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केंद्र सरकार का बड़ा कदम: अपात्र राशन कार्ड होंगे कैंसिल, तुरंत करें दस्तावेज़ों की जांच

नई दिल्ली सरकार से मिलने वाला गेहूं-चावल तो छोड़िए..सरकारी योजनाओं के लाभ भी हाथ से फिसलने वाले हैं। राशन कार्ड बनवाकर सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों पर सरकार ने सख्ती करने का मूड बना लिया है। केंद्र सरकार ने राज्यों को नियमों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। 22 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि जो लोग 6 महीने से ज्यादा समय से राशन नहीं ले रहे हैं, उनके राशन कार्ड रद्द कर दिए जाएं। अभी देश में करीब 23 करोड़ राशन कार्ड हैं। माना जा रहा है कि देशभर में करीब 18 फीसदी तक राशन कार्ड रद्द हो सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक देश में 25 लाख से ज्यादा फर्जी राशन कार्ड हैं। सरकार के नए आदेश के मुताबिक जिन लोगों ने 6 महीने से राशन नहीं लिया है, उन पर सबसे पहले गाज गिरने वाली है। बात यहीं नहीं रुकेगी। प्रशासन घर-घर जाकर राशनकार्ड धारकों की जांच करने वाला है। यहां तक कि जिन लोगों ने ई-केवाईसी कराया हुआ है, उनकी भी पात्रता की फिर से जांच होगी। गरीब कल्याण अन्न योजना भी दायरे में केंद्र सरकार की मुफ्त राशन योजना यानी गरीब कल्याण अन्न योजना के लाभार्थियों पर भी नया आदेश लागू होगा। अगर कोई लाभार्थी इस योजना के तहत मुफ्त राशन ले रहा है और पिछले 6 महीने से उसने राशन नहीं उठाया है तो नाम कटने की पूरी संभावना है। तुरंत करा लें राशन कार्ड का ई-केवाईसी अगर अभी तक आपने अपने राशन कार्ड का ई-केवाईसी नहीं कराया है तो इस काम को पहली फुर्सत में निपटा लें। बिना ईकेवाईसी के राशन कार्ड पर खतरा सबसे ज्यादा है। राशन कार्ड का ई-केवाईसी आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकते हैं। लगातार मौके दिए जाने के बावजूद अभी भी बड़ी संख्या में राशन कार्ड के e-KYC नहीं हुए हैं। सरकार को आशंका है कि ये कार्ड फर्जी हो सकते हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फर्जी राशन कार्ड दरअसल ऐसा देखा जा रहा है कि ऐसे लाखों लोगों ने भी राशन कार्ड बनवा रखे हैं, जो पात्रता की शर्तों को पूरा भी नहीं करते हैं। इन लोगों ने सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए फर्जी दस्तावेजों की मदद से राशन कार्ड बनवा रखे हैं। इन परिवारों को राशन की जरूरत नहीं है, लेकिन राशन कार्ड के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेना है। मसलन आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए राशन कार्ड की जरूरत होती है। आयुष्मान कार्ड से 5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है। इसी तरह EWS कोटे से दाखिला लेने में भी राशन कार्ड बहुत काम आता है।

चुनावी पारदर्शिता पर सवाल: CEC ने उठाया मुद्दा, मरे हुए लोगों के नाम लिस्ट में क्यों?

