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पति और बेटी की हत्या, ब्लैक मैजिक के शक में महिला ने किया कत्लेआम

तेलंगाना  पत्नी के अवैध संबंधों की खातिर पति की बली चढ़ गई। इंदौर की सोनम रघुवंशी, मेरठ की मुस्कान रस्तोगी, तुमकुरु की सुमंगला जैसे कई नामों ने इस तरह के अपराध की खबरों को आम बना दिया है। अब तेलंगाना के भूपलपल्ली से ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां के कविता नाम की महिला ने ना सिर्फ अपने पति की हत्या करा दी, बल्कि आशिक के साथ मिलकर बेटी को भी मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद दोनों ने काले जादू का षड्यंत्र रचा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 45 साल की के कविता और उसके आशिक जे राजकुमार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों पर 22 साल की वार्षिनी की हत्या के आरोप हैं। वार्षिनी, कविता की बेटी थी। जयशंकर भूपलपल्ली एसपी किरन खरे का कहना है कि वार्षिनी 3 अगस्त से घर से गायब थी और उसकी मां ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ समय बाद वार्षिनी की लाश मेदिपल्ली जंगल में मिली थी। उस समय जांच कर रहे काताराम डीएपी ए सूर्य नारायण को शव के पास आधार कार्ड, हल्दी और सिंदूर मिला था। इसके चलते पुलिस को काले जादू का शक हुआ। खबर है कि राजकुमार सोशल मीडिया के जरिए काला जादू सीखता था। आरोपी ने जंगल में पड़ी लाश पर हल्दी और सिंदूर छिड़क दिया था। साथ ही उसने शव के आसपास नींबू रख दिए और पास ही जमीन में कई कीलें ठोक दी थी। पुलिस का कहना है कि कविता का पति 50 वर्षीय कुमारास्वामी बीमार रहता था। तब उसने प्रेमी राजकुमार के साथ मिलकर मारने की साजिश रची थी। 6 जून को आरोपी ने कुमारास्वामी का गला दबा दिया और मौत की वजह बीमारी बताकर मामले को रफा दफा कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, इस बात का शक वार्षिनी को हो गया था। इसके चलते ही दोनों मिलकर 22 साल की बेटी की हत्या की भी योजना बनाई थी। 3 अगस्त को मिलकर दोनों ने उसे मौत के घाट उतार दिया और पुलिस को गुमराह करने के मकसद से आसपास काले जादू जैसा सामान रख दिया।  

