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डेयरी सेक्टर में बदलाव,आईटी लैब से गाय-भैंस की जल्दी प्रेग्नेंसी टेस्टिंग

लखनऊ यूपी में करीब और 190.20 लाख गोवंश 330.10 लाख भैंस हैं। इसमें प्रजनन योग्य 89.36 लाख गाय और 153.12 लाख भैंस हैं। इसमें करीब एक लाख गाय भैंस में समय से गर्भ धारण नहीं करने की समस्या पाई जाती है। अभी तक पशुओं के गर्भवती होने की जांच तीन माह में हो पाती हैं। यदि कोई गाय या भैंस गर्भ नहीं धारण की है तो तीन से चार माह बाद ही उसे दोबारा गर्भ धारण कराया जाता है। इस अंतर को कम करने की तैयारी है। इसके लिए प्रदेश में आईटी इनैबल्ड पशु गर्भपरीक्षण प्रयोगशाला बनाई जा रही है। इन प्रयोगशाला में किट के जरिये 28 दिन में ही जांच हो सकेगी। यदि कोई गाय भैस गर्भवती नहीं हुई है तो किसान माहभर बाद ही उसे दोबारा सीमेन चढ़वा सकेगा। साथ ही पशु चिकित्सक से संपर्क करके उसका उपचार भी करा सकेगा। इसकी शुरुआत बुंदेलखंड, पूर्वांचल, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पांच ब्लॉकों से की जा रही है। यानी हर क्षेत्र में एक-एक ब्लॉक का चयन किया जा रहा है। कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए अतिहिमीकृत वीर्य द्वारा कृत्रिम गर्भाधान को बढावा दिए जाने की नीति बनाई गई है। सभी पशु अस्पतालों में हिमीकृत बीज रखने के लिए अलग अत्याधुनिक लैब भी बनाई जा रही है। इसी तरह विदेशी नस्ल के सांडों के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान कराकर संकर नस्ल तैयार कर दूध की मात्रा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। किसानों को दी जाएंगी गाय गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि कई गौशाला में अच्छी नस्ल की गायें हैं। इन गायों का उपचार कराया गया है। कुछ गर्भवती भी हैं। इन्हें किसानों को दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बुदेलखंड में यह प्रयोग काफी सफल रहा है।  

42 हजार पदों के लिए आज से परीक्षा, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

लखनऊ होमगार्ड के करीब 42 हजार पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन शनिवार से होगा। सोमवार तक यह परीक्षा रोजाना दो पालियों में सुबह 10 से 12 और शाम 3 से 5 बजे तक आयोजित होगी। इसमें करीब 25 लाख अभ्यर्थी हिस्सा लेंगे। उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने परीक्षा को निष्पक्ष एवं शुचितापूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पुख्ता बंदोबस्त किए हैं। परीक्षा के दौरान तीन दिन तक प्रदेश पुलिस अलर्ट पर रहेगी। शनिवार की परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों तक आने शुरू हो गए हैं। भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष एसबी शिरडकर ने बताया कि श्रावस्ती को छोड़कर अन्य सभी जिलों में एक हजार से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा के सकुशल आयोजन के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है, जिनकी देखरेख में प्रश्नपत्र जिलों के स्ट्रॉन्ग रूम में कड़ी सुरक्षा में पहुंच चुके हैं। परीक्षा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त रहेंगे। सभी जिलों के पुलिस प्रभारियों को इस बाबत पूर्व में निर्देश दिए जा चुके हैं। परीक्षा में सेंध लगाने का प्रयास करने वालों पर कई एजेंसियां पैनी नजर रख रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर परीक्षा से संबंधित जानकारी आदि का प्रचार-प्रसार करने वालों को सख्त कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है। वहीं सीएम योगी ने भी बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सभी वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ होमगार्ड भर्ती की लिखित परीक्षा की समीक्षा करने के साथ आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे। होमगार्ड परीक्षा के चलेंगी चार स्पेशल ट्रेनें  उत्तर प्रदेश होमगार्ड परीक्षा को दृष्टिगत रखते हुए उत्तर रेलवे प्रशासन ने चार स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। इससे परीक्षार्थियों को आने-जाने में राहत होगी। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि 25, 26, 27 अप्रैल को उप्र होमगार्ड परीक्षा होनी है। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए चार परीक्षा स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। 04220 लखनऊ जंक्शन जौनपुर परीक्षा स्पेशल शाम 6:20 बजे चलकर बाराबंकी, रुदौली, अयोध्या कैंट, अयोध्या धाम, अकबरपुर, शाहगंज से होते हुए जौनपुर पहुंचेगी। 04222 लखनऊ जंक्शन प्रयाग परीक्षा स्पेशल शाम 5:30 बजे चलकर निहालगढ़, सुल्तानपुर, मां बेल्हादेवी धाम प्रतापगढ़ जंक्शन व फाफामऊ से होते हुए प्रयाग पहुंचेगी। 04223 वाराणसी मऊ परीक्षा स्पेशल शाम छह बजे चलकर जौनपुर, औड़िहार से होते हुए मऊ जाएगी तथा 04224 वाराणसी बिजौली स्पेशल शाम 6:35 बजे चलकर औड़िहार, गाजीपुर, यूसुफपुर होते हुए बिजौली पहुंचेगी।  

