samacharsecretary.com

चांदी की कीमत में बड़ा वृद्धि — ₹13,000 की तेज बढ़त, सोने के ताज़ा रेट देखें

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) को लेकर गिरावट के सारे अनुमान धरे के धरे नजर आ रहे हैं और दोनों कीमती धातुएं हर रोज रिकॉर्ड तोड़ती दिख रही हैं. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को चांदी ने तो खुलते ही ऐसा गदर मचाया कि 1Kg Silver Price 3 लाख रुपये के पार निकल गया. चांदी ने इतिहास में पहली बार ये स्तर पार किया है. वहीं दूसरी ओर सोने का भाव (Gold Rate) भी ताबड़तोड़ तेजी के साथ नए शिखर पर पहुंच गया.  चांदी रुकने वाली नहीं Silver Price रुकता नजर नहीं आ रहा है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोमवार को ओपन होने के साथ ही चांदी की कीमत 13,553 रुपये चढ़ गई और इसके साथ ही इसने तीन लाख का आंकड़ा पहली बार पार करते लिया. 1 किलो चांदी का नया ऑल टाइम हाई लेवल 3,01,315 रुपये प्रति किलो हो गया है. पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को MCX Silver Rate 2,87,762 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था.  जनवरी में अब तक ₹65000 महंगी बीते साल 2025 में धमाल मचाने के बाद चांदी की कीमत ने इस साल के पहले महीने में भी शुरुआत से ही गदर मचाए रखा है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि Silver Price In January 2026 में अब तक 65,614 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गया है. जी हां 2025 के आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर को 1 किलो चांदी की कीमत 2,35,701 रुपये थी, जो कि अब 3,01,315 रुपये प्रति किलो पर पहुंच चुकी है.  झटके में 2900 रुपये महंगा हुआ सोना अब बात करें, सोने की कीमतों के बारे में तो MCX Gold Rate चांदी की तरह ही भागता हुआ नजर आया है. बीते सप्ताह शुक्रवार को 5 फरवरी वाले सोने का वायदा भाव 1,42,517 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था और सोमवार को खुलने के साथ ही ये 1,45,500 रुपये के नए हाई लेवल पर पहुंच गया. इस हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो 10 Gram 24 Karat Gold Rate 2983 रुपये बढ़ गया है.  वहीं इस साल की शुरुआत से अब तक गोल्ड प्राइस में आए उछाल पर गौर करें, तो 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने का दाम 1,35,804 रुपये था, जिसके हिसाब से ये अब तक 9,696 रुपये प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो गया है.  क्यों चमक रहे सोना-चांदी?  सोने और चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के पीछे के कारणों की बात करें, तो ग्लोबल टेंशन को सबसे अहम वजह माना जा सकता है, ट्रंप टैरिफ से एक बार फिर से ये बढ़ी है और Greenland पर कब्जा करने के ट्रंप के प्लान में रुकावट डालते नजर आ रहे यूरोपीय देशों पर भी अमेरिका ने टैरिफ जड़ दिया है. इससे टेंशन और भी बढ़ गई है और निवेशक फिर से सुरक्षित ठिकाने की तलाश में Gold-Silver का रुख करने लगे हैं और इनकी कीमतों में तेज उछाल आया है.  

