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हनुमान जी को लेकर बयान पर विवाद, शशि थरूर के बेटे ने अमेरिकी को लताड़ा

नई दिल्ली केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे ईशान ने हिंदू धर्म के खिलाफ टिप्पणी को लेकर अमेरिकी की जमकर क्लास लगा दी। उन्होंने इतिहास से आंकड़े पेश कर बताया है कि अमेरिका में ईसाई धर्म आने से सैकड़ों साल पहले इसकी एंट्री भारत में हो चुकी थी। दरअसल, सोशल मीडिया पर हनुमान जी की प्रतिमा साझा कर यूजर उसे गिराने की बात क रहा था। जैसी ह्यू नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने हनुमान जी की प्रतिमा की तस्वीर साझा की थी। सात ही लिखा, 'जब हम जीतेंगे, तो इसे गिराने वाले हैं।' इसपर ईशान थरूर ने जवाब दिया, 'पता नहीं इस बेवकूफ को यह पता है या नहीं कि भारत में ईसाई धर्म, अमेरिका में ईसाई धर्म के आने से 1500 साल से भी ज्यादा पहले आ गया था। भारत में हजारों चर्च हैं। फिर भी अमेरिका हनुमान जी की एक मूर्ति बर्दाश्त नहीं कर पा रहा? हर जगह धार्मिक राष्ट्रवादी ही दुनिया के सबसे कमजोर और कम आत्मसम्मान वाले लोग होते हैं।' कौन हैं ईशान थरूर मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 1984 में जन्मे ईशान अमेरिका में पत्रकार हैं। उनका नाम सिंगापुर में हुआ था। उनके जुड़वा भाई का नाम कनिष्क है। वह केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे हैं। वह मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मामलों और वैश्विक राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लिखते रहे हैं। हाल ही में वॉशिंगटन पोस्ट में छंटनी के बाद वह चर्चा में आ गए थे। न्यूयॉर्कर के अनुसार, साल 2026 में संस्था के साथ शुरुआत करने वाले ईशान ग्लोबल नोट्स नाम से एक इंटरनेशनल पॉलिटिक्स कॉलम लिखते हैं। इससे पहले वह करीब 1 दशक तक वॉशिंगटन पोस्ट में रहे और वर्ल्ड व्यू कॉलम लिखते रहे। साल 2021 में अमेरिकन एकेडमी ऑफ डिल्पोमैसी ने उन्हें आर्थर रॉस मीडिया अवॉर्ड फॉर कॉमेंट्री से नवाजा था। 2024 में उन्हें टेड सोरेन्सन अवॉर्ड मिला। इसके साथ ही वह काउंसिल ऑन फॉरिन रिलेशन्स में 2026-27 एड्वर्ड आर मरो प्रेस फैलो हैं। इससे पहले वह 8 सालों तक टाइम में सीनियर एडिटर और संवाददाता रहे थे। उन्होंने सिंगापुर और न्यूयॉर्क में संस्था के लिए काम किया है। उन्होंने साल 2006 में येल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। खास बात है कि येल में पढ़ाई के दौरान उन्हें सड्लर फैलोशिप मिली थी। उन्होंने अपनी पत्रकारिता की पारी की शुरुआत साल 2006 से टाइम मैगजीन से की थी। साल 2014 में उन्होंने संस्थान को अलविदा कह दिया था। इसके बाद वह अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में द वॉशिंगटन पोस्ट पहुंचे थे।

थरूर ने अय्यर को दिया करारा जवाब, नेहरू पर टिप्पणी से लेकर तंज तक छिड़ी सियासी बहस

ईरान ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध को लेकर भारत के स्टैंड पर सरकार को कांग्रेस घेरने में जुटी है। इस बीच उसके ही दो वरिष्ठ नेता आपस में उलझे हुए हैं और सार्वजनिक रूप से खुले खत लिखकर एक-दूसरे पर बरस रहे हैं। पहले मणिशंकर अय्यर ने फ्रंटलाइन पत्रिका में एक लेख लिखकर शशि थरूर पर नेहरूवादी नीति से भटकने का आरोप लगाया था। इजरायल और अमेरिका पर उनके रुख की आलोचना की थी। अब उन्हें जवाब देते हुए शशि थरूर ने भी विस्तार से पोस्ट लिखा