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चांदी के बढ़ते दामों से व्यापार ठप होने की आशंका, कारोबारी और ग्राहक दोनों चिंतित

इंदौर   देश में चांदी और सोने के भाव में रिकॉर्डतोड़ वृद्धि हो रही है. बुधवार को चांदी 3 लाख 25 हजार किलो के भाव को पार कर गई. वहीं प्रति तोला सोना भी डेढ़ लाख के करीब पहुंच गया है. इन हालातों में अब बाजार में चांदी मिलना मुश्किल हो रही है. बड़े व्यवसायियों ने भी चांदी की खरीदी बिक्री से हाथ खींच लिए हैं. ग्राहक समझ नहीं पा रहे कि चांदी में इतनी ज्यादा चमक क्यों बढ़ गई है. इंदौर सराफा मार्केट की चमक फीकी दुनिया भर में चांदी की खरीदी में आ रही तेजी के चलते मध्य प्रदेश के सबसे बड़े इंदौर सराफा बाजार में भी चांदी 325000 के आंकड़े को पार कर गई. इंदौर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी और मंत्री बसंत सोनी ने बताया "बढ़ती कीमतों के कारण कई शहरों में चांदी के व्यापार को लेकर विवाद हो रहे हैं, जो व्यापारी बड़े व्यापारियों से माल खरीद कर बेचने के लिए ले जा रहा है, बढ़ती कीमत के कारण उसे खरीदी की रकम चुकाना मुश्किल हो रहा है." कारीगर, ढलाई, पालिश करने वाले, डिजाइनर, पैकिंग मजदूरों की आजीविका पर असर चांदी के बढ़ते दामों ने सराफा बाजार में ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसने 40 वर्षों का इतिहास तोड़ दिया। डेढ़ महीने के भीतर चांदी की कीमत दोगुणी होकर ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जिसकी कल्पना भी कारोबारियों ने नहीं की थी। 21 नवंबर को जहां चांदी का भाव एक लाख 52 हजार रुपये प्रति किलोग्राम था, 20 जनवरी तक तीन लाख 22 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचा। यह उछाल सराफा उद्योग के लिए झटका है। अब बाजार में न खरीदार हैं, न विक्रेता। एक महीने से ठंडी पड़ी भट्ठियां, उम्मीद व आशंका के बीच फंसा सराफा उद्योग हालात ऐसे हो गए हैं कि दुकानें खुली तो हैं, लेकिन लेनदेन ठप है। इसी उथल-पुथल के बीच सराफा कारोबार को बड़ा झटका उस वक्त लगा, जब चार दर्जन व्यापारियों की करीब 2500 किलो चांदी लेकर 10 कारोबारी फरार हो गए। करोड़ों की चांदी डूबने की आशंका ने छोटे और मझोले व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। लगातार बढ़ती कीमतों ने सराफा कारोबार से जुड़े एक लाख मजदूरों के रोजगार पर भी संकट ला दिया है। कारीगर, ढलाई करने वाले, पालिश करने वाले, डिजाइनर, पैकिंग मजदूरों के लेकर अन्य की आजीविका इसी पर निर्भर है। स्थिति यह है कि एक पायल बनाने में ही करीब 10 से 12 मजदूरों को रोजगार मिलता है। लेकिन जब पायल ही नहीं बनेगी, तो ये मजदूर क्या करेंगे। चांदी न मिलने पर गिलट की पायल का काम अर्जुनपुरा के रहने वाले कारीगर अजय बताते हैं कि चांदी की माल नहीं मिलने पर अब उन्होंने गिलट की पायल बनाने का काम शुरू किया है, लेकिन इसमें भी मजदूरी कम हो गई है। फिर भी परिवार के भरण पोषण को देखते हुए गिलट का काम ले लिया है।  मध्यम वर्ग से भी दूर हुई चांदी सराफा कारोबारी हुकुम सोनी का कहना है "बाजार में ग्राहकों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है, क्योंकि अब मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए चांदी खरीदना भी मुश्किल हो गया है. क्योंकि सबसे छोटा चांदी का आइटम भी अब ₹2000 तक पहुंच गया है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर है. गुजरात के सूरत में इन्हीं हालातों के कारण कई व्यापारियों ने चांदी का धंधा बंद कर दिया. ऐसी स्थिति अब इंदौर सराफा बाजार में आ रही है कई व्यापारियों में व्यापार के दौरान टकराव हो रहे हैं." शादी के सीजन में भी खरीदने की हिम्मत नहीं शादी का सीजन होने के बाद भी लोग चांदी नहीं खरीद पा रहे हैं. ग्राहक आते हैं और रेट पूछकर वापस चले जाते हैं. उन्हें उम्मीद रहती है कि हो सकता है आगे चलकर चांदी के रेट कम हो जाएं. लेकिन जब वही ग्राहक फिर वापस खरीदारी करने आता है तो कम से कम वजन के आइटम्स के बारे में जानकारी लेता है. दूसरी तरफ, चांदी को गिरवी रखने वाले अब उसे उठाने के लिए आ रहे हैं. इसको लेकर भी विवाद सामने आ रहे हैं. चांदी के भाव कम होने की उम्मीद नहीं सोना-चांदी के जानकार बता रहे हैं कि चांदी का फंड एवं कोष विकसित करने के कारण भी दाम बढ़ रहे हैं, क्योंकि युद्ध के हालातो में चांदी और सोना निवेशकों के लिए भी सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है. चांदी उत्पादक देश पेरू में 23% चांदी का फंड है, जिसकी मात्रा 149000 टन है. इसी प्रकार चीन में 99000 टन और रूस में 70000 टन का चांदी कोष तैयार किया गया है. ऐसी स्थिति में चांदी के दाम कम होने की संभावना कम है.

