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594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे तैयार, उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ताकत देगा

  हरदोई यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में किसानों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक लाख से अधिक किसानों ने इस परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध कराई जिससे इसका समय पर निर्माण संभव हो सका। गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन समारोह से पहले आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, '12 जिलों के एक लाख से अधिक किसानों ने इस एक्सप्रेसवे के लिए अपनी भूमि दी। मैं उन सभी 'अन्नदाता' किसानों का आभार व्यक्त करता हूं, जिनके सहयोग से यह परियोजना साकार हो सकी।' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने के लिए हरदोई के मल्लावां में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। यह एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है और राज्य के 12 जिलों से होकर गुजरता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना की आधारशिला दिसंबर 2021 में रखी गई थी और इसे निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया गया, जो राज्य सरकार की बुनियादी ढांचा विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेसवे न केवल परिवहन को सुगम बनाएगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा। उत्तर प्रदेश की रीढ़ साबित होगा गंगा एक्सप्रेसवे सीएम आदित्यनाथ ने बताया कि इस परियोजना के लिए लगभग 18,000 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई, जबकि एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्लस्टर और 'लॉजिस्टिक्स' केंद्र विकसित करने के लिए करीब 7,000 एकड़ भूमि अलग से चिह्नित की गई है। उन्होंने कहा, 'यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित होगा और सड़क संपर्क, कृषि विपणन तथा क्षेत्रीय विकास को मजबूती प्रदान करते हुए 'विकसित भारत' के लक्ष्य को गति देगा।' अधिकारियों के अनुसार यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित 12 प्रमुख जिलों को जोड़ता है। इससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और आवागमन तेज, सुरक्षित व अधिक सुविधाजनक होगा। इस कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गंगा एक्सप्रेसवे का किया उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का बुधवार को हरदोई के मल्लावां में उद्घाटन किया। आधिकारिक बयान के अनुसार लगभग 36,230 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा के समय को वर्तमान 10-12 घंटे से घटाकर लगभग छह घंटे कर देगा। इसमें कहा गया कि गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित 12 प्रमुख जिलों को जोड़ता है। इससे पहले, प्रधानमंत्री के हरदोई पहुंचने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया। योगी आदित्यनाथ ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि हरदोई से एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ राज्य की विकास यात्रा को नयी गति मिलेगी।

नरेंद्र मोदी ने किया गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, ₹1500 में तय होगा लंबा सफर

लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली कल रात यानी कि गुरुवार 12 बजे से शुरू होने जा रही है. बातचीत के दौरान चीफ इंजीनियर यूपीडा राज चौधरी ने स्पष्ट किया कि इंटरचेंज और टोल प्लाजा पहले से निर्मित हैं. टोल दरें प्रति किलोमीटर के हिसाब से तय की गई हैं और वाहन की एंट्री व एग्जिट पॉइंट के आधार पर फास्टैग से स्वतः कटौती होगी. टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और ट्रैक्टर के लिए ₹1.28 प्रति किमी, कार, जीप, वैन और हल्के मोटर वाहन के लिए ₹2.50 प्रति किमी, लाइट कमर्शियल वाहन, मिनी बस आदि के लिए ₹4.05 प्रति किमी, बस और ट्रक के लिए ₹8.20 प्रति किमी तय किया गया है. वहीं मल्टीएक्सल, भारी मशीनरी और अर्थमूविंग वाहनों के लिए ₹12.60 प्रति किमी व ओवरसाइज वाहनों के लिए ₹16.10 प्रति किमी दर निर्धारित की गई है. प्रयागराज से मेरठ तक कार से यात्रा करने पर करीब ₹1500 टोल लगने का अनुमान है. अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि यदि कंसेसियनार चाहे तो शुरुआती दिनों में कुछ छूट भी दी जा सकती है, जैसा पहले अन्य एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में किया गया था. PM मोदी आज करेंगे एक्सप्रेसवे का उद्घाटन आज यानी कि बुधवार को उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया जाएगा, जो मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा हाईस्पीड कॉरिडोर है. यह परियोजना न केवल प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगी, बल्कि औद्योगिक निवेश, कृषि विपणन, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी गेमचेंजर साबित होगी. पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल से सीधे जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी मजबूती प्रदान करेगा. 12 जिलों को सीधी कनेक्टिविटी, यात्रा समय में बड़ी कमी प्रधानमंत्री सुबह 11.15 पर हरदोई पहुंचेंगे और 12.55 पर यहां से वापस लौटेंगे. इस दौरान पीएम गंगा एक्सप्रेसवे का उदघाटन करने के साथ ही यूपीडा की प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे और साथ ही पौधरोपण करने के अलावा जनसभा समेत अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेंगे. प्रधानमंत्री जिस गंगा एक्सप्रेसवे को हरी झंडी दिखाएंगे वह मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ता है. इस हाई-स्पीड मार्ग के चालू होने से इन क्षेत्रों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी. जहां पहले लंबी दूरी तय करने में कई घंटे लगते थे, अब यह सफर तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा. इसके साथ ही, माल परिवहन की लागत में कमी आने से उद्योगों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी. पीपीपी मॉडल पर आधुनिक निर्माण गंगा एक्सप्रेसवे को पीपीपी (DBFOT) मॉडल पर विकसित किया गया है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है. इसे फिलहाल 6 लेन में तैयार किया गया है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे 8 लेन तक विस्तार योग्य बनाया गया है. 120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के साथ यह एक्सप्रेसवे तेज और सुगम यातायात सुनिश्चित करेगा. उच्च गुणवत्ता के निर्माण, चौड़े राइट ऑफ वे और मजबूत सेफ्टी फीचर्स इसे देश के सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे में शामिल करते हैं. एयरस्ट्रिप, आईटीएमएस और सुरक्षा की अत्याधुनिक व्यवस्था इस एक्सप्रेसवे की एक खास विशेषता शाहजहांपुर के पास बनाई गई लगभग 3.2 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप है, जहां आपात स्थिति में वायुसेना के विमान उतर सकते हैं. इसके अलावा, पूरे मार्ग पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस), सीसीटीवी निगरानी, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, एम्बुलेंस और पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है. वाहनों की गति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा. औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स विकास का नया केंद्र गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आईएमएलसी) इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत हैं. इन क्लस्टर्स में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स हब स्थापित किए जाएंगे. सरकार द्वारा दी जा रही कैपिटल सब्सिडी, एसजीएसटी रिइम्बर्समेंट, स्टाम्प ड्यूटी छूट, पावर इंसेंटिव और पीले टॉप-अप जैसी सुविधाएं निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. इससे प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आएगा और लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे.

