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योगी सरकार की नई पहल, पीड़ित महिलाओं को आवास और स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर लगातार नए कदम उठा रही है। इसी क्रम में योगी सरकार ने तीन तलाक(Triple Talaq) तथा एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार इन पीड़ित महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना(PM Housing Scheme), मुख्यमंत्री आवास योजना (Chief Minister Housing Scheme), आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से लाभान्वित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही निराश्रित महिलाओं को भी इन सभी योजनाओं का लाभ देने की तैयारी शुरू कर दी गयी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला कल्याण विभाग ने विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही महिला कल्याण विभाग तीन तलाक एवं एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के साथ निराश्रित महिलाओं का विस्तृत डाटा एकत्रित किया जा रहा है, ताकि पात्र महिलाओं को योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जा सके। लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा शासन स्तर पर इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और शासनादेश (जीओ) तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है। महिला कल्याण विभाग द्वारा पीड़ित महिलाओं का सत्यापित विवरण एकत्रित किया जा रहा है। इसके आधार पर लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा। योगी सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी पात्र महिला को केवल जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण सरकारी योजनाओं से वंचित न रहना पड़े। इसके लिए विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। योगी ने उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को दिए थे निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये थे कि जिन महिलाओं को तीन तलाक या एसिड अटैक जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है और जिनके पास स्थायी आवास नहीं है, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही इन महिलाओं और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का भी लाभ दिया जाए। मालमू हो कि एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता होती है। वहीं, तीन तलाक से प्रभावित कई महिलाएं आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा का सामना करती हैं। ऐसे में आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों उपलब्ध कराकर योगी सरकार उनके जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

श्रीराम कथा समापन में बोले योगी आदित्यनाथ: राम नाम से एकजुट हुआ देश

लखनऊ सीतापुर रोड स्थित ब्रज की रसोई परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। सीएम ने कहा कि भारत की धरती कोई धर्मशाला नहीं है। जो भारत की संस्कृति, विरासत और मूल्यों का सम्मान करेगा, वही यहां सम्मानपूर्वक रह सकेगा। जो भारत की आत्मा और उसके संस्कारों को स्वीकार नहीं कर सकता, उसके लिए यहां कोई स्थान नहीं है। मुख्यमंत्री ने पद्म विभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि चित्रकूट में देश के पहले दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने सेवा और समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस आयु में भी वे विश्राम करने के बजाय लोकमंगल और राष्ट्रकल्याण के लिए देश-विदेश में श्रीराम कथा के माध्यम से जनजागरण का कार्य कर रहे हैं। श्रीराम के नाम ने पूरे देश को एक जुट बनाए हैं योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन किसी व्यक्ति, संगठन या दल का आंदोलन नहीं था, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का विषय था। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का नाम वह सूत्र रहा, जिसने उत्तर से दक्षिण तक पूरे देश को एकजुट बनाए रखने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति भगवान राम के आदर्शों का थोड़ा-सा अंश भी अपने जीवन में उतार ले, तो उसका ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र का भी कल्याण संभव है। कंस और मारीच का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री ने पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास और धर्मग्रंथ हमें सज्जन शक्ति को संगठित करने तथा अधर्म और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कंस और मारीच के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि गलत संगति और स्वार्थपूर्ण सलाह हमेशा समाज और राष्ट्र को नुकसान पहुंचाती है। संत समाज सदैव लोगों को जोड़ने का काम करता है सीएम योगी ने कहा कि कुछ शक्तियां समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर बांटने का प्रयास करती हैं, जबकि संत समाज सदैव लोगों को जोड़ने और राष्ट्र को मजबूत करने का कार्य करता है। मुख्यमंत्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम और संतों का सानिध्य व्यक्ति को जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को नमन करते हुए उनके आगामी साधना पर्व की सफलता तथा राष्ट्र कल्याण की कामना की। साथ ही उपस्थित श्रद्धालुओं को जय श्रीराम के उद्घोष के साथ शुभकामनाएं भी दीं।  

50 लाख से अधिक की प्रॉपर्टी डील पर TDS नियमों की जांच तेज, बागपत में खंगाले जा रहे दस्तावेज

