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बुधादित्य योग और भद्र राजयोग का शुभ संयोग, मिथुन-कन्या समेत इन राशियों पर बरसेगी किस्मत की मेहरबानी

मेष: 22 जून के दिन फाइनेंशियल दिक्कतों से छुटकारा पाने के लिए अपने पार्टनर से सलह लें। आज काफी मोटिवेटेड फील करेंगे। सही दृष्टिकोण के साथ आप अपने रोमांटिक सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं। वर्क प्रेशर आज ज्यादा फील हो सकता है। वृषभ: 22 जून के दिन सिनीयर्स के साथ नोक-झोक से बचना बेहतर रहेगा। धन के मामले में लकी रहने वाले हैं आज आप। वर्क प्रेशर ज्यादा हो सकता है। अर्थीक स्थिति मजबूत रहेगी। करियर में कुछ नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। मिथुन: 22 जून के दिन उत्साह से भरा रहेगा दिन। आज आपको काम पर फोकस करने की सलाह दी जाती है। अपनी डाइट को हेल्दी रखें। आगे बढ़ने और दुनिया को यह दिखाने से न डरें कि आप क्या कर सकते हैं। कर्क: 22 जून के दिन फाइनेंशियल स्थिति में थोड़े-बहुत उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। स्किल्स में सुधार करना चाहते हैं, तो अब कदम उठाने का सही समय आ गया है। आज का दिन थोड़ा बिजी फील हो सकता है। सिंह: 22 जून का दिन आपके लिए काफी लकी माना जा रहा है। अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलें। बिजनेस कर रहे लोगों की किस्मत साथ देगी। अपने रास्ते में आने वाले अवसरों का लाभ उठाने का दिन है। कन्या: 22 जून के दिन मजाकिया बातचीत में खुद को शामिल करने के लिए तैयार रहें। आज के दिन कुछ ऐसा करें, जो आप हमेशा से करना चाहते थे। आपका अच्छा मूड होगा और यह उन लोगों को आकर्षित करेगा, जो कनेक्शन बनाने के लिए तैयार हैं। तुला: 22 जून के दिन आपको अपने फाइनेंस को मैनेज करने में आपका पार्टनर मदद कर सकता है। हेल्थ पर आज कड़ी नजर रखें। जो लोग रिलेशन में हैं, उनके लिए आज अपने जुनून को जगाने और अपनी पार्ट्नर्शिप में फिर से स्पार्क लाने का सही समय है। वृश्चिक: 22 जून के दिन अपने साथी की बात ध्यान से सुनें। विवाद को निपटाने के लिए समझौता करना जरूरी है। एक-दूसरे के साथ फिर से जुड़ने के लिए समय निकालें और हर पल का आनंद उठाएं। अपने रोज के कार्यक्रम से कुछ समय निकालें। धनु: 22 जून के दिन धैर्य रखें और टकराव को रोकने के लिए खुद को समझाएं। शाम होते-होते आपकी सभी मुश्किलें कम हो जाएंगी। अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए आज का दिन शुभ है। थोड़ा इमोशनल फील कर सकते हैं। मकर: 22 जून के दिन आप प्यार और परिवार के बीच फंसा हुआ महसूस कर सकते हैं। जबकि आपका दिल नई दोस्ती के लिए तरस सकता है। अपने ऊपर अत्यधिक बोझ डालने से बचने के लिए अपने जीवन में इन चीजों को संतुलित करने का तरीका खोजना अनिवार्य है। कुंभ: 22 जून के दिन ऐसी एक्टिविटी करें, जो आपको खुश और कॉन्फिडेंट बनाती है। आपकी आनंदमय ऊर्जा को बढ़ाने और उन लोगों को आकर्षित करने का सबसे अच्छा तरीका है, जो आपके जैसा ही महसूस करते हैं। मीन: 22 जून के दिन आपको कुछ मुश्किलों से जूझना पड़ सकता है। अगर आप अपने पार्टनर के साथ कोई प्लान बना रहे हैं, तो बातचीत के दौरान विवाद हो सकता है, जो तीखी बहस में बदल सकता है। खुलकर बातचीत करने की कोशिश करें। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।  

वास्तु शास्त्र के अनुसार फ्रिज के ऊपर ये चीजें रखना हो सकता है अशुभ, बढ़ती है नकारात्मक ऊर्जा

