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केंद्र सरकार के फंड पर निशाना, पीएम मोदी ने ममता बनर्जी पर साधा वार

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के दौरे पर गए हैं और इस दौरान उन्होंने जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राज्य की टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) सरकार पर जमकर निशाना साधा। जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल में विकास कार्यों के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती है। चुनौती ये है कि बंगाल के लिए जो पैसा हम सीधे राज्य सरकार को भेजते हैं, उसमें से ज़्यादातर हिस्सा लूट लिया जाता है। वो पैसा TMC कैडर पर खर्च होता है, यही वजह है कि गरीब कल्याण की कई योजनाओं में बंगाल देश के दूसरे राज्यों से पीछे है। 'BJP ने हर प्रकार की मदद की' उन्होंने कहा, "बीते 11 वर्षों में केंद्र की BJP सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए लगातार हर प्रकार की मदद दी है। बंगाल में नेशनल हाईवे के निर्माण के लिए जितना पैसा कांग्रेस की UPA सरकार ने अपने 10 साल में दिया था। उससे 3 गुना से ज्यादा पैसा हमारी भारत सरकार ने बंगाल को दिया है।" पीएम मोदी ने कहा कि रेलवे के लिए भी बंगाल का बजट पहले की तुलना में तीन गुना बढ़ाया गया है। पश्चिम बंगाल आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक है। इसलिए जब तक पश्चिम बंगाल का सामर्थ्य नहीं बढ़ेगा, तब तक विकसित भारत की यात्रा सफल नहीं हो पाएगी। क्योंकि BJP मानती है कि जब बंगाल का उदय होगा, तभी विकसित भारत बनेगा। पीएम मोदी ने दुर्गा पूजा पर की बात उन्होंने कहा, "मैं ऐसे समय में कोलकाता आया हूं जब दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू हो गई है। कोलकाता नए रंग में नई रौनक के साथ सज रहा है। आस्था और आनंद के पर्व के साथ जब विकास का पर्व भी जुड़ जाता है तो खुशी दोगुनी हो जाती है। यहां से कुछ ही दूरी पर मुझे कोलकाता मेट्रो और हाइवे से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के शिलान्यास और लोकार्पण का अवसर मिला है।" पीएम ने कहा कि बीते 11 साल में यहां भारत सरकार द्वारा अनेक बड़े हाइवे प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं, बहुत सारे प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। जब 6 लेन का कोना एक्सप्रेस वे बनकर तैयार हो जाएगा, तो इससे पोर्ट की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।ये कनेक्टिविटी कोलकाता और पश्चिम बंगाल के बेहतर भविष्य की नींव को मजबूत करेगी। 'सरकार ने जनता की मांग पूरी की' उन्होंने कहा, "भारत सरकार पश्चिम बंगाल के विकास के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। आज पश्चिम बंगाल देश के उन राज्यों में शामिल हो चुका है, जहां रेलवे का शत-प्रतिशत बिजलीकरण हो चुका है। लंबे समय से पुरुलिया से हावड़ा के बीच मेमू ट्रेन की मांग हो रही थी, भारत सरकार ने जनता की ये मांग भी पूरी कर दी है।"  

