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कौशल विकास मिशन की नई पहल: Skill के साथ Financial Intelligence पर जोर

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के यूपीएसडीएम और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDUGKY) के अंतर्गत प्रदेश भर में 1000 से अधिक ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 1.5 लाख से अधिक युवाओं को अगले हफ्ते से फाइनेंशियल स्किल्स की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। योगी सरकार ने पहल की है। प्रदेश के युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ना ही अब उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का लक्ष्य नहीं है। मिशन ने अपनी प्राथमिकताओं का दायरा बढ़ाते हुए युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, जागरूक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार नागरिक बनाने का निर्णय लिया है। यह पहल मिशन निदेशक श्री पुलकित खरे के निर्देशन और दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उनके इसी विज़न को धरातल पर उतारते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बीच शुक्रवार को एमओयू हुआ। मिशन निदेशक की पहल पर पहली बार कौशल प्रशिक्षण को वित्तीय शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। MoU से पहले मिशन मुख्यालय स्थित सभागार में Financial Literacy & Awareness Workshop का आयोजन किया गया, जिसमें विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों को वित्तीय जागरूकता एवं आर्थिक निर्णय क्षमता का महत्व बताया गया । मिशन निदेशक भी वर्कशॉप में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाओं और वित्तीय अनिश्चितताओं के दौर में युवाओं को वित्तीय शिक्षा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने फाइनेंशियल स्किलिंग की ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है । एक्सपर्ट्स ने बताए वित्तीय सफलता के 12 मूल मंत्र प्रेसेंटेशन के माध्यम से एनएसई के अधिकारियों ने फाइनेंशियल सक्सेस के 12 मूल मंत्र बताए। उन्होंने बताया पहले खुद के भविष्य के लिए बचत करें। इनकम से कम खर्च करें। आपातकालीन फंड तैयार रखें। हाई इंटरेस्ट पर लोन लेने से बचें, रेगुलर इन्वेस्टमेंट करें। इन्वेस्टमेंट में विविधता रखें, रिस्क और रिटर्न की समझ रखें, टैक्स को देखते हुए निवेश करें, आवश्यक बीमा करवाएं, लॉन्ग टर्म एसेट्स लें, समय-समय पर इन्वेस्टमेंट की समीक्षा करें। ऐप बनेगा युवाओं का डिजिटल वित्तीय मार्गदर्शक वर्कशॉप में कर्मचारियों को SaaRthi App के बारे में भी विस्तार से बताया गया । यह इन्वेस्टमेंट एजुकेशन के लिए बनाया गया एक उपयोगी डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो उपयोगकर्ताओं को इन्वेस्टमेंट संबंधी शैक्षणिक वीडियो, वित्तीय योजना के टूल्स, कैलकुलेटर और Financial Health Check-up जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। कौशल के साथ आर्थिक समझ भी जरूरी यह MoU प्रदेश के युवाओं के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा। कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार पाने वाले युवा अब केवल आय अर्जित नहीं करेंगे, बल्कि यह भी समझेंगे कि पहली सैलरी का सही उपयोग कैसे करें, बजट और बचत कैसे शुरू करें, इन्वेस्टमेंट कब और कहाँ करना चाहिए, लोन से कैसे बचना है, भविष्य की आर्थिक सुरक्षा कैसे तैयार करनी है। यह ट्रेनिंग युवाओं को घर खरीदने, व्यवसाय शुरू करने, परिवार की आर्थिक सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवानिवृत्ति जैसे जीवन के बड़े निर्णय लेने में भी सक्षम बनाएगी । साथ ही वित्तीय जागरूकता उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी निवेश योजनाओं और आर्थिक जोखिमों से सुरक्षित रहने में भी मदद करेगी। युवाओं को “Skill + Financial Intelligence” के माध्यम से रोजगार से आगे बढ़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। वर्कशॉप में अपर मिशन निदेशक श्रीमती पूजा मिश्रा, जॉइंट डायरेक्टर श्री मयंक गंगवार, वित्त नियंत्रक श्री संदीप कुमार, असिस्टेंट डायरेक्टर श्री एम के सिंह, असिस्टेंट डायरेक्टर श्रीमती पवित्रा टंडन व मिशन के अन्य कर्मचारी मौजूद रहें । वहीं, NSE से चीफ रेग्युलेटरी ऑफिसर श्री अंकित शर्मा, वाइस प्रेसिडेंट श्री जोगिंदर सिंह और यूपी रीजन की सीनियर इंचार्ज श्रुति शर्मा भी वर्क शॉप में मौजूद रहीं । आर्थिक रूप से सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि कौशल विकास का वास्तविक उद्देश्य तब तक अधूरा है, जब तक हमारे युवा अपनी कमाई का सही उपयोग और मैनेजमेंट करना न सीखें। आज रोजगार पाना जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है वित्तीय रूप से समझदार बनना। एनएसई के साथ यह साझेदारी युवाओं को Skill + Financial Intelligence के मॉडल पर तैयार करेगी, जिससे वे केवल नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि आर्थिक रूप से सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।

योगी आदित्यनाथ ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां, 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का दावा

