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सपा सरकार में ठहरे निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार को मुख्यमंत्री योगी ने दी रफ्तार

लखनऊ कभी निवेशकों की प्राथमिकता सूची में पीछे रहने वाला उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था में शामिल हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले 9 वर्षों में प्रदेश ने औद्योगिक विकास, निवेश, बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन के क्षेत्र में बड़े स्तर पर उपलब्धियां हासिल की हैं। केंद्र व राज्य सरकार के अभूतपूर्व तालमेल ने विकास की कई अहम पहलों के जरिए यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर किया है। सपा सरकार में उपेक्षित, योगी सरकार में रिकॉर्ड निवेश 2017 से पहले सपा सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश की गति लगभग ठहर सी गई थी। कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और निवेश-अनुकूल माहौल की कमी को निवेशकों की बड़ी चिंता माना जाता था, लेकिन 2017 के बाद स्थिति तेजी से बदली। पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों से लगभग 1.10 करोड़ रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के चार चरणों में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रोजेक्ट धरातल पर उतारे जा चुके हैं, जिनसे लगभग 60 लाख रोजगार अवसर पैदा हुए हैं। वहीं 7.5 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट के साथ 5वीं जीबीसी प्रस्तावित है। पिछली सपा सरकार के मुकाबले यह बदलाव दर्शाता है कि निवेशकों का विश्वास उत्तर प्रदेश में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुआ है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत जटिल प्रक्रियाओं के अनुपालन में कमी लाने के लिए यूपी को भारत में प्रथम स्थान मिला है। 65 विभागों में प्रक्रियागत 4,675 अनुपालन कम किए गए है। व्यापार में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 13 राज्य अधिनियमों में लगभग 99 प्रतिशत छोटे दंडात्मक प्रावधानों को हटाया गया है। एक्सप्रेसवे क्रांति से औद्योगिक विकास में तेजी उत्तर प्रदेश की औद्योगिक सफलता के पीछे सबसे बड़ा आधार मजबूत बुनियादी ढांचा है। 2017 तक प्रदेश में सीमित एक्सप्रेसवे नेटवर्क था, जिनकी संख्या महज दो थी। वहीं आज उत्तर प्रदेश 22 एक्सप्रेसवे वाले राज्य के रूप में विकसित हो रहा है। फिलहाल यूपी में 9 एक्सप्रेसवे संचालित, 3 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित हैं। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा है। एक्सप्रेसवे के किनारे 26 जिलों में 27 स्थानों पर 5,300 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित की गई है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीआईडीए) के माध्यम से 56,662 एकड़ क्षेत्र में नया औद्योगिक शहर विकसित किया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास का बड़ा केंद्र बनेगा। जल-थल-आकाश: हर तरफ खुले रास्ते वर्ष 2017 से पहले यूपी में केवल दो हवाई अड्डे (लखनऊ, वाराणसी) पूरी तरह और गोरखपुर हवाई अड्डा आंशिक रूप से क्रियाशील था। मोदी सरकार के मार्गदर्शन में योगी सरकार ने 9 वर्षों में इस क्षेत्र में तेजी से विकास किया। नतीजा यह कि प्रदेश में 17 हवाई अड्डे वर्तमान में चालू हैं और 7 अन्य हवाई अड्डों का विकास जारी है। नोएडा (जेवर) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन के साथ ही यूपी 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला पहला राज्य बन गया। माल ढुलाई के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के तहत पूर्वी फ्रेट कॉरिडोर का 1,050 किमी से अधिक हिस्सा यूपी से गुजरता है। पूर्वी और पश्चिमी डीएफसी का जंक्शन दादरी में स्थित है। भारत के 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से 11 यूपी में हैं। भारत का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल और फ्रेट विलेज (100 एकड़ से अधिक) वाराणसी में निर्माणाधीन है। एफडीआई, फैक्ट्रियों और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि औद्योगिक विकास का सबसे बड़ा संकेतक विदेशी निवेश, फैक्ट्रियों की संख्या और निर्यात होता है। इन तीनों क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। जून 2000 से मार्च 2017 तक प्रदेश में मात्र 3,303 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया था। जबकि अप्रैल 2017 से जून 2025 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 17,004 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। योगी सरकार के कुशल नेतृत्व में इसमें पांच गुना से अधिक वृद्धि हुई है। इसी तरह फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के तहत पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या सपा सरकार में 2016-17 में 14,169 थी, जो फरवरी 2026 तक बढ़कर 31,459 हो गई। यानी प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की संख्या दोगुने से अधिक हुई। निर्यात के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। 2016-17 में प्रदेश का कुल निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये था, जो फिलहाल दो लाख करोड़ से आगे निकल चुका है। आईटी और आईटीईएस निर्यात में और भी अधिक वृद्धि हुई है। यह 2015 के 15 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 82 हजार करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी 7 वर्षों में लगभग 1,058 प्रतिशत बढ़ा है। यह 3,862 करोड़ (2017-18) से बढ़कर 44,744 करोड़ (2024-25) हो चुका है। एमएसएमई व ओडीओपी बने गेमचेंजर योगी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में एक एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाना है। वर्तमान में प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में 3.11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। योजना के तहत 20,396 उद्यमियों को 903.63 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई, जिससे सवा तीन लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित हुए। कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए 8,435 लाभार्थियों को 80.48 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। इसके साथ ही 24 जिलों में 30 कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से सवा चार लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। प्लेज योजना के तहत 12 औद्योगिक पार्कों (10 से 50 एकड़) के विकास पर भी काम चल रहा है। रक्षा, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर में नई पहचान पहले उत्तर प्रदेश को मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य माना जाता था, लेकिन गुजरे 9 वर्षों में यूपी हाई-टेक उद्योगों का केंद्र बनकर उभरा है। रक्षा औद्योगिक गलियारे के 6 नोड झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और कानपुर विकसित किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में अब तक … Read more

