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उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग तथा वाधवानी फाउंडेशन की अनुषांगिक संस्था स्किल्स डेवलपमेंट नेटवर्क (एसडीएन) के मध्य रोज़गारपरक शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार प्राप्ति के लिए हुआ एमओयू

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रथम चरण में सहकारी गन्ना समितियों के सहयोग से संचालित इंटर कालेजों एवं महाविद्यालयों के जर्जर भवनों को ठीक कराया गया। यहां अतिरिक्त शैक्षणिक कक्षों का निर्माण भी कराया जा रहा है। इन कॉलेजों में दी जा रही शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के उ‌द्देश्य से चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने युवाओं को कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग ने वाधवानी फाउंडेशन के "स्किल्स डेवलपमेंट नेटवर्क (एसडीएन) के साथ एमओयू किया है। इसका उद्देश्य सहकारी गन्ना समितियों के सहयोग से संचालित शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक कौशल प्रदान करना है, जिससे वे रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में सफलतापूर्वक आगे बढ़ सकें। 75 से 90 घंटे का दिया जाएगा विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. ने बताया कि प्रदेश में सहकारी गन्ना समितियों द्वारा संचालित 09 इंटर कॉलेजों/महाविद्यालयों में लगभग 15,440 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। वर्तमान परिदृश्य में उद्योगों की मांग के अनुरूप व्यावहारिक ज्ञान, संचार कौशल, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क, समस्या समाधान तथा कार्यस्थल के अनुरूप व्यवहार विकसित करना भी आवश्यक है। यह एमओयू इसे ध्यान में रखकर किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 3,500 विद्यार्थियों को 75 से 90 घंटे का विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के अंतर्गत बालिकाओं के समग्र विकास व कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्हें रोजगारोन्मुखी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।  प्रशिक्षण कार्यक्रम में "एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स कार्यक्रम" के अंतर्गत विद्यार्थियों को प्रभावी संचार कौशल, साक्षात्कार की तैयारी, शैक्षणिक लेखन, व्यक्तित्व विकास, प्रस्तुतिकरण, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता, व्यावसायिक नैतिकता, नेतृत्व क्षमता तथा कार्यस्थल पर अपेक्षित व्यवहार संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।  शिक्षकों व विद्यार्थियों को निःशुल्क उपलब्ध होगी शिक्षण सामग्री फाउंडेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष सुनील दहिया ने बताया कि एआई (ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर आधारित अत्याधुनिक लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) डिजिटल कंटेंट एवं इंटरएक्टिव शिक्षण सामग्री सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को निःशुल्क उपलब्ध करायी जायेगी। इस प्लेटफॉर्म पर डिजिटल कंटेंट, वीडियो लेक्चर, मूल्यांकन मॉड्यूल, अभ्यास सामग्री तथा इंटरैक्टिव शिक्षण संसाधन उपलब्ध रहेंगे। इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक "एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट प्रोग्राम" भी होगा, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों में उद्यमशीलता की भावना विकसित की जाएगी। कार्यक्रम के अंतर्गत युवाओं को नवाचार, स्टार्टअप, व्यवसाय प्रबंधन, जोखिम प्रबंधन, अवसरों की पहचान तथा स्वरोजगार के विभिन्न आयामों की जानकारी प्रदान की जाएगी।  राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ देंगे परामर्श समय-समय पर 'राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन कार्यशालाएं, मास्टरक्लास, करियर परामर्श सत्र भी होंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योग जगत की वर्तमान प्रवृत्तियों, रोजगार के अवसरों, नई तकनीकों एवं भविष्य की आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त होगी। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगार एवं इंटर्नशिप के अवसरों से जोड़ना भी है। कार्यक्रम की नियमित समीक्षा भी होगी।  उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 20 विद्यार्थियों को दिया जाएगा पारितोषिक  गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने बताया कि प्रतिभाशाली गरीब विद्यार्थियों के लिए गन्ना समितियों एवं चीनी मिलों के सहयोग से अध्ययन सामग्री-पुस्तकें व मोबाइल निःशुल्क उपलब्ध कराये जाने के साथ साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले टॉप 20 विद्यार्थियों को चीनी मिलों के सहयोग से पारितोषिक भी प्रदान किया जाएगा।  इस एमओयू पर वाधवानी फाउंडेशन की ओर से कार्यकारी उपाध्यक्ष सुनील दहिया एवं गन्ना आयुक्त की ओर से डॉ. वी.बी. सिंह, अपर गन्ना आयुक्त (समितियां) द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान अपर गन्ना आयुक्त (प्रशासन) अभिषेक आनंद, अपर गन्ना आयुक्त (विकास) वी.के. शुक्ल, अपर गन्ना आयुक्त (क्रय) विश्वेश कनौजिया आदि मौजूद रहे।