डेंगू की चपेट में बांग्लादेश, 24 घंटे में 5 लोगों की मृत्यु

ढाका बांग्लादेश में डेंगू से एक दिन में पांच लोगों की मौत हुई है, जो इस साल का सबसे बड़ा एक दिवसीय आंकड़ा है। देश के स्वास्थ्य महानिदेशालय के अनुसार, अब तक डेंगू से मरने वालों की संख्या बढ़कर 110 हो गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में सुबह 8 बजे तक 311 नए मरीज सामने आए, जिससे इस साल डेंगू संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 27,782 हो गए हैं। साल 2024 में बांग्लादेश में डेंगू के एक लाख से ज्यादा मामले और 575 मौतें दर्ज की गई थीं, जबकि 2023 में डेंगू से 1,705 लोगों की जान गई थी, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा है। डेंगू एक वायरल बीमारी है जो एडीज मच्छरों के काटने से फैलती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द, ग्रंथियों में सूजन, उल्टी और चकत्ते शामिल हैं। जून से सितंबर के बीच का मानसून काल बांग्लादेश में डेंगू का मुख्य मौसम माना जाता है। हाल के वर्षों में यह बीमारी देश में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इस साल डेंगू के मामले और मौतें पिछले पांच सालों की समान अवधि की तुलना में कहीं ज्यादा हैं। डेंगू के मामले मई 2023 से तेजी से बढ़ने लगे थे और अब तक चरम पर नहीं पहुंचे हैं। देश के सभी 64 जिलों से मामले दर्ज किए गए हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र ढाका सिटी कॉर्पोरेशन है, जहां से कुल मामलों का 52.8 प्रतिशत और मौतों का 78.9 प्रतिशत सामने आया है। अन्य प्रभावित क्षेत्रों में चटगांव (13.2 प्रतिशत मामले, 9.2 प्रतिशत मौतें), ढाका डिवीजन (ढाका शहर को छोड़कर) (11.6 प्रतिशत मामले, 2.8 प्रतिशत मौतें) और बरिसाल डिवीजन (10.5 प्रतिशत मामले, 4.3 प्रतिशत मौतें) शामिल हैं। सिलहट डिवीजन में अब तक सबसे कम 560 मामले दर्ज हुए हैं और यहां किसी की मौत नहीं हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 25 अगस्त को गुजरात के दौरे पर, 1,400 करोड़ रुपए से अधिक की रेल परियोजनाओं की देंगे सौगात

नई दिल्ली/गांधीनगर,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 25 अगस्त को गुजरात के दौरे पर रहेंगे, जहां वे 1,400 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न रेलवे परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह परियोजनाएं विशेष रूप से उत्तर गुजरात के महेसाणा, पाटन, बनासकांठा, गांधीनगर और अहमदाबाद जिलों को लाभान्वित करेंगी। यह रेलवे परियोजनाएं क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स दक्षता और रोजगार सृजन में उल्लेखनीय योगदान देंगी। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रेलवे की जो परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित की जाएंगी उनमें 537 करोड़ रुपए की लागत से तैयार महेसाणा–पालनपुर रेल लाइन (65 किमी) का दोहरीकरण, 347 करोड़ रुपए की लागत से कलोल-कड़ी-कटोसन रोड रेल लाइन (37 किमी) का गेज कन्वर्जन और 520 करोड़ रुपए की लागत से बेचराजी-रणुंज रेल लाइन (40 किमी) का गेज कन्वर्जन शामिल है। ये रेलवे परियोजनाएं विशेष रूप से उत्तर गुजरात के महेसाणा, बनासकांठा और पाटण जिले को ब्रॉडगेज लाइन के माध्यम से सहज, सुरक्षित और निर्बाध संपर्क प्रदान करेंगी। इससे दैनिक यात्रियों, पर्यटकों और व्यवसायों के लिए आवागमन अधिक सरल और तेज होगा। साथ ही, क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। अतिरिक्त लाइन क्षमता के कारण अहमदाबाद-दिल्ली मार्ग पर तेज गति से ट्रेनों का संचालन संभव होगा। इससे अधिक यात्री ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा और मालगाड़ियों की गति एवं दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। इस प्रकार यह परियोजनाएं गुजरात की आर्थिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान करेंगी। बेचराजी-रणुंज रेल लाइन का गेज कन्वर्जन नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान फॉर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के अनुरूप किया गया है। इसका उद्देश्य लॉजिस्टिक लागत को कम करना और गुजरात राज्य की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स रैंकिंग में और बेहतर सुधार लाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहल उत्तर गुजरात की सामाजिक-आर्थिक प्रगति को और गति प्रदान करेगी। साथ ही, भारत के लॉजिस्टिक्स और रेलवे क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करेगी। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी कटोसन रोड और साबरमती के बीच यात्री ट्रेन सेवा कड़ी से एवं बेचराजी से कार-लोडेड मालगाड़ी सेवा का भी शुभारंभ करेंगे। कटोसन-साबरमती रोड नई ट्रेन सेवा न केवल पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच को आसान बनाएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी। इसी तरह, बेचराजी से शुरू होने वाली कार-लोडेड मालगाड़ी राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों को मजबूत कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इससे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इन दोनों रेल सेवाओं से क्षेत्र को पर्यावरण अनुकूल, टिकाऊ और उच्च गति वाला परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा। इससे न केवल यात्रा समय में कमी आएगी बल्कि क्षेत्रीय औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ये सभी रेलवे परियोजनाएं विकसित गुजरात से विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करेंगी।  