US बर्गर कंपनी बर्गर किंग करेगा एशियाई विस्तार, टैरिफ विवादों के बीच हुई डील

नई दिल्ली भारत में काफी पॉपुलर फास्ट फूड चेन में से एक बर्गर किंग भी है. यह अमेरिका की पुरानी और मशहूर बर्गर कंपनी है, जो यहां व्हॉपर, चिकन बर्गर, फ्रेंच फ्राइज और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी चीजें बेचती है. लोग इसे मैकडॉनल्ड्स और केएफसी से तुलना करते हैं, क्योंकि ये तीनों ही क्विक सर्विस रेस्टोरेंट यानी क्यूएसआर सेक्टर में बड़े नाम हैं. बर्गर किंग भारत में 575 से ज्यादा आउटलेट्स चला रही है. ये दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर, चेन्नई जैसे बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों तक फैली हुई है. कंपनी हर साल नए स्टोर खोल रही है और ग्रोथ पर फोकस कर रही है. भारत में बर्गर किंग चलाने वाली कंपनी रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया (आरबीए) अब नए हाथों में जा रही है. चाइनीज वोक ब्रांड की मालिक कंपनी इंस्पिरा ग्लोबल आरबीए में कंट्रोलिंग स्टेक ले रही है. यह डील अमेरिका की पुरानी बर्गर कंपनी बर्गर किंग के भारत वाले ऑपरेटर को खरीदने जैसी है, क्योंकि बर्गर किंग अमेरिका की सबसे पुरानी और मशहूर ब्रांड्स में से एक है. अभी वैश्विक स्तर पर अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ वॉर चल रही है, ऐसे में यह डील काफी चर्चा में है. इस डील के तहत एवरस्टोन कैपिटल अपनी पूरी 11.26 प्रतिशत हिस्सेदारी इंस्पिरा ग्लोबल को बेच रही है. एवरस्टोन ने यह हिस्सेदारी अपने निवेश वाहन क्यूएसआर एशिया के जरिए रखी थी. इस बिक्री से एवरस्टोन को करीब 460 करोड़ रुपये मिलेंगे. डील ₹70 प्रति शेयर पर हुई है, जो बीएसई पर मंगलवार को बंद हुए ₹64 के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 10 प्रतिशत ज्यादा है. 1500 करोड़ का फ्रेश कैपिटल इंस्पिरा ग्लोबल के प्रमोटर्स आयुष अग्रवाल और मधुसूदन अग्रवाल ने कंपनी में और पैसा लगाने का ऐलान किया है. वे ₹900 करोड़ इक्विटी शेयर के जरिए और ₹600 करोड़ वॉरंट के जरिए निवेश करेंगे. कुल मिलाकर यह करीब ₹1500 करोड़ का फ्रेश कैपिटल होगा. यह निवेश आरबीए में नए प्रमोटर के रूप में इंस्पिरा को मजबूत बनाएगा और कंपनी को ग्रोथ के लिए पैसा मिलेगा. इस डील से ओपन ऑफर भी ट्रिगर होगा, जिसमें पब्लिक शेयरहोल्डर्स को भी शेयर बेचने का मौका मिलेगा. आरबीए भारत और इंडोनेशिया में बर्गर किंग चलाती है. इंडोनेशिया में पोपाइज ब्रांड भी उसी के पास है. भारत में बर्गर किंग के 575 से ज्यादा आउटलेट्स हैं. यह मैकडॉनल्ड्स और केएफसी जैसी बड़ी कंपनियों से सीधा मुकाबला करती है. फास्ट फूड सेक्टर में अभी उपभोक्ता खर्च कम होने से स्लोडाउन चल रहा है, लेकिन इंस्पिरा ग्लोबल को भरोसा है कि यह सेक्टर हाई ग्रोथ वाला है. 60 से 80 नए रेस्टोरेंट्स खोलने की प्लानिंग इंस्पिरा ग्लोबल का फूड एंड बेवरेज हिस्सा लेनेक्सिस फूडवर्क्स पहले से ही 45 से ज्यादा शहरों में 250 से अधिक चाइनीज वोक रेस्टोरेंट्स चला रहा है. आयुष अग्रवाल ने कहा कि यह निवेश उनकी कंज्यूमर बिजनेस पर फोकस को मजबूत करेगा और हाई-ग्रोथ क्यूएसआर सेक्टर में मौजूदगी बढ़ाएगा. वे ब्रांड को अच्छे से संभालने, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और स्मार्ट कैपिटल यूज पर जोर देंगे. यह डील आरबीए को नई एनर्जी देगी. कंपनी हर साल 60 से 80 नए रेस्टोरेंट्स खोलने की प्लानिंग कर रही है. आने वाले सालों में आउटलेट्स की संख्या बढ़ाकर 800 तक पहुंचाने और ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन 70 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य है. एवरस्टोन कैपिटल ने सालों पहले निवेश किया था और अब एग्जिट कर रही है. इंस्पिरा ग्लोबल के आने से बर्गर किंग भारत में और तेजी से फैल सकती है. आम लोग अब देखेंगे कि क्या बर्गर किंग के आउटलेट्स बढ़ेंगे और नई चीजें मिलेंगी. यह डील फास्ट फूड मार्केट में बड़ा बदलाव ला सकती है.

