samacharsecretary.com

स्वयं सहायता समूह की ताकत: राजश्री शुक्ला ने बिजली बिल सेवा से जीता पूरे गांव का विश्वास

लखनऊ बाराबंकी की राजश्री शुक्ला आज उस बदलाव की मिसाल हैं, जो सरकारी योजनाओं और व्यक्तिगत मेहनत के संगम से संभव हुआ है। कभी सीमित संसाधनों के साथ जीवनयापन करने वाली राजश्री आज “विद्युत सखी” के रूप में अलग पहचान बना चुकी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई इस पहल ने उन्हें न सिर्फ रोजगार दिया, बल्कि उन्हें अपने जिले में एक नई पहचान भी दी है। घर-घर जाकर बिजली बिल संग्रह करने का उनका काम आज हजारों लोगों के लिए सुविधा और भरोसे का प्रतीक बन चुका है। घर-घर सेवा, गांव को मिली सुविधा: डिजिटल भुगतान से बदली ग्रामीण व्यवस्था राजश्री का काम केवल बिल संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में एक बड़ी सुविधा लेकर आया है। उनके प्रयासों से गांव के लोगों को लंबी कतारों में खड़े होने से राहत मिली है और समय पर बिल जमा होने से बिजली विभाग के राजस्व संग्रह में भी सुधार हुआ है। अब तक वे 81,000 से अधिक बिजली बिल की राशि एकत्र कर चुकीं हैं। उनकी मेहनत का परिणाम है कि उन्होंने अभी तक कुल ₹18 करोड़ से अधिक की राशि का बिल जमा कराया है। आज उनकी वार्षिक आय ₹10 लाख से अधिक है, जो यह दर्शाती है कि सही अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन कर अपने पैरों पर खड़ी हो सकतीं हैं। राधा स्वयं सहायता समूह से मिली सफलता: लाख रुपये तक पहुंची आय राजश्री ‘राधा स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी हैं और उन्होंने वर्ष 2021 में मात्र ₹30,000 की बैंक सहायता से इस काम की शुरुआत की थी। शुरुआत में यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने गांव-गांव जाकर जागरूकता शिविर लगाए, लोगों को डिजिटल भुगतान, बिल सेवाओं और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। कुछ समय बाद ही उनकी मासिक आय 80 हजार रुपये से अधिक हो चुकी है। उनकी ईमानदारी और मेहनत ने धीरे-धीरे लोगों का विश्वास जीत लिया। आज स्थिति यह है कि गांव की महिलाएं खुद उन्हें फोन कर बिल भुगतान में सहायता मांगती हैं। यह विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी बन गया है। सम्मान और प्रेरणा: एक महिला से हजारों तक पहुंचा आत्मनिर्भरता का संदेश राजश्री शुक्ला की इस उपलब्धि को राज्य स्तर पर भी सराहा गया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें सम्मानित किया। उनकी सफलता न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि महिलाएं भी हर क्षेत्र में आगे बढ़कर न केवल खुद को, बल्कि समाज को भी सशक्त बना सकती हैं।  9 नवंबर 2024 को आयोजित “आकांक्षा हाट” कार्यक्रम के अवसर पर उत्तर प्रदेश की 5 मेधावी महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें विद्युत सखी राजश्री शुक्ला भी शामिल थीं। इसके अलावा उन्हें 15 अगस्त 2023 और 26 जनवरी 2024 और 15 अगस्त 2025 के बीच मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया जा चूका है। उनकी उपलब्धियों के चलते उन्हें 15 अगस्त 2024 को दिल्ली के लाल किले पर प्रधानमंत्री की ओर से आमंत्रित किया गया, जहां वे ध्वजारोहण समारोह की साक्षी बनीं। इसके साथ ही 14 अगस्त 2024 को ग्रामीण विकास मंत्रालय में आयोजित बैठक एवं भोज कार्यक्रम में भी उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।  योगी सरकार की पहल ‘विद्युत सखी’ से बदलता उत्तर प्रदेश आज उत्तर प्रदेश में विद्युत सखियां सक्रिय रूप से अच्छा काम कर रही हैं, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के बिजली बिल संग्रह कर राज्य की व्यवस्था को मजबूत किया है। यह पहल केवल एक योजना नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण, डिजिटल सशक्तीकरण और ग्रामीण विकास का एक सशक्त मॉडल बन चुकी है। राजश्री शुक्ला जैसी महिलाएं इस बात का प्रमाण हैं कि जब सरकार की योजनाएं सही दिशा में लागू होती हैं और लोग उन्हें अपनाते हैं, तो बदलाव सिर्फ संभव नहीं, बल्कि स्थायी हो जाता है।

विकास की रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकती है टेक्नोलॉजी: मुख्यमंत्री

