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11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र, कलश स्थापना से पहले घर में इन बातों का रखें ध्यान

Sharadiya Navratri शारदीय नवरात्र शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं.  इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और घरों में कलश स्थापना से लेकर अखंड ज्योति तक कई धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं.  मान्यता है कि नवरात्र से पहले घर की साफ-सफाई और पूजा स्थल की तैयारी कर लेना शुभ माना जाता है.  इस बार शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से होकर 19 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी. नवरात्र से पहले घर की सफाई करें नवरात्र शुरू होने से पहले घर के पूजा स्थल और आसपास की अच्छी तरह सफाई कर लें.  धार्मिक मान्यताओं में साफ-सुथरे स्थान को पूजा के लिए विशेष महत्व दिया गया है.  इसलिए मंदिर की सफाई के साथ वहां रखी पुरानी या खराब हो चुकी पूजा सामग्री को भी व्यवस्थित कर लें. घर के मुख्य द्वार, पूजा घर और रसोई की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है. नवरात्र के दौरान कई लोग सात्विक भोजन और व्रत का पालन करते हैं, इसलिए रसोई को भी पहले से व्यवस्थित करना सुविधाजनक रहेगा. पूजा की सामग्री पहले से जुटा लें नवरात्र में कलश स्थापना की जाती है, इसलिए पूजा सामग्री पहले से तैयार रखना बेहतर है.  कलश, नारियल, आम के पत्ते, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, फल और पूजा में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री की व्यवस्था पहले ही कर लें. अगर आप नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने वाले हैं तो दीपक, तेल या घी और पर्याप्त मात्रा में बाती भी पहले से रख लें.  इससे पूजा के समय किसी जरूरी सामान की कमी नहीं होगी. घर के पूजा स्थल को सजाएं नवरात्रि से पहले पूजा घर को फूलों, साफ कपड़े और दीपक से सजाया जा सकता है.  मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को साफ करके उचित स्थान पर स्थापित करें.  पूजा स्थल के आसपास अनावश्यक सामान न रखें. धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के दौरान पूजा स्थल को शांत और स्वच्छ रखना शुभ माना जाता है. नवरात्रि में घटस्थापना का महत्व नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है.  2026 में शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होगी.  नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है.  हालांकि पूजा का मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता देना बेहतर है. महालया कब है? दुर्गा पूजा और नवरात्र से पहले महालया का भी विशेष महत्व माना जाता है.  साल 2026 में महालया 10 अक्टूबर को है.  बंगाली परंपरा में महालया के साथ देवी पक्ष की शुरुआत मानी जाती है . इसके बाद मां दुर्गा के आगमन की तैयारियां तेज हो जाती हैं. दुर्गा पूजा कब से शुरू होगी? 2026 में कोलकाता समेत बंगाल में दुर्गा पूजा का मुख्य उत्सव 17 अक्टूबर से शुरू होगा.  षष्ठी से लेकर विजयादशमी तक पूजा और उत्सव का सिलसिला चलेगा.  पश्चिम बंगाल के आधिकारिक पूजा कैलेंडर के अनुसार 17 अक्टूबर को महाषष्ठी, 18 अक्टूबर को महासप्तमी, 19 अक्टूबर को महाअष्टमी, 20 अक्टूबर को महानवमी और 21 अक्टूबर को विजयादशमी होगी. वहीं, देश के अधिकांश हिस्सों में शारदीय नवरात्र 11 से 19 अक्टूबर तक रहेगी, 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी.  क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार तारीखों में अंतर हो सकता है. नवरात्रि से पहले मन और घर दोनों तैयार करें नवरात्रि को केवल पूजा-पाठ का समय ही नहीं बल्कि आत्मचिंतन और सकारात्मक शुरुआत का अवसर भी माना जाता है.  इसलिए इन नौ दिनों की शुरुआत से पहले घर को व्यवस्थित करने के साथ अपने दैनिक जीवन में भी अनुशासन लाने की कोशिश करें.  पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक नियमों का पालन अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार किया जा सकता है.

नवरात्रि के पहले दिन करें ये 5 काम, कलश स्थापना से कन्या भोज तक मिलेगा मां दुर्गा का आशीर्वाद

