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स्वागत समारोह में पीएम मोदी को दी गई गाली, वायरल हुआ वीडियो

पटना/ नई दिल्ली  राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चल रही वोटर अधिकार यात्रा के दौरान बुधवार को दरभंगा जिले में सिंहवाड़ा प्रखंड में एक मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मां की गाली दी गई है। इसका वीडियो वायरल है जिसकी पुष्टि हिन्दुस्तान नहीं कर रहा हैं। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पार्टी के मंच पर ऐसा नहीं हुआ है, लेकिन उनके मंच से कुछ दूर टिकट के एक दावेदार के मंच पर इस बदतमीजी की बात बताई जा रही है। वायरल वीडियो जाले विधानसभा सीट से कांग्रेस का टिकट मांग रहे मोहम्मद नौशाद के समर्थन में अलग से बनाए गए मंच का बताया जा रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि अपशब्द का प्रयोग होने के बाद एक आदमी इसे गलत बताते हुए माइक लेता है और नौशाद के समर्थन में नारे लगवाने लगता देता है। पीएम मोदी को दिवंगत मां की गाली देने से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता उबल पड़े हैं। भाजपा ने कहा कि राजनीति में ऐसी नीचता पहले कभी नहीं देखी गई। यह यात्रा अपमान, घृणा और स्तरहीनता की सारी हदें पार कर चुकी है। पार्टी ने कहा है कि यह ऐसी गलती है कि राहुल और तेजस्वी अगर हजार बार कान पकड़कर उठक-बैठक करके भी माफी मांगें, तब भी बिहार की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। भाजपा मुख्यालय में संबित पात्रा ने इसको लेकर पीसी की है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत भाजपा के कई नेताओं ने अपशब्द कहने की भर्त्सना की है। इस मसले पर अभी तक राहुल गांधी या तेजस्वी यादव का कोई बयान नहीं आया है। वायरल वीडियो के संबंध में कांग्रेस से टिकट के दावेदार जाले इलाके के नेता मोहम्मद नौशाद से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके मंच का यह वीडियो एडिट किया हुआ हो सकता है। उन्होंने कहा कि वो राहुल गांधी के काफिले में मुजफ्फरपुर की ओर जा रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान करने की बात करते हुए नौशाद ने कहा कि यह घटना उनके समर्थकों ने नहीं की है। इसकी जांच होनी चाहिए। सिंहवाड़ा प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष रेयाज अहमद डेजी ने बताया कि पार्टी की तरफ से अतरबेल में एक होटल के पास गठबंधन का मंच बना था। वहां सभी दलों के नेता-कार्यकर्ता झंडा-बैनर के साथ जुटे थे। रेयाज ने इसकी निंदा की और कहा कि कांग्रेस के मंच पर यह घटना नहीं हुई है। कांग्रेस के विधानसभा प्रभारी मेराज अली ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने जो मंच बनाया था, वहां राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और तेजस्वी यादव कुछ सेकंड के लिए रुके भी थे, लेकिन आगे बनाए गए नौशाद के मंच के सामने उनका काफिला रुका तक नहीं था। सिमरी थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि वायरल वीडियो की जानकारी उन्हें नहीं मिली है और ना ही कहीं से कोई शिकायत मिली है। इसकी शिकायत मिलने पर नियमानुकूल कारवाई की जाएगी। प्रखंड प्रमुख पुष्पा झा, मुखिया संघ के अध्यक्ष पप्पू चौधरी, समाजसेवी गणेश चौबे, निर्भय कुमार, संजय कुमार, शंभू ठाकुर समेत कई संघ-संगठनों के लोगों ने मोदी को अपशब्द कहने की तीखी निंदा की है। क्या है वायरल वीडियो में वायरल वीडियो में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ नारे लगाती साधारण कार्यकर्ताओं की बड़ी भीड़ मंच पर दिख रही है। राहुल, प्रियंका या तेजस्वी की सुरक्षा व्यवस्था ऐसी है, जिसमें मंच पर इस तरह की भीड़ और इस तरह के लोग चढ़ नहीं पाते। इसी नारेबाजी के दौरान एक आदमी की आवाज आती है जो पीएम मोदी की मां को लेकर अपशब्द कहता है। मंच पर तभी एक आदमी की यह आवाज आती है कि गलत है, गलत है और फिर सामान्य नारेबाजी शुरू हो जाती है।  