लखनऊ यूपी में जमीन-मकान की खरीद-फरोख्त पर नजर रखी जा रही है। आयकार की नजर है। बागपत में बीते वर्षों में मिली खामियों और सर्वे की कार्रवाई के बाद आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही रजिस्ट्री कार्यालयों के रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू कर दी है। टीडीएस देयता, रजिस्ट्री संबंधी विवरण और वित्तीय लेनदेन के ब्योरे में दर्ज प्रविष्टियों की बारीकी से जांच की जा रही है। आयकर विभाग की आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण इकाई के अधिकारी हर पहलू की समीक्षा कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर वर्तमान अवधि तक के रिकॉर्ड को जांच के दायरे में लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, जमीन के बैनामे के समय संपत्ति के मूल्य के आधार पर टीडीएस देयता निर्धारित होती है। इसके लिए पैन कार्ड नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है। हालांकि जांच में सामने आया कि कई मामलों में इन औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया। इसी लापरवाही को देखते हुए जनपद की विभिन्न तहसीलों के रजिस्ट्री कार्यालयों का सर्वे किया गया। यदि बैनामा की गई संपत्ति का मूल्य 30 लाख रुपये या उससे अधिक है तो संबंधित सब रजिस्ट्रार कार्यालय को स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (एसएफटी) के तहत इसकी सूचना आयकर विभाग को देनी होती है। निर्धारित प्रारूप में यह विवरण तय समय सीमा के भीतर जमा करना अनिवार्य है। वहीं 50 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की संपत्ति के सौदे में खरीदार को विक्रेता के भुगतान से एक प्रतिशत टीडीएस काटना होता है। नियमों के तहत फार्म 60 भरना अनिवार्य यदि किसी संपत्ति का सौदा 10 लाख रुपये या उससे अधिक का है और संबंधित व्यक्ति के पास पैन कार्ड नहीं है तो आयकर नियमों के तहत फार्म-60 भरना अनिवार्य है। इसमें सौदा करने वाले व्यक्ति की पहचान और निवास संबंधी विवरण दर्ज किए जाते हैं। इन मामलों की जानकारी एसएफटी फाइलर द्वारा फार्म-61 और फार्म-61ए के माध्यम से आयकर विभाग को भेजी जाती है। ये खामियां आईं सामने आयकर व्यवस्था में किसानों की कृषि आय को कर से छूट प्राप्त है। जांच में पाया गया कि कुछ बिल्डरों ने इस प्रावधान का लाभ उठाने के लिए नगरीय क्षेत्र की कृषि भूमि के करोड़ों रुपये के सौदे किए। कई मामलों में न तो टीडीएस काटा गया और न ही पैन कार्ड का विवरण दर्ज किया गया। पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) की देयता को भी नजरअंदाज किया गया। आयकर विभाग की जांच में ऐसे कई सौदे सामने आए, जिनमें बाद में टीडीएस और कैपिटल गेन टैक्स की देयता निर्धारित की गई।

महिलाओं के लिए बड़ी राहत, यूपी सरकार देगी आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ

लखनऊ  महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ट्रिपल तलाक और एसिड अटैक जैसी गंभीर सामाजिक कुरुतियों और आपराधिक कृत्यों से प्रभावित महिलाओं को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए उन्हें आवास और हेल्थ इंश्योरेंस कवर प्रदान करने की तैयारी कर रही है. योगी सरकार इन महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ देने की दिशा में काम कर रही है।  इसके साथ ही निराश्रित महिलाओं को भी इन योजनाओं के दायरे में शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला कल्याण विभाग ने इस संबंध में कार्रवाई तेज कर दी है. विभाग ट्रिपल तलाक और एसिड अटैक से प्रभावित महिलाओं के साथ-साथ निराश्रित महिलाओं का विस्तृत और सत्यापित डेटा एकत्र कर रहा है, ताकि पात्र लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा सके. सरकारी स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देशों और शासनादेश को तैयार करने की प्रक्रिया भी जारी है।  प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पात्र महिलाओं की पहचान कर उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा. योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र महिला जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे. इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है. हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिया था।  उन्होंने कहा था कि ट्रिपल तलाक या एसिड अटैक जैसी परिस्थितियों का सामना कर चुकी और जिनके पास स्थायी आवास नहीं है, ऐसी महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर उपलब्ध कराया जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि इन महिलाओं और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।  बता दें कि एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, कई सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता होती है. वहीं ट्रिपल तलाक से प्रभावित अनेक महिलाएं आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा का सामना करती हैं. ऐसे में आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराकर योगी सरकार उनके जीवन को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयासरत है। 

