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बेमौसम बारिश ने तोड़ी किसानों की कमर, फसलों के नुकसान की सूचना के लिए खुला कंट्रोल रूम और प्रशासन ने शुरू किया सर्वे

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में बुधवार और बृहस्पतिवार के दौरान पूर्वी और पश्चिमी संभाग के 50 से ज्यादा जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। विक्षोभ के असर से हुई बारिश से बांदा, इटावा, बरेली, हरदोई जैसे जिलों में दिन व रात का पारा सामान्य से काफी नीचे पहुंच गया। बेमाैसम बारिश और तेज रफ्तार हवाओं से खेतों में कटने को तैयार खड़ी गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। माैसम विभाग का कहना है कि शुक्रवार से मौसम की यह आंख मिचौली थमने वाली है। अगले 15 दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा। इसके साथ ही अगले एक हफ्ते में प्रदेश भर के औसत तापमान में लगभग दस डिग्री तक की बढ़ोतरी का पूर्वानुमान जताया गया है। बृहस्पतिवार को 9.4 डिग्री की सर्वाधिक गिरावट के साथ बांदा में रात का तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। वहीं 11.5 डिग्री तापमान के साथ नजीबाबाद में सबसे ठंडी रात रही। वहीं 28 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ मुजफ्फरनगर व अयोध्या में सबसे ठंडा दिन रहा। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि शुक्रवार से प्रदेश भर में पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म हो जाएगा और तापमान में क्रमश: बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। बृहस्पतिवार को लखीमपुर खीरी में सर्वाधिक 15 मिमी बारिश दर्ज हुई। वहीं बहराइच में 6 मिमी, कानपुर में 5.4 मिमी और लखनऊ में 4.5 मिमी बारिश हुई।   तीखी धूप में मरहम लगाती रहीं ठंडी हवाएं राजधानी में माैसम अब स्थिर होने वाला है। पिछले दो-तीन से सक्रिय विक्षोभ का असर कमजोर पड़ चुका है। शुक्रवार से मौसम में बदलाव के संकेत हैं। अब धूप और गर्म हवाओं से गर्मी की वापसी होगी। बृहस्पतिवार सुबह तक आसमान में बादलों का डेरा रहा। दोपहर में आसमान खुलने पर तीखी धूप से सामना हुआ। हालांकि ठंडी हवाएं असर में थीं जिन्होंने धूप में मरहम का काम किया। मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार और बुधवार की आंधी-बारिश के असर से बृहस्पतिवार को भी माैसम आमतौर पर राहत भरा रहा। दिन का अधिकतम तापमान 3.5 डिग्री बढ़त के साथ 30.5 डिग्री दर्ज किया लेकिन यह सामान्य तापमान से लगभग 7 डिग्री कम था। बीती रात की बारिश सुबह में 4.5 मिमी दर्ज की गई। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि शुक्रवार से पश्चिमी विक्षोभ का असर पूरी तरह खत्म हो जाएगा जिससे लखनऊ में अगले एक हफ्ते में तापमान में 5 से 7 डिग्री की क्रमिक बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। शुक्रवार से रात के तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। साथ ही 25 से 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से रूखी पछुआ हवाएं चलेंगी। इन हवाओं के असर में आने से गर्मी का अहसास और बढ़ जाएगा।  आने वाले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क और गर्म ही रहने के आसार हैं। यदि कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो अधिकतम तापमान 35 से 40 डिग्री के बीच पहुंच सकता है। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 3.5 डिग्री की बढ़त के साथ 30.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। वहीं, न्यूनतम तापमान 2.8 डिग्री की गिरावट के साथ 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। बुधवार रात आंधी और बारिश के साथ कुछ जगहों पर हुई ओलावृष्टि से शहर के कई इलाकों में गेहूं और सब्जियों के साथ आम की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। कई जगह खेतों में तैयार हो चुकी गेहूं की फसल गिर गई। कई जगहों पर गेहूं की फसल के जहां भीग जाने से उसके दाने काले पड़ने की भी संभावना बढ़ गई है। सरोजनीनगर के भटगांव पांडे निवासी किसान अभिलाष ने बताया कि आंधी और बारिश से गेहूं की फसल गिर गई। बाली टूटने से भी करीब 30 से 40 प्रतिशत का नुकसान हुआ है। तहसील प्रशासन की टीम अभी तक सर्वे को नहीं पहुंची है। माल के केडोरा निवासी श्याम प्रकाश ने बताया कि उनकी दस बिस्वा गेहूं की फसल भीग कर गिर गई। बागवान जितेंद्र ने बताया कि आंधी पानी से आम के करीब 30 प्रतिशत टिकोरे झड़ गए। मुआवजे के सर्वे के लिए कोई टीम नहीं आई। एसडीएम ने लिया स्थिति का जायजा मोहनलालगंज। आंधी-बारिश से हुए फसल नुकसान का आकलन करने के लिए उप जिलाधिकारी पवन पटेल ने देवती, करोरा और केवली गांवों में पहुंचकर फसलों की स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम ने बताया कि सभी लेखपालों को अपने क्षेत्र में हुए नुकसान की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने निगोहा, नगराम और गोसाईगंज क्षेत्र के कई गांवों का भी निरीक्षण किया। खुला कंट्रोल रूम, फसल को नुकसान तो यहां दें सूचना  कंट्रोल रूम एवं दैवी आपदा के सहायक अधिकारी अमर सिंह ने बताया कि डीएम के निर्देशन में कलक्ट्रेट में कंट्रोल रूम की स्थापना कर दी गई है। कोई भी किसान अपनी फसल नुकसान की जानकारी मोबाइल नंबर 9415002525 पर अथवा लखनऊ जिले के लिए टोल फ्री नंबर 1077 पर दे सकता है। सर्वे में जिस किसान की 33 फीसदी से अधिक फसल का नुकसान मिलेगा उसे तुरंत मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।  

