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शेयर मार्केट में बिकवाली का तूफान, सेंसेक्स 585 अंक गिरा, निफ्टी नीचे लुढ़का

मुंबई  शेयर बाजार में आज भारी गिरावट देखने को मिली है। दिन में एक वक्त पर मार्केट हरे निशान के ऊपर ट्रेड करने लगा था। लेकिन बाजार तेजी को बरकरार नहीं रख पाया। जिसकी वजह सेंसेक्स 0.72 प्रतिशत या फिर 585.67 अंक की गिरावट के साथ 80,599.91 अंक पर बंद हुआ है। वहीं, निफ्टी 0.82 प्रतिशत या फिर 203 अंक की गिरावट के साथ 24,565.35 अंक रहा है। बता दें, ट्रंप के टैरिफ वाले फैसले और एफपीआई की निकासी ने घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया है। जिसकी वजह से यह गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार को निफ्टी का इंट्रा-डे हाई 24734.90 अंक और इंट्रा-डे लो 24535.05 अंक रहा है। सेंसेक्स का इंट्रा-डे हाई 81,317.51 अंक और इंट्रा-डे लो लेवल 80,495.57 अंक रहा है। ट्रेंट में दिखी तेजी सेंसेक्स की टॉप 30 में से 24 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए हैं। सनफार्मा के शेयरों का भाव 4.63 प्रतिशत तक लुढ़क गया है। वहीं, टाटा स्टील के शेयर 3 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए हैं। इंफोसिस, मारुति, टाटा मोटर्स, टेक महिंद्रा के शेयरों में भी 2 या फिर 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई है। दूसरी तरफ इस दबाव के माहौल में रिलायंस, कोटक बैंक, आईटीसी, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स और ट्रेंट (3 प्रतिशत) के शेयरों में तेजी दर्ज की गई है। शेयर बाजार में गिरावट और बड़ी हो गई है। सेंसेक्स 424.14 अंक या फिर 0.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,761.44 पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, निफ्टी, 153.05 अंक या फिर 0.62 प्रतिशत की गिरावट के बाद 24,615.30 अंक पर ट्रेड कर रहा था।  शेयर मार्केट में गिरावट बढ़ गई है। एफएमसीजी और मीडिया को छोड़ सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल हैं। बैंक निफ्टी से लेकर ऑयल एंड गैस तक सेक्टोरल इंडेक्स में भारी गिरावट हैं। फार्मा और हेल्थ केयर स्टॉक्स तो बुरी तरह पिटे हैं। निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 3 फीसद टूटा है तो हेल्थ केयर इंडेक्स में 2.35 पर्सेंट की भारी गिरावट है। निफ्टी गिरावट का शतक लगाकर 105 अंक नीचे 24662 पर आ गया है। एक समय 24,784 पर पहुंच गया था। जबकि, सेंसेक्स भी अब 275 अंकों के नुकसान के साथ 80910 पर ट्रेड कर रहा है। एक समय यह 81317 पर था। शेयर मार्केट में आज तेज उतार-चढ़ाव है। बाजार एक बार फिर लाल निशान में आ गया है। बैंक निफ्टी से लेकर ऑयल एंड गैस तक सेक्टोरल इंडेक्स लाल हैं। फार्मा और हेल्थ केयर स्टॉक्स तो बुरी तरह पिटे हैं। निफ्टी फार्मा इंडेक्स और हेल्थ केयर इंडेक्स में क्रमश: 2.75 और 2.21 पर्सेंट की भारी गिरावट है। निफ्टी गिरावट का शतक लगाकर 103 अंक नीचे 24665 पर आ गया है। एक समय 24,784 पर पहुंच गया था। जबकि, सेंसेक्स भी अब 240 अंकों के नुकसान के साथ 80944 पर ट्रेड कर रहा है। एक समय यह 81317 पर था। शेयर मार्केट में आज तेज उतार-चढ़ाव है। बाजार एक बार फिर लाल निशान में आ गया है। निफ्टी 59 अंक नीचे 24709 पर आ गया है। एक समय 24,784 पर पहुंच गया था। सेंसेक्स भी अब 136 अंकों के नुकसान के साथ 81,048 पर ट्रेड कर रहा है। एक समय यह 81317 पर था। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी तथा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप की आशंका के बीच रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 40 पैसे मजबूत होकर 87.25 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। अमेरिका के भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। अंतरबैंक विदेशी विनिमय मुद्रा बाजार में रुपया 87.60 प्रति डॉलर पर खुला और शुरुआती कारोबार में 87.25 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 40 पैसे की बढ़त दर्शाता है।  शेयर मार्केट आज के नुकसान की भरपाई कर हरे निशान पर आ गया है। हरियाली लौट आई है। सेंसेक्स अब 90 अंकों की उछाल के साथ 81275 पर है। जबकि, निफ्टी में 8 अंकों की तेजी है और यह 24776 पर है। निफ्टी टॉप गेनर्स में आयशर मोटर्स, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, ट्रेंट और नेस्ले के शेयर हैं। शेयर मार्केट अब रिकवरी मोड में है। सेंसेक्स केवल 6 अंक नीचे 81179 पर है। जबकि, निफ्टी में 21 अंकों की गिरावट है और यह 24746 पर है। निफ्टी टॉप गेनर्स में आयशर मोटर्स, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, ट्रेंट और नेस्ले के शेयर हैं। जबकि, निफ्टी टॉप लूजर में सन फार्मा, सिप्ला, डॉक्टर रेड्डी, टाटा मोटर्स और जेएसडब्ल्यू स्टील।  

