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8 सितंबर का राशिफल: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, मां लक्ष्मी की कृपा से बढ़ेगा धन

मेष आज प्यार से बोलें और दूसरों के साथ जल्दबाजी करने से बचें। कोई मित्रवत संपर्क उपयोगी जानकारी शेयर कर सकता है। शाम तक एक छोटा सा काम पूरा करके शांत और संतुष्ट महसूस करेंगे। अपनी प्रगति का शांति से जश्न मनाएं। वृषभ आज अनावश्यक खर्चों से बचें। योजनाओं पर ध्यान दें। निरंतर प्रयास से पुरस्कार मिलेंगे। आज आपके दिमाग में उज्ज्वल आइडिया उमड़ेंगे। अपने आइडिया को प्राथमिकता दें और एक उपयोगी योजना पर अमल करें। मिथुन सही फैसले आज सुकून प्रदान करेंगे। अपने समय का ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर 'ना' कहें। जरूरी कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें और छोटे-मोटे काम पूरे करें। दोस्त या परिवार मददगार सलाह देते हैं, शांति से सुनें। कर्क आज दूसरों से बात करते समय पॉजिटिव रहें। अपने लक्ष्य की ओर एक कदम बढ़ाएं। अप्रत्याशित मदद मिल सकती है। बिना किसी अहंकार के मदद को स्वीकार करें। रोज कॉन्फिडेंस बढ़ाने के लिए छोटी-छोटी जीत का जश्न मनाएं। सिंह आज कॉन्फिडेंस और प्रगति के लिए एक काम शुरू करने से पहले दूसरा काम पूरा करें। आज आपकी एनर्जी हाई है। छोटी-छोटी समस्याओं को सुलझाने के लिए क्लियर सोच का प्रयोग करें। कन्या आज छोटे-छोटे कदम लगातार प्रगति लाएंगे। दयालु बनें। जिज्ञासु बने रहें और धैर्य के साथ बिना किसी हड़बड़ी के नए अवसरों का स्वागत करें। आज का दिन निरंतर कोशिश और योजना बनाने के पक्ष में हैं। तुला आज के दिन खुद पर भरोसा करें। क्लियर रूप से बोलें और छोटे लक्ष्य निर्धारित करें। शांति पाने के लिए छोटे-छोटे ब्रेक लें। म्यूजिक सुनें। जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें। मददगार सलाह स्वीकार करें। वृश्चिक आज छोटे-छोटे काम विश्वास का निर्माण करते हैं। शाम तक, हल्के-फुल्के शौक के साथ आराम करें। फ्यूचर के लिए अगले कदमों की योजना बनाएं। आज आप ऊर्जावान और आत्मविश्वासी महसूस करेंगे। धनु आज सीखने के छोटे-छोटे काम आपके लिए मददगार साबित होंगे। रात तक अपने नोट्स को ऑर्गनाइज करें। अच्छी नींद लें और नई योजनाओं के लिए तैयार हो जाएं। आज आप स्टेबल महसूस करेंगे। मकर आज आपका दिमाग तेज है। कुछ छोटा-मोटा सीखें, विचार साझा करें और विनम्रता से बात करें। साधारण बातचीत और सुनने से नए संबंध बन सकते हैं। क्लियर सवाल पूछें और छोटे-छोटे आइडिया शेयर करें। कुंभ आज अपनी रूटीन पर ध्यान केंद्रित करें। नए कामों से पहले छोटे काम पूरे करें। पैसों या रिश्तों के बारे में जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें। बातचीत भ्रम को दूर करती है। कोई अच्छी खबर मिल सकती है। मीन एक समय में एक ही काम पर फोकस करें और आसानी से बात करें। आपकी एनर्जी काम निपटाने और दोस्ताना बातचीत को बढ़ावा देने में मदद करेगी। जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें।

गणेश चतुर्थी 2026: 14 सितंबर से शुरू होगा गणेश महोत्सव, जानें पूजा मुहूर्त और शुभ योग