पश्चिमी विक्षोभ से मिलेगी राहत, जानें कब बदलेगा मौसम

लखनऊ उत्तर प्रदेश में प्रचंड गर्मी अपने पूरे रंग में है। शुक्रवार को प्रदेश के ज्यादातर इलाके भीषण गर्मी के चपेट में रहे। तपिश के प्रकोप से अब जनजीवन और लोगों का कामकाज प्रभावित होने लगा है। प्रयागराज, वाराणसी, हरदोई, आगरा, मेरठ,अलीगढ़ और शाहजहांपुर जैसे शहरों भयानक लू के थपेड़ों का प्रकोप रहा और दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। 45.2 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ प्रयागराज प्रदेश में सर्वाधिक गर्म रहा। माैसम विभाग का कहना है कि 26 अप्रैल से यूपी में सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के असर से प्रदेश के विभिन्न इलाकों में बूंदाबांदी होगी और तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। साथ ही लू के थपेड़ों और तपिश से राहत मिलेगी। हालांकि शनिवार के लिए भी माैसम विभाग की ओर से प्रदेश के 45 जिलों में लू की चेतावनी जारी किया गया है। वहीं पश्चिम के 21 जिलों में वार्म नाइट की आशंका जताई गई है। आंचलिक माैसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 26 अप्रैल से एक नए विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश भर में बादलों की सक्रियता बढ़ेगी और पश्चिमी यूपी समेत विभिन्न इलाकों में बूंदाबांदी से पारे में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आएगी। इन 45 जिलों के लिए है लू की चेतावनी बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नोज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मधुरा, हाथरस, कासगंज एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर संभल, बदायूं, जालोन, हमीरपुर, महोबा, झांसी व आस पास के क्षेत्र। यहां है वार्म नाइट होने की संभावना सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, बदायूं व आस पास के क्षेत्र । पारा 42.5 डिग्री पर, शुक्रवार बना सीजन का सबसे गर्म दिन  राजधानी में शुक्रवार को भीषण गर्मी के बीच पारा 42.5 डिग्री सेल्सियस पर जा पहुंचा है। यह वर्तमान सीजन में लखनऊ में दर्ज हुआ सबसे ज्यादा तापमान है। अधिकतम तापमान अभी सामान्य से 3.4 डिग्री ज्यादा है। दूसरी तरफ न्यूनतम तापमान में 2.7 डिग्री की कमी भी आई है। शुक्रवार को यह 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शुक्रवार की सुबह से ही तेज धूप ने अपना तेवर दिखाना शुरू कर दिया। दोपहर तक झुलसा देने वाली धूप व गर्म हवा के थपेड़ों ने लोगों का राह चलना मुहाल कर दिया। गर्मी के असर से दोपहर में सड़कों पर सूनापन साफ नजर आया है। जरूरी काम से निकलने वाले लोग सिर को ढके और पानी की बोतल साथ लिए नजर आए। मौसम विभाग के मुताबिक रविवार 26 अप्रैल से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके चलते लखनऊ में 27 अप्रैल से बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और 28 व 29 अप्रैल को हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं। इस बदलाव से तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट के संकेत हैं। इससे तपिश और लू जैसे हालात से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार तापमान में बढ़ोतरी जारी है। शनिवार व रविवार को लू का असर और तेज हो सकता है। ऐसे में दिन के समय बाहर निकलने वालों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। परिषदीय स्कूलों में गर्मी और लू से बचाव के निर्देश जारी प्रदेश में भीषण गर्मी और लू के मद्देनजर बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय व कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश गर्मी और लू के बढ़ते प्रकोप से बच्चों को बचाने के लिए हैं। धूप में किसी भी गतिविधि पर रोक लगाई गई है। प्रार्थना सभाएं छायादार स्थानों या कक्षाओं में होंगी। आउटडोर गतिविधियां सुबह 9 बजे तक पूरी करनी होंगी। विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल, छाया और पंखों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। फर्स्ट-एड की भी व्यवस्था अनिवार्य है।  शिक्षकों को बच्चों को समय-समय पर पानी पीने और लू से बचाव के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है। बच्चों को जंक फूड, बासी या मसालेदार भोजन से बचने की सलाह दी गई है। विद्यालयों को पंखे, स्वच्छ शौचालय और मिड-डे-मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने फर्स्ट-एड किट में ओआरएस, बुखार और उल्टी-दस्त की दवाएं रखने को कहा है।  

पूर्व मध्यमा द्वितीय में 95.91%, उत्तर मध्यमा प्रथम में 94.40% और उत्तर मध्यमा द्वितीय में 94.86% परीक्षार्थियों ने हासिल की सफलता

