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सीएम समेत कई दिग्गज OBC नेता जाएंगे बिहार, चुनावी मैदान में MP का असर

भोपाल  बिहार की सियासत पर जैसे-जैसे चुनावी रंग गहराता जा रहा है, वैसे-वैसे दूसरे राज्यों के बड़े नेता भी वहां की जमीन पर उतरने लगे हैं। मध्य प्रदेश इस बार ख़ास में है, क्योंकि यहां के ओबीसी चेहरे चुनावी मैदान में अहम भूमिका निभाने वाले है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने प्रचार और प्रबंधन की कमान अपने-अपने भरोसेमंद नेताओं को सौंपने की रणनीति बनाई है।  भाजपा से सीएम मोहन और मंत्री शिवराज होंगे स्टार प्रचारक भाजपा सीएम मोहन यादव को बिहार के यादव वोटबैंक के सामने बड़ा चेहरा बनाने की की योजना बना रही है। यूपी-बिहार की राजनीति में यादव वंश के प्रभाव को चुनौती देने का जिम्मा मोहन यादव के कन्धों पर होगा। सीएम यादव इससे पहले महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और दिल्ली के विधानसभा चुनावों में प्रचार कर चुके है। वहीँ, केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की किसान हितैषी और संवेदनशील नेता की छवि बिहार में भाजपा के लिए हथियार साबित हो सकती है। मखाना किसानों के लिए उनके प्रयास और गरीबों के प्रति लगाव उन्हें वहां विशेष लोकप्रियता दिलाता है। कांग्रेस चलेगी यादव-पटेल कार्ड दूसरी ओर कांग्रेस भी ओबीसी समीकरण को साधने में कोई कसार नहीं छोड़ना चाहती। कांग्रेस ने एमपी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव और उनके भाई सचिन यादव को बिहार चुनावी अभियान में अहम भूमिका देने की तैयारी की है। इसके अलावा राज्य सभा सांसद अशोक सिंह(यादव), पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल, वरिष्ठ नेता सत्यनारायण पटेल और दिनेश गुर्जर भी चुनावी मैदान में उतरेंगे। कांग्रेस ने बिहार के ओबीसी बहुल इलाकों को टारगेट करने की रणनीति बनाई है। इन नेताओं को लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा की जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

पूजा पाल ने अखिलेश यादव को लिखी चिट्ठी, जताया खतरे का संकेत, सपा पर लगाया जिम्मेदारी का आरोप

कौशांबी  यूपी में कौशांबी जिले की चायल सीट से विधायक पूजा पाल ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने अपनी हत्या की आशंका जताई है. उन्होंने साफ कहा है कि यदि मेरी हत्या होती है तो इसके लिए समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव जिम्मेदार होंगे. पूजा पाल ने अपनी चिट्ठी में उल्लेख किया है कि उन्होंने जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया है. उनके पति की हत्या के दोषियों को सजा मिल चुकी है. उन्होंने लिखा, मैंने अपना वास्तविक लक्ष्य प्राप्त कर लिया है, मेरे पति के हत्यारों को सजा मिल गई है. अब मुझे मौत भी मिले तो भी गर्व ही होगा. पत्र के अंतिम हिस्से में उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि अखिलेश यादव ने उन्हें बीच रास्ते में अपमानित करके छोड़ दिया है. इस कारण समाजवादी पार्टी के अपराधी समर्थकों का मनोबल काफी बढ़ गया है और ठीक वैसे ही जैसे उनके पति की हत्या हुई थी, वैसे ही उनकी हत्या भी हो सकती है. पूजा पाल ने पत्र में कहा, यदि ऐसा होता है तो मैं सरकार और प्रशासन से मांग करती हूं कि मेरी हत्या की वास्तविक दोषी समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को ही माना जाए. कौन हैं पूजा पाल? पूजा पाल की शादी 16 जनवरी 2005 को राजू पाल से हुई थी. राजू इलाहाबाद (पश्चिमी) विधानसभा सीट से बसपा विधायक थे. शादी के महज 9 दिन बाद 25 जनवरी 2005 को राजू की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई. यह हत्या इलाहाबाद की सियासत में भूचाल लाने वाली घटना थी. पूजा पाल ने अपने पति की हत्या के बाद अतीक अहमद और उसके गुर्गों के खिलाफ FIR दर्ज कराई, जिसके चलते वो 'अतीक गैंग से लोहा लेने वाली' नेता के रूप में उभरीं. पति की हत्या के बाद उन्होंने उपचुनाव लड़ा लेकिन हार गईं. उसके बाद 2007 और 2012 में इलाहाबाद शहर (पश्चिम) से BSP से विधायक चुनी गईं. हालांकि 2017 में वे हार गईं. बाद में 2022 में सपा के टिकट पर चायल विधानसभा सीट से विधायक बनीं.