ED की बड़ी कार्रवाई: फर्जी बैंक गारंटी केस में अनिल अंबानी के खिलाफ जांच तेज

मुंबई  रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ती हुई दिख रही हैं. बैंक लोन फ्रॉड केस के बाद अब ईडी ने 68 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी मामले में जांच तेज कर दी है. इसी सि​लसिले में शुक्रवार को ईडी ने ओडिशा और कोलकाता में छापेमारी की. ईडी ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की ओर से 11 नवंबर, 2024 को दर्ज एक मामले के आधार पर एक ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) दर्ज की है. ईडी का आरोप है कि अनिल अंबानी की कंपनी को इसी फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर ठेका दिया गया था. भुवनेश्वर में ईडी ने मेसर्स बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों से जुड़े 3 परिसरों पर छापा मारा और तलाशी ली. वहीं कोलकाता में इसी फर्म के एक सहयोगी के परिसर में ईडी ने छापेमारी की. मेसर्स बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड (ओडिशा स्थित), इसके निदेशक और सहयोगी 8% कमीशन पर फर्जी बैंक गारंटी जारी करने में संलिप्त पाए गए.' कमीशन देने के लिए फर्जी बिल तैयार किए ईडी ने आरोप लगाया है कि अनिल अंबानी की कंपनी ने फर्म को कमीशन देने के लिए फर्जी बिल भी तैयार किए थे. कई अघोषित बैंक खातों का पता चला है. इन बैंक खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन पाए गए हैं. संघीय एजेंसी ने कहा कि उसने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों और भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) को सौंपी गई ₹68.2 करोड़ की एक फर्जी बैंक गारंटी के बीच संबंधों का खुलासा किया है. इसी से जुड़े एक मामले में, पहले जब्त किए गए सबूत (अनिल अंबानी समूह की कंपनियों के मामले में 24.07.2025 को की गई तलाशी के दौरान) का वर्तमान जांच से सीधा संबंध है. SBI का फर्जी ईमेल डोमेन इस्तेमाल किया ईडी के अनुसार, यह फर्जी गारंटी मेसर्स रिलायंस एनयू बेस लिमिटेड और मेसर्स महाराष्ट्र एनर्जी जनरेशन लिमिटेड के नाम पर जारी की गई थी, जो दोनों अनिल अंबानी समूह से जुड़ी हैं. फर्जी बैंक गारंटी को असली बताने के प्रयास में, अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने कथित तौर पर SECI से संपर्क करने के लिए आधिकारिक "sbi.co.in" के बजाय एक नकली ईमेल डोमेन, "s-bi.co.in" का इस्तेमाल किया. ईडी ने इस नकली डोमेन के सोर्स का पता लगाने के लिए नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) से डोमेन रजिस्ट्रेश का विवरण मांगा है. कंपनी के पते पर मिला रिश्तेदार का आवास ईडी के अनुसार, कंपनी केवल एक कागजी संस्था है- इसका पंजीकृत कार्यालय एक रिश्तेदार की आवासीय संपत्ति है. पते पर कंपनी का कोई वैधानिक रिकॉर्ड नहीं मिला. कई कंपनियों के साथ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का पता चला है. कंपनी से जुड़े प्रमुख लोग टेलीग्राम ऐप का इस्तेमाल 'डिसअपीयरिंग मैसेज' फीचर इनेबल करके चैट करते पाए गए हैं, जो बातचीत को छिपाने के प्रयासों का संकेत देता है. इससे पहले अंबानी को ईडी ने शुक्रवार को कथित ₹17,000 करोड़ के लोन फ्रॉड केस की चल रही जांच के सिलसिले में समन जारी किया और पूछताछ के लिए 5 अगस्त को अपने नई दिल्ली में दफ्तर पेश होने को कहा.

