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उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और एनएसई के बीच हुआ एमओयू

यूपी के 1.5 लाख से अधिक युवाओं को मिलेगी निशुल्क फाइनेंशियल स्किल्स की ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और एनएसई के बीच हुआ एमओयू यूपीएसडीएमयू और डीडीयू-जीकेवाई के 1000 से अधिक केन्द्रों में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवा होंगे लाभांवित  रोजगार के साथ-साथ युवाओं को ‘स्किल + फाइनेंशियल इंटेलीजेंस’ मॉडल पर आत्मनिर्भर बनाएगा मिशन   मिशन मुख्यालय में वर्कशॉप का आयोजन, अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी जानें फाइनेंस मैनेजमेंट के 12 मूल मंत्र  लखनऊ,  प्रदेश के युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ना ही अब योगी सरकार का लक्ष्य नहीं है, बल्कि अपनी प्राथमिकताओं का दायरा बढ़ाते हुए युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, जागरूक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार नागरिक बनाना भी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री योगी के इसी विजन को धरातल पर उतारते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के बीच शुक्रवार को एमओयू हुआ। मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर पहली बार कौशल प्रशिक्षण को वित्तीय शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। इस साझेदारी के तहत यूपीएसडीएम तथा दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू जीकेवाई) के अंतर्गत प्रदेश भर में 1000 से अधिक ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 1.5 लाख से अधिक युवाओं को अगले हफ्ते से फाइनेंशियल स्किलिंग की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। मिलेगी फाइनेंशियल स्किलिंग की ट्रेनिंग एमओयू से पहले मिशन मुख्यालय स्थित सभागार में फाइनेंशियल लिटरेसी एंड अवेयरनेस वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों को वित्तीय जागरूकता एवं आर्थिक निर्णय क्षमता का महत्व बताया गया। मिशन निदेशक भी वर्कशॉप में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाओं और वित्तीय अनिश्चितताओं के दौर में युवाओं को वित्तीय शिक्षा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने फाइनेंशियल स्किलिंग की ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है ।  एक्सपर्ट्स ने बताए वित्तीय सफलता के 12 मूल मंत्र प्रेसेंटेशन के माध्यम से एनएसई के अधिकारियों ने फाइनेंशियल सक्सेस के 12 मूल मंत्र बताए। उन्होंने बताया पहले खुद के भविष्य के लिए बचत करें। इनकम से कम खर्च करें। आपातकालीन फंड तैयार रखें। हाई इंटरेस्ट पर ऋण लेने से बचें, रेगुलर इन्वेस्टमेंट करें। इन्वेस्टमेंट में विविधता रखें। रिस्क और रिटर्न की समझ रखें। टैक्स को देखते हुए निवेश करें। आवश्यक बीमा करवाएं। लॉन्ग टर्म एसेट्स लें और समय-समय पर इन्वेस्टमेंट की समीक्षा करें। ‘सारथी एप’ बनेगा युवाओं का डिजिटल वित्तीय मार्गदर्शक वर्कशॉप  में कर्मचारियों को सारथी एप (SaaRthi App) के बारे में भी विस्तार से बताया गया। यह इन्वेस्टमेंट एजुकेशन के लिए बनाया गया एक उपयोगी डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो उपयोगकर्ताओं को इन्वेस्टमेंट संबंधी शैक्षणिक वीडियो, वित्तीय योजना के टूल्स, कैलकुलेटर और फाइनेंशियल हेल्थ चेकअप जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। कौशल के साथ आर्थिक समझ भी जरूरी  यह एमओयू प्रदेश के युवाओं के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा। कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार पाने वाले युवा अब केवल आय अर्जित नहीं करेंगे, बल्कि यह भी समझेंगे कि पहली सैलरी का सही उपयोग कैसे करें, बजट और बचत कैसे शुरू करें, इन्वेस्टमेंट कब और कहां करना चाहिए, अनावश्यक ऋण से कैसे बचना है, भविष्य की आर्थिक सुरक्षा कैसे तैयार करनी है। यह ट्रेनिंग युवाओं को घर खरीदने, व्यवसाय शुरू करने, परिवार की आर्थिक सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवानिवृत्ति जैसे जीवन के बड़े निर्णय लेने में भी सक्षम बनाएगी। साथ ही वित्तीय जागरूकता उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी निवेश योजनाओं और आर्थिक जोखिमों से सुरक्षित रहने में भी मदद करेगी। युवाओं को “स्किल + फाइनेंशियल इंटेलीजेंस” के माध्यम से रोजगार से आगे बढ़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। वर्कशॉप में अपर मिशन निदेशक पूजा मिश्रा, जॉइंट डायरेक्टर मयंक गंगवार, वित्त नियंत्रक संदीप कुमार, असिस्टेंट डायरेक्टर एम के सिंह, असिस्टेंट डायरेक्टर पवित्रा टंडन व मिशन के अन्य कर्मचारी मौजूद रहें। वहीं, एनएसई से चीफ रेग्युलेटरी ऑफिसर अंकित शर्मा, वाइस प्रेसिडेंट जोगिंदर सिंह और यूपी रीजन की सीनियर इंचार्ज श्रुति शर्मा भी वर्कशॉप में मौजूद रहीं । वर्जन कौशल विकास का वास्तविक उद्देश्य तब तक अधूरा है, जब तक हमारे युवा अपनी कमाई का सही उपयोग और मैनेजमेंट करना न सीखें। आज रोजगार पाना जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है वित्तीय रूप से समझदार बनना। एनएसई के साथ यह साझेदारी युवाओं को स्किल + फाइनेंशियल इंटेलीजेंस के मॉडल पर तैयार करेगी, जिससे वे केवल नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि आर्थिक रूप से सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।  – पुलकित खरे, मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन

योगी सरकार की हरित पहल: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर जल्द दौड़ेंगी हाइड्रोजन बसें

योगी सरकार की हरित पहल: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर दौड़ेंगी हाइड्रोजन बसें डीजल से हाइड्रोजन तक: भविष्य के परिवहन मॉडल का नेतृत्व कर रहा यूपी प्रत्येक हाइड्रोजन बस में होंगी 42 सीटें, एक बार में 750 किमी. की यात्रा, प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन भी लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों के साथ 3 हाइड्रोजन बसों को भी हरी झंडी दिखाई। यह पहल प्रदेश को हरित परिवहन की दिशा में आगे ले जाएगी। इससे प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। एनटीपीसी दादरी द्वारा विकसित ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना के तहत इन बसों का निर्माण किया गया है। ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है। डीजल व पेट्रोल आधारित वाहनों की तुलना में हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसें पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल हैं। इन बसों से उत्सर्जन के रूप में केवल पानी निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण की समस्या नहीं होती। यही कारण है कि दुनिया के विकसित देश भी हाइड्रोजन आधारित परिवहन को बढ़ावा दे रहे हैं और अब उत्तर प्रदेश भी इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाता दिखाई देगा। हर साल एक हजार टन कार्बन उत्सर्जन होगा कम इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के जल का उपयोग किया जा रहा है। इससे प्राकृतिक जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा। साथ ही प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा, जो लगभग 1750 पेड़ लगाने के बराबर है। इसके अलावा इस परियोजना से प्रति वर्ष करीब 1000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। एक बार में 750 किमी तक यात्रा संभव 42 यात्रियों की क्षमता वाली प्रत्येक बस में एक बार में 56 किलोग्राम हाइड्रोजन भरी जा सकेगी, जिससे लगभग 750 किलोमीटर तक की यात्रा संभव होगी। ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह परियोजना न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि भविष्य के हरित परिवहन मॉडल का भी मार्ग प्रशस्त करेगी।

विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे सीएम योगी

विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री योगी मुख्य अतिथि के रूप में होंगे शामिल देश के सबसे बड़े विज्ञान आंदोलन का राष्ट्रीय अधिवेशन 13 -14 जून को काशी हिंदू विश्वविद्यालय में  राष्ट्रीय अधिवेशन में देश-विदेश के लगभग 1200 प्रतिनिधि हो रहे शामिल  विज्ञान भारती के सदस्य, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि एवं विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ हो रहे शामिल  अधिवेशन का उद्देश्य वैज्ञानिक एवं सामाजिक चुनौतियों पर चर्चा कर वैज्ञानिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के लिए कार्ययोजना तैयार करना   वन हेल्थ, विकसित भारत हेतु नेट ज़ीरो तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नैतिकता जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर भी होगी विशेष चर्चा  वाराणसी,   काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और वैदिक विज्ञान केंद्र के संयुक्त  तत्वावधान में आयोजित  विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में 13 जून की सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह सत्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं राष्ट्रीय विकास से संबंधित विचार-विमर्श की दिशा निर्धारित करेगा। भारत के सबसे बड़े विज्ञान आंदोलन विज्ञान भारती का 7 वां राष्ट्रीय अधिवेशन 13 एवं 14 जून को काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में आयोजित किया जा रहा है।  इस दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में देश-विदेश से लगभग 1200 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।  इनमें विज्ञान भारती के सदस्य, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि एवं विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी,नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. शेखर सी. मांडे भी उद्घाटन सत्र में सहभागिता करेंगे। अधिवेशन में देश के प्रमुख संस्थानों एवं सरकारी संगठनों से जुड़े प्रतिष्ठित वक्ता एवं विचारक अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। वन हेल्थ विषयक सत्र का नेतृत्व राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग  के अध्यक्ष डॉ. बी. एन. गंगाधर करेंगे, जिसमें शिक्षण, स्वास्थ्य एवं अनुसंधान संस्थानों से जुड़े विशिष्ट विशेषज्ञ भाग लेंगे।  विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिवकुमार शर्मा ने जानकारी दी कि इस अधिवेशन का उद्देश्य समसामयिक वैज्ञानिक एवं सामाजिक चुनौतियों पर सार्थक विमर्श करते हुए वैज्ञानिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के लिए एक कार्ययोजना तैयार करना है। इस वर्ष के अधिवेशन में वन हेल्थ, विकसित भारत हेतु नेट ज़ीरो तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नैतिकता जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर विशेष चर्चा की जाएगी। विकसित भारत हेतु नेट ज़ीरो विषयक सत्र का नेतृत्व मध्य प्रदेश शासन के ऊर्जा तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव मनु श्रीवास्तव करेंगे। इस सत्र में सतत विकास एवं ऊर्जा संक्रमण से जुड़े विभिन्न आयामों पर चर्चा होगी।  राष्ट्रीय महासचिव विवेकानन्द पाई ने बताया कि अधिवेशन के दूसरे दिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नैतिकता विषयक विशेष सत्र का नेतृत्व भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव तथा इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के पूर्व अध्यक्ष और पद्मश्री पुरस्कृत प्रो. आशुतोष शर्मा करेंगे। इस सत्र में शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं तथा तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा समाज हित में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्तरदायी एवं नैतिक उपयोग पर विचार-विमर्श किया जाएगा। अधिवेशन में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार का सार्वजनिक व्याख्यान भी आयोजित किया गया है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल विशेष उद्बोधन देंगे तथा अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।  संचालक समिति सदस्य ,प्रो रामनारायण द्विवेदी  ने बताया विज्ञान भारती द्वारा इस अवसर पर “भारत के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार  नीति” संबंधी प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। 14 जून को आयोजित समापन सत्र में भारत सरकार के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर तथा प्रो. गोवर्धन दास विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह में शामिल होंगे।   विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन विज्ञान भारती  के क्षेत्र संगठन मंत्री अंकित राय ने जानकारी दी कि यह राष्ट्रीय अधिवेशन संवाद, सहयोग एवं नीति-निर्माण के लिए एक प्रभावी मंच सिद्ध होगा जो भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने तथा “विकसित भारत” के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