 नई दिल्ली बिहार में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान को लेकर विपक्ष के लगातार विरोध के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने इस प्रक्रिया का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग को मरे हुए मतदाताओं, डुप्लिकेट मतदाता पहचान पत्र धारकों और विदेशी नागरिकों को वोटर लिस्ट में शामिल करने की अनुमति देनी चाहिए। यह बयान तब आया है जब राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने SIR अभियान के खिलाफ तीखा विरोध जताया है। विपक्षी दलों का दावा है कि SIR की प्रक्रिया से 50 लाख से अधिक मतदाताओं के मताधिकार छिन सकते हैं। SIR अभियान पर उठे सवाल मुख्य चुनाव आयुक्त ने इंटरव्यू में कहा, "क्या चुनाव आयोग को मृत मतदाताओं को वोटर लिस्ट में रखने की अनुमति देनी चाहिए? क्या डुप्लिकेट वोटर आईडी वाले लोगों को अनुमति दी जानी चाहिए? क्या विदेशी नागरिकों को वोटर लिस्ट में शामिल करना चाहिए? इस पर आपत्ति क्या है?" उन्होंने जोर देकर कहा कि एक शुद्ध और सटीक मतदाता सूची लोकतंत्र की सफलता की नींव है। विपक्ष का विरोध और संसद में हंगामा कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत इंडिया गठबंधन के कई सांसदों ने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में संशोधन के खिलाफ संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और इसे वापस लेने के साथ-साथ दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की। दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले, कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, झामुमो, राजद और वामपंथी दलों सहित विपक्ष के शीर्ष नेता और सांसद संसद के मकर द्वार के बाहर एकत्र हुए और सरकार तथा मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप है कि यह अभियान बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं, खासकर गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की साजिश है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और RJD नेता तेजस्वी यादव ने इस अभियान को "लोकतंत्र के खिलाफ साजिश" करार दिया। चुनाव आयोग का आंकड़ा चुनाव आयोग ने  एक बयान में बताया कि SIR अभियान के तहत अब तक 56 लाख मतदाताओं को अयोग्य पाया गया है। इसमें 20 लाख मृत मतदाता, 28 लाख ऐसे मतदाता जो बिहार से बाहर चले गए हैं, 7 लाख ऐसे मतदाता जो दो जगहों पर पंजीकृत हैं, और 1 लाख ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनका पता नहीं चल सका। CEC ने सवाल उठाया, “क्या चुनाव आयोग को ऐसे मतदाताओं को नहीं हटाना चाहिए?” पारदर्शी प्रक्रिया का दावा ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR अभियान पूरी तरह पारदर्शी है और इसका उद्देश्य एक शुद्ध मतदाता सूची तैयार करना है। उन्होंने बताया कि बिहार के मतदाताओं ने इस अभियान में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया है और अब तक 57.48% गणना फॉर्म एकत्र किए जा चुके हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 2003 की मतदाता सूची में शामिल 4.96 करोड़ मतदाताओं को कोई अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है, जबकि शेष 3 करोड़ मतदाताओं को अपनी जन्म तिथि या स्थान साबित करने के लिए 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक जमा करना होगा। उन्होंने पूछा, "क्या चुनाव आयोग द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से तैयार की जा रही शुद्ध मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव और एक मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला नहीं है?" मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, "किसी न किसी मोड़ पर, हम सभी को, और भारत के सभी नागरिकों को, राजनीतिक विचारधाराओं से परे जाकर, इन सवालों पर एक साथ गहराई से विचार करना होगा।" सुप्रीम कोर्ट में मामला SIR अभियान के खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि यह प्रक्रिया असंवैधानिक है और लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को अभियान जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन यह भी सुझाव दिया कि आधार, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेजों को स्वीकार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने अभियान के समय पर भी सवाल उठाए, पूछा कि इसे केवल बिहार में ही क्यों लागू किया गया और इसे पूरे देश में क्यों नहीं किया गया। विपक्ष की रणनीति एक दिन पहले, बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने धमकी दी थी कि अगर एसआईआर प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो वे राज्य में आगामी चुनावों का बहिष्कार करेंगे। उनके बहिष्कार वाले बयान के बारे में पूछे जाने पर, तेजस्वी ने कहा, "देखेंगे कि लोग क्या चाहते हैं और हमारे सहयोगी क्या कहते हैं।" उन्होंने पूछा, "अगर राज्य के चुनाव पक्षपातपूर्ण और जोड़-तोड़ वाले तरीके से कराए जाते हैं, जहां यह पहले से ही तय होता है कि कौन कितनी सीटें जीतेगा, तो ऐसे चुनाव कराने का क्या फायदा?"

