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अमित शाह बोले, राहुल गांधी कर रहे हैं संस्थाओं पर विश्वास कम करने का प्रयास

कोच्चि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोच्चि में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं को मान न दिए जाने का आरोप लगाया। शाह आगामी महत्वपूर्ण स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर भाजपा के राज्य नेतृत्व को तैयार करने हेतु शुक्रवार को केरल की वाणिज्यिक राजधानी कोच्चि के एक दिवसीय दौरे पर हैं। एक कार्यक्रम में शाह ने बताया कि देश को नुकसान पहुंचाने वाली स्थितियां पिछली सत्ता की देन है। उन्होंने कहा, “जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टिकरण देश के लिए नासूर जैसा है। 2014 में नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद इन तीनों की जगह ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफॉर्मेंस’ की शुरुआत हुई है और जिसे पूरा देश अनुभव कर रहा है। करप्शन को दूर करने का प्रयास देश के पीएम ने किया है। चूंकि स्थिरता है, इसलिए लंबे समय तक नीतियां चल रही हैं। इस 11 साल के कालखंड को जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो पाते हैं कि जनता के देश में पहले जो सवाल था कि भविष्य कैसा होगा, वो अब नहीं है। आज 140 करोड़ लोग मानते हैं कि 2047 में भारत टॉप पर होगा और इसे लेकर कोई कंफ्यूजन नहीं है। वहीं, राहुल गांधी को लेकर पूछे गए सवाल पर बोले, जब से वो मुखिया बने हैं तब से संवैधानिक संस्थाओं को शक की नजर से देख रहे हैं। अभी जो एसआईआर हो रहा है, वो 2003 में भी हुआ था, 1961 में भी हुआ था और 1970 में भी हुआ था। तो अब समस्या क्या है? अगर एसआईआर से कोई भी नागरिक या राजनीतिक पार्टी संतुष्ट नहीं है, तो वह असेंबली के रिटर्निंग ऑफिसर, जिला कलेक्टर और राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर के सामने अपील कर सकता है। शाह ने सदन में पेश तीन विधेयकों को लेकर कहा कि लोकतंत्र में नैतिकता का स्तर बनाए रखने की जिम्मेदारी सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की है। ये बिल किसी पार्टी के लिए नहीं है। ये बिल भाजपा के मुख्यमंत्रियों पर भी लागू होगा और प्रधानमंत्री पर भी लागू होगा। बता दें कि मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संघ राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) बिल 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025 और संविधान (130वां संशोधन) बिल 2025 पेश किए थे। जिसमें प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति गिरफ्तार होकर जेल से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री के रूप में शासन नहीं चला सकता है। विपक्ष ने इन बिलों का विरोध किया।  

कोकिला बेन की तबीयत अचानक बिगड़ी, मुंबई अस्पताल में भर्ती

मुंबई  भारत के दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी की मां कोकिला बेन की तबीयत बिगड़ गई है। मुकेश और अनिल अंबानी की मां कोकिलाबेन अंबानी को एयरलिफ्ट करके मुंबई के HN रिलायंस हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। उनकी सेहत को लेकर अभी पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है। हालांकि, बढ़ती उम्र के चलते स्थिति गंभीर होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं। अभी तक, अंबानी परिवार की तरफ से उनकी सेहत को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर इस दौरान कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें अंबानी परिवार के सदस्यों को दक्षिण मुंबई में स्थित रिलायंस हॉस्पिटल पहुंचते हुए नजर आ रहे हैं। इसी के साथ उनकी सेहत को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। ताया जा रहा है कि वह इस वक्त डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं। गुजरात के जामनगर में हुआ था जन्म 24 फरवरी, 1934 को गुजरात के जामनगर में पैदा हुईं कोकिलाबेन अंबानी को अंबानी परिवार की कुलमाता माना जाता है। उन्हें न केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज के फाउंडर दिवंगत धीरूभाई अंबानी की पत्नी के रूप में, बल्कि तेजी से बदलते इस दौर में परिवार का मार्गदर्शन और समर्थन करने में उनकी भूमिका के लिए भी सम्मान दिया जाता है। परिवार को एकजुट रखने में भी उनकी भूमिका है। मुश्किल घड़ी में भी परिवार को संभाला साल 2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद उनके दोनों बेटों मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के रास्ते अलग हो गए। बिना वसीयत छोड़े धीरूभाई अंबानी दुनिया से चल बसे, तो दोनों भाइयों के रिश्ते में खटास आ गई। जबकि कभी ये दोनों एक-दूसरे जान छिड़कते थे। उस दौरान भी कोकिलाबेन ने स्थिति को संभाला और समाधान निकालते हुए कारोबार का बंटवारा किया। फिर बाद में चलकर दोनों भाइयों के रिश्ते फिर पटरी पर आने लगे। बंटवारे में मुकेश अंबानी के हिस्‍से में पेट्रोकेमिकल्‍स सहित तेल और गैस, रिफाइनिंग और टेक्‍सटाइल्‍स आए। वहीं अनिल अंबानी को फाइनेंशियल सर्विसेज, पावर, एंटरटेनमेंट और टेलीकॉम का कारोबार संभालने के लिए दिया गया। समाज सेवा से जुड़ी कोकिलाबेन कोकिलाबेन बड़े पैमाने पर समाज सेवा के कार्यों से भी जुड़ी हुई हैं। मुंबई स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल का नाम उनके सम्मान में उनके नाम पर रखा गया है, जो एक मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल है। यह सामाजिक कल्याण के प्रति उनकी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता का ही एक सबूत है।