है। एक्स पर ही जवाब देते हुए थरूर ने लिखा है कि असहमति होने में कुछ गलत नहीं है। लोकतंत्र की यही खूबी है कि लोग अलग-अलग राय रख सकते हैं। इसके आगे उन्होंने मणिशंकर अय्यर को आड़े हाथों लेते हुए लिखा, 'सिर्फ इसलिए कि कोई विदेश नीति को थोड़ा अलग तरीके से देखता है, उसकी नीयत या देशभक्ति पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। आपने मेरे विचारों और मेरे चरित्र के बारे में जो सार्वजनिक टिप्पणी की है, उसका जवाब देना जरूरी हो गया है।' वह लिखते हैं कि मैंने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मामलों को भारत के राष्ट्रीय हित के नजरिए से देखा है। मेरे लिए भारत की सुरक्षा, भारत की अर्थव्यवस्था और दुनिया में भारत की इज्जत सबसे ऊपर है। दुनिया की राजनीतिक हकीकत को समझना और भारत के हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेना कोई 'मोरल सरेंडर' नहीं है — यह जिम्मेदार स्टेटक्राफ्ट है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा सिद्धांत और व्यवहारिकता का संतुलन रही है। जवाहर लाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति से लेकर आज की बहु-ध्रुवीय कूटनीति तक भारत का मकसद हमेशा एक ही रहा है, अपनी संप्रभुता की रक्षा करना और दुनिया में न्याय की बात करना। संसद में हो या संसद के बाहर, मेरा रिकॉर्ड इसी संतुलन को दिखाता है। देशभक्ति पर किसी एक पीढ़ी का अधिकार नहीं है। और न ही गांधी जी या नेहरू जी को समझने का अधिकार किसी एक समूह के पास है। असली सम्मान यही है कि उनके विचारों को आज के समय की हकीकत के साथ समझकर लागू किया जाए। इसके आगे वह लिखते हैं, ‘इतिहास में भी भारत ने कई बार ऐसा किया है कि किसी देश की गलत कार्रवाई को तुरंत सार्वजनिक रूप से नहीं ललकारा, क्योंकि हमारे अपने राष्ट्रीय हित उससे जुड़े हुए थे। उदाहरण के लिए, सोवियत यूनियन के साथ हमारे रिश्ते इतने महत्वपूर्ण थे कि हंगरी, चेकोस्लोवाकिया और अफगानिस्तान के मामलों में भी भारत ने बहुत संतुलित रुख अपनाया। आज भी खाड़ी देशों के साथ भारत के बहुत बड़े हित जुड़े हैं। लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार, हमारी ऊर्जा सुरक्षा और करीब 90 लाख भारतीय वहां काम कर रहे हैं। ऐसे में विदेश नीति बनाते समय इन सब बातों को ध्यान में रखना पड़ता है।’ सरेंडर वाली बात पर भी मणिशंकर अय्यर को खूब सुनाया अय्यर के सरेंडर वाले कॉमेंट पर भी थरूर ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यथार्थ को समझना किसी के आगे झुकना नहीं होता। आज अमेरिका में ऐसी सरकार है जो अंतरराष्ट्रीय कानून को हमेशा उसी तरह प्राथमिकता नहीं देती जैसे हम देना चाहते हैं। लेकिन अगर हम उसे खुलकर चुनौती देते हैं तो उसके परिणाम भी हो सकते हैं। अपने हाल के लेख में मैंने साफ लिखा है कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं और इसे तुरंत खत्म होना चाहिए। लेकिन साथ ही मैंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ हमारे कई महत्वपूर्ण हित जुड़े हैं, उन्हें खतरे में डालना समझदारी नहीं होगी। विदेश नीति आखिरकार राष्ट्रीय हित के बारे में ही होती है, केवल भाषण देने या दिखावे की राजनीति करने के बारे में नहीं। क्या सरकार देती है विदेश जाने का पैसा? थरूर ने दिया जवाब उन्होंने एक के बाद एक सभी आरोपों पर जवाब दिया और यह भी बताया कि उनकी विदेश यात्राओं को सरकार प्रायोजित ना बताया जाए। वह लिखते हैं, 