कमलनाथ सरकार गिरने की वजह बताते हुए दिग्विजय सिंह ने किया व्यक्तिगत खुलासा

भोपाल  पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश में 5 साल पहले कांग्रेस सरकार गिरने पर खुलकर बातचीत की और कमलनाथ को जिम्मेदार ठहराया है. दिग्विजय ने आरोप लगाया कि कमलनाथ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की वो मांग नहीं मानी, जिस पर डिनर के दौरान सहमति बनी थी. इसी कारण सरकार गिर गई. बातचीत में दिग्विजय ने कहा, इस बात का दुख है कि हमें जिन पर पूरा भरोसा था, उन लोगों ने धोखा दे दिया. आइडियोलॉजिकल क्लैश नहीं था. ये क्लैश ऑफ पर्सनालिटी हो गया. दिग्विजय से जब पूछा गया कि अगर कमलनाथ ग्वालियर-चंबल संभाग से जुड़ी मांगें मान लेते तो शायद यह नौबत नहीं आती? इस पर उन्होंने स्वीकार किया कि शायद फिर यह नौबत नहीं आती.  दरअसल, मध्य प्रदेश में 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया था और 15 साल के लंबे इंतजार के बाद सत्ता में वापसी की थी. पार्टी ने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया था. हालांकि, अंदरखाने नाराजगी की खबरें आती रहीं. इस बीच, 15 महीने बाद सिंधिया ने बगावत कर दी और बीजेपी में शामिल हो गए. कई विधायकों ने भी कांग्रेस छोड़ दी और सिंधिया खेमे में चले गए. जिससे कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई और कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा. दिग्विजय ने बताया- कैसे गिरी थी कमलनाथ सरकार? सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर रही कि दिग्विजय और सिंधिया के बीच लड़ाई के कारण कांग्रेस सरकार गिर गई. अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कयासों पर विराम लगाया है. MPTak के साथ विशेष पॉडकास्ट में दिग्विजय ने पहली बार इस मामले में चुप्पी तोड़ी और बताया कि कमलनाथ की सरकार कैसे गिरी थी. उन्होंने एक इंडस्ट्रियलिस्ट के घर सिंधिया और कमलनाथ के डिनर की वो कहानी भी बताई. दिग्विजय से जब पूछा गया कि कहा जाता है कि आपकी वजह से कमलनाथ सरकार गिरी? इस पर उन्होंने कहा, ये प्रचारित किया गया कि मेरी और सिंधिया की लड़ाई की वजह से कमलनाथ की सरकार गिर गई. लेकिन सच्चाई ये नहीं है. मैंने चेताया था कि ऐसी घटना हो सकती है. दिग्विजय का कहना था कि मेरा दुर्भाग्य है कि शायद मेरी कुंडली में यह है कि मुझ पर हमेशा वह आरोप लगेगा जिसमें मैं दोषी नहीं हूं.  दिग्विजय ने सुनाई डिनर की वो कहानी दिग्विजय का कहना था कि एक बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट हैं. मैं उनका नाम नहीं लेना चाहूंगा. कमलनाथ और सिंधिया दोनों से उनके अच्छे संबंध हैं. मैं उनके पास गया और कहा कि देखिए इन दोनों की लड़ाई में हमारी सरकार गिर जाएगी. आप जरा संभालिए, क्योंकि आपके दोनों से अच्छे संबंध हैं. दिग्विजय ने बताया कि उनके घर डिनर रखा गया और मैं भी उसमें शामिल हुआ. मैंने बहुत कोशिश की कि ये मामला निपट जाए. वहां पर सभी इश्यूज को लेकर एक लिस्ट तैयार हुई, लेकिन उसका पालन नहीं हो पाया. ये बात सच है कि तमाम प्रयासों के बावजूद कमलनाथ सरकार नहीं बच पाई. मेरा ना माधवराव सिंधिया से कोई विवाद था, ना ज्योतिरादित्य से कोई विवाद था. दिग्विजय से पूछा गया कि डिनर मीटिंग में कौन-कौन मांगें रखी गईं थीं? उन्होंने कहा, छोटी-मोटी बातें हुईं थी. ये हुआ था कि ग्वालियर-चंबल संभाग में जैसा हम दोनों कहेंगे, वैसा कर देंगे. हम दोनों ने दूसरे दिन विशलिस्ट बनाकर दे दिया, मैंने भी दस्तखत किए. लेकिन विशलिस्ट का पालन नहीं हुआ. 