75 जिलों के 1183 परीक्षा केंद्रों पर तीन दिन चली परीक्षा, फर्जी अभ्यर्थियों और भ्रामक वीडियो प्रसारित करने वालों पर कड़ी कार्रवाई

लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा 8, 9 और 10 जून 2026 को प्रदेश के 75 जनपदों के 1183 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में शांतिपूर्ण, पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई। परीक्षा के दौरान अत्याधुनिक तकनीकी निगरानी, ई-केवाईसी सत्यापन, बायोमेट्रिक मिलान और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए भर्ती बोर्ड ने नकल, प्रतिरूपण और अफवाह फैलाने के प्रयासों पर प्रभावी अंकुश लगाया। भर्ती बोर्ड के अनुसार परीक्षा के लिए कुल 28,86,798 अभ्यर्थियों को आहूत किया गया था। इनमें 19,62,561 पुरुष अभ्यर्थी (67.99 प्रतिशत) तथा 9,24,237 महिला अभ्यर्थी (32.01 प्रतिशत) शामिल थीं। तीन दिवसीय परीक्षा में कुल 21,92,236 अभ्यर्थी उपस्थित हुए, जो कुल पंजीकृत अभ्यर्थियों का 75.94 प्रतिशत है। इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा का सफल आयोजन प्रदेश की प्रशासनिक क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। परीक्षा के दौरान जनपद गौतमबुद्ध नगर के मिहिर भोज पीजी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर एक अभ्यर्थी अंकित कुमार पुत्र सत्यदेव निवासी कुटियाना, थाना कोतवाली देहात, जनपद एटा की ई-केवाईसी मिसमैच होने पर जांच की गई। जांच में सामने आया कि वह कूटरचित आधार कार्ड के माध्यम से परीक्षा में शामिल हुआ था। मामले में थाना दादरी, गौतमबुद्ध नगर में 9 जून 2026 को मुकदमा संख्या 255/2026 धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत अभियोग पंजीकृत कर आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू की गई है। इसी प्रकार जनपद अलीगढ़ के डीएवी बालिका इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर अंकित पुत्र रविंद्र सिंह निवासी तालिबपुर, थाना खुर्जा देहात, जनपद बुलंदशहर को दूसरे अभ्यर्थी लोकेश पुत्र नेत्रपाल के नाम से परीक्षा देते हुए पकड़ा गया। बायोमेट्रिक मिसमैच और दस्तावेजों की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद थाना क्वार्सी, अलीगढ़ में 9 जून 2026 को मुकदमा संख्या 474/2026 धारा 318(4), 336(2), 336(3), 337, 338, 340(2) भारतीय न्याय संहिता तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम-2024 की धारा 4 एवं 13(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। भर्ती बोर्ड द्वारा जारी व्हाट्सएप नंबर 9454457951 पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर परीक्षा के संबंध में भ्रामक एवं तथ्यहीन वीडियो प्रसारित करने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई। यूट्यूब पर "Shubham Mittal" नामक चैनल द्वारा परीक्षा को लेकर भ्रामक वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले में थाना हुसैनगंज, लखनऊ कमिश्नरेट में मुकदमा संख्या 83/2026 दर्ज किया गया। आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 221 एवं 292, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम-2024 की धारा 4 एवं 13(2) के तहत कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में इंस्टाग्राम यूजर reshami68yadav द्वारा परीक्षा के संबंध में भ्रामक वीडियो प्रसारित करने पर थाना हुसैनगंज में मुकदमा संख्या 82/2026 धारा 221, 292 भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 66D सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दर्ज किया गया। इंस्टाग्राम यूजर durgeshsaxena94 एवं आईडी mukti.reem_98 द्वारा परीक्षा संबंधी भ्रामक सामग्री प्रसारित किए जाने पर थाना हुसैनगंज में मुकदमा संख्या 84/2026 धारा 221, 292 भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 66D सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2008 के अंतर्गत दर्ज किया गया। वहीं इंस्टाग्राम यूजर Rohit (Oye Hero) एवं आईडी Rohitvlogs_24*7 द्वारा परीक्षा को लेकर भ्रामक एवं तथ्यहीन वीडियो प्रसारित करने पर थाना हुसैनगंज में मुकदमा संख्या 85/2026 धारा 221, 292 भारतीय न्याय संहिता, धारा 66D सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम-2024 की धारा 4/13(2) के तहत अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई की जा रही है। बुधवार को जनपद कानपुर नगर के लालू प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज, माल रोड परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी नागेश कुमा…

