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2026 की शुरुआत में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, चांदी 227900 रुपये प्रति किलो, गोल्ड 137145 रुपये प्रति 10 ग्राम

इंदौर  नए साल की शुरुआत सोने-चांदी के दाम में गिरावट के साथ हुई। आज चांदी के भाव 2520 रुपये टूटकर 227900 रुपये प्रति किलो पर आ गए। सोने के भाव में महज 44 रुपये की गिरावट हुई है। जीएसटी समेत चांदी अब 234737 रुपये प्रति किलो पर आ गई है। जबकि, 24 कैरेट गोल्ड का रेट अब जीएसटी समेत 137145 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। बुधवार को चांदी बिना जीएसटी 230420 रुपये पर बंद हुई। इसी तरह सोना बिना जीएसटी 136781 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। आज बिना जीएसटी सोना 133195 रुपये पर बंद हुआ था। सोना 29 दिसंबर 2025 के ऑल टाइम हाई 138181 से 5010 रुपये सस्ता हो चुका है। जबकि, चांदी 243483 से 15538 रुपये टूटी है। यह रेट आईबीजेए द्वारा जारी किए गए हैं। आईबीजेए दिन में दो बार रेट जारी करता है। एक बार दोपहर 12 बजे के करीब दूसरा 5 बजे के आसपास। Gold-Silver Price Today, 1 January 2026: नए साल की शुरुआत में सोना-चांदी के लेटेस्ट भाव   शुद्धता बुधवार शाम का रेट गुरुवार सुबह का रेट कितना सस्ता? सोना (प्रति 10 ग्राम) 999 (24 कैरेट) 133195 133151 ₹44 सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 995 (23 कैरेट) 132662 132618 ₹44 सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 916 (22 कैरेट) 122007 121966 ₹41 सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 750 (18 कैरेट) 99896 99863 ₹33 सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 585 (14 कैरेट) 77919 77893 ₹26 सस्ता चांदी (प्रति 1 किलो) 999 230420 227900 ₹2520 सस्ती कैरेट के हिसाब से गोल्ड के भाव आज 23 कैरेट गोल्ड भी 44 रुपये टूटकर 132618 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर खुला। जीएसटी संग इसकी कीमत अब 136596 रुपये हो गई है। अभी इसमें मेकिंग चार्ज नहीं जुड़ा है। 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 41 रुपये गिरकर 121966 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। जीएसटी संग यह 125624 रुपये है। 18 कैरेट गोल्ड 33 रुपये की गिरावट के साथ 99863 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है और जीएसटी के साथ इसकी कीमत 102858 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। 14 कैरेट गोल्ड का रेट भी 26 रुपये टूटा है। आज यह 77893 रुपये पर खुला और जीएसटी समेत यह 80229 रुपये पर है। सर्राफा कीमत इससे पहले कमजोर वैश्विक रुख और मजबूत डॉलर को देखते हुए बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमत में गिरावट आई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9% शुद्धता वाले सोने की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट जारी रही और यह 1,300 रुपये टूटकर 1,37,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा। चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई और छह दिन की रिकॉर्ड तेजी का सिलसिला टूट गया। स्थानीय सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 2,000 रुपये गिरकर 2,39,000 रुपये प्रति किलोग्राम रही।  