 हिंदू धर्म में गणेश महोत्सव का विशेष महत्व है. यह पर्व मुख्य रूप से भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी के दिन इसका समापन होता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर से शुरू होगा और समापन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार के दिन अनंत चतुर्दशी के दिन होगा. धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों भगवान गणेश अपने भक्तों के बीच रहते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. भगवान गणेश की पूजा सार्वजनिक रूप से पंडालों में भी की जाती है और लोग अपने घरों में भी गणपति की स्थापना करते हैं. गणेश चतुर्थी तिथि (Ganesh Chaturthi 2026 Tithi) द्रिक पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी की तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगा. वहीं, गणेश जी का विसर्जन 25 सितंबर, शुक्रवार के दिन होगा. गणेश चतुर्थी पूजन मुहूर्त (Ganesh Chaturthi 2026 Pujan Muhurat) पंचांग के मुताबिक, गणेश चतुर्थी के पूजन का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 2 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 31 मिनट पर होगा. गणेश चतुर्थी 2026 शुभ योग पंडितों की मानें तो, इस बार गणेश चतुर्थी बहुत ही शुभ मानी जा रही है. क्योंकि इस दिन रवि योग का संयोग बन रहा है. इसके अलावा, गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी के बीच 10 दिनों में कईं विशेष ग्रह योग निर्माण कर रहे हैं. जिसमें गुरु इस समय कर्क राशि में उच्च के हैं, शनि मीन राशि में वक्री स्थिति में बैठे हुए हैं. गणेश चतुर्थी पूजन विधि (Ganesh Chaturthi Pujan Vidhi) गणेश महोत्सव के दौरान अगर आपने घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की है तो सुबह और शाम दोनों समय उनकी पूजा करनी चाहिए. दोनों समय दीपक जलाकर भगवान गणेश की आरती करें. पूजा में भगवान गणेश को पीले फूल और दूर्वा जरूर अर्पित करें. इसके साथ भोग लगाएं और फिर आरती करें. गणेश महोत्सव के दौरान सात्विकता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. खान-पान भी सात्विक रखना शुभ माना जाता है. जिन लोगों ने घर में गणपति की स्थापना की है, उन्हें इन दिनों प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. भोजन तैयार करने के बाद पहले भगवान गणेश को भोग लगाएं और फिर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें. अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. इस दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार उपवास रखकर भगवान गणेश की पूजा करने और विसर्जन में शामिल होने की परंपरा है. भगवान गणेश को क्या अर्पित करें? भगवान गणेश की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीजों में दूर्वा और मोदक माने जाते हैं. मोदक उपलब्ध न हो तो लड्डू भी अर्पित किए जा सकते हैं. इसके अलावा भगवान गणेश को पीले वस्त्र और सिंदूर अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. यहां एक मान्यता यह भी है कि महिलाएं भगवान गणेश को सिंदूर अर्पित न करें और केवल फूल व पीले वस्त्र अर्पित करें, जबकि पुरुष सिंदूर अर्पित कर सकते हैं. भगवान गणेश को पीले फूलों की माला भी चढ़ाई जा सकती है. विशेष मनोकामना के लिए फलों की माला अर्पित करने की परंपरा भी बताई जाती है. अगर आपने घर में गणपति की स्थापना की है तो पूरे गणेश महोत्सव के दौरान घी का अखंड दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है. सुबह और शाम कपूर या दीपक से भगवान गणेश की आरती जरूर करें. गणेश चतुर्थी उपाय (Ganesh Chaturthi Upay) – मनचाहे विवाह के लिए गणेश जी का उपाय गणेश महोत्सव के दौरान विवाह में आ रही बाधा को दूर करने के लिए भगवान गणेश का विशेष श्रृंगार करें. उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल और मोदक या लड्डू अर्पित करें. इसके बाद ऊं विघ्नहराय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें. पूजा के बाद भगवान गणेश से शीघ्र विवाह और मनचाहा जीवनसाथी मिलने की प्रार्थना करें. पूजा में अर्पित पीले वस्त्र को उतारकर सुरक्षित रख लें. यह उपाय गणेश महोत्सव के दौरान किसी भी दिन सुबह किया जा सकता है. – संतान प्राप्ति के लिए उपाय अगर किसी दंपति को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है तो गणेश महोत्सव के दौरान भगवान गणेश को फलों की माला अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है. इसके लिए केले, सेब, अंगूर और नाशपाती जैसे फलों को पीले धागे में बांधकर माला बनाएं और भगवान गणेश को अर्पित करें. इसके बाद संतान गणपति स्तोत्र का पाठ करें. पति-पत्नी साथ मिलकर 'ॐ उमापुत्राय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें और संतान प्राप्ति के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना करें. पूजा के बाद भगवान गणेश को अर्पित किए गए फलों को प्रसाद के रूप में बच्चों में बांट दें. इस उपाय को गणेश महोत्सव के दौरान लगातार तीन दिनों तक करने की परंपरा बताई जाती है. – मकान या संपत्ति प्राप्ति के लिए उपाय अगर आप मकान खरीदना चाहते हैं, नया घर बनाना चाहते हैं या संपत्ति से जुड़ी कोई इच्छा पूरी करना चाहते हैं तो गणेश महोत्सव के दौरान भगवान गणेश को लाल फूलों की माला अर्पित करें. इसके लिए गुड़हल या गुलाब के फूलों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके साथ लाल फल, लाल वस्त्र और तांबे का एक सिक्का भगवान गणेश को अर्पित करें. इसके बाद ऊं सर्वसौख्यप्रदाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें और भगवान गणेश से संपत्ति प्राप्ति की प्रार्थना करें.

बेड से लेकर दरवाजे तक, इन जगहों पर बैठकर खाना न खाएं, वास्तु में माना गया है अशुभ