योगी सरकार में संस्कृत शिक्षा को नई पहचान, पारदर्शी व्यवस्था के बीच यूपी संस्कृत बोर्ड 2026 का रिजल्ट घोषित पूर्व मध्यमा द्वितीय में 95.91%, उत्तर मध्यमा प्रथम में 94.40% और उत्तर मध्यमा द्वितीय में 94.86% परीक्षार्थियों ने हासिल की सफलता तीनों वर्गों में बेहतर रहा प्रदर्शन, सीसीटीवी निगरानी, रियल टाइम मॉनिटरिंग और सख्त व्यवस्थाओं के बीच हुई परीक्षा  पूर्व मध्यमा द्वितीय (कक्षा-10) में कन्नौज की सृष्टि ने हासिल किया शीर्ष स्थान उत्तर मध्यमा द्वितीय (कक्षा-12) की श्रेष्ठता सूची में रजनीश यादव (प्रतापगढ़) ने मारी बाजी लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों का प्रभाव अब संस्कृत शिक्षा में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। उ०प्र० माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद, लखनऊ द्वारा वर्ष 2026 की पूर्व मध्यमा द्वितीय, उत्तर मध्यमा प्रथम एवं उत्तर मध्यमा द्वितीय परीक्षाओं का परिणाम घोषित कर दिया गया है। पारदर्शी व्यवस्था के बीच पूर्व मध्यमा द्वितीय में 95.91% परीक्षार्थी, उत्तर मध्यमा प्रथम में 94.40% परिणाम और उत्तर मध्यमा द्वितीय में 94.86% परीक्षार्थियों ने सफलता हासिल की। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ महेंद्र देव और माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव शिव लाल ने परीक्षाफल की घोषणा की। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष परीक्षाएं 19 फरवरी से 28 फरवरी 2026 के मध्य प्रदेश के 241 परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं के बीच संपन्न कराई गईं। परीक्षाफल परिषद की आधिकारिक वेबसाइट www.upmssp.com पर जनसामान्य के लिए उपलब्ध है। माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने सभी सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। कन्नौज के सुजीत और प्रतापगढ़ के रजनीश बने टॉपर पूर्व मध्यमा द्वितीय (कक्षा-10) के परीक्षाफल में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में प्रथम स्थान पर सुजीत कुमार (कन्नौज) रहे, जिन्होंने 700 में से 661 अंक (94.43%) प्राप्त किए। द्वितीय स्थान पर खुशबू सरोज (प्रतापगढ़) ने 660 अंक (94.29%) हासिल किए। तृतीय स्थान मुलायम सिंह यादव (प्रतापगढ़) और प्रियंका सरोज (प्रतापगढ़) ने संयुक्त रूप से 653 अंक (93.29%) के साथ प्राप्त किया। उत्तर मध्यमा द्वितीय (कक्षा-12) की श्रेष्ठता सूची में रजनीश यादव (प्रतापगढ़) ने 1400 में से 1251 अंक (89.36%) प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। द्वितीय स्थान पर वंशिका श्रीवास्तव (प्रतापगढ़) रहीं, जिन्होंने 1199 अंक (85.64%) प्राप्त किए। तृतीय स्थान पर काजल (प्रतापगढ़) और संस्कृति (अमरोहा) ने संयुक्त रूप से 1196 अंक (85.43%) के साथ स्थान बनाया। पूर्व मध्यमा द्वितीय में शानदार प्रदर्शन पूर्व मध्यमा द्वितीय परीक्षा में कुल 21,915 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए, जिनमें 21,107 संस्थागत और 808 व्यक्तिगत परीक्षार्थी शामिल थे। परीक्षा में 16,615 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए, जिनमें से 15,029 सफल घोषित किए गए। इस वर्ग का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 95.91 रहा। संस्थागत परीक्षार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 95.96 और व्यक्तिगत का 94.78 रहा। इस वर्ग में 11,340 बालक एवं 3,689 बालिकाएं उत्तीर्ण हुईं। बालिकाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत (96.64%) बालकों (95.68%) से अधिक रहा। उत्तर मध्यमा प्रथम में बालिकाओं ने फिर मारी बाजी उत्तर मध्यमा प्रथम में कुल 19,745 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए, जिनमें 19,116 संस्थागत और 629 व्यक्तिगत थे। परीक्षा में 15,746 परीक्षार्थी शामिल हुए और 14,028 सफल घोषित किए गए। इस वर्ग का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 94.40 रहा। संस्थागत परीक्षार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 94.45 और व्यक्तिगत का 93.00 रहा। इस वर्ग में 10,420 बालक और 3,608 बालिकाएं उत्तीर्ण हुईं, जहां बालिकाओं का प्रदर्शन (94.62%) बालकों (94.33%) से बेहतर रहा। उत्तर मध्यमा द्वितीय में लगातार बेहतर परिणाम उत्तर मध्यमा द्वितीय में 14,162 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए, जिनमें 13,694 संस्थागत और 468 व्यक्तिगत थे। परीक्षा में 13,302 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए, जिनमें 12,306 सफल हुए। इस वर्ग का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 94.86 रहा। इसमें 9,053 बालक और 3,253 बालिकाएं उत्तीर्ण हुईं। बालिकाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत 95.95 रहा, जो बालकों (94.47%) से अधिक है। पिछले वर्ष से बेहतर रहा परिणाम इन परीक्षाओं में प्रदेश के 1091 संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के हजारों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। परीक्षा के दौरान प्रत्येक दिन की उपस्थिति ऑनलाइन अपलोड कराई गई, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई, वहीं राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम से रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था लागू रही। इसके अतिरिक्त जनपद और मंडल स्तर पर भी ऑनलाइन कंट्रोल रूम के माध्यम से सतत निगरानी की गई। मूल्यांकन कार्य 7 मार्च से 20 मार्च के बीच 13 केंद्रों पर सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। परिषद के अनुसार, इस वर्ष का परीक्षा परिणाम गत वर्ष की तुलना में अधिक बेहतर रहा है, जो योगी सरकार की पारदर्शी और नकलविहीन परीक्षा प्रणाली का प्रत्यक्ष प्रमाण है। तकनीक आधारित निगरानी से बनी परीक्षा की विश्वसनीयता परीक्षा के दौरान सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, राज्य स्तरीय रियल टाइम कंट्रोल रूम, जनपद एवं मंडल स्तर पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग और उपस्थिति की डिजिटल ट्रैकिंग जैसे उपायों ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और नकलविहीन बनाया। यही कारण है कि इस वर्ष का परिणाम न केवल बेहतर रहा, बल्कि परीक्षा प्रणाली पर छात्रों और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत हुआ है। योगी सरकार की नीतियों से संस्कृत शिक्षा को मिला नया प्रोत्साहन योगी सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी सुदृढ़ीकरण और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जा रहा है। संस्कृत शिक्षा परिषद की परीक्षाओं का बेहतर प्रबंधन और बढ़ता उत्तीर्ण प्रतिशत इसी दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। इससे न केवल संस्कृत शिक्षा को नई पहचान मिल रही है, बल्कि प्रदेश के छात्र-छात्राओं के लिए नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। श्रेणीवार परीक्षाफल श्रेणीवार परीक्षाफल के अनुसार पूर्व मध्यमा द्वितीय में सर्वाधिक 14,199 परीक्षार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए, जबकि 816 द्वितीय श्रेणी और 5 परीक्षार्थी तृतीय श्रेणी में रहे। वहीं उत्तर मध्यमा प्रथम में 5,661 परीक्षार्थी प्रथम श्रेणी में, 6,087 द्वितीय श्रेणी में तथा 555 परीक्षार्थी तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण घोषित किए गए।