ग्रीस ने इजरायली जहाज को किनारे लगाने से रोका, 1600 यात्री परेशान

सायरोस इजरायल के खिलाफ दुनिया भर में फिलिस्तीन समर्थक ऐक्टिव हैं। पिछले दिनों अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों से लेकर सड़कों तक पर इजरायल के लोगों का विरोध हुआ था। यही नहीं इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की वॉशिंगटन में गोली मारकर हत्या कर दी थी। अब ग्रीस में इजरायल के एक जहाज को समंदर के किनारे पर रुकने नहीं दिया गया। इसके चलते जहाज को मजबूरन वापस लौटना पड़ा। जहाज में 1600 यात्री सवार थे। ये प्रदर्शनकारी नारेबाजी कर रहे थे और नो-एंट्री टू इजरायल चिल्ला रहे थे। इस विरोध प्रदर्शन के चलते जहाज को वापस लौटना पड़ा और फिर साइप्रस के रास्ते आया। क्राउन इरिस नाम का क्रूज शिप 6 घंटे की यात्रा करके पहुंचा था, लेकिन उसे रुकने ही नहीं दिया गया। जहाज को ग्रीस के सायरोस में रुकना था और कुछ यात्रियों को उतरना था। फिर विरोध ऐसा हुआ कि जहाज को वापस ले जाया गया और वह साइप्रस के रास्ते अपनी मंजिल पर पहुंचा। इस जहाज को लिमासोल जाना था, जो साइप्रस का ही दूसरा सबसे बड़ा शहर है। चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक जिस जहाज को रुकने ही नहीं दिया गया, उसमें करीब 400 बच्चे भी सवार थे। जहाज में सवार लोगों और क्रू मेंबर का कहना था कि बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी बैठे थे। ऐसे में विरोध प्रदर्शन हिंसक होने से उनकी जान को खतरा हो सकता था। उन्हें बचाने के लिए ही जहाज को वहां से आगे बढ़ा लिया गया। जहाज में सवार लोगों को सुरक्षा के नजरिए से अंदर ही बने रहने को कहा गया। उनसे खिड़कियां और दरवाजे बंद करने को कहा गया। इजरायली यात्री ने बताया कि हमने विरोध प्रदर्शन को देखते हुए इजरायल के झंडे लहराए और गाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि हम लोग तो जहाज के अंदर सुरक्षित महसूस कर रहे थे, लेकिन उसमें सवार बच्चे थोड़ा डरे हुए थे। यह प्रदर्शन ग्रीस में मौजूद फिलिस्तीन समर्थकों की ओर से आयोजित किया गया था। फ्रांस में इजरायल की साइकिलिंग टीम को घेरा यही नहीं ऐसे ही एक विरोध का सामना इजरायल की साइकिलिंग टीम को फ्रांस में करना पड़ा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग इजरायल के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और टीम को घेर लिया। इन लोगों का कहना था कि फ्रांस की सरकार को इजरायल के लोगों को अपने देश में एंट्री नहीं देनी चाहिए।

ग्रीस ने इजरायली जहाज को किनारे लगाने से रोका, 1600 यात्री परेशान

सायरोस इजरायल के खिलाफ दुनिया भर में फिलिस्तीन समर्थक ऐक्टिव हैं। पिछले दिनों अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों से लेकर सड़कों तक पर इजरायल के लोगों का विरोध हुआ था। यही नहीं इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की वॉशिंगटन में गोली मारकर हत्या कर दी थी। अब ग्रीस में इजरायल के एक जहाज को समंदर के किनारे पर रुकने नहीं दिया गया। इसके चलते जहाज को मजबूरन वापस लौटना पड़ा। जहाज में 1600 यात्री सवार थे। ये प्रदर्शनकारी नारेबाजी कर रहे थे और नो-एंट्री टू इजरायल चिल्ला रहे थे। इस विरोध प्रदर्शन के चलते जहाज को वापस लौटना पड़ा और फिर साइप्रस के रास्ते आया। क्राउन इरिस नाम का क्रूज शिप 6 घंटे की यात्रा करके पहुंचा था, लेकिन उसे रुकने ही नहीं दिया गया। जहाज को ग्रीस के सायरोस में रुकना था और कुछ यात्रियों को उतरना था। फिर विरोध ऐसा हुआ कि जहाज को वापस ले जाया गया और वह साइप्रस के रास्ते अपनी मंजिल पर पहुंचा। इस जहाज को लिमासोल जाना था, जो साइप्रस का ही दूसरा सबसे बड़ा शहर है। चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक जिस जहाज को रुकने ही नहीं दिया गया, उसमें करीब 400 बच्चे भी सवार थे। जहाज में सवार लोगों और क्रू मेंबर का कहना था कि बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी बैठे थे। ऐसे में विरोध प्रदर्शन हिंसक होने से उनकी जान को खतरा हो सकता था। उन्हें बचाने के लिए ही जहाज को वहां से आगे बढ़ा लिया गया। जहाज में सवार लोगों को सुरक्षा के नजरिए से अंदर ही बने रहने को कहा गया। उनसे खिड़कियां और दरवाजे बंद करने को कहा गया। इजरायली यात्री ने बताया कि हमने विरोध प्रदर्शन को देखते हुए इजरायल के झंडे लहराए और गाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि हम लोग तो जहाज के अंदर सुरक्षित महसूस कर रहे थे, लेकिन उसमें सवार बच्चे थोड़ा डरे हुए थे। यह प्रदर्शन ग्रीस में मौजूद फिलिस्तीन समर्थकों की ओर से आयोजित किया गया था। फ्रांस में इजरायल की साइकिलिंग टीम को घेरा यही नहीं ऐसे ही एक विरोध का सामना इजरायल की साइकिलिंग टीम को फ्रांस में करना पड़ा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग इजरायल के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और टीम को घेर लिया। इन लोगों का कहना था कि फ्रांस की सरकार को इजरायल के लोगों को अपने देश में एंट्री नहीं देनी चाहिए।

