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BEST टेस्ट में फेल होकर फडणवीस से मिले राज, ठाकरे परिवार में फिर दरार के संकेत

मुंबई  महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की, जिससे राज्य के राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बेस्ट कर्मचारी सहकारी ऋण समिति का चुनाव मिलकर लड़ने वाली उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) और मनसे को बुधवार को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है। दोनों पार्टियों ने पहली बार मिलकर कोई चुनाव लड़ा था, हालांकि उनका संयुक्त पैनल चुनाव में एक भी पद नहीं जीत पाया। राज्य में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए शिवसेना (UBT) और मनसे के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, इसे लेकर किसी भी दल ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा था। हाल ही में मराठी भाषा को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में राज और उद्धव साथ नजर आए थे। हार पर फडणवीस ने कसा तंज फडणवीस ने बुधवार को कहा कि BEST चुनाव में शिवसेना (UBT) और मनसे की हार ‘ठाकरे ब्रांड’ की सार्वजनिक अस्वीकृति को दर्शाती है। उन्होंने ठाकरे भाइयों के नेतृत्व वाली दोनों पार्टियों पर इस चुनाव का राजनीतिकरण करने के लिए निशाना साधा। शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का संयुक्त पैनल सोमवार को चुनाव में सभी 21 सीट हार गया। फडणवीस ने संवाददाताओं से कहा, 'मुझे लगता है कि इस तरह के चुनाव का राजनीतिकरण करने की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि यह केवल एक ऋण समिति का चुनाव था। लेकिन उन्होंने ठाकरे ब्रांड की जीत के बड़े-बड़े दावे करके इसका राजनीतिकरण कर दिया। लेकिन ऐसा लगता है कि लोगों को यह पसंद नहीं आया। चुनाव के नतीजे लोगों की अस्वीकृति को दर्शाते हैं।' महाराष्ट्र में भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कहा कि यह परिणाम ठाकरे भाइयों के घटते प्रभाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'उद्धव और राज ठाकरे ने बेस्ट चुनाव को लेकर एक साथ आकर खूब शोर मचाया। ऐसा दिखाया गया मानो उनकी जीत आसान हो, लेकिन मनसे के हाथ मिलाने के बावजूद यह सहकारी संस्था में एक भी सीट नहीं जीत पाए, जिस पर वर्षों से शिवसेना (UBT) का दबदबा रहा है।' BEST चुनाव बेस्ट क्रेडिट सोसाइटी का चुनाव लड़ने के लिए शिवसेना (UBT) और मनसे ने ‘उत्कर्ष’ नाम का एक पैनल गठित किया था। इस पैनल में 21 सदस्य थे, जिनमें से शिवसेना (UBT) से 18, मनसे से दो और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संघ से एक सदस्य थे। शिवसेना (UBT) और मनसे के नेताओं ने कहा था कि बेस्ट में मनसे के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है, लेकिन यह चुनाव दोनों पार्टियों को राज्य में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले एक साथ आने का मौका देगा।  

उपराष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस की रणनीति तेज, राहुल गांधी ने किया सुदर्शन रेड्डी पर भरोसा