टैरिफ डर का असर: ट्रंप के बयान से एशिया में बिकवाली, भारत में भी बाजार लुढ़के

मुंबई     डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का टैरिफ दुनिया के शेयर बाजारों को संभलने का मौका नहीं दे रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति आए दिन कहीं न कहीं टैरिफ बम (Trump Tariff Bomb) फोड़ते नजर आ रहे हैं, जिसका असर खुद अमेरिकी शेयर बाजारों के साथ ही एशियाई शेयर मार्केट में क्रैश (Asian Market Crash) के रूप में देखने को मिला है. जापान से लेकर साउथ कोरिया तक बुधवार को भगदड़ देखने को मिली. ये पहले से ही बिखरते जा रहे भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए भी खराब सिग्नल रहे, जब सेंसेक्स-निफ्टी ओपन हुए तो शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद दोनों इंडेक्स भी बिखर गए. BSE Sensex ओपनिंग के बाद 200 अंक से ज्यादा फिसलकर कारोबार करता नजर आया.  ट्रंप ने दी 200% टैरिफ की धमकी अमेरिका ने एक बार फिर से टैरिफ बम फोड़ा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 यूरोपीय देशों पर बीते शनिवार को 10 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जो 1 फरवरी को लागू होने वाला है. ये Trump Tariff Warning अमेरिका के ग्रीनलैंड प्लान का विरोध करने पर दी गई है और ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर Greenland कब्जाने में कोई रुकावट आती है, तो फिर 1 जून से ये टैरिफ 25% तक किया जाएगा. इसके बाद अचानक Donald Trump ने फ्रांस की वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ लगाने की नई धमकी दे डाली है.  कल हुआ था क्रैश, आज भी बिखरे सेंसेक्स-निफ्टी बता दें कि ट्रंप टैरिफ से दुनिया के बाजारों में मची हलचल का असर बीते कुछ दिनों से भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ देखने को मिल रहा है. पिछले कारोबारी दिन मंगलवार सेंसेक्स-निफ्टी में तगड़ी गिरावट देखने को मिली थी. BSE Sensex 83,207 पर ओपन होने के बाद 1066 अंक गिरकर 82,180.47 पर क्लोज हुआ था. तो वहीं NSE Nifty 25,580 पर खुलने के बाद 353 अंक फिसलकर 25,232 पर बंद हुआ था. बुधवार को जब शेयर बाजार में कारोबार ओपन हुए, तो दोनों इंडेक्स में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला. लेकिन महज 10 मिनट के कारोबार के दौरान ही बीएसई का सेंसेक्स करीब 200 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं एनएसई का निफ्टी भी रेड जोन में ट्रेड करता दिखा.  जापान से कोरिया तक मार्केट क्रैश ट्रंप की इस नई धमकी का सीधा असर एशियाई शेयर बाजार में भगदड़ के रूप में दिखाई दिया है. बुधवार को जब Asian Stock Markets में कारोबार शुरू हुआ, तो ज्यादातर टूटे हुए नजर आए. Japan Nikkei खबर लिखे जाने तक 297 अंक फिसलकर 52,693 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि शुरुआती कारोबार में ये 796 अंकों की गिरावट के लेकर 52,194 तक फिसल गया था.  जापान के अलावा हांगकांग का Hang Seng 112 अंक टूटकर 26,423 पर आ गया. इसके अलावा साउथ कोरिया का KOSPI इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा गिरकर ट्रेड कर रहा था. अन्य बाजारों में ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200, DAX, CAC भी रेड जोन में दिखाई दिए.  खुद अमेरिका में बुरा हाल Trump Tariff का असर सिर्फ एशियाई बाजारों में ही नहीं, बल्कि खुद अमेरिका में भी बड़े लेवल पर देखने को मिला है. अमेरिकी शेयर बाजार भी बीते कारोबारी दिन तेज गिरावट के साथ बंद हुए. Dow Jones 870 अंक की तेज गिरावट के साथ फिसलकर 48,509 पर आ गया, तो वहीं S&P 500 इंडेक्स भी बिखरा हुआ नजर आया. इसमें क्लोजिंग के समय तक 143 अंक की गिरावट आ गई और ये 6817 पर बंद हुआ.