ओबीसी छात्रों के लिए वरदान बनी पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना, 8.8 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला लाभ

योगी सरकार की छात्रवृत्ति योजना से लाखों छात्रों को मिला सहारा, प्रयागराज रहा प्रदेश में अव्वल ओबीसी छात्रों के लिए वरदान बनी पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना, 8.8 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला लाभ आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर और कुशीनगर भी टॉप-5 जिलों में शामिल कक्षा 9 और 10 के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मिल रही सीधी वित्तीय सहायता पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था से सीधे बैंक खातों में पहुंच रही छात्रवृत्ति राशि लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा को समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। सरकार की छात्रवृत्ति योजनाएं लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी हैं। पिछड़ा वर्ग पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या के मामले में प्रयागराज जिला पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है। यहां 39,892 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। यह संख्या प्रदेश में सर्वाधिक है और दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर पात्र विद्यार्थियों तक पहुंच रहा है। जौनपुर में 31 हजार से ज्यादा छात्रों को मिली छात्रवृत्ति प्रदेश में प्रयागराज के बाद आजमगढ़ दूसरे स्थान पर रहा, जहां 35,785 छात्र-छात्राओं के खातों में छात्रवृत्ति की राशि पहुंची है। इसी तरह गाजीपुर में 32,872 छात्र-छात्राओं को लाभ मिला, जबकि जौनपुर में 31,475 और कुशीनगर में 26,137 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। इस तरह वर्ष 2025-26 में पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 8.88 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। इसमें 4 लाख 58 हजार से ज्यादा छात्राएं, 4 लाख 30 हजार से अधिक छात्र और 3 ट्रांसजेंडर शामिल है। छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक होना इस बात का संकेत है कि प्रदेश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं।  कक्षा 9 और 10 के छात्रों को मिल रही छात्रवृत्ति योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को 150 रुपये प्रतिमाह की दर से अधिकतम 10 माह तक छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त 750 रुपये वार्षिक अनुदान भी दिया जाता है। इस प्रकार एक छात्र को कुल 2,250 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। योगी सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया है। छात्र छात्रवृत्ति प्रबंधन प्रणाली की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करते हैं। पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना मुख्य रूप से कक्षा 9 और 10 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए है।  हर पात्र छात्र को समय पर सहायता उपलब्ध हो- निदेशक, पिछड़ा वर्ग इस योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों के बच्चों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, जिनकी वार्षिक आय दो लाख रुपये या उससे कम है। आर्थिक तंगी के कारण कई बार प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो जाती है। प्रदेश सरकार की यह योजना ऐसे छात्रों के लिए संबल का काम कर रही है और उन्हें शिक्षा से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा संचालित पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजनाएं पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक अभाव किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने और हर पात्र छात्र को समय पर सहायता उपलब्ध हो।