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के मौके पर शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों ने भारत की विकास यात्रा की सराहना की है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने अपनी शक्ति और सामर्थ्य का परिचय पूरे विश्व को दिया है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज का भारत बिना रुके, बिना डिगे और बिना थके आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक देश में लोगों को जाति, धर्म, भाषा और संप्रदाय के नाम पर बांटने की राजनीति हुई, लेकिन मोदी सरकार ने सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की भावना के साथ काम किया है। मोदी सरकार ने 25 करोड़ आबादी को गरीबी रेखा से निकाला उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता संभालने के समय देश की आबादी लगभग 120 करोड़ थी। इन 12 वर्षों में सरकार की योजनाओं के माध्यम से 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने में सफलता मिली है। योगी ने कहा कि दुनिया में बहुत कम ऐसे देश हैं जिनकी आबादी 25 करोड़ से अधिक है और भारत ने इतनी बड़ी आबादी को गरीबी से बाहर निकालकर ऐतिहासिक कार्य किया है। सीएम योगी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री की जनकल्याणकारी योजनाओं का सबसे अधिक लाभ उत्तर प्रदेश को मिला है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 65 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर मिले हैं। यूपी के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन का लाभ वहीं देशभर में बने 12 करोड़ शौचालयों में से करीब 3 करोड़ शौचालय उत्तर प्रदेश में बनाए गए हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत देश में जारी 60 करोड़ कार्डों में से 15 करोड़ लाभार्थी उत्तर प्रदेश के हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन योजना का लाभ मिल रहा है। जनधन खाते, उज्ज्वला योजना, स्वास्थ्य बीमा और अन्य योजनाओं ने गरीबों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। योगी ने कहा कि सरकार ने कभी वोट बैंक की राजनीति नहीं की, बल्कि गरीबों के उत्थान को प्राथमिकता दी। बेटियों को जन्म से स्नातक तक शिक्षा सहायता योजना का लाभ महिलाओं के सशक्तिकरण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बेटियों को जन्म से लेकर स्नातक तक शिक्षा सहायता की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। सेना, अंतरिक्ष और उद्योग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में ड्रॉपआउट दर कम हुई है और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके सफल नेतृत्व और 12 वर्षों के कार्यकाल के लिए बधाई भी दी। 2027 में 2017 से बड़ी जीत होगी- पंकज चौधरी वहीं इस मौके पर यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर सरकार बनाएगी और जीत की हैट्रिक लगाएगी। उन्होंने कहा कि 2027 में पार्टी को 2017 से भी बड़ी जीत हासिल होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जो विकास यात्रा शुरू हुई थी, वह अब विकसित भारत के संकल्प में बदल चुकी है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य किया गया है, जिससे जनता का भरोसा भाजपा के प्रति लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता ने बीते वर्षों में बदलते भारत को देखा है। देश ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल की हैं।

