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हरजीगढ़ी में 50 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया आधुनिक डेयरी प्रोजेक्ट

हौसले और मेहनत से पूजा ने रचा सफलता का नया अध्याय, 80 लाख का वार्षिक कारोबार हरजीगढ़ी में 50 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया आधुनिक डेयरी प्रोजेक्ट ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ के जरिए पनीर, घी, फुलक्रीम दूध व छाछ का बड़े पैमाने पर उत्पादन लखनऊ अलीगढ़ जनपद के इगलास क्षेत्र स्थित कलवारी गांव की पूजा चौधरी ने अपने दृढ़ निश्चय और लगातार मेहनत के दम पर यह कर दिखाया है कि कम संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। विवाह के बाद जब उन्होंने ससुराल में कदम रखा, तब परिवार दूध के छोटे व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। पूजा ने इस कार्य को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने और बड़े स्तर पर विकसित करने का निर्णय लिया। इसके चलते पूजा ने साल 2023 में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग से 50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर 'शिव मिल्क प्रोडक्ट' नाम से एक डेयरी प्लांट की स्थापना की। उनके इस दूरदर्शी कदम से आज उनका वार्षिक कारोबार 80 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।  इस डेयरी प्लांट में पनीर, घी, मावा, पाउच पैक फुलक्रीम दूध, छाछ सहित कई अन्य उत्पादों को तैयार किया जाता है। इन उत्पादों की आपूर्ति न केवल जिले में की जाती है, बल्कि मथुरा-वृंदावन तक नियमित रूप से की जा रही है। हरजीगढ़ी में 50 लाख के निवेश से शुरू की आधुनिक डेयरी टप्पल क्षेत्र के छोटे से गांव हरजीगढ़ी में आधुनिक तकनीक से लैस ऑटोमेटिक डेयरी प्लांट की स्थापना करना पूजा के लिए आसान नहीं था। लेकिन जब इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी करना संभव है। इसमें पूजा के पति रोहिताश और परिवार ने उनका पूरा सहयोग किया और अपने छोटे से दुग्ध व्यवसाय को नए मुकाम तक पहुंचा दिया। दरअसल वर्ष 2008 में उनके परिवार ने कामधेनु डेयरी योजना का लाभ लेकर दूध का बूथ शुरू किया था। विवाह के बाद पूजा ने कारोबार में अकाउंट संबंधी जिम्मेदारी संभाली और विस्तार की दिशा में कदम आगे बढ़ाया। विभाग में आवेदन, जमीन की उपलब्धता और ऋण स्वीकृति के बाद प्लांट शुरू करने में थोड़ा विलम्ब जरूर हुआ पूजा ने हार नहीं मानी। डेयरी शुरू होने के बाद पूजा ने 35 लोगों को रोजगार दिया और 70 किसानों से दूध आपूर्ति का अनुबंध भी किया। पनीर, घी, फुलक्रीम दूध व छाछ का उत्पादन ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ के नाम से संचालित इस डेयरी प्लांट में पनीर, घी, मावा, पाउच पैक फुलक्रीम दूध और छाछ सहित अन्य उत्पाद मशीन के जरिये तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों की आपूर्ति जिले के अलावा मथुरा-वृंदावन, हाथरस और अन्य कस्बों तक की जा रही है। पूजा के ससुर इस व्यवसाय को और भी बढ़ाना चाहते हैं। आज लगभग 20 डीलर विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। पूजा ने सभी उत्पादों की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए उत्पादन और वितरण की एक व्यवस्थित व्यवस्था बनाई है जिससे उनका यह व्यवसाय तेजी से बढ़ा है और अच्छा मुनाफा भी हुआ है।  महिला उद्यमिता की प्रेरक पहचान बनीं पूजा अक्सर यह धारणा रही है कि विवाह के बाद बहुओं की भूमिका घर की चारदीवारी तक सीमित हो जाती है। आज भी कई स्थानों पर यह सोच कायम है। लेकिन पूजा के साथ ऐसा नहीं हुआ। शादी के बाद उन्हें परिवार का पूरा सहयोग और प्रोत्साहन मिला, जिसने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया और आगे बढ़ने का हौसला दिया।  पूजा ने राजकीय कन्या महाविद्यालय से स्नातक किया। शुरू से उनकी इच्छा व्यवसाय करने की थी। ससुर और पति के प्रोत्साहन से उन्होंने डेयरी प्लांट में निवेश का निर्णय लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को उन्नत पशुपालन के लिए प्रेरित भी किया और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। आज 35 से अधिक लोग दूध संग्रह कर डेयरी तक पहुंचा रहे हैं। पूजा चौधरी की यह यात्रा ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली हर महिला के लिए प्रेरणास्रोत है, जिन्होंने आत्मनिर्भर बनकर उद्यमिता के क्षेत्र में सशक्त पहचान स्थापित की है।

उन्नाव एक्सप्रेसवे पर भीषण टक्कर: रोडवेज बस ने ट्रक को मारी टक्कर, तीन यात्रियों की मौत

