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राजनीति में नया मोड़: प्रफुल्ल पटेल ने उठाया बड़ा कदम, शरद पवार की योजना पर असर

मुंबई  महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार की पिछले दिनों एक विमान हादसे में हुई मौत के बाद एनसीपी की राजनीति पूरी तरह बदल गई है. उनके निधन के चौथे दिन ही उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार राज्य के डिप्टी सीएम पद की शपथ दिला दी गई. उनके निधन को अभी केवल सात दिन हुए हैं लेकिन, ऐसा लगता है कि राज्य और एनसीपी की राजनीति में व्यापक बदलाव आ गया है. अजित पवार ने राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान अपनी इच्छा जताई थी कि एनसीपी के दोनों गुटों के कार्यकर्ता एकजुट होना चाहते हैं. इसको लेकर उनकी और उनके चाचा शरद पवार के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई है. दोनों पक्षों और शरद पवार के परिवार से भी कई ऐसे बयान आए थे जिससे लगता था कि अब फिर से परिवार एकजुट हो गया है. अजित पवार के निधन के बाद परिवार ने एकजुट होकर इस दर्द को भी झेला. सुनेत्रा पवार और उनके बेटों के साथ हर कदम पर परिवार का सदस्य दिखा. 85 वर्षीय वयोवृद्ध नेता शरद पवार ने भी मीडिया से बातचीत में यह कहा कि अजित की इच्छा एनसीपी को फिर से एकजुट करने की थी. लेकिन, उसके कुछ ही घंटों के भीतर एनसीपी की राजनीति ने करवट ले ली. सुनेत्रा पवार ने उनके निधन के महज चौथे दिन डिप्टी सीएम की शपथ ली. हद तो तब हो गई जब शरद पवार ने यह कह दिया कि उनको इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. तमाम रिपोर्ट में दावा किया गया कि एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष और अजित पवार के करीबी दोस्त रहे प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश एनसीपी के सुनील तटकरे इस पूरे मामले को हैंडल कर रहे हैं. सुनेत्रा पवार को पार्टी की कमान देने की तैयारी दरअसल, डिप्टी सीएम बनने के बाद सुनेत्रा पवार को पार्टी अध्यक्ष बनाने की तैयारी चल रही है. निधन से पहले अजित पवार के पास ही पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी थी. प्रफुल्ल पटेल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं. प्रफुल्ल पटेल ने खुद को इस रेस से बाहर करने के फैसला किया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक पटेल ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता चाहते हैं कि अध्यक्ष का पद सुनेत्रा पवार संभालें. इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने पुणे और बीड़ के पालक मंत्री की जिम्मेदारी भी सुनेत्रा पवार को दे दी है. ये जिम्मेदारी भी दिवंगत अजित पवार के पास थी. प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि सुनेत्रा पवार पार्टी अध्यक्ष का पद संभालें. हम सभी पार्टी को आगे बढ़ाने में उनके साथ हैं. यह दिवंगत अजित दादा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी. हमें पार्टी की एक बैठक बुलानी पड़ेगी और पार्टी व जनता की भावनाओं के अनुरूप फैसला लेना पड़ेगा. प्रुफल्ला पटेल ने विलय से किया इनकार प्रफुल्ल पटेल ने साफ किया कि इस वक्त एनसीपी और शरद पवार के गुट वाली एनसीपी के विलय को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई. हमारा फोकस पार्टी के मसले सुलझाने पर है. विलय की बात को खारिज करते हुए प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि अजित दादा ने कम से कम दो बार टीवी चैनलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और दोनों दलों के बीच कॉऑर्डिनेशन केवल स्थानीय निकाय चुनाव तक सीमित थे. पटेल ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव में एनसीपी ने अहिल्यानगर में भाजपा और नासिक में शिव सेना के साथ भी गठबंधन किया था. पटेल ने कहा कि अजित दादा ने यह कहा था कि कुछ लोग चाहते है कि दोनों पार्टियों को मिलकर काम करना चाहिए लेकिन इसको लेकर कोई गंभीर चर्चा नहीं हुई थी. उन्होंने उस वीडियो को भी खारिज किया जिसमें एनसीपी और शरद गुट के नेताओं के मिलने को दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि हम मिलते रहते हैं क्योंकि हम एक समय एक ही परिवार के हिस्से थे. शरद पवार को झटका अब सवाल यह है कि एनसीपी के इस इनकार के बाद क्या 85 वर्षीय शरद पवार को पार्टी और परिवार को एकजुट करने की उनकी संभवतः अंतिम इच्छा अधूरी रह जाएगी. शरद पवार बुजुर्ग हो चुके है. शरद पवार के लिए अजित पवार बेटे जैसे थे. वह महाराष्ट्र में शरद पवार के स्वाभाविक उत्तराधिकारी माने जाते थे. उनके निधन से शरद पवार को गहरा झटका लगा है. लेकिन, एनसीपी का नया नेतृत्व जिस तरह से शरद पवार से दूरी बना रहा है उससे लगता है कि महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले वयोवृद्ध शरद पवार का सपना अधूरा रहा जाएगा.