छात्राओं के लिए बड़ी सौगात! रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत मुफ्त स्कूटी देगी योगी सरकार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई कर रही छात्राओं के लिए एक बेहद शानदार खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार स्नातक प्रथम वर्ष की मेधावी छात्राओं को अपनी तरफ से मुफ्त स्कूटी देने की एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। इस महत्वाकांक्षी पहल का नाम 'रानी लक्ष्मी बाई योजना' रखा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य की बेटियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के आने से छात्राओं को कॉलेज आने-जाने में होने वाली दिक्कतों से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी। मेरिट के आधार पर चमकेगी मेधावियों की किस्मत सरकार की इस योजना का लाभ सीधे तौर पर उन छात्राओं को मिलेगा जो पढ़ाई-लिखाई में अव्वल हैं। स्कूटी देने के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जाएगी। योजना के नियमों के मुताबिक, छात्राओं को उनके स्नातक प्रथम वर्ष में प्राप्त अंकों के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इन अंकों के आधार पर एक राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, और जो छात्राएं इस मेरिट में स्थान बनाएंगी, उन्हें सरकार की तरफ से मुफ्त स्कूटी का तोहफा दिया जाएगा। पहले चरण में 50 हजार छात्राओं को मिलेगी रफ्तार उत्तर प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में इस समय कुल मिलाकर लगभग नौ लाख छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए सरकार इस योजना को चरणों में लागू करने जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने जो खाका तैयार किया है, उसके तहत पहले चरण में राज्य की 50 हजार सबसे मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की पूरी तैयारी कर ली गई है। जल्द ही मुख्यमंत्री के सामने होगा प्रजेंटेशन इस योजना को धरातल पर उतारने और इसका लाभ जल्द से जल्द छात्राओं तक पहुंचाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग दिन-रात काम कर रहा है। विभाग की ओर से इस योजना का पूरा प्रस्ताव और गाइडलाइंस तैयार कर ली गई हैं। बहुत जल्द ही उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने इस पूरी योजना का एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण करेंगे। मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलते ही इस योजना के तहत आवेदन करने की प्रक्रिया और तारीखों की घोषणा कर दी जाएगी। उत्तर प्रदेश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में स्नातक स्तर पर करीब 9 लाख छात्राएं नामांकित हैं। इन सभी छात्राओं में से कड़ी स्क्रीनिंग और मेरिट लिस्ट के जरिए ही भाग्यशाली मेधावियों का चुनाव किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य न केवल बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है, बल्कि कॉलेज आने-जाने में उन्हें आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाना भी है।

