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महाराष्ट्र को मिली लंबी दूरी की वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात, जानें कहां-कहां से गुजरेगी

मुंबई  महाराष्ट्र के लिए खुशखबरी है। राज्य को जल्द ही अपनी 12वीं वंदे भारत एक्सप्रेस मिलने जा रही है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 अगस्त को करेंगे। यह नई सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन अजनी (नागपुर) से पुणे के बीच चलाई जाएगी और इसका संचालन व रखरखाव सेंट्रल रेलवे (CR) जोन द्वारा किया जाएगा। अजनी (नागपुर)–पुणे वंदे भारत एक्सप्रेस देश की सबसे लंबी चलने वाली वंदे भारत ट्रेन होगी, जो कि 881 किमी की दूरी तय करेगी। यह नागपुर से पुणे के बीच की सबसे तेज ट्रेन होगी, जिसकी औसत रफ्तार 73 किमी प्रति घंटा होगी। ट्रेन में 10 इंटरमीडिएट स्टॉप होंगे और यह वार्धा-अकोला-शेगांव-भुसावल-जलगांव-मनमाड़ होते हुए पुंटांबा-डौंड के मार्ग से गुजरेगी। यह नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 26101/26102 के रूप में चलेगी। पुणे से नियमित सेवा 11 अगस्त से और अजनी से 12 अगस्त से शुरू होगी। यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलेगी। यह सेवा दोनों शहरों और बीच के कस्बों में काम, व्यापार, पढ़ाई और पर्यटन के लिए यात्रियों को बड़ी सुविधा देगी। व्यापारी, छात्र, कर्मचारी और पर्यटक सभी को तेज़ और आरामदायक यात्रा का लाभ मिलेगा। पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ व्यापार और वाणिज्य के नए अवसर भी खुलेंगे। महाराष्ट्र में चल रही वंदे भारत ट्रेनों की सूची 1. नागपुर–सिकंदराबाद 2. हुब्बल्ली–पुणे 3. कोल्हापुर–पुणे 4. जालना–छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस 5. बिलासपुर–नागपुर 6. मुंबई सेंट्रल–गांधीनगर 7. इंदौर–नागपुर 8. CSMT–साईंनगर शिर्डी 9. CSMT–सोलापुर 10. CSMT–मडगांव 11. मुंबई सेंट्रल–अहमदाबाद 12. अजनी (नागपुर)–पुणे (नई सेवा)