भारत-US ट्रेड डील पर शशि थरूर का तंज: सफलता का जश्न बाद में, पहले देश को पूरी सच्चाई

नई दिल्ली मंगलवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार से स्पष्टता की मांग की। थरूर ने कहा कि भले ही भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ (शुल्क) को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसद करना सकारात्मक हो सकता है, लेकिन सरकार को इसके सभी पहलुओं और विवरणों को सार्वजनिक करना चाहिए। थरूर ने कहा कि वे इस डील को लेकर जश्न मनाना चाहेंगे लेकिन पहले सरकार बताए तो कि मसला क्या है? शशि थरूर की मुख्य आपत्तियां एएनआई से बात करते हुए थरूर ने सरकार की कार्यशैली और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा- हमारे पास राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट हैं; क्या संसदीय लोकतंत्र में इतना ही काफी है? क्या भारत सरकार को देश की जनता को यह नहीं समझाना चाहिए कि इस सौदे में वास्तव में क्या है? उन्होंने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र पर समझौते के प्रभाव को लेकर चिंता जताई। थरूर ने कहा कि यदि अमेरिका भारत को अपने कृषि उत्पादों का बड़ा बाजार बनाना चाहता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर अमेरिका 500 अरब डॉलर के व्यापार की बात कर रहा है, जबकि भारत का कुल आयात बिल लगभग 700 अरब डॉलर है, तो क्या भारत को अन्य देशों से आयात कम करना पड़ेगा। थरूर ने कहा- विपक्ष सिर्फ इतना जानना चाहता है कि इस समझौते में है क्या। अगर यह अच्छी खबर है तो हम खुशी-खुशी इसका स्वागत करेंगे, लेकिन सरकार को देश को बताना चाहिए कि इसमें कौन-सी शर्तें शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी के तीखे सवाल कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक विस्तृत पोस्ट शेयर कर सरकार से कई कड़े सवाल पूछे हैं- घोषणा का तरीका: कांग्रेस ने आपत्ति जताई कि युद्धविराम की तरह इस व्यापार समझौते की घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा की गई। यह भी कहा गया कि यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर हुआ है। 'जीरो' टैरिफ का डर: ट्रंप के दावे के अनुसार, भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को 'शून्य' करने पर सहमत हो गया है। कांग्रेस का मानना है कि इससे भारतीय बाजार पूरी तरह अमेरिका के लिए खुल जाएगा, जिससे स्थानीय उद्योगों, व्यापारियों और किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। रूसी तेल पर पाबंदी: सबसे बड़ा सवाल रूसी तेल को लेकर है। कांग्रेस ने पूछा है कि क्या मोदी सरकार ने ट्रंप के दावे के अनुसार रूस से मिलने वाले रियायती तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जता दी है? विपक्ष का मुख्य तर्क यह है कि किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते को केवल सोशल मीडिया घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार संसद और जनता के सामने इस सौदे का पूरा कच्चा चिट्ठा रखे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा कैसे की जा रही है।