अमेरिका में वीजा धारकों पर शिकंजा, ट्रंप प्रशासन ने बनाए कड़े नियम

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वीजा नियमों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने करीब 5.5 करोड़ (55 मिलियन) वीजा धारकों की संपूर्ण समीक्षा (Review) शुरू की है। इस समीक्षा का उद्देश्य है यह देखना कि किसी ने वीजा की शर्तों का उल्लंघन तो नहीं किया है और अगर किया है तो उस पर डिपोर्टेशन (देश से निकाला जाना) की कार्रवाई की जा सके। किन-किन पर पड़ेगा असर? इस फैसले का असर अमेरिका में रह रहे सभी वीजा होल्डर्स पर पड़ सकता है, जैसे:     छात्र (Student Visa)     वर्क वीजा वाले कर्मचारी (H1-B, L1 वीजा आदि)     फैमिली वीजा धारक (Spouse/Dependent Visa)     पर्यटक या विज़िटर वीजा पर आए लोग     ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई कर चुके लोग सरकार की दलील क्या है? एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार:"अगर किसी व्यक्ति के वीजा रिकॉर्ड में ओवरस्टे (यानी तय समय से ज्यादा रुकना), आपराधिक गतिविधि, सुरक्षा के लिए खतरा, या आतंकवाद से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी मिलती है, तो उसका वीजा कभी भी रद्द किया जा सकता है।" यानी कि अगर कोई वीजा धारक नियमों के उल्लंघन में पकड़ा जाता है तो बिना किसी पूर्व चेतावनी के उनका वीजा सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है। कौन कर रहा है यह जांच? यह जांच अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की ओर से की जा रही है। सभी वीजा धारकों की पृष्ठभूमि (Background) की जांच की जा रही है। इसमें पुलिस रिकॉर्ड, इमिग्रेशन हिस्ट्री, और कोर्ट केस तक की जानकारी शामिल होगी। क्यों हो रही है चिंता? इमिग्रेंट एडवोकेसी ग्रुप्स (प्रवासी अधिकार संगठनों) ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक:     यह प्रक्रिया अत्यधिक कठोर और भेदभावपूर्ण हो सकती है।     बिना स्पष्ट वजह के भी कई लोगों का वीजा रद्द किया जा सकता है।     ऐसे फैसलों से विदेशी छात्रों और कुशल कामगारों में डर का माहौल बन सकता है। पहले भी ट्रंप प्रशासन ने किए थे सख्त फैसले डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल में इमिग्रेशन नीति पहले से ही काफी सख्त रही है। इससे पहले उन्होंने मुस्लिम बैन लगाया था, जिसमें कुछ देशों के नागरिकों को अमेरिका आने से रोका गया था। H1-B वीजा की प्रक्रिया को कड़ा किया था और डीएसीए (DACA) जैसे कार्यक्रमों को खत्म करने की कोशिश की थी, जिससे लाखों युवा अप्रवासी प्रभावित हुए थे। भारतीयों पर क्या असर? अमेरिका में लाखों भारतीय छात्र और आईटी प्रोफेशनल्स H1-B, F1 और अन्य वीजा पर रहते हैं। ऐसे में इस फैसले से भारत के हजारों परिवारों और पेशेवरों पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर वे लोग जिनकी वीजा वैधता को लेकर कोई पेचीदगी है — उन्हें डिपोर्टेशन का नोटिस मिल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों को वापस छोड़ने पर लगी रोक हटाई, लेकिन खाना हर जगह न देने की शर्त रखी