Navratr 2026 नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर, रविवार से आरंभ हो रहा है। देवी आराधना के लिए समर्पित इन नौ दिनों में भक्त श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। मान्यता है कि नवरात्रि में विधि-विधान से की गई साधना मन को शांति देने के साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ाती है। ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन यानी आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से कुछ विशेष कार्य करना शुभ माना जाता है। 1. कलश स्थापना करें नवरात्रि के प्रथम दिन घर में विधि-विधान से कलश स्थापित करना शुभ माना जाता है। कलश को शक्ति, समृद्धि और जीवन का प्रतीक माना जाता है। देवी पूजा की शुरुआत कलश स्थापना और मां दुर्गा के आह्वान से की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक कलश की स्थापना भक्त को नियमित पूजा, जप और साधना से जोड़े रखती है। 2. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष महत्व रखता है। संभव हो तो प्रतिदिन इसका पाठ करें। यदि समय कम हो तो देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक स्तोत्र का नियमित पाठ किया जा सकता है। सुविधा के अनुसार दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों को नौ दिनों में बांटकर भी पढ़ा जा सकता है। मान्यता है कि देवी की महिमा का पाठ करने से मनोबल बढ़ता है और मां की कृपा प्राप्त होती है। 3. नवार्ण मंत्र का जाप करें नवरात्रि में नवार्ण मंत्र का जाप देवी उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मंत्र है- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'। मान्यता के अनुसार इस मंत्र के जाप से मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और मां काली की आराधना का फल प्राप्त होता है। इसे रुद्राक्ष की माला से जप सकते हैं। समय कम हो तो रोज कम से कम एक माला यानी 108 बार जाप करें। 4. कन्याओं को भोजन कराएं नवरात्रि में कन्या पूजन और कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में कन्याओं को देवी स्वरूप माना गया है। सामर्थ्य हो तो प्रतिपदा से महानवमी तक कन्याओं को भोजन कराया जा सकता है। किसी अनाथालय में बच्चियों को भोजन कराना भी सेवा का अच्छा माध्यम हो सकता है। 5. जरूरतमंदों की सहायता करें नवरात्रि केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि सेवा और दान-पुण्य का भी अवसर है। इस दौरान जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल, दवाएं, जूते-चप्पल जैसी उपयोगी वस्तुएं दान करें। सामर्थ्य रखने वाले लोग बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण में सहयोग करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकते हैं। सच्चे मन से की गई सेवा को देवी आराधना का ही एक रूप माना जाता है।

आज का राशिफल 10 अक्टूबर 2026: इन राशियों के लिए शुभ रहेगा शनिवार, नौकरी-बिजनेस में मिल सकती है सफलता

मेष राशि- आज आपका दिन ठीक रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। कामकाज में पहले से बेहतर स्थिति बन सकती है। व्यापार में कोई नया काम शुरू करने का विचार आ सकता है। प्रेम और संतान से जुड़े मामले मध्यम रहेंगे। किसी काम में मन थोड़ा कम लगेगा। छोटी-मोटी परेशानी हो सकती है, लेकिन किसी बड़े नुकसान के संकेत नहीं हैं। लाल वस्तु पास रखना शुभ होगा। वृषभ राशि- आज मन थोड़ा परेशान रह सकता है। मानसिक तनाव बढ़ सकता है। प्रेम संबंधों में छोटी बात पर तू-तू, मैं-मैं हो सकती है। विद्यार्थियों के मन में असमंजस रहेगा कि क्या करें और क्या न करें। आज कोई महत्वपूर्ण फैसला लेने से बचें। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। व्यापार की स्थिति अच्छी रहेगी। काली जी को प्रणाम करना शुभ होगा। मिथुन राशि- आज घर में किसी बात को लेकर मनमुटाव हो सकता है। कोई बड़ा विवाद नहीं होगा, लेकिन एक-दूसरे की बात गलत समझने की स्थिति बन सकती है। भूमि, भवन या वाहन की खरीदारी में अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। काम में देरी होगी, लेकिन काम पूरा होगा। व्यापार अच्छा चलेगा। काली जी को प्रणाम करना शुभ होगा। कर्क राशि- आज स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में दिन अच्छा रहेगा। व्यापार की स्थिति अभी सामान्य रहेगी। न ज्यादा फायदा दिख रहा है और न कोई बड़ा नुकसान। कुल मिलाकर स्थिति न्यूट्रल रहेगी। बाकी मामलों में पहले से बेहतर स्थिति बन सकती है। लाल वस्तु पास रखना शुभ होगा। सिंह राशि- आज धन हानि से बचकर रहें। निवेश करने से अभी बचना बेहतर होगा। स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामले मध्यम रहेंगे। व्यापार की स्थिति अच्छी रहेगी। पैसों से जुड़े किसी फैसले में जल्दबाजी न करें। सूर्य को जल देना शुभ होगा। कन्या राशि- आज घबराहट और बेचैनी बनी रह सकती है। मन में उत्साह रहेगा, लेकिन ऊर्जा का स्तर थोड़ा कम रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में दिन अच्छा रहेगा। व्यापार भी अच्छा चलेगा। काम को लेकर ज्यादा दबाव न लें। शनि देव को प्रणाम करना शुभ होगा। तुला राशि- आज सिर दर्द और आंखों से जुड़ी परेशानी हो सकती है। खर्च बढ़ने से मन थोड़ा परेशान रहेगा। किसी अज्ञात डर या चिंता की स्थिति भी बन सकती है। हालांकि स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। प्रेम और संतान के मामले मध्यम रहेंगे। व्यापार अच्छा चलेगा। शनि देव को प्रणाम करना शुभ होगा। वृश्चिक राशि- आज आय के नए रास्ते खुल सकते हैं। पुराने स्रोतों से भी धन लाभ होगा। स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में स्थिति अच्छी रहेगी। व्यापार बहुत अच्छा चलेगा। यात्रा में ज्यादा मजा नहीं आएगा, लेकिन यात्रा लाभ देने वाली रहेगी। सूर्य को जल देना शुभ होगा। धनु राशि- आज व्यापार में थोड़ी शिथिलता रहेगी। हालांकि नुकसान के संकेत नहीं हैं। पिता के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। अपने स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न करें। प्रेम और संतान से जुड़े मामले मध्यम रहेंगे। कामकाज में धैर्य से आगे बढ़ें। बजरंगबली को प्रणाम करना शुभ होगा। मकर राशि- आज भाग्य के भरोसे कोई काम बनता हुआ नहीं दिख रहा है। हालांकि स्थिति नकारात्मक नहीं है। यात्रा बहुत अच्छी नहीं रहेगी। अपमानित होने का थोड़ा भय रह सकता है, इसलिए संभलकर रहें। प्रेम, संतान और व्यापार से जुड़े मामले बहुत अच्छे रहेंगे। काली जी को प्रणाम करना शुभ होगा। कुंभ राशि- आज चोट-चपेट लग सकती है। किसी परेशानी में पड़ने से बचें। परिस्थितियां थोड़ी प्रतिकूल रहेंगी, इसलिए संभलकर आगे बढ़ें। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामले बहुत अच्छे रहेंगे। व्यापार भी अच्छा चलेगा। गणेश जी को प्रणाम करना शुभ होगा। मीन राशि- आज निजी जीवन में मन नहीं लगेगा। स्वास्थ्य भी थोड़ा मध्यम रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में उत्साह कम रहेगा। मन थोड़ा बुझा-बुझा रह सकता है। व्यापार लगभग ठीक चलेगा। ज्यादा चिंता करने से बचें। शिवजी का जलाभिषेक करना शुभ होगा।

