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100 एआई स्टार्टअप को बढ़ावा और पांच लाख युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने और शासन व नागरिक सेवाओं में एआई के सुरक्षित, प्रभावी एवं उत्तरदायी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तर प्रदेश एआई मिशन (यूपी-एआईएम)’ की स्थापना, क्रियान्वयन एवं संचालन को मंजूरी दी गई। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बताया कि मिशन मोड में संचालित होने वाले यूपी-एआईएम के माध्यम से राज्य में एआई आधारित नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास, स्टार्टअप एवं उद्यमिता, हाई-कैपेसिटी कंप्यूटिंग और एआई आधारित डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा। इसके तहत एकीकृत यूपी एआई स्टैक विकसित किया जाएगा, जिसमें एआई रेडी डेटा इकोसिस्टम, एआई ऑपरेटिंग फ्रेमवर्क, विभागीय एआई एप्लीकेशन, सुरक्षित डेटा एक्सचेंज प्लेटफॉर्म और जीपीयू आधारित एआई कंप्यूट की सुविधा उपलब्ध होगी। पांच लाख युवाओं को प्रशिक्षण मिशन के तहत 100 से अधिक एआई यूज केसेस विकसित/क्रियान्वित किए जाएंगे, जबकि 25 से 30 उपयोग-प्रकरणों को बड़े स्तर पर विस्तार दिया जाएगा। कम से कम 100 एआई स्टार्टअप्स को वित्तीय एवं गैर-वित्तीय सहायता, पांच लाख एआई फ्लुएंट युवाओं का कौशल विकास और 50 हजार फॉरवर्ड डिप्लॉयड एआई प्रोफेशनल्स तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। यूपी एआईएम को सात प्रमुख आयामों के माध्यम से लागू किया जाएगा। इनमें यूपी एआई स्टैक एवं डेटा एक्सचेंज, एआई टैलेंट एवं फ्यूचर स्किल्स, एआई रिसर्च एवं सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, एआई स्टार्टअप्स एवं एमएसएमई, एआई कंप्यूट एवं डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, एआई ट्रस्ट एवं एश्योरेंस तथा डिस्ट्रिक्ट एआई एनेबलमेंट शामिल हैं। सभी 75 जिलों में बनेंगे डिस्ट्रिक्ट एआई केंद्र मिशन के तहत प्रदेश के सभी 75 जनपदों में डिस्ट्रिक्ट एआई केंद्र विकसित किए जाएंगे। ये केंद्र स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए एआई आधारित नवाचार, प्रशिक्षण, रोजगार, स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देंगे। एआई सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, रिसर्च प्रोजेक्ट, इनोवेशन चैलेंजेस और हैकथॉन्स के माध्यम से अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहन दिया जाएगा। एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए एआई ट्रस्ट एंड एश्योरेंस फ्रेमवर्क भी विकसित होगा। इसमें हाई-इम्पैक्ट सरकारी एआई समाधानों के लिए सुरक्षा, गोपनीयता, जोखिम मूल्यांकन, प्री-डिप्लॉयमेंट असेसमेंट और मानव पर्यवेक्षण पर विशेष जोर रहेगा। स्वतंत्र सोसाइटी के रूप में होगा संचालन यूपी-एआईएम को आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अंतर्गत स्वतंत्र सोसाइटी के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसके संचालन के लिए एपेक्स बॉडी, गवर्निंग बॉडी और एक्जीक्यूटिव कमेटी की व्यवस्था होगी। मिशन का नेतृत्व सीईओ करेंगे। यूपी एआई स्टैक के विकास और संचालन के लिए मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर (एमएसआई) का चयन किया जाएगा। एमएसआई द्वारा एआई स्टैक और एआई सॉल्यूशन का डिजाइन, विकास, इंटीग्रेशन, डिप्लॉयमेंट, संचालन एवं रखरखाव किया जाएगा, जिसकी समीक्षा एसएलए और निर्धारित माइलस्टोन के आधार पर की जाएगी। भविष्य में यूपी एआई स्टैक ऑपरेटिंग प्लेटफॉर्म सभी विभागों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। विभागों से जुड़े एआई स्टार्टअप्स और तकनीकी साझेदारों को ओपन वेट मॉडल्स (एसएलएम्स/एलएलएम्स), डेवलपमेंट सैंडबॉक्सिंग और टेस्ट सैंडबॉक्सिंग जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी।

योगी सरकार ने बढ़ाया धान खरीद का लक्ष्य, 4,500 केंद्रों पर होगी खरीद; किसानों को मिलेगा बढ़ा MSP