भाजपा पर बरसीं ममता, बोलीं- जब तक जिंदा हूं वोटिंग अधिकार सुरक्षित रहेगा

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को TMC छात्र परिषद की रैली में भाजपा पर जोरदार हमले किए हैं। ममता बनर्जी ने कहा है कि भाजपा 500 लोगों की टीम ले कर बंगाल आई है और लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए सर्वे किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लेकिन उनके होते हुए किसी भी बंगाली के मतदान के अधिकार को नहीं छीनने दिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने ‘भाषाई आतंकवाद’ का भी जिक्र किया है। CM ममता ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा है कि भाषाई आतंकवाद को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोलकाता में छात्र शाखा की एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा, "आपको खुद जांच करनी चाहिए कि आपका नाम अभी भी मतदाता सूची में है या हटा दिया गया है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके पास आधार कार्ड हैं।" उन्होंने आगे कहा, "जब तक मैं ज़िंदा हूं, किसी को भी लोगों का मताधिकार नहीं छीनने दूंगी।" ममता बनर्जी ने इस दौरान चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राज्य सरकार के अधिकारियों को धमका रहा है। उन्होंने दावा किया, "चुनाव आयोग हमारे अधिकारियों को धमका रहा है। आयोग का अधिकार क्षेत्र चुनाव के दौरान केवल तीन महीनों तक ही है, पूरे साल नहीं।" बंगालियों की भूमिका भुलाने की कोशिश ममता बनर्जी ने दावा किया है कि भाजपा स्वतंत्रता आंदोलन में बंगालियों द्वारा निभाई गई भूमिका को भुलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “अगर बंगाली भाषा ही नहीं है, तो राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत किस भाषा में लिखे गए हैं? वे चाहते हैं कि लोग स्वतंत्रता आंदोलन में बंगालियों द्वारा निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को भूल जाएं। हम इस भाषाई आतंक को बर्दाश्त नहीं करेंगे।” भाजपा के पास 'भ्रष्टाचार भंडार वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी ममता बनर्जी ने जवाब दिया। CM ममता ने दावा किया कि TMC सरकार ने कई सामाजिक कल्याणकारी पहल की हैं। वहीं केंद्र की भाजपा सरकार विकास के नाम पर भ्रष्टाचार में लिप्त है। उन्होंने कहा, "हम महिलाओं के लिए 'लक्ष्मी भंडार' योजना लेकर आए हैं, जबकि भाजपा के पास 'भ्रष्टाचार भंडार' और भाई-भतीजावाद है। वे देश को लूट रहे हैं, जबकि हम महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं।"  

सीएम मान पर तरुण चुघ का तंज – पंजाब संकट में, नेता विदेश यात्राओं में व्यस्त

चंडीगढ़  भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (आप) नेतृत्व पर बुधवार को हमला बोला। भाजपा नेता ने कहा कि जब पंजाब बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है, तब मुख्यमंत्री मान सुर्खियां बटोरने के लिए तमिलनाडु घूम रहे हैं और दिल्ली के उनके आकाओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया रोजाना पंजाब को लूटने में लगे हैं। चुघ ने कहा, “जब रोम जल रहा था तब नीरो बांसुरी बजा रहा था, आज वही दृश्य पंजाब में दोहराया जा रहा है। हजारों परिवार पानी में फंसे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री मान जनता के साथ खड़े होने के बजाय बाहरी दौरों में मशगूल हैं। वहीं, उनके मालिक पंजाब के संसाधनों पर ऐश कर रहे हैं।” तमिलनाडु में सीएम मान द्वारा ‘ब्रेकफास्ट योजना’ की घोषणा पर चुघ ने सवाल उठाते हुए कहा, “झूठे वादों की बजाय मान को जवाब देना चाहिए कि किसानों की कर्जमाफी कब होगी? एमएसपी टॉप-अप कब मिलेगा? पंजाब की महिलाओं को 1000 रुपए प्रति माह का वादा किए 40 महीने बीत चुके हैं, लेकिन आज तक कोई वादा पूरा नहीं हुआ।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीते चार वर्षों में आप सरकार ने पंजाब पर 1 लाख करोड़ रुपये का नया कर्ज लाद दिया, केंद्र की योजनाओं जैसे पीएम पोषण योजना को अपने नाम से पेश किया और फिर भी मूल वादे पूरे नहीं किए। चुघ ने कहा, “आज पंजाब के 20 लाख से अधिक बच्चे और पूरे देश में 11.5 करोड़ से ज्यादा बच्चे पोषण केवल पीएम पोषण योजना से पा रहे हैं।” सीएम मान की नाकामी को पंजाब की दुर्दशा का कारण बताते हुए चुघ ने कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था ध्वस्त है, अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है और नशा युवाओं को बर्बाद कर रहा है। उन्होंने आप नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा, “केजरीवाल-सिसोदिया गैंग ने पंजाब को अपनी विलासिता की कॉलोनी बना रखा है और रोजाना राज्य को लूटने की साज़िश रचते हैं।”

