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UP में अनोखा मामला: जिंदा शख्स ने करवाई अपनी तेरहवीं, 1900 मेहमानों को बुलाकर सबको चौंकाया

उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से आई यह कहानी हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती है। अकेलेपन और भविष्य की चिंता ने 65 वर्षीय राकेश यादव को ऐसा फैसला लेने पर मजबूर किया, जिसकी पूरे इलाके में चर्चा है। राकेश यादव ने जीते-जी अपनी ही तेरहवीं कर डाली। उन्होंने करीब 1900 लोगों को इस अनोखे भोज में आमंत्रित किया, ताकि उनके मरने के बाद होने वाले सभी संस्कारों का “झंझट” पहले ही खत्म हो जाए। निमंत्रण पत्र भी उतना ही भावुक था निमंत्रण पत्र भी उतना ही भावुक था। उसमें मशहूर डायलॉग लिखा था, 'मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था।' मानो यह लिखकर वो अपने जीवन की पीड़ा को बयान कर रहे हों।मुरादगंज चौकी क्षेत्र के लक्ष्मणपुर गांव में सोमवार दोपहर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। राकेश यादव तीन भाइयों में सबसे बड़े थे, लेकिन किसी ने शादी नहीं की। दो भाइयों की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। अब परिवार में सिर्फ उनकी एक विवाहित बहन ही बची हैं। मेरी तेरहवीं कौन कराएगा, इस चिंता ने मजबूर किया बुढ़ापे में सहारे की कमी और अपने अंतिम संस्कार को लेकर उठते सवालों ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। उनका कहना है, मेरे बाद मेरा अंतिम संस्कार कौन करेगा, मेरी तेरहवीं कौन कराएगा। इसी चिंता ने मुझे यह फैसला लेने पर मजबूर किया। पैतृक घर भी एक रिश्तेदार को दान कर दिया राकेश ने अपना पैतृक घर भी एक रिश्तेदार को दान कर दिया और अब वह एक साधारण मड़ैया में रह रहे हैं। उन्हें रिश्तेदारों पर भी भविष्य को लेकर भरोसा नहीं है। उन्होंने अपनी वृद्धावस्था पेंशन और वर्षों की मेहनत से बचाए पैसों से यह पूरा आयोजन कराया। करीब 150 कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें बर्तन भेंट किए भोज की शुरुआत कन्या पूजन से हुई, जिसमें करीब 150 कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें बर्तन भेंट किए गए। इसके बाद विशाल भंडारे में पूड़ी, सब्जी और बूंदी के लड्डू परोसे गए। रिश्तेदारों का भी खास ख्याल रखा गया। करीब 100 महिला रिश्तेदारों को साड़ियां और 90 पुरुष रिश्तेदारों को बर्तन भेंट किए गए। बहन भी पहुंचीं, जो पूरे दृश्य को देखकर भावुक हो उठीं इस अनोखे आयोजन में उनकी बहन कालिंद्री भी पहुंचीं, जो पूरे दृश्य को देखकर भावुक हो उठीं। यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उस सच्चाई का आईना है जहां अकेलापन इंसान को जीते-जी अपने अंत की तैयारी करने पर मजबूर कर देता है।  

देवरिया में नकली नोट गिरोह का भंडाफोड़: सपा नेता निकला ‘धुरंधर’, चार आरोपी पकड़े गए