वन विभाग ने हटाया अवैध निर्माण, इटावा सफारी के पास जमीन पर किया वृक्षारोपण

इटावा इटावा में एक ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है, जिसकी चर्चा शहर से लेकर सोशल मीडिया तक हो रही है. वजह सिर्फ एक ध्वस्तीकरण अभियान नहीं, बल्कि वह तस्वीर है जिसने लोगों को चौंका दिया. जिन लोगों ने रात तक एक मजार देखा था, सुबह जब वे उसी स्थान पर पहुंचे तो पूरा दृश्य बदल चुका था. जहां पहले मजार दिखाई देती थी, वहां अब पेड़-पौधे और हरियाली नजर आ रही थी. मामला इटावा सफारी पार्क के पीछे बीहड़ क्षेत्र में स्थित सैयद बाबा की मजार से जुड़ा है. वन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में इस मजार से जुड़े निर्माण को हटाकर जमीन को खाली कराया गया. इसके बाद उसी स्थान पर वृक्षारोपण कर दिया गया. बताया जा रहा है कि कार्रवाई इतनी गोपनीय और शांतिपूर्ण तरीके से की गई कि आसपास के अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी तब हुई, जब काम पूरा हो चुका था. रात में चला अभियान, सुबह बदली तस्वीर स्थानीय लोगों के अनुसार देर रात प्रशासनिक गतिविधियां तेज हुईं. सुरक्षा व्यवस्था के बीच सबसे पहले मजार परिसर में मौजूद सामग्री और अवशेषों को हटाया गया. इसके बाद बुलडोजर की मदद से वहां बने कमरे और अन्य निर्माण को ध्वस्त किया गया. कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया. प्रशासन ने कोशिश की कि प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे और किसी तरह की अव्यवस्था न हो. सुबह जब लोगों ने इलाके का रुख किया तो वहां का नजारा बदल चुका था. ध्वस्तीकरण के बाद मलबा भी हटा दिया गया था और जमीन को समतल कर वन विभाग की ओर से वृक्षारोपण शुरू कर दिया गया था. कई बड़े पौधों के साथ सैकड़ों छोटे पौधे भी लगाए गए. इसी बदलाव ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा. सोशल मीडिया पर भी तस्वीरें और वीडियो साझा किए जाने लगे, जिनमें रात और सुबह के दृश्य का अंतर साफ दिखाई दे रहा था. आखिर क्यों हुई कार्रवाई? जानकारी के अनुसार वन विभाग काफी समय से इस मामले की जांच कर रहा था. विभाग का कहना था कि जिस भूमि पर मजार और उससे जुड़े निर्माण मौजूद थे, वह वन विभाग की भूमि है. ऐसे में निर्माण की वैधता से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे. वन विभाग की ओर से मजार के केयरटेकर फजले इलाही को नोटिस जारी किया गया था. नोटिस में भूमि और निर्माण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था. सूत्रों के अनुसार कई महीनों तक सुनवाई चलती रही. इस दौरान अलग-अलग तारीखों पर पक्षकारों को दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया. लेकिन वन विभाग का दावा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके. यहीं से मामला आगे बढ़ा और विशेष वन न्यायालय तक पहुंच गया. तीन महीने चली प्रक्रिया बताया जा रहा है कि कार्रवाई अचानक नहीं हुई. इसके पीछे करीब तीन महीने तक चली प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया रही. वन विभाग की ओर से लगातार यह पूछा जाता रहा कि जिस भूमि पर निर्माण है, उसके स्वामित्व और वैधता से जुड़े कागजात प्रस्तुत किए जाएं. विभाग का कहना था कि यदि निर्माण वैध है तो संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं. सुनवाई के दौरान कई अवसर दिए गए, लेकिन कथित तौर पर कोई ऐसा दस्तावेज सामने नहीं आया जो निर्माण को वैध साबित कर सके.  इसके बाद विशेष वन विभाग की अदालत ने मामले में आदेश जारी किया, जिसके आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ. मीडिया से दूर रखी गई पूरी कार्रवाई इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि कार्रवाई को मीडिया की नजरों से काफी हद तक दूर रखा गया. आमतौर पर इस तरह के अभियानों के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के बयान सामने आते हैं और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक रूप से दी जाती है. लेकिन इस मामले में अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए. ध्वस्तीकरण के बाद भी जिला प्रशासन और वन विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया. यही वजह है कि कार्रवाई को लेकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई. स्थानीय स्तर पर चर्चा यह भी रही कि प्रशासन किसी भी प्रकार के विवाद या तनाव से बचना चाहता था. इसलिए पूरे अभियान को बेहद शांत और नियंत्रित तरीके से अंजाम दिया गया. रेंजर ने पहले ही दिए थे संकेत इस मामले में पहले बढ़पुरा वन रेंज के रेंजर अशोक शर्मा ने बातचीत के दौरान संकेत दिए थे कि विभाग भूमि से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है. उन्होंने बताया था कि संबंधित पक्ष से लगातार कागजात मांगे जा रहे हैं और वन भूमि पर अनधिकृत निर्माण को लेकर नोटिस भी जारी किया गया है. रेंजर के अनुसार यदि वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं तो नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी. उस समय यह बयान सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना गया था, लेकिन अब ध्वस्तीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया कि विभाग कानूनी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा था. वृक्षारोपण बना चर्चा का विषय ध्वस्तीकरण के बाद जिस तेजी से वृक्षारोपण किया गया, वह भी चर्चा का विषय बना हुआ है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई पूरी होते ही वन विभाग की टीम ने क्षेत्र को हरित स्वरूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी. बड़े पौधों के साथ-साथ बड़ी संख्या में नए पौधे रोपे गए. वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि भूमि को उसके मूल स्वरूप में विकसित करने की योजना के तहत यह कदम उठाया गया. चूंकि क्षेत्र सफारी पार्क और वन क्षेत्र के नजदीक स्थित है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को प्राथमिकता दी गई. यही वजह है कि जिस स्थान पर कुछ घंटे पहले तक निर्माण मौजूद था, वहां अब हरियाली दिखाई दे रही है. लोगों के बीच चर्चा तेज कार्रवाई के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. कुछ लोग इसे वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं. हालांकि प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार कार्रवाई न्यायालय के आदेश और विभागीय प्रक्रिया के बाद की गई है. इसलिए अधिकारियों का जोर कानूनी … Read more

