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शिक्षा से रोजगार तक बड़ा फोकस: सीएम योगी के मार्गदर्शन में आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए लगातार संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है, जिन्होंने अपने माता-पिता अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है। इसके साथ ही बालश्रम, भिक्षावृत्ति एवं वैश्यावृत्ति जैसी परिस्थितियों से मुक्त कराकर पुनर्वासित बच्चों को भी इस योजना के माध्यम से पारिवारिक वातावरण में बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जा रहा है। आर्थिक सहायता से बच्चों को मिल रहा बेहतर भविष्य मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 2,500 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। वहीं, ऐसे युवक-युवतियां जिन्होंने माता-पिता दोनों अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है, उन्हें 18 से 23 वर्ष की आयु तक स्नातक डिग्री या डिप्लोमा पूरा करने के लिए प्रतिमाह 2,500 रुपए की सहायता दी जा रही है। योगी सरकार की इस पहल से बच्चों की शिक्षा और भविष्य सुरक्षित हो रहा है। वर्तमान समय में प्रदेशभर में कुल 1,03,611 बच्चे इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सहायता किसी संबल से कम नहीं है। योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करना भी है। बाल संरक्षण को मिल रही नई मजबूती, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर योगी सरकार बाल संरक्षण और पुनर्वास को लेकर विशेष रूप से गंभीर नजर आ रही है। बालश्रम और भिक्षावृत्ति जैसी समस्याओं से मुक्त कराए गए बच्चों को परिवार आधारित वातावरण में पुनर्वासित कर मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनका सामाजिक विकास भी सुनिश्चित हो रहा है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है। कई छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की मंशा है कि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है। वहीं बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत आने वाले समस्त पात्र बच्चों की प्राथमिकता के आधार पर पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिया जाए। इसके लिए जिले स्तर पर व्यापक सर्वेक्षण, सत्यापन एवं जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएं। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि पात्रता रखने वाला कोई भी बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे। सी. इंदुमति, निदेशक, महिला कल्याण विभाग

तेज रफ्तार पर लगेगी लगाम! IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों संग यूपी परिवहन विभाग ने बनाई नई स्पीड पॉलिसी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर कई अभियान चला रही है। सड़क हादसों को रोकना योगी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। इसी क्रम में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञ और उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग मिलकर ‘उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी’ पर काम कर रहे हैं। इसके तहत हाईवे और एक्सप्रेसवे की तरह ही शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर भी वैज्ञानिक आधार पर गति सीमा निर्धारित करना है। इस पहल का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की रोकथाम कर लोगों को सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है। पॉलिसी का फाइनल ड्राफ्ट जल्द ही प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। हाल में उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की अध्यक्षता में स्टेट रोड सेफ्टी टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों द्वारा तैयार उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी के ड्राफ्ट पर विस्तृत चर्चा हुई। नीति का उद्देश्य वैज्ञानिक और एविडेंस-बेस्ड अप्रोच के माध्यम से सड़कों पर सुरक्षित गति सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं एवं मृत्यु दर को कम करना है। इसके तहत केवल राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों की व्यस्त सड़कों, बाजारों, स्कूल-कॉलेजों के आसपास के मार्गों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों के लिए भी उपयुक्त गति सीमा तय की जाएगी। इससे अनियंत्रित गति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी। प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा ड्राफ्ट आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों और परिवहन विभाग ने इस पॉलिसी के लिए प्रदेशभर में विस्तृत अध्ययन किया है। तैयार किए गए पॉलिसी ड्राफ्ट पर चर्चा के दौरान परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन्हें शामिल करते हुए संशोधन किया जाएगा। इसके बाद परिवहन विभाग उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी को प्रदेश सरकार के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजेगा। मंजूरी मिलने के बाद यह पॉलिसी प्रदेश के विभिन्न विभागों के सहयोग से लागू की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों की प्रकृति और यातायात घनत्व के अनुरूप गति सीमा तय होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी। वहीं विभाग सेफ सिस्टम अप्रोच के तहत सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित गति, सुरक्षित सड़क यात्री, सुरक्षित वाहन और पोस्ट-क्रैश केयर पर भी ध्यान दे रहा है। साथ ही सुरक्षित गति ऑडिट, प्रवर्तन व्यवस्था, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, वाहन फिटनेस निरीक्षण, जनजागरूकता अभियान के जरिए भी सुरक्षित यातायात सुनिश्चित कर रहा है।