शेयर बाजार में वापसी या और गिरावट? बजट 2026 से पहले Q3 नतीजे तय करेंगे दिशा

नई दिल्ली  घरेलू शेयर बाजारों में पिछले सप्ताह प्रमुख सूचकांकों के सपाट रहने के बाद आने वाले सप्ताह में कंपनियों के तिमाही परिणामों से बाजार की दिशा तय होगी। आईटी कंपनियों के अच्छे तिमाही परिणामों से इस सेक्टर में तेजी बनी हुई है जो आने वाले सप्ताह में जारी रहने की संभावना है। अगले सप्ताह सेंसेक्स की कंपनियों में इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट के वित्तीय परिणाम जारी होने हैं। संसद में 01 फरवरी को पेश होने वाले बजट से पहले निवेशक सतर्कता बरत सकते हैं। पिछले सप्ताह मुंबई नगर निगम चुनाव को कारण गुरुवार को बाजार में अवकाश रहा था। सोमवार और शुक्रवार को प्रमुख सूचकांकों में तेजी रही जबकि मंगलवार और बुधवार को गिरावट देखी गई। पिछले सप्ताह शेयर बाजार में दिखा था हाहाकार बीएसई का सेंसेक्स 5.89 अंक की साप्ताहिक गिरावट में शुक्रवार को 83,570.35 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक 11.05 अंक की बढ़त के साथ सप्ताहांत पर 25,694.35 अंक पर रहा। प्रमुख सूचकांकों के विपरीत मझौली और छोटी कंपनियों के लिए बीता सप्ताह अच्छा रहा। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक में 0.29 प्रतिशत की तेजी रही। निफ्टी स्मॉलकैप-100 सूचकांक भी 0.46 अंक ऊपर बंद हुआ। सेंसेक्स की 30 में से 19 के शेयर पिछले सप्ताह टूट गये जबकि अन्य 11 में साप्ताहिक तेजी दर्ज की गयी। एलएंडटी का शेयर सबसे ज्यादा 4.24 फीसदी लुढ़का। मारुति सुजुकी में 3.91 प्रतिशत, सन फार्मा में 3.51, एशियन पेंट्स में 2.39, आईटीसी में 2.33, इंडिगो में 2.19 और बीईएल में 2.08 प्रतिशत की गिरावट रही। टाटा के इस शेयर का भी रहा बुरा हाल ट्रेंट का शेयर 1.86 प्रतिशत, कोटक महिंद्रा बैंक का 1.67, रिलायंस इंडस्ट्रीज का 1.20, बजाज फाइनेंस का 1.05 और अडानी पोर्ट्स का 0.99 प्रतिशत फिसल गया। एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनीलिवर, भारती एयरटेल, महिंद्रा एंड महिंद्रा और पावर ग्रिड के शेयर भी साप्ताहिक गिरावट में रहे। टेक महिंद्रा में सबसे अधिक 5.65 प्रतिशत की तेजी रही। टाटा स्टील का शेयर भी 5.50 प्रतिशत, इंफोसिस 4.62, भारतीय स्टेट बैंक 4.23, अल्ट्राटेक सीमेंट 3.52 और एनटीपीसी 3.04 प्रतिशत मजबूत हुआ। एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर 2.20 फीसदी, एक्सिस बैंक के 1.78 और इटरनल के 1.11 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त में रहे। आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फिनसर्व के शेयर भी हरे निशान में रहे।

बजट सरप्राइज: शादीशुदा दंपतियों को मिल सकती है भारी टैक्स छूट

नई दिल्ली  केंद्र सरकार यूनियन बजट 2026 से पहले शादीशुदा टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने पर विचार कर रही है। खबर है कि वित्त मंत्रालय वैकल्पिक जॉइंट टैक्सेशन सिस्टम लाने की तैयारी में है। अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो पति-पत्नी मिलकर एक साथ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकेंगे। इसका सबसे ज्यादा फायदा उन परिवारों को होगा, जहां एक ही कमाने वाला सदस्य है। अभी ऐसे परिवार दूसरे जीवनसाथी की छूट और टैक्स स्लैब का पूरा फायदा नहीं उठा पाते, जिससे टैक्स का बोझ बढ़ जाता है। क्या है सिस्टम फिलहाल भारत में टैक्स सिस्टम ऐसा है कि शादीशुदा होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। पति और पत्नी दोनों को अलग-अलग टैक्स देना पड़ता है, अलग PAN, अलग छूट और अलग कटौती मिलती हैं। अगर पत्नी की इनकम नहीं है, तो उसकी बुनियादी छूट सीमा बेकार चली जाती है। इसी समस्या को देखते हुए भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्थान (ICAI) ने सरकार को सुझाव दिया है कि USA और Germany की तरह भारत में भी जॉइंट टैक्स फाइलिंग का विकल्प होना चाहिए, जहां परिवार को एक इकोनॉमिक यूनिट माना जाता है। जॉइंट टैक्सेशन में पति-पत्नी की कुल इनकम जोड़कर टैक्स लगाया जाएगा और इसके लिए अलग टैक्स स्लैब हो सकते हैं। माना जा रहा है कि बुनियादी छूट सीमा को भी बढ़ाया जा सकता है। जैसे अभी अगर एक व्यक्ति को ₹3 लाख तक टैक्स छूट मिलती है, तो जॉइंट फाइलिंग में यह सीमा ₹6 लाख या उससे ज्यादा हो सकती है। इससे मिडिल क्लास फैमिली को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा होम लोन ब्याज, मेडिकल इंश्योरेंस और दूसरे कटौती को भी बेहतर तरीके से एडजस्ट किया जा सकेगा। अगर दोनों पति-पत्नी कमाते हैं, तो भी उन्हें अलग-अलग स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलने की बात कही जा रही है। सरचार्ज पर भी राहत मिल सकती है साथ ही, सरचार्ज को लेकर भी राहत मिल सकती है। अभी ₹50 लाख से ज्यादा इनकम पर सरचार्ज लगता है, लेकिन जॉइंट टैक्सेशन में इसकी सीमा ₹75 लाख या उससे ज्यादा की जा सकती है। इससे हाई टैक्स ब्रैकेट में आने वाले परिवारों को भी राहत मिलेगी। अब सबकी नजरें यूनियन बजट 2026-27 पर टिकी हैं, जो 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाएगा। बजट सेशन 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह भारत के टैक्स सिस्टम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी जानकारी: 8वें वेतन आयोग के दौर में DA का पैटर्न समझना जरूरी