'मेरी विदेश यात्राओं को लेकर जो आरोप लगाए गए हैं, वे बिल्कुल बेबुनियाद हैं। ऑपरेशन सिंदूर को छोड़कर मेरी बाकी विदेश यात्राएं निजी रही हैं। न उन्हें सरकार आयोजित करती है, न सरकार उनका खर्च उठाती है। दुनिया भर के कई विश्वविद्यालय और संस्थान मुझे बुलाते हैं, जितने निमंत्रण आते हैं, उनमें से ज्यादातर को मैं अपने काम के कारण स्वीकार भी नहीं कर पाता। इसके बाद जहां तक क्षेत्रीय राजनीति की बात है, मेरे विचार सालों से एक जैसे रहे हैं। अय्यर पर कसे तीखे तंज, बोले- अब जवाब देना जरूरी था अय्यर पर दोहरे रवैये के लिए तंज भी शशि थरूर ने कसा। उन्होंने लिखा, 'आपने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मेरा समर्थन किया, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। फिर जब आपको पार्टी से निलंबित किया गया था, तब मैंने भी आपके समर्थन में आवाज उठाई थी। मुझे खुशी है कि वह निर्णय बाद में ठीक किया गया। आपने अपने पत्र के अंत में 'रास्ते अलग होने' की बात कही। सच यह है कि आपरेशन सिंदूर पर मेरे बोलने के बाद से ही आप लगातार मेरे बारे में कई टिप्पणियां कर रहे थे। मैंने अब तक सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी थी, लेकिन आपकी हाल की टिप्पणियों के बाद जवाब देना जरूरी हो गया, इसलिए दे रहा हूं।'  

संविधान पर थरूर का बड़ा बयान, कहा– मोदी सम्मान करते हैं, RSS का रुख भी बदला

नई दिल्ली. कांग्रेस लीडरशिप से मतभेद की अटकलों के बीच वरिष्ठ नेता व सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री संविधान को पवित्र मानते हैं और आरएसएस तक ने भी इसे अपना लिया है। संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा है। थरूर ने ये सब बातें कोझिकोड में केरल लिटरेचर फेस्टिवल में दर्शकों के एक सवाल का जवाब देते हुए कहीं। शशि थरूर ने कहा, ''आपको याद होगा मैंने 2014 में जब बीजेपी सत्ता में आई थी, तब इसके बारे में लिखा था। उस समय बहुत बातें हो रही थीं कि वे संविधान को खत्म कर देंगे और एक नया संविधान लाएंगे। यहां तक कि यह भी रिपोर्ट किया गया था कि आरएसएस के विचारक गोविंदाचार्य एक नए संविधान का ड्राफ्ट लिख रहे थे। और फिर भी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि संविधान उनकी पवित्र किताब है। असल में, अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में अपने पहले भाषण में, उन्होंने कहा था कि संविधान ही मेरी एकमात्र पवित्र किताब है।'' कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, ''मैसेज यही था कि वह संविधान को पवित्र मानते हैं। और नतीजा यह हुआ कि जिन्होंने संविधान को रिजेक्ट किया था, जैसा कि आरएसएस ने किया था, उन्होंने भी अब इसे अपना लिया है। तो मैं कहूंगा कि समय की कसौटी पर खुद को साबित किया है। इसने अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों की सरकारों में बदलाव को झेला है और अब तो एक ऐसी पार्टी के सत्ता में आने का भी गवाह बना है जिसके आरएसएस में दार्शनिक पूर्वजों ने साफ तौर पर संविधान को रिजेक्ट कर दिया था, और फिर भी संविधान बचा रहा।" इससे पहले शुक्रवार को केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों और रणनीति को लेकर कांग्रेस हाईकमान ने अहम बैठक की, लेकिन शशि थरूर इसमें नहीं शामिल हुए। इससे एक बार फिर से उनके और कांग्रेस लीडरशिप के बीच मतभेद की अटकलें लगाई जाने लगीं। थरूर के कार्यालय ने कहा है कि उन्होंने