लखनऊ आग हादसे से नाराज CM योगी, अधिकारियों को लगाई फटकार; जिम्मेदारों पर गिर सकती है गाज

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को तीन मंजिल की इमारत में लगी आग में झुलसकर 15 लोगों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और मामले की जांच के सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री अपना अलीगढ का दौरा बीच में ही छोडकर लखनऊ लौटे और घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। अधिकारियों के मुताबिक आदित्यनाथ ने पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव (गृह) मौके पर जाकर घटना का जायजा लेने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले की तह में जाकर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। घटना से गुस्साए सीएम योगी ने अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। यह आग अलीगंज थाना इलाके में उषा मेहता मार्ग पर स्थित तीन मंजिला वाणिज्यिक इमारत में अपराह्न करीब तीन बजे लगी। आग पर काबू पाने के लिए कई दमकल वाहनों और 'हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म' वाली गाड़ी को अभियान पर लगाया गया। पुरनिया बाजार से चंद कदमों की दूरी पर स्थित यह इमारत अलीगंज के पॉश रिहायशी इलाके में है, जहां कोचिंग सेंटर और कैफे जैसी जगहें हैं। अधिकारियों के अनुसार बचाव अभियान के दौरान आग में फंसे लोगों को इमारत से बाहर निकाला गया। कुछ लोगों को 'बॉडी बैग' में लाया गया, जबकि कुछ को कंबल में लपेटा गया था और एम्बुलेंस में ले जाते समय वे बेहोश लग रहे थे। इन लोगों के शवों या घायलों को बगल की इमारत की छत से बाहर निकाला गया। प्रधानमंत्री ने जताया शोक, मृतकों के परिजन को दो-दो लाख रुपये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''लखनऊ में अग्नि दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। अखिलेश यादव ने दुख व्यक्त किया सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर लिखा कि इस हादसे के पीछे के कारणों की ईमानदारी से जांच हो। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके, यही कोशिश होनी चाहिए। मायावती ने जताया शोक बसपा अध्यक्ष मायावती ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर कहा, ''उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आज दोपहर बाद हुई अग्निकाण्ड में अनेक लोगों की मौत तथा और भी कई लोगों के घायल हो जाने की घटना अति-दुखद। उन्होंने आगे कहा, ''इस प्रकार की जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली होती हैं तथा कितने ही परिवार की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम के लिये सबको मिलकर सही से काम करने की ज़रूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा। आग लगने के समय इमारत के अंदर मौजूद रहे युवकों और युवतियों के रिश्तेदार बताये जा रहे कुछ लोग घटनास्थल के पास खड़े होकर रोते-बिलखते और अधिकारियों से इमारत के अंदर जाने की गुहार लगाते नजर आये।