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। यह इंतजार अभी 18 महीने या उससे ज्यादा दिन रहेगा। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि वेतन आयोग को केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सैलरी स्ट्रक्चर समेत अन्य सुविधाओं पर मंथन के लिए 18 महीने का वक्त मिला है। इस बीच, कुछ केंद्रीय कर्मचारी ये सवाल भी पूछ रहे हैं कि क्या 8वें वेतन आयोग के लागू होने से पहले महंगाई भत्ता (DA) मिलेगा? अगर मिलेगा तो इसका पैटर्न क्या होगा? क्यों हो रही चर्चा दरअसल, 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है और जनवरी-जून 2026 का डीए संशोधन 7वें वेतन आयोग के दायरे से बाहर का पहला संशोधन होगा। हालांकि दिसंबर 2025 में संसद में दिए गए एक लिखित जवाब में सरकार ने साफ कहा कि मौजूदा महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मर्ज करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार का कहना है कि एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू (महंगाई सूचकांक) के आधार पर हर छह महीने में डीए/डीआर में होने वाली बढ़ोतरी महंगाई के असर की भरपाई के लिए पर्याप्त है। डीए में कितना इजाफे की उम्मीद? श्रम और रोजगार मंत्रालय ने नवंबर 2025 के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) 148.2 पर प्रकाशित किया है। यह एक ऐसा डेटा पॉइंट है जो सीधे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों के महंगाई राहत (DR) की गणना में इस्तेमाल होता है। महंगाई सूचकांक का उपयोग वेतन और पेंशन को वास्तविक मूल्य में गिरावट से बचाने के लिए किया जाता है और यह हर छह महीने में DA रिवीजन तय करता है, जिसका अगला रिवीजन 8वें वेतन आयोग के तहत 1 जनवरी, 2026 से होना है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) के तहत स्टैंडर्ड कैलकुलेशन के आधार पर, नवंबर 2025 तक DA पहले ही 59.93% तक पहुंच गया है, जो इसे 60% के निशान से थोड़ा ही कम रखता है। दिसंबर 2025 के इन्फ्लेशन डेटा का इंतजार है, लेकिन सिनेरियो-बेस्ड कैलकुलेशन से पता चलता है कि नतीजा काफी हद तक तय है। अगर दिसंबर इंडेक्स एक सही रेंज में भी ऊपर-नीचे होता है, तो भी कैलकुलेटेड DA 60% से ऊपर ही रहेगा।

रेगुलेटरी एक्शन का असर: ₹22.2 करोड़ जुर्माना और अफसरों पर कार्रवाई, इंडिगो शेयर पर निवेशकों की नजर

नई दिल्ली  बीते दिसंबर महीने में इंडिगो एयरलाइन की ओर से की गई मनमानी पर अब सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। दरअसल, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने दिसंबर में बड़े पैमाने पर हुई दिक्कतों के लिए इंडिगो एयरलाइन पर ₹22.2 करोड़ का जुर्माना लगाया है। इस खबर के बाद अब सोमवार को इंडिगो के शेयर पर निवेशकों की नजर रहेगी। बता दें कि डीजीसीए ने 68 दिनों के लिए हर दिन ₹3 लाख का जुर्माना और इसके अलावा ₹1.80 करोड़ का एक बार का सिस्टमैटिक पेनल्टी लगाया है। इस तरह, इंडिगो पर लगाया गया कुल जुर्माना ₹22.2 करोड़ हो गया है। शेयर का परफॉर्मेंस इंडिगो के शेयर की बात करें तो बीएसई पर 4738.70 रुपये पर है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर में मामूली तेजी आई थी। अब सोमवार को शेयर का कैसा परफॉर्मेंस रहेगा, ये तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन सरकार की कार्रवाई से निवेशक सहमे हुए हैं। शेयर के 52 हफ्ते का हाई 6,225.05 रुपये है। वहीं, शेयर के 52 हफ्ते का लो 3,946.40 रुपये है। इंडिगो पर सरकार की कार्रवाई दरअसल, डीजीसीए ने दिसंबर के पहले सप्ताह में इंडिगो संकट की उड़ानों में व्यवधान की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर उस पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही एक अधिकारी को कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया है। नियामक ने एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को भी इस मामले में आगाह किया है। बता दें कि 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द रही थीं और 1,852 उड़ानों में देरी हुई थी। इसके बाद भी कई दिन तक बड़े पैमाने पर व्यवधान था लेकिन डीजीसीए ने अपनी कार्रवाई के लिए सिर्फ इन्हीं तीन दिनों को आधार बनाया है। जांच समिति ने 26 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। अधिकारियों को किया आगाह नियामक ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को आगाह करके छोड़ दिया है जबकि मुख्य परिचालन अधिकारी इसिडर पोरक्रस को विंटर शिड्यूल और फ्लाइट ड्यूटी से संबंधित नये नियमों के असर के आकलन में विफल रहने के लिए चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर) जैसन हर्टर को मौजूदा जिम्मेदारियों से मुक्त करने और कोई भी जिम्मेदारी का पद न देने का आदेश दिया गया है। इंडिगो से 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने के लिए भी कहा गया है। कंपनी जैसे-जैसे डीजीसीए के निर्देशों के अनुरूप लक्ष्यों को हासिल करती जाएगी, बैंक गारंटी की राशि उसे वापस मिलती जाएगी।

