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ट्रंप का भारत पर सख्त टैरिफ, रूसी तेल के अलावा ये हैं असली वजहें

नई दिल्ली भारत पर टैरिफ लगाने का सिर्फ एक ही कारण नहीं दिखाई दे रहा है, बल्कि इसके पीछे कई कारण हैं. डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत पर 25% टैरिफ लगा दिया है, जो 7 अगस्‍त से प्रभावी है. वहीं इस टैरिफ (Tariff on India) को बढ़ाकर 50 फीसदी करने की चेतावनी दे चुके हैं और यह भी कहा है कि यह 27 अगस्‍त तक भारत पर लागू कर दिया जाएगा, जिसके पीछे की वजह भारत द्वारा रूसी तेल खरीदना बताया जा रहा है.  डोनाल्‍ड टंप (Donald Trump) ने भारत के खिलाफ सख्‍त रुख अपनाते हुए अब यह तक कह दिया है कि जबतक टैरिफ को लेकर मसला नहीं सुलझ जाता है, तबतक कोई बातचीत नहीं होगी. अमेरिका का यह बयान ऐसे वक्‍त में आया है, जब अमेरिकी टीम व्‍यापार वार्ता के लिए भारत (India-US Trade Talk) आने वाली है. ऐसे में साफ नजर आ रहा है कि अमेरिका हर तरह से भारत पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, ताकि भारत दबाव में आकर US की शर्तों पर समझौता कर ले.  भारत से क्‍या चाहते हैं ट्रंप?  रूस का तेल तो ठीक है, लेकिन ट्रंप यह भी चाहते हैं कि भारत अमेरिकी कृषि उत्‍पाद और डेयरी प्रोडक्‍ट्स पर टैरिफ कम करे, ताकि भारत जैसे बड़े मार्केट में अमेरिका के इन प्रोडक्‍ट्स को एंट्री मिल सके. लेकिन भारत इन सेक्‍टर्स को ज्‍यादा प्राथमिकता देता है. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि अगर भारत इन सेक्‍टर्स को अमेरिका के लिए खोलता है तो किसानों की आय पर असर होगा, जिसे लेकर भारत समझौता नहीं करना चाहेगा.  वहीं अमेरिका एग्री, डेयरी प्रोडक्‍ट्स के लिए Tariff 100 फीसदी कम करने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा, अमेरिका यह भी चाहता है कि भारत रूसी तेल इम्‍पोर्ट को कम करे और अमेरिका से ज्‍यादा तेल का आयात करे. जबकि भारत को अमेरिका की तुलना में सस्‍ता तेल रूस से मिल रहा है.  डॉलर को लेकर क्‍यों परेशान हैं ट्रंप? अमेरिकी डॉलर दुनियाभर में इस्‍तेमाल की जाने वाली करेंसी है. बीते आठ दशक यानी 1944 से ही US Dollar का इस्‍तेमाल सभी देश व्‍यापार के लिए कर रहे हैं. दुनियाभर के सेंट्रल बैंक डॉलर का रिजर्व रखते हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो करीब 90 फीसदी विदेशी मुद्रा लेनदेन डॉलर में ही होती है. लेकिन ब्रिक्‍स देशों ने इसपर निर्भरता कम करने के लिए कदम उठाये, जिसे लेकर ट्रंप बौखलाए हुए हैं.  ट्रंप इसलिए भी ब्रिक्‍स देशों से डरे हुए हैं, क्‍योंकि इस संगठन के देश मिलकर वर्ल्‍ड इकोनॉमी में 35 फीसदी का योगदान देते हैं. ऐसे में अगर इन देशों ने अमेरिका और डॉलर का विरोध किया तो अमेरिका के सुपरपॉवर बने रहने का पोजिशन छिन सकता है. साथ ही डॉलर वर्ल्‍ड करेंसी से हट सकता है.  रूस से कितना तेल मंगाता है भारत?  साल 2022 से भारत ने रूसी तेल का आयात बढ़ाया है. भारत अभी रूस से हर दिन 1.7 से 2.2 मिलियन बैरल तक का रूसी तेल आयात करता है. भारत रूसी तेल का करीब 37 फीसदी हिस्‍सा आयात कर रहा है. वहीं सबसे ज्‍यादा चीन रूसी तेल खरीद रहा है. साल 2024 में भारत ने रूस से 4.1 लाख करोड़ रुपये का कच्‍चा तेल आयात किया है.  ट्रंप के टैरिफ वार के पीछे छिपे ये बड़े कारण, सिर्फ रूसी तेल नहीं जिम्मेदार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को लेकर एक और बड़ा बयान दिया है. एक  सवाल के जवाब में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक यह मुद्दा हल नहीं होता, तब तक भारत के साथ व्यापार वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी. समाचार एजेंसी एएनआई ने डोनाल्ड ट्रंप से पूछा, "भारत पर टैरिफ को लेकर आपने जो 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, क्या आप व्यापार वार्ताएं (Trade Negotiations) तेज होने की उम्मीद कर रहे हैं? इसका संक्षिप्त जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा, 'नहीं, जब तक हम इसे हल नहीं कर लेते, तब तक नहीं.' ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में टैरिफ को लेकर तनाव देखा जा रहा है. अमेरिका द्वारा एकतरफा 50% शुल्क लगाने से भारत चिंतित है, और दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय का बयान हालांकि अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रिंसिपल डिप्टी प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने एक सवाल के जवाब में कहा, "…जहां तक भारत की बात है, मैं इतना कह सकता हूं कि राष्ट्रपति की व्यापार असंतुलन को लेकर और रूसी तेल की खरीद को लेकर जो चिंताएं हैं, उस पर बहुत स्पष्ट रुख अपनाया है. आपने देखा है कि उन्होंने इस पर सीधे तौर पर कदम उठाए हैं… भारत एक रणनीतिक साझेदार है जिसके साथ हम पूरी और स्पष्ट बातचीत कर रहे हैं. यह बातचीत जारी रहेगी…" भारत पर लगाया 50 फीसदी टैरिफ आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया है. हालांकि, अभी 7 अगस्त से 25% का टैरिफ ही लागू हुआ है, जबकि अतिरिक्त 25% टैरिफ 27 अगस्त से प्रभावी होगा. इसके साथ ही, ट्रंप प्रशासन एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। वे चिप पर 100% टैरिफ लगाने का ऐलान करने वाले हैं, जिसका सीधा असर दुनियाभर के सेमीकंडक्टर उद्योग पर पड़ेगा. यह भारत के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि भारतीय सेमीकंडक्टर बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है.