इस बार देश में धान खरीद में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ेगी योगी सरकार   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में धान क्रय नीति को मंजूरी   पिछले वर्ष देश में सर्वाधिक 62 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा था उत्तर प्रदेश ने, इस बार 65 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य   आठ क्रय एजेंसियों के माध्यम से 4500 केंद्रों पर होगी खरीद, किसानों को मिलेगा बढ़ा समर्थन मूल्य   सामान्य धान 2441 और ग्रेड-ए धान 2461 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा   फार्मर आईडी वाले किसानों को पंजीकरण से छूट, यथासंभव 48 घंटे में होगा भुगतान   लखनऊ धान की सरकारी खरीद में पिछले वर्ष देश में पहला स्थान हासिल करने वाली योगी सरकार इस बार देश में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान क्रय नीति को मंजूरी दी गई। पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में देश में सर्वाधिक 62 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। इस बार सरकार ने 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए आठ क्रय एजेंसियों के माध्यम से प्रदेश में 4500 क्रय केंद्र संचालित किए जाएंगे। किसानों को उनकी उपज का बढ़ा न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा। खरीद के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर भुगतान सीधे बैंक खातों में कराया जाएगा।   कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश ने 62 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद कर देश में पहला स्थान प्राप्त किया था। इस बार उससे तीन लाख मीट्रिक टन अधिक धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए क्रय केंद्रों की व्यवस्था के साथ भुगतान और धान की ढुलाई की निगरानी के भी प्रावधान किए हैं।   पश्चिमी यूपी में 15 अक्टूबर, पूर्वी यूपी में एक नवंबर से खरीद धान खरीद के लिए प्रदेश में दो अलग-अलग अवधि निर्धारित की गई हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर 2026 से 15 फरवरी 2027 तक खरीद होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक धान खरीदा जाएगा। जिलों में धान की पैदावार और आवक के आधार पर क्रय केंद्रों का स्थान तय किया जाएगा।   धान के समर्थन मूल्य में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी भारत सरकार ने सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। पिछले वर्ष की तुलना में समर्थन मूल्य में लगभग तीन प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों से इसी दर पर धान खरीदा जाएगा।   आठ एजेंसियां करेंगी खरीद, डीएम तय करेंगे केंद्रों का स्थान खाद्य विभाग, पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस, मंडी परिषद एवं उससे संबद्ध एफपीओ-एफपीसी, एनसीसीएफ, नैफेड तथा भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से धान की खरीद होगी। कुल 4500 क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं। संबंधित जिलाधिकारी जिले में धान की पैदावार, आवक और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए क्रय संस्थाओं के बीच केंद्रों का स्थल आवंटन करेंगे।   फार्मर आईडी वाले किसानों को पंजीकरण से छूट धान की सरकारी खरीद के लिए इस बार फार्मर आईडी वाले किसानों को अलग से ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कराना होगा। भारत सरकार की एग्रीस्टैक योजना के तहत प्रदेश में बनाई गई किसान पहचान के आधार पर ही उनकी उपज खरीदी जाएगी। इससे किसानों को विभागीय पोर्टल पर दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी।   48 घंटे में भुगतान, देरी पर तय होगी जिम्मेदारी किसानों से खरीदे गए धान का भुगतान सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। बैंक खातों के सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर धनराशि किसानों के खातों में भेजने की व्यवस्था की गई है। भुगतान में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।   जीपीएस से धान की ढुलाई, क्यूआर कोड से निगरानी धान खरीद में पारदर्शिता के लिए प्रदेश के सभी जिलों में क्रय केंद्रों से संबंधित चावल मिलों तक धान भेजने के लिए जीपीएस युक्त वाहनों का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा पायलट परियोजना के तहत चिह्नित जिलों में चावल के बोरों पर क्यूआर कोड के माध्यम से खाद्यान्न की आवाजाही और बिलिंग की निगरानी की जाएगी।   धान खरीद के लिए बोरों की भी व्यवस्था धान खरीद के दौरान बोरों की कमी न हो, इसके लिए भी तैयारी की गई है। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, 80 हजार बोरों की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है। कुल 12.25 लाख बोरे उपलब्ध कराने की तैयारी है। सरकार ने खरीद के दौरान पैकिंग सामग्री की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया है।

UP में नौसेना शौर्य संग्रहालय बनेगा खास टूरिस्ट स्पॉट, डिजिटल गैलरी से लेकर बोटिंग तक की मिलेगी सुविधा