शेयर बाजार की चाल: बजट 2026 से पहले निवेशकों की चिंता या उम्मीदें? Q3 रिपोर्ट देगी दिशा

नई दिल्ली   घरेलू शेयर बाजारों में पिछले सप्ताह प्रमुख सूचकांकों के सपाट रहने के बाद आने वाले सप्ताह में कंपनियों के तिमाही परिणामों से बाजार की दिशा तय होगी। आईटी कंपनियों के अच्छे तिमाही परिणामों से इस सेक्टर में तेजी बनी हुई है जो आने वाले सप्ताह में जारी रहने की संभावना है। अगले सप्ताह सेंसेक्स की कंपनियों में इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट के वित्तीय परिणाम जारी होने हैं। संसद में 01 फरवरी को पेश होने वाले बजट से पहले निवेशक सतर्कता बरत सकते हैं। पिछले सप्ताह मुंबई नगर निगम चुनाव को कारण गुरुवार को बाजार में अवकाश रहा था। सोमवार और शुक्रवार को प्रमुख सूचकांकों में तेजी रही जबकि मंगलवार और बुधवार को गिरावट देखी गई। पिछले सप्ताह शेयर बाजार में दिखा था हाहाकार बीएसई का सेंसेक्स 5.89 अंक की साप्ताहिक गिरावट में शुक्रवार को 83,570.35 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक 11.05 अंक की बढ़त के साथ सप्ताहांत पर 25,694.35 अंक पर रहा। प्रमुख सूचकांकों के विपरीत मझौली और छोटी कंपनियों के लिए बीता सप्ताह अच्छा रहा। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक में 0.29 प्रतिशत की तेजी रही। निफ्टी स्मॉलकैप-100 सूचकांक भी 0.46 अंक ऊपर बंद हुआ। सेंसेक्स की 30 में से 19 के शेयर पिछले सप्ताह टूट गये जबकि अन्य 11 में साप्ताहिक तेजी दर्ज की गयी। एलएंडटी का शेयर सबसे ज्यादा 4.24 फीसदी लुढ़का। मारुति सुजुकी में 3.91 प्रतिशत, सन फार्मा में 3.51, एशियन पेंट्स में 2.39, आईटीसी में 2.33, इंडिगो में 2.19 और बीईएल में 2.08 प्रतिशत की गिरावट रही। टाटा के इस शेयर का भी रहा बुरा हाल ट्रेंट का शेयर 1.86 प्रतिशत, कोटक महिंद्रा बैंक का 1.67, रिलायंस इंडस्ट्रीज का 1.20, बजाज फाइनेंस का 1.05 और अडानी पोर्ट्स का 0.99 प्रतिशत फिसल गया। एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनीलिवर, भारती एयरटेल, महिंद्रा एंड महिंद्रा और पावर ग्रिड के शेयर भी साप्ताहिक गिरावट में रहे। टेक महिंद्रा में सबसे अधिक 5.65 प्रतिशत की तेजी रही। टाटा स्टील का शेयर भी 5.50 प्रतिशत, इंफोसिस 4.62, भारतीय स्टेट बैंक 4.23, अल्ट्राटेक सीमेंट 3.52 और एनटीपीसी 3.04 प्रतिशत मजबूत हुआ। एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर 2.20 फीसदी, एक्सिस बैंक के 1.78 और इटरनल के 1.11 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त में रहे। आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फिनसर्व के शेयर भी हरे निशान में रहे।

