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नोएडा से बड़ी चोरी का खुलासा: नेपाल ले जाने से पहले पुलिस ने 821 मोबाइल फोन बरामद किए

नोएडा दिल्ली-एनसीआर में मोबाइल चोरी की बढ़ती घटनाओं पर बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा पुलिस ने अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है. थाना फेज-2 पुलिस ने इस गिरोह के आठ सदस्यों को पकड़ते हुए उनके कब्जे से 821 चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 6 से 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है. पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह झारखंड से दो-तीन महीने के लिए दिल्ली-एनसीआर आता था. यहां किराये पर कमरे लेकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में सक्रिय रहता और मौके का फायदा उठाकर मोबाइल चोरी करता था. पकड़े जाने से बचने के लिए गिरोह के सदस्य चोरी के तुरंत बाद मोबाइल एक-दूसरे को पास कर देते थे. जब चोरी किए गए मोबाइलों की संख्या सैकड़ों में पहुंच जाती थी, तो उन्हें बैग और बोरियों में भरकर ट्रेन और बस के जरिए झारखंड और बिहार ले जाया जाता था. नेपाल में भी करते थे सप्लाई इसके बाद इन मोबाइलों को नेपाल बॉर्डर के इलाकों में बेहद सस्ते दामों पर बेच दिया जाता था. सेंट्रल नोएडा के डीसीपी शक्ति अवस्थी ने बताया कि गिरोह के आठ सदस्यों को पकड़ा गया है, जिनमें छह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि दो नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेजा गया है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 821 मोबाइल फोन की बरामदगी नोएडा पुलिस के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी मानी जा रही है. फिलहाल पुलिस बरामद मोबाइल फोन के मालिकों की पहचान करने और गिरोह से जुड़े अन्य नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है.

भीषण शीतलहर का कहर, उत्तर भारत में जारी ठंड और दिल्ली में शीत दिवस

लखनऊ  उत्तर भारत में इन दिनों भीषण ठंड और शीतलहर का प्रकोप लगातार जारी है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत कई मैदानी राज्यों में घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सुबह और देर रात दृश्यता बेहद कम रहने के कारण सड़क, रेल और हवाई यातायात पर भी असर पड़ा है। कई स्थानों पर वाहन रेंगते नजर आए, जबकि ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, उत्तरी भारत के कई हिस्सों में तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली समेत अनेक शहरों में साल का अब तक का सबसे ठंडा दिन दर्ज किया गया। विभाग के मुताबिक, जब किसी क्षेत्र का अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस से 6.4 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज होता है, तब उसे ‘शीत दिवस’ की श्रेणी में रखा जाता है। फिलहाल कई इलाकों में यही स्थिति बनी हुई है। कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी से ठंड और बढ़ गई है। बर्फबारी के चलते ऊंचाई वाले इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है, जबकि पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी ठंड और कोहरे के बने रहने की संभावना जताई है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

ग्रामीणों का बड़ा फैसला, पंचायत चुनाव में शराब बांटने वाले प्रत्याशी का सामाजिक बहिष्कार