गैस सिलेंडर में गड़बड़ी का खुलासा, संदिग्ध उपभोक्ताओं की सूची तैयार

लखनऊ घरेलू सिलेंडरों की हर रीफिल पर चेक लगाने के बाद तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल की दिशा में कदम बढ़ाया है। सभी कनेक्शन धारकों का बीती अवधि का उपयोग का विवरण तैयार किया जा रहा है। जिन कनेक्शन धारकों ने नाम मात्र को रीफिल ली है, उनको संदिग्ध की सूची में डाला जा रहा है। वहीं अत्यधिक उपयोग वाले उपभोक्ता भी चिन्हित किए जा रहे हैं। इनका ऑडिट कराकर उपयोग की वास्तविक स्थिति जानी जाएगी। बीती अवधि में प्रबंधन के पास गैस कटिंग की शिकायतें पहुंची हैं। इसमें सस्ती घरेलू गैस से कॉमर्शियल की रीफिलिंग की शिकायत प्रमुख है। गैस कटिंग से तैयार किए गए इस सिलेंडर को कॉमर्शियल के उपयोगकर्ता को सरकारी रेट से कम पर उपलब्ध कराए जाने का आरोप है। इसको संज्ञान में लेकर तेल कंपनियों ने संबंधित कनेक्शन धारक का ब्योरा तलब कर उसके अधिकतम एवं न्यूनतम उपयोग का विवरण तैयार किया है। इस विवरण में इस बात का उल्लेख है कि एक रीफिल से दूसरी रीफिल के बीच कितना अंतर है। बीती अवधि में कितने अंतर से रीफिल ली गईं। इस समय यह अंतर कितना है। बिगड़ सकती है आपूर्ति वितरण से जुड़े लोगों ने बताया कि एक बड़ा वर्ग किसी भी तरह घरेलू गैस को हासिल करने की जुगत में लग गया है। किल्लत के समय में गैस की बुकिंग का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे हालातों में वास्तविक जरूरतमंद घरों तक समय से गैस पहुंचाने की दिक्कत हो गई है। जो वितरक एक से दो दिन के अंदर अपने उपभोक्ताओं के यहां रीफिल पहुंचा देते थे, एक से अधिक का समय लेने लग गए हैं। वहीं तेल कंपनियां गैस की सीमित आपूर्ति दे रही हैं। जांच की वजह इस समय घरेलू उपयोग की एलपीजी खरीदार को 67.22 रुपये प्रति किलो पड़ रही है। जबकि कॉमर्शियल उपयोगकर्ता को एक किलो गैस के लिए 166.71 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। दोनों मदों में अंतर 99.69 रुपये किलो के स्तर तक पहुंच गया है। इस अंतर के चलते बड़े पैमाने पर कॉमर्शियल के 19 किलो के सिलेंडर में घरेलू गैस को भर कर बेचा जा रहा है। खरीदार को 300 रुपये की छूट देकर यह सिलेंडर 2800-2900 रुपये का दिया जा रहा है। आगरा संभाग, इंडेन वितरक संघ के अध्यक्ष, विपुल पुरोहित ने कहा कि कुछ ऐसे हलवाई चिन्हित किए गए हैं जिनका एलपीजी उपयोग सामान्य नहीं है। त्योहार के समय अधिक मांग की संभावना होने के बावजूद इनके द्वारा अपेक्षित रीफिल नहीं ली गई। कुछ रेस्टोरेंट भी चिन्हित किए गए हैं। इनका भी यही हाल है। पूरे एक महीने में नाममात्र की रीफिल ली गईं। जब कॉमर्शियल की किल्लत चल रही थी, उस समय इनकी तरफ से लगातार मांग थी। संदेह है कि इनके द्वारा अन्य स्रोतों से गैस हासिकल करने का प्रयास चल रहा है।

बरेली में स्वच्छता नियम होंगे सख्त, खुले में कूड़ा फेंकने पर कटेगा बिजली-पानी कनेक्शन

लखनऊ पूरे देश में स्वच्छता को अभियान बनाया गया है और लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। केंद्र की मोदी और यूपी की योगी सरकारें कूड़ा निस्तारण और साफ-सफाई का अभियान भी चला रही हैं। शहर-शहर को सफाई की रैंकिंग से जोड़ा गया है। इसके बाद भी मुहिम रंग नहीं लाने पर अब सख्ती होने जा रही है। बरेली शहर में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण को सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम प्रशासन ने सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के तहत अब खुले में कूड़ा फेंकने, सार्वजनिक स्थानों पर मलबा डालने या गीले-सूखे कचरे का अलग-अलग निस्तारण नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ अब बिजली और पानी का कनेक्शन तक काटा जाएगा। सूखा-गीला कूड़ा एक साथ होने पर चालान नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि शासन के निर्देशों के तहत प्रत्येक घर और संस्थान को गीला, सूखा, सैनिटरी तथा विशेष श्रेणी के कचरे (ई-वेस्ट) को अलग-अलग रखना अनिवार्य होगा। जांच के दौरान कचरा मिश्रित मिलने पर चालान की कार्रवाई की जाएगी। वहीं होटल, अस्पताल, मॉल और बड़ी आवासीय सोसायटियों को अपने परिसर में ही कचरे का निस्तारण करना होगा। शहर को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया आसान होगी और लैंडफिल पर भार कम पड़ेगा। अधिकारियों ने नागरिकों से नियमों का पालन करने और स्वच्छता अभियान में सहयोग देने की अपील की है। कूड़ा निस्तारण मशीनों का इंस्टॉलेशन शुरू वहीं, शहर में कूड़ा निस्तारण की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सथरापुर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। नगर निगम ने प्लांट के संचालन के लिए तैयारियां और तेज कर दी हैं। मशीनों का इंस्टॉलेशन शुरू हो चुका है और तकनीकी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्लांट के शुरू होते ही प्रतिदिन करीब 500 मीट्रिक टन कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा सकेगा। सीएम योगी दे सकते हैं सौगात नगर निगम अधिकारियों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के संभावित दौरे के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सौगात शहरवासियों को मिल सकती है। पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी का कहना है कि प्लांट संचालन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए इंदौर और गुजरात के शहरों में संचालित कचरा प्रबंधन मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं। वहां की प्रोसेसिंग प्रणाली, तकनीकी व्यवस्था और संचालन प्रक्रिया से जुड़ी रिपोर्टें भी मंगाई जा रही हैं, ताकि बरेली में आधुनिक और प्रभावी व्यवस्था लागू की जा सके स्वच्छ शहर की दिशा में बड़ा कदम प्लांट संचालित होने पर शहर में कूड़े के ढेर और डंपिंग की समस्या में काफी कमी आएगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को भी बढ़ावा मिलेगा।नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि प्लांट शुरू होने के बाद शहर में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण से प्रदूषण कम होगा और स्वच्छ शहर की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