 नई दिल्ली उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्षी गठबंधन ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है। विपक्ष का दावा है कि यह चुनाव सिर्फ एक पद के लिए नहीं, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को रेड्डी के समर्थन में एकजुट होकर यह संदेश दिया कि विपक्ष अब संविधान विरोधी ताकतों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह चुनाव संविधान को बचाने वालों और उस पर हमला करने वालों के बीच की लड़ाई है। उन्होंने बताया कि रेड्डी ने तेलंगाना में जाति जनगणना पर काम किया और सामाजिक न्याय की दिशा में ठोस दृष्टिकोण तैयार किया। राहुल ने एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए कहा कि जब उन्होंने रेड्डी से बातचीत की, तो उनकी जेब में संविधान की प्रति थी। रेड्डी ने उन्हें बताया कि वे पिछले 52 वर्षों से संविधान अपने साथ रखते हैं क्योंकि किसी भी कानूनी बहस का अंतिम उत्तर संविधान ही होता है। राहुल ने कहा कि यही प्रतिबद्धता आज देश को चाहिए। मल्लिकार्जुन खरगे ने भी लगए आरोप कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि बीते 11 वर्षों में सत्तारूढ़ भाजपा ने अपनी संसदीय बहुमत का बार-बार दुरुपयोग किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जैसी स्वायत्त एजेंसियों को विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस्तेमाल किया है। खरगे ने कहा कि अब नए विधेयक भी विपक्षी सरकारों को कमजोर करने और उन्हें अस्थिर करने के औजार बना दिए गए हैं। उनके अनुसार, संसद में लगातार विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है और गंभीर जनहित के मुद्दों पर बहस तक नहीं होने दी जा रही। रेड्डी की उम्मीदवारी को विपक्ष ने बताया ऐतिहासिक खरगे ने जोर देकर कहा कि ऐसे समय में बी. सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी विपक्ष की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रेड्डी का जीवन और काम संविधान की आत्मा को दर्शाता है न्याय, करुणा और हर नागरिक को सशक्त बनाने की भावना। विपक्ष का मानना है कि रेड्डी उपराष्ट्रपति पद पर बैठकर न केवल लोकतंत्र की रक्षा करेंगे बल्कि देश को न्याय और एकता की नई दिशा देंगे। इंडिया गठबंधन की बैठक और रणनीति इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन के केंद्रीय हॉल में रेड्डी से मुलाकात की और आगामी चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा की। विपक्षी दलों ने दावा किया कि यह चुनाव भाजपा के लिए सत्ता का खेल हो सकता है, लेकिन उनके लिए यह संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती का सवाल है। सभी विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से रेड्डी को समर्थन देने का ऐलान किया और सांसदों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक प्रयास में साथ खड़े हों। विपक्ष का कहना है कि अब वक्त आ गया है जब संसद में सत्ता के दुरुपयोग और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिशों के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया जाए।

तमिलनाडु में बीजेपी का बड़ा आयोजन: 22 अगस्त को बूथ समिति सम्मेलन, अमित शाह देंगे संबोधन

चेन्नई,  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने घोषणा की है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अगस्त को तिरुनेलवेली में पार्टी के पहले बूथ समिति जोन सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जिसमें एक लाख से अधिक बूथ स्तर के कार्यकर्ता भाग लेंगे। तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंथ्रन के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक को पार्टी 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा मोड़ मान रही है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ए.एन.एस. प्रसाद के अनुसार, इस बैठक में पांच लोकसभा क्षेत्रों और 28 विधानसभा क्षेत्रों की 8,595 बूथ समितियों के प्रतिनिधि एकत्रित होंगे। उन्होंने इस आयोजन को एक ‘ऐतिहासिक आंदोलन’ बताया जिसका उद्देश्य द्रमुक के ‘भ्रष्ट और दमनकारी शासन’ को खत्म करना और एनडीए को 200 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में जीत के लिए तैयार करना है। यह सम्मेलन तिरुचेंदूर में आयोजित किया जाएगा, जिसे पार्टी ने ‘भगवान मुरुगन की पवित्र भूमि’ कहा है। ए.एन.एस. प्रसाद ने अमित शाह को ‘चुनावी विजय सम्राट’ और ‘कुशल रणनीतिकार’ कहा। उन्होंने बताया कि शाह जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने और बूथों को पार्टी के प्रचार तंत्र के आधार के रूप में मजबूत करने के लिए डिजाइन किए गए एक विस्तृत चुनावी रोडमैप का अनावरण करेंगे। पार्टी ने कहा कि प्रशिक्षण सत्र डीएमके की वोट खरीदने की रणनीतियों और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का मुकाबला करने पर केंद्रित होंगे। भाजपा नेताओं ने डीएमके सरकार की विफलताओं को उजागर करने का भी संकल्प लिया और उस पर ‘अराजकता, भ्रष्टाचार, बढ़ते अपराध, अवैध शराब से होने वाली मौतों और करों में भारी वृद्धि’ का आरोप लगाया। प्रसाद ने आगे कहा कि भाजपा यह सुनिश्चित करेगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कल्याणकारी योजनाओं और केंद्र सरकार की परियोजनाओं को घर-घर तक पहुंचाया जाए, और केंद्र के खिलाफ डीएमके द्वारा किए जा रहे ‘निराधार प्रचार’ का मुकाबला किया जाए। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य बूथ-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से राज्य में 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करना है। सम्मेलन में तमिलनाडु के वरिष्ठ भाजपा नेता और महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में हाल ही में नामित किए जाने पर भी प्रकाश डाला जाएगा। पार्टी ने इसे राज्य के लिए ‘गर्व की बात’ और प्रधानमंत्री मोदी के ‘तमिलनाडु के प्रति विशेष स्नेह’ का प्रतिबिंब बताया। तिरुनेलवेली कार्यक्रम के बाद, भाजपा ने अगले कुछ महीनों में मदुरै, कोयंबटूर, सलेम, तंजावुर, तिरुवन्नामलाई और तिरुवल्लूर में इसी तरह के सम्मेलनों की योजना बनाई है, जिनमें राष्ट्रीय नेताओं के भाग लेने की उम्मीद है। पोन राधाकृष्णन, डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन, के. अन्नामलाई, केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन, एच. राजा और अभिनेता से नेता बने सरथकुमार सहित वरिष्ठ नेता भी तिरुनेलवेली बैठक को संबोधित करने वाले हैं। अमित शाह की उपस्थिति से, भाजपा अपने जमीनी कार्यकर्ताओं में जोश भरने, एनडीए को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने और पूरे तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके को चुनौती देने के अपने इरादे का संकेत देने की उम्मीद कर रही है।  