पीवीवीएनएल, डीवीवीएनएल, पीयूवीवीएनएल और केस्को में शिकायतों का शत-प्रतिशत समाधान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेशवासियों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। एक ओर जहां तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है और बिजली की मांग में भारी वृद्धि दर्ज की जा रही है, वहीं दूसरी ओर उप्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निस्तारण में भी नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। मई में प्राप्त कुल शिकायतों में से 99.24 प्रतिशत शिकायतों का सफल समाधान कर विभाग ने अपनी कार्यकुशलता और जवाबदेही का परिचय दिया है। 99.24 प्रतिशत शिकायतों का निस्तारण हुआ आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में प्रदेश भर से कुल 1855713 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 1841683 शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण कर दिया गया। शिकायतों के निस्तारण की दर 99.24 प्रतिशत रही, जो उपभोक्ता सेवा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सतत मॉनिटरिंग और ऊर्जा विभाग की सक्रिय कार्यशैली के चलते उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। एमवीवीएनएल में 6 लाख 30 हजार से ज्यादा शिकायतों का हुआ निस्तारण प्रदेश के सभी डिस्कॉम पर प्राप्त शिकायतों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) में 404173 शिकायतें दर्ज की गईं, जबकि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) में 359501 शिकायतें प्राप्त हुईं। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एमवीवीएनएल) में 633102 शिकायतें, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीयूवीवीएनएल) में 338104 शिकायतें और कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (केस्को) में 1,20,833 शिकायतें दर्ज हुईं। इन सभी डिस्कॉम पर आने वाली लगभग सभी शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। शिकायतों का सफल समाधान हुआ जिसमें बिजली आपूर्ति से संबंधित शिकायतें सबसे अधिक रही है। इसके अलावा बिल भुगतान, बिल संशोधन, स्मार्ट मीटर, मीटर संबंधी समस्याएं, सेवा संबंधी शिकायतें तथा कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें भी बड़ी संख्या में प्राप्त हुईं। हालांकि विभागीय टीमों ने इन सभी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकतर मामलों का सफल समाधान किया है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में बिजली सप्लाई से संबंधित सबसे अधिक 4 लाख 80 हजार से ज्यादा शिकायतें प्राप्त हुईं। इन शिकायतों पर लगातार निगरानी रखी गई और लगभग सभी मामलों का निस्तारण कर दिया गया।  पीयूवीवीएनएल की सभी शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण इसी प्रकार पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में 2 लाख 97 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं, जिनका शत-प्रतिशत निस्तारण किया गया। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में 2 लाख 52 हजार से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं और सभी शिकायतों का समाधान सुनिश्चित किया गया। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में 2 लाख 13 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं, जिनका भी 100 प्रतिशत निस्तारण किया गया। वहीं केस्को क्षेत्र में 94,944 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिन पर प्रभावी कार्रवाई करते हुए सभी शिकायतों का समाधान किया गया है। अब उपभोक्ता ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं शिकायत यूपीपीसीएल ने डिजिटल सेवाओं के विस्तार के माध्यम से भी उपभोक्ताओं को बड़ी सुविधा प्रदान की है। अब उपभोक्ता न केवल अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं, बल्कि उसकी स्थिति की जानकारी भी घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं। 1912 शिकायत प्रबंधन प्रणाली और ऑनलाइन ट्रैकिंग सुविधा के माध्यम से शिकायतों की निगरानी पहले की तुलना में अधिक आसान और पारदर्शी हो गई है। उपभोक्ता वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जाकर अपनी शिकायत की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं उप्र. पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल 1912 पर आने वाली शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के लिए लगातार निर्देशित करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि 1912 पर आने वाली शिकायतों को तब तक समाप्त न माना जाए, जब तक उपभोक्ता संतुष्ट न हो।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर उत्तर प्रदेश में भी होगा भव्य आयोजन