लखनऊ  यूपी के पंचायत चुनाव की तैयारियां चल रही है। प्रदेश के ग्राम पंचायतों में चुनाव को लेकर हलचल तेज है। इस बीच बागपत जनपद से एक खबर है। यहां के ढिकौली गांव में जिला जाट सभा की पंचायत में पंचों के साथ-साथ आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे प्रत्याशियों ने चुनाव के दौरान किसी भी कीमत पर शराब नहीं बांटने की शपथ ली। पंचायत में शराब बांटने वाले प्रत्याशी का सामाजिक बहिष्कार करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। जिला जाट सभा अध्यक्ष, अधिवक्ता सोमेन्द्र ढाका के आवास पर नशा मुक्त समाज के संकल्प के साथ आयोजित की गई इस पंचायत में लिए गए निर्णय के बारे में जानकारी ढाका ने मंगलवार को पीटीआई-भाषा को दी। पंचायत आयोजक सोमेंद्र ढाका ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को शराब मुक्त बनाने के लिए यह पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें किसान नेता अन्नू मलिक, रामछेल पंवार, विक्रम आर्य, संदीप प्रधान, विनय ढाका, जयकुमार और राजू के अलावा खाप मुखिया, प्रत्याशी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। पंचायत में समाज सुधार के लिए नशे को जड़ से खत्म करने पर जोर दिया गया और सभी से इस दिशा में संकल्प लेने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आगामी पंचायत चुनाव में यदि कोई प्रत्याशी शराब का वितरण कर समाज को दूषित करने का प्रयास करेगा, तो उसका मिलकर बहिष्कार किया जाएगा। पंचायत में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों ने कहा कि चुनाव में हार स्वीकार्य है, लेकिन शराब बांटकर जीत हासिल करना स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने संकल्प लिया कि यदि कोई शराब के नाम पर वोट मांगने आएगा तो उसे गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर हमला— ‘वीबी-जी राम जी’ का विरोध करेंगे तो पोल खुलेगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विकसित भारत–जी राम जी कानून, 2025 को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस ऐतिहासिक सुधार का स्वागत होना चाहिए था, उसी का विरोध कर विपक्ष अपने पुराने भ्रष्टाचार मॉडल का खुला समर्थन कर रहा है। यह विरोध विकास का नहीं, बल्कि पोल खुलने के डर का परिणाम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस प्रेस वार्ता की आवश्यकता इसलिए पड़ी, क्योंकि जिन लोगों ने वर्षों तक देश के संसाधनों पर डकैती डाली, गरीबों को भूखा रहने और नौजवानों को पलायन के लिए मजबूर किया, वे आज सुधारों और विकसित भारत की संकल्पना पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर ऐसे लोग कानून का समर्थन करेंगे तो उनकी असलियत सामने आ जाएगी, इसलिए वे विरोध कर रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन इस अधिनियम पर लगातार प्रश्न खड़े कर रहे हैं, जबकि यह ग्रामीण भारत, किसानों और श्रमिकों के हित में उठाया गया बड़ा कदम है। एनडीए सरकार का आभार जताने के बजाय विपक्ष भ्रष्टाचार को प्रोत्साहित करने वाली अपनी पुरानी परंपराओं का ही समर्थन कर रहा है। मुख्यमंत्री ने विकसित भारत की परिकल्पना को स्पष्ट करते हुए कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब राज्य विकसित होंगे और राज्य तभी विकसित होंगे, जब गांव विकसित होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना, श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और सम्मान देना इस अधिनियम का मूल उद्देश्य है। इसी लक्ष्य के साथ यह कानून लाया गया है और वह इसका पूर्ण समर्थन करते हैं। योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की विफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके शासनकाल में अधूरी और अस्थायी परिसंपत्तियां, फर्जी हाजिरी, भुगतान में कटौती जैसी भ्रष्टाचार की शिकायतें हर जनपद और हर ग्राम पंचायत से सामने आती थीं। शिकायत निवारण की कमजोर व्यवस्था, कमजोर सोशल ऑडिट, प्रशासनिक अक्षमताएं और मजदूरी में लगातार देरी आम बात थी। उन्होंने कहा कि खोदने और भरने वाली योजनाओं पर विराम लगने से स्वाभाविक है कि जिनके हित प्रभावित हुए हैं, वे चिल्ला रहे हैं। यही वे लोग हैं जो गड्ढा खोदते थे और फिर उसे पाटते थे। सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सपा शासनकाल में सोनभद्र में मनरेगा का बड़ा घोटाला हुआ, जिसकी सीबीआई जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि नए कानून के तहत हर छह महीने में अनिवार्य सोशल ऑडिट, डिजिटल और समयबद्ध शिकायत निवारण प्रणाली तथा कैग मानकों के अनुरूप ऑडिट की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि विकसित भारत–जी राम जी कानून ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलेगा। पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रमिक-किसान के अधिकार सुनिश्चित होंगे। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वे विकास के नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के पक्षधर हैं।