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर केवल रहने का स्थान नहीं है, बल्कि यह हमारी ऊर्जा, स्वास्थ्य और खुशहाली का केंद्र होता है. दिनभर की भागदौड़ के बाद जब हम भोजन करते हैं, तो वह केवल हमारे शरीर को पोषण ही नहीं देता, बल्कि हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है. लेकिन अक्सर अनजाने में हम घर के किसी भी कोने जैसे बेड पर बैठकर या दरवाजे की चौखट पर, खाना खाने लगते हैं. वास्तु और ज्योतिष में भोजन करने के स्थान और दिशा का सीधा संबंध हमारी सेहत, मानसिक शांति और आर्थिक स्थिति (मां लक्ष्मी की कृपा) से माना गया है. गलत जगह बैठकर भोजन करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा और बीमारियां दस्तक देने लगती हैं. आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार घर में किन-किन जगहों पर बैठकर खाना खाने से सख्त परहेज करना चाहिए. बिस्तर या बेड पर वास्तु और शास्त्र दोनों में बिस्तर पर बैठकर खाना खाने को सख्त मना किया गया है. ऐसा करने से राहु का अशुभ प्रभाव बढ़ता है, व्यक्ति कर्ज में डूब सकता है, नींद से जुड़ी समस्याएं होती हैं और घर की बरकत रुक जाती है. टूटे-फूटे या गंदे बर्तनों और हाथों में रखकर प्लेट को हाथ में पकड़कर या फिर टूटे-फूटे व चटके हुए बर्तनों में खाना नहीं खाना चाहिए. हाथ में थाली रखकर खाने से दरिद्रता आती है और टूटे बर्तनों में खाने से घर में कलह और नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. रसोई घर के बिल्कुल दरवाजे या मुख्य द्वार पर घर के मुख्य द्वार (Main Door) पर या चौखट पर बैठकर भोजन करना बेहद अशुभ माना जाता है. मुख्य द्वार से ऊर्जा का प्रवेश होता है; वहां बैठकर खाने से घर की लक्ष्मी रुष्ट होती हैं और धन की हानि होती है. अंधेरे या धुंधली रोशनी वाली जगह पर जहां रोशनी कम हो या अंधेरा हो, वहां बैठकर भोजन नहीं करना चाहिए. इससे पाचन तंत्र खराब होता है और मन में नकारात्मक विचार आते हैं. बाथरूम या शौचालय के पास शौचालय से हमेशा नकारात्मक ऊर्जा निकलती है. इसके आसपास बैठकर खाना खाने से भोजन की पवित्रता नष्ट होती है. इससे कई प्रकार की शारीरिक बीमारियां और इंफेक्शन होने का खतरा रहता है. वास्तु के अनुसार भोजन करने के सही नियम – भोजन करते समय आपका मुख हमेशा पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए। इससे आयु और स्वास्थ्य बढ़ता है. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से बचना चाहिए. – यदि संभव हो तो रसोई घर (Kitchen) में बैठकर ही भोजन करें. इससे राहु के दोष शांत होते हैं. इसके अलावा डाइनिंग टेबल पर साफ जगह बैठकर खाएं. – भोजन शुरू करने से पहले हाथ-पैर अच्छे से धोएं और अन्न देवता का धन्यवाद करें.

चाणक्य नीति: ये 5 आदतें इंसान को सफलता से रखती हैं दूर, आज ही सुधार लें

 हर व्यक्ति जिंदगी में आगे बढ़ना और सफलता हासिल करना चाहता है, लेकिन सिर्फ मेहनत करना ही काफी नहीं होता. कई बार हमारी अपनी आदतें ही तरक्की की राह में रुकावट बन जाती हैं. आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में ऐसी ही आदतों और व्यवहार के बारे में बताया है, जो व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोक सकते हैं. चाणक्य के अनुसार अगर इंसान समय रहते अपनी कमियों को पहचानकर उनमें सुधार कर ले, तो सफलता की राह आसान हो सकती है. आलस्य को न बनने दें आदत चाणक्य नीति के अनुसार आलस्य व्यक्ति की प्रगति का सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है. जो व्यक्ति जरूरी काम को लगातार टालता रहता है, उसके हाथ से कई अच्छे अवसर निकल जाते हैं. सही समय पर फैसला लेना और काम को पूरा करना सफलता के लिए जरूरी है. इसलिए किसी भी काम को कल पर टालने की आदत से बचना चाहिए. केवल किस्मत के भरोसे न बैठें किस्मत पर भरोसा करना गलत नहीं है, लेकिन सिर्फ भाग्य के भरोसे बैठकर प्रयास छोड़ देना नुकसानदायक हो सकता है. चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए. मेहनत और सही दिशा में किया गया प्रयास ही आगे बढ़ने में मदद करता है. लक्ष्य की कमी भी बन सकती है बाधा अगर व्यक्ति को यह ही पता न हो कि उसे हासिल क्या करना है, तो उसकी मेहनत सही दिशा में नहीं जा पाती. चाणक्य नीति के अनुसार जीवन में स्पष्ट लक्ष्य होना जरूरी है. इसके साथ ही अनुशासन और निरंतर प्रयास भी सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं. अभ्यास छोड़ने की गलती न करें किसी भी काम में लगातार बेहतर बनने के लिए अभ्यास जरूरी है. चाणक्य ने भी ज्ञान और विद्या के साथ अभ्यास के महत्व पर जोर दिया है. लगातार अभ्यास न करने से सीखी हुई चीजें भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती हैं. इसलिए नई चीजें सीखने और अपनी क्षमता को बेहतर करने का प्रयास जारी रखना चाहिए. मुश्किल आने से पहले तैयार रहें चाणक्य के बताए श्लोक का भाव है कि जो व्यक्ति संकट आने से पहले ही उसके समाधान के बारे में सोच लेता है. मुश्किल समय में अपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल करता है, वह बेहतर स्थिति में रहता है. वहीं हर परिस्थिति को किस्मत के भरोसे छोड़ देने वाला व्यक्ति मुश्किल में फंस सकता है. इसलिए भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी करना समझदारी है.