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर शुक्रवार को भव्य आयोजन होगा। योगी सरकार पूरे प्रदेश में विश्वास, विकास व जनकल्याण के गौरवपूर्ण 12 वर्ष की उपलब्धि को धूमधाम से मनाएगी। मुख्यमंत्री सुबह लखनऊ व शाम को वाराणसी में होने वाले भव्य समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। वहीं लोकभवन में होने वाले कार्यक्रम में राजग सरकार के सहयोगी दलों (अपना दल एस, सुभासपा, राष्ट्रीय लोकदल व निषाद पार्टी) के प्रमुख/मंत्री भी मौजूद रहेंगे।  पीएम मोदी के सुशासन के 12 वर्ष की उपलब्धियों को बताएगी योगी सरकार सुशासन को समर्पित पीएम मोदी के द्वारा 140 करोड़ भारतीयों की निरंतर सेवा के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकभवन में मीडिया संवाद करेंगे। मोदी सरकार के नेतृत्व में जनकल्याण, अवस्थापना एवं आस्था को मिले सम्मान के विषय में संपूर्ण जानकारी भी देंगे। मोदी सरकार के 12 वर्षों की विकास यात्रा को लेकर यहां प्रदर्शनी भी लगेगी। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।  सरकार के साथ ही भाजपा संगठन व सहयोगी दल के नेता भी रहेंगे मौजूद   भव्य समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संगठन की तरफ से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष/केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी भी रहेंगे। साथ ही उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के मंत्री व सहयोगी दल अपना दल (एस) के आशीष पटेल, निषाद पार्टी के डॉ. संजय निषाद, सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर व राष्ट्रीय लोकदल के अनिल कुमार भी रहेंगे।  इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाएंगे सीएम योगी लोकभवन में मुख्य कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अपने सरकारी आवास से इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। सीएम योगी नोएडा में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की 110 में से 45 इलेक्ट्रिक बसों (प्रथम चरण) का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फ्लैग ऑफ करेंगे। साथ ही नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी शुभारंभ करेंगे। यहां कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता ‘नंदी’ व परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी मौजूद रहेंगे।  शाम को वाराणसी में होने वाले कार्यक्रम में पहुंचेंगे मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार शाम को बाबा विश्वनाथ की नगरी व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी पहुंचेंगे। वे यहां गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल चौकाघाट में होने वाले कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। मुख्यमंत्री यहां शहरी आजीविका मिशन, उद्योग विभाग समेत विभिन्न विभागों की योजना के लाभार्थियों को भी सम्मानित करेंगे। यहां एक जनपद-एक व्यंजन समेत अनेक विभागों के स्टॉल भी लगेंगे।

सपा सरकार में ठहरे निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार को मुख्यमंत्री योगी ने दी रफ्तार