CM सुक्खू ने विधायक पत्नी के विधानसभा क्षेत्र को दी राहत और विकास की सौगातें

शिमला  हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर भी विधायक हैं. ऐसे में सीएम सुक्खू की अपनी पत्नी कमलेश ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र पर खास मेहरबानी रहती है. ताजा मामले में अब देहरा में आरटीओ दफ्तर खोलने की नोटिफिकेशन जारी की गई है. दरअसल. इस रिजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस के तहत, ज्वाली, ज्वालामुखी, इंदौरा और फतेहपुर को शामिल किया गया है. पत्नी के विधानसभा क्षेत्र के लिए नई दफ्तर खोलने की घोषणा करना नई बात नहीं है. सीएम सुक्खू ने इससे पहले भी कई ऐलान देहरा के लिए किए है. जानकारी के अनुसार, सुक्खू सरकार में सबसे पहले यहां पर एसपी दफ्तर खोला था और देहरा को 14वां पुलिस जिला बनाया गया. पांच नवंबर 2024 में यह दफ्तर शुरू हुआ था. वहीं, लोक निर्माण विभाग (PWD) का सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर कार्यालय भी खोला गया है. इसके, अलावा, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड (HPSEB) का सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर दफ्तर, जल शक्ति विभाग का सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) दफ्तर भी देहरा को सीएम सुक्खू की पत्नी के विधायक बनने के बाद दिया गया. जून में देहरा आए थे सीएम हाल ही में जून महीने में सीएम सुक्खू ने देहरा का दौरा किया था और हरिपुर तहसील के बनखंडी में दुर्गेश अरण्य वन्य प्राणी उद्यान में 47.62 करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल प्रशासन, डायगनोस्टिक ब्लॉक, केन्द्रीकृत रसोईघर व क्वारंटीन केंद्र और 16.25 करोड़ रुपये की लागत से उठाऊ पेयजल योजना की आधारशिला रखी. गौरतलब है कि देहरा में अकेले टूरिज्म सेक्टर पर 100 करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान सरकार का है. देहरा पर मेहरबानी क्यों गौरतलब है कि देहरा में 2024 में उपचुनाव हुए थे तो इसमें सीएम की पत्नी कमलेश ठाकुर की जीत हुई थी. वहीं, देहरा सीएम सुक्खू का ससुराल भी है. पत्नी के मायके देहरा के लिए सीएम सुक्खू अक्सर घोषणाएं करते रहते हैं. पत्नी के बहाने सीएम को घेरती रहती है भाजपा बुधवार को भारतीय जनता पार्टी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरा और साथ ही कहा कि सरकार नई जॉब ट्रेनी पॉलिसी को रद्द करे. भाजपा विधायक सतपाल सत्ती ने तंज कसते हुए कहा महिलाओं को पेंशन का वादा पूरा न करने पर माफी सीएम को माफी मांगनी चाहिए. सत्ती ने कहा कि आपने भाभी जी को तो पेंशन लगा दी, क्या सभी महिलाओं को पेंशन देंगे. इस पर सीएम ने कहा कि पेंशन नहीं अभी सैलरी लगी है और वो भी भाजपा की वजह से लगी है.

ठाकरे ब्रदर्स के लिए हार, सोसाइटी चुनाव में साथ आने के बावजूद जीत नहीं मिली

मुंबई  महाराष्ट्र की राजनीति में करीब 20 साल बाद साथ आए ठाकरे ब्रदर्स को पहले ही चुनाव में बड़ा झटका लगा है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) की तरफ से समर्थित 'उत्कर्ष' पैनल को बेस्ट क्रेडिट सोसाइटी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. ठाकरे ब्रदर्स की ओर से समर्थित पैनल को 21 में से एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई है.  एक सीट भी नहीं जीत पाए ठाकरे ब्रदर्स बेस्ट सोसाइटी चुनाव के नतीजों में शशांक राव के पैनल ने 14 सीटें हासिल जीतीं, जबकि महायुति पैनल ने सात सीटें हासिल कीं, जिससे सहकारी समिति पर ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का नौ साल पुराना प्रभुत्व अब खत्म हो गया. ठाकरे ब्रदर्स के बीच गठबंधन के कारण इस चुनाव पर सभी की नजरें थीं. लेकिन नतीजे ने उनके संयुक्त राजनीतिक प्रभाव को एक बड़ा झटका दिया. शशांक राव का पैनल विनर के तौर पर उभरा, जबकि बीजेपी और सहयोगियों वाले महायुति गठबंधन ने सम्मानजनक हिस्सेदारी हासिल की. उत्कर्ष पैनल का खाता न खोल पाने से आगामी मुंबई नगर निगम चुनावों से पहले ठाकरे गुट की प्रासंगिकता पर अब सवाल उठ खड़े हो गए हैं. चुनाव शशांक राव पैनल को 21 में से 14 सीटे, महायुति पैनल को सात सीटें हासिल हुईं, जबकि ठाकरे ब्रदर्स का उत्कर्ष पैनल अपना खाता भी नहीं खोल पाया है. काम नहीं आई एकजुटता उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की ओर से साल 2006 में शिवसेना से अलग होकर बनाई गई एमएनएस पार्टी ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी रही हैं. हालांकि, हाल के राजनीतिक बदलावों ने मुंबई के नगर निगम चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का मुकाबला करने के लिए एक संभावित गठबंधन की चर्चाओं को जन्म दिया है. बेस्ट चुनाव को उनकी संयुक्त रणनीति के लिए एक लिटमस टेस्ट के रूप में देखा गया, जिसका मकसद मराठी भाषी समुदायों और बेस्ट कर्मचारियों के बीच अपने बेस वोटबैंक का फायदा उठाना था. लेकिन यह हार उनके जनाधार को एकजुट करने में चुनौतियों का संकेत देती है और बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों के लिए उनकी रणनीति को प्रभावित कर सकती है, जहां मुंबई के नगर निकाय पर कब्जा दांव पर है. शशांक राव पैनल का दबदबा शशांक राव मुंबई के एक प्रमुख ट्रेड यूनियन नेता हैं, जिन्हें बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन (BEST) कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले बेस्ट वर्कर्स यूनियन के प्रमुख के रूप में उनकी प्रभावशाली भूमिका के लिए जाना जाता है. अनुभवी यूनियन नेता शरद राव के बेटे होने के नाते, शशांक ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया है और बेस्ट कर्मचारियों, ऑटो-रिक्शा चालकों और अन्य श्रमिक समूहों के अधिकारों की वकालत की है, जिसका मुख्य उद्देश्य श्रमिकों की शिकायतों का समाधान करना है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की एमएनएस की तरफ से समर्थित 'उत्कर्ष' पैनल को एक बड़ा झटका लगा है, और वह बेस्ट सोसाइटी के चुनावों में एक भी सीट जीतने में असफल रहा, जिसमें 21 उम्मीदवार थे. यह हार ठाकरे ब्रदर्स के अप्रत्याशित गठबंधन के लिए एक बहुत बड़ा सबक है और इससे मुंबई नगर निगम चुनावों से पहले उनकी संयुक्त रणनीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जहां उनका मकसद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को चुनौती देना है.

