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विमान हादसे ने राजनीतिक हलचल बढ़ाई, खड़गे बोले- सच्चाई सामने आनी चाहिए

नई दिल्ली महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में हुए अचानक निधन से पूरे देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस दुखद घटना ने ना सिर्फ उनके परिवार और समर्थकों को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चिंता और सवालों की लहर दौड़ा दी है। उनके निधन पर नेताओं ने शोक व्यक्त करने के साथ ही हादसे की जांच की भी मांग शुरू कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि अजित पवार का देहांत प्रीमेच्योर यानी समय से पहले हुआ और यह उन लोगों के लिए एक बड़ा आघात है जो उनके साथ काम करते थे। खड़गे ने कहा कि उनके परिवार वालों को यह दुख सहन करने की शक्ति मिले, यही हम सभी प्रार्थना कर सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस हादसे की जांच होना जरूरी है क्योंकि यह एक अननैचुरल एक्सीडेंट है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने छोटे प्लेन में ऐसा हादसा क्यों हुआ, जबकि सुरक्षा के लिहाज से ये ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने भी हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में इस तरह की घटनाएं लगातार क्यों हो रही हैं, यह चिंता का विषय है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को इस मामले पर गहन ध्यान देना चाहिए और जांच कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सुरक्षा और जीवन से जुड़ा मामला है। पूर्व सपा सांसद डॉ. एसटी हसन ने कहा कि अजित पवार देश के बड़े नेताओं में से एक थे और महाराष्ट्र की राजनीति में उनका योगदान अमूल्य था। उन्होंने कहा कि इस दुख में समाजवादी पार्टी उनके परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस हादसे में किसी तरह की साजिश हुई हो तो जांच कर उसे सामने लाया जाना चाहिए। अगर ऐसा कुछ नहीं पाया गया तो इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण एक्सीडेंट ही माना जाएगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हर प्लेन क्रैश के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस हादसे में क्या हुआ, यह तुरंत कहना मुश्किल है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि कोई टेक्निकल खराबी थी, खराब मौसम का असर था या कोई और वजह थी। उन्होंने कहा कि मौत तो मौत होती है और इसे केवल भगवान ही जानते हैं। उन्होंने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जो लोग इस विमान में इस दुनिया से चले गए, उनका वक्त यहीं खत्म हो गया।

कौन बनेगा वारिस, क्या टूटेगी या जुड़ेगी NCP? अजित पवार के निधन के बाद सियासी घमासान