लखनऊ स्थित नौसेना शौर्य संग्रहालय का होगा विस्तार, 6.8 एकड़ में होगा वाटर बॉडी का विकास योगी कैबिनेट ने तीसरे चरण की परियोजना को दी मंजूरी, संग्रहालय के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा एलडीए नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियां, बोटिंग, लाइट एंड साउंड शो और डिजिटल गैलरी होंगे आकर्षण छात्रों को रियायती दर पर मिलेगा प्रवेश, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य युवाओं को राष्ट्रीय विरासत से जोड़ता है पर्यटन- जयवीर सिंह प्रदेश में ऐसे पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है, जो लोगों में जिज्ञासा पैदा करेःं जयवीर सिंह लखनऊ,  लखनऊ में पर्यटन को नया आयाम देने के लिए विकसित किए जा रहे नौसेना शौर्य संग्रहालय का विस्तार होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में संग्रहालय के तीसरे चरण के तहत वाटर बॉडी विकसित करने के लिए करीब 6.8 एकड़ जमीन पर्यटन विभाग को उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। साथ ही संग्रहालय परिसर के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को सौंपने का भी निर्णय लिया गया। वाटर बॉडी विकसित करने के लिए एलडीए संबंधित 6.8 एकड़ भूमि पर्यटन विभाग को एक लाख रुपये की टोकन मनी पर उपलब्ध कराएगा। परियोजना के तहत नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियां, बोटिंग, लाइट एंड साउंड शो के साथ जलीय जीवन और समुद्री जैव विविधता से जुड़ी प्रदर्शनियां विकसित की जाएंगी। इससे नौसेना शौर्य संग्रहालय को एक ऐसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां लोग देश के समुद्री इतिहास और नौसेना की तकनीक को करीब से जानने के साथ मनोरंजन का भी आनंद ले सकेंगे। इतिहास, विज्ञान और तकनीक से रूबरू होंगे पर्यटक उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग भारतीय नौसेना के सहयोग से नौसेना शौर्य संग्रहालय विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को देश की समुद्री विरासत और नौसेना की सामरिक ताकत से रूबरू कराने के साथ अनुभवात्मक व ज्ञान आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना है। संग्रहालय में नौसेना के उपकरणों, समुद्री इतिहास और देश की रक्षा क्षमताओं की झलक देखने को मिलेगी। डिजिटल तकनीक, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियों और सिमुलेशन के जरिये पर्यटक नौसेना की कार्यप्रणाली को करीब से समझ सकेंगे। 'संग्रहालय विस्तार से बढ़ेंगे पर्यटन और रोजगार' पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ऐसे पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है, जो लोगों में जिज्ञासा पैदा करने के साथ युवाओं को देश की राष्ट्रीय विरासत से जोड़ें। अनुभवात्मक और ज्ञान आधारित पर्यटन के जरिए विद्यार्थियों के लिए इतिहास, विज्ञान और तकनीक को अधिक रोचक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नौसेना शौर्य संग्रहालय के विस्तार से परिवारों को लखनऊ घूमने का एक नया विकल्प मिलेगा। साथ ही पर्यटन से जुड़े कारोबार और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।' मई में हुआ था पहले चरण का उद्घाटन परियोजना के पहले चरण के तहत विकसित नौसेना शौर्य वाटिका का उद्घाटन 30 मई 2026 को केंद्रीय रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने किया था। वाटिका में भारतीय नौसेना की ओर से उपलब्ध कराए गए युद्धपोतों और पनडुब्बियों के हिस्से, नौसैनिक तोपें, लंगर और प्रोपेलर प्रदर्शित किए गए हैं। इनके माध्यम से पर्यटक समुद्र से दूर स्थित लखनऊ में भी भारतीय नौसेना की कार्यप्रणाली और उसकी सामरिक क्षमताओं को करीब से समझ सकते हैं। आधुनिक तकनीक से रूबरू कराएगा एक्सपीरियंस सेंटर परियोजना के तहत प्रस्तावित क्यूरेशन एंड एक्सपीरियंस सेंटर में भारत की समुद्री विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। यहां डिजिटल गैलरी, इमर्सिव ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियां, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियां और सिमुलेशन विकसित किए जाएंगे। इनके जरिए प्राचीन समुद्री व्यापार से लेकर आधुनिक नौसैनिक अभियानों और स्वदेशी रक्षा तकनीक तक की यात्रा को दर्शाया जाएगा। केंद्र में भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत और बचाव अभियानों में भूमिका की जानकारी भी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त यहां एक्वेरियम विकसित करने की भी योजना है। इससे विद्यार्थियों और शोध में रुचि रखने वाले युवाओं को समुद्री जीवन तथा उससे जुड़ी तकनीक को समझने का अवसर मिलेगा। वाटर बॉडी में बोटिंग और लाइट एंड साउंड शो परियोजना के तीसरे चरण में विकसित होने वाली वाटर बॉडी संग्रहालय परिसर का प्रमुख आकर्षण होगी। यहां नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियों के साथ बोटिंग की सुविधा विकसित की जाएगी। लाइट एंड साउंड शो तथा जलीय जीवन और समुद्री जैव विविधता से संबंधित प्रदर्शनियां भी प्रस्तावित हैं। इससे संग्रहालय को शैक्षणिक भ्रमण के साथ परिवारों के मनोरंजन के लिए भी उपयोगी बनाया जा सकेगा। 69.10 करोड़ की परियोजना, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य संग्रहालय भवन, नौसेना शौर्य वाटिका और क्यूरेशन से जुड़े कार्यों के लिए अब तक करीब 69.10 करोड़ रुपए की मंजूरी दी जा चुकी है। वर्ष 2025 में शुरू हुई इस तीन चरणों वाली परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परिसर में प्रवेश के लिए टिकट की व्यवस्था भी होगी। विद्यार्थियों और स्कूली बच्चों के लिए रियायती दरों पर प्रवेश की व्यवस्था होगी। इससे स्कूलों के शैक्षणिक भ्रमण को प्रोत्साहन मिलने और विद्यार्थियों को इतिहास, विज्ञान, तकनीक तथा राष्ट्रीय सेवा से जुड़े विषयों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलने की उम्मीद है। पूरे परिसर का संचालन करेगा एलडीए नौसेना शौर्य वाटिका के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी एलडीए संभालेगा। क्यूरेशन एंड एक्सपीरियंस सेंटर और वाटर बॉडी का निर्माण पूरा होने के बाद उनका संचालन भी इसी व्यवस्था के तहत किया जाएगा। इससे पूरे परिसर में रखरखाव, सुरक्षा, टिकट और पर्यटक सुविधाओं का प्रबंधन एक ही एजेंसी के माध्यम से किया जा सकेगा।