SEBI ने 12 लोगों को 5 साल के लिए बैन किया, 90 लाख का जुर्माना, यह थे उनके कृत्य

मुंबई  भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक बड़े फ्रंट-रनिंग गिरोह पर एक्‍शन लेते हुए 12 संस्थाओं को पांच साल के लिए शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है. शुक्रवार को अपने आदेश में कैपिटल मार्केट नियामक ने नोटिस प्राप्‍त करने वालों पर 90 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है और 1.07 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के अवैध लाभ को वापस करने का भी आदेश दिया है.  यह मामला मंगल केशव फाइनेंशियल सर्विसेज एलएलपी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्‍टर परेश एन भगत नामक एक बड़े कस्‍टमर्स से संबंधित डील में एडवांस पेमेंट लेने से संबंधित है.  एमकेएफएस में कार्यरत और भगत के लिए लेन-देन संभालने वाले डीलर आशीष एस. पारेख और राजेश जोशी थे. सेबी की जांच के अनुसार, इन डीलर्स ने महत्वपूर्ण आगामी ऑर्डरों से संबंधित गैर-सार्वजनिक जानकारी शेयर करके अपने पद का दुरुपयोग किया.  कैसे पैसा बनाती थीं ये संस्‍थाएं?  यह गोपनीय जानकारी परिवार के सदस्यों और संबंधित संस्थाओं समेत कुछ लोगों के एक नेटवर्क तक लीक हो गई. सेबी ने पाया कि इस जानकारी की मदद से इन लोगों ने ट्रेडिंग की और अवैध पैसा बनाया. सेबी  ने कहा कि ये संस्‍थाएं समन्वित तरीके से ट्रेड करती थीं. आमतौर पर बॉय और सेल या सेल-सेल-बॉय पैटर्न पर काम करती थीं. वे बड़े ग्राहकों के बड़े सौदों से ठीक पहले अपने ऑर्डर देती थीं और थोक ऑर्डरों के कारण होने वाले प्राइस में उतार-चढ़ाव से लाभ कमाती थीं.  धोखाधड़ी का काम  SEBI के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश सी. वर्शनी ने अपने आदेश में क‍हा कि नोटिस प्राप्तकर्ताओं ने ऐसी जानकारी का उपयोग किया जो आम जनता के पास उपलब्ध नहीं थी, और इसका लाभ उठाकर उन्होंने अवैध रूप से पैसा कमाया. यह काम धोखाधड़ी का है. नियामक ने SEBI अधिनियम की धारा 15HA के तहत कठोर जुर्माना लगाया है.  कितना का लगा जुर्माना आशीष एस पारेख और राजेश जोशी नामक प्राथमिक डीलरों पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. नागेंद्र एस. दुबे और चिराग अतुल पिथड़िया पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिन्होंने बिचौलियों और डीलरों के रूप में काम करते हुए अग्रिम लेन-देन को आसान बनाया. 5 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का जुर्माना, दीपा आशीष पारेख, कश्मीरा जोशी और इस योजना के लिए उपयोग किए गए विभिन्न हफ़ाइल परिवार खातों समेत आठ अन्य संस्थाओं पर भी लगाया गया है.  ब्‍याज के साथ पैसा वापस करने का भी आदेश प्रतिबंध और जुर्माने के अलावा, संस्थाओं को अवैध रूप से कमाए गए पैसे 1,07,61,609 रुपये की राशि, साथ ही लाभ अर्जित होने के समय से गणना किए गए 12% ब्याज को वापस करने का आदेश दिया गया है. नियामक ने इन बकाया राशियों के निपटान के लिए पिछले अंतरिम आदेश के तहत एस्क्रो खातों में पहले से ही जब्त किए गए लगभग 1.25 करोड़ रुपये के उपयोग की अनुमति दी है.  5 साल के लिए शेयर बाजार से बैन इस आदेश के तहत आशीष पारेख और नागेंद्र दुबे समेत दस संस्थाओं को 26 दिसंबर, 2022 के अंतरिम आदेश की तारीख से शुरू होकर पांच साल के लिए बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. दो अन्य कश्मीरा जोशी और राजेश जोशी पर इस अंतिम आदेश की तारीख से पांच साल का नया प्रतिबंध लगाया गया है. सुषमा नागेंद्र दुबे के खिलाफ कार्यवाही उनकी मृत्यु के बाद समाप्त कर दी गई, हालांकि धन वापसी की देनदारी उनके कानूनी वारिसों को भेजा गया है. 