उन्नाव लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर सिरधरपुर और देवखरी गांव के पास मथुरा और आगर डिपो की दो रोडवेज बसें एक ही ट्रक में भीड़ गईं। हादसे में तीन यात्रियों की मौत हो गई जबकि दोनों बसों के 31 यात्री घायल हो गए। पुलिस ने घायलों को बांगरमऊ सीएचसी भेजा। वहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है। दोनों घटनाएं चालक को झपकी आने से बताई जा रही हैं। एक्सप्रेसवे पर रविवार रात 12 बजे एक ट्रक किलोमीटर संख्या 226 सिरधरपुर गांव के सामने सड़क घेरकर खड़ा था। रात करीब 12 आगरा फोर्ट की बस खड़े ट्रक में पीछे से भिड़ गई। हादसे में 14 सवारी घायल हो गईं। हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने पांच एंबुलेंस से सभी घायलों को बांगरमऊ स्वास्थ्य केंद्र भिजवाया साथ ही हाइड्रा मंगाकर क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने का प्रयास शुरू किया। पुलिस रोडवेज बस हटवाने के बाद रात्रि 2:30 बजे क्षतिग्रस्त ट्रक को प्रीतमपुरा चौकी ले जाया जा रहा था, तभी आगरा फोर्ट की ही दूसरी रोडवेज बस इस ट्रक में पीछे से टकरा गई। हादसे में तीन सवारियों की मौत हो गई उसमें बैठी 17 सवारियां घायल हो गईं। फिर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और घायलों को स्वास्थ्य केंद्र लाई। डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों बसों के घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। मृतकों की पहचान न होने पर शव पोस्टमार्टम हाउस में रखवाए गए हैं। कोतवाल अखिलेशचंद्र पांडेय ने बताया कि ट्रक सड़क के किनारे खड़ा था। दोनों बसों में 31 सवारियां घायल हुई हैं। तीन की मौत हुई है। शवों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है।

सुरक्षा और सुशासन से बदली तस्वीर, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था से बढ़ा भरोसा, त्योहारों के दौरान कई गुना तक बढ़ा फुटफॉल