नो ट्रिपिंग जोन बनाने की तैयारी, 1500 करोड़ की योजना पर काम तेज

लखनऊ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने लखनऊ नो ट्रिपिंग जोन बनाने की ठान ली है। इसमें केंद्र सरकार की मदद से आधुनिकीकरण का काम होगा। इससे लखनऊ की बिजली व्यवस्था को वर्ष 2032 के हिसाब से आधुनिक किया जाएगा। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड इसकी तैयारी में जुट गया है। राजधानी की बिजली व्यवस्था का इंफ्रास्ट्रक्चर वर्ष 2032 के हिसाब से तैयार करने की तैयारी है। इस पूरे काम को वर्ष 2028 मध्य तक करना होगा। वर्ष 2032 में राजधानी के उपभोक्ताओं को कितनी बिजली चाहिए होगी, कितने उपभोक्ता होंगे और इन्फ्रास्ट्रक्चर कितना मजबूत करना होगा। उसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने का काम तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। पंद्रह सौ करोड़ रुपये खर्च करके वर्ष 2028 मध्य तक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा। टीम देखेगी कि कैसे पांच वर्ष में बिजली की डिमांड लखनऊ में बढ़ी है। उसी आधार पर आगे की रणनीति बनाएगी। वर्ष 2032 में कितने बिजली उपकेंद्र व ट्रांसमिशन उपकेंद्र चाहिए होंगे। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) राजधानी में बिजली का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसमें पावर कारपोरेशन के निदेशक होंगे, मध्यांचल के निदेशक तकनीकी और लेसा के एक मुख्य अभियंता को रखा गया है। यह समिति दीपावली तक पूरी फिजिबिलिटी रिपोर्ट शक्ति भवन को सौंप देगी। इसके बाद मध्यांचल लखनऊ में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने पर काम करेगा। यह काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। हर वर्ष बढ़ रही है डिमांड और उपभोक्ता लखनऊ में हर वर्ष दो से ढाई सौ मेगावाट एम्पियर बिजली की डिमांड बढ़ रही है। हर वर्ष दो सौ मेगावाट की खपत और एक लाख उपभोक्ता बढ़ रहे है। इसको देखते हुए नए ट्रांसमिशन बिजली उपकेंद्र के साथ ही नए बिजली उपकेंद्र भी नए विकसित क्षेत्रों में बनाए जाएंगे। वहीं पुराने लखनऊ व घनी आबादी वाले क्षेत्र में पावर ट्रांसफार्मर रखे जाएंगे। इसके लिए जमीन भी तलाशी जाएगी, जिससे छोटे बिजली उपकेंद्र भी वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बनाए जा सके। बिजली उपकेंद्र को डबल व त्रिपल सोर्स से लैस करने पर फोकस होगा। वीआइपी क्षेत्रों में एलटी केबल भी ओवरहेड न जाए, उन्हें ट्रंच लाइन में ले जाया जाए, इस पर भी विचार होगा।  