HC का फैसला पलटा, SC/ST एक्ट में जमानत अब केवल खास परिस्थितियों में मिलेगी

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाल ही में एक फैसला सुनाते हुए कहा है कि दलितों के खिलाफ उत्पीड़न से जुड़े मामले यानी SC/ST एक्ट 1989 के तहत दर्ज मामलों में किसी भी आरोपी को अग्रिम जमानत तभी दी जा सकती है, जब स्पष्ट रूप से यह साबित हो कि आरोपी के खिलाफ प्रथम द्रष्टया कोई मामला न बनता हो। यानी पहली नजर में ही यह तथ्य साबित हो जाए कि आरोपी ने दलित समुदाय के प्रति कोई हिंसा नहीं की है। CJI बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मंगलवार को इस बात पर जोर दिया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से लाया गया था और यह आरोपी को गिरफ्तारी से पूर्व जमानत देने पर रोक लगाता है। इसके साथ ही पीठ ने जातिगत अत्याचार के आरोपों का सामना कर रहे एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने संबंधी बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। SC/ST एक्ट की धारा 18 का उल्लेख पीठ ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 18 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रावधान स्पष्ट रूप से दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 438 (अग्रिम जमानत देने संबंधी) को लागू नहीं करने के बारे में है और इसे धारा के तहत दायर आवेदनों को सुनवाई से बाहर करने का प्रावधान करता है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान के साथ ही SC/ST एक्ट की धारा 18 आरोपी को अग्रिम जमानत देने पर रोक लगाती है। हालांकि, पीठ ने ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देने के लिए स्पष्ट रेखा खींचते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 के तहत अगर प्रथम द्रष्टया यह साबित होता है कि आरोपी ने इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं किया है तो अदालत आरोपी को CRPC की धारा 438 के तहत दायर आवेदनों पर विचार करते हुए अग्रिम जमानत देने का विवेकाधिकार रखता है। अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जानी चाहिए बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा, "अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 की धारा 18 स्पष्ट भाषा के साथ सीआरपीसी की धारा 438 के तहत दायर आवेदनों को खारिज करती है और SC/ST समुदाय के लोगों के प्रति अपराध करने के आरोपियों को अग्रिम जमानत देने पर प्रतिबंध लगाता है।" पीठ ने कहा कि ऐसे आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जानी चाहिए। पीठ ने कहा, ‘‘यह कानून अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उपायों को लागू करने के उद्देश्य से लागू किया गया था।’’ क्या है मामला? पीठ ने शिकायतकर्ता किरण द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट के 29 अप्रैल के आदेश के विरुद्ध दायर अपील को स्वीकार करते हुए आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दिया। यह मामला 2024 में हुए विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जब महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में चुनाव के बाद हुई झड़प में एक दलित परिवार पर हमला किया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने हमले के दौरान जातिसूचक गालियां गदी थीं। नवंबर 2024 में दर्ज प्राथमिकी में धाराशिव जिले के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपी राजकुमार जीवराज जैन हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां मामले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी गई थी। हाई कोर्ट का आदेश पलटा शिकायत के अनुसार, 25 नवंबर 2024 को जैन और अन्य ने कथित तौर पर किरण के घर के बाहर उसके साथ बहस की और उसे और उसके परिवार पर लोहे के रॉड से हमला किया था और इस दौरान जातिसूचक गालियां दीं थीं। दलित परिवार पर आरोप था कि उन लोगों ने जैन के पसंदीदा उम्मीदवारों को वोट नहीं दिए थे। हाई कोर्ट के पैसले के खिलाफ किरण ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि पीड़ित को अपमानजनक शब्द कहना और जातिसूचक गालियां देना स्पष्ट रूप से SC/ST एक्ट का उल्लंघन है।  

डोनाल्ड ट्रंप ने किया बड़ा संकेत, किस और नोबेल पर खुलासा

वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि जल्दी ही यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग थम सकती है। उन्होंने सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि मैं सब कुछ देख रहा हूं। अब इस इन पर नजर थी। इसके बारे में राष्ट्रपति पुतिन और जेलेंस्की से बात चल रही है। उन्होंने कहा कि कुछ होने वाला है, लेकिन वे लोग इसके लिए तैयार नहीं हैं। लेकिन फिर भी कुछ होगा और हम ऐसा करने जा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रूस ने यू्क्रेन पर हमले तेज कर दिए हैं। इन हमलों में 15 लोग मारे गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर दिए इंटरव्यू में कहा कि मुझे लगता था कि रूस आसानी से मान जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब लगता है कि कुछ होने ही वाला है। यही नहीं डोनाल्ड ट्रंप ने चीन में विक्ट्री परेड में व्लादिमीर पुतिन के हिस्सा लेने पर भी टिप्पणी की। ट्रंप ने कहा कि मुझे पता था कि ऐसा होगा और पुतिन एवं जिनपिंग के साथ किम जोंग उन भी रहेंगे। ट्रंप ने तिकड़ी पर तंज कसते हुए कहा कि मुझे पता है कि वे लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। उन्हें लगा होगा कि मैं देख रहा हूं और यह सच है। अमेरिकी नेता ने कहा कि मेरे इन सभी लोगों के साथ अच्छे संबंध हैं। अगले एक से दो सप्ताह में आपको पता चल जाएगा कि ये कितने अच्छे हैं। अपनी ही तारीफ करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मैं धैर्य रखना जानता हूं। मैं सामने वाले को चांस देता हूं कि वह आए और टेबल पर बात की जाए। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से क्रेडिट लिया और कहा कि मैंने दुनिया में 6 से 7 युद्ध रुकवा दिए हैं। मैं नोबेल प्राइज के लिए डिजर्व करता हूं। इन जंगों के बारे में बताता हुए वाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि शायद डोनाल्ड ट्रंप इजरायल-ईरान, रवांडा-कांगो, अर्मेनिया-अजरबैजान, थाइलैंड-कंबोडिया, भारत-पाकिस्तान, मिस्र-इथियोपिया और सर्बिया-कोसोवो के बारे में बात कर रहे हैं। उन्होंने युद्ध रुकवाने के क्रेडिट लेते हुए कहा कि ये सारे देश आपस में लड़ रहे थे। इन लोगों के लिए जंग ही एक रास्ता बन गया था और शांति की बात भी भूल चुके थे। लेकिन मैंने जब दखल दिया और कहा कि अब बहुत हो चुका है। आप लोगों ने बहुत सी जानें ले ली हैं तो फिर जंग थमी और इन देशों को युद्ध से हटाने में सफल रहा। इस बार उन्होंने दिलचस्प तरीके से यह जरूर कहा कि मैं नोबेल पुरस्कार नहीं मांग रहा। इस साल के नोबेल सम्मान विजेताओं के नाम अगले महीने घोषित होने वाले हैं। ट्रंप ने कहा कि मैं तो सिर्फ युद्धों को रुकवाना चाहता हूं। मुझे दुनिया का अटेंशन पाने की कोई चाहत नहीं है।  