बुध का कन्या राशि में प्रवेश, बना भद्र राजयोग; इन 5 राशियों को मिलेगा जबरदस्त लाभ

 द्रिक पंचांग के अनुसार, 7 सितंबर 2026 यानी आज बुध देव अपनी स्वयं की और उच्च राशि कन्या में प्रवेश कर चुके हैं. वैदिक ज्योतिष में बुध को बुद्धि, व्यापार, तर्कशास्त्र, गणित और वाणी का कारक ग्रह माना जाता है. जब बुध अपनी उच्च राशि में आते हैं, तो भद्र राजयोग का निर्माण करते हैं, जिससे कई राशियों को करियर, धन और बौद्धिक क्षमता के क्षेत्र में विशेष लाभ मिलता है. 26 सितंबर की दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहने वाले इस गोचर से मुख्य रूप से इन राशियों को सबसे ज्यादा फायदा होने जा रहा है. मेष राशि करियर में सफलता: छठे भाव में बुध का गोचर आपके विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों को शांत रखेगा. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिलेंगे. प्रभावशाली वाणी: कार्यस्थल पर आपकी बातें और सुझाव लोग ध्यान से सुनेंगे, जिससे आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. वृषभ राशि आर्थिक लाभ: आपकी राशि के पांचवें भाव में गोचर होने से अचानक धन लाभ के अवसर बन सकते हैं. करियर व व्यापार: सरकारी या प्रशासनिक कार्यों में सहयोग मिलेगा. यदि आप शेयर बाजार, शिक्षा या रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े हैं, तो आपकी योजनाएं सफल होंगी. पारिवारिक जीवन: संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ेगी. मिथुन राशि सुख-साधनों में वृद्धि: बुध आपकी राशि के स्वामी हैं. चौथे भाव में गोचर से आपके भौतिक सुख-सुविधाओं और प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में तरक्की होगी. कमाई के नए स्रोत: आय के नए स्रोत बन सकते हैं. नौकरीपेशा जातकों को पदोन्नति या कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. पारिवारिक सहयोग: माता पक्ष से पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा. कन्या राशि आत्मविश्वास में वृद्धि: आपकी अपनी राशि और प्रथम (लग्न) भाव में बुध का आगमन आपके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में जबरदस्त निखार लाएगा. मान-सम्मान और प्रगति: समाज और कार्यस्थल पर आपकी प्रतिभा की सराहना होगी. व्यापार में नए समझौतों और निवेश से बड़ा आर्थिक फायदा मिलने के योग हैं. कुंभ राशि अटके काम होंगे पूरे: करियर में लंबे समय से रुके हुए प्रोजेक्ट्स फिर से शुरू होंगे. बिजनेस और डील: पार्टनरशिप के कामों में बड़ा लाभ हो सकता है और किसी अच्छी डील के मिलने के संकेत हैं. संपत्ति से जुड़े विवाद हल हो सकते हैं. बुध के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के सरल उपाय – इस अवधि के दौरान भगवान गणेश की पूजा करें और उन्हें दूर्वा अर्पित करें. – हरा वस्त्र या हरे रंग की चीजों का उपयोग बढ़ाएं या किसी जरूरतमंद को हरी मूंग की दाल का दान करें. – प्रतिदिन ऊं बुं बुधाय नमः मंत्र का जाप करें.

अजा एकादशी पर जरूर पढ़ें राजा हरिश्चंद्र की कथा, दूर होंगे संकट और पाप

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता है कि अजा एकादशी का व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के पाप कर्मों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस दिन व्रत के साथ अजा एकादशी की कथा सुनना या पढ़ना भी बेहद शुभ माना जाता है. अजा एकादशी व्रत कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में राजा हरिश्चंद्र एक प्रतापी और धर्मपरायण राजा थे. उनके राज्य में सुख-समृद्धि और वैभव की कोई कमी नहीं थी. प्रजा भी उनसे बेहद प्रसन्न थी. लेकिन समय ने ऐसी करवट ली कि राजा हरिश्चंद्र को अपना राज्य, धन-संपत्ति और यहां तक कि अपने परिवार से भी अलग होना पड़ा. कहा जाता है कि परिस्थितियां इतनी विकट हो गई थीं कि उन्हें अपना जीवन चलाने के लिए एक चांडाल के यहां दास के रूप में काम करना पड़ा. राजा हरिश्चंद्र के जीवन में दुख और परेशानियों का दौर लगातार बढ़ता जा रहा था. इसके बावजूद उन्होंने सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा. इसी दौरान एक दिन उनकी मुलाकात गौतम ऋषि से हुई. राजा हरिश्चंद्र ने ऋषि के चरणों में नमन किया और उन्हें अपने जीवन में आई सभी परेशानियों के बारे में बताया. उनकी स्थिति जानकर गौतम ऋषि ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी. गौतम ऋषि ने राजा को बताया कि अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है. श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और उसके जीवन के संकट दूर होने लगते हैं. ऋषि की सलाह मानकर राजा हरिश्चंद्र ने विधि-विधान से अजा एकादशी का व्रत किया और भगवान विष्णु की आराधना की. धार्मिक मान्यता के अनुसार, अजा एकादशी के व्रत के प्रभाव से राजा हरिश्चंद्र के सभी कष्ट दूर हो गए. उन्हें अपना खोया हुआ राज्य, धन-संपत्ति और परिवार वापस मिल गया. अंत में भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई और वे वैकुण्ठ धाम चले गए. अजा एकादशी व्रत की पूजा विधि अजा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें. इसके बाद घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें. पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. भगवान विष्णु को पीले वस्त्र अर्पित करें और पीले फूल चढ़ाएं. इसके बाद गंगाजल से भगवान का अभिषेक करें. पूजा के दौरान धूप और दीप जलाकर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें. भगवान को फल, मिठाई और अन्य सात्विक चीजों का भोग लगाया जा सकता है. पूरे दिन भगवान विष्णु के मंत्र ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करना शुभ माना जाता है. शाम के समय भगवान विष्णु की आरती करें या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. इस दिन अजा एकादशी की व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी शुभ फलदायी माना जाता है. अगले दिन द्वादशी तिथि पर पूजा करने के बाद व्रत का पारण करें. अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक चीजों का दान करना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस तरह श्रद्धापूर्वक अजा एकादशी का व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है.