4300 करोड़ के गुमनाम चंदे पर राहुल गांधी का हमला, चुनाव आयोग से की जवाबदेही की मांग

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर हमला बोला है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग से सवाल किए हैं। राहुल गांधी ने जिस मीडिया रिपोर्ट को साझा किया है, उसमें दावा किया गया है कि गुजरात में कुछ 'अनाम दलों' को 2019-20 और 2023-24 के बीच 4,300 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। राहुल गांधी ने आयोग पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या चुनाव आयोग इसकी जांच करेगा या हलफनामा मांगेगा। राहुल गांधी ने उठाये सवाल लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की। इसमें दावा किया गया है कि इन दलों ने तीन चुनावों  2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव तथा 2022 के विधानसभा चुनाव में कुल 43 उम्मीदवार उतारे थे, जिन्हें मिलकर सिर्फ 54,069 वोट मिले। वहीं, इनकी चुनाव रिपोर्ट में इन पार्टियों का खर्च 39.02 लाख रुपये दर्ज है, जबकि ऑडिट रिपोर्ट में 3,500 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब दिखाया गया है। क्या कानून बदल देगा चुनाव आयोग एक्स पर हिंदी में लिखे पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि गुजरात में कुछ गुमनाम पार्टियां हैं जिनके नाम किसी ने नहीं सुने हैं, लेकिन उन्हें 4,300 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि इन पार्टियों ने बहुत कम मौकों पर चुनाव लड़ा है या उन पर पैसा खर्च किया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने आगे चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए पूछा कि ये हजारों करोड़ रुपये कहां से आए? इन्हें कौन चला रहा है? यह पैसा कहां गया? क्या चुनाव आयोग इसकी जांच करेगा या यहां भी हलफनामा मांगेगा? या फिर वह कानून ही बदल देगा, ताकि यह डेटा भी छिपाया जा सके? राहुल गांधी से चुनाव आयोग ने मांगा था हलफनामा गौरतलब है कि राहुल गांधी ने हाल ही में मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। उस पर 17 अगस्त को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि कांग्रेस नेता या तो शपथपत्र देकर प्रमाण पेश करें या फिर देश से माफी मांगें।