मोदी सरकार का कदम – महंगाई कम करने के लिए दे सकती है LPG सब्सिडी का लाभ

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार आज शुक्रवार को LPG सब्सिडी को लेकर बड़ा फैसला ले सकती है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मोदी कैबिनेट एलपीजी के दामों को स्थिर बनाए रखने के लिए सरकारी तेल कंपनियों को करीब 30 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दे सकता है. आज शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट की होने वाली बैठक में इस पर फैसला होने की उम्मीद है. सरकार का यह है उद्देश्य मोदी सरकार का सरकारी तेल कंपनियों को सब्सिडी देने का मुख्य उद्देश्य मार्केट के दाम से कम कीमत पर रसोई गैस बेचने वाली कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई करना है. बता दें, यह राहत सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉपोरेशन को मिलेगा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में दामों के उतार-चढ़ाव के बीच भी ये सभी कंपनियां कस्टमर्स के लिए दाम यथावत रखती हैं. इससे जनता को काफी राहत मिलती है. जानिए क्यों मिल सकता है सब्सिडी का लाभ मोदी सरकार लगातार बढ़ते दामों के बीच भी जनता को राहत देने की तैयारी में है. अगर कंपनियों को सब्सिडी का लाभ मिलता है तो महंगाई का दबाव थोड़ा कम होगा. बता दें, अमेरिकी प्रशासन लगातार भारत पर टैरिफ बढ़ाता जा रहा है. उसका कहना है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करे. हर महीने कम होते हैं गैस के दाम सरकारी तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को LPG सिलेंडर के दामों को अपडेट करती हैं. बता दें, कंपनियों ने इस महीने के पहले दिन ही 14 किग्रा. वाले कमर्शियल गैस के दामों में कमी की थी. सरकारी तेल कंपनियों ने 33 रुपये 50 पैसे की कटौती की थी. वहीं, घरेलू गैस सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए हैं. 8 अप्रैल के बाद से इन दामों में कोई बदलाव नहीं हुए हैं. राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में कमर्शियल गैस के नए दाम 1631.50 रुपये हो गए हैं. मायानगरी मुंबई में यही सिलेंडर अब 1582.50 रुपये में उपलब्ध होगा. पहले इसकी कीमत करीब 1616 रुपये थी. कोलकाता की बात करें तो इसकी कीमत घटकर 1734.50 रुपये हो गई है. पहले यह 1769 रुपये में बिक रहा था. चेन्नई में कमर्शियल गैस का यही सिलेंडर 1789 रुपये में बेचा जाएगा. पहले यह 1823.50 रुपये में बिक रहा था.

ऑस्ट्रेलिया जा रहे हैं सभी! प्रधानमंत्री का क्या होगा? सामने आई चौंकाने वाली वजह

पर्थ अभी तक आपने किसी व्यक्ति के दूसरे देश में शिफ्ट होने के बारे में सुना होगा। लेकिन क्या कभी ऐसा सुना है कि पूरा एक देश ही दूसरे देश में शिफ्ट हो गया। ऐसा हो रहा है तुवालू में। तुवालू पैसिफिक ओशियन का एक छोटा सा देश है जो कि आइलैंड पर बसा है। यहां पर समुद्र का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके चलते पूरे देश को ऑस्ट्रेलिया में माइग्रेट किया जा रहा है। पूरी दुनिया में यह अपनी तरफ का पहला मामला है। तुवालू को लेकर बहुत सारी स्टडी हो चुकी हैं। इनमें सामने आया है कि अगले 25 साल में तुवालू पूरी तरह से पानी में डूब सकता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तुवालू के प्रधानमंत्री नए देश में क्या भूमिका निभाएंगे। इतनी है इस देश की आबादी तुवालू देश कुल मिलाकर नौ समुद्री द्वीपों से मिलकर बना है। इसकी आबादी 11 हजार के करीब है। समुद्र की सतह से अब इसकी ऊंचाई मात्र दो मीटर ही रह गई है। यानी समुद्र का जलस्तर अगर दो मीटर और ऊपर गया तो फिर यह पानी में समाना शुरू हो जाएगा। यहां पर बाढ़ और तूफान का खतरा हमेशा बना रहता है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि तुवालू के नौ में से दो द्वीप करीब-करीब पानी में समा चुके हैं। नासा के मुताबिक पिछले 30 साल में यहां पर समुद्र का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है। अगर पानी इसी तरह से बढ़ता रहा तो साल 2050 तक यह द्वीपीय देश पूरी तरह से डूब जाएगा। नागरिकों को मिलेंगे सभी अधिकार साल 2023 में तुवालू और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत हर साल 280 तुवालू नागरिकों को ऑस्ट्रेलिया में बसने की इजाजत मिली थी। इन नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा, घर और नौकरी के सभी अधिकार मिलेंगे। नागरिकों के पहले बैच को 16 से 18 जुलाई के बीच ऑस्ट्रेलिया ले जाया गया। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री पेनी वांग ने कहा कि इन नागरिकों को पूरे सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार मिलेगा। वहीं, तवालू के प्रधानमंत्री फेलेती तियो ने दुनिया भर से इस मामले पर ध्यान देने की मांग की है।