30 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं आंधियां

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मौसम अचानक बदल गया है। रायबरेली जिले में शनिवार की सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह करीब 08:15 बजे आसमान में बादल छा गए। तेज हवाओं के साथ धूल का गुबार उठा, और देखते ही देखते बूंदाबांदी झमाझम बारिश में बदल गई। लगभग डेढ़ घंटे तक हुई इस तेज बारिश ने जहां एक तरफ लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी निजात दिलाई है। वहीं दूसरी तरफ शहर की रफ्तार पर कुछ देर के लिए ब्रेक भी लगा दिया। वर्षा ऋतु की इस पहली अच्छी बारिश का बच्चों ने जमकर लुत्फ उठाया। वे सड़कों और छतों पर भीगते नजर आए। वहीं, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के 30 जिलों में आंधी-बारिश, मेघगर्जन और वज्रपात की संभावना जताई है। नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी और प्रयागराज समेत 40 जिलों के लिए यलो अलर्ट भी जारी किया गया है। किसानों के चेहरे खिले, आम-जामुन की फसल को संजीवनी रायबरेली में हुई यह बारिश कृषि क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो रही है। खासकर धान की नर्सरी (बैरन) डाल रहे किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। इसके अलावा, इस बारिश को आम और जामुन के फलों के लिए भी बेहद लाभदायक माना जा रहा है, जिससे फसलों में चमक और मिठास बढ़ेगी। पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते कई जिलों में अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार सबसे ज्यादा असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के इलाकों में देखने को मिल सकता है। वहां हवाओं की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 80 किलोमीटर प्रति घंटे के तूफानी झोकों में बदल सकती है। मौसम विभाग ने प्रदेश के तीन अलग-अलग कैटेगरी में बांटकर आंधी की रफ्तार का आकलिया है। इसके मुताबिक फिरोजाबाद, मैनपुरी, आगरा, एटा, इटावा, कासगंज अलीगढ़, मथुरा, औरैया, जालौन, हाथरस, महोबा, हमीरपुर, ललितपुर और झांसी में सबसे भीषण अंधड़ चलने की आशंका है। यहां हवा की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। हीट डोम क्षेत्र से छिटक रहे बादल जून में भी उत्तरी पाकिस्तान से आए पश्चिमी विक्षोभों का प्रदेश के कई जिलों में असर पड़ा लेकिन हीट डोम वाले क्षेत्रों से बादल छिटक गए। यहां या तो बारिश हुई नहीं और हुई भी तो नाममात्र। इसके विपरीत पश्चिमी यूपी के जनपदों में भारी बारिश हुई। आईएमडी के शुक्रवार सुबह 08:30 बजे के आंकड़ों के अनुसार मेरठ 62 मिमी, मुरादाबाद 66 मिमी, मुजफ्फरनगर 57 मिमी, शाहजहांपुर 18 मिमी, हरदोई 09 मिमी, झांसी 01 मिमी, इटावा 10 मिमी, बरेली 19 मिमी, आगरा 18 मिमी और गाजियाबाद में 6.5 मिमी बारिश हुई। अन्य जनपदों में ज्यादातर में बूंदाबांदी या एक से दो मिली बारिश ही हुई। लेकिन बुंदेलखंड के जनपदों व कानपुर नगर समेत आसपास के जनपदों में जहां तापमान 40 के पार रहा वहां बारिश नाममात्र ही हुई। पिछले 48 घंटों से ऑरेंज अलर्ट के बावजूद केवल तेज हवाएं चलीं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जो हीट डोम का क्षेत्र है वहां बारिश ऐसे में मुश्किल होती है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ सशक्त था जिसका असर आगे भी पड़ेगा। देश के मध्य हिस्से के राज्यों में अभी आंधी-पानी जारी रहेगा लेकिन शनिवार से यूपी में यह सीमित हो जाएगा। 30 जिलों में ऑरेन्ज अलर्ट, 40 में यलो अलर्ट प्रदेश में चक्रवातीय प्रणालियों और पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम का मिजाज आक्रामक बना हुआ है। अमौसी स्थित यूपी-उत्तराखंड के मौसम मुख्यालय ने अगले 24 घंटों यानी शनिवार की सुबह तक के लिए 30 जिलों में तेज आंधी-बारिश, और वज्रपात का ऑरेन्ज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा 40 जिलों के लिए यलो अलर्ट है। मौसम विभाग के मुताबिक, सबसे ज्यादा प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के इलाकों में देखने को मिलेगा। जहां हवाओं की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 80 किलोमीटर प्रति घंटे के तूफानी झोंकों में तब्दील हो सकती है।

सेना के जवानों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा यूपी की देसी गायों के दूध से बना स्कॉयर फ्रीज ड्राइड योगर्ट पाउडर