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें शेल्टर होम में स्थायी रूप से रखने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि हम पिछले आदेश में कुछ संशोधन कर रहे हैं. जस्टिस विक्रम नाथ ने आदेश पढ़ते हुए कहा कि हमने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्ष बनाया है ताकि राष्ट्रीय पॉलिसी पर बात हो सके. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि कुत्तों को वापस छोड़ने पर लगी रोक को हटा दिया है. कोर्ट ने कहा कि रेबीज और खतरनाक कुत्तों को न छोड़ा जाए. अदालत ने ये भी कहा कि जिन कुत्तों को पकड़ा गया था उन्हें वैक्सिनेट कर वापस छोड़ा जाए. इसके अलावा बीमार और आक्रामक कुत्तों को शेल्टर होम में ही रखा जाएगा. कोर्ट ने कहा कि कहीं भी कुत्तों को खाना न दें इसके लिए हर इलाके में एक तय जगह बने. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर कार्रवाई की जाएगी. कुत्तों को पकड़ने वाली टीम के काम में बाधा डालने वाले व्यक्ति पर 25 हजार और एनजीओ पर 2 लाख जुर्माना लगेगा. कोर्ट ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए हेल्पलाइन शुरू करने का निर्देश दिया. पशु प्रेमी कुत्तों को गोद लेने के लिए एमसीडी के समक्ष आवेदन कर सकते हैं. ये जिम्मेदारी उनकी होगी कि एक बार गोद लिए गए कुत्तों को दोबारा सड़कों पर नहीं छोड़ा जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आवारा कुत्तों को लेकर नेशनल पॉलिसी बनाई जाएगी. कोर्ट ने आदेश का दायरा बढाते हुए कहा कि अब जो भी निर्देश दिए जाएंगे वो पूरे देश के लिए लागू होगा. सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2025 को दिल्ली-NCR के आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखने का निर्देश पारित किया था, जिसके खिलाफ कई याचिकाएं दायर हईं थी. इंडिया गेट पर पशु प्रेमियों ने कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ कैंडल मार्च भी निकाला था. करीब 2 दशक से सुप्रीम कोर्ट के गलियारों का एक जाना-पहचाना चेहरा. पत्रकारिता में बिताया समय उससे भी अधिक. कानूनी ख़बरों की जटिलता को सरलता में बदलने का कौशल. खाली समय में सिनेमा, संगीत और इतिहास में रुचि.  आवारा कुत्तों पर क्या फंसा है पेंच? कुत्तों को छोड़ने पर प्रतिबंध स्थगित कर दिया गया है। नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को छोड़ा जा सकता है, सिवाय उन कुत्तों के जिनमें रेबीज होने का संदेह है या जो आक्रामक व्यवहार दिखा रहे हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने स्पष्ट किया कि जिन आवारा कुत्तों को पकड़ा जाता है, उन्हें नसबंदी, कृमिनाशक और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में वापस छोड़ दिया जाना चाहिए, जहां से उन्हें उठाया गया था। पूरे देश में लागू होगा यह फैसला अदालत ने मामले का दायरा दिल्ली-एनसीआर से आगे बढ़ाकर पूरे भारत में लागू कर दिया। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया। न्यायालय ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर राष्ट्रीय नीति बनाने के लिए उच्च न्यायालयों में लंबित इसी तरह की याचिकाओं को सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरित करेगा। सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला 11 अगस्त को जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे तुरंत सड़कों से कुत्ते उठाकर शेल्टर होम्स में रखें और शुरुआती तौर पर कम से कम 5000 कुत्तों के लिए आश्रय गृह बनाएं. अदालत ने चेतावनी भी दी थी कि इस काम में बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. देशभर में हुआ व्यापक विरोध कोर्ट ने ये आदेश एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पारित किया. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि दिल्ली में आवारा कुत्तों के काटने से, खासकर बच्चों में रेबीज के मामले बढ़ रहे हैं. अदालत ने इस मामले की सुनवाई 28 जुलाई को शुरू की थी. हालांकि देशभर में इस आदेश का व्यापक विरोध हुआ और कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट से इसे रोकने की अपील की. अब 22 अगस्त को विशेष पीठ इस मामले पर अपना आदेश सुनाएगी.  