25% आयात शुल्क पर फिलहाल रोक, ट्रंप का फैसला एक हफ्ते टला — जानें अगली डेट

नई दिल्ली अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत पर बुधवार को 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, जो 1 अगस्‍त यानी आज से प्रभावी होने वाला था. लेकिन अब इसे एक सप्‍ताह के लिए टाल दिया गया है. अमेरिका की ओर से जारी किए गए नए निर्देश में अब ये टैरिफ 7 दिन बाद भारत समेत बांग्‍लादेश, ब्राजील और अन्‍य देशों पर लगाया जाएगा, जो 7 अगस्‍त 2025 से प्रभावी होगा. बुधवार को डोनाल्‍ड ट्रंप ने अचानक से भारत समेत कई देशों पर टैरिफ का ऐलान करते हुए दुनिया में फिर से हलचल मचा दी थी. भारत पर 25 फीसदी टैरिफ का ऐलान करते हुए ट्रंप ने कहा था कि व्‍यापार बाधा को दूर करने के लिए ये टैरिफ लगाया जा रहा है. इसके अलावा, जुर्माने का भी ऐलान किया गया था, जो रूस से तेल और डिफेंस प्रोडक्‍ट्स खरीदने के कारण है. हालांकि अभी अमेरिका ने नए आदेश के तहत सभी देशों पर लगने वाले टैरिफ को 1 सप्‍ताह के लिए टाल दिया है यानी अब टैरिफ लगने की नई डेडलाइन 7 अगस्‍त हो चुकी है. देशहित में हर संभव कदम! जिसपर भारत ने बिना कोई जवाबी कार्रवाई के सीधे शब्‍दों में कहा कि देशहित में हर संभव कार्रवाई की जाएगी. वहीं एक सरकारी अधिकारी ने कहा था कि भारत नेगोशिएशन टेबल पर अमेरिका के टैरिफ का जवाब देगा. लोकसभा में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा था कि बात 10 से 15 फीसदी टैरिफ को लेकर हुई है. उन्‍होंने कहा था कि टैरिफ को लेकर देशहित में हर संभव कार्रवाई की जाएगी.  अमेरिका क्या चाहता है? भारत पर अतिर‍िक्‍त दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने टैरिफ लगा रहा है. वह चाहता है कि जल्‍द से जल्‍द भारत अपने एग्रीकल्‍चर और डेयरी सेक्‍टर्स से समझौता करके डील कर ले, लेकिन भारत इसपर राजी नहीं है. भारत का कहना है कि किसी भी सूरत में वह अपने कृषि और डेयरी सेक्‍टर्स को अमेरिका के लिए नहीं खोल सकता.  अमेरिका भारत से अपने कृषि और डेयरी उत्पादों, खासकर (नॉन-वेज मिल्क) और जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) फसलों के लिए बाजार खोलने और इन पर टैरिफ कम की डिमांड कर रहा है, जिस कारण अभी व्‍यापार डील नहीं हो पा रही है. अमेरिका इसमें 100 फीसदी टैरिफ से छूट चाहता है. भारत क्‍यों नहीं मानना चाहता यूएस की बात? भारत में दूध को धार्मिक और सांस्‍कृतिक तौर पर पवित्र माना जाता है और मांसाहारी चारा खाने वाले मवेशियों से मिले दूध (नॉनवेज मिल्‍क)  को अनुमति देना भारत के लिए स्‍वीकार्य नहीं है. भारत चाहता है कि दोनों देशों के बीच एक संतुलित सौदा हो, जो 140 करोड़ लोगों, खासकर 70 करोड़ किसानों के हितों की रक्षा हो. खाद्य सुरक्षा, किसानों के हित, और रणनीतिक स्वायत्तता को प्रमुखता पर रखना चाहता है. साथ ही अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच की उम्‍मीद कर रहा है. 

डिजिटल इंडिया को मिलेगी नई उड़ान: Google बनाएगा एशिया का सबसे बड़ा डेटा सेंटर

हैदराबाद  सरकारी सूत्रों ने बताया कि गूगल, दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में 1 गीगावाट का डेटा सेंटर और उसका विद्युत बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए 6 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह अल्फाबेट इकाई का भारत में इस तरह का पहला निवेश होगा। मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले आंध्र प्रदेश सरकार के दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि बंदरगाह शहर विशाखापत्तनम में बनने वाले इस डेटा सेंटर में 2 बिलियन डॉलर का नवीकरणीय ऊर्जा निवेश शामिल है, जिसका