यूपी में ‘फेस्टिवल इकोनॉमी’ बनी आर्थिक इंजन सुरक्षा और सुशासन से बदली तस्वीर, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था से बढ़ा भरोसा, त्योहारों के दौरान कई गुना तक बढ़ा फुटफॉल दीपावली, होली, नवरात्र और गणेश महोत्सव जैसे पर्वों में खुदरा व्यापार में भी हुई उल्लेखनीय वृद्धि कुम्हार, मूर्तिकार और हस्तशिल्प कारीगरों को बड़े ऑर्डर, स्वयं सहायता समूहों का त्योहार आधारित कारोबार तेज भव्य आयोजनों से बढ़ा धार्मिक पर्यटन, अयोध्या-वाराणसी-मथुरा बने आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से आयोजन हुए व्यवस्थित, स्थानीय विकास कार्यों को भी मिली गति लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में पर्व-त्योहारों के आयोजन का स्वरूप बदला है। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक तैयारी और राजनीतिक स्तर पर बढ़ी सक्रियता के चलते प्रमुख पर्वों-त्योंहारों पर सांस्कृतिक आयोजनों का दायरा कहीं ज्यादा व्यापक हो गया है। इसका सीधा असर प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। योगी सरकार के प्रयासों से 9 वर्षों में बदले परिदृश्य ने प्रदेश में इस फेस्टिवल इकॉनमी को जन्म दिया है, जिसके माध्यम से न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी बाजार में कारोबार कई गुना तक बढ़ रहा है। सुरक्षा के भरोसे ने त्योहारों को बनाया आर्थिक इंजन उत्तर प्रदेश में फेस्टिवल इकॉनमी को गति देने में योगी सरकार में सुदृढ़ कानून-व्यवस्था निर्णायक कारक बनी है। प्रमुख पर्व-त्योहारों पर राज्य से लेकर जिला स्तर तक विशेष सुरक्षा प्लान लागू किए जाते हैं। संवेदनशील जिलों और धार्मिक नगरों में अतिरिक्त पुलिस व पीएसी बल की तैनाती, महिला सुरक्षा दल और दंगा नियंत्रण इकाइयों की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित की जाती है। ड्रोन से रियल टाइम निगरानी, प्रमुख बाजारों व आयोजन स्थलों पर व्यापक सीसीटीवी कवरेज और इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के जरिए 24×7 मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। यातायात के लिए पूर्व निर्धारित डायवर्जन प्लान और अतिरिक्त सार्वजनिक परिवहन भी लागू होता है। प्रशासन और व्यापारी संगठनों के अनुसार बेहतर सुरक्षा माहौल का सीधा असर बाजार पर दिखा है। होली, दीपावली और नवरात्र जैसे अवसरों पर कई प्रमुख बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में 30 से 50 प्रतिशत तक अधिक फुटफॉल दर्ज किया गया। अधिकारियों का मानना है कि भरोसेमंद कानून-व्यवस्था ने न सिर्फ लोगों को खुलकर पर्व-त्योहारों का उत्सव मनाने का अवसर दिया, बल्कि व्यापार व सेवा क्षेत्र में विश्वास का वातावरण भी तैयार किया है, जिससे त्योहार आर्थिक गतिविधियों का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। बाजार गतिविधियों का बढ़ा दायरा व्यापार मंडल पदाधिकारियों का कहना है कि पिछले नौ वर्षों में त्योहारों के दौरान बाजार गतिविधियों का दायरा स्पष्ट रूप से बढ़ा है। दीपावली, होली और नवरात्र जैसे प्रमुख अवसरों पर खुदरा बाजार में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक कारोबार दर्ज किया जा रहा है। कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सर्राफा, मिठाई, सजावटी सामग्री और पूजा उत्पादों की मांग में लगातार उछाल आया है। व्यापारिक संगठनों का दावा है कि संगठित प्रबंधन और बेहतर कानून-व्यवस्था के कारण ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है, जिससे बिक्री के आंकड़े मजबूत हुए हैं। त्योहारों ने बढ़ाया फुटफॉल, सेवा क्षेत्र को मिला व्यापक लाभ त्योहारों के सांस्कृतिक आयोजनों के विस्तार का प्रभाव पर्यटन और सेवा क्षेत्र में भी दिखाई देता है। अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और मथुरा जैसे शहरों में बड़े आयोजनों के दौरान होटल ऑक्यूपेंसी दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। परिवहन, टूर ऑपरेटर, टैक्सी, ई-रिक्शा और खानपान कारोबार में भी उछाल आया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार संगठित और सुरक्षित आयोजनों के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे अस्थायी और स्थायी दोनों प्रकार के रोजगार के अवसर बढ़े हैं। अधिकारियों का मानना है कि कानून-व्यवस्था की सख्ती, प्रशासनिक समन्वय और त्योहारों के योजनाबद्ध विस्तार ने इन आयोजनों को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों का सशक्त माध्यम बना दिया है। कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा आर्थिक लाभ त्योहारों के विस्तारित स्वरूप का प्रभाव परंपरागत कारीगरों पर स्पष्ट दिखाई देता है। अयोध्या के दीपोत्सव के दौरान लाखों दीयों की मांग ने आसपास के जिलों के कुम्हारों को बड़े स्तर पर ऑर्डर उपलब्ध कराए। कई स्थानों पर प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से स्थानीय कुम्हारों से सीधे खरीद की व्यवस्था की गई, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसी तरह, वाराणसी की देव दीपावली और प्रयागराज के माघ मेले जैसे आयोजनों में हस्तशिल्प, पूजा सामग्री और पारंपरिक सजावटी वस्तुओं की बिक्री में तेज उछाल दर्ज किया गया। मथुरा-वृंदावन की होली के दौरान गुलाल, पारंपरिक परिधान और धार्मिक उपहार सामग्री के कारोबार में बढ़ोतरी देखी गई। नवरात्र और दुर्गा पूजा के समय मूर्तिकारों, पंडाल निर्माताओं, लाइटिंग और साउंड सिस्टम से जुड़े व्यवसायों को बड़े पैमाने पर काम मिला। कई जिलों में स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को प्राथमिकता देने की पहल से क्षेत्रीय रोजगार को बल मिला। महिला स्वयं सहायता समूहों ने भी इस अवसर को आय के स्रोत में बदला। दीपावली पर दीये और मोमबत्ती, नवरात्र में प्रसाद पैकिंग, होली पर हर्बल गुलाल, पापड़-चिप्स जैसे पारंपरिक खाद्य उत्पाद और त्योहार आधारित गिफ्ट पैक्स तैयार कर समूहों ने शहरी बाजारों और सरकारी मेलों में स्टॉल के माध्यम से उल्लेखनीय बिक्री की। ग्रामीण उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच मिलने से कुटीर उद्योगों को स्थायी बाजार आधार मिला है। पारंपरिक आयोजनों का पुनर्जागरण प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान कई ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हुए हैं, जो पहले सीमित दायरे में होते थे, लेकिन अब उनका विस्तार राज्य स्तर तक दिखाई देता है। अयोध्या का दीपोत्सव और वाराणसी की देव दीपावली के अलावा रंगभरी एकादशी का आयोजन अब बड़े पैमाने पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के साथ होता है। इसी प्रकार कृष्ण जन्मोत्सव (मथुरा-वृंदावन) में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यापक प्रबंधन व्यवस्था लागू की गई है। श्रावणी मेले और कांवड़ यात्रा के आयोजन का स्वरूप भी बदला है। गणेश महोत्सव, जो पहले मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर सीमित था, अब कई शहरों में बड़े सांस्कृतिक आयोजनों के रूप में उभरा है। पंडाल निर्माण, मूर्ति निर्माण, लाइटिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दायरा बढ़ा है। इसके अतिरिक्त रामोत्सव, कृष्णोत्सव, बुद्ध महोत्सव, महाशिवरात्रि मेले, चित्रकूट दीप महोत्सव जैसे आयोजनों को भी संगठित रूप से बढ़ावा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन आयोजनों को पर्यटन कैलेंडर से जोड़ने और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के … Read more