वास्तु शास्त्र में घर की हर वस्तु का अपना महत्व होता है, और फ्रिज भी इससे अछूता नहीं है. रसोई में रखा फ्रिज न केवल भोजन को ताज़ा रखता है, बल्कि यह घर की ऊर्जा और आर्थिक स्थिति पर भी असर डालता  है.  वास्तु के अनुसार, फ्रिज जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसे सही दिशा में रखना और इसके ऊपर रखी जाने वाली चीजों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. फ्रिज के ऊपर क्या न रखें? फ्रिज के ऊपर सामान रखने की आदत अक्सर घर में नकारात्मक ऊर्जा को खींच कर वास्तु दोष का कारण बनती है. इसलिए कुछ चीजों को फ्रिज के ऊपर कभी न रखें: दवाइयां: फ्रिज के ऊपर दवाइयां रखने से उनकी प्रभावशीलता कम हो जाती है. इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा vibrations) बढ़ते हैं. धन और कीमती वस्तुएं: नकदी, सिक्के या गहने फ्रिज के ऊपर रखने से धन के आगमन में रुकावट आती है. अनावश्यक आर्थिक हानि हो सकती है. इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: माइक्रोवेव या टोस्टर जैसे भारी बिजली के उपकरण फ्रिज के ऊपर रखने से ऊर्जाओं में टकराव होता है.  साथ ही, फ्रिज के कंपन से इनके गिरने का खतरा भी बना रहता है. मृत पौधे: सूखे फूल, बोनसाई या मुरझाए हुए पौधे कभी न रखें. ये घर में मृत और नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं. खाने-पीने की चीजें: फ्रिज के मोटर से निकलने वाली गर्मी के कारण ऊपर रखे ब्रेड, अनाज या शराब जैसे खाने-पीने की चीजें जल्दी खराब हो जाती हैं, जिससे घर में वास्तु दोष पैदा होता है. फ्रिज के ऊपर/अंदर क्या रखें (सकारात्मक ऊर्जा के लिए) घर की सकारात्मकता और समृद्धि बढ़ाने के लिए आप ये उपाय अपना सकते हैं: आध्यात्मिक प्रतीक: फ्रिज के दरवाजे पर स्वास्तिक जैसे शुभ प्रतीक या वास्तु के मुताबिक मैग्नेट लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है. क्लीयर क्वार्ट्ज क्रिस्टल: फ्रिज के ऊपर एक छोटा, साफ क्लीयर क्वार्ट्ज क्रिस्टल रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. यह रसोई में सुरक्षा घेरा बनता है. प्रकाश: वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज के पास एक छोटा घी का दीपक या सुगंधित मोमबत्ती रखना तत्वों को संतुलित करने और ऊर्जा को शुद्ध करने में मदद करता है. सेंधा नमक (Rock Salt): एक छोटी कांच की कटोरी में थोड़ा सेंधा नमक रखें. यह रसोई की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है. इसे हर 15-20 दिन में बदलते रहें. सुगंधित मोमबत्ती: एक छोटी सुगंधित मोमबत्ती (बिना जलाए) रखने से भी वातावरण ताज़ा बना रहता है. फ्रिज के लिए कुछ महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स दिशा का चुनाव (Ideal Placement): वास्तु के अनुसार, फ्रिज को हमेशा रसोई या डाइनिंग रूम के दक्षिण-पश्चिम (South-West) या दक्षिण-पूर्व (South-East) कोने में रखें. फ्रिज को कभी भी उत्तर-पूर्व (North-East) दिशा में न रखें. साफ-सफाई: फ्रिज को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें. उसे गैरजरूरी सामानों से न भरें (Overstuffing न करें). एक्सपायरी चेक करें: फ्रिज में रखा बासी या खराब भोजन ऊर्जा के प्रवाह को रोकता है. इसलिए, समय-समय पर फ्रिज चेक करें , एक्सपायर हो चुके सामान को तुरंत बाहर निकालें.

शुक्र का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश, वृषभ समेत 4 राशियों को मिलेगा बड़ा आर्थिक लाभ