8th Pay Commission पर बवाल: 2.5 लाख कर्मचारियों को नहीं मिला लाभ, वित्त मंत्री को लिखा पत्र

नई दिल्ली केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में घोषित कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज (CSAP) को लेकर विवाद गहरा गया है। ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन ने इस योजना से केंद्र शासित प्रदेशों और स्वायत्त निकायों (Autonomous Bodies) के कर्मचारियों को बाहर रखने पर कड़ी आपत्ति जताई है। फेडरेशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर इस 'नाइंसाफी' को दूर करने की मांग की है। 2.5 लाख कर्मचारियों के साथ भेदभाव का आरोप फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने वित्त मंत्री को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि देश की करीब 5,000 सेंट्रल ऑटोनोमस बॉडीज में लगभग 2.5 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। ये कर्मचारी केंद्र सरकार के ही नियमों के तहत सेवाएं देते हैं, फिर भी उन्हें इस महत्वपूर्ण वेलफेयर बूस्टर से वंचित रखा गया है।   इसमें दिल्ली सरकार (GNCTD) और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी भी शामिल हैं, जो व्यावहारिक रूप से केंद्र के ही अधीन काम करते हैं। क्या है कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज? केंद्र सरकार ने 16 जनवरी को केंद्रीय कर्मचारियों के लिए इस विशेष पैकेज की घोषणा की थी। इसे आठवें वेतन आयोग के लागू होने से पहले एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इस योजना के मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:     बैंकिंग सुविधाएं: एक ही खाते के माध्यम से सभी वित्तीय लेनदेन।     बीमा कवर: कर्मचारियों को बेहतर बीमा सुरक्षा का प्रावधान।     ऋण और कार्ड: आसान लोन प्रक्रिया और विशेष कार्ड सुविधाएं।     वित्तीय सुरक्षा: बैंकिंग जरूरतों को एक ही स्थान पर एकीकृत कर सामाजिक सुरक्षा मजबूत करना। फेडरेशन की प्रमुख मांगें फेडरेशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि प्रधानमंत्री के 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के विजन को ध्यान में रखते हुए समानता सुनिश्चित की जाए। पत्र के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:     समानता का अधिकार: सभी केंद्र शासित प्रदेशों और ऑटोनोमस बॉडीज के कर्मचारियों को तुरंत इस पैकेज में शामिल किया जाए।     सामाजिक न्याय: वित्तीय सुरक्षा के इस लाभ को केवल मंत्रालयों तक सीमित न रखा जाए।     वित्तीय समावेश: 2.5 लाख वंचित कर्मचारियों को भी बैंकिंग और बीमा के ये विशेष लाभ दिए जाएं।

लाल निशान पर खुला बाजार, सेंसेक्स में 651 अंकों की गिरावट, निफ्टी फिसला

नई दिल्ली विदेशी निधियों की निरंतर निकासी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण निवेशकों की भावना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने से मंगलवार को शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान 2:07 बजे तक सेंसेक्स 650.97 अंक या 0.78 प्रतिशत गिरकर 82,595.21 अंक पर आ गया। वहीं निफ्टी 216.35 अंक या 0.85 प्रतिशत गिरकर 25,369.15 अंक पर आ गया। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 311.33 अंक गिरकर 82,934.85 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 99.5 अंक गिरकर 25,486 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 8 पैसे गिरकर 90.98 पर आ गया। सेंसेक्स की कंपनियों का हाल सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से, इटरनल, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, इंटरग्लोब एविएशन, ट्रेंट और बजाज फिनसर्व पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। वहीं, कोटक महिंद्रा बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, अल्ट्राटेक सीमेंट और आईटीसी लाभ कमाने वालों में शामिल थे। भू-राजनीतिक तनावों और विदेशी निवेश्कों की बिकवाली का दिखा असर ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली और रुपये की निरंतर कमजोरी से घरेलू शेयरों में आत्मविश्वास पर दबाव पड़ रहा है और अल्पकालिक सुधार के दौरान भी इनमें किसी भी महत्वपूर्ण तेजी की संभावना सीमित है। घरेलू संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार खरीदारी एक प्रमुख स्टेबलाइजर के रूप में काम कर रही है, जो बिकवाली के दबाव को कम कर रही है और बाजार में और अधिक गिरावट को रोकने में मदद कर रही है। एशियाई बाजारों में रहा मिला-जुला हाल एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक ऊंचा कारोबार कर रहा था, जबकि जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक नीचे कारोबार कर रहे थे। सोमवार को छुट्टी के कारण अमेरिकी बाजार बंद रहे। अमेरिकी बाजारों में राष्ट्रीय अवकाश मार्टिन लूथर किंग जूनियर दिवस के उपलक्ष्य में बाजार बंद रहने के बाद मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में अधिकतर गिरावट देखी गई। सोमवार को अधिकांश यूरोपीय बेंचमार्क में गिरावट के बाद अमेरिकी वायदा बाजार में भी भारी गिरावट आई। तेल की कीमतें स्थिर रहीं। ट्रंप की टैरिफ धमकी के बाद वैश्विक बाजारों में आई गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा आठ यूरोपीय देशों से आयात पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाने की धमकी के बाद वैश्विक शेयरों में गिरावट आई, जिससे अमेरिका में भारी निवेश करने वाले महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया हुई। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची द्वारा 8 फरवरी को अचानक चुनाव की घोषणा के बाद टोक्यो का बेंचमार्क निक्केई 225 सूचकांक 1.1% गिरकर 52,988.24 पर आ गया।   ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 64.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.11 प्रतिशत बढ़कर 64.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 3,262.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) खरीदार बने रहे और उन्होंने 4,234.30 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। सोमवार को सेंसेक्स 324.17 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 83,246.18 पर बंद हुआ। निफ्टी 108.85 अंक या 0.42 प्रतिशत गिरकर 25,585.50 पर आ गया।