संसद में फिर गरमाया माहौल: राहुल की स्पीच के दौरान हंगामा, स्पीकर तक पहुंचे पेपर

नई दिल्ली लोकसभा में आज लगातार दूसरे दिन राहुल गांधी की स्पीच पर हंगामा खड़ा हो गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है। हुआ यूं कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए नेता विपक्ष राहुल गांधी जैसे ही खड़े हुए और उन्होंने अपनी बात रखनी शुरू की, उन्होंने फिर से राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाना चाहा और कल की बात फिर से दोहराते हुए कहा कि यह चीन और पाकिस्तान के साथ जुड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि नेता विपक्ष सदन को गुमराह कर रहे हैं। स्पीकर की बैठक में हूई बातचीत का जिक्र करते हुए रिजिजू ने कहा कि हम यहां सुनने के लिए बैठे हैं लेकिन उन्हें विषय को छोड़ना चाहिए। राहुल गांधी इस पर रुके नहीं और उन्होंने फिर से नरवणे के संस्मरण का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, "मैं विपक्ष का नेता हूं, मुझे बोलने दिया जाए।" इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर आर्टिकल पर ऐतराज है, तो नहीं बोलूंगा। इसके बाद राहुल गांधी ने चीन का जिक्र किया और कहा कि ईस्टर्न लद्दाख में भारतीय सैनिक मारे गए। इसी दौरान किसी सदस्य ने चेयर को संबोधित करते हुए यार बोल दिया। इस पर चेयर ने फटकार लगाते हुए कहा कि यह संसद है। उस समय आसन पर कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी बैठे थे। इस यार के मुद्दे पर लोकसभा में हंगामा होने लगा। दूसरी तरफ विपक्षी सांसद भी इस बात से भड़क उठे कि नेता विपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा है। इसी दौरान आसन की तरफ पेपर भी फेंके गए।

संघ और दिल्ली की बैठक के बाद MP में निगम-मंडलों में नियुक्तियों की तैयारी, जल्द जारी होगी सूची

भोपाल  मध्यप्रदेश में लंबे समय से अटकी पड़ी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अब बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। निगम–मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में नियुक्तियों की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। सत्ता और संगठन ने दिल्ली के निर्देश पर नामों की विस्तृत सूची तैयार कर ली है, जिस पर संघ से भी मंथन किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक सूची दिल्ली भेज दी गई है और वहां से हरी झंडी मिलते ही नियुक्ति आदेश जारी किए जाने की तैयारी है। दरअसल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव को करीब दो साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होने से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी। इस असंतोष को देखते हुए जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में 12 प्रमुख निगम मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में नियुक्तियों की योजना बनाई गई थी। नाम भी तय हो गए थे, लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव की घोषणा के चलते प्रक्रिया बीच में ही अटक गई। दिल्ली का साफ संदेश—छोटी नहीं, बड़ी सूची लाओ सूत्र बताते हैं कि नियुक्तियों में हो रही देरी की शिकायत भोपाल से लेकर दिल्ली तक पहुंची। इसके बाद दिल्ली से साफ संदेश आया कि अब 10–12 नामों से काम नहीं चलेगा, बल्कि एकमुश्त बड़ी सूची भेजी जाए ताकि अधिकतर निगम मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में एक साथ नियुक्तियां की जा सकें। सीएम हाउस में हुई मैराथन बैठक राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर मैराथन बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित संगठन और सरकार के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। बैठक में निगम–मंडलों और प्राधिकरणों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पदों के लिए प्रस्तावित नामों पर गहन चर्चा के बाद सूची को अंतिम रूप दिया गया।अब सबकी निगाहें दिल्ली से मिलने वाली अंतिम मंजूरी पर टिकी हैं। जैसे ही हरी झंडी मिलेगी, मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का लंबा इंतजार खत्म हो जाएगा और सत्ता–संगठन में नई ऊर्जा का संचार होगा।  