नई Volvo EX60 21 जनवरी को होगी लॉन्च, इंटीरियर डिजाइन का हुआ पर्दाफाश

मुंबई  लग्जरी कार निर्माता कंपनी Volvo आगामी 21 जनवरी, 2026 को दुनिया भर में अपनी Volvo EX60 को लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, लेकिन इससे पहले स्वीडिश कार निर्माता कंपनी इसके कुछ टीजर भी जारी कर रही है, और फ्रेश टीजर इमेज में इसके इंटीयर क जिनसे इसकी कुछ झलक सामने आ रही हैं. बता दें कि नई Volvo EX60 पॉपुलर Volvo XC60 SUV का इलेक्ट्रिक वर्जन है, और यह कंपनी का पहला मॉडल है, जिसे EVs के लिए बनाए गए अपने नए प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है. इसकी लॉन्च के साथ, Volvo कॉम्पैक्ट EX30 और फ्लैगशिप EX90 के बीच की कमी को पूरा करेगी. नई Volvo EX60 का इंटीरियर नए लेटेस्ट टीज़र में कार के इंटीरियर की एक झलक दिखाई गई है, जिसमें एक बड़ी, फ्लोटिंग टैबलेट इंफोटेनमेंट टचस्क्रीन देखी जा सकती है, जो डैशबोर्ड के बीच में लगी है. डिस्प्ले के नीचे एक फिजिकल वॉल्यूम नॉब दिया गया है, लेकिन हमेशा की तरह Volvo के डिज़ाइन में फिजिकल बटनों का इस्तेमाल कम किया गया है. इसके अलावा, ड्राइवर को टच-कैपेसिटिव कंट्रोल वाला मल्टी-फंक्शन स्टीयरिंग व्हील और स्टीयरिंग कॉलम पर सीधे लगा एक पतला डिस्प्ले भी दिया जा सकता है, जो पारंपरिक डिजिटल क्लस्टर की जगह लेगा. कंपनी का उद्देश्य कार में मिलने वाले ज़्यादातर फिजिकल कंट्रोल्स को वॉयस कमांड से बदलना है, और इसी वजह से आने वाली इस मिड-साइज़ SUV में AI-पावर्ड टेक्नोलॉजी दी जाएगी. नई EX60 में Google के Gemini AI असिस्टेंट को इंटीग्रेट किया जाएगा, जिससे यूज़र्स SUV से बातचीत कर पाएंगे. Gemini की मदद से, कंपनी का मकसद 'सड़क पर ज़रूरी हर चीज़ के लिए हैंड्स-फ्री कंट्रोल' देना है. नई Volvo EX60 का डिजाइन कार के डिजाइन की बात करें तो पहले सामने आए टीज़र तस्वीरों से डिजाइन के बारे में काफी कुछ जानकारी मिलती है. नई EX60 में ICE-पावर्ड XC60 जैसा ही ओवरऑल सिल्हूट दिया जाएगा, जिसमें थॉर-हैमर LED वाली लंबी फ्रंट-एंड डिज़ाइन होगी. इसका जनरल डिज़ाइन हाल ही में लॉन्च हुई Volvo EX30 जैसा ही होने वाला है, जिसमें बोल्ड, मिनिमलिस्ट लुक होगा, साथ ही क्लोज्ड-ऑफ फ्रंट ग्रिल, बोनट लूवर्स और उभरे हुए फेंडर्स होंगे. Volvo EX60 की बैटरी और चार्जिंग Volvo EX60 को ऑप्टिमल कंडीशन में 400kW DC फास्ट चार्जर से कनेक्ट करके 10 मिनट में लगभग 340 km की रेंज तक चार्ज किया जा सकता है. Volvo इस हाई-परफॉर्मेंस हार्डवेयर को लंबे समय तक सपोर्ट करने के लिए इसकी बैटरी पर 10 साल की वारंटी देगी. खास बात यह है कि कंपनी ने ब्रीद बैटरी टेक्नोलॉजीज के साथ पार्टनरशिप में थर्मल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर भी डेवलप किया है. जानकारी के अनुसार, Volvo EX60, स्केलेबल प्रोडक्ट आर्किटेक्चर 3 (SPA3) का ग्लोबल डेब्यू है, जो कंपनी द्वारा खास तौर पर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन के लिए डिज़ाइन किया गया एक प्लेटफॉर्म है. पुराने आर्किटेक्चर में इंटरनल कम्बशन इंजन को एडजस्ट करना पड़ता था, लेकिन SPA3 सेल-टू-बॉडी टेक्नोलॉजी के साथ आता है, जिसमें बैटरी पैक सीधे गाड़ी के चेसिस में इंटीग्रेट होता है. Volvo EX60 की रेंज नई Volvo EX60 का उद्देश्य एफिशिएंसी और लंबी दूरी की यात्रा के लिए एक हाई स्टैंडर्ड सेट करना है. कंपनी इसे ऑल-व्हील-ड्राइव कॉन्फ़िगरेशन में पेश करने वाली है, और Volvo को उम्मीद है कि यह SUV यूरोपियन WLTP साइकिल के तहत 810km तक की बेस्ट-इन-क्लास रेंज देने वाली है. नॉर्थ अमेरिकन मार्केट के लिए, EPA स्टैंडर्ड के अनुसार, इसी सेटअप से 400-मील की रेंज (लगभग 644km) मिलने का अनुमान है.

सोने के भाव में बदलाव! 17 जनवरी के ताजा रेट जानें, 22-24 कैरेट के भाव अपने शहरों में