शुक्र देव का नक्षत्र परिवर्तन ज्योतिष शास्त्र में भौतिक सुख-सुविधाओं, धन, वैभव और ऐश्वर्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. 23 जून को शुक्र ग्रह बुध की ओनरशिप वाले अश्लेषा नक्षत्र (Ashlesha Nakshatra) में प्रवेश करने जा रहे हैं. अश्लेषा नक्षत्र में शुक्र का आना कई राशियों के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आएगा, लेकिन मुख्य रूप से 4 राशियां ऐसी हैं जिन्हें इस दौरान जबरदस्त आर्थिक लाभ और करियर में तरक्की मिलने वाली है. आइए जानते हैं उन लकी राशियों के बारे में. 1. वृषभ राशि (Taurus) शुक्र आपकी राशि के स्वामी हैं, इसलिए इनका नक्षत्र परिवर्तन आपके लिए बेहद शुभ और फलदायी रहने वाला है. करियर व व्यापार: नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई और बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. व्यापारियों के लिए मुनाफे के नए स्रोत बनेंगे. आर्थिक लाभ: आपकी सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी. यदि आप प्रॉपर्टी या वाहन खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो समय अनुकूल है. लव लाइफ: पार्टनर के साथ रिश्ते मजबूत होंगे और सिंगल लोगों के जीवन में किसी खास की एंट्री हो सकती है. 2. मिथुन राशि (Gemini) चूंकि अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध देव हैं और बुध की मिथुन राशि के साथ गहरी मित्रता है, इसलिए यह गोचर आपके लिए भाग्यशाली रहेगा. वाणी से लाभ: मीडिया, राइटिंग, मार्केटिंग या कंसल्टेंसी से जुड़े लोगों को अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स के दम पर बड़ा फायदा होगा. धन लाभ: फंसा हुआ पैसा वापस मिल सकता है. अचानक से धन लाभ होने के योग बनेंगे, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. पारिवारिक सहयोग: भाई-बहनों और परिवार के सदस्यों का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे आपके रुके हुए काम पूरे होंगे. 3. कर्क राशि (Cancer) शुक्र का यह नक्षत्र परिवर्तन कर्क राशि के जातकों के लिए मान-सम्मान और सुख लेकर आ रहा है. व्यक्तित्व में निखार: आपके आकर्षण में वृद्धि होगी और समाज में आपका कद बढ़ेगा. लोग आपकी बातों से प्रभावित होंगे. करियर में ग्रोथ: ऑफिस में सीनियर्स और बॉस आपके काम की तारीफ करेंगे. क्रिएटिव फील्ड से जुड़े लोगों के लिए यह समय गोल्डन पीरियड साबित हो सकता है. मानसिक शांति: पिछले कुछ समय से चल रहा तनाव दूर होगा और आप खुद को काफी रिलैक्स महसूस करेंगे. 4. कन्या राशि (Virgo) बुध की दूसरी राशि कन्या के लिए भी शुक्र का अश्लेषा नक्षत्र में जाना बेहद लाभकारी सिद्ध होगा. आर्थिक पक्ष: आपकी इनकम के साधनों में बढ़ोतरी होगी. निवेश (Investment) से अच्छा रिटर्न मिलने की पूरी संभावना है. बिजनेस में मुनाफा: अगर आप पार्टनरशिप में कोई बिजनेस कर रहे हैं, तो कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है जो भविष्य में तगड़ा मुनाफा देगी. इच्छाओं की पूर्ति: लंबे समय से अटकी हुई कोई इच्छा इस दौरान पूरी हो सकती है, जिससे घर में खुशियों का माहौल रहेगा.

पौराणिक कथाओं में हनुमान जी और मच्छिंद्रनाथ के बीच योग-शक्ति संघर्ष का उल्लेख

हिंदू धार्मिक ग्रंथों में पवनपुत्र हनुमान जी को सबसे शक्तिशाली माना गया है. मान्यता है कि उनके बिना न तो राम कथा पूर्ण है और न ही रामायण. राम-रावण युद्ध में हनुमान जी ऐसे योद्धा थे, जिन्हें कोई भी किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचा सका. उनके पराक्रम, सेवा, दया और शक्ति की अनगिनत गाथाएं प्रसिद्ध हैं. लेकिन कुछ कथाओं के अनुसार, तीन ऐसे योद्धा भी हुए हैं, जिनके सामने हनुमान जी को भी झुकना पड़ा. यह सुनने में भले ही आश्चर्यजनक लगे, लेकिन पुराणों और लोक कथाओं में इसका उल्लेख मिलता है. 1. मच्छिंद्रनाथ रामायण के अनुसार, मच्छिंद्रनाथ एक महान सिद्ध योगी और तपस्वी थे. एक बार वे रामेश्वरम पहुंचे और राम सेतु को देखकर भावविभोर हो गए. इसके बाद वे समुद्र में स्नान करते हुए भगवान राम की भक्ति में लीन हो गए. उसी समय हनुमान जी, जो वानर रूप में वहाँ उपस्थित थे, उनकी परीक्षा लेना चाहते थे. उन्होंने तेज वर्षा उत्पन्न कर दी और स्वयं एक वानर के रूप में पर्वत पर गुफा बनाने का अभिनय करने लगे. मच्छिंद्रनाथ ने उन्हें समझाते हुए कहा कि संकट आने से पहले ही सुरक्षित स्थान खोज लेना चाहिए. इस पर हनुमान जी ने उनसे उनकी शक्ति का परिचय मांगा और युद्ध की चुनौती दे दी. इसके बाद दोनों के बीच युद्ध हुआ, जिसमें मच्छिंद्रनाथ की योग शक्ति के सामने हनुमान जी की शक्ति निष्फल हो गई. अंत में वायुदेव के हस्तक्षेप के बाद यह युद्ध समाप्त हुआ और इस कथा में हनुमान जी की हार मानी जाती है. 2. मेघनाद (इंद्रजीत) जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तो उन्होंने अशोक वाटिका में उत्पात मचाया और रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध कर दिया था. इसके बाद रावण ने अपने शक्तिशाली पुत्र मेघनाद को हनुमान जी को पकड़ने के लिए भेजा. मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया. हनुमान जी को वरदान प्राप्त था, इसलिए उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन ब्रह्मास्त्र का सम्मान करते हुए उन्होंने स्वयं को उसके बंधन में जाने दिया. इस प्रकार, तकनीकी रूप से यह भी एक स्थिति थी जहां हनुमान जी को रोका गया था. 3. लव और कुश यह घटना उस समय की है जब भगवान श्रीराम ने अश्वमेध यज्ञ किया था. यज्ञ का घोड़ा जंगल में छोड़ा गया, जिसे लव और कुश ने पकड़ लिया और चुनौती स्वीकार कर ली. श्रीराम की सेना से युद्ध में लव-कुश ने शत्रुघ्न और लक्ष्मण तक को पराजित कर दिया. इसके बाद भरत, सुग्रीव और हनुमान जी भी युद्ध के लिए पहुंचे. जब हनुमान जी ने लव-कुश का पराक्रम देखा, तो उन्हें संदेह हुआ. ध्यान लगाने पर उन्हें ज्ञात हुआ कि ये दोनों श्रीराम और माता सीता के पुत्र हैं. यह जानने के बाद हनुमान जी ने युद्ध करना उचित नहीं समझा और शांत भाव से खड़े रहे. इसके बावजूद लव-कुश ने उन पर प्रहार किया, लेकिन हनुमान जी ने प्रतिकार नहीं किया था.