बिहार में मतदाता सूची विवाद: कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का किया समर्थन

नई दिल्ली बिहार की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने (एसआईआर मुद्दे) को लेकर कांग्रेस पार्टी ने आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। कांग्रेस ने कहा कि यह फैसला लोकतंत्र पर हुए एक कठोर हमले से देश को बचाने वाला है और चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली को पूरी तरह उजागर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि काटे गए मतदाताओं की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए। इसके साथ ही सूची के साथ-साथ नाम काटने की वजह भी बताई जाए। कोर्ट ने या भी कहा कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वे आधार कार्ड को पहचान पत्र के तौर पर दिखाकर मतदान कर सकें। आज अदालत ने अपने ही आदेश को दोहराते हुए साफ कहा कि चुनाव आयोग को आधार कार्ड को वैध पहचान पत्र मानना ही होगा। कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया कांग्रेस ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'आज सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र को सुरक्षित किया है। चुनाव आयोग ने अब तक बाधा डालने वाली और मतदाताओं के अधिकारों के खिलाफ काम करने वाली भूमिका निभाई थी। लेकिन अब अदालत ने राजनीतिक दलों को भी इस पूरी प्रक्रिया में शामिल करने का रास्ता खोल दिया है। यह एक ऐतिहासिक कदम है।' कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अब उन्हें एक लागू होने योग्य अधिकार मिल गया है जिसे चुनाव आयोग अनदेखा नहीं कर सकता। चुनाव आयोग पर तीखा हमला कांग्रेस ने सीधे चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा- 'आज चुनाव आयोग पूरी तरह बेनकाब और बदनाम हो चुका है। उसके पीछे के 'जी-2 कठपुतली संचालक' भी पूरी तरह पराजित हो गए हैं।'

संजय राउत ने याद दिलाया 2007 का मामला, NDA को उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग का डर

मुंबई  शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने शुक्रवार को दावा किया कि भाजपा उपराष्ट्रपति चुनाव में समर्थन जुटाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के घटक दलों से संपर्क कर रही है, क्योंकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के एनडीए सांसदों में बेचैनी है और उसे क्रॉस-वोटिंग का डर है। उन्होंने उदाहरण दिया कि जिस तरह 2007 के राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा की तत्कालीन सहयोगी शिवसेना ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल का समर्थन किया था, क्योंकि वह महाराष्ट्र से थीं, उसी तरह एनडीए को भी डर है कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के सांसद विपक्षी उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी का समर्थन कर सकते हैं। राउत ने कहा, "क्या आप (एनडीए) इस बात से डरे हुए हैं कि क्रॉस-वोटिंग होगी?…. डुप्लीकेट शिवसेना (एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का संदर्भ) क्रॉस-वोटिंग करेगी…. कागजों पर (एनडीए के लिए) बहुमत है, लेकिन (विपक्ष का) उम्मीदवार आंध्र प्रदेश से है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में (सांसदों में) बेचैनी है।" उन्होंने आगे कहा, "राहुल गांधी द्वारा देश, बिहार और कई अन्य जगहों पर बनाए गए माहौल के कारण क्रॉस-वोटिंग की संभावना है।" रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस हफ्ते की शुरुआत में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से बात की और 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में उनका समर्थन मांगा। इस पर टिप्पणी करते हुए, राउत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी उन्हीं पार्टियों से वोट मांग रही है "जिन्हें उसने तोड़ा"। राज्यसभा सांसद ने कहा कि ऐसे चुनावों में ठाकरे और पवार को फोन करना राजनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा है। उन्होंने आगे कहा कि शिवसेना (यूबीटी) विपक्षी उम्मीदवार को वोट देगी। उन्होंने कहा कि ठाकरे ने "तानाशाही" के खिलाफ लड़ाई का कड़ा रुख अपनाया है। राउत ने कहा, "आप (एनडीए) दावा करते हैं कि आपके पास बहुमत है… आप वोट क्यों मांग रहे हैं और आपको ऐसा करने का क्या अधिकार है।" एनडीए ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है, जबकि इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है।  