उपयोग इस सुविधा को संचालित करने के लिए किया जाएगा। सर्च दिग्गज का डेटा सेंटर क्षमता और निवेश के लिहाज से एशिया में सबसे बड़ा होगा और यह सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड सहित पूरे क्षेत्र में इसके डेटा सेंटर पोर्टफोलियो के अरबों डॉलर के विस्तार का हिस्सा है। अप्रैल में, अल्फाबेट ने कहा था कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ आक्रमण से उत्पन्न आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद, इस साल डेटा सेंटर क्षमता निर्माण पर लगभग 75 अरब डॉलर खर्च करने के लिए प्रतिबद्ध है। अल्फाबेट ने रायटर्स के टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया। आंध्र प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश, जो सरकार और व्यापारिक नेताओं के साथ निवेश पर चर्चा करने के लिए सिंगापुर में हैं, ने गूगल निवेश पर कोई टिप्पणी नहीं की। हैदराबाद में गूगल का सुरक्षा इंजीनियरिंग केंद्र खुला उन्होंने सिफ़ी टेक्नोलॉजीज़ द्वारा राज्य में बनाए जाने वाले 550 मेगावाट के डेटा सेंटर का ज़िक्र करते हुए कहा, "हमने सिफ़ी जैसी कुछ घोषणाएँ की हैं, जो सार्वजनिक हैं।" उन्होंने आगे कहा, "कुछ घोषणाएँ ऐसी हैं जो अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं। अक्टूबर में हम ये घोषणाएँ करेंगे।" राज्य का विभाजनोत्तर निवेश अभियान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सहयोगी द्वारा संचालित राज्य आंध्र प्रदेश को 2014 में दो भागों में विभाजित कर दिया गया, जिससे इसकी पूर्व राजधानी हैदराबाद और राजस्व का एक प्रमुख स्रोत नव निर्मित तेलंगाना राज्य के हाथों में चला गया। आंध्र प्रदेश तब से उच्च ऋण और सामाजिक व्यय के वित्तीय दबाव को कम करने के लिए निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। लोकेश ने कहा कि आंध्र प्रदेश पहले ही 1.6 गीगावाट की कुल क्षमता वाले डेटा केंद्रों में निवेश को अंतिम रूप देने में सक्षम हो गया है, उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 6 गीगावाट के डेटा केंद्र बनाने का है, जो वर्तमान में लगभग शून्य है। उन्हें उम्मीद है कि पहले से तय 1.6 गीगावाट के शुरुआती डेटा सेंटर अगले 24 महीनों में चालू हो जाएँगे। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी एनारॉक के अनुसार, यह पूरे देश में वर्तमान में संचालित 1.4 गीगावाट से ज़्यादा होगा। लोकेश ने कहा, "हम विशाखापत्तनम में तीन केबल लैंडिंग स्टेशन लगाने पर भी काम कर रहे हैं। हम पर्याप्त केबल नेटवर्क बनाना चाहते हैं, जो मुंबई की मौजूदा क्षमता से दोगुना होगा।" केबल लैंडिंग स्टेशन – जो आमतौर पर डेटा केंद्रों के नजदीक स्थित होते हैं, जिन्हें वैश्विक नेटवर्कों के लिए तीव्र और विश्वसनीय कनेक्शन की आवश्यकता होती है – का उपयोग उन उपकरणों को संग्रहीत करने के लिए किया जाता है जो समुद्र के नीचे स्थित केबलों से डेटा प्राप्त करते हैं और उन्हें रिले करते हैं। लोकेश ने यह भी कहा कि राज्य डेटा केंद्रों की स्थिरता संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा अवसंरचना के निर्माण पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें अगले पाँच वर्षों में बिजली-प्रधान उद्योग से 10 गीगावाट तक की बिजली उत्पादन क्षमता की आवश्यकता होने का अनुमान है। उन्होंने कहा, "अधिकांश ऊर्जा वास्तव में हरित ऊर्जा होगी, और यही वह अद्वितीय मूल्य प्रस्ताव है जिसे हम प्रस्तुत कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि कुछ अतिरिक्त क्षमता कोयले से संचालित होगी, क्योंकि डेटा केंद्रों को पूरे दिन विश्वसनीय, उच्च मात्रा वाली बिजली की आवश्यकता होती है।  