मंदिर में इस्लाम प्रचार पर दर्ज FIR रद्द, हाईकोर्ट ने कहा– यह अपराध नहीं, मुस्लिम युवकों को राहत

बेंगलुरु कर्नाटक हाई कोर्ट ने वैसे तीन मुस्लिम व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है, जिन पर एक हिंदू मंदिर में इस्लाम की शिक्षा को बढ़ावा देने वाले पर्चे बांटने और मौखिक रूप से अपनी धार्मिक मान्यताओं को समझाने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि किसी मंदिर में सिर्फ इस्लाम का प्रचार करने वाला पर्चा बांटने और उसके बारे में व्याख्या करने से कोई अपराध नहीं हो जाता, जब तक कि धर्मांतरण से जुड़ा कोई साक्ष्य न मिलता हो। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 299, 351(2) और 3(5) और कर्नाटक धर्म स्वतंत्रता अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2022 की धारा 5 के तहत आरोप लगाए गए थे। जस्टिस वेंकटेश नाइक टी की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपियों ने उपरोक्त कानूनों के तहत कोई अपराध नहीं किया है, क्योंकि उन लोगों ने किसी भी व्यक्ति को इस्लाम में धर्मांतरित करने का कोई प्रयास नहीं किया। हिन्दू धर्म पर अपमानजनक टिप्पणी के भी आरोप लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि चार मई 2025 को शाम 4:30 बजे, जब वह जामखंडी स्थित रामतीर्थ मंदिर गया था, तो कुछ लोग वहां मंदिर परिसर में इस्लामिक शिक्षा का प्रचार करने वाले पर्चे बाँट रहे थे और अपनी धार्मिक मान्यताओं के बारे में लोगों को मौखिक रूप से समझा रहे थे। शिकायत में बताया गया है कि घटनास्थल पर मौजूद हिन्दू श्रद्धालुओं ने उन लोगों से उनकी गतिविधियों के बारे में पूछताछ की थी, तो इसके जवाब में, मुस्लिम युवकों ने कथित तौर पर हिंदू धर्म की आलोचना करते हुए अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। नौकरी और गाड़ी का दिया था प्रलोभन शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपी मंदिर में मौजूद लोगों को इस्लाम धर्म अपनाने के एवज में गाड़ी देने और दुबई में नौकरी दिलाने का प्रलोभन दे रहे थे। दूसरी तरफ, अपने खिलाफ दर्ज अपराध को रद्द करने की मांग करते हुए, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वे केवल अल्लाह या पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं का प्रचार कर रहे थे। धर्मांतरण के साक्ष्य नहीं याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा किसी व्यक्ति को एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने का प्रयास करने के आरोप केपीआरएफआर अधिनियम की धारा 5 के तहत दंडनीय अपराध के आवश्यक तत्वों को पूरा नहीं करते हैं क्योंकि ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिससे साबित हो कि वे सभी धर्मांतरण कराने की कोशिश कर रहे थे।

50 लोगों की जान पर आफत: रूस का यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त, बचाव अभियान जारी