2026 में शेयर बाजार ने दिखाया जोरदार उछाल, सेंसेक्स 223.54 अंक बढ़ा

मुंबई  साल 2026 (New Year) की शुरुआत हो चुकी है और नए साल को भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) भी सलाम किया है. Sensex-Nifty दोनों इंडेक्स 1 जनवरी 2026 को तेज रफ्तार के साथ ग्रीन जोन में ओपन हुए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स जहां ओपनिंग के साथ ही 200 अंक से ज्यादा उछल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 भी अपने पिछले बंद की तुलना में तेज रफ्तार के साथ ग्रीन जोन में खुला. इस बीच कई शेयर खुलते ही 10 से 15 फीसदी तक उछल गए.  सेंसेक्स-निफ्टी की धांसू शुरुआत 2026 के पहले दिन शेयर मार्केट (Stock Market) पॉजिटिव नोट के साथ ओपन हुआ. बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 85,220 की तुलना में ओपन होने के साथ ही 223.54 अंक की तेजी लेकर 85,444.14 के स्तर पर जा पहुंचा, तो वहीं एनएसई का निफ्टी अपने पिछले बंद 26,139 के मुकाबले ग्रीन जोन में खुलने के बाद 65.75 अंक चढ़कर 26,195.35 पर ट्रेड करता हुआ नजर आया.  1284 कंपनियों के शेयरों की तेजी ओपनिंग शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार में मौजूद करीब 1284 कंपनियों के शेयरों ने अपने पिछले बंद के मुकाबले जोरदार तेजी लेकर कारोबार की शुरुआत की थी. इसके अलावा 728 कंपनियों के शेयर ऐसे थे, जो पिछले बंद की तुलना में गिरावट के साथ लाल निशान पर ओपन हुए थे. इसके अलावा 151 कंपनियों के स्टॉक्स ने फ्लैट ओपनिंग की, यानी इनकी कीमतों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. Tata Steel, Jio Financial, L&T, Reliance Industries, Bajaj Finserv सबसे तेज भागने वाले शेयरों में शामिल थे.  भारतीय शेयर बाजारों ने मजबूत आशावाद के साथ ट्रेडिंग वर्ष की शुरुआत की, जिसमें प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों ने शुरुआती कारोबार में उल्लेखनीय लाभ दर्ज किया। बेंचमार्क सेंसेक्स में 223.54 अंकों की महत्वपूर्ण उछाल देखी गई, जो प्रभावशाली 85,444.14 पर पहुंच गया। साथ ही, निफ्टी सूचकांक ने भी 65.75 अंक बढ़कर 26,195.35 पर कारोबार करते हुए ठोस लाभ दर्ज किया। 2024 ट्रेडिंग कैलेंडर के पहले दिन इस सकारात्मक शुरुआत ने निवेशकों के आत्मविश्वास को बढ़ाया है और वर्ष की वित्तीय गतिविधियों के लिए एक उत्साहजनक माहौल तैयार किया है। बाजार की प्रतिक्रिया व्यापार के शुरुआती घंटों में विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत खरीदारी रुचि देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ऊपर की ओर बढ़ी हुई चाल, नए ट्रेडिंग वर्ष में प्रवेश करते समय बाजार सहभागियों के बीच प्रचलित बुलिश सेंटिमेंट (तेजी की भावना) का सुझाव देती है। यह शुरुआती गति अक्सर साल के अंत के नतीजों के बाद नए सिरे से आशावाद और आगामी आर्थिक घटनाओं की प्रत्याशा से प्रेरित होती है। विश्लेषक इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखते हैं, जो बाद के ट्रेडिंग सत्रों में बाजार के रुझानों को प्रभावित कर सकता है और महीने के लिए एक रचनात्मक दिशा निर्धारित कर सकता है। वित्तीय निहितार्थ बेंचमार्क सूचकांकों में तत्काल वृद्धि समग्र मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) में एक बड़ी वृद्धि को दर्शाती है। इक्विटी रखने वाले निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो मूल्यों में वृद्धि का अनुभव होने की संभावना है, जो बाजार की सकारात्मक भावना को दर्शाता है। यह ऊपर की ओर प्रदर्शन निवेशक के आत्मविश्वास को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकता है, जिससे पूरे वर्ष स्टॉक मार्केट में भागीदारी और पर्याप्त निवेश प्रवाह बढ़ सकता है। यदि यह प्रवृत्ति बनी रहती है तो कंपनियों को पूंजी जुटाने की गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ भी मिल सकती हैं।

वोडा-आइडिया को कैबिनेट की बड़ी राहत, AGR बकाया पर ‘फ्रीज’ लगाने का निर्णय, 2032 से शुरू होगा भुगतान

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने कर्ज के बोझ से दबी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया को एक बड़ी राहत दी है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को एक विशेष राहत पैकेज को मंजूरी दी, इसके तहत कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाये को 87,695 करोड़ रुपये पर फ्रीज कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले का टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना और वोडाफोन आइडिया में सरकार की 49% हिस्सेदारी के मूल्य की रक्षा करना है। भुगतान का नया शेड्यूल किया गया जारी कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए इस पैकेज के अनुसार, वोडाफोन आइडिया को इस फ्रीज किए गए बकाये का भुगतान तत्काल नहीं करना होगा। सूत्रों ने जानकारी दी है कि ₹87,695 करोड़ के इस बकाये का भुगतान वित्त वर्ष 2031-32 (FY32) से वित्त वर्ष 2040-41 (FY41) के बीच किया जाना है। AGR बकाया राशि को 31 दिसंबर, 2025 की स्थिति के अनुसार फ्रीज किया गया है। दूरसंचार विभाग (DoT) इस बकाये की राशि का फिर से आकलन करेगा ताकि सटीकता सुनिश्चित की जा सके। राहत के बावजूद, कंपनी को कुछ भुगतानों के लिए मौजूदा समयसीमा का पालन करना होगा। सूत्रों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 से संबंधित AGR बकाये के भुगतान की शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह राशि वोडाफोन आइडिया को वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच पूर्व-निर्धारित किस्तों में चुकानी होगी। सरकार की हिस्सेदारी और बाजार में प्रतिस्पर्धा बचाए रखने की कवायद सरकार फिलहाल वोडाफोन आइडिया में सबसे बड़ी शेयरधारक है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 49% है। सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट के इन कदमों का उद्देश्य न केवल सरकारी निवेश को सुरक्षित करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि देश का टेलीकॉम बाजार 'डुओपॉली' (केवल दो कंपनियों का वर्चस्व) बनने से बचा रहे। राहत पैकेज से कंपनी को अपनी सेवाओं के विस्तार, विशेषकर 5G रोलआउट और नेटवर्क अपग्रेडेशन के लिए जरूरी पूंजी जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। कैबिनेट का यह फैसला ऐसे समय पर सामने आया है जब वोडाफोन- आइडिया लंबे समय से वित्तीय संकट और ग्राहकों की घटती संख्या से जूझ रही है। अक्तूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से एजीआर बकाये के पुनर्मूल्यांकन को सरकार के नीतिगत दायरे में बताया गया था। उसके बाद से ही सरकार की ओर से राहत देने की खबर सामने आने की उम्मीद थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बकाये के भुगतान में पांच साल से अधिक की अतिरिक्त मोहलत मिलने से कंपनी के कैश फ्लो में सुधार होगा। हालांकि, कंपनी की लंबी अवधि की स्थिरता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वह आने वाले महीनों में नए निवेशकों से कितनी जल्दी फंड जुटा पाती है और अपने औसत प्रति ग्राहक राजस्व यानी एआरपीयू में कितना इजाफा कर पाती है। कैबिनेट ने ₹20,668 करोड़ के सड़क परियोजनाओं को दी मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से दो प्रमुख सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इन परियोजनाओं पर कुल 20,668 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे महाराष्ट्र और ओडिशा में कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। कैबिनेट का सबसे बड़ा फैसला महाराष्ट्र के लिए रहा, जहां 374 किलोमीटर लंबे नासिक-सोलापुर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस 6-लेन कॉरिडोर के निर्माण पर 19,142 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह कॉरिडोर न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि नासिक और सोलापुर जैसे औद्योगिक और कृषि केंद्रों के बीच लॉजिस्टिक्स दक्षता को भी बढ़ाएगा। ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट होने के कारण यह पूरी तरह से नए एलाइनमेंट पर विकसित किया जाएगा, जिससे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होगा। इसके अलावे, कैबिनेट ने ओडिशा में सड़क नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए 1,526 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-326 (NH-326) के 206 किलोमीटर लंबे हिस्से का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। यह परियोजना राज्य के आंतरिक क्षेत्रों में माल ढुलाई को सुगम बनाएगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर करेगी।  

अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत में रोल्स-रॉयस का तीसरा घर, लग्ज़री ब्रांड करेगा मेगा इन्वेस्टमेंट

 नई दिल्ली भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. अब भारत 2030 तक जर्मनी को भी पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर है. इंडिया अब केवल एक उभरता हुआ बाजार नहीं, बल्कि ग्लेाबल डिफेंस और एडवांस इंजीनियरिंग का अगला बड़ा हब भी बनता जा रहा है. इसी बदलते भारत को देखते हुए ब्रिटेन की दिग्गज एयरो-इंजन निर्माता कंपनी रोल्स-रॉयस (Rolls Royce) ने एक बड़ा संकेत दिया है. कंपनी भारत को ब्रिटेन के बाहर अपना तीसरा “होम मार्केट” बनाने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रही है, जो देश की तकनीकी और सामरिक ताकत के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है. अब तक अपने लग्ज़री कारों से भारतीयों का दिल जीतने वाली रोल्स रॉयस अब डिफेंस और एयरोस्पेस में भी बड़ी योजनाओं के साथ उतर रही है.  रोल्स-रॉयस का तीसरा घर रोल्स-रॉयस ने हाल ही में कहा कि, वह भारत को ब्रिटेन के बाहर अपना तीसरा “होम मार्केट” बनाने की संभावनाओं पर काम कर रही है. कंपनी का मानना है कि भारत में जेट इंजन, नेवल प्रोपल्शन, लैंड सिस्टम्स और एडवांस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें पूरी तरह खोलने का समय अब आ गया है. पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में रोल्स-रॉयस इंडिया के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट शशि मुकुंदन ने कहा कि, "कंपनी भारत में बड़े निवेश की योजना बना रही है. उन्होंने साफ किया कि एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए प्रोग्राम के तहत बनने वाले लड़ाकू विमानों के लिए नेक्स्ट जेनरेशन एयरो इंजन का डेवलपमेंट भारत में करना कंपनी की प्राथमिकता है." अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत पर फोकस फिलहाल रोल्स-रॉयस ब्रिटेन के अलावा अमेरिका और जर्मनी को अपना “होम मार्केट” मानती है, जहां कंपनी की मजबूत मौजूदगी और मैन्युफैक्चरिंग फेसिलिटी है. अब भारत को भी उसी स्तर पर लाने की तैयारी इस बात का संकेत है कि कंपनी भारत में लांग टर्म प्लांस के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है.  शशि मुकुंदन ने यह भी बताया कि, "रोल्स-रॉयस भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में अहम भूमिका निभा सकती है. यह तकनीक भविष्य की नौसैनिक जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है." एयरो इंजन से नेवल इंजन तक का रास्ता उन्होंने बताया कि, "अगर एएमसीए के लिए जेट इंजन का डेवलपमेंट रोल्स-रॉयस के साथ होता है, तो इससे भारत को नेवल प्रोपल्शन इंजन बनाने में भी मदद मिल सकती है." बताते चलें कि, रोल्स-रॉयस दुनिया की उन गिनी-चुनी कंपनियों में शामिल है, जिनके पास एयरो इंजन को “मैरिनाइज” करने की क्षमता है. भारत में बड़े निवेश की तैयारी मुकुंदन ने निवेश के आंकड़े साझा किए बिना कहा कि कंपनी भारत में अपने एक्सपेंशन के लिए बड़ा निवेश करने पर विचार कर रही है. भारत में स्केल, नीतिगत स्पष्टता और रक्षा व इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को लेकर मजबूत पॉलिटिकल विलपॉवर है, जो तेजी से परिपक्व हो रही है." हालांकि उन्होंने इस बात की जानकारी नहीं दी है कि, रोल्स रॉयस अपने इस प्रोजेक्ट को लेकर कितना निवेश करने पर सोच रही है. उन्होंने कहा कि, "अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो यह निवेश इतना बड़ा होगा कि लोग इसे जरूर महसूस करेंगे. असली मायने निवेश की राशि से ज्यादा उसके प्रभाव के हैं, जो उन सभी क्षेत्रों में वैल्यू चेन और इकोसिस्टम के डेवलपमेंट को गति देगा, जहां रोल्स-रॉयस काम करती है." रोल्स-रॉयस भारत में दो डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग के साथ MoU को अंतिम रूप देने जा रही है. इनमें से एक समझौता अर्जुन टैंक के लिए इंजन निर्माण से जुड़ा होगा, जबकि दूसरा भविष्य के रेडी कॉम्बैट व्हीकल्स के इंजनों से संबंधित होगा. गौरतलब है कि अक्टूबर में रोल्स-रॉयस के सीईओ तुफ़ान एर्गिनबिलगिक ने एक बिजनेस राउंडटेबल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा था कि आने वाले समय में भारत रोल्स-रॉयस के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है. यह बयान अब कंपनी की रणनीति में साफ झलकता नजर आ रहा है. हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब और रोजगार की संभावनाएं Rolls-Royce अब भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, रिसर्च और सप्लाई चेन का अहम केंद्र बनाने जा रहा है. इससे न सिर्फ एयरोस्पेस, डिफेंस और पावर सिस्टम्स सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को भी नई गति मिलेगी. साथ ही, मॉडर्न जेट इंजन और एडवांस टेक्नोलॉजी का भारत में विकास देश को ग्लोबल एविएशन और डिफेंस इकोसिस्टम में और मजबूत स्थिति दिलाएगा, जिससे भारत भविष्य की हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरता नजर आएगा. रोल्स-रॉयस का इतिहास रोल्स-रॉयस का इतिहास इंजीनियरिंग, इनोवशन और विश्वसनीयता का प्रतीक रहा है. इसकी स्थापना 1906 में चार्ल्स रोल्स और हेनरी रॉयस ने की थी. इन्हीं दोनों के सरनेम से कंपनी का नाम 'रोल्स-रॉयस' पड़ा है. चार्ल्स और हेनरी ने पहले लग्ज़री कारों के जरिए कंपनी को पहचान दिलाई, लेकिन जल्द ही रोल्स-रॉयस ने एयरोस्पेस क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई.  प्रथम विश्व युद्ध के दौरान विमान इंजनों के निर्माण से शुरुआत करते हुए कंपनी ने जेट इंजन टेक्नोलॉजी में क्रांति ला दी. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद रोल्स-रॉयस ने जेट इंजन डेवलप किए, जिनका इस्तेमाल सैन्य और कमर्शियल विमानों में हुआ और जिसने आधुनिक एविएशन की दिशा बदल दी. आज रोल्स-रॉयस दुनिया की लीडिंग एयरो-इंजन निर्माता कंपनियों में शामिल है और इसके जेट इंजन हाई परफॉर्मेंस, एडवांस टेक्नोलॉजी के लिए जाने जाते हैं.