FTA से भारत को मिलेगा फायदा! केसर से लेकर चावल तक UK में जमाएंगे धाक

नई दिल्ली भारत-यूके के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-UK Free Trade Agreement) हो चुका है, जिसके तहत भारत, ब्रिटेन में अपने प्रोडक्‍ट्स '0' या कम टैक्‍स बेचेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की करीब 99 फीसदी चीजें ब्रिटेन में कम टैक्‍स पर बिकेंगी. वहीं UK की 90 फीसदी चीजें भारत में कम टैरिफ पर बिकेंगी. FTA दस्‍तावेज पर साइन दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में गुरुवार को हुई थी.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इस डील को लेकर कहा था कि इससे ग्‍लोबल स्‍तर पर भारत को और मजबूती मिलेगी. साथ ही दोनों देशों के बीच सालाना व्‍यापार 34 अरब डॉलर बढ़ेगा. इस डील के तहत 2030 तक व्‍यापार को  120 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. इससे आम लोगों को भी फायदा होगा, जिसमें ब्रिटेन से आने वाले कुछ चीजों के रेट घट जाएंगे.  क्‍या चीजें हो जाएंगी सस्‍ती?  अगर आप वाइन के शौकीन हैं तो स्‍कॉच व्हिस्‍की के रेट में करीब 20 से 50 फीसदी की गिरावट आ सकती है. वहीं इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, कपड़े, चमड़े के प्रोडक्‍ट्स और दवाइंया,  मेटल और ज्‍वेलरी सस्‍ती हो सकती हैं. जबकि एग्रीकल्‍चर प्रोडक्‍ट्स, कार और बाइक जैसे ऑटो और स्‍टील की चीजें महंगी हो सकती हैं.  ब्रिटेन में खूब बिकेंगे ये प्रोडक्‍ट्स FTA से यूनाइटेड किंगडम (UK) में इम्‍पोर्ट होन वाली चीजें भी सस्‍ती हो जाएंगी, जिससे इसका प्रोडक्‍शन तेजी से बढ़ेगा. लोग भारतीय प्रोडक्‍ट को ज्‍यादा खरीदेंगे. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इमेज शेयर किया है, जिसमें बताया गया है कि भारत किस राज्‍य से कौन-कौन से प्रोडक्‍ट्स ब्रिटेन में इम्‍पोर्ट होंगे, जो मेड इन इंडिया की छाप छोड़ेंगी.  दोनों देशों के बीच व्यापार टारगेट बता दें, दोनों देशों के बीच साल 2023-24 में व्यापार 4.74 लाख करोड़ रुपये (लगभग 60 अरब डॉलर) का था, और इस समझौते से भारत का निर्यात 60% तक बढ़ सकता है. अनुमान है कि अगले 5 साल में भारतीय गारमेंट्स, चमड़ा, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद और ऑटोमोबाइल पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में ब्रिटेन को निर्यात में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.  ब्रिटेन में खूब बिकेंगे ये प्रोडक्ट्स इस समझौते से 95% से अधिक कृषि और इससे जुड़े खाद्य प्रोडक्ट्स पर शून्य शुल्क लगेगा, जिससे कृषि निर्यात बढ़ेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी. अगले तीन वर्षों में कृषि निर्यात में 20% से अधिक की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो 2030 तक भारत के 100 अरब डालर के कृषि-निर्यात के लक्ष्य को पूरा करने में योगदान देगा. ब्रिटेन के 90% उत्पादों पर भारत में शुल्क हटाया जाएगा या कम किया जाएगा. ब्रिटेन में भारतीय मसाले, फल-सब्जियां, और हस्तशिल्प सस्ते और अधिक उपलब्ध होंगे. स्कॉच व्हिस्की (150% से 75%, फिर 10 वर्षों में 40%), कारें (100% से 10%), कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट, बिस्किट, सैल्मन मछली, और मेडिकल डिवाइसेज जैसे उत्पाद भारत में सस्ते होंगे.   किसान के लिए बड़े मौके इससे भारतीय किसानों के लिए प्रीमियम ब्रिटिश बाजार के दरवाजे खुलेंगे, जो जर्मनी, नीदरलैंड और अन्य यूरोपीय संघ के देशों को मिलने वाले फायदे के बराबर या उससे भी अधिक होगा. हल्दी, काली मिर्च, इलायची, अचार और दालों को भी शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी. जबकि ब्रिटेन का भारत को निर्यात (व्हिस्की, कारें, मेडिकल उपकरण) भी 60% तक बढ़ सकता है. लक्ष्य ये भी है कि दोनों देशों के बीच व्यापार प्रक्रियाओं को सरल और डिजिटल बनाए, जिससे व्यापार लागत कम होगी. इस डील एक हिस्सा ये भी है कि भारत में कपड़ा, चमड़ा, और रत्न-आभूषण जैसे उद्योगों नौकरिकों के अवसर बढ़ेंगे. MSME सेक्टर विशेष रूप से क्षेत्रीय हस्तशिल्प जैसे कोल्हापुरी चप्पल और बनारसी साड़ी, को ब्रिटेन के बाजार में बढ़त मिलेगी. ब्रिटेन में भी हजारों नौकरियां पैदा होंगी, खासकर व्हिस्की, ऑटोमोबाइल, और चिकित्सा उपकरण सेक्टर में.  भारत के 99% निर्यात पर ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिसपर फिलहाल 4-16% शुल्क लिए जाते हैं. इससे वस्त्र, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा होगा. विशेष रूप से कृषि और समुद्री उत्पादों (जैसे झींगा, टूना, मसाले, हल्दी, कटहल, बाजरा) पर 95% से अधिक शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे अगले 5 वर्षों में कृषि निर्यात में 20% की वृद्धि की उम्मीद है.  मेक इन इंडिया की ताकत उम्मीद की जा रही है कि 5 साल के बाद यह समझौता भारत में 'मेक इन इंडिया' और महिला उद्यमिता को मजबूती देगा, क्योंकि समझौते में लैंगिक समानता और श्रम अधिकारों पर जोर दिया गया है. डील के तहत भारतीय प्रोफेशनल (जैसे आईटी, हेल्थ, योग प्रशिक्षक) को ब्रिटेन में अस्थायी वीजा और सामाजिक सुरक्षा अंशदान में तीन साल की छूट से लाभ होगा. जबकि 5 साल के बाद करीब 100 अतिरिक्त वार्षिक वीजा और बढ़ी हुई श्रम गतिशीलता से भारतीय युवाओं को ब्रिटेन में अधिक अवसर मिलेंगे. 60,000 से अधिक आईटी पेशेवरों को ब्रिटेन में अस्थायी वीजा के माध्यम से काम करने में आसानी होगी. आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का विस्तार यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा. साल 2030 तक यानी 5 साल के बाद भारत और ब्रिटेन 'UK-India Vision 2035' के तहत रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, जलवायु, और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे. हालांकि फिलहाल ये यह कहना कि किसे ज्यादा फायदा होगा, ये जटिल है, क्योंकि दोनों देशों को अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे.  जम्‍मू-कश्‍मीर: पश्‍मीना शॉल, बासमती चावल, कश्‍मीरी केसर और कश्‍मीरी विलो बैट्स  हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: बासमती चावल  पंजाब- जलंधर स्‍पोर्ट्स गूड्स, बासमती राइस  दिल्‍ली- बासमती राइस  राजस्‍थान- जयपुर जेमस्‍टोन और ज्‍वेलरी  गुजरात– सूरत टेक्‍सटाइल, मोरबी में बने मिट्टी के वर्तन और सूरत के डायमंड  महाराष्‍ट्र– कोल्‍हापुरी फूटवीयर, आईटी सर्विसेज  कर्नाटक– चन्‍नापाटन के खिलौने केरल– रबर और हल्‍दी उत्तर प्रदेश– खुर्जा में बने मिट्टी के बर्तन, मेरठ के स्‍पोर्ट्स प्रोडक्‍ट, बासमती चावल और आगरा-कानपुर के लेदर  तेलंगाना– आईटी सर्विस आंध्र प्रदेश– कॉफी और हल्‍दी  तमिलनाडु– कांचीपूरम साड़ी, हल्‍दी, गुड़‍िया, स्‍लीपर और आईटी सर्विस  बिहार- सिक्‍की ग्रॉस टॉय, भागलपुर सिल्‍क, मखाना और लिच्ची त्रिपुरा– नेचुरल और प्रोड्यूस्‍ड रबर  वेस्‍ट बंगाल- साड़ी, दाजर्लिंग टी, गुड़‍िया और शांतिनिकेतन लेदर 