Karwa Chauth 2026 Date: कब है करवा चौथ? जानें सरगी का समय, पूजा मुहूर्त और व्रत खोलने का समय

 Karva Chauth 2026 :हिंदू धर्म में करवा चौथ व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे मुख्य माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। करवा चौथ कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस साल 2026 में चतुर्थी तिथि 29 अक्तूबर को पड़ रही है। इस तिथि का आरंभ 29 अक्तूबर की रात 1 बजकर 6 मिनट पर होगा और इसका समापन उसी दिन रात 10 बजकर 9 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, करवाचौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026 को रखा जाएगा। करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त करवा चौथ वाले दिन व्रत रखने के साथ ही शाम के समय विधिवत रुप से पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार, 29 अक्तूबर को करवा चौथ पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक रहने वाला है। इस अवधि में महिलाएं करवा माता की पूजा करती हैं और व्रत की कथा सुनती है। पूजा में आप करवा, दीपक, रोली, अक्षत, फूल और अन्य पारंपरिक सामग्री का इस्तेमाल कर सकते हैं। करवा चौथ में सरगी का समय दरअसल, करवा चौथ की सगरी सूर्योदय से पहले ग्रहण की जाती है। खासकर इसे सुबह के समय सूर्योदय से पहले खाने की परंपरा है। इस बार सरगी के लिए सुबह 3:30 बजे से 5:30 बजे के बीच का शुभ समय माना जा रहा है। लेकिन स्थानीय सूर्योदय के अनुसार सरगा का समय बदल सकता है। इसलिए अपने शहर के सूर्योदय के समय का ध्यान में रखकर सारगी ग्रहण करें। सरगी के बाद ही महिलाएं व्रत का संकल्प लेकर पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करती हैं। करवा चौथ चंद्रोदय का समय करवा चौथ व्रत में मुख्य रुप से चंद्रमा के दर्शन का महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं रात में चंद्रमा के निकलने की प्रतीक्षा करती हैं। चंद्र दर्शन के बाद चंद्र देव को अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, 29 अक्तूबर 2026 को रात करीब 8 बजकर 17 मिनट पर चंद्रोदय होगा। लेकिन चंद्रमा के दिखाई देने का समय शहर और स्थान के अनुसार, अलग-अलग हो सकता है। करवा चौथ पर बन रहे हैं ये शुभ योग ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार करवा चौथ के दिन चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे। इसलिए करवा चौथ पर  गौरी योग, परिधि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं में शुभ योगों को पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल रहने वाला है। लेकिन इन योगों का प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली और स्थानीय पंचांग गणना के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।  