मनरेगा की जगह लागू होगी वीबी जीरामजी योजना, 125 दिन रोजगार का प्रावधान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी भत्ता को समय-समय पर मुद्दा बनाया जाता रहा है। अब इसका एक मसौदा तैयार किया गया है। इस मसौदे को प्रस्ताव के रूप में मंजूरी के लिए योगी कैबिनेट में जल्द ही लाया जाएगा। यूपी की योगी सरकार केंद्र द्वारा जारी विकसित भारत-जी राम जी (वीबी जीरामजी) योजना को यूपी में लागू कराने जा रही है। इस योजना की खास बात यह होगी कि फसलों की कटाई-बुवाई के लिए मजदूरों को अपने खेत में काम करने के दौरान खाली रहने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। ग्राम्य विकास विभाग ने इसका मसौदा तैयार कर लिया है और जल्द ही कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराने की तैयारी है। राज्य सरकार को इसे जुलाई से पूरी तरह से लागू करना है। केंद्र सरकार ने मनरेगा के स्थान पर वीबी जीरामजी योजना की शुरुआत की है। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून को राज्यों में अपने यहां लागू करना है। ग्राम्य विकास विभाग ने इसके आधार पर इसका प्रारूप तैयार किया है। इसमें मनरेगा के सभी मजदूरों को शामिल करते हुए योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। इसके साथ ही अन्य नए मजदूरों को भी जोड़ने का काम किया जाएगा। 105 दिन गारंटी वाला रोजगार बुवाई और कटाई के व्यस्त सीजन में खेती में काम करने वाले मजदूरों के लिए कुल 60 दिन का नो वर्क का समय होगा। शेष 305 दिनों में भी मजदूरों को 125 दिन की गारंटी वाला रोजगार दिया जाएगा। दैनिक मजदूरी हर सप्ताह या किसी भी स्थिति में कम करने की तिथि के 15 दिन के अंदर दे दिया जाएगा। वीबी जीरामजी में रोजगार की गारंटी प्रति ग्रामीण परिवार 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। यूपी में भी अब ग्रामीण मजदूरों को इतने दिन का ही रोजगार दिया जाएगा। वीबी जीरामजी योजना में मजदूरों को पूरी तरह से ऑनलाइन डिजिटल भुगतान किया जाएगा। इन कार्यों को दी जाएगी प्राथमिकता इसके साथ ही गड़बड़ी रोकने के लिए इसका सत्यापन भी कराया जाएगा। योजना में मजदूरों से फीडबैक लेकर गड़बड़ियों को रोका जाएगा और खामियों को दूर किया जाएगा। इस योजना में पानी से जुड़े कामों, कृषि और भूजल स्तर में सुधार के कामों को प्राथमिकता दी जाएगी। सड़क और कनेक्टिविटी जैसे कामों में इन्हें लगाया जाएगा। मनरेगा में पंजीकृत मजदूर यूपी में फिलहाल मनरेगा में 2.43 करोड़ मजदूर पंजीकृत हैं। इसमें 1.82 करोड़ जॉब कार्ड जारी किए गए हैं। इसमें सक्रिय मजदूरों की संख्या 1.21 करोड़ है। सक्रिय जॉब कार्ड की संख्या 86.15 लाख है।

वर्दी में रील बनाकर सोशल मीडिया पर डाली, 6 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

लखनऊ  उत्तर प्रदेश पुलिस में सोशल मीडिया पर रील बनाने की होड़ थम नहीं रही है। बार-बार चेतावनियों के बावजूद पुलिस के जवान और अफसर वर्दी में रील बनाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला शाहजहांपुर का है जहां ड्यूटी के दौरान रील बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करना छह पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया। एसपी सौरभ दीक्षित ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चार महिला और दो पुरुष सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया। कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। साथ ही सोशल मीडिया पर सक्रिय पुलिसकर्मी भी सतर्क हो गए हैं। मामला शाहजहांपुर के परौर थाने का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार थाने में तैनात कुछ महिला सिपाहियों ने ड्यूटी के दौरान थाने और कार्यालय परिसर में रील बनाकर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपलोड की थी। वीडियो में पुलिसकर्मी वर्दी में नजर आ रहे थे। बताया जा रहा है कि वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद किसी ने उसे एक्स पर साझा करते हुए कार्रवाई की मांग कर दी। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस अधीक्षक ने जांच कराई। जांच में ड्यूटी के दौरान वीडियो बनाए जाने और सोशल मीडिया पर अपलोड किए जाने की पुष्टि होने पर सख्त कार्रवाई की गई। लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मियों में मंजू कुमारी, मोनिका, जविता, मोनिका, दिलशाद और मोहित मिश्रा शामिल हैं। क्या बोले एसपी शाहजहांपुर के एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि ड्यूटी के दौरान रील बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करना अनुशासनहीनतामें आता है।जांच कराई गई थी,आरोप सही पाए गए। अनुशासन बनाए रखने के लिए छह पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। आगे भी इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने हर महीने की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेजने का भी आदेश दिया था। कहा गया था कि रिपोर्ट के साथ आपत्तिजनक पोस्ट का स्क्रीनशॉट और URL (लिंक) भी संलग्न रखना अनिवार्य होगा। ऐसा इसलिए ताकि सबूत सुरक्षित रहे। पिछले दिनों अमिताभ यश ने जारी किया था ये आदेश बता दें कि पिछले दिनों यूपी के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) अमिताभ यश ने रील बनाने वाले पुलिसवालों पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी जारी की थी। उन्होंने ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर तुरंत विभागीय ऐक्शन लेने का आदेश दिया था। प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को आदेश दिया गया था कि सोशल मीडिया पॉलिसी का उल्लंघन करने वाले अफसरों और जवानों की लिस्ट बनाएं और उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें।