100 किमी/घंटा की हवाओं ने मचाई तबाही, बरेली में बिजली-पानी सप्लाई ठप

बरेली भीषण गर्मी के बीच यूपी में आंधी-पानी ने कहर बरपाया हुआ है। 100 की स्पीड से चल रही हवाओं ने तबाही मचाई है। अकेले यूपी के बरेली में आंधी से 419 खंभे टूट गए और 23 ट्रांसफार्मर खराब हो गए हैं। बिगड़े मौसम ने जिले की बिजली व्यवस्था को पूरी तरह बेपटरी कर दिया। शहर से लेकर गांव तक बिजली की लाइनें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। हालात ऐसे रहे कि बिजली निगम के अधिकारी और कर्मचारी 24 घंटे बीत जाने के बाद भी आपूर्ति पूरी तरह बहाल नहीं कर सके। बिजली संकट का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पेयजल संकट, कारोबार, उद्योग और लोगों की दिनचर्या पर भी गहरा असर पड़ा। आंधी से ग्रामीण क्षेत्रों में 325 बिजली पोल और शहरी क्षेत्रों में 94 पोल क्षतिग्रस्त हो गए। ग्रामीण क्षेत्र के 18 और शहर के पांच ट्रांसफार्मर भी खराब हो गए। पेड़ गिरने से कई जगह हाईटेंशन लाइनें टूट गईं, जिससे पूरे जिले की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। बुधवार देर रात गुल हुई बिजली के कारण गुरुवार सुबह तक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश हिस्से अंधेरे में डूबे रहे। सुबह 10 बजे के बाद एक-एक कर बिजलीघरों की आपूर्ति बहाल की गई, लेकिन देर रात तक कई मोहल्लों और गांवों में बिजली नहीं पहुंच सकी। बिजली न होने से इनवर्टर जवाब दे गए और मोबाइल फोन बंद होने लगे। गर्मी और उमस के बीच लोगों को रातभर जागकर समय बिताना पड़ा। पेयजल संकट भी गहरा गया, क्योंकि नगर निगम और जलकल विभाग के ट्यूबवेल बिजली न होने के कारण बंद रहे। 154 पेड़ गिरे, यातायात भी प्रभावित आंधी ने शहर की रफ्तार थाम दी। आंधी के चलते शहर के विभिन्न इलाकों में करीब 154 पेड़ और बड़ी-बड़ी शाखाएं गिर गईं, जिससे कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हो गया। बिजली लाइनों पर पेड़ गिरने से कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति भी बाधित रही। हालात सामान्य करने के लिए नगर निगम का पूरा अमला रात से ही सड़कों पर उतर आया और गुरुवार शाम तक राहत एवं बचाव कार्य जारी रहा। राहत में जुटा प्रशासनिक अमला आपात स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम ने बड़े स्तर पर संसाधन लगाए। नगर निगम की ओर से 150 कर्मचारियों, 8 बुलडोजर, 10 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 40 छोटे मालवाहक वाहनों और 6 इंजीनियरों की टीम को शहर के चारों जोन में तैनात किया गया। टीमों ने रातभर अभियान चलाकर सड़कों पर गिरे पेड़ों, शाखाओं और मलबे को हटाने का कार्य किया। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार प्राथमिकता उन मार्गों को दी गई, जहां यातायात पूरी तरह बाधित हो गया था। कई इलाकों में पेड़ गिरने से वाहन फंस गए। बिजली निगम और नगर निगम ने साथ मिलकर संभाली कमान आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, मुख्य अभियंता और अधिशासी अभियंता लगातार शहर का निरीक्षण करते रहे। अधिकारियों ने विभिन्न प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत कार्यों की निगरानी की और कर्मचारियों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए। नगर निगम और बिजली विभाग की संयुक्त टीमों ने भी कई स्थानों पर पहुंचकर बिजली लाइनों पर गिरे पेड़ों को हटाया, ताकि विद्युत आपूर्ति जल्द बहाल की जा सके। हालांकि कई इलाकों में घंटों तक बिजली बाधित रही। आपदा प्रबंधन की खुली पोल मानसून से पहले आई आंधी ने शहर की आपदा प्रबंधन तैयारियों की पोल खोल दी। कई स्थानों पर पुराने और जर्जर पेड़ गिरने से लोगों में दहशत का माहौल रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कमजोर पेड़ों की छंटाई और सर्वे किया जाता तो कई घटनाओं को रोका जा सकता था। अब नगर निगम ऐसे पेड़ों की सूची तैयार करने में जुट गया है, जो भविष्य में खतरा बन सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि संभावित खतरनाक पेड़ों की पहचान कर उनकी छंटाई और हटाने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि मानसून के दौरान किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। नगर आय़ुक्त संजीव कुमार मौर्य के अनुसार आंधी के तुरंत बाद सभी जोन में टीमें सक्रिय कर दी गई थीं। प्राथमिकता सड़कें खुलवाने और जनसुविधाएं बहाल करने की रही। अधिकांश मार्गों को साफ करा दिया गया है और शेष स्थानों पर भी कार्य जारी है।