अमेरिका की आर्थिक पकड़ पर मंडराया खतरा, रूस-चीन-भारत बना सकते हैं नया फाइनेंशियल फ्रंट

नई दिल्‍ली  अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप इस समय भारत से अपनी व्‍यक्तिगत खुन्‍नस निकाल रहे हैं. तभी तो उन्‍होंने सारे देशों को छोड़ सिर्फ भारत पर ही 50 फीसदी का टैरिफ ठोक दिया है. ट्रंप के दायरे में भारत ही नहीं, रूस और चीन भी आ गए हैं. इसका मतलब है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति इस समय रूस, भारत और चीन पर एकसाथ हमलावर हो गए हैं. ऐसे में हर आदमी के मन में यही सवाल उठ रहा कि क्‍या ये तीनों देश मिलकर अमेरिका की दादागिरी खत्‍म कर सकते हैं. अमेरिका को सबसे ज्‍यादा लाभ ग्‍लोबल मार्केट में डॉलर में होने वाले ट्रेड से होता है. तो क्‍या, रूस-भारत और चीन मिलकर डॉलर का मुकाबला कर सकते हैं. इस बात का जवाब अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की झुंझलाहट से ही मिल जाता है. आपको याद होगा जब ब्रिक्‍स सम्‍मेलन के दौरान ट्रंप ने डॉलर का विकल्‍प बनाने को लेकर रूस, भारत और चीन को धमकी दी थी. ट्रंप ने कहा था कि अगर ब्रिक्‍स देश मिलकर डॉलर कमजोर करने की साजिश करते हैं तो इन देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगा दिया जाएगा. फिलहाल भारत ने ऐसी कोई कोशिश नहीं की और उस पर ट्रंप 50 फीसदी का टैरिफ लगा चुके हैं. जाहिर है कि उनके मन में इस बात को लेकर काफी डर है कि अगर तीनों देश साथ आ गए तो डॉलर को नुकसान हो सकता है. कैसे दे सकते हैं डॉलर को टक्‍कर अमेरिकी डॉलर को टक्‍कर देने के लिए भारत ने भले ही अभी तक कोई खास कदम न उठाया हो, लेकिन रूस और चीन लंबे समय से कोशिश कर रहे हैं. चीन ने अपने ज्‍यादातर साझेदारों से स्‍थानीय मुद्रा युआन में कारोबार बढ़ाना शुरू कर दिया है. रूस ने भी यूक्रेन युद्ध के बाद डॉलर में लेनदेन को काफी हद तक कम किया है और अपनी स्‍थानीय मुद्रा में कारोबार कर रहा है. वैसे तो भारत ने भी ईरान, रूस सहित कुछ देशों के साथ रुपये में लेनदेन किया है, लेकिन अभी तक ग्‍लोबल मार्केट में कोई उल्‍लेखनीय डील स्‍थानीय करेंसी में नहीं हुई. हां, अगर तीनों ही देश मिलकर अपनी-अपनी करेंसी में कारोबार शुरू करते हैं तो डॉलर को कड़ी टक्‍कर दी जा सकती है. क्‍या हो सकती है रणनीति अमेरिका को अपनी बादशाहत कायम रखने और कारोबार बढ़ाने के लिए बड़े बाजार की जरूरत है. यह बात पूरी दुनिया को पता है कि भारत और चीन दो सबसे बड़ी जनसंख्‍या यानी उपभोक्‍ता वाले देश हैं. यही दोनों देश दुनिया की फैक्‍ट्री भी हैं. चीन तो सबसे बड़ा उत्‍पादक देश है, जबकि भारत दुनिया की दूसरी फैक्‍ट्री बनने की राह पर है. इसका मतलब है कि यह दोनों देश न सिर्फ बड़े उत्‍पादक हैं, बल्कि सबसे बड़े उपभोक्‍ता वाले देश भी हैं. अगर रूस के साथ मिलकर ये तीनों देश अपनी मुद्रा में लेनदेन और कारोबार करते हैं तो निश्चित रूप से डॉलर को बड़ी चुनौती मिल सकती है. तीनों देशों में कितना कारोबार भारत, रूस और चीन का आपस में कुल व्‍यापार भी लगातार बढ़ता जा रहा है. वित्‍तवर्ष 2023-24 में रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय कारोबार 65 अरब डॉलर से ज्‍यादा रहा था, जबकि भारत और चीन का कारोबार 130 अरब डॉलर से अधिक रहा है. इसी तरह, रूस और चीन का कारोबार भी 200 अरब डॉलर से ज्‍यादा ही रहा. इस तरह, अगर तीनों देशों के बीच कुल कारोबार को देखा जाए तो यह करीब 390 अरब डॉलर के आसपास रहा है. इसके 400 अरब डॉलर से भी ज्‍यादा पहुंचने का अनुमान है. भारत-रूस और चीन का कितना ग्‍लोबल कारोबार भारत का कारोबार : पिछले वित्‍तवर्ष 2024-25 में भारत का कुल अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार करीब 1,830 अरब डॉलर (1.83 ट्रिलियन डॉलर के आसपास) रहा है. इसमें प्रोडक्‍ट का कारोबार करीब 1,300 अरब डॉलर और सेवाओं का आयात-निर्यात 500 अरब डालर से ज्‍यादा रहा है. चीन का कुल कारोबार : चीन ने पिछले वित्‍तवर्ष 3.59 ट्रिलियन डॉलर का सामान दुनियाभर में निर्यात किया और 2.56 ट्रिलियन डॉलर का सामान मंगाया. इस तरह, सामान का कुल कारोबार 6.15 ट्रिलियन डॉलर रहा, जबकि सेवाओं का कारोबार मिला दें तो यह आंकड़ा 7.56 ट्रिलियन डॉलर पहुंच जाता है. रूस का कितना कारोबार : पिछले वित्‍तवर्ष में रूस ने दुनियाभर को 424 अरब डॉलर का सामान बेचा और दुनिया से 304 अरब डॉलर का सामान खरीदा. यानी कुल कारोबार रहा 728 अरब डॉलर का. इसमें सेवाओं का कारोबार जोड़ दिया जाए तो यह 117 अरब डॉलर और बढ़कर करीब 865 अरब डॉलर पहुंच जाएगा. तीनों का कितना कारोबार : इस तरह रूस, चीन और भारत का कुल अंतरराष्‍ट्रीय कारोबार करीब 10 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्‍यादा का रहा है. अमेरिका का कितना ग्‍लोबल कारोबार साल 2024 में अमेरिका का कुल कारोबार करीब 7 ट्रिलियन डॉलर का रहा है. इसमें प्रोडक्‍ट के निर्यात का हिस्‍सा 2 ट्रिलियन डॉलर और आयात का हिस्‍सा 3.37 ट्रिलियन डॉलर रहा. इसका मतलब है माल का कुल कारोबार 5.43 ट्रिलियन डॉलर रहा, जबक‍ि सर्विस का निर्यात 928 अरब डॉलर और आयात 700 अरब डॉलर रहा. सर्विस का कुल कारोबार 1.63 ट्रिलियन डॉलर रहा है और कुल कारोबार 7 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया है. आंकड़ों में कौन आगे अगर तीनों ही देश अकेले-अकेले अमेरिका का मुकाबला करेंगे तो यह मुश्किल होगा, क्‍योंकि उसका कुल कारोबार चीन से भी ज्‍यादा है. लेकिन, अगर चीन-भारत और रूस मिलकर अमेरिका के सामने खड़े होते हैं तो यह आंकड़ा अमेरिका के कुल कारोबार से कहीं ज्‍यादा बैठता है. आंकड़े साफ बताते हैं कि अगर तीनों ही देश मिलकर अमेरिकी डॉलर के सामने खड़े होते हैं तो निश्चित रूप से इसका मुकाबला ग्‍लोबल मार्केट में कर सकते हैं.