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि टेक्नोलॉजी विकास की रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकती है। हमारी गति को प्रगति में बदल सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। बजट में भी टेक्नोलॉजी पर विशेष ध्यान देने का प्रयास किया है। जब हम तकनीक नहीं अपनाते, उससे परहेज करते हैं तो प्रतिस्पर्धा में नहीं होते हैं। और, जब प्रतिस्पर्धा में नहीं होते हैं तो प्रगति की जगह दुर्गति की ओर जाते हैं। हमें प्रगति का अनुसरण करना है। सीएम योगी गुरुवार को गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के गोरखपुर सेंटर के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे युवाओं में बहुत टैलेंट है। उसके टैलेंट को जब हम टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ते हैं तो वह अपनी प्रतिभा को कई गुना तेजी के साथ आगे बढ़ाने में सफल होता है। यही कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र ने पिछले 11 वर्षों में देश में किया है। दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी भारत में है। यहां युवाओं में स्केल तो था लेकिन उसे वर्ष 2014 के पहले की सरकारों ने महत्व नहीं दिया। स्केल को स्किल में बदलने का प्रयास नहीं किया, कोई प्लेटफार्म नहीं उपलब्ध कराया। परिणाम था कि युवा हतोत्साहित होता था, पलायन करता था। युवाओं के मन में निराशा थी। लेकिन, वर्ष 2014 के बाद एक-एक कर हर क्षेत्र में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। न केवल भारत सरकार के स्तर पर, बल्कि हर जनपद स्तर पर युवाओं के स्केल को स्किल में बदलने के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारंभ हुए। उन कार्यक्रमों की श्रृंखला में एसटीपीआई का गोरखपुर केंद्र भी अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है। इसका शुभारंभ वासन्तिक नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर होना अत्यंत शुभ लक्षण है।  एसटीपीआई से मिलेगी युवाओं के सपनों को नई उड़ान मुख्यमंत्री ने कहा कि एसटीपीआई का यह सेंटर गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगा। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि स्टार्टअप चलाने वाला व्यक्ति केवल अपना कंप्यूटर लेकर वहां जाएगा। उसे जगह, बिजली कनेक्शन और अन्य जन सुविधाओं की चिंता नहीं करनी है। देश और दुनिया में जहां कहीं भी सॉफ्टवेयर की टेक्नोलॉजी आज अपनी धमक दिखा रही है, उसके पीछे यही सफल मॉडल है। गोरखपुर में पहली बार इसे शुरू किया जा रहा है। प्लग एंड प्ले मॉडल पर यहां के युवाओं को अपने स्टार्टअप के लिए प्लेटफार्म उपलब्ध हुआ है। 15 अप्रैल को होगा पूर्वी यूपी के पहले सेंटर आफ एक्सीलेंस का शुभारंभ मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अप्रैल को गोरखपुर में पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर आफ एक्सीलेंस का शुभारंभ भी हो जाएगा। यह सेंटर आफ एक्सीलेंस महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एमपीआईटी) में बना है। ये सभी कार्यक्रम दिखाते हैं कि अब केवल हार्डवेयर में ही नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर में भी पूर्वी उत्तर प्रदेश का युवा अपनी प्रतिभा का परिचय वैश्विक मंच पर देने में सफल हो पाएगा। पिछले 11 वर्ष के अंदर स्टार्टअप संस्कृति को आगे बढ़ाने का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में 20 हजार से अधिक स्टार्टअप काम कर रहे हैं और इनमें से आधे महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। हर व्यक्ति के अंदर प्रतिभा है, लेकिन उसके हुनर को मंच चाहिए। एमएमएमयूटी में बनेगा ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी का सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी को भविष्य की ऊर्जा बताते हुए कहा कि सरकार गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनवा रही है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। एनर्जी के लिए हमें किसी अन्य देश पर निर्भर न रहना पड़े, इसके लिए ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी एक माध्यम बनने वाली है। हम लोग हाल में जापान गए थे। जापान के साथ हमारी बातचीत हुई है। जापान में ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी काफी एडवांस्ड स्टेज में है। हम उनसे मिलकर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाएंगे। टेक्नोलॉजी को आने में और इनोवेशन को रिसर्च एंड डेवलपमेंट में बदलने में थोड़ा समय लगता है। संभावनाओं के अनुरूप विकसित किए जा रहे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जिस क्षेत्र में जो संभावनाएं हैं, उसी को देखकर सेंटर आफ एक्सीलेंस विकसित किए जा रहे हैं। आईआईटी कानपुर व एसजीपीजीआई लखनऊ में मेडिटेक, कानपुर में लेदर व ड्रोन टेक्नोलॉजी और नोएडा-ग्रेटर नोएडा में रोबोटिक्स के सेंटर आफ एक्सीलेंस विकसित करने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है। सरकार विश्व बैंक के साथ मिलकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के 28 जिलों और बुंदेलखंड के सात जिलों में एग्रीटेक पर काम कर रही है। ऐसे ही स्टार्टअप डेयरी,  मत्स्य पालन और अन्य फील्ड में भी स्थापित हो सकते हैं। नौ वर्षों में गोरखपुर में हुआ एक लाख करोड़ रुपये का निवेश मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान गोरखपुर के विकास और इसकी उपलब्धियों की भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बीते नौ वर्षों में गोरखपुर के विकास में एक लाख करोड रुपये का निवेश हुआ है। यहां एम्स, खाद कारखाना, पिपराइच चीनी मिल बनी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक बना। आयुष विश्वविद्यालय, कई पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थान बने। स्केल डेवलपमेंट के केंद्र बने। चारों ओर हाईवे और फोरलेन की कनेक्टिविटी हुई। गोरखपुर से अंदर की सड़कों को लेकर, अन्य तमाम प्रकार की सुविधाओं को लेकर काम हुए। गोरखपुर में एक लाख करोड रुपये निवेश करने से लाखों नौजवानों के लिए नौकरी और रोजगार की संभावना आगे बढ़ी है।  गीडा में दिखती है नवनिर्माण की नई प्रगति सीएम योगी ने कहा कि गीडा ने पिछले नौ वर्ष में नव निर्माण की नई प्रगति को देश और दुनिया के सामने रखा है। एक समय था जब गीडा में दो उद्योग लगे थे। उन दो उद्योगों में केवल 29-30 करोड रुपये की पूंजी लगी थी। जबकि पिछले नौ वर्ष में यहां लगभग 350 से अधिक उद्योग लगे हैं, 17000 करोड रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। 50000 से अधिक नौजवानों को नौकरी और रोजगार की संभावना अकेले गीडा ने विकसित की है। गीडा में प्लग एंड प्ले के जिस मॉडल पर सॉफ्टवेयर पार्क विकसित हुआ है, ऐसे ही यहां पर सरकार फ्लैटेड फैक्ट्री कार्यक्रम को लेकर आई है। गीडा में प्लास्टिक पार्क भी … Read more