नई दिल्ली महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया अजित पवार की आज (बुधवार, 28 जनवरी) सुबह एक विमान दुर्घटना में दु:खद मौत हो गई। उनके साथ विमान में कुल पांच लोग सवार थे और सभी की उस हादसे में मौत हो गई। 66 वर्षीय अजित पवार जमीन से जुड़े एक नेता थे, जिनका दुखद अंत उनके गृह नगर बारामती में ही हुआ। उनके असामयिक निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में कई सवाल कौंधने लगे हैं। मीडिया से लेकर सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा यही है कि उनका राजनीतिक वारिस कौन होगा? राजनीतिक विरासत का वारिस कौन? राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार की छत्रछाया से बाहर निकलकर जुलाई 2023 में अजित पवार ने अपने चाचा खिलाफ बगावत कर दी थी और पार्टी के नाम और चिह्न के साथ-साथ पार्टी के अधिकतर विधायकों को अपने पाले में कर लिया था। अब उनके आकस्मिक निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि उनकरी इस राजनीतिक विरासत का वारिस कौन होगा? क्या राज्यसभा सांसद और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार अजित दादा की असली राजनीतिक वारिस होंगी या फिर उनके बेटे पार्थ पवार के कंधों पर ये जिम्मेदारी आएगी क्योंकि वह राजनीति में सक्रिय रहे हैं। पार्थ 2019 का लोकसभा चुनाव मावल संसदीय सीट से लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें तब हार का सामना करना पड़ा था। उनके दूसरे बेटे जय पवार फैमिली बिजनेस संभालते हैं। इसके अलावा चर्चा ये भी है कि क्या उनकी राजनीतिक विरासत का वारिस परिवार से बाहर का भी हो सकता है? अगला डिप्टी सीएम कौन होगा? अजित पवार महाराष्ट्र की महायुति सरकार में उप मुख्यमंत्री थे। उनके निधन से राज्य की राजनीति में एक शून्य पैदा हो गया है। ऐसे में उनके निधन के बाद ये भी चर्चा जोर मारने लगी है कि अब राज्य का अगला उप मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार इस जिम्मेदारी को संभालेंगी या उनके बेटे पार्थ को ये जिम्मेदारी मिलेगी। चर्चा ये भी है कि चूंकि पार्थ पवार का राजनीतिक अनुभव कम है, इसलिए पार्टी में दूसरे लाइन के नेता इस पद की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। NCP का अगला चीफ कौन? अजित दादा की आकस्मिक मौत ने एक नहीं अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं। उनमें एक सवाल ये भी है कि उनके जाने के बाद NCP की कमान अब कौन संभालेगा? क्या पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल को ये जिम्मेदारी मिल सकती है या परिवार से ही कोई सदस्य पार्टी की अगुवाई करेगा? क्या महायुति से अलग होगी NCP? चर्चा ये भी है कि क्या अजित दादा गुट वाली NCP अब महायुति से अलग हो जाएगी क्योंकि ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि पिछले कुछ दिनों से महायुति में अजित पवार मुखर थे और भाजपा से कुछ मुद्दों पर उकी तल्खी चल रही थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पार्टी भाजपा की अगुवाई वाले गठबंधन से अलग हो जाएगी या जिनसे तल्खी थी, वो तो रहे नहीं तो पार्टी पहले की ही तरह महायुति में बनी रहेगी क्योंकि सत्ता से हटने के बाद पार्टी में बिखराव का खतरा बढ़ सकता है। क्या दोनों NCP का विलय होगा और कौन लेगा ये फैसला? एक चर्चा ये भी है कि अजित दादा की मौत के बाद NCP के दोनों धड़े एक हो सकते हैं, जिसकी चर्चा पिछले कुछ समय से हो रही है। हालिया पुणे और पिपंरी-चिंचीवाड़ महा नगरपालिका चुनावों में दोनों धड़ों ने एक होकर चुनाव लड़ा था और इसकी संभावनाओं को बल भी दिया था लेकिन इन सबके बावजूद सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि NCP में इन मुद्दों पर फैसला लेगा कौन? अजित पवार की मौत ने पार्टी और परिवार को बड़े असमंजस में डाल दिया है। बता दें कि पिछले साल के लोकसभा चुनाव में अजित पवार की पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली थी। आम चुनाव में मिली करारी हार को लेकर आलोचकों के निशाने पर आए अजित पवार ने हालांकि पांच महीने बाद विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन में 41 सीट जीतकर सबको गलत साबित कर दिया था। वहीं शरद पवार की अगुवाई वाली NCP को सिर्फ 10 सीट मिलीं थी। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से अजित पवार ने राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली थी लेकिन उनके निधन ने राज्य से लेकर केंद्र तक की राजनीति में कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।  

अजित पवार की मौत पर सियासत तेज: ममता बोलीं– सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच, भरोसा खत्म