रेलयात्रियों के लिए खुशखबरी: अंतिम समय में टिकट बुकिंग की सुविधा, जानें पूरा प्रोसेस

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने यात्रियों को एक कमाल का तोहफा दिया है। अगर आप वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रा करना चाहते हैं, तो ट्रेन के चलने से 15 मिनट पहले भी आप ऐप से टिकट बुक करा पाएंगे। इस सुविधा से उन लोगों को फायदा होगा जिनका आखिरी समय पर यात्रा करने का प्लान बनता है। यह सुविधा सिर्फ वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए पेश की गई है और फिलहाल इसमें दक्षिण रेलवे जोन की कुछ चुनी हुई ट्रेनों को ही शामिल किया गया है। कुछ समय में इसमें और जोन और ट्रेने जोड़ी जा सकती हैं। ऐप से टिकट बुक कराने के लिए आपको सिंपस से स्टेप्स को फॉलो करना होगा। क्यों पेश की गई सुविधा? भारतीय रेलवे ने इस सुविधा को उन यात्रियों के लिए पेश किया है जिन्हें अचानक यात्रा करने की जरूरत आन पड़ती है। ऐसे यात्रियों के पास भी आरामदायक यात्रा करने का ऑप्शन हो, इसके लिए इस सुविधा को पेश किया गया है। बता दें कि पूरे देश में फिलहाल 144 वंदे भारत एक्सप्रेस चल रही हैं। यह देश के मुख्य शहरों को तेज रफ्तार और आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ती हैं। अभी तक जब ट्रेन अपने शुरुआती स्टेशन से निकल जाती थी, तो बीच के स्टेशनों से चढ़ने वाले यात्री टिकट नहीं ले सकते थे, भले ही सीटें खाली क्यों न हों। इससे न सिर्फ सीटों के खाली रहते यात्रियों को टिकट नहीं मिल पाती थी, बल्कि रेलवे को भी खाली सीटों का नुकसान झेलना पड़ता था। क्या हुआ बदलाव? अब रेलवे ने इस नियम में बदलाव कर दिया है। बीच के स्टेशनों से चढ़ने वाले यात्री भी ट्रेन के रवाना होने से 15 मिनट पहले तक टिकट बुक कर सकते हैं। यह सुविधा ट्रेन की सीटों के बेहतर इस्तेमाल में भी मदद करेगी और यात्रियों को को भी बेहतर सुविधा मिल सकेगी। इस नई सुविधा का लाभ फिलहाल तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की वंदे भारत ट्रेनों में मिल रहा है। आने वाले समय में उम्मीद है कि इसे देशभर की अन्य वंदे भारत ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा। अब चलिए देर न करके हुए जल्दी से वह तरीका समझ लेते हैं जिससे आप 15 मिनट पहले भी टिकट बुक करवा पाएंगे। इस सुविधा से जुड़े FAQ’S     यह सुविधा फिलहाल सिर्फ साउदर्न रेलवे जोन की 8 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों पर ही उपलब्ध है। आने वाले समय में इसे दूसरे जोन में भी लागू किया जा सकता है।     15 मिनट पहले बुक होने वाली टिकट के दाम उतने ही होंगे, जिनते एक सामान्य टिकट के लगते हैं।     आप अगर चाहें, तो टिकट बुक करवाने के बाद कैंसिल भी कर पाएंगे। हालांकि रिफंड भारतीय रेलवे की रिफंड पॉलिसी के अनुसार मिलेगा।     15 मिनट पहले मिलने वाली टिकट को ऑफलाइन भी लिया जा सकता है।     फिलहाल यह सिर्फ कुछ चुनी हुई वंदे भारत ट्रेनों के लिए उपलब्ध है। बाकी ट्रेनों में इस सुविधा को लाने को लेकर कोई जानकारी नहीं है। 15 मिनट पहले IRCTC ऐप से वंदे भारत की टिकट ऐसे बुक करें?     स्टेप 1: IRCTC वेबसाइट या ऐप खोलें​     स्टेप 2: लॉग इन या नया अकाउंट बनाएं     स्टेप 3: यात्रा की जानकारी भरें और ट्रेन में से वंदे भारत एक्सप्रेस को चुनें     स्टेप 4: सीट की उपलब्धता जांचें     स्टेप 5: क्लास और बोर्डिंग स्टेशन चुनें     स्टेप 6: पेमेंट करें और टिकट पाएं

