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अलीगढ़ की ब्रास आर्ट को अंतरराष्ट्रीय पहचान, GI टैग से बढ़ेगा निर्यात और कारीगरों की आमदनी

अलीगढ़ अलीगढ़ की विश्व प्रसिद्ध धातु मूर्तियों को आधिकारिक तौर पर जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) टैग मिल गया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने चार नए जीआई टैग हासिल कर कुल 83 अंकों के साथ देश में पहला स्थान बरकरार रखा है। इसे अलीगढ़ की पारंपरिक शिल्पकला और स्थानीय कारीगरों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। अलीगढ़ ब्रास स्टेचू एंड आर्टवेयर सप्लायर एसोसिएशन के अध्यक्ष हनुमंत राम गांधी ने बताया कि उनकी एसोसिएशन ने जीआई मैन ऑफ इंडिया के रूप में विख्यात पद्मश्री डॉ. रजनी कांत के साथ मिलकर इस टैग के लिए आवेदन किया था। चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री की विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं, परीक्षणों और प्रस्तुतियों के बाद अलीगढ़ की इस कला को यह विशेष मान्यता प्राप्त हुई है। यहां बनी पीतल और अन्य धातुओं की मूर्तियां अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में बड़े पैमाने पर निर्यात की जाती हैं। वैश्विक बाजारों में भारतीय संस्कृति, देवी-देवताओं और पारंपरिक कलाकृतियों की भारी मांग के कारण इस उद्योग का विदेशी मुद्रा अर्जित करने में बड़ा योगदान है। जीआई टैग मिलने से अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रामाणिकता बढ़ी है, जिससे जालसाजी से सुरक्षा मिलेगी और स्थानीय कारीगरों व निर्यातकों को अपने उत्पादों के बेहतर दाम मिल सकेंगे। संगठन के सचिव कपिल वार्ष्णेय और कोषाध्यक्ष मोहित राठी ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व से जोड़ते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण बताया। देशभर में बना नया कीर्तिमान इस वित्तीय वर्ष में डॉ. रजनी कांत के तकनीकी सहयोग से देश के कई राज्यों में जीआई टैग की क्रांति आई है। लद्दाख में आठ, झारखंड में आठ, मध्य प्रदेश में 22, और बिहार, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, असम को मिलाकर रिकॉर्ड 84 नए जीआई पंजीकृत हुए हैं, जबकि 215 नए आवेदन विभिन्न चरणों में लंबित हैं।  

राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित 1766 करोड़ रु. की 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया सीएम योगी ने

ललितपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ललितपुर को आज एक साथ 1500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की सौगात मिल रही है। कांग्रेस ने पांच दशक और सपा ने चार बार प्रदेश में शासन किया, लेकिन इन दलों ने कुल मिलाकर 1500 करोड़ रुपये भी ललितपुर को नहीं दिए होंगे, क्योंकि उनमें विकास की सोच नहीं थी। सपा के लिए सैफई ही परिवार था और कांग्रेस के लिए दिल्ली का परिवार ही देश था। दोनों इससे बाहर नहीं निकल सकते। लेकिन, हमारे लिए 25 करोड़ जनता ही परिवार है और उसे विकास, सुरक्षा, सम्मान देना हमारा दायित्व है।  मुख्यमंत्री शनिवार को तुवन मंदिर मैदान में राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित 1766 करोड़ रुपये की 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर ललितपुर की विकास यात्रा पर लघु फिल्म भी दिखाई गई। सीएम ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात बुंदेलखंड के सुंदरतम जनपदों में से एक ललितपुर हमारे हृदय में बसता है। सीएम ने कार्यक्रम में उपस्थित जनता का अभिनंदन करते हुए आश्वासन दिया कि डबल इंजन सरकार यहां के विकास के लिए हरसंभव कदम उठाएगी। अब ललितपुर के युवाओं व बेटियों को मिलती है सरकारी नौकरी  सीएम ने कांग्रेस व सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि संकुचित सोच वाली इनकी सरकारों ने हर जनपद में एक-एक माफिया दिया था, जो जनता की गाढ़ी कमाई पर डकैती डालने के साथ अवैध खनन, वनों की अवैध कटान, गोतस्करी करते थे। प्रदेश को बंजर बनाते थे। इन लोगों ने यूपी को बीमारू बनाकर बुंदेलखंड के नौजवानों को पलायन पर मजबूर किया। बहन-बेटियों को कष्ट दिया था, लेकिन आज ललितपुर की बेटियां व नौजवान यूपी पुलिस समेत सरकारी नौकरियों में भर्ती होते हैं।  पिछली सरकारों की उपेक्षा का दंश झेलता था ललितपुर सीएम ने कहा कि पिछली सरकारों की उपेक्षा का दंश झेलने वाला ललितपुर विकास की योजनाओं से कोसों दूर था। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास परियोजनाएं नहीं थीं। पानी होने के बावजूद खेती के लिए सिंचाई, गरीब के लिए आवास की सुविधा नहीं थी। मिट्टी के घड़े में पानी ढोते-ढोते माता-बहनों की जिंदगी व्यतीत हो जाती थी। यहां के संसाधनों व वन संपदा में लूट होती थी और मुट्ठी भर लोग अवैध खनन कर अव्यवस्था पैदा करते थे।  अब नवाचार के लिए जाना जा रहा है ललितपुर सीएम ने कहा कि ललितपुर अब विकास की ऊंचाइयों को प्राप्त कर नवाचार के लिए जाना जा रहा है। प्रदेश की पहली गोशाला देकर ललितपुर ने बताया था कि सरकार भी गोशाला का संचालन कर सकती है। तुवन सरकार की कृपा से तत्कालीन जिला प्रशासन ने पहली गोशाला प्रारंभ की थी। अब वहां से कंपोस्ट का निर्यात अन्य देशों को होने जा रहा है। अब ललितपुर के पास मेडिकल कॉलेज, अटल आवासीय विद्यालय भी है। 1500 एकड़ में यूपी का पहला फार्मा पार्क ललितपुर में बनेगा, इसकी तैयारी हो चुकी है। इससे हजारों नौजवानों को नौकरी मिलेगी।  