डेनिश डेयरी टेक्नोलॉजी से देसी गायों के दूध के उत्पाद बना यूपी बना देश का 'धुरंधर'  सेना के जवानों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा यूपी की देसी गायों के दूध से बना स्कॉयर फ्रीज ड्राइड योगर्ट पाउडर मुख्यमंत्री योगी की प्रेरणा से देसी नस्ल की गायों के संरक्षण से राष्ट्रशक्ति और आर्थिक समृद्धि का नया मॉडल तैयार देसी गाय के दूध के विशेष उत्पाद से और फुर्तीले होंगे सेना के जवान, दुश्मनों के दांत खट्टे करने में मिलेगी नई ताकत  लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण अब राष्ट्रशक्ति, सैनिक सामर्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला नया मॉडल बनकर उभरा है। योगी सरकार के कुशल प्रबंधन से प्रदेश की देसी नस्ल की गायों का दूध अब भारतीय सेना के जवानों की ताकत बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डेनमार्क और आइसलैंड की अत्याधुनिक डेयरी तकनीक से तैयार हो रहा विशेष डेयरी उत्पाद स्कॉयर (Skyrrup) सेना के जवानों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करने में उपयोगी साबित हो रहा है। उत्तर प्रदेश की देसी गायों के दूध से तैयार यह प्रीमियम सप्लीमेंट अब भारतीय सेना में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, कम फैट और प्राकृतिक पोषक तत्वों से भरपूर यह उत्पाद जवानों को अधिक फिट, ऊर्जावान और सक्षम बनाने में मदद करेगा। पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित हो रही गो आधारित अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर भारत की नई ताकत बनती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश का मॉडल अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है। देश का पहला मॉडल, जहां गो सेवा से बढ़ रही सेना की शक्ति प्रयागराज के रहने वाले इंजीनियर एस.एन. द्विवेदी ने नोएडा में रोजगार, गो संरक्षण और आधुनिक डेयरी तकनीक को जोड़कर एक अनूठा मॉडल विकसित किया है। उनकी डेयरी में गिर, साहीवाल समेत 250 से अधिक देसी नस्ल की गायों की देखरेख की जा रही है। इन गायों के दूध में प्राकृतिक रूप से उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन और अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हीं गुणों के कारण भारतीय सेना में इनके दूध से बने उत्पाद की मांग लगातार बढ़ रही है।  देसी गायों के दूध से तैयार स्कॉयर जवानों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा देने तथा मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक माने जा रहे हैं। आधुनिक प्रोसेसिंग और अल्ट्रा फिल्टर तकनीक के कारण इन उत्पादों की गुणवत्ता काफी बढ़ जाती है। डेनमार्क की अल्ट्रा फिल्टर तकनीक से तैयार होता है स्कॉयर स्कॉयर आइसलैंड का एक पारंपरिक डेयरी उत्पाद है, जिसे दही और चीज के बीच की श्रेणी का माना जाता है। इसका स्वाद हल्का खट्टा होता है और करीब 1000 साल पहले उत्तरी यूरोप के समुद्री योद्धा वाइकिंग्स (Vikings) खाते थे। इसमें सामान्य डेयरी उत्पादों की तुलना में अधिक प्रोटीन और बेहद कम फैट होता है। इसमें स्कॉयर, ग्रीक योगर्ट, जिलेटो आइसक्रीम, स्कॉयर पाउडर, योगार्ट पाउडर, पनीर और घी सभी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में पहली बार डेनमार्क की अत्याधुनिक अल्ट्रा फिल्टर डेयरी तकनीक और आइसलैंड की प्रोसेसिंग पद्धति का उपयोग कर इसे तैयार किया जा रहा है। यही कारण है कि प्रदेश में तैयार हो रहे प्रीमियम दूध और उससे बने उत्पाद राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। इससे प्रदेश की देसी गाय आधारित डेयरी अर्थव्यवस्था को नया बाजार और नई पहचान मिल रही है। गो संरक्षण से रोजगार और आर्थिक समृद्धि की नई राह इंजीनियर एस.एन. द्विवेदी अब अलीगढ़ में 500 देसी गायों की क्षमता वाली अत्याधुनिक गोशाला विकसित कर रहे हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिली प्रेरणा ने उन्हें गो सेवा और गो संरक्षण के कार्य को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने का संकल्प दिया। उन्होंने गो सेवा को रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि से जोड़ते हुए ऐसा मॉडल विकसित किया है जिसकी चर्चा अब देशभर में हो रही है। आधुनिक तकनीक और भारतीय संस्कृति के समन्वय से उन्होंने साबित किया है कि गौ संरक्षण केवल परंपरा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का प्रभावी माध्यम भी बन सकता है। योगी सरकार में राष्ट्रनिर्माण का आधार बन रहा गो संरक्षण उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि योगी सरकार द्वारा गो संरक्षण को लेकर किए गए प्रयास अब बड़े परिणामों के रूप में सामने आ रहे हैं। आधुनिक गोशालाएं, उन्नत डेयरी तकनीक, डिजिटल मार्केटिंग और मूल्य संवर्धित गो उत्पादों ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि गो सेवा के माध्यम से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं, वहीं भारतीय सेना तक पौष्टिक गो उत्पाद पहुंचाकर इसे राष्ट्रसेवा से भी जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित हो रही गो आधारित अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर भारत की नई ताकत बनती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में औरैया का वृद्धाश्रम बना आत्मनिर्भरता का केंद्र

सेवा, सम्मान और स्वाभिमान का संगम: योगी सरकार की पहल से वृद्धाश्रम बना आत्मनिर्भरता का केंद्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में औरैया का वृद्धाश्रम बना आत्मनिर्भरता का केंद्र आराध्या वृद्ध महिला स्वयं सहायता समूह की माताएं पूजा सामग्री, गुलाब जल और मुंगौड़ी बनाकर बढ़ा रहीं स्वावलंबन की राह वृद्ध पुरुष स्वयं सहायता समूह के सदस्य गोसेवा और ऑर्गेनिक खेती के जरिए पेश कर रहे मिसाल लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में वृद्धाश्रम केवल बेघर और निराश्रित बुजुर्गों के लिए आश्रय स्थल भर नहीं रह गए हैं, बल्कि सेवा, सम्मान और स्वाभिमान के साथ आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में भी नई पहचान बना रहे हैं। इसका सबसे प्रेरणादायक उदाहरण औरैया जिले का वृद्धाश्रम है, जहां बुजुर्ग अपने अनुभव, हुनर और श्रम के बल पर स्वावलंबन की नई कहानी लिख रहे हैं। बुजुर्ग अपने कार्यों के माध्यम से दे रहे आत्मविश्वास और स्वाभिमान का संदेश  औरैया वृद्धाश्रम में गठित आराध्या वृद्ध महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी माताएं पूजा सामग्री, गुलाब जल और मुंगौड़ी तैयार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। जीवन के उस पड़ाव में, जब अक्सर लोग स्वयं को समाज से अलग-थलग महसूस करने लगते हैं, ये महिलाएं अपने कार्यों के माध्यम से आत्मविश्वास और स्वाभिमान का संदेश दे रही हैं। वहीं, वृद्धाश्रम में गठित वृद्ध पुरुष स्वयं सहायता समूह के सदस्य गोसेवा और ऑर्गेनिक खेती के जरिए समाज के सामने प्रेरणादायक मिसाल पेश कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए वे न केवल उत्पाद तैयार कर रहे हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश भी दे रहे हैं। योगी सरकार में मिल रहा 6316 बुजुर्गों को सुरक्षा और सहारा   मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन में समाज कल्याण विभाग का उद्देश्य बुजुर्गों को केवल संरक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वो अपनी क्षमताओं के अनुरूप सक्रिय भूमिका निभा सकें। प्रदेश के 75 जिलों में 6316 बुजुर्गों को सुरक्षा और सहारा मिल रहा है। इन सभी वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों को सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही योग, भजन-कीर्तन, मनोरंजन और सामूहिक संवाद जैसी गतिविधियों के माध्यम से उन्हें मानसिक रूप से भी सक्रिय बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के प्रयासों से वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जो बुजुर्ग कभी उपेक्षा और असहाय का जीवन जीने को विवश थे, वे आज सम्मान और आत्मविश्वास के साथ समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। बुजुर्गों के जीवन में आशा, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का होता है संचार  योगी सरकार की पहल केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होती, बल्कि बुजुर्गों  के जीवन में आशा, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का संचार भी करती है। औरैया का यह मॉडल इस बात का प्रमाण है कि अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर बुजुर्ग भी समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इसके अलावा वृद्धाश्रमों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर निरीक्षण, समीक्षा और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है।    संजीव सिंह, निदेशक, समाज कल्याण विभाग