नौ दिन का नवरात्र कभी आठ, कभी दस दिन कैसे? समझें तिथियों का धार्मिक रहस्य

Sharadiya Navratri : शारदीय नवरात्र यानी मां दुर्गा की आराधना के नौ दिन। आमतौर पर श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखकर मां के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन हिंदू पंचांग में तिथियों के फेर के कारण हर साल नवरात्र का क्रम एक जैसा नहीं रहता। कभी तिथि के क्षय से आठ दिनों में ही पूजा संपन्न हो जाती है, तो कभी तिथि की वृद्धि के कारण नवरात्र दस दिनों तक चलता है। कई बार अष्टमी और नवमी का पूजन एक ही दिन करना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि नौ दिनों का पर्व कभी आठ या दस दिनों का कैसे हो जाता है? इसका जवाब चंद्रमा की गति और पंचांग में तिथियों की अवधि में छिपा है। तिथि के क्षय-वृद्धि से बदलता है पूजा का क्रम ज्योतिषाचार्य डा. राघव नाथ झा के अनुसार, हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित है। इसलिए हर तिथि की अवधि समान नहीं होती। जब कोई तिथि सूर्योदय के समय नहीं आती और दूसरी तिथि के साथ एक ही दिन में समाहित हो जाती है, तो उसे तिथि का क्षय कहा जाता है। वहीं, जब कोई तिथि दो सूर्योदय तक बनी रहती है, तो उसकी वृद्धि मानी जाती है। नवरात्र में इसका सीधा असर कलश स्थापना से लेकर अष्टमी, नवमी और विजयादशमी के पूजन क्रम पर पड़ता है। यही वजह है कि अलग-अलग वर्षों में पर्व की अवधि और प्रमुख पूजन तिथियों में अंतर देखने को मिलता है। 2014 और 2021 में एक दिन हुआ संयुक्त पूजन बीते वर्षों पर नजर डालें तो तिथियों के इस बदलाव के कई उदाहरण मिलते हैं। वर्ष 2014 में नवमी तिथि के क्षय के कारण अष्टमी और नवमी का पूजन एक ही दिन हुआ था। उस वर्ष 25 सितंबर को कलश स्थापना हुई और तीन अक्टूबर को विजयादशमी मनाई गई। इसी तरह 2021 में चतुर्थी तिथि के क्षय के कारण तृतीया और चतुर्थी का पूजन एक ही दिन करना पड़ा। इस वजह से नवरात्र का पूजा क्रम आठ दिनों में पूरा हुआ। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि धार्मिक अनुष्ठानों की तारीख तय करने में केवल दिनों की सामान्य गिनती नहीं, बल्कि पंचांग में तिथियों की वास्तविक स्थिति महत्वपूर्ण होती है। 2016 और 2025 में दस दिनों तक चला नवरात्र तिथि की वृद्धि भी पर्व की अवधि को प्रभावित करती है। वर्ष 2016 में द्वितीया तिथि की वृद्धि के कारण नवरात्र का क्रम दस दिनों तक चला। वहीं, 2025 में चतुर्थी तिथि दो दिन पड़ने के कारण नवरात्र दस दिनों का रहा। इसके उलट, जब दो तिथियों का पूजन एक ही दिन करना पड़ता है, तो पूजा के दिन कम हो सकते हैं। हालांकि, तिथि के क्षय या वृद्धि का अर्थ देवी की आराधना में कमी या बढ़ोतरी नहीं है। इसका संबंध पंचांग के अनुसार व्रत और पूजन की तारीखों के निर्धारण से है। कभी नौका, कभी हाथी पर देवी के आगमन की मान्यता नवरात्र में तिथियों के साथ देवी के आगमन और प्रस्थान के वाहन को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। पंचांग और परंपराओं में वार के आधार पर देवी के आगमन और गमन के वाहन का उल्लेख मिलता है। अलग-अलग वर्षों में हाथी, घोड़ा, नौका और डोली जैसे वाहनों का जिक्र किया जाता है। वर्ष 2018 में देवी के आगमन को नौका से, 2019 में हाथी से और 2020 में घोड़े से जोड़ा गया था। 2021 में डोली पर आगमन की मान्यता रही, जबकि 2022 और 2023 में हाथी तथा 2024 में डोली पर आगमन बताया गया। इन मान्यताओं का संबंध धार्मिक परंपराओं से है, जबकि नवरात्र की अवधि में बदलाव का आधार पंचांग की तिथियां हैं। अलग-अलग वर्षों में ऐसे बदला नवरात्र का क्रम वर्ष 2014 से 2025 तक नवरात्र की अवधि और तिथियों में अलग-अलग तरह के बदलाव देखने को मिले। कुछ वर्षों में नौ दिनों का सामान्य क्रम रहा, कुछ में तिथि के क्षय से संयुक्त पूजन हुआ, तो कुछ वर्षों में तिथि की वृद्धि से पूजा दस दिनों तक चली। इसलिए नवरात्र की सही तिथियों और व्रत के दिन का निर्धारण करने के लिए संबंधित वर्ष का पंचांग देखना जरूरी है। श्रद्धालुओं के लिए यह जानकारी उपयोगी है, क्योंकि इससे अष्टमी, नवमी, कलश स्थापना और विजयादशमी की तारीखों को लेकर होने वाली उलझन दूर हो सकती है। प्रमुख वर्षों में नवरात्र की अवधि वर्ष     कलश स्थापना तिथि     पूजन क्रम 2014      25 सितंबर          नवमी तिथि के क्षय से अष्टमी-नवमी का पूजन एक दिन 2015     13 अक्टूबर         नवमी-दशमी के संयोग से पूजन क्रम प्रभावित 2016     1 अक्टूबर           द्वितीया तिथि की वृद्धि से दस दिनों का नवरात्र 2017     21 सितंबर          नौ दिनों का नवरात्र 2018     10 अक्टूबर         द्वितीया के क्षय और पंचमी की वृद्धि का प्रभाव 2019     29 सितंबर          नौ दिनों का नवरात्र 2020     17 अक्टूबर          नौ दिनों का नवरात्र 2021     7 अक्टूबर           चतुर्थी के क्षय से तृतीया-चतुर्थी का संयुक्त पूजन; आठ दिनों का क्रम 2022     26 सितंबर           नौ दिनों का नवरात्र 2023     15 अक्टूबर         नौ दिनों का नवरात्र 2024     3 अक्टूबर             चतुर्थी की वृद्धि और नवमी के क्षय से अष्टमी-नवमी का संयोग 2025     22 सितंबर            चतुर्थी तिथि दो दिन पड़ने से दस दिनों का नवरात्र