बुंदेलखंड में बसने जा रहा यूपी का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर  सीएम ने कहा कि अब बहन-बेटियां, माताएं सिर पर घड़ा लेकर नहीं जातीं, क्योंकि बुंदेलखंड में हर घर जल की योजना साकार हो रही है। हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। सीएम ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की चर्चा करते हुए कहा कि हम लोग यूपी का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर बुंदेलखंड में बसाने जा रहे हैं। पहले यहां का युवा पलायन करता था। ठोकर से घड़ा फूट जाता था तो माताएं-बहनें किस्मत पर रोती थीं। आपके पूर्वजों ने बुंदेलखंड को सजाया-संवारा था, लेकिन पिछली सरकारों के निकम्मेपन और माफियावृत्ति के कारण बुंदेलखंड पिछड़ा था। हर जनपद में माफिया नौजवानों की नौकरी पर डकैती डालता था। विकास योजनाओं पर गुंडों को बैठाकर जनता के हक को छीना जाता था, जिससे बुंदेलखंड ठगा महसूस करता था।  नए भारत को ताकत दे रहे पीएम मोदी सीएम ने याद दिलाया कि सरकार ने बुंदेलखंड को भी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के हब के रूप में विकसित करने की बात कही थी। अभी इस कॉरिडोर में यूपी के अंदर ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। ऑपरेशन सिंदूर में जब यह मिसाइल दागी गई तो पाकिस्तान त्राहिमाम करते हुए जान की भीख मांग रहा था। पीएम मोदी नए भारत को ताकत दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश समेत बुंदेलखंड का कायाकल्प हो रहा है। यहां की पहचान अब नौजवानों को नौकरी, बहन-बेटियों की सुरक्षा-समृद्धि से हो रही है। महिला स्वयंसेवी समूह की बहनें बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर के माध्यम से तेजी से कैसे आय बढ़ा सकती हैं, बुंदेलखंड, ललितपुर, झांसी इस मॉडल का प्रतीक बन रहा है। पूरी हो गई दशकों से लंबित अर्जुन सहायक परियोजना  सीएम ने कहा कि समग्र विकास का कोई विकल्प नहीं हो सकता। विकास ही जीवन में परिवर्तन लाएगा। नौजवान, किसान, कारीगर, हस्तशिल्पी, व्यापारी, बेटी-बहन समेत समाज के हर तबके को विकास का वाहक बनाना पड़ेगा, तब किस्मत बदलेगी और समृद्धि आएगी। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने यही कार्य किया। लंबित सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से बढ़ाया गया है। दशकों से लंबित अर्जुन सहायक परियोजना अब पूरी हो गई। रतौली बांध, बावनी बांध, कचनौदा बांध, चिल्ली सिंचाई आदि परियोजनाओं ने बुंदेलखंड के किसानों की किस्मत बदली है। किसानों की आमदनी अब कई गुना हो रही है।  गोरखपुर या उप मुख्यमंत्रियों के जनपदों को नहीं दिया मेडिकल कॉलेज सीएम ने कहा कि हमने गोरखपुर या उप मुख्यमंत्रियों के जनपदों के लिए नहीं, बल्कि ललितपुर के लिए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किया। सीएम युवा के माध्यम से युवा उद्यमी बनाए जा रहे हैं। पूर्वजों ने कहा था कि ललितपुर न छोड़ियो, जब तक मिले उधार। किंतु अब आपको उधार लेने की जरूरत नहीं, क्योंकि सरकार ब्याज-गारंटी मुक्त पैसा दे रही है। अपना व्यवसाय चलाइए और कुछ समय बाद पैसा वापस कर दीजिए। आपका व्यवसाय भी बढ़ेगा और आप उद्यमी भी हो जाएंगे। सीएम ने विधायकों व सांसद की जमकर तारीफ भी की सीएम ने कहा कि अच्छा कार्य तब होता है, जब अच्छी सरकार आती है। अच्छी सरकार तब आती हैं, जब अच्छे विधायक-सांसद चुने जाते हैं। सीएम ने मन्नू कोरी व रामरतन कुशवाहा को ईमानदार, मेहनती तथा जनसेवा के प्रति पूरी तरह समर्पति बताते हुए कहा कि वे दिन-रात काम करते हैं। हमने उनसे … Read more

भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल आकार ले रही है। अचल संपत्तियों के पंजीकरण, स्वामित्व सत्यापन और नामांतरण प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित एवं तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने व्यापक सुधारों का खाका प्रस्तुत किया।   भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस योगी सरकार लगातार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में संपत्ति पंजीकरण और नामांतरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए ऐसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जिनसे फर्जी स्वामित्व, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। प्रस्तुतीकरण में पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन कर नई धाराएं 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे संपत्ति के स्वामित्व और अधिकारों की पूर्व जांच अनिवार्य हो सकेगी।   हर संपत्ति को मिलेगी यूनिक पहचान योगी सरकार का लक्ष्य प्रदेश की सभी ग्रामीण एवं शहरी संपत्तियों के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करना है। इस आईडी को जीआईएस मैपिंग और आधिकारिक स्वामित्व अभिलेखों से जोड़ा जाएगा, जिससे किसी भी संपत्ति की पहचान, स्वामित्व और रिकॉर्ड की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत घरौनी तैयार करने का कार्य पहले से चल रहा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।  पंजीकरण के साथ ही स्वतः होगा नामांतरण प्रदेश सरकार नागरिकों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीकरण पूरा होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। इसके लिए विभिन्न विभागों के अभिलेखों का एकीकरण, एपीआई आधारित डेटा साझाकरण और रियल-टाइम रिकॉर्ड अपडेट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इससे लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और समय तथा संसाधनों की बचत होगी।  भू-आधार से जुड़ेगा हर भूमि पार्सल योगी सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं के अनुरूप भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर भी तेजी से कार्य कर रही है। इसके तहत प्रत्येक भूमि पार्सल को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) यानी ‘भू-आधार’ प्रदान किया जाएगा। यह जियो-रेफरेंस्ड पहचान संख्या भूमि अभिलेखों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और जीआईएस प्रणालियों से जोड़ने में मदद करेगी, जिससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड अधिक सटीक और अद्यतन रहेंगे।  बिजली, पानी और संपत्ति कर रिकॉर्ड होंगे एक जगह   इस प्रस्तावित सुधारों के तहत संपत्ति कर रजिस्टर को स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग, राजस्व विभाग, बिजली, पानी और सीवर विभागों के रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। कॉमन प्रॉपर्टी आईडी आधारित यह व्यवस्था विभिन्न विभागों के बीच डिजिटल डेटा साझा करने में सहायक होगी और कर संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएगी।  ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बल विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों के लागू होने से संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आएगी, नागरिकों को तेज और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। योगी सरकार की यह पहल न केवल डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करेगी, बल्कि ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी नई गति प्रदान करेगी। उत्तर प्रदेश को तकनीक आधारित भूमि और संपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अप्रूवल, रिजेक्शन और कार्ड डिसेबल जैसी प्रक्रियाओं के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे राजधानी के चक्कर