अमेरिका में 250 सालों के इतिहास में पहली बार आबादी में गिरावट आने वाली है, ट्रंप पॉलिसी से लगेगा एक और झटका

वॉशिंगटन  अमेरिका में 250 सालों के इतिहास में पहली बार आबादी में गिरावट आने वाली है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रवासियों के आने में कमी आई है। यही नहीं देश में प्रवासियों की संख्या 5,25,000 कम होनी है। एक तरफ यह गिरावट आएगी तो वहीं अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों का आंकड़ा 5 लाख 19 हजार रहने का अनुमान है। इस तरह अमेरिका की आबादी में कुल 6000 लोगों की कमी इस साल दर्ज की जाएगी। अमेरिकन इंटरप्राइजेज इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में सिविल वॉर के दौरान 7 लाख लोग मारे गए थे। तब भी आबादी में गिरावट नहीं आई थी। कोरोना काल में भी अमेरिका की आबादी निगेटिव में नहीं गई थी। इसलिए यह ऐतिहासिक होगा कि अमेरिका की आबादी में इस साल गिरावट दर्ज होगी। आबादी में इस कमी की वजह अमेरिका की घटती जन्मदर भी है। बीते करीब 30 सालों से अमेरिका की औसत जन्मदर 1.6 ही बनी हुई है, जबकि रिप्लेसमेंट लेवल के लिए भी 2.1 जरूरी मानी गई है। इस तरह अमेरिका में परिवार लगातार छोटे हो रहे हैं और बच्चे पैदा करने में लोगों की रुचि कम हो रही है। इंस्टिट्यूट फॉर फैमिली स्टडीज के अनुसार अमेरिका में हर सप्ताह सेक्स करने वाले महिला और पुरुषों की संख्या 37 फीसदी ही है, जबकि 1990 में यह औसत 55 पर्सेंट था। बता दें कि अमेरिका में पहले ही प्रवासियों की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है। आने वालों का आंकड़ा कम हुआ है तो वहीं निकलने वाले बढ़ गए हैं। इस साल के शुरुआत 6 महीनों में ही 14 लाख प्रवासियों ने अमेरिका छोड़ दिया है। अमेरिका के गृह विभाग का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद से 16 लाख माइग्रेंट अमेरिका छोड़ चुके हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीतियां प्रवासियों को अमेरिका आने से हतोत्साहित करने वाली हैं। यही नहीं अवैध रूप से अमेरिका में आने के नाम पर प्रशासन ने 3,59,000 लोगों को अरेस्ट किया है। इनमें से 3 लाख 32 हजार लोगों को डिपोर्ट किया गया है। यह आंकड़ा डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के शुरुआती 200 दिनों का है। हालांकि दिलचस्प तथ्य यह है कि प्रवासियों की संख्या कम होने के बाद भी देश में 15 फीसदी आबादी ऐसे लोगों की है, जो किसी और मुल्क में पैदा हुए हैं और अब अमेरिका में हैं। जानकारों का मानना है कि आबादी में कमी और खासतौर पर प्रवासियों की घटती संख्या के चलते वर्कफोर्स का संकट भी पैदा हो सकता है।  