प्रयागराज जिले में नकली नोट का धुरंधर समाजवादी पार्टी का एक नेता निकला। वह अपने साथियों के साथ नकली नोट की फैक्ट्री देवरिया में चला रहा था। मामले में चार लोगों की गिरफ्तार किया गया है, जबकि सपा नेता विवेक यादव सहित दो फरार हैं। अभियुक्तों के कब्जे से एक लाख 18 हजार रुपये के नकली नोट, लैपटॉप, प्रिंटर सहित अन्य सामान बरामद हुआ है। इसी मामले में पूर्व में जेल जा चुका है धर्मेंद्र  डीसीपी गंगानगर कुलदीप गुनावत ने बताया गिरफ्तार अभियुक्त धर्मेंद्र कुमार से पूछताछ में यह तथ्य प्रकाश में आया कि अभियुक्त धर्मेंद्र कुमार जनपद देवरिया में रहा है। वह रामपुर करखाना से पूर्व में जेल भी इसी मामले में जेल जा चुका है। गैंग बनाकर कर रहे थे यह धंधा चारों अभियुक्तों विवेक यादव पुत्र अवध बिहारी यादव निवासी गौरी खुर्द थाना गौरी बाजार जनपद देवरिया के निर्देशन में गैंग बनाकर पैसे कमाने की उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से यह कार्य कर रहे थे। राहुल यादव व विवेक कुमार उपरोक्त पैसों के साथ यह लोगों से संपर्क करते थे और धर्मेंद्र, विवेक यादव और जो एक अन्य सहयोगी से मिलकर देवरिया स्थित कमरे पर नोट बनाकर, छापते थे व उसकी सप्लाई करते थे। बाजार में नकली नोट खपाने के लिए लाए थे ये सभी नकली भारतीय नोटों को बाजार में खपाने के उद्देश्य से लाये थे जिन्हें लोगों द्वारा छोटे ग्रामीण बाजारों में छोटे-छोटे मात्रा में (100-500/- रुपये) बजार में चलाया जाना था। अभियुक्त विवेक यादव पुत्र अवध बिहारी यादव निवासी गौरी खुर्द थाना गौरी बाजार जनपद देवरिया की गिरफ्तारी अभी शेष है, जिसके गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीमों का गठन किया गया था। जिपं चुनाव लड़ चुका है विवेक यादव पुलिस का कहना है कि देवरिया निवासी विवेक यादव जिला पंचायत का चुनाव लड़ चुका है। समाजवादी पार्टी से विधायक का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयागराज पुलिस ने देवरिया पुलिस से संपर्क साधा है। ये हैं गिरफ्तार अभियुक्त 1. राहुल यादव पुत्र राजकुमार यादव निवासी सरायकंसराय थाना दुर्गागंज जनपद भदोही, उम्र करीब 28 वर्ष। 2. विवेक कुमार यादव पुत्र राकेश यादव निवासी गोकलपट्टी थाना सुरीयावां जनपद भदोही, उम्र करीब 26 वर्ष 3. नरेन्द्र यादव उर्फ विराट पुत्र रामजी यादव निवासी बैतालपुर थाना गौरीबाजार जनपद देवरिया, उम्र करीब 26 वर्ष। 4. धर्मेन्द्र कुमार पुत्र राजाराम प्रसाद निवासी ग्राम महाराजगंज थाना रुद्रपुर जनपद देवरिया, उम्र करीब 22 वर्ष।

विकास की रफ्तार,अदाणी-अंबानी के बाद अब टाटा पावर चमकाएगा गोरखपुर, 300 लोगों को मिलेगा रोजगार