राहुल गांधी पर टूटा ‘रूल 349’ का डंडा! जानिए लोकसभा का यह नियम आखिर कहता क्या है

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सोमवार (2 फरवरी) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोद मुकुंद नरवणे के एक संस्मरण के मसौदे के कुछ अंश का जिक्र किया तो सदन में हंगामा मच गया। सत्ता पक्ष ने इसका जमकर विरोध किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने भी नरवणे के संस्मरण का उल्लेख करने का विरोध किया। इसके बाद सदन में सत्तापक्ष और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक एवं हंगामा देखने को मिला। सदन में गतिरोध बने रहने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपराह्न दो बजकर नौ मिनट पर सभा की बैठक अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोबारा जब कार्यवाही शुरू हुई तो राहुल गांधी ने फिर से जनरल नरवणे की बात कहनी शुरू कर दी। इसके बाद फिर सदन में हंगामा हुआ। इसे देखते हुए स्पीकर बिरला ने सदन की कार्यवाही शाम 4 बजे तक स्थगित कर दी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा के नियम संख्या 349 का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता से कई बार यह अपील की कि वह पुस्तक या किसी पत्रिका को सदन में उद्धृत नहीं कर सकते, हालांकि राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख का हवाला देते हुए चीन के साथ भारत के सैन्य तनाव का विषय उठाने का प्रयास किया और दावा किया कि पूर्व सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के चरित्र के बारे में भी बताया है। इस दौरान राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। लोकसभा में गतिरोध के समय प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद थे। अब सवाल उठता है कि नियम 349 क्या है, जो राहुल गांधी को जनरल नरवणे का संस्मरण पढ़ने से रोक रहा है। क्या है लोकसभा का नियम 349? लोकसभा की नियम पुस्तिका (Rulebook) का नियम 349 सदन के भीतर सदस्यों के आचरण और मर्यादा से संबंधित है। यह नियम उन शिष्टाचारों को निर्धारित करता है जिनका पालन प्रत्येक सांसद को सदन की कार्यवाही के दौरान करना अनिवार्य होता है। यह नियम कहता है कि सदस्य सदन में नारे नहीं लगा सकते और न ही किसी तरह का प्रदर्शन कर सकते हैं। इस नियम की उपधारा एक में कहा गया है कि कोई भी सदस्य किसी अखबार की क्लिपिंग या मैगजीन में प्रकाशित अंश, कोई पुस्तक के अंश सदन में नहीं पढ़ सकते। इसके अलावा सदन के भीतर झंडे, प्रतीक चिन्ह, पोस्टर, तख्तियां या धार्मिक चित्र दिखाना वर्जित है। स्पीकर का निर्देश मानना बाध्यकारी लोकसभा का नियम 349 यह भी कहता है कि सदस्य सदन में जोर-जोर से बात नहीं कर सकते, हंस नहीं सकते और न ही ऐसी कोई हरकत कर सकते हैं जिससे कार्यवाही में बाधा आए। इसके अलावा जब कोई अन्य सदस्य बोल रहा हो, तो उसे टोकना या उसके भाषण के बीच में बाधा डालना नियम का उल्लंघन माना जाता है। नियम कहता है कि सदस्यों को लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) की बातों और निर्देशों का पालन करना होता है और उनकी अनुमति के बिना कोई भी मुद्दा नहीं उठा सकता। तेजस्वी सूर्या के बयान पर पलटवार बता दें कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए अपने भाषण की शुरुआत में ही भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए पलटवार करने का प्रयास किया। उनका कहना था कि सूर्या ने कांग्रेस की देशभक्ति और चरित्र पर सवाल खड़े किए हैं, इसलिए वह एक पूर्व सेना प्रमुख के उस संस्मरण के अंश को पढ़ना चाहते हैं जो एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। उन्होंने जैसे ही इसे पढ़ने का प्रयास किया तो राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि नेता प्रतिपक्ष को बताना चाहिए कि वह जिस पुस्तक का उल्लेख कर रहे हैं, वो प्रकाशित हुई है या नहीं। पहले तीन, फिर 4 बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि सदन में पुस्तक और पत्रिका में प्रकाशित बातों को नहीं रखा जा सकता और नेता प्रतिपक्ष को व्यवस्था का पालन करना चाहिए। बिरला ने राहुल गांधी से कई बार कहा कि वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखें। जब राहुल गांधी इस संस्मरण के कुछ अंश सदन के पटल पर रखने पर अड़े रहे तो बिरला ने कहा, ''आप लगातार आसन की वमानना कर रहे हैं…।'' राहुल गांधी ने कहा कि वह आसन को चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि चीन के साथ भारत के रिश्ते के बारे में बात रखना चाहते हैं। सदन में लगातार गतिरोध बने रहने पर बिरला ने लोकसभा की बैठक पहले तीन बजे तक फिर 4 बजे तक स्थगित कर दी।  