नमो भारत का कमाल: मेरठ से दिल्ली की दूरी सिमटी, एम्स और एयरपोर्ट पहुंचना हुआ फास्ट

मेरठ नमो भारत (RRTS) ट्रेन ने मेरठ को दिल्ली से इस कदर जोड़ दिया है कि अब देश की राजधानी के प्रमुख स्थल जैसे कनाट प्लेस, लालकिला, एम्स और आईजीआई एयरपोर्ट मेरठवासियों की सीधी पहुंच में आ गए हैं। नमो भारत और दिल्ली मेट्रो के बीच बढ़ते समन्वय ने न केवल समय की बचत की है, बल्कि यात्रियों को 'एक ही ऐप' से दोनों ट्रेनों की टिकट बुक करने की सुविधा भी दे दी है। अब यात्रियों को दिल्ली मेट्रो के लिए अलग से लाइन में लगने या ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है। एम्स और शिक्षण संस्थानों के लिए वरदान स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दिल्ली जाने वाले मरीजों के लिए नमो भारत एक लाइफलाइन साबित हो रही है। यदि किसी मरीज को स्ट्रेचर के साथ एम्स (AIIMS) ले जाना हो, तो ट्रेन में इसके लिए विशेष प्रबंध हैं। शताब्दीनगर स्टेशन से सराय काले खां और फिर मेट्रो के जरिए मात्र 77 मिनट में एम्स पहुंचा जा सकता है, जिस पर कुल 212 रुपये का खर्च आता है। इसी तरह, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) जाने वाले छात्र अब मात्र 78 मिनट में और 183 रुपये खर्च कर अपने कॉलेज पहुंच सकते हैं। वहीं, जेएनयू (JNU) जाने के लिए न्यू अशोक नगर रूट से 96 मिनट का समय और 214 रुपये का खर्च आता है।   एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों की सीधी कनेक्टिविटी हवाई यात्रा करने वालों के लिए भी यह सफर अब तनावमुक्त हो गया है। शताब्दीनगर से आनंद विहार और वहां से मेट्रो की विभिन्न लाइनों का उपयोग कर यात्री केवल 96 मिनट में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (टर्मिनल-3) पहुंच सकते हैं। इस पूरी यात्रा का कुल खर्च लगभग 247 रुपये बैठता है। वहीं, कश्मीरी गेट आईएसबीटी (ISBT) जाने के लिए गाजियाबाद स्टेशन से मेट्रो बदलना सबसे सस्ता और तेज विकल्प है, जहां यात्री 65 मिनट में महज 153 रुपये में पहुंच सकते हैं। पर्यटन और प्रशासनिक केंद्रों तक आसान पहुंच दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनाट प्लेस और चांदनी चौक जैसे बाजारों तक पहुंचना अब बेहद सरल है। शताब्दीनगर से आनंद विहार होते हुए मात्र 59 मिनट में कनाट प्लेस और 70 मिनट में चांदनी चौक पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा, इंडिया गेट, सुप्रीम कोर्ट और नए संसद भवन (सेवा तीर्थ स्टेशन) जाने के लिए भी नमो भारत और ब्लू लाइन मेट्रो का तालमेल यात्रियों का समय बचा रहा है। प्रगति मैदान स्थित 'भारत मंडपम' जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन सबसे नजदीकी पॉइंट है, जहां मेरठ से आनंद विहार होकर आसानी से पहुंचा जा सकता है। स्मार्ट कनेक्टिविटी और पार्किंग की सुविधा नमो भारत का शताब्दीनगर स्टेशन शहर के कई हिस्सों को जोड़ता है और यहां पार्किंग की बेहतर व्यवस्था होने के कारण यात्री इसे अपना मुख्य आधार बना रहे हैं। नमो भारत का मोबाइल ऐप न केवल टिकट बुकिंग में मदद करता है, बल्कि यात्रियों को यह भी गाइड करता है कि उन्हें किस स्टेशन पर ट्रेन बदलनी है, जिससे पहली बार दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए भी सफर काफी आसान हो गया है।