32348 मेगावाट की ऐतिहासिक उपलब्धि: योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित करते हुए देशभर में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल एवं निर्बाध पूर्ति कर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में अब तक की सर्वाधिक पीक पावर डिमांड पूरी करने वाला राज्य बन गया है। इससे पहले 13 मई 2026 को महाराष्ट्र ने 32,317 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था।  मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में बिजली व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए गए हैं। 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट रिकॉर्ड पीक डिमांड आपूर्ति की गई है। जोकि अब तक के इतिहास में सबसे अधिक है। यूपी पीक डिमांड बिजली आपूर्ति करने में लगातार सबसे आगे हैं। 20 जून को यूपी में 31549 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई। 19 जून को भी प्रदेश में 30968 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। इससे पहले 24 मई को यूपी में सबसे अधिक 31824 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। साल 2025 में 11 जून को 31486 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। इस तरह 21 जून 2026 को डिमांड बिजली आपूर्ति ने अभी तक के सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। प्रचंड गर्मी में बिजली की मांग चरम पर यूपी जैसे विशाल राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है। प्रदेश में बिजली अवसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार नए उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है और पुराने उपकरणों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया गया है। उत्तर प्रदेश ने रिकॉर्ड मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर यह साबित कर दिया है कि प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और सक्षम हो चुकी है। बिजलीकर्मी दिन-रात फील्ड में डटे प्रदेश भर में बिजलीकर्मी दिन-रात मैदान में डटे हुए हैं। चाहे तूफानी रात हो, भारी बारिश हो या चिलचिलाती गर्मी, बिजलीकर्मी हर परिस्थिति में उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और सुचारु बिजली आपूर्ति करने में जुटे हैं। रात्रिकालीन मेंटेनेंस कार्यों के माध्यम से विभिन्न जिलों में बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मरों और उपकेंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। ट्रांसफार्मरों की सुरक्षित और प्रभावी कार्यप्रणाली बनाए रखने के लिए उनकी अर्थिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभागीय टीमों द्वारा नियमित रूप से अर्थिंग में पानी डालकर सिस्टम को सुरक्षित और स्थिर रखा जा रहा है। उपकेंद्रों का अधिकारी कर रहे लगातार निरीक्षण प्रदेश भर में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उपकेंद्रों का निरीक्षण भी लगातार किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को हर स्थिति में गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। शिकायतों के त्वरित निस्तारण और फील्ड रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल पूर्ति उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।  रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही चेयरमैन डॉ. गोयल ने कहा कि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं तक निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही है। पूरे प्रदेश में ब्रेक डाउन में आये फीडरों को छोड़कर अन्य कार्यों के लिए शटडाउन लेने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने बताया कि फीडरों के शटडाउन के लेने के लिए अधिशाषी अभियंताओं को अधिकृत किया गया है। जिससे शटडाउन महत्वपूर्ण व आवश्यक है, यह सुनिश्चित किया जा सकें।

योगी सरकार के तहत यूपी बना देश में सबसे अधिक बिजली आपूर्ति करने वाला राज्य

लखनऊ  कई अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दर्जनों उपक्रम में नंबर एक बने उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रविवार रात को बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित करते हुए देशभर में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल एवं निर्बाध पूर्ति कर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में अब तक की सर्वाधिक पीक पावर डिमांड पूरी करने वाला राज्य बन गया है। इससे पहले 13 मई 2026 को महाराष्ट्र ने 32,317 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में बिजली व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए गए हैं। 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट रिकॉर्ड पीक डिमांड आपूर्ति की गई है। जोकि अब तक के इतिहास में सबसे अधिक है। यूपी पीक डिमांड बिजली आपूर्ति करने में लगातार सबसे आगे हैं। 20 जून को यूपी में 31549 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई। 19 जून को भी प्रदेश में 30968 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। इससे पहले 24 मई को यूपी में सबसे अधिक 31824 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। साल 2025 में 11 जून को 31486 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। इस तरह 21 जून 2026 को डिमांड बिजली आपूर्ति ने अभी तक के सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। प्रचंड गर्मी में बिजली की मांग चरम पर यूपी जैसे विशाल राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है। प्रदेश में बिजली अवसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार नए उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है और पुराने उपकरणों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया गया है। उत्तर प्रदेश ने रिकॉर्ड मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर यह साबित कर दिया है कि प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और सक्षम हो चुकी है। बिजलीकर्मी दिन-रात फील्ड में डटे प्रदेश भर में बिजलीकर्मी दिन-रात मैदान में डटे हुए हैं। तूफानी भरी रात हो या फिर भारी बारिश या चिलचिलाती गर्मी, बिजलीकर्मी हर परिस्थिति में उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और सुचारु बिजली आपूर्ति करने में जुटे हैं। रात्रिकालीन मेंटेनेंस कार्यों के माध्यम से विभिन्न जिलों में बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मरों और उपकेंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। ट्रांसफार्मरों की सुरक्षित और प्रभावी कार्यप्रणाली बनाए रखने के लिए उनकी अर्थिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभागीय टीमों द्वारा नियमित रूप से अर्थिंग में पानी डालकर सिस्टम को सुरक्षित और स्थिर रखा जा रहा है। उपकेंद्रों का अधिकारी कर रहे लगातार निरीक्षण प्रदेश भर में वरिष्ठ अधिकारी भी उपकेंद्रों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को हर स्थिति में गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। शिकायतों के त्वरित निस्तारण और फील्ड रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल पूर्ति उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने कहा कि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं तक निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही है। पूरे प्रदेश में ब्रेक डाउन में आये फीडरों को छोड़कर अन्य कार्यों के लिए शटडाउन लेने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने बताया कि फीडरों के शटडाउन के लेने के लिए अधिशाषी अभियंताओं को अधिकृत किया गया है। जिससे शटडाउन महत्वपूर्ण व आवश्यक है, यह सुनिश्चित किया जा सकें।  