यूपी में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा, पहली बार हाइड्रोजन बसों का संचालन शुरू

नोएडा सीएम योगी ने शुक्रवार को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथारिटी को नई इलेक्ट्रिक बसों की सौगात दी। इसके साथ ही पहली बार यूपी में हाइड्रोजन बसों के संचालन का भी शुभारंभ हुआ है। यमुना अथारिटी में तीन हाईड्रोजन बसें चलेंगी। सीएम योगी ने लखनऊ स्थित अपने आवास से बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें 45 बसें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथारिटी में चलेंगी। इन बसों के चलने से जेवर एयरपोर्ट जाना-आना आसान हो जाएगा। सीएम योगी ने हाईड्रोजन बसों के बारे बताते हुए कहा कि तीन हाईड्रोजन बसें यमुना अथारिटी को एनटीपीसी ने उपलब्ध कराया है। कहा कि अब ग्रीन हाईड्रोजन मोबिलिटी नई धारणा बन चुकी है। एक प्रक्रिया के बाद पानी से हाईड्रोजन निकालकर इन बसों का संचालन होगा। पानी में दो हाईड्रोजन और एक ऑक्सीजन होता है। पानी से इन दोनों को अलग किया जाएगा। पानी भी ग्राउंड वाटर या सरफेस वाटर नहीं बल्कि सीवर का लिया जाएगा। सीवर के पानी को ट्रीटमेंट करके इस्तेमाल किया जाएगा। इसी पानी में से ऑक्सीजन को निकालकर वायुमंडल में भेजा जाएगा और हाईड्रोजन को कंप्रेस करके सिलेंडर में भरकर बसों को चलाया जाएगा। इन बसों का संचालन जेवर एयरपोर्ट के पास होने जा रहा है। इससे वहां पर वायु प्रदूषण भी कम होगा। जहरीले वातारण से समाज को बचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि 15 जून से नोएडा में सबसे बड़ा एयरपोर्ट शुरू हो रहा है। तब तक बसों की संख्या 110 कर दी जाएगी। आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ाकर 500 की जाएगी। जिले के तीनों प्राधिकरण एरिया में पर्यावरण को बेहतर बनाए रखने के लिए इन इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत की गई है। एयरपोर्ट तक मेट्रो शुरू होने तक बसें लोगों की राह आसान करेंगी। आने वाले समय में मेट्रो भी एयरपोर्ट तक जाएगी। पिछली सरकारों पर हमला शुभारंभ के मौके पर सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में टूटी सड़कों और अराजकता का माहौल था। लोगों के सामने पहचान तक का संकट था। यहां पर लोग निवेश से घबराते थे। आज वर्ल्ड क्लास कनेक्टिविटी के कारण विकास को रफ्तार मिली हुई है। डबल इंजन की सरकार में 4 लाख किलोमीटर का रोड नेटवर्क बनकर है। यूपी के पास आज सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे और इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। भगवान श्रीराम पुष्पक विमान से लंका से अयोध्या आए थे लेकिन एयरपोर्ट के लिए वहां के लोग तरस रहे थे।आजादी के इतने साल बाद तक अयोध्या अपमानित हो रही थी। आज वहां पर महर्षि वाल्मिकी के नाम पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है।