कृषि विभाग ने किसानों से की अपील, खलिहानों को आग से बचाने के लिए ज्वलनशील पदार्थों से करें परहेज

ज्वलनशील पदार्थों से करें खलिहानों का बचाव आगजनी की घटनाओं के पश्चात कृषि विभाग ने किसानों से की अपील बेमौसम बरसात पर भी किसानों को किया जा रहा जागरूक, दाने भीग गए हैं तो उनमें मात्र 10 प्रतिशत तक नमी बचने के बाद ही करें भंडारित  लखनऊ प्रदेश के कुछ जनपदों में खेत-खलिहानों में आगजनी की घटनाओं पर कृषि विभाग किसानों को जागरूक कर रहा है। कृषि विभाग ने जनपदों में तैनात कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस समय किसान बेमौसम बारिश से परेशान हैं। वहीं कुछ जनपदों में आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे में किसानों के पास पहुंचकर उन्हें जागरूक करें कि वे खलिहानों का सिगरेट, बीड़ी व अन्य ज्वलनशील पदार्थों से बचाव करें।  कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन दिनों निरंतर किसानों से संपर्क में रहें। उन्हें किसी प्रकार की परेशानी हो, इसके लिए भी लगातार किसानों से संवाद स्थापित करें।  कृषि विभाग ने किसानों से अपील की कि वर्तमान में सरसों, चना, मसूर, मटर जैसी फसलों की कटाई एवं मड़ाई पूर्ण करते हुए भण्डारण इत्यादि किया जा रहा है। सर्वाधिक क्षेत्र में उगाई गई गेहूं की फसल को कुछ दिनों से विभिन्न क्षेत्रों में हो रही वर्षा से क्षति की आशंका है। ऐसे में किसान इस समय फसलों की कटाई एवं मड़ाई के समय सावधानी बरतें।  विभाग ने किसानों से कहा कि खेतों में यदि खड़ी फसल है और भीग गई है तो एक या दो दिन सूखने का मौका दें। यदि फसल की कटाई हो गई है और लांक खेत में पड़ी है तो खेत में पानी न रुकने दें अथवा बोझा बांधकर खड़ा कर दें। यदि फसल कटकर खलिहान में पड़ी है और भीग गई है तो उसे खोलकर हवा व धूप लगने दें जिससे जल्द ही सूख जाए, तत्पश्चात मड़ाई करें। यदि दाने भीग गए हैं तो उसे मात्र 10 प्रतिशत तक नमी बचने के बाद ही भंडारित करें। बीज उत्पादक कृषक हार्वेस्टर कंबाइन से कटाई कराते समय सफाई का विशेष ध्यान रखें। वर्तमान में नमी के दृष्टिगत भण्डारण के समय भण्डार स्थल अथवा बखारी, बोरा, दीवाल आदि को धूमरीकरण/फ्यूमिगेशन अवश्य कर लें, जिससे भण्डारगृह साफ सूखा एवं कीटमुक्त रहे। थोड़ी सी सावधानी व उचित प्रबंधन से वर्षा से होने वाले संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

राष्ट्रीय जनजाति आयोग की जांच में सामने आई हकीकत, 16 साल की निकली मोनालिसा और पति फरमान के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