रेलवे अपडेट: तीसरी लाइन कमीशनिंग के चलते दर्जनों ट्रेनों पर असर, यात्रियों को परेशानी

लखनऊ रेलवे गोंडा से गोंडा कचहरी के बीच पांच किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन को कमीशंड करने के लिए अगले माह प्री इंटरलाकिंग और नान इंटरलाकिंग की प्रक्रिया पूरी करेगा। इस कारण गोंडा रूट होकर चलने वाली कई ट्रेनों को सात से 11 जुलाई तक निरस्त किया जाएगा। वहीं, कई ट्रेनों के रूट बदलेंगे। छह, सात व 10 जुलाई को 15109 छपरा-मथुरा एक्सप्रेस लखनऊ नहीं आएगी। ये ट्रेनें निरस्त होंगी – 22921 -बांद्रा-बलरामपुर एक्सप्रेस -05 जुलाई – 22922 -बलरामपुर-बांद्रा एक्सप्रेस -07 जुलाई – 15081- गोरखपुर-गोमतीनगर एक्सप्रेस -06 से 10 जुलाई – 15082- गोमतीनगर-गोरखपुर एक्सप्रेस -07 से 11 जुलाई – 15133 -छपरा-आनंद विहार एक्सप्रेस -06 जुलाई – 15134 -आनंद विहार-छपरा एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15031- गोरखपुर-लखनऊ जंक्शन एक्सप्रेस -08 व 09 जुलाई – 15032- लखनऊ जंक्शन-गोरखपुर एक्सप्रेस -08 व 09 जुलाई – 15070- ऐशबाग-गोरखपुर एक्सप्रेस -सात से 10 जुलाई – 15069- गोरखपुर-ऐशबाग एक्सप्रेस -आठ से 11 जुलाई – 22199- ग्वालियर-बलरामपुर सुशासन एक्सप्रेस-08 जुलाई – 22200- बलरामपुर-ग्वालियर एक्सप्रेस -09 जुलाई – 15029- गोरखपुर-पुणे एक्सप्रेस -09 जुलाई – 15030- पुणे -गोरखपुर एक्सप्रेस अयोध्या होकर चलेंगी यह ट्रेनें – 15078- गोमतीनगर-कामाख्या एक्सप्रेस -29 जून – 15904- चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस -28 जून व 08 जुलाई – 12512- तिरुवनंतपुरम-गोरखपुर एक्सप्रेस -28 जून से 07 जुलाई – 15046- ओखा-गोरखपुर एक्सप्रेस 28 जून व 05 जुलाई – 12592- यशवंतपुर-गोरखपुर एक्सप्रेस -29 जून व 06 जुलाई – 15134- आनंद विहार-छपरा एक्सप्रेस -01 व 04जुलाई – 19409 – साबरमती-थावे एक्सप्रेस -02 जुलाई – 22534- यशवंतपुर-गोरखपुर सुपरफास्ट -01 जुलाई – 19623- मदार जंक्शन-दरभंगा अमृत भारत -03 जुलाई – 12522- एर्नाकुलम-बरौनी एक्सप्रेस -03 जुलाई – 15065- गोरखपुर-पनवेल एक्सप्रेस -06 से 10 जुलाई – 