ट्वीट विवाद में संजय कुमार ने जताई खेद, चुनाव आयोग पर कांग्रेस का दबाव खत्म

मुंबई  चुनाव विश्लेषक और लोकनीति- CSDS के कोऑर्डिनटर संजय कुमार ने महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट पर सवाल उठाने को लेकर माफी मांगते हुए अपना पुराना ट्वीट डिलीट कर दिया है। संजय कुमार के इन आंकड़ों का सहारा लेते हुए कांग्रेस चुनाव आयोग पर आक्रामक थी। राहुल गांधी ने कई बार संजय कुमार के इस ट्वीट का जिक्र कर चुनाव आयोग पर निशाना साधा था। अब संजय कुमार ने माफी मांगते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के आंकड़ों की तुलना करने में गलती हो गई थी। संबंधित ट्वीट डिलीट कर दिया गया है। संजय कुमार ने कहा कि डेटा टीम से आंकड़ों का अध्ययन करने में गलती हो गई थी। हमारा उद्देश्य किसी तरह की गलत जानकारी देना नहीं था। संजय कुमार के माफी मांगने के बाद बीजेपी को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। बीजेपी ने कहा कि यह एक 'ईमानदारी वाली गलती' थी। बीजेपी के आईटी चीफ अमित मालवीय ने कहा, हर चुनाव में यही होता है कि पहले कहा जाता है कि बीजेपी हार रही है। वहीं जब बाजी पलट जाती है तो इस बात पर चर्चा शुरू होती है कि बीजेपी आखिर कैसे जीत गई। यही लोग किसी तरह समझाते हैं कि बीजेपी कैसे जीती। उन्हें लगता है कि टीवी देखने वाली जनता मूर्ख है। उन्होंने कहा, सीएसडीएस ने बिना जांचे-परखे ही आंकड़े पोस्ट कर दिए। इससे कांग्रेस को महाराष्ट्र में प्रपंच गढ़ने का मौका मिल गया। क्या था संजय कुमार का दावा डिलीट किए गए ट्वीट में संजय कुमार ने दावा किया था कि महाराष्ट्र की रामटेक विधानसभा नंबर 59 में लोकसभा चुनाव के वक्त कुल 466203 वोटर थे, जबकि विधानसभा चुनाव के दौरान यह संख्या घटकर केवल 286931 रह गई। ऐसे में दोनों चुनाव के बीच वोटरों की संख्या 38 फीसदी तक कम हो गई। संजय कुमार ने एक और दावा किया था कि देवलाली विधानसभा सीट पर लोकसभा चुनाव के दौरान 4,56,072 वोटर थे जो कि विधानसभा चुनाव के दौरान 2,88,141 ही रह गए। ऐसे में 36 फीसदी वोटर कम हो गए। बीजेपी ने कहा, जिन संस्थानों के आंकडों पर राहुल गांधी को भरोसा है, वे स्वीकार कर रहे हैं कि उनके आंकड़े ही गलत थे। यह केवल महाराष्ट्र के वोटर्स को बदनाम करने की कोशिश है। चुनाव आयोग से चल रही है तनातनी राहुल गांधी इन दिनों बिहार में वोटर अधिकार यात्रा कर रहे हैं। 7 अगस्त को राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर 'वोट' चोरी के आरोप लगाते हुए प्रजेंटेशन दिया था। उन्होंने कहा था कि कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा सीट में वोटर लिस्ट में धांधली की गई। वहीं संजय कुमार के डेटा का उदाहरण देते हुए भी उन्होंने महाराष्ट्र में वोट चोरी का आरोप लगाया था। राहुल गांधी ने कहा कि बिहार में भी एसआईआर करवाकर केवल सरकार वोटों की चोरी करवाना चाहत है। उन्होंने चुनाव आयोग और बीजेपी की साठगांठ के भी आरोप लगाए। इसके बाद चुनाव आयोग ने भी राहुल गांधी पर पलटवार किया और उनके दावों को खारिज कर दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि राहुल गांधी निराधार दावे कर रहे हैं और इसके लिए उन्हें शपथपत्र देकर देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना चाहता है विपक्ष? खबर यह भी है कि इंडिया गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना चाहता है। विपक्ष का कहना है कि ज्ञानेश कुमार बीजेपी के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इंडिया गठबंधन की बैठक के दौरान महाभियोग पर चर्चा की गई। हालांकि किसी नेता ने इसकी पुष्टि नहीं की है।  

पंजाब सरकार की निगरानी कर रहे हैं केजरीवाल, बोले AAP नेता

नई दिल्ली दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि राजधानी में पार्टी की हार के बाद से अरविंद केजरीवाल का फोकस गोवा, पंजाब और गुजरात पर है। वह इन राज्यों में संगठन को मजबूती और विस्तार देने में जुटे हैं। सौरभ भारद्वाज ने यह भी कहा कि अरविंद केजरीवाल पंजाब में सरकार के कामकाज की देखभाल कर रहे हैं। भारद्वाज का ऐसा कहना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब में कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि अरविंद केजरीवाल पंजाब में सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप कर रहे हैं। आप के राष्ट्रीय संयोजक को विपक्षी दल 'सुपर सीएम' भी कहकर तंज कसते हैं। सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि केजरीवाल खाली बैठने वाले नहीं है। 8 फरवरी को दिल्ली में उनकी पार्टी की हार हुई और अगले दिन सुबह से वह गुजरात, गोवा और पंजाब पर काम कर रहे हैं। हार के बाद अधिकतर समय दिल्ली से बाहर रहने से जुड़े एक सवाल के जवाब में पूर्व मंत्री ने कहा, 'उनके पास टाइम नहीं है मिलने का छोटी-मोटी चीजों के लिए। मैं उनके पास जाता हूं कभी गुजरात के लिए लोग बैठे होते हैं, भी पंजाब के लिए बैठे होते हैं, कभी गोवा के लिए बैठे होते हैं। कभी सोशल मीडिया टीम बैठी होती है।' केजरीवाल के तीन लक्ष्य, पंजाब में सरकार के कामकाज की देखभाल भी: भारद्वाज सौरभ भारद्वाज ने कहा, 'अरविंद केजरीवाल लगातार पार्टी को विस्तार देने के लिए काम कर रहे हैं। उनके तीन लक्ष्य हैं, वह गोवा में पार्टी को विस्तार दे रहे हैं, दूसरा- गुजरात में विस्तार कर रहे हैं। तीसरा पंजाब में जो सरकार के काम चल रहे हैं उसकी थोड़ी देखभाल कर रहे हैं और पंजाब में जो हमारा संगठन है उसको लगातार मजबूत कर रहे हैं।' अभी कम हैं दिल्ली में दिखने को मौके: सौरभ भारद्वाज यह पूछे जाने पर कि उन्होंने खुद को दिल्ली का बेटा कहा था और हारते ही बाहर चले गए, क्या यह धोखा नहीं है? इस सवाल के जवाब में भारद्वाज ने कहा कि उनकी दिल्ली पर नजर है, लेकिन कम दिख रहे हैं। सही समय पर वह दिल्ली में भी दिखेंगे। भारद्वाज ने कहा, ‘जब झुग्गी झोपड़ी वाला मुद्दा हुआ तो अरविंद जी ने हमें बुलाया और कहा कि यह बहुत क्रूर है। इसके लिए आंदोलन करना पड़ेगा। रूपरेखा बनाई, हम लोग गली-गली गए, बड़ा आंदोलन किया। हमने स्कूल के लिए जो पर्चा बांटा है, उन्हें दिखाया उन्होंने संशोधन कराए। एक-एक चीज पर उनकी नजर है। हां, सार्वजनिक रूप से कम दिख रहे हैं, क्योंकि एक मुख्यमंत्री के तौर पर ऐसा ज्यादा होता था, अब आप विपक्ष में है, इसलिए मौके कम है। जब सही समय आएगा वह दिल्ली में दिखेंगे। राष्ट्रीय राजनीति में भी कम उठाते हैं मुद्दे हैं, जहां उनका फोकस है वह बता दिया मैंने आपको।’  

