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तकनीक, परामर्श व बाजार तक सीधी पहुंच हुई सुनिश्चित, गांव-गांव मजबूत हो रहा कृषि इकोसिस्टम

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढ़े आठ वर्षों में कृषि क्षेत्र में बुनियादी बदलाव आया है। प्रदेश सरकार ने खेती को उन्नत बनाने के साथ ही ज्ञान, तकनीक, परामर्श व मार्केट एक्सेस से जोड़कर गांव-गांव तक इसका लाभ पहुंचाया है। फसल प्रबंधन, बीज चयन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती, ड्रोन स्प्रे और आधुनिक सिंचाई जैसे क्षेत्रों में डिजिटल व वैज्ञानिक नवाचारों ने खेती को न केवल सुरक्षित बनाया बल्कि किसानों की लागत घटाकर उत्पादन व आय को भी बढ़ाया है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के इस उत्तम मॉडल को विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा भी सराह चुके हैं। उन्होंने प्रदेश के योगी आदित्यनाथ की सरकार की इस कृषि-परिवर्तन यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने कृषि को आधुनिकता से जोड़ते हुए विश्व स्तर का मॉडल प्रस्तुत किया है। तकनीक, नवाचार व फसलों तक सरकार की पहुंच प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने किसानों को वैज्ञानिक व स्मार्ट खेती की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए व्यापक प्रशिक्षण अभियान चलाया है, जिसमें युवा किसान और महिला किसान उत्पादक समूह विशेष रूप से शामिल रहे। हर गांव में कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय विशेषज्ञों के साथ परामर्श प्रणाली स्थापित की गई, जिससे फसलों की बीमारी, पानी, उर्वरक व बाजार से जुड़े प्रश्नों का समाधान इम्पैक्ट आधारित तरीके से सीधे खेत पर ही उपलब्ध हो रहा है। ड्रोन-स्प्रे, स्वचालित सिंचाई प्रणाली, मिट्टी के पोषक तत्वों की डिजिटल निगरानी तथा खेतों की डिजिटल सर्वेक्षण प्रणाली ने कृषि सेक्टर को आधुनिक उद्योग जैसी दक्षता प्रदान की है। फसल बीमा के दावों का त्वरित निपटारा, ऑनलाइन मंडियों और ई-नाम जैसी पहल ने किसानों को सही दाम और व्यापक बाजार उपलब्ध कराया है। रिकॉर्ड भुगतान, एथेनॉल क्रांति का आधार बनी मजबूत कृषि अवसंरचना गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान, नई चीनी मिलों की स्थापना, क्षमता बढ़ोतरी और एथेनॉल उत्पादन में यूपी का देश में शीर्ष स्थान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की किसान-केंद्रित सोच को दर्शाता है। सिंचाई परियोजनाओं, “हर खेत तक पानी” मिशन, बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक और हर घर नल से जल जैसे अभियानों ने खरीफ और रबी दोनों सीजनों में फसलों की सिंचाई व पेयजल आपूर्ति को मजबूती दी है। इसी कड़ी में ग्रामीण सड़कों, स्टोरेज, मंडियों व कोल्ड चेन नेटवर्क के विस्तार ने कृषि को उद्योग की शक्ति प्रदान की है। वहीं एफपीओ, एग्री-ड्रोन ऑपरेटरों और जैविक खेती को प्रोत्साहन देकर किसानों को “उत्पादक से उद्यमी” बनाने की दिशा में भी सरकार ने निर्णायक कदम उठाए हैं जो धरातल पर अपना असर दिखा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में विश्व बैंक और प्रदेश सरकार ने मिलकर ‘यूपी एग्रीज’ परियोजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य राज्य में कृषि प्रणाली को तकनीकी और वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है। इस परियोजना से लगभग 10 लाख छोटे और सीमांत किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। विश्व बैंक के अजय बंगा, अध्यक्ष ने बताया उत्तर प्रदेश का कृषि मॉडल छोटे किसानों समेत सभी के लिए बहुत अच्छा है। यह केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है जिसे मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है।  

राज्य में 21000 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप इनमे से लगभग 22-25% ग्रामीण या छोटे कस्बों से