सितंबर में इन 3 राशियों पर रहेगी शनि की कड़ी नजर, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

 सितंबर का महीना ग्रहों की चाल और नक्षत्रों के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है. इस माह कर्मफलदाता और न्याय के देवता शनि देव 3 मुख्य राशियों मिथुन, सिंह और कन्या के जातकों के धैर्य, निर्णय क्षमता और योग्यता की कड़ी परीक्षा ले सकते हैं. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सितंबर में शनि देव की दृष्टि सिंह राशि के स्वामी ग्रह सूर्यदेव पर और मिथुन व कन्या राशि के स्वामी ग्रह बुध देव पर पड़ेगी.  ग्रहों के इस प्रभाव के कारण इन तीनों ही राशियों के जीवन में उथल-पुथल और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.  शनि देव कर्म प्रधान ग्रह हैं, इसलिए इस दौरान ईमानदारी और लगन से किए गए कार्यों का तो उत्तम फल मिलेगा, लेकिन भाग्य के भरोसे बैठकर आलस्य करना नुकसानदायक साबित हो सकता है. आइए जानते हैं कि सितंबर महीने में इन तीनों राशियों पर शनि देव का कैसा असर रहने वाला है. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि के स्वामी ग्रह बुध पर शनि की दृष्टि रहने से इस माह आपको मानसिक तनाव और भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है. कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों या अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श में संयम रखें. जल्दबाजी में लिया गया कोई भी व्यावसायिक निर्णय भारी पड़ सकता है. सावधानी: अपनी योग्यता पर भरोसा रखें और शॉर्टकट अपनाने से बचें.  जितने अधिक प्रयास आप खुद करेंगे, सफलता उतनी ही मजबूत मिलेगी. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव हैं, और सूर्य-शनि के बीच ज्योतिषीय शत्रुता मानी जाती है.  ऐसे में सिंह राशि वालों के लिए यह समय धैर्य की परीक्षा का रहेगा. कार्यस्थल पर आपके काम का बोझ बढ़ सकता है और सीनियर के साथ तालमेल बिठाने में मशक्कत करनी पड़ सकती है.  मान-सम्मान को लेकर थोड़ा सजग रहें. सावधानी: अहंकार से दूर रहें.  अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ें और भाग्य के भरोसे कोई नया जोखिम न लें. कन्या राशि (Virgo) कन्या राशि के स्वामी बुध पर शनि की दृष्टि के चलते इस माह आपके दैनिक कार्यों और योजनाओं में कुछ रुकावटें या देरी देखने को मिल सकती है. धन के मामलों में सोच-समझकर कदम उठाएं. फिजूलखर्ची से बचें और सेहत का विशेष ध्यान रखें. सावधानी: आलस्य को खुद पर हावी न होने दें.  शनि देव आपकी निरंतरता (Consistency) की परीक्षा लेंगे, इसलिए अपने लक्ष्यों पर टिके रहें. शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के सरल उपाय – शनिवार को दान: हर शनिवार को काले तिल, उड़द की दाल या सरसों के तेल का दान करें. – पीपल पूजन: शनिवार की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं. – हनुमान जी की उपासना: प्रतिदिन या हर मंगलवार-शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें, इससे शनि देव के कष्टों से मुक्ति मिलती है.

7 सितंबर राशिफल: सोमवार का दिन इन राशियों के लिए रहेगा खास, मां लक्ष्मी की कृपा से मिलेगा आर्थिक लाभ