सीएम योगी ने चेताया: जातिवाद के नाम पर देश को लूटने वाले राष्ट्रद्रोहियों से रहें सतर्क

जातिवाद के नाम पर देश को लूटने वाले राष्ट्रद्रोहियों से सावधान रहें: सीएम योगी तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के शुभारंभ एवं ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम को सीएम ने किया संबोधित राष्ट्रकवि दिनकर की कृति आज भी राष्ट्र चेतना की मशाल, साहित्य समाज का दर्पण: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने देखा रश्मिरथी का मंचन, कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति की सराहना की तीन दिवसीय आयोजन में स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और अटल जी पर भी होंगे विशेष नाट्य कार्यक्रम लखनऊ, "राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ आज भी समाज और राष्ट्र को दिशा देने वाली प्रेरणा है। यदि भारत को मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित बनाना है तो जातिवाद के नाम पर समाज को बांटने वाली शक्तियों से सावधान रहना होगा।" ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के शुभारंभ एवं ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की कालजयी काव्यकृति ‘रश्मिरथी’ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। साहित्य के ऐसे सशक्त साधक के प्रति हम सब अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए प्रदेश की राजधानी में एकत्र हैं। यहां हम उनकी कालजयी काव्यकृति पर आधारित नाट्य-श्रृंखला का मंचन देखेंगे। हम देखेंगे कि किस प्रकार मां सरस्वती दिनकर जी की जिह्वा पर विराजती थीं और उनकी लेखनी शब्दों को पिरोती थी। यह सब ‘रश्मिरथी’ के इस मंचन के माध्यम से हम सभी को देखने-सुनने को मिलेगा। इस अवसर पर दिनकर जी की स्मृतियों को नमन करते हुए मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। दिनकर जी की कृतियों के कुछ अंश लेकर विरोधियों पर प्रहार भी करता हूं सीएम योगी ने कहा कि जब इस कार्यक्रम का पत्र मिला, तो सबसे पहले मैंने कहा कि यह कार्यक्रम उसी दिन रखिए, जिस दिन मैं भी इसका भागीदार बन सकूं, क्योंकि मैं अक्सर दिनकर जी की कृतियों के कुछ अंश लेकर विरोधियों पर प्रहार भी करता हूं। भारत धन-धान्य से परिपूर्ण रहा है, दुनिया की बड़ी ताकत रहा है, लेकिन भारत ने सैकड़ों वर्षों की गुलामी भी सही है। बल और बुद्धि में भारत का कोई मुकाबला नहीं कर सकता था, लेकिन हमारी कुछ कमियां भी थीं। दिनकर जी ने इन कमियों पर जिस प्रकार प्रहार किया है, उसे देखकर मुझे अच्छा लगता है। आप इस नाट्य मंचन के माध्यम से भी देखेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिनकर जी ने ‘रश्मिरथी’ में लिखा है- “ऊंच-नीच का भेद न जाने, वही श्रेष्ठ ज्ञानी है, दया-धर्म जिसमें हो, सबसे वही पूज्य प्राणी है।" जातिवाद पर भी उन्होंने कितना सशक्त प्रहार किया है- “मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का, धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का। पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर, जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर।” सीएम योगी ने कहा कि यदि हमें अपनी आजादी को लंबे समय तक अक्षुण्ण बनाए रखना है और विकसित व आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करना है, तो जातिवाद के नाम पर देश को लूटने और समाज को कमजोर करने वाले राष्ट्रदोहियों से सावधान रहना होगा। युवा वर्ग के लिए दिनकर जी इस बात की प्रेरणा इन पंक्तियों के माध्यम से दशकों पहले ही दे चुके हैं- "सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, कांटों में राह बनाते हैं।" मुख्यमंत्री ने कहा कि दिनकर जी ने समाज की चेतना को जिस रूप में जागरूक किया और पूरे समाज को एकजुट किया, वह अद्वितीय है। अपनी कृतियों के माध्यम से वह अलग-अलग स्तरों पर लोगों को जागृत करते रहे और देश की चेतना को निरंतर सशक्त करते रहे। जब भारत के लोकतंत्र को दबाने का प्रयास हुआ, तब भी दिनकर जी ने आह्वान किया- “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।” शब्द किस प्रकार मंत्र बन जाएं और हर व्यक्ति के मन में राष्ट्र के लिए त्याग, चेतना और समर्पण की भावना को जागृत करें, यह गुण महान कवि में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि 'रश्मिरथी' ऐसे पात्र के बारे में है, जो अपनी पहचान के लिए मोहताज रहा। उसकी गाथा को दिनकर जी ने जिस प्रकार प्रस्तुत किया और उसके गुणों की व्याख्या की, उसने हर व्यक्ति को सोचने के लिए मजबूर किया कि कौन किस स्थान पर हो सकता है और हमें किसी की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ में उन्होंने लिखा है- "जब किसी जाति का अहम चोट खाता है, पावक प्रचण्ड हो कर बाहर आता है। यह वही चोट खाये स्वदेश का बल है, आहत भुजंग है, सुलगा हुआ अनल है।" स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्मसभा के बाद लखनऊ, अयोध्या, काशी की यात्राएं की सीएम ने बताया कि उन्होंने संस्कृति विभाग से कहा है कि ऐसी साहित्यिक कृतियों पर आधारित कार्यक्रम आज की पीढ़ी के लिए नई प्रेरणा हैं। इस प्रेरणा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। कल यहीं पर स्वामी विवेकानंद पर आधारित एक नाट्य मंचन का कार्यक्रम है। स्वामी विवेकानंद हर भारतीय के लिए प्रेरणा हैं। वह एक संन्यासी थे, लेकिन हर युवा के लिए मार्गदर्शक बने। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की वैदिक और सनातन परंपरा को सम्मान दिलाया। उन्होंने ज्ञान को विज्ञान के साथ जोड़कर तत्कालीन समाज को उसके अनुरूप तैयार करने का कार्य किया और भारत की चेतना को जागरूक करने के लिए पूरी शक्ति के साथ समर्पित रहे। स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्मसभा के बाद भारत में जो यात्राएं कीं, उनमें लखनऊ, अयोध्या, काशी सहित उत्तर प्रदेश के कई स्थान शामिल थे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 अप्रैल को यहां लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक पर आधारित कार्यक्रम होगा। तिलक जी ने भारत की स्वाधीनता के लिए “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा” का उद्घोष इसी लखनऊ में किया था, जो भारत की आजादी का एक प्रमुख केंद्र बना। इसी दिन ‘अटल स्वरांजलि’ कार्यक्रम भी आयोजित होगा, जिसमें भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताओं पर आधारित एक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। अटल जी का शताब्दी वर्ष हाल में संपन्न हुआ है, और इस अवसर … Read more