गोरखपुर विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ते उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के लिए एक और गुड न्यूज है। यहां अदाणी और अंबानी ग्रुप के बाद टाटा पावर ने दिलचस्पी दिखाई है। टाटा पावर यहां 100 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाना चाहता है जिसके लिए सरकार उसे करीब 300 एकड़ जमीन मुहैया कराएगी। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण ( गीडा) ने टाटा पावर को सोलर प्लांट के लिए यह जमीन मुहैया कराने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए धुरियापार औद्योगिक कारिडोर में 300 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। जल्द टाटा पावर की तकनीकी टीम निरीक्षण को आएगी। जमीन पसंद आते ही आवंटन प्रक्रिया शुरू होगी। अदाणी और अंबानी समूह के बाद अब टाटा पावर कंपनी की ओर से 100 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। इस प्लांट पर लगभग 800 करोड़ रुपये के निवेश होंगे। परियोजना पूरी तरह से सौर ऊर्जा आधारित होगी, जिससे स्वच्छ और हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। सोलर प्लांट से हर साल करीब 20 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन हो सकता है। गीडा अधिकारियों का कहना है कि कंपनी के प्रतिनिधि जल्द ही चिह्नित भूमि का निरीक्षण को धुरियापार आ सकते हैं। अनुमान है कि इस परियोजना से 300 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। वायु गुणवत्ता सुधारने को 30.35 करोड़ केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत गोरखपुर समेत उत्तर प्रदेश के 10 शहरों के लिए 163.70 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह धनराशि शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित कर वायु गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से दी गई है। गोरखपुर को इस मद में 30.35 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत पांच साल में गोरखपुर को 150.31 करोड़ रुपये मिले हैं जिनमें 82.28 करोड़ रुपये की धनराशि अब तक खर्च की जा चुकी है। क्या बोले गीडा के अधिकारी गीडा के एसीईओ राम प्रकाश ने कहा कि टाटा पावर कंपनी ने 800 करोड़ के निवेश से 100 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया है। कंपनी की मांग के अनुसार 300 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। जल्द ही प्रतिनिधियों को जमीन दिखा दी जाएगी।

एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026: योगी मॉडल से ओडीओपी को मिलेगा सशक्त राष्ट्रीय मंच

एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026: योगी मॉडल से सशक्त ओडीओपी को मिलेगा राष्ट्रीय मंच वाराणसी में 31 मार्च को होगा सम्मेलन, व्यापार, पर्यटन और एमएसएमई में सहयोग पर फोकस दोनों राज्यों के बीच बढ़ेगा समन्वय, ओडीओपी और जीआई शिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल लखनऊ  मध्यप्रदेश शासन द्वारा 31 मार्च को वाराणसी स्थित रामाडा होटल में “एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026” का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के मध्य व्यापार, शिल्प, ओडीओपी उत्पाद, पर्यटन तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के मंत्री राकेश सचान को सम्मेलन में गरिमामय उपस्थिति हेतु आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन का मुख्य सत्र दोपहर 12:30 बजे से 2:00 बजे के मध्य आयोजित होगा। विशेष रूप से, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना ने प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों और शिल्प को नई पहचान दी है। इसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन में दोनों राज्यों के ओडीओपी उत्पादों एवं जीआई टैग शिल्प को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने, पर्यटन के क्षेत्र में परस्पर सहयोग बढ़ाने तथा एमएसएमई सेक्टर में साझा संभावनाओं को विकसित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। यह आयोजन न केवल व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ‘योगी मॉडल’ के तहत विकसित उद्यमिता, स्थानीय उत्पादों के सशक्तीकरण और वैश्विक बाजार से जुड़ाव की दिशा में भी एक प्रभावी मंच प्रदान करेगा। सम्मेलन के माध्यम से दोनों राज्यों के बीच आर्थिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने की अपेक्षा है।

मौलाना को पड़ा भारी: CM योगी के खिलाफ अपशब्द कहने पर यूपी पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार किया

पूर्णिया  गौमाता और योगी आदित्यनाथ की मां के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मौलाना अब्दुल्ला सलीम को उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने मौलाना को पूर्णिया जिले से हिरासत में लिया और अब उसे यूपी ले जाया जा रहा है. गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा के बीच उसे ट्रांजिट प्रक्रिया पूरी कराकर उत्तर प्रदेश रवाना किया गया. इस कार्रवाई के बाद दोनों राज्यों की पुलिस सतर्क हो गई और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।  मौलाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे एक मजहबी जलसे के दौरान मुख्यमंत्री और उनकी मां को लेकर विवादित टिप्पणी करते नजर आए थे. इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भारी आक्रोश देखने को मिला. कई संगठनों ने इसे भड़काऊ और असंवेदनशील बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. मामले के तूल पकड़ने के बाद राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में युवाओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया. परिवर्तन चौक और गांधी पार्क के आसपास मौलाना के खिलाफ पोस्टर लगाए गए थे और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी थी. स्थिति को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन पोस्टर हटवा दिए और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया।  120 से ज्यादा हुईं थीं FIR बताया जा रहा है कि मौलाना ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश में लागू गौकशी कानूनों की आलोचना करते हुए तीखी भाषा का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद उसके खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया. गिरफ्तारी की आशंका के बीच उन्होंने अपने समर्थकों से सोशल मीडिया और सड़कों पर विरोध करने की अपील भी की थी, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया. लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस, नगर निगम, अलीगंज, आलमबाग, गोमतीनगर समेत पूरे शहर में पोस्टर लगे थे. मौलाना सलीम पर उत्तर प्रदेश में 120 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं।  बिहार से यूपी ला रही पुलिस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और शिकायतों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई है. मौलाना को उत्तर प्रदेश लाकर आगे की पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इस पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों राज्यों की पुलिस सतर्क है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त निगरानी की जा रही है। 