संसद में गरमाई बहस: भारत को नीचा दिखाना बंद करें— राहुल पर मंत्री के कड़े शब्द

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लोकसभा में चीन पर दिए गए बयानों से लगातार हंगामा जारी है। लोकसभा स्पीकर द्वारा बार-बार रोके जाने के बाद भी नेता विपक्ष लगातार एक ही मुद्दे पर बोलते रहे, जिसके बाद सदन की कार्यवाही 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद जब कार्यवाही शुरू हुई तो उन्होंने एक बार फिर से वही बात शुरू कर दी। इस पर नाराज होते हुए संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नेता विपक्ष जो कुछ भी बोल रहे हैं, वह अपुष्ट जानकारी है। उनसे यही कहूंगा कि कोई ऐसी बात मत बोलिए, जिससे देश का और सेना का मनोबल टूटे। देश को नीचा दिखाकर क्या मिलेगा। हालांकि इसके बाद भी राहल गांधी नहीं रुके और फिर स्पीकर ने सदन की कार्यवाही चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी।   यह पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी बात रखने के लिए उठे कांग्रेस नेता ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के लेखों का हवाला देकर चीन पर बात रखते हुए कहा कि डोकलाम में चीनी सैनिक मौजूद थे। राहुल के इतना कहते ही सत्ता पक्ष के नेताओं ने इस पर हंगामा शुरू कर दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आखिर राहुल गांधी किसी ऐसी किताब का जिक्र सदन के पटल पर कैसे कर सकते हैं, जो कि छपी ही नहीं है। राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी लोकसभा नेता विपक्ष के बयान की निंदा की। हालांकि, इसके बाद भी वह नहीं रुके और लगातार वही बात कहते रहे। राहुल की इस हठधर्मिता पर स्पीकर ओम बिरला ने राहुल को नसीहत भी दी। इस पर नेता विपक्ष ने कहा कि फिर आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना चाहिए और क्या नहीं। इस पर नाराज होते हुए स्पीकर ने कहा कि मैं यहां आपका सलाहकार नहीं हूं। लेकिन आपको उसी मुद्दे पर बोलना चाहिए, जिस पर यहां चर्चा हो रही है और जिसके बारे में आपने सदन को जानकारी दी थी।

संसद में चीन मुद्दे पर टकराव: राहुल के दावे पर गरजे राजनाथ, दे डाला खुला चैलेंज

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयानपर लोकसभा में हंगामा मच गया है। उन्होंने सोमवार को पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे के नाम पर दावा करते हुए कहा कि डोकलाम में चीनी सेना के टैंक भारतीय सीमा के पास हैं। इसके लिए उन्होंने एक पुस्तक का हवाला देने की बात कही, लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें चैलेंज कर दिया। रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी को चुनौती दी और कहा कि आप बताएं कि आखिर यह पुस्तक प्रकाशित हुई भी है या नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी पुस्तक के आधार पर यहां बात नहीं की जा सकती, जो प्रकाशित ही नहीं हुई है। मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि यह पुस्तक पब्लिश हुई थी या नहीं। अमित शाह ने भी राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई।   राहुल गांधी ने दावा किया था कि वह मनोज नरवणे की पुस्तक के आधार पर यह बात कह रहे हैं। इस पर डिफेंस मिनिस्टर ने कहा कि मैं चुनौती देता हूं कि वह पुस्तक को प्रस्तुत कर दें। यदि कोई पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई है तो फिर उसके आधार पर ऐसे दावे कैसे किए जा सकते हैं। वहीं राहुल गांधी ने कहा कि मैंने पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरणों का हवाला दिया है, जो प्रकाशित ही नहीं हुए हैं। इस पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की स्पीच का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने भी इस सदन से बाहर के संदर्भों की बात की थी। इस पर होम मिनिस्टर अमित शाह ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी सूर्या ने किसी मीडिया रिपोर्ट या फिर विषय से हटकर किसी पुस्तक का जिक्र नहीं किया था। गृह मंत्री ने कहा कि उनकी स्पीच में 2004 से 2014 तक राष्ट्रपति के अभिभाषणों पर बात की थी। उसमें ऐसा कुछ भी नहीं था, जो आपत्तिजनक था। राजनाथ सिंह और अमित शाह के ऐतराज के बाद भी राहुल गांधी ने अपना आक्रामक रुख बनाए रखा। उन्होंने कहा कि ये लोग तो आतंकवाद से लड़ने का दावा करते हैं, लेकिन एक कोट का जिक्र करने से डरते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि आखिर इसमें ऐसा क्या लिखा है कि यह सरकार उसका जिक्र तक नहीं करने देना चाहती। अखिलेश यादव ने भी दिया दखल- बोलने देने से परेशानी क्या है? राहुल गांधी की स्पीच को लेकर बवाल बढ़ा तो अखिलेश यादव भी खड़े हुए। उन्होंने कहा कि चीन का मसला संवेदनशील है और उससे सावधान रहने की जरूरत है। डॉ. लोहिया भी ऐसा कहते थे और मुलायम सिंह यादव भी उसे लेकर चिंतित थे। ऐसे में नेता विपक्ष यदि चीन को लेकर कुछ कहना चाहते हैं तो उन्हें रोकना नहीं चाहिए। वहीं राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि किसी पुस्तक के प्रकाशन पर ही रोक लगी है तो फिर उसका जिक्र सदन में नहीं होना चाहिए। ऐसा करना गलत है और सदन की गरिमा के खिलाफ है। राहुल गांधी बार-बार इसी मसले पर बोलना चाहते थे, लेकिन सदन में लगातार हंगामा होता रहा और राजनाथ सिंह ने कई बार खड़े होकर ऐसी पुस्तक के जिक्र पर आपत्ति जताई, जो प्रकाशित ही नहीं हुई। मैं आपका सलाहकार नहीं हूं, राहुल गांधी को स्पीकर की नसीहत अंत में बवाल इतना बढ़ा कि राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला से कहा कि आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना है। इस पर स्पीकर ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि मैं आपका सलाहकार नहीं हूं। लेकिन आपको उसी मुद्दे पर बात करनी चाहिए, जिस पर यहां चर्चा हो रही है।