जटिल प्रसव के मामले भी अब संभाल रहे छोटे जिलों के अस्पताल

लखनऊ योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़े कदम उठाए हैं। आज प्रदेशवासियों को उनके ही जिले में गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा मिल रही है। योगी सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि वर्तमान में जटिल प्रसव वाले मामलों को बड़े शहरों की ओर रेफर करने की प्रवृत्ति अब प्रदेश में कम हो रही है। छोटे शहरों में ही जटिल मामले संभाले जा रहे हैं। इसके साथ ही योगी सरकार ने 76 जिला अस्पतालों के 1,791 डाक्टरों को बीते चार वर्षों में प्रशिक्षण दिया। आरआरटीसी मॉडल से जिलों में मजबूत हो रही मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करना आज भी स्वास्थ्य प्रणाली के सामने बड़ी चुनौती है। विशेषकर जिला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ सेवाओं की कमी, आपात स्थितियों में त्वरित निर्णय की क्षमता का अभाव और समय पर रेफरल की जटिलताओं के कारण कई बार ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, जिन्हें रोका जा सकता है। इन्हीं सवालों का व्यावहारिक और प्रभावी उत्तर बनकर उभरा है रीजनल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग सेंटर (आरआरटीसी) मॉडल। प्रदेश में इस वक्त 20 मेडिकल कॉलेज आरआरटीसी के रूप में काम कर रहे हैं।  आरआरटीसी मॉडल: प्रशिक्षण से आगे, एक “सिस्टम स्ट्रेंथनिंग इंजन” आरआरटीसी ने पारंपरिक प्रशिक्षण मॉडल से आगे बढ़ते हुए हब-एंड-स्पोक आधारित मेंटरशिप मॉडल विकसित किया, जिसमें मेडिकल कॉलेज “नॉलेज हब” के रूप में कार्य करता है और जिले “स्पोक” के रूप में उससे निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। इस मॉडल के तहत ऑन-साइट मेंटरिंग, निरंतर क्षमता निर्माण, नर्सिंग स्टाफ का सशक्तीकरण व मल्टी-डिपार्टमेंट सहयोग लिया जाता है। अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थापित आरआरटीसी इस मॉडल की मिसाल है। यहां से अलीगढ़, हाथरस व कासगंज जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ की क्षमतावृद्धि की गई । आज वे जटिल से जटिल मामलों को संभाल रहे हैं। आरआरटीसी की को-ऑर्डिनेटर डॉ. तबस्सुम रहमत बताती हैं कि “हमारा लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि हर स्वास्थ्य इकाई को इस स्तर तक सक्षम बनाना है कि वह जटिल परिस्थितियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सके।” जमीनी बदलाव: कासगंज से उभरती एक मिसाल आरआरटीसी मॉडल का प्रभाव सबसे स्पष्ट रूप से कासगंज जिला महिला अस्पताल में देखा जा सकता है। वर्ष 2017 में जहां इस अस्पताल में पहला सफल सी-सेक्शन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, वहीं आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह सुसज्जित और सक्रिय है। अधिकतर डॉक्टर और स्टाफ प्रशिक्षित हैं। जटिल प्रसव मामलों का स्थानीय स्तर पर ही प्रबंधन संभव हो रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहले जिन मामलों को तत्काल बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता था, अब उनमें से कई का इलाज जिले में ही हो रहा है। इससे न केवल समय की बचत हुई है, बल्कि माताओं और नवजातों के लिए जीवनरक्षक अंतर भी पैदा हुआ है। संकट के समय भी निरंतरता: कोविड-19 के दौरान अनुकूलन कोविड-19 महामारी के दौरान जब स्वास्थ्य सेवाओं पर अभूतपूर्व दबाव था, तब भी आरआरटीसी की पहल नहीं रुकी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण जारी रखा गया, विशेष सत्र आयोजित किए गए, और यह सुनिश्चित किया गया कि संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल सेवाएं बाधित न हों। यह दर्शाता है कि यह मॉडल केवल स्थिर परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि संकट के समय भी अनुकूल और प्रभावी है। एक केस, जो बताता है क्षमता का वास्तविक अर्थ जेएन मेडिकल कालेज की डॉ. नसरीन नूर एक जटिल केस को याद करती हैं। 23 वर्षीय एक महिला तेज पेट दर्द के साथ आई। प्रारंभिक जांच में स्थिति सामान्य प्रतीत हो रही थी, लेकिन विस्तृत मूल्यांकन में हेटरोटॉपिक प्रेग्नेंसी का पता चला। एक गर्भाशय में और दूसरा ट्यूब में, जिसमें से ट्यूब वाली प्रेग्नेंसी फट चुकी थी। तत्काल सर्जरी कर मरीज की जान बचाई गई। सावधानीपूर्वक फॉलोअप के बाद उसी महिला ने नौ महीने बाद एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। यह केवल एक सफल केस नहीं, बल्कि यह संकेत है कि अब प्रणाली जटिल और जीवन-जोखिम वाली स्थितियों को पहचानने और संभालने में सक्षम हो रही है।

अफवाहों पर ध्यान न दें, आवश्यकता पड़ने पर ही पेट्रोल-डीजल लेने जाएं

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि रसोई गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसी के बाहर लाइन लगाने की आवश्यकता नहीं है, निर्धारित समय पर बुकिंग कराएं, सिलेंडर आपके घर पहुंच जाएगा। इसी तरह आवश्यकता होने पर ही पेट्रोल-डीजल लेने जाएं, फिलिंग सेंटरों पर लाइन लगाने की कोई जरूरत नहीं है। कुछ लोग अफवाहें फैला कर राज्य का माहौल खराब करना चाहते हैं, अव्यवस्था फैलाना चाह रहे हैं। लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। मुख्यमंत्री गुरुवार को गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र (गीडा) में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गल्फ वॉर के पहले अगर किसी के घर रसोई गैस का सिलेंडर एक महीने चलता था, तो वह आज पांचवें या छठे दिन ही सिलेंडर लेने क्यों पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि निर्धारित समय पर ही बुकिंग कराएं, आपकी बारी आने पर रसोई गैस आपके घर तक पहुंच जाएगी। सरकार ने सभी जिला प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। जैसे पहले गैस सिलेंडरों की होम डिलीवरी होती थी, वैसे ही अब भी होगी। इसके लिए एजेंसी के बाहर लाइन लगाने की कोई जरूरत नहीं है। पेट्रोल-डीजल लेने तभी जाएं, जब आवश्यकता हो, लाइन लगाने की आवश्यकता नहीं है। कुछ लोगों द्वारा साजिश के तहत फैलाई जा रही अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर हम उतावलेपन में आकर किसी अफवाह में, दुष्प्रचार के चक्कर में पड़ते हैं तो हमारी राष्ट्रभक्ति पर लोग संदेह करेंगे। हमको यह सतर्कता रखनी होगी। हमें अपने राष्ट्रीय नेतृत्व पर विश्वास रखकर धन्यवाद देना चाहिए कि भारत में सबकुछ अच्छा है। उत्साहपूर्वक उत्सव मनाए जा रहे हैं। नवरात्रि के कार्यक्रम हो रहे हैं। कल रामनवमी है, कल 12 बजे रामजन्मभूमि पर सूर्य भगवान भी भगवान श्रीराम का राजतिलक करेंगे। वैश्विक संकट के बीच संयम व सहयोग जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ईरान-अमेरिका/इज़राइल युद्ध से पूरी दुनिया प्रभावित है। दुनिया में हाहाकार, अराजकता, अव्यवस्था है, लेकिन भारत के अंदर हम प्रधानमंत्री मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में बेखौफ व सुरक्षित हैं, विकास यात्रा को भी बढ़ा रहे हैं। लेकिन, यह युद्ध लंबा खिंचा तो हर व्यक्ति प्रभावित होगा। हमको भी मानसिक रूप से तैयार होना होगा। अफवाहों पर ध्यान नहीं देना होगा। जब आपत्ति या चुनौती आती है तो उसका मुकाबला करने के लिए हर व्यक्ति को सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा, यही सच्ची राष्ट्रभक्ति होती है। जब हम किसी भी राष्ट्रीय मुद्दे पर सरकार के साथ मिलकर काम करते हैं तो बेहतर परिणाम सामने आएंगे। देशहित में अगर सरकार ने कोई कदम उठाया तो हम उसके लिए खुद को तैयार करेंगे।