किसानों को 122.28 करोड़ रुपये की फसल क्षतिपूर्ति, वितरण कार्यक्रम 4 मई को

किसानों को मिलेगी 122.28 करोड़ रुपये की फसल क्षतिपूर्ति, वितरण कार्यक्रम 4 मई को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ और रबी सीजन के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार  4 मई को अपराह्न 04 बजे से प्रदेश के समस्त जनपदों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से क्षतिपूर्ति धनराशि का होगा वितरण   योगी सरकार ने फसल नुकसान से किसानों को सुरक्षा देने और आय स्थिर रखने के लिए उठाया बड़ा कदम  लखनऊ  प्रतिकूल मौसम के कारण प्रभावित होने वाली फसलों से किसानों को सुरक्षा प्रदान करने और उनकी आय स्थिर बनाए रखने के उद्देश्य से योगी सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। प्रदेश के समस्त जनपदों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और चयनित 60 जनपदों में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना का सफल क्रियान्वयन खरीफ 2016 से बीमा कंपनियों के माध्यम से किया जा रहा है। निदेशक कृषि सांख्यिकी एवं फसल बीमा सुमिता सिंह ने बताया कि इसी क्रम में 4 मई को अपराह्न 04 बजे से प्रदेश के समस्त जनपदों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से खरीफ 2025 एवं रबी 2025-26 की फसल क्षतिपूर्ति धनराशि का वितरण किया जाएगा। खरीफ 2025 मौसम की कुल देय क्षतिपूर्ति 730.04 करोड़ रुपये में से 624.88 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है और शेष 105.16 करोड़ रुपये का भुगतान 4 मई को किया जाएगा। इसी प्रकार रबी 2025-26 मौसम की शेष 17.11 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का भी भुगतान किया जाएगा। इस प्रकार 04 मई को कुल 122.28 करोड़ रुपये की राशि लाभान्वित किसानों के खातों में अंतरित की जाएगी। बता दें कि 21 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 'वन-क्लिक' के माध्यम से खरीफ 2025 की 285.00 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति 2.51 लाख किसानों को वितरित की गई थी।  किसानों के लिए प्रीमियम की दरें बेहद किफायती  उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017-18 से वर्ष 2025-26 तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अब तक कुल 67.86 लाख किसानों को 5755.68 करोड़ रुपये की राशि क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जा चुकी है। यह योजना ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित है, जिसमें खरीफ की प्रमुख फसलें जैसे धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, उर्द, मूंग, अरहर, मूंगफली, सोयाबीन व तिल तथा रबी की फसलों में गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, लाही-सरसों, अलसी व आलू को कवर किया गया है। किसानों के लिए प्रीमियम की दरें बेहद किफायती रखी गईं हैं, जिसमें खरीफ फसल हेतु बीमित राशि का 2 प्रतिशत, रबी हेतु 1.5 प्रतिशत और वार्षिक नकदी फसलों के लिए अधिकतम 5 प्रतिशत की दर निर्धारित है। कृषक अंश के अतिरिक्त शेष प्रीमियम की धनराशि का वहन केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा समान रूप से किया जाता है।

डॉक्टर दंपती केस में टिप्पणी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण अपील खारिज की

प्रायगराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में स्पष्ट किया कि यदि पत्नी उच्च शिक्षित है, अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से पर्याप्त आय अर्जित करने में सक्षम है तो वह भरण-पोषण की हकदार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने डॉ. गरिमा दुबे की ओर से दायर एक अपील को खारिज करते हुए दिया। प्रयागराज की डॉ. गरिमा दुबे स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और उनके पति न्यूरोसर्जन हैं। उन्होंने ट्रायल कोर्ट में बच्चों और स्वयं के लिए भरण-पोषण की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। ट्रायल कोर्ट ने उनके स्वयं के भरण-पोषण आवेदन को खारिज कर दिया गया था। हालांकि, उनके तीन बच्चों के लिए 60 हजार रुपये प्रति माह का भरण-पोषण स्वीकार किया था। स्वयं के भरण-पोषण की मांग करते हुए डॉक्टर ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को अस्पताल से निकाल दिया गया है। वह वर्तमान में कार्यरत नहीं हैं। वह उसी जीवन स्तर की हकदार हैं जो अलगाव से पहले था। वहीं, पति के वकील ने दलील दी कि वह एक विशेषज्ञ चिकित्सक हैं जो उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में पति से भी अधिक कमाने की क्षमता रखती हैं। ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, वह सालाना 31 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रही थीं।    