यूपी में दिवाली पर उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की बल्ले-बल्ले, योगी सरकार देगी फ्री सिलेंडर

दीपावली से पहले उज्ज्वला लाभार्थियों को योगी सरकार की सौगात, मिलेगा मुफ्त सिलेंडर   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव मंजूर   दीपावली और होली पर एक-एक मुफ्त सिलेंडर रिफिल देने की योजना जारी रहेगी   अक्टूबर से दिसंबर तक पहला चरण, जनवरी से मार्च के बीच दूसरा चरण   योजना पर 2142.78 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार, आधार प्रमाणीकरण जरूरी    लखनऊ दीपावली से पहले योगी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में दीपावली और होली पर एक-एक मुफ्त एलपीजी सिलेंडर रिफिल देने की योजना को जारी रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में पात्र लाभार्थियों को दो मुफ्त सिलेंडर रिफिल मिलेंगे। इस पर राज्य सरकार 2142.78 करोड़ रुपये खर्च करेगी।   कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि गरीब परिवारों को रसोई गैस की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मंत्रिपरिषद ने योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहला मुफ्त रिफिल अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच दीपावली के अवसर पर और दूसरा जनवरी से मार्च 2027 के बीच होली के अवसर पर दिया जाएगा।   आधार से जुड़ा बैंक खाता होना जरूरी योजना का लाभ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उन्हीं लाभार्थियों को मिलेगा, जिनके बैंक खाते आधार से जुड़े होंगे और आधार प्रमाणीकरण पूरा होगा। सरकार ने पात्रता के लिए यह शर्त निर्धारित की है।   पिछले वर्षों की व्यवस्था रहेगी जारी योगी सरकार पिछले वित्तीय वर्षों में भी दीपावली और होली पर उज्ज्वला लाभार्थियों को दो मुफ्त सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराती रही है। अब चालू वित्तीय वर्ष में भी यह व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के अनुसार, इससे गरीब परिवारों में स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ेगा और महिलाओं तथा बच्चों को परंपरागत ईंधन के धुएं से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी।