मनोज जरांगे ने BMC चुनाव से पहले दी नई चुनौती, फडणवीस के मंत्री पहुंचे समझाने

मुंबई महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे ने एक बार फिर राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने तेजी दिखाते हुए मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल भेजकर मनोज जरांगे से बातचीत करने के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। जरांगे बुधवार की सुबह जैसे ही मुंबई के लिए रवाना हुए। राज्य की फडणवीस सरकार ने शिवनेरी में उनसे मिलने के लिए एक मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा। दरअसल, मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे 29 अगस्त से मुंबई में अपना आंदोलन शुरू करने पर अड़े हुए हैं। उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि उन्हें कैबिनेट उप-समिति के प्रमुख और राज्य के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल का फोन आया था, जिसमें उन्हें बताया गया था कि सरकार की एक टीम चर्चा के लिए पुणे जिले के शिवनेरी पहुंचेगी। जरांगे ने पत्रकारों को बताया, ‘‘विखे पाटिल द्वारा भेजा गया प्रतिनिधिमंडल शिवनेरी आएगा। सरकार ने बातचीत करने की इच्छा जताई है, लेकिन मुंबई आंदोलन पर हमारा रुख अपरिवर्तित है।’’ इस बीच, विखे पाटिल ने कहा कि सोमवार को हुई कैबिनेट उप-समिति की पहली बैठक में मराठा समुदाय के करीबी रिश्तेदारों को आरक्षण का लाभ देने से संबंधित जरांगे की मांगों पर विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने बताया कि मराठा आरक्षण पर शिंदे समिति को छह महीने का विस्तार दिया गया है, जिसकी मांग जरांगे ने पहले भी की थी। विखे पाटिल ने कहा, ‘‘उप-समिति ने अपनी पहली ही बैठक में इस मांग को स्वीकार कर लिया।’’ जरांगे मराठा समुदाय को कुनबी जाति (अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल एक जाति) के रूप में मान्यता दिलाने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, ताकि उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिल सके। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जरांगे से मंगलवार को अनुरोध किया था कि वह 27 अगस्त से शुरू हो रहे गणेश उत्सव के दौरान मुंबई में प्रदर्शन करने की अपनी योजना पर फिर से विचार करें। महाराष्ट्र सरकार द्वारा उन्हें रोकने के प्रयासों के बावजूद जरांगे ने घोषणा की है कि वह 29 अगस्त से मुंबई के आजाद मैदान में मराठा आरक्षण के लिए फिर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे।  

कांग्रेस पर बरसीं शोभा करंदलाजे, कहा- मंदिर को धर्मनिरपेक्ष बताना गलत

बेंगलुरु  कर्नाटक सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखिका बानू मुश्ताक को मैसूरू के मशहूर दशहरा उत्सव कार्यक्रम का उद्घाटन करने के लिए बुलाने के फैसले पर रार छिड़ा हुआ है। यह मामला राज्य में अब कांग्रेस बनाम भाजपा की सियासी लड़ाई बनती जा रही है। अब केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे भी इस राजनीतिक लड़ाई में कूद पड़ी हैं। उन्होंने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार द्वारा इस आमंत्रण के समर्थन में की गई टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है। करंदलाजे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबे पोस्ट में लिखा है, "उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की यह टिप्पणी कि चामुंडेश्वरी मंदिर सिर्फ हिंदुओं की संपत्ति नहीं है, बहुत ही निंदनीय है।" उन्होंने आगे लिखा, “ऐसा लगता है कि वह कांग्रेस आलाकमान को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि कर्नाटक विधानसभा में आरएसएस की प्रार्थना पढ़ने के लिए लगाए गए फटकार की भरपाई कर सकें। कांग्रेस पार्टी का लहजा, तेवर और रुख हमेशा से हिंदू विरोधी और हिंदू हितों के खिलाफ रहा है।” मंदिर 'धर्मनिरपेक्ष स्थान' नहीं केंद्रीय मंत्री ने लिखा है, "जो लोग धर्मनिरपेक्षता का उपदेश देते रहते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि मंदिर 'धर्मनिरपेक्ष स्थान' नहीं हैं, बल्कि वे पवित्र संस्थान हैं जिनका अधिकार हिंदुओं का है।" भाजपा नेता ने लिखा है, “कांग्रेस पार्टी ने अपनी हिंदू विरोधी मानसिकता को बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने बानू मुश्ताक को मैसूर दशहरा के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया, जो खुलेआम हमारे देवताओं को अस्वीकार करती हैं और अब उनके उप-मुख्यमंत्री यह कहने का साहस कर रहे हैं कि चामुंडी हिंदुओं की संपत्ति नहीं है। क्या यही कर्नाटक की आस्था और परंपराओं के प्रति उनका सम्मान है?” चामुंडेश्वरी मंदिर केवल हिंदुओं की संपत्ति नहीं: डीके एक दिन पहले जब इस विवाद पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि मैसुरू स्थित चामुंडी हिल, जहां प्रसिद्ध चामुंडेश्वरी मंदिर स्थित है, केवल हिंदुओं की संपत्ति नहीं है। शिवकुमार ने यह बयान अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित बानू मुश्ताक को इस वर्ष 22 सितंबर को चामुंडी हिल की चोटी पर विश्व प्रसिद्ध 'मैसुरू दशहरा- 2025' समारोह का उद्घाटन करने के लिए दिए गए सरकारी निमंत्रण के विरोध पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिया। कांग्रेस के खिलाफ भाजपा ने खोला मोर्चा शिवकुमार ने कहा, ‘‘चामुंडी हिल और देवी चामुंडी हर धर्म की हैं, यह केवल हिंदुओं की संपत्ति नहीं है। सभी समुदायों के लोग चामुंडी हिल जाते हैं और देवी की पूजा करते हैं, यह उनकी आस्था है। हम चर्च, जैन मंदिर, दरगाह, गुरुद्वारे जाते हैं… यह (मुश्ताक का विरोध) पूरी तरह से राजनीति है।’’ शिवकुमार ने कहा था, "हिंदू मंदिरों में अल्पसंख्यक भी जाते हैं। हम मस्जिदों और चर्चों में भी जाते हैं। इसे कौन रोक सकता है?" उनके इस बयान पर विपक्षी दल भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने भी कहा कि चामुंडी पहाड़ी पक्के तौर पर हिंदुओं की संपत्ति है, मुसलमानों की नहीं। मैसुरू के सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने भी शिवकुमार के बयान की निंदा की है।