लखनऊ में परीक्षा अभ्यर्थियों से बदसलूकी पड़ी भारी, छेड़छाड़ के आरोपी ऑटो चालक का एनकाउंटर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सिपाही भर्ती परीक्षा देने जा रही दो युवतियों से छेड़छाड़ का मामला सामने आया. युवतियों ने हसीब नाम के ऑटो चालक पर छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप लगाया. इसके बाद पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए सोमवार की देर को रात लखनऊ के पारा इलाके में आरोपी हसीब का एनकाउंटर कर दिया. इस एनकाउंटर में हसीब के पैर में गोली जा लगी. इसके बाद पुलिस हसीब को घायल अवस्था में अस्पताल लेकर गई और उसको भर्ती कराया. पुलिस ने आरोपी हसीब के पास से तमंचा, कारतूस और ऑटो बरामद किया है. बताया जा रहा है कि दोनों युवतियां लखीमपुर जिले की रहने वाली थीं और परीक्षा देने जा रही थीं।  यूपी पुलिस की परीक्षा देने जा रही थीं लड़कियां दोनों लड़कियों को लखनऊ में ट्रेन से उतर कर रायबरेली बस से जाना था. रेलवे स्टेशन से बस अड्डे तक के लिए दोनों युवतियां हसीब के ऑटो में बैठी थीं. इस दौरान आरोपी हसीब उनको बस अड्डे न ले जाकर एक सुनसान इलाके में लेकर चला गया. जहां उसने दोनों लड़कियों से छेड़छाड़ की. वहीं जब युवतियों ने विरोध करना शुरू किया तो आरोपी हसीब ने उनकी पिटाई कर दी. इस दौरान युवतियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया. फिर आरोपी हसीब मौके से फरार हो गया।  पुलिस ने आरोपी हसीब का किया एनकाउंटर इसके बाद दोनों पीड़िता नजदीकी थाने पहुंचीं. फिर पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज कराई और परीक्षा के लिए रायबरेली भेजा. पुलिस ने कई सीसीटीवी फुटेज की मदद लेकर आरोपी हसीब की पहचान की और देर रात पुलिस की घेरेबंदी में फंस गया. इस दौरान उसने पुलिस को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में फायरिंग की और गोली हसीब के पैर में जा लगी. बताया जा रहा है कि आरोपी हसीब पहले भी हरदोई में दुष्कर्म के मामले में जेल जा चुका है।   

पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मुख्यमंत्री

वस्त्रोद्योग के लिए नई कौशल विकास व्यवस्था तैयार हो, ग्रामोद्योग और माटीकला क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को मिले नई गति : मुख्यमंत्री पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मुख्यमंत्री उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार होगा कुशल मानव संसाधन, प्रशिक्षण और रोजगार को जोड़ने पर जोर ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश वित्तीय सहायता, कौशल विकास, तकनीकी उन्नयन और विपणन सुविधाओं को एकीकृत रूप से विकसित किया जाए लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वस्त्र क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप व्यापक कौशल विकास कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और रोजगार की दृष्टि से देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उद्योगों को समय पर प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित न होकर युवाओं को रोजगार और आजीविका से जोड़ना होना चाहिए। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार समर्थ योजना के अंतर्गत अब तक 2.28 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि 1.60 लाख से अधिक प्रशिक्षार्थियों को रोजगार से जोड़ा गया है। महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है और कुल प्रशिक्षार्थियों में उनका हिस्सा 87 प्रतिशत से अधिक है। वहीं उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से भी बड़ी संख्या में युवाओं को वस्त्र क्षेत्र से संबंधित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वस्त्र क्षेत्र में तकनीकी बदलाव अत्यंत तेजी से हो रहे हैं। ऑटोमेशन, आधुनिक मशीनरी तथा टेक्निकल टेक्सटाइल्स जैसे नए क्षेत्रों के विस्तार को देखते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समयानुकूल बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक उपयोगी और रोजगारपरक बनाया जाए। बैठक में अधिकारियों ने वस्त्र क्षेत्र के लिए प्रस्तावित कौशल विकास व्यवस्था की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें उद्योगों, प्रशिक्षण संस्थानों तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए प्रशिक्षण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही प्रशिक्षण की गुणवत्ता, पारदर्शिता, निगरानी और रोजगार परिणामों को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्थाओं के विकास पर भी चर्चा हुई। माटीकला क्षेत्र की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार से सीधे जुड़ा हुआ है। मिट्टी से निर्मित उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ बड़ी संख्या में कारीगर परिवारों की आजीविका का आधार भी हैं। उन्होंने माटीकला उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने, कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, सोलर चाक उपलब्ध कराने, नई तकनीक, बेहतर उपकरण, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाओं से जोड़ने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के अंतर्गत वर्ष 2019-20 से वर्ष 2025-26 तक 1,331 इकाइयों की स्थापना की गई है। इन इकाइयों में 3,302.37 लाख रुपये का पूंजी निवेश हुआ है तथा 557.18 लाख रुपये की मार्जिन मनी सहायता उपलब्ध कराई गई है। माटीकला महोत्सवों, प्रदर्शनियों और मेलों के माध्यम से कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 300 इकाइयों की स्थापना के लक्ष्य के सापेक्ष बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने लंबित ऋण प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक उद्योगों को केवल संरक्षण की नहीं, बल्कि नवाचार, ब्रांडिंग, डिजिटलीकरण और आधुनिक बाजार से जुड़ाव की आवश्यकता है। माटीकला के उत्पादों को ई-कॉमर्स, डिजाइन विकास और आधुनिक विपणन प्रणालियों से जोड़कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर प्रशिक्षण, बैंकों से समन्वय बनाकर वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन, विपणन और रोजगार सृजन की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह संग लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का बटन दबाकर शुभारंभ किया