UP में भदोही के नाम को लेकर बड़ा बदलाव, योगी कैबिनेट ने प्रस्ताव पर लगाई मुहर

भदोही को फिर मिलेगी संत रविदास के नाम से पहचान, योगी कैबिनेट की मुहर   सपा सरकार ने हटाया था संत रविदास का नाम, अब संत रविदासनगर भदोही होगा नाम   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव मंजूर   संत रविदास के सम्मान के साथ भार राज की ऐतिहासिक विरासत भी रहेगी बरकरार   दलित और राजभर समाज, दोनों को साधने का सियासी संदेश   लखनऊ भदोही जिले को एक बार फिर संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम से पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में जिले का नाम 'संत रविदासनगर भदोही' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। समाजवादी पार्टी की सरकार में जिले के नाम से संत रविदास का नाम हटाकर केवल भदोही कर दिया गया था। अब योगी सरकार ने संत रविदास का नाम दोबारा जोड़ने के साथ भदोही की ऐतिहासिक पहचान भी बरकरार रखने का निर्णय लिया है। इस फैसले के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। इसे दलित और राजभर समाज, दोनों को साधने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।   कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि जिले का नाम संत रविदासनगर भदोही होगा। सरकार ने भारतीय संत परंपरा और सामाजिक सुधार में संत रविदास के योगदान को इस निर्णय का आधार बनाया है। नए नाम में संत रविदास के सम्मान के साथ भदोही की पहचान भी शामिल रहेगी।   सपा सरकार में हटाया गया था संत रविदास का नाम भदोही के नामकरण का राजनीतिक इतिहास रहा है। वर्ष 1997 में मायावती सरकार ने जिले का नाम संत रविदास नगर किया था। वर्ष 2014 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार ने जिले का नाम बदलकर केवल भदोही कर दिया था। अब योगी सरकार ने संत रविदास का नाम फिर शामिल करने का निर्णय लिया है।   दलित और राजभर समाज को संदेश संत रविदास दलित समाज की आस्था और सामाजिक चेतना के प्रमुख प्रतीक हैं। वहीं भदोही की ऐतिहासिक पहचान भार राज से जुड़ी मानी जाती है। राजभर समाज इस विरासत को अपनी परंपरा से जोड़कर देखता है। ऐसे में जिले के नए नाम में संत रविदास और भदोही, दोनों को स्थान देने का राजनीतिक महत्व है। इसे दोनों समुदायों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने के साथ राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।   राजस्व संहिता के तहत होगा नाम परिवर्तन प्रदेश सरकार के अनुसार, नाम परिवर्तन का निर्णय उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की संशोधित धारा 6(2) के तहत लिया गया है। इस प्रावधान के अंतर्गत राज्य सरकार अधिसूचना जारी कर किसी राजस्व क्षेत्र का नामकरण कर सकती है। प्रस्ताव को केंद्र सरकार के 11 सितंबर 1953 के संबंधित परिपत्र के अनुरूप भी बताया गया है।

योगी कैबिनेट ने एसएएफ विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026 को दी मंजूरी, बड़े निवेश और हरित रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

लखनऊ उत्तर प्रदेश को सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में ‘उत्तर प्रदेश सतत विमानन ईंधन (सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल) विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026’ लागू करने को मंजूरी दी गई। नीति का उद्देश्य विमानन क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देने के साथ ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, निजी निवेश एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना और प्रदेश में हरित रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। इसमें कृषि अवशेष, नगरीय अपशिष्ट और अखाद्य तिलहनों जैसे स्थानीय फीडस्टॉक से एसएएफ उत्पादन को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में नई मूल्य श्रृंखला विकसित करने और किसानों की आय में विविधता लाने पर भी जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में धान की भूसी, गेहूं का भूसा और गन्ने की बगास जैसे कृषि अवशेष बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं, जिनसे पायरोलिसिस और गैसीफिकेशन जैसी तकनीकों के माध्यम से एसएएफ का उत्पादन किया जा सकता है। गन्ना उत्पादन और एथेनॉल निर्माण में प्रदेश की अग्रणी स्थिति इसे द्वितीय पीढ़ी के जैव ईंधन और अल्कोहल टू जेट एसएएफ तकनीकों के लिए मजबूत आधार प्रदान करती है। ₹200 करोड़ से अधिक निवेश वाली इकाइयों को प्रोत्साहन नीति में एसएएफ इकाइयों को निवेश के आधार पर तीन श्रेणियों में रखा गया है। ₹200-500 करोड़ तक पूंजी निवेश वाली इकाइयां वृहद, ₹500-1,500 करोड़ तक वाली मेगा और ₹1,500 करोड़ से अधिक निवेश वाली इकाइयां अल्ट्रा मेगा श्रेणी में होंगी। इन इकाइयों को स्टांप ड्यूटी में छूट/प्रतिपूर्ति, भू-उपयोग परिवर्तन प्रभार एवं विकास शुल्क में छूट, नेट एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, ब्याज सब्सिडी, 10 वर्षों तक इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट, कौशल विकास सब्सिडी, पेटेंट पंजीकरण शुल्क की प्रतिपूर्ति सहित विभिन्न प्रोत्साहन दिए जाएंगे। जरूरत के अनुसार कस्टमाइज्ड पैकेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए भी प्रावधान किया गया है। भूमि आवंटन की स्थिति में फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी भी मिलेगी। पांच वर्ष प्रभावी रहेगी नीति एसएएफ इकाइयों को वित्तीय प्रोत्साहनों की स्वीकृति और वितरण के लिए उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। आवेदनों के मूल्यांकन के लिए निदेशक, यूपीनेडा के स्तर पर मूल्यांकन समिति गठित की जाएगी। यह नीति लागू होने की तिथि से पांच वर्ष तक अथवा नई नीति के लागू होने तक प्रभावी रहेगी।