HPCL के साथ मिलकर VinFast की V-Green बनाएगी इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन

मुंबई  वियतनामी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी VinFast ने भारतीय बाजार में अपने ऑपरेशन्स को बढ़ाने के लिए अपनी योजनाओं के तहत, पब्लिक EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए एक बड़े टाई-अप की घोषणा की है. VinFast की V-Green और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने भारत में HPCL के चुनिंदा फ्यूल स्टेशनों पर मिलकर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए पार्टनरशिप की घोषणा की है. इस कोलैबोरेशन के तहत, V-Green कई बाजारों में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने के लिए HPCL के रिटेल फ्यूल नेटवर्क का इस्तेमाल करेगी. बता दें कि HPCL मौजूदा समय में देश भर में 24,400 से ज़्यादा फ्यूल स्टेशन संचालित कर रही है और इसके HP e-Charge ब्रांड के तहत पहले से ही 5,300 से ज़्यादा EV चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए जा चुके हैं, साथ ही देश भर में 150 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन भी स्थापित किए गए हैं. वहीं, V-Green अपने घरेलू बाज़ार, वियतनाम से एक्सपीरिएंस लेकर आई है, जहां उसने 1.50 लाख से ज़्यादा चार्जिंग पोर्ट लगाए हैं. यह कंपनी मार्च 2024 में VinFast के फाउंडर फाम न्हाट वुओंग ने शुरू की थी, जिनकी इस चार्जिंग वेंचर में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है. V-Green को VinFast से एक अलग कंपनी के तौर पर अलग किया गया, ताकि यह सिर्फ़ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट पर फोकस कर सके, जबकि VinFast ग्लोबल मार्केट में अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल बिज़नेस को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है. बता दें कि कुछ महीने पहले, कार बनाने वाली कंपनी VinFast ने भारतीय बाज़ार में अपने पहले इलेक्ट्रिक वाहनों, VF6 और VF7 को लॉन्च किया था.