रमजान में स्कूलों की स्पेशल टाइमिंग पर BJP का तीखा विरोध, कांग्रेस को किया कटघरे में

बेंगलुरु  कर्नाटक में रमजान के दौरान स्कूलों की स्पेशल टाइमिंग को लेकर भाजपा ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोमवार को एक बयान में कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा है कि कांग्रेस हमेशा अपने वोट बैंक को पहले रखती है। उन्होंने यह सवाल भी उठाए हैं कि अगर रमजान के दौरान स्कूल के स्टाफ या टीचर्स को जल्दी छुट्टी की इजाजत मिली है, तो नवरात्रि में इस तरह का नियम लागू क्यों नहीं किया गया। पूनावाला ने एक बयान में कहा, "हम देख सकते हैं कि कर्नाटक में रमजान के दौरान स्कूलों की टाइमिंग अलग होगा। लेकिन क्या आपने कर्नाटक सरकार किसी हिंदू त्योहार के दौरान ऐसी कोई छूट दी है? आप कह रहे हैं कि रमजान के दौरान टीचर और स्टाफ जल्दी जा सकते हैं, लेकिन क्या आप नवरात्रि के दौरान भी ऐसा ही करेंगे?” शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस हमेशा अपने वोट बैंक को पहले रखती है और कांग्रेस के पास संविधान के अनुसार निष्पक्ष और समान रूप से काम करने का विजन नहीं है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के लिए हिंदू आस्था का अपमान करना और वोट बैंक की दुकान चलाना, उनकी इकलौती पहचान बन गई है। और इसीलिए वे सबसे पहले वोटबैंक को रखते हैं।” स्कूलों के समय में बदलाव इससे पहले कर्नाटक के कुछ स्कूलों में रमजान को लेकर कुछ दिशानिर्देश जारी किए गए थे। उर्दू और अन्य अल्पसंख्यक भाषा स्कूलों के निदेशालय के एक निर्देश के मुताबिक रमजान के महीने में राज्य में उर्दू मीडियम जूनियर प्राइमरी और सेकेंडरी प्राइमरी स्कूलों के बंद रहने का समय रमजान महीना शुरू होने की तारीख से एक महीने के लिए सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक बढ़ा दिया जाएगा।

भाजपा प्रमुख नितिन नवीन ने बताई टीम बनाने की योजना: मेहनत इन राज्यों में, दिल्ली में मिलेगा मौका