₹35,000 करोड़ का निवेश, 12 हजार नई नौकरियां, 10 लाख कारों का प्रोडक्शन – Maruti की बड़ी योजना

  नई दिल्ली    Maruti New Plant in Gujarat: भारत की सड़कों पर दौड़ती हर दूसरी कार में मारुति की झलक मिल जाती है. मारुति तकरीबन आधे कार बाजार पर काबिज है और अब यही मारुति सुजुकी इतिहास का एक और बड़ा अध्याय लिखने जा रही है. गुजरात की धरती पर 35,000 करोड़ रुपये का निवेश, एक ऐसे प्लांट की शुरुआत जो हर साल 10 लाख नई गाड़ियाँ बनाएगा, और हजारों लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगा. तो आइये जानें क्या है मारुति सुजुकी का मेगा प्रोडक्शन प्लान. मारुति सुजुकी गुजरात में एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाएगी, जिस पर करीब 350 अरब रुपये यानी 35,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस प्लांट से हर साल करीब 10 लाख गाड़ियों का उत्पादन किया जाएगा. इसका मकसद सिर्फ भारत में बढ़ती मांग को पूरा करना नहीं है, बल्कि एक्सपोर्ट मार्केट में भी कंपनी की पकड़ मजबूत करना है. इस नई फैक्ट्री में उत्पादन साल 2029 से शुरू होने की उम्मीद है. इसके बाद मारुति की कुल सालाना उत्पादन क्षमता 24 लाख से बढ़कर करीब 34 लाख गाड़ियों तक पहुंच जाएगा. जापान की सुजुकी मोटर की हिस्सेदारी वाली मारुति सुजुकी पहले से ही भारत की नंबर वन कार कंपनी है और यह निवेश उसकी बादशाहत को और मजबूत करेगा. मारुति के एंट्री लेवल मॉडल्स की मांग आसमान छू रही है. कंपनी के मुताबिक इन गाड़ियों पर करीब डेढ़ महीने का ऑर्डर बैकलॉग चल रहा है. यानी लोग खरीदना चाहते हैं, लेकिन गाड़ी मिलने में इंतजार करना पड़ रहा है. यही वजह है कि कंपनी उत्पादन बढ़ाने के लिए इतने बड़े कदम उठा रही है. इस नए प्लांट में प्रोडक्शन शुरू होने के बाद कारों की वेटिंग से भी निजात मिलने की उम्मीद है. जमीन खरीदने के लिए पहली किस्त मंजूर मारुति के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इस हफ्ते 4,960 करोड़ रुपये की शुरुआती रकम मंजूर की है, ताकि गुजरात में इस नए प्लांट के लिए जमीन खरीदी जा सके. इससे पहले कंपनी ने साफ किया था कि, वह साणंद में नया ऑटोमोबाइल प्लांट लगाने के लिए गुजरात सरकार से जमीन लेने की प्रक्रिया में है. अब मारुति सुजुकी ने 35 हजार करोड़ के निवेश के लिए निवेश पत्र गुजरात सरकार को सौंपा है. मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड खोरज में 1750 एकड़ भूमि पर 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश से एक नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी. 12 हजार नौकरियां उम्मीद की जा रही है कि, मारुति सुजुकी के इस नए प्लांट से संभावित रूप से 12 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा. इतना ही नहीं, इस नए प्लांट के चलते आसपास के इलाकों में कुछ अन्य छोटे और मिडियम साइज इंडस्ट्री यूनिट्स भी शुरू होने की संभावना है. जिससे लगभग 75 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा. इस प्रोजेक्ट के तहत, सालाना 25 लाख कारों की उत्पादन क्षमता वाले 4 प्लांट डेवलप किए जाएंगे, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता प्रति वर्ष 10 लाख कारों की होगी. कंपनी 2029 से पहले इस प्लांट में प्रोडक्शन शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. बताते चलें कि, इस नए प्लांट के निर्माण के लिए गुजरात सरकार और मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के बीच 2024 वाइब्रेंट समिट में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया था.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2012 में सुजुकी मोटर्स को पहली बार गुजरात में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया था. जिसके बाद गुजरात में मारुति का पहला प्लांट हंसलपुर में शुरू किया गया था. इस समय यह प्लांट सालाना 7.50 लाख कारों का उत्पादन करता है, जिसे आने वाले समय में बढ़ाकर 10 लाख यूनिट प्रति वर्ष करने की योजना है. भारत में मारुति के कितने प्लांट मौजूदा समय में मारुति सुजुकी के कुल 3 प्लांट हैं. जिनमें सालाना तकरीबन 23.5 लाख कारों का प्रोडक्शन होता है. इनमें से दो हरियाणा (गुरुग्राम और मानेसर) में और एक गुजरात में हैं. हाल ही में, मारुति सुजुकी ने हरियाणा के खरखौदा में अपने नए ग्रीनफील्ड प्लांट में भी उत्पादन शुरू किया है, जिसकी सालाना क्षमता 2.50 लाख यूनिट है. इसके अलावा गुजरात में एक और ग्रीनफील्ड प्लांट स्थापित करने की योजना है.

दो करोड़ से ज्यादा दोपहिया बिकने के बावजूद नहीं टूटा 7 साल का रिकॉर्ड, वजह जानें

नई दिल्ली भारत का दोपहिया वाहन बाजार एक बार फिर मजबूती के साथ आगे बढ़ता दिख रहा है. साल 2025 में टू-व्हीलर बिक्री ने दो करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया, जो ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है. बीते कुछ वर्षों की सुस्ती के बाद बाजार में लौटी यह तेजी कंपनियों और ग्राहकों दोनों के लिए राहत लेकर आई है. हालांकि, बिक्री अब भी 2018 में बनाए गए सेल्स रिकॉर्ड से थोड़ा नीचे है, लेकिन रुझान साफ तौर पर सकारात्मक नजर आ रहा है. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स यानी SIAM के आंकड़ों के मुताबिक, बीते साल 2025 में भारत में कुल दो करोड़ से ज्यादा टू-व्हीलर बिके. यह 2024 में बेचे गए 1.9 करोड़ स्कूटर-बाइक्स की तुलना में करीब पांच प्रतिशत ज्यादा है. इसके बावजूद, 2018 में दर्ज 2.1 करोड़ यूनिट्स की ऐतिहासिक बिक्री का रिकॉर्ड अब तक नहीं टूट पाया है. हीरो और होंडा की बादशाहत  बिक्री के मामले में हीरो मोटोकॉर्प ने एक बार फिर बाजी मारी. कंपनी ने 2025 में 57.5 लाख यूनिट्स बेचकर नंबर एक की पोजिशन पर कब्जा बनाए रखा और सालाना आधार पर 2% की बढ़त दर्ज की. वहीं होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया दूसरे स्थान पर रही, जिसने 54 लाख यूनिट्स की बिक्री की. यह 2024 के मुकाबले करीब 1.9 प्रतिशत ज्यादा है. टीवीएस की तेज छलांग, बजाज को झटका टीवीएस मोटर कंपनी ने इस साल सबसे तेज बढ़त दर्ज की. कंपनी की बिक्री में 15.7 प्रतिशत का उछाल आया और कुल 39.8 लाख यूनिट्स दोपहिया वाहनों की बिक्री की. दूसरी ओर, बजाज ऑटो के लिए साल कुछ चुनौतीपूर्ण रहा. कंपनी की बिक्री में 5.1 प्रतिशत की गिरावट आई और 2025 में 22.2 लाख यूनिट्स ही बिक पाए. सुजुकी मोटरसाइकिल इंडिया ने हालांकि अच्छा प्रदर्शन किया और 10.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ 11.3 लाख यूनिट्स की बिक्री दर्ज की. घरेलू बाजार में मांग बढ़ने के पीछे कई कारण रहे. शुरुआत में टियर-1 शहरों में स्कूटर की मांग तेजी से बढ़ी, जबकि मोटरसाइकिल की बिक्री बाद में रफ्तार पकड़ती दिखी. SIAM के अनुसार, इनकम टैक्स में राहत, जीएसटी 2.0 में बदलाव और रेपो रेट में कटौती ने ग्राहकों की जेब पर दबाव कम किया. इससे दोपहिया वाहनों की खरीद आसान हुई. इस साल का फेस्टिव सीजन भी बीते कई वर्षों में सबसे मजबूत रहा. एक्सपोर्ट बाजार में भी बढ़ी डिमांड सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि निर्यात के मोर्चे पर भी टू-व्हीलर सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया. 2025 में रिकॉर्ड 49.4 लाख यूनिट्स वाहन विदेश भेजे गए, जो सालाना आधार पर 24.2 प्रतिशत की बढ़त है. दक्षिण एशिया में जबरदस्त डिमांड देखने को मिली साथ अफ्रीकी बाजारों में सुधार से एक्सपोर्ट बढ़ा है. SIAM का कहना है कि 2025 भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक अहम साल साबित हुआ. सरकार की नीतिगत सुधारों ख़ासतौर पर जीएसटी रिफॉर्म ने वाहनों की बिक्री को जबरदस्त ग्रोथ दी है. इंडस्ट्री को उम्मीद है कि, जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में भी सभी सेगमेंट में बढ़त देखने को मिलेगी. GST की छूट… फिर भी नहीं टूटा रिकॉर्ड बीते साल 22 सितंबर से देश भर में नए जीएसटी स्ट्रक्चर को लागू किया गया. जिसके अनुसार 350 सीसी से कम इंजन क्षमता वाले दोपहिया वाहनों पर जीएसटी टैक्स घटा दिया गया. इसका सीधा असर दोपहिया वाहनों की कीमतों पर देखने को मिला. लेकिन दूसरी ओर कारों पर जीएसटी में छूट का तगड़ा असर देखा गया. मारुति सुजुकी ने अपने एक बयान में कहा भी था कि, लोग अब दोपहिया से चारपहिया में अपग्रेड कर रहे हैं. यानी ऐसे लोग जो हाई-एंड बाइक्स की प्लानिंग कर रहे थें उन्होंने ने भी कारों की तरफ रूख किया. क्योंकि कारों की कीमत में तगड़ी कटौती देखने को मिली थी.  दूसरी ओर साल के आखिरी महीनों में फेस्टिवल ऑफर्स, फाइनेंस सुविधाएं, न्यूतम डाउन पेमेंट और ईजी ईएमआई जैसे स्कीम्स ने कारों की तरफ लोगों का रूझान बढ़ा दिया. हालांकि साल 2024 में बेचे गए (2.1 करोड़) और बीते साल के (2.0 करोड़) यूनिट के बीच बहुत ज्यादा अंतर नहीं है, लेकिन कारों में अपग्रेड करने ग्राहकों की चाहत को भी एक कारण माना जा रहा है. 

जनवरी 2026 अपडेट: महिंद्रा की तीन SUVs थार, थार रॉक्स और XUV 3XO हुई महंगी

मुंबई  जनवरी 2026 की शुरुआत महिंद्रा SUV खरीदने वालों के लिए झटका लेकर आई है। देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता महिंद्रा एंड महिंद्रा ने एक साथ अपनी तीन पॉपुलर SUVs—महिंद्रा थार, थार रॉक्स और XUV 3XO—की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी की ओर से नई एक्स-शोरूम कीमतें 17 जनवरी 2026 से लागू कर दी गई हैं। इस बढ़ोतरी का असर एंट्री लेवल से लेकर टॉप वैरिएंट तक साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। महिंद्रा थार हुई महंगी ऑफ-रोडिंग के शौकीनों की पसंद महिंद्रा थार अब पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत पर मिलेगी। कंपनी ने इसके बेस वैरिएंट को छोड़कर बाकी सभी 2026 वैरिएंट्स की कीमतों में करीब 20 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की है। हालांकि, थार की शुरुआती कीमत अभी भी 9.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) पर बरकरार रखी गई है, लेकिन टॉप वैरिएंट की कीमत अब बढ़कर 17.19 लाख रुपये तक पहुंच गई है। अलग-अलग इंजन और ट्रांसमिशन विकल्पों में यह बढ़ोतरी करीब 1 से 1.6 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है, जिससे यह साफ है कि महिंद्रा ने पूरे लाइनअप में एक समान असर डाला है। थार रॉक्स की कीमतों में भी इजाफा महिंद्रा थार रॉक्स, जिसे कंपनी ने ज्यादा प्रीमियम और पावरफुल विकल्प के तौर पर पेश किया है, वह भी इस बार महंगाई से नहीं बच पाई। जनवरी 2026 में थार रॉक्स की कीमतों में करीब 21 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। सबसे ज्यादा इजाफा 2.2 लीटर टर्बो डीजल ऑटोमैटिक 4WD वैरिएंट में देखा गया है। नई कीमतों के बाद थार रॉक्स की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 12.39 लाख रुपये हो गई है, जबकि इसका टॉप वैरिएंट अब 22.25 लाख रुपये तक पहुंच गया है। प्रतिशत के लिहाज से यह बढ़ोतरी लगभग 1 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन कीमत के स्तर पर इसका असर खरीदारों की जेब पर साफ पड़ेगा। XUV 3XO भी हुई महंगी महिंद्रा की कॉम्पैक्ट SUV XUV 3XO की कीमतों में भी जनवरी 2026 में संशोधन किया गया है। कंपनी ने इसके अलग-अलग वैरिएंट्स पर करीब 17 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की है। सबसे ज्यादा इजाफा डीजल इंजन वाले टॉप वैरिएंट्स में देखने को मिला है। नई कीमतों के बाद XUV 3XO की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 7.37 लाख रुपये से शुरू होती है, जबकि इसका टॉप वैरिएंट अब 14.55 लाख रुपये तक पहुंच गया है। पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन विकल्पों में यह बढ़ोतरी लगभग 1 से 1.3 प्रतिशत के बीच रही है। एक साथ बढ़ी कीमतों का क्या मतलब? महिंद्रा की इन तीनों SUVs की कीमतों में एक साथ हुई बढ़ोतरी से साफ संकेत मिलता है कि कंपनी बढ़ती लागत और बाजार स्थितियों को संतुलित करने की कोशिश कर रही है। चाहे दमदार ऑफ-रोड SUV थार हो, ज्यादा प्रीमियम थार रॉक्स या फिर फैमिली-फ्रेंडली XUV 3XO—तीनों ही मॉडल अब पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत पर मिलेंगे। ऐसे में जो ग्राहक इन SUVs को खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए नई कीमतें जानना और बजट दोबारा तय करना जरूरी हो गया है।

CII की राय: Budget 2026 में ये सुधार आम बजट को बनाएंगे असरदार

मुंबई   भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) एक शानदार खबर लेकर आया है. दरअसल CII  बिजनेस आउटलुक सर्वे के अनुसार, देश में बिजनेस करने वाली कंपनियों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है. लोकल मार्केट में सामान की डिमांड मजबूत है, जिससे कंपनियां भविष्य को लेकर पॉजिटिव हैं. CII के बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स में बड़ा इजाफा देखा गया है. वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में यह इंडेक्स बढ़कर 66.5 हो गया है, जो पिछले 5 तिमाहियों में सबसे ज्यादा है. सर्वे में शामिल 72% कंपनियों का मानना है कि त्योहारी सीजन और जीएसटी (GST) दरों में सुधार की वजह से आने वाले समय में डिमांड और बढ़ेगी. बजट 2026-27 के लिए CII के सुझाव सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि, "बढ़ते आत्मविश्वास से उद्योग की वैश्विक चुनौतियों से निपटने की क्षमता उजागर होती है, जिसे मजबूत घरेलू मांग और घरेलू सुधारों से सपोर्ट मिल रहा है. सरकार को भारत की तेज रफ्तार बनाए रखने के लिए बजट में कुछ कदम उठाने की जरूरत है, जिसमें शामिल हैं-     इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश (NIP 2.0) CII ने सुझाव दिया कि सरकार 150 लाख करोड़ रुपये की संशोधित 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline 2.0) के जरिए बुनियादी ढांचे पर खर्च जारी रखे. इससे ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता मिले जो तुरंत शुरू हो सकें और कमाई कर सकें.     इंडिया डेवलपमेंट एंड स्ट्रैटेजिक फंड घरेलू और विदेशी निवेश जुटाने के लिए एक विशेष फंड बनाने का सुझाव दिया गया है. यह फंड छोटे और मध्यम उद्योगों के साथ, ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स, युवाओं के कौशल विकास पर निवेश को बढ़ाने पर काम आएगा.     बिजनेस करना होगा और आसान कंपनियों पर कागजी कार्रवाई और नियमों का बोझ कम करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का डिजिटलीकरण कोष बनाने का प्रस्ताव है. इसका लक्ष्य डिजिटल रिकॉर्ड और रियल-टाइम कंप्लायंस सिस्टम को लागू करना है.     इनोवेशन और रिसर्च पर फोकस भविष्य की तकनीक के लिए CII ने 10 नए 'उन्नत शिक्षा और अनुसंधान केंद्र' खोलने की सिफारिश की है. हर केंद्र के लिए 1,000 करोड़ रुपये का बजट रखने का सुझाव है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी और बायोटेक्नोलॉजी पर काम करेंगे. भारतीय उद्योग जगत चाहता है कि सरकार बजट में ऐसे कदम उठाए जिससे न केवल व्यापार करना आसान हो, बल्कि भारत नई तकनीकों और मजबूत बुनियादी ढांचे के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहे.

अब और तेज़ होगा इंटरनेट अनुभव, Airtel ने इन राज्यों में बढ़ाया 5G नेटवर्क

नई दिल्ली भारत की टेलीकॉम कंपनी एयरटेल ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के यूजर्स को बड़ी सौगात दी है. कंपनी का कहना है कि पिछले 12 महीनों में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 2400 से अधिक नए 5 जी साइट्स लगाए गए हैं. इससे 3.6 करोड़ से अधिक ग्राहकों को फास्ट स्पीड और बेहतर नेटवर्क कवरेज मिलने लगा है. एयरटेल का दावा है कि अब शहरों के साथ-साथ कस्बों और गांवों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट का अनुभव पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगा. 87 जिलों में फैला 5G नेटवर्क कंपनी का कहना है कि इस बड़े नेटवर्क विस्तार का फायदा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 87 जिलों को मिल रहा है. कंपनी के मुताबिक, अब व्यस्त शहरों के साथ-साथ तेजी से बढ़ते कस्बों और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में भी मजबूत 5G कवरेज उपलब्ध है. इस नेटवर्क से 3.6 करोड़ ग्राहक सीधे तौर पर जुड़े हैं. कंपनी के अनुसार, एयरटेल हर दिन औसतन छह नए 5G साइट्स लाइव कर रहा है, जिससे कवरेज लगातार और मजबूत होती जा रही है. स्ट्रीमिंग से पढ़ाई तक सब होगा आसान तेज 5G नेटवर्क के चलते यूजर्स को हाई-क्वालिटी वीडियो स्ट्रीमिंग, फास्ट डाउनलोड और बिना रुकावट ऑनलाइन काम करने का अनुभव मिलेगा. छात्र ऑनलाइन क्लास और डिजिटल स्टडी प्लेटफॉर्म्स का बेहतर उपयोग कर पाएंगे. इसके साथ ही डिजिटल पेमेंट्स और ऑनलाइन सेवाएं भी ज्यादा भरोसेमंद बनेंगी. एयरटेल का कहना है कि यूजर्स चाहे सफर में हों या घर पर, उन्हें हर जगह समान नेटवर्क अनुभव मिलेगा. इन शहरों और जिलों को सीधा फायदा कंपनी के अनुसार, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, सागर, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, देवास, कोरबा और राजनांदगांव जैसे बड़े जिलों में एयरटेल का 5G नेटवर्क और मजबूत हुआ है. इन इलाकों में रहने वाले नागरिकों, छात्रों, छोटे कारोबारियों और सरकारी संस्थानों को हाई-स्पीड इंटरनेट का सीधा लाभ मिलेगा. ग्रामीण इलाकों पर खास फोकस एयरटेल ने साफ किया है कि उसका फोकस सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है. कंपनी ने ग्रामीण इलाकों, गांवों, हाईवे, सीमावर्ती क्षेत्रों और आर्थिक गलियारों में भी नेटवर्क घनत्व बढ़ाने के लिए बड़ा निवेश किया है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए Airtel के CEO रितेश अग्रवाल ने कहा कि ये राज्य कंपनी के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं. एयरटेल आगे भी नेटवर्क विस्तार और बेहतर डिजिटल अनुभव देने के लिए निवेश जारी रखेगा.