एटीएस की कमी के चलते मैनुअल फिटनेस पर फिर से मिली छूट

 लखनऊ केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने पांच जनवरी को जारी अपने उस आदेश को चार महीने में ही पलट दिया है, जिसके तहत वाहनों की मैनुअल फिटनेस जांच पूरी तरह बंद कर दी गई थी। अब प्रदेश के 51 जिलों में सशर्त मैनुअल फिटनेस जांच दोबारा शुरू होगी। दरअसल, अधिकांश जिलों में आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) न होने के कारण करीब 18 लाख वाहनों को फिटनेस के लिए 100 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ रही थी। सीतापुर और रायबरेली जैसे जिलों के वाहन स्वामियों को लखनऊ आना पड़ रहा था, जिससे भारी असुविधा हो रही थी। केंद्रीय मंत्रालय के सचिव यतेंद्र कुमार द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, जिन जिलों में एटीएस तैयार हो रहे हैं, वहां निश्चित अवधि तक ही मैनुअल जांच की अनुमति होगी। अलीगढ़ और प्रतापगढ़ में अब केवल एटीएस के जरिये ही फिटनेस होगी। गोरखपुर, अयोध्या, आजमगढ़, बुलंदशहर और हापुड़ में 30 जून तक मैनुअल जांच की सुविधा मिलेगी तथा रायबरेली, गाजीपुर, मथुरा और प्रयागराज को 30 सितंबर तक मोहलत दी गई है। इसके अलावा 31 दिसंबर तक पीलीभीत, चित्रकूट, बलरामपुर, हरदोई, ललितपुर, संभल, जौनपुर, चंदौली, भदोही, बदायूं, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बांदा, सीतापुर, अमरोहा, हमीरपुर, महोबा, कन्नौज, औरैया, शाहजहांपुर, कौशांबी, अंबेडकर नगर, अमेठी, बागपत, बहराइच, बलिया, बस्ती, देवरिया, फर्रुखाबाद, गोंडा, कासगंज, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, महराजगंज, मऊ, संतकबीर नगर, शामली, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर व सुलतानपुर सहित 40 जिलों में यह सुविधा रहेगी। एटीएस की वर्तमान स्थिति प्रत्येक जिले में तीन-तीन निजी एटीएस खोलने की योजना थी। वर्तमान में बिजनौर, फिरोजाबाद, झांसी, कानपुर देहात, मुरादाबाद, वाराणसी, बरेली, रामपुर, फतेहपुर, कानपुर नगर, आगरा और मीरजापुर सहित कुल 26 जिलों में ही एटीएस संचालित हैं। राजधानी लखनऊ में बख्शी का तालाब स्थित एटीएस के अलावा अब बंथरा में दूसरा केंद्र बनकर तैयार है। इससे पूर्व केंद्रीय मंत्रालय ने 14 नवंबर 2024, एक अप्रैल 2025 और फिर 17 नवंबर को प्रमुख सचिव परिवहन को पत्र लिखकर एक जनवरी से अनिवार्य रूप से एटीएस के माध्यम से फिटनेस कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, धरातल पर पर्याप्त संसाधन न होने के कारण इस व्यवस्था को चार महीने के भीतर ही बदलना पड़ा। जुर्माने का प्रविधान नियम के अनुसार, नए व्यावसायिक वाहनों को पंजीकरण के बाद आठ वर्ष तक प्रत्येक दो साल में और उसके बाद हर साल फिटनेस करानी अनिवार्य है। फिटनेस न होने पर पहली बार पकड़े जाने पर 5000 रुपये और दूसरी बार 10,000 रुपये के चालान का प्रविधान है।  

होमगार्ड एनरोलमेंट-2025 परीक्षा बिना किसी गड़बड़ी के संपन्न, कड़ी निगरानी से नकल के प्रयास नाकाम