योगी सरकार के 9 वर्षों में यूपी ने तोड़े पर्यटन क्षेत्र के सारे रिकार्ड, बना पर्यटन का सिरमौर

लखनऊ उत्तर प्रदेश पर्यटन क्षेत्र में सफलता की जो नई कहानी लिख रहा है, वह केवल पर्यटकों की रिकॉर्ड संख्या तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुकी है। उत्तर प्रदेश में आस्था और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे की पूरक बनकर प्रदेश में पर्यटन की विकास यात्रा को नई दिशा दे रही है। इस दिशा में सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तैयार की गई पर्यटन नीति- 2022 के सफल क्रियान्वयन के साथ इको टूरिज्म का विकास, पर्यटन सुविधाओं में अवसंरचनात्मक सुधार, बेहतर कनेक्टिविटी, सुदृढ़ कानून व्यवस्था, एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे और परिवहन सेवाओं के विस्तार ने यूपी में पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही योगी सरकार का ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनामी’ का मॉडल उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक स्पिरिचुअल टूरिज्म हब के रूप में विकसित कर रहा है। आईआईएम लखनऊ ने कुछ समय पहले अयोध्या में पर्यटन को लेकर अध्ययन किया था। इसमें उसने योगी सरकार की टेंपल इकॉनामी की सराहना की है।  योगी सरकार के नौ वर्षों के शासनकाल में उत्तर प्रदेश ने पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, जिसकी गवाही पर्यटन के आंकड़े देते हैं। योगी सरकार के पहले वर्ष 2017 में यूपी में लगभग 23.75 करोड़ पर्यटक आए थे, वहीं 2019 में यह संख्या लगभग दोगुनी बढ़कर 54.06 करोड़ पहुंच गई। हालांकि, इसमें कोविड महामारी के दौरान गिरावट दर्ज की गई, लेकिन योगी सरकार की पर्यटन नीति – 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन से तेज रिकवरी हुई। परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2024 में 64.91 करोड़ पर्यटकों के साथ यूपी देश में सर्वाधिक घरेलू पर्यटकों वाला राज्य बन गया और विदेशी पर्यटकों के मामले में चौथा। यही नहीं, वर्ष 2025 में महाकुंभ-2025 के आयोजन से पर्यटकों की संख्या अभूतपूर्व रूप से बढ़कर 156.18 करोड़ तक पहुंच गई। गौरतलब है कि पिछले 9 वर्षों में यूपी में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगभग सात गुना बढ़ चुकी है। वर्तमान में राष्ट्रीय पर्यटन में यूपी की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो यूपी को वैश्विक पर्यटन का केंद्र बनाने की दिशा में उल्लेखनीय संकेत है। प्रदेश में 5 लाख से अधिक रोजगार का सृजन मुख्यमंत्री के विजन को साकार करती उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 प्रदेश में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन को साकार करने वाली साबित हुई है। इस नीति के तहत होटल, होमस्टे, ईको-टूरिज्म, वेलनेस और एडवेंचर टूरिज्म समेत 22 गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए निवेश आधारित सब्सिडी की व्यवस्था की गई है। जिसके तहत अब तक ₹36,681 करोड़ के निवेश लक्ष्य को हासिल किया गया है। साथ ही 1,684 से अधिक पर्यटन इकाइयों को पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। जिससे प्रदेश में 5 लाख से अधिक रोजगार का सृजन हुआ और महिलाओं का भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।  उत्तर प्रदेश में 12 से अधिक टूरिस्ट सर्किटों का निर्माण धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश में विभिन्न तीर्थ परिषदों का निर्माण कर उनका कायाकल्प किया गया। जिससे एक ओर तो तीर्थों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा में बढ़ोतरी हुई, साथ ही इन क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिला। इसमें अयोध्या, देवीपाटन, ब्रज तीर्थ, विंध्याचल, चित्रकूट, नैमिषारण्य, शुक तीर्थ विकास परिषदों का गठन प्रमुख है। इसके साथ ही प्रदेश में 12 से अधिक टूरिस्ट सर्किटों, रामायण, कृष्ण, बौद्ध, जैन, सूफी, स्वतंत्रता संग्राम सर्किट आदि का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही 83 धार्मिक मार्गों के चौड़ीकरण व विकास से श्रद्धालुओं की यात्रा और सुगम हुई है। सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया। इसमें लखनऊ में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना, कौशांबी में संग्रहालय, बाराबंकी में बाबू केडी सिंह संग्रहालय, गोरखा रेजिमेंट सेंटर, मेरठ में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित संग्रहालय और गोरखपुर में शहीद स्मारक जैसे निर्माण कार्य उल्लेखनीय हैं। प्रयागराज में आजाद पार्क और ‘देखो प्रयागराज’ ट्रेल का अनुभव, बुंदेलखंड (महोबा) का विरासत पर्यटन स्थल के रूप में विकास, अयोध्या में अंतर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, कुशीनगर में बुद्ध थीम पार्क, आगरा स्थित बटेश्वर और श्रावस्ती का समेकित पर्यटन विकास जैसी विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश में सांस्कृतिक समृद्धि के साथ पर्यटन विकास की वाहक साबित हो रही हैं। राज्य में 49 इको-टूरिज्म परियोजनाएं शुरू की गईं राज्य में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अगस्त 2022 में यूपी इको टूरिज्म बोर्ड का गठन किया गया। जिसके माध्यम से प्रदेश के प्रमुख इको टूरिज्म केंद्रों दुधवा, कतर्नियाघाट, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, अमानगढ़ और सोहगीबरवा वन क्षेत्रों के साथ अन्य प्राकृतिक पर्यावासों में भी नाइट स्टे, वॉच टॉवर, नेचर ट्रेल, कैफेटेरिया, होमस्टे और बर्ड वॉचिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। राज्य में 49 इको-टूरिज्म परियोजनाएं शुरू की गईं हैं, साथ ही ग्रामीण पर्यटन के लिए 234 गांवों का चयन किया गया है। प्रदेश के सभी जिलों में युवा पर्यटन क्लबों का गठन कर स्थानीय सहभागिता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनामी’ मॉडल सबसे प्रभावशाली कारक सिद्ध हुआ यही नहीं, योगी सरकार का ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनामी’ मॉडल यूपी में पर्यटन विकास का सबसे प्रभावशाली कारक सिद्ध हुआ है। इसका सबसे सशक्त उदाहरण अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के रूप में देखने को मिला। अयोध्या में आने वाले पर्यटकों की संख्या वर्ष 2017 के 2.84 लाख से अविश्वसनीय रूप से बढ़कर वर्ष 2024 में 16.44 करोड़ के पार पहुंच गई। यही नहीं, वर्ष 2025 में भी अयोध्या में 29.95 करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। इसी क्रम में वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, प्रयागराज में कुंभ और महाकुंभ के आयोजनों ने इन तीर्थक्षेत्रों में पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा दिया है। योगी सरकार का यह मॉडल बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि वर्ष 2017 से 2025 तक 197 ऐतिहासिक और पवित्र स्थलों का जीर्णोद्धार हुआ, जिससे प्रदेश में पर्यटनजनित व्यापार और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश में त्योहार और उत्सव अब दिव्य-भव्य महोत्सव का रूप ले चुके हैं। इसमें अयोध्या का दीपोत्सव, वाराणसी की देव दीपावली और मथुरा के ब्रज और बरसाना के होली उत्सव में देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगती है। यही नहीं, प्रयागराज के महाकुंभ-2025 में … Read more