इंदौर  सोने व चांदी की कीमतों में एक बार फिर बदलाव देखने को मिला है। शनिवार सुबह सोने की कीमतों में ₹380 प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) की बढ़त देखी गई है। वहीं चांदी के भाव में भी ₹3,000 प्रति किग्रा का उछाल आया है। शुक्रवार शाम (16 जनवरी 2026) को 24 कैरेट का भाव ₹1,43,550 और चांदी का भाव ₹2,92,000 (प्रति किग्रा) पर बंद हुआ था। अगर आप 17 जनवरी 2026 को सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो पहले 18, 22 और 24 कैरेट का ताजा भाव देख लीजिए। भारतीय सराफा बाजार (व्यापारियों द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार) में आज 22 कैरेट सोने के दाम ₹1,31,950, 24 कैरेट का भाव ₹1,43,930 और 18 कैरेट सोने का रेट ₹1,07,990 चल रहे हैं। चांदी ₹2,95,000 (प्रति किग्रा) दर्ज हुई। प्रमुख शहरों का चांदी (Silver Rate Today) का भाव     10 ग्राम: ₹2,950     100 ग्राम: ₹29,500     ₹2,95,000 (प्रति किग्रा): दिल्ली, मुंबई, पुणे, नागपुर, जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, कोलकाता, भोपाल और इंदौर ।     ₹3,10,000 (प्रति किग्रा): चेन्नई, मदुरै, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और केरल। (दक्षिण भारत के राज्यों के भाव में मेकिंग चार्ज, डीलर प्रीमियम/स्थानीय शुल्क, परिवहन लागत और मांग के चलते कीमतों में बढ़त बनी है।) 18 कैरेट (18K) सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम में)     मेरठ, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़: ₹1,07,990     ​इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद: ₹1,07,890     ​मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु: ₹1,07,840     ​चेन्नई, कोयंबटूर: ₹1,10,900 22 कैरेट (22K) सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम में)     ​मेरठ, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़: ₹1,31,950     ​इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद: ₹1,31,850     ​मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु: ₹1,31,800     ​चेन्नई, कोयंबटूर: ₹1,32,800 24 कैरेट (24K) सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम में)     मेरठ, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़: ₹1,43,930     ​इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद: ₹1,43,830     ​मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु: ₹1,43,780     ​चेन्नई, कोयंबटूर: ₹1,44,870 (दक्षिण भारत के कुछ शहरों में स्थानीय प्रीमियम/मेकिंग/डीलर मार्जिन के कारण अंतर) सोने-चांदी के भाव में बदलाव के प्रमुख कारण     अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर में उतार-चढ़ाव, वैश्विक मांग, भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ब्याज दरें और शेयर बाजार का प्रदर्शन सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करते हैं।     भारतीय बाजार और स्थानीय कारक, भारत जैसे देशों में आयात शुल्क और अन्य कर, घरेलू दामों पर USD-INR, आयात शुल्क, जीएसटी/टीसीएस, लोकल मेकिंग चार्ज, देश की महंगाई दर और त्योहार और शादियों का सीजन भी कीमतों पर असर डालते हैं। सोना खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान     भारत में सोने-चांदी के मानक भाव इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए जाते हैं। हालांकि शनिवार, रविवार और केंद्र सरकार द्वारा घोषित छुट्टियों के दिन नए रेट जारी नहीं होते हैं।     IBJA के रेट में GST और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होते, इसलिए अलग-अलग शहरों और ज्वेलरी शोरूम्स में अंतिम दाम अलग हो सकते हैं।     ​सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क और HUID (Hallmark Unique Identification) कोड जरूर जांचें।     हॉलमार्क के निशान में ​BIS लोगो (भारतीय मानक ब्यूरो का आधिकारिक प्रतीक), ​कैरेट/शुद्धता, HUID नंबर (एक यूनिक अल्फा-न्यूमेरिक कोड) और सेंटर मार्क ( लैब टेस्टिंग निशान) होता है। कैसे जांचे कैरेट वाइज शुद्धता?     ​24 कैरेट (99.9% शुद्ध) पर 999 लिखा होता है। यह सबसे शुद्ध है, लेकिन इससे गहने नहीं बनते क्योंकि यह बहुत मुलायम होता है।     ​22 कैरेट (91.6% शुद्ध) पर 916 लिखा होता है। गहने बनाने के लिए यह सबसे लोकप्रिय है। इसमें 8.4% तांबा या चांदी या अन्य धातु मिलाई जाती है, ताकि गहने मजबूत रहें।     ​18 कैरेट (75.0% शुद्ध) पर 750 लिखा होता है। अक्सर हीरे या कीमती पत्थरों वाले गहनों में इसका उपयोग होता है।     ​ज्यादातर दुकानदार 18, 20 और 22 कैरेट का ही सोना बेचते हैं। खरीदारी करते समय यह सुनिश्चित करें कि आप जितने कैरेट का पैसा दे रहे हैं, गहने पर वही अंक (जैसे 916 या 750) दर्ज हो।  

गोल्‍ड और सिल्‍वर ETFs के दाम पहुंचे रिकॉर्ड हाई, अब बेचें या खरीदें? जानें क्या करना सही रहेगा