3D तकनीक से जीवंत होंगे 16 संस्कार, यूपी का नया सांस्कृतिक म्यूजियम तैयार

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जल्द ही ऐसा सांस्कृतिक संग्रहालय विकसित होने जा रहा है, जहां जन्म से मोक्ष तक आध्यात्म का हाइटेक संगम होगा। इसके साथ ही जनजातीय विरासत, लोक परंपराएं, संस्कार और भारतीय जीवन दर्शन आधुनिक तकनीक के साथ जीवंत रूप में देखने को मिलेंगे। इस हाइटेक म्यूजियम में 3डी तकनीक से जन्म से मृत्यु तक के 16 संस्कार दिखेंगे। बीकेटी के चंद्रिकादेवी मंदिर के पास उत्तर प्रदेश संस्कृति संग्राहलय-म्यूजियम एंड रिचुअल सेंटर परियोजना के निर्माण और क्यूरेशन कार्य के लिए राज्य सरकार ने करीब 23.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये की धनराशि जारी जारी कर दी गई है। इस परियोजना का काम दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सोलह संस्कारों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा इस हाईटेक संग्रहालय का सबसे खास हिस्सा क्यूरेशन फ्रेमवर्क होगा, जिसमें जन्म से मृत्यु तक भारतीय जीवन यात्रा और अर्थ, धर्म, काम तथा मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों को केंद्र में रखा गया है। आधुनिक तकनीकों जैसे थ्री डी प्रोजेक्शन मैपिंग, होलोग्राफिक प्रोजेक्शन, पैनोरमिक वीडियो वॉल, काइनेटिक मूर्तियां और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन के जरिए अमूर्त आध्यात्मिक अवधारणाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। गैलरी वन में भारतीय रीति-रिवाजों की उत्पत्ति, वैदिक परंपराएं और प्रकृति के पांच तत्व-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के साथ उनके संबंध को दर्शाया जाएगा। यहां 270 डिग्री प्रोजेक्शन स्क्रीन पर ओरिएंटेशन फिल्म दिखाई जाएगी। इसी गैलरी में सोलह संस्कारों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जिनमें गर्भाधान, नामकरण, अन्नप्राशन, उपनयन, विवाह, संन्यास और अंत्येष्टि जैसे संस्कार शामिल होंगे। प्रवेश प्लाजा से ओपन थिएटर तक ढेरों सुविधाएं परियोजना के तहत प्रवेश प्लाजा, पार्किंग, स्मारिका केंद्र, कैफेटेरिया, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, आवास ब्लॉक, ओपन थिएटर, तालाब, एडमिन ब्लॉक, निगरानी टावर और सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। संग्रहालय का पूरा ढांचा पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक डिजाइन के समन्वय पर आधारित होगा। यहां आने वाले पर्यटक केवल प्रदर्शनी नहीं देखेंगे, बल्कि भारतीय संस्कारों और जीवनचक्र को अनुभव भी कर सकेंगे। पर्यटकों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनेगा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस परियोजना को इस तरह तैयार किया जाएगा कि यह केवल संग्रहालय न रहकर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत केंद्र बन जाए। यह केंद्र लखनऊ में सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देगा और देश-विदेश के पर्यटकों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनेगा।