25, 26 और 27 अप्रैल को अभ्यर्थियों के लिए विशेष सुरक्षा निर्देश: सीएम योगी ने किए कड़े इंतजाम

अभूतपूर्व सुरक्षा में होगी होमगार्ड लिखित परीक्षा सीएम योगी ने दिए कड़े सुरक्षा इंतजाम के निर्देश, 25, 26 व 27 अप्रैल को 1053 केंद्रों पर 25 लाख से अधिक अभ्यर्थी होंगे शामिल 41,424 पदों के लिए जुटेंगे लाखों अभ्यर्थी, हर 240 परीक्षार्थियों पर एक निरीक्षक/उप निरीक्षक की तैनाती सभी केंद्रों व स्ट्रॉन्ग रूम में सीसीटीवी से निरंतर निगरानी, घड़ी, मोबाइल, ब्लूटूथ समेत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित लखनऊ  योगी सरकार की “पारदर्शी एवं नकलविहीन भर्ती” की प्रतिबद्धता के तहत होमगार्ड एनरॉलमेंट 2025 की लिखित परीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने अभूतपूर्व सुरक्षा का खाका तैयार किया है। 41,424 पदों के लिए आयोजित होने वाली इस परीक्षा में 25.32 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा 25, 26 व 27 अप्रैल को प्रदेश भर के 1053 केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित की जाएगी। योगी सरकार के निर्देशन में व्यापक एवं बहुस्तरीय व्यवस्था न केवल परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करेगी, बल्कि प्रदेश में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी मजबूती से स्थापित करेगी। हर स्तर पर कड़ी निगरानी, पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष डीजी एस.बी. शिरडकर ने बताया कि परीक्षा की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक जिले में अपर पुलिस अधीक्षक/अपर पुलिस उपायुक्त स्तर के नोडल ऑफिसर बनाए गए हैं। सभी केंद्रों पर प्रति 240 परीक्षार्थियों पर एक निरीक्षक/उप निरीक्षक की तैनाती की गई है। प्रवेश द्वार पर हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर से सभी अभ्यर्थियों की सघन चेकिंग होगी। महिला अभ्यर्थियों की जांच महिला पुलिसकर्मियों द्वारा बंद परिसर में कराई जाएगी। प्रश्नपत्र सुरक्षा के लिए ‘डबल लॉक’ सिस्टम, सख्त प्रोटोकॉल प्रश्नपत्रों को कोषागार में डबल लॉक व्यवस्था में रखा गया है, जिसकी चाबियां अलग-अलग अधिकारियों के पास रहेंगी। स्ट्रॉन्ग रूम में 24 घंटे बिजली, इंटरनेट और अग्निशमन व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रश्नपत्रों को केंद्रों तक पहुंचाने के लिए रूट मैप बनाकर सेक्टर मजिस्ट्रेट द्वारा पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) किया गया है। परिवहन के दौरान किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध रहा। परीक्षा केंद्रों का सैनिटाइजेशन, सीसीटीवी से होगी निगरानी सभी परीक्षा केंद्रों का गहन सैनिटाइजेशन कराया गया है और छत, गैलरी, मैदान और वॉशरूम तक की सघन जांच की गई है, ताकि किसी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस या आपत्तिजनक सामग्री छिपी न रह जाए। सभी केंद्रों और स्ट्रॉन्ग रूम में सीसीटीवी कैमरों से निरंतर निगरानी की जाएगी। साथ ही पेयजल, क्लॉक रूम और समय की सूचना के लिए बेल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। अभ्यर्थियों के लिए सख्त गाइडलाइन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पूरी तरह प्रतिबंधित अभ्यर्थियों को केवल प्रवेश पत्र, पहचान पत्र और काला/नीला पेन लाने की अनुमति होगी। किसी भी प्रकार की घड़ी, मोबाइल, ब्लूटूथ या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र में पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। कक्ष निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सीटिंग व्यवस्था और अनुशासन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं। रेलवे स्टेशन से परीक्षा केंद्र तक सुरक्षा, यूपी-112 और एम्बुलेंस तैनात परीक्षा के दौरान रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष पुलिस व्यवस्था की गई है। परीक्षा केंद्रों के आसपास यूपी-112 की गाड़ियां और एम्बुलेंस तैनात रहेंगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी, जिससे अफवाहों पर रोक लगाई जा सके। आधार आधारित ई-केवाईसी प्रक्रिया से गुजरना होगा डीजी शिरडकर ने बताया कि नकलविहीन और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पूर्व आधार आधारित ई-केवाईसी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके साथ ही केंद्रों पर आइरिस बायोमेट्रिक डेस्क स्थापित की जाएंगी, जहां अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। इस व्यवस्था के माध्यम से इंपर्सनेशन (दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने) जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगेगी और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