किसानों के लिए PM मोदी का मजबूत रुख, ट्रंप की चुप्पी में छुपी असमंजस की कहानी

नई दिल्ली डराने-धमकाने और धौंस दिखाने वाले दबंग से निपटने के लिए उससे उलझने के बजाय उसके खेल से अलग रहना चाहिए, फिर चाहे वह टकराव के लिए उकसा ही क्यों न रहा हो. इसके बजाय अपने लोगों को यह भरोसा दें कि आप उनके साथ खड़े हैं और दोस्‍तों का साथ दें. उन तक अपनी बात पहुंचाएं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निपटने के लिए ठीक यही रणनीति अपनाते दिख रहे हैं.  डोनाल्‍ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया. इसके बाद मोदी ने उन्हें फोन करने के बजाय गुरुवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा से एक घंटे से अधिक समय तक बातचीत की. चर्चा इस बात पर हुई कि कैसे अमेरिका ने दोनों देशों पर सबसे ज्यादा 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए हैं और इन हालात में उन्हें एकजुट होकर कदम उठाना चाहिए. गुरुवार सुबह एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि वे भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेंगे, भले इसके लिए उन्हें भारी कीमत क्यों न चुकानी पड़े. यह ट्रंप की दबाव वाली रणनीति के जवाब में उनका साफ संदेश था. ट्रंप का दबाव, भारत की ड‍िप्‍लोमेसी रूस के साथ भारत के आर्थिक रिश्तों से नाराज ट्रंप ने बुधवार को अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ भी लगा दिया. इसके बावजूद पीएम मोदी के करीबी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल उसी दिन रूस पहुंचे. गुरुवार को मॉस्को में डोभाल ने एलान किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की तारीख लगभग तय हो चुकी हैं. इस महीने के अंत में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी रूस जाएंगे. 1 सितंबर को मोदी बीजिंग में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां उनकी पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात हो सकती है. दबाव में झुकने को तैयार नहीं… ये घटनाक्रम डोनाल्‍ड ट्रंप को और भड़का सकते हैं. गुरुवार रात राष्‍ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ व्यापार वार्ता तब तक आगे नहीं बढ़ेगी, जब तक रूसी तेल खरीद का मसला हल नहीं हो जाता. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ऐसे दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं, खासकर तब जब अमेरिका भारत से कृषि, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में असीमित पहुंच की मांग कर रहा है. इन मांगों को ठुकराकर मोदी किसानों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे उनके असली मसीहा हैं. साल 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने वे कानून वापस ले लिए थे. साथ ही उनकी सरकार पीएम-किसान निधि योजना के तहत हर साल किसानों को 6,000 रुपये की सहायता और फसल बीमा भी देती है. अब अमेरिका के खिलाफ किसानों के हित में खड़े होकर प्रधानमंत्री उनसे अपना जुड़ाव और मजबूत कर रहे हैं. फोन पर बात…दो टूक जवाब पिछले 100 दिनों में मोदी और ट्रंप की फोन पर केवल दो बार बात हुई है. एक बार 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद और दूसरी बार जून में जब ट्रंप ने कनाडा में मौजूद मोदी को फोन किया. उस समय मोदी ने साफ तौर पर ट्रंप के इस झूठे दावे को खारिज कर दिया था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराया. संसद में भी मोदी ने कहा था कि किसी भी विश्व नेता ने भारत को ऑपरेशन सिंदूर रोकने के लिए राजी नहीं किया. फिलहाल पीएम मोदी संयम बरतते हुए अपने मित्र देशों को अमेरिकी दबाव के खिलाफ एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. भारत ने अमेरिकी कदमों को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, अनुचित, अनुचित और अव्यवहारिक बताया है, जो दशकों में वॉशिंगटन के खिलाफ भारत की सबसे कड़ी भाषा है. ट्रंप अचानक ले सकते हैं यू-टर्न भारत जानता है कि ट्रंप अप्रत्याशित हैं और अचानक यू-टर्न ले सकते हैं, इसलिए इंतजार करना सबसे बेहतर कूटनीतिक विकल्प है. अगर जल्द ही ट्रंप-पुतिन की मुलाकात होती है और रूस-यूक्रेन युद्ध सुलझ जाता है, तो ट्रंप का भारत विरोध भी खत्म हो सकता है. आखिरकार रूस से तेल खरीदने के लिए पहले अमेरिका ने ही भारत को प्रोत्साहित किया था और खुद भी रूस से यूरेनियम जैसी चीजें आयात करता है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता तभी होगा जब वह राष्ट्रीय हित में होगा और भारतीय किसानों से कोई समझौता नहीं होगा. तब तक मोदी अपने काम में लगे रहेंगे और अपने तरीके से संदेश देते रहेंगे. जैसे कि गुरुवार को संसद में तमिलनाडु के किसानों के एक दल से मुलाकात.