मतदाताओं का बड़ा फैसला: पंचायत चुनाव में शराब बांटने वाले प्रधान प्रत्याशी का होगा सामाजिक बहिष्कार

लखनऊ यूपी के पंचायत चुनाव की तैयारियां चल रही है। प्रदेश के ग्राम पंचायतों में चुनाव को लेकर हलचल तेज है। इस बीच बागपत जनपद से एक खबर है। यहां के ढिकौली गांव में जिला जाट सभा की पंचायत में पंचों के साथ-साथ आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे प्रत्याशियों ने चुनाव के दौरान किसी भी कीमत पर शराब नहीं बांटने की शपथ ली।   पंचायत में शराब बांटने वाले प्रत्याशी का सामाजिक बहिष्कार करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। जिला जाट सभा अध्यक्ष, अधिवक्ता सोमेन्द्र ढाका के आवास पर रविवार को नशा मुक्त समाज के संकल्प के साथ आयोजित की गई इस पंचायत में लिए गए निर्णय के बारे में जानकारी ढाका ने मंगलवार को पीटीआई-भाषा को दी। पंचायत आयोजक सोमेंद्र ढाका ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को शराब मुक्त बनाने के लिए यह पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें किसान नेता अन्नू मलिक, रामछेल पंवार, विक्रम आर्य, संदीप प्रधान, विनय ढाका, जयकुमार और राजू के अलावा खाप मुखिया, प्रत्याशी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। पंचायत में समाज सुधार के लिए नशे को जड़ से खत्म करने पर जोर दिया गया और सभी से इस दिशा में संकल्प लेने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आगामी पंचायत चुनाव में यदि कोई प्रत्याशी शराब का वितरण कर समाज को दूषित करने का प्रयास करेगा, तो उसका मिलकर बहिष्कार किया जाएगा। पंचायत में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों ने कहा कि चुनाव में हार स्वीकार्य है, लेकिन शराब बांटकर जीत हासिल करना स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने संकल्प लिया कि यदि कोई शराब के नाम पर वोट मांगने आएगा तो उसे गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

जन्मदिन पर अनोखा उपहार! बृजभूषण शरण सिंह ने ऋतेश्वर महाराज को भेंट की करोड़ों की दुर्लभ गाय

गोंडा यूपी के गोंडा जिले में नंदिनी नगर में चल रहे राष्ट्रकथा महोत्सव के दौरान सदगुरु ऋतेश्वर महाराज के जन्मदिन पर पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने उन्हें दुर्लभ 20 लाख रुपए कीमत वाली श्यामा गाय भेंट की। हरियाणा से लाई गई काले रंग की इस दुर्लभ गाय को देखते ही महाराज उसे दुलार करने लगे। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि ये उपहार उनके एक मित्र ने भेजा है। इस मौके पर ऋतेश्वर महाराज ने श्रोताओं से आह्वान किया कि हमें राष्ट्र, धर्म और अपनी आत्मा की पुकार को सुनना चाहिए। आज हमें अपने महापुरुषों द्वारा बताए गए कर्तव्यों पर गंभीरता से विचार करना होगा। परिवार, समाज और राष्ट्र के सशक्त निर्माण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना चाहिए।   भोजपुरी स्टार पवन सिंह, बृजभूषण ने भी साधा सुर राष्ट्रकथा में रविवार की शाम भोजपुरी गानों के पावर स्टार पवन सिंह भी पहुंचे। दो भजन भी गाए। बृजभूषण ने स्टेज से खुद ही आज नंदिनी नगरिया निहार सखियां… गीत गाया। इस दौरान राष्ट्र कथा के भंडारे में परोसे जा रहे बथुए के सगपहिते पर कहा बथुआ अब राष्ट्रीय ब्रांड हो गया है। अब इसे नेशनल फूड घोषित किया जाना चाहिए। स्टेडियम में पहलवानों से मिले सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज सदगुरु रविवार के देर शाम पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, ऋतेश्वर महाराज को लेकर नंदिनी नगर कुश्ती स्टेडियम पहुंचे। कुश्ती सीखने आए खिलाड़ियों से मुलाकात कराई। दांव-पेंच बताए। इस दौरान तलवार बाजी का प्रदर्शन भी किया गया। पूर्व सांसद ने अपने मालिश करने वाले नेशनल पदक विजेता खिलाड़ी और अपने नाई से मुलाकात कराकर कहा जब नाऊ इतने तगड़े हैं नेताजी का तो दबदबा तो रहेगा ही भैया। यह सुनकर सद्‌गुरु ऋतेश्वर महाराज जोर से हंसे और दोनों को आशीर्वाद दिया।