तुलकु पाल्डेन वांग्याल की दुखद मृत्यु, चीनी हिरासत में बिताई अंतिम घड़ियां

नई दिल्ली चोएग्याल मठों के प्रमुख लामा तुलकु पाल्डेन वांग्याल की कथित तौर पर कई वर्षों के कारावास और गंभीर दुर्व्यवहार के बाद 53 वर्ष की आयु में जेल में मृत्यु हो गई। बताया गया कि उन्हें पहले गोंजो काउंटी जेल में रखा गया, फिर चामडो और बाद में ल्हासा स्थानांतरित किया गया, जहां उन्हें अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें निरंतर यातनाएं सहनी पड़ीं और उनकी रिहाई की अपीलों को अनसुना कर दिया गया। 2025 में उन्हें गांसु प्रांत ले जाया गया, जहां यातनाएं जारी रही। 19 जुलाई को हिरासत में उनकी मृत्यु हो गई। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) ने उनकी मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया और इसे बीजिंग द्वारा तिब्बती धार्मिक हस्तियों के व्यवस्थित दमन और बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित करने का स्पष्ट उदाहरण बताया। सीटीए के अनुसार, सम्मानित धार्मिक नेता तुलकु पाल्डेन वांग्याल ने अपना जीवन तिब्बती लोगों की सेवा में समर्पित किया। उन्होंने तिब्बती संस्कृति के संरक्षण की वकालत की, समुदाय में एकता पर जोर दिया और तिब्बती पहचान के प्रति निष्ठा को प्रोत्साहित किया। लेकिन इन गतिविधियों ने चीनी अधिकारियों को संदेहास्पद बना दिया, जिसके कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और करीब आठ वर्षों तक जेल में रखा गया। सीटीए ने जोर देकर कहा कि उनकी मृत्यु तिब्बत में व्याप्त संकट को उजागर करती है, जहां धार्मिक स्वतंत्रता, आवागमन की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कठोर प्रतिबंध हैं। तिब्बती निर्वासित सरकार ने कहा कि तुलकु पाल्डेन वांग्याल के साथ चीन का व्यवहार सांस्कृतिक संरक्षण और आध्यात्मिक नेतृत्व की आवाज को दबाने की जानबूझकर नीति को दर्शाता है। सीटीए ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उनके साथ हुए अन्याय को मान्यता देने और तिब्बत में जारी उल्लंघनों के लिए चीन को जवाबदेह ठहराने की अपील की। सीटीए ने कहा कि तिब्बतियों के लिए, तुलकु पाल्डेन वांग्याल का निधन न केवल एक सम्मानित लामा की क्षति है, बल्कि उत्पीड़न के खिलाफ निरंतर संघर्ष की दुखद याद भी है।  