होमगार्ड एनरोलमेंट-2025 परीक्षा सकुशल संपन्न, सख्त निगरानी से नकल और फर्जीवाड़े की कोशिशें नाकाम 25, 26 और 27 अप्रैल को दो पालियों में आयोजित परीक्षा रही शांतिपूर्ण 1053 केंद्रों पर तीन दिन चली परीक्षा में सख्ती के बीच नकल माफिया पर कार्रवाई कूटरचना, प्रतिरूपण और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के दुरुपयोग में कई गिरफ्तारियां लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित होमगार्ड एनरोलमेंट-2025 की लिखित परीक्षा 25, 26 और 27 अप्रैल 2026 को प्रदेश के 74 जनपदों के 1053 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। पूरे परीक्षा आयोजन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, जिससे परीक्षा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित वातावरण में कराई जा सकी। परीक्षा के दौरान बायोमैट्रिक सत्यापन, फोटो मिलान और डिजिटल निगरानी के जरिए नकल और फर्जीवाड़े पर कड़ी नजर रखी गई। इसी के चलते कूटरचित दस्तावेज, प्रतिरूपण और अनुचित साधनों के उपयोग के मामलों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अभियोग पंजीकृत किए गए। तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक सख्ती पूरी तरह प्रभावी होमगार्ड एनरोलमेंट-2025 परीक्षा में सख्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 27 अप्रैल को हापुड़ और फतेहपुर में प्रवेश पत्र में जन्मतिथि से छेड़छाड़ कर कूटरचित दस्तावेज बनाने वाले छोटेलाल और विक्रम सिंह को तत्काल गिरफ्तार किया गया, वहीं अलीगढ़ और हाथरस में बायोमैट्रिक सत्यापन के दौरान प्रतिरूपण की कोशिश कर रहे अमित कुमार और धर्मपाल सिंह को मौके पर ही पकड़ लिया गया। इससे पहले 26 अप्रैल को कानपुर नगर के बीएनएसडी इंटर कॉलेज में प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस छुपाने के मामले में एक सहायक अध्यापक सहित तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। एटा में फर्जी प्रवेश पत्र तैयार करने वाले तेजवीर सिंह पर कार्रवाई की गई, जबकि बरेली में अलग-अलग नामों से दो केंद्रों पर परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी को बायोमैट्रिक मिलान के आधार पर दबोच लिया गया, जिससे स्पष्ट है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक सख्ती पूरी तरह प्रभावी रही। सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचना फैलाने वालों पर भी कार्रवाई परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पेपर लीक और भ्रामक सूचना फैलाने के मामलों को भी गंभीरता से लिया गया। यूट्यूब चैनल और टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से अफवाह फैलाने वाले अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ लखनऊ में आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पूरी परीक्षा आयोजन के दौरान प्रशासन ने पारदर्शिता और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्नत तकनीक, सघन चेकिंग और सुरक्षा व्यवस्था के चलते किसी भी बड़े व्यवधान की स्थिति नहीं बनी और परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हो सकी।

योगी सरकार शिक्षा ढांचे को मजबूत करने में लगी, बच्चों को मिलेगा बेहतर शैक्षिक वातावरण

शिक्षा ढांचे को मजबूत करने में जुटी योगी सरकार, बच्चों को बेहतर-सुविधायुक्त शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर  अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा (एसीएस) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने दिया निर्देश  बच्चों को स्कूल में अच्छा और सुविधायुक्त माहौल देने के लिए योगी सरकार ने उठाया कदम  मजबूत होंगी ऑपरेशन कायाकल्प और प्रोजेक्ट अलंकार से स्कूलों में सुविधाएं  प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को स्कूलों में पाई जाने वाली कमियों को चिह्नित कर जल्द से जल्द दूर कराने के निर्देश लखनऊ  विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों को बेहतर और सुविधायुक्त शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योगी सरकार ने प्रदेश भर में स्कूलों के कायाकल्प को गति देते हुए बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि विद्यालयों में मौजूद अवसंरचनात्मक कमियों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र दूर किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विद्यालय में आवश्यक सुविधाओं का अभाव अब स्वीकार्य नहीं होगा और सभी संस्थानों को निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।  योगी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को मजबूत कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है, जिससे प्रदेश के हर बच्चे को बेहतर और सुसज्जित विद्यालयी वातावरण मिल सके। कमियों को दूर करने के लिए चलेगा विशेष अभियान ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के अंतर्गत अब तक हुए कार्यों की समीक्षा करते हुए शेष कमियों को दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत गैप एनालिसिस के माध्यम से हर विद्यालय की जरूरतों का आकलन कर उन्हें पूरा किया जाएगा। जहां संसाधनों की कमी होगी, वहां कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) और संबंधित विभागों के सहयोग से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी, ताकि कोई भी स्कूल बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे। ‘प्रोजेक्ट अलंकार’: अधोसंरचना को और मजबूत बनाने के निर्देश माध्यमिक विद्यालयों में ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के अंतर्गत अधोसंरचना को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिन स्कूलों में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है, उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। यदि अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता हो, तो समेकित प्रस्ताव तैयार कर विभाग को भेजा जाए, जिससे समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो सके। विद्यालयों को ‘विद्यांजलि पोर्टल’ से जोड़ने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश इसके साथ ही सभी विद्यालयों को ‘विद्यांजलि पोर्टल’ से जोड़ने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस पोर्टल के माध्यम से स्कूल अपनी आवश्यकताओं को दर्ज करेंगे और एनजीओ, सीएसआर व अन्य सहयोगियों के माध्यम से उन जरूरतों को पूरा किया जाएगा। जिला स्तर पर इसकी सतत निगरानी की जाएगी, जिससे कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