योगी कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकृत

  जेएस विश्वविद्यालय का परिसमापन, आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ग्रेटर नोएडा ऑफ-कैंपस को मंजूरी योगी कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकृत जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद में अनियमितताओं पर योगी सरकार की कठोर कार्रवाई फर्जी डिग्रियों के चलते जेएस विश्वविद्यालय पर गिरी गाज, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय संभालेगा अभिलेख आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ का ग्रेटर नोएडा में ऑफ-कैंपस, उच्च शिक्षा के विस्तार को मिली मंजूरी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े दो महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। एक तरफ, योगी कैबिनेट ने जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद (जनपद फिरोजाबाद) के परिसमापन को मंजूरी दी है तो वहीं आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा में ऑफ-कैंपस को संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।  फर्जी डिग्रियों पर कड़ा एक्शन  जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद के परिसमापन के प्रस्ताव की मंजूरी के निर्णय की जानकारी देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि  जांच में यह सामने आया कि विश्वविद्यालय द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए बीपीएड पाठ्यक्रम की फर्जी और बैक डेट में मार्कशीट व डिग्रियां जारी की गईं, जिनका उपयोग राजस्थान की शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में चयनित अभ्यर्थियों द्वारा किया गया। इस प्रकरण में राजस्थान पुलिस की जांच, कुलाधिपति एवं कुलसचिव की गिरफ्तारी तथा शासन स्तर पर गठित जांच समितियों की आख्या में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। मंत्री ने बताया कि जेएस विश्वविद्यालय द्वारा अधिनियम की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन किया गया है, जिसमें डिग्री प्रदान करने की शक्ति का दुरुपयोग, संगठित अपराध के रूप में फर्जी अंकतालिकाओं एवं डिग्रियों का वितरण, आवश्यक भूमि मानक का पालन न करना तथा उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को अनिवार्य विवरण उपलब्ध न कराना शामिल है। इन सभी तथ्यों के दृष्टिगत योगी सरकार ने जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद, फिरोजाबाद के परिसमापन का निर्णय लिया है। परिसमापन के पश्चात विश्वविद्यालय के समस्त अभिलेख डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रखे जाएंगे तथा उन्हीं अभिलेखों के आधार पर पूर्व में निर्गत मार्कशीट एवं डिग्रियों का प्रमाणीकरण किया जाएगा। साथ ही, परिसमापन अवधि के दौरान विश्वविद्यालय की गतिविधियों के संचालन हेतु धारा 55(6) के अंतर्गत त्रि-सदस्यीय अंतरिम समिति गठित करने का भी निर्णय लिया गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर में उच्च शिक्षा के नए अवसर होंगे सृजित  कैबिनेट बैठक में दूसरा अहम निर्णय आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा में ऑफ-कैंपस की स्थापना को लेकर लिया गया। इसके लिए संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस ऑफ-कैंपस के शुरू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे और छात्रों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 तथा उसके द्वितीय संशोधन अधिनियम, 2021 के अंतर्गत परिसर दूरस्थ केंद्र की स्थापना का प्रावधान किया गया है। इस क्रम में प्रायोजक संस्था एसोसिएशन ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मेरठ द्वारा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 4.796 एकड़ भूमि चिन्हित की गई थी, जिसके लिए 25 फरवरी 2025 को आशय पत्र (एलओआई) निर्गत किया गया था। अब सरकार द्वारा आई०आई०एम०टी० विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा स्थित ऑफ-कैंपस के संचालन हेतु प्रायोजक संस्था को संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। मंत्री ने कहा कि इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं एनसीआर क्षेत्र में उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार होगा और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