लखनऊ योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों के लिए एक बड़ी राहत भरी व्यवस्था लागू की गई है। अब आयुष्मान कार्ड से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए लाभार्थियों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) के लखनऊ स्थित कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उनकी समस्याओं का निस्तारण अब जिला स्तर पर ही किया जा सकेगा। सभी सीएमओ को उपलब्ध कराई गई तकनीकी आईडी साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रयास है कि आयुष्मान भारत योजना का वास्तविक लाभ तभी पात्र लोगों तक पहुंचे। उन्हें बिना किसी अनावश्यक परेशानी के समय पर सेवाएं उपलब्ध हों। यही वजह है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ), नोडल आयुष्मान अधिकारियों तथा जिला कार्यान्वयन इकाई की टीमों को विशेष तकनीकी आईडी उपलब्ध करा दी गई है। इसके माध्यम से अब जिला स्तरीय अधिकारी आयुष्मान कार्ड के अप्रूवल, रिजेक्शन और कार्ड को डिसेबल करने जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं का स्थानीय स्तर पर ही त्वरित समाधान कर सकेंगे। इस व्यवस्था से लाभार्थियों का समय और धन दोनों बचेगा तथा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेजी से उपलब्ध होंगी। राष्ट्रीय औसत से कम है यूपी का दावा निस्तारण एवं भुगतान का टाइम वहीं साचीज ने गुणवत्तापूर्ण उपचार और अस्पतालों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं। एजेंसी का उद्देश्य एक ओर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है तो दूसरी ओर ईमानदारी से कार्य करने वाले अस्पतालों को समय पर भुगतान देकर उन्हें प्रोत्साहित करना भी है। दावों (क्लेम) के निस्तारण और भुगतान प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में भुगतान लंबित होने को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है और लगभग 500 करोड़ रुपये की देयता ही लंबित है। उत्तर प्रदेश में दावा निस्तारण एवं भुगतान का औसत टर्न-अराउंड टाइम लगभग 57 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 73 दिन है। यह उपलब्धि प्रदेश में लागू की गई प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीकी सुधारों को दर्शाती है। अनियमितताओं के चलते 200 अस्पतालों पर कार्रवाई साचीज की सीईओ ने बताया कि कई बार अस्पतालों द्वारा आवश्यक दस्तावेज समय पर या पूर्ण रूप से प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण दावे अस्वीकृत हो जाते हैं। इससे अस्पतालों को भुगतान प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को दूर करने के लिए एजेंसी विभिन्न चरणों में ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इन प्रशिक्षणों में अस्पतालों को दावा प्रस्तुत करने की सही प्रक्रिया, आवश्यक अभिलेखों की जानकारी और स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन्स के अनुरूप उपचार एवं दावा प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अस्पताल पहली बार में ही सही और पूर्ण दावा प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे दावों की अस्वीकृति कम होगी और भुगतान प्रक्रिया और अधिक तेज एवं पारदर्शी बनेगी। इससे मरीजों और अस्पतालों दोनों को लाभ मिलेगा। दूसरी ओर केवल गुणवत्तापूर्ण और लाभार्थी हितैषी अस्पतालों को बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी भी की जा रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में गुणवत्ता मानकों का पालन न करने तथा विभिन्न अनियमितताओं के कारण लगभग 200 अस्पतालों को योजना से डी-एम्पैनल किया गया है। यह कार्रवाई स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। 300 अस्पतालों का कराया जा रहा फील्ड ऑडिट करीब 300 अस्पताल ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिनके विरुद्ध अपकोडिंग अथवा संदिग्ध दावों के माध्यम से अनुचित भुगतान प्राप्त करने की आशंका सामने आई है। ऐसे अस्पतालों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उनके विरुद्ध विस्तृत फील्ड ऑडिट कराया जा रहा है। जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इससे योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूती मिलेगी। साचीज का स्पष्ट लक्ष्य है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत केवल वही अस्पताल सक्रिय रहें, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान कर रहे हैं। ऐसे अस्पतालों को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा उनके दावों और भुगतान के निस्तारण को और अधिक व्यवस्थित एवं समयबद्ध बनाया जाएगा।