जौनपुर में सबसे ज्यादा, गौतमबुद्धनगर में सबसे कम मतदाता—जानें पूरी सूची

लखनऊ यूपी निर्वाचन आयोग ने बुधवार को बहुप्रतिक्षीत त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। इसमें कुल 12.58 करोड़ मतदाता हैं। पुनरीक्षण में 29 लाख के नाम बढ़े हैं और 2.03 करोड़ के नाम सूची से काटे गए हैं। जौनपुर में सबसे ज्यादा 36.97 लाख और गौतमबुद्धनगर में सबसे कम 2.09 लाख मतदाता हैं। पहली बार सभी मतदाताओं के स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) जारी किए गए हैं। चुनाव में फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) की मदद से फर्जी वोटिंग रोकी जाएगी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अब फर्जी मतदान करना संभव नहीं होगा। फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) से मतदाताओं की फोटो खींचकर उसका तुरंत पूरा ब्योरा चेक किया जाएगा। इससे पहले किस मतदान किया है, तो तुरंत पकड़ा जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग तकनीक के प्रयोग से फर्जी मतदान को रोकेगा। नई सूची में 2.32 करोड़ मतदाताओं के नाम जोड़े गए राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी की। वर्ष 2021 की मतदाता सूची में 12.29 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल थे। वर्ष 2025-26 की मतदाता सूची में 12.58 करोड़ मतदाता हैं। नई मतदाता सूची में कुल 2.32 करोड़ मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। मृतक व स्थानांतरित इत्यादि 2.03 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। ऐसे में 29.01 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची में बढ़े हैं। जौनपुर में सबसे ज्यादा, गौतमबुद्धनगर में सबसे कम मतदाता जौनपुर में सबसे अधिक 36.97 लाख, दूसरे नंबर पर आजमगढ़ में 35.76 लाख व तीसरे नंबर पर प्रयागराज में 34.95 लाख मतदाता हैं। सबसे कम गौतमबुद्धनगर में 2.09 लाख मतदाता हैं। सबसे कम मतदाता वाले जिलों में दूसरे नंबर पर महोबा में 5.88 लाख व तीसरे नंबर पर चित्रकूट में 7 लाख मतदाता हैं। ब्लॉक प्रमुखों का 19 जुलाई को खत्म होगा कार्यकाल ग्राम प्रधानों के बाद जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई व ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म होगा। तब तक अगर चुनाव न हुए तो इनका भी कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के बाद इसकी मांग भी तेज हो गई है। ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल थे 12.69 करोड़ वोटर राज्य निर्वाचन आयोग ने 23 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की थी, इसमें कुल 12.69 करोड़ मतदाता शामिल थे। इसके बाद मतदाताओं को दावे व आपत्तियों का समय दिया गया और अंतिम मतदाता सूची जारी की गई। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सभी जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा किया गया है।

चांदी महंगी होने पर बदली योजना, दुल्हन के खाते में बढ़कर भेजे जाएंगे 64 हजार रुपये

लखनऊ मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में राज्य सरकार ने बदलाव करते हुए पायल और बिछिया उपहार की जगह भी दुल्हन के खाते में धनराशि ट्रांसफर की जाएगी। ये बदलाव चांदी की कीमतों में उछाल आने के बाद किया गया है सरकार ने अब विवाह करने वाली कन्याओं को दी जाने वाली चांदी की पायल और बिछिया के बदले भी नकद राशि देने का फैसला किया है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव प्रवीण मिश्र द्वारा शासनादेश जारी कर दिया गया है। क्या है मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रति युगल एक लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। पूर्व में इसमें से 60 हजार रुपये की राशि दुल्हन के खाते में भेजी जाती थी और 25 हजार रुपये से पायल, बिछिया सहित अन्य उपहार दिए जाते थे। जबकि 15 हजार रुपये की राशि आयोजन पर खर्च की जाती है। लेकिन पिछले कुछ समय से चांदी की कीमतों में भारी उछाल आ रहा है। जिसके बाद चांदी की पायल और बिछिया नहीं देने का निर्णय लिया गया है। इसके बजाय चार हजार रुपये की राशि दुल्हन के खाते में भेजी जाएगी। क्यों हुआ बदलाव इस तरह से दुल्हन के खाते में कुल 64 हजार रुपए भेजे जाएंगे। उपहार सामग्री पर 21 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत पहले निर्धारित वजन (30 ग्राम चांदी की पायल और 10 ग्राम चांदी की बिछिया) के लिए 4 हजार रुपए निर्धारित थे, लेकिन चांदी की बढ़ती कीमतों के बाद 4 हजार रुपए में ये सब खरीद पान मुश्किल है। ऐसे में सरकार ने 4 हजार रुपए सीधे दुल्हन के खाते में भेजने का निर्णय लिया है। इस नए फैसले के बाद अब कन्या के बैंक खाते में 60 हजार की जगह कुल 64 हजार भेजे जाएंगे। बाकि योजना में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

