल दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगा बल्कि अमेरिका के F-35 लड़ाकू विमान को भारत में बेचने की कोशिशों पर भी सीधा असर डालेगा. डोनाल्‍ड ट्रंप भारत को F-35 फाइटर जेट बेचा चाहते थे, उसी के ल‍िए जंग लड़ रहे थे, लेक‍िन अगर रूस ये फैसला ले लेता है तो उनके सपने चकनाचूर हो जाएंगे. भारतीय वायुसेना लंबे समय से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की जरूरत पर जोर देती रही है. सूत्रों के मुताबिक, भारत को फिलहाल कम से कम दो से तीन स्क्वॉड्रन एडवांस्ड फाइटर जेट्स की आवश्यकता है. इस रेस में एक ओर है रूस का Su-57 और दूसरी तरफ है अमेरिका का F-35.रूस ने साफ संदेश दिया है कि वह न केवल भारत को ये विमान बेचना चाहता है, बल्कि इन्हें यहीं भारत में बनाने के लिए तैयार है. इस परियोजना में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अहम भूमिका निभा सकती है, जो पहले से ही नासिक में Su-30 MKI का निर्माण करती है. निवेश और लागत पर मंथन रूसी एजेंसियां इस वक्त इस बात का आकलन कर रही हैं कि भारत में Su-57 का उत्पादन करने के लिए कितनी बड़ी निवेश राशि की जरूरत होगी. अगर यह प्रोजेक्ट शुरू होता है, तो इसका फायदा दोहरा होगा. भारत को दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान मिलेंगे. इन विमानों की लागत भी कम हो जाएगी, क्योंकि निर्माण यहीं पर होगा. भारत में पहले से कई फैक्ट्रियां हैं जो रूस के बनाए सैन्य उपकरण तैयार करती हैं. इन्हें Su-57 प्रोडक्शन के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. अमेरिका की टेंशन: F-35 पर ग्रहण ये खबर ऐसे वक्त आई है जब अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड वॉर जैसी स्थिति बनी हुई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर कई सेक्टरों में 50% तक का टैरिफ और रूसी तेल आयात का हवाला देते हुए अतिरिक्त 25% शुल्क लगाया है. अमेरिका लगातार भारत पर दबाव डाल रहा है कि वह F-35 खरीदे. लेकिन अगर भारत और रूस मिलकर Su-57 का निर्माण करने लगते हैं, तो यह ट्रंप की योजना पर पानी फेर देगा. यह साफ संकेत होगा कि भारत अपनी रक्षा ज़रूरतों में रूस के साथ गहरी साझेदारी रखता है. S-400, S-500 और अब Su-57 भारत ने हाल के वर्षों में रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा है और अब उसने S-500 में भी रुचि दिखाई है. रूस चाहता है कि इसके साथ ही भारत Su-57 को भी अपनी वायुसेना का हिस्सा बनाए. दिलचस्प बात यह है कि भारत पहले भी रूस के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट (FGFA) प्रोग्राम का हिस्सा रह चुका है. हालांकि, तकनीकी और वित्तीय मतभेदों के कारण भारत ने इस प्रोजेक्ट से दूरी बना ली थी. लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात और अमेरिका-भारत तनाव ने एक बार फिर इस प्रोजेक्ट को ज़िंदा कर दिया है. भारत का अपना फाइटर प्लान रूस के साथ यह संभावित डील ऐसे समय में चर्चा में है जब भारत खुद भी अपना स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी कर रहा है. इस विमान का पहला टेस्ट फ्लाइट 2028 तक होने की उम्मीद है और इसे 2035 तक वायुसेना में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है. इसका मतलब है कि अगले 10 साल भारत के लिए बेहद अहम हैं. तब तक उसे या तो किसी बड़े साझेदार की मदद से फिफ्थ जेनरेशन जेट्स की ज़रूरत पूरी करनी होगी या फिर वायुसेना में बड़ी कमी का सामना करना पड़ेगा. भारत के लिए बड़ा मौका     अगर Su-57 का उत्पादन भारत में होता है तो इसके कई फायदे होंगे.     भारत को मिलेंगे अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट्स.     रक्षा निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे.     भारत रूस के साथ रक्षा साझेदारी को और गहरा करेगा.     अमेरिका के दबाव और शर्तों से बचकर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगा.  

इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट लागू, अवैध घुसपैठियों पर सख्ती

नई दिल्ली भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और इमीग्रेशन मामलों को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स ऐक्ट, 2025 1 सितंबर से लागू हो गया है. गृह मंत्रालय ने सोमवार को इसका नोटिफिकेशन जारी किया. यह बिल संसद के बजट सत्र के दौरान पारित हुआ था और 4 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंज़ूरी दी थी. अब इसे एक कानून के रूप में लागू कर दिया गया है. गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नितेश कुमार व्यास द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है, "केंद्र सरकार इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स ऐक्ट, 2025 (13 ऑफ 2025) की धारा 1 की उपधारा (2) में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए 1 सितंबर 2025 को लागू होने की तिथि घोषित करती है." इस ऐक्ट के तहत भारत में प्रवेश करने, ठहरने या बाहर जाने के लिए नकली पासपोर्ट या वीजा का इस्तेमाल करने (यानी जालसाजी करने) वालों को अब 7 साल तक की जेल और अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. न्यूनतम सजा 2 साल और न्यूनतम जुर्माना 1 लाख रुपये तय किया गया है. अगर कोई विदेशी नागरिक बिना वैध पासपोर्ट या ट्रैवल डॉक्यूमेंट, जैसे बिना वीजा के भारत में प्रवेश करता है, तो उसे 5 साल तक की जेल या 5 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड मिल सकते हैं. ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन को नए अधिकार इस ऐक्ट ने ब्यूरो ऑफ़ इमीग्रेशन को और मज़बूत बनाया है. अब यह एजेंसी अवैध विदेशी नागरिकों को तुरंत डिपोर्ट कर सकेगी और राज्यों के साथ सीधा कोऑर्डिनेशन करेगी. इसी के साथ, होटल, यूनिवर्सिटी, अन्य एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, हॉस्पिटल और नर्सिंग होम को विदेशी नागरिकों से जुड़ी जानकारी समय-समय पर देना अनिवार्य कर दिया गया है. किसी भी संस्थान में अवैध विदेशी नागरिकों की आवाजाही पाए जाने पर उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा. एयरलाइंस और शिप कंपनियों पर भी सख्ती सभी इंटरनेशनल एयरलाइंस और शिप कंपनियों को भारत पहुंचने पर अपने पैसेंजर और क्रू का पूरा मैनिफेस्ट और एडवांस इन्फॉर्मेशन सिविल अथॉरिटी या इमीग्रेशन ऑफिसर को देना होगा. नया कानून लागू होने के बाद पुराने क़ानून को समाप्त कर दिया गया है. यह नया ऐक्ट विदेशी नागरिकों और इमीग्रेशन से जुड़े सभी मामलों को एक ही कानून के तहत लाता है. अलग-अलग चार कानून को किया गया समाप्त इससे पहले तक अलग-अलग चार कानून लागू थे, जिसमें पासपोर्ट (एंट्री इंटू इंडिया) ऐक्ट, 1920; रजिस्ट्रेशन ऑफ़ फॉरेनर्स ऐक्ट, 1939; फॉरेनर्स ऐक्ट, 1946 और इमीग्रेशन (कैरियर्स लाइबिलिटी) ऐक्ट, 2000 शामिल थे. अब ये सभी कानून समाप्त कर दिए गए हैं. गृह मंत्रालय का मानना है कि इस कानून से भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा और इमीग्रेशन व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा, साथ ही उन विदेशी नागरिकों पर सख्ती होगी जो नकली पासपोर्ट या वीज़ा की आड़ में देश में रह रहे थे.