मेष आज खुश रहने के लिए लव लाइफ से जुड़े सभी मुद्दों को सॉल्व कर लें। व्यावसायिक रूप से आप अच्छे और भाग्यशाली रहेंगे। मेष राशि वाले कुछ लोग संपत्ति पर कानूनी विवाद जीत सकते हैं। कार्यस्थल पर भी आज आप अच्छा प्रदर्शन करेंगे। वृषभ आज रिश्ते में छोटी-मोटी नोक झोंक के बावजूद आपकी लव लाइफ अच्छी रहेगी। करियर में सफल होने के लिए हर आने वाली चुनौती को पूरी शिद्दत से हल करें। अच्छे श्रोता बनें। मिथुन आज छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याएं रहेंगी जबकि आपका धन- धान्य बना रहेगा। आज कार्यालय में आपका प्रदर्शन बेहतरीन रहने वाला है। वहीं, प्रेम जीवन भी शानदार रहेगा। वित्त और स्वास्थ्य दोनों दिन भर अच्छे रहेंगे। कर्क आज अपनी क्षमता साबित करने के लिए दफ्तर में हर मुद्दे को सुलझाएं। बड़े निवेश के लिए आज का दिन अच्छा है और स्वास्थ्य भी आज अच्छा रहने वाला है। कुछ कर्क राशि वाले पुराने रिश्ते में वापस जाने के लिए भाग्यशाली होंगे। सिंह आज खुशी के पल आप महसूस करेंगे। वहीं, एक खुशहाल रिश्ते को व्यावसायिक सफलता का भी सहारा मिलता है। पैसों को सोच-समझकर खर्च करें। अपने साथी के साथ समय बिताएं। कन्या आज आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ कोई भी काम कर सकते हैं। आप उस प्यार और प्रशंसा की उम्मीद कर सकते हैं, जिसके आप हकदार हैं। आज वह दिन है, जब आपको अपना आकर्षण, और क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा। तुला आज सभी पेशेवर चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करें। मजबूत वित्तीय स्थिति आपको स्मार्ट फाइनेंशियल डीसीजन लेने में मदद करती है। आज दफ्तर में सावधान रहें क्योंकि चुनौतियां आ सकती हैं। वृश्चिक आज सही निर्णय लेने के लिए खुद पर भरोसा रखें। आप मेलजोल, संपर्क और प्रयोग में रुचि रखते हैं। आज आप खुद को एक्स्प्रेस करने के नए तरीके सीखेंगे। लव के मामले में आपका दिन बहुत नॉर्मल रहेगा। धनु आज अपने प्रेम जीवन को शानदार बनाएं। रिश्ते से जुड़े मुद्दों को मेच्योर स्वभाव के साथ संभालें। आर्थिक रूप से आप अच्छे हैं लेकिन स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। आप एनर्जेटिक महसूस करेंगे। मकर आज अपने साथी को यह बताने का दिन है कि आप उनके लिए कितने आभारी हैं। सुख-दुख में आपके साथ रहने के लिए उन्हें धन्यवाद देने के लिए समय निकालें। धन के मामले में सावधान रहें। कुंभ आज अपने रास्ते में आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार होंगे। यह अपने सपनों को पूरा करने का समय है। आप उत्साह महसूस करेंगे। कोई भी बाधा इतनी बड़ी नहीं है, जिसे पार करना आपके लिए मुश्किल हो। मीन यह आपकी कड़ी मेहनत का आनंद लेने का समय है। यह याद रखना भी आवश्यक है कि जीवन केवल आराम और स्थिरता के बारे में नहीं है। कभी-कभी आपको अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर कुछ नया आजमाना चाहिए।  

चाणक्य नीति: इन 3 चीजों को लेकर कभी न करें शर्म, वरना बढ़ सकती है परेशानी