मॉस्को  रूस में एक बड़ा विमान हादसा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक एक यात्री विमान चीन की सीमा के पास लापता हो गया था। विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया था। An-24 नाम के इस यात्री विमान में 49 लोग सवार थे और ताजा रिपोर्ट से पता चला है कि सभी लोगों की मौत हो गई है। लापता विमान क्रैश हो गया था और अब उसका मलबा मिल गया है। रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी TASS की रिपोर्ट में पहले कहा गया था कि विमान ने टिंडा (Tynda) के लिए उड़ान भरी थी लेकिन गंतव्य के नजदीक पहुंचते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से उसका उसका संपर्क टूट गया। बताया गया था कि चीन की सीमा के पास ये विमान लापता हो गया है। TASS की रिपोर्ट के मुताबिक यात्री विमान, अंगारा एयरलाइंस का था और अंतिम बार जब उससे संपर्क हुआ था, वह टिंडा एयरपोर्ट से कुछ किलोमीटर की दूरी पर था। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया है। यह इलाका चीन की सीमा के काफी पास स्थिति है और इस क्षेत्र में करीब करीब हमेशा मौसम काफी खराब रहता है, जिससे विमानों के लिए उड़ान भरना काफी चुनौतीपूर्ण रहता है। AN-24 का पूरा नाम Antonov-24 है, जो एक सोवियत निर्मित मध्यम दूरी का डबल इंजन टर्बोप्रॉप यात्री विमान है. इसे मुख्य रूप से कम दूरी की उड़ानों के लिए बनाया गया है और क्षेत्रीय उड़ानों के लिए इसका इस्तेमाल होता है. ये पहली बार 1959 में उड़ा था और इसे रूसी, पूर्वी यूरोप और एशिया के कठिन इलाकों में उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन किया गया था. ये विमान लगभग 1,500 से 2,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है, जो इसे क्षेत्रीय उड़ानों के लिए परफेक्ट बनाता है. इसकी खासियत ये है कि ये कम दूरी के रनवे से टेकऑफ और लैंडिंग कर सकता है, जो इसे दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों के लिए उपयुक्त बनाता है. इसके मजबूत और भरोसेमंद डिजाइन की वजह से इसे कार्गो विमान और सैन्य परिवहन में भी इस्तेमाल किया जाता है. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS और SHOT न्यूज आउटलेट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यात्री विमान के लापता होने की रिपोर्ट आने के साथ ही स्थानीय प्रशासन और एविएशन अथॉरिटी ने तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया था। बचाव दलों को जंगलों और पहाड़ी इलाकों की ओर रवाना किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि विमान की क्रैश लैंडिंग हो सकती है। जिस क्षेत्र में विमान लापता हुआ था वो अमूर क्षेत्र मौसम के लिहाज से काफी मुश्किल क्षेत्र है। यहां काफी ज्यादा ठंड होती है और पहाड़ी इलाका है। यहां घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ इलाके हैं। इसके अलावा मौसम में अचानक परिवर्तन आता रहता है। इसलिए पायलट्स के लिए इस क्षेत्र से विमानों को उड़ाना काफी मुश्किल होता है।

हिमाचल में भारी बारिश की चेतावनी, मॉनसून फिर पकड़ रहा रफ्तार

हिमाचल  हिमाचल प्रदेश में मॉनसून एक बार फिर जोर पकड़ने वाला है। मौसम विभाग ने राज्य में 26 जुलाई से 30 जुलाई तक लगातार पाँच दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसे देखते हुए येलो अलर्ट भी जारी किया गया है, जिसका मतलब है कि लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि, आज (गुरुवार, 24 जुलाई) और कल (शुक्रवार, 25 जुलाई) कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जब हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। पिछले 24 घंटों में कहाँ कितनी बारिश हुई? मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। कांगड़ा जिले के नगरोटा सुरियाँ में सबसे ज्यादा 55 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा, बिलासपुर के नैना देवी में 33 मिमी, गुलेर में 29 मिमी, नाहन में 28 मिमी, मुरारी देवी में 22 मिमी, घुमरूर में 19 मिमी, कसौली में 18 मिमी और भटियात में 14 मिमी वर्षा हुई है। यह बारिश भले ही राहत भरी रही हो, लेकिन आने वाले दिनों में और भी तेज़ बारिश की आशंका है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक, भारी बारिश और भूस्खलन के कारण हिमाचल प्रदेश में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नेशनल हाईवे सहित कुल 311 सड़कें अभी भी बंद पड़ी हैं। मंडी जिले में सबसे ज्यादा 184 सड़कें ठप हैं, जबकि कुल्लू में 71 और सिरमौर में 22 सड़कों पर यातायात रुका हुआ है। मंडी के कोटली क्षेत्र में नेशनल हाईवे-70 भी बंद है, जिससे आवाजाही में काफी परेशानी हो रही है। बिजली और पानी की आपूर्ति भी प्रभावित सड़कों के साथ-साथ बिजली और पानी की व्यवस्था भी चरमरा गई है। पूरे प्रदेश में 65 बिजली ट्रांसफार्मर खराब हो गए हैं, जिससे कई इलाकों में बिजली गुल है. इसके अलावा, 221 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे पीने के पानी की किल्लत हो गई है. मंडी जिले में 49 ट्रांसफार्मर और 65 पानी की स्कीमें ठप हैं। चंबा जिले के तीसा उपमंडल में 10 ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली आपूर्ति बाधित है. चंबा में 60, कांगड़ा में 59 और सिरमौर में 34 पानी की स्कीमें बंद पड़ी हैं। मॉनसून सीजन में अब तक की आपदाएँ मॉनसून सीजन में हिमाचल प्रदेश को अब तक कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा है। राज्य में 26 भूस्खलन, 42 फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) और 24 बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। अकेले मंडी जिले में बादल फटने की 15, फ्लैश फ्लड की 11 और भूस्खलन की 4 घटनाओं ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। इन घटनाओं से जान-माल का काफी नुकसान हुआ है और राहत कार्य जारी हैं। प्रशासन लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील कर रहा है।  