बागपत कुंभ में वायरल हुई मोनालिसा की शादी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय जनजाति आयोग की जांच में लड़की नाबालिग पाई गई, जिसके बाद पति फरमान के खिलाफ पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट में केस दर्ज किया गया है।  कुंभ मेले में वायरल हुई मोनालिसा की शादी का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। जांच में सामने आया है कि जिस लड़की को बालिग बताकर शादी कराई गई थी, वह वास्तव में नाबालिग है। इसके बाद पति फरमान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय जनजाति आयोग (NCST) की जांच में यह खुलासा हुआ कि शादी के समय मोनालिसा की उम्र महज 16 वर्ष 2 माह थी। आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में हुई जांच में संबंधित दस्तावेज और स्थानीय रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। जांच के बाद मध्य प्रदेश के महेश्वर थाने में आरोपी फरमान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।  आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जनजाति आयोग की ओर से केरल और मध्य प्रदेश पुलिस के डीजीपी को दिल्ली तलब किया है, ताकि पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली जा सके और आगे की कार्रवाई तय की जा सके। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस शादी को लेकर कई सवाल उठे थे, जिसके बाद आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की थी। जांच में उम्र संबंधी रिकॉर्ड सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। बता दें कि फरमान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद के रहने वाले हैं। पिछले कुछ वर्ष पहले ही वह अपने परिवार को छोड़कर फिल्मों में काम करने का सपना लेकर मुंबई चले गए। यहीं पर उनकी मुलाकात मोनालिसा से हुई। इस जोड़े ने हाल ही में केरल में शादी की। जिसके बाद से ही ये मामला चर्चा में बना हुआ है। हालांकि फरमान के परिवार का कहना है कि वे इस शादी को नहीं मानते और न ही मोनालिसा को अपनी बहू के रूप में स्वीकार करते हैं।  

सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी बना जेम पोर्टल से खरीद में शीर्ष राज्य

पारदर्शिता का रोल मॉडल पेश किया उत्तर प्रदेश ने सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी बना जेम पोर्टल से खरीद में शीर्ष राज्य वित्त वर्ष 2025-26: जेम पोर्टल से सर्वाधिक 3606 करोड़ रुपये की खरीद कर यूपी में अव्वल रहा नगर विकास विभाग  टॉप-10 की सूची में गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, छत्तीसगढ़, झारखंड, जम्मू-कश्मीर व असम भी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पारदर्शी नीतियों ने उत्तर प्रदेश को देश के सामने रोड मॉडल के तौर पर पेश किया है। किसानों से गन्ना, गेहूं-चावल व अन्य कृषि उत्पाद खरीदने का मामला हो या सरकारी विभागों की विविध आवश्यकताओं से जुड़ी खरीद का, योगी सरकार ने पारदर्शिता के उच्च मानदंड स्थापित किए हैं। इसी क्रम में प्रदेश के सरकारी महकमों ने अपनी अधिसंख्य खरीद जेम पोर्टल से सुनिश्चित कर यूपी को अन्य राज्यों से आगे लाकर खड़ा कर दिया है।   