कोलकाता महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार का बुधवार सुबह एक दुखद विमान दुर्घटना में निधन हो गया। यह हादसा पुणे जिले के बारामती में हुआ, जब उनका विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस घटना ने पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ दी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस विमान हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। उन्होंने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए संभावित साजिश की आशंका जताई और देश में राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए।   मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि वह इस खबर से स्तब्ध हैं और इसे राष्ट्र के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक नेतृत्व के लिए भी कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं बची है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन बयानों का भी जिक्र किया जिनमें कहा जा रहा था कि अजित पवार भाजपा छोड़ने पर विचार कर रहे थे। ममता ने संकेत दिया कि अजित पवार महायुति गठबंधन से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे थे, इसलिए इस हादसे के पीछे कोई साजिश हो सकती है। उन्होंने कहा- 'आज जो हुआ, वह गंभीर सवाल खड़े करता है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच ही विश्वसनीय होगी। हमें सिर्फ सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, किसी अन्य एजेंसी पर नहीं।' उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और हादसे की उचित जांच की मांग की। बनर्जी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा- अजित पवार के अकास्मिक निधन से स्तब्ध हूं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री तथा उनके साथ सवार अन्य लोगों की आज सुबह बारामती में हुए भीषण विमान हादसे में मृत्यु हो गई। इस घटना से गहरे शोक में हूं। उनके परिवार, उनके चाचा शरद पवार जी सहित, तथा दिवंगत अजित के सभी मित्रों और समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। हादसे की गहन जांच की मांग अन्य दलों के नेताओं ने भी की है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता प्रकाश आंबेडकर ने भी स्वतंत्र और पारदर्शी जांच पर जोर दिया। अजित पवार मुंबई से बारामती के लिए जिला परिषद चुनावों से पहले चार जनसभाओं को संबोधित करने जा रहे थे। सुबह 8:10 बजे मुंबई से उड़ान भरने वाला 16 वर्षीय बॉम्बार्डियर लियरजेट 45 (पंजीकरण VT-SSK) सुबह करीब 8:50 बजे बारामती में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस ट्विन-इंजन हल्के जेट विमान को वीआईपी और कॉरपोरेट यात्राओं में आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है। यह VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित था। टक्कर के बाद विमान पूरी तरह नष्ट हो गया, मलबा दूर-दूर तक फैल गया और घटनास्थल से धुएं के गुबार उठते देखे गए। किसी के बचने की सूचना नहीं है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, विमान को लैंडिंग के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उड़ान ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, विमान ने सुबह 8:30 बजे पहली लैंडिंग का प्रयास किया, जो खराब दृश्यता के कारण विफल रहा। इसके बाद 8:42 बजे दूसरी अप्रोच की गई, लेकिन 8:45 बजे के आसपास रडार से संपर्क टूट गया और रनवे 11 के थ्रेशोल्ड के पास विमान क्रैश हो गया। बारामती में दृश्यता कम थी और हवाईअड्डे पर नाइट-लैंडिंग सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, जिससे ऐसे हालात में सुरक्षित लैंडिंग सीमित हो जाती है। हादसे के बाद शवों की पहचान कठिन थी; अजित पवार की पहचान उनकी कलाई घड़ी से की गई।  

‘अयोध्या से कटियार ही लड़ें’— बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान, सियासत में साजिश का आरोप

गोंडा कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि अयोध्या लोकसभा सीट पर पहला हक विनय कटियार का है और उन्हें ही चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने यह बात एक चैनल से बातचीत के दौरान कही। पूर्व सांसद ने कहा कि उनके साथ 2023-24 में षड्यंत्र हुआ, इसलिए उन्होंने कहा था कि वह लोकसभा जाएंगे।   भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने सोमवार को संकेत दिया था कि वह 2029 का लोकसभा चुनाव अयोध्या सीट से लड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला सही समय पर लिया जाएगा। लेकिन वह किसी भी तरह लोकसभा जरूर जाएंगे। उनका ये बयान सुर्खियों में आने के बाद एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ गई। इसे ही लेकर उन्होंने एक मीडिया चैनल से बात की और कहा, ‘आज फिर बोल रहा हूं कि मैं लोकसभा का चुनाव 2029 में लड़ूंगा। सीट पार्टी तय करेगी कि मुझे कहां से लड़ना है। मुझे एक बार लोकसभा जाना है, चाहे जैसे जाऊं।’ पूर्व सांसद ने एक बार फिर अलग-अलग वर्ग के विधायकों व सांसदों की बैठक का समर्थन किया और कहा कि मुझे इसमें कुछ गलत नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि पंकज चौधरी से मेरे पुराने संबंध हैं। 1991 में वह दोनों एक साथ चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। प्रदेश अध्यक्ष बनने से पार्टी को फायदा होगा। बृजभूषण शरण ने राष्ट्रकथा कार्यक्रम का भी जिक्र किया, जिसे सबको जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित किया गया और जिसमें सभी का सहयोग लिया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों पर भी टिप्पणी की और कहा कि जब तक पूरी जानकारी नहीं मिलती, तब तक इस पर बोलना उचित नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ अपने संबंधों को बेहतर बताया। पहले भी चुनाव लड़ने का कर चुके हैं जिक्र इससे पहले भी बृजभूषण शरण सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि वह 2029 का चुनाव जरूर लड़ेंगे। दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकती है। उन्होंने कहा था, ‘भाजपा से मेरा बेटा विधायक है, एक बेटा सांसद है, भतीजा ब्लॉक प्रमुख है। पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी है। हमारी विचारधारा भारतीय जनता पार्टी की है।’  