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन: मोदी बोले– भारत में अब यूके प्रोडक्ट किफायती दामों पर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन के दो दिनों के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने ब्रिटिश पीएम किएर स्टार्मर से लंदन में मुलाकात की, जहां द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों ने फ्री ट्रेड डील (FTA) समझौते पर साइन किए. जिसका उद्देश्य भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना है. इस मौके पर प्रेस को संबोधित करते हुए पीएम ने स्टार्मर के जोरदार स्वागत के लिए आभार जताया और उन्होंने ऐतिहासिक द्विपक्षीय वार्ता के दौरान साइन किए गए फ्री ट्रेड डील की भी तारीफ की. ये हमारे उपभोक्ताओं के लिए अच्छा सौदा होगा, क्योंकि इससे कपड़ों और जूतों की कीमतें कम हो जाएंगी. साथ ही भारत के सी फूड को ब्रिटेन की मार्केट में नए अवसर मिलेंगे. भारत के हर वर्ग के लिए ये समझौता लाभकारी होगा. इस समझौते के यूके की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा और भारत का निवेश भी बढ़ेगा. ये समझौते वैश्विक स्थिरता को भी बल देंगे. अब यूके के प्रोडक्ट सस्ते मिलेंगे. दोस्तों शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर नया अध्याय लिख रहे हैं. यूके की छह यूनिवर्सिटी भारत में कैंपस खोल रही हैं, पिछले दिनों गुरुग्राम में कैंपस खोला है. दोस्तों पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा के लिए हम स्टार्मर का आभार जताते हैं.हम रूस और यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के साथ-साथ मिडिल ईस्ट की स्थिति पर भी विचार साझा करते रहे हैं. आज विस्तारवादी सोच नहीं विकासवादी सोच का दौर है.  भारत-ब्रिटेन मुफ्त व्यापार समझौते (FTA) के लिहाज से उनके इस दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पीएम मोदी ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात करेंगे. इस दौरान पीएम मोदी और स्टार्मर द्विपक्षीय संंबंधों पर चर्चा करेंगे.  भारत के साथ फ्री ट्रेड डील पर साइन करने के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने कहा कि भारत के साथ एक ऐतिहासिक समझौते का मतलब ब्रिटेन में रोजगार, निवेश और विकास है. इससे ब्रिटेन में हजारों नौकरियां पैदा होंगी. फ्री ट्रेड डील से कारोबार के नए अवसर पैदा होंगे और कामकाजी लोगों की जेब में पैसा आएगा. ये हमारी काम करने की नीति में बड़ा बदलाव है. इससे पहले उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वे जिस ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, नौकरियों और आर्थिक विकास के लिए वह एक बड़ी जीत है. इस समझौते के तहत टैरिफ में कटौती से कपड़े, जूते और खाद्य उत्पादों की कीमतें सस्ती होंगी.  भारत को क्या फायदा ब्रिटेन का कहना है कि एफटीए से भारत के लोगों को बहुत फायदा होगा। उन्हें ब्रिटेन के अच्छे प्रोडक्ट्स आसानी से मिल पाएंगे। जैसे कि सॉफ्ट ड्रिंक, कॉस्मेटिक्स, कारें और मेडिकल डिवाइस। FTA लागू होने के बाद, इन चीजों पर लगने वाला टैक्स 15% से घटकर 3% हो जाएगा। इससे ये चीजें सस्ती हो जाएंगी। अभी भी ब्रिटेन भारत से 11 अरब पाउंड का सामान खरीदता है। लेकिन टैक्स कम होने से ब्रिटेन के लोगों और कारोबारियों के लिए भारतीय सामान खरीदना और भी आसान हो जाएगा। इससे भारतीय कारोबारियों को भी फायदा होगा, क्योंकि वे ब्रिटेन को ज्यादा सामान बेच पाएंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा, "भारत के साथ हमारा यह बड़ा व्यापार समझौता ब्रिटेन के लिए बहुत बड़ी जीत है। इससे ब्रिटेन में हजारों नौकरियां पैदा होंगी, कारोबार के नए मौके मिलेंगे और देश के हर कोने में विकास होगा। यह हमारी बदलाव की योजना को पूरा करेगा।" ट्रेड के इतर यह समझौता सिर्फ व्यापार तक ही सीमित नहीं रहेगा। 