ग्रामीण कला को बाजार से जोड़कर बढ़ाया मुनाफा

परंपरा से प्रगति तक: मूंज शिल्प ने बदली रजनी बाला की दुनिया ग्रामीण कला को बाजार से जोड़कर बढ़ाया मुनाफा सुल्तानपुर की बेटी ने हस्तशिल्प से गढ़ी अपनी पहचान      कई जिलों तक पहुंची रजनी बाला की मेहनत की पहचान सरकारी योजनाओं से मजबूत हो रही आत्मनिर्भरता की नींव लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में सामाजिक परिवर्तन और नई संभावनाओं का दौर जारी है। महिलाएं अपने संकल्प और परिश्रम से आत्मनिर्भर विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। सुल्तानपुर के कुड़वार ब्लाक के गांव हरखपुर की रहने वाली रजनी बाला इसका सशक्त उदाहरण हैं, जिन्होंने मूंज उत्पादों में सिकहुला, भउका, दौरी, डोलची और कप जैसी कलाकृतियों को बढ़ावा देकर अपनी अलग पहचान बनाई है। ग्रामीण कला को बाजार से जोड़कर बढ़ाया मुनाफा रजनी बाला ने 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की है। वह बताती हैं कि मूंज शिल्प का हुनर उन्हें अपनी मां से विरासत में मिला। उनकी मां भी मूंज के उत्पाद तैयार करती थीं, जिससे बचपन से ही रजनी को इस कार्य का पारिवारिक वातावरण और व्यावहारिक अनुभव मिलता रहा। उसी सीख और लगन के दम पर आज रजनी विभिन्न प्रकार के मूंज उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बनी हैं। उनके पति दिल्ली में एक निजी कंपनी में कैब चलाते हैं और रजनी के काम में पूरा सहयोग देते हैं। उनके दो बच्चे हैं, बेटा लखनऊ में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी सुल्तानपुर के एक विद्यालय में अध्ययनरत है।  सुल्तानपुर की बेटी ने हस्तशिल्प से गढ़ी अपनी पहचान मूंज के प्रत्येक उत्पाद की कीमत अलग-अलग होती है, लेकिन लाभ की दृष्टि से यह व्यवसाय काफी मजबूत है। रजनी बाला बताती हैं कि औसतन हर उत्पाद पर लगभग 50 प्रतिशत तक शुद्ध लाभ हो जाता है। यदि किसी उत्पाद को तैयार करने में ₹100 की लागत आती है, तो उसका बाजार मूल्य लगभग ₹150 होता है। उनके व्यवसाय को अब अन्य राज्यों से भी पहचान मिल रही है। अब तक का उनका सबसे बड़ा और लाभदायक ऑर्डर राजस्थान से मिला, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने करीब 100 महिलाओं को रोजगार का अवसर दिया। इस तरह रजनी बाला न केवल स्वयं सशक्त बन रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आजीविका से जोड़कर सामूहिक आत्मनिर्भरता की मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।  कई जिलों तक पहुंची रजनी बाला की मेहनत की पहचान रजनी बाला ने बताया कि उनके मूंज उत्पादों के निर्माण और विपणन में जिला उद्योग कार्यालय का महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है। विशेष रूप से जिला उपायुक्त सुश्री नेहा सिंह के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से उन्हें अपने उत्पादों को बड़े मंच तक ले जाने का अवसर मिला। इसी सहयोग के चलते उन्होंने नोएडा, सुल्तानपुर के साथ-साथ लखनऊ और आसपास के अन्य जिलों में भी स्टॉल लगाकर अपने उत्पादों की सफलतापूर्वक बिक्री की है। सरकारी समर्थन और अपने परिश्रम के बल पर रजनी बाला आज स्थानीय शिल्प को व्यापक बाजार से जोड़ते हुए आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल बनी हैं। सरकारी योजनाओं से मजबूत हो रही आत्मनिर्भरता की नींव उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाएं प्रदेशभर में महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रही हैं। राज्य स्तर पर अब तक लाखों महिलाओं एवं युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। इन योजनाओं के प्रभाव से सुल्तानपुर सहित कई जिलों में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जो युवा कभी बेरोजगारी से जूझ रहे थे, वे आज आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार कर रहे हैं। योगी सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक महिलाएं और युवा इन योजनाओं का लाभ उठाकर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में भागीदारी निभाएं। विभिन्न विभाग अपने स्तर पर आवेदकों को मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान कर रहे हैं, ताकि प्रक्रिया सरल और सुलभ बनी रहे। साथ ही, समय-समय पर जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इन सफल युवाओं और महिलाओं की प्रेरक कहानियां न केवल अन्य लोगों के लिए उत्साह का स्रोत बन रही हैं, बल्कि सुल्तानपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में विकास और आत्मनिर्भरता की नई रोशनी भी फैला रही हैं।