गाजा पर कब्जे को लेकर नेतन्याहू का सख्त रुख, कहा- बंधक समझौते से फर्क नहीं पड़ता

येरुशेलम इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दो टूक कहा है कि अगर हमास बंधकों को रिहा करने वाली शर्तों के साथ युद्धविराम समझौते पर सहमत हो जाता है, तब भी उनकी सेना पूरे गाजा पट्टी पर कब्जा करेगी। नेतन्याहू की यह टिप्पणी तब आई है, जब गाजा पर कब्जा करने के लिए इजरायली सुरक्षा बल आगे बढ़ रहे हैं और उनके इस कदम की अंतरराष्ट्रीय जगत में भारी आलोचना हो रही है।  स्काई न्यूज ऑस्ट्रेलिया से बात करते हुए, नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि हमास को खदेड़ने का उनका लक्ष्य अपरिवर्तित है। उन्होंने कहा, "हम ऐसा वैसे भी करेंगे। ऐसा कभी नहीं था कि हम हमास को वहाँ छोड़ देंगे।" नेतन्याहू ने कहा कि हम हर हाल में गाजा पर भी कब्जा करेंगे। ट्रंप के बयान का भी किया जिक्र उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस समर्थन का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि हमास गाजा में नहीं रह सकता है। नेतन्याहू ने कहा, “मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे सही कहा है, उनका कहना है कि हमास को गाजा से जाना ही होगा। यह SS (शुट्ज़स्टाफ़ेल) को जर्मनी में ही छोड़ देने जैसा है। आप जानते हैं, जर्मनी के ज़्यादातर हिस्से को तो SS से मुक्त करा लिया गया था लेकिन बर्लिन को एसएस और नाज़ी कोर के साथ छोड़ दिया गया था।” आलोचनाओं को कहा- यहूदी-विरोधी सुनामी बता दें कि 1925 में हिटलर ने शुट्ज़स्टाफ़ेल की स्थापना की थी, जिसे एसएस के नाम से भी जाना जाता है। एसएस को शुरू में हिटलर के निजी अंगरक्षकों के रूप में बनाया गया था, बाद में इसने बड़ा रूप ले लिया था और नाजियों पर कब्जा कर लिया था। नेतन्याहू ने तर्क दिया कि अगर हमास शेष बंधकों को रिहा करने, निरस्त्रीकरण करने और "गाज़ा का विसैन्यीकरण" करने पर सहमत हो जाए, तो युद्ध आज ही समाप्त हो सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आलोचना को यहूदी-विरोधी सुनामी कहकर खारिज कर दिया। UN महासचिव बोले तुरंत हो युद्धविराम बता दें कि इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने घनी आबादी वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्र के उत्तरी भाग में स्थित गाज़ा शहर पर कब्ज़ा करने की अपनी अहम रणनीति के तहत बुधवार को युद्ध का अगला चरण शुरू कर दिया है। नेतन्याहू ने इसे हमास का गढ़ बतलाया है। इसके साथ ही इजरायली सेना के जवान गाजा पट्टी में अंदर घुस गए। दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने नेतन्याहू से तुरंत अपने सैनिकों को गाजा से बुलाने और युद्धविराम का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि IDF के आक्रमण से गाजा पट्टी में भूख से तड़प रहे लोगों का बड़े पैमाने पर विनाश हो जाएगा। अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में फ़िलिस्तीनियों की आधिकारिक मौत के आंकड़े इस सप्ताह बढ़कर 62,000 को पार कर गए हैं।