मोगली गर्ल’ एहसास का निधन, 9 साल बाद थम गया संघर्ष का सफर

बहराइच मोगली गर्ल यानी एहसास। अब दुनिया छोड़ गई। नौ साल पहले बंदरों के झुंड से घिरी एक 10 साल की बच्ची को वनकर्मियों ने बचाया था। बंदरों जैसी आवाज, पैर से खाना खाने की आदत और कपड़े न पहनने की शगल ने ही उसको मोगली गर्ल बनाया था। 15 जून को उसकी मौत की खबर पाकर एक बार फिर वर्ष 2017 की तस्वीर लोगों के सामने आ गई, जब वह देश के नामचीन अखबारों की सुर्खियां ही नहीं बनी थी। कतर्निया सेंचुरी के मोतीपुर रेंज के नैनिहा गांव के पास गश्त के दौरान तत्कालीन उपनिरीक्षक सुरेश कुमार ने एक 10 साल की बच्ची को बंदरों के झुंड के बीच देखा था। वह लड़की नंगी थी, नाखून-बाल बढ़े थे, दोनों हाथ-पैर से चलती थी और बंदरों की तरह चिल्लाती-गुर्राती थी। बंदरों ने उसे बचाने आए ग्रामीणों पर हमला कर दिया था। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उसे झुंड से निकाला। सामान्य जीवन जीने की कला सीख रही मोगली गर्ल का नौ साल बाद जिंदगी का सफर 15 जून को खत्म हो गया। वर्ष 2017 में जंगल से निकली बच्ची मोगली गर्ल शरीर पर खरोंचों के निशान थे।मिहीपुरवा सीएचसी से रेफर कर उसे बहराइच जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। आम लोगों की भाषा नहीं समझती थी मोगली गर्ल तत्कालीन सीएमएस रहे डॉ डीके सिंह ने बताया कि वह न भाषा समझती थी, न थाली में खाना खाती थी, बल्कि जमीन पर फैलाकर बंदरों की तरह उठाकर खाती थी। लिहाजा उसे मोगली गर्ल का नाम मिला था। इलाज करने वाले नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ एसके वर्मा बताते हैं कि पहली बार ऐसा मामला उनके सामने आया था। सारे अंग विकसित थे, लेकिन उसके हाव-भाव पूरी तरह से बंदरों जैसे थे। हालाकि यहां से जाने के बाद उसके भाषा, व्यवहार और शिक्षा पर काम हुआ। धीरे-धीरे उसने बोलना सीखा, कपड़े पहनना सीखा और सामान्य जीवन जीने लगी। लेकिन जब उन्हें भी यह जानकारी मिली कि उस बालिका की मौत हो गई तो वे भी हैरान रह गए। सांस की बीमारी से जूझ रही थी जंगल में मिली लड़की वैसे डॉ अनूप कुमार बताते हैं कि जंगल में वर्षों रहने का असर उसके फेफड़ों पर पड़ा था। जैसा की जानकारी सामने आई है कि लंबे समय से वह सांस की बीमारी से जूझ रही थी। दो दिन पहले लखनऊ में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। जिस बच्ची को वनकर्मियों ने मौत के मुंह से निकाला था, वह समाज की मुख्यधारा से जुड़ते-जुड़ते दुनिया छोड़ गई। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ संजय खत्री कहते है कि ऐसी घटनाएं हमेशा समाज में एक नई सीख देती है। एहसास की कहानी मानवता और प्रकृति के रिश्ते का सबसे अनोखा उदाहरण मानी जाएगी।

हाथरस दौरे से पहले सलेमपुर में जनसभा स्थल का निरीक्षण, सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर फोकस

हाथरस  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 23 जून को हाथरस आ रहे हैं। वह हाथरस में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री के आगमन की खबर पाकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। उनकी जनसभा कराने के लिए प्रशासन ने सभास्थल के लिए जगह चिन्हित कर ली है। मुख्यमंत्री के हाथरस आने की पुष्टि डीएम अतुल वत्स ने की है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री 23 जून को हाथरस में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। उनका विस्तृत कार्यक्रम एक-दो दिन में प्रशासन को मिलने की उम्मीद है। जनसभा के लिए स्थान तलाश रहा प्रशासन डीएम ने बताया कि जनसभा के लिए संभावित जनसभा स्थल की तलाश प्रशासन कर रहा है। सलेमपुर के पास जनसभा कराने को लेकर प्रशासन विचार कर रहा है। मुख्यमंत्री के आने की खबर से पुलिस और प्रशासन में खलबली मची है। मुख्यमंत्री अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था को लेकर बैठक भी ले सकते हैं। प्रशासन ने मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर विकास कार्यों की बुकलेट बनाना भी शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री का अभी तक कार्यक्रम जनसभा का है। प्रशासन को उनके विस्तृत कार्यक्रम का इंतजार है। डीएम ने दिए जरूरी निर्देश शुक्रवार को जिलाधिकारी अतुल वत्स और पुलिस अधीक्षक (एसपी) चिरंजीवनाथ सिन्हा ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर जनसभा के प्रस्तावित स्थल सलेमपुर औद्योगिक क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी अतुल वत्स ने कार्यक्रम स्थल पर मंच निर्माण, हेलीपैड, वीआईपी मूवमेंट और आम जनता के बैठने की व्यवस्था को लेकर मातहतों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। कड़े सुरक्षा घेरे की रूपरेखा की तैयार एसपी चिरंजीवनाथ सिन्हा ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए कार्यक्रम स्थल और उसके आसपास के इलाकों में कड़े सुरक्षा घेरे की रूपरेखा तैयार की। मुख्यमंत्री के दौरे को ऐतिहासिक बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी पूरी ताकत से जुट गए हैं।  