RBI की सख्ती से जन-धन खाताधारकों पर असर: जानिए तीन बड़े फैसलों का सीधा प्रभाव

नई दिल्ली 10 साल पहले जिन जन-धन खातों ने लाखों गरीबों को पहली बार बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा था, अब उन्हीं खातों की दोबारा जांच का वक्त आ गया है. RBI ने बड़ा कदम उठाते हुए बैंकों को निर्देश दिया है कि वे 1 जुलाई से 30 सितंबर तक ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष कैंप लगाएं, जहां जन-धन खातों का री-केवाईसी (KYC अपडेट) मुफ्त में किया जाएगा. इस निर्देश के पीछे दो प्रमुख उद्देश्य हैं पहला, बैंक खातों को धोखाधड़ी से सुरक्षित रखना, और दूसरा, यह सुनिश्चित करना कि 10 साल पहले खुले खाते अब भी वैध जानकारी से जुड़े हुए हैं. जन-धन योजना की शुरुआत 2014 में हुई थी, और कई खातों में उस समय केवल सीमित या बेसिक KYC डॉक्युमेंट्स लिए गए थे. RBI का कहना है कि जिन खातों की KYC वैधता अब समाप्त हो चुकी है, उन्हें री-केवाईसी कराना अनिवार्य होगा ताकि खाता सक्रिय रह सके. इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद बैंक उपभोक्ताओं को न केवल KYC अपडेट करने का मौका मिलेगा, बल्कि वे नए खाते खोलने, बीमा योजनाओं से जुड़ने और वित्तीय सेवाओं की जानकारी भी मुफ्त में प्राप्त कर सकेंगे. RBI ने मृत खाता धारकों के दावों से जुड़ी प्रक्रिया को भी नया रूप दिया है. अभी तक हर बैंक की अपनी प्रक्रिया थी, जिससे मृतक के परिवार को भारी कागज़ी कार्यवाही और देरी का सामना करना पड़ता था. अब RBI एक समान प्रक्रिया लागू करने जा रहा है, जिसमें सभी बैंकों को एक जैसी गाइडलाइंस, दस्तावेज़ और प्रक्रियाएं अपनानी होंगी. चाहे दावेदार नॉमिनी हो, कानूनी वारिस हो या परिवार का कोई सदस्य, अब दावा करना आसान और तेज़ हो जाएगा. सरकारी बॉन्ड में निवेश अब बिना क्लिक के, खुद-ब-खुद RBI ने रिटेल निवेशकों के लिए एक और बड़ा ऐलान किया है. अब ‘रिटेल डायरेक्ट पोर्टल’ पर एक नया ऑटो-बिडिंग फीचर शुरू किया गया है, जिससे लोग सरकारी बॉन्ड्स (T-बिल्स) में एक बार सेटिंग करके बार-बार निवेश कर सकेंगे. इस सुविधा से निवेशक फ्रेश इन्वेस्टमेंट्स और री-इन्वेस्टमेंट्स के लिए अपनी बोली स्वचालित रूप से सेट कर पाएंगे. इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि निवेश की निरंतरता भी बनी रहेगी — खासकर उन लोगों के लिए जो हर हफ्ते या महीने निवेश करना चाहते हैं. RBI के ये तीन फैसले इस ओर इशारा करते हैं कि भारत की वित्तीय व्यवस्था अब परिपक्वता की दिशा में अग्रसर है. जहां एक ओर ग्रामीण खातों की दोबारा जांच की जाएगी, वहीं दूसरी ओर मृतकों की जमा पूंजी उनके परिवार तक न्यायपूर्वक और पारदर्शिता के साथ पहुंचेगी. और सबसे बड़ी बात, अब आम आदमी भी सरकारी निवेशों में टेक्नोलॉजी की मदद से आसानी से भागीदारी कर सकेगा, वो भी बिना किसी झंझट के.