ट्रंप की आलोचना में उतरे पूर्व US मंत्री, मोदी को लेकर कही बड़ी बात

नई दिल्ली अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ की कड़ी आलोचना की है। कैंपबेल ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों को गंभीर खतरे में डाल रहा है, जो 21वीं सदी में अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह दी कि वे ट्रंप के दबाव में नहीं झुकें। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू किया, जिससे भारत पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया। यह टैरिफ 27 अगस्त से प्रभावी होगा। कैंपबेल की चेतावनी: भारत रूस से संबंध नहीं तोड़ेगा सीएनबीसी इंटरनेशनल को दिए एक इंटरव्यू में कैंपबेल ने कहा, "21वीं सदी में अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता भारत के साथ है, और यह अब खतरे में है। जिस तरह से राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पीएम मोदी के बारे में बात की है, उसने भारतीय सरकार को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।" उन्होंने भारत को सलाह दी कि वह ट्रंप के दबाव में नहीं झुके। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए।" कैंपबेल ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका भारत पर दबाव डालता है कि वह रूस से संबंध तोड़ दे, तो भारतीय रणनीतिकार ठीक इसके उलट करेंगे। उन्होंने कहा, "भारत को रूस के साथ संबंध तोड़ने के लिए कहना उलटा पड़ सकता है।" अमेरिका में द्विपक्षीय चिंता ट्रंप के इस फैसले ने अमेरिका में भी द्विपक्षीय चिंता को जन्म दिया है। पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने टैरिफ की आलोचना करते हुए कहा कि यह अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर बोझ डालता है। उन्होंने मुक्त व्यापार की वकालत की और कहा, "अमेरिकी कंपनियां और उपभोक्ता ही टैरिफ की कीमत चुकाते हैं।" इसके अलावा, डेमोक्रेट सीनेटर ग्रेगरी मीक्स ने भी चेतावनी दी कि ट्रंप का यह "टैरिफ तंत्र" भारत-अमेरिका साझेदारी को नुकसान पहुंचा सकता है। भारत की स्थिति और पीएम मोदी का रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली में एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए एक मजबूत संदेश दिया। उन्होंने कहा, "हमारे लिए किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। मुझे पता है कि इसके लिए हमें भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। भारत तैयार है।" यह बयान ट्रंप के टैरिफ के जवाब में देखा जा रहा है, जिसमें भारत ने साफ कर दिया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

पाकिस्तान की पुरानी जिद कायम, बोला– कश्मीर पर बाहरी दखल मंजूर

कराची  पाकिस्तान ने  कहा कि वह कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए अमेरिका या किसी भी अन्य देश की मदद का स्वागत करेगा. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में यह बात कही. खान से जब कश्मीर मुद्दे में अमेरिका की रुचि के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "हम न केवल अमेरिका से, बल्कि किसी भी ऐसे देश से मदद का स्वागत करते हैं जो स्थिति को स्थिर करने और कश्मीर विवाद को हल करने में मदद कर सके." उन्होंने आगे कहा कि यह विवाद दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा के मुद्दों के केंद्र में है. दूसरी ओर, भारत लगातार यह कहता रहा है कि वह पाकिस्तान के साथ बातचीत में किसी तीसरे पक्ष की भागीदारी नहीं चाहता है. 1972 के शिमला समझौते में भी दोनों देशों के बीच किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को अस्वीकार किया गया था. अमेरिका की रुचि का स्वागत- पाकिस्तान मई में दोनों देशों के बीच हुए चार दिवसीय संघर्ष के बाद से पाकिस्तान और भारत के बीच किसी भी संपर्क के सवाल पर खान ने कहा कि ऐसा कोई संपर्क नहीं हुआ है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि "हम इस मुद्दे के समाधान के लिए दोनों पक्षों के साथ काम करने में अमेरिका की रुचि का स्वागत करते हैं." खान ने कहा कि पाकिस्तान की समग्र राजनयिक स्थिति जगजाहिर है. उन्होंने कहा, "हम कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहते हैं, लेकिन भारत को अपना मन बनाना होगा. फिलहाल, हमारे दोनों पक्षों के बीच नियमित राजनयिक संपर्क के अलावा कोई बातचीत नहीं हुई है." भारत का स्टैंड क्लियर भारत ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान के साथ केवल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) की वापसी और आतंकवाद के मुद्दे पर ही बातचीत करेगा. पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकवाद के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से फैल रहे आतंकवाद के मुद्दे को कई बार उठाया है. उन्होंने यह भी खारिज किया कि खनिजों को निकालने के लिए अमेरिका के साथ कोई गुप्त समझौता हुआ है. उन्होंने यूक्रेन संघर्ष में पाकिस्तानी नागरिकों की संलिप्तता के आरोपों को भी "बेबुनियाद" बताया और कहा कि यूक्रेन के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान से औपचारिक रूप से संपर्क नहीं किया है.