क्या आपकी भी IRCTC ID हो गई है बंद? जानें 2.5 करोड़ यूजर पर क्यों गिरी गाज

नई दिल्ली अगर आप भी ट्रेन टिकट आईआरसीटीसी के जरिए बुक करते यह खबर आपके लिए है, क्योंकि आईआरसीटीसी ने 2.5 करोड़ से ज्यादा यूजर आईडी को डीएक्टिवेट कर दिया है। रेलवे को डेटा के विश्लेषण में कुछ यूजर्स के बुकिंग पैटर्न पर शक हुआ था। इसी संदेह के आधार पर इन यूजर्स की आईडी को बंद किया गया है। सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। राज्यसभा सांसद सांसद एडी सिंह ने संसद में इस बारे में सवाल पूछा था। सिंह ने रेलवे मंत्रालय से सवाल पूछा था कि आईआरसीटीसी के करोड़ों यूजर्स की आईडी क्यों बंद की गई, टिकट बुकिंग खुलते ही टिकट कैसे गायब हो जाते हैं और इसे रोकने के लिए रेलवे क्या कदम उठा रहा है? इसके जवाब में सरकार ने जानकारी दी। मंत्रालय ने अपने जवाब में लिखा है कि,टिकट बुकिंग में हो रही गड़बड़ियों को रोकने के लिए आईआरसीटीसी ने 2.5 करोड़ से ज्यादा यूजर आईडी बंद कर दी है। जांच में पता चला कि इन यूजर आईडी से बुकिंग करने में कुछ गड़बड़ है। 25 जुलाई को राज्यसभा में दिए गए एक उत्तर में रेल मंत्रालय ने कहा कि टिकट बुकिंग सिस्टम में हो रही गड़बड़ी और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए आईआरसीटीसी ने यह कदम उठाया है। डेटा एनालिसिस के दौरान पाया गया कि करोड़ों यूजर आईडी फर्जी या संदिग्ध जानकारियों से बनी थीं। जिसके बाद उनको डीएक्टिवेट कर दिया गया ताकि तत्काल टिकट बुकिंग में पारदर्शिता लाई जा सके और ईमानदार यात्रियों को नुकसान ना हो। मंत्रालय ने यह भी बताया कि, ट्रेनों में टिकटों की मांग पूरे साल एक जैसी नहीं रहती है। कुछ समय ऐसा होता है जब टिकटों की मांग बहुत ज्यादा होती है और कुछ समय ऐसा होता है जब कम होती है। जो ट्रेनें ज्यादा लोकप्रिय हैं और जो यात्रा करने में कम समय लेती हैं, उसमें टिकट जल्दी बिक जाते हैं। लेकिन दूसरी ट्रेनों में टिकट आसानी से मिल जाते हैं। यात्रियों को कन्फर्म टिकट आसानी से मिलें, टिकट बुकिंग में पारदर्शिता रहे और लोग ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन टिकट बुक करें, इसके लिए रेलवे ने कई कदम उठाए हैं। इसके अलावा वेटिंग लिस्ट की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। अगर डिमांड बढ़ती है, तो स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाता है या फिर मौजूदा ट्रेनों में अतिरिक्त डिब्बे जोड़े जाते हैं। साथ ही, विकल्प और अपग्रेडेशन स्कीम जैसी योजनाएं चलाई जाती हैं ताकि वेटिंग वाले यात्रियों को भी कंफर्म सीट मिल सके। मंत्रालय ने जानकारी दी कि, यात्री ऑनलाइन या रेलवे के काउंटर पर जाकर टिकट बुक कर सकते हैं। आजकल करीब 89 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन बुक होते हैं। रेलवे के काउंटर पर भी आप डिजिटल तरीके से भी पेमेंट कर सकते हैं। 1 जुलाई 2025 से तत्काल टिकट बुकिंग के नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं। यात्रियों को अब आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप पर आधार कार्ड से वेरीफाई करना होगा। एजेंट तत्काल टिकट बुकिंग खुलने के पहले 30 मिनट तक टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। कैसे चेक करें आपका आईआरसीटीसी अकाउंट एक्टिव है या नहीं?     आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट या एप पर जाएं। फिर अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट खोलें या आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट एप डाउनलोड करे।     एप या वेबसाइट पर लॉगिन करे। इसके बाद  अपना यूजर आईडी और पासवर्ड  डालें। इसके बाद कैप्चा कोड भरें और साइन इन पर क्लिक करें।     अगर आपका अकाउंट एक्टिव है, तो आप आसानी से लॉगिन कर पाएंगे और डैशबोर्ड पर अपनी बुकिंग और अन्य जानकारी देख सकेंगे।     अगर अकाउंट निष्क्रिय है, तो आपको एक एरर मैसेज दिखाई देगा, जैसे आपका अकाउंट निष्क्रिय है।     अगर आपका अकाउंट बंद हुआ है, तो घबराएं नहीं। इसके बाद आप आईआरसीटीसी कस्टमर केयर से संपर्क कर सकते हैं।

हुंडई की बंपर डील: इन 3 कारों पर मिल रहा 80,000 रुपए से ज्यादा का डिस्काउंट, मौका सिर्फ जुलाई तक!