मैनपुरी में 37.86 किमी मार्ग होगा चार लेन, योगी 328.67 करोड़ रुपये की मिली मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में मैनपुरी जिले के शिकोहाबाद-भोगांव राज्य मार्ग संख्या-84 के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य की पुनरीक्षित प्रशासकीय और वित्तीय स्वीकृति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत घिरोर से भोगांव तक 31.30 किलोमीटर मार्ग को चार लेन में विकसित करने और 6.56 किलोमीटर लंबे घिरोर बाईपास का निर्माण किया जाएगा। कुल 37.86 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की पुनरीक्षित लागत 328.67 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। जाम की समस्या होगी दूर यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (दिल्ली-कोलकाता मार्ग) पर शिकोहाबाद की आबादी से शुरू होकर मैनपुरी में राज्य मार्ग संख्या-83 को पार करते हुए भोगांव में राष्ट्रीय राजमार्ग-91 (दिल्ली-कानपुर मार्ग) से जुड़ता है। आगरा से लखनऊ, कानपुर और कन्नौज की ओर जाने वाला भारी यातायात इसी मार्ग से गुजरता है। यातायात का दबाव अधिक होने के कारण यहां अक्सर जाम की स्थिति बनती थी। मार्ग के चार लेन में चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण से आवागमन अधिक सुगम होने की उम्मीद है। उपज मंडी तक पहुंचाने में किसानों को होगी आसानी मार्ग के विकास से आसपास के किसानों को अपनी कृषि उपज मंडी स्थल तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही क्षेत्रीय लोगों को जिला मुख्यालय आने-जाने में भी सहूलियत होगी। सड़क की क्षमता बढ़ने से यातायात के दबाव को कम करने और क्षेत्र में आवागमन व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

योगी सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, बाजरा का MSP ₹125 बढ़ा; जानें मक्का-ज्वार के नए रेट

लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष के लिए मक्का, बाजरा और ज्वार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की है। इन्हें 31 दिसंबर तक खरीदने के लिए 455 क्रय केंद्र खोले जाएंगे। किसानों को धान बेचने के 48 घंटे के अंदर भुगतान किया जाएगा। इस प्रस्ताव को शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पास किया गया। योगी आदित्यनाथ सरकार ने मोटे अनाज की क्रय नीति को मंजूरी दी गई। सरकार ने पिछले वर्ष से 10 रुपये बढ़ाकर मक्का का समर्थन मूल्य 2410 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। बाजरा का समर्थन मूल्य 2775 से बढ़ाकर 2900 रुपये प्रति क्विंटल, बाजरा के मूल्य में 125 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। हाइब्रिड ज्वार का समर्थन मूल्य 324 रुपये बढ़ाकर 4023 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। ज्वार की मालदांडी किस्म का समर्थन मूल्य 4073 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा। कैबिनेट ने मक्का के लिए 25 जिलों में 75 केंद्र खोल 15 हजार टन खरीदने का लक्ष्य रखा है। 33 जिलों में 300 केंद्र खोल 2.20 लाख टन बाजरा खरीदने का लक्ष्य है। 13 जिलों के 80 केंद्रों के माध्यम से 50 हजार टन ज्वार खरीदा जाएगा। अनाज खरीद का भुगतान किसानों को आधार से जुड़े और एनपीसीआइ से मैप्ड बैंक खाते में किया जाएगा। किसानों को आनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। क्रय केंद्रों पर ई-पाप मशीन से बायोमैट्रिक सत्यापन के बाद कंप्यूटराइज्ड खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर अनाज खरीदा जाएगा। धान क्रय का कार्यक्रम घोषित योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने 15 अक्टूबर से वेस्ट यूपी में धान की खरीद को मंजूरी दी है। प्रदेश में 15 अक्टूबर से 15 फरवरी तक धान खरीद होगी। एक नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान खरीद होगी, जोकि 28 फरवरी तक होगी। सरकार ने 65 लाख मिट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है। इसके लिए आठ क्रय एजेंसियां निर्धारित की गई हैं जोकि 4500 क्रय केंद्रों पर खरीद करेंगी। सरकार ने PCF, PCU, UPSS, मंडी परिषद, FPO, FPC, NCCF और नैफेड को खरीद की जिम्मेदारी दी है।  