महोबा में बैडमिंटन कोर्ट पर खेलते हुए खिलाड़ी की मौत, 5 सेकंड में हुआ दर्दनाक हादसा

महोबा  महोबा जिला स्टेडियम में बैडमिंटन खेल रहे पस्तोर गली निवासी 58 वर्षीय सुधीर गुप्ता की सडन कार्डियक अरेस्ट से अचानक मौत हो गई. रोजाना की तरह स्टेडियम पहुंचे सुधीर अपने साथियों के साथ पूरी ऊर्जा में खेल रहे थे. लगातार तीन शॉट खेलने के महज 11 सेकंड बाद उन्हें सीने में बेचैनी महसूस हुई. उन्होंने अपना हाथ दिल की तरफ ले जाने की कोशिश की, लेकिन 5 सेकंड के भीतर ही वह अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े. साथी खिलाड़ी उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।  सीसीटीवी में कैद हुआ खौफनाक मंजर स्टेडियम के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि सुधीर गुप्ता पूरी तरह फिट लग रहे थे. खेल के दौरान अचानक उनके कदम लड़खड़ाए और वह संभल नहीं पाए।  डॉक्टरों का प्राथमिक अनुमान है कि यह साइलेंट हार्ट अटैक का मामला है. इस घातक अटैक ने उन्हें संभलने या मदद मांगने तक का मौका नहीं दिया. खेल का मैदान देखते ही देखते मातम के सन्नाटे में बदल गया।  परिवार में कोहराम, वीडियो वायरल सुधीर गुप्ता की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार और पस्तोर गली मोहल्ले में कोहराम मच गया है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. सोशल मीडिया पर अब यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जो लोगों को फिटनेस और जीवन की अनिश्चितता पर सोचने पर मजबूर कर रहा है. एक हंसते-खेलते इंसान का इस तरह अचानक चले जाना हर किसी को हैरान कर रहा। है।   