लखनऊ कभी निवेशकों की प्राथमिकता सूची में पीछे रहने वाला उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था में शामिल हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले 9 वर्षों में प्रदेश ने औद्योगिक विकास, निवेश, बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन के क्षेत्र में बड़े स्तर पर उपलब्धियां हासिल की हैं। केंद्र व राज्य सरकार के अभूतपूर्व तालमेल ने विकास की कई अहम पहलों के जरिए यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर किया है। सपा सरकार में उपेक्षित, योगी सरकार में रिकॉर्ड निवेश 2017 से पहले सपा सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश की गति लगभग ठहर सी गई थी। कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और निवेश-अनुकूल माहौल की कमी को निवेशकों की बड़ी चिंता माना जाता था, लेकिन 2017 के बाद स्थिति तेजी से बदली। पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों से लगभग 1.10 करोड़ रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के चार चरणों में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रोजेक्ट धरातल पर उतारे जा चुके हैं, जिनसे लगभग 60 लाख रोजगार अवसर पैदा हुए हैं। वहीं 7.5 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट के साथ 5वीं जीबीसी प्रस्तावित है। पिछली सपा सरकार के मुकाबले यह बदलाव दर्शाता है कि निवेशकों का विश्वास उत्तर प्रदेश में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुआ है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत जटिल प्रक्रियाओं के अनुपालन में कमी लाने के लिए यूपी को भारत में प्रथम स्थान मिला है। 65 विभागों में प्रक्रियागत 4,675 अनुपालन कम किए गए है। व्यापार में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 13 राज्य अधिनियमों में लगभग 99 प्रतिशत छोटे दंडात्मक प्रावधानों को हटाया गया है। एक्सप्रेसवे क्रांति से औद्योगिक विकास में तेजी उत्तर प्रदेश की औद्योगिक सफलता के पीछे सबसे बड़ा आधार मजबूत बुनियादी ढांचा है। 2017 तक प्रदेश में सीमित एक्सप्रेसवे नेटवर्क था, जिनकी संख्या महज दो थी। वहीं आज उत्तर प्रदेश 22 एक्सप्रेसवे वाले राज्य के रूप में विकसित हो रहा है। फिलहाल यूपी में 9 एक्सप्रेसवे संचालित, 3 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित हैं। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा है। एक्सप्रेसवे के किनारे 26 जिलों में 27 स्थानों पर 5,300 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित की गई है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीआईडीए) के माध्यम से 56,662 एकड़ क्षेत्र में नया औद्योगिक शहर विकसित किया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास का बड़ा केंद्र बनेगा। जल-थल-आकाश: हर तरफ खुले रास्ते वर्ष 2017 से पहले यूपी में केवल दो हवाई अड्डे (लखनऊ, वाराणसी) पूरी तरह और गोरखपुर हवाई अड्डा आंशिक रूप से क्रियाशील था। मोदी सरकार के मार्गदर्शन में योगी सरकार ने 9 वर्षों में इस क्षेत्र में तेजी से विकास किया। नतीजा यह कि प्रदेश में 17 हवाई अड्डे वर्तमान में चालू हैं और 7 अन्य हवाई अड्डों का विकास जारी है। नोएडा (जेवर) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन के साथ ही यूपी 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला पहला राज्य बन गया। माल ढुलाई के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के तहत पूर्वी फ्रेट कॉरिडोर का 1,050 किमी से अधिक हिस्सा यूपी से गुजरता है। पूर्वी और पश्चिमी डीएफसी का जंक्शन दादरी में स्थित है। भारत के 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से 11 यूपी में हैं। भारत का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल और फ्रेट विलेज (100 एकड़ से अधिक) वाराणसी में निर्माणाधीन है। एफडीआई, फैक्ट्रियों और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि औद्योगिक विकास का सबसे बड़ा संकेतक विदेशी निवेश, फैक्ट्रियों की संख्या और निर्यात होता है। इन तीनों क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। जून 2000 से मार्च 2017 तक प्रदेश में मात्र 3,303 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया था। जबकि अप्रैल 2017 से जून 2025 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 17,004 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। योगी सरकार के कुशल नेतृत्व में इसमें पांच गुना से अधिक वृद्धि हुई है। इसी तरह फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के तहत पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या सपा सरकार में 2016-17 में 14,169 थी, जो फरवरी 2026 तक बढ़कर 31,459 हो गई। यानी प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की संख्या दोगुने से अधिक हुई। निर्यात के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। 2016-17 में प्रदेश का कुल निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये था, जो फिलहाल दो लाख करोड़ से आगे निकल चुका है। आईटी और आईटीईएस निर्यात में और भी अधिक वृद्धि हुई है। यह 2015 के 15 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 82 हजार करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी 7 वर्षों में लगभग 1,058 प्रतिशत बढ़ा है। यह 3,862 करोड़ (2017-18) से बढ़कर 44,744 करोड़ (2024-25) हो चुका है। एमएसएमई व ओडीओपी बने गेमचेंजर योगी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में एक एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाना है। वर्तमान में प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में 3.11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। योजना के तहत 20,396 उद्यमियों को 903.63 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई, जिससे सवा तीन लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित हुए। कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए 8,435 लाभार्थियों को 80.48 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। इसके साथ ही 24 जिलों में 30 कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से सवा चार लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। प्लेज योजना के तहत 12 औद्योगिक पार्कों (10 से 50 एकड़) के विकास पर भी काम चल रहा है। रक्षा, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर में नई पहचान पहले उत्तर प्रदेश को मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य माना जाता था, लेकिन गुजरे 9 वर्षों में यूपी हाई-टेक उद्योगों का केंद्र बनकर उभरा है। रक्षा औद्योगिक गलियारे के 6 नोड झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और कानपुर विकसित किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में अब तक … Read more

75 जिलों के 1183 परीक्षा केंद्रों पर तीन दिन चली परीक्षा, फर्जी अभ्यर्थियों और भ्रामक वीडियो प्रसारित करने वालों पर कड़ी कार्रवाई

लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा 8, 9 और 10 जून 2026 को प्रदेश के 75 जनपदों के 1183 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में शांतिपूर्ण, पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई। परीक्षा के दौरान अत्याधुनिक तकनीकी निगरानी, ई-केवाईसी सत्यापन, बायोमेट्रिक मिलान और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए भर्ती बोर्ड ने नकल, प्रतिरूपण और अफवाह फैलाने के प्रयासों पर प्रभावी अंकुश लगाया। भर्ती बोर्ड के अनुसार परीक्षा के लिए कुल 28,86,798 अभ्यर्थियों को आहूत किया गया था। इनमें 19,62,561 पुरुष अभ्यर्थी (67.99 प्रतिशत) तथा 9,24,237 महिला अभ्यर्थी (32.01 प्रतिशत) शामिल थीं। तीन दिवसीय परीक्षा में कुल 21,92,236 अभ्यर्थी उपस्थित हुए, जो कुल पंजीकृत अभ्यर्थियों का 75.94 प्रतिशत है। इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा का सफल आयोजन प्रदेश की प्रशासनिक क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। परीक्षा के दौरान जनपद गौतमबुद्ध नगर के मिहिर भोज पीजी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर एक अभ्यर्थी अंकित कुमार पुत्र सत्यदेव निवासी कुटियाना, थाना कोतवाली देहात, जनपद एटा की ई-केवाईसी मिसमैच होने पर जांच की गई। जांच में सामने आया कि वह कूटरचित आधार कार्ड के माध्यम से परीक्षा में शामिल हुआ था। मामले में थाना दादरी, गौतमबुद्ध नगर में 9 जून 2026 को मुकदमा संख्या 255/2026 धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत अभियोग पंजीकृत कर आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू की गई है। इसी प्रकार जनपद अलीगढ़ के डीएवी बालिका इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर अंकित पुत्र रविंद्र सिंह निवासी तालिबपुर, थाना खुर्जा देहात, जनपद बुलंदशहर को दूसरे अभ्यर्थी लोकेश पुत्र नेत्रपाल के नाम से परीक्षा देते हुए पकड़ा गया। बायोमेट्रिक मिसमैच और दस्तावेजों की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद थाना क्वार्सी, अलीगढ़ में 9 जून 2026 को मुकदमा संख्या 474/2026 धारा 318(4), 336(2), 336(3), 337, 338, 340(2) भारतीय न्याय संहिता तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम-2024 की धारा 4 एवं 13(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। भर्ती बोर्ड द्वारा जारी व्हाट्सएप नंबर 9454457951 पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर परीक्षा के संबंध में भ्रामक एवं तथ्यहीन वीडियो प्रसारित करने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई। यूट्यूब पर "Shubham Mittal" नामक चैनल द्वारा परीक्षा को लेकर भ्रामक वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले में थाना हुसैनगंज, लखनऊ कमिश्नरेट में मुकदमा संख्या 83/2026 दर्ज किया गया। आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 221 एवं 292, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम-2024 की धारा 4 एवं 13(2) के तहत कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में इंस्टाग्राम यूजर reshami68yadav द्वारा परीक्षा के संबंध में भ्रामक वीडियो प्रसारित करने पर थाना हुसैनगंज में मुकदमा संख्या 82/2026 धारा 221, 292 भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 66D सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दर्ज किया गया। इंस्टाग्राम यूजर durgeshsaxena94 एवं आईडी mukti.reem_98 द्वारा परीक्षा संबंधी भ्रामक सामग्री प्रसारित किए जाने पर थाना हुसैनगंज में मुकदमा संख्या 84/2026 धारा 221, 292 भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 66D सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2008 के अंतर्गत दर्ज किया गया। वहीं इंस्टाग्राम यूजर Rohit (Oye Hero) एवं आईडी Rohitvlogs_24*7 द्वारा परीक्षा को लेकर भ्रामक एवं तथ्यहीन वीडियो प्रसारित करने पर थाना हुसैनगंज में मुकदमा संख्या 85/2026 धारा 221, 292 भारतीय न्याय संहिता, धारा 66D सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम-2024 की धारा 4/13(2) के तहत अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई की जा रही है। बुधवार को जनपद कानपुर नगर के लालू प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज, माल रोड परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी नागेश कुमा…