PF बैलेंस चेक करना हुआ आसान, 99% लोग नहीं जानते ये तरीका

नई दिल्ली अगर आपकी तनख्वा से PF कटता है, तो जाहिर तौर पर आप जानना भी चाहते होंगे कि आपके PF अकाउंट का बैलेंस क्या है? इसके लिए अगर आप EPFO की साइट पर जाकर, लॉग इन करके पासबुक चेक करते हैं, तो जान लें कि यही काम फोन का एक बटन दबाते ही हो सकता है। दरअसल कई बार तकनीकी या किन्हीं अन्य वजहों से आपके PF खाते में सैलरी से कटी रकम पहुंच नहीं पाती। ऐसे में समय रहते यह चेक करना बेहद जरूरी हो जाता है कि आपके PF का अकाउंट में तनख्वा से कटने वाली रकम पहुंच रही है या नहीं। इस नंबर को सेव कर लें आप अपने फोन का एक बटन दबाकर भी अपने PF बैलेंस का पता लगा सकते हैं। इसके लिए आपको 9966044425 इस नंबर को सेव करना होगा। इस नबंर पर अपने फोन से मिस कॉल देने के बाद आपको एक SMS प्राप्त होगा। इस SMS में आपको आपके PF बैलेंस की डिटेल मिल जाएगी। ध्यान रखें कि इस नंबर पर कॉल करने के बाद कॉल आपको नहीं काटना है। दरअसल आपके कॉल करने के बाद दो बार बेल बजने के बाद कॉल खुद ब खुद कट जाएगी। इसके बाद आपको अपने PF अकाउंट बैलेंस की जानकारी के साथ एक SMS मिल जाएगा। SMS से भी मिलेगा बैलेंस अगर किसी वजह से आप कॉल की जगह SMS भेज कर अपने PF अकाउंट बैलेंस की जानकारी पाना चाहते हैं, तो आप ऐसा भी कर सकते हैं। एक सेट फॉर्मेंट में SMS भेज कर भी आप अपने PF अकाउंट बैलेंस की डिटेल्स प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको 7738299899 इस नंबर को फोन में सेव कर लेना चाहिए। EPFO की वेबसाइट के मुताबिक आपको अपने फोन की मैसेज ऐप में जाकर एक नया मैसेज क्रिएट करना होगा। उस मैसेज में आपको “EPFOHO UAN No.” लिख कर उसे 7738299899 पर भेज देना होगा। कुछ देर बाद आपको एक SMS के तौर पर अपने PF अकाउंट बैलेंस की सारी डिटेल मिल जाएगी। इस मैसेज को भेजते हुए याद रखें कि EPFOHO लिखने के बाद आपको एक स्पेस देना होगा और उसके बाद अपना UAN नंबर लिखना होगा। ध्यान देने वाली बात अगर आप मिस कॉल के जरिए अपना PF बैलेंस पता करना चाह रहे हैं, तो आपके UAN में बैंक खाता नंबर, आधार या PAN में से कोई भी एक चीज लिंक होनी चाहिए। इसके अलावा आपका मोबाइल नंबर यूनिफाइड पोर्टल पर UAN के साथ एक्टिवेट होना चाहिए। साथ ही आपके UAN के साथ बैंक खाता नंबर, आधार या PAN में से कम से कम एक KYC डॉक्यूमेंट लिंक होना जरूरी है। अगर आप SMS भेजकर अपना PF बैलेंस पता करना चाहते हैं, तो बता दें कि यह सर्विस10 भाषाओं में उपलब्ध है। अगर आप अंग्रेजी के अलावा किसी और भाषा में SMS प्राप्त करना चाहते हैं, तो UAN के बाद उस भाषा के पहले तीन अक्षर जोड़ने होंगे। उदाहरण के लिए, तेलुगु में जानकारी पाने के लिए "EPFOHO UAN TEL" भेजना होगा। इस तरह आप आसानी से अपने PF अकाउंट बैलेंस के बारे में जान सकते हैं।

बच्चे समलैंगिक हों तो भारतीयों की क्या प्रतिक्रिया? कई देशों में सर्वे में मिली जानकारी