नई दिल्ली हुंडई जुलाई महीने के दौरान अपने अलग-अलग मॉडल पर बंपर डिस्काउंट दे रही है। अगर आप भी अगले कुछ दिनों में नहीं हुंडई कार खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपके लिए खुशखबरी है। बता दें कि इस दौरान हुंडई के तीन कारों पर 80,000 रुपये से ज्यादा की छूट मिल रही है। इनमें हुंडई टक्सन, हुंडई वेन्यू और हुंडई ग्रैंड i10 Nios शामिल हैं। बता दें कि यह ऑफर जुलाई, 2025 के अंत तक ही वैलिड है। डिस्काउंट की अधिक जानकारी के लिए ग्राहक अपने नजदीकी डीलरशिप संपर्क कर सकते हैं। यहां जानिए डिस्काउंट की डिटेल हुंडई टक्सन के डीजल वैरिएंट पर ग्राहक जुलाई महीने के दौरान अधिकतम 1 लाख रुपये तक की बचत कर सकते हैं। जबकि कंपनी की दूसरी सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी हुंडई वेन्यू पर 85,000 रुपये की छूट मिल रही है। इसके अलावा, हुंडई वेन्यू N-लाइन पर भी इस दौरान 85,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है। जबकि कंपनी इसी दौरान हुंडई ग्रैंड i10 एनआईओएस के सीएनजी वैरिएंट पर 85,000 रुपये तक की छूट दे रही है। कार में है 6-एयरबैग की सेफ्टी अगर सबसे ज्यादा डिस्काउंट वाले कार हुंडई टक्सन की बात करें तो इसके केबिन में ग्राहकों को 10.25-इंच का टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम, 10.25-इंच का ड्राइवर डिस्प्ले, कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी, एक पैनोरमिक सनरूफ, डुअल जोन क्लाइमेट कंट्रोल, हीटेड और वेंटीलेटेड फ्रंट सीट्स और वायरलेस फोन चार्जिंग जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसके अलावा, सेफ्टी के लिए कार में 6-एयरबैग और 360-डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स दिए गए हैं। हुंडई टक्सन की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 29.27 लाख रुपये से लेकर टॉप मॉडल में 36.04 लाख रुपये तक जाती है।

वैश्विक कंपनी जेबिल भारत में विनिर्माण क्षेत्र में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर रही है: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली, वैश्विक विनिर्माण कंपनी जेबिल का गुजरात के साणंद स्थित संयंत्र लगभग पूरा हो चुका है। यह संयंत्र देश में सिलिकॉन फोटोनिक्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्माण करेगा।जेबिल के 25 से अधिक देशों में 100 से अधिक स्थानों पर 1,40,000 से अधिक कर्मचारी हैं। वैष्णव ने एक्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा, "जेबिल भारत में सिलिकॉन फोटोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सेवाओं के निर्माण में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर रही है।" मंत्री ने कहा, "साणंद स्थित संयंत्र लगभग पूरा हो चुका है।"जेबिल के ग्राहकों की सूची में स्वास्थ्य सेवा, पैकेजिंग, स्मार्टफोन और क्लाउड उपकरण से लेकर ऑटोमोटिव और घरेलू उपकरणों तक, हर बाजार में दुनिया के 300 सबसे बड़े ब्रांड शामिल हैं।इस बीच, दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार ने कहा है कि उसने 31 मार्च तक दूरसंचार उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत 1,162 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। 1 अप्रैल, 2021 को शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य दूरसंचार क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। यह चालू वित्त वर्ष के अंत में समाप्त होने वाली है।इस योजना के तहत चयनित 42 कंपनियों में से 21 निर्माताओं ने अब तक सफलतापूर्वक प्रोत्साहन प्राप्त कर लिए हैं। सरकार ने इस योजना के लिए 4,115 करोड़ रुपये निर्धारित किए थे, जिसका लक्ष्य अनुमानित 2.45 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिक्री और इसके दौरान 44,000 से अधिक नए रोजगार सृजित करना था। जेबिल शीर्ष लाभार्थी के रूप में उभरा, जिसने दो वित्तीय वर्षों में 235.87 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन प्राप्त किया। अन्य प्रमुख प्राप्तकर्ताओं में फ्लेक्सट्रॉनिक्स (165.12 करोड़ रुपये), नोकिया (157.32 करोड़ रुपये), फॉक्सकॉन राइजिंग स्टार्स (80.33 करोड़ रुपये) और सिरमा एसजीएस (53.23 करोड़ रुपये) शामिल हैं।उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि दूरसंचार ऑपरेटरों और सरकार के दृष्टिकोण के बीच मज़बूत तालमेल ज़रूरी है। वे आत्मनिर्भरता और रोज़गार सृजन के लक्ष्यों को सही मायने में साकार करने के लिए उच्च स्थानीय मूल्य संवर्धन वाले दूरसंचार उत्पादों की खरीद को प्रोत्साहित करने के महत्व पर ज़ोर देते हैं।  

अनिल अंबानी के ऑफिसों पर लगातार छापेमारी, ED की कार्रवाई तीसरे दिन भी जारी

मुंबई रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी से जुड़े दिल्ली और मुंबई स्थित परिसरों पर पिछले 48 घंटों से ईडी की छापेमारी जारी है. प्रवर्तन निदेशालय ने 3,000 करोड़ रुपये के संदिग्ध लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अनिल अंबानी के रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों और अधिकारियों से जुड़े 35 से ज्यादा जगहों परिसरों में तलाशी अभियान शुरू किया है. गुरुवार सुबह 7 बजे से ईडी के अधिकारी अनिल अंबानी के कई ठिकानों पर छापेमारी कर रहे थे. आज भी अनिल अंबानी के ऑफिस रिलायंस में छापेमारी जारी है. रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने एक बयान जारी कर कहा है कि ईडी की छापेमारी समूह की अन्य कंपनियों से जुड़े पुराने मामलों से संबंधित है. उन कंपनियों या जांच के दायरे में आने वाले मामलों से कोई संबंध नहीं है. ये शिकायतें RAAGA कंपनियों द्वारा सार्वजनिक संस्थानों के साथ लोन हेराफेरी, रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोपों से संबंधित हैं. RAAGA कंपनियां रिलायंस अनिल अंबानी समूह की संस्थाओं का संदर्भ देती हैं. सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय आवास बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित कई एजेंसियों ने जांच में योगदान देने वाली जानकारी साझा की है. अधिकारियों का कहना है कि लोन वितरण से ठीक पहले, यस बैंक के प्रवर्तकों से जुड़ी संस्थाओं को पैसा रिसीव हुआ था. इससे बैंक अधिकारियों और उधार लेने वाली फर्मों के बीच संभावित रिश्वतखोरी और लेन-देन की व्यवस्था के सवाल उठे हैं. ईडी अब यस बैंक के प्रवर्तकों और अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों के बीच कथित सांठगांठ की जांच कर रहा है.