रिपोर्ट में खुलासा: सिख यात्रियों के बीच फैलाने की कोशिश थी पाकिस्तान की भारत विरोधी नैरेटिव

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां भारतीय सिख श्रद्धालुओं की आगामी पाकिस्तान यात्रा के दौरान रणनीतिक रूप से ‘भारत विरोधी नैरेटिव’ को आगे बढ़ाने की योजना बना रही हैं। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। ‘खालसा वॉक्स’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया चर्चाओं में यह बात सामने आई कि 2 अगस्त को लाहौर के होटल गुलबर्ग में एक अंतर-एजेंसी बैठक हुई, जिसमें सुरक्षा एजेंसियों, इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (पीएसजीपीसी) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में सुरक्षा एजेंसियों ने गुरुद्वारों में भारत-विरोधी बैनर और नारे लगाने का सुझाव दिया था, लेकिन ईटीपीबी और पीएसजीपीसी ने इसका कड़ा विरोध किया। रिपोर्ट में कहा गया कि ईटीपीबी के एक अतिरिक्त सचिव ने चेतावनी दी कि यदि धार्मिक यात्राओं का राजनीतिकरण हुआ तो भारत ऐसे दौरे अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर सकता है, जिससे पहले से वित्तीय संकट झेल रहे बोर्ड को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। बताया गया कि 8 मई से करतारपुर कॉरिडोर बंद होने के कारण ईटीपीबी को हर महीने लगभग 7 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, दो बड़े वार्षिक सिख तीर्थ यात्राओं के रद्द होने से स्थिति और बिगड़ गई है। अधिकारी ने कहा कि धार्मिक आयोजनों को पूरी तरह राजनीति से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं का कार्यक्रम पहले से ही कई सरकारी और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय में तैयार किया जाता है। हालांकि ईटीपीबी ने कहा कि वह संघीय निर्देशों का पालन करेगा, लेकिन धार्मिक आयोजनों की पवित्रता बनाए रखना उतना ही जरूरी है। इसके बावजूद, रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने श्रद्धालुओं के ठहरने के स्थानों के आसपास सेमिनार और बातचीत आयोजित कर ‘नकली नैरेटिव’ फैलाने की योजना बनाई है। इनमें "भारत में सिखों के साथ भेदभाव, भारत में गुरुद्वारों को निशाना बनाए जाने" जैसी बातें शामिल हैं। रिपोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान ऐतिहासिक शिकायतों, आर्थिक उपेक्षा की कथित धारणाओं और दुष्प्रचार का इस्तेमाल कर सिख प्रवासी समुदाय के एक हिस्से को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, धार्मिक यात्राओं को राजनीतिक एजेंडे से जोड़ना पाकिस्तान की एक सोची-समझी रणनीति है।  