TMC ने INDIA ब्लॉक से दूरी बनाई, उपराष्ट्रपति चुनाव में रखी ये मांग

कलकत्ता उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर NDA और विपक्षी INDIA गठबंधन के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है. एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि विपक्षी पार्टियों के बीच अब भी आखिरी सहमति नहीं बन पाई है. सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मानना है कि INDIA गठबंधन का उम्मीदवार तमिलनाडु से नहीं होना चाहिए, और साथ ही ममता बनर्जी की पार्टी ने उम्मीदवार को लेकर अपनी मंशा भी जाहिर की है. टीएमसी चाहती है कि विपक्ष एक नॉन-पॉलिटिकल उम्मीदवार उतारे, जो बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ लड़ाई को मज़बूत कर सके. टीएमसी का कहना है कि यह चुनाव सिर्फ पद की लड़ाई नहीं बल्कि संविधान और "आइडिया ऑफ इंडिया" को बचाने की जंग है. टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास से निकलते समय बताया था कि "कल (मंगलवार) दोपहर 12.30 बजे मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर INDIA गठबंधन की बैठक होगी." उन्होंने भरोसा जताया कि विपक्ष शाम तक एक मजबूत उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर देगा. एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को बनाया है अपना उम्मीदवार दूसरी तरफ, एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का राजनीतिक करियर लंबा और प्रभावशाली रहा है. वह 31 जुलाई 2024 से महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं. इससे पहले फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक उन्होंने झारखंड के राज्यपाल के रूप में काम किया. इस दौरान उन्हें राष्ट्रपति की तरफ से तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के लेफ्टिनेंट गवर्नर का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था. राधाकृष्णन तमिलनाडु से आने वाले वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं और सार्वजनिक जीवन में उनका अनुभव चार दशकों से भी अधिक का है. वे दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और कोयंबटूर से संसद पहुंचे थे. 2004 से 2007 तक उन्होंने तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई. उनकी पहचान आरएसएस विचारधारा से जुड़ी हुई है. सितंबर में होंगे उपराष्ट्रपति चुनाव उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर 2025 को होना है. यह चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे के बाद कराया जा रहा है. अब देखना यह होगा कि INDIA गठबंधन किस उम्मीदवार को मैदान में उतारकर एनडीए के मुकाबले में खड़ा करता है.

राधाकृष्णन के खिलाफ ISRO वैज्ञानिक को उतारने पर विचार, विपक्ष जल्द खोलेगा पत्ता

नई दिल्ली विपक्षी नेता उपराष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त उम्मीदवार पर चर्चा के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर सोमवार शाम बैठक करेंगे। रक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने भी नए उपराष्ट्रपति के सर्वसम्मति से चुनाव के लिए राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे सहित कुछ विपक्षी दलों के नेताओं से संपर्क किया है। सूत्रों ने बताया कि विपक्ष देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए ऐसे गैर-राजनीतिक चेहरे को मैदान में उतारना चाहता है, जिसकी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और कद हो। उन्होंने बताया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के वरिष्ठ नेताओं ने उपराष्ट्रपति पद के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के एक वैज्ञानिक का नाम प्रस्तावित किया है, जो तमिलनाडु से हैं और काफी सम्मानित हैं। वरिष्ठ द्रमुक नेता तिरुचि शिवा का नाम भी चर्चा में है लेकिन अन्य विपक्षी नेताओं के साथ अभी इस पर चर्चा होनी बाकी है। शिवा ने हालांकि यह कहते हुए इस संबंध में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि इस मामले पर उनका नेतृत्व फैसला लेगा। NDA यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं जहां 2026 में चुनाव होने हैं। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी सहित ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (INDIA) के वरिष्ठ नेताओं के इस बैठक में भाग लेने की संभावना है। यह बैठक सत्तारूढ़ राजग द्वारा महाराष्ट्र के राज्यपाल राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित करने के एक दिन बाद होगी। सूत्रों ने बताया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और पश्चिम बंगाल की उनकी समकक्ष ममता बनर्जी सहित अन्य वरिष्ठ नेता विचार-विमर्श में डिजिटल माध्यम से शामिल हो सकते हैं जबकि अखिलेश यादव जैसे अन्य वरिष्ठ नेताओं के व्यक्तिगत रूप से इसमें शामिल होने की संभावना है। विपक्ष आज करेगा उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार का ऐलान एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है. लेकिन विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं और उम्मीदवार की घोषणा अभी बाकी है. सूत्रों की मानें तो आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव में इंडिया ब्लॉक का एक साझा उम्मीदवार मैदान में उतरेगा. इसको लेकर संसद में मौजूद 'सभी विपक्षी दलों के नेताओं' की बैठक आज दोपहर 12:30 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर बुलाई गई है. उम्मीद है कि बैठक के बाद आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार का नाम घोषित किया जाएगा. किन नामों पर हो रही चर्चा? सूत्रों के मुताबिक, इंडिया ब्लॉक के शीर्ष नेता कई नामों पर चर्चा कर रहे हैं. इनमें पूर्व इसरो वैज्ञानिक मैलस्वामी अन्नादुरई का नाम भी शामिल है, जिन्होंने चंद्रयान-1 परियोजना की अगुवाई की थी. विपक्ष चाहता है कि इस चुनाव को ‘लोकतंत्र और संविधान की रक्षा’ की लड़ाई के रूप में पेश किया जाए. खबरों की मानें तो जिन नामों पर चर्चा हो रही है उनमें एक नाम तमिलनाडु से डीएमके के सांसद तिरुचि सिवा का भी है. चर्चा में शामिल तुषार गांधी का भी नाम इसके अलावा, महात्मा गांधी के परपोते और इतिहासकार तुषार गांधी का नाम भी शुरुआती चर्चा में आया है, ताकि यह चुनाव भाजपा के खिलाफ एक वैचारिक संघर्ष के रूप में दिखाया जा सके. साथ ही महाराष्ट्र से एक दलित बुद्धिजीवी को भी इंडिया ब्लॉक के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में विचार किया जा रहा है. पीएम मोदी से मिले राधाकृष्णन एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन सोमवार को दिल्ली पहुंचे. एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. उनका काफिला पहले से तैयार था और इस दौरान गर्मजोशी से उनका स्वागत किया गया. दिल्ली पहुंचने के बाद राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की.