15067- गोरखपुर-बांद्रा एक्सप्रेस -08 जुलाई – 12587- गोरखपुर-जम्मूतवी अमरनाथ एक्सप्रेस -06 जुलाई – 12565- बिहार संपर्कक्रांति एक्सप्रेस -09 जुलाई – 15651- गुवाहाटी-जम्मूतवी एक्सप्रेस -06 जुलाई – 15066- पनवेल-गोरखपुर एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15565- वैशाली एक्सप्रेस – 08 से 10 जुलाई – 12571- गोरखपुर-आनंद विहार एक्सप्रेस-08 व 10 जुलाई – 12572- आनंद विहार-गोरखपुर एक्सप्रेस – 09 जुलाई – 14673 शहीद एक्सप्रेस -08 व 09 जुलाई – 15005- गोरखपुर-देहरादून एक्सप्रेस-08 जुलाई – 15652- जम्मूतवी-गुवाहाटी एक्सप्रेस -08 जुलाई – 12596- आनंद विहार-गोरखपुर एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15566- वैशाली एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15653- गुवाहाटी-जम्मूतवी एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15204- बरौनी-जम्मूतवी एक्सप्रेस -09 जुलाई – 12555- गोरखधाम एक्सप्रेस -09 जुलाई – 22537- गोरखपुर-एलटीटी कुशीनगर एक्सप्रेस -09 जुलाई – 11079- एलटीटी-गोरखपुर एक्सप्रेस -09 जुलाई – 14674- शहीद एक्सप्रेस -09 जुलाई वाराणसी शटल समेत दो ट्रेनों में बढ़ेंगे कोच रेलवे प्रशासन ने लखनऊ और वाराणसी रूट सहित दो प्रमुख ट्रेनों में कोचों की स्थायी वृद्धि करने का बड़ा फैसला लिया है। इसमें गाड़ी संख्या 20401/20402वाराणसी-लखनऊ-वाराणसी सुपरफास्ट शटल एक्सप्रेस में 27 जून से कोच बढ़ाए जा रहे हैं। ट्रेन में सफर को सुगम बनाने के लिए एक वातानुकूलित (एसी) चेयर कार और एक शयनयान (स्लीपर) श्रेणी का कोच स्थायी रूप से जोड़ा जाएगा। इस बढ़ोतरी के बाद ट्रेन की कुल कोच संख्या 20 से बढ़कर 22 हो जाएगी, जिससे दैनिक यात्रियों को सीटों के लिए मारामारी नहीं करनी पड़ेगी। रेलवे ने वाराणसी-इंदौर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (द्वि-साप्ताहिक और साप्ताहिक) में भी जुलाई की शुरुआत से एक एसी प्रथम श्रेणी और एक एसी 2-टियर कोच की स्थायी वृद्धि करने की घोषणा की है, जिससे इसकी क्षमता भी 22 कोच की हो जाएगी। इससे रेलयात्रियों को राहत मिलेगी।