75 जिलों में ओडीओपी और स्टार्टअप मॉडल ने लोकल प्रोडक्ट्स को बाजार, ब्रांडिंग और डिजिटल पहुंच दिया लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढे आठ सालों में प्रदेश सरकार ने ग्रामीण नवाचार को प्रोत्साहित करने को लेकर कई विशेष कदम उठाए हैं। जिनका सकारात्मक प्रभाव अब धरातल पर दिखने लगा है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 21,000 स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिनमें से 22 से 25 प्रतिशत स्टार्टअप ग्रामीण और छोटे कस्बों से उभर रहे हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि अब ग्रामीण युवा भी तकनीक आधारित रोजगार के नए अवसर को प्राप्त कर रहे हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण समाज में उद्यमशीलता की नई भावना पैदा कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप क्रांति अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही रही। अब यह छोटे गांवों और कस्बों में भी इनका प्रभाव देखने को मिल रहा है।  प्रदेश सरकार की ओर से जिस प्रकार से कदम उठाए जा रहे हैं, उससे यह स्पष्ट हो चुका है कि वर्ष 2047 तक विकसित उत्तर प्रदेश का स्वप्न ग्रामीण नवाचार और उद्यमिता से ही साकार होगा। गांवों से निकलते ये स्टार्टअप न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को दिशा दे रहे हैं बल्कि एक नए आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत का आधार भी तैयार कर रहे हैं। सीड फंडिंग और मेंटरशिप से मिली नई दिशा… ग्रामीण उद्यमिता को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने सीड फंडिंग, मेंटरशिप, इन्क्यूबेशन और मार्केट लिंकेज जैसे सभी महत्वपूर्ण तत्वों को एक साथ जोड़कर एक प्रभावी प्रणाली तैयार की है। इससे युवा केवल स्टार्टअप की शुरुआत ही नहीं कर रहे बल्कि उसे टिकाऊ और बाज़ार योग्य बनाने में भी सफल हो रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न इन्क्यूबेशन सेंटरों में ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों और ग्रामीण उत्पादकों के लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित हो रहे हैं, जिनमें स्मार्ट खेती, डिजिटल मार्केटिंग और उत्पाद गुणवत्ता सुधार जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण नवाचार को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जाए जिससे गांवों में आर्थिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव रखी जा सके। ओडीओपी प्लस स्टार्टअप मॉडल ने बढ़ाया ग्रामीण उत्पादों का मूल्य… प्रदेश के 75 जिलों में लागू किया गया ओडीओपी प्लस स्टार्टअप मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई पहचान दे रहा है। यह मॉडल स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार, ब्रांडिंग और डिजिटल पहुंच प्रदान कर रहा है। पहले जहां छोटे गांवों के उत्पाद सीमित बाजारों तक ही पहुंच पाते थे वहीं अब ईकॉमर्स और लॉजिस्टिक्स आधारित समाधान ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा दिया है। इससे न केवल बिक्री बढ़ी है बल्कि ग्रामीण उत्पादों की पहचान और मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह मॉडल राज्य में आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरा है। एग्रो टेक और ग्रामीण ई-कॉमर्स में युवाओं की बढ़ती भूमिका… उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में एफपीओ, फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, मिट्टी के स्वास्थ्य और डिजिटल खेती जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में तकनीक आधारित स्टार्टअप तेजी से बढ़ रहे हैं। ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स एड टेक और एग्रो टेक जैसे सेक्टर ग्रामीण युवाओं को नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। खासतौर पर कृषि आधारित स्टार्टअप ने किसानों को सीधे बाजार से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने में मददगार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि उत्तर प्रदेश का विकास तभी संभव है जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को अपने गांव में ही रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिलेंगे। ग्रामीण स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के साधन विकसित होने से ग्रामीण स्तर पर पलायन भी कम हुआ है।

आर्थिक और सामाजिक रुप से कमजोर प्रतिभाशाली युवाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग बनी मददगार