नो ट्रिपिंग जोन बनाने की तैयारी, 1500 करोड़ की योजना पर काम तेज

लखनऊ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने लखनऊ नो ट्रिपिंग जोन बनाने की ठान ली है। इसमें केंद्र सरकार की मदद से आधुनिकीकरण का काम होगा। इससे लखनऊ की बिजली व्यवस्था को वर्ष 2032 के हिसाब से आधुनिक किया जाएगा। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड इसकी तैयारी में जुट गया है। राजधानी की बिजली व्यवस्था का इंफ्रास्ट्रक्चर वर्ष 2032 के हिसाब से तैयार करने की तैयारी है। इस पूरे काम को वर्ष 2028 मध्य तक करना होगा। वर्ष 2032 में राजधानी के उपभोक्ताओं को कितनी बिजली चाहिए होगी, कितने उपभोक्ता होंगे और इन्फ्रास्ट्रक्चर कितना मजबूत करना होगा। उसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने का काम तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। पंद्रह सौ करोड़ रुपये खर्च करके वर्ष 2028 मध्य तक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा। टीम देखेगी कि कैसे पांच वर्ष में बिजली की डिमांड लखनऊ में बढ़ी है। उसी आधार पर आगे की रणनीति बनाएगी। वर्ष 2032 में कितने बिजली उपकेंद्र व ट्रांसमिशन उपकेंद्र चाहिए होंगे। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) राजधानी में बिजली का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसमें पावर कारपोरेशन के निदेशक होंगे, मध्यांचल के निदेशक तकनीकी और लेसा के एक मुख्य अभियंता को रखा गया है। यह समिति दीपावली तक पूरी फिजिबिलिटी रिपोर्ट शक्ति भवन को सौंप देगी। इसके बाद मध्यांचल लखनऊ में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने पर काम करेगा। यह काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। हर वर्ष बढ़ रही है डिमांड और उपभोक्ता लखनऊ में हर वर्ष दो से ढाई सौ मेगावाट एम्पियर बिजली की डिमांड बढ़ रही है। हर वर्ष दो सौ मेगावाट की खपत और एक लाख उपभोक्ता बढ़ रहे है। इसको देखते हुए नए ट्रांसमिशन बिजली उपकेंद्र के साथ ही नए बिजली उपकेंद्र भी नए विकसित क्षेत्रों में बनाए जाएंगे। वहीं पुराने लखनऊ व घनी आबादी वाले क्षेत्र में पावर ट्रांसफार्मर रखे जाएंगे। इसके लिए जमीन भी तलाशी जाएगी, जिससे छोटे बिजली उपकेंद्र भी वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बनाए जा सके। बिजली उपकेंद्र को डबल व त्रिपल सोर्स से लैस करने पर फोकस होगा। वीआइपी क्षेत्रों में एलटी केबल भी ओवरहेड न जाए, उन्हें ट्रंच लाइन में ले जाया जाए, इस पर भी विचार होगा।  

3D तकनीक से जीवंत होंगे 16 संस्कार, यूपी का नया सांस्कृतिक म्यूजियम तैयार

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जल्द ही ऐसा सांस्कृतिक संग्रहालय विकसित होने जा रहा है, जहां जन्म से मोक्ष तक आध्यात्म का हाइटेक संगम होगा। इसके साथ ही जनजातीय विरासत, लोक परंपराएं, संस्कार और भारतीय जीवन दर्शन आधुनिक तकनीक के साथ जीवंत रूप में देखने को मिलेंगे। इस हाइटेक म्यूजियम में 3डी तकनीक से जन्म से मृत्यु तक के 16 संस्कार दिखेंगे। बीकेटी के चंद्रिकादेवी मंदिर के पास उत्तर प्रदेश संस्कृति संग्राहलय-म्यूजियम एंड रिचुअल सेंटर परियोजना के निर्माण और क्यूरेशन कार्य के लिए राज्य सरकार ने करीब 23.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये की धनराशि जारी जारी कर दी गई है। इस परियोजना का काम दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सोलह संस्कारों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा इस हाईटेक संग्रहालय का सबसे खास हिस्सा क्यूरेशन फ्रेमवर्क होगा, जिसमें जन्म से मृत्यु तक भारतीय जीवन यात्रा और अर्थ, धर्म, काम तथा मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों को केंद्र में रखा गया है। आधुनिक तकनीकों जैसे थ्री डी प्रोजेक्शन मैपिंग, होलोग्राफिक प्रोजेक्शन, पैनोरमिक वीडियो वॉल, काइनेटिक मूर्तियां और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन के जरिए अमूर्त आध्यात्मिक अवधारणाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। गैलरी वन में भारतीय रीति-रिवाजों की उत्पत्ति, वैदिक परंपराएं और प्रकृति के पांच तत्व-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के साथ उनके संबंध को दर्शाया जाएगा। यहां 270 डिग्री प्रोजेक्शन स्क्रीन पर ओरिएंटेशन फिल्म दिखाई जाएगी। इसी गैलरी में सोलह संस्कारों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जिनमें गर्भाधान, नामकरण, अन्नप्राशन, उपनयन, विवाह, संन्यास और अंत्येष्टि जैसे संस्कार शामिल होंगे। प्रवेश प्लाजा से ओपन थिएटर तक ढेरों सुविधाएं परियोजना के तहत प्रवेश प्लाजा, पार्किंग, स्मारिका केंद्र, कैफेटेरिया, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, आवास ब्लॉक, ओपन थिएटर, तालाब, एडमिन ब्लॉक, निगरानी टावर और सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। संग्रहालय का पूरा ढांचा पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक डिजाइन के समन्वय पर आधारित होगा। यहां आने वाले पर्यटक केवल प्रदर्शनी नहीं देखेंगे, बल्कि भारतीय संस्कारों और जीवनचक्र को अनुभव भी कर सकेंगे। पर्यटकों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनेगा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस परियोजना को इस तरह तैयार किया जाएगा कि यह केवल संग्रहालय न रहकर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत केंद्र बन जाए। यह केंद्र लखनऊ में सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देगा और देश-विदेश के पर्यटकों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनेगा।