कुलगाम में खूनी भिड़ंत: 2 वीर जवान शहीद, एक दहशतगर्द ढेर

 श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के कुलगाम के अखाल इलाके में आतंकियों के साथ मुठभेड़ का आज नौवां दिन है. बीती रात भर इलाके में जोरदार धमाकों और गोलीबारी की आवाजें गूंजती रहीं. इस दौरान सेना के दो जवान शहीद हो गए, जबकि पिछली रात की गोलीबारी में दो अन्य जवान घायल हुए हैं.  अब तक 10 जवान घायल अब तक मुठभेड़ में एक आतंकी का शव बरामद हुआ है, जबकि कुल मिलाकर दो जवान शहीद और दस जवान घायल हो चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक, घने जंगल और प्राकृतिक गुफा जैसे ठिकानों का फायदा उठाकर कम से कम तीन या उससे ज्यादा आतंकी अब भी छिपे हुए हैं. यह मुठभेड़ पिछले कई दशकों में सबसे लंबा चला रहा आतंक विरोधी अभियान बन गया है. 1 अगस्त को सुरक्षाबलों ने शुरू किया था ऑपरेशन भारतीय सुरक्षाबलों ने 1 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों की तलाश में 'ऑपरेशन अखल' शुरू किया था. यह कार्रवाई इलाके में आतंकियों के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद शुरू हुई थी. माना जा रहा है कि यहां 2 से 3 आतंकी छिपे हो सकते हैं. भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स के अनुसार, सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने दक्षिण कश्मीर के जंगल क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी के इनपुट के आधार पर घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया.

यात्रियों के लिए खुशखबरी: रेलवे ने शुरू किया रिटर्न टिकट पर 20% छूट ऑफर

 नई दिल्ली रेलवे ने यात्रियों के लिए राउंड ट्रिप पैकेज स्कीम का ऐलान किया है, जिसके तहत रिटर्न जर्नी पर 20% की छूट मिलेगी. यह योजना फिलहाल एक्सपेरिमेंटल बेसिस पर लागू की जाएगी, ताकि इसके असर और यात्रियों की प्रतिक्रिया का आकलन किया जा सके. रेलवे ने त्योहारों के सीजन में भीड़ को मैनेज करने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए 'राउंड ट्रिप पैकेज' स्कीम की घोषणा की है. इस स्कीम के तहत जो यात्री अपनी रिटर्न जर्नी तय समय सीमा के भीतर बुक करेंगे, उन्हें रिटर्न टिकट के बेस किराए पर 20% की छूट मिलेगी. ‘कनेक्टिंग जर्नी फीचर’ के जरिए बुक होगा टिकट यह योजना 14 अगस्त 2025 से शुरू होगी. इसके तहत पहले यात्रा (Onward Journey) का टिकट 13 अक्टूबर 2025 से 26 अक्टूबर 2025 के बीच की तारीख के लिए बुक करना होगा. इसके बाद वापसी (Return Journey) का टिकट 17 नवंबर 2025 से 1 दिसंबर 2025 के बीच की तारीख के लिए ‘कनेक्टिंग जर्नी फीचर’ के जरिए बुक किया जा सकेगा. बेस किराए पर मिलेगी छूट इस स्कीम में छूट तभी मिलेगी जब दोनों तरफ का टिकट एक ही यात्रियों के नाम से और कन्फर्म हो. रिटर्न टिकट की बुकिंग के लिए एडवांस रिजर्वेशन पीरियड लागू नहीं होगा. छूट केवल रिटर्न जर्नी के बेस किराए पर दी जाएगी. रेलवे ने बताया कि यह योजना फिलहाल एक्सपेरिमेंटल बेसिस पर लागू की गई है, ताकि त्योहारों के समय ट्रेनों का दोनों तरफ से बेहतर इस्तेमाल हो सके.

135 सीटर सुपर लग्जरी बस लॉन्च, नागपुर में मिलेगी सबसे पहले फ्लाइट लेवल सुविधा

 नई दिल्ली देश के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मोदी सरकार 135 सीटर लग्जरी बस शुरू करेगी। इस बस में फ्लाइट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सबसे पहले इसे महाराष्ट्र के नागपुर में शुरू किया जाएगा। इसके बाद इसे दिल्ली-मुंबई समेत देश के अन्य शहरों में भी चलाया जाएगा। इसकी जानकारी खुद केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दी है। नितिन गडकरी ने कहा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में मेट्रो अहम रोल निभा रही है, लेकिन अब सरकार की तैयारी 135 सीटर बसें चलाने की है। ये फ्लैश चार्जिंग बस होंगी, जो कॉस्ट के मामले में मेट्रो से सस्ती होगी और लग्जरी सुविधाओं से लैस होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन बसों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सबसे पहले महाराष्ट्र के नागपुर में शुरू किया जाएगा। इसके बाद इसे दिल्ली-मुंबई समेत देश के अन्य शहरों में भी चलाया जाएगा। डीजल बस से 30% कम होगा किराया मेट्रो की कॉस्ट प्रति किलोमीटर 450 करोड़ है।र इस बस की कॉस्ट 2 करोड़ है. तो इसका टिकट डीजल बस की तुलना में 30 फीसदी कम होगा। एयरकंडीशन बस होगी, एग्जिक्युटिव चेयर्स होंगी और हवाई जहाज की तरह इसमें खाने-पीने का सामान भी मिलेगा। दिल्ली से जयपुर, दिल्ली से देहरादून और चेन्नई से बेंगलुरु में भी शुरू करेंगे। 360 रोपवे केबल कार बनाने पर काम भी जारी नितिन गडकरी ने पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन में एक और बड़े बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि हम 360 रोपवे केबल कार बनाने पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हमने हाइड्रोडन प्यूल को लेकर 10 प्रोजेक्ट शुरू किए हैं और इसके तहत टाटा ने एक हाइड्रोजन फ्यूल पर चलने वाला ट्रक भी बनाया है। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन बनाने से लेकर इससे चलने वाले वाहनों का निर्माण हमारे प्रमुख कामों में शामिल है। इसका सीधा असर आने वाले समय में आपको ट्रासपोर्टेशन के ऊपर देखने को मिलेगा। हर दिन 100 किलोमीटर रोड बनाने का लक्ष्य केंद्रीय परिवहन मंत्री ने कहा कि हम ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में 40 हजार करोड़ के नए काम कर रहे हैं। हमने कई टारगेट सामने रखे हैं और इनमें एक खास ये है कि हम रोड बनाने की अपनी कैपेसिटी को बढ़ाने वाले हैं और आगे जाकर 100 किलोमीटर रोड प्रति दिन बनाएंगे। इस साल साल 2.5 लाख करोड़ रुपये के काम किए हैं, 10 लाख करोड़ रुपये के काम अभी करना है। उन्होंने कहा कि अगर 1 रुपये का खर्च रोड इंफ्रास्ट्रक्चर में होता है, तो उससे 3 रुपये आते हैं। इस साल दिसंबर तक अच्छे रोड बनने के कारण ये 9 फीसदी पर पहुंच सकती है। इससे अच्छी सड़कों से जहां एक्सपोर्ट आसान होगा, तो  इकोनॉमी की ग्रोथ में भी इससे मदद मिलेगी। 

अल-अक्सा के मुफ्ती पर इजरायल का बैन, गाजा संबंधित वक्तव्य बनी वजह

तेल अवीव इजरायल ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर के ग्रैंड मुफ्ती शेख मोहम्मद हुसैन की एंट्री पर ही पाबंदी लगा दी है। वे मस्जिद परिसर में नहीं घुस सकते। गाजा को लेकर उन्होंने एक तकरीर दी थी, जिसमें इजरायल की नीतियों की आलोचना की थी। इसी के चलते इजरायल ने उनके ऊपर पाबंदी लगाई है। शेख हुसैन के वकील का कहना है कि पहले 8 दिन की पाबंदी उन पर लगाई गई थी। इसके बाद मुफ्ती पर पाबंदी की मियाद 6 महीनों के लिए और बढ़ा दी गई है। जुलाई के आखिरी में जुमे के मौके पर नमाज अदा किए जाने के बाद शेख मोहम्मद हुसैन ने एक तकरीर की थी। इसमें उन्होंने इजरायल की उस नीति का विरोध किया था, जिसके तहत गाजा में जरूरी चीजों, भोजन और दवा की सप्लाई नहीं हो पा रही थी। इसके चलते 20 लाख फिलिस्तीनियों के आगे भुखमरी तक का संकट पैदा हो गया था। अब इसी मामले में Wafa न्यूज एजेंसी के अनुसार इजरायल ने ऐक्शन लिया है। इजरायली अथॉरिटीज ने मुफ्ती को 27 जुलाई को समन जारी किया था। उन्हें कहा गया था कि वे अगले 8 दिनों तक यहां ना आएं। इस दौरान मस्जिद में कुछ काम भी हो सकता है। बुधवार को 8 दिन की लिमिट खत्म हुई तो अब इसे 6 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। फिलिस्तीन ने इजरायल सरकार के इस फैसले की निंदा की है। फिलिस्तीन का कहना है कि इजरायल की तरफ से लगाया गया यह बैन अल-अक्सा मस्जिद पर नियंत्रण का प्रयास है। फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने कहा कि इस तरह से अल-अक्सा मस्जिद से जुड़ी मजहबी अथॉरिटीज को किनारे लगाने की तैयारी हो रही है, जो इजरायल की नीतियों का विरोध करती रहती है। बता दें अल-अक्सा मस्जिद को लेकर सदियों से विवाद रहा है। इसके एक हिस्से पर इस्लाम के लोगों का दावा है तो वहीं यहूदी भी इसे पवित्र स्थल मानते हैं और एक हिस्से माउंट टेंपल कहते हैं।