अब किताबों से आगे की पढ़ाई: विद्यार्थियों को मिलेगी AI और रोबोटिक्स की ट्रेनिंग

लखनऊ  प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब पारंपरिक पढ़ाई के साथ आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी भी मिलेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेश के 18 मंडलों में ड्रीम लैब स्थापित की जा रही हैं। इसके लिए टाटा समूह के प्रतिष्ठान नेल्को के साथ हब और स्पोक माडल पर अनुबंध किया गया है नेल्को की ओर से ड्रीम लैब की स्थापना के लिए आवश्यक उपकरण और सामग्री की आपूर्ति इसी माह कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की योजना वर्तमान शैक्षिक सत्र में इन लैब का संचालन शुरू करने की है, जिससे हजारों विद्यार्थियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा। ड्रीम लैब ऐसी अत्याधुनिक प्रयोगशाला है, जहां विद्यार्थी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) आधारित शिक्षा को प्रयोगों के माध्यम से समझ सकेंगे। यहां उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), रोबोटिक्स, इंटरनेट आफ थिंग्स (आइओटी), कोडिंग, थ्री-डी डिजाइन और इलेक्ट्रानिक उपकरणों के संचालन जैसी उभरती तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रयोगशाला केवल किताबों तक सीमित शिक्षा की अवधारणा को बदलकर विद्यार्थियों को ‘करके सीखने’ का अवसर देगी। हब और स्पोक माडल के तहत प्रत्येक मंडल में स्थापित मुख्य ड्रीम लैब (हब) से आसपास के चयनित विद्यालयों (स्पोक) के विद्यार्थी भी जुड़ेंगे और उपलब्ध संसाधनों का लाभ उठा सकेंगे। इससे सीमित संसाधनों में अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक आधुनिक तकनीकी शिक्षा पहुंच सकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रीम लैब विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और नवाचार की सोच को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच तकनीकी संसाधनों की दूरी भी कम होगी और वे भविष्य की रोजगारोन्मुखी चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे

मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को किया सम्मानित

फिरोजाबाद.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जनसभा स्थल पर लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग के स्टॉल पर बच्चों और उप्र पुलिस के स्टॉल पर पुलिस कर्मियों से संवाद स्थापित किया। कृषि विभाग, एमएसएमई, आजीविका मिशन, खादी ग्रामोद्योग, फिरोजाबाद-शिकोहाबाद विकास प्राधिकरण, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग आदि के स्टॉल आदि पर जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बच्चों को गोद में लेकर दुलारा-पुचकारा और उनका अन्नप्राशन किया। यहां फिरोजाबाद की विकास यात्रा पर लघु फिल्म भी दिखाई गई।  विधायक मनीष ने लगवाया नारा- देखो-देखो शेर आया  मंच संचालिका ने जब फिरोजाबाद विधायक मनीष असीजा को संबोधन के लिए बुलाया तो उन्होंने शीघ्रता से अपनी बात रखी। विधायक असीजा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया और जनता से नारा लगवाया। उन्होंने बोला, देखो-देखो कौन आया, जनता ने ‘शेर आया-शेर आया’ के गगनचुंबी नारों से सीएम योगी का स्वागत किया।  सीएम ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित किया। सीएम के हाथों चेक, चाबी, प्रमाण पत्र, स्वीकृति पत्र आदि पाकर लाभार्थियों के चेहरे खिल उठे।  सीएम के हाथों इन्हें मिली चाबी  प्रदीप कुमार- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)- चाबी  शशि- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)- चाबी आलोक प्रताप सिंह- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) -चाबी  मीरा देवी- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) -चाबी पिंकी- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) -चाबी इन्हें मिला चेक  अंकित झा – मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान- 5 लाख का चेक  रानी/डाली- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-6.45 करोड़ का चेक  श्रीनिवास- त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत 12.80 लाख का चेक  ओमकार नाथ ब्रिज- पीएम कुसुम योजना- 2.66 लाख का चेक ।

सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, सपा-बसपा-कांग्रेस पर विकास और कानून व्यवस्था को लेकर निशाना