योगी आदित्यनाथ सरकार की नि:शुल्क आवासीय और मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग बनी मॉडल   प्रदेश के युवाओं को मिल रहा है रोजगार, पीसीएस मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए आवेदन का आज आखिरी दिन लखनऊ योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश में युवा सशक्तिकरण के लिए 8 नि:शुल्क आवासीय और 150 मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग चला रही है। इसके माध्यम से युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और रोजगार मिलने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर विशेष फोकस है। वो चाहते हैं कि प्रतिभाशाली युवाओं को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में किसी भी बाधा का सामना न करना पड़े।  छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए किया जाता है तैयार उत्तर प्रदेश में समाज कल्याण विभाग प्रतियोगी छात्रों के लिए दो तरह की कोचिंग चलाता है। रेजिडेंशियल कोचिंग में पढ़ाई के साथ साथ रहने की भी सुविधा होती है और मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग में केवल क्लास चलती है। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का दायरा काफी विस्तृत है। यहां से मिलने वाली कोचिंग सिर्फ यूपीपीसीएस तक सीमित नहीं है, बल्कि यूपीएससी, अधीनस्थ सेवाएं, विभिन्न भर्ती बोर्ड, बैंकिंग, एसएससी, अर्धसैनिक बल, जेईई, नीट, एनडीए, सीडीएस, बीएड, टीईटी जैसी लगभग हर प्रमुख परीक्षा इसमें शामिल है।  150 सेंटर में 23000 से ज्यादा छात्रों का रजिस्ट्रेशन उत्तर प्रदेश के 150 अभ्युदय कोचिंग सेंटर में इस साल अब तक 23801 अभ्यर्थी रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। सिविल सर्विसेस के लिए 8663, NEET के लिए 5574, JEE के लिए 2018, एनडीए/सीडीएस के लिए 801 और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 6745 छात्र अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इसमें छात्रों को पाठ्यक्रम और क्वेश्चन बैंक भी दिए जाते हैं, ताकि उनकी तैयारी पूरी तरह परीक्षा-केन्द्रित और व्यवस्थित हो।  पीसीएस मुख्य परीक्षा के लिए नि:शुल्क कोचिंग समाज कल्याण विभाग ने लखनऊ के गोमतीनगर में छत्रपति शाहू जी महाराज शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान में पीसीएस मुख्य परीक्षा की तैयारी हेतु मुफ्त आवासीय कोचिंग की व्यवस्था की है। अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के पुरुष उम्मीदवार, जिनकी पारिवारिक आय छह लाख रुपये तक है वो आज 12 दिसंबर तक आवेदन कर सकते हैं। अब तक अनुसूचित जाति के 19, अनुसूचित जनजाति के 2 और अन्य पिछड़ा वर्ग के 25 प्रतियोगी छात्रों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। भागीदारी भवन के संयुक्त निदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि कोचिंग सत्र के दौरान अभ्यर्थियों को हॉस्टल, भोजन और लाइब्रेरी की सुविधा बिल्कुल मुफ्त मिलेगी। इसके साथ ही हर विषय के विशेषज्ञ नियमित रूप से क्लास लेंगे। मुख्य परीक्षा पर फोकस करते हुए उत्तर लेखन का अभ्यास कराया जाएगा, मॉडल टेस्ट कराए जाएंगे और परीक्षा पैटर्न के मुताबिक खास सत्र भी चलेंगे।  अभ्युदय कोचिंग से प्रदेश के युवाओं का बदला जीवन अभ्युदय कोचिंग करियर को दिशा देने वाला मजबूत मंच बनकर उभर रहा है। इसमें कोचिंग, अध्ययन सामग्री और गाइडेंस सब कुछ नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है ताकि प्रतिभाएं सिर्फ संसाधनों की कमी के कारण पीछे न छूट जाए। यूपीएससी सीएसई 2023 में 882वीं रैंक हासिल करने वाली श्रुति श्रवण ने बताया कि इस योजना से उनको परीक्षा में सफल होने, खुद को अच्छी तरह से तैयार करने और अपने प्रदर्शन का आकलन करने में काफी मदद मिली।