वित्त वर्ष 2025-26 में जेम पोर्टल पर खरीद में उत्तर प्रदेश देश के अन्य राज्यों के सामने मिसाल बना है। देश में शीर्ष स्थान पर काबिज उत्तर प्रदेश ने इस अवधि में जेम पोर्टल पर 22,337 करोड़ रुपये की खरीद की। प्रदेश की कुल खरीद में सर्वाधिक हिस्सेदारी नगर विकास विभाग की रही, जिसने 3606 करोड़ रुपये की खरीदारी जेम पोर्टल के माध्यम से की। भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश की जेम पोर्टल क्रय नीति की सराहना करते हुए पारदर्शी खरीद में यूपी को रोल मॉडल राज्य घोषित किया है।  अन्य राज्यों के लिए मॉडल बना उत्तर प्रदेश  वित्त वर्ष 2025-26: जेम पोर्टल खरीद में यूपी अव्वल राज्य-कुल क्रय (करोड़ रुपये में)  उत्तर प्रदेश-22,337 गुजरात-14,009  महाराष्ट्र-6113  दिल्ली-4278  छत्तीसगढ़-3935  बिहार-3611  मध्य प्रदेश-2900  जम्मू-कश्मीर-2653  झारखंड-2647  असम-2494  वित्त वर्ष 2025-26 में जेम पोर्टल पर यूपी के शीर्ष 10 विभागों की खरीद  विभाग-कुल क्रय (करोड़ रुपये में) नगर विकास विभाग-3606 चिकित्सा शिक्षा-2973 चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग-2498 गृह विभाग-1852 ऊर्जा विभाग-1192 पशुपालन विभाग-1139 बेसिक शिक्षा विभाग-812 ग्रामीण विकास-755 माध्यमिक शिक्षा-560  महिला एवं बाल विकास विभाग-450  साल दर साल खरीदारों का बढ़ता विश्वास  महिला उद्यमियों द्वारा खरीद  2020-21 में 467 करोड़  2021-22 में 734 करोड़  2022-23 में 1603 करोड़  2023-24 में 2583 करोड़  2024-25 में 3310 करोड़  2025-26 में 4755 करोड़  एससी/एसटी उद्यमियों द्वारा खरीद  2020-21 में 54 करोड़  2021-22 में 119 करोड़  2022-23 में 261 करोड़  2023-24 में 438 करोड़  2024-25 में 507 करोड़  2025-26 में 752 करोड़  स्टार्ट अप द्वारा जेम से खरीद  2020-21 में 261 करोड़  2021-22 में 785 करोड़  2022-23 में 1108 करोड़  2023-24 में 2435 करोड़  2024-25 में 2139 करोड़  2025-26 में 3203 करोड़  लघु-मध्यम इकाइयों द्वारा जेम से खरीद 2020-21 में 3978 करोड़  2021-22 में 8643 करोड़  2022-23 में 13,376 करोड़  2023-24 में 18,230 करोड़  2024-25 में 21,275 करोड़  2025-26 में 27,235 करोड़  यूपी के विक्रेताओं का जेम से बढ़ता कारोबार  2020-21 में 5770 करोड़  2021-22 में 14,792 करोड़  2022-23 में 20,910 करोड़  2023-24 में 29,232 करोड़  2024-25 में 33,536 करोड़  2025-26 में 42,654 करोड़  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में सभी विभागों को जेम पोर्टल के माध्यम से खरीद के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। उत्तर प्रदेश ने वित्त वर्ष 2025-26 में जेम पोर्टल के माध्यम से सर्वाधिक खरीद कर अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। – कृष्ण मुरारी, IRSS, उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जेम