श्रद्धालुओं को बड़ी राहत! अमृतसर से कटड़ा के बीच चलेगी नई वंदे भारत ट्रेन

उधमपुर देश की सबसे तेज और सुविधाजनक रेल सेवाओं में शुमार वंदे भारत एक्सप्रेस अब एक और नए रूट पर दौड़ने जा रही है। श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा स्टेशन से अमृतसर स्टेशन के बीच नई वंदे भारत ट्रेन 11 अगस्त से नियमित रूप से दौड़ना शुरू होगा। 10 अगस्त को प्रधानमंत्री तीन वंदेभारत का उद्घाटन विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से करेंगे। इनमें कटड़ा-अमृतसर वंदेभारत, बेंगलुरु–बेलगावी वंदे भारत, अजनी(नागपुर)-पुणे वंदे भारत शामिल हैं। इस दौरान कटड़ा जम्मू और पठानकोट स्टेशन पर भव्य स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जानकारी के कटड़ा अमृतसर के बीच शुरू होने वाली वंदे भारत ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलेगी (मंगलवार को छोड़ कर) और इसका प्राइमरी मेंटेनेंस साहिबाबाद में होगा। ट्रेन के उद्घाटन की अधिसूचना रेलवे बोर्ड ने 5 अगस्त 2025 को जारी की है। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि उद्घाटन रन एक विशेष सेवा के रूप में होगा, जिसके बाद ट्रेन नियमित संचालन में आ जाएगी।   ट्रेन के नियमित रूप से चलने का समय उद्घाटन रन से अलग है। जानकारी के मुताबिक मुताबिक कटड़ा से अमृतसर के बीच चलने वाली आठ कोच वाली वंदे भारत ट्रेन(02406) को प्रधानमत्री वर्चुअल माध्यम से सुबह 10:50 बजे कटडा स्टेशन से हरी झंडी दिखा कर रवाना करेंगे। इसके लिए कटड़ा स्टेशन पर प्रस्तावित मुख्य उद्घाटन समारोह में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह, श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा के विधायक बलदेव सिंह, रियासी के विधायक कुलदीप राज दूबे, एसएसपी जीआरपी संजय कोतवाल और एसएसपी रियासी के शामिल होने की संभावना है। कटड़ा से रवाना होने के बाद ट्रेन दोपहर 12:15 बजे जम्मू तवी स्टेशन पहुंचेगी। जहां पर एक छोटा समारोह आयोजित कर 12:20 बजे इसे आगे रवाना किया जाएगा। जम्मू तवी स्टेशन पर होने वाले कार्यक्रम में जम्मू-पुंछ सांसद जुगल किशोर शर्मा, राज्यसभा सांसद गुलाम अली खटाना, विधायक विक्रम सिंह रंधावा, जम्मू पश्चिम विधायक अरविंद गुप्ता, पूर्वी जम्मू विधायक युद्धवीर सिंह सेठी, एसएसपी जम्मू जोगिंदर सिंह और एसएसपी जीआरपी जम्मू शैलेंद्र सिंह की उपस्थिति प्रस्तावित है। जहां से ट्रेन 13:50 बजे पठानकोट कैंट स्टेशन पहुंचेगी, वहां भी स्वागत समारोह के बाद इसे 13:55 बजे रवाना किया जाएगा। पठानकोट कैंट स्टेशन पर आयोजित स्वागत समारोह में गुरदासपुर के सांसद सुखविंदर सिंह रंधावा, पठानकोट विधायक अश्विनी शर्मा, पठानकोट नगर निगम के मेयर पन्ना लाल भाटिया, पूर्व विधायक दिनेश सिंह बब्बू, भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा, डीसी आदित्य उप्पल और एसएसपी डीएस ढिल्लों के उपस्थित रहने की संभावना है। 11 तारीख से चलने वाली वंदेभारत ट्रेन की दोनों दिशाओं की नियमित समय-सारिणी 26406 (कटड़ा से अमृतसर) स्टेशन आगमन प्रस्थान कटड़ा — 06:40 जम्मू तवी: 08:05 08:07 पठानकोट कैंट: 09:30 09:32 जालंधर सिटी: 11:03 11:05 व्यास: 11:28 11:30 अमृतसर: 12:20 — 26405 (अमृतसर से कटड़ा) स्टेशन आगमन प्रस्थान अमृतसर — 16:25 व्यास: 17:03 17:05 जालंधर सिटी: 17:33 17:35 पठानकोट कैंट: 19:03 19:05 जम्मू तवी: 20:28 20:30 कटड़ा: 22:00 — उधमपुर को स्टॉपेज नहीं मिलने से निराशा कटड़ा से अमृतसर की ओर चलने वाली इस नई वंदे भारत एक्सप्रेस में उधमपुर जैसे सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्टेशन को स्टापेज नहीं दिया गया है। जिससे उधमपुर के लोगों को इस नई ट्रेन का कोई फायदा नहीं मिलेगा उधमपुर रेलवे स्टेशन सेना की उत्तरी कमान, बीएसएफ, आईटीबीपी, शेर-ए-कश्मीर पुलिस अकादमी जैसे अहम सुरक्षा प्रतिष्ठान के अलावा जम्मू-कश्मीर के प्रवेशद्वार जैसा महत्व रखता है। यहां से बड़ी संख्या में व्यापारी अमृतसर और जालंधर की ओर नियमित यात्रा करते हैं, वहीं विद्यार्थियों और व्यास धाम के श्रद्धालुओं के लिए भी यह रूट बेहद महत्त्वपूर्ण है। रेलवे द्वारा जारी समयसारिणी में अगर उधमपुर को दो से पांच मिनट का स्टॉपेज दिया जाता, तो ट्रेन के कुल सफर में मुश्किल से उतनी ही देरी होती, लेकिन इसके बदले हजारों यात्रियों को सुविधा मिल सकती थी। ऐसे में अब उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में रेलवे मंत्रालय इस चूक को सुधारते हुए उधमपुर स्टेशन को भी इस सेवा से जोड़ेगा।