एयरपोर्ट में नजर आएगा स्विस एफिशिएंसी और भारतीय आतिथ्य का संगम

क्षेत्रीय विरासत के साथ आधुनिक सुविधाओं का होगा मेल पूरी तरह भारतीय पारंपरिक डिजाइन से प्रेरणा लेकर तैयार की गई है एयरपोर्ट की वास्तुकला लखनऊ/ग्रेटर नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) का जल्द ही शुभारंभ होने को है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यात्री यहां उतरते ही भारतीय संस्कृति और उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत का अनुभव कर सकें। स्विस दक्षता और भारतीय मेहमाननवाजी का अद्भुत संयोजन यात्रियों को एक अनूठी, सहज और आरामदायक यात्रा का अनुभव देगा। आधुनिकतम तकनीक और सुविधाओं के साथ यह हवाईअड्डा वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार हो रहा है।  यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के एसीईओ शैलेन्द्र कुमार भाटिया ने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपने अभिनव डिजाइन, अत्याधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक समृद्धि के साथ न केवल यूपी बल्कि भारत की वैश्विक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार है। यह हवाई अड्डा यात्रियों के लिए हर कदम पर आरामदायक, तेज और यादगार अनुभव का वादा करता है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वयं दिन प्रतिदिन इसकी निगरानी कर रहे हैं और हाल ही में उन्होंने यहां का भ्रमण कर प्रगति का जायजा लिया और दिशा निर्देश भी दिए। ‘घाट’ और ‘हवेली’ की झलक देती आकर्षक डिजाइन एयरपोर्ट की वास्तुकला पूरी तरह भारतीय पारंपरिक डिजाइन से प्रेरणा लेकर तैयार की गई है, ताकि यात्री यहां उतरते ही उत्तर भारत की सांस्कृतिक आत्मा को महसूस कर सकें। टर्मिनल बिल्डिंग में लैटिस स्क्रीन जैसे नक्काशीदार डिजाइन लगाए गए हैं, जो न केवल सौंदर्य बढ़ाते हैं, बल्कि प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन के प्रवाह को भी नियंत्रित करते हैं। प्रवेश द्वार पर वाराणसी और हरिद्वार के प्रसिद्ध घाटों की याद दिलाने वाली चौड़ी व आकर्षक सीढ़ियां बनाई गई हैं, जो इस क्षेत्र की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं। टर्मिनल के भीतर एक हवेली शैली का विस्तृत आंगन बनाया जा रहा है, जो यात्रियों को खुला, हवादार और आरामदायक माहौल प्रदान करेगा। यह डिज़ाइन पारंपरिक भारतीय वास्तुकला में आंगन की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है। इसके साथ ही यूपी की प्रमुख नदियों की शांति व प्रवाह को दर्शाने वाली सफेद, तरंगाकार छत पूरे टर्मिनल को आधुनिकता और प्रकृति के संयोजन का प्रतीक बनाती है। इन सभी डिज़ाइन तत्वों का उद्देश्य है एक ऐसा वातावरण तैयार करना जहां यात्री तनावमुक्त, सहज और आत्मीय अनुभव के साथ अपनी यात्रा की शुरुआत कर सकें। एक ऐसा अनुभव जो भारतीय संस्कृति की गर्मजोशी और आधुनिक विश्वस्तरीय सुविधाओं का अनूठा मेल हो। मिलेगा डिजिटल अनुभव, पूरी तरह टेक-सक्षम होगा एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यात्रियों को एक अत्याधुनिक और डिजिटल-फर्स्ट अनुभव प्रदान करने जा रहा है। एयरपोर्ट पर ऐसी आधुनिक तकनीकें लगाई जा रही हैं, जो यात्रा को तेज और सहज बनाएंगी। यात्री स्वयं ही सेल्फ बैग-ड्रॉप मशीनों के माध्यम से अपना सामान जमा कर सकेंगे, जिससे लंबी कतारों में लगने की जरूरत कम होगी। इसी तरह सेल्फ बोर्डिंग गेट्स के जरिए बोर्डिंग प्रक्रिया और अधिक तेज़ और सुविधाजनक होगी। एयरपोर्ट के सभी गेट DigiYatra सुविधा से लैस होंगे, जिसमें बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के माध्यम से यात्रियों को बिना किसी दस्तावेज दिखाए तेजी से प्रवेश और बोर्डिंग की सुविधा मिलेगी। स्मार्ट साइनेज, यूज़र-फ्रेंडली इंटरफेस और डिजिटलीकृत प्रक्रियाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर यात्री को एक तनावमुक्त, सुगम और अत्याधुनिक यात्रा अनुभव मिले। यह एयरपोर्ट भविष्य की यात्रा जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जहां तकनीक यात्रियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। शॉपिंग और डाइनिंग का यादगार अनुभव नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों को शॉपिंग और डाइनिंग का ऐसा अनोखा अनुभव मिलेगा, जो उनकी यात्रा को और भी खास बना देगा। यहां यूपी और भारत के असली स्वादों का आनंद लेने के साथ-साथ स्थानीय और वैश्विक व्यंजनों का बेहतरीन मिश्रण उपलब्ध होगा। पारंपरिक व्यंजनों से लेकर इंटरनेशनल क्यूज़ीन तक, हर स्वाद का ध्यान रखते हुए एक क्यूरेटेड F&B अनुभव तैयार किया जा रहा है, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा होगा। साथ ही, एयरपोर्ट पर शॉपिंग का आनंद भी यात्रियों को रोमांचक सांस्कृतिक यात्रा का एहसास कराएगा, जहां स्थानीय हस्तशिल्प, आर्टवर्क, आधुनिक रिटेल ब्रांड्स और विशेष सॉवेनियर्स का आकर्षक संगम देखने को मिलेगा। यहां का हर अनुभव यात्रियों को सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि उत्तर भारत की समृद्ध संस्कृति से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करेगा। साथ ही शॉपिंग के लिए ड्यूटी-फ्री स्टोर्स, प्रीमियम ब्रांड्स और यूपी के विशेष हस्तशिल्प जैसे बनारसी सिल्क, चिकनकारी और अतर के आकर्षक विकल्प यात्रियों को उपलब्ध होंगे। इस संपूर्ण व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि यात्रियों को यहां सिर्फ एक ट्रांजिट स्पेस नहीं, बल्कि एक यादगार सांस्कृतिक यात्रा का आनंद मिले। ग्रीन एयरपोर्ट का बनेगा सजीव उदाहरण नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक ग्रीन एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया गया है, जहां निर्माण से लेकर संचालन तक हर स्तर पर सतत विकास को प्राथमिकता दी गई है। एयरपोर्ट परिसर में नवीकरणीय ऊर्जा, विशेष रूप से सोलर और ऑफ-ग्रिड विंड सिस्टम का अधिकतम उपयोग किया जाएगा, जिससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। वर्षा जल संचयन प्रणाली और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के साथ-साथ अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर्यावरण संरक्षण को मजबूती प्रदान करेंगे।