सिंधु और कावेरी जैसी 10 पवित्र नदियों के नाम पर बसेगी टाउनशिप

सांस्कृतिक पुनरुद्धार से होगा ग्रेटर आगरा का नवनिर्माण सिंधु और कावेरी जैसी 10 पवित्र नदियों के नाम पर बसेगी टाउनशिप नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करेगा ग्रेटर आगरा वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी से ताज नगरी की बदलेगी पहचान, ग्रेटर आगरा बनेगा नया ग्रोथ इंजन 10 टाउनशिप में 1.5 लाख लोगों के लिए होंगी आधुनिक आवासीय सुविधाएं सांस्कृतिक विरासत के साथ होगा आधुनिकता का संगम लखनऊ/आगरा पर्यटन नगरी आगरा अब केवल अपने ऐतिहासिक स्मारकों के लिए ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनरुद्धार और आधुनिक शहरी विकास के संगम के रूप में नई पहचान बनाने जा रहा है। ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर विकसित हो रहे ‘ग्रेटर आगरा’ में सांस्कृतिक पुनरुद्धार के जरिए नवनिर्माण की अनूठी अवधारणा को केंद्र में रखा गया है, जहां सिंधु से लेकर कावेरी तक 10 पवित्र नदियों के नाम पर टाउनशिप बसाई जाएंगी। सबसे खास बात ये है कि नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी ग्रेटर आगरा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना संतुलित क्षेत्रीय विकास के विजन के अनुरूप एक नए शहरी केंद्र के रूप में उभरेगी। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण / नये शहर प्रोत्साहन योजना के तहत आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा ग्राम रायपुर और रहनकलां में लगभग 450 हेक्टेयर क्षेत्र में यह महत्वाकांक्षी परियोजना विकसित की जा रही है। करीब 5142 करोड़ रुपए की लागत वाली यह योजना आगरा को एक आधुनिक, योजनाबद्ध और बहुआयामी शहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। भारतीय संस्कृति को सम्मान देने वाली पहलः जयवीर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ग्रेटर आगरा की सबसे बड़ी खासियत इसका सांस्कृतिक दृष्टिकोण है। यहां विकसित की जा रही 10 टाउनशिप सिंधुपुरम, गोमतीपुरम, गंगापुरम, यमुनापुरम, बेतवापुरम, महानदीपुरम, नर्मदापुरम, गोदावरीपुरम, कृष्णापुरम और कावेरीपुरम भारतीय सभ्यता की पवित्र नदियों के नाम पर बसाई जा रहीं हैं। यह पहल न केवल भारतीय संस्कृति को सम्मान देती है, बल्कि शहर के विकास को एक नई पहचान भी प्रदान करती है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा नया शहर इन टाउनशिप में लगभग 1.5 लाख लोगों के लिए आधुनिक आवासीय सुविधाएं विकसित की जा रहीं हैं। कुल 4712 भूखंडों में आवासीय, ग्रुप हाउसिंग, कमर्शियल और मिश्रित उपयोग के प्लॉट शामिल हैं। यहां स्कूल, अस्पताल, कम्युनिटी सेंटर, होटल, बैंक, डाकघर, पुलिस चौकी और फायर स्टेशन जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे यह क्षेत्र पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके। परियोजना के तहत आधुनिक सड़क नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किए जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र एक स्मार्ट और सस्टेनेबल शहरी मॉडल के रूप में उभरेगा।  बेहतर कनेक्टिविटी बनेगी विकास की रीढ़ ग्रेटर आगरा योजना की लोकेशन इसे और भी खास बनाती है। यह परियोजना 100 मीटर चौड़ी इनर रिंग रोड के पास स्थित है और नेशनल हाईवे-19, फतेहाबाद रोड तथा यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ी हुई है। साथ ही, यमुना नदी की निकटता और कुबेरपुर रेलवे स्टेशन की आसान पहुंच इसे आवागमन और व्यापार के लिए बेहद उपयुक्त बनाती है।  ग्रीन और सस्टेनेबल विकास पर जोर हर टाउनशिप में कम से कम 15 प्रतिशत क्षेत्र ग्रीन स्पेस के लिए आरक्षित रखा गया है। पार्क, ओपन स्पेस और स्पोर्ट्स सुविधाओं के साथ यह योजना पर्यावरण संतुलन और बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी।  कमर्शियल और पर्यटन का नया केंद्र योजना के तहत यमुनापुरम को कमर्शियल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। वहीं कावेरीपुरम को वाटर-बेस्ड एक्टिविटी और मनोरंजन के लिए तैयार किया जाएगा, जिससे पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। रोजगार और निवेश का बड़ा केंद्र बनेगा ग्रेटर आगरा पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ग्रेटर आगरा केवल एक आवासीय परियोजना नहीं, बल्कि रोजगार और निवेश का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। निर्माण कार्य से लेकर उद्योग और सेवा क्षेत्र तक लाखों लोगों को रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के कारण बड़ी-बड़ी कंपनियां यहां निवेश के लिए आकर्षित होंगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। देश के लिए आदर्श शहरी विकास का बनेगा मॉडल ग्रेटर आगरा योजना केवल इंफ्रास्ट्रक्चर विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक पुनरुद्धार और आधुनिक विकास का एक ऐसा मॉडल है, जो आगरा को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। आने वाले समय में यह परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक आदर्श शहरी विकास मॉडल साबित हो सकती है।