शिवसेना के MP ने उठाई मुंबई प्रदर्शन रोक की मांग, राउत ने शिंदे को लिया आड़े हाथ

मुंबई महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अगुवाई वाली शिवसेना के सांसद मिलिंद देवड़ा ने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर दक्षिण मुंबई में विरोध-प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया है और कहा है कि इस इलाके में, जहां वित्तीय/व्यावसायिक केंद्र और सरकारी कार्यालय स्थित हैं, वहां विरोध-प्रदर्शनों से कामकाज बाधित होता है। मिलिंद देवड़ा की यह मांग और चिट्ठी ऐसे वक्त में आई है, जब कुछ दिनों पहले ही ओबीसी आरक्षण की मांग पर मनोज जरांगे की अगुवाई में मराठा आंदलनकारियों के प्रदर्शन की वजह से मुंबई की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी चिट्ठी साझा करते हुए देवड़ा ने लिखा है, "हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर, जिसने मुंबई को लगभग ठप कर दिया है, मैंने मुख्यमंत्री@Dev_Fadnavis जी को पत्र लिखा है।" उन्होंने आगे लिखा है, “हालांकि, प्रत्येक भारतीय को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) यह सुनिश्चित करे कि महाराष्ट्र का राजनीतिक और आर्थिक केंद्र ठप न हो।” संजय राउत शिंदे पर भड़के दूसरी तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया है कि उन्हें जानकारी है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मुंबई में मराठा आंदोलन और उनके विरोध-प्रदर्शनों की व्यवस्था करने में शामिल थे। राउत ने मिलिंद देवड़ा की चिट्ठी साझा करते हुए एक्स पर मराठी में लिखा, “अमित शाह द्वारा प्रायोजित शिंदे गुट का असली चेहरा यही है; न्याय की मांग के लिए एकजुट हो रहे मराठी लोगों पर इनके पेट का दर्द उजागर हो गया है। शिंदे गुट के सांसद मिलिंद देवड़ा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मुंबई में मराठी लोगों के आंदोलन की अनुमति न देने की मांग की है। बालासाहेब की तस्वीर का इस्तेमाल बंद करो!” पांच दिनों तक मुंबई में जनजीवन रहा बाधित बता दें कि मराठा नेता मनोज जरांगे-पाटिल के नेतृत्व में मराठा समुदाय के लिए शिक्षा एवं नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग को हुए विरोध प्रदर्शन से शहर के कई हिस्सों में दैनिक जनजीवन बाधित हो गया था। बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन (बेस्ट) उपक्रम ने विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर अपना परिचालन कुछ दिनों तक रोक दिया था। हालांकि, अब शहर में स्थिति सामान्य सी हो गई है। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) से भी बस सेवाएं पुनः शुरू कर दी गई हैं।  