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फिरोजाबाद जिले को 658 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 81 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। टूंडला के उसायनी में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विकास और जनकल्याण को प्राथमिकता देते हुए बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इस दौरान उनके निशाने पर विपक्ष रहा। सपा-बसपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी रामनवमी का तो विरोध करती ही थी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने का भी विरोध करती थी। कांवड यात्रा नहीं होने देती थी। गरीब को राशन नहीं मिलता था। आयुष्मान कार्ड,शौचाल, एलपीजी सिलेंडर की भी सुविधा नहीं थी। तब बिजली भी नहीं थी, क्योंकि सपा, कांग्रेस और बसपा के लोग अंधेरे में रहने के आदी थे। अंधेरे में ही इनकी डकैती कुशलतापूर्ण पड़ जाती थी। इसलिए चाहते ही नहीं थे बिजली आए। सपा-बसपा और कांग्रेस पर बरसे सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी ने सपा को घेरते हुए कहा कि उनके एजेंडे में विकास नहीं है। उसका काम लोगों को बांटना, सामाजिक एकता को कमजोर करना, गुंडागर्दी को बढ़ावा देना और विकास योजनाओं में रोड़ा अटकाना रहा है। भाजपा सरकार वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट जैसी योजनाएं दे रही है, जबकि समाजवादी पार्टी के समय 'वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया' की स्थिति थी। हर जिले में एक चिन्हित माफिया अराजकता फैलाता था, जमीनों पर कब्जा करता था और व्यापारियों से वसूली करता था। अब यूपी में सब चंगा है- सीएम योगी उन्होने कहा कि आज उत्तर प्रदेश माफिया, गुंडागर्दी और उपद्रव से मुक्त हो चुका है। प्रदेश में अब न कर्फ्यू लगता है और न दंगे होते हैं। अब यूपी में सब चंगा है और जब सब चंगा होता है तो उपद्रव नहीं, उत्सव होते हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पहले रामनवमी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समेत अन्य धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाई जाती थी और गरीबों को राशन, आवास, शौचालय, आयुष्मान योजना तथा गैस कनेक्शन जैसी सुविधाओं से वंचित रखा जाता था। सरकार की गिनाईं उपलब्धियां मुख्यमंत्री ने सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, 10 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसके अलावा 65 लाख परिवारों को आवास, करीब दो करोड़ परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन और डेढ़ करोड़ परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि 16 लाख किसानों के निजी ट्यूबवेलों के बिजली बिल माफ किए गए हैं। किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड, खरीद नीति और किसान सम्मान निधि का लाभ भी मिल रहा है। हाल ही में किसान सम्मान निधि की 4300 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में भेजी गई है।