कुदरत की मार और अन्नदाता का दर्द,उत्तर प्रदेश में बारिश-बिजली से 20 मौतें, मुख्यमंत्री ने दिए तुरंत मुआवजे के निर्देश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में कुछ दिनों से मौसम बदल चुका है. जहां अप्रैल में चिलचिलाती धूप होनी चाहिए वहीं अब बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि हो रही है. इसने जहां लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत दी, वहीं खेतों में खड़ी मेहनत पर पानी फेर दिया. खासकर गेहूं की फसल, जो इस समय कटाई के दौर में थी, इस बदले मौसम की सबसे बड़ी मार झेल रही है. कई जिलों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे किसानों के दर्द को साफ बयां कर रही हैं कहीं खेतों में पानी भरा है, तो कहीं ओलों ने सुनहरी बालियों को जमीन पर गिरा दिया है. किसान, जो कुछ दिन पहले तक अच्छी पैदावार की उम्मीद में जुटे थे, अब नुकसान का हिसाब लगाने में लगे हैं. लखनऊ के निगोहा इलाके समेत कई जगहों से खबरें हैं कि बारिश और ओलावृष्टि ने खड़ी और कटी दोनों तरह की फसल को नुकसान पहुंचाया है. जिन खेतों में कटाई हो चुकी थी, वहां भीगने से गेहूं के दाने काले पड़ने का खतरा बढ़ गया है. वहीं, जिन खेतों में फसल अभी खड़ी थी, वहां ओलों ने बालियों को झुका दिया या पूरी तरह गिरा दिया. किसानों का कहना है कि इस बार करीब 40 फीसदी तक नुकसान की आशंका है. यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके पूरे साल की मेहनत और उम्मीदों पर पड़ा गहरा असर है. कई किसानों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण कटाई का काम ठप पड़ गया है. मजदूर खाली बैठे हैं और मशीनें खेतों में नहीं उतर पा रहीं. इससे फसल का नुकसान और बढ़ने की आशंका है. सीएम योगी ने लिया संज्ञान मौसम के इस बदले मिजाज ने सिर्फ फसलों को ही नहीं, बल्कि किसानों की मानसिक स्थिति को भी प्रभावित किया है. एक ओर कर्ज और लागत का दबाव है, दूसरी ओर पैदावार घटने का डर. ऐसे में उनके सामने आने वाले समय को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. इसी बीच, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है. उन्होंने लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे फील्ड में सक्रिय रहें और किसानों के संपर्क में बने रहें. मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि इस आपदा का असर किसानों पर न्यूनतम होना चाहिए और हर प्रभावित व्यक्ति तक राहत पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है. सभी जिलाधिकारियों से मांगी  रिपोर्ट मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. साथ ही उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे खुद गांवों में जाकर स्थिति का जायजा लें. सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर जाकर नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाए. राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों को संयुक्त रूप से सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मुआवजा प्रक्रिया में देरी न हो. सरकार की ओर से यह भी सुनिश्चित करने की बात कही गई है कि जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उन्हें समयबद्ध तरीके से मुआवजा मिले. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है. 20 लोगों की मौत, 33 पशुओं की भी गई जान केवल फसल नुकसान ही नहीं, बल्कि इस दौरान हुई जनहानि और पशुहानि को भी गंभीरता से लिया गया है. पिछले एक हफ्ते में प्रदेश में अति वर्षा और आकाशीय बिजली की वजह से करीब 20 लोगों की मौत, 12 लोग घायल और 33 पशुओं की मौत की खबर सामने आई है. इन सभी मामलों में मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिलाधिकारियों ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा वितरित करना शुरू कर दिया है. सरकार ने यह भी कहा है कि जिन परिवारों के घर इस आपदा में क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत घर उपलब्ध कराया जाएगा. वहीं, कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को जल्द से जल्द सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं.

जाम से मिलेगी मुक्ति, योगी सरकार ने जारी की नई ट्रैफिक गाइडलाइन और नियम तोड़ने पर ₹20,000 तक का जुर्माना

लखनऊ उत्तर प्रदेश में ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। खासतौर पर स्कूल और कॉलेज की छुट्टी के समय लगने वाले जाम को देखते हुए नई गाइडलाइन जारी की गई है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने “सिटी रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन स्कीम (CRTC)” के तहत 20 शहरों के 172 रास्तों के लिए नियम बनाए हैं। अब स्कूलों और आसपास के दफ्तरों की छुट्टी एक साथ नहीं होगी, बल्कि उनमें कम से कम 15 मिनट का अंतर रखा जाएगा। क्या हैं नए नियम? व्यस्त चौराहों और तिराहों के 100 मीटर के दायरे को खाली रखना होगा, इस क्षेत्र में सवारी बैठाने या उतारने की अनुमति नहीं होगी, पीक टाइम में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा, रूट मार्शल की व्यवस्था की जाएगी, ट्रैफिक को तेज और सुचारु बनाने पर जोर दिया जाएगा। किन शहरों में लागू होंगे नियम? ये गाइडलाइन कुल 20 बड़े शहरों में लागू होंगी। जिनमें आगरा, आजमगढ़, अलीगढ़, अयोध्या, बांदा, बरेली, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, गोंडा, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, सहारनपुर, वाराणसी शामिल है।   लखनऊ के प्रमुख जाम वाले रूट लखनऊ में कई रास्तों को चिन्हित किया गया है, जैसे: जुनाबगंज से चारबाग, अयोध्या रोड से चारबाग, बख्शी का तालाब से पॉलिटेक्निक, मड़ियांव से हजरतगंज, ट्रांसपोर्टनगर से कमता, अवध चौराहा से दुबग्गा। कितना लगेगा जुर्माना? नो एंट्री तोड़ने पर: ₹20,000 नो पार्किंग (पहली बार): ₹500, बाद में ₹2000 गलत दिशा में वाहन चलाने पर: ₹2000 जाम की स्थिति एक सर्वे के मुताबिक, लखनऊ के कुछ रास्तों पर पीक टाइम में यात्रा का समय 10 से 15 गुना तक बढ़ जाता है। खासकर दोपहर और शाम के समय जाम सबसे ज्यादा रहता है। वहीं, डीजीपी राजीव कृष्ण के अनुसार, स्कूल और दफ्तर एक साथ बंद होने से ही सबसे ज्यादा जाम लगता है। इसलिए छुट्टी का समय अलग-अलग करने का फैसला लिया गया है, जिससे ट्रैफिक कम होगा और लोगों को राहत मिलेगी। सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से छात्रों, अभिभावकों और आम लोगों को रोजाना लगने वाले जाम से राहत मिलेगी।  