पूर्वांचल बना पंचायत राजनीति का नया केंद्र, बलिया में जुड़े सबसे ज्यादा वोटर

लखनऊ यूपी के पंचायत मतदाताओं का नया भूगोल सामने आया है। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचक नामावली-2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण वोट बैंक का संतुलन तेजी से बदल रहा है। एक तरफ पूर्वांचल के कई जिलों में पंचायत मतदाताओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी है तो दूसरी तरफ शहरीकरण और पलायन की वजह से 11 जिलों में पंचायत वोट बैंक सिमट गया है। इनमें पश्चिम के पांच जिले शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर गाजीपुर की है, जहां पंचायत मतदाताओं की संख्या में 94,757 की कमी दर्ज हुई है। मैनपुरी में 93,207 और आजमगढ़ में 60,347 मतदाता घटे हैं। वाराणसी में 41,397, एटा में 23,429, आगरा में 23,294, गाजियाबाद में 15,637 और गौतमबुद्धनगर में 12,431 मतदाता कम हुए हैं। पंचायत क्षेत्रों से मतदाताओं के घटने का यह रुझान उन जिलों में अधिक दिखाई दे रहा है, जहां तेजी से शहरी विस्तार हो रहा है या फिर लंबे समय से पलायन चुनौती बना हुआ है। गौतमबुद्धनगर में मतदाताओं की संख्या सबसे कम एनसीआर के जिले पंचायत व्यवस्था से सबसे तेजी से दूर होते नजर आ रहे हैं। गौतमबुद्धनगर में पंचायत मतदाताओं की कुल संख्या केवल 2.09 लाख रह गई है, जो पूरे प्रदेश में सबसे कम है। गाजियाबाद में यह संख्या 4.56 लाख है। दूसरी ओर जौनपुर में 36.97 लाख, आजमगढ़ में 35.76 लाख, प्रयागराज में 34.95 लाख और गोरखपुर में 29.63 लाख पंचायत मतदाता हैं। यह अंतर बताता है कि जहां पश्चिमी यूपी के कुछ जिले तेजी से शहरी पहचान हासिल कर रहे हैं। वहीं, पूर्वांचल अब भी ग्रामीण राजनीति की सबसे बड़ी धुरी बना हुआ है। बलिया में सबसे अधिक नए मतदाता पूर्वांचल और तराई के कई जिले पंचायत वोटरों की नई ताकत बनकर उभरे हैं। बलिया में सबसे अधिक 1,60,376 नए पंचायत मतदाता जुड़े हैं। लखीमपुर खीरी में 1,38,223, देवरिया में 1,26,771, सिद्धार्थनगर में 1,23,162 और कुशीनगर में 1,20,011 मतदाताओं की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रयागराज में भी 92,460 नए मतदाता जुड़े हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश की ग्रामीण राजनीति का केंद्र अब और अधिक पूर्वांचल की ओर खिसकता दिखाई दे रहा है।  

शहीद पथ पर यात्रियों को मिलेगी आइकॉनिक फुट ओवरब्रिज की सौगात

लखनऊ राजधानी लखनऊ में शहीद पथ पर लुलु मॉल के पास स्काई वॉक (फुट ओवरब्रिज) बनेगा। 100 मीटर लंबा व 05 मीटर चौड़ा यह फुट ओवरब्रिज नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन देगा। आईकॉनिक डिजाइन इसे अलग बनाएगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने पीपीपी मोड पर फुट ओवरब्रिज के निर्माण के लिए एक निजी कंपनी के साथ करार किया है। इसके निर्माण में लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसका पूरा खर्च कंपनी द्वारा किया जाएगा। इसके रूफ टॉप पर ओपन एयर रेस्टोरेंट और नीचे ग्रीन एरिया होगा। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई एक अहम बैठक में परियोजना का प्रेजेंटेशन दिया गया। जिसमें फुट ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए हरी झंडी दे दी गयी है। उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इससे शहीद पथ जैसे व्यस्त मार्ग पर पैदल यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक एवं बाधारहित आवागमन उपलब्ध होगा। फुट ओवरब्रिज में सीढ़ियों के अलावा लिफ्ट का भी प्रावधान किया गया है। उपाध्यक्ष ने बताया कि लोक निर्माण विभाग, ट्रैफिक पुलिस, लेसा व लुलु मॉल प्रबंधन के साथ बैठक करके फुट ओवरब्रिज का निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिये गये हैं। निर्माण के दौरान ट्रैफिक में रुकावट न आए इसके लिए चरणबद्ध निर्माण पद्धति अपनाएंगे। रूफ टॉप पर ओपन एयर रेस्तरां, नीचे हरित क्षेत्र ग्राउंड फ्लोर पर लगभग 1200 वर्गमीटर क्षेत्रफल में आकर्षक ग्रीन एरिया होगा। जिसमें कियोस्क, सार्वजनिक उपयोग के लिए इंटरैक्टिव स्पेस, शौचालय और पार्किंग की सुविधा होगी। इसके अलावा ग्राउंड फ्लोर, मेजेनाइन फ्लोर तथा प्रथम तल पर कॉमर्शियल स्पेस विकसित किया जाएगा। फुट ओवरब्रिज के रूफ टॉप पर ओपन एयर रेस्टोरेंट और एलईडी स्क्रीन होगी। एंटी-स्किड फ्लोरिंग समेत कई खासियत होंगी उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि फुट ओवरब्रिज की डिजाइन में सुरक्षा को सर्वाच्च प्राथमिकता दी गयी है। इसमें एंटी-स्किड फ्लोरिंग, मजबूत रेलिंग, सीसीटीवी निगरानी, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, स्पष्ट साइनेज, अग्निरोधी विद्युत फिटिंग तथा भूकंपरोधी डिजाइन का प्रावधान किया गया है। फायर सेफ्टी उपकरण, पब्लिक एड्रेस सिस्टम आदि होंगे। कैसरबाग में बस पोर्ट की तैयारी तेज वहीं, लखनऊ के सबसे पुराने बस स्टेशन, कैसरबाग को एयरपोर्ट की तर्ज पर बस पोर्ट बनाने के लिए चार निवेशकों ने और खाली पड़े जानकीपुरम बस अड्डे की जमीन पर हाईटेक बस अड्डा बनाने के लिए पांच निवेशकों ने दावेदारी ठोंकी है। इसका खुलासा टेंडर प्रक्रिया के टेक्निकल बिड खुलने के बाद हुआ है। यूपी के 49 बस अड्डों को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित करने के लिए आमंत्रित की गई टेंडर प्रक्रिया में 13 बस अड्डों के लिए निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई है। बाकी 36 बस अड्डों के लिए एक माह बाद दोबारा टेंडर जारी किया जाएगा। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के अधिकारियों ने बताया कि पहले फेज में यूपी के 23 बस अड्डों को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। दूसरे फेज में 49 बस अड्डों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। अभी टेक्निकल बिड खुली है। इन बस अड्डों की 55 प्रतिशत जमीन पर बस पोर्ट और 45 प्रतिशत जमीन पर शॉपिंग मॉल बनेगा, जहां यात्रियों को शॉपिंग करने, सिनेमा देखने और फूड कोर्ट में खान-पान के अलावा बेहतर वीआईपी वेटिंग लाउंज जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन 13 बस अड्डों पर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। ये सुविधाएं मिलेंगी 1. एसी स्मार्ट लाउंज, अत्याधुनिक प्रतीक्षालय और साफ-सुथरे टॉयलेट की सुविधा। 2. उड़ानों की तरह बसों के आने-जाने का समय, देरी व प्लेटफॉर्म नंबर की लाइव सूचना 3. यात्रियों के लिए मनोरंजन, खान-पान, शॉपिंग मॉल, कैफे, रेस्तरां और रिटेल सुविधा 4. रोडवेज बसों के अलावा निजी व लग्जरी वोल्वो बसों की भी सुविधा परिसर से मिलेगी 5. मल्टीलेवल पार्किंग में कार, टैक्सी, दोपहिया वाहन आदि के लिए अलग जगह क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन के अनुसार मुख्यमंत्री की मंशा है कि बस अड्डे एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित हों। इसी क्रम में मुख्यालय से टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसमें लखनऊ क्षेत्र के कैसरबाग और जानकीपुरम बस अड्डे को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने के लिए शामिल किया गया है।