जौनपुर में सबसे ज्यादा, गौतमबुद्धनगर में सबसे कम मतदाता—जानें पूरी सूची

लखनऊ यूपी निर्वाचन आयोग ने बुधवार को बहुप्रतिक्षीत त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। इसमें कुल 12.58 करोड़ मतदाता हैं। पुनरीक्षण में 29 लाख के नाम बढ़े हैं और 2.03 करोड़ के नाम सूची से काटे गए हैं। जौनपुर में सबसे ज्यादा 36.97 लाख और गौतमबुद्धनगर में सबसे कम 2.09 लाख मतदाता हैं। पहली बार सभी मतदाताओं के स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) जारी किए गए हैं। चुनाव में फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) की मदद से फर्जी वोटिंग रोकी जाएगी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अब फर्जी मतदान करना संभव नहीं होगा। फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) से मतदाताओं की फोटो खींचकर उसका तुरंत पूरा ब्योरा चेक किया जाएगा। इससे पहले किस मतदान किया है, तो तुरंत पकड़ा जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग तकनीक के प्रयोग से फर्जी मतदान को रोकेगा। नई सूची में 2.32 करोड़ मतदाताओं के नाम जोड़े गए राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी की। वर्ष 2021 की मतदाता सूची में 12.29 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल थे। वर्ष 2025-26 की मतदाता सूची में 12.58 करोड़ मतदाता हैं। नई मतदाता सूची में कुल 2.32 करोड़ मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। मृतक व स्थानांतरित इत्यादि 2.03 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। ऐसे में 29.01 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची में बढ़े हैं। जौनपुर में सबसे ज्यादा, गौतमबुद्धनगर में सबसे कम मतदाता जौनपुर में सबसे अधिक 36.97 लाख, दूसरे नंबर पर आजमगढ़ में 35.76 लाख व तीसरे नंबर पर प्रयागराज में 34.95 लाख मतदाता हैं। सबसे कम गौतमबुद्धनगर में 2.09 लाख मतदाता हैं। सबसे कम मतदाता वाले जिलों में दूसरे नंबर पर महोबा में 5.88 लाख व तीसरे नंबर पर चित्रकूट में 7 लाख मतदाता हैं। ब्लॉक प्रमुखों का 19 जुलाई को खत्म होगा कार्यकाल ग्राम प्रधानों के बाद जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई व ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म होगा। तब तक अगर चुनाव न हुए तो इनका भी कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के बाद इसकी मांग भी तेज हो गई है। ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल थे 12.69 करोड़ वोटर राज्य निर्वाचन आयोग ने 23 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की थी, इसमें कुल 12.69 करोड़ मतदाता शामिल थे। इसके बाद मतदाताओं को दावे व आपत्तियों का समय दिया गया और अंतिम मतदाता सूची जारी की गई। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सभी जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा किया गया है।

चांदी महंगी होने पर बदली योजना, दुल्हन के खाते में बढ़कर भेजे जाएंगे 64 हजार रुपये