महाराष्ट्र चुनाव अपडेट: ठाकरे-शिंदे गठबंधन ने बनाई साझा रणनीति

मुंबई  महाराष्ट्र में नए सियासी समीकरण आकार ले रहे हैं। खबर है कि अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने हाथ मिला लिया है। हालांकि, यह गठबंधन जिला परिषद चुनाव के लिए ही हैं। इधर, शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत का कहना है कि इस संबंध में और जानकारी जुटाई जा रही है। कहा जा रहा है कि क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के दबदबे को कमजोर करने के इरादे से गठबंधन किया गया है।  रिपोर्ट के अनुसार, सोलापुर जिले के बार्शी तालुका में जिला परिषद चुनाव के लिए दोनों दल साथ आए हैं। खास बात है कि गठबंधन में डिप्टी सीएम अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और वरिष्ठ नेता शरद पवार की राकंपा (एसपी) भी शामिल है। शिवसेना (यूबीटी) के बार्शी विधायक दिलीप सोपाल ने इसकी जानकारी दी है। खास बात है कि सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर भी मुहर लग गई है। राज्यसभा सांसद संजय राउत का कहना है कि स्थानीय स्तर पर हो रहे घटनाक्रमों के बारे में पार्टी नेतृत्व को पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा विरोधी ताकतों के बार्शी में एकजुट होने के संकेत थे, लेकिन इस संबंध में जानकारी ली जा रही है। खबर है कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे को भी इसकी जानकारी नहीं है। भाजपा का सोलापुर में तगड़ा प्रदर्शन हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया था। राज्य में भी पार्टी ने 29 में से 21 नगरपालिकाओं पर कब्जा जमाया था। बार्शी में कुछ समय पहले हुए एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी के चुनाव में भी 18-0 से जीत दर्ज की थी। यहां भाजपा ने नगर परिषद अध्यक्ष पद हासिल किया था और 42 में 23 सीटें जीती थीं। सीट शेयरिंग रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीपी को 3 जिला परिषद सीटें और 8 पंचायत समिति सीटें दी गईं हैं। शिवसेना को 2 जिला परिषद सीटें और 4 पंचायत समिति सीटें दी गईं। शिवसेना यूबीटी 1 जिला परिषद सीट पर चुनाव लड़ेगी।