समाजवाद के नाम पर ‘परिवारवादी’ खा जाते थे गरीबों का हकः मुख्यमंत्री

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेशवासियों के हित में दो बड़े कार्य किए। सुबह आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को विकास योजनाओं व तकनीक से जोड़ा तो शाम को वंचित व कमजोर वर्ग के कक्षा 9-10 तथा दशमोत्तर के 27,99,982 विद्यार्थियों के बैंक खाते में 3350 करोड़ की छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति का अंतरण किया। सीएम ने गरीब परिवारों के मुख्य अर्जक की मृत्यु होने पर राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत 33,334 आश्रित परिवारों को भी 100 करोड़ रुपये की सहायता राशि का अंतरण किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में छात्रवृत्ति पाने वाले बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने अपने विचार भी प्रकट किए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं को जमकर आड़े हाथ लिया और कहा कि समाजवाद के नाम पर परिवारवादी गरीबों का हक खा जाते थे। लेकिन, गरीबों के हक पर डकैती डालने वालों को मालूम है कि अब ऐसा किया तो जेल जाना पड़ेगा। सरकार उनके बाप-दादा की कमाई भी जब्त कर गरीबों में बांटेगी। सीएम ने बच्चों को दिया परिश्रम का मूलमंत्र  सीएम ने बच्चों से कहा कि यह छात्रवृत्ति इसलिए है कि आप और मेहनत कर सकें। परिश्रम का कोई विकल्प नहीं हो सकता। छात्रवृत्ति संबल का काम कर रही है, यह आपकी मंजिल नहीं है, आपकी मंजिल परिश्रम है। परिश्रम से प्राप्त अंक ही मंजिल पर ले जाएंगे। यदि मेहनत में कोताही बरती, छात्रवृत्ति की धनराशि का दुरुपयोग किया और परिणाम खराब आया तो यह स्वतः ही बाधित हो जाती है। ऐसी नौबत न आने पाए।  जब संवेदना का हिस्सा बनती है सेवा तो ‘सबका साथ-सबका विकास’ होता है सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 67 लाख बच्चों को 4800 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई। जब सेवा संवेदना का हिस्सा बनती है तो सरकार का लक्ष्य व्यक्ति, जाति-संप्रदाय नहीं, बल्कि सबका साथ-सबका विकास होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रेरणादायी मंत्र सबका साथ-सबका विकास बिना भेदभाव सभी समुदायों को छात्रवृत्ति योजना से जोड़ता है। अनुसूचित जाति-जनजाति के शत-प्रतिशत, पिछड़ी जाति के विद्यार्थियों, सामान्य वर्ग के अतिगरीब व अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों की पढ़ाई के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध हो और उन्हें समय पर छात्रवृत्ति मिले, सरकार की पहले ही दिन से यह मंशा थी।  सपा ने प्रदेश को इतना लूटा कि हमारी सरकार को 2017-18 के साथ 2016-17 के बच्चों की भी छात्रवृत्ति देनी पड़ी थी मुख्यमंत्री ने कहा कि 2016-17 में समाजवादी पार्टी ने अनुसचित जाति-जनजाति के छात्रों को छात्रवृत्ति ही नहीं दी, क्योंकि उन्होंने तब तक प्रदेश को इतना लूट डाला था कि खाते में पैसा ही नहीं था। जो राशि केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति के लिए आई थी, उसे भी उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यों के लिए डायवर्ट कर दिया था। 2017 में जब हमारी सरकार आई तो 2017-18 के साथ ही हमें 2016-17 के बच्चों को भी छात्रवृत्ति देनी पड़ी।  पहले तकनीक का उपयोग नहीं होता था, छात्रवृत्ति के पैसे में मनमानी करते थे अधिकारी  सीएम योगी ने कहा कि पहले छात्रवृत्ति की राशि कम होती थी और उसमें भी तकनीक का उपयोग नहीं होता था। पैसा जिले में जाता था, वहां समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी मनमानापन करते थे। छात्रों को 500 की बजाय 200-250 रुपये ही छात्रवृत्ति मिल पाती थी। पीएम ने तकनीक पर ध्यान देने को कहा, जिससे आज एक क्लिक पर 28 लाख छात्रों के खाते में 3350 करोड़ रुपये पहुंच गए। यह दर्शाता है कि तकनीक जीवन को आसान बनाने के साथ ही भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था देती है।  2017 के पहले हर क्षेत्र में था भ्रष्टाचार, आधी राशि खा जाते थे सपा के गुंडे सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार था। कुपोषित बच्चों व नवजात शिशुओं के पोषण आहार, कुपोषित माताओं के पोषाहार, छात्रों की छात्रवृत्ति, विकास योजनाओं, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ समेत सभी योजनाओं में भ्रष्टाचार था। सीएम योगी ने पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि उनका बयान था कि सरकार एक हजार रुपये पेंशन राशि क्यों देती है। उनके समय में दिव्यांगजनों को महज 300 रुपये मिलते थे, वह भी समय से नहीं। छह महीने में एक साथ 1800 रुपये जाते थे, लेकिन इसमें से दिव्यांग को केवल 900 रुपये मिलते थे और 900 रुपये इनके लोग चट कर जाते थे। विधवा-वृद्धजन पेंशन के रूप में 500 रुपये मिलते थे, छह महीने में एक साथ 3000 रुपये जाते थे। इसमें से 1500 रुपये सपा के गुंडे और बाबू हड़प कर जाते थे। सपा शासन में आधी राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती थी। यूपी में आज 1.06 करोड़ निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों व दिव्यांगजनों को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन राशि सीधे अकाउंट में मिलती है। कटौती करने वालों को मालूम है कि गरीबों के हिस्से में डकैती डालेगा तो उसकी जगह जेल होगी और सरकार बाप-दादा की कमाई भी जब्त कर गरीबों में बांटेगी।  समाजवाद के नाम पर परिवारवादी खा जाते थे सहायता राशि  सीएम योगी ने राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का जिक्र किया, कहा कि इसके लाभार्थियों को पेंशन व 30 हजार रुपये की राशि भी दी जा रही है। इसके तहत आज 100 करोड़ रुपये जारी हुए हैं। 2025-26 में 1.36 लाख से अधिक परिवारों को 412 करोड़ रुपये से अधिक सहायता राशि प्रदान की गई है। 2017 से अब तक 10 लाख से अधिक परिवारों को 3039 करोड़ रुपये से अधिक राशि दी जा चुकी है। पहले यह राशि गरीबों को नहीं मिलती थी। बच्चों की सहायता, माताओं का राशन, गरीबों व वंचितों को मिलने वाली सरकार की सहायता समाजवाद के नाम पर परिवारवादी खा जाते थे। गरीब लाचार-हताश होकर भटकते थे।  सपा के काले कारनामों के कारण ‘बीमारू’ बना था यूपी सीएम ने आरोप लगाया कि 2017 के पहले सत्ता के संरक्षण में पलने वाले गुंडे समानांतर सरकार चलाते थे। वंचित, दलितों की सुनवाई नहीं होती थी। सपा प्रदेश में चार बार सत्ता में आई, लेकिन एक भी दलित महापुरुष-संत व सामाजिक न्याय से जुड़े महापुरुष के प्रति सम्मान का भाव नही रखा। कन्नौज में बाबा साहेब के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम सपा सरकार ने बदल दिया, हमारी सरकार ने फिर से उसका नाम बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर … Read more