शिकार नहीं मिला तो थम गई सांसें, दो कुंतल के बाघ का खाली पेट मिला

पीलीभीत दो कुंतल के वजन वाले भारी-भरकम बाघ की भूख से मौत हो गई। शनिवार रात को पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की माला रेंज में उसका शव मिला। रविवार को बरेली के भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) में उसके पोस्टमार्टम में यह स्पष्ट हो गया कि उस पर हमला या किसी से संघर्ष नहीं हुआ था। वह बीमारी अथवा किसी अन्य कारण से जूझते हुए झाड़ियों में लेटा था, वहीं उसकी मौत हो गई। उसका पेट खाली पाया गया, जोकि संकेत कर रहा कि आठ दिन से उसे शिकार नहीं मिला था। शनिवार देर रात गश्त पर निकले वनकर्मियों ने धमेला वाच टावर के पास उसका शव देखा था। इसकी सूचना पर फील्ड डायरेक्टर पीटीआर पीपी सिंह, डीएफओ भरत कुमार डीके व अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बाघ के शव का निरीक्षण किया गया ताकि हमले या संघर्ष की स्थिति का आकलन किया जा सके। डीएफओ ने बताया कि बाघ के शरीर पर किसी प्रकार की चोट नहीं थी। उसका शव पोस्टमार्टम के लिए बरेली भेजा गया। रविवार को पोस्टमार्टम करने वाली टीम के विज्ञानी ने फोन पर बताया कि बाघ की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका, इसलिए विसरा सुरक्षित रखा है। विसरा की जांच में कुछ तथ्य सामने आ सकते हैं। पोस्टमार्टम के समय देखा गया कि बाघ का पेट खाली था, यानी उसे एक सप्ताह से शिकार नहीं मिला। उसके अंदरुनी हिस्से प्रभावित थे, जो संक्रमण का संकेत कर रहे थे। संक्रमण का कारण क्या रहा होगा, इस पर विज्ञानी ने कहा कि संभव है कि वह किसी बीमारी से पीड़ित हो। दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि उसने किसी ऐसे पशु का शिकार कर लिया, जिसका मांस जहरयुक्त हो। इसके पीछे आशंका जताई जा सकती है कि जहरीला पदार्थ खाने वाला वन्यजीव जंगल में बाघ के सामने आ गया हो। बाघ ने उसका शिकार कर लिया। ऐसे में उस वन्यजीव का जहरीला मांस बाघ के पेट में पहुंचने पर भी संक्रमण हो सकता है। यह सिर्फ अनुमान या आशंका ही है। वास्तविक कारण विसरा की जांच में सामने आ सकेगा। यह तय है कि संक्रमण के बाद बाघ शिकार नहीं कर सका, इसी कारण उसका पेट पूरी तरह खाली था। उसका उम्र सात वर्ष थी। टाइगर रिजर्व में हैं 80 से अधिक बाघ पीलीभीत टाइगर रिजर्व की पांचों रेंज में 80 से अधिक बाघ हैं। माला और बराही रेंज में बाघों की गतिविधियां अधिक दिखती हैं। टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटकों को भी बराही रेंज में ही मुख्य रूप से घुमाया जाता है।  

एक घंटे में रोपे 2,51,446 पौधे, चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को किया ध्वस्त

वाराणसी/लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में काशी ने विश्व के पर्यावरण मानचित्र पर रविवार को एक नया इतिहास दर्ज कर दिया। वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित 'वृहद पौधरोपण कार्यक्रम' में मात्र एक घंटे की समयावधि में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधों का रोपण कर चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। मौके पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के जज ऋषिनाथ ने महापौर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाणपत्र सौंपा। महापौर ने कहा कि यह महान उपलब्धि पीएम मोदी से प्रेरणा लेकर सीएम योगी के कुशल मार्गदर्शन से संभव हो सकी। इस ऐतिहासिक पल को दर्ज करने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम सुबह से ही डोमरी में मौजूद रही। नगर निगम और विभिन्न सामाजिक व सरकारी संस्थाओं के समन्वय से सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में विकसित किए गए इस आधुनिक ‘शहरी वन’ ने आज विश्व पटल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है । चीन का रिकॉर्ड ध्वस्त, भारत ने अपने नाम किया रिकॉर्ड  10 मार्च 2018 को 1,53,981 पौधों का रोपण कर चीन की हेनान प्रांतीय समिति और हेनान शिफांगे ग्रीनिंग इंजीनियरिंग कंपनी ने विश्व रिकॉर्ड बनाया था। रविवार को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निर्णायक ऋषि नाथ और विश्व रिकॉर्ड रणनीतिकार निश्चल बारोट ने मौके पर मौजूद रहकर प्रत्येक गतिविधि की निगरानी की। ड्रोन कैमरों और आधुनिक डिजिटल गणना तंत्र के जरिए हुई सटीक पुष्टि के बाद ऋषि नाथ ने आधिकारिक रूप से इस नए रिकॉर्ड की घोषणा की। 60 गंगा घाटों की प्रतिकृति बना 'शहरी वन' इस 'शहरी वन' की सबसे अनूठी विशेषता इसकी बनावट और वैचारिक पृष्ठभूमि है। पूरे वन क्षेत्र को 60 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों जैसे -दशाश्वमेध, ललिता घाट, नया घाट, मणिकर्णिका घाट, केदार घाट, चौसट्टी घाट, मान मंदिर घाट और शीतला घाट के नाम पर रखा गया है। यह बनावट ऐसी है कि भविष्य में जब ये पौधे वृक्ष बनेंगे, तो गंगा किनारे एक हरा-भरा 'मिनी काशी' का स्वरूप नजर आएगा। प्रत्येक सेक्टर में लगभग 4,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इनमें शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों के साथ-साथ आम, अमरूद और पपीता जैसे फलदार वृक्षों और अश्वगंधा, शतावरी व गिलोय जैसी औषधियों को प्राथमिकता दी गई है। यह परियोजना न केवल पर्यावरण को सुधारेगी, बल्कि आने वाले समय में नगर निगम के लिए आय का एक बड़ा स्रोत भी बनेगी। पौधरोपण के लिए जनभागीदारी का महाकुंभ इस विश्व रिकॉर्ड को बनाने के पीछे महीनों की  तैयारी और हजारों हाथों का सामूहिक श्रम शामिल है। रविवार की सुबह से ही डोमरी में भारी उत्साह का माहौल रहा। इस महाभियान में बड़ी संख्या में स्कूल-कालेजों के अलावा कई संस्थाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। पुलिस एवं सैन्य बल रहा तैनात  भारतीय सेना के 39 जीटीसी, 34 जीटीसी, 39 जीआर, और 137 सीएफटीएफ (टीए) के जवानों ने अनुशासन की मिसाल पेश की। वहीं एनडीआरएफ, सीआरपीएफ, नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) और उत्तर प्रदेश पुलिस की 36वीं व 39वीं वाहिनी पीएसी के जवानों ने पूरी ऊर्जा के साथ पौधरोपण किया। छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा  नमामि गंगे, उत्तर प्रदेश वन विभाग, कृषि विभाग, डूडा और नगर निगम की टीमों ने तकनीकी प्रबंधन और सिंचाई की व्यवस्था संभाली। काशी विद्यापीठ, यूपी कालेज, देहरादून पब्लिक स्कूल, मुकुलारेंडम स्कूल के हजारों छात्र-छात्राओं, एनसीसी कैडेट्स और एनएसएस के स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम को एक जन-आंदोलन में बदल दिया। सिंचाई की स्मार्ट तकनीक  इन पौधों को जीवित रखने के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। वन क्षेत्र में 10,827 मीटर लंबी अत्याधुनिक पाइपलाइन बिछाई गई है। 10 बोरवेल और 360 'रेन गन' सिस्टम के जरिए सिंचाई की ऐसी व्यवस्था की गई है कि पानी की बर्बादी न हो। मियावाकी तकनीक के कारण ये पौधे सामान्य की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ेंगे और मात्र दो से तीन वर्षों में यह क्षेत्र एक सघन 'ऑक्सीजन बैंक' का रूप ले लेगा। जापानी वनस्पति शास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह तकनीक कम जगह में घना जंगल उगाने के लिए विश्व प्रसिद्ध है। आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ यह परियोजना केवल हरियाली तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम के लिए आय का बड़ा स्रोत भी बनेगी। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ हुए समझौते के तहत तीसरे वर्ष से ही निगम को दो करोड़ रुपये की आय होने लगेगी, जो सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये वार्षिक तक पहुँच सकती है। पौधरोपण के दौरान मौजूद गणमान्य कार्यक्रम के दौरान बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी , महापौर अशोक कुमार तिवारी, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र राय, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, अश्वनी त्यागी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल व श्याम भूषण शर्मा उपस्थित रहे। महापौर ने कहा कि यह आध्यात्मिक शांति और आधुनिक अर्थशास्त्र का एक अनूठा उदाहरण है। प्रशासन की टीमें स्थल पर डटी रहीं और अंततः काशी ने विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि काशी न केवल अपनी प्राचीन परंपराओं को संजोए हुए है, बल्कि पर्यावरण जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। ढाई लाख पौधों की यह नई सौगात काशी के माथे पर एक और गौरवपूर्ण तिलक है।

तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास से सतत समन्वय, 24×7 हेल्पलाइन नंबर जारी, श्रमिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के निर्देश

लखनऊ मध्य एशिया में मौजूदा तनावपूर्ण हालात के बीच इजराइल में कार्यरत उत्तर प्रदेश के 6,004 निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार पूरी तरह सतर्क है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी श्रमिक सुरक्षित हैं और उनके कुशलक्षेम पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ये सभी श्रमिक वर्ष 2024 में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) और इजराइल की सरकारी संस्था पॉपुलेशन, इमिग्रेशन एंड बॉर्डर अथॉरिटी (पीआईबीए) के माध्यम से चयनित होकर इजराइल की विभिन्न निर्माण परियोजनाओं में कार्यरत हैं। दूतावास से सीधा संपर्क, स्थिति नियंत्रण में तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास द्वारा जारी सुरक्षा परामर्श के अनुसार सभी भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है। प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन डॉ. एम.के. शन्मुगा सुन्दरम् ने इजराइल में भारत के राजदूत जे.पी. सिंह से फोन पर वार्ता की। राजदूत ने अवगत कराया कि स्थिति नियंत्रण में है और दूतावास सभी भारतीय श्रमिकों के संपर्क में है। प्रथम सचिव डॉ. गारिका तेजेश्वर ने भी आश्वस्त किया कि अधिकांश भवनों में सुरक्षा शेल्टर उपलब्ध हैं और श्रमिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता श्रम, सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने श्रमिकों और उनके परिजनों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सभी श्रमिकों की सुरक्षा हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है। विभाग राष्ट्रीय कौशल विकास निगम और भारतीय दूतावास के साथ निरंतर संपर्क में है, ताकि किसी भी परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। निदेशक, सेवायोजन नेहा प्रकाश और अपर निदेशक पी.के. पुंडीर ने भी एनएसडीसी अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था की निरंतर समीक्षा के निर्देश दिए हैं। 24×7 हेल्पलाइन नंबर जारी भारतीय दूतावास, तेल अवीव द्वारा 24 घंटे संचालित हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं: +972-54-7520711, +972-54-2428378। इसके साथ ही पीआईबीए ने भी हेल्पलाइन नंबर 1-700-707-889 जारी किया है, जिसका संचालन सेंटर फॉर इंटरनेशनल माइग्रेशन एंड इंटीग्रेशन द्वारा किया जा रहा है। हर श्रमिक की सुरक्षा योगी सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर श्रम एवं सेवायोजन विभाग लगातार हालात की समीक्षा कर रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि विदेश में कार्यरत प्रत्येक श्रमिक प्रदेश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इजराइल में वर्तमान में लगभग 42,000 भारतीय नागरिक निवास कर रहे हैं, जिनमें 6,004 उत्तर प्रदेश के निर्माण श्रमिक शामिल हैं। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जाएगी और श्रमिकों तथा उनके परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।