बीजेपी नेतृत्व में बड़ा बदलाव, अगला अध्यक्ष हो सकता है उत्तर भारत से

नई दिल्ली बीजेपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा? फिलहाल इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से जब इस सवाल का जवाब पूछा जाता है, तो वे कहते हैं कि अध्यक्ष तो बीजेपी का ही होगा। फिलहाल नाम नहीं बता सकते। लेकिन अब चर्चा है कि बीजेपी का अगला अध्यक्ष 'उत्तर' से हो सकता है। अब सवाल उठता है कि उत्तर से ही अध्यक्ष क्यों होगा, तो आइये जानते हैं इसके पीछे की सियासत। सीपी राधाकृष्णन की उम्मीदवारी में ही सवाल का जवाब दरअसल, रविवार को बीजेपी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए साउथ ( तमिलनाडु ) से आने वाले ओबीसी के बड़े नेता सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है। सहयोगी दलों ने भी राधाकृष्णन को समर्थन किया है। राधाकृष्णन इस वक्त महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि पार्टी का अगला अध्यक्ष कौन होगा? सीपी राधाकृष्णन की उम्मीदवारी में ही इस सवाल का जवाब छिपा है। क्षेत्रीय संतुलन का रखा जाएगा ख्याल बीजेपी के नए अध्यक्ष में क्षेत्रीय संतुलन का ख्याल रखा जाएगा। ठीक उसी तरह, जिस तरह सीपी राधाकृष्णन के चयन से पार्टी ने क्षेत्रीय संतुलन का ख्याल रखा है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा उत्तर भारत से हैं। अब चर्चा हो रही है कि नया अध्यक्ष भी उत्तर भारत से ही होगा। इसको लेकर कई कयास भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि बीजेपी अपने अप्रत्याशित फैसलों के लिए जानी जाती है। अंत में कुछ भी हो सकता है। उत्तर भारत ही क्यों? दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पूर्वी भारत से हैं। उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन दक्षिण भारत से आते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम भारत से आते हैं, और संसद में उत्तर भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि बीजेपी का अगला अध्यक्ष उत्तर भारत से हो सकता है। इन नामों की है चर्चा नए अध्यक्ष के लिए जिन नामों की सबसे अधिक चर्चा है, उनमें मनोहर लाल खट्टर, भूपेंद्र यादव और केशव प्रसाद मौर्य प्रमुख हैं, जो सभी उत्तर भारत से आते हैं। यही कारण है कि सीपी राधाकृष्णन की उम्मीदवारी के बाद कयास लग रहे हैं कि नया अध्यक्ष उत्तर भारत से हो सकता है। जातीय समीकरण को लेकर भी चर्चा बीजेपी के नए अध्यक्ष के चयन में क्षेत्र के साथ-साथ जातीय समीकरणों को लेकर भी कयास लग रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समुदाय से आती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओबीसी हैं, और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन भी ओबीसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में अनुमान है कि बीजेपी का नया अध्यक्ष सामान्य वर्ग से हो सकता है। यही कारण है कि नया अध्यक्ष किस क्षेत्र और जाति से होगा, इस पर चर्चा जोरों पर है।