UGC के नए नियम और राजनीति का खेल: कांग्रेस नेता शंका में, BJP को फायदा दोगुना

नई दिल्ली यूजीसी रूल्स 2026 को लेकर मचे घमासान के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उदित राज को आशंका है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इससे डबल फायदा हो सकता है। उदित राज ने सवर्णों की ओर से किए जा रहे विरोध के पीछे साजिश का दावा करते हुए कहा कि अधिकतर भाजपा और आरएसएस के समर्थक ही ऐसा कर रहे हैं। उत्तर पश्चिम दिल्ली के पूर्व सांसद उदित राज ने कहा है कि विरोध के बावजूद सवर्ण भाजपा को ही वोट देंगे और दूसरी तरफ दलित-ओबीसी और आदिवासी भी खुश हो जाएंगे। उन्होंने भाजपा का डबल फायदा और इसके पीछे कथित साजिश का जिक्र करते हुए कहा, 'यूजीसी के नए नियम के पीछे कुछ बड़ी राजनीतिक साजिश लगती है। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और सवर्ण जाति के लोगों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है और ये अधिकतर बीजेपी और आरएसएस के समर्थक हैं। विरोध के बावजूद ये वोट बीजेपी को ही देंगे। दूसरे तरफ दलित, ओबीसी और आदिवासी बीजेपी से खुश हो जाएंगे। मतलब है 'चित भी इनका पट भी इनका।' उदित राज ने यूजीसी रूल्स के खिलाफ उठ रहीं आवाजों को भी भाजपा की ही चाल बताया। उन्होंने वाराणसी में मंदिर तोड़े जाने पर विरोध नहीं होने का जिक्र करते हुआ कहा, 'लगता है बीजेपी ही अंदर से विरोध करा रही वरना वाराणसी में कितने मंदिर तोड़ें, क्या उसका बड़े पैमाने पर विरोध किया! गैर बीजेपी सरकार होती तो शायद ऐसा विरोध होता। क्या अब दलित, ओबीसी और आदिवासी हिंदू न रहे।?'  

मुंबई मेयर चुनाव में फडणवीस सरकार का बड़ा कदम, बदला चुनावी परिदृश्य

मुंबई  मुंबई मेयर पद के चुनाव को लेकर सियासी घमासान के बीच एक बड़ा मोड़ सामने आया है. बीएमसी चुनाव में मामूली बहुमत वाली महायुति सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिसे ठाकरे गुट की रणनीति पर सीधा वार माना जा रहा है. दरअसल शिवसेना (यूबीटी) गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पिछले दिनों कहा कहा था कि ‘अगर भगवान की इच्छा होगी तो महापौर भी अपना होगा.’ हालांकि, उनके इस बयान के बाद बीजेपी और शिंदे गुट अलर्ट मोड में आ गया और इस ताजा कदम को उसी से जोड़कर देखा जा रहा है. मुंबई महानगरपालिका की सत्ता की लड़ाई में राज्य सरकार ने एक अहम राजनीतिक चाल चली है. आगामी मेयर चुनाव की प्रक्रिया में ‘पीठासीन अधिकारी’ (Presiding Officer) की नियुक्ति से जुड़े पुराने नियम में बदलाव कर दिया गया है. नई अधिसूचना के मुताबिक अब महापौर चुनाव से जुड़ी पूरी प्रक्रिया का संचालन नगर आयुक्त या सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे. सरकार के इस फैसले के बाद सत्ताधारी और विपक्ष के बीच पहले ही दिन टकराव के संकेत मिल रहे हैं. अब तक की परंपरा के अनुसार, नई नगर परिषद की पहली बैठक में मेयर के चयन तक कार्यवाही देखने के लिए पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति होती थी. यह जिम्मेदारी या तो निवर्तमान महापौर को या फिर सदन के सबसे वरिष्ठ नगरसेवक को सौंपी जाती थी. मुंबई महापालिका का कार्यकाल समाप्त हुए करीब तीन साल हो चुके हैं, ऐसे में निवर्तमान महापौर का विकल्प पहले ही खत्म हो गया था. पुराने नियमों के तहत, उद्धव ठाकरे गुट की वरिष्ठ नगरसेविका श्रद्धा जाधव को पीठासीन अधिकारी बनने का मौका मिल सकता था. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर पीठासीन अधिकारी विपक्ष का होता, तो सत्ताधारियों को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता था. इसी संभावित स्थिति से बचने के लिए सरकार ने नियमों में बदलाव किया है. राज्य सरकार की तरफ से जारी नई नियमावली के अनुसार, अब महापौर या उपमहापौर के चुनाव के लिए बुलाई जाने वाली विशेष बैठक की अध्यक्षता राज्य सरकार के सचिव स्तर या उससे ऊचे अधिकारी करेंगे. वर्तमान नगर आयुक्त भूषण गगराणी प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी हैं, ऐसे में वही इस प्रक्रिया के पीठासीन अधिकारी होंगे. इसके साथ ही महापौर के अधिकार भी सीमित कर दिए गए हैं. नए चुने गए महापौर भी उपमहापौर के चुनाव के दौरान पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्य नहीं कर सकेंगे. गौरतलब है कि वर्ष 1997 से मुंबई महापालिका में शिवसेना-भाजपा की सत्ता रही है और इस दौरान पीठासीन अधिकारी को लेकर कभी विवाद नहीं हुआ. लेकिन मौजूदा बदले हुए राजनीतिक समीकरणों में यह मुद्दा विवाद की जड़ बनता नजर आ रहा है. ठाकरे गुट की ओर से पीठासीन अधिकारी अपने पक्ष का हो, इसके लिए रणनीति बनाई जा रही थी, लेकिन सरकार की अधिसूचना ने इस योजना को झटका दे दिया है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि महापौर चुनाव के पहले ही दिन नए नियमों को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिल सकता है.