12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण, यूरोप और आर्कटिक क्षेत्रों में दिखेगा अद्भुत नजारा

दुनिया भर के वैज्ञानिकों और आसमान में होने वाली घटना को देखने के शौकीन लोगों के लिए अगस्त 2026 का महीना बहुत खास होने वाला है.  इस साल 12 अगस्त को एक अद्भुत खगोलीय घटना होने जा रही है, जिसे हम पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं.  आइए जानते हैं कि यह क्या है और इसका क्या मतलब है. क्या होता है पूर्ण सूर्य ग्रहण? सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चाँद, सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है. जब चांद, सूर्य को पूरी तरह से ढक लेता है और दिन के उजाले में कुछ देर के लिए अंधेरा छा जाता है, तो उसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं.  उस समय सूर्य के चारों ओर एक चमकती हुई रिंग (छल्ला) दिखाई देती है, जो देखने में किसी जादुई नजारे जैसी लगती है. क्या यह भारत में दिखाई देगा? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत में रहने वाले लोग इसे देख पाएंगे? तो इसका जवाब है नहीं.  यह सूर्य ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देग.  यह मुख्य रूप से यूरोप (जैसे स्पेन), ग्रीनलैंड, आइसलैंड और आर्कटिक के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. भारत में इसका असर? चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका कोई असर नहीं होगा.  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो ग्रहण हमारे देश में नहीं दिखता, उसका सूतक काल (नियम-कानून) भी मान्य नहीं होता.  इसलिए भारत के लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और पूजा-पाठ बिना किसी चिंता के सामान्य रूप से कर सकते हैं. सावधानी: ग्रहण कैसे देखें? अगर आप ऐसी जगह पर हैं जहां ग्रहण दिखने वाला है, तो एक बात का हमेशा ध्यान रखें: ग्रहण को कभी भी अपनी आंखों से सीधा न देखें. सूर्य की रोशनी इतनी तेज होती है कि वह आपकी आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचा सकती है. इसे देखने के लिए हमेशा बाजार में मिलने वाले खास सोलर फिल्टर वाले चश्मों का ही इस्तेमाल करना चाहिए.  साधारण चश्मे या आंखों के सामने हाथ रखकर इसे देखना बहुत खतरनाक हो सकता है.