जनता दर्शन में 200 लोगों की समस्याएं सुनीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की हर समस्या का त्वरित समाधान कराएं। किसी भी समस्या से जुड़ी शिकायत को संवेदनशीलता से लेकर उसका संतुष्टिप्रद निस्तारण सुनिश्चित कराने में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। जनता दर्शन में पहुंचे लोगों को मुख्यमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा, चिंता मत करिए। सरकार आपकी हर समस्या पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराएगी।  जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे और एक-एक कर उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना। उनके प्रार्थना पत्र लिए और पास में मौजूद अधिकारियों को समस्या समाधान हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिए। अलग-अलग मामलों से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और संतुष्टिपरक होना चाहिए।  अपराध व जमीन कब्जा किए जाने से संबंधित शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि कोई दबंग किसी की जमीन पर जबरन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। गरीबों को उजाड़ने वाले कतई न बख्शे जाएं। गरीबों की संपत्ति पर गरीबों का ही कब्जा सुनिश्चित होना चाहिए। जनता दर्शन में पारिवारिक विवाद के जुड़े मामले भी आए थे। इस पर मुख्यमंत्री ने दोनों पक्षों के बीच पहले संवाद कराने और बात न बनने पर यथोचित विधिक कार्यवाही के निर्देश दिए।   जनता दर्शन में हर बार की तरह कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का एस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। एस्टीमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी। जनता दर्शन में कुछ महिलाएं अपने बच्चों को लेकर आई थीं। मुख्यमंत्री ने इन बच्चों को खूब दुलारा और उन्हें चॉकलेट के साथ आशीर्वाद भी दिया।    गोवंश को दुलारकर गुड़ खिलाया सीएम ने गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने प्रातःकाल गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर मत्था टेका। सीएम योगी जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं तो गोसेवा उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रहती है। गुरुवार सुबह वह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए मंदिर की गोशाला पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया। गोशाला में सीएम योगी ने गोवंश के माथे पर हाथ फेरा। उन्हें खूब दुलारा और अपने हाथों से गुड़ खिलाया।

योगी सरकार में बदली यूपी टूरिज्म की पहचान, वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा उत्तर प्रदेश

योगी सरकार के 9 वर्षों में यूपी टूरिज्म ने तय किया ‘ग्रेवयार्ड इकोनॉमी’ से ‘टेंपल इकोनॉमी’ का सफर योगी सरकार में बदली यूपी टूरिज्म की पहचान, वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा उत्तर प्रदेश तीर्थ स्थलों का विकास और धार्मिक उत्सवों का भव्य आयोजन, यूपी बना देश में पर्यटन का सिरमौर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में पिछले 9 वर्षों के दौरान योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पर्यटन क्षेत्र ‘ग्रेवयार्ड इकोनॉमी’ से निकलकर ‘टेंपल इकोनॉमी’ में बदल चुका है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने लोकभवन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान योगी सरकार की 9 वर्षों की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए कहा कि यह परिवर्तन केवल सोच का नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं का भी प्रतीक बनकर उभरा है। जहां वर्ष 2017 के पहले राज्य सरकार के बजट का बड़ा हिस्सा कब्रिस्तानों की दीवारें बनाने में खर्च होता था, वहीं अब योगी सरकार में प्रदेश के तीर्थ स्थलों, धार्मिक गलियारों, सांस्कृतिक मार्गों और पर्यटन अवसंरचना के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस बदलाव ने उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्द्धन को पर्यटन के विकास से जोड़ा है। यूपी के आस्था के केंद्र,  तीर्थस्थल बने पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर्यटन मंत्री ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप पिछले 9 वर्षों में राज्य में आस्था, संस्कृति और पर्यटन का संगम अब आर्थिक विकास का मजबूत आधार बन चुका है। योगी सरकार में तीर्थ विकास परिषदों का निर्माण कर प्रदेश के तीर्थों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विकास किया गया है। अयोध्या, काशी, प्रयागराज, मथुरा के साथ ही मीरजापुर, चित्रकूट, नैमिषारण्य और सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी देवी शक्तिपीठ जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल आज प्रदेश के पर्यटन की नई पहचान बन चुके हैं। इस क्रम में विशेष रूप से काशी विश्वनाथ धाम के कॉरिडोर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में 4-5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं राम मंदिर अयोध्या में वर्ष 2025 के दौरान लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। सांस्कृतिक उत्सव और आयोजन से बढ़ा यूपी में धार्मिक पर्यटन उत्तर प्रदेश में आयोजित सांस्कृतिक आयोजनों ने भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। दीपोत्सव अयोध्या ने 2025 में 26 लाख से अधिक दीप जलाकर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। वहीं देव दीपावली वाराणसी को प्रांतीय मेले का दर्जा दिया गया है। 2017 में दीपोत्सव की शुरुआत, प्रयागराज में आयोजित होने वाला माघ, कुंभ और महाकुंभ मेला, ब्रज का रंगोत्सव जैसे आयोजनों ने पर्यटन को तेज गति से बढ़ावा दिया है। महाकुंभ-2025 का आयोजन इस यात्रा का ऐतिहासिक शिखर माना जा रहा है, जिसमें रिकॉर्ड 66 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ। उत्तर प्रदेश की ये सांस्कृतिक परंपराएं और उत्सव अब आर्थिक गतिविधियों का बड़ा स्रोत बन रहीं हैं। इन आयोजनों से स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन, प्रसाद, फूल, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों को व्यापक लाभ मिला है। पर्यटन नीति-2022 का सफल क्रियान्वयन, हुआ 5 लाख रोजगार का सृजन उत्तर प्रदेश में पर्यटन का नीतिगत विस्तार करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पर्यटन नीति-2022 को लागू किया गया। इसका परिणाम है कि अब तक उत्तर प्रदेश में ₹36,681 करोड़ से अधिक निवेश धरातल पर उतर चुका है, जिससे करीब 5 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। 1,757 पर्यटन इकाइयों का पंजीकरण भी किया गया है। युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के लिए शोध, प्रचार और मॉनिटरिंग कार्यों में ₹40,000 मासिक स्टाइपेंड देने की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पर्यटक सुरक्षा और सुविधाएं हुईं सुदृढ़, मिला पर्यटन को बढ़ावा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख शहरों—आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा, झांसी और लखनऊ में पर्यटन पुलिस तैनात की गई है। साथ ही 850 प्रशिक्षित गाइडों की नियुक्ति की गई है, जिससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके। इसके साथ ही ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 234 गांवों का चयन किया गया है और 2026-27 तक 50,000 होम-स्टे कमरे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 16 वन्यजीव क्षेत्रों में इको-टूरिज्म को विकसित किया जा रहा है। साथ ही तीर्थ यात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार करते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा हेतु ₹1 लाख तथा सिंधु दर्शन यात्रियों को ₹20 हजार का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। पर्यटक आगमन में रिकॉर्ड वृद्धि, घरेलू पर्यटन में यूपी बना प्रथम पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि एक पर्यटक कम से कम 6 लोगों की आय का माध्यम बनता है। प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन पर विशेष ध्यान का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश देश में घरेलू पर्यटक आगमन के मामले में प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है। वर्ष 2025 में प्रदेश में कुल 1 अरब 56 करोड़ से अधिक पर्यटक आए, जिनमें लगभग 36 लाख विदेशी पर्यटक शामिल रहे। केवल अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज में ही वर्ष 2025 के दौरान लगभग 116 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आगमन हुआ, जो राज्य के कुल पर्यटन का करीब 90 प्रतिशत है।  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि योगी सरकार के 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने यह सिद्ध कर दिया है कि सांस्कृतिक विरासत और आस्था को आर्थिक शक्ति में बदला जा सकता है। उत्तर प्रदेश अब तीर्थ, पर्यटन और परंपरा के समन्वय से विकास का एक नया मॉडल बनकर देश और दुनिया के सामने आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनकर उभरा है।