CM का बड़ा ऐलान: हर शहर और गांव को ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेंगे

हर शहर, गांव को ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेंगेः मुख्यमंत्री सीएम योगी ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यीडा क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट तक संचालित होने वाली 45 इलेक्ट्रिक व 3 हाइड्रोजन बसों को किया फ्लैग ऑफ नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी किया शुभारंभ किया सीएम योगी ने 15 जून तक 110 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन, मांग के अनुरूप 500 तक बढ़ाई जाएगी इलेक्ट्रिक बसों की संख्या लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को ग्रीन मोबिलिटी व सस्टेनेबल डेवलपमेंट का विजन दिया है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार आने वाले समय में हर शहर-गांव को पेट्रोल-डीजल मुक्त ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेगी। हर व्यक्ति को बेहतर, आरामदायक व पर्यावरण अनुकूल परिवहन सेवा मिलने पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि प्रदेश में परिवहन विभाग का बेड़ा बड़ा हो रहा है, उनके कार्य भी बड़े दिखने चाहिए। सीएम योगी ने शुक्रवार को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट तक संचालित होने वाली उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की 45 इलेक्ट्रिक बसों व 3 हाइड्रोजन बसों को लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये फ्लैग ऑफ किया। उन्होंने इस अवसर पर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी शुभारंभ किया। 15 जून से संचालित होने जा रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट  अपने संबोधन में सीएम ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे गतिरोध बड़ी चुनौतियां हैं। इनके कारण दुनिया वायु प्रदूषण, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, ओलावृष्टि का सामना कर रही है। दुनिया पर थोपे गए युद्धों की कीमत पूरी मानवता चुका रही है। पीएम के विजन को धरातल पर उतारने के लिए 15 जून से भारत के सबसे बड़े हवाई अड्डे (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) का संचालन प्रारंभ होने जा रहा है। देश के सबसे बड़े आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक हब तथा सुचारु वायुसेवा की दृष्टि से यात्रियों, नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तीनों अथॉरिटी (नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यीडा) ने परिवहन निगम के माध्यम से यह सेवा प्रारंभ की है। यह नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरे नोएडा, ग्रेनो व यीडा  मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना अथॉरिटी आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, स्टार्टअप्स, सेमीकंडक्टर समेत अन्य औद्योगिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में उभरी हैं। दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों को वहां लाने के साथ ही पर्यावरण अनुकूल परिवहन समय की मांग है। वहां कुछ क्षेत्रों में मेट्रो का संचालन भी हो रहा है, लेकिन लास्ट माइल कनेक्टिविटी की दृष्टि से इलेक्ट्रिक बस का संचालन मील का पत्थऱ साबित होने जा रहा है। 15 जून तक तीनों अथॉरिटी द्वारा 110 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रारंभ होगा। मांग के अनुरूप इसमें क्रमिक बढ़ोतरी कर 500 बसों का संचालन भी तीनों अथॉरिटी के माध्यम से किया जाएगा।  नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में दिख रहा परिवर्तन सीएम योगी ने 2017 के पहले और इससे बाद के उत्तर प्रदेश का फर्क समझाया। कहा कि नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में परिवर्तन दिख रहा है और 9 वर्ष में यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार ने किया है। 2017 से पहले टूटी सड़कें, नदारद बिजली, असुरक्षा, अराजकता व अव्यवस्था के वातावरण में नागरिकों के सामने पहचान का संकट खड़ा था, तब उत्तर प्रदेश में निवेश की बात दिवास्वप्न थी। 2017 के बाद का उत्तर प्रदेश विश्वस्तरीय रोड, एयर कनेक्टिविटी के लिए जाना जाता है। यूपी के पास हाईवे, एक्सप्रेसवे समेत 4 लाख किमी का रोड नेटवर्क है। इंटर स्टेट कनेक्टिविटी सबसे बेहतरीन है। 9 वर्ष पहले जो यूपी बदहाल सड़कों के लिए जाना जाता था, आज उसने एक्सप्रेसवे प्रदेश के रूप में पहचान बनाई है।  सीएम ने कहा कि 2019 में प्रयागराज कुंभ के दौरान सरकार ने कैबिनेट में गंगा एक्सप्रेसवे की घोषणा की थी। मेरठ से प्रयागराज के बीच देश के सबसे बड़े गंगा एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वालों को आश्चर्य होता है कि यह वही उत्तर प्रदेश है, जहां कभी सड़क व गड्ढे में अंतर का पता नहीं लगता था। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक, दिल्ली-मेरठ 12 लेन एक्सप्रेसवे और शीघ्र ही लोकार्पित होने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे नए यूपी की नई पहचान बने हैं।  अब यूपी में 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट सीएम ने यूपी की बेहतर एयर कनेक्विटी का जिक्र करते हुए कहा कि प्रयागराज में 11 महीने में एयरपोर्ट बनकर तैयार हुआ। जेवर में देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन गया है। कभी त्रेतायुग में भगवान श्रीराम पुष्पक विमान से अयोध्या आए थे, लेकिन इसके बाद अयोध्यावासियों को कभी वायुसेवा प्राप्त नहीं हुई। अयोध्या हजारों वर्ष तक उपेक्षित और आजादी के बाद भी अपमानित रही। आज वहां महर्षि वाल्मीकि को समर्पित एयरपोर्ट संचालित हो रहा है। उप्र में लखनऊ, अयोध्या, काशी, कुशीनगर व नोएडा समेत 5 इंटरनेशनल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। नोएडा एयरपोर्ट यात्रियों के साथ ही कार्गो-एमआरओ हब के रूप में खुद को स्थापित करने जा रहा है।  17 नगर निगमों में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन सीएम ने कहा कि देश के 20 में से यूपी के 7 शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। 17 नगर निगमों में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें संचालित कर रहे हैं। नोएडा में सरकार आज यह सुविधा प्रारंभ कर रही है। पहले इलेक्ट्रिक बसें बाहर से मंगानी पड़ती थीं, लेकिन अब टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड हिंदुजा ग्रुप ने लखनऊ में इलेक्ट्रिक बस के दो-दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर यह सुविधा देनी प्रारंभ की है। यीडा में 3 हाइड्रोजन बसों का भी होगा संचालन  मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से यमुना अथॉरिटी में तीन अन्य हाइड्रोजन बसें भी संचालित करने जा रहे हैं। यीडा को ये बसें एनटीपीसी ने उपलब्ध कराई हैं। इनमें ग्राउंड या सरफेस वाटर नहीं, बल्कि सीवर वाटर का इस्तेमाल कर हाइड्रोजन का निर्माण होगा। ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी अभिनव अवधारणा बन चुकी है। इन बसों का संचालन भी जेवर एयरपोर्ट के पास करेंगे। वायु प्रदूषण को कम करने, जहरीले वातावरण से बच्चों, बुजुर्गों, बीमारों को बचाने में इनकी बड़ी भूमिका होगी।  नेट जीरो लक्ष्य के प्रति समर्पित सरकार सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने के लिए विश्व बैंक की मदद से 2741 करोड़ रुपये से उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट … Read more

मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को दिया स्वीकृति पत्र, चेक व चाबी

मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को दिया स्वीकृति पत्र, चेक व चाबी प्रदर्शनी व फूड कार्ट का शुभारंभ भी किया सीएम योगी ने वाराणसी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल चौकाघाट में आयोजित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। यहां कृषि, उद्यान, समाज कल्याण, पर्यटन, पंचायती राज, मत्स्य, एपीडा, खादी व ग्रामोद्योग समेत अनेक विभागों ने उपलब्धियों पर प्रदर्शनी लगाई। इस आयोजन में 'एक जनपद-एक व्यंजन' (ओडीओसी) योजना के तहत बनारसी लस्सी, तिरंगा बर्फी, लौंगलता व पान आदि को भी प्रदर्शित किया गया। विशेष चिकित्सा शिविर भी लगाया गया। सीएम योगी ने यहां जनकल्याण शिविर, स्ट्रीट वेंडर तथा कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र प्रदान किया।  मुख्यमंत्री ने किया फूड कार्ट का शुभारंभ  मुख्यमंत्री ने ओडीओसी के अंतर्गत फूड कार्ट का शुभारंभ भी किया। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट व आमजन में मिष्ठान वितरित किया। सीएम योगी ने यहां स्वास्थ्य परीक्षण करा रहे लोगों से भी संवाद किया।  मुख्यमंत्री के हाथों इन्हें मिला चेक, चाबी, प्रमाण पत्र  👉 प्रमिला देवी- स्ट्रीट वेंडर- पथ विक्रय प्रमाण पत्र  👉 राजू- स्ट्रीट वेंडर- पथ विक्रय प्रमाण पत्र 👉 दीपक बरनवाल- स्ट्रीट वेंडर- पथ विक्रय प्रमाण पत्र 👉 बेबी मौर्या- पीएम स्वनिधि योजना- 50 हजार रुपये का चेक  👉 कन्हैया- पीएम स्वनिधि योजना- क्रेडिट कार्ड  👉 रोशनी कुमारी- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान- 5 लाख का चेक  👉 याशिका सिंह- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान- 2.50 लाख का चेक   👉 ललिता- विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना- सिलाई मशीन व प्रमाण पत्र   👉 खुशबू जायसवाल- विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना- सिलाई मशीन व प्रमाण पत्र