इंदिरापुरम हाईराइज में आग से हड़कंप: गौर ग्रीन एवेन्यू में 8 फ्लैट प्रभावित, दमकल की 20 गाड़ियां मौके पर

गाजियाबाद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से बड़ी खबर सामने आई है. यहां इंदिरापुरम के अभय खंड स्थित गौर ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में अचानक भीषण आग लग गई. आग इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में ऊंची-ऊंची लपटें और काले धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई देने लगा. इस घटना की सूचना मिलते ही सोसाइटी में हड़कंप मच गया. लोग अपने-अपने फ्लैटों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे. अब फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पा लिया है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का तत्काल संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. सीएम योगी ने कहा कि लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी को तुरंत मौके पर पहुंचने और स्थिति की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया. कई घंटों की मशक्कत के बाद आग अब कंट्रोल में है, हालांकि कूलिंग का काम अभी भी जारी है. फायर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में पता चला है कि आग 9वीं मंजिल से शुरू हुई थी. हालांकि, आग लगने के सटीक कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है. फायर ऑफिसर राहुल ने बताया कि सोसाइटी का फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह काम कर रहा था, जिससे राहत एवं बचाव कार्य में काफी मदद मिली. आग लगने के बाद तुरंत अलार्म बजा और लोगों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया. राहत की बात यह है कि अब तक किसी के अंदर फंसे होने की पुष्टि नहीं हुई है. एक बुजुर्ग व्यक्ति को एहतियातन एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया था. अधिकारियों के मुताबिक, वह पहले से ही अस्वस्थ थे. इस अग्निकांड में कुल आठ फ्लैट प्रभावित हुए हैं. आग इतनी भीषण थी कि 9वीं मंजिल से उठी लपटें 13वीं मंजिल तक पहुंच गई थीं. काले धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था. मौके पर फायर ब्रिगेड की करीब 20 गाड़ियां तैनात की गईं. हालांकि, पार्क की दीवार के कारण दमकल की गाड़ियों से पानी का दबाव ऊपरी मंजिलों तक पहुंचाने में शुरुआती दिक्कतों का सामना करना पड़ा. सुबह 8:30 बजे मिली थी आग लगने की सूचना सुबह करीब 8:30 बजे आग लगने की सूचना मिली थी, जिसके बाद दमकल, पुलिस और प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं. फिलहाल, आग पूरी तरह बुझने के बाद सभी फ्लैटों की विस्तृत जांच की जाएगी. इसके बाद ही नुकसान का सही आकलन और आग लगने के कारणों का खुलासा हो सकेगा. मौके पर मौजूद चश्मदीदों ने कहा कि आग करीब साढ़े आठ बजे दिखाई दी थी. आग से अब तक आठ फ्लैट प्रभावित हुए हैं. हालांकि, उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार अभी तक किसी के अंदर फंसे होने की सूचना नहीं मिली है. फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि दूर से ही दिखाई दे रही थीं. कई लोगों ने घटना के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किए, जो वायरल हो रहे हैं.