घुसपैठ पर बड़ी कार्रवाई: योगी सरकार ने जांच तेज करने को दिए कड़े निर्देश

वाराणसी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को काशी के दौरे पर आ रहे हैं। वे मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। इससे पूर्व बुधवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी तथा नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल की अध्यक्षता में स्मार्ट सिटी सभागार में विभागीय समीक्षा बैठक हुई।  'सही ढंग से कराई जाए जांच' बैठक में महापौर ने सभी जोनल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार शहर में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों की जांच शत-प्रतिशत सही ढंग से कराई जाए और इसकी विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।         होगी सख्त कार्रवाई महापौर ने कहा कि वर्तमान में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों द्वारा फर्जी तरीके से जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इसकी जांच के लिए अपर नगर आयुक्त सविता यादव के नेतृत्व में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति द्वारा दोषी पाए जाने वाले फर्जी प्रमाण-पत्रों को तत्काल निरस्त करने तथा संबंधित के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने के भी आदेश जारी किए गए हैं।  

कौन बनेगा यूपी का नया प्रदेश अध्यक्ष? तारीख तय, इस चेहरे की सबसे ज्यादा चर्चा

लखनऊ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उत्तर प्रदेश इकाई में संगठनात्मक बदलाव की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल आज शाम तक लखनऊ पहुंचेंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेता हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करेंगे। उनकी यह यात्रा प्रदेश में नए संगठनात्मक नेतृत्व के चयन से जोड़कर देखी जा रही है। सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि पार्टी इस बार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के नेता पर भरोसा जता सकती है। इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।  कब होगा ऐलान?  माना जा रहा है कि नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान अगले दो से तीन दिनों के भीतर निर्वाचन प्रक्रिया के तहत हो सकता है। पीयूष गोयल को यूपी चुनाव प्रभारी बनाए जाने के बाद संगठन में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। उनके नेतृत्व में चुनाव प्रबंधन, संगठन विस्तार, उम्मीदवार चयन और जनसंपर्क अभियानों को गति देने की योजना है। भाजपा सूत्रों के अनुसार, गोयल प्रदेश के सभी संगठनात्मक स्तरों पर जाकर तैयारियों का जायजा लेंगे और नए अध्यक्ष के औपचारिक एलान को अंतिम रूप देंगे। BJP की पुरानी राजनीति का हिस्सा है अध्यक्ष बदलना  भाजपा ने हाल ही में प्रांतीय परिषद के सदस्यों की घोषणा की है, जिसे व्यापक संगठनात्मक फेरबदल का संकेत माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि नई टीम के साथ चुनावी तैयारियों को मजबूती मिलेगी और प्रदेश भर में संगठन अधिक सक्रिय होगा। वहीं, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष बदलना भाजपा की पुरानी रणनीति का हिस्सा रहा है, जिससे संगठनात्मक ढांचे में ताजगी बनी रहती है। इस बार भी यह फैसला चुनावी रणनीति को धार देने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि, 'पीयूष गोयल का लखनऊ आना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। नए प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया जा सकता है।  रेस में कौन है सबसे आगे? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का नाम सबसे ज्यादा चर्चाओं में है। लोध समुदाय से ताल्लुक रखने वाले वर्मा को पार्टी का प्रमुख ओबीसी चेहरा माना जाता है। वहीं, स्वतंत्र देव सिंह (जल शक्ति मंत्री), अमरपाल मौर्य (राज्यसभा सांसद) और धर्मपाल सिंह जैसे ओबीसी नेताओं का भी नाम सामने आ रहा है। 