कौशल विकास मिशन की नई पहल: Skill के साथ Financial Intelligence पर जोर

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के यूपीएसडीएम और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDUGKY) के अंतर्गत प्रदेश भर में 1000 से अधिक ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 1.5 लाख से अधिक युवाओं को अगले हफ्ते से फाइनेंशियल स्किल्स की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। योगी सरकार ने पहल की है। प्रदेश के युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ना ही अब उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का लक्ष्य नहीं है। मिशन ने अपनी प्राथमिकताओं का दायरा बढ़ाते हुए युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, जागरूक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार नागरिक बनाने का निर्णय लिया है। यह पहल मिशन निदेशक श्री पुलकित खरे के निर्देशन और दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उनके इसी विज़न को धरातल पर उतारते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बीच शुक्रवार को एमओयू हुआ। मिशन निदेशक की पहल पर पहली बार कौशल प्रशिक्षण को वित्तीय शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। MoU से पहले मिशन मुख्यालय स्थित सभागार में Financial Literacy & Awareness Workshop का आयोजन किया गया, जिसमें विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों को वित्तीय जागरूकता एवं आर्थिक निर्णय क्षमता का महत्व बताया गया । मिशन निदेशक भी वर्कशॉप में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाओं और वित्तीय अनिश्चितताओं के दौर में युवाओं को वित्तीय शिक्षा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने फाइनेंशियल स्किलिंग की ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है । एक्सपर्ट्स ने बताए वित्तीय सफलता के 12 मूल मंत्र प्रेसेंटेशन के माध्यम से एनएसई के अधिकारियों ने फाइनेंशियल सक्सेस के 12 मूल मंत्र बताए। उन्होंने बताया पहले खुद के भविष्य के लिए बचत करें। इनकम से कम खर्च करें। आपातकालीन फंड तैयार रखें। हाई इंटरेस्ट पर लोन लेने से बचें, रेगुलर इन्वेस्टमेंट करें। इन्वेस्टमेंट में विविधता रखें, रिस्क और रिटर्न की समझ रखें, टैक्स को देखते हुए निवेश करें, आवश्यक बीमा करवाएं, लॉन्ग टर्म एसेट्स लें, समय-समय पर इन्वेस्टमेंट की समीक्षा करें। ऐप बनेगा युवाओं का डिजिटल वित्तीय मार्गदर्शक वर्कशॉप में कर्मचारियों को SaaRthi App के बारे में भी विस्तार से बताया गया । यह इन्वेस्टमेंट एजुकेशन के लिए बनाया गया एक उपयोगी डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो उपयोगकर्ताओं को इन्वेस्टमेंट संबंधी शैक्षणिक वीडियो, वित्तीय योजना के टूल्स, कैलकुलेटर और Financial Health Check-up जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। कौशल के साथ आर्थिक समझ भी जरूरी यह MoU प्रदेश के युवाओं के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा। कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार पाने वाले युवा अब केवल आय अर्जित नहीं करेंगे, बल्कि यह भी समझेंगे कि पहली सैलरी का सही उपयोग कैसे करें, बजट और बचत कैसे शुरू करें, इन्वेस्टमेंट कब और कहाँ करना चाहिए, लोन से कैसे बचना है, भविष्य की आर्थिक सुरक्षा कैसे तैयार करनी है। यह ट्रेनिंग युवाओं को घर खरीदने, व्यवसाय शुरू करने, परिवार की आर्थिक सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवानिवृत्ति जैसे जीवन के बड़े निर्णय लेने में भी सक्षम बनाएगी । साथ ही वित्तीय जागरूकता उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी निवेश योजनाओं और आर्थिक जोखिमों से सुरक्षित रहने में भी मदद करेगी। युवाओं को “Skill + Financial Intelligence” के माध्यम से रोजगार से आगे बढ़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। वर्कशॉप में अपर मिशन निदेशक श्रीमती पूजा मिश्रा, जॉइंट डायरेक्टर श्री मयंक गंगवार, वित्त नियंत्रक श्री संदीप कुमार, असिस्टेंट डायरेक्टर श्री एम के सिंह, असिस्टेंट डायरेक्टर श्रीमती पवित्रा टंडन व मिशन के अन्य कर्मचारी मौजूद रहें । वहीं, NSE से चीफ रेग्युलेटरी ऑफिसर श्री अंकित शर्मा, वाइस प्रेसिडेंट श्री जोगिंदर सिंह और यूपी रीजन की सीनियर इंचार्ज श्रुति शर्मा भी वर्क शॉप में मौजूद रहीं । आर्थिक रूप से सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि कौशल विकास का वास्तविक उद्देश्य तब तक अधूरा है, जब तक हमारे युवा अपनी कमाई का सही उपयोग और मैनेजमेंट करना न सीखें। आज रोजगार पाना जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है वित्तीय रूप से समझदार बनना। एनएसई के साथ यह साझेदारी युवाओं को Skill + Financial Intelligence के मॉडल पर तैयार करेगी, जिससे वे केवल नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि आर्थिक रूप से सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।