शिवराज सिंह चौहान पर ठहरी निगाहें, भाजपा अध्यक्ष की रेस में अटकलें तेज

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के नाम पर अब तक मुहर नहीं लग सकी है। साथ ही पार्टी की तरफ से कोई तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है। अब कहा जा रहा है कि बीजेपी बिहार विधानसभा चुनाव का शेड्यूल आने से पहले अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर सकती है। साथ ही RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख प्रमुख मोहन भागवत के साथ केंद्रीय मंत्री की मुलाकात ने अटकलें तेज कर दी हैं। हालांकि, भाजपा की तरफ से आधिकारिक तौर पर साफ नहीं किया गया है कि अगले प्रमुख के नाम की घोषणा कब होगी। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि पार्टी आलाकमान की तरफ से संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कर ली गई है। वहीं, इस पर 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया है कि इसके बाद नए अध्यक्ष के चुनाव की जानकारी दी जा सकती है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों के प्रमुख पहले चुने जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने यह भी कहा है कि अगर अध्यक्ष बिहार चुनाव की घोषणा से पहले नहीं चुना गया, तो नियुक्ति चुनाव के बाद ही की जाएगी। फिलहाल, भाजपा ने अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए किसी शेड्यूल का ऐलान नहीं किया है। दिल्ली में बड़ी मीटिंग रविवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और संघ प्रमुख भागवत की मीटिंग की खबरें हैं। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि यह बैठक बंद कमरे में 45 मिनट तक चली। खास बात है कि चौहान को भी अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदारों में से एक माना जा रहा है। खास बात है कि यह मीटिंग दो साल के लंबे अंतराल के बाद हुई थी। इन नामों की भी चर्चा इससे पहले कहा जा रहा था कि केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी, आंध्र प्रदेश की भाजपा प्रमुख डी पुरंदेश्वरी, भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वनति श्रीनिवासन, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव, भाजपा नेता विनोद तावड़े के नाम की भी चर्चाएं चल रही थीं। हालांकि, इन्हें लेकर भाजपा ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है।  

‘वोटर अधिकार यात्रा’ में प्रियंका गांधी की मौजूदगी, बिहार कांग्रेस ने कहा—सकारात्मक माहौल

सुपौल  लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में बिहार में कथित तौर पर वोट चोरी के खिलाफ इंडिया ब्लॉक की वोटर अधिकार यात्रा में मंगलवार को सांसद प्रियंका गांधी भी शामिल हो गईं। वोटर अधिकार यात्रा के 10वें दिन की यात्रा आज सुपौल से शुरू हुई है। सुपौल में इस यात्रा को लेकर लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। यात्रा में बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता बड़े-बड़े झंडे लेकर शामिल हुए हैं। वोटर अधिकार यात्रा झंझारपुर होते हुए दरभंगा तक पहुंचेगी। प्रियंका गांधी के इस यात्रा में शामिल होने से कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल है। बिहार कांग्रेस ने आज की वोटर अधिकार यात्रा का एक वीडियो जारी करते हुए एक्स पर लिखा, "सुपौल में बन गया माहौल। वोट चोर — गद्दी छोड़।" दरअसल, बिहार में निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर के तहत 65 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम काटे जाने के खिलाफ इंडिया ब्लॉक द्वारा वोटर अधिकार यात्रा निकाली गई है। इसमें गठबंधन में शामिल राजद के नेता तेजस्वी यादव सहित बिहार के सभी घटक दलों के नेता शामिल हो रहे हैं। आज इस यात्रा के दसवें दिन की शुरुआत सुपौल जिले से हुई है। कल यानी सोमवार को इस यात्रा को ब्रेक दिया गया था। इस साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाला है। इस यात्रा के जरिए विपक्षी दल के गठबंधन के लोग लोगों के बीच पहुंच रहे हैं और उन्हें अपनी बात कह रहे हैं। राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा 17 अगस्त को बिहार के सासाराम से शुरू हुई है। इस यात्रा में इंडिया ब्लॉक में शामिल राजद के नेता तेजस्वी यादव सहित घटक दलों के सभी नेता भी शामिल हैं। 16 दिन की यह यात्रा लगभग 20 जिलों से होकर गुजरेगी और 1,300 किलोमीटर का सफर पूरा करेगी। एक सितंबर को पटना में बड़ी रैली के साथ यात्रा का समापन होगा। यह यात्रा अब तक औरंगाबाद, गया, शेखपुरा, कटिहार, पूर्णिया, मुंगेर, भागलपुर होते हुए सुपौल पहुंची है।

DK पर दबाव बढ़ा, RSS प्रार्थना के बाद हाईकमान से ऐक्शन की मांग; सिद्धारमैया समर्थक बढ़त में

बेंगलुरु  कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संघर्ष नई बात नहीं है, लेकिन अब आरएसएस की प्रार्थना के चलते पार्टी में मतभेद है। डिप्टी सीएम शिवकुमार ने श्रद्धा भाव के साथ आरएसएस की प्रार्थना की दो पंक्तियां विधानसभा में पढ़ दी थीं। इसी को लेकर कांग्रेस के कई विधायक नाराज हैं। यही नहीं कोई डीके शिवकुमार से माफी की मांग कर रहा है तो किसी ने हाईकमान से ऐक्शन की बात ही उठा दी है। डीके शिवकुमार ने नेता विपक्ष आर. अशोक से बातचीत के दौरान आरएसएस की ओर से राज्य में स्कूलों और कई सामाजिक संस्थाएं खोलने का जिक्र करते हुए तारीफ की थी। इसके अलावा आरएसएस की प्रार्थना की भी दो पंक्तियां सुनाई थीं। अब इस मामले में वह पार्टी के अंदर ही घिर गए हैं। राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जरकिहोली का कहना है कि हाईकमान और सीएम सिद्धारमैया के ऊपर है कि वह डीके शिवकुमार पर इस हरकत के लिए क्या ऐक्शन लेते हैं। इसके अलावा एमएलसी बीके हरिप्रसाद का कहना है कि डीके शिवकुमार को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवकुमार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। कम से कम यह स्पष्ट होना चाहिए कि उन्होंने पार्टी नेता के तौर पर नहीं बल्कि निजी स्तर पर यह प्रार्थना पढ़ी थी। वहीं जरकिहोली ने कहा कि हम अपने स्तर पर तो कुछ नहीं कर सकते। इस मामले में हाईकमान को ही फैसला लेना है। इस मामले के चलते सिद्धारमैया कैंप को भी हावी होने का मौका मिल गया है, जो डीके शिवकुमार की सीएम पद की दावेदारी को लेकर असहज रहा है। जरकिहोली को भी सिद्धारमैया खेमे का नेता माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह सवाल तो उठता ही है क्या शिवकुमार ने जो किया, वह राहुल गांधी की लाइन पर है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों को डीके शिवकुमार समझते ही नहीं हैं। उम्मीद है कि वह कुछ सीखेंगे। हालांकि जरकिहोली ने एक दिन पहले ही डिप्टी सीएम का बचाव भी किया था। उन्होंने कहा था कि आरएसएस की प्रार्थना तो मैं भी पढ़ लूंगा। लेकिन क्या वे मुझे सीएम बना देंगे? यही नहीं उन्होंने कहा था कि हमेशा किसी का विरोध ही नहीं किया जा सकता। यह कहना सही नहीं है कि आरएसएस की प्रार्थना पढ़ ली तो अब डीके शिवकुमार भाजपा में ही शामिल हो जाएं। इसमें कुछ गलत नहीं है। वह सब जानते हैं। हमारे पास हमेशा काउंटर इंटेलिजेंस होना चाहिए। यानी विरोधी खेमे के बारे में भी पता होना चाहिए। वहीं हरिप्रसाद ने कहा कि डीके शिवकुमार को जो करना है करें। लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने जो किया है, वह गलत था। हम इसका विरोध करते हैं।

कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ीं, साथी दलों ने राहुल गांधी को छोड़कर बढ़ाया कदम खींचने का दबाव

नई दिल्ली सबको जोड़कर चलने की कोशिश में जुटी कांग्रेस एक बार फिर अकेली पड़ती जा रही है. पीएम-सीएम वाले बिल पर विपक्षी एकता का गुब्बारा फुटने लगा है. पीएम-सीएम को हटाने वाले बिल पर जीपीसी में शामिल होने को लेकर इंडिया ब्लॉक में दो फाड़ नजर आ रहा है. इंडिया गठबंधन के प्रमुख साथियों ने कांग्रेस को फंसा दिया है. जेपीसी मामले पर राहुल गांधी अब बीच मझधार फंस चुके हैं. यहां से वह किस ओर जाएंगे, यह आने वाले वक्त में पता चल जाएगा. दरअसल, भ्रष्टाचार यानी आपराधिक मामलों में कम से कम 30 दिनों तक बिना बेल के जेल में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने वाले बिलों को जेपीसी के लिए भेजा गया है. इस बिल पर विचार करने के लिए बनने वाली जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति में शामिल होने को लेकर ही विपक्षी खेमे यानी इंडिया ब्लॉक मतभेद है. कांग्रेस की क्या प्लानिंग? ET की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि DMK के TKS एलंगोवन ने कहा कि उनकी पार्टी ने बिल के विरोध करने और उसे दर्ज कराने के लिए जेपीसी में शामिल होने का फैसला लिया है। वहीं कांग्रेस के एक सांसद ने कहा, "हमारे पास यह सोचने के उपयुक्त कारण हैं कि जेपीसी में शामिल होना कैसे उपयोगी हो सकता है।" उन्होंने कहा कि हम हर किसी को बीजेपी के खिलाफ एक साथ ले जाना चाहते हैं। विपक्षी दल कह रहे JPC बेमतलब बता दें कि इंडिया गठबंधन में शामिल रही आम आदमी पार्टी ने भी तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ही तरह जेपीसी में अपने सदस्य नामित नहीं करने का फैसला किया है। हालांकि, वामपंथी दलों ने अपनी स्थिति णअभी स्ष्ट नहीं की है लेकिन माना जा रहा है कि वह इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ है और जेपीसी में अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। कई विपक्षी दलों ने कहा है कि इस मुद्दे पर जेपीसी बेमतलब है। विपक्षी एकता में दरार? जब संसद में 130वां संविधान संशोधन विधेयक पेश हुआ तब विपक्षी खेमा एकजुट नजर आया था. मगर अब धीरे-धीरे इस एकता की दीवार ढहने लगी है. पीएम-सीएम वाले बिल पर जेपीसी में हिस्सा लेने को लेकर इंडिया ब्लॉक के प्रमुख दलों में गहरी दरार उभर आई है. अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे से लेकर अरविंद केजरीवाल तक सबने कांग्रेस को फंसा दिया है. सपा, टीएमसी, आप और उद्धव गुट वाली शिवसेना ने जेपीसी से अलग रहने का फैसला किया है. हालांकि, कांग्रेस ने अब तक जेपीसी में शामिल होने के संकेत दिए हैं. इंडिया गठबंधन के सहयोगियों के इस फैसले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बीच मजधार में अकेला छोड़ दिया है. अब कांग्रेस के सामने यह मुसीबत है कि वह अकेले जेपीसी में जाएगी या फिर अन्य साथियों की तरह अलग रहने का ही फैसला लेगी? क्या है पीएम-सीएम बिल दरअसल, बीते दिनों संविधान (130वां) संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश हुआ. यह बिल और इसके साथ जुड़े जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश शासन संशोधन विधेयक में प्रावधान है कि अगर कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री किसी ऐसे अपराध में गिरफ्तार या हिरासत में रहता है, जिसकी सजा पांच साल या उससे अधिक है, और यह हिरासत लगातार 30 दिन तक रहती है, तो वह अपने पद से खुद ब खुद बर्खास्त हो जाएंगे. हालांकि, जेल से आने के बाद वह पद ग्रहण कर सकते हैं. यह विधेयक 20 अगस्त को लोकसभा में पेश हुआ. इस दौरान विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया. इसके बाद सरकार ने पीएम-सीएम वाले बिल को 31 सदस्यीय जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का फैसला किया. जेपीसी में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे.अभी तक इसका गठन नहीं हुआ है. जानिए किसका क्या स्टैंड ममता बनर्जी की टीएमसी ने भी जेपीसी से अलग होने का फैसला किया है. टीएमसी का कहना है कि यह बिल भाजपा की ‘राजनीतिक साजिश’ है, जो विपक्ष को फंसाने और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उलझाने का प्रयास है. जेपीसी में शामिल होकर टीएमसी भाजपा के खेल में नहीं पड़ेगी. अखिलेश की समाजवादी पार्टी का भी यही स्टैंड है. खिलेश यादव ने इसे ‘संघीय ढांचे पर हमला’ करार दिया. अखिलेश ने कहा कि यह बिल राज्यों की स्वायत्तता को कमजोर करेगा. हमारा फैसला स्वतंत्र है, और इस मामले में हम कांग्रेस के साथ नहीं चलेंगे. वहीं, उद्धव गुट वाली शिवसेना ने भी ममता और अखिलेश की राह अपनाई है. उद्धव ठाकरे ने कहा कि विपक्षी एकता चुनावों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। लेकिन इस बिल पर जेपीसी में शामिल होना मतलब भाजपा की रणनीति को वैधता देना है। हम बाहर रहकर जनता के बीच मुद्दा उठाएंगे. शिवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि उद्धव ठाकरे को लगता है कि जेपीसी का कोई मतलब नहीं है. वहीं, अरविंद केजरीवाल की आप के सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी जेपीसी में शामिल नहीं होगी, क्योंकि ये बिल भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाने के लिए लाया गया है. राजद भी इससे अलग रहने का मन बना रही है. कांग्रेस फंस गई कांग्रेस? इस तरह इन चार दलों के फैसले ने कांग्रेस को मुश्किल में डाल दिया है. हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक आधिकारिक फैसला नहीं लिया, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी जेपीसी में शामिल होने के पक्ष में हैं, ताकि बिल के कमजोर पक्षों को उजागर किया जा सके. हालांकि, अखिलेश, ममता, अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे के फैसले के बाद कांग्रेस पर दबाव बढ़ गया है. कांग्रेस असमंजस में है. वह क्या करे और क्या नहीं, अभी इस पर मंथन कर रही है. अगर कांग्रेस अकेले जाती है, तो यह इंडिया ब्लॉक की एकता को और कमजोर कर सकता है. साथ ही भाजपा को विपक्ष की कमजोरी का फायदा मिल सकता है. यह स्थिति राहुल गांधी के लिए चुनौतीपूर्ण है और ऐसा लग रहा है कि वह बीच मझधार में हैं. अब देखने वाली बात होगी कि इससे राहुल गांधी कैसे पार पाते हैं.