STF की बड़ी कार्रवाई: कफ सिरप रैकेट के दो मास्टरमाइंड भाई लखनऊ में गिरफ्तार

लखनऊ  यूपी एसटीएफ को बड़ी कामयाबी मिली है। एसटीएफ ने कोडीन युक्त सिरप का अवैध भंडारण करने में दो आरोपियों सगे भाई अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा को लखनऊ में गिरफ्तार किया। दोनों सहारनपुर के रहने वाले है। कोडीन युक्त सिरप प्रकरण की जांच में लगी एसटीएफ और एफएसडीए ने अभी तक कई खुलासे किए हैं। वहीं सिरप प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी कई बिन्दुओं पर अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाएगी। एसआईटी जांच में यह भी देखेगी कि पिछले साल जांच के बाद दर्ज एफआईआर में पूर्व सांसद का करीबी बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह, अमित टाटा का नाम विवेचना में सामने आ चुका था, फिर भी इसे दबाए क्यों रखा गया। उसे बचाने में लगे रहे पुलिस कर्मियों की भूमिका का भी पता लगाया जाएगा। इसके साथ ही फर्जी फर्म और फर्जी ई-बिल से कितने करोड़ रुपये की तस्करी की गई, इसके लिए जीएसटी विभाग से पूरा ब्योरा ले लिया गया है। शासन ने इस प्रकरण के तूल पकड़ने पर आईजी एल. कुमार के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। एसआईटी ने अपनी जांच शुरू कर दी है। इसी कड़ी में उसने सबसे पहले अब तक दर्ज एफआईआर का ब्योरा लेने के साथ ही जीएसटी विभाग से उन फर्मों की जानकारी ली है जिनके जरिए वाराणसी से पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश तक सिरप की सप्लाई की गई। बर्खास्त सिपाही के मददगार पुलिसकर्मियों पर भी नजर एसआईटी अपनी जांच में यह भी पता करेगी कि आलोक सिंह, अमित टाटा का नाम गाजियाबाद, सोनभद्र और लखनऊ में दर्ज एफआईआर की विवेचना में नाम सामने आने के बाद उन्हें बचाने की कोशिश किसकी शह पर की जाती रही। इसमें आलोक के मददगार पुलिस कर्मियों के बारे में भी पता लगाया जा रहा है। साथ ही आलोक सिंह द्वारा बनाई गई दो फर्मों मां शारदा व एक अन्य के लेन-देन का भी ब्योरा लिया गया है। इसके अलावा एसआईटी ने एफआईआर से सम्बन्धित जिलों की पुलिस, एसटीएफ की अब तक की कार्रवाई की पूरी जानकारी लेने के साथ ही ईडी से भी सम्पर्क किया है। ईडी भी इस मामले में मनी नांड्रिंग एक्ट के तहत जांच कर रही है। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (सीबीएन) ने भी कफ सिरप प्रकरण में जांच शुरू कर दी है। नारकोटिक्स ब्यूरो के लखनऊ कार्यालय ने कई फार्मा कम्पनियों को आवंटित किए जाने वाले कोडीन का ब्योरा मांगा है। कोडीन युक्त सिरप की तस्करी को लेकर ही इस समय हड़कम्प मचा हुआ है। नारकोटिक्स ब्यूरो के अफसरों के मुताबिक नशीले कफ सिरप की सप्लाई में कई गिरोह लगे हुए है। इनको ये सप्लाई ग्वालियर से की जा रही थी। इस पर ही ब्यूरो की टीम ने ग्वालियर से इन फार्मा कम्पनियों का ब्योरा मंगवाया है। छह महीने प हले नारकोटिक्स कन्ट्रोल ब्यूरो ने अमीनाबाद में छापा मार कर नशे में इस्तेमाल होने वाली लाखों टेबलेट के साथ कोडीन युक्त सिरप की बोतलें बरामद की थी।

लखनऊ में योगी सरकार के तहत स्थापित हुआ सर्वाधिक रूफटॉप सोलर, हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अहम कदम

योगी सरकार के नेतृत्व में लखनऊ में सर्वाधिक रूफटॉप सोलर किया गया स्थापित लखनऊ में 62 हजार से ज्यादा इंस्टॉलेशन लखनऊ के बाद वाराणसी और कानपुर नगर शीर्ष 3 में शामिल 43 दिनों में 50 हजार इंस्टॉलेशन से समृद्ध हो रहा सीएम योगी के हरित यूपी का विजन लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PMSGY) के तहत लखनऊ में अब तक 62,271 रूफटॉप सोलर (RTS) इंस्टॉलेशन पूरे हो चुके हैं। यह राज्य के किसी भी जिले से सबसे अधिक है। लखनऊ की इस अगुवाई ने पूरे उत्तर प्रदेश को 3 लाख से अधिक इंस्टॉलेशन का मुकाम छू लिया है, जो योगी सरकार की कुशल मॉनिटरिंग और जनकेंद्रित नीतियों का जीता-जागता प्रमाण है। राजधानी बनी टॉपर योगी सरकार के निर्देश पर लखनऊ जिला प्रशासन, यूपीनेडा और डिस्कॉम की टीम ने दिन-रात मेहनत कर 62,271 इंस्टॉलेशन पूरे किए। लखनऊ की यह सफलता अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बन रही है और सौर ऊर्जा को घर-घर पहुंचाने में मील का पत्थर साबित हो रही है। अन्य प्रमुख जिलों ने भी दिखाई ताकत लखनऊ के बाद वाराणसी ने 26,208, कानपुर नगर ने 18,562, बरेली ने 12,952 और आगरा ने 11,033 इंस्टॉलेशन कर शानदार प्रदर्शन किया। प्रयागराज (9,719), रायबरेली (8,616), झांसी (7,674), बाराबंकी (6,477) और गोरखपुर (6,262) जैसे जिलों ने भी योगी सरकार की योजना को मजबूती प्रदान की। सभी 75 जिलों में PO नियुक्त कर और 23 जिलों की मासिक दर दोगुनी करने से समावेशी विकास सुनिश्चित हुआ। 43 दिनों में 50,000 इंस्टॉलेशन योगी सरकार के मार्गदर्शन में इंस्टॉलेशन की गति छह गुना बढ़ी है। प्रदेश भर में पहले ढ़ाई लाख इंस्टॉलेशन में 270 दिन लगे जबकि आखिरी 50,000 मात्र 43 दिन में पूरे हुए। यह तेजी लाखों परिवारों को मुफ्त बिजली, कम बिल और अतिरिक्त आय का लाभ दे रही है। उत्तर प्रदेश अब सौर ऊर्जा में टॉप-3 राज्यों में शामिल है। यह सीएम योगी के हरित विकास मॉडल के संकल्प को साकार कर रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर

विकसित उत्तर प्रदेश 2047: उत्तर प्रदेश की स्टार्टअप क्रांति को गति देते सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर लैब सुविधा, मेंटरशिप, टेस्टिंग और नेटवर्किंग से युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीक का अवसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से उस दिशा में अग्रसर है जहां नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीक, विकास के आधार स्तंभ बनेंगे। प्रदेश में 07 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भारत की तकनीकी अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह स्टार्टअप क्रांति को गति देने का काम कर रहे है। सरकार का यह कदम स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बना रहा है। साथ ही उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने की ओर कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विज़न है कि नया उत्तर प्रदेश ज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के आधार पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बने। उत्तर प्रदेश सरकार ने थीम आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति दी है। ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,  ब्लॉकचेन, मेडटेक, टेलीकॉम, ड्रोन, एडिटिव, मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि इन अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवा विश्व स्तरीय स्टार्टअप खड़े कर सकेंगे और प्रदेश को नए रोजगार अवसरों का बड़ा केंद्र बनाएंगे। सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस  में चयनित प्रोडक्ट आधारित स्टार्टअप को जो सुविधाएं प्रदान की जा रही है उनमें उच्च स्तरीय लैब, को-वर्किंग स्पेस, रिसर्च सपोर्ट, प्रोडक्ट टेस्टिंग और विशेषज्ञ मेंटरशिप शामिल हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रतिभाशाली युवा को संसाधनों के अभाव में पीछे हटना पड़े।  सरकार की ओर से इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए वित्तीय सहायता का भी मजबूत ढांचा तैयार किया है। इसमें पूंजीगत और इनके संचालन पर व्यय के लिए  अनुदान उपलब्ध कराया है। सरकार का मॉडल यह है कि पहले पांच वर्षों तक इन्हें सहायता देकर इनकी नींव को सुदृढ़ किया जाए, बाद में यह स्वयं के नवाचार और साझेदारियों के द्वारा भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। आईटी एवं स्टार्टअप सेक्टर के कंसलटेंट सुनील गुप्ता का कहना है कि सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस का प्रभाव केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है,  बल्कि स्वास्थ्य कृषि, शिक्षा और स्वच्छता जैसे सामाजिक क्षेत्रों में भी तकनीक आधारित समाधान इनके द्वारा विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्थापित 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्षेत्रीय विकास को भी गति दे रहे हैं।  जिससे छोटे शहरों के युवाओं को भी विश्व स्तरीय सुविधाएं अपने ही प्रदेश में ही उपलब्ध हो रही है। क्या है सेंटर आफ एक्सीलेंस… सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आधुनिक अर्थव्यवस्था का इंजन कहा जाता है । यह ऐसे विशेषीकृत संस्थान होते हैं जो किसी एक उन्नत तकनीक या क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण, उत्पाद, विकास और उद्योग सहयोग के केंद्र के रूप में काम करते हैं। यहां पर स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को उच्च स्तरीय लैब  सुविधाएं,  प्रोडक्ट परीक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उद्योग जगत से नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।  उत्तर प्रदेश के सात सेंटर ऑफ़ एक्सिलेंस…    – गौतमबुद्ध नगर में सीओई ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी – लखनऊ में मेडटेक सीओई – कानपुर नगर में सीओई टेलिकॉम (5जी/6जी)   – गौतमबुद्ध नगर में सीओई-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इनोवेशन ड्रिवेन एंटरप्रेन्योरशिप (एआईआईडीई) – सहारनपुर में सीओई टेलिकॉम (5जी/6जी)  – कानपुर नगरमें सीओई अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी)/ ड्रोन टेक्नोलॉजी – गाज़ियाबाद में सीओई एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों के साथ बैठक की गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