देश के टॉप एजुकेशन संस्थान: IIT मद्रास, AIIMS और हिंदू कॉलेजों ने मारी बाज़ी

नई दिल्ली  शिक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को देश के टॉप कॉलेजों की लिस्ट NIRF 2025 रैंकिंग जारी कर दी है। आईआईटी मद्रास ओवरऑल और इंजीनियरिंग कैटेगरी में टॉप स्थान प्राप्त कर देश का टॉप इंस्टीट्यूट बनकर उभरा है। ओवरऑल कैटेगरी में टॉप 10 में आईआईटी इंस्टीट्यूट का दबदबा रहा है। टॉप 10 इंस्टीट्यूट की लिस्ट में 6 नाम आईआईटी इंस्टीट्यूट के शामिल हैं। दूसरा स्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलुरु को प्राप्त हुआ है। NIRF की रैंकिंग कुल 17 कैटेगरी में जारी की गई है, जिसमें ओवरऑल, यूनिवर्सिटी, कॉलेज, रिसर्च संस्थान, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, मेडिकल, डेंटल, लॉ, आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग, एग्रीकल्चर एंड अलायड सेक्टर, इनोवेशन ओपन यूनिवर्सिटी, स्किल यूनिवर्सिटी, स्टेट पब्लिक यूनिवर्सिटी और सस्टेनेबिलिटी (एसडीजी) शामिल हैं। टॉप 10 इंस्टीट्यूट: ओवरऑल कैटेगरी 1. आईआईटी,मद्रास 2. IISc, बैंगलुरू 3. आईआईटी, बॉम्बे 4. आईआईटी, दिल्ली 5. आईआईटी, कानपुर 6. आईआईटी, खड़गपुर 7. आईआईटी, रुड़की 8. एम्स, दिल्ली 9. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दिल्ली 10. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी यूनिवर्सिटी कैटेगरी इस साल 2025 NIRF रैंकिंग की यूनिवर्सिटी कैटेगरी में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISC) ने छठीं बार लिस्ट में टॉप किया है। दूसरे स्थान पर चौथी बार जेएनयू रहा है। तीसरी रैंक पाने में मणिपाल अकादमी ऑफ हायर एजुकेशन सफल रही है। चौथा और पांचवां स्थान जामिया मिलिया इस्लामिया और दिल्ली यूनिवर्सिटी को मिला है। इस वर्ष टॉप 10 यूनिवर्सिटी की कैटेगरी में बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (BITS) ने भी स्थान बनाया है। टॉप 10 यूनिवर्सिटी आईआईएससी, बेंगलुरु जे.एन.यू., नई दिल्ली मणिपाल उच्च शिक्षा अकादमी, मणिपाल जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली बी.एच.यू., वाराणसी बिट्स, पिलानी अमृता विश्व विद्यापीठम, कोयंबटूर जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ इंजीनियरिंग कैटेगरी इंजीनियरिंग कैटेगरी में पिछले वर्ष की तरह अपना टॉप स्थान बरकरार रखते हुए आईआईटी मद्रास देश का टॉप इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट बना है। दूसरा स्थान आईआईटी दिल्ली ने हासिल किया है। वहीं,तीसरा स्थान आईआईटी बॉम्बे को प्राप्त हुआ है। पिछले वर्ष आईआईटी गुवाहटी की रैंक 7 थी जो इस वर्ष नीचे खिसक कर रैंक 8 पर पहुंच गई है। टॉप 10 इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट आईआईटी मद्रास आईआईटी दिल्ली आईआईटी बॉम्बे आईआईटी कानपुर आईआईटी खड़गपुर आईआईटी रुड़की आईआईटी हैदराबाद आईआईटी गुवाहाटी एनआईटी तिरुचिरापल्ली आईआईटी बीएचयू बेस्ट कॉलेज भारत के बेस्ट कॉलेज की कैटेगरी में NIRF रैंकिंग 2025 में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अपना टॉप स्थान बरकरार रखा है। पिछले साल की तरह इस बार भी कॉलेज कैटेगरी में हिंदू कॉलेज ने टॉप किया है। दूसरा स्थान मिरांडा हाउस कॉलेज को मिला है। तीसरा स्थान हंसराज कॉलेज, दिल्ली को प्राप्त हुआ है। चौथे और पांचवे स्थान पर किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली और सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली रहे हैं। टॉप 5 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों का दबदबा रहा है। एनआईआरएफ रैंकिंग 2025: देश के बेस्ट कॉलेज 1. हिंदू कॉलेज, दिल्ली 2. मिरांडा हाउस, दिल्ली 3. हंस राज कॉलेज, दिल्ली 4. किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली 5 सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली 6 राम कृष्ण मिशन विवेकानन्द सेंटेनरी कॉलेज, कोलकाता 7. आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज, दिल्ली 8. सेंट सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता लोयोला कॉलेज, चेन्नई 9. पीएसजीआर कृष्णम्मल महिला कॉलेज, कोयंबटूर 10. पीएसजी कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस, कोयंबटूर ये हैं टॉप-5 मेडिकल कॉलेज मेडीकल कैटेगरी में एम्स, दिल्ली ने फिर से एक बार टॉप स्थान हासिल किया है। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS), नई दिल्ली पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, पुडुचेरी संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, लखनऊ  