इन्वेस्ट यूपी बनी नोडल एजेंसी, आईटी से लेकर आरएंडडी तक निवेश और रोजगार को मिलेगा प्रोत्साहन

जीसीसी नीति-2024 की एसओपी-2025 को योगी कैबिनेट की हरी झंडी इन्वेस्ट यूपी बनी नोडल एजेंसी, आईटी से लेकर आरएंडडी तक निवेश और रोजगार को मिलेगा प्रोत्साहन प्रदेश को ग्लोबल सर्विस हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम जीसीसी नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश में उच्च कौशल आधारित निवेश बढ़ेंगे और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) नीति-2024 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु नियमावली-2025 को मंजूरी प्रदान की गई। इस नियमावली के लागू होने से प्रदेश को वैश्विक निवेश, उच्च स्तरीय सेवाओं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में नई गति मिलेगी। कैबिनेट से अनुमोदित नियमावली के अंतर्गत इन्वेस्ट यूपी को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। यह नियमावली जीसीसी नीति-2024 के प्रख्यापन की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी तथा राज्य सरकार द्वारा संशोधन अथवा समाप्त किए जाने तक लागू रहेगी। जीसीसी में अब तक 21 कंपनियों ने किया निवेश औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कैबिनेट के निर्णय के विषय में बताया कि प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है, जिसके चलते निवेश करने के लिए उद्योग घराने और मल्टीनेशनल कंपनियां हमारे संपर्क में हैं। जीसीसी नीति हमारे लिए बहुत लाभप्रद है और आज हम इसकी एसओपी लेकर आए हैं। यूपी में जीसीसी के निवेश में लगातार वृद्धि हो रही है। चालू वित्तीय वर्ष में 21 कंपनियों ने इसमें निवेश प्रारंभ कर दिया है। इसके माध्यम से प्रदेश में व्यापक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। नियमावली के अनुसार, जीसीसी किसी भारतीय अथवा विदेशी कंपनी द्वारा स्थापित एक कैप्टिव इकाई होगी, जो सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास (R&D), वित्त, मानव संसाधन, डिजाइन, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स और नॉलेज सर्विसेज जैसे रणनीतिक कार्यों का निष्पादन करेगी। वित्तीय प्रोत्साहनों की व्यापक व्यवस्था इस नियमावली में जीसीसी इकाइयों को आकर्षित करने के लिए कई प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। इनमें फ्रंट एंड लैंड सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट अथवा प्रतिपूर्ति, पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, संचालन व्यय (ओपेक्स) सब्सिडी, पेरोल और भर्ती सब्सिडी, ईपीएफ प्रतिपूर्ति, प्रतिभा विकास एवं कौशल प्रोत्साहन, अनुसंधान एवं नवाचार प्रोत्साहन के साथ-साथ केस-टू-केस आधार पर विशेष प्रोत्साहन शामिल हैं। वित्तीय लाभ के अतिरिक्त, जीसीसी इकाइयों को तकनीकी सहायता समूह, इंडस्ट्री लिंकेज सपोर्ट, विनियामक सहायता, आवेदन प्रकरणों का त्वरित निस्तारण, अनुमोदन एवं प्रोत्साहन वितरण की सुव्यवस्थित प्रक्रिया भी उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्र सरकार की योजनाओं से अतिरिक्त लाभ नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि इसके अंतर्गत मिलने वाले सभी प्रोत्साहन, भारत सरकार की किसी भी योजना अथवा नीति के तहत उपलब्ध लाभों के अतिरिक्त होंगे। किसी भी विधिक विवाद की स्थिति में न्यायिक क्षेत्राधिकार केवल लखनऊ स्थित न्यायालयों का होगा। स्वीकृत प्रोत्साहन राशि का वितरण वित्त विभाग के प्रचलित नियमों एवं शासनादेशों के अनुसार किया जाएगा। निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा योगी सरकार के इस निर्णय को प्रदेश को ग्लोबल सर्विस हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। GCC नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश में उच्च कौशल आधारित निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