एमपीएसपी के शताब्दी वर्ष तक हो सौ संस्थाओं का संचालन : योगी आदित्यनाथ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों के साथ बैठक की गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 को लेकर तय किए लक्ष्य, दिए दिशानिर्देश शताब्दी वर्ष में सालभर होगा विविध कार्यक्रमों का आयोजन, अभी से तैयारियों में जुटने के निर्देश गोरखपुर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद (एमपीएसपी) के लिए इसके शताब्दी वर्ष 2032 तक सौ संस्थाओं के संचालन और इनमें एक लाख विद्यार्थियों को शिक्षा और कौशल से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने शताब्दी वर्ष में पूरे एक साल विविध कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए अभी से रूपरेखा बनाकर तैयारियों में जुट जाने के भी निर्देश दिए हैं। बुधवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का 93वां संस्थापक सप्ताह भव्यता से मनाया गया था। दिन में हुए मुख्य महोत्सव के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री ने देर शाम परिषद की सभी संस्थाओं के प्रमुखों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर शताब्दी वर्ष 2032 तक संस्थापक युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत लीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सपनों और इच्छाओं को पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में श्री योगी ने कहा कि सभी संस्थाओं को अभी से शिक्षा परिषद के शताब्दी महोत्सव की तैयारियों में जुटना होगा। शताब्दी वर्ष 10 दिसंबर 2031 से 10 दिसंबर 2032 तक, पूरे एक साल मनाया जाएगा। सालभर में क्या क्या आयोजन होंगे, इसकी रुपरेखा अभी से तैयार करनी शुरू कर दी जाए। शताब्दी महोत्सव का पूरा साल यादगार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष तक शिक्षा, चिकित्सा, योग, सेवा और अन्य प्रकल्पों को मिलाकर परिषद के अंतर्गत सौ संस्थाओं का संचालन करने का लक्ष्य तय कर उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। शताब्दी वर्ष तक सौ बस्तियों को ‘मॉडल बस्ती’ बनाएं संस्थाएं गोरक्षपीठाधीश्वर ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देशित किया कि वे शताब्दी वर्ष तक सौ बस्तियों को ‘मॉडल बस्ती’ बनाने का कार्य करें। इसके लिए बस्तियों को गोद लेकर वहां शिक्षा, चिकित्सा, स्वच्छता, सेवा, जागरूकता, रोजगार एवं स्वरोजगार आदि के कार्य किए जाएं। सभी तक जनकल्याण की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि थारू और वनटांगिया बस्तियों में परिषद की संस्थाएं पहले से कार्य करती रही हैं। इन बस्तियों के उत्थान के मानक संतृप्ति के स्तर पर होने चाहिए। वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जुड़ें, हर संस्था किसी विशिष्टता से जानी जाए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय इस दिशा में काफी बेहतर कर कर सकता है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष तक परिषद की सभी संस्थाओं की पहचान उनकी किसी न किसी विशिष्टता से बने, इसके लिए उन्हें किसी विशिष्ट कार्य से जुड़कर आगे बढ़ना होगा। शताब्दी वर्ष तक हों एक लाख विद्यार्थी, सबके पास हो स्किल गोरक्षपीठाधीश्वर ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के शताब्दी वर्ष तक संस्थाओं में एक लाख विद्यार्थियों के अध्ययनरत होने का भी लक्ष्य दिया। साथ ही कहा कि उस समय तक हर विद्यार्थी को किसी न किसी एक स्किल से जोड़ा जाए। हर संस्था एक-एक विद्यार्थी को अपने स्तर से स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास करे। खुद मानक बनें संस्थाओं के प्रमुख बैठक में श्री योगी ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सभी शिक्षक और कर्मचारी परिश्रम और ईमानदारी के मानक बनें। इसके लिए संस्थाओं के प्रमुखों को खुद मानक बनकर शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए रोल मॉडल बनना होगा। आधुनिकता, प्राचीनता, परंपरा व प्रगति की संस्कृति दिखे परिसर में गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि अनुशासित परिसर संस्कृति शिक्षा परिषद की संस्थाओं की पहचान है। संस्थाओं में आधुनिक युगानुकूल विचारों के साथ पारंपरिक राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मूल्यों का भी संरक्षण होता रहेगा। इन संस्थाओं ने भारत की परंपरा और प्रगति को दर्शाने के साथ लोक कल्याण का भी मॉडल दिया है। उन्होंने कहा कि संस्थाओं के परिसर में आधुनिकता, प्राचीनता, परंपरा व प्रगति की संस्कृति दिखनी चाहिए। संस