योगी सरकार का बड़ा फैसल,प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी समेत कई जिलों के पुलिस अफसर बदले

लखनऊ यूपी सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल कर दिया। शासन ने 12 आईपीएस अफसरों का तबादला कर दिया है। इनमें तीन अपर पुलिस अधीक्षक, चार सहायक पुलिस अधीक्षक और पांच सहायक पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात थे। अचानक हुए इस तबादले से विभाग में हड़कंप मचा है। शासन ने जिनका तबादला किया है उनमें सहारनपुर अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सागर जैन को प्रयागराज पुलिस उपायुक्त प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट, गोंडा पूर्वी अपर पुलिस अधीक्षक रहे मनोज कुमार रावत को संभल में अपर पुलिस अधीक्ष दक्षिणी, मेरठ अपर पुलिस अधीक्षक आयुष विक्रम सिंह को बहराइच का अपर पुलिस अधीक्षक नगर बनाया है। इसी तरह सीतापुर के सहायक पुलिस अधीक्षक विनायक गोपाल भोसले को मेरठ अपर पुलिस अधीक्षक नगर, मेरठ सहायक पुलिस अधीक्षक अंतरिक्ष जैन को बुलंदशहर अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, संभल के सहायक पुलिस अधीक्षक आलोक कुमार को प्रतापगढ़ का अपर पुलिस अधीक्षक (नगर पूर्वी), अलीगढ़ सहायक पुलिस अधीक्षक मयंक पाठक को सहारनपुर में अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), सहायक पुलिस आयुक्त पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद सुश्री लिपि नागयाच को अपर पुलिस उपायुक्त वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट, नोएडा पुलिस कमिश्नरेट सहायक पुलिस आयुक्त सुश्री टि्विंकल जैन को लखनऊ अपर पुलिस उपायुक्त पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ, सहायक पुलिस आयुक्त पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज राजकुमार मीणा को अपर पुलिस अधीक्षक (नक्सल) मिर्जापुर, सहायक पुलिस आयुक्त पुलिस कमिश्नेट लखनऊ ऋषभ रुनवाल को सोनभद्र का अपर पुलिस अधीक्षक (नक्सल), सहायक पुलिस आयुक्त वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट डॉ. ईशान सोनी को जालौन का अपर पुलिस अधीक्षक बनाया है। एक दिन पहले पांच आईएएस अधिकारियों का हुआ था तबादला एक दिन पहले शासन ने पांच आईएएस अधिकारियों का तबादला किया है। प्रतीक्षारत गुंजन द्विवेदी को मिशन निदेशक, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तथा रत्नेश सिंह को अपर निदेशक, उप्र प्रशासन व प्रबंधन अकादमी के पद पर तैनाती दी गई है। सचिव उप्र लोक सेवा आयोग अशोक कुमार को विशेष सचिव सिंचाई, जल संसाधन व परती भूमि विकास विभाग तथा कारागार प्रशासन बनाया गया है। विशेष सचिव उच्च शिक्षा विभाग तथा कुलसचिव डा.राम मनोहर लोहिया विधि विवि गिरिजेश कुमार त्यागी को सचिव उप्र लोक सेवा आयोग बनाया गया है। विशेष सचिव सिंचाई, जल संसाधन व परती भूमि विकास विभाग तथा कारागार प्रशासन अनीता वर्मा सिंह को विशेष सचिव उच्च शिक्षा विभाग तथा कुलसचिव डा.राम मनोहर लोहिया विधि विवि बनाया गया है।

आर्थिक मोर्चे पर यूपी की बड़ी छलांग, नेट जीएसटी संग्रह में कर्नाटक और गुजरात को पीछे छोड़ा