UP TET 2026 में सख्ती: बहुविवाह करने वाले नहीं भर पाएंगे फॉर्म

लखनऊ अगर आप भी उत्तर प्रदेश में सरकारी टीचर बनने का ख्वाब देख रहे हैं और यूपी टीईटी (UP TET 2026) परीक्षा का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, तो आपके लिए एक बेहद अहम और जरूरी खबर है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) पूरे पांच साल के लंबे इंतजार के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए 27 मार्च 2026 से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। हाल ही में जारी हुए नोटिफिकेशन के मुताबिक, इस बार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर होने जा रही इस बड़ी परीक्षा में 20 लाख से भी ज्यादा उम्मीदवारों और पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों के शामिल होने की पूरी उम्मीद है। लेकिन आवेदन शुरू होने से ठीक पहले, आयोग ने कुछ ऐसे सख्त नियम और गाइडलाइन जारी की हैं, जिन्हें जानना हर उम्मीदवार के लिए बेहद जरूरी है खासकर उन लोगों के लिए जो शादीशुदा हैं। UP TET 2026: एक से ज्यादा शादी पर पाबंदी का नियम आयोग की तरफ से जारी की गई आधिकारिक गाइडलाइन में सबसे ज्यादा चर्चा उस नियम की हो रही है जो शादीशुदा उम्मीदवारों से जुड़ा है। नोटिफिकेशन में बिल्कुल साफ कर दिया गया है कि ऐसे पुरुष अभ्यर्थी जो विवाहित हैं और जिनकी एक से ज्यादा पत्नियां जीवित हैं, वे इस परीक्षा का फॉर्म भरने के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे। यह नियम सिर्फ पुरुषों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए भी उतना ही सख्त है। ऐसी महिला उम्मीदवार, जिसने किसी ऐसे पुरुष से शादी की है जिसकी पहले से ही एक पत्नी जीवित है, उन्हें भी इस परीक्षा से बाहर रखा जाएगा। सीधे शब्दों में कहें तो बहुविवाह (Polygamy) करने वाले उम्मीदवारों को यूपी टीईटी की रेस से सीधे तौर पर बाहर कर दिया गया है। पुरुष और महिला, दोनों ही वर्गों के लिए यह नियम एक समान लागू होगा। UP TET 2026: क्या इस नियम में मिल सकती है कोई छूट? हर कड़े नियम की तरह इस नियम में भी एक छोटी सी गुंजाइश छोड़ी गई है। आयोग के मुताबिक, अगर किसी विशेष मामले में राज्य के राज्यपाल महोदय खुद इस प्रतिबंध से किसी उम्मीदवार को खास छूट या मुक्ति दे देते हैं, तो केवल उसी सूरत में ऐसे उम्मीदवार यूपी टीईटी की परीक्षा में शामिल होने के हकदार बन सकेंगे। इसके अलावा किसी भी स्तर पर इस नियम में कोई ढील नहीं दी जाएगी। परीक्षा में बैठने का मतलब नौकरी की गारंटी नहीं आयोग ने उम्मीदवारों को एक और बात को लेकर आगाह किया है। गाइडलाइन में साफ लिखा है कि अगर किसी उम्मीदवार को यूपी टीईटी में बैठने की इजाजत मिल जाती है और उसका एडमिट कार्ड जारी हो जाता है, तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसकी पात्रता पूरी तरह से प्रमाणित हो गई है। टीईटी पास करने से किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति का कोई सीधा कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। नौकरी के समय भर्ती एजेंसी या नियोक्ता प्राधिकारी द्वारा ही उम्मीदवार की सभी योग्यताओं और दस्तावेजों को अंतिम रूप से जांचा और प्रमाणित किया जाएगा। इसलिए यह हर उम्मीदवार की अपनी जिम्मेदारी है कि वह फॉर्म भरने से पहले आयोग द्वारा तय किए गए योग्यता मानदंडों को अच्छी तरह से पढ़ ले और खुद को संतुष्ट कर ले। गलत जानकारी देने पर हो सकती है जेल अगर कोई उम्मीदवार नियमों के दायरे में नहीं आता है और फिर भी चालाकी से फॉर्म भर देता है, तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार होगा। आयोग ने सख्त हिदायत दी है कि आवेदन में किसी भी तरह की भ्रामक, गलत या झूठी जानकारी देने पर उम्मीदवार का परीक्षा परिणाम तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, उसका टीईटी प्रमाण पत्र जब्त कर लिया जाएगा और ऐसे गंभीर मामलों में उम्मीदवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई या मुकदमा भी चलाया जा सकता है। ओएमआर शीट की दोबारा नहीं होगी चेकिंग परीक्षा देने के बाद अक्सर कई उम्मीदवारों को अपनी कॉपी दोबारा चेक कराने की इच्छा होती है। इस मुद्दे पर आयोग के उपसचिव डॉ. संजय कुमार सिंह ने स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। उन्होंने बताया कि परीक्षा की ओएमआर शीट का मूल्यांकन अत्याधुनिक मशीनों (इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों) के जरिए पूरी सावधानी से किया जाता है। इसकी स्कैनिंग में इतनी सटीकता होती है कि बार बार संवीक्षा की जरूरत ही नहीं पड़ती। इसलिए, किसी भी उम्मीदवार के ओएमआर उत्तर पत्रक की दोबारा जांच, पुनर्मूल्यांकन या स्क्रूटनी के लिए किए गए किसी भी आवेदन पर बिल्कुल विचार नहीं किया जाएगा। इस संबंध में आयोग किसी भी तरह का पत्राचार स्वीकार नहीं करेगा। कब से कब तक भरे जाएंगे फॉर्म? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूपी टीईटी के लिए ऑनलाइन आवेदन 27 मार्च 2026 से शुरू होकर 26 अप्रैल 2026 तक चलेंगे। वहीं, आयोग ने इस बार की परीक्षाएं 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को आयोजित करने का फैसला किया है। इसलिए, अगर आप सभी योग्यताओं को पूरा करते हैं, तो आखिरी तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते अपना फॉर्म सही सही जरूर भर लें।