मंगल का वृषभ राशि में प्रवेश, 42 दिनों तक सभी राशियों पर पड़ेगा गहरा प्रभाव

 ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल का हमारे जीवन पर गहरा और सीधा प्रभाव पड़ता है.  साहस, पराक्रम और ऊर्जा के कारक ग्रह मंगल (Mars) का राशि परिवर्तन एक अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय घटना मानी जाती है. आज, 21 जून 2026 को मंगल अपनी राशि बदलकर वृषभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं. मंगल का यह गोचर 2 अगस्त 2026 तक रहेगा, यानी इसका प्रभाव कुल 42 दिनों तक बना रहेगा. ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, मंगल का यह गोचर सभी 12 राशियों के जीवन में बड़े बदलाव लाने वाला है.  जहां यह गोचर कुछ लोगों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा, वहीं कुछ राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष सावधानी और सतर्कता बरतने का है. मंगल गोचर: क्यों है यह महत्वपूर्ण? मंगल को ग्रहों का सेनापति कहा जाता है. 42 दिनों तक वृषभ राशि में इनका प्रवास ग्रहों की स्थिति में बड़ा फेरबदल लाएगा, जो मुख्य रूप से हमारे आर्थिक निर्णयों, कार्यक्षमता और साहस को प्रभावित करता है. इस दौरान ऊर्जा में उतार-चढ़ाव महसूस किया जा सकता है. इन राशियों को रहना होगा बेहद सतर्क ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल के वृषभ राशि में रहने के दौरान 4  राशियों के जातकों को  विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है: 1. मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय चुनौतियों से भरा हो सकता है. कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ तालमेल बिठाने में समस्या आ सकती है. इस अवधि में अहंकार से दूर रहना और वाणी पर नियंत्रण रखना आपके लिए हितकर होगा. कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले सोच-विचार अवश्य करें. 2. तुला राशि: मंगल का गोचर तुला राशि के जातकों के लिए भी तनावपूर्ण रह सकता है.  कार्यक्षेत्र में वाद-विवाद की स्थिति बन सकती है. पारिवारिक जीवन में भी संवेदनशीलता बनी रहेगी, इसलिए धैर्य से काम लेना ही समझदारी है. फिजूलखर्चों पर लगाम लगाएं. 3. अन्य चार राशियां: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इसके अतिरिक्त अन्य चार राशियां सिंह, मकर, वृश्चिक और कुंभ मंगल की इस स्थिति से प्रभावित होंगी. इन जातकों को अपने निवेश, व्यक्तिगत संबंधों और स्वास्थ्य के प्रति विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है. इस अवधि में क्या करें? (विशेष सलाह) आर्थिक योजना: मंगल के प्रभाव से आक्रामक निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, इसलिए निवेश करते समय पूरी तरह सतर्क रहें. क्रोध पर नियंत्रण: मंगल ऊर्जा का कारक है, ऐसे में छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना स्वाभाविक है. योग और ध्यान का सहारा लें. वाणी में संयम: घर और कार्यस्थल पर बहस से बचें. अपनी बात को विनम्रता से रखने का प्रयास करें. स्वास्थ्य: अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाएं और संतुलित दिनचर्या का पालन करें.

युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मिलेगा अत्याधुनिक अध्ययन केंद्र : मुख्यमंत्री

रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के सलियाटोली ग्राम में निर्माणाधीन नालंदा परिसर का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। लगभग 4 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से निर्मित हो रहे इस 250 सीटर अत्याधुनिक परिसर के निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखते हुए कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। नालंदा परिसर युवाओं को अध्ययन, मार्गदर्शन और आत्मविकास के लिए एक आधुनिक एवं प्रेरणादायी वातावरण प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह परिसर जशपुर जिले के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि नालंदा परिसर के निर्माण का प्लिंथ लेवल कार्य पूर्ण हो चुका है तथा शेष निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए निर्धारित समयावधि में परियोजना को पूर्ण करने के निर्देश दिए। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा नालंदा परिसर निर्माणाधीन नालंदा परिसर को आधुनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। परिसर में विद्यार्थियों के लिए 24 घंटे अध्ययन की सुविधा उपलब्ध होगी। यहां इंडोर एवं आउटडोर स्टडी जोन, ऑक्सी रीडिंग जोन, डिजिटल लाइब्रेरी, वाई-फाई जोन तथा प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित 50 हजार से अधिक पुस्तकों की व्यवस्था की जाएगी। परिसर को पर्यावरण अनुकूल स्वरूप प्रदान करने के लिए सौर ऊर्जा आधारित प्रणाली विकसित की जाएगी तथा 50 से अधिक देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा। युवाओं के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए परिसर में यूथ टावर, स्पोर्ट्स कोर्ट, कैफेटेरिया, एटीएम और हेल्थ जोन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त आरएफआईडी आधारित प्रवेश प्रणाली, बायोमेट्रिक पहचान व्यवस्था तथा आधुनिक पुस्तक प्रबंधन प्रणाली जैसी स्मार्ट सुविधाएं इसे एक आधुनिक और तकनीक-सक्षम अध्ययन केंद्र का स्वरूप प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचारपूर्ण शैक्षणिक केंद्र युवाओं को अपने सपनों को साकार करने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराएंगे और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस अवसर पर पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्षमती गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष शंभूनाथ चक्रवर्ती, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