 नई दिल्ली थाइलैंड में इसी साल समलैंगिक संबंधों को मंजूरी मिल गई है। इसके अलावा भारत में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है, लेकिन शादी को परमिशन देने को लेकर बहस जारी है। भले ही भारत में समलैंगिक संबंध अपराध के दायरे से बाहर हैं, लेकिन समाज में इसे लेकर बहस जारी है। एक बड़ा वर्ग इसे लेकर असहज है। इस बीच एक दिलचस्प सर्वे अमेरिकी रिसर्च संस्था प्यू ने किया है। प्यू रिसर्च के सर्वे में भारत समेत 15 देशों के लोगों से पूछा गया था कि यदि उनके बच्चे समलैंगिक हो जाते हैं तो वे कैसा अनुभव करेंगे। इसे सहजता से स्वीकार करेंगे या फिर ऐतराज होगा। इस सर्वे में शामिल भारतीयों से जब ऐसा ही सवाल पूछा गया तो 56 फीसदी ने कहा कि उन्हें परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि यदि उनके बच्चे समलैंगिक संबंधों की ओर आकर्षित होते हैं या ऐसा करते हैं तो यह उन्हें पसंद नहीं है और उन्हें परेशानी होगी। इसके अलावा 9 फीसदी लोगों ने कहा कि वे ना तो पसंद करेंगे और ना ही असहज होंगे। इसके अलावा 16 पर्सेंट लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने कहा कि उन्हें कोई समस्या नहीं होगा। वहीं 19 फीसदी लोगों ने कोई जवाब देने से ही इनकार कर दिया। प्यू रिसर्च की तरफ से जिन 15 देशों में यह सर्वे किया गया है, उनमें से ज्यादा मध्यम आय वर्ग वाले हैं। इनमें इंडोनेशिया, तुर्की, बांग्लादेश, साउथ अफ्रीका, ब्राजील और अर्जेंटीना शामिल हैं। बच्चों के समलैंगिक संबंधों का सबसे प्रबल विरोध करने वाले देशों में घाना है। यहां के 95 फीसदी लोगों ने कहा कि बच्चों का समलैंगिक होना वह पसंद नहीं करेंगे। वहीं इंडोनेशिया में ऐसे 94 फीसदी लोग हैं, जो बच्चों का गे या लेस्बियन होना एकदम पसंद नहीं करते। नाइजीरिया में ऐसे लोगों की संख्या 91 फीसदी है तो वहीं तुर्की में 87 पर्सेंट लोग इसके खिलाफ हैं। अहम तथ्य यह है कि ज्यादातर मुस्लिम बहुल देशों की बड़ी आबादी समलैंगिक संबंधों को एकदम पसंद नहीं करती और वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे इसकी ओर बढ़ें। केन्या में 87 फीसदी और बांग्लादेश में 60 फीसदी लोग बच्चों के ऐसे संबंधों में जाने के खिलाफ हैं। पेरू में 59 फीसदी और समलैंगिक शादियों को मान्यता देने वाले थाइलैंड में ऐसे लोगों की संख्या 57 पर्सेंट ही है। इसके अलावा साउथ अफ्रीका में ऐसे 56 फीसदी लोग हैं। अर्जेंटीना में ऐसे लोगों की संख्या अधिक है, जो बच्चों के समलैंगिक संबंधों में जाने को लेकर असहज नहीं हैं। अर्जेंटीना के 32 फीसदी लोगों ने ही कहा कि वे बच्चों के समलैंगिक संबंधों में जाने के खिलाफ हैं। ब्राजील में ऐसे लोगों की संख्या 38 फीसदी है, जबकि मेक्सिको में 45 फीसदी हैं।