राहुल गांधी की सुरक्षा को और सख्त करने की मांग, कांग्रेस नेता ने केंद्रीय गृह मंत्री को लिखा पत्र

नई दिल्ली  उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की समुचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। उन्होंने इस पत्र को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया है। राय ने गुरुवार को लिखे गये पत्र में कहा है “जन प्रतिनिधियों को अपने राजनीतिक और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए जनता और समर्थकों से निरंतर संवाद करना पड़ता है। हालांकि, किसी भी गणमान्य राजनेता का जीवन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और उनकी सुरक्षा के लिए सर्वोत्तम व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिये।'' उन्होंने आगे लिखा, ''लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की व्यक्तिगत सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी कांग्रेस और भारतीय राजनीति के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। वर्तमान में वह बिहार में जन अधिकार यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें उनके विचारों को सुनने और देखने के लिए लाखों लोग एकत्र हो रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में राहुल गांधी की उच्चतम स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी के परिजन अतीत में आतंकी हिंसा का शिकार हुए हैं, जिसमें सुरक्षा चूक एक प्रमुख कारक रही थी। राय ने आशा व्यक्त की कि गृह मंत्री राहुल गांधी की सुरक्षा के लिए उनकी इस चिंता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक निर्देश जारी करेंगे।  

जिला अध्यक्षों पर पार्टी की नजर, कांग्रेस ने लॉन्च किया रिपोर्टिंग एप

भोपाल   मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने नए जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां कर दी हैं, जिसके बाद अब कांग्रेस 'मिशन-2028' की तैयारियों में अभी से जुटती नजर आ रही है. एक तरफ कई जिलों में कांग्रेस के जिलाध्यक्षों का विरोध देखा गया था, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने विरोधों को दरकिनार करते हुए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. खास बात यह है कि एमपी कांग्रेस अब टेक्नोलॉजी का सहारा लेती भी नजर आ रही है, जहां मप्र कांग्रेस जिलाध्यक्षों के कामकाज पर तकनीक से नजर रखेगी. कांग्रेस पार्टी ने इसके लिए रिपोर्टिंग एप तैयार करवाया है, जिसमें सभी जिलाध्यक्षों को अपनी हर दिन की जानकारी अपलोड करनी होगी. इस तरह का प्रयोग मध्य प्रदेश कांग्रेस में पहली बार हो रहा है.  भोपाल से दिल्ली जाएगी रिपोर्ट  बताया जा रहा है कि कांग्रेस के सभी नए जिलाध्यक्षों को इस एप के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की तरफ से ट्रेनिंग भी दी जाएगी. बताया जा रहा है कि अगर यह एप सफल रहता है तो यह प्रयोग कांग्रेस देश के सभी राज्यों में लागू करेगी. इससे पहले 24 अगस्त को दिल्ली में कांग्रेस के सभी 71 नए जिलाध्यक्षों की ट्रेनिंग रखी गई है, जिसमें कांग्रेस के सीनियर नेता और जानकर उन्हें जिम्मेदारी और रणनीति के बारें में बताएंगे. इस बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी भी मौजूद रहेंगे, वहीं यह भी बताया जा रहा है कि जिलाध्यक्षों की पूरी रिपोर्ट जीतू पटवारी कांग्रेस आलाकमान के पास दिल्ली में भेजेंगे ताकि यहां से भी कांग्रेस जिलाध्यक्षों के कामकाज पर नजर रखी जा सके.  कांग्रेस जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद से मचे बवाल को लेकर अब संगठन डैमेज कंट्रोंल में जुट गया है। इसी कड़ी में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद अब मध्य प्रदेश कांग्रेस उनके कामकाज पर भी तकनीकी रूप से नजर रखने का काम करेगी। उनकी निगरानी के लिए पार्टी ने एक रिपोर्टिंग एप तैयार किया है। बताया जा रहा है कि, इस एप पर ये सभी जिला अध्यक्ष रोजाना अपने कामकाज का अपडेट अपलोड करेंगे। कांग्रेस संगठन में ये प्रयोग पहली बार मध्य प्रदेश से शुरू होने जा रहा है। एप सफल रहा तो एआईसीसी (ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी) इसे अन्य राज्यों में भी लागू करेगी। दिल्ली में सभी 71 नए जिलाध्यक्षों की ट्रेनिंग 24 अगस्त को इसी विषय को लेकर दिल्ली में सभी 71 नए जिलाध्यक्षों की ट्रेनिंग रखी गई है। सत्र में अध्यक्ष को जिम्मेदारियों और रणनीति की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी भी मौजूद रहेंगे। नए जिला अध्यक्षों को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी संबोधित करेंगे। एमपी में पकड़ मजबूत करना चाहती है कांग्रेस  कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश में अपनी पकड़ को और मजबूत बनाने में जुटी है. इसलिए पार्टी तकनीक का सहारा भी ले रही है, वहीं इस एप के जरिए जिलाध्यक्षों की सक्रियता, कार्यप्रणाली और क्षेत्रीय पकड़ को भी बारीकी से पकड़ा जा सकेगा, कांग्रेस का यह प्रयास न केवल संगठन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है. जीतू पटवारी भी यह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कांग्रेस जिलाध्यक्षों को मजबूती से काम करना होगा, अगर कोई जिलाध्यक्ष मजबूती से काम नहीं करता है तो फिर उसे जिम्मेदारी से हटाया जाएगा.  वहीं दूसरी तरफ लगातार हो रहे हैं कांग्रेस जिलाध्यक्षों के विरोध पर पार्टी ने और सख्ती दिखा दी है. चेतावनी पत्र जारी करने के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि जो लोग जिलाध्यक्षों का विरोध कर रहे हैं उनके खिलाफ अब नोटिस जारी किया जाएगा. बता दें कि भोपाल, देवास, इंदौर, उज्जैन समेत कई जिलों से जिलाध्यक्षों के विरोध के स्वर उठे थे, जिस पर अब सख्ती से कार्रवाई के संकेत पीसीसी चीफ की तरफ से दिए गए हैं.  