2035 के लिए जो नई योजना बनाई जा रही है, उसमें दोनों देश मिलकर तरक्की करेंगे, नई चीजें खोजेंगे और अपनी सेना को भी मजबूत करेंगे। इसके लिए एक नया डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप बनाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि भारत और ब्रिटेन ने बातचीत के दौरान एक-दूसरे की राजनीतिक संवेदनशीलता का सम्मान किया है। ब्रिटिश सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर से पहले एक बयान में कहा, "हमने भ्रष्टाचार विरोधी, श्रम अधिकार, जेंडर और डेवलपमेंट पर मुक्त व्यापार समझौते में भारत के पहले अध्यायों को सुरक्षित करते हुए अपने मूल्यों का समर्थन किया है. यह अध्याय महिलाओं के लिए यूके-भारत FTA के पूर्ण लाभों तक पहुंचने के अवसरों को बढ़ाएगा. यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भी आगे बढ़ाएगा और व्यापार के माध्यम से लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा." समझौते में टैरिफ में कटौती शामिल है. भारत ब्रिटेन की तुलना में काफी अधिक संरक्षणवादी अर्थव्यवस्था है, और उसने अपने 90 प्रतिशत टैरिफ में कटौती की है. इससे यूके से भारत आने वाले उत्पादों पर औसत टैरिफ 15 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत हो जाएगा. बदले में, ब्रिटेन – जो पहले से ही भारत से सालाना 11 अरब यूरो मूल्य का सामान आयात करता है – भारतीय निर्माताओं को अधिक बाजार पहुंच प्रदान करेगा. अब कपड़े-जूते समेत ये चीजें हो जाएंगी सस्‍ती, देखें लिस्‍ट!  भारत-यूके बीच इस डील से दोनों देशों के आम लोगों के लिए भी बहुत फायदेमंद होगा. दवाई से लेकर इलेक्‍ट्रॉनिक और फैशन तक के सामान सस्‍ते हो जाएंगे. हालांकि कुछ चीजें महंगे भी होंगे, जो आम लोगों की जेब पर सीधा असर डालेगा.  इस डील को लेकर चर्चा की शुरुआत जनवरी 2022 में तत्कालीन ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन के कार्यकाल में हुई थी. इसे पहले 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य था. पीएम मोदी ने इस डील को लेकर कहा कि दोनों देशों की अर्थव्‍यवस्‍था में उछाल आएगी. साथ ही नौकरियों के अवसर खुलेंगे. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत-ब्रिटेन की कोशिश द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 120 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्‍य रखा गया है.  भारत-यूके FTA का मतलब क्‍या है?  भारत और यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-UK FTA) से भारत को अपनी 99 फीसदी एक्‍सपोर्ट उत्‍पाद  पर UK में टैक्‍स फ्री एक्‍सपोर्ट मिलेगा.  वहीं भारत ब्रिटेन से आने वाले 90 फीसदी उत्‍पादों पर टैरिफ कम या फिर हटा दिया जाएगा. इससे भारतीय कंपनियों से लेकर आम लोगों को भी बड़ा फायदा होगा.  क्‍या सस्‍ता और क्‍या महंगा  इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, कपड़े, मरीन प्रोडक्‍ट्स, स्‍टील और मेटल, और ज्‍वेलरी समेत कई चीजें सस्‍ती हो सकती हैं. वहीं महंगे की बात करें तो एग्रीकल्‍चर प्रोडक्‍ट्स, कार और बाइक जैसे ऑटो प्रोडक्‍ट्स और स्‍टील जैसे प्रोडक्‍ट्स महंगे हो सकते हैं.  यह डील भारत को वैश्विक मानचित्र पर कैसे स्थापित करेगी? इस … Read more