यूपी को इससे सर्वाधिक लाभ, रोजगार की नई गारंटी के साथ प्रदेश में लागू करेंगेः मुख्यमंत्री

ग्रामीण विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा विकसित भारत–जी राम जी कानून : सीएम योगी यूपी को इससे सर्वाधिक लाभ, रोजगार की नई गारंटी के साथ प्रदेश में लागू करेंगेः मुख्यमंत्री सीएम बोले, जिन्होंने लंबे समय तक देश के संसाधनों पर डकैती डाली, जनता उनसे सवाल करेगी मनरेगा के दौरान अधूरी व अस्थायी परिसंपत्तियां बनीं, फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी की शिकायतें मिलीं, इसलिए लाया गया बदलाव बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, रियल टाइम मोबाइल ऐप मॉनिटरिंग और डीबीटी के माध्यम से सीधा भुगतान होगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को ‘विकसित भारत–जी राम जी कानून, 2025’ कानून की खूबियां बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण भारत के कायाकल्प की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन को मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 पारित किया गया है, जो देश के ग्रामीण विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को इस कानून से सर्वाधिक लाभ होगा। रोजगार की नई गारंटी के साथ इसे प्रदेश में लागू किया जाएगा।  लोकभवन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए योगी ने कहा कि जिन लोगों ने लंबे समय तक देश के संसाधनों पर डकैती डाली, गरीबों को भूख और युवाओं को बेरोजगारी व पलायन के लिए मजबूर किया, वे आज पारदर्शी सुधारों का समर्थन करने से इसलिए बच रहे हैं, क्योंकि तब जनता उनसे सवाल करेगी कि जब उन्हें मौका मिला था, तब उन्होंने यह काम क्यों नहीं किया। कांग्रेस और उसका इंडी गठबंधन इस महत्वपूर्ण अधिनियम पर सवाल खड़े कर रहा है, जबकि देशहित, श्रमिकों, किसानों और गांवों के विकास के लिए उठाए गए इस कदम का स्वागत होना चाहिए था। प्रधानमंत्री और एनडीए के प्रति आभार जताने के बजाय वे अपने पुराने, भ्रष्टाचार-प्रेरित मॉडल का बचाव कर रहे हैं। सीएम योगी ने बताया कि वीबी–जी राम जी एक्ट, 2025 की मूल भावना पारदर्शी प्रक्रिया, रोजगार की अधिकतम गारंटी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर आधारित है। यही अधिनियम विकसित भारत-2047 के विजन की मजबूत आधारशिला बनेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा जब राज्य विकसित होंगे और राज्य तभी विकसित होंगे जब गांव विकसित होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त कर किसान आत्मनिर्भर बनेगा, श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और सम्मान मिलेगा। पहले कमजोर सोशल ऑडिट, शिकायत निवारण की खामियां थीं मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून इसलिए जरूरी था क्योंकि मनरेगा के दौरान अधूरी व अस्थायी परिसंपत्तियां बनीं, फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी और भुगतान में कटौती जैसी शिकायतें हर जनपद से सामने आईं।  समाजवादी पार्टी की सरकार के समय मनरेगा में घोटाला हुआ था जिसकी सीबीआई जाँच चली।   