अयोध्या राम मंदिर फंड गड़बड़ी की जांच में 9 पेनड्राइव में सबूत सुरक्षित, कई नए नाम आए सामने

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों की जांच जारी है। शुक्रवार को जांच का पांच दिन था। एसआईटी के अधिकारियों ने प्रारम्भिक रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि शनिवार की शाम तक एसआईटी प्रारंभित रिपोर्ट सीएम योगी को सौंप सकती है। इसके लिए शुक्रवार को भी देर रात तक अफसर लिखा-पढ़ी में व्यस्त रहे। बताया जा रहा है कि एसआईटी ने 9 पेनड्राइव में जरूरी दस्तावेजों और साक्ष्यों को संकलित कर सुरक्षित किया है। फिलहाल पांचवें दिन से अधिकारियों ने जांच में पूरी सख्ती बरती है और लगातार लोगों से पूछताछ की है। इस पूछताछ में कई नये नाम भी शामिल हुए हैं जिसमें श्रद्धालुओं के द्वारा भगवान को अर्पित किए गए आभूषणों के इधर-उधर गायब हो जाने के आरोपों से सम्बन्धित लोग प्रमुख रुप से सम्मिलित किए गए हैं। नौ संदिग्धों में दो की खास भूमिका राम मंदिर में चढ़ावे की धांधली के प्रकरण की छानबीन के लिए यहां पहुंची एसआईटी पांच दिन तक आठ से दस घंटे तक के कठिन परिश्रम के बाद भी इस सवाल का जवाब नहीं खोज पाई कि राम मंदिर में होने वाली घटनाओं को लेकर ट्रस्टियों की चुप्पी क्यों नहीं टूटी। एसआईटी के अधिकारियों ने इस प्रश्न का जवाब जानने के लिए मौखिक पूछताछ के साथ लिखित रूप से भी सवाल जवाब किए फिर भी इसका संतोषजनक जवाब ट्रस्टियों ने नहीं दिया। फिलहाल एसआईटी के सदस्यों की ओर से पड़ताल जारी है। पड़ताल की कड़ी में सभी से अलग-अलग व सामूहिक पूछताछ के साथ ग्रीन हाउस के अलग-अलग कक्ष में अलग-अलग अधिकारियों द्वारा पूछताछ की जा रही है। गणना कार्य में लगे नौ संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ में दो व्यक्तियों जिनमें एक गणना प्रभारी भी है, का नाम बार-बार समान रूप से आया है। बैंक कर्मियों को जांच से मुक्त रखने वालों की सामने आई भूमिका सूत्र बताते हैं कि इन्हीं लोगों की सीसीटीवी कैमरे की निगरानी को पुलिस कंट्रोल रूम से अलग करने में भी भूमिका रही है। इसके अलावा गणना स्थल में आवागमन के दौरान बैंक कर्मियों को जांच से मुक्त रखने में इन्हीं लोगों की भूमिका सामने आई है। इसके कारण एस आईटी का शिकंजा गणना प्रभारी पर कसता जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि गणना स्थल में नियुक्त गणना कर्मियों की भर्ती में भी गणना प्रभारी की ओर से संस्तुति की जाती रही। बताया जाता है कि संगठन के कार्यकर्ता के रूप में इन गणना कर्मियों को नियुक्त कराया गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय के करीबी व राम मंदिर के सेवादार रामशंकर यादव टिन्नू से लेकर गणना कर्मियों द्वारा इस बात की पुष्टि के बाद जांच अधिकारी बहुत सतर्कता के साथ छानबीन कर रहे कि संगठित अपराध की कोई सुनियोजित योजना तो नहीं थी अथवा अवसर पाकर षड्यंत्र को अंजाम दिया गया। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों की जांच जारी है। शुक्रवार को जांच का पांच दिन था। एसआईटी के अधिकारियों ने प्रारम्भिक रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि शनिवार की शाम तक एसआईटी प्रारंभित रिपोर्ट सीएम योगी को सौंप सकती है। इसके लिए शुक्रवार को भी देर रात तक अफसर लिखा-पढ़ी में व्यस्त रहे। बताया जा रहा है कि एसआईटी ने 9 पेनड्राइव में जरूरी दस्तावेजों और साक्ष्यों को संकलित कर सुरक्षित किया है। फिलहाल पांचवें दिन से अधिकारियों ने जांच में पूरी सख्ती बरती है और लगातार लोगों से पूछताछ की है। इस पूछताछ में कई नये नाम भी शामिल हुए हैं जिसमें श्रद्धालुओं के द्वारा भगवान को अर्पित किए गए आभूषणों के इधर-उधर गायब हो जाने के आरोपों से सम्बन्धित लोग प्रमुख रुप से सम्मिलित किए गए हैं। नौ संदिग्धों में दो की खास भूमिका राम मंदिर में चढ़ावे की धांधली के प्रकरण की छानबीन के लिए यहां पहुंची एसआईटी पांच दिन तक आठ से दस घंटे तक के कठिन परिश्रम के बाद भी इस सवाल का जवाब नहीं खोज पाई कि राम मंदिर में होने वाली घटनाओं को लेकर ट्रस्टियों की चुप्पी क्यों नहीं टूटी। एसआईटी के अधिकारियों ने इस प्रश्न का जवाब जानने के लिए मौखिक पूछताछ के साथ लिखित रूप से भी सवाल जवाब किए फिर भी इसका संतोषजनक जवाब ट्रस्टियों ने नहीं दिया। फिलहाल एसआईटी के सदस्यों की ओर से पड़ताल जारी है। पड़ताल की कड़ी में सभी से अलग-अलग व सामूहिक पूछताछ के साथ ग्रीन हाउस के अलग-अलग कक्ष में अलग-अलग अधिकारियों द्वारा पूछताछ की जा रही है। गणना कार्य में लगे नौ संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ में दो व्यक्तियों जिनमें एक गणना प्रभारी भी है, का नाम बार-बार समान रूप से आया है। बैंक कर्मियों को जांच से मुक्त रखने वालों की सामने आई भूमिका सूत्र बताते हैं कि इन्हीं लोगों की सीसीटीवी कैमरे की निगरानी को पुलिस कंट्रोल रूम से अलग करने में भी भूमिका रही है। इसके अलावा गणना स्थल में आवागमन के दौरान बैंक कर्मियों को जांच से मुक्त रखने में इन्हीं लोगों की भूमिका सामने आई है। इसके कारण एस आईटी का शिकंजा गणना प्रभारी पर कसता जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि गणना स्थल में नियुक्त गणना कर्मियों की भर्ती में भी गणना प्रभारी की ओर से संस्तुति की जाती रही। बताया जाता है कि संगठन के कार्यकर्ता के रूप में इन गणना कर्मियों को नियुक्त कराया गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय के करीबी व राम मंदिर के सेवादार रामशंकर यादव टिन्नू से लेकर गणना कर्मियों द्वारा इस बात की पुष्टि के बाद जांच अधिकारी बहुत सतर्कता के साथ छानबीन कर रहे कि संगठित अपराध की कोई सुनियोजित योजना तो नहीं थी अथवा अवसर पाकर षड्यंत्र को अंजाम दिया गया।