नई दिल्ली भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यभार संभालने के बाद पार्टी में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए देश भर से चुने गए भाजपा नेताओं के प्रदर्शन के आधार पर ही उन्हें नवीन की नई राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने की संभावना है। असम के लिए विशेष टीम की तैनाती भाजपा ने असम के लिए लगभग एक दर्जन राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सूची तैयार की गई है। इस पूरी टीम का मार्गदर्शन राज्य के चुनाव प्रभारी बैजयंत 'जय' पांडा कर रहे हैं। इस टीम में दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज, प्रवेश वर्मा, विधायक अनिल शर्मा और पवन शर्मा जैसे नाम शामिल हैं। राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश और राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर जैसे 'परखे हुए' नेताओं को भी इस मिशन में जोड़ा गया है। यह टीम राज्य में भाजपा, आरएसएस और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगी। नेताओं की जिम्मेदारियां और कार्य इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन नेताओं को केवल प्रचार तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर के ठोस काम सौंपे गए हैं। जैसे हर नेता को एक से दो लोकसभा सीटों के भीतर चुनावी प्रबंधन का जिम्मा दिया गया है। जनसांख्यिकीय आंकड़ों का विश्लेषण और बूथ स्तर की रणनीति बनाना का काम भी दिया गया है। इसके अलावा, चुनाव करीब आने पर ये नेता टिकटों के बंटवारे से जुड़े फैसलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे मतदाताओं के बीच पार्टी की छवि को मजबूत करेंगे। चयन का आधार क्या है? इन नेताओं के चयन में उनकी आरएसएस पृष्ठभूमि, ABVP और युवा मोर्चा के साथ उनके पुराने जुड़ाव को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि भाजपा पहले भी अन्य राज्यों के नेताओं को चुनावी ड्यूटी पर लगाती रही है, लेकिन इस बार का उद्देश्य नए अध्यक्ष के तहत 'संगठनात्मक निरंतरता' बनाए रखना है। चुनाव परिणामों के बाद किए जाने वाले विश्लेषण में जिन नेताओं का प्रदर्शन शानदार रहेगा, उन्हें नितिन नवीन की टीम में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। पीढ़ीगत बदलाव के संकेत 45 वर्षीय नितिन नवीन की नियुक्ति को भाजपा में एक पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि नबीन की टीम में नए चेहरों और अनुभवी दिग्गजों का मिश्रण होगा। चूंकि इस साल कई बड़े नेता राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं और एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का आधा समय पूरा होने वाला है, ऐसे में कैबिनेट फेरबदल की भी संभावनाएं हैं। वर्तमान में असम के लिए जो टीम बनाई गई है, वैसी ही टीमें जल्द ही पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए भी घोषित की जाएंगी। इन नेताओं के लिए यह चुनाव केवल जीत-हार का सवाल नहीं है, बल्कि भाजपा के नए सांगठनिक ढांचे में अपने भविष्य को सुरक्षित करने का एक मौका है। नितिन नवीन की पहली परीक्षा असम और पश्चिम बंगाल के आगामी 2026 विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। नए अध्यक्ष नितिन नबीन के लिए ये चुनाव उनकी नेतृत्व क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा होंगे। असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आने (हैट्रिक) के लक्ष्य के साथ मैदान में है। भाजपा का पूरा जोर 'घुसपैठ' और 'जनसांख्यिकीय परिवर्तन' जैसे मुद्दों पर है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार 'मियां' वोटर्स और बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को उठाकर हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं। नितिन नवीन ने असम में बूथों की संख्या को 28,000 से बढ़ाकर 31,400 करने का लक्ष्य रखा है, ताकि माइक्रो-मैनेजमेंट को मजबूत किया जा सके। कांग्रेस ने इस बार प्रियंका गांधी को असम के लिए बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कांग्रेस विपक्षी एकजुटता के जरिए भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। भाजपा अपने पुराने सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि गठबंधन लगभग 103 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ने की स्थिति में है। हालांकि असम के मुकाबले बंगाल में भाजपा के लिए चुनौती थोड़ी कठिन है क्योंकि यहां वह 14 साल के ममता बनर्जी के शासन को चुनौती दे रही है। भाजपा के पास बंगाल में ममता बनर्जी के कद का कोई एक 'मास लीडर' नहीं है। इसलिए पार्टी एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे और 'विकास' के मॉडल पर निर्भर है। भाजपा ने बंगाल को अलग-अलग जोन में बांटकर 'क्षेत्रीय वॉर-रूम' बनाए हैं। हर जोन के लिए राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को तैनात किया गया है। पार्टी भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और कानून-व्यवस्था को मुख्य चुनावी मुद्दा बना रही है। साथ ही, केंद्रीय योजनाओं के लाभ को सीधे जनता तक पहुँचाने का वादा किया जा रहा है। नितिन नवीन ने पद संभालते ही बंगाल का दौरा शुरू कर दिया है। उन्होंने दुर्गापुर में कोर टीम के साथ बैठक कर जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का 'रोडमैप' तैयार किया है।