कमजोर सोशल ऑडिट, शिकायत निवारण की खामियां, प्रशासनिक अक्षमताएं और मजदूरी में देरी लगातार बनी रहीं। खेती के मौसम में किसानों को मजदूर नहीं मिलते थे और श्रमिकों को समय पर काम व भुगतान की गारंटी नहीं मिल पाती थी। सीएम योगी ने बताया कि नए अधिनियम में रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। साप्ताहिक भुगतान होगा और देरी पर मुआवजा व अतिरिक्त ब्याज दिया जाएगा। समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अब कानूनी अधिकार बन गया है। खेती के मौसम में मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्यों को बुवाई और कटाई के समय 60 दिन तक कार्य स्थगित करने का अधिकार दिया गया है। बंद होगा गड्ढा खोदने और पाटने का खेल उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत पंचायतें स्थायी परिसंपत्तियां बना सकेंगी। ग्राम पंचायतें चार प्राथमिक श्रेणियों में कार्य तय करेंगी। जल संरक्षण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, चेक डैम, ग्रामीण सड़कें, नालियां, आजीविका से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर, खेल मैदान, ओपन जिम, बाजार और मंडियों का निर्माण किया जा सकेगा। आपदा प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्य भी इसी के तहत होंगे। सीएम योगी ने बताया कि इस अधिनियम में टेक्नोलॉजी को कानूनी अधिकार के रूप में शामिल किया गया है। बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, रियल टाइम मोबाइल ऐप मॉनिटरिंग और डीबीटी के माध्यम से सीधा भुगतान होगा। फर्जी नामों पर भुगतान का खेल पूरी तरह बंद होगा। पहले जो लोग गड्ढा खोदते थे और उसे पाटते थे, उनका यह खेल बंद होगा।  मनरेगा की तुलना में 17 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त संसाधन मिल सकते हैं राज्यों को उन्होंने बताया कि कानून में छह माह में अनिवार्य सोशल ऑडिट, डिजिटल और समयबद्ध शिकायत निवारण, जिला लोकपाल और मानकों के अनुरूप ऑडिट की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। केंद्र–राज्य की साझेदारी 60:40 रहेगी और कार्य पूरी तरह मांग आधारित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नई योजना से राज्यों को मनरेगा की तुलना में लगभग 17 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त संसाधन मिल सकते हैं। जिन राज्यों में श्रमिकों की संख्या अधिक है, वहां अधिक कार्य मिलेगा। रोजगार अब केवल राहत नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनेगा। हर पात्र को समय पर काम, हर गांव में टिकाऊ परिसंपत्तियां सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूरी केंद्रीय कैबिनेट के प्रति आभार जताते हुए कहा कि राज्य सरकार इसे पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और प्रभावशीलता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है। हर पात्र को समय पर काम, हर गांव में टिकाऊ परिसंपत्तियां और हर श्रमिक के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और खुशहाली। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत राजग से जुड़े दलों के नेता भी उपस्थित थे।