अक्टूबर 2026 में इन 7 राशियों की चमकेगी किस्मत, ग्रहों के बदलाव से धन लाभ के योग

 साल 2026 का अक्टूबर महीना ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद उथल-पुथल और बड़े बदलावों वाला साबित हो रहा है. इस महीने एक के बाद एक कई प्रमुख ग्रह अपनी चाल, राशि और नक्षत्र में परिवर्तन कर रहे हैं. ज्योतिष गणना के अनुसार, जहां कुछ ग्रहों की चाल बदल चुकी है, वहीं आने वाले दिनों में देवगुरु बृहस्पति, शनि, सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल जैसे शक्तिशाली ग्रह भी अपनी स्थिति में फेरबदल करने जा रहे हैं. अक्टूबर के इन बचे हुए 26 दिनों में होने वाले ये खगोलीय परिवर्तन देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालेंगे. प्रसिद्ध एस्ट्रोलॉजर नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, ग्रहों की इस बदलती चाल से 7 भाग्यशाली राशियों के लिए यह पूरा दौर 'गोल्डन पीरियड' जैसा साबित होने वाला है. आइए जानते हैं कि आने वाले 26 दिन किन राशियों के लिए मालामाल होने के योग बना रहे हैं. वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि के लोगों के लिए अक्टूबर के शेष दिन बेहद शुभ परिणाम लेकर आ रहे हैं. इस दौरान आपकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह से स्टेबल बनी रहेगी, जिससे पैसों को लेकर चल रही किसी भी प्रकार की चिंता से राहत मिलेगी. कर्क राशि (Cancer) कर्क राशि के लोगों के लिए आने वाले 26 दिन पूरी तरह से पॉजिटिव परिणाम लेकर आए हैं. इस अवधि में आपको किसी भी बड़ी सफलता को पाने के लिए बहुत ज्यादा संघर्ष या अतिरिक्त प्रयास नहीं करने पड़ेंगे, बल्कि कम मेहनत में ही आपको मनचाहे परिणाम हासिल हो जाएंगे. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के जातकों के लिए अक्टूबर के ये बचे हुए दिन बेहद लाभदायक रहने वाले हैं. इस दौरान आपको अपने भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा, जिससे आपके कई रुके हुए काम तेजी से पूरे होंगे. इसके साथ ही आर्थिक मोर्चे पर भी बड़े धन लाभ के मजबूत योग बन रहे हैं, जिससे आपकी तिजोरी मजबूत होगी. कन्या राशि (Virgo) कन्या राशि वालों के लिए अक्टूबर के आगामी दिन अत्यधिक फायदेमंद साबित होंगे. इस समयावधि में आपके सामने करियर या व्यापार से जुड़ा कोई नया और बेहतरीन मौका आ सकता है, जिसके जरिए आपके जीवन में धन का आगमन होने की पूरी संभावना है. तुला राशि (Libra) तुला राशि के जातकों के लिए यह समय काफी अच्छा और उत्साहवर्धक माना जा रहा है. इस पूरे दौर में आप गजब के आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे, जिसके बल पर आप अपने कार्यक्षेत्र में और अधिक बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे और लोगों को प्रभावित करेंगे. मकर राशि (Capricorn) मकर राशि के जातकों के लिए यह पूरा समय बेहद शानदार और सुखद रहने वाला है. इस दौरान घर-परिवार में किसी खास बात को लेकर प्रसन्नता का माहौल रहेगा और आपको अपनी संतान पक्ष से कोई बहुत अच्छी और सुकून देने वाली खबर सुनने को मिल सकती है. मीन राशि (Pisces) मीन राशि के जातकों के लिए आने वाले 26 दिन हर लिहाज से लाभकारी और प्रगतिशील रहेंगे. इस दौरान कार्यक्षेत्र में आपको अपने दोस्तों और सहपाठियों/सहयोगियों का पूरा-पूरा सपोर्ट मिलेगा, जिससे कठिन से कठिन प्रोजेक्ट भी आसानी से पूरे हो जाएंगे.