ई-वॉलेट्स के जरिए पैसा जुटा रहा जैश, हमलों से बचने को बदल रहा रणनीति

लाहौर  ऑपरेशन सिंदूर के तहत मई 2025 में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में कई आतंकी लॉन्च पैड तबाह किए थे. इन ठिकानों का इस्तेमाल जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) कर रहे थे. इस बीच खुफिया रिपोर्टों के आधार पर IANS ने खुलासा किया है कि जैश-ए-मोहम्मद अब अपने नेटवर्क को दोबारा खड़ा करने की तैयारी कर रहा है. संगठन पूरे पाकिस्तान में 313 नए मरकज बनाने की योजना पर काम कर रहा है. ये ठिकाने नए आतंकियों को ट्रेनिंग देने और सुरक्षित आश्रय प्रदान करने के काम आएंगे. साथ ही ये ठिकाने जैश प्रमुख मसूद अजहर और उसके परिवार के लिए भी सुरक्षित अड्डे होंगे. इस नेटवर्क को खड़ा करने के लिए जैश ने 3.91 अरब पाकिस्तानी रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस धन उगाही अभियान का नेतृत्व जैश प्रमुख मसूद अजहर और उसका भाई तल्हा अल सैफ कर रहे हैं. संगठन ने ऑनलाइन धन इकट्ठा करने के लिए ईजीपैसा और सदापे जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की योजना बनाई है. इसके अलावा जैश के कमांडर मस्जिदों में शुक्रवार की नमाज के दौरान भी चंदा इकट्ठा कर रहे हैं. चंदे को गाजा में मानवीय सहायता के नाम पर दिखाया जा रहा है, जबकि असल में इसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए हो रहा है. जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी ब्लैंक दान रसीद सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ब्लैंक दान रसीद की एक कॉपी भी मिली. जांच में इस बात के सबूत मिले कि जमा किए जा रहे 3.94 अरब पाकिस्तानी रुपये कई पाकिस्तानी डिजिटल वॉलेट में जा रहे हैं. ऐसा ही एक सदापे खाता मसूद अजहर के भाई, तल्हा अल सैफ (तल्हा गुलजार) के नाम पर है, जो पाकिस्तानी मोबाइल नंबर +92 3025xxxx56 से जुड़ा है. यह नंबर जैश-ए-मोहम्मद के हरिपुर जिले के कमांडर आफ़ताब अहमद के नाम पर रजिस्ट्रड है, जिसके CNIC नंबर 133020376995 पर हरिपुर के खाला बट्ट टाउनशिप में जैश-ए-मोहम्मद के कैंप का पता दर्ज है. भारत के लिए क्या मायने रखता है यह पुनर्गठन जैश-ए-मोहम्मद की यह गतिविधि भारत के लिए नई चुनौती है. संगठन की कोशिश है कि ऑपरेशन सिंदूर से हुए नुकसान की भरपाई करके फिर से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाए. नए शिविरों का जाल फैलाने से कश्मीर घाटी में आतंक फैलाने की साजिश तेज हो सकती है. भारत के सुरक्षा तंत्र को इस पुनर्गठन पर करीबी निगरानी रखने की जरूरत है. 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए ऑपरेशन सिंदूर के तहत 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए. जैश का बहावलपुर स्थित मुख्यालय और कई ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए. यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला थी, जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे. पाकिस्तान में बनाएगा 313 नए मरकज, मांग रहा चंदा ऑपरेशन सिंदूर के कई महीने बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) अपने तबाह हुए प्रशिक्षण शिविरों और ठिकानों के नेटवर्क को फिर से पुनर्जीवित तकरने की तैयारी में लग गया है। अपने आतंकी ढांचे को फिर से खड़ा करने के लिए जैश-ए-मोहम्मद ने एक बड़ा धन उगाही अभियान शुरू किया है। इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में इसके बारे में जानकारी दी है। मई में आपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर स्थित मुख्यालय और आतंकी लॉन्च पैड को नेस्तनाबूद कर दिया था। 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में 9 आतंकी लॉन्च पैड को तबाह किया था। ये लॉन्च पैड जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। यह अभियान 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए चलाया गया था। पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे। 313 नए शिविर स्थापित करने की योजना  खुफिया जानकारी के आधार पर अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जैश-ए-मोहम्मद अपनी स्थिति सुधारने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। संगठन ने कथित तौर पर पूरे पाकिस्तान में 313 नए 'मरकज' स्थापित करने की योजना बनाई है, जिनका इस्तेमाल आतंकियों को ट्रेनिंग और उन्हें ठिकाने देने के लिए किया जाएगा। इसके लिए 3.91 अरब पाकिस्तानी रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। पकड़े जाने से बचने के लिए ऑनलाइन चंदा इन ठिकानों में नए आतंकियों के लिए प्रशिक्षण केंद्र चलाने के साथ ही जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर और उसके परिवार के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में काम करने की उम्मीद है। रिपोर्ट में बताया गया है कि धन उगाही अभियान का नेतृत्व मसूद अजहर अपने भाई तल्हा अल सैफ के साथ मिलकर कर रहा है। पकड़े जाने से बचने के लिए जैश ने ईजीपैसा और सदापे जैसे डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की योजना बनाई है। ऑनलाइन पैसा इकठ्ठा करने के अलावा जैश के कमांडर शुक्रवार की नमाज के दौरान मस्जिदों में भी चंदा इकठ्ठा कर रहे हैं। इसे गाजा में मानवीय सहायता के लिए दिए जाने के लिए दिखा रहे हैं।