कांग्रेस में अंदरूनी तकरार? अपने ही नेताओं को नीचा दिखा रहे राहुल गांधी: पूनावाला

नई दिल्ली कांग्रेस नेता शशि थरूर के अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में शामिल नहीं होने पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस एक बार फिर 'टुकड़े-टुकड़े' मोड में है। वह अपने ही नेता को दरकिनार और अपमानित कर रही है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, अभी पब्लिक में जो चल रहा है, वह डॉ. शशि थरूर बनाम केरल कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी है। यह हैरानी की बात नहीं है। हमने पहले भी ऐसी ही स्थितियां देखी हैं, राहुल गांधी बनाम प्रियंका गांधी, डीके शिवकुमार बनाम सिद्धारमैया, गहलोत बनाम पायलट, सुक्खू बनाम प्रतिभा सिंह और कांग्रेस बनाम कांग्रेस।" शहजाद पूनावाला ने कहा, "राहुल गांधी को जनता पहले ही नकार चुकी है, लेकिन यह साफ है कि कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता खुद उन्हें नेता के तौर पर स्वीकार नहीं करते। इसका हालिया उदाहरण शकील अहमद हैं। शकील अहमद ने बताया कि राहुल गांधी असुरक्षित और नासमझ नेता हैं। वह असुरक्षा की भावना से काम करते हैं।" शहजाद पूनावाला ने कहा, "शकील अहमद, जो मंत्री भी रह चुके हैं, उन्होंने कई खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी कितने इनसिक्योर नेता हैं। राहुल गांधी एक मजबूत कांग्रेस तो चाहते हैं, लेकिन मजबूत कांग्रेसी नहीं चाहते।" कांग्रेस पार्टी पूरी दुनिया के सामने यह दावा करती है कि वह लोकतांत्रिक है, लेकिन वह न तो संविधान का और न ही पार्टी के अंदर लोकतंत्र का पालन करती है।" भाजपा नेता ने कहा कि शकील अहमद ने यह भी कहा कि राहुल गांधी को संविधान की कोई परवाह नहीं है और उन्होंने एसआईआर का मुद्दा उठाया, लेकिन जमीन पर उसमें कोई दम या सच्चाई नहीं थी। एक बात साफ है कि कांग्रेस को बर्बाद करने में राहुल गांधी का सबसे बड़ा हाथ है और यह सिर्फ शकील अहमद की राय नहीं है, बल्कि हर कांग्रेस नेता की यही भावना है।

राजनीति में ज़हरीली भाषा! भाजपा नेता का ममता बनर्जी पर आपत्तिजनक बयान, TMC ने पुलिस में की शिकायत