कर्बला की जंग: सत्ता के खिलाफ उसूलों की सबसे बड़ी कुर्बानी की कहानी

इतिहास में बहुत युद्ध बहुत हुए हैं, लेकिन 10 अक्टूबर, 680 ईस्वी (10 मुहर्रम, 61 हिजरी) की घटना ऐसी है जो केवल एक तारीख बनकर नहीं, बल्कि न्याय के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान के रूप में दर्ज है.  इराक के कर्बला के रेगिस्तान में जो हुआ, वह सत्ता और उसूलों के बीच की वह लड़ाई थी जिसने इंसानियत की परिभाषा बदल दी.  इराक के कर्बला में हुई यह घटना इमाम हुसैन और उमय्यद खलीफा यजीद प्रथम की सेनाओं के बीच हुई थी. सत्ता का संकट और कूफा का निमंत्रण इस संघर्ष की शुरुआत 680 ईस्वी में हुई, जब मुआविया प्रथम की मृत्यु के बाद उनका बेटा यजीद प्रथम खलीफा बना. मुस्लिम समुदाय (उम्मा) का एक बड़ा वर्ग मानता था कि नेतृत्व का सही अधिकार हजरत मोहम्मद के चचेरे भाई और दामाद अली इब्न अबी तालिब और उनके वंशजों का है.  इराक के कूफा शहर के लोगों ने हुसैन (अली के बेटे) को निमंत्रण दिया कि वे उनके पास आएं और उन्हें खलीफा घोषित किया जाएगा. जब यजीद को इस विद्रोह की भनक लगी, तो उसने उबैदुल्लाह (बसरा के गवर्नर) को कूफा भेजा.  उबैदुल्लाह ने कड़ाई से पेश आते हुए जनजातीय प्रमुखों को जिम्मेदार ठहराया और विद्रोह करने वालों को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी. इन धमकियों के बावजूद, हुसैन अपने परिवार और वफादार साथियों के साथ मक्का से कूफा के लिए चल पड़े. कर्बला में घेराबंदी 10 अक्टूबर को जब हुसैन फरात नदी के पश्चिम में स्थित कर्बला पहुंचे, तो उनका सामना उबैदुल्लाह द्वारा भेजी गई एक विशाल सेना से हुआ. 4,000 सैनिकों वाली इस सेना का नेतृत्व कूफा के संस्थापक के बेटे उमर इब्न साद कर रहे थे.  हुसैन के पास लड़ने वाले केवल 72 लोग थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने यजीद की सेना के आगे झुकने से इनकार कर दिया. कूफा के निवासियों से मिले मदद के वादे पूरे नहीं हुए, और हुसैन अपने साथियों के साथ  युद्ध में घिर गए.  युद्ध का अंत अत्यंत दुखद था; हुसैन और उनके लगभग सभी परिवार के लोग और साथी मारे गए. उनके शवों के साथ की गई बर्बरता ने बाद की शिया समुदायों के भीतर गहरा आक्रोश और शोक भर दिया. जैनब का साहस और सत्ता को चुनौती युद्ध के बाद, हुसैन की बहन जैनब और बच्चों सहित परिवार की महिलाओं को बंदी बना लिया गया. उन्हें पहले कूफा और फिर रेगिस्तान के रास्ते दमिश्क में यजीद के दरबार में पेश किया गया. शिया परंपरा के अनुसार, जैनब ने कूफा में उबैदुल्लाह को और दमिश्क में यजीद को सरेआम ललकारा और उसकी सत्ता को चुनौती दी.  उनका निधन 681 ईस्वी में हुआ.  उन्हें कहां दफनाया गया, इसे लेकर मान्यताएं बंटी हुई हैं: शिया परंपरा के अनुसार वे दमिश्क में दफन हैं, जबकि सुन्नी परंपरा उन्हें काहिरा में दफन मानती है. इतिहास पर गहरा प्रभाव और शोक की परंपरा इस जंग के बाद हुसैन को मानने वाले लोगों ने उमर, उबैदुल्लाह और यजीद को सीधे तौर पर हत्यारा माना.  यही वजह है कि आज भी मुस्लिम समुदाय में इन तीनों नामों को बहुत नफरत से देखा जाता है. हर साल 10 मुहर्रम (जिसे आशूरा कहा जाता है) के दिन दुनिया भर के मुसलमान गहरा दुख मनाते हैं. इस दिन लोग ताज़िया निकालते हैं और मातम (शोक मनाने का तरीका, जिसमें कई लोग खुद को चोट पहुँचाकर अपना दर्द जाहिर करते हैं) के जरिए कर्बला की उस कड़वी याद को ताजा करते है. . आज भी कर्बला में बना हुसैन का मकबरा  मुसलमानों के लिए पवित्र जगह है. अगर हम इस जंग के मकसद को देखें, तो यजीद के लिए यह लड़ाई सिर्फ अपनी गद्दी और ताकत को बचाने का एक जरिया थी. लेकिन दूसरी तरफ, हुसैन के लिए यह अपने उसूलों और सच्चाई पर डटे रहने की परीक्षा थी. हुसैन ने इस परीक्षा में अपनी जान दे दी, लेकिन वे झुकने के बजाय हारकर भी इतिहास के सबसे बड़े नायक बन गए.