चांदी की कीमतों में अचानक मंदी, New Rates के अनुसार हुई भारी गिरावट

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतें (Gold-Silver Rates) लगातार हैरान कर रही हैं. खासतौर पर चांदी के भाव में इस हफ्ते की शुरुआत से ही उथल-पुथल देखने को मिल रही है. सोमवार को ये अचानक 21000 रुपये टूटी थी, तो मंगलवार को फिर तूफानी रफ्तार से भागती हुई नजर आई. साल के आखिरी कारोबारी दिन बुधवार 31 दिसंबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर खुलने के साथ ही चांदी का वायदा भाव 18000 रुपये तक टूट गया और चांदी सस्ती (Silver Price Crash) हो गई.   खुलते ही क्रैश हो गई Silver साल के आखिरी दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में (Comex Silver Price) बुरी तरह फिसला, तो ऐसा ही हाल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर भी देखने को मिली MCX Gold Rate अपने बीते कारोबारी दिन के बंद वायदा भाव 2,51,012 रुपये प्रति किलो की तुलना में बुरी तरह टूटकर ओपन हुआ. ये शुरुआती कारोबार में 18000 रुपये से ज्यादा करीब 6.90% सस्ती होकर 2,32,228 रुपये प्रति किलो पर आ गई. हालांकि, जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा ये कीमती धातु रिकवरी करती हुई भी नजर आई, लेकिन खबर लिखे जाने तक Silver Price 10,812 रुपये (4.31%) की गिरावट के साथ 2,40,200 रुपये पर कारोबार कर रहा था.  तीन दिनों चांदी में तगड़ा उतार-चढ़ाव 2025 के आखिरी हफ्ते के महज तीन कारोबारी दिनों में ही चांदी के भाव (Silver Rates) में तगड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को जैसे ही एमसीएक्स पर वायदा कारोबार की शुरुआत हुई थी, 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का दाम तूफानी तेजी पकड़ते हुए 2.54 लाख के पार पहुंच गया था, जो इसका नया लाइफ टाइम हाई लेवल है. लेकिन आधे दिन का कारोबार होने के बाद अचानक ये भर-भराकर टूटने लगी और पलक झपकते ही 21,511 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई.  सोमवार को चांदी की कीमत में आई तेज गिरावट, मंगलवार को देखने को नहीं मिली. दूसरे कारोबारी दिन Silver Price फिर रॉकेट की रफ्तार से चढ़ता हुआ नजर आया और ये 17000 रुपये से ज्यादा महंगी हो गई. लेकिन तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को फिर बाजी पलटी और ये कीमती धातु झटके में 18000 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई.  रिकॉर्ड हाई से कितनी सस्ती है चांदी?  अगर बात चांदी के रिकॉर्ड हाई लेवल से आई गिरावट के बारे में करें, तो सोमवार को MCX Silver Price 2,54,174 रुपये प्रति किलोग्राम के हाई लेवल पर पहुंचा था और बुधवार को शुरुआती कारोबार में ये 2,32,228 रुपये तक टूट गया था. ऐसे में लाइफ टाइम हाई से 1 किलो चांदी का वायदा भाव (1 Kg Silver Rate) फिलहाल 21,946 रुपये प्रति किलो तक कम चल रहा है. Gold का भाव भी झटके में टूटा सोना भी चांदी की चाल से चाल मिलाकर चलता हुआ नजर आ रहा है. Gold Rate अपने रिकॉर्ड हाई लेवल 1,40,655 रुपये प्रति 10 ग्राम की तुलना में काफी कम हो गया है. बुधवार को MCX पर 5 फरवरी की एक्सपायरी वाले 24 कैरेट सोने का वायदा भाव (10 Gram 24 Karat Gold Rate) गिरावट के साथ 1,35,756 रुपये पर कारोबार कर रहा था. ऐसे में अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से सोना अब 4,899 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता है.  (नोट- Gold-Silver किसी भी धातु को खरीदने या बेचने से पहले अपने सलाहकार की मदद लेना जरूरी है.aajtak.in सिर्फ जानकारी दे रहा है, इसे निवेश की सलाह कतई न समझें.)

31 दिसंबर को जोमैटो और स्विगी के डिलीवरी वर्कर्स की हड़ताल, इन कंपनियों को होगा कितना नुकसान?