कोझिकोड में केरल साहित्य महोत्सव में अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण बैठक में शामिल होने में असमर्थता के बारे में पार्टी को सूचित कर दिया था। हालांकि, थरूर के करीबी सूत्रों ने कहा कि वह बैठक में शामिल नहीं हुए क्योंकि वह इस बात से आहत हैं कि राहुल गांधी ने हाल में कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनके मौजूद होने के बावजूद उनके नाम का उल्लेख नहीं किया और राज्य के नेताओं द्वारा बार-बार उन्हें दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है।

आडवाणी की तारीफ में थरूर का विवादित बयान, बीजेपी ने समर्थन किया, कांग्रेस पर तंज

 नई दिल्ली  8 नवंबर को बीजेपी के सबसे सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी का जन्मदिन था. देश भर के प्रमुख नेताओं ने हमेशा की तरह बधाई दी, लेकिन कांग्रेस नेता शशि थरूर  विवादों में आ गए. शुभकामनाओं में लालकृष्ण आडवाणी के बारे में शशि थरूर की राय कुछ लोगों को रास नहीं आईं. करीब करीब वैसे ही जैसे एक जमाने में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को लालकृष्ण आडवाणी का सेक्युलर बताया जाना बहुतों को हजम नहीं हुआ.  98 साल के लालकृष्ण आडवाणी के बारे में सुप्रीम कोर्ट के वकील संजय हेगड़े को शशि थरूर की राय नागवार गुजरी, तो कांग्रेस सांसद ने आगे बढ़ते हुए और अपनी दलील को दमदार बनाने के लिए आडवाणी की तुलना दो पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से कर डाली – और लहजा ऐसा कि कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर शशि थरूर के बयान से दूरी बना ली.  हाल ही में, शशि थरूर ने भारतीय राजनीति में वंशवाद पर एक लेख लिखा था जिस पर उनके पहले के बयानों की ही तरह विवाद हुआ. शशि थरूर ने वैसे तो कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक वंशवाद की राजनीति का हवाला दिया था, लेकिन सबसे ऊपर चर्चा थी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और बिहार चुनाव में महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव की. शशि थरूर के ताजा बयान पर कांग्रेस ने तो अपनी राय जाहिर कर ही दी है, बीजेपी की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है – वैसे भी 2014 में बीजेपी के केंद्र की सत्ता में आने के बाद से लगता तो यही है कि लालकृष्ण आडवाणी तो बस सम्मान की मूर्ति बनाकर पूजे जाते रहे हैं. मार्गदर्शक मंडल तो अब नाम मात्र भी नहीं बचा है, लेकिन 2024 में राम मंदिर उद्घाटन समारोह से भी उनको दूर ही रहना पड़ा.  शशि थरूर के बयान पर विवाद क्यों? लालकृष्ण आडवाणी के 98वें जन्मदिन के मौके पर शशि थरूर ने सोशल साइट X पर शुभकामनाएं देते हुए लिखा, लालकृष्ण आडवाणी जी को उनके 98वें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं! जनसेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता, उनकी विनम्रता और शालीनता और आधुनिक भारत की दिशा तय करने में उनकी भूमिका अमिट है. एक सच्चे राजनेता, जिनका सेवामय जीवन अनुकरणीय रहा है. विरोध के स्वर अक्सर शशि थरूर को कांग्रेस के भीतर से सुनने पड़ते हैं, लेकिन ये बाहर से था. सुप्रीम कोर्ट के वकील संजय हेगड़े ने शशि थरूर के बयान पर कड़ा विरोध जताया. 'माफ कीजिए मि. थरूर' के साथ संजय हेगड़े ने अपनी पोस्ट की शुरुआत की, और लेखक खुशवंत सिंह का हवाला देते हुए लिखा, नफरत के बीज फैलाना जनसेवा नहीं है.  