आधुनिक रिश्ते और शिव-आदर्श: बराबरी, भरोसा और भावनात्मक संतुलन की नई परिभाषा

 आज के समय में रिश्तों को लेकर सोच तेजी से बदल रही है. खासकर Gen Z लड़कियां अब सिर्फ दिखावे, स्टाइल या कूल बनने वाले लड़कों से ज्यादा प्रभावित नहीं होतीं हैं. वे ऐसे पार्टनर की तलाश में हैं जो उन्हें समझे, सम्मान दे और भावनात्मक रूप से मजबूत हो. यही वजह है कि अब उनकी पसंद भगवान शिव जैसे शांत, संतुलित और भरोसेमंद व्यक्तित्व की तरफ बढ़ रही है. लाइफ पार्टनर को लेकर Gen Z लड़कियों की बदली सोच Gen Z यानी आज की युवा पीढ़ी. आम तौर पर 1997 के बाद जन्मे लोगों को Gen Z कहा जाता है. यह जनरेशन पहले के मुकाबले ज्यादा समझदार, अपनी बात खुलकर कहने वाली, लॉजिकल और इमोशंस को समझने वाली है. खासकर जब बात प्यार और रिश्तों की आती है, तो इनकी सोच तेजी से बदल रही है. इसी विषय को लेकर आजकल एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है, खासकर Gen Z लड़कियों के बीच. आजकल की लड़कियां अपने पार्टनर या लाइफ पार्टनर में भगवान शिव जैसी खूबियां चाहती हैं. यहां भगवान शिव जैसा पार्टनर का मतलब भगवान बनने से नहीं है, बल्कि उनके स्वभाव और गुणों से है. अब लड़कियां दिखावे, ओवर रोमांस या सिर्फ कूल बनने वाले लड़कों से ज्यादा इंप्रेस नहीं होतीं हैं. वे ऐसे पार्टनर चाहती हैं जो सच्चा हो, सिंपल हो, जमीन से जुड़ा हो और रिश्ते को समझे. वैसे यह सोच पूरी तरह नई भी नहीं है. पौराणिक कथाओं में भी बताया गया है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. यानी शिव जैसे गुण हमेशा से आदर्श माने गए हैं. अब बस फर्क इतना है कि आज की लड़कियां फिर से उन्हीं गुणों को अपने पार्टनर में ढूंढ रही हैं. आइए समझते हैं कि इस बदलती सोच के पीछे आखिर कौन-सी भावनात्मक जरूरतें छिपी हैं. Gen Z  लड़कियां चाहती हैं भोलेनाथ जैसा पार्टनर सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर चर्चा बहुत हो रही है. कई लड़कियां कहती हैं कि उन्हें ऐसा लाइफ पार्टनर चाहिए जिसमें भगवान शिव जैसी खूबियां हों. यह बात सिर्फ धर्म या आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी भावनाएं और समाज से जुड़ी सोच भी छिपी हुई है. Gen Z लड़कियों को रिश्तों में स्थिरता, धैर्य और इमोशनल बैलेंस चाहिए होता है. भगवान शिव के स्वभाव में भी यही खूबियां देखने को मिलती हैं. यही वजह है कि लड़कियां ऐसे पार्टनर की चाहत रखती हैं जो गुस्से में भी खुद को संभाल कर रखे, बेवजह रिएक्ट न करे. लेकिन जब उसकी पार्टनर किसी परेशानी में हो, तो पूरी मजबूती से उसके साथ खड़ा हो जाए. रिश्तों में बांधें नहीं बल्कि सशक्त बनें भगवान शिव की एक खास बात यह है कि वे एक तरफ योगी हैं और दूसरी तरफ गृहस्थ भी. यही बैलेंस Gen Z लड़कियों को काफी आकर्षित करता है. आज के जमाने की लड़कियां ऐसा पार्टनर चाहती हैं जो उनके सपनों को रोके नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने में उनका साथ दे. शिव जी हमेशा माता पार्वती को अपने साथ रखते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्हें शक्तियां भी देते हैं. मां पार्वती ने कई बार राक्षसों का नाश भी किया था, जो यह दिखाता है कि शिव जी उन पर पूरा भरोसा करते थें. वे उन्हें बांधकर नहीं रखते थे, बल्कि आगे बढ़ने की ताकत देते थें. आज की लड़कियां भी ऐसा ही पार्टनर चाहती हैं, जो उनके करियर को समझे, उन्हें सपोर्ट करे और उन्हें अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने की आजादी दे. समानता भगवान शिव का अर्धनारीश्वर रूप बहुत खास माना जाता है. इसमें आधा हिस्सा शिव का है और आधा माता शक्ति का. इसका सीधा सा मतलब है कि पुरुष और महिला एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं, दोनों मिलकर ही जीवन और सृष्टि को आगे बढ़ाते हैं. यह रूप यह भी बताता है कि सिर्फ शक्ति या सिर्फ चेतना से काम नहीं चलता है, बल्कि दोनों का साथ होना जरूरी है. यानी रिश्ते में बराबरी और संतुलन सबसे ज्यादा मायने रखता है. अर्धनारीश्वर का संदेश साफ है कि पति-पत्नी या पार्टनर्स को एक-दूसरे को बराबर समझना चाहिए, एक-दूसरे की इज्जत करनी चाहिए और हर फैसले में दोनों की अहमियत होनी चाहिए. अच्छा साथी भगवान शिव की एक खास बात यह है कि वे जितने शक्तिशाली हैं, उतने ही दयालु और शांत स्वभाव के भी हैं. Gen Z लड़कियों के लिए आदर्श पार्टनर वही है जो बाहर से मजबूत हो, लेकिन अंदर से समझदार, केयरिंग और सॉफ्ट दिल वाला हो. भगवान शिव को अहंकार खत्म करने वाला भी माना जाता है. इसलिए आज की लड़कियां भी ऐसे पार्टनर चाहती हैं जिनमें बेवजह का ईगो न हो. वे ऐसा रिश्ता चाहती हैं जो बराबरी और सम्मान पर टिका हो, न कि सिर्फ मर्द होने के घमंड पर. आज के रिश्तों में लड़कियां समझदारी चाहती हैं, जहां एक-दूसरे को कंट्रोल करने की कोशिश न हो, बल्कि दोनों मिलकर एक-दूसरे को समझें और सपोर्ट करें.