Ganga Expressway: पश्चिमी यूपी से पूरब तक, 12 जिलों को जोड़ने वाला 594KM लंबा एक्सप्रेसवे

नई दिल्ली Ganga Expressway: उत्तर प्रदेश में सड़क नहीं, रफ्तार का एक नया अध्याय खुलने जा रहा है. 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) का लोकार्पण कर सकते हैं. ये सिर्फ एक प्रोजेक्ट की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि 'नए यूपी' की रेस का अगला गियर लगेगा. सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार जिस इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल की बात करती रही है, गंगा एक्सप्रेसवे उसका सबसे बड़ा और सबसे तेज उदाहरण बनकर सामने आने वाला है।  सबसे ख़ास बात ये है कि, तकरीबन 36,402 करोड़ की लागत से बनकर तैयार होने वाला 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसव अब तक का यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे है. इसके बाद गोरखपुर–शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे पर भी काम चल रहा है जो तकरीबन 700 किमी लंबा होगा. यानी फिलहाल गंगा एक्सप्रेसवे ही सबसे बड़ा है।  करीब 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव तक जाएगा. यह सड़क पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी हिस्से से जोड़ेगी. इससे लंबी दूरी का सफर पहले से कहीं ज्यादा तेज, सुरक्षित और आरामदायक हो जाएगा. बताया जा रहा है कि, इस एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा केवल 6-7 घंटों में ही पूरी की जा सकेगी, जिसके लिए अभी तकरीबन 11 घंटे से ज्यादा समय लगता है।  इस एक्सप्रेसवे से मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, सम्भल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों को सीधा फायदा मिलेगा. करीब 519 गांव इस परियोजना से जुड़ेंगे. इससे गांव और शहर के बीच की दूरी सिर्फ किलोमीटर में नहीं, बल्कि विकास के रफ्तार में भी घटेगी।  AI बेस्ड हाईटेक टोल कलेक्शन  इस एक्सप्रेस वे पर कुल 14 टोल प्लाजा बनाए जाएंगे. टोल सिस्टम पूरी तरह से मॉडर्न और डिजिटल होगी, ताकि वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत ही न पड़े. इसके अलावा टोल कलेक्शन के लिए सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक पर बेस्ड हाईटेक कैमरे लगाए गए हैं. जो सिर्फ वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से ही फास्टैग टोल कलेक्ट कर लेंगे।  इतना ही नहीं इस एक्सप्रेसवे पर  ‘नो-स्टॉप टोल कलेक्शन सिस्टम’ लगाया जा रहा है. यानी वाहन बिना रूके टोल कलेक्ट करवाते हुए आगे बढ़ते रहेंगे. इससे एक्सप्रेस के टोल प्लाजाओं पर लगने वाले ट्रैफिक जाम के झंझट से भी मुक्ति मिलेगी. वाहनों की अधिकत स्पीड लिमिट 120 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी. सड़क के आसपास कटीले तारों से फेंसिंग की जा रही है, ताकि किसी भी तरह से मवेशियों को सड़क पर आने से रोका जाए और दुर्घटना की स्थिति न बने।  एक्सप्रेसवे पर मिलेंगी ये सुविधाएं गंगा एक्सप्रेसवे पर कुल 9 फेसिलिटी सेंटर बनाये गए हैं. हर फैसिलिटी सेंटर पर यात्रियों को कई अलग-अलग तरह की सुविधाएं मिलेंगी. जिसमें पेट्रोल पंप, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग पॉइंट, फूड कोर्ट, कैफेटेरिया, ढाबा, मोटेल, डॉरमेट्री, ट्रामा सेंटर, टॉयलेट्स इत्यादि शामिल हैं. इसके अलावा बीच सड़क किसी के वाहन खराब होने की स्थिति को ध्यान में रखकर मोटर व्हीकल सर्विस सेंटर भी मिलेगा. इस फैसिलिटी सेंटर पर वाहनों को खड़ा करने के लिए बड़ी पार्किंग भी उपलब्ध होगी।  लाइटिंग का भी इंतजाम आमतौर पर रात में एक्सप्रेसवे से यात्रा करने पर सबसे बड़ी समस्या लाइटिंग को लेकर देखने को मिलती है. चूकिं एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ खेत होते हैं और आबादी काफी दूर होती है ऐसे में सड़क पर पर्याप्त रोशनी की जरूरत होती है. इसके लिए गंगा एक्सप्रेसवे पर रेड कलर के रेडियम लाइट, सड़क के दोनों किनारों पर ब्लिंकर्स, बीच में पड़ने वाले पुलों पर स्ट्रीट लाइट्स और बेरिकेड्स पीली रेडियम लाइट्स का इंतजाम किया गया है. ताकि रात के समय भी लोग सुरक्षित यात्रा कर सकें।  किसानों के लिए बड़ा गेमचेंजर किसानों के लिए यह एक्सप्रेसवे किसी लाइफलाइन से कम नहीं होगा. अब फसलें तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगी. इससे फसलों की गुणवत्ता बनी रहेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिल सकेगी. खासकर जल्दी खराब होने वाले फसलों और उत्पाद के लिए यह बड़ा फायदा साबित होगा. प्रयागराज समेत कई धार्मिक और सांस्कृतिक शहर इस एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेंगे. इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी. स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।  एक्सप्रेसवे में यूपी का दबदबा देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क में पहले ही उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत है. गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही यह आंकड़ा करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा. यानी एक्सप्रेसवे की रेस में यूपी बाकी राज्यों से काफी आगे निकलता नजर आ रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा मतलब है कम लॉजिस्टिक्स लागत. इससे उद्योगों को फायदा मिलेगा और नए निवेश के दरवाजे खुलेंगे. गंगा एक्सप्रेसवे एक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तौर पर विकसित हो सकता है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके पैदा होंगे।  गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं है. यह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में अहम भूमिका निभा सकता है. पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के बाद अब यह प्रोजेक्ट यूपी को “एक्सप्रेसवे स्टेट” के रूप में और मजबूत बनाएगा. आने वाले समय में यही इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश को देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में खड़ा करने की बड़ी वजह बन सकता है। 

लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के शुभारंभ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के शुभारंभ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। यह बदलाव वैज्ञानिक तकनीकों, एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीति तथा केंद्र-राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। यूपी में “लैब टू लैंड” की अवधारणा धरातल पर उतर चुकी है, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। कृषि विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि, प्रति हेक्टेयर उत्पादन में रिकॉर्ड सुधार, बहुफसली खेती का विस्तार और वैल्यू एडिशन पर बढ़ता फोकस इस परिवर्तन के स्पष्ट संकेत हैं। मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों, अंतरराष्ट्रीय कृषि केंद्रों की स्थापना, कृषि विज्ञान केंद्रों के सशक्तीकरण और प्रगतिशील किसानों की भूमिका को इस बदलाव का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। भिन्न-भिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप बनें नीतियां अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन होने के कारण नीतियां भी उसी अनुरूप तय की जानी चाहिए। यदि अलग-अलग जोन में इस प्रकार की गोष्ठियां आयोजित की जाएं तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि गत वर्ष ‘विकसित कृषि अभियान’ और ‘खेती की बात, खेत में’ कार्यक्रम के दौरान उन्हें कई जनपदों में जाने का अवसर मिला, जहां किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि शिक्षा से जुड़े प्रशिक्षुओं में अभूतपूर्व उत्साह व जिज्ञासा देखने को मिली। पहली बार इनोवेशन को सीधे व्यावहारिक धरातल पर उतारने का अवसर मिला है। पहले लैब में होने वाले अनुसंधान को लैंड तक पहुंचने में काफी समय लगता था, लेकिन अब “लैब टू लैंड” की अवधारणा साकार हो चुकी है और तकनीक सीधे खेत तक पहुंच रही है। इस अभिनव पहल के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस अवधारणा को व्यवहारिक रूप से देशभर में लागू करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। योजनाओं की सही जानकारी मिले तो किसान स्वयं बेहतर परिणाम देने में सक्षम मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, आवश्यकता केवल प्रभावी नेतृत्व की है, जिसकी शुरुआत भारत सरकार के स्तर से होती है और राज्य उसे तेजी से अपनाते हैं। पहले नीतियां केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित रह जाती थीं, लेकिन अब उनके ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। अन्नदाता किसानों को योजनाओं की सही जानकारी दी जाए, तो वे स्वयं बेहतर परिणाम देने में सक्षम हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 की स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय प्रदेश में मात्र 69 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) थे, जो लगभग निष्क्रिय अवस्था में थे और उनके वैज्ञानिक भी अन्य संस्थानों में अटैच थे। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा 20 नए केवीके की पहल के साथ-साथ मौजूदा केंद्रों को सशक्त बनाने की कार्ययोजना पर काम हुआ। आज स्थिति यह है कि सभी केवीके सक्रिय होकर नवाचारों को बढ़ावा दे रहे हैं और प्रदेश के सभी 9 एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से कृषि विकास को नई दिशा दे रहे हैं। अब कृषि को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ने की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ये वैज्ञानिक स्थानीय स्तर पर डेमोंस्ट्रेशन करते हैं और फिर किसानों के खेत में जाकर उसे लागू करते हैं, लगातार दौरे करते हैं, निरंतर गोष्ठियां चलती हैं और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साथ ही भारत सरकार के साथ उनका सतत संवाद बना रहता है। इसी का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8 से बढ़कर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। परिणाम बताते हैं कि हम इससे भी बेहतर उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। सीएम ने कहा कि मेरा मानना है कि आजादी के समय भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान लगभग 41-42 प्रतिशत था। समय के साथ इसका योगदान घटता गया। यदि कृषि व मैन्युफैक्चरिंग के बीच बेहतर समन्वय हो, तो विकास की गति और तेज हो सकती है। वर्तमान में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान अब भी लगभग 15–16 प्रतिशत के आसपास है, जबकि कृषि का हिस्सा घटकर लगभग 20–21 प्रतिशत तक सीमित रह गया। अब आवश्यकता है कि कृषि को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ा जाए। इसके लिए नए प्रयासों को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने तथा प्रभावी ढंग से विस्तार देने की आवश्यकता है। निर्णायक भूमिका निभा सकती है तकनीक मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आज के दौर में अत्यंत निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में विभिन्न उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र स्थापित करवाए हैं। उदाहरण के तौर पर, वाराणसी में इंटरनेशनल राइस इंस्टीट्यूट की स्थापना हुई है, जो बेहतरीन परिणाम दे रहा है। यहां से नई-नई किस्में विकसित की गई हैं। अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुसार कौन-सी किस्म उपयुक्त होगी, कौन-सी तकनीक अपनाई जानी चाहिए, क्वालिटी सीड किस प्रकार उत्पादन बढ़ा सकते हैं, ये सभी परिणाम अब स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि कुछ क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर धान का उत्पादन 100 कुंतल तक पहुंच गया है, जो पहले 50–60 कुंतल तक सीमित था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अल नीनो के कारण गेहूं और उद्यान फसलों, विशेष रूप से आम पर प्रभाव पड़ा है, लेकिन यह एक सतत चुनौती है। इसके बावजूद, लागत कम करके उत्पादन बढ़ाना, समय पर अच्छे बीज उपलब्ध कराना, केमिकल फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड के उपयोग को कम करते हुए नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देना, इन सभी क्षेत्रों में निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। उत्तर प्रदेश में कृषि के लिए अनुकूल वातावरण मुख्यमंत्री ने बाराबंकी के प्रगतिशील किसान पद्म पुरस्कार से सम्मानित रामशरण वर्मा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि गत वर्ष मुझे उनके खेत पर ‘विकसित कृषि अभियान’ के तहत जाने का अवसर मिला। यदि कोई रामशरण वर्मा से उनकी शैक्षिक योग्यता पूछता है, तो वह स्वयं को “दसवीं फेल” बताते हैं, लेकिन खेती में उनकी दक्षता और वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग अत्यंत प्रेरणादायक है। वह कम लागत में अधिक उत्पादन करने का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भारत … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना विभाग ने शुरू की तैयारी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी की गई है। इसके तहत गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग गन्ने की फसल का जीपीएस सर्वेक्षण कराएगा। यह जीपीएस सर्वेक्षण 1 मई से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगा। इसकी सूचना 3 दिन पहले सभी रजिस्टर्ड गन्ना किसानों को मोबाइल एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी शामिल होंगे। इनको सर्वेक्षण से पहले प्रशिक्षित भी किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान किसान की मौजूदगी जरूरी होगी। टीम किसान के खेत पर पहुंचकर जीपीएस के जरिए उत्पादन का डाटा सीधे विभाग के सर्वर पर फीड करेगी। वहीं सर्वेक्षण के बाद खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म समेत अन्य जानकारी भी किसानों को एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त वीना कुमारी मीना ने बताया कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी कर दी गई है। सर्वेक्षण कार्य 1 मई से प्रारम्भ कर 30 जून तक पूरा किया जाएगा। साथ ही बताया कि किसी भी गन्ना कृषक के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की वेबसाइट www.upbhulekh.gov.in से किया जा सकता है। चीनी मिलें गन्ना सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े सीधे विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन पोर्ट करेंगी और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगी। सर्वेक्षण के दौरान होगा नए किसानों का पंजीकरण विभाग के मुताबिक गन्ना सर्वेक्षण के दौरान नए सदस्यों (किसान) का पंजीकरण भी किया जाएगा। 30 सितम्बर 2026 तक पंजीकृत कृषकों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। उपज बढ़ोत्तरी के लिए गन्ना सर्वेक्षण से लेकर 30 सितम्बर 2026 तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए अनुसूचित जाति व जनजाति के कृषकों, लघु कृषकों और अन्य कृषकों से क्रमशः 10, 100 एवं 200 रुपये प्रति कृषक शुल्क जमा कराया जाएगा।