भारत आएंगे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, ट्रंप की चुनौती के बीच बढ़ेगी भारत-रूस की नजदीकी

नई दिल्ली अमेरिका से मची तनातनी के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आ रहे हैं. गुरुवार को मॉस्को में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के हवाले से बताया गया कि राष्ट्रपति पुतिन इस साल के अंत में भारत का दौरा करेंगे. रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे की खबर ऐसे वक्त में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल की खरीद से नाराज होकर भारत पर टैरिफ 50% तक बढ़ा दिया है. रूसी न्यूज एजेंसी इंटरफैक्स (Interfax) ने अजीत डोभाल के हवाले से पहले बताया था कि राष्ट्रपति पुतिन अगस्त के अंत में भारत का दौरा करेंगे. हालांकि, बाद में खबर में संशोधन करते हुए एजेंसी ने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन 2025 के अंत में भारत दौरे पर आएंगे. ट्रंप ने भारत पर लगाया है 50% टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर पहले 25% टैरिफ लगाया था. इसके कुछ दिनों बाद ही उन्होंने घोषणा की थी कि रूसी तेल की खरीद के संबंध में भारत पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ाई जाएगी. उन्होंने कहा था, 'भारत न केवल रूस से बड़ी मात्रा में तेल की खरीद कर रहा है बल्कि खरीदे गए तेल का एक बड़ा हिस्सा खुले बाजार में बेचकर भारी मुनाफा भी कमा रहा है. भारत को इस बात की परवाह नहीं है कि यूक्रेन में रूस की वॉर मशीन कितने लोगों को मार रही है. इसे देखते हुए मैं भारत पर टैरिफ बढ़ाने जा रहा हूं.'  ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की जिससे कुल टैरिफ बढ़कर 50% हो गया है. भारत पर यह 50% टैरिफ ट्रंप का कार्यकारी आदेश जारी होने के 21 दिन बाद से लागू होगा. ट्रंप के 50% टैरिफ पर भारत ने क्या कहा? ट्रंप के अतिरिक्त टैरिफ को भारत के विदेश मंत्रालय ने तर्कहीन बताया है. मंत्रालय ने कहा, 'यह कार्रवाई अनुचित, बेवजह और तर्कहीन है.' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा गया, 'हाल के दिनों में अमेरिका ने रूस से भारत के तेल आयात को निशाना बनाया है. हम इन मुद्दों पर पहले ही अपना रुख साफ कर चुके हैं जिसमें यह फैक्ट भी शामिल है कि हमारा आयात बाजार के हालातों पर आधारित है. और इसका मकसद भारत की 140 करोड़ आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है.' 