हाथियों के साथ फोटो लेना पड़ा भारी, 39 वर्षीय CEO की ट्रैजिक डेथ

नई दिल्ली  दक्षिण अफ्रीका के एक गेम रिजर्व में बड़ा हादसा हुआ है।  गेम रिजर्व के मालिक और करोड़पति सीईओ की ही हाथी ने कुचलकर हत्या कर दी। यह घटना सुबह 8 बजे गोंडवाना प्राइवेट गेम रिजर्व में हुई।  हाथी ने सीईओ पर दातों से किया हमला डेली मेल के अनुसार, हाथियों के एक झुंड को पर्यटक आवासों से दूर ले जाने का प्रयास कर किया जा रहा था। तभी, हाथियों का भगाने का काम गड़बड़ा गया और एक बड़ा वजनी हाथी ने करोड़पति सीईओ पर हमला कर दिया। कथित तौर पर हाथी ने फ्रेंकोइस क्रिश्चियन कॉनराडी को अपने दांतों से मारा और उन्हें कई बार कुचला, जिससे आस-पास के रेंजर अपनी पूरी कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाने में असमर्थ रहे। हाथियों से था गहरा लगाव कॉनराडी एक केलिक्स ग्रुप स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कंपनी के भी मालिक थे। उनके बारे में कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें हाथियों और नेचर से गहरा लगाव था और वे अक्सर उनकी तस्वीरें लेने के लिए जंगलों और रिजर्व में जाते थे। उनके पास जूलॉजी, पशु अध्ययन, कॉमर्स एंड मार्केटिंग की डिग्री थी। गोंडवाना के एक अधिकारी ने कहा कि कॉनराडी के हादसे के बारे में उनकी कंपनी के कर्मचारियों को कुछ न कहने की चेतावनी दी गई है कि वे कुछ भी न कहें, वरना उन्हें उसी दिन नौकरी से निकाल दिया जाएगा।  

होटल ले जाने के मामले में टीचर को मिली जमानत, कोर्ट ने सहमति का किया उल्लेख

मुंबई  नाबालिग छात्र के यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार हुईं मुंबई की एक शिक्षिका को जमानत मिल गई है। मुंबई की एक कोर्ट ने सबूतों के आधार पर कहा कि दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे। टीचर पर आरोप थे कि उसने कई मौकों पर फाइव स्टार होटल ले जाकर नाबालिग छात्र का यौन शोषण किया है। अदालत ने जमानत देते समय आरोपी शिक्षिका पर पीड़ित से किसी तरह का संबंध नहीं साधने की शर्तें लगाई हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने आदेश में कहा है कि सबूत दिखाते हैं दोनों के बीच सहमति से संबंध थे। स्पेशल जज सबीना मलिक ने कहा, 'आरोपी ने स्कूल से इस्तीफा दे दिया था, तो छात्र और शिक्षिका के बीच संबंध की बात नहीं है। ऐसे में प्रभाव उतना नहीं है।' जज ने कहा कि ट्रायल पूरा होने में समय लगेगा और आरोपी को तब तक हिरासत में रखने से कुछ नहीं मिलेगा। इधर, पीड़ित ने जमानत याचिका का विरोध किया है। पक्ष का कहना है कि अगर महिला को जमानत मिलती है, तो वह एक बार फिर छात्र को डराने धमकाने के रास्ते खोज लेगी। साथ ही कहा गया है कि वह सबूतों के साथ भी छेड़छाड़ कर सकती है। इसपर जज ने कहा कि जरूरी शर्तें लगाई जा सकती हैं, जिनके जरिए ऐसी आशंकाओं को दूर किया जा सकेगा। जज ने कहा कि आरोपी किसी भी तरह से पीड़ित से संपर्क नहीं करेगी। किसी भी गवाह या पीड़ित को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उकसाने, डराने या किसी चीज का वादा करने की रोक लगाई जाती है। जज ने यह भी साफ किया है कि इन शर्तों का उल्लंघन करने से जमानत तुरंत रद्द हो जाएगी। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की तरफ से दिए गए आवेदन में महिला ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। साथ ही उसका कहना है कि यह मामला झूठा और लड़के की मां के कहने पर किया गया है, क्योंकि वह उनके रिश्ते के खिलाफ थीं। महिला ने याचिका में लड़के से बातचीत के सबूत पेश किए और कहा है कि उसके पैरेंट्स को रिश्ते के बारे में पता था। वह इसके खिलाफ थे। क्या था केस पुलिस का दावा है कि शिक्षा नाबालिग छात्र के प्रति दिसंबर 2023 में आकर्षित हुई थी। उसने कथित तौर पर जनवरी 2024 में पहली बार यौन संबंधों की पेशकश की। FIR में कहा गया है कि शिक्षिका नाबालिग छात्र को बड़े होटलों में ले जाती थी, जहां कथित तौर पर उसका यौन शोषण किया जाता था। खबरें हैं कि टीचर ने कई बार शोषण करने से पहले छात्र को नशीला पदार्थ दिया।