नई दिल्ली  आज यानी 31 दिसंबर को अगर स्विगी (Swiggy), जोमैटो (Zomato), ब्लिंकइट (Blinkit) और जेप्टो (Zepto) के डिलीवरी करने वाले गिग वर्कर हड़ताल करने की प्लानिंग कर रहे हैं. अगर ये सभी हड़ताल पर चले गए, तो इन कंपनियों को एक ही दिन में करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है. ये कंपनियां ऑनलाइन खाना और सामान पहुंचाने का काम करती हैं, और नए साल की पार्टी के दिन ऑर्डर्स के नंबर बहुत अधिक होते हैं. यदि हड़ताल हुई से डिलीवरी रुक जाएगी, तो दुकान का शटर डाउन जैसे हालात बन जाएंगे. हमने इन कंपनियों के पुराने बिक्री के आंकड़ों से हिसाब लगाया है कि कितना नुकसान होगा? क्यों हड़ताल करना चाहते हैं डिलीवरी बॉयज? डिलीवरी बॉयज लंबे समय से शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें कम पैसे मिलते हैं. काम ज्यादा है और सिक्योरिटी है ही नहीं. अगर वे 31 दिसंबर को काम बंद कर दें, तो इन कंपनियों के ऐप पर ऑर्डर तो धड़ाधड़ आएंगे, लेकिन सामान पहुंचाने वाला कोई नहीं होगा. नतीजतन, ग्राहक नाराज, और कंपनियों की कमाई पर पानी फिर जाएगा. हमने ये आंकड़े कंपनियों की 2024-25 की सालाना रिपोर्ट से लिए गए हैं और रोजाना की एवरेज सेल निकाली है. ध्यान दें, ये सिर्फ अनुमान हैं, असली नुकसान नए साल की वजह से और ज्यादा हो सकता है, क्योंकि उस दिन पार्टी के लिए ऑर्डर दोगुने-तिगुने तक हो सकते हैं. स्विगी नुकसान में रहकर भी रहेगी फायदे में! स्विगी देश की बड़ी फूड डिलीवरी कंपनी है. इसकी सालाना कमाई करीब 15,227 करोड़ रुपये है. मतलब, औसतन हर दिन 41.7 करोड़ रुपये की बिक्री होती है. कंपनी अभी घाटे में चल रही है. हर 100 रुपये की कमाई पर 20.5 रुपये का घाटा झेल रही है. लेकिन हड़ताल से उस दिन की पूरी बिक्री रुक जाएगी, तो नुकसान 41.7 करोड़ रुपये का होगा. अच्छी बात ये कि कुछ खर्च बच जाएगा, जैसे डिलीवरी का पैसा, पैकेजिंग इत्यादी. तो स्विगी का घाटा थोड़ा कम हो सकता है. कंपनी करीब 8.5 करोड़ रुपये की बचत कर लेगी. फिर भी, कुल मिलाकर कंपनी को बड़ा झटका लगेगा, क्योंकि ग्राहकों को अच्छा एक्सपीरियंस नहीं होगा. जोमैटो का हाल क्या? जोमैटो भी फूड डिलीवरी में बड़ा नाम है. इसकी सालाना कमाई लगभग 15,037 करोड़ रुपये है, यानी रोजाना की एवरेज 41.2 करोड़ रुपये. कंपनी अब फायदे में है. हर 100 रुपये पर 3.5 रुपये का मुनाफा कमा रही है. हड़ताल से एक दिन की बिक्री खोने पर 41.2 करोड़ का नुकसान होगा, और मुनाफे में 1.4 करोड़ की कमी आएगी. जोमैटो की ब्लिंकइट अलग से चलती है, लेकिन फूड वाला हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित होगा. ब्लिंकइट पर असर ब्लिंकइट जोमैटो की ही कंपनी है, जो किराने और सामान की क्विक डिलीवरी करती है. सालाना कमाई 5,206 करोड़ रुपये है, मतलब रोज 14.3 करोड़. ये कंपनी भी घाटे में है. प्रति 100 रुपये पर यह 0.6 रुपये का घाटा उठा रही है. हड़ताल से 14.3 करोड़ की बिक्री रुकेगी, लेकिन कुछ खर्च बचने से घाटा 10 लाख कम हो सकता है. जैसा कि पहले भी बता चुके हैं कि नए वर्ष से ऐन पहले सेल ज्यादा होने की उम्मीद है. जेप्टो को सबसे बड़ा घाटा? जेप्टो भी किराने की क्विक डिलीवरी करती है और बहुत तेजी से फैल रही है. सालाना कमाई 11,110 करोड़, यानी रोज 30.4 करोड़ रुपये का रेवेन्यू. लेकिन इसका घाटा बड़ा है. यह हर 100 रुपये पर 30.3 रुपये का नुकसान उठा रही है. हड़ताल से 30.4 करोड़ की बिक्री खोएगी, लेकिन खर्च बचने से घाटा 9.2 करोड़ कम हो सकता है. जेप्टो नई कंपनी है, तो ऐसे में ग्राहक दूसरी जगह जा सकते हैं. इन चारों कंपनियों को मिलाकर एक दिन में करीब 127.6 करोड़ रुपये की बिक्री रुक सकती है. लेकिन घाटे वाली कंपनियों में कुछ पैसे बचेंगे, तो असली नुकसान थोड़ा कम होगा. फिर भी, नए साल की पूर्व संध्या पर ये बड़ा झटका होगा, क्योंकि ग्राहक परेशान होंगे और कंपनियां तनाव में.

लगातार दूसरे दिन फिसले सोना-चांदी, निवेशकों को ऊँचे भाव से मिली राहत

नई दिल्ली सोने और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरी दिन गिरावट देखने को मिली है। 24 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,35,000 रुपए प्रति 10 ग्राम से नीचे लुढ़क गया है, साथ ही चांदी की कीमत भी 2.33 लाख रुपए प्रति किलो से नीचे पहुंच गई है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 2,182 रुपए कम होकर 1,34,599 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,36,781 रुपए प्रति 10 ग्राम था। 22 कैरेट सोने की कीमत 1,23,293 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,25,291 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम 1,02,586 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,00,949 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी कमी देखी गई है। चांदी का दाम 3,111 रुपए कम होकर 2,32,329 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,35,440 रुपए प्रति किलो था। हाजिर के उलट वायदा बाजार में सोने और चांदी में तेजी देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के 5 फरवरी 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 1.35 प्रतिशत बढ़कर 1,36,767 रुपए हो गया है। चांदी 5 मार्च 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 6 प्रतिशत बढ़कर 2,37,894 रुपए हो गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में तेजी हावी रही। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोने का दाम 1.61 प्रतिशत बढ़कर 4,412 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 7.04 प्रतिशत बढ़कर 75.44 डॉलर प्रति औंस पर है। एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि सोना एमसीएक्स पर करीब 1,200 रुपए की तेजी के साथ बंद हुआ। कॉमेक्स में रिकवरी से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला। बाजार में निवेशकों की निगाहें अमेरिकी फेड के मिनट्स पर हैं। आने वाले समय में सोना 1,32,000 रुपए से 1,38,500 रुपए की रेंज में रह सकता है। 

iPhone 16 ने भारत में तोड़ा रिकॉर्ड, 65 लाख यूनिट्स की बिक्री के साथ सबसे ज्यादा बिकने वाला स्मार्टफोन बना