बुंदेलखंड की 90 हजार ग्रामीण महिलाओं ने किया दो हजार करोड़ से अधिक का कारोबार

लखनऊ. एक वक्त था जब बुंदेलखंड की पहचान सूखे, पलायन और गरीबी से थी। लेकिन आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इसी बुंदेलखंड की ग्रामीण महिलाएं देश के सामने आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहीं हैं। बुंदेलखंड की करीब 90 हजार महिलाओं ने दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का सामूहिक कारोबार खड़ा कर इतिहास रच दिया है। झांसी जिले से शुरू हुई यह यात्रा आज बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, ललितपुर और महोबा में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। प्रतिदिन लगभग तीन लाख लीटर दूध का संग्रह 1143 गांवों में फैले इस नेटवर्क में महिलाएं प्रतिदिन लगभग तीन लाख लीटर दूध का संग्रह कर रहीं हैं। बलिनी एमपीसीएल से जुड़ी महिलाएं अब तक दो हजार करोड़ से अधिक का कारोबार कर चुकीं हैं। पहले जहां बिचौलियों के कारण दूध का वाजिब मूल्य नहीं मिल पाता था, वहीं अब सीधे बैंक खातों में भुगतान होता है। प्रशिक्षण, पशु चिकित्सा सेवाएं, वित्तीय सहायता और उपलब्ध बाजार ने इन महिलाओं को सच्चे अर्थों में उद्यमी बना दिया है। महिलाओं का यह समूह अब ग्रामीण डेयरी व्यवसाय का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।  परिवार और समाज में आया बदलाव घर की आर्थिक जिम्मेदारी उठाते हुए बुंदेलखंड की महिलाएं अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रहीं हैं, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बना रहीं हैं और सामाजिक रूप से भी सशक्त हो रहीं हैं। जो महिला पहले घर की दहलीज तक सीमित थीं, आज वे ग्राम स्तरीय बैठकों में निर्णय ले रहीं हैं। प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचेगी योजना  योगी सरकार ने इस मॉडल को प्रदेश के 31 जिलों तक पहुंचा दिया है, जिसके तहत महिलाओं के नेतृत्व वाले दुग्ध उत्पादन का कुल कारोबार 5,000 करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच गया है। जल्द ही इसे प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचाने की योजना है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। यह महज एक व्यावसायिक उपलब्धि नहीं, बल्कि योगी सरकार की योजनाओं का जीवंत प्रमाण है, जहां बुंदेलखंड की बेटियां अब पूरे देश को दिशा दिखा रहीं हैं।  