जिलों की मांग पर सरकार का फैसला, राशन वितरण की डेडलाइन बढ़ी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के राशन कार्डधारकों के लिए राहत की खबर है। योगी सरकार ने जून माह के राशन वितरण की डेट बढ़ाते हुए अब 15 जून तक राशन वितरण कराने का फैसला किया है। पहले राशन वितरण 10 जून तक पूरा किया जाना था। दरअसल,कुछ जिलों के जिलाधिकारियों ने शासन को पत्र भेजकर निर्धारित समय सीमा के भीतर राशन वितरण पूरा करने में असमर्थता जताई थी। इसके बाद स्थिति की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव एवं खाद्य आयुक्त रणवीर प्रसाद ने राशन वितरण की अंतिम डेट बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। खाद्य एवं रसद विभाग के निर्देशों के अनुसार, उत्तर प्रदेशकी सभी कोटे की दुकानों पर अब 15 जून तक पात्र लाभार्थियों को राशन वितरित किया जाएगा। इससे उन कार्डधारकों को भी राहत मिलेगी जो किसी कारणवश अब तक राशन नहीं ले सके हैं। जून माह के राशन का वितरण 25 मई से शुरू हो गया था। राशन 10 जून तक वितरित किया जाना था। वितरण सुबह छह बजे से शुरू होकर रात नौ बजे तक चलेगा अब डेट बढ़ने से 15 जून तक राशन का वितरण सुबह छह बजे से शुरू होकर रात नौ बजे तक चलेगा। इस दौरान अंत्योदय कार्डधारकों को 14 किलो गेहूं व 21 किलो चावल (कुल 35 किलो) नि:शुल्क राशन मिलेगा। जबकि पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट दो किलो गेहूं व तीन किलो चावल मिलेगा। शिकायत टोल फ्री नम्बर 1967 व 1800-1800-150 पर कर सकते हैं कार्डधारक नि:शुल्क राशन वितरण से संबंधित शिकायत टोल फ्री नम्बर 1967 व 1800-1800-150 पर कर सकते हैं। जांच के बाद शिकायत सही पाये जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही हर राशन की दुकान पर पोर्टेबिलिटी की सुविधा उपलब्ध रहेगी। यानी कहीं का भी कार्डधारक किसी भी कोटे के दुकान से राशन ले सकेंगे। लाभार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न होने दी जाए आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में लगभग 3.64 करोड़ राशन कार्ड धारक हैं, जिनके माध्यम से करीब 14.62 करोड़ लाभार्थियों को हर महीने राशन उपलब्ध कराया जाता है। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी पात्र व्यक्ति खाद्यान्न से वंचित न रहे और सभी लाभार्थियों तक समय पर राशन पहुंचे। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि राशन वितरण प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित किया जाए और लाभार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न होने दी जाए। राशन कार्ड धारक निर्धारित अवधि के भीतर अपनी नजदीकी उचित दर की दुकान से खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं।