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राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुआ जामनगर का सरकारी डेंटल कॉलेज, CM ने दी बधाई

जामनगर गुजरात के जामनगर स्थित सरकारी डेंटल कॉलेज और हॉस्पिटल को ओरल हेल्थ के प्रति लोगों को जागरुक करने और तंबाकू से होने वाले नुकसानों को लेकर चलाए गए अभियानों के लिए सम्मानित किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने जामनगर के सरकारी डेंटल कॉलेज को प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया। इस पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी खुशी जताई है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह सम्मान न सिर्फ संस्थान के लिए, बल्कि पूरे गुजरात के लिए गौरव की बात है। गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए दांतों का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। सरकारी डेंटल कॉलेज और अस्पताल, जामनगर को मौखिक और दंत स्वास्थ्य के साथ-साथ तंबाकू सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जन जागरूकता को लेकर अलग-अलग कार्यक्रमों के आयोजन के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने लगातार दूसरे साल प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया है।” इससे पहले, जामनगर कलेक्टर ने सरकारी डेंटल कॉलेज और हॉस्पिटल को बधाई दी। कलेक्टर ऑफिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर राज्य को गौरवान्वित करने के लिए राजकीय डेंटल कॉलेज और हॉस्पिटल, जामनगर को बहुत-बहुत बधाई।” केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय देशभर के डेंटल कॉलेज और अस्पतालों को मुंह और ऑरल हेल्थ के साथ-साथ तंबाकू सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूकता अभियान चलाने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस अभियान के तहत आयोजित किए जाने वाले सर्वश्रेष्ठ कार्यक्रमों के लिए हर साल पुरस्कार दिए जाते हैं। इसी क्रम में जामनगर के डेंटल कॉलेज और हॉस्पिटल ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अनूठी उपलब्धि हासिल कर पूरे सौराष्ट्र को गौरवान्वित किया है।  

आवारा कुत्तों का कहर: बुजुर्ग की नाक काटी, बच्चे भी बने शिकार

बड़वानी देश-प्रदेश के साथ शहर में भी आवारा श्वानों द्वारा आमजन को निशाना बनाने का सिलसिला जारी हैं। बुधवार को सुबह से दोपहर तक चंद घंटे में एक दर्जन के करीब लोग श्वान के काटने के शिकार बने। इस दौरान एक बुजुर्ग के मुंह पर श्वान ने झपट्टा मारकर नाक काट दी। लहुलहान हालात में स्वजन उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहीं इस दौरान आधे दिन में ही बच्चों सहित बड़े लोग श्वानों के शिकार होकर जिला अस्पताल उपचार के लिए पहुंचे। बुधवार सुबह करीब 10 बजे शहर के गुरुद्वारा के पीछे नवलपुरा मुख्य मार्ग पर वेल्डिंग व ऑटो गैरेज व्यवसायी हाजी बसीर मंसूरी को श्वान ने बुरी तरह जख्मी किया। यह घटना सामने लगे सीसीटीवी में कैद हुई। उक्त घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने जमकर रोष व्यक्त किया। हाजी मंसूरी अपने घर से सटी दुकान पर आए और वहां मंडरा रहे श्वानों को भगाने का प्रयास किया, इस दौरान अचानक श्वान ने लंबी छलांग लगाकर उनके चेहरे पर बुरी तरह झपट्टा मारा। श्वान के हमले से वे सड़क पर गिरे, जिसके बाद श्वान ने उनके हाथ-पैर में निशाना बनाया। आसपास के लोगों के पहुंचने पर श्वान दूर भागा। इस हमले से बुजुर्ग बसीर मंसूरी की नाक का एक ओर का हिस्सा निकल गया और हड्डी तक क्षतिग्रस्त हो गई। स्वजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। बुधवार को जिला अस्पताल में अवकाश के चलते नए सोलह पलंग वार्ड की इमरजेंसी ओपीडी में उनका टीकाकरण कर भर्ती कर उपचार शुरू किया। वहीं शाम चार बजे तक जिला अस्पताल में श्वान के काटने के शिकार करीब 10 लोग उपचार के लिए पहुंचे। इसमें बड़ों के साथ बच्चे भी शामिल थे। इस वर्ष अब तक 1400 से अधिक घायल जिला अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक श्वान टीकाकरण केंद्र पर 1400 से अधिक लोग दर्ज हुए हैं, जिन्हें श्वानों ने निशाना बनाया हैं। इसमें महिला-पुरुषों के साथ युवा-बच्चे शामिल हैं। वहीं अधिकांश मामलों में श्वानों द्वारा खूंखार रुप से लोगों और बच्चों पर हमला कर घायल किया है। कई लोगों को शरीर में दो-तीन या अधिक स्थानों पर जख्म व खरोंचे भी आई हैं। बता दें कि डेढ़ वर्ष पूर्व न्यू हाउसिंग बोर्ड मैदान के समीप आवारा श्वानों ने दो वर्षीय मासूम को झपटकर मौत के घाट उतार दिया था। कॉलोनियों व स्कूलों के आसपास अधिक समस्या शहर में वर्षाकाल के बीच आवारा श्वानों के जगह-जगह झुंड विचरण करते देखे जा सकते हैं। मुख्य रुप से पालाबाजार, पानवाड़ी, न्यु हाउिंगस बोर्ड, हाट बाजार, मीट मार्केट, माडल स्कूल परिसर, नवलपुरा, राजघाट रोड से सटी कालोनियां, आनंद नगर सहित मुख्य रुप से स्कूलों के आसपास श्वानों के झुंड मंडराने से बच्चों पर खतरा बना हुआ हैं। हालांकि गत दिनों से नगर पालिका अमले द्वारा श्वानों को पकड़कर आबादी क्षेत्र से बाहर छोड़ने की कार्रवाई की जा रही हैं, बावजूद इससे फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही हैं। इस वर्ष अब तक श्वानों के शिकार     जनवरी में 284     फरवरी में 178     मार्च में 250     अप्रैल में 171     मई में 170     जून में 112     जुलाई में 182     1400 से अधिक अगस्त अब तक (प्रतिदिन औसत 6 से 10 मरीज)

गुजरात दंगों पर तरलोचन सिंह बोले: नरेंद्र मोदी न होते तो पूरा राज्य जल उठता

नई दिल्ली सिख मामलों के जानकार और पूर्व राज्यसभा सांसद तरलोचन सिंह ने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका की सराहना की है। कहा कि यह दंगा साबरमती एक्सप्रेस अग्निकांड से उपजे गुस्सा का नतीजा था और इसे नरेंद्र मोदी ने अच्छे से संभाला वरना पूरा गुजरात ही जल जाता। उन्होंने कहा कि ट्रेन में जिंदा जले लोगों के परिजन उनके शवों को अपने गांव ले जाना चाहते थे, लेकिन नरेंद्र मोदी ने उनका अंतिम संस्कार वहीं करा दिया। तरलोचन सिंह ने कहा कि यदि ये शव उनके गांवों में पहुंचते तो सोचिए कि कितना गुस्सा लोगों का भड़कता और पूरा गुजरात ही जल जाता, लेकिन नरेंद्र मोदी ने साहस दिखाया और ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि 2002 का दंगा जनता के गुस्से का परिणाम था, उसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। बता दें कि 2002 में गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम हुआ करते थे। उस दंगे को लेकर उन पर भी कांग्रेस की ओर से आरोप लगाए जाते रहे हैं। 2002 के दंगों के दौरान तरलोचन सिंह अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष थे। उन्होंने कहा कि गुजरात का दंगा दिल्ली में हुए 1984 के दंगों की तरह सरकार प्रायोजित नहीं था। उन्होंने कहा कि 2002 में मैं अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष था। तरलोचन सिंह ने कहा कि घटना होने के बाद सबसे पहले पहुंचने वाले लोगों में मैं था। मैंने उसके बारे में पूछताछ की। कोई उसके बारे में नहीं जानता था। मैं 2000 में अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बना था और गुजरात दंगा 2002 में हुआ। मैंने गुजरात दंगे पर एक बुकलेट भी लिखी है। उन्होंने कहा कि यह बुकलेट छपी भी थी और नरेंद्र मोदी ने इसकी 500 कॉपियां बटवाई थीं। मैंने गुजरात दंगों से दिल्ली के सिख दंगों की तुलना की थी। मैंने कहा था कि दिल्ली का दंगा सरकार प्रायोजित था, लेकिन गुजरात का दंगा जनता के गुस्से की अभिव्यक्ति थी। उस दंगे में सरकार या उसके किसी एक भी आदमी की भूमिका नहीं थी। मैंने अपनी जांच में यह बात कही थी। पीएम नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए तरलोचन सिंह ने कहा कि तब गुजरात सीएम के तौर पर उनका रोल सराहनीय था। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने तय किया कि मारे गए सभी कारसेवकों का अंतिम संस्कार वहीं कर दिया जाए। यदि वे शव गांवों में पहुंचते तो कितना गुस्सा भड़कता। हम इसकी कल्पना ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में तो पूरा गुजरात ही जल जाता, लेकिन नरेंद्र मोदी ने साहस दिखाया और हालात को संभाल लिया। उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम था कि दंगे अहमदाबाद और उसके आसपास के इलाके में ही हुए। पूरे गुजरात में स्थिति नहीं बिगड़ी।

हाईवे पर फंसे मालवाहक वाहन, भाड़ा भी नहीं मिलेगा; बर्बाद हो रही लाखों की सब्जियां

हिमाचल  चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पिछले तीन दिनों से पंडोह से औट के बीच बंद है, जिससे कुल्लू-मनाली और लाहौल-स्पीति की ओर जाने वाले सैकड़ों मालवाहक वाहन फंस गए हैं। इन ट्रकों में फल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान लदा है, जो अब खराब होने लगा है। सोमवार को कुछ समय के लिए सड़क खोली गई थी, लेकिन भारी बारिश के कारण यह फिर से बंद हो गई। दवाड़ा में सबसे ज्यादा नुकसान हाईवे को सबसे ज्यादा नुकसान दवाड़ा के पास हुआ है, जहाँ ब्यास नदी का पानी हाईवे पर आ गया और सड़क का एक बड़ा हिस्सा बह गया। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से आ रहे ये ट्रक 9 मील के पास खुले मैदानों में खड़े हैं। ट्रक चालक तीन दिनों से यहाँ फंसे हुए हैं, जिससे उनकी चिंताएँ बढ़ गई हैं। चालकों का दर्द: "अब तो भाड़ा भी नहीं मिलेगा" एक ट्रक चालक ने बताया कि तीन दिन से हाईवे पर फंसे होने के कारण उनके ट्रक में लदी हुई सारी सब्जियां और फल सड़ने लगे हैं। उनका कहना है कि इस नुकसान की भरपाई करना मुश्किल है, क्योंकि उन्हें अब भाड़ा भी नहीं मिलेगा। कुछ अन्य चालकों ने कहा कि उन्होंने कभी भी हाईवे की ऐसी खराब हालत नहीं देखी। हालाँकि, प्रशासन की तरफ से फंसे हुए चालकों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की गई है, लेकिन खराब हो रहे सामान की वजह से चालकों की परेशानी कम नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि इस सड़क को जल्द से जल्द खोला जाए और इसका रखरखाव बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) को सौंपा जाए। प्रशासन का बयान: युद्ध स्तर पर चल रहा काम मंडी जिला प्रशासन ने बताया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें सड़क बहाली के काम में जुटी हुई हैं। सड़क खोलने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। प्रशासन ने यह भी जानकारी दी है कि मंडी से कुल्लू जाने वाले वैकल्पिक मार्ग, कटौला रोड को भी जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिशें की जा रही हैं। यह स्थिति न केवल चालकों के लिए, बल्कि कुल्लू-मनाली में जरूरी सामान की सप्लाई पर भी असर डाल रही है। प्रशासन का कहना है कि वे इस समस्या को जल्द से जल्द हल करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।  

ट्रंप भारत संग कर रहे थे बड़ी डील की बात, अचानक क्यों बिगड़ गया माहौल?

वाशिंगटन  भारत पर अमेरिकी टैरिफ की मार जारी है। बुधवार से अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी लागू हो गया। इसके साथ ही भारतीय निर्यात पर अब कुल 50 फीसदी शुल्क लगेगा। खास बात है कि भारत और ब्राजील दो ही ऐसे देश हैं, जिनपर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इतना टैरिफ लगाया है। सवाल है कि आखिर कैसे बड़े सहयोगी माने जाने वाले दो देश व्यापार के लिहाज से तकरार का सामना कर रहे हैं। ट्रंप क्या बताते हैं ज्यादा टैरिफ की वजह जुलाई में जब ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया तो इसकी वजह ब्रिक्स बताई। तब उन्होंने कहा था, 'हम अभी बातचीत कर रहे हैं और इसमें ब्रिक्स का मसला भी शामिल है। आप जानते हैं, ब्रिक्स अमेरिका विरोधी देशों का एक समूह है और भारत इसका सदस्य है। यह अमेरिकी मुद्रा पर हमला है और हम किसी को भी ऐसा नहीं करने देंगे।' ट्रंप ने घाटे की भी बात कही थी। उन्होंने कहा था, 'यह निर्णय आंशिक रूप से ‘ब्रिक्स’ की वजह से लिया गया है और इसमें कुछ हद तक घाटे की भूमिका है। हमें बहुत बड़ा घाटा हुआ है। जैसा कि आप जानते हैं, प्रधानमंत्री मोदी मेरे मित्र हैं लेकिन वे हमारे साथ व्यापार के मामले में बहुत ज्यादा जुड़े नहीं हैं।' 7 महीनों में ऐसा क्या हो गया फरवरी- भारतीय प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ सीमित व्यापार समझौते और साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक करने पर सहमत हुए। साथ ही उन्होंने अमेरिका से ऊर्जा खरीद में भी इजाफा का वादा किया था। मार्च- केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल वॉशिंगटन पहुंचते हैं और ट्रंप सरकार में मंत्री हॉवर्ड लुटनिक से मुलाकात करते हैं। साथ ही उन्होंने अधिकारी जैमिसन ग्रीर से भी चर्चा की। इसके बाद मार्च में ही अमेरिकी अधिकारी बातचीत के लिए दिल्ली पहुंचे थे। तब तक भारत ने कहा था कि अमेरिका के साथ अच्छी चर्चा चल रही है। खबर है कि एक रिपोर्ट में भारत की तरफ से लगाए जाने वाले भारी टैरिफ, डेटा कानून और पेटेंट के मुद्दे का जिक्र किया गया था। अप्रैल- उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत पहुंचे और द्विपक्षीय वार्ता की रूपरेखा तैयार हुई। तब भारतीय अधिकारियों की तरफ से कहा गया था कि 9 जुलाई की डेडलाइन से पहले डील साइन हो जाएगी। मई- गोयल ने फिर वॉशिंगटन का दौरा किया और इस बार उनके साथ बड़े वार्ताकार राजेश अग्रवाल भी थे। कहा जा रहा था कि भारत को अच्छे नतीजों की उम्मीद थी। जून- अमेरिका के वाणिज्य मंत्री लुटनिक 3 जून को भारत आते हैं। उन्होंने कहा था कि भारत और अमेरिका अच्छी प्रगति कर रहे हैं और जल्द ही डील पर अंतिम मुहर लग सकती है। खुद ट्रंप ने भी कहा था कि भारत के साथ बड़ी डील होने वाली है। रॉयटर्स से बातचीत में भारतीय अधिकारियों ने बताया था कि खासतौर से कृषि उत्पादों पर इम्पोर्ट ड्यूटी के मामले में असहमति होने के चलते बातचीत रुक गई है। इसके बाद 20 जून को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि उन्होंने ट्रंप का अमेरिका आने का न्योता अस्वीकार कर दिया था। जुलाई- गोयल ने 4 जुलाई को कहा था कि भारत डेडलाइन के लिए डील नहीं करेगा और राष्ट्र के हित को सबसे ऊपर रखा जाएगा। इसके बाद 15वें दौर की बातचीत के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल एक बार फिर अमेरिका पहुंचा। खास बात है कि उस दौरान ट्रंप लगातार दावा कर रहे थे कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रुकवाया। पीएम मोदी ने जुलाई में संसद में कहा कि 'विश्व के किसी भी नेता ने हमें ऑपरेशन रोकने के लिए नहीं कहा।' इसके बाद 31 जुलाई को ट्रंप ने पहली बार भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया। अगस्त- 7 अगस्त को ही नए टैरिफ रेट लागू हुए थे कि कुछ समय बाद ट्रंप ने 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क की भी घोषणा कर दी। इससे पहले पीएम मोदी ने कहा था कि भारत किसानों के हित से समझौता नहीं करेगा। खास बात है कि 25-29 अगस्त के बीच भारत आ रहे अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा रद्द हो गई। इधर, पीएम मोदी ने चीन जाने की तैयारी कर ली थी। इन मुद्दों पर फंसा पेंच रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि कई स्तर पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। खासकर अमेरिका चाहता है कि उसके डेयरी और कृषि से जुड़े उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ती दरों पर बेचे जाएं। इसके लिए बीटीए के तहत भारत आयात शुल्क में रियायत दे, जिस पर भारत सहमत नहीं है। भारत उन उत्पादों को समझौते में शामिल नहीं करना चाहता है या फिर उन उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने को तैयार नहीं है, जिनसे घरेलू बाजार, उद्योग और किसान प्रभावित हों। क्या चाहता है भारत रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत भारत श्रम-प्रधान क्षेत्रों को लेकर विशेष शुल्क रियायत देने की मांग कर रही है। इनमें वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, चमड़े के सामान, परिधान, प्लास्टिक, रसायन, झींगा, तिलहन, अंगूर और केले जैसे उत्पाद शामिल हैं। समझौते के तहत भारत अतिरिक्त शुल्क (26 प्रतिशत) को हटाने की मांग कर रहा है। वहीं, स्टील और एल्युमीनियम (50 प्रतिशत) और ऑटो क्षेत्र (25 प्रतिशत) के शुल्क भी कमी चाहता है।  

मोहन भागवत का बड़ा बयान: हिंदू राष्ट्र सत्ता की राजनीति से अलग

नई दिल्ली ऐसे समय में जब देश में हिंदू राजनीति अपने चरमोत्कर्ष की ओर जा रही हो, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत का मंगलवार को दिया गया भाषण महत्वपूर्ण हो जाता है. भागवत कहते हैं कि हिंदू राष्ट्र शब्द का सत्ता से कोई मतलब नहीं है. भाजपा सरकार पर विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि वह इस विचारधारा को सत्ता पाने और उसमें बने रहने के औजार के रूप में इस्तेमाल करती है. आम तौर पर यह माना जाता रहा है कि संघ बीजेपी को समय समय पर बौद्धिक खुराक देता रहा है. अपने तमाम मतभेदों के बावजूद संघ और बीजेपी एक बिंदु पर जाकर एक हो जाते हैं. जाहिर है कि भागवत का कथन सिर्फ शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि संघ की मूल वैचारिक धारा को तो व्यक्त करता ही है देश में सत्तासीन बीजेपी सरकार के लिए एक दिशा का निर्धारण भी करता है. पर सवाल यह है कि संघ प्रमुख के इस बयान के मायने क्या हैं?  क्या यह सीधे -सीधे बीजेपी नेताओं को संदेश देता है? राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भागवत का यह ताज़ा बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष भाजपा पर लगातार यह आरोप लगा रहा है कि वह बहुसंख्यकवाद और ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे रही है. भाजपा लगातार दूसरी बार केंद्र में सत्तासीन है और कई राज्यों में भी उसके हाथ में ताकत है. ऐसे में संघ प्रमुख का यह कहना कि हिंदू राष्ट्र का अर्थ सत्ता से नहीं है, एक राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है. इसके साथ ही इस तरह भी देखा जा सकता है कि संघ अब बीजेपी को हिंदू राष्ट्र के मुद्दे को थोड़ा नरम करके चलने का संकेत देना चाहता हो. आरएसएस अपनी स्थापना के शुरुआती दिनों से ही हिंदू राष्ट्र की बात पर मुखर रहा है. गोलवलकर, जिन्हें गुरुजी कहा जाता है ने इसे परिभाषित करते हुए कहा था कि भारत की आत्मा हिंदू है और यहां की संस्कृति की जड़ें हिंदुत्व से निकली हैं. संघ का शुरू से ही मानना रहा है कि हिंदू शब्द सिर्फ धार्मिक नहीं है. इसमें सभ्यता, परंपरा, जीवनशैली और सामाजिक मूल्य सभी शामिल हैं. यही कारण है कि संघ हमेशा कहता रहा कि मुसलमान, ईसाई, पारसी या अन्य धार्मिक समूह भी इस राष्ट्र के उतने ही हिस्से हैं, जितने हिंदू.  संघ अपनी पुरानी लाइन पर] बीजेपी के लिए इस बयान की टाइमिंग महत्वपूर्ण इसलिए यह बिल्कुल सीधा और साफ है कि भागवत का बयान संघ की पुरानी लाइन को ही दोहराता हैृ.चूंकि आरएसएस सीधे सत्ता की राजनीति में शामिल नहीं होता.  संघ की असली ताकत समाज-निर्माण, शिक्षा, सेवा और सांस्कृतिक कार्य में है. इसलिए संघ प्रमुख के इस बात में कुछ भी नया नहीं है कि हिंदू राष्ट्र का लक्ष्य संसद में बहुमत पाना नहीं है, बल्कि समाज को ऐसा बनाना है जिसमें नैतिकता, समरसता और सांस्कृतिक एकता हो. हां लेकिन उनकी इस बात की टाइमिंग महत्वपूर्ण है. यह हो सकता है कि संघ प्रमुख बीजेपी के लिए कोई सीमा रेखा खींच रहे हैं या अल्पसंख्यकों को कोई संदेश दे रहे हों. अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर बीजेपी से नरम रुख चाहता है संघ दरअसल भारत में हिंदू राष्ट्र का सीधा संबंध अक्सर मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना से लिया जाता है. विपक्ष इसे बहुसंख्यकवादी एजेंडा मानता है. यही कारण रहा है कि कांग्रेस नेताओं के मुंह से बीजेपी के बजाय आरएसएस के लिए ज्यादा अपशब्द निकलता रहा है. शायद यही कारण है कि भागवत कहते हैं कि हिंदू राष्ट्र का सत्ता से कोई संबंध नहीं है तो यह संदेश जाता है कि संघ का उद्देश्य किसी पर वर्चस्व थोपना नहीं है. बल्कि यह अवधारणा सबको साथ लेकर चलने वाली सांस्कृतिक पहचान की है. जरूरी बात यह है कि संघ यह बात बार-बार क्यों दुहरा रहा है. कहीं यह बीजेपी को अगले विधानसभा चुनावों के लिए इशारा तो नहीं है  . क्योंकि भारतीय जनता पार्टी बिहार और बंगाल विधानसभा चुनावों में डेमोग्रेफी चेंज और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर अल्पसंख्यकों पर लगातार जुबानी हमले कर रही है. हो सकता है कि संघ यह चाहता हो कि बीजेपी को अपने रुख में थोड़ी नरमी लानी चाहिए. बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों पर भी फोकस जरूरी भागवत का बयान भाजपा को अप्रत्यक्ष रूप से यह याद दिलाता है कि संघ की दृष्टि सत्ता से आगे है. भाजपा हिंदू राष्ट्र को राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल सत्ता हासिल करने के लिए कर सकती है. भागवत का यह बयान केवल वैचारिक नहीं बल्कि जमीनी राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है .क्योंकि बार-बार यह सवाल उठ रहा है कि देश में बेरोजगारी, किसान संकट जैसे मुद्दे हिंदू-मुसलमान की राजनीति के चलते गौण हो गए हैं. संघ शायद यह संदेश देना चाहता है कि हिंदू राष्ट्र का अर्थ इन समस्याओं से मुंह मोड़ना नहीं बल्कि इन्हें समाज-आधारित समाधान देना है. भागवत के इस उपदेश का भविष्य में ये असर हो सकता है. -भाजपा-विरोधी दलों का आरोप कमजोर हो सकता है कि हिंदू राष्ट्र सिर्फ सत्ता हथियाने का औजार है. -भाजपा को अपनी भाषा और नीतियों में “समावेशिता” दिखानी पड़ सकती है. -अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश भी जाएगा कि भारत का राष्ट्रवाद अधिनायकवादी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और समावेशी है. -भागवत का कहना है कि स्वाभाविक धर्म समन्वय है संघर्ष नहीं है. इससे कम से कम हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन धर्म में तो समन्वय दिखाई ही देगा. राष्ट्रवादी मुसलमानों में भी हिंदू धर्म के साथ समन्वयव की उम्मीद जगेगी.

CJI का गुस्सा उफन पड़ा, जमानत रोके जाने पर बोले—व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान जरूरी

नई दिल्ली  देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने सीबीआई से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा एक आरोपी की जमानत याचिका पर 43 बार रोक लगाने के लिए कड़ी फटकार लगाई है। CJI गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामले में अभियुक्त पहले ही साढ़े तीन साल से ज़्यादा का वक्त हिरासत में बिता चुका है, इसलिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों में इस तरह बार-बार जमानत स्थगन स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने अभियुक्त रामनाथ मिश्रा को जमानत देते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में अदालतों को अत्यंत शीघ्रता से विचार करना चाहिए। सीजेआई ने मामले में कहा, “हमने बार-बार यह टिप्पणी की है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामलों पर अदालतों द्वारा अत्यंत शीघ्रता से विचार किया जाना चाहिए… व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों में, हाई कोर्ट्स से यह अपेक्षा नहीं की जाती है कि वे मामले को इतने लंबे समय तक लंबित रखें और समय-समय पर सुनवाई स्थगित करने के अलावा कुछ न करें।” ऐसी प्रवृति हम पसंद नहीं करते: SC पीठ ने 25 अगस्त के अपने आदेश में कहा, “मौजूदा मामले में 43 बार जमानत स्थगित किया जा चुका है। हम उच्च न्यायालय द्वारा किसी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामले को इतनी बड़ी संख्या में जमानत स्थगित करने की प्रवृत्ति को पसंद नहीं करते। व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर तुरंत शीघ्रता से गौर किया जाना चाहिए।” CBI ने फिर किया जमानत का विरोध, SC ने नहीं मानी दलील सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय ने इस आधार पर जमानत याचिका का विरोध किया कि हाई कोर्ट में जमानत याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान शीर्ष अदालत द्वारा अगर जमानत दी गई तो इससे एक गलत मिसाल कायम होगी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने CBI की इस दलील पर ध्यान नहीं दिया और कहा कि अभियुक्त पहले ही साढ़े तीन साल से ज़्यादा समय हिरासत में बिता चुके हैं और उनकी जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 43 बार स्थगित हो चुकी है। ऐसे में जमानत नहीं देना उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन होगा। इसी मामले में पहले भी HC को फटकार लगा चुका है SC दिलचस्प बात यह है कि शीर्ष अदालत ने इसी मामले में एक सह-अभियुक्त को 22 मई, 2025 को ज़मानत दे दी थी, जब उसे पता चला था कि उच्च न्यायालय ने उसकी ज़मानत याचिका पर 27 बार सुनवाई स्थगित कर चुका है। शीर्ष अदालत ने कहा, "याचिकाकर्ता को निचली अदालत की संतुष्टि के लिए ज़मानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है।"  

‘भारत के दम को दुनिया समझती है’, बाबा रामदेव ने राष्ट्रवाद और टैरिफ पर दिया संदेश

'ट्रंप राजनीतिक गुंडागर्दी करते हैं', बाबा रामदेव ने समझाया टैरिफ से मुकाबले का देसी मंत्र भारत के दम को दुनिया समझती है, राष्ट्रवाद के लिए उत्साह की जरूरत- बाबा रामदेव  नई दिल्ली स्वामी रामदेव ने अमेरिकी टैरिफ पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अमेरिकी टैरिफ से मुकाबले का देसी मंत्र समझाया है. उन्होंने बातचीत करते हुए कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राजनीतिक रूप से गुंडागर्दी कर रहे हैं. उन्हें ये पता होना चाहिए कि हम सब मिलकर ट्रंप की सबक सीखा सकते हैं.  जब बाबा रामदेव से पूछा कि क्या टैरिफ का बिल्कुल असर नहीं होगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'देखिए, अब भारत को खुलकर सामने आना होगा. हम अन्य देशों को साथ मिलकर अमेरिका का सबक सीखा देंगे, PM मोदी जी ने इस की तैयार कर ली है. उन्होंने कहा कि एक वक्त था जब चीन की स्थिति बहुत खराब थी, लेकिन चीन ने लगातार काम से अपनी स्थिति बदल दी और पूरी दुनिया के बाजार पर अपना कब्जा कर लिया.' 'विकासशील देशों को धमकाने है तरीका' एक सवाल के जवाब में बाबा रामदेव ने कहा कि देखिए, ट्रंप की ये नीति एक तरह से 'टैरिफ टेररिज्म' है. ये विकासशील देशों को धमकाने का एक तरीका है, लेकिन भारत को इससे डरने की जरूरत नहीं है. चुनौती में होते हैं अवसर: बाबा रामदेव स्वदेशी के साथ धार्मिक चीजें जुड़ जाती है? उन्होंने कहा कि यहां किसी का विरोध नहीं है. यहां स्वदेशी नीति का मतलब है कि हमें अपने उत्पादों पर भरोसा करना चाहिए. हमें अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहिए. गांधी जी ने भी स्वदेशी को बढ़ावा दिया था. हमें 'मेक इन इंडिया' को और मजबूत करना चाहिए. हमें अपनी अर्थनीति को दुरुस्त करना चाहिए. ट्रंप की नीतियां हमें और मजबूत करेंगी, क्योंकि इससे हमें अपनी ताकत को पहचानने का मौका मिलेगा. हर चुनौती में एक अवसर होता है. हमें इस अवसर को भुनाना चाहिए. हमें अपनी अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति पता नहीं क्या-क्या बोल रहे हैं कि हमारे प्रधानमंत्री उनके बयानों पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं जो उनके बड़प्पन को दिखाता है. टैरिफ का प्रभाव बहुत कम टैरिफ पर बोलते हुए उन्‍होंने बताया कि भारत क्‍या करे तो इसका प्रभावि‍त कम हो सकता है. हालांकि उससे पहले उन्‍होंने कहा कि मुझे पूरी उम्‍मीद है कि टैरिफ का असर ज्‍यादा समय तक नहीं रहने वाला है. यह कुछ समय तक ही है, जिसके बहुत ज्‍यादा असर पड़ने वाला नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका रास्‍ता तलाश लेंगे. उन्‍होंने टैरिफ से निपटने के लिए कुछ मंत्र भी सुझाए.  भारत को क्‍या करना चाहिए?     स्‍वामी रामदेव ने कहा कि भारत को खुलकर आना होगा और टैरिफ की क्षतिपूर्ति, अमेरिका से व्‍यापार कम करके और दूसरे देशों से व्‍यापार को बढ़ाकर करनी चाहिए. यह भारत के लिए आपदा में अवसर की तरह है.      भारत में बहुत प्रतिभाएं हैं. भारत ऑटोमोबाइल से लेकर मैन्‍युफैक्‍चरिंग और टेक्‍नोलॉजी के मामले में ग्‍लोबल लीडर क्‍यों नहीं बन सकता है? हमे देसी प्रोडक्‍ट्स को प्रमोर्ट करना होगा और इसे अवसर के तौर पर देखना चाहिए.      पहले चीन में भी बहुत बूरी स्थिति आई थी. वहां कंगाली आ चुकी थी, लेकिन अपने आर्थिक नीतियों में बदलाव के कारण वह बहुत आगे निकल चुका है. हमारे देश में भी बड़ी क्षमताएं हैं. हम भी चीन की तरह आगे बढ़ सकते हैं.       स्‍वामी रामदेव ने कहा कि ट्रंप के टैरिफ से डरने की बात नहीं है. समय के साथ सबकुछ ठीक हो जाएगा. अभी अपने सभी प्रोडक्‍ट्स को प्राथमिकता देने की जरूरत है. स्‍वदेशी का पूरा इस्‍तेमाल होना चाहिए.      उन्‍होंने कहा कि भारत सबसे बड़ा कंज्‍युमर है. ऐसे में हमे अपने शक्ति का इस्‍तेमाल करना चाहिए. हमारे अंदर बहुत सामर्थ्‍य है. रामदेव ने आगे कहा कि भारत को मजबूती से जमीन पर उतरकर काम करना होगा. हमारे पास वैश्‍वक अवसर है. हम बाकी देशों तक पहुंच बढ़ा सकते हैं. हमे पूरे दमखम के साथ काम करना होगा. 

हंगामा खत्म, सैयदा हमीद ने बदली अपनी राय, बांग्लादेशियों को वापस भेजने का फैसला टला

नई दिल्ली  बांग्लादेशियों के पक्ष में बयान देकर विवादों में घिरीं सामाजिक कार्यकर्ता और योजना आयोग की पूर्व सदस्य सैयदा हमीद ने अब अपनी ही बात पर यू-टर्न ले लिया है और कहा है कि अवैध रूप से घुसे बांग्लादेशियों को देश से बाहर किया जाना चाहिए। हमीदा की ताजा टिप्पणी भारी विरोध और सियासी विवादों के बाद आई है। उन्होंने मंगलवार को एक कार्यक्रम में अपने बयान पर यू-टर्न लिया। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हमीद ने स्वीकार किया कि उनकी टिप्पणी से हलचल मच गई थी। सैयदा हमीद ने कहा, "असम का मेरा अनुभव बेहद खूबसूरत है… 1997 से महिला आयोग और योजना आयोग का हिस्सा रहते हुए, मैं असम के हर हिस्से में गई हूँ। लेकिन मुझे कभी इस बात का एहसास नहीं हुआ कि मैं एक मुसलमान और एक महिला हूँ… अचानक, मेरा नाम पूरे भारत में गूंजने लगा… बांग्लादेशी अब एक अपशब्द बन गया है। यह अब एक भयावह शब्द बन गया है।" उन्होंने आगे कहा, “अगर कुछ बांग्लादेशी भी आ गए हैं, तो उनके साथ बैठिए, उनसे बातचीत कीजिए और उन्हें वापस भेजिए।” सैयदा हमीद ने पहले क्या कहा था? इससे पहले सैयदा हमीद ने रविवार को कहा था, "बांग्लादेशी भी इंसान हैं; धरती बहुत बड़ी है, बंगलादेशी भी यहाँ रह सकते हैं… अल्लाह ने यह धरती इंसानों के लिए बनाई है, शैतान के लिए नहीं। किसी इंसान को इतनी बेरहमी से क्यों निकाला जाए।" इसके साथ ही उन्होंने असम की हिमंता विस्वा सरमा सरकार पर बेदखली अभियानों के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ अमानवीय कृत्य करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि असम सरकार मुसलमानों को बंगलादेशी बता रही है। असम में मच गया था सियासी भूचाल हमीद के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि हमीद अवैध घुसपैठियों का समर्थन कर रही हैं और उनके बयान को इसका सबूत बताया था। सरमा ने कहा था कि ऐसे लोग ही ‘‘असम को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने के जिन्ना के सपने को साकार करने’’ की कोशिश करते हैं। उन्होंने दावा किया कि हमीद जैसे लोगों के मौन समर्थन के कारण असमिया लोगों की पहचान विलुप्त होने के कगार पर है। मुख्यमंत्री सरमा ने मानवाधिकार कार्यकर्ता हमीद को गांधी परिवार का करीबी और विश्वासपात्र भी बताया था। हिंदू सेना का विरोध-प्रदर्शन विवाद मचने के बाद हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने सैयदा हमीद की हालिया टिप्पणी के खिलाफ मगलवार को प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि वह असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों का बचाव कर रही हैं। यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली के ‘कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब’ में हुआ, जहां हमीद ने नागरिक मंच असम नागरिक सम्मेलन द्वारा आयोजित ‘असम के विशेष संदर्भ में राष्ट्र की स्थिति’ विषय पर एक संगोष्ठी में शिरकत की थी। संगोष्ठी में हमीद ने असम में मुसलमानों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर चिंता व्यक्त करते हुए कथित तौर पर कहा था कि उन्हें अक्सर बांग्लादेशी करार दिया जाता है।

मणिमहेश यात्रा संकट में, हिमाचल में बारिश और सिग्नल कटने से परिजन परेशान

शिमला हिमाचल प्रदेश में बीते 72 घंटे में मौसम ने जमकर कहर ढाया है. हालांकि, गनीमत रही कि फ्लेश फ्लड और लैंडस्लाइड (Himachal Landslide) में कहीं किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन संपति का काफी नुकसान हुआ है. चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाईवे एक बार फिर से 2023 में आई आपदा की तरह टूट गया है और कुल्लू से मनाली के बीच में जगह जगह ब्यास नदी हाईवे को बहा ले गई है. ऐसे में इसे बनाने में लंबा वक्त लग सकता है. हालांकि राहत की बात है कि प्रदेश में बुधवार को धूप खिली है और कुल्लू मनाली में भी बारिश थम गई है. अब ब्यास नदी का जलस्तर धीरे धीरे कम होने लगा है. जानकारी के अनुसार, बीते 24 घंटे में कुल्लू और मनाली में ब्यास नदी की वजह से रेस्टोरेंट, दुकान और कई पुल बह गए. कुल्लू के अखाड़ा बाजार के पास एक दुकान नदी में समा गई. वहीं, ओल्ड मनाली को जोड़ने वाला पुल टूट गया. लेफ्ट बैंक में ट्रक और जीप नदी में बह गई. बुधवार को कुल्लू के मनाली, बंजार और सदर में स्कूल कॉलेज बंद रहेंगे. चंबा में हजारों लोग फंस चंबा के भरमौर में मणिमहेश यात्रा पर गए हजारों लोग वहां फसें हैं. यहां पर मोबाइल नेटवर्क उड़ गए हैं. हिमाचल प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र (HP LSA), दूरसंचार विभाग के अपर महानिदेशक टेलीकॉम ने सूचित किया है कि चंबा शहर और भरमौर उप मंडल , जिला चंबा में इंट्रा-सर्कल रोमिंग (ICR) सुविधा7 दिनों के लिए, अर्थात 01 सितम्बर 2025 तक के लिए सक्रिय कर दी गई है/ यह पहल प्रभावित क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी को बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है. इस क्षेत्र के मोबाइल उपभोक्ता अपने डिवाइस की सेटिंग्स में जाकर किसी भी उपलब्ध मोबाइल नेटवर्क का मैन्युअल रूप से चयन कर सकते हैं, चाहे वह उनके मूल सेवा प्रदाता का नेटवर्क न हो. ICR सुविधा की अवधि के दौरान उपभोक्ता किसी भी ऐसे टेलीकॉम ऑपरेटर के नेटवर्क से जुड़कर सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे जिसकी उस क्षेत्र में कवरेज उपलब्ध है. इस अस्थायी व्यवस्था का उद्देश्य बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के कारण उत्पन्न व्यवधान के दौरान निर्बाध मोबाइल संचार सुनिश्चित करके सहायता प्रदान करना है. 4 नेशनल हाइवे और 677 सड़कें बंद हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश से हालात बिगड़ गए हैं. राज्य भर में सड़क और मोबाइल नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, प्रदेश में 4 नेशनल हाइवे और 677 सड़कें बंद हो गई हैं. कुल्लू–मनाली मार्ग पूरी तरह कट गया है. चंडीगढ़–मनाली नेशनल हाईवे–21 मंडी में कई स्थानों पर अवरुद्ध है. मंडी–पठानकोट एनएच–154 भी बंद पड़ा है. एनएच–305 कुल्लू के बंजार क्षेत्र में और एनएच–03 किन्नौर के बिगुलसरी में बाधित है. जिला वार स्थिति देखें तो बिलासपुर में 13, हमीरपुर में 5, कांगड़ा में 67, किन्नौर में 1, कुल्लू में 131, मंडी में 342, शिमला में 45, सिरमौर में 36, सोलन में 19 और ऊना में 18 सड़कें बंद हैं. वहीं चंबा और लाहौल–स्पीति से नेटवर्क बाधित होने के कारण रिपोर्ट नहीं मिल पाई है. भारी बारिश के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और प्रशासन लगातार हालात पर नज़र बनाए हुए है. मंगलवार शाम को आपदा प्रबंधन ने यह जानकारी सांझा की है.