चीन में पीएम मोदी की एंट्री के मायने, 7 साल बाद होगा ऐतिहासिक SCO शिखर संवाद

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त को चीन के तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जाएंगे। यह सात साल में उनकी पहली चीन यात्रा होगी। इस यात्रा को भारत-चीन संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है, खासकर 2020 में लद्दाख में दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव खत्म होने के बाद। सूत्रों के मुताबिक, मोदी इस यात्रा के साथ जापान भी जाएंगे, जहां वे जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी ने आखिरी बार 2018 में चीन का दौरा किया था, जब वे वुहान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक बैठक और किंगदाओ में एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे। 2020 में लद्दाख के गलवान घाटी में हिंसक झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्ते बहुत खराब हो गए थे। हाल ही में 21 अक्टूबर 2024 को दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव खत्म करने पर सहमति बनी, जिसके बाद रूस के कजान में मोदी और शी की मुलाकात हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने रिश्तों को सामान्य करने और सीमा विवाद पर बातचीत के लिए कई तंत्रों को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई। द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना पीएम मोदी की इस यात्रा में शी जिनपिंग के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना है। इस मुलाकात में सीमा पर तनाव कम करने, डायरेक्ट उड़ानों की बहाली, बॉर्डर व्यापार शुरू करने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हाल के महीनों में दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच कई बैठकें हुई हैं। इसके अलावा, कैलाश मानसरोवर यात्रा और चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा जैसे कुछ भरोसा बढ़ाने वाले कदम भी उठाए गए हैं। चीन की कुछ गतिविधियों पर चिंता हालांकि, भारत को अभी भी चीन की कुछ गतिविधियों पर चिंता है, जैसे ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर बांध बनाने की शुरुआत और भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पाकिस्तान को चीन का समर्थन। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जुलाई में बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात में इन मुद्दों को उठाया था। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों को रिश्तों को बेहतर करने के लिए सीमा पर तनाव कम करने और व्यापार में रुकावटों को दूर करने की जरूरत है। इससे भारत के लिए क्या बदलेगा, क्या बढ़ेगा ट्रंप पर दबाव? उनकी यह यात्रा वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान की यात्रा के साथ होगी. यदि यह यात्रा होती है तो यह 2018 के बाद और पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध के बाद पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने अक्टूबर 2024 में कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. अक्टूबर 2019 के बाद से उनकी पहली सुनियोजित बैठक भी भारत और चीन द्वारा अपनी विवादित सीमा पर गश्त करने के समझौते पर पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद हुई थी. शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन 10 देशों का यूरेशियन सुरक्षा और राजनीतिक समूह है. चीन, रूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस इसके सदस्य हैं. अक्टूबर 2024 में कजान में मिले थे मोदी- जिनपिंग अक्टूबर 2024 की बैठक के दौरान पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति से कहा था कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए. बैठक में उन्होंने कहा, “यह पांच वर्षों के बाद हमारी पहली औपचारिक बैठक है. हम सीमा पर हुए समझौतों का स्वागत करते हैं. सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए. आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता हमारे संबंधों का आधार बने रहने चाहिए. मुझे विश्वास है कि हम खुले दिल से बातचीत करेंगे और हमारी चर्चाएं रचनात्मक होंगी.” इस बीच शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन के लिए अधिक संवाद और सहयोग करना मतभेदों और असहमतियों को उचित ढंग से संभालना महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वे अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी निभाएं तथा विकासशील देशों की ताकत और एकता को बढ़ावा देने के लिए एक उदाहरण स्थापित करें. जून में बनी थी वार्ता के लिए सहमति इस वर्ष जून माह के प्रारंभ में,भारत और चीन ने ट्रेड और इकनॉमिक्स के क्षेत्र में चिंता के विशिष्ट मुद्दों को हल करने के लिए वार्ता करने पर सहमति व्यक्त की थी. क्योंकि वे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के लद्दाख क्षेत्र में सैन्य गतिरोध की समाप्ति के बाद द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और पुनर्निर्माण करने के लिए काम कर रहे थे. यह निर्णय विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीनी उप विदेश मंत्री सुन वेइदोंग के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद लिया गया. दोनों पक्षों ने सीधी हवाई सेवाओं को फिर से शुरू करने के प्रयासों में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की, जो 2020 से निलंबित हैं. इस वर्ष कैसे रहे भारत-चीन संबंध जून में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक की संयुक्त विज्ञप्ति पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था. क्योंकि इसमें आतंकवाद से संबंधित चिंताओं का उल्लेख नहीं किया गया था. एचटी की रिपोर्ट के अनुसार राजनाथ सिंह ने चीन के किंगदाओ में बैठक में भाग लिया, लेकिन उन्होंने संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए. क्योंकि इसमें 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख नहीं था. लेकिन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस अपहरण का उल्लेख था. ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत के साथ चार दिनों तक चले संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान का पुरजोर समर्थन किया था. चीन ने काफी दिनों बाद पहलगाम हमले की निंदा की हालांकि जब अमेरिका ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लेने वाले लश्कर-ए-तैयबा के प्रतिनिधि संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) घोषित किया तो चीन ने 22 अप्रैल के हमले की निंदा की. चीन ने आतंकवाद से निपटने तथा स्थिरता बनाए रखने के लिए मजबूत क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, “चीन सभी प्रकार के आतंकवाद का दृढ़ता से विरोध करता है और 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता है. चीन क्षेत्रीय देशों से आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ाने … Read more

एनडीए बैठक में उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर मंथन, जल्द तय होगा उम्मीदवार का नाम

नई दिल्ली  उपराष्ट्रपति के चुनाव को लेकर गुरुवार को एनडीए दल के नेताओं की बैठक आयोजित की गई। संसदीय दल की इस बैठक में सर्वसम्मति से पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को उम्मीदवार तय करने के लिए अधिकृत किया गया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक एवं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बैठक के बाद यह जानकारी साझा की। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने के बाद से यह पद खाली है। चुनाव आयोग ने हाल ही नोटिफिकेशन जारी कर इस पद के लिए चुनाव कराए जाने की तारीख तय की थी। इसके लिए नामांकन शुरु हो गए है और 9 सितंबर को वोटिंग और काउंटिंग की जाएगी। एनडीए सर्वसम्मति से पीएम के निर्णय का समर्थन करेगा अल्पसंख्यक मंत्री ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि, बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्‌डा को उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और उम्मीदवार के नाम को अंतिम रूप देने के लिए अधिकृत किया गया। पीएम के नेतृत्व में लिए गए किसी भी निर्णय का एनडीए सर्वसम्मति से समर्थन करेगा।   राहुल गांधी को लेकर कही यह बात इसी दौरान रिजिजू ने राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, कई बार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण हो चुके हैं। राहुल गांधी महाराष्ट्र में चुनाव हार गए, इसलिए चुनाव आयोग की छवि को खराब करना चाहते हैं। उन्होंने पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की छवि खराब करने की कोशिश की और सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाया कि वह तय नहीं कर सकते हैं कि कौन भारतीय है। इसके बाद आज वह चुनाव आयोग की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर आप चुनाव आयोग या सुप्रीम कोर्ट पर हमला कर रहे हैं तो सीधे-सीधे लोकतंत्र पर हमला कर रहे हैं।