UP में राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, टिकटों पर मंथन और नए चेहरों की तलाश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में आने वाले दिन बेहद सरगर्मियों से भरे रहने वाले हैं. अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले राज्य में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होंगे. राज्यसभा चुनाव ने राज्य की राजनीतिक हलचल को चरम पर पहुंचा दिया है. इस चुनाव को केवल संसद के ऊपरी सदन का समीकरण बदलने के तौर पर नहीं, बल्कि 2027 के महामुकाबले से पहले भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है. जिन 10 सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें भाजपा के हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, नीरज शेखर, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, बनवारी लाल वर्मा और दिनेश शर्मा शामिल हैं. वहीं समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव और रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।  आइए समझते हैं कि इस बार उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का पूरा गणित क्या है, किसका पत्ता साफ होने जा रहा है और दोनों दल किस रणनीति पर काम कर रहे हैं. भाजपा के मौजूदा सांसदों में से कई ऐसे चेहरे हैं जिनका कार्यकाल खत्म हो रहा है, लेकिन पार्टी को दोबारा राज्यसभा भेजना मजबूरी है. हालांकि, पार्टी इस बार कई नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में भी है. इससे कुछ मौजूदा सांसदों का पत्ता साफ होना लगभग तय माना जा रहा है. वहीं, समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव भी इस बार कम से कम दो नए वफादारों जिसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक चेहरों को दिल्ली भेजने की तैयारी में हैं।  राज्यसभा की 10 सीटों के लिए किसका दावा कितना मजबूत? विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखें तो भाजपा और उसके सहयोगियों के पास करीब 290 विधायक हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के पास लगभग 102 विधायक हैं. ऐसे में गणित भाजपा के पक्ष में दिखाई देता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा 8 सीटें जीतने की रणनीति पर काम कर सकती है, जबकि सपा के लिए 2 सीटें सुरक्षित मानी जा रही हैं. सबसे ज्यादा चर्चा उन नेताओं को लेकर है जिनकी दोबारा राज्यसभा वापसी हो सकती है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और और पूर्व आईपीएस बृजलाल के नाम फिर से चर्चा में हैं. जबकि, संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले अरुण सिंह का पत्ता कट सकता है. बीजेपी सामाजिक समीकरणों और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखते हुए कई नए चेहरों को भी मौका दे सकती है।  संख्याबल और संभावित जीत यूपी विधानसभा में 403 सदस्य हैं. एनडीए (बीजेपी + सहयोगी): 290-294 MLAs सपा + सहयोगी: 103-105 (सपा 101-102 + कांग्रेस 2) अन्य बसपा 1, JD(L) आदि, कुछ खाली एक सीट जीतने के लिए लगभग 37 वोट चाहिए. ऐसे में मौजूदा गणित के आधार पर बीजेपी/एनडीए 7-8 सीटें आसानी से जीत सकती हैं. सपा 2 सीटें और अधिकतम 3 जीत सकती हैं, अगर बागी न हों और गठबंधन मजबूत हो।  सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने कोर ‘PDA’ फॉर्मूले को मजबूत करने के लिए किसी बड़े अति-पिछड़े या दलित चेहरे को उच्च सदन भेज सकते हैं. वहीं बीजेपी भी पश्चिम से लेकर पूर्व तक के जातीय संतुलन को साधने वाले नेताओं पर दांव लगाएगी. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह राज्यसभा चुनाव दोनों पार्टियों के लिए नाक का सवाल बन चुका है. जो भी पार्टी उम्मीद से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब होगी, वह राज्य में यह नैरेटिव बनाने में सफल रहेगी कि ‘हवा’ उसके पक्ष में बह रही है. बगावत या क्रॉस वोटिंग के जरिए यदि किसी दल ने दूसरे को पटखनी दी, तो विरोधी खेमे के कैडर का मनोबल टूट जाएगा।  बीजेपी और सपा का सीट गणित उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायकों की मौजूदा संख्या के आधार पर ही राज्यसभा की इन 10 सीटों का फैसला होगा. एक राज्यसभा सीट को जीतने के लिए तय प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है. बीजेपी अपने मजबूत संख्याबल और सहयोगी दलों जैसे रालोद, सुभासपा, अपना दल के दम पर कम से कम 7 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है. पार्टी इसके लिए अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करने और विपक्षी खेमे में सेंधमारी की रणनीति पर भी काम कर सकती है. वहीं समाजवादी पार्टी के पास पिछले चुनावों के मुकाबले विधायकों की संख्या बेहतर है. कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद सपा आसानी से 3 सीटें अपने दम पर जीतने की स्थिति में है. यदि विपक्ष एकजुट रहता है और कुछ असंतुष्ट विधायक साथ आते हैं, तो सपा चौथी सीट के लिए भी कड़ा मुकाबला पेश करेगी।  किसका चमकेगा भाग्य और किसका कटेगा टिकट? राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार दोनों ही दल किसी भी ऐसे चेहरे को दोबारा मौका नहीं देना चाहेंगे जो आगामी विधानसभा चुनाव में जमीन पर जातीय या क्षेत्रीय समीकरणों को फिट न बैठता हो. जो नेता पिछले कुछ समय से संगठन में निष्क्रिय रहे हैं या जिनका स्थानीय स्तर पर विरोध है, उनका टिकट कटना तय माना जा रहा है. बीजेपी कुछ बुजुर्ग नेताओं को मार्गदर्शक मंडल या संगठन में भेजकर नए और युवा चेहरों को मैदान में उतार सकती है।