सीएम योगी आज गोरखपुर में करेंगे एसटीपीआई केंद्र का उद्घाटन, आईटी-स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा नया बल

सीएम योगी गोरखपुर में आज एसटीपीआई केंद्र का करेंगे उद्घाटन, आईटी-स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा मजबूत आधार पूर्वांचल को मिलेगी टेक्नोलॉजी की नई उड़ान,  रोजगार और निवेश का नया हब बनेगा गोरखपुर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में आईटी और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति देने के लिए गुरुवार को गोरखपुर में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के अत्याधुनिक केंद्र का उद्घाटन करेंगे। लगभग 19.8 करोड़ रुपये की लागत से गीडा क्षेत्र में निर्मित यह केंद्र पूर्वांचल के युवाओं, स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए बड़े अवसरों का द्वार खोलेगा। 25,000 वर्ग फुट में विकसित यह सुविधा न केवल आईटी उद्योग को गति देगी, बल्कि क्षेत्र में रोजगार सृजन और डिजिटल सशक्तीकरण को भी नई दिशा देगी।  अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस, स्टार्टअप्स को मिलेगा प्लेटफॉर्म गोरखपुर एसटीपीआई केंद्र को प्लग एंड प्ले कार्यक्षेत्र, इन्क्यूबेशन स्पेस और आधुनिक नेटवर्किंग सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। यहां 50 सीटों वाला कार्यक्षेत्र, 6000 वर्ग फुट का रॉ और सेमी-फर्निश्ड इन्क्यूबेशन स्पेस, 54 व्यक्तियों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम, कॉन्फ्रेंस रूम और नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र स्टार्टअप्स, एमएसएमई और आईटी कंपनियों को अपने विचारों को विकसित करने और बाजार तक पहुंचाने के लिए मजबूत आधार देगा। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक प्रमुख स्वायत्त संस्था है, जिसने देश में आईटी/आईटीईएस निर्यात को बढ़ावा देने, उद्योगों को सक्षम बनाने तथा तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एसटीपीआई, अपने 70 केंद्रों (जिनमें से 62 केंद्र टियर-II/III शहरों में हैं) के माध्यम से आईटी/आईटीईएस एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने हेतु कार्य कर रहा है। पूर्वांचल में नवाचार और रोजगार का नया केंद्र यह केंद्र खासतौर पर पूर्वांचल क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा करेगा। एसटीपीआई के माध्यम से न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए भी तैयार किया जाएगा। यह पहल क्षेत्रीय असंतुलन को कम करते हुए छोटे शहरों को टेक्नोलॉजी हब में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश में पहले से नोएडा, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ और आगरा जैसे शहरों में एसटीपीआई केंद्र सक्रिय हैं, जिससे राज्य का आईटी/आईटीईएस निर्यात लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा करीब 48,231 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। गोरखपुर केंद्र के शुरू होने से यह नेटवर्क और मजबूत होगा तथा प्रदेश को देश के प्रमुख आईटी हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।  प्रदेश के आईटी सेक्टर को मिल रहा विस्तार सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया ने उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और वित्तीय प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित कर नवाचार को नई गति प्रदान की है। लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में स्थापित मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह केंद्र चिकित्सकीय उपकरणों, डिजिटल स्वास्थ्य समाधान और स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार को बढ़ावा देता है तथा नवउद्यमों को चिकित्सा क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करने हेतु एक सशक्त मंच प्रदान करता है।

जब सेवा व संवेदना शासन का हिस्सा बनती हैं, तब बनता है गरीब का मकान: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