बाढ़ और पर्यावरण पर हाईकोर्ट का सख्त रुख: अवैध कटाई रोकने के लिए जारी नोटिस

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश में बाढ़ के दौरान बहते हुए लकड़ी के लठ्ठों के वीडियो का संज्ञान लेते हुए कहा कि पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध पेड़ों की कटाई हो रही है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। अदालत ने कहा, “हमने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में अभूतपूर्व भूस्खलन और बाढ़ देखी है। मीडिया रिपोर्ट्स में भी सामने आया है कि बाढ़ के पानी में बड़ी संख्या में लकड़ी के लठ्ठ बह रहे थे। प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि पहाड़ों में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई हो रही है।” पीठ ने केंद्र सरकार (पर्यावरण मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा जम्मू-कश्मीर राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। आदेश लिखवाने के बाद, सीजेआई गवई ने मौखिक रूप से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, “यह गंभीर मुद्दा है। मीडिया में हमने देखा कि हिमाचल, उत्तराखंड में बड़ी संख्या में लकड़ी के लठ्ठ बहते दिखे। अवैध पेड़ों की कटाई चल रही है।” इस पर SG तुषार मेहता ने आश्वासन दिया कि वह आज ही पर्यावरण मंत्रालय के सचिव से बात करेंगे और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों से संपर्क करेंगे। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि चंडीगढ़ से मनाली के बीच 14 सुरंगें हैं, जो बारिश में भूस्खलन होने पर “मौत के जाल” बन जाती हैं। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें बताया गया था कि 300 लोग एक सुरंग में फंस गए थे।  

मुरली मनोहर जोशी का बड़ा बयान, RSS मंच से उठाया आय असमानता का मुद्दा

 नई दिल्ली आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा नई दिल्ली में संघ की शताब्दी वर्षगांठ पर आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला से ठीक एक हफ्ते पहले संघ के आर्थिक क्षेत्र में काम करने वाले छह संगठनों के करीब 80 प्रतिनिधियों की बंद कमरे में विशेष बैठक हुई। इसमें वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व पार्टी अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी मुख्य वक्ता रहे। जोशी ने इस दौरान करीब 70 स्लाइड्स दिखाईं और कहा कि केवल आर्थिक विकास को ही राष्ट्रीय लक्ष्य मानना उचित नहीं है।  एक रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने आय में असमानता, भारत की कम प्रति व्यक्ति जीडीपी और सामाजिक संकटों का उल्लेख करते हुए डिग्रोथ की अवधारणा पेश की। इसका अर्थ है कि विकास की दौड़ से बाहर निकलकर सादगी, साझेदारी और स्थानीय संसाधनों के संरक्षण पर जोर देना। आय असमानता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2021 में भारत की कुल घरेलू संपत्ति का 65% केवल शीर्ष 10% लोगों के पास था। भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी मात्र 2,878 डॉलर थी, जबकि जापान की 33,955 डॉलर थी। कृषि व स्वदेशी उद्योगों पर फोकस करने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी सहयोग पर अधिक निर्भरता भारत के हित में नहीं है। मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि 1.58 करोड़ बच्चे नशे के शिकार हो चुके हैं। दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाले करीब एक-तिहाई बच्चे नशे और शराब में फंस चुके हैं। उन्होंने आत्महत्या की बढ़ती दर पर भी चिंता जताई। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आत्महत्या करने वालों की संख्या 2018 में 1.34 लाख से बढ़कर 2022 में 1.70 लाख तक पहुंच चुके हैं। 2019-21 के बीच 35,950 छात्रों ने जान दी है। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रहे मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर केवल 32.7%, जबकि जापान में 64.6% और पोलैंड में 75.3% है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की 43.5% आबादी अब भी कृषि पर निर्भर, जबकि जापान में यह मात्र 3% है। मुरली मनोहर जोशी ने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सामाजिक असमानताओं को और गहरा कर सकता है। उन्होंने हालिया प्राकृतिक आपदाओं और हिमालयी सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि भारत “क्लाइमेट इमरजेंसी” की ओर बढ़ रहा है। मोहन भागवत ने मुरली मनोहर जोशी की इस चिंता पर कहा, “जोशी जी ने सब कुछ कह दिया है।” संगठन के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने हालांकि स्पष्ट किया कि बैठक का उद्देश्य सरकार की नीतियों की आलोचना करना नहीं, बल्कि सिद्धांत और व्यावहारिक कदमों को जोड़कर भविष्य की कार्ययोजना बनाना है। इस बैठक में भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, सहकार भारती, ग्राहक पंचायत, स्वदेशी जागरण मंच और लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधि शामिल हुए। साथ ही संघ विचारक एस गुरुमूर्ति, भाजपा महासचिव बीएल संतोष, पीएम आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजय सान्याल और यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना भी विशेष आमंत्रित थे।