जेल में बंद मंत्रियों की बर्खास्तगी पर विधेयक, चिदंबरम ने जताई आश्चर्यजनक प्रतिक्रिया

नई दिल्ली  पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने गुरुवार को 130वें संविधान संशोधन विधेयक को अजीब और असंवैधानिक बताया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर किसी को 30 दिनों तक जमानत नहीं मिलती तो क्या वह मुख्यमंत्री या मंत्री नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि जनता का फैसला किसी एक गिरफ्तारी की वजह से पलट दिया जा सकता है। दुनिया में इससे ज्यादा अजीब कोई भी बात नहीं सुनी जा सकती। पेशे से वकील पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर इस विधेयक के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने लिखा, "कोई आरोप नहीं, कोई मुकदमा नहीं, कोई दोष सिद्दी नहीं… लोकतांत्रिक देश में एक गिरफ्तारी (आम तौर पर फर्जी आरोपों के आधार पर) के आधार पर जनता के फैसले को पलट दिया जाएगा।" निचली अदालतें नहीं देती जमानत: चिदंबरम पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आजकल निचली अदालतें शायद ही कभी जमानत देती हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट भी इसमें आनाकानी करता है। उन्होंने न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा, “हर महीने सुप्रीम कोर्ट में हजारों जमानत याचिकाएं आती हैं। इस प्रक्रिया में कई हफ्ते लग जाते हैं। इसी बीच, जो 30 दिन की मोहलत सरकार दे रही है उसकी तारीख भी निकल जाएगी। परिणामस्वरूप गलत आरोपों के आधार पर एक सरकार अस्थिर हो जाएगी। क्या इससे ज्यादा गैर-कानूनी, असंवैधानिक और लोकतंत्र विरोधी या संघीय विरोधी कुछ हो सकता है?” गौरतलब है कि कल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच लोकसभा में यह बिल पेश किया था। इसके बाद विपक्ष के प्रदर्शन को देखते हुए इस विधेयक को संसद की संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया, इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्य सभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। इस विधेयक के मुताबिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद पर रहते हुए अगर किसी पांच साल तक की सजा हो सकने वाले अपराध के तहत 30 दिन तक जेल में गुजारते हैं। तो ऐसे मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों या पीएम को पद से हटाया जा सकता है। फिर चाहें वह दोषी साबित हुए हों या फिर नहीं। इस विधेयक को लेकर विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के कानून के जरिए राज्य सरकारें, खासकर विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य सरकारें अस्थिर हो जाएंगी। विपक्ष ने दावा किया कि भाजपा शासित केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों को फंसाने, उन्हें सलाखों के पीछे डालने और फिर उन्हें पद से हटाने की योजना बना रही है। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए राजनीति में गिरते नैतिक मानकों को ऊपर उठाना और इसे ईमानदार बनाए रखने वाला बताया। आपको बता दें यह बिल ऐसे समय में आया है जब कुछ महीने पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री पद अरविंद केजरीवाल जेल से सरकार चला रहे थे। वहीं दूसरी ओर झारखंड के मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन ने भी जेल गए थे। हालांकि उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था।  