Vastu Tips: हाथ से दीया, नमक या दूध गिरना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें मान्यताएं

Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में हमारे आसपास रखी हर छोटी-बड़ी वस्तु का संबंध हमारी सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा गया है. कई बार हम दैनिक जीवन में होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं जैसे हाथ से किसी चीज का छूटकर गिर जाने को एक लापरवाही या इत्तेफाक मानकर टाल देते हैं. लेकिन, वास्तु और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ खास चीजों का बार-बार या अचानक हाथ से गिरना भविष्य में आने वाली परेशानियों या अशुभ घटनाओं का संकेत हो सकता है. आइए जानते हैं कि वे कौन सी चीजें हैं जिनका गिरना अशुभ माना जाता है. पूजा के दौरान हाथ से दीया गिरना हिंदू संस्कृति में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. यदि पूजा या आरती करते समय अचानक आपके हाथ से जलता हुआ दीपक या दीया छूटकर गिर जाए, तो इसे बेहद अशुभ माना जाता है. वास्तु के अनुसार, यह इस बात का संकेत हो सकता है कि भगवान आपकी पूजा से पूर्णतः संतुष्ट नहीं हैं या भविष्य में आपके घर पर कोई आर्थिक संकट या बड़ी विपत्ति आ सकती है. हाथ से नमक का गिरना वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोईघर में इस्तेमाल होने वाला नमक सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता, बल्कि इसका गहरा संबंध ज्योतिष में शुक्र और चंद्र ग्रह से माना जाता है. यदि आपके हाथ से नमक बार-बार नीचे गिरता है, तो इसे दरिद्रता और आर्थिक तंगी का संकेत माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, नमक का गिरना आपसी रिश्तों में खटास और पारिवारिक कलह का कारण भी बन सकता है. दूध का उबलकर गिरना या छलकना घर में दूध का उबलकर गैस पर गिरना या बर्तन से छलकना बहुत आम बात है, लेकिन ज्योतिषीय नजरिए से इसे शुभ नहीं माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि दूध का गिरना घर में मानसिक अशांति, नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश और धन-हानि का संकेत देता है. विशेषकर चंद्रमा के कमजोर होने पर इस तरह की घटनाएं अधिक होती हैं. तेल का जमीन पर गिरना भोजन पकाने में इस्तेमाल होने वाला सरसों या अन्य तेल यदि अचानक बर्तन से गिर जाए या शीशी टूट जाए, तो इसे बहुत बड़ा अपशकुन माना जाता है. वास्तु के मुताबिक, तेल का गिरना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में आपको किसी गंभीर आर्थिक नुकसान या कार्यक्षेत्र में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. पूजा की थाली या सामग्री का बिखरना अगर पूजा की थाली या उसमें रखी रोली, चावल, फूल आदि सामग्री अचानक आपके हाथों से बिखर जाए, तो यह घर के किसी सदस्य के अस्वस्थ होने या किसी अप्रिय घटना के घटने की ओर इशारा करता है. इसे घर की ऊर्जा में आए नकारात्मक बदलाव का संकेत माना जाता है.