सीएम योगी ने दिया होली पर्व पर विशेष सफाई अभियान चलाने का निर्देश

लखनऊ प्रदेश में होली पर्व को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता और मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के पुख्ता इंतजाम के निर्देश दिए हैं। इसके अंतर्गत 2 से 4 मार्च तक पूरे प्रदेश की ग्राम पंचायतों में व्यापक स्वच्छता और सैनिटाइजेशन अभियान चलेगा। सीएम योगी ने अफसरों को त्योहार को लेकर सफाई व्यवस्था पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए हैं। इसके अंतर्गत सभी डीएम और सीडीओ मॉनिटरिंग करेंगे। सफाई के साथ फॉगिंग व एंटी लार्वा छिड़काव भी इस अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों में कार्यक्रम स्थलों, घाटों, तालाबों, अमृत सरोवरों और स्नान स्थलों की सफाई, फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और अपशिष्ट निस्तारण जैसे कार्य किए जाएंगे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि होलिकोत्सव से पहले और बाद दोनों अवधि में कार्यक्रम स्थलों पर विशेष सफाई सुनिश्चित की जाए। जल निकासी की बेहतर व्यवस्था की जाएगी सुनिश्चित पंचायतीराज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने कहा है कि कार्यक्रम सम्पन्न होने के उपरांत सभी अपशिष्ट पदार्थों का समुचित निपटान किया जाए। ग्राम पंचायतों में निर्मित रूरल रिसोर्स सेंटर पर समस्त कचरा एकत्र किया जाए।  जलभराव वाले स्थलों की पहचान कर स्थायी उपायों के माध्यम से जल निकासी की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों से बचाव हो सके।  स्थानीय ग्राम पंचायतों को सौंपी गई जिम्मेदारी सभी जिला पंचायतीराज अधिकारियों को विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा नदी-तालाबों या सरोवरों के घाटों की मरम्मत, रंगाई-पुताई और सुरक्षा इंतजाम की जिम्मेदारी भी स्थानीय ग्राम पंचायतों को सौंपी गई है। इस पूरे अभियान की सतत मॉनिटरिंग की जाएगी।

बाराबंकी में स्पीड बनी काल, एक्सप्रेसवे पर बोलेरो के उड़ते ही मचा कोहराम

बाराबंकी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर रविवार को दिन में बड़ा हादसा हो गया। यहां पर तेज रफ्तार बेलोरो टायर फटने के कारण पलट गई। दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ घायलों में पांच की हालत गंभीर है। बाराबंकी के त्रिवेदीगंज पर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर तेज रफ्तार बोलेरो वाहन का पिछला टायर अचानक फट गया। जिससे वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। बोलेरो में सभी अयोध्या के एक ही गांव के निवासी लखनऊ के मोहनलाल गंज में आयोजित सत्संग से लौट रहे थे। लखनऊ की सीएचसी गोसाईगंज पहुंचाये गए घायलों में तीन को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि आठ लोगों का उपचार चल रहा है। अयोध्या के इनायत नगर सुक्खा पुरवा निवासी अजीत कुमार, इनायत नगर के ही देवीपुर निवासी वंश बहादुर यादव, इनकी पत्नी निर्मला, राज कुमार, श्याम कली पत्नी करमचंद, बाबू राम, रेखा पत्नी रंग बहादुर, शांति पत्नी बलिराम, इंद्र पति, पांडेय पुरवा निवासी सियालाल, पराना पत्नी सियालाल सवार थे। लोनी कटरा पुलिस ने बताया कि यह सभी लखनऊ के मोहन लालगंज में आयोजित सत्संग में गए थे। सभी रविवार दोपहर बोलेरो वाहन से वापस अयोध्या लौट रहे थे। बोलेरो अजीत कुमार चला रहे थे। लोनीकटरा के नेरा कबूलपुर के पास पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर करीब करीब दो बजे बोलेरो का पिछला बांया टायर अचानक फट गया, जिससे अजीत का वाहन से संतुलन खो गया और वाहन कई पलथे खाते हुए दुर्घटनाग्रस्त हो गई। पुलिस ने आनन-फानन सभी घायलों को लखनऊ के सीएचसी गोसाईगंज भेजा। लोनीकटरा थाना प्रभारी अभय मौर्य ने बताया कि लोनीकटरा में तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है, जबकि अन्य का इलाज रहा है, जिनकी हालत ठीक बताई जा रही है।