राहुल गांधी की एंट्री पर सस्पेंस, तेजस्वी संभालेंगे कमान; इंडिया गठबंधन वर्कर करेंगे डोर-टू-डोर कैंपेन

पटना  बिहार में विधानसाभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन वोट अधिकार यात्रा कर रहा है। इंडिया गठबंधन ने मतदाता अधिकार यात्रा के साथ अपने वादों की पोटली भी खोल दी है। गठबंधन के कार्यकर्ता यात्रा के दौरान घर-घर अधिकार का पर्चा भी बांटेंगे। गुरुवार को 5वें दिन की यात्रा शेखपुरा से शुरू होगी। रात्रि विश्राम मुंगेर में होगा। वहीं राहुल गांधी दिल्ली में उपराष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी गतिविधियों में व्यस्त रहने के चलते गुरुवार की शाम से यात्रा में शामिल होंगे। गुरुवार की सुबह शेखपुरा से यात्रा में तेजस्वी यादव और अन्य नेता मौजूद रहेंगे। बुधवार को यात्रा का विश्राम दिन रहा। वहीं, यात्रा में 28 अगस्त को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल होंगे। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में अखिलेश यादव का जुड़ना वोट चोरी के ख़िलाफ़ हमारे इस जन आंदोलन को और मज़बूत करेगा। घर-घर अधिकार का पर्चा में वादों का गुलदस्ता समाहित किया गया है। इस पर्चे में गठबंधन के सभी नेताओं को जगह दी गई है। राहुल-तेजस्वी संग माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, भाकपा के डी राजा को भी जगह दी गई है। इसमें कमाई, दवाई, पढ़ाई और सामाजिक न्याय के अधिकार से संबंधित वादे गिनाए गए हैं। गठबंधन ने इसी के इर्द-गिर्द चुनावी घोषणा पत्र तैयार करने का मन बनाया है।  

महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, राज ठाकरे और फडणवीस की मीटिंग पर अजित पवार का बयान चर्चा में

मुंबई  महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच गुरुवार हुई मुलाकात पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में संवाद बनाए रखना एक परंपरा रही है। इससे एक दिन पहले ही मनसे और शिवसेना (UBT) को BEST चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। वर्धा में पत्रकारों से बातचीत में पवार ने कहा, 'कई नेता एक-दूसरे से और मुख्यमंत्री से मिलते हैं, चाहे वे नेता सत्ता में हों या नहीं। एक-दूसरे के साथ संवाद बनाए रखना राज्य की परंपरा है। इस मुलाकात को राजनीतिक रंग देने की कोई जरूरत नहीं है।' इससे पहले राज ठाकरे ने फडणवीस से दक्षिण मुंबई में स्थित उनके आधिकारिक बंगले 'वर्षा' में मुलाकात की थी, जिससे राज्य के राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई थीं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बेस्ट कर्मचारी सहकारी ऋण समिति का चुनाव मिलकर लड़ने वाली उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राज ठाकरे की मनसे को बुधवार को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है। दोनों पार्टियों ने पहली बार मिलकर कोई चुनाव लड़ा था, हालांकि उनका संयुक्त पैनल 21 में से एक भी पद नहीं जीत पाया। फडणवीस ने दोनों पार्टियों पर ‘‘ठाकरे ब्रांड’’ के नाम पर क्रेडिट सोसायटी चुनाव का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया था। राज्य में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए शिवसेना (UBT) और मनसे के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं हो रही हैं। राज ठाकरे क्या बोले मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ठाकरे ने कहा, 'महाराष्ट्र के शहरों में पुनर्विकास हो रहा है। जनसंख्या बढ़ रही है…, यातायात बढ़ रहा है… और यहां बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। मुंबई में ट्रैफिक बड़ी समस्या है। लोगों को ट्रैफिक के नियम नहीं पता। वो कहीं भी गाड़ियां पार्क कर देते हैं और चले जाते हैं।' उन्होंने कहा, 'आज मैंने मुख्यमंत्री के साथ-साथ मुंबई पुलिस से चर्चा की।'