एफपीपीसीए वसूली पर विवाद, नियामक आयोग ने कॉर्पोरेशन को फिर भेजा नोटिस

लखनऊ प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं से जून माह में 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क वसूला जा रहा है। इस मामले में नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को दोबारा नोटिस जारी किया है। उन्हें 19 जून तक इस वसूली का आधार बताने वाली रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। विद्युत उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 10 प्रतिशत ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) की वसूली हो रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसके विरोध में नियामक आयोग में याचिका दायर की। आयोग ने 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को नियम विरुद्ध बताया। उसने पॉवर कॉर्पोरेशन को नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे थे। सप्ताह भर बाद भी कॉर्पोरेशन जवाब नहीं दे पाया। प्रबंध निदेशक ने जवाब के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। वर्मा ने इस पर आपत्ति जताई और वसूली रोकने की मांग की। इसके बाद नियामक आयोग ने बुधवार को प्रबंध निदेशक को फिर नोटिस भेजा। आयोग की सख्त टिप्पणी आयोग ने अपने नए आदेश में स्पष्ट किया है कि एफपीपीसीए के आंकड़े यूपीपीसीएल के पास होने चाहिए। यूपीईआरसी विनियमों के तहत यह जानकारी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक होनी चाहिए थी। कॉर्पोरेशन ने आयोग द्वारा मांगी गई मूल सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराईं। वह अन्य राज्यों में लागू व्यवस्था का अध्ययन करने की बात कर रहा है। जबकि आयोग ने केवल उत्तर प्रदेश में 10 प्रतिशत एफपीपीसीए के आंकड़ों का आधार पूछा था। बिना आंकड़े वसूली अवैध अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि कॉर्पोरेशन के पास एफपीपीसीए निर्धारण के आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं से की जा रही वसूली अवैध है। यह स्वयं संदेह के घेरे में आ जाती है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर है क्योंकि लाखों उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने आयोग से तत्काल 10 प्रतिशत की वसूली पर रोक लगाने की मांग की। पारदर्शिता और जवाबदेही परिषद अध्यक्ष ने बताया कि आयोग ने यूपीपीसीएल को 19 जून तक सभी मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा है। आयोग का यह आदेश इस बात का संकेत है कि नियामक संस्था मामले को गंभीरता से ले रही है।  उपभोक्ताओं से अतिरिक्त धनराशि वसूलने से पहले सभी गणनाएं और नियामकीय प्रक्रियाएं स्पष्ट होनी अनिवार्य हैं।  यदि नियमानुसार अभिलेख वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं किए गए, तो यह नियामकीय प्रावधानों का उल्लंघन है। आयोग ने 1 जून को ही इस आदेश को गैर कानूनी बताया था।  

उत्तर प्रदेश में पंचायत मतदाताओं की संख्या 12.58 करोड़ पहुंची, बलिया में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