राहु गोचर 2026: सिंह, वृश्चिक और मीन राशि वालों को मिल सकता है धन लाभ

 शनि की राशि मकर में राहु का प्रवेश ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 5 दिसंबर 2026 को राहु कुंभ राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. राहु को छाया ग्रह माना जाता है और इसके राशि परिवर्तन का असर सभी राशियों पर अलग-अलग देखने को मिल सकता है. ज्योतिष के अनुसार मकर राशि में राहु का गोचर कुछ जातकों के लिए अचानक आर्थिक लाभ, करियर में नए अवसर और कारोबार में तरक्की के रास्ते खोल सकता है. खासतौर पर सिंह, वृश्चिक और मीन राशि के लोगों को इस गोचर से फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है. सिंह राशि सिंह राशि के जातकों के लिए राहु का मकर गोचर कारोबार और पेशेवर जीवन में नए अवसर लेकर आ सकता है. बिजनेस करने वालों को कोई बड़ा प्रोजेक्ट या लाभ का सौदा मिल सकता है. लंबे समय से रुका हुआ काम दोबारा गति पकड़ सकता है. राजनीति से जुड़े लोगों की सक्रियता बढ़ सकती है और लोगों के बीच प्रभाव मजबूत होने के संकेत हैं. आमदनी के नए रास्ते खुल सकते हैं, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है. हालांकि बड़े फैसले जल्दबाजी में लेने से बचना होगा. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों के लिए राहु का यह गोचर करियर और कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है. जो लोग लंबे समय से अपना नया काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है. बिजनेस में नए संपर्क फायदेमंद साबित हो सकते हैं, किसी बड़े प्रोजेक्ट से लाभ मिलने की संभावना है. राजनीति से जुड़े लोगों को नई जिम्मेदारी या महत्वपूर्ण भूमिका मिल सकती है. इस दौरान सहयोगियों और प्रभावशाली लोगों का साथ भी मिल सकता है. मीन राशि मीन राशि के जातकों के लिए राहु का गोचर करियर और बिजनेस में बदलाव के संकेत दे रहा है. कामकाज में ऐसा अवसर मिल सकता है, जिसका लंबे समय से इंतजार था. अटके हुए प्रोजेक्ट दोबारा शुरू होने की संभावना है. किसी काम में सफलता मिलने से आत्मविश्वास बढ़ेगा. आर्थिक मोर्चे पर भी स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है. अचानक धन लाभ या कमाई के नए स्रोत मिलने के योग बन सकते हैं. हालांकि किसी भी अवसर को स्वीकार करने से पहले उसके फायदे और नुकसान पर विचार जरूर करें. राहु गोचर के दौरान किन बातों का रखें ध्यान? राहु को भ्रम और अचानक बदलाव से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए इस अवधि में बिना पूरी जानकारी के निवेश या बड़ा आर्थिक फैसला लेने से बचना बेहतर रहेगा. किसी के कहने मात्र से पैसा लगाने के बजाय अच्छी तरह जांच-पड़ताल करें. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनिवार को जरूरतमंद लोगों की मदद करना, पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और शनिदेव की पूजा करना शुभ माना जाता है. साथ ही इस दौरान गलत संगति और अनावश्यक विवादों से दूर रहना चाहिए.  

नवरात्रि में हाथी पर सवार होकर होगा मां दुर्गा का आगमन, जानिए देश और दुनिया पर क्या पड़ेगा प्रभाव