मुंबई   अमेरिकी टेक दिग्गज एप्पल इंक. ने भारत में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आसान क्रेडिट, कैशबैक जैसे विभिन्न ऑफर्स की बदौलत आईफोन 16 अब भारत का सबसे अधिक बिकने वाला स्मार्टफोन बन गया है, जिसने चीन की वीवो के सबसे लोकप्रिय बजट मॉडल को भी पीछे छोड़ दिया है। काउंटरप्वाइंट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल ने 2025 के पहले 11 महीनों में आईफोन 16 के करीब 65 लाख यूनिट्स बेचे और इसके साथ ही यह भारत का सबसे ज्यादा बिकने वाला स्मार्टफोन बन गया। एप्पल ने इस अवधि में एंड्रॉएड फोन बनाने वाली कई बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया। बीबीके इलेक्ट्रॉनिक्स समर्थित वीवो का वाई29 5जी इस अवधि में 47 लाख यूनिट्स की बिक्री के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं, 33 लाख बिक्री के साथ आईफोन 15 भी भारत में बेस्ट‑सेलिंग फोन की टॉप 5 लिस्ट में शामिल रहा। एप्पल के फोन, जिनकी कीमत आईफोन 15 के लिए 47,000 रुपए से शुरू होती है, वीवो के सबसे अधिक बिकने वाले हैंडसेट (14,000 रुपए) की कीमत से तीन गुना से भी अधिक है। रिपोर्ट में बताया गया कि एप्पल की यह सफलता बदलते ग्राहक व्यवहार को दर्शाती है। पहले भारत में ज्यादातर लोग एंट्री‑लेवल और मिड‑रेंज फोन ही खरीदते थे, लेकिन अब महंगे स्मार्टफोन की मांग बढ़ रही है। एप्पल ने भारत में स्थानीय निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) बढ़ाकर चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई है। हाल ही में कंपनी ने बेंगलुरु, पुणे और नोएडा में तीन नए एप्पल स्टोर खोले, जिससे भारत में इसके कुल पांच स्टोर हो गए। एप्पल ने ग्राहकों के लिए नो‑कॉस्ट ईएमआई, कैशबैक और बैंक स्कीम जैसी सुविधाएं भी दी हैं, जिससे कंपनी के महंगे फोन खरीदना आसान हो गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एप्पल ने नवंबर में भारत से 2 अरब डॉलर के आईफोन एक्सपोर्ट किए, जो अब तक का सबसे बड़ा है। कंपनी की फाइलिंग के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में एप्पल इंडिया ने घरेलू बिक्री में 9 अरब डॉलर का रिकॉर्ड बनाया और हर पांचवें आईफोन का निर्माण या असेंबली भारत में किया गया। भारत में एप्पल की मैन्युफैक्चरिंग ने ग्लोबल प्रोडक्शन वैल्यू में 12 प्रतिशत का योगदान दिया। साथ ही, कंपनी ने पहली बार भारत में महंगे प्रो और प्रो मैक्स मॉडल का निर्माण भी शुरू किया। कंपनी की फाइलिंग में यह भी बताया गया कि वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका से 178.4 अरब डॉलर का रेवेन्यू आया, जो एप्पल के ग्लोबल रेवेन्यू का करीब 43 प्रतिशत है और इन आईफोन में से बढ़ती संख्या भारत से भेजी गई।