UPI ट्रांजैक्शन पर आए नए नियम, 1 अगस्त से ये 3 बदलाव होंगे लागू

 नई दिल्ली  1 अगस्त 2025 से UPI से जुड़े नए नियम लागू हो रहे हैं। अगर आप रोज Paytm, PhonePe, GPay या किसी और UPI ऐप से पेमेंट करते हैं, तो ये बदलाव आपके लिए जरूरी हैं। UPI सिस्टम को मैनेज करने वाली नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने ये लिमिट्स इसीलिए तय की हैं ताकि सिस्टम पर दबाव कम हो और ट्रांजैक्शन फेल या डिले जैसी दिक्कतें घटें। ये बदलाव जरूरी ट्रांजैक्शन्स को प्रभावित नहीं करेंगे, लेकिन बैलेंस चेक, स्टेटस रीफ्रेश जैसी चीजों पर लिमिट जरूर लगाई जा रही है। NPCI का कहना है कि इससे UPI ज्यादा स्मूद और भरोसेमंद बनेगा, खासतौर पर उस वक्त जब ज्यादा लोग एक साथ ट्रांजैक्शन करते हैं। 1 अगस्त से UPI पर क्या नई लिमिट्स लगेंगी? अगले महीने से UPI यूजर्स सिर्फ 50 बार ही अपना अकाउंट बैलेंस चेक कर पाएंगे। इसके अलावा, जो यूजर्स अपने मोबाइल नंबर से लिंक बैंक अकाउंट्स को बार-बार चेक करते हैं, वो भी अब सिर्फ 25 बार ही ऐसा कर सकेंगे। ये लिमिट्स इसीलिए लाई गई हैं ताकि बिना जरूरत के सिस्टम पर लोड ना पड़े, जिससे अक्सर स्पीड स्लो हो जाती है या ट्रांज़ैक्शन फेल हो जाते हैं। नए नियमों की वजह क्या है? NPCI यानी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने बताया कि अप्रैल और मई 2025 में UPI प्लेटफॉर्म पर काफी लोड देखा गया। इसका सबसे बड़ा कारण था लोग बार-बार बैलेंस चेक करते रहे या फिर एक ही ट्रांजैक्शन का स्टेटस बार-बार रिफ्रेश करते रहे। इससे सर्वर पर दबाव बढ़ा और कई बार लेन-देन में देरी या फेल होने की स्थिति आ गई। इसी वजह से अब नए नियम लाए जा रहे हैं ताकि सिस्टम बेहतर और फास्ट बना रहे। कौन-कौन से बदलाव होंगे? एक दिन में अधिकतम 50 बार ही बैलेंस चेक कर सकेंगे। आप अपने मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक अकाउंट की डिटेल्स दिन में 25 बार से ज्यादा नहीं देख पाएंगे। कोई एक ट्रांजैक्शन का स्टेटस सिर्फ 3 बार चेक किया जा सकेगा, वो भी हर बार कम से कम 90 सेकंड का अंतर होना जरूरी होगा। Netflix, EMI, बिजली बिल जैसे ऑटो डेबिट पेमेंट्स अब सिर्फ निर्धारित समय पर ही प्रोसेस होंगे। ऑटो पेमेंट्स पर भी असर पड़ेगा जो व्यापारी या कंपनियां ऑटो पेमेंट के जरिए ग्राहकों से पेमेंट लेती हैं, उन्हें अब NPCI द्वारा तय किए गए टाइम स्लॉट्स के अनुसार भुगतान प्राप्त करना होगा। इससे पेमेंट सिस्टम और ज़्यादा व्यवस्थित हो सकेगा। हालांकि आम यूजर्स को इससे कोई खास दिक्कत नहीं होगी। UPI बना डिजिटल इंडिया की रीढ़ आज UPI सिर्फ एक ऐप नहीं बल्कि हर गली, मोहल्ले और चाय की दुकान तक पहुंच चुका है। "भैया QR स्कैन कर दूं?" जैसे वाक्य अब आम सुनाई देते हैं। NPCI का यह कदम UPI नेटवर्क को और ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए उठाया गया है। बदलाव जरूरी हैं सुविधा बनाए रखने के लिए जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट की सुविधा बढ़ रही है, वैसे-वैसे सिस्टम को स्मार्ट और टिकाऊ बनाने के लिए ऐसे बदलाव जरूरी हो जाते हैं। इन छोटे लेकिन असरदार नियमों के जरिए हर यूजर को बिना किसी रुकावट के पेमेंट करने में आसानी मिलेगी।