चाणक्य नीति के अनुसार स्त्री के 5 महत्वपूर्ण गुण जो बनाते हैं उसे मजबूत और सम्मानित

 आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति शास्त्र (Chanakya Niti) में जीवन को सफल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं. चाणक्य नीति के अनुसार, एक मजबूत और श्रेष्ठ स्त्री केवल शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि अपने गुणों और विचारों से शक्तिशाली होती है. चाणक्य ने स्त्री के ऐसे 5 विशेष गुणों का उल्लेख किया है, जो उसे हर विपरीत परिस्थिति में मजबूत बनाते हैं और समाज में सम्मान दिलाते हैं. आइए जानते हैं इन गुणों के बारे में: संतोष (संतुष्ट रहने का गुण) आचार्य चाणक्य के अनुसार, जो स्त्री हर परिस्थिति में संतुष्ट रहना जानती है, वह सबसे मानसिक रूप से सबसे मजबूत होती है. संकट के समय या आर्थिक तंगी होने पर भी जो स्त्री धैर्य नहीं खोती और कम साधनों में भी घर को संभाल लेती है, वह किसी भी मुश्किल दौर से अपने परिवार को बाहर निकाल सकती है. ऐसी स्त्री को कोई भी परिस्थिति तोड़ नहीं सकती. धर्म और संस्कारों का पालन चाणक्य नीति कहती है कि जो स्त्री धर्म के मार्ग पर चलती है और जिसके पास अच्छे संस्कार होते हैं, वह न केवल खुद मजबूत होती है बल्कि पूरे परिवार की धुरी बनती है. संस्कारी और धार्मिक स्त्री सही और गलत का अंतर बखूबी जानती है. वह समाज के बहकावे में नहीं आती और अपने बच्चों को भी सही दिशा देती है, जिससे आने वाली पीढ़ियां मजबूत बनती हैं. मधुर वाणी (मीठी बोली) वाणी को चाणक्य ने सबसे बड़ा हथियार माना है. चाणक्य के अनुसार, जिस स्त्री की वाणी मधुर होती है, वह सबसे शक्तिशाली होती है. कड़वी बात कहने वाले अक्सर अपनों को भी पराया कर देते हैं, लेकिन अपनी मीठी और समझदारी भरी बातों से एक स्त्री बड़े से बड़े विवाद को शांत कर सकती है. मधुर वाणी वाली स्त्री हर किसी का दिल जीत लेती है और संकट के समय लोग उसके साथ खड़े होते हैं. शिक्षित और ज्ञानवान होना आचार्य चाणक्य का मानना था कि स्त्री का शिक्षित और जागरूक होना बेहद जरूरी है. ज्ञान ही स्त्री की असली शक्ति है. एक ज्ञानवान स्त्री केवल घर ही नहीं संभालती, बल्कि जरूरत पड़ने पर सही और बड़े फैसले लेने में भी सक्षम होती है. वह अपने अधिकारों को जानती है और समाज में कोई उसका शोषण नहीं कर सकता. ज्ञान उसे आत्मनिर्भर और साहसी बनाता है. साहस और संकट में धैर्य (साहसी स्वभाव) चाणक्य के अनुसार, एक मजबूत स्त्री का सबसे बड़ा गुण उसका साहस है. वह मुश्किल समय में रोने या घबराने के बजाय उसका सामना करने की रणनीति बनाती है. जब परिवार पर कोई विपत्ति आती है, तो साहसी स्त्री एक ढाल की तरह आगे आकर खड़ी हो जाती है. उसका यही हौसला पूरे घर को संबल देता है और विपरीत समय को भी अनुकूल बना देता है.