चांदी में भूचाल, एक घंटे में ₹21500 की गिरावट—जानिए किस फैसले से हुई क्रैश

नई दिल्ली चांदी (Silver) की खूब चर्चा हो रही है, सोमवार को भी चांदी की कीमतों में बड़ी उछाल देखने को मिली. MCX पर भाव बढ़कर 2.54 लाख रुपये किलो तक पहुंच गया. लेकिन उसके बाद अचानक एक भूचाल आया और चांदी की कीमत 21500 रुपये प्रति किलो तक गिर गई, यानी एक झटके में सोमवार को चांदी 21 हजार रुपये से ज्यादा सस्ती हो गई.    एक तरह से सराफा बाजार में एक बड़ा मार्केट ड्रामा देखने को मिला. चांदी के भाव ने दिन की शुरुआत में इतिहास रच दिया और फिर एक ही घंटे में 21,500 रुपये तक लुढ़क गए, निवेशक समझ नहीं पा रहे हैं कि ऐसा क्या हुआ, जो चांदी भर-भराकर टूट गई.   पिछले हफ्ते से लगातार रिकॉर्ड बना रही चांदी सोमवार को उस वक्त औंधे मुंह गिर पड़ी, जब उसने ढाई लाख रुपए प्रति किलोग्राम के हाई लेवल को छुआ। इसके कुछ देर बाद ही एक घंटे में चांदी में 21000 रुपए से ज्यादा की भारी गिरावट आई। MCX पर मार्च 2026 डिलीवरी वाली चांदी फिसलकर 2,33,120 रुपए प्रति किलोग्राम (silver price crast today) पर आ गई। जिसने निवेशकों को चौंका कर रख दिया। अब सवाल यह कि आखिर चांदी ने इतनी बड़ी गिरावट आई क्यों? दरअसल, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट किसी एक वजह से नहीं, बल्कि मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक माहौल के ठंडा पड़ने का नतीजा है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचते ही ट्रेडर्स ने मुनाफा काटना शुरू किया और सेफ-हेवन डिमांड में अचानक ठंडक दिखी। MCX पर भारी गिरावट, 5300 रुपए तक गिरे दाम खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 मार्च 2026 एक्सपायरी वाली चांदी 2,34,400 रुपए (silver price today) प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी। पिछले दिन के मुकाबले इसमें 2.25 फीसदी यानी 5387 रुपए की गिरावट आई। पिछले कारोबारी सत्र के दौरान यह 2,39,787 रुपए (silver rate today) पर क्लोज हुई थी। खास बात यह है कि आज सुबह मार्केट खुलते ही चांदी में अचानक तेजी आई और कीमत 2,54,174 रुपए प्रति किलोग्राम के हाई लेवल पर पहुचं गई। लेकिन 1 बजे के आसपास इसमें तेजी से गिरावट (silver price crash) आई और 2.34 लाख के आसपास कारोबार करने लगी। यानी चांदी में 21,500 रुपए से ज्यादा की गिरावट आई।  रूस-यूक्रेन युद्धविराम के संकेतों ने गिराई कीमत?  अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही तस्वीर दिखी। चांदी पहली बार उथल-पुथल भरे कारोबार में 80 डॉलर प्रति औंस के ऊपर गई, लेकिन बाद में 75 डॉलर के नीचे फिसल गई। वजह- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप (Donald Trump) और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेंलेंस्की (Volodymyr Zelensky) के बीच युद्धविराम को लेकर 'काफी करीब' पहुंचने की बात। ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्ष यानी रूस और यूक्रेन की शांति वार्ता 'बहुत करीब' है, जिससे सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर पड़ी। MCX पर आई इस तेज गिरावट को बुलियन मार्केट में ब्रॉड प्रॉफिट बुकिंग का हिस्सा माना जा रहा है। रिलायंस सिक्योरिटीज (Reliance Securities) के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी कहते हैं कि, "ट्रेंड अब भी पॉजिटिव है, लेकिन उतार-चढ़ाव तेज रहेगा। 2.40 लाख चांदी के लिए नजदीकी सपोर्ट है।" वहीं अमेरिकी फर्म BTIG ने चेताया कि कीमती धातुएं पैराबॉलिक हो चुकी हैं। फर्म का कहना है कि, "ऐसी तेजी आमतौर पर समय लेकर नहीं, बल्कि तेज डाउनसाइड रिएक्शन के साथ खत्म होती है।" तकनीकी चार्ट पर चांदी 200-DMA से करीब 89% ऊपर थी- इतिहास बताता है कि ऐसी स्थिति में आगे के हफ्तों में कीमतें अक्सर नीचे आती हैं। अचानक चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट  सुबह जब MCX पर चांदी के मार्च वायदा भाव ने 2,54,174 रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड तोड़ा, तब ऐसे लग रहा था कि 2025 का यह आखिरी कारोबारी सत्र चांदी के नाम हो जाएगा. लेकिन जैसे ही बाजार में प्रॉफिट बुकिंग की लहर चली, भाव ने रफ्तार से उल्टी दिशा पकड़ी और 2,32,663 रुपये तक गिर गया, यानी कुछ ही देर में चांदी की कीमत करीब 21,500 रुपये घट गई.  जानकारों के मुताबिक यह गिरावट अचानक नहीं है, बल्कि तेज उछाल के बाद की सामान्य प्रतिक्रिया है. कई ट्रेडरों ने लाभ सुरक्षित करने के लिए चांदी बेचना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में गिरावट की गति और तेज हो गई. चांदी में तूफानी तेजी के पीछे कारण बता दें, सबसे पहले चांदी पर अंतरराष्ट्रीय बाजार ने दबाव बनाया. वैश्विक सिल्वर की कीमतें पहले $80 प्रति औंस तक पहुंच गईं. लेकिन उसके बाद लुढ़क कर $75 पर पहुंच गई, जिससे घरेलू भावों पर असर पड़ा है. इस बदलाव में यूक्रेन-रूस तनाव में कुछ शांति की खबरें भी शामिल रहीं, जिसकी वजह से 'Safe-Haven' यानी सुरक्षित निवेश की मांग कम हुई.  गौरतलब है कि चांदी ने पिछले एक साल में जबरदस्त रिटर्न दिया है. दिसंबर 2024 में चांदी का भाव करीब 90 लाख रुपये किलो था. जहां से भाव 150% से ज्यादा उछल चुका है. सोमवार को चांदी की कीमत MCX पर 254000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई.  विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतों में कई कारणों से बढ़ोतरी देखी जा रही है. औद्योगिक मांग में उछाल, निवेशकों की सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ती रुचि और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण चांदी की डिमांड बढ़ती जा रही है. खास तौर पर ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर पैनल्स में चांदी की बढ़ती मांग ने कीमतों को उछलने में मदद की है. '10% हाई के बाद 25% गिरी चांदी' BTIG के एनालिस्ट जोनाथन क्रिन्स्की (Jonathan Krinsky) ने 1987 का उदाहरण देते हुए कहा कि जब-जब चांदी ने मल्टी-मंथ हाई पर 10% की एक दिन की छलांग लगाई, उसके बाद 25% तक की गिरावट भी देखी गई। ICICI Prudential Mutual Fund के CIO (फिक्स्ड इनकम) मनीष बंथिया भी मानते हैं कि, "इतनी शानदार रैलियां अक्सर नरमी से नहीं, झटके से ठंडी पड़ती हैं।" हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं होती। केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, गिरावट के बाद चांदी ने 80 डॉलर के आसपास तेज रिबाउंड भी दिखाया। मध्य-पूर्व तनाव, अमेरिका-वेनेजुएला खींचतान और दरों में कटौती की उम्मीदें अब भी कीमतों को सहारा दे रही हैं। लंबी अवधि में सप्लाई की कमी, कम इन्वेंट्री और औद्योगिक मांग के चलते ट्रेंड मजबूत है। लेकिन फिलहाल, तेज उतार-चढ़ाव ही नई हकीकत है।