लखनऊ मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में राज्य सरकार ने बदलाव करते हुए पायल और बिछिया उपहार की जगह भी दुल्हन के खाते में धनराशि ट्रांसफर की जाएगी। ये बदलाव चांदी की कीमतों में उछाल आने के बाद किया गया है सरकार ने अब विवाह करने वाली कन्याओं को दी जाने वाली चांदी की पायल और बिछिया के बदले भी नकद राशि देने का फैसला किया है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव प्रवीण मिश्र द्वारा शासनादेश जारी कर दिया गया है। क्या है मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रति युगल एक लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। पूर्व में इसमें से 60 हजार रुपये की राशि दुल्हन के खाते में भेजी जाती थी और 25 हजार रुपये से पायल, बिछिया सहित अन्य उपहार दिए जाते थे। जबकि 15 हजार रुपये की राशि आयोजन पर खर्च की जाती है। लेकिन पिछले कुछ समय से चांदी की कीमतों में भारी उछाल आ रहा है। जिसके बाद चांदी की पायल और बिछिया नहीं देने का निर्णय लिया गया है। इसके बजाय चार हजार रुपये की राशि दुल्हन के खाते में भेजी जाएगी। क्यों हुआ बदलाव इस तरह से दुल्हन के खाते में कुल 64 हजार रुपए भेजे जाएंगे। उपहार सामग्री पर 21 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत पहले निर्धारित वजन (30 ग्राम चांदी की पायल और 10 ग्राम चांदी की बिछिया) के लिए 4 हजार रुपए निर्धारित थे, लेकिन चांदी की बढ़ती कीमतों के बाद 4 हजार रुपए में ये सब खरीद पान मुश्किल है। ऐसे में सरकार ने 4 हजार रुपए सीधे दुल्हन के खाते में भेजने का निर्णय लिया है। इस नए फैसले के बाद अब कन्या के बैंक खाते में 60 हजार की जगह कुल 64 हजार भेजे जाएंगे। बाकि योजना में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

एफपीपीसीए वसूली पर विवाद, नियामक आयोग ने कॉर्पोरेशन को फिर भेजा नोटिस

लखनऊ प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं से जून माह में 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क वसूला जा रहा है। इस मामले में नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को दोबारा नोटिस जारी किया है। उन्हें 19 जून तक इस वसूली का आधार बताने वाली रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। विद्युत उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 10 प्रतिशत ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) की वसूली हो रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसके विरोध में नियामक आयोग में याचिका दायर की। आयोग ने 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को नियम विरुद्ध बताया। उसने पॉवर कॉर्पोरेशन को नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे थे। सप्ताह भर बाद भी कॉर्पोरेशन जवाब नहीं दे पाया। प्रबंध निदेशक ने जवाब के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। वर्मा ने इस पर आपत्ति जताई और वसूली रोकने की मांग की। इसके बाद नियामक आयोग ने बुधवार को प्रबंध निदेशक को फिर नोटिस भेजा। आयोग की सख्त टिप्पणी आयोग ने अपने नए आदेश में स्पष्ट किया है कि एफपीपीसीए के आंकड़े यूपीपीसीएल के पास होने चाहिए। यूपीईआरसी विनियमों के तहत यह जानकारी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक होनी चाहिए थी। कॉर्पोरेशन ने आयोग द्वारा मांगी गई मूल सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराईं। वह अन्य राज्यों में लागू व्यवस्था का अध्ययन करने की बात कर रहा है। जबकि आयोग ने केवल उत्तर प्रदेश में 10 प्रतिशत एफपीपीसीए के आंकड़ों का आधार पूछा था। बिना आंकड़े वसूली अवैध अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि कॉर्पोरेशन के पास एफपीपीसीए निर्धारण के आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं से की जा रही वसूली अवैध है। यह स्वयं संदेह के घेरे में आ जाती है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर है क्योंकि लाखों उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने आयोग से तत्काल 10 प्रतिशत की वसूली पर रोक लगाने की मांग की। पारदर्शिता और जवाबदेही परिषद अध्यक्ष ने बताया कि आयोग ने यूपीपीसीएल को 19 जून तक सभी मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा है। आयोग का यह आदेश इस बात का संकेत है कि नियामक संस्था मामले को गंभीरता से ले रही है।  उपभोक्ताओं से अतिरिक्त धनराशि वसूलने से पहले सभी गणनाएं और नियामकीय प्रक्रियाएं स्पष्ट होनी अनिवार्य हैं।  यदि नियमानुसार अभिलेख वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं किए गए, तो यह नियामकीय प्रावधानों का उल्लंघन है। आयोग ने 1 जून को ही इस आदेश को गैर कानूनी बताया था।