लखनऊ  राज्य निर्वाचन आयोग ने बुधवार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया। प्रदेश में कुल 29.01 लाख मतदाता बढ़ गए हैं। इसके साथ ही अब कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 12.58 करोड़ हो गई है। मतदाता सूची का अनंतिम प्रकाशन 23 दिसंबर को हुआ था। दावे-आपत्तियों के निस्तारण के लिए आयोग ने पांच बार तारीख भी बढ़ाई थी। कुल 169 दिन बाद आयोग ने मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया है। आयोग ने पहली बार सभी मतदाताओं को स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) जारी किया गया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में 12.29 करोड़ मतदाता थे। इसके बाद 23 दिसंबर को जारी अनंतिम मतदाता सूची में कुल 12.69 करोड़ मतदाता हो गए थे। इसके बाद कुल 2.32 करोड़ नाम जोड़े गए और 2.03 करोड़ नाम काटे गए। ऐसे में कुल मतदाताओं की संख्या 12.58 करोड़ हो गई है। मतदाता वृद्धि के मामले में बलिया प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है, यहां 1,60,376 मतदाताओं की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद लखीमपुर खीरी में कुल 1,38,223, देवरिया में 1,26,771, सिद्धार्थनगर में 1,23,162 और कुशीनगर में 1,20,011 मतदाता बढ़े हैं। शीर्ष दस जिलों में शाहजहांपुर, प्रयागराज, गोंडा और जौनपुर भी शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि पूर्वांचल और तराई क्षेत्र के जिलों में मतदाताओं की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, पुनरीक्षण अभियान के दौरान नए मतदाताओं को जोड़ने, मृत व स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने तथा दावे-आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की गई है, जो आगामी पंचायत चुनाव का आधार बनेगी। गौरतलब है कि पिछले दिनों हाई कोर्ट ने पंचायत चुनाव समय पर न होने पर नाराजगी जताते हुए आयोग से अगली सुनवाई में चुनाव की तारीख मांगी है। ऐसे में अब पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज होने की संभावना है। गाजीपुर में सबसे अधिक घटे मतदाता मतदाताओं की संख्या में कमी वाले जिलों में गाजीपुर सबसे ऊपर रहा है, जहां 94,757 मतदाता कम हुए हैं। मैनपुरी में 93,207 और आजमगढ़ में 60,347 मतदाता कम हुए हैं। आगरा में 23,294, एटा में 23,429, कानपुर देहात में 10,759 और हापुड़ में 366 मतदाता घटे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापक पुनरीक्षण अभियान के दौरान मृत, स्थानांतरित और पात्रता खो चुके मतदाताओं के नाम हटाने के कारण आंकड़ों में यह बड़ा अंतर देखने को मिला है। कई स्थानों पर गांव के परिवार अब शहर में रहने लगे हैं। ऐसे में उनके नाम गांव की मतदाता सूची से काटे गए हैं। सर्वाधिक मतदाता वाले टॉप 10 जिले जिला          जनसंख्या जौनपुर          36,97,376 आजमगढ़       35,76,287 प्रयागराज      34,95,203 सीतापुर          31,18,029 गोरखपुर         29,63,142 लखीमपुर खीरी     28,87,290 हरदोई              28,73,247 गाजीपुर           28,11,268 बलिया           26,97,200 गोंडा               26,74,509 सबसे कम मतदाता वाले 10 जिले जिला                       जनसंख्या गौतमबुद्धनगर              2,09,562 महोबा                          5,88,137 चित्रकूट                        7,00,457 हमीरपुर                      7,28,518 हापुड़                         7,47,201 शामली                        7,48,921 बागपत                         8,11,402 ललितपुर                       8,57,275 श्रावस्ती                        8,58,977 औरैया                          9,57,338

लखनऊ के इकाना स्टेडियम की जांच के आदेश, LDA खंगालेगा निर्माण और रखरखाव से जुड़े सभी पहलू

 लखनऊ लखनऊ का इकाना स्टेडियम… वही मैदान जहां चौके-छक्कों की गूंज सुनाई देती है, जहां हजारों दर्शक मैच का रोमांच देखने पहुंचते हैं. लेकिन इस बार चर्चा क्रिकेट की नहीं, बल्कि जांच की हो रही है. कारण है- लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) का एक फैसला।  एलडीए ने इकाना इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण, संचालन, रखरखाव और अनुबंध की शर्तों की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित कर दी है. यानी अब स्टेडियम में रिकॉर्ड और फाइलें खंगाली जाएंगी. एलडीए यह पता लगाना चाहता है कि स्टेडियम का संचालन उन शर्तों के मुताबिक हो रहा है या नहीं, जिनके आधार पर इसका अनुबंध किया गया था।  सवाल सिर्फ इमारत का नहीं है. जांच का दायरा काफी बड़ा रखा गया है. समिति यह देखेगी कि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार हुआ या नहीं. रखरखाव व्यवस्था कैसी है. अनुबंध की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं. स्टेडियम परिसर में विकसित खेल सुविधाएं और अन्य ढांचागत परियोजनाएं किस स्थिति में हैं. यानि सिर्फ पिच नहीं, पूरे सिस्टम का निरीक्षण  होगा।  एलडीए ने समिति को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपे. इस रिपोर्ट में निर्माण की गुणवत्ता, रखरखाव की स्थिति और अनुबंध से जुड़े सभी पहलुओं का विस्तृत ब्योरा होगा. इसके बाद एलडीए रिपोर्ट की स्टडी करेगा और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई तय करेगा।  फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है और किसी तरह की अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन अगर समिति की रिपोर्ट में किसी प्रकार की लापरवाही, निर्माण संबंधी कमी या अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन की बात सामने आती है, तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।  इकाना स्टेडियम सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों में गिना जाता है. यहां अंतरराष्ट्रीय मैचों से लेकर आईपीएल तक के बड़े मुकाबले आयोजित होते हैं. ऐसे में स्टेडियम की निर्माण गुणवत्ता, सुरक्षा और रखरखाव को लेकर किसी भी तरह की जांच स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 

उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी रफ्तार, योगी ने UPEIDA की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली

लखनऊ  ये बात तो पक्‍की है कि उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक के दौरान अगर किसी सरकारी एजेंसी ने राज्य की तस्वीर बदलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है तो वह है UPEIDA (Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority). आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट इसी ने जमीन पर उतारे हैं. अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने UPEIDA की कमान सीधे अपने हाथ में ले ली है. सीएम ने साफ संकेत दिया है कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं की गति और तेज की जाएगी. राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के फोकस के रूप में देखा जा रहा है।  क्या है UPEIDA? दरअसल, UPEIDA यानी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण की स्थापना राज्य में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब और उनसे जुड़े विकास काममों के लिए की गई थी. इसका मुख्य मकसद केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि सड़क के किनारे उद्योग, निवेश, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और रोजगार के मौके भी विकसित करना भी है. यही वजह है कि यूपी में एक्सप्रेसवे को केवल परिवहन परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में देखा जाता है. ऐसे में यह भी जान लेना जरूरी है कि UPEIDA ने प्रदेश में कौन से सबसे बड़े प्रोजेक्ट डिलीवर किए हैं.. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 302 किमी उद्घाटन: 2016 इससे यात्रा समय में भारी कमी आई. पश्चिमी यूपी और राजधानी लखनऊ के बीच सीधी कनेक्टिविटी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 341 किमी लखनऊ से गाजीपुर तक बनाया गया है. लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये आई. पूर्वी यूपी को राजधानी क्षेत्र से जोड़ा. बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 296 किमी चित्रकूट से इटावा क्षेत्र तक कनेक्टिविटी अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये बुंदेलखंड क्षेत्र को NCR नेटवर्क से जोड़ने वाला अहम मार्ग है. गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 91 किमी गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ता है. इससे पूर्वी यूपी की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया. गंगा एक्सप्रेसवे लंबाई: 594 किमी मेरठ से प्रयागराज तक लागत लगभग 36,000 करोड़ से अधिक. यह राज्य का सबसे महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट है. यूपीडा अभी किन परियोजनाओं पर काम कर रहा है?     गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार और उससे जुड़े लिंक     आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे     अलीगढ़-आगरा एक्सप्रेसवे     अलीगढ़-पलवल एक्सप्रेसवे     अवध एक्सप्रेसवे     चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे     कई औद्योगिक कॉरिडोर और ई-वे हब परियोजनाएं     इसके अलावा पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे ई-वे हब, लॉजिस्टिक्स पार्क और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिन पर सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।      पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में एक्सप्रेसवे के बाद औद्योगिक निवेश और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।  सीएम योगी के कमान संभालने से क्या बदलेगा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की रेगुलर समीक्षा करते रहे हैं. हाल के महीनों में उन्होंने गंगा एक्सप्रेसवे समेत कई परियोजनाओं की वीकली मॉनिटरिंग और तय समयसीमा में काम पूरा करने पर जोर दिया है. वह कई बार मौकों पर निरीक्षण भी करने पहुंचे थे और मकसद साफ था कि ये इन अहम प्रोजेक्‍ट्स में भी किसी भी तरह का डिले नहीं चाहते. सीएम के UPEIDA की सीधी निगरानी में आने से भूमि अधिग्रहण में आने वाली दिक्‍कतें पहली बात तो तेजी से दूर हो सकती हैं. साथ ही विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा. खास बात ये भी है कि इसकी वित्तीय मंजूरियों में भी तेजी आएगी. परियोजनाओं की समयसीमा पर सख्ती बढ़ेगी और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कई बड़े प्रोजेक्ट धरातल पर दिखाई दे सकते हैं।  2027 चुनाव से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर होगा सबसे बड़ा मुद्दा? देखा जाए तो यूपी की राजनीति में एक्सप्रेसवे अब सिर्फ सड़क नहीं बल्कि विकास का भी हैं. भाजपा सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गंगा एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और नए लिंक एक्सप्रेसवे को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहेगी. यही वजह है कि UPEIDA की कमान पर मुख्यमंत्री की सीधी नजर को केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि विकास और राजनीति दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।