बेसिक स्कूल रसोइयों के लिए बड़ा फैसला, सेवा शर्तों और छुट्टियों का मिलेगा लाभ

लखनऊ बेसिक स्‍कूलों में मध्याह्न भोजन (MDM) बनाने वाले रसोइयों की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल हो सकती है। हाल ही में कई स्तर पर हुई बैठकों के बाद मध्याह्न भोजन प्राधिकारण इनकी सेवा नियमावली बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। नियमावली बनने के बाद अन्य संविदाकर्मियों की तरह छुट्टियों और नियुक्ति प्रक्रिया सहित कई सेवा शर्तें इन पर भी भी लागू होंगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2004 में कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में बच्चों को पका हुआ भोजन दिए जाने की योजना लागू की गई थी। उसके बाद 2007 में पिछड़े ब्लॉक के अपर प्राइमरी स्कूलों में और 2008 में सभी अपर प्राइमरी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की योजना लागू कर दी गई। वर्तमान में 1.41 लाख स्कूलों के 1.52 करोड़ बच्चों को पका हुआ भोजन दिया जा रहा है। इसके लिए 3.63 लाख रसोइये स्कूलों में कार्यरत हैं। ऐसे बनी सहमति रसोइयों को 2000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाता है, लेकिन इनकी अब तक सेवा शर्तें नहीं बनीं। ग्राम समिति इनका चयन करती हैं। कुछ रसोइये 70-75 साल की उम्र में भी कार्यरत हैं। वहीं, ग्राम समिति चाहती है तो किसी को कभी भी हटा देती है। इनकी सेवानिवृत्ति की कोई आयु सरकार ने तय नहीं की है। वहीं, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को 11 महीने का मानदेय मिलता है, लेकिन रसोइयों को 10 माह का ही मानदेय मिलता है। अब इनकी सेवा शर्ते बनाने की तैयारी की जा रही है। रसोइयों के प्रदर्शन के बाद अफसरों संग हुई बैठक हाल ही में रसाइयों के प्रदर्शन के बाद अधिकारियों के साथ उनकी बैठकें हुईं। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, शिक्षा विभाग और शासन स्तर के अधिकारियों ने भी मंथन किया। उसके बाद प्राधिकरण को इस बाबत प्रस्ताव करने के लिए कहा गया है। इनकी रिटायरमेंट उम्र 62 साल की जा सकती है। सेवा शर्तों से क्या अंतर आएगा? सेवा शर्तें बन जाने से इनकी रिटायरमेंट उम्र तय हो जाएगी। इससे ग्राम समितियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। अभी इनको किसी तरह की कोई छुट्टी का प्रावधान नहीं है। यहां तक कि मातृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर लीव का भी प्रावधान नहीं है। सेवा शर्तें बन जाने से रसोइयों को ये लाभ भी मिल सकेंगे। अन्य संविदा कर्मियों की तरह इनके 11 माह के मानदेय पर भी विचार किया जा रहा है।  

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बनेगा नया रिकॉर्ड! 1.42 करोड़ छात्र-छात्राओं के साथ योग करेगा उत्तर प्रदेश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर एक नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है। प्रदेश के 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों के लगभग 1.42 करोड़ छात्र-छात्राओं तथा 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत 78 हजार से अधिक छात्राओं को योग से जोड़ने की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को प्रदेशभर के विद्यालयों में सामूहिक योगाभ्यास होगा, जिसमें विद्यार्थी, शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और अभिभावक सहभागिता करेंगे। कार्यक्रमों के प्रभावी अनुश्रवण और समन्वय के लिए शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। योग को जन आंदोलन और स्वस्थ जीवनशैली का आधार बनाने की दिशा में योगी सरकार की सतत पहल का प्रभाव इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भी दिखाई देगा, जहां गांव से लेकर शहर तक विद्यालय परिसर योगमय वातावरण के साक्षी बनेंगे।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बेसिक शिक्षा विभाग ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आयुष मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में प्रदेश के सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों तथा खंड शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग का प्रयास है कि योग दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन न रहकर विद्यार्थियों के जीवन में स्वस्थ आदतों और सकारात्मक जीवनशैली का स्थायी संदेश बन सके। विद्यालयों में सामूहिक योगाभ्यास, प्राणायाम और योग का होगा आयोजन बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 21 जून को विद्यालयों में सामूहिक योगाभ्यास, प्राणायाम और योग के महत्व पर आधारित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विद्यार्थियों को योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों से परिचित कराया जाएगा। साथ ही अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि योग का संदेश समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंच सके। नई पीढ़ी को स्वस्थ, जागरूक और आत्मविश्वासी बनाने के संकल्प को नई ऊर्जा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्षों में योग को विद्यालयी जीवन और जनस्वास्थ्य से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। विद्यालयों में नियमित योग गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ विद्यार्थियों में स्वास्थ्य, अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मक सोच विकसित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। 21 जून को होने वाला यह व्यापक आयोजन न केवल योग की वैश्विक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को स्वस्थ, जागरूक और आत्मविश्वासी बनाने के संकल्प को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

सीएम योगी ने किया मां बगुलामुखी का दर्शन-पूजन, मुख्यमंत्री ने तुवन मंदिर में भी माथा टेका

दतिया/ललितपुर बुंदेलखंड को विकास परियोजनाओं की सौगात देने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को मध्य प्रदेश के दतिया में मां बगुलामुखी का दर्शन-पूजन भी किया। दतिया हवाई पट्टी पर मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सीएम योगी का स्वागत किया। मुख्यमंत्री यहां से पीतांबरा पीठ पहुंचे।  पीतांबरा पीठ में मुख्यमंत्री ने मां बगुलामुखी के दर्शन किए और विधिवत पूजा अर्चना की। उन्होंने परिसर में स्थित वनखण्डेश्वर महादेव मंदिर में मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक भी किया। इसके बाद मुख्यमंत्री लोकार्पण/शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए ललितपुर रवाना हो गए। ललितपुर पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने तुवन मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान मंदिर के पुजारी व महंत आदि उपस्थित रहे।