महिला की नग्न अवस्था देख दंपत्ति ने रखी हैरान कर देने वाली मांग

सिचुआन  चीन में एक महिला के साथ अजीब घटना घट गई है। यहां एक महिला अपने कमरे में नग्न अवस्था में सो रही थी, उसी समय उसकी खिड़की को साफ करने आए दो सफाई कर्मियों ने उसे इस हालत में देख लिया। इसके बाद उसे काफी शर्मिंदगी हुई और वह डिप्रेशन में चली गई। रिपोर्ट के मुताबिक यह महिला और उसका पति चीन के सिचुआन प्रांत के चेंगदू के एक लग्जरी बिल्डिंग के अपार्टमेंट में रहता है। इनके अपार्टमेंट का किराया करीब 1400 डॉलर प्रति महीना है। सोशल मीडिया पर लिखे अपने पोस्ट में चेंग नामक इस महिला ने पूरी घटना की जानकारी दी। दंपत्ती ने बताया कि यह घटना 25 अप्रैल की सुबह हुई जब पत्नी सो रही थी और पति लिविंग रूप में काम कर रहा था। उसी वक्त पत्नी के चीखने की आवाज आई। पति भागकर उसे देखने के लिए पहुंचा। दंपत्ति ने आगे लिखा, "मैं उसे देखने गया, मेरी पत्नी बिस्तर पर बिना कपड़ों के लेटी हुई थी और खिड़की पर दो सफाई कर्मचारी उसे घूर रहे थे। उस समय कमरे के पर्दे भी बंद नहीं थे और लाइट भी पूरी जल रही थी। मैं तुरंत ही पर्दे बंद करने के लिए भागा।" महिला के पति के मुताबिक उसकी पत्नी को आमतौर पर बिस्तर में कपड़े नहीं पहनने की आदत है। ऐसे में वह अपनी सामान्य अवस्था में ही थी। प्रॉपर्टी ऑनर के ऊपर आरोप लगाते हुए पति ने लिखा, "उन्होंने हमें खिड़की के बाहर सफाई की तारीख की सही जानकारी नहीं दी। उन्होंने हमें बस इतना बताया था कि 21 से 30 अप्रैल के बीच में सफाई की जाएगी। दस दिन तक कमरे के पर्दे बंद रखना हमारे लिए नामुमकिन है। हालांकि मैंने कई बार उनसे सही तारीख के बारे में पूछा भी लेकिन उन्होंने नहीं बताया।" चेंग ने कहा कि जब से यह घटना हुई है, उसकी पत्नी गहरे डिप्रेशन में चली गई है। कपल का कहना है कि इस घटना के लिए प्रॉपर्टी ऑनर और उनकी मैनेजमेंट कंपनी को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्हें उचित मुआवजे के तौर किराए में बड़ी छूट भी मिलनी चाहिए। हालांकि चेंग के मुताबिक उनकी दोनों ही मांगे कंपनी की तरफ से ठुकरा दी गई हैं। चेंग ने बताया कि उनके शिकायत करने पर कंपनी ने एक कर्मचारी को फलों की टोकरी के साथ मांफी मांगने के लिए भेज दिया। अब मेरी पत्नी के डिप्रेशन में जाने का सवाल है, तो किसी को कोई चिंता नहीं है। हमारा किराए का कॉन्ट्रेक्ट भी कुछ समय में खत्म हो रहा है। इतना ही नहीं हमारे बार-बार कहने पर कंपनी में किराए में सिर्फ 80 डॉलर कम करने के प्रस्ताव रखा है। चेंग ने कहा, “हम इस अपार्टमेंट के प्रति महीने करीब 10 हजार युआन देते हैं। क्या हमारे पास 600 युआन की कमी है? कंपनी का यह रवैया दर्शाता है कि उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है। अगर वह चिंता करते ही तो किराए में एक लंबी छूट दे सकते थे। हम उनके रवैए से संतुष्ट नहीं है।”