लखनऊ उत्तर प्रदेश ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य कर विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश नेट कलेक्शन के आधार पर देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। पोस्ट सेटलमेंट वृद्धि के मामले में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। जारी आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश को एसजीएसटी और आईजीएसटी से कुल 84.80 हजार करोड़ रुपये मिले। इसमें से 2.37 हजार करोड़ रुपये की रिकवरी के बाद नेट संग्रह 82.42 हजार करोड़ रुपये रहा। इस आधार पर उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा। महाराष्ट्र 1.84 लाख करोड़ रुपये के नेट संग्रह के साथ पहले स्थान पर है। मार्च 2026 में राज्य का संग्रह 7.53 हजार करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में आठ प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत है। नेट संग्रह की स्थिति  वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का एसजीएसटी और आईजीएसटी कलेक्शन 82.42 हजार करोड़ रुपये रहा। यह महाराष्ट्र के 1.84 लाख करोड़ रुपये के बाद दूसरा सबसे बड़ा संग्रह है। कर्नाटक का नेट संग्रह 81.06 हजार करोड़ रुपये रहा। गुजरात का नेट संग्रह 73.17 हजार करोड़ रुपये और तमिलनाडु का 72.97 हजार करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वृद्धि दर में अग्रणी प्रदर्शन  उपभोक्ता आधारित राज्यों में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन वृद्धि के मामले में सबसे बेहतर रहा है। मार्च 2026 में राज्य के संग्रह में आठ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों में गिरावट आई। जीएसटी संग्रह में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर व्यापार और उपभोग से जुड़ी है। जीएसटी 2.0 में करों में कटौती के बावजूद उत्तर प्रदेश का कर संग्रह बढ़ा है। राज्यकर आयुक्त डॉ. नीतिन बंसल का कहना है कि जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी सीधे तौर पर व्यापार और उपभोग से जुड़ी होती है। जीएसटी 2.0 में आम लोगों को राहत के लिए करो में कटौती के बावजूद उत्तर प्रदेश का कर संग्रह बढ़ा है। जबकि उपभोक्ता आधारित अन्य राज्यों में नकारात्मक ग्रोथ है। वर्तमान वित्त वर्ष में इसे और बढ़ाने के लिए विभाग कई नए प्रयास कर रहा है। कई नई शुरुआत कर रहा है जिसका असर जल्द सामने आएगा।  

उत्तर प्रदेश में 5.5 लाख प्रगणक संभालेंगे डिजिटल जनगणना का जिम्मा, मुख्य सचिव ने 10 अप्रैल तक तैयारी पूरी करने के दिए निर्देश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 के पहले चरण को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्‍होंने निर्देश दिए कि मकान सूचीकरण और गणना से जुड़े सभी प्रारंभिक कार्य 10 अप्रैल तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। बैठक में महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण भी शामिल हुए। उन्होंने भी जनगणना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए। पर्यवेक्षकों को 16 अप्रैल से 7 मई के बीच ट्रेनिंग इस मौके पर मुख्य सचिव ने कहा कि यूपी में लगभग 5.5 लाख प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की जानी है, जिसके लिए उनका सत्यापित और ताजा डिजिटल डेटाबेस निर्धारित समय सीमा के भीतर तैयार किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से घनी शहरी बस्तियों, झुग्गी क्षेत्रों और अधिक गतिशील आबादी वाले इलाकों में सटीक और पूर्ण गणना सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को फील्ड में भेजने से पहले 16 अप्रैल से 7 मई के बीच अनिवार्य और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए। जनगणना के आंकड़े देश के विकास की दिशा तय करते हैं। यह विकास की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। सभी अधिकारी और कर्मचारी इसे जन-अभियान के रूप में संचालित करें ताकि सटीक और विश्वसनीय आंकड़े प्राप्त हो सकें। तकनीकी सहायकों की होगी भर्ती प्रशिक्षण से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं जैसे कक्ष, प्रोजेक्टर, जलपान और उपस्थिति शासनादेश के अनुरूप सुनिश्चित की जाएं और यह प्रक्रिया 6 मई से पहले पूरी कर ली जाए। गोयल ने कहा कि गणना ब्लॉकों का सीमांकन स्पष्ट और त्रुटिरहित होना चाहिए। इसके लिए तकनीकी सहायकों की भर्ती शीघ्र पूरी कर जियो-टैगिंग और सीमांकन कार्य को मजबूत बनाया जाए। स्व-गणना की सुविधा भी रहेगी मुख्‍य सचिव ने बताया कि इस बार जनगणना में आम नागरिकों के लिए स्व-गणना की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। उत्तर प्रदेश में स्व-गणना पोर्टल 7 मई से 21 मई 2026 तक सक्रिय रहेगा, जिसके माध्यम से नागरिक स्वयं अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।     उत्तर प्रदेश में जनगणना-2027 पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी।     डेटा संग्रहण, प्रविष्टि, सत्यापन और निगरानी सभी प्रक्रियाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित होंगी।     पहले चरण में 22 मई से 20 जून 2026 तक मकानों की गणना की जाएगी।     दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनसंख्या गणना का कार्य संपन्न होगा।