यूपी के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को साइंटिफिक तरीके से बढ़ाएगा क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्रः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह संग लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का बटन दबाकर शुभारंभ किया यूपी के पास देश के 35-36 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन की क्षमता, जरूरत इसे तकनीक के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने की: सीएम योगी सीएम योगी ने प्रधानमंत्री मोदी व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का जताया आभार, कहा- क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र से होगा यूपी को बड़ा लाभ राज्य सरकार चाहती है कि मौसम की और सटीक जानकारी के लिए उसका अपना सेटेलाइट हो: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मौसम पूर्वानुमान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में किए गए कार्यों के परिणाम स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना से उत्तर प्रदेश को विशेष लाभ मिलेगा। यूपी देश की सबसे बड़ी आबादी का राज्य है। महज 11 फीसदी कृषि योग्य भूमि में यूपी देश का 21 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन करता है। समय पर मौसम, बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि या ओलावृष्टि की जानकारी नहीं मिलेगी तो हम किसानों के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे। क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना मौसम की और सटीक जानकारी प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  मुख्यमंत्री ने सोमवार को केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह संग बटन दबाकर क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारंभ किया। इसे लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र को परिवर्तित कर स्थापित किया गया है। इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि हम लोग सीजन में अतिवृष्टि-अनावृष्टि, आकाशीय बिजली आदि के संबंध में मेट्रोलॉजिकल व अन्य विभागों की बैठक में चर्चा करते थे कि समय पर सटीक जानकारी मिलने से सही रणनीति संभव होती है। आज केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में लखनऊ खुद को मेट्रोलॉजिकल रीजनल सेंटर के रूप में स्थापित कर रहा है। य़ह यूपी के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सीएम ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रति आभार भी जताया।  12 वर्ष में आए परिवर्तन का दिखता है लाभ सीएम ने कहा कि आजादी के बाद इस विषय पर अपेक्षित ध्यान न देने का परिणाम था कि अन्नदाता किसान अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाए। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनधन की हानि को रोकने वाले प्रयास भी अधूरे रहे। लेकिन, पिछले 12 वर्ष में पीएम मोदी के नेतृत्व में डॉ. जितेंद्र सिंह ने जो अभियान प्रारंभ किया, उसका परिणाम सभी देख रहे हैं। 12 वर्ष पहले बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, आकाशीय बिजली के खतरों के बारे में जो जानकारी मिलती थी, होता उससे ठीक उल्टा था, लेकिन अब मौसम की सटीक जानकारी प्राप्त हो रही है। आपदा से तीन घंटे पहले मोबाइल पर अलर्ट  सीएम ने कहा कि 13 मई को आंधी-तूफान से प्रदेश के कुछ जनपदों में जनधन की काफी हानि हुई थी। बैठक में मैंने पूछा कि अर्ली वार्निंग सिस्टम क्यों काम नहीं कर रहा था। पता चला कि सिस्टम तो काम कर रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की सक्रियता का अभाव है। फिर रात में पूरे प्रदेश के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मैंने कहा कि जब आपको अलर्ट मिल रहा है तो आपको भी स्थानीय स्तर पर लोगों व संस्थाओं को अलर्ट करना चाहिए। इस बैठक के चौथे-पांचवें दिन भी आपदा आई, लेकिन तीन घंटे पहले सबके मोबाइल पर अलर्ट आना प्रारंभ हो गया।  सीएम ने किया सहारनपुर की घटना का जिक्र सीएम ने सहारनपुर की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वहां शिवालिक पहाड़ी की तलहटी में मां शाकम्भरी देवी का मंदिर है। देहरादून व शिवालिक पहाड़ियों में भारी बरसात हुई। यहां बारिश होने से एकत्र होने वाला जल बाढ़ जैसा माहौल पैदा कर देता है। उस समय मंदिर में कीर्तन चल रहा था, काफी श्रद्धालु मौजूद थे, लेकिन मौसम विभाग ने समय से सही जानकारी दी तो सभी को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया, जिससे जनधन की व्यापक हानि रुक गई। अर्ली वार्निंग सिस्टम का लाभ  सीएम ने कहा कि मीरजापुर, सोनभद्र, चंदौली आदि कई जनपदों में आकाशीय बिजली का खतरा बहुत रहता है। हर वर्ष 100-150 लोगों की मौत होती थी। चार-पांच वर्ष पहले प्रयागराज से पटना के बीच एक ही दिन में 90 मौतें हुई थीं। इसमें यूपी के 30 व बिहार के 60 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, एमडीएमए, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की बैठक में मैंने पूछा कि आखिर इन मौतों को कौन रोकेगा। क्या इसे तकनीक से रोका नहीं जा सकता, तब विभाग ने बताया कि यह संभव है। अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का परिणाम है कि उक्त जिलों में हर वर्ष होने वाली मौत के आंकड़े घटकर महज दर्जन भर रह गए। लोगों को भी ऐसे मौसम में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, सतर्क रहना चाहिए।   अपना सेटेलाइट चाहती है राज्य सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी को सदैव डॉ. जितेंद्र सिंह का सकारात्मक सहयोग मिलता है। मौसम की पूर्व जानकारी किसानों की आमदनी बढ़ाने और आकाशीय बिजली, अतिवृष्टि, अनावृष्टि व ओलावृष्टि के कारण होने वाली जनधन की हानि को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमने इसरो से भी अनुरोध किया था कि राज्य सरकार चाहती है कि उसके पास अपना सेटेलाइट हो, जो मौसम की और सटीक जानकारी उपलब्ध करा सके। चिड़िया व जानवरों का व्यवहार बता देता था मौसम का रुख मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य ने जबसे बुद्धिमत्ता का उपयोग प्रारंभ किया होगा, उसके लिए सबसे पहले मौसम की जानकारी, आकाश में चमकती बिजली, बादलों से होने वाली वर्षा जैसी स्थितियां कौतूहल का विषय बनीं। ऋषि-मुनियों ने स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पंचांग का निर्माण किया। आज भी ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर की गई गणना मौसम की सटीक जानकारी का आधार बनती है। लोक कहावतों, लोक परंपराओं में भी हम देखते थे कि अमुक चिड़िया की बोली या जानवरों का व्यवहार परिवर्तन मौसम की पूर्व जानकारी देने का माध्यम बनता था। मौसम चक्र में आया एक महीने का अंतर सीएम ने कहा कि क्लाईमेट चेंज होने से मौसम चक्र में लगभग एक महीने का अंतर आया है। यही हाल रहा … Read more