आज के दौर में लोगों के बीच खुद को बेहतर दिखाने का दबाव काफी बढ़ गया है. अच्छी नौकरी, महंगी चीजें, बेहतर लाइफस्टाइल और आर्थिक स्थिति को लेकर लोग अक्सर दूसरों से अपनी तुलना करने लगते हैं. कई बार इसी दिखावे के कारण व्यक्ति अपनी वास्तविक जरूरतों और परिस्थितियों को छिपाने लगता है. आचार्य चाणक्य की नीतियां इससे बिल्कुल अलग सोच अपनाने की सीख देती हैं. उनके अनुसार कुछ ऐसी परिस्थितियां हैं, जिनके लिए व्यक्ति को न तो संकोच करना चाहिए और न ही दूसरों के सामने शर्मिंदा महसूस करना चाहिए l आर्थिक परेशानी छिपाने में न करें संकोच हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रहती. कभी किसी के पास पर्याप्त धन होता है तो कभी परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता है.चाणक्य नीति के अनुसार आर्थिक तंगी ऐसी चीज नहीं है, जिसे लेकर इंसान को शर्म महसूस करनी चाहिए  l मुश्किल समय को छिपाने के बजाय उसे स्वीकार करके उससे बाहर निकलने की कोशिश करनी चाहिए. अपनी क्षमता के अनुसार मेहनत करना, नए कौशल सीखना और बेहतर अवसर तलाशना ज्यादा जरूरी है. सिर्फ लोगों को अपनी स्थिति बेहतर दिखाने के लिए कर्ज या अनावश्यक खर्च का सहारा लेना परेशानी को और बढ़ा सकता है  l ईमानदारी से किया कोई काम छोटा नहीं कई बार लोग काम को उसके पद और कमाई के आधार पर आंकने लगते हैं. यही वजह है कि कुछ लोग छोटा काम करने में भी झिझकते हैं . चाणक्य की सीख है कि ईमानदारी से किया गया कोई भी काम छोटा नहीं होता  l नौकरी छोटी हो या बड़ी, कारोबार हो या मेहनत-मजदूरी अगर व्यक्ति अपने काम को ईमानदारी से करता है तो उसे अपने पेशे पर गर्व होना चाहिए. मुश्किल समय में मिलने वाला कोई भी सही काम आगे बढ़ने का जरिया बन सकता है. काम से मिलने वाला अनुभव भविष्य में नए अवसरों के दरवाजे भी खोल सकता है  l भूख लगे तो खाना मांगने में न करें शर्म चाणक्य नीति में शरीर की मूल जरूरतों को भी महत्व दिया गया है. अगर किसी व्यक्ति को भूख लगी है तो सिर्फ लोकलाज या दूसरों के सामने अच्छा दिखने के लिए अपनी भूख को दबाना सही नहीं है l भोजन शरीर की बुनियादी जरूरत है . इसलिए समय पर खाना खाना या जरूरत पड़ने पर भोजन मांगना कोई शर्म की बात नहीं है. अपनी सेहत और शरीर की जरूरतों को नजरअंदाज करना समझदारी नहीं कही जा सकती l लोग क्या कहेंगे के डर से न रोकें खुद को अक्सर व्यक्ति अपनी जरूरतों से ज्यादा इस बात की चिंता करता है कि दूसरे उसके बारे में क्या सोचेंगे. आर्थिक स्थिति खराब हो तो उसे छिपाना, मेहनत का काम करने से बचना या भूख लगने पर भी संकोच करना इसी मानसिकता का हिस्सा हो सकता है  l चाणक्य की इस सीख का मूल भाव यही है कि दूसरों की राय से ज्यादा अपने आत्मसम्मान और जरूरतों को महत्व देना चाहिए . समाज की बातें हमेशा बदलती रहती हैं, लेकिन अपने जीवन की जिम्मेदारी व्यक्ति को खुद उठानी होती है l दिखावे से बेहतर है वास्तविकता को स्वीकार करना आज सोशल मीडिया के दौर में तुलना और दिखावे का असर और बढ़ गया है. किसी की महंगी कार, शानदार घर या लग्जरी लाइफ देखकर लोग अपनी जिंदगी को कमतर समझने लगते हैं. लेकिन दूसरों की जिंदगी देखकर अपनी क्षमता से ज्यादा खर्च करना समझदारी नहीं है l खुशहाल जीवन का मतलब सिर्फ महंगी चीजें होना नहीं है. आर्थिक अनुशासन, मेहनत, आत्मसम्मान और अपनी वास्तविक परिस्थितियों को स्वीकार करना भी उतना ही जरूरी है l चाणक्य नीति की यह सीख हमें याद दिलाती है कि जरूरत के समय मदद मांगना, ईमानदारी से काम करना और अपनी मूल जरूरतों को स्वीकार करना कमजोरी नहीं है. असली कमजोरी तब है, जब इंसान सिर्फ समाज के डर से अपनी जरूरतों और सच्चाई को छिपाता रहे l