सरकार की कार्यप्रणाली में रुकावट डालना लोकतंत्र के खिलाफ—किरन रिजिजू

नई दिल्ली  संसद के मानसून सत्र का अंतिम दिन था। इस बार मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। इस बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष होना चाहिए। विरोध करना या असहमति जताना अपनी बात कहने का लोकतांत्रिक तरीका है, लेकिन संसद में सरकार के काम में बाधा डालना और उसे रोकना अलोकतांत्रिक है। किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार की दृष्टि से देश के लिए बहुत उपयोगी सत्र रहा है, लेकिन विपक्ष के सांसदों को, खासकर नए सांसदों को, सदन में बोलने का मौका नहीं मिला। सत्र के दौरान सांसद अपने लोकसभा क्षेत्र की बात रखते हैं, लेकिन विपक्ष के कई सांसदों को बोलने का मौका नहीं मिला, उसके लिए विपक्ष के नेता जिम्मेदार हैं। एनडीए और कुछ दल, जिन्होंने सत्र में भाग लिया, उन्हें धन्यवाद। उन्होंने कहा कि एक बात मेरे मन में चोट पहुंचाती है। कैप्टन शुभांशु शुक्ला पर चर्चा रखी गई थी, लेकिन विपक्ष ने चर्चा नहीं करने दी, जिसका दुख है। कई बिल पास किए हैं, कुछ बिल संयुक्त संसदीय समिति को भेजे गए हैं। उनमें तीन बिल महत्वपूर्ण हैं, जिनमें गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025, 130वां संविधान संशोधन बिल 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025 शामिल हैं। ये ऐसे बिल हैं, जिनमें आजादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री को रखा गया है। लोग खुद को बचाने के लिए कानून बनाते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के लोगों ने भ्रम फैलाने की कोशिश की। इस बिल के लिए देशभर में स्वागत हो रहा है। मेरे पास कई संदेश आए। उन्होंने कहा कि विरोध तो होता है, लोकतंत्र में विरोध होना भी चाहिए, पक्ष और विपक्ष मिलकर संसद बनते हैं, लेकिन संसद के कामकाज में बाधा डालना ठीक नहीं है। हमारी पार्टी जीवन भर विपक्ष में रही, थोड़े समय तक सत्ता में है। हमने हमेशा विपक्ष में रहते हुए ये ध्यान रखा कि विरोध से किसी को चोट न लगे और न ही सीमा लांघे। देश के खिलाफ बात करके, इलेक्शन कमीशन को गाली देकर, सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ बात करके आप लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।

भारतीय एयरलाइंस के लिए घाटे का साल, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को सबसे बड़ा झटका

नई दिल्ली वित्त वर्ष 2024-25 में ज्यादातर भारतीय एयरलाइंस ने नुकसान दर्ज किया है और सबसे ज्यादा घाटा टाटा ग्रुप की एयरलाइन एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को हुआ है। यह जानकारी सरकार की ओर से गुरुवार को संसद को दी गई। लोकसभा में एक सवाल का लिखित में जवाब देते हुए केंद्रीय नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि एयर इंडिया और उसकी बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस ने वित्तीय वर्ष के दौरान कर से पूर्व 9,568.4 करोड़ रुपए का संयुक्त घाटा दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान एयर इंडिया को 3,890.2 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस को 5,678.2 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। अन्य एयरलाइन जैसे अकासा एयर को कर से पूर्व 1,983.4 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। वहीं, इस दौरान स्पाइसजेट को 58.1 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। इंडिगो, देश की एकमात्र बड़ी एयरलाइन है, जिसे वित्त वर्ष 25 में मुनाफा हुआ है। इंडिगो को पिछले वित्त वर्ष में कर से पहले 7,587.5 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ है।प्रोविजनल डेटा से जानकारी मिली है कि एयर इंडिया पर 26,879.6 करोड़ रुपए, इंडिगो पर 67,088.4 करोड़ रुपए, एयर इंडिया एक्सप्रेस पर 617.5 करोड़ रुपए, अकासा एयर पर 78.5 करोड़ रुपए और स्पाइसजेट पर 886 करोड़ रुपए का कर्ज है। मोहोल ने स्पष्ट किया कि 1994 में एयर कॉर्पोरेशन अधिनियम के निरस्त होने के बाद से एयरलाइनों के वित्तीय और परिचालन संबंधी निर्णय कंपनियां स्वयं लेती हैं, जिसमें ऋण पुनर्गठन भी शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति, 2016 के तहत एक अनुकूल नीतिगत माहौल बनाकर एक सहायक भूमिका निभाती है। उन्होंने उड़ान जैसी योजनाओं का भी जिक्र किया, जो क्षेत्रीय मार्गों पर परिचालन करने वाली एयरलाइनों को वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं, जिससे वे अधिक लागत प्रभावी बनती हैं। ये आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब घरेलू विमानन बाजार में वृद्धि के बावजूद एयरलाइनों की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। मोहोल ने संसद को बताया कि पिछले महीनों की तुलना में जुलाई में एयरलाइन क्षमता में कोई कमी नहीं देखी गई है, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार इस क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए चुनौतियों का समाधान करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।