कोलकाता पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पारा चरम पर पहुंच गया है। हाल ही में इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दक्षिण 24 परगना जिले के भाजपा उपाध्यक्ष संजय दास मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते नजर आ रहे हैं। विवादित बयान और वायरल वीडियो वायरल वीडियो भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की उपस्थिति में आयोजित एक कार्यक्रम का बताया जा रहा है। वीडियो में संजय दास मुख्यमंत्री को 'चुड़ैल' कहकर संबोधित कर रहे हैं और सार्वजनिक रूप से उनका 'सिर कलम' करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इसने राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।   TMC ने दर्ज कराई शिकायत तृणमूल कांग्रेस का कड़ा रुख तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई महिला मुख्यमंत्री का घोर अपमान और उनकी हत्या का खुला आह्वान बताया है। पार्टी ने भाजपा नेता के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। टीएमसी सांसद बापी हलदर ने कहा कि भाजपा राज्य में अशांति फैलाना चाहती है और महिलाओं के प्रति उनकी मानसिकता इस बयान से उजागर हो गई है। मामले पर भाजपा ने दी सफाई भाजपा की सफाई इस विवाद पर भाजपा की ओर से शतरूपा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह तृणमूल नेताओं द्वारा पूर्व में भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई हिंसक टिप्पणियों की एक प्रतिक्रिया मात्र है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी संजय दास के इस तरह के अमर्यादित बयान का समर्थन नहीं करती है।

संविधान पर थरूर का बड़ा बयान, कहा– मोदी सम्मान करते हैं, RSS का रुख भी बदला

नई दिल्ली. कांग्रेस लीडरशिप से मतभेद की अटकलों के बीच वरिष्ठ नेता व सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री संविधान को पवित्र मानते हैं और आरएसएस तक ने भी इसे अपना लिया है। संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा है। थरूर ने ये सब बातें कोझिकोड में केरल लिटरेचर फेस्टिवल में दर्शकों के एक सवाल का जवाब देते हुए कहीं। शशि थरूर ने कहा, ''आपको याद होगा मैंने 2014 में जब बीजेपी सत्ता में आई थी, तब इसके बारे में लिखा था। उस समय बहुत बातें हो रही थीं कि वे संविधान को खत्म कर देंगे और एक नया संविधान लाएंगे। यहां तक कि यह भी रिपोर्ट किया गया था कि आरएसएस के विचारक गोविंदाचार्य एक नए संविधान का ड्राफ्ट लिख रहे थे। और फिर भी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि संविधान उनकी पवित्र किताब है। असल में, अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में अपने पहले भाषण में, उन्होंने कहा था कि संविधान ही मेरी एकमात्र पवित्र किताब है।'' कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, ''मैसेज यही था कि वह संविधान को पवित्र मानते हैं। और नतीजा यह हुआ कि जिन्होंने संविधान को रिजेक्ट किया था, जैसा कि आरएसएस ने किया था, उन्होंने भी अब इसे अपना लिया है। तो मैं कहूंगा कि समय की कसौटी पर खुद को साबित किया है। इसने अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों की सरकारों में बदलाव को झेला है और अब तो एक ऐसी पार्टी के सत्ता में आने का भी गवाह बना है जिसके आरएसएस में दार्शनिक पूर्वजों ने साफ तौर पर संविधान को रिजेक्ट कर दिया था, और फिर भी संविधान बचा रहा।" इससे पहले शुक्रवार को केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों और रणनीति को लेकर कांग्रेस हाईकमान ने अहम बैठक की, लेकिन शशि थरूर इसमें नहीं शामिल हुए। इससे एक बार फिर से उनके और कांग्रेस लीडरशिप के बीच मतभेद की अटकलें लगाई जाने लगीं। थरूर के कार्यालय ने कहा है कि उन्होंने कोझिकोड में केरल साहित्य महोत्सव में अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण बैठक में शामिल होने में असमर्थता के बारे में पार्टी को सूचित कर दिया था। हालांकि, थरूर के करीबी सूत्रों ने कहा कि वह बैठक में शामिल नहीं हुए क्योंकि वह इस बात से आहत हैं कि राहुल गांधी ने हाल में कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनके मौजूद होने के बावजूद उनके नाम का उल्लेख नहीं किया और राज्य के नेताओं द्वारा बार-बार उन्हें दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है।