कम लागत में ज्यादा कमाई : प्राकृतिक खेती से बदल रही यूपी के किसानों की तकदीर

प्राकृतिक खेती से बेहतर आय अर्जित कर रहे 2.60 लाख किसान कम लागत में ज्यादा कमाई : प्राकृतिक खेती से बदल रही यूपी के किसानों की तकदीर प्राकृतिक खेती योजनाओं के अंतर्गत 75 जिलों में 2356 क्लस्टर में 1.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल आच्छादित गो आधारित प्राकृतिक खेती योजना के तहत बुंदेलखंड क्षेत्र के 7 जनपदों में 470 प्राकृतिक क्लस्टर संचालित बुंदेलखंड में 23 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र आच्छादित, 22 हजार किसानों को मिला लाभ लखनऊ  उत्तर प्रदेश में खेती अब सिर्फ गुजारे का जरिया नहीं, बल्कि कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला व्यवसाय बनती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘प्राकृतिक खेती मिशन’ के जरिए खेती-किसानी की तस्वीर बदल रही है। रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों के जाल से निकलकर अब किसान देसी संसाधनों के सहारे खेती कर रहे हैं और यही बदलाव उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है। प्रदेश में इस समय 75 जिलों में 2356 क्लस्टर के जरिए 1.14 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्राकृतिक खेती के दायरे में आ चुका है। इसका सीधा फायदा 2.60 लाख किसानों को मिल रहा है। खास बात यह है कि यह खेती सिर्फ उत्पादन का तरीका नहीं बदल रही, बल्कि किसानों के खर्च को कम करके उनकी आमदनी बढ़ाने का रास्ता भी खोल रही है। बुंदेलखंड बना अभियान का मजबूत चेहरा इस अभियान का मजबूत चेहरा बुंदेलखंड बनकर उभरा है। झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जैसे जिलों में ‘गो-आधारित प्राकृतिक खेती’ ने नई उम्मीद जगाई है। बुंदेलखंड क्षेत्र के करीब 23 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली इस पहल ने पहले के समय सूखा और संसाधनों की कमी से जूझ रहे इलाके को एक नए मॉडल में बदल दिया है। इसका लाभ 22 हजार किसानों को मिला। गो आधारित जीवामृत और घनजीवामृत के इस्तेमाल से खेती की लागत तेजी से घटी है, वहीं फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई है। किसानों को कम खर्च में मिल रहा बेहतर उत्पादन गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि बुंदेलखंड में शुरू हुआ यह मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बन रहा है। किसानों को कम खर्च में बेहतर उत्पादन मिल रहा है और बाजार में प्राकृतिक उत्पादों की मांग उन्हें अतिरिक्त लाभ दे रही है। किसानों की जेब पर बोझ घटाकर उनकी आमदनी बढ़ाना और लोगों को रसायनमुक्त भोजन उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकता है।  सुरक्षित और स्वास्थ्यकर खाद्यान्न खेतों में केमिकल की जगह गो-आधारित फसलों से किसान आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि योगी सरकार का यह प्रयोग न सिर्फ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि प्रदेश को सुरक्षित और स्वास्थ्यकर खाद्यान्न की दिशा में भी आगे बढ़ा रहा है।

पीएम मोदी गंगा एक्सप्रेसवे को आज राष्ट्र को समर्पित करेंगे, यूपी में विकास की नई राह खोलेगी