इतिहास रचा सुनेत्रा पवार ने: महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी CM का भव्य राजतिलक

मुंबई  एनसीपी (अजित गुट) की विधायक दल बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए सुनेत्रा पवार को पार्टी का नया विधायक दल नेता चुन लिया गया है. इस फैसले के साथ ही उनके आज ही महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने का रास्ता साफ हो गया है. बैठक से पहले ही संकेत मिल गए थे. पार्टी नेता दिलीप वलसे ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे पार्टी के अन्य नेताओं ने समर्थन दिया. सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद के रूप में विधान भवन पहुंची थीं, जहां सर्वसम्मति से उन्हें पार्टी का नेता बनाए जाने का फैसला लिया गया. इससे पहले एनसीपी नेताओं ने दिवंगत अजित पवार को श्रद्धांजलि दी. पार्टी नेताओं के मुताबिक यह फैसला संगठन और राज्य की राजनीति के लिए निर्णायक माना जा रहा है. NCP मर्जर की खबरों के बीच इसलिए लिया फैसला राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा पवार को उनके पति एवं दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तीन दिन बाद शनिवार (31 जनवरी) को महाराष्ट्र में सर्वसम्मति से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक दल की नेता चुना गया। इसके बाद सुनेत्रा पवार को आज (31 जनवरी) राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। इससे पहले NCP विधायक दल की नेता के रूप में सुनेत्रा पवार के नाम का प्रस्ताव वरिष्ठ नेता दिलीप वालसे पाटिल ने किया। जबकि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने इसका समर्थन किया। बारामती में 28 जनवरी को हुई एक विमान दुर्घटना में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली 'महायुति' सरकार में उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री रहे अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई। बैठक के दौरान सुनेत्रा पवार ने अपने दिवंगत पति की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। उनके छोटे बेटे जय भी इस अवसर पर मौजूद थे। विधान भवन परिसर में प्रवेश करते समय कई मंत्री और विधायक भावुक दिखाई दिए। लोक भवन ने पुष्टि की है कि सुनेत्रा पवार का शपथ ग्रहण समारोह मुंबई में शाम पांच बजे आयोजित किया गया। सुनेत्रा पवार ने साल 2024 में बारामती से लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उन्हें अपनी ननद और NCP (SP) की मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले से पराजय का सामना करना पड़ा था। इसके बाद सुनेत्रा पवार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुईं। डिप्टी सीएम बनने का फैसला क्यों लिया? कुछ लोग जल्दबाजी में डिप्टी सीएम बनने के पीछे की वजह को लेकर हैरान हैं। पार्टी सूत्रों ने News18 को बताया कि सुनेत्रा पवार शुरुआत में इसके लिए तैयार नहीं थीं। लेकिन पार्टी की भलाई और अजित पवार के विजन को आगे बढ़ाने के लिए NCP वफादारों की राय पर विचार करने के बाद भारी मन से वह सहमत हुईं। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली 'महायुति' सरकार में उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री रहे अजित पवार की 28 जनवरी को बारामती में एक विमान दुर्घटना में चार अन्य लोगों के साथ मौत हो गई थी। NCP सूत्रों के अनुसार, डिप्टी CM अजित पवार की मौत के बाद सुनेत्रा को लगा कि पार्टी प्रमुख के तौर पर अपने पति के विजन को आगे बढ़ाना उनकी जिम्मेदारी है। सूत्रों ने कहा, "जब अजित पवार ने बगावत की, तो वह अकेले थे… सुनेत्रा पवार ने एक पत्नी के तौर पर उस पार्टी की रक्षा करना अपना कर्तव्य समझा, जिसे अजित पवार ने सालों की कड़ी मेहनत से बनाया था। दुख की घड़ी में भी, उन्हें लगा कि अपने पति के काम को आगे बढ़ाना उनकी जिम्मेदारी है।" अजित पवार ने NCP को दो गुटों में बांट दिया था। एक गुट यानी असली NCP अजित पवार का है। जबकि दूसरा NCP (SP) उनके चाचा शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले के नेतृत्व में है। इसके बाद वह BJP-शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गए। जबकि SP गुट शिवसेना UBT और कांग्रेस के साथ विपक्ष में रहा।