नई दिल्‍ली ग्‍लोबल अनिश्चितता और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण कीमती धातुओं के दाम में उछाल रुक नहीं रही है. सोना और चांदी के दाम अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए हैं. इस बीच, सिल्‍वर और गोल्‍ड ETF में भी खरीदारी तेजी से बढ़ रही है. ज्‍यादातर निवेशकों ने तो इन मेटल में SIP तक शुरू कर दी है. दूसरी ओर, सालाना आधार पर सोने की कीमतों में 80 फीसदी से ज्‍यादा की तेजी आई है, जबकि चांदी की कीमतें 190 फीसदी बढ़ी हैं. वहीं पिछले एक साल में सिल्‍वर ETF में 188% की उछाल आई है और गोल्‍ड ईटीएफ ने 80 फीसदी से ज्‍यादा का रिटर्न दिया है.  सिल्‍वर और गोल्‍ड ETFs अपने रिकॉर्ड हाई पर बने हुए हैं. आइए जानते हैं क्‍या इसमें प्रॉफिट बुक करने का सही मौका है.    अभी निवेशकों को क्‍या करना चाहिए?  बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तेजी के बाद लॉन्‍गटर्म प्रॉफिट की उम्मीदों के लिए नए निवेश आदर्श नहीं हो सकते हैं. उनका कहना है कि लॉन्‍गटर्म निवेशक निवेशित रह सकते हैं, लेकिन अधिक समझदारी भरा तरीका यह होगा कि अतिरिक्त निवेश को कम किया जाए और पोर्टफोलियो को फिर से रिस्‍ट्रक्‍चर करें. एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि अभी निवेशकों को थोड़ी प्रॉफिट बुकिंग कर लेनी चाहिए और जब करेक्‍शन आए तो खरीदारी करनी चाहिए.   क्‍यों अभी नहीं करना चाहिए निवेश?  इसके पीछे का तर्क समझाते हुए एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी चीज की अत्यधिक मांग होने पर,  कुछ छूट जाने का डर (FOMO) बन जाता है, जिस कारण लोग हाई रेट पर भी खरीदारी कर लेते हैं. यह सबसे बड़ी गलती होती है, क्‍योंकि रिकॉर्ड हाई के बाद जब गिरावट आती है तो निवेशकों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ता है. अपने अनुभव को शेयर करते हुए सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (सीएफपी) और फाइनेंशियल रेडियंस के संस्थापक राजेश मिनोचा ने ईटीएम्यूटुअलफंड्स को बताया कि चांदी लॉन्‍गटर्म मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म के दौरान इसमें गिरावट का रिस्‍क है.  उन्‍होंने कहा कि सिल्‍वर प्राइस में करीब 200 फीसदी की उछाल के बाद अभी निवेश करना उचित नहीं होगा. हालांकि लॉन्‍ग्‍टर्म निवेशक अभी भी बाजार में बने रह सकते हैं, लेकिन अतिरिक्‍त निवेश को कम करना और एक लक्ष्‍य के साथ सीमित अमाउंट तक ही निवेश करना सही फैसला होगा.  फिस्डम के रिसर्च उपाध्यक्ष सागर शिंदे ने ET को बताया कि चांदी के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण रिस्‍क बढ़ गया है. तेज उछाल के बाद अब बड़ा लाभ कमाने वाले निवेशक इसमें शॉर्टटर्म प्रॉफिट बुकिंग कर सकते हैं. इसी तरह सोने के रिकॉर्ड हाई पर होने के कारण एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि अभी निवेशकों को स्थिरता का इंतजार करना चाहिए, फिर इसमें निवेश बढ़ाया जा सकता है. लॉन्‍गटर्म नजरिए के लिए गोल्‍ड में निवेशित रह सकते हैं, लेकिन अभी नए निवेश से बचना चाहिए.  क्‍यों इतनी तेज से भाग रही चांदी?      चांदी की कीमतों में उछाल के कई कारण सामने आए हैं, जिसमें औद्योगिक मांग सबसे बड़ी वजह है, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स से लेकर सोलर एनर्जी तक में चांदी की डिमांड तेजी से बढ़ी है. चांदी को अब सोने के विकल्प के बजाय एक वैल्‍यूवेबल औद्योगिक सामग्री के रूप में देखा जा रहा है.      दूसरा सबसे बड़ा कारण ग्‍लोबल जियो-पॉलिटिकल टेंशन और अनिश्चितताओं के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी खरीदी जा रही है. जिस कारण सिल्‍वर ईटीएफ का वेटेज बढ़ा है.      चांदी के रेट में बढ़ोतरी का तीसरा बढ़ा कारण आपूर्ति की कमी, खनन में सीमित निवेश है.   MCX पर सोने-चांदी के रेट्स  5 मार्च वायदा के लिए चांदी के दाम गुरुवार को करीब 600 रुपये चढ़कर 292152 रुपये प्रति किलो पर थे, जो इसके रिकॉर्ड हाई के काफी करीब है. 5 फरवरी वायदा के लिए गोल्‍ड के रेट करीब 70 रुपये टूटकर 143056 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था.