पीएम मोदी आज (बुधवार) राष्ट्र को समर्पित करेंगे गंगा एक्सप्रेसवे, यूपी की ‘लाइफ लाइन’ पर दौड़ेगा विकास 594 किमी का मेगा कॉरिडोर पश्चिम से पूर्व तक जोड़ेगा प्रदेश को, औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और रोजगार को मिलेगा बड़ा बूस्ट मेरठ से प्रयागराज तक हाई-स्पीड कॉरिडोर कृषि विपणन, और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से गेमचेंजर साबित होगी प्रधानमंत्री विभिन्न गतिविधियों में लेंगे हिस्सा, यूपीडा की प्रदर्शनी के अवलोकन के साथ ही जनसभा को करेंगे संबोधित लखनऊ  बुधवार को उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया जाएगा, जो मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा हाईस्पीड कॉरिडोर है। यह परियोजना न केवल प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगी, बल्कि औद्योगिक निवेश, कृषि विपणन, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी गेमचेंजर साबित होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल से सीधे जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी मजबूती प्रदान करेगा। 12 जिलों को सीधी कनेक्टिविटी, यात्रा समय में बड़ी कमी प्रधानमंत्री सुबह 11.15 पर हरदोई पहुंचेंगे और 12.55 पर यहां से वापस लौटेंगे। इस दौरान पीएम गंगा एक्सप्रेसवे का उदघाटन करने के साथ ही यूपीडा की प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे और साथ ही पौधरोपण करने के अलावा जनसभा समेत अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री जिस गंगा एक्सप्रेसवे को हरी झंडी दिखाएंगे वह मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ता है। इस हाई-स्पीड मार्ग के चालू होने से इन क्षेत्रों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। जहां पहले लंबी दूरी तय करने में कई घंटे लगते थे, अब यह सफर तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा। इसके साथ ही, माल परिवहन की लागत में कमी आने से उद्योगों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। पीपीपी मॉडल पर आधुनिक निर्माण गंगा एक्सप्रेसवे को पीपीपी (DBFOT) मॉडल पर विकसित किया गया है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे फिलहाल 6 लेन में तैयार किया गया है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे 8 लेन तक विस्तार योग्य बनाया गया है। 120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के साथ यह एक्सप्रेसवे तेज और सुगम यातायात सुनिश्चित करेगा। उच्च गुणवत्ता के निर्माण, चौड़े राइट ऑफ वे और मजबूत सेफ्टी फीचर्स इसे देश के सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे में शामिल करते हैं। एयरस्ट्रिप, आईटीएमएस और सुरक्षा की अत्याधुनिक व्यवस्था इस एक्सप्रेसवे की एक खास विशेषता शाहजहांपुर के पास बनाई गई लगभग 3.2 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप है, जहां आपात स्थिति में वायुसेना के विमान उतर सकते हैं। इसके अलावा, पूरे मार्ग पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस), सीसीटीवी निगरानी, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, एम्बुलेंस और पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है। वाहनों की गति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा। औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स विकास का नया केंद्र गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आईएमएलसी) इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत हैं। इन क्लस्टर्स में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स हब स्थापित किए जाएंगे। सरकार द्वारा दी जा रही कैपिटल सब्सिडी, एसजीएसटी रिइम्बर्समेंट, स्टाम्प ड्यूटी छूट, पावर इंसेंटिव और पीले टॉप-अप जैसी सुविधाएं निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। इससे प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आएगा और लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। अन्य एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी, बनेगा मजबूत नेटवर्क गंगा एक्सप्रेसवे को प्रदेश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे (पूर्वांचल, आगरा-लखनऊ, बुंदेलखंड और गोरखपुर लिंक) से जोड़ा जा रहा है। इससे उत्तर प्रदेश में एक इंटरकनेक्टेड एक्सप्रेसवे नेटवर्क तैयार होगा, जो देश में सबसे बड़ा होगा। बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल लोगों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि माल ढुलाई तेज और सस्ती हो जाएगी, जिससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई गति मिलेगी। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर कृषि आधारित उद्योग, मंडियां, कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस विकसित किए जाएंगे। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिलेगा और उन्हें उचित मूल्य प्राप्त होगा। इसके साथ ही, पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा और समग्र विकास सुनिश्चित होगा। रोजगार सृजन और निवेश का नया अध्याय गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिला है और आगे भी लाखों रोजगार के अवसर सृजित होंगे। आईएम आईएमएलसी और औद्योगिक कॉरिडोर के विकसित होने से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों की रुचि बढ़ेगी। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।