कराची में बिजली संकट, 50 घंटे की कटौती पर नागरिकों ने किया विरोध

कराची  पाकिस्तान के कराची में हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद कई इलाकों में 50 घंटे से अधिक समय तक बिजली गुल रहने के बाद विभिन्न इलाकों में विरोध-प्रदर्शन किए गए। स्थानीय मीडिया ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अमीराबाद, बुस्तान सोसायटी, यूनिवर्सिटी रोड, टीपू सुल्तान रोड, मोइनाबाद और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों ने बताया कि मंगलवार को दोपहर करीब 2:30 बजे (स्थानीय समयानुसार) बिजली गुल हो गई। जिस दिन से शहर में भारी बारिश हुई थी, तब से बिजली सप्लाई अभी तक बहाल नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, पानी की आपूर्ति बंद होने से उनकी परेशानी और बढ़ गई। बिजली कटौती से परेशान लोगों ने के-इलेक्ट्रिक कार्यालय के बाहर धरना दिया और बार-बार की गई शिकायतों पर ध्यान न देने के लिए बिजली कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मालिर में मेहरान डिपो मार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे पीपुल्स बस सेवा ठप हो गई, जबकि लियाकत मार्केट की सड़कें बंद कर दी गईं, जिससे मॉडल कॉलोनी, जिन्ना एवेन्यू और आसपास की सड़कों पर भीषण जाम लग गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर बिजली आपूर्ति तुरंत बहाल नहीं की गई तो वे शहर के अन्य हिस्सों में भी प्रदर्शन करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी अरब सागर में बने चक्रवाती तूफान के कारण गुरुवार शाम कराची के कई हिस्सों में बारिश हुई। पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग (पीएमडी) के अनुसार, कराची के कई इलाकों में बारिश हुई, जिनमें गुलशन-ए-इकबाल, गुलशन-ए-मयमार, डालमिया रोड, ड्रिघ रोड, गुलिस्तान-ए-जौहर, एमए जिन्ना रोड, ओरंगी टाउन, हॉक्सबे और मुबारक गांव शामिल हैं। कराची में पिछले दो दिनों में मूसलाधार बारिश के बीच कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई। शहर में ये मौतें डूबने, सड़क दुर्घटनाओं और बिजली का झटका लगने से हुईं। मौसम विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि शहर के ऊपर एक बारिश लाने वाला मौसमी सिस्टम सक्रिय है। प्रवक्ता ने आगे बताया कि देर रात तक इस सिस्टम के कमजोर होने की उम्मीद है और 27 अगस्त से एक और मानसून सिस्टम सिंध में प्रवेश कर सकता है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि 27 अगस्त को सिंध में मानसून सिस्टम के नए दौर के प्रवेश की उम्मीद है, जिससे कराची और सिंध के अन्य इलाकों में 30 अगस्त तक बारिश होगी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के अनुसार, जून के अंत में मानसून सीज़न शुरू होने के बाद से पाकिस्तान में बारिश से संबंधित 700 से ज़्यादा मौतें हुई हैं।

भारत-अमेरिका: राजदूत ने की नेताओं से बातचीत, व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर फोकस

वॉशिंगटन अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने अमेरिकी नेताओं से लगातार हो रही मुलाकातों के तहत रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर बिल हेगर्टी से भेंट की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संवाद की प्रगति पर चर्चा की, जिसका उद्देश्य निष्पक्ष, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापारिक साझेदारी सुनिश्चित करना है। दोनों पक्षों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते हाइड्रोकार्बन व्यापार पर भी विचार साझा किए। क्वात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आज सीनेटर बिल हेगर्टी के साथ उपयोगी चर्चा हुई। भारत-अमेरिका साझेदारी के प्रति उनके निरंतर और मजबूत समर्थन के लिए आभारी हूं। निष्पक्ष और संतुलित व्यापारिक संबंधों पर जारी वार्ताओं की जानकारी दी। साथ ही, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हाइड्रोकार्बन व्यापार में वृद्धि पर भी विचार साझा किए।” भारतीय राजदूत ने डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद ग्रेग लैंड्समैन से भी रचनात्मक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार संवाद और ऊर्जा सुरक्षा पर हालिया प्रगति से उन्हें अवगत कराया। गुरुवार को क्वात्रा ने हाउस आर्म्ड सर्विसेज डेमोक्रेट्स के रैंकिंग सदस्य एडम स्मिथ से भी बातचीत की। इस चर्चा में भारत-अमेरिका संबंधों में हालिया घटनाक्रमों और व्यापार, ऊर्जा तथा रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर स्पष्ट विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “प्रतिनिधि एडम स्मिथ के साथ रोचक चर्चा हुई। भारत-अमेरिका रिश्तों और आपसी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर उनके निरंतर समर्थन के लिए आभारी हूं।” इसके अलावा, क्वात्रा ने अमेरिकी सांसद जोश गॉथहाइमर से भी मुलाकात की, जो हाउस इंटेलिजेंस कमेटी की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी और साइबर उपसमिति के रैंकिंग सदस्य हैं। इस बैठक में द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग, खासकर तेल और गैस व्यापार तथा संतुलित और निष्पक्ष व्यापारिक संबंधों पर विचार साझा किए गए। क्वात्रा की ये बैठकें ऐसे समय में हुई हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ बढ़ोतरी की घोषणा की। ट्रंप ने भारत के रूस से लगातार कच्चा तेल आयात करने को इसका मुख्य कारण बताया। इससे पहले 20 जुलाई को 25 प्रतिशत का एक और टैरिफ लागू हो चुका है। अमेरिकी कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यावहारिक” करार दिया। मंत्रालय ने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक स्वायत्तता का सम्मान किया जाना चाहिए।

पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे पर भ्रष्टाचार का आरोप, श्रीलंका पुलिस ने किया गिरफ्तार

कोलंबो  श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को शुक्रवार को आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने गिरफ्तार कर लिया है। वे सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप को लेकर कोलंबो स्थित सीआईडी कार्यालय में बयान दर्ज कराने गए थे, जहां उनको गिरफ्तार कर लिया गया। श्रीलंकाई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह जांच सितंबर 2023 में उनकी लंदन यात्रा से संबंधित है, जहां वे अपनी पत्नी, प्रोफेसर मैत्री विक्रमसिंघे के वॉल्वरहैम्प्टन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। जांचकर्ताओं का दावा है कि इस यात्रा और सुरक्षा खर्चों के लिए सरकारी धन का उपयोग किया गया था। पूर्व राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि उनकी पत्नी ने अपने खर्चे खुद उठाए थे और किसी भी सार्वजनिक धन का दुरुपयोग नहीं हुआ। सीआईडी ने पहले फोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत किए थे और उनके पूर्व निजी सचिव सैंड्रा परेरा और पूर्व राष्ट्रपति सचिव समन एकनायके के बयान दर्ज किए थे। शुक्रवार सुबह चार घंटे से अधिक समय तक बयान दर्ज कराने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और जल्द ही फोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किए जाने की उम्मीद है। बता दें कि मंगलवार को सीआईडी अधिकारियों का उनके पास पेश होने के लिए फोन आया था। इसके बाद उन्होंने अपने वकीलों को सूचित किया था कि वह इस सप्ताह ही उपस्थित होंगे। उनके वकीलों ने सीआईडी को बताया था कि वह शुक्रवार को पेश होंगे। विक्रमसिंघे के वकीलों ने उन्हें गिरफ्तारी के लिए तैयार रहने की सलाह दी थी। पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की पेशी से पहले फोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। विक्रमसिंघे ने जुलाई 2022 में गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफे के बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति का पद संभाला था, और सितंबर 2024 में वह चुनाव हार गए थे। वह श्रीलंका के इतिहास में गिरफ्तार होने वाले पहले पूर्व राष्ट्रपति हैं।

परिवारवाद पर अमित शाह की तीखी टिप्पणी, स्टालिन और सोनिया गांधी घिरे

चेन्नई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को तमिलनाडु में बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने एक प्रतिष्ठित तमिल नेता, सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति जैसे प्रतिष्ठित पद के लिए मनोनीत किया है। अमित शाह ने कहा कि पहलगाम में, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों ने निर्दोष नागरिकों की दुखद जान ले ली। मोदी ने देश को दृढ़ता से आश्वस्त किया कि आतंकियों और उनके कृत्यों को अंजाम देने वालों, दोनों को परिणाम भुगतने होंगे। 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया गया। इसके अलावा, 'ऑपरेशन महादेव' ने पहलगाम में हुए जघन्य हमले के लिए जिम्मेदार तीन आतंकवादियों को सफलतापूर्वक मार गिराया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने 130वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। पूरा विपक्ष एकजुट होकर इस विधेयक का विरोध कर रहा है। प्रस्तावित विधेयक में कहा गया है कि अगर किसी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को जेल होती है, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना होगा। विपक्ष ने इस विधेयक पर सवाल उठाए। हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि डीएमके के दो वरिष्ठ मंत्री लगभग आठ महीने जेल में रहे और इस दौरान उन्होंने अपने पदों से इस्तीफा नहीं दिया। किसी व्यक्ति का जेल से शासन करना अव्यावहारिक और अनुचित है। केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे कहा कि यहां तक कि डीएमके इस विधेयक को 'काला विधेयक' बताकर इसकी आलोचना कर रहा है। मैं स्टालिन को याद दिलाना चाहूंगा कि अनैतिक कार्यों में लिप्त लोगों को ऐसे आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि डीएमके सरकार देश की सबसे भ्रष्ट सरकारों में से एक है, जो कई हाई-प्रोफाइल घोटालों में फंसी है। इनमें टीएएसएमएसी शराब घोटाला, रेत खनन घोटाला, परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार और नौकरी के बदले पैसे कांड जैसे कई अन्य घोटाले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए को 18 प्रतिशत वोट शेयर मिला, जबकि हमारी सहयोगी पार्टी, एआईएडीएमके को 21 प्रतिशत वोट मिले। कुल मिलाकर इस गठबंधन को कुल वोट शेयर का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा मिला। एनडीए और एआईएडीएमके के बीच यह साझेदारी सिर्फ एक राजनीतिक सहयोग नहीं है, यह तमिलनाडु के विकास और प्रगति को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता है। अमित शाह ने परिवारवाद पर हमला करते हुए कहा कि एमके स्टालिन का एकमात्र एजेंडा अपने बेटे के लिए मुख्यमंत्री पद सुरक्षित करना है, जबकि सोनिया गांधी का प्राथमिक लक्ष्य अपने बेटे को प्रधानमंत्री बनाना है। मैं बिल्कुल स्पष्ट कर दूं कि दोनों ही अपनी महत्वाकांक्षाओं में विफल रहेंगे, क्योंकि एनडीए पूरी तरह से जीत की ओर अग्रसर है।

सेना अलर्ट पर: चीन की ओर से बढ़ाया तनाव, भेजे गए 14 जहाज और ड्रोन

मनीला दक्षिण चीन सागर में तनाव एक बार फिर चरम पर है। चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए फिलीपींस सैन्य बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। चीन ने विवादित सेकंड थॉमस शोल के पास अपने तटरक्षक जहाजों और कई मिलिशिया पोतों को तैनात किया है। फिलीपींस के सैन्य अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि चीन ने विवादित दक्षिण चीन सागर के तटवर्ती क्षेत्र में लंबे समय से खड़े फिलीपीन युद्धपोत- बीआरपी सिएरा माद्रे के निकट तटरक्षक जहाजों और कई मिलिशिया जहाजों को तैनात किया है। उन्होंने कहा कि कम से कम 14 चीनी तटरक्षक और संदिग्ध मिलिशिया जहाज उनके युद्धपोत के आसपास निगरानी में देखे गए हैं। चीन की नेवी फोर्स बुधवार को देखी गई थी और गुरुवार को भी क्षेत्र में मौजूद बताई गई है। इनमें से कुछ हाई-कैलिबर हथियारों से लैस हैं और एक शिप पर हेलीकॉप्टर व ड्रोन भी देखे गए हैं। अधिकारी ने बताया कि चीनी सेना को करीब आने से रोकने के लिए सिएरा माद्रे से दो नावों के जरिए फिलीपीन सेना तैनात की गई थी। विवाद का केंद्र: सेकंड थॉमस शोल सेकंड थॉमस शोल को फिलीपीन में आयुंगिन शोल और चीन में रेन’आई रीफ के नाम से जाना जाता है। यह दक्षिण चीन सागर में एक प्रमुख विवादित क्षेत्र है। यह शोल फिलीपीन के 200-नॉटिकल मील विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर स्थित है, लेकिन चीन इसे अपने “नाइन-डैश लाइन” दावे के हिस्से के रूप में मानता है। 1999 में, फिलीपीन ने इस क्षेत्र में अपनी संप्रभुता को बनाए रखने के लिए बीआरपी सिएरा माद्रे नामक एक पुराने युद्धपोत को जानबूझकर इस शोल पर तैनात किया था, जो अब एक क्षेत्रीय चौकी के रूप में कार्य करता है। अतीत में, चीन ने बार-बार मांग की है कि फिलीपींस बीआरपी सिएरा माद्रे को शोल से हटा ले। फिलीपींस ने चीन की मांग को मानने से इनकार कर दिया है। फिलीपीन नौसेना के प्रवक्ता रियर एडमिरल रॉय त्रिनिदाद ने एसोसिएटेड प्रेस को टेलीफोन पर बताया, "उनकी कार्रवाइयों और संख्या में वृद्धि के कारण यह चिंताजनक है। अगर स्थिति बिगड़ती है, तो हमारे पास एक आकस्मिक योजना तैयार है। इन सभी बलपूर्वक और आक्रामक कार्रवाइयों के बीच, कमांडर-इन-चीफ का निर्देश बिल्कुल स्पष्ट है: हम अपने क्षेत्र, संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों के विरुद्ध किसी भी खतरे से पीछे नहीं हटेंगे।" त्रिनिदाद ने बताया कि घटनास्थल पर मौजूद पांच चीनी तटरक्षक जहाजों में से एक ने बिना किसी लक्ष्य के अपनी वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, चीनी की छोटी नावों को उथले पानी के प्रवेश द्वार पर जाल डालते देखा गया, जहां से फिलीपीन जहाज पहले सिएरा माद्रे को आपूर्ति पहुंचाने के लिए गुजरते थे। बड़ी प्लानिंग से आई है चीनी सेना? फिलीपींस की सेना ने एक बयान में कहा, "चीनी तटरक्षक बल के जहाजों को समुद्र में पानी की बौछारों का इस्तेमाल करते हुए युद्धाभ्यास और अभ्यास करते देखा गया है, जबकि कई छोटे जहाज, जैसे कठोर पतवार वाली फुलाने वाली नावें और तेज नावें, भी उथले पानी में तैनात की गई हैं। चीनी तटरक्षक बल की कुछ तेज नावें भारी चालक दल वाले हथियारों सहित माउंटेड हथियारों से लैस देखी गईं।" हाल की घटनाएं और बढ़ गया तनाव फिलीपीन सैन्य अधिकारियों के अनुसार, चीनी बलों की इस तैनाती ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। बीआरपी सिएरा माद्रे से दो नावों में सवार फिलीपीन सैनिकों को तैनात किया गया है ताकि चीनी जहाजों को और करीब आने से रोका जा सके। चीनी अधिकारियों ने इस सैन्य बयान पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अतीत में वे बार-बार मांग कर चुके हैं कि फिलीपीन बीआरपी सिएरा माद्रे को शोल से हटाए। इससे पहले, जून 2024 में सेकंड थॉमस शोल पर एक हिंसक टकराव हुआ था, जिसमें फिलीपीन नौसेना के कर्मियों को चोटें आई थीं, जिसमें एक सैनिक का अंगूठा भी कट गया था। इस घटना के बाद, चीन और फिलीपीन ने टकराव को रोकने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था की थी, जिसके तहत चीनी तटरक्षक और नौसेना बल शोल से दूरी बनाए रखते थे और फिलीपीन सैनिक बीआरपी सिएरा माद्रे को सप्लाई और सैनिकों की तैनाती बिना किसी बाधा के कर सकते थे। इस समझौते के बाद, फिलीपीन नौसेना ने कम से कम आठ बार बिना किसी घटना के आपूर्ति और सैनिकों को पहुंचाया, जिसमें केवल तीन से चार चीनी तटरक्षक जहाज दूर से निगरानी करते थे। पिछली घटनाएं और क्षेत्रीय तनाव यह ताजा तैनाती उस समय हुई है जब कुछ ही दिन पहले, 11 अगस्त को, स्कारबोरो शोल के पास एक चीनी नौसेना जहाज और तटरक्षक पोत के बीच टक्कर हुई थी। यह घटना तब हुई जब दोनों चीनी जहाज फिलीपीन तटरक्षक जहाज बीआरपी सुलुआन का पीछा कर रहे थे, जो मछुआरों को सहायता प्रदान करने के लिए एक मिशन पर था। इस टक्कर में चीनी तटरक्षक जहाज को भारी नुकसान हुआ और वह समुद्र में चलने लायक नहीं बचा था। फिलीपीन तटरक्षक ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे “खतरनाक युद्धाभ्यास” करार दिया और चीनी चालक दल को सहायता की पेशकश की, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। 

PM-CM से जुड़े नए बिल पर बोले अमित शाह, केजरीवाल पर भी की कटाक्ष

तिरुवनंतपुरम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इन दिनों केरल के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के उस बिल का भी जिक्र किया जिसके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री अगर गंभीर आपराधिक आरोपों में 30 दिन से ज्यादा हिरासत में रहते हैं तो पद से हटा दिए जाएंगे. अमित शाह ने एक निजी चैनल से बातचीत करते हुए कहा कि  दिल्ली के (पूर्व) मुख्यमंत्री जेल जाने के बाद भी सरकार चला रहे थे, अगर जेल जाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया होता, तो आज इस बिल की जरूरत ही नहीं होती. अमित शाह ने कहा कि क्या देश की जनता चाहती है कि कोई भी मुख्यमंत्री जेल में रहकर सरकार चलाए? अब ये लोग (विपक्षी दल) कहते हैं कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान पहले क्यों नहीं हुआ? अरे, जब संविधान बना था, तब ऐसे निर्लज्ज लोगों की कल्पना ही नहीं की गई थी कि जेल जाने के बाद भी इस्तीफा नहीं देंगे. साथ ही कहा कि ये बिल किसी पार्टी के लिए नहीं है, ये बिल भाजपा के मुख्यमंत्रियों पर भी लागू होगा और प्रधानमंत्री पर भी लागू ​होगा.  केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि 70 साल पहले एक ऐसी घटना हुई थी, जिसमें कई मंत्री और मुख्यमंत्री जेल गए थे और जेल जाने से पहले सबने इस्तीफा दे दिया था. लेकिन कुछ समय पहले एक घटना हुई, जिसमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री जेल जाने के बाद भी सरकार चला रहे थे. तो सवाल उठता है कि संविधान बदलना चाहिए या नहीं बदलना चाहिए? लोकतंत्र में नैतिकता का स्तर बनाए रखने की जिम्मेदारी सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की है. बिल में क्या प्रावधान है? केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक बिल पेश किया है, इस पर काफी विवाद हो रहा है. प्रस्तावित बिल में लिखा है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी मंत्री पर ऐसी धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज होता है, जिनमें 5 साल या उससे ज्यादा सज़ा का प्रावधान है, तो ऐसी स्थिति में गिरफ्तार होने के 31वें दिन उन्हें अपना पद छोड़ना होगा और अगर वो ऐसा नहीं करेंगे. तो गिरफ्तारी के 31वें दिन खुद-ब-खुद इस पद से उन्हें हटा दिया जाएगा. ऐसी स्थिति में भारत के राष्ट्रपति देश के प्रधानमंत्री की सलाह पर उस केन्द्रीय मंत्री को उसकी गिरफ्तारी के 31वें दिन तक उसके पद से हटा सकते हैं. अगर किसी वजह से देश का प्रधानमंत्री इस पर कोई फैसला नहीं लेता और वो केन्द्रीय मंत्री को बचाने की कोशिश करते हैं, तो ऐसी स्थिति में वो केन्द्रीय मंत्री अपनी गिरफ्तारी के 31वें दिन खुद इस पद से हट जाएगा और उनसे सारी ज़िम्मेदारी वापस ले ली जाएगी. इसी तरह अगर प्रधानमंत्री को किसी आपराधिक मुकदमे में गिरफ्तार किया जाता है, तो प्रधानमंत्री को भी गिरफ्तारी के 31वें दिन तक इस्तीफा देना होगा और अगर वो ऐसा नहीं करते तो वो भी खुद-ब-खुद इस पद से हटा दिए जाएंगे. यहां दोनों मामलों में छूट ये होगी कि कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद सत्तारूढ़ पार्टी चाहे तो वो उस नेता को फिर से प्रधानमंत्री या केन्द्रीय मंत्री चुन सकती है.  इसी तरह के प्रावधान राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों पर भी लागू होंगे, जिसके लिए अनुच्छेद 164 में एक नया भाग जोड़ा जाएगा. इसके तहत राज्य सरकार में कोई मंत्री गिरफ्तार होता है तो राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर 31वें दिन तक उस मंत्री को उसके पद से हटा सकते हैं और अगर खुद मुख्यमंत्री ही गिरफ्तार हो जाएं तो उन्हें भी 30 दिनों तक जेल में रहने के बाद 31वें दिन इस पद से हटा दिया जाएगा या उन्हें भी इससे पहले इस्तीफा देना होगा.