आयकर विधेयक पर केंद्र सरकार ने किया पलटाव, सुझावों के आधार पर लिया निर्णय

नई दिल्ली  सरकार ने आयकर विधेयक, 2025 को वापस लेने का निर्णय लिया है. बाद में लोकसभा में एक नया विधेयक पेश किया जाएगा जो आयकर अधिनियम, 1961 का स्थान लेगा. सरकार ने 13 फरवरी, 2025 को लोकसभा में आयकर विधेयक, 2025 पेश किया था और उसी दिन इसे जांच के लिए प्रवर समिति के पास भेज दिया गया था. प्रवर समिति ने 21 जुलाई, 2025 को अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश कर दी है. प्रवर समिति द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार विधेयक में सुधार किया जाएगा. प्रवर समिति की लगभग सभी सिफारिशें सरकार ने स्वीकार कर ली हैं. अन्य स्रोतों से भी सुझाव मिले हुए हैं जिन्हें सही विधायी अर्थ देने के लिए शामिल किया जाना जरूरी है. प्रारूपण, वाक्यांशों के संरेखण, परिणामी परिवर्तनों और परस्पर संदर्भों में कुछ सुधार किए गए हैं. इसलिए, प्रवर समिति द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने आयकर विधेयक, 2025 को वापस लेने का निर्णय लिया है. इसके पहले बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्षी दलों के सदस्यों के शोर-शराबे के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रवर समिति की रिपोर्ट के अनुसार आयकर विधेयक, 2025 को वापस लेने की अनुमति मांगी. सदन की मंजूरी के बाद उन्होंने आयकर विधेयक वापस ले लिया. गौरतलब है कि विपक्षी दलों के सदस्यों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर शुक्रवार को भी लोकसभा में हंगामा किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद दोपहर तीन बजकर पांच मिनट पर दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई. दो बार के स्थगन के बाद दोपहर तीन बजे बैठक शुरू हुई तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रवर समिति की रिपोर्ट के अनुसार आयकर विधेयक, 2025 को वापस लेने की अनुमति मांगी और सभा की सहमति से सरकार ने विधेयक को वापस ले लिया.

ट्रम्प के टैरिफ वार के बीच PM मोदी-पुतिन की खास बातचीत, भारत में स्वागत के लिए न्योता

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच टेलिफोन पर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध, आपसी संबंधों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। पीएम मोदी ने एक बार फिर भारत की शांति की नीति को दोहराया और राष्ट्रपति पुतिन को भारत आने का निमंत्रण भी दिया। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन से जुड़े हालिया हालात की भी पुतिन से जानकारी ली। भारत की शांति की नीति पीएम मोदी ने पुतिन को इस जानकारी के लिए धन्यवाद भी दिया और दोहराया कि भारत हमेशा युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। भारत की नीति है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही किसी भी संघर्ष का हल निकलना चाहिए। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच पुराने और मजबूत रिश्तों पर भी चर्चा की और दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों के बीच के संबंधों को और मजबूत किया जाएगा। पुतिन को भारत आने का न्योता बता दें, भारत और रूस कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हैं, जैसे ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और व्यापार। इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आने वाले महीनों में और बातचीत की योजना है। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को इस साल भारत आने का न्योता भी दिया है। भारत- रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन का यह 23वां संस्करण होगा, जो दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने का काम करेगा।