योगी सरकार की सौगात, यूपी के 18 शहरों में शुरू होगी 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसों की सेवा

योगी कैबिनेट का फैसला: 18 शहरों में चलेंगी 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसें जीसीसी मॉडल पर होगा संचालन, 12 साल की होगी अनुबंध अवधि 12 मीटर की बस पर 40 लाख और 9 मीटर की बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान आगरा, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी समेत 18 शहरों को मिलेगा लाभ लखनऊ और कानपुर को मिलेंगी 300-300 बसें, वाराणसी में 250 और गोरखपुर में चलेंगी 150 इलेक्ट्रिक बसें यूपी में निर्मित बसों की खरीद को मिलेगी वरीयता, रोजगार के नए अवसरों की खुली राह लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश की नगरीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत उत्तर प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को व्यवस्थित करने के साथ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा (जेवर सहित) में बसें संचालित की जाएंगी। इनमें 9 मीटर और 12 मीटर लंबाई की वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी। अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से 12 वर्ष निर्धारित की गई है। लखनऊ और कानपुर को मिलेंगी 300-300 बसें नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रदेश के 18 शहरों में जल्द ही 1,725 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इनमें आगरा में 100, मथुरा-वृंदावन में 50, अलीगढ़ में 25, फिरोजाबाद में 25, गाजियाबाद में 100, मेरठ में 100, शाहजहांपुर में 25, बरेली में 25, मुरादाबाद में 25, सहारनपुर में 25, नोएडा (जेवर सहित) में 100, वाराणसी में 250, अयोध्या में 50, लखनऊ में 300, गोरखपुर में 150, कानपुर में 300, प्रयागराज में 50 और झांसी में 25 बसें चलाई जाएंगी। निजी ऑपरेटर करेंगे बसों का संचालन जीसीसी मॉडल के तहत निजी ऑपरेटर बसों की खरीद, चार्जिंग स्टेशन के लिए आवश्यक चार्जर की व्यवस्था, बस चालक एवं तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती तथा बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर ऑपरेटरों को संचालन एवं रखरखाव शुल्क (ओएंडएम फी) का भुगतान किया जाएगा। वहीं, टैरिफ/प्रयोक्ता शुल्क निर्धारण सरकार द्वारा किया जाएगा। बसों की खरीद पर मिलेगा अनुदान परियोजना के तहत 12 मीटर लंबी प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस के लिए 40 लाख रुपये और 9 मीटर लंबी बस के लिए 35 लाख रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। बसों के संचालन के लिए डिपो निर्माण हेतु संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण की ओर से आवश्यकतानुसार भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। निजी निवेश से सेवाओं में सुधार की उम्मीद सरकार के अनुसार, निजी निवेश के माध्यम से बस संचालन में सरकारी व्यय का बोझ कम होगा और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। निजी ऑपरेटर दक्षता, समयबद्धता एवं उपभोक्ता संतुष्टि पर विशेष ध्यान देंगे। निजी ऑपरेटरों को प्रतिस्पर्धा के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे नवीनतम तकनीक एवं सेवा सुधार लागू होंगे। निजी ऑपरेटर निविदा प्रक्रिया से चयनित होकर अनुबंधित किए जाएंगे और उपभोक्ताओं को सीधा लाभ प्राप्त होगा। प्रदेश में निर्मित बसों को मिलेगी वरीयता योजना के तहत नई इलेक्ट्रिक बसों के खरीद के संबंध में परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित नीति के क्रम में एल-1 के रेट पर उत्तर प्रदेश में निर्मित बसों के क्रय को वरीयता प्रदान किया जाना प्रस्तावित है। इससे प्रदेश में बस निर्माण और आपूर्ति से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।

योगी सरकार का मिशन शक्ति अभियान: गांव-गांव पहुंच रही महिला पुलिस, महिलाओं की सुरक्षा पर जोर