अक्टूबर के इसी महीने में नवरात्रि की भी शुरुआत हो रही है, जिसकी तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. जगह जगह पर माता की स्थापना के लिए झांकियां तैयार होनी शुरू हो चुकी हैं. शहडोल जिले के चौक चौराहों पर जहां-जहां दुर्गा मां की प्रतिमा स्थापित की जाती है. वहां पर कई दिन पहले से ही पंडाल सजना लाइटिंग की व्यवस्था झांकी की व्यवस्था की जा रही है. मूर्तिकार मूर्तियों को तैयार करने में जुटे हुए हैं. इस बार माता किस पर सवार होकर आ रही हैं, बैठकी का शुभ मुहूर्त कब है, और जिस वाहन में माता आ रही हैं उसके क्या संकेत हैं, जानिए ज्योतिष आचार्य से 11 अक्टूबर से नवरात्रि की शुरुआत ज्योतिष  बताते हैं कि, ''इस बार नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से हो रही है, दिन रविवार पड़ रहा है. प्रातः कालीन सुबह 5:27 से लेकर के 10:30 बजे तक दिन में घट स्थापना का पहला शुभ मुहूर्त है. इसके बाद एक अभिजीत मुहूर्त भी है जो विशेष कर 11:45 दिन में शुरू होगा और 1:00 बजे के बीच में अभिजीत मुहूर्त रहेगा. यह बहुत महत्वपूर्ण मुहूर्त माना जाता है. इस मुहूर्त की लोग प्रतीक्षा भी करते हैं, और फिर एक मुहूर्त सायं कालीन शाम को 6:00 बजे से लेकर के 9:00 बजे के बीच में रात्रि कालीन समय में रहेगा. इस मुहूर्त में घट स्थापना करें, देवी की स्थापना करें, पंडाल को सजाएं और इसमें स्थापना करके पूजा पाठ करें तो देवी बहुत प्रसन्न होती हैं.'' 11 अक्टूबर से नवरात्रि की शुरुआत  ज्योतिष  बताते हैं कि, माता का हाथी पर आगमन देश और दुनिया के लिए कई बड़े संकेत लेकर आ रहा है. इस बार जब नवरात्रि की शुरुआत होगी तो माता हाथी पर सवार होकर आएंगी. शास्त्रों में ऐसा लिखा है कि जब हाथी पर बैठकर मां दुर्गा आती हैं तो पृथ्वी बहुत संतुष्ट होती है और पृथ्वी धन-धान्य से परिपूर्ण होती है. विशेष कर जो राजनीतिक क्षेत्र में लोग हैं उनमें बहुत सामंजस्य होता है।  देश में होगी अच्छी वर्षा, किसानों होंगे खुशहाल ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, ''हाथी को जल और बादलों का भी प्रतीक माना गया है, इसलिए माता का हाथी पर सवार होकर आना इस बात का भी संकेत है कि देश में अच्छी वर्षा होगी. जल स्रोतों में वृद्धि होगी, किसानों की फसल बेहतर होगी. समाज में ज्ञान स्थिरता, और सुख समृद्धि में बढ़ोतरी होगी. जब माता गज में सवार होकर आती हैं तो ये देश और समाज के लिए बहुत ही शुभ और मंगलकारी माना गया है. शांति का प्रतीक माना गया है. इससे जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और आर्थिक मजबूती आने की संभावनाएं भी बढ़ रही है. मतलब इस बार बहुत ही शुभ संकेत हैं, इस बार सब कुछ अच्छा होगा। 

8 या 9 नवंबर, कब है दिवाली? जानें 2026 की सही तारीख, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और पूजा विधि

 Diwali 2026 : दीपावली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। रोशनी और खुशियों का यह पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस दिन घरों में दीप जलाने के साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली की रात विधि-विधान से लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में हर साल की तरह इस बार भी लोगों के बीच दिवाली की तारीख को लेकर उत्सुकता है। आइए जानते हैं 2026 में दिवाली किस दिन मनाई जाएगी और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। कब है दिवाली? हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी। वहीं, अमावस्या तिथि का समापन 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण इस साल दीपावली का पर्व 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। दिवाली के दिन शाम के समय घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाए जाते हैं। इसके बाद शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कई परिवार इस दिन अपने घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल को दीपों और रंगोली से सजाते हैं। लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त दिवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए शाम 5 बजकर 54 मिनट से शाम 7 बजकर 50 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं। पूजा स्थल को पहले अच्छी तरह साफ करके सजाएं। इसके बाद चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा के दौरान घर के सभी सदस्य एक साथ शामिल होकर देवी-देवताओं का ध्यान कर सकते हैं। दिवाली से जुड़े प्रमुख त्योहारों की तारीख धनतेरस: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी: 7 नवंबर 2026, शनिवार दीपावली: 8 नवंबर 2026, रविवार गोवर्धन पूजा: 10 नवंबर 2026, मंगलवार भाई दूज: 11 नवंबर 2026, बुधवार दीपावली की पूजा विधि     दिवाली की पूजा से पहले पूजा स्थल और पूरे घर की साफ-सफाई कर लें।     इसके बाद पूजा की चौकी पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।     पास में कलश रखें और उस पर रोली से तिलक करें।     इसके बाद कलश में जल भरकर उसमें आवश्यक पूजा सामग्री अर्पित करें।     पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के ध्यान और पूजन से करें।     उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें।     देवी को फूल, अक्षत, फल, मिठाई और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।     पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का ध्यान करते हुए दीप जलाएं।     इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर लक्ष्मी-गणेश की पूजा और कथा कर सकते हैं।     अंत में देवी-देवताओं की आरती करें और प्रसाद सभी लोगों में बांटें।     मान्यता के अनुसार, दिवाली की रात दीप जलाने और विधि-विधान से पूजा करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजा क्यों की जाती है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन-धान्य, सुख और समृद्धि का वास होता है। यही वजह है कि लोग इस दिन अपने घर और पूजा स्थल को दीपों से सजाते हैं और मां लक्ष्मी से परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। भगवान गणेश को शुभता और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। इसलिए दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के साथ गणेश जी की आराधना करने की भी परंपरा है। दिवाली पर इन बातों का रखें ध्यान     दिवाली के दिन पूजा स्थल को साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए।     पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य श्रद्धा और शांत मन से शामिल हों।     लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।     घर में दीप जलाते समय उनकी सुरक्षित जगह का ध्यान रखें, ताकि त्योहार के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।