बहराइच में पुनर्वास धनराशि एवं भूमि पट्टों का वितरण किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  जब सेवा व संवेदना शासन का हिस्सा बनती हैं, तब बनता है गरीब का मकान: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम ने कहा, पीडीए की बात करने वालों को क्यों याद नहीं आए भरथापुर के यादव, मौर्य, कुशवाहा  सीएम योगी ने 136 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास, शौचालय और आवास के लिए भूमि पट्टों का किया वितरण  पुनर्वास करने वाले परिवारों के लिए बनेगी बेहतरीन कॉलोनी, नाम होगा भरतपुरः सीएम योगी  बहराइच/लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जातियों में बांटकर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने वाली पिछली सरकारों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि आज जिन परिवारों का पुनर्वास किया जा रहा है, उनमें दलित, पिछड़े, यादव, मौर्य, कुशवाहा व थारू जनजाति आदि से जुड़े लोग भी हैं। हमने उन्हें जातीय चश्मे से नहीं देखा, क्योंकि वे हमारे लिए परिवार का हिस्सा हैं। उन्हें सुरक्षा के साथ ही शासन की सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए, ताकि वे भी उज्ज्वल भविष्य के सपने बुन सकें और विकास की उड़ान का हिस्सा बन सकें। लेकिन जो लोग सत्ता में आने पर केवल परिवार तक सीमित रह जाते हैं, उन्हें भरथापुर के मौर्य, यादव, दलित व पिछड़ी जातियों के लोग याद नहीं आ रहे थे। मुख्यमंत्री ने बुधवार को बहराइच जनपद की ग्राम पंचायत सेमरहना में आयोजित कार्यक्रम में भरथापुर गांव के 118 लाभार्थियों को 15 लाख रुपये प्रति हितग्राही की दर से पुनर्वास धनराशि एवं कृषि भूमि आदि परिसंपत्तियों के समतुल्य 21.55 करोड़ से अधिक की राशि का अंतरण किया। इसके साथ ही उन्होंने 136 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास, शौचालय और आवास के लिए भूमि के पट्टों का वितरण भी किया। सीएम ने इस मौके पर महर्षि बालार्क व महाराजा सुहेलदेव को भी याद किया। पिछली सरकारों पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को सालों तक उपेक्षित रखा गया, हम भरथापुर के उन 500 लोगों के पुनर्वास कार्यक्रम से जुड़ रहे हैं। जो लोग पीडीए की बात करते हैं, उनसे पूछिए कि भरथापुर के लोगों को उनका अधिकार पहले क्यों नहीं मिला। इनके बच्चों को भी सुरक्षित रहने का अधिकार था, लेकिन जाति के नाम पर बांटने वाले लोगों ने आजादी के बाद से देश की जितनी क्षति की है, उसका खामियाजा देश ने लगातार भुगता है। इन लोगों ने जातीय आधार पर न बांटकर देश को एकता के सूत्र में बांधा होता तो प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जैसे आज ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के लिए कार्य हो रहा है और गरीबों-वंचितों के बीच सुविधाएं पहुंच रही हैं, वैसे ही इनका पुनर्वास बहुत पहले हो गया होता। जातीय चश्मे से बांटने वालों ने गरीबों के प्रति अपनी संवेदना नहीं दिखाई। डबल इंजन सरकार लोगों को जातीय चश्मे से नहीं, बल्कि सेवा व संवेदना के चश्मे से देखती है।  सेवा व संवेदना शासन की व्यवस्था का हिस्सा सीएम योगी ने कहा कि जब सेवा व संवेदना व्यवस्था का हिस्सा बनती हैं तो गरीब को आवास, शौचालय, आयुष्मान कार्ड व शासन की अन्य सुविधाएं आसानी से मिलती हैं। हम बहराइच में सेवा व संवेदना के सेतु को जोड़ने आए हैं। उन्होंने प्रदेश में दंगा-उपद्रव कराया, हर जनपद में माफिया पैदा किए, परिवार के लिए खजाने को लूटा और हमने प्रदेश के खजाने को 25 करोड़ जनता के हित, गरीबों के उत्थान, बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार सृजन, बाढ़ जैसी आपदा रोकने और बिजली पर खर्च किया। 2017 के पहले वे बिजली नहीं देते थे, क्योंकि उनके सारे काम-कारनामे अंधेरे में होते थे। गरीबों के हक पर डकैती पड़ती थी। यूपी में भाजपा सरकार आई तो गरीब को उसका हक दिला रही है। आपदा में सेवा, सेवा में संवेदना और संवेदना में समाधान का रास्ता निकाल रही सरकार सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकार समस्या को समस्या बनाए रखने में अपना हित रखती थी। वे समस्या से ही समाज को विभाजित करते थे, फिर उपद्रवियों-दंगाइयों से लोगों को प्रताड़ित कराते थे, संपत्तियों में आगजनी कराते थे। आज सरकार आपदा में सेवा, सेवा में संवेदना और संवेदना में समाधान का रास्ता निकाल रही है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उत्थान ही डबल इंजन सरकार का संकल्प है। पुनर्वास के साथ-साथ आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में सरकार ने इस गांव को अपने हाथों में लिया है। माताएं, बहनें आत्मनिर्भर बन सकें, पुरुषों को काम मिल सके, हमने इसके लिए भी कार्य किया है।  हां, यह है जनता की सरकार  सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी की प्रेरणा से आज जो कार्य हो रहा है, वह बताता है कि हम जाति, पंथ और संप्रदाय से मुक्त होकर 25 करोड़ लोगों के लिए सामूहिक रूप से सेवा व संवेदना की भावना रखते हैं। आज इस कार्यक्रम में कुछ मांएं मंच पर आकर राहत सामग्री ले रही थीं और कुछ को चेक प्रदान किए जा रहे थे तो वास्तव में लग रहा था कि यह है जनता की सरकार।  सीएम ने बयां की भरथापुर की दुर्दशा सीएम योगी ने कहा कि 2025 में भरथापुर गांव के लोगों की एक नाव सरयू जी की धारा में विलीन हो गई। इस दुर्घटना में 9 लोगों की मौत हुई। जब प्रशासन से बातचीत की तो पता चला कि जहां दुर्घटना हुई है, वहां गांव से सटे क्षेत्र में मगरमच्छ रहते हैं। यह सुनकर मैं भी कांप गया कि आखिर ये लोग कैसे जंगल के बीच में रहते हैं। मैंने उनकी पीड़ा को महसूस किया। प्रभारी मंत्री, जन प्रतिनिधि व प्रशासनिक टीम के साथ पहुंचा। राहत कार्य तेजी से चला, दर्जन भर लोगों को बचाया गया, लेकिन 9 लोग नहीं बच पाए। मैं स्वयं आकर गांव की स्थिति देखी। सोचा इन लोगों की क्या गलती थी कि इन्हें आज तक सड़क, बिजली, आवास, पक्का मकान, शौचालय की सुविधा नहीं मिली। उन बच्चों की गलती क्या थी, जिन्होंने बचपन में ये सुविधाएं नहीं देखीं। पानी के लिए भी नदी ही सहारा थी। जंगल में हाथी, बाघ, तेंदुआ, सांप और नदी की तरफ से मगरमच्छ का खतरा, उसके बीच में ये 500 लोग रह रहे थे। 2017 के पहले उपद्रव था, 2017 के बाद त्योहारों से पहले उत्सव सीएम ने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश को हमने नवनिर्माण की दिशा में … Read more