श्रीकृष्ण ने पांडवों को क्यों भेजा था वन? कलियुग से जुड़ी 5 रहस्यमयी घटनाओं का क्या है राज

महाभारत केवल हिंदू धर्म का ही नहीं, बल्कि समस्त मानव जाति के लिए ज्ञान और जीवन दर्शन का एक महान ग्रंथ माना जाता है. इसमें जीवन से जुड़े लगभग हर विषय का वर्णन मिलता है. धर्म, न्याय, राजनीति, समाज, परिवार, युद्ध, ज्ञान और अध्यात्म जैसे अनेक विषयों पर महाभारत हमें सोचने और सही मार्ग चुनने की प्रेरणा देता है. आज हम आपको महाभारत और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा एक ऐसा रोचक प्रसंग बताने जा रहे हैं, जिससे आज का मनुष्य भी बहुत कुछ सीख सकता है. इस कथा में पांचों पांडव वन में अलग-अलग दिशाओं में जाते हैं और वहां उन्हें कुछ ऐसी विचित्र घटनाएं दिखाई देती हैं, जिनका अर्थ वे समझ नहीं पाते. बाद में भगवान श्रीकृष्ण इन घटनाओं का अर्थ बताते हैं और उन्हें कलयुग से जोड़कर समझाते हैं. तो आइए जानते हैं यह रोचक पौराणिक प्रसंग. श्रीकृष्ण ने पांडवों को वन में क्या देखने के लिए कहा? कथा के अनुसार, एक बार पांचों पांडव भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुंचे. उन्होंने श्रीकृष्ण से कलयुग के बारे में जानने की इच्छा जताई. पांडवों ने पूछा कि आने वाले समय में संसार की स्थिति कैसी होगी और मनुष्यों का स्वभाव कैसा हो जाएगा. भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें सीधे उत्तर देने के बजाय कहा कि वे पांचों अलग-अलग दिशाओं में वन में जाएं. वहां जो कुछ भी विचित्र दिखाई दे, उसे ध्यान से देखें और वापस आकर उन्हें बताएं. श्रीकृष्ण ने कहा कि वे उन घटनाओं का अर्थ समझाएंगे. भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांचों पांडव अलग-अलग दिशाओं में वन की ओर निकल पड़े. युधिष्ठिर ने देखा दो सूंड वाला हाथी सबसे पहले युधिष्ठिर वन में भ्रमण कर रहे थे. तभी उन्होंने एक बेहद विचित्र हाथी देखा. उस हाथी की दो सूंड थीं. यह दृश्य देखकर युधिष्ठिर आश्चर्यचकित रह गए. जब सभी पांडव वापस आए और उन्होंने श्रीकृष्ण को यह बात बताई तो श्रीकृष्ण ने इसका अर्थ समझाया. कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने कहा कि कलयुग में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ेगी, जिनके मन में कुछ और होगा और उनके कर्म कुछ और होंगे. वे सामने से कुछ और कहेंगे, लेकिन भीतर से उनका उद्देश्य अलग होगा. ऐसे लोग अपने स्वार्थ के लिए दूसरों का शोषण करने से भी पीछे नहीं हटेंगे. इस प्रसंग का संदेश यह है कि मनुष्य को केवल किसी के शब्दों पर नहीं, बल्कि उसके कर्मों पर भी ध्यान देना चाहिए. अर्जुन ने देखा वेद लिखे पंखों वाला पक्षी अर्जुन जब वन में भ्रमण कर रहे थे तो उन्होंने एक और आश्चर्यजनक दृश्य देखा. उन्होंने एक ऐसे पक्षी को देखा, जिसके पंखों पर वेदों जैसी पवित्र रचनाएं अंकित थीं, लेकिन वह पक्षी एक मृत शरीर का मांस खा रहा था. अर्जुन यह दृश्य देखकर हैरान रह गए. जब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से इसका अर्थ पूछा तो कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने कहा कि कलयुग में कुछ लोग ज्ञान और धर्म की बड़ी-बड़ी बातें करेंगे, लेकिन उनका आचरण उनके शब्दों के विपरीत होगा. वे बाहर से विद्वान, धार्मिक और ज्ञानी दिखाई देंगे, लेकिन उनका मन धन, पद और स्वार्थ में लगा रहेगा. ऐसे लोगों के लिए धर्म और ज्ञान केवल दिखावा बनकर रह जाएगा. इस प्रसंग का संदेश है कि सच्चा ज्ञान केवल पुस्तकों को पढ़ने से नहीं, बल्कि अच्छे आचरण से दिखाई देता है. भीम ने देखा गाय अपने बछड़े को घायल कर रही है भीम वन में घूम रहे थे. उन्होंने देखा कि एक गाय ने बछड़े को जन्म दिया है. जन्म के बाद वह अपने बछड़े को अत्यधिक प्रेम से चाट रही है, लेकिन वह उसे इतना चाट रही है कि बछड़ा घायल होकर लहूलुहान हो गया. यह देखकर भीम भी आश्चर्यचकित रह गए. जब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से इसका अर्थ पूछा तो कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने बताया कि कलयुग में माता-पिता का अपने बच्चों के प्रति मोह कई बार इतना बढ़ जाएगा कि वे बच्चों को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने का अवसर ही नहीं देंगे. अत्यधिक प्रेम और मोह भी कई बार व्यक्ति के विकास में बाधा बन सकता है. माता-पिता का कर्तव्य केवल बच्चों को अपने पास बांधकर रखना नहीं, बल्कि उन्हें सही संस्कार देकर जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार करना भी है. इस प्रसंग का संदेश है कि प्रेम के साथ-साथ सही दिशा और स्वतंत्रता भी जरूरी है. सहदेव ने देखा सात कुओं के बीच एक खाली कुआं सहदेव वन में भ्रमण कर रहे थे. उन्होंने देखा कि आसपास के कई कुएं पानी से भरे हुए हैं, लेकिन उनके बीच स्थित एक गहरा कुआं पूरी तरह सूखा पड़ा है. यह दृश्य देखकर सहदेव हैरान रह गए. उन्होंने वापस जाकर भगवान श्रीकृष्ण से इसका अर्थ पूछा. कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने कहा कि कलयुग में मनुष्य के पास धन और संसाधनों की कोई कमी नहीं होगी. लोग विवाह, उत्सव और अन्य आयोजनों में बड़ी मात्रा में धन खर्च करेंगे, लेकिन उनके आसपास कोई व्यक्ति भूखा या जरूरतमंद होगा तो कई लोग उसकी सहायता करने से पीछे हट जाएंगे. एक ओर ऐशो-आराम और भोग-विलास होगा, जबकि दूसरी ओर कई लोग मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे होंगे. इस प्रसंग का संदेश है कि मनुष्य को अपनी समृद्धि के साथ समाज और जरूरतमंद लोगों की भी चिंता करनी चाहिए. नकुल ने देखा विशाल चट्टान को एक छोटे पौधे ने रोक दिया नकुल वन में भ्रमण कर रहे थे. उन्होंने देखा कि पहाड़ से एक विशाल चट्टान तेजी से नीचे की ओर लुढ़क रही है. रास्ते में बड़े-बड़े वृक्ष आए, लेकिन वे उस चट्टान को रोक नहीं सके. कई बाधाओं को पार करती हुई वह चट्टान लगातार आगे बढ़ती रही. लेकिन जब वह एक छोटे से पौधे के पास पहुंची तो वह वहीं रुक गई. नकुल यह देखकर अत्यंत आश्चर्यचकित रह गए. जब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से इस घटना का अर्थ पूछा तो कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने कहा कि कलयुग में मनुष्य का जीवन मोह, धन, अहंकार और सांसारिक इच्छाओं के प्रभाव में तेजी से नीचे की ओर जा सकता है. बड़ी-बड़ी शक्तियां और सांसारिक उपलब्धियां भी कई बार मनुष्य को सही मार्ग पर नहीं रोक पातीं. लेकिन ईश्वर की भक्ति, अच्छे कर्म और आध्यात्मिक चेतना जीवन की दिशा बदल सकती है. इस कथा का संदेश है कि मनुष्य … Read more