योगी सरकार के मिशन शक्ति अभियान से महिलाएं हुईं सशक्त, 99 हजार से अधिक गांवों तक पहुंची महिला बीट पुलिस  – अभियान के फेज-5 के द्वितीय चरण में 2.90 लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक स्थलों की जांच – 66 हजार से अधिक महिलाओं और बेटियों ने दौड़ में लिया भाग –  38.64 लाख से अधिक लोगों की हुई चेकिंग, 1,841 अभियोग किए गये दर्ज लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने के लिए चलाया जा रहा मिशन शक्ति अभियान के प्रभावी परिणाम सामने आये हैं। मिशन शक्ति अभियान ने जहां एक ओर आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाया, वहीं दूसरी ओर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराकर उन्हे सशक्त बनाया। अभियान के फेज-5 के द्वितीय चरण 19 मार्च-26 से 17 अप्रैल तक प्रदेशभर में करीब 3 लाख स्कूल, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों की जाचं की गई। इसके अलावा महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन सेवाओं के प्रति जागरूक करने के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया।  66 हजार से अधिक महिलाओं और बालिकाओं ने दौड़ में लिया भाग  महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की नोडल अधिकारी एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि योगी सरकार प्रदेश में महिला सुरक्षा को कानून-व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए जागरूकता, संवाद और सख्त कार्रवाई पर एक साथ जोर दे रही है। इसी क्रम में मिशन शक्ति अभियान फेज-5 का द्वितीय चरण प्रदेश भर में संचालित किया गया। इस दौरान पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभागों ने समन्वित रूप से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। अभियान में महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा संबंधी जानकारी देने के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया। अभियान के तहत महिला सुरक्षा को लेकर जनपद स्तर पर 66,441 महिलाओं और बालिकाओं ने आयोजित दौड़ कार्यक्रमों में प्रतिभाग किया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से 49,437 प्रचार-प्रसार सामग्री वितरित की गई। इनमें 1,930 जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और प्रेरणादायी महिलाओं ने भी भाग लिया। वहीं, धार्मिक स्थलों, मेलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित महिला चौपालों के माध्यम से 15,55,219 लोगों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन सेवाओं से संबंधित जानकारी दी गई। इन प्रयासों का उद्देश्य महिलाओं को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और जरूरत के समय उपलब्ध सहायता तंत्र का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है। 99 हजार से अधिक गांवों में पहुंची महिला बीट पुलिस अभियान के दौरान 1,593 मिशन शक्ति केंद्रों पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में 12,51,777 महिलाओं ने प्रतिभाग किया। इस दौरान 10,05,926 सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन से संबंधित पम्फलेट वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त, विभिन्न ग्राम पंचायतों और वार्डों में बीट पुलिस अधिकारियों ने 45,040 कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, बीसी सखी, लेखपाल, एएनएम, आशा वर्कर, ग्राम पंचायत अधिकारियों और रोजगार सेवकों सहित अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों ने सहयोग किया। इन कार्यक्रमों में 72,820 लोगों सहित जनमानस को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। महिलाओं की समस्याओं को सीधे सुनने और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने के लिए महिला बीट पुलिस अधिकारियों ने व्यापक स्तर पर भ्रमण किया। अभियान के दौरान महिला बीट अधिकारियों ने 99,377 ग्रामों और वार्डों का दौरा किया। इस दौरान घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायता से जोड़ने पर जोर दिया गया। घरेलू विवाद, भरण-पोषण और अन्य समस्याओं से जुड़े मामलों में पीड़ितों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने तथा जरूरत के अनुसार संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने की पहल की गई। 2.90 लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक स्थलों की जांच महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभियान के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस की निगरानी और चेकिंग भी तेज की गई। 2,90,153 स्कूल-कॉलेजों तथा चौराहों, बाजारों, मॉल, पार्क और भीड़भाड़ वाले स्थानों की जांच की गई। इस कार्रवाई के दौरान 38,64,614 व्यक्तियों की चेकिंग की गई। वहीं 1,841 अभियोग पंजीकृत किए गए, 6276 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 16,85,263 व्यक्तियों को चेतावनी दी गई।  अभियान के दौरान 59,897 स्थानों पर पुलिस की गश्त और फुट पेट्रोलिंग की गई। इसके साथ ही महिला अपराधों से जुड़े संवेदनशील स्थलों और हॉटस्पॉट क्षेत्रों में 39,454 कैमरे अधिष्ठापित कराए गए। राजकीय रेलवे पुलिस ने भी मिशन शक्ति अभियान से संबंधित 4,893 रेलवे स्टेशनों पर 11,226 ट्रेनों में 1,69,201 प्रचार सामग्री वितरित की।