मकर संक्रांति से शुरू होकर माहभर से अधिक चलने वाले मेले की तैयारियां पूरी

श्रद्धा, मनोरंजन व रोजगार का संगम है गोरखनाथ मंदिर का खिचड़ी मेला मकर संक्रांति से शुरू होकर माहभर से अधिक चलने वाले मेले की तैयारियां पूरी त्रेतायुगीन है महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा गोरखपुर  मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में लगने और इससे पखवारा पूर्व शुरू होकर माह भर से अधिक समय तक चलने वाला खिचड़ी मेला श्रद्धा, मनोरंजन और रोजगार का संगम है। पूरी प्रकृति को ऊर्जस्वित करने वाले सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की अनूठी परंपरा पूरी तरह लोक को समर्पित है। गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी के रूप में चढ़ाए जाने वाला अन्न वर्षभर जरूरतमंदों में वितरित किया जाता है। मंदिर के अन्न क्षेत्र में कभी भी कोई जरूरतमंद पहुंचा, खाली हाथ नहीं लौटा। ठीक वैसे ही, जैसे बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर मन्नत मांगने वाला कभी निराश नहीं होता। मंदिर में खिचड़ी का यह पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनेगा। गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा त्रेतायुगीन मानी जाती है। मान्यता है कि तत्समय आदियोगी गुरु गोरखनाथ एक बार हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां ज्वाला देवी के दरबार मे पहुंचे। मां ने उनके भोजन का प्रबंध किया। कई प्रकार के व्यंजन देख बाबा ने कहा कि वह तो योगी हैं और भिक्षा में प्राप्त चीजों को ही भोजन रूप में ग्रहण करते हैं। उन्होंने मां ज्वाला देवी से पानी गर्म करने का अनुरोध किया और स्वयं भिक्षाटन को निकल गए। भिक्षा मांगते हुए वह गोरखपुर आ पहुंचे और राप्ती और रोहिन के तट पर जंगलों में बसे इस स्थान पर धूनी रमाकर साधनालीन हो गए। उनका तेज देख लोग उनके खप्पर में अन्न (चावल, दाल) दान करते रहे। मकर संक्रांति का पर्व आने पर यह परंपरा खिचड़ी पर्व के रूप में परिवर्तित हो गई। तब से बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने का क्रम हर मकर संक्रांति पर अहर्निश जारी है। कहा जाता है कि उधर ज्वाला देवी के दरबार मे बाबा की खिचड़ी पकाने के लिए आज भी पानी उबल रहा है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर नाथ पंथ की विशिष्ट परंपरानुसार गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी चढ़ाकर समूचे जनमानस की सुख समृद्धि की मंगलकामना करते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार तथा देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी लाखों की तादाद में श्रद्धालु शिवावतारी बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं। मकर संक्रांति के दिन भोर में सबसे पहले गोरक्षपीठ की तरफ से पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी चढ़ाकर बाबा को भोग अर्पित करते हैं। तत्पश्चात नेपाल राजपरिवार की ओर से आई खिचड़ी बाबा को चढ़ाई जाती है। इसके बाद मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं और जनसामान्य की आस्था खिचड़ी के रूप में निवेदित होनी शुरू हो जाती है। खिचड़ी महापर्व को लेकर मंदिर व मेला परिसर सज धजकर तैयार है। प्रशासन के साथ ही मंदिर प्रबंधन की तरफ से श्रद्धालुओं के ठहरने और अन्य सुविधाओं का पूरा इंतज़ाम किया गया है। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी अब तक तीन बार खिचड़ी मेला की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं।   सामाजिक समरसता का केंद्र है गोरखनाथ मंदिर गोरखनाथ मंदिर सामाजिक समरसता का ऐसा केंद्र है जहां जाति, पंथ, महजब की बेड़ियां टूटती नजर आती हैं। इसके परिसर में क्या हिंदू, क्या मुसलमान, सबकी दुकानें हैं। यानी बिना भेदभाव सबकी रोजी रोटी का इंतजाम है। यही नहीं, मंदिर परिसर में  लगने वाला खिचड़ी मेला भी जाति-धर्म के बंटवारे से इतर हजारों लोगों की आजीविका का माध्यम बनता है। मंदिर परिसर में नियमित रोजगार करने वालों से लेकर मेला में दुकान लगाने वालों तक, बड़ी भागीदारी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की होती है। उन्होंने कभी कोई भेदभाव महसूस नहीं किया बल्कि अपनेपन के भाव से विभोर होते रहते हैं। मेले में खरीदारी से लेकर मनोरंजन के साधनों तक का भरपूर इंतजाम हैं।