योगी सरकार में महिलाओं का मजबूत सहारा बनी 181 हेल्पलाइन

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में महिलाओं की सुरक्षा व सशक्तीकरण शीर्ष प्राथमिकता पर है। इसी दिशा में संचालित 181 महिला हेल्पलाइन प्रदेश की महिलाओं के लिए संकट के समय मजबूत सहारा बनकर उभरी है। वर्ष 2025-26 में इस हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण एक बड़ी उपलब्धि है, जो नारी की गरिमा व सुरक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता दर्शाती है। इलाज व राशन दिलाने में भी मदद की हेल्पलाइन ने आंकड़ों पर नजर डाले तो महिला हेल्पलाइन 181 पर 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक 85 हजार से ज्यादा शिकायतें आई। इनमें अधिसंख्य शिकायतें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, साइबर क्राइम, मारपीट से जुड़ी थीं। कुछ ऐसे भी मामले थे, जिनमें महिलाओं ने अस्पताल में इलाज के लिए या जमीन-जायदाद से जुड़े प्रकरणों में मदद मांगी। राशन दिलाने में मदद के लिए भी कई महिलाओं ने हेल्पलाइन से संपर्क किया। ये सभी मामले निस्तारण के लिए सम्बंधित विभागों को ट्रांसफर किए गए। उल्लेखनीय यह है कि हेल्पलाइन इन सभी मामलों का संतुष्टिपरक निस्तारण करने में सफल रही। 24 घंटे सक्रिय रहती है 181 महिला हेल्पलाइन किसी भी प्रकार की समस्या या जानकारी के लिए महिलाएं इस हेल्पलाइन से सीधे संपर्क कर सकती हैं। शिकायत के मामले 2 मिनट के भीतर संबंधित वन स्टॉप सेंटर को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। इसके बाद संबंधित जनपद में स्थापित डैशबोर्ड के माध्यम से तैनात महिला कर्मचारी पीड़िता से संपर्क कर उसकी समस्या को समझती है और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराती है। यह हेल्पलाइन 24×7 सक्रिय रहती है, जहां घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को त्वरित सहायता मिलती है। साथ ही पीड़ित महिलाओं को मनोवैज्ञानिक, कानूनी और सामाजिक सहयोग भी प्रदान किया जाता है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए योगी सरकार प्रतिबद्ध योगी सरकार के कार्यकाल में इस सेवा का दायरा और प्रभाव लगातार बढ़ा है। तेज निस्तारण, संवेदनशील कार्यप्रणाली और तकनीकी सुदृढ़ता के जरिए 181 महिला हेल्पलाइन आज प्रदेश की महिलाओं के सशक्तीकरण की एक मजबूत कड़ी बन चुकी है, जो हर महिला को सुरक्षा और सम्मान का भरोसा दिला रही है। महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 181 महिला हेल्पलाइन इस दिशा में एक सशक्त माध्यम बनकर सामने आई है, जिसके जरिए महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।