सीएम योगी ने दी डिजिटल, सशक्त और आधुनिक आंगनवाड़ी व्यवस्था की सौगात

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकभवन में आयोजित भव्य कार्यक्रम के माध्यम से उत्तर प्रदेश की आंगनवाड़ी व्यवस्था को डिजिटल, सशक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। इस अवसर पर उन्होंने 69,804 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन, 18,440 कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। उन्होंने 450 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली विभिन्न बाल विकास एवं महिला कल्याण परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया।  69 हजार से अधिक स्मार्टफोन वितरित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और मुख्य सेविकाओं को 69,804 स्मार्टफोन वितरित किए। यह पहल आंगनवाड़ी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्मार्टफोन के माध्यम से अब पोषण ट्रैकिंग, बच्चों का डेटा अपडेट, गर्भवती महिलाओं की निगरानी और सरकारी योजनाओं का रियल-टाइम क्रियान्वयन संभव होगा। नियुक्ति पत्र से जमीनी ढांचे को मिली नई मजबूती कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 18,440 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। यह भर्ती रिक्त पदों को भरने के साथ ही सेवा तंत्र को और मजबूती प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने रायबरेली, अमेठी, सिधौली, गोसाईगंज समेत विभिन्न जिलों की चयनित अभ्यर्थियों को मंच से नियुक्ति पत्र सौंपे, जिससे पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का संदेश भी गया। कुपोषण से लड़ाई को मिलेगा बल मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को स्टेडियोमीटर, इन्फेंटोमीटर और वेइंग स्केल जैसे आधुनिक उपकरण वितरित किए। प्रदेशभर में 10,553 इन्फेंटोमीटर, 1,33,282 स्टेडियोमीटर और 58,237 मदर-चाइल्ड वेइंग स्केल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन उपकरणों से बच्चों की लंबाई, ऊंचाई और वजन की सटीक निगरानी होगी, जिससे कुपोषण की समय रहते पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा। ‘सक्षम आंगनवाड़ी’, अब सेवा केंद्र से आगे बढ़कर विकास केंद्र बनेंगी प्रदेश में 23,697 आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ के रूप में विकसित किया गया है, जिन पर 236 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन केंद्रों को एलईडी स्क्रीन, आरओ मशीन, ईसीसीई (अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन) किट और आधुनिक फर्नीचर से सुसज्जित किया गया है। अब ये केंद्र केवल पोषण वितरण तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक विकास के केंद्र बन रहे हैं। 75 जिलों में फैला विशाल नेटवर्क आज उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में 897 बाल विकास परियोजनाएं लगभग 1.89 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों से संचालित हो रही हैं। सरकार का लक्ष्य इन सभी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट, डिजिटल और आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है, ताकि हर बच्चे और हर मां तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंच सकें। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वस्थ बचपन ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। प्रदेश में उत्तम पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और समुचित देखभाल के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जा रहा है। आज आंगनवाड़ी केंद्र सुरक्षित, प्रेरणादायक और खेल-आधारित वातावरण प्रदान कर रहे हैं, जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। सीएम ने हाथों मिले नियुक्ति पत्र, स्मार्टफोन व डिवाइस नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों में मीरा देवी (रायबरेली), महिमा (अमेठी), शहरुनिशां (सिधौली), शैलू सिंह (गोसाईगंज), किरण तथा सुभाषिनी और बक्शी का तालाब की मेनका पाल को नियुक्ति पत्र वितरित किए। वहीं सहायिकाओं में सुभाषिनी, मेनका पाल, मंजू सिंह, मुस्कान सोनकर और रूमा देवी को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने 69,804 स्मार्टफोन के वितरण के क्रम में मंच पर लखनऊ की आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों – आशा यादव, प्रीति सैनी, अमिता मिश्रा, अर्चना रावत, माया देवी, सुनीता रस्तोगी, निधि जायसवाल, मीना शुक्ला, प्रिया पाल और नेहा भारती को स्मार्टफोन प्रदान किए। वहीं मुख्य सेविकाओं में पूनम राय, अरुणा वाजपेई, मीनू देवी, रूमी रानी और उषा देवी को भी स्मार्टफोन देकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने मंच से आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस (जिसमें स्टेडियोमीटर, इन्फेंटोमीटर व वेइंग स्केल शामिल हैं) का वितरण किया। इनमें नाहिद परवीन, सावित्री, यूतिका सिंह, राधा पांडे, आस्था पाल, अनीता, नीलू रावत, राजरानी, बीना मिश्रा और रेखा मिश्रा सम्मिलित रहीं।  

योगी सरकार की पहल को बताया तकनीकी सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम, कहा- डिजिटल सुविधाओं से सशक्त होंगी कार्यकत्रियां

लखनऊ. योगी सरकार में अब आंगनवाड़ी सेवाएं डिजिटल रूप से और अधिक प्रभावी बनने जा रहीं हैं। आंगनवाड़ी व्यवस्था को और दुरुस्त बनाने के लिए लोकभवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम को दौरान स्मार्टफोन और नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाली लाभार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए खुद को गौरवान्वित महसूस किया। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल तकनीकी सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वावलंबन को भी नई मजबूती प्रदान करती है। नवनियुक्त कार्यकत्रियों ने मुख्यमंत्री की इस पहल को लेकर सराहना करते हुए खुशी जताई।   कार्यक्रम में पहुंचीं नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकत्री अंजली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्मार्टफोन से हमारा काम सुचारु रूप से चल पायेगा, साथ ही अब डाटा संरक्षण में आसानी होगी। तो वहीं नवनियुक्त आशा कार्यकत्री सुभाषिनी ने कहा कि मुझे मुख्यमंत्री के हाथों से अपना नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ जिसकी मुझे बहुत ख़ुशी है। उन्होंने कहा कि हमारी नियुक्तियां मेरिट आधार पर पूर्ण रूप से पारदर्शी तरीके से हुईं हैं।   नवनियुक्त आशा कार्यकत्री रितिका सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे मुख्यमंत्री से आज जो ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस प्राप्त हुआ है उससे आंगनवाड़ी में बच्चों का वजन अच्छे से नाप पाऊंगी। सुपरवाइजर अरुणा बाजपेयी ने बताया कि  मुझे आज स्मार्टफोन मिला है जिससे मैं अपना विभागीय कार्य को और बेहतर तरीके से कर पाऊंगी।  लाभार्थियों ने कहा कि डिजिटल आंगनवाड़ी की यह पहल न केवल कार्यकत्रियों को सशक्त बनाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की नींव भी रखेगी। यह कार्यक्रम केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश में बदलती व्यवस्था, पारदर्शी शासन और तकनीक के माध्यम से सशक्त समाज की दिशा में एक बड़ा संदेश बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री की इस पहल से प्रदेश की आंगनवाड़ी सेवाएं अब डिजिटल रूप से और अधिक प्रभावी बनेंगी। योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।