संजय हेगड़े ने आगे लिखा, रथयात्रा कोई एक वाकया नहीं थी. वो भारतीय गणराज्य के बुनियादी सिद्धांतों को पलटने की एक लंबी यात्रा थी. 2002 और 2014 की जमीन उसी यात्रा ने तैयार की, और उसके बाद की राजनीति को भी दिशा दी. जैसे द्रौपदी का अपमान महाभारत की पृष्ठभूमि बना, वैसे ही रथयात्रा और उसकी हिंसक विरासत आज तक देश की नियति को सताती रही है. अपने मौजूदा शरशय्या से भी उनकी तरह से कोई राजधर्म नहीं बताया गया. शशि थरूर ने संजय हेगड़े को जवाब देते हुए उनकी राय से सहमति तो जताई, लेकिन अपनी बात को वजन देने के लिए अपनी ही कांग्रेस पार्टी के दो नेताओं जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी का भी मूल्यांकन उससे से जुड़ी किसी एक घटना के आधार पर नहीं किया जा सकता.  शशि थरूर ने X पर लिखा, 'संजय हेगड़े आपकी बात से सहमत हूं, लेकिन आडवाणी की लंबी सेवा को एक वाकये तक सीमित करना, चाहे वो कितनी भी महत्वपूर्ण क्यों न हो गलत है. नेहरू के पूरे राजनीतिक करियर का आकलन चीन की नाकामी के आधार पर नहीं किया जा सकता, और न ही इंदिरा गांधी के करियर का मूल्यांकन सिर्फ इमरजेंसी की वजह से किया जा सकता है… मेरा मानना ​​है कि हमें आडवाणी जी के प्रति भी यही शिष्टाचार दिखाना चाहिए.' कांग्रेस पर कसा 'नाजी' वाला तंज थरूर के बयान पर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, "कांग्रेस पार्टी को अपना नाम 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' से बदलकर 'इंदिरा नाजी कांग्रेस' कर लेना चाहिए, क्योंकि यह इंदिरा गांधी की आपातकालीन मानसिकता और नाजी व्यवहार का तरीका है।" दरअसल, खेड़ा ने थरूर के बयान से कांग्रेस पार्टी को किनारे करते हुए कहा था, हमेशा की तरह थरूर अपनी निजी हैसियत से बोल रहे हैं।' इतना ही नहीं उन्होंने थरूर के इस बयान को कांग्रेस की लोकतांत्रिक भावना बताते हुए कहा कि एक कांग्रेस सांसद और सीडब्ल्यूसी सदस्य के रूप में काम करते हुए भी थरूर ऐसे बयान देते रहते हैं, जो कि कांग्रेस की विशिष्ट लोकतांत्रिक और उदारवादी भावना को दर्शाता है। कांग्रेस की तरफ से शशि थरूर के बयान पर जारी की गई इस प्रतिक्रिया पर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए पूनावाला मुख्य विपक्षी दल की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा, "हम सभी सार्वजनिक जीवन में शिष्टाचार बनाए रखते हैं। लेकिन इसी शिष्टाचार के लिए कांग्रेस पार्टी ने उनके (थरूर) के खिलाफ फतवा जारी कर दिया है। यह कांग्रेस की असहिष्णुता की भावना को दर्शाता है। उनके लिए कोई भी प्रतिद्वंद्वी दुश्मन जैसा है।" क्या कहा था थरूर ने? भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर उनके साथ एक तस्वीर पोस्ट करते हुए थरूर ने उनकी तारीफ की थी। उन्होंने लिखा, "उनकी (आडवाणी) जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता, विनम्रता और शालीनता तथा आधुनिक भारत की दिशा तय करने में उनकी भूमिका अमिट है। एक सच्चे राजनेता जिनका सेवामय जीवन अनुकरणीय रहा।" थरूर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया था। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि किसी के पूरे जीवन को किसी एक घटना के आधार पर नहीं देखना चाहिए। जैसे नेहरू जी के जीवन को चीन से हार के लिए नहीं देख सकते, इंदिरा जी के जीवन को केवल आपातकाल के लिए याद नहीं कर सकते। ठीक उसी प्रकार का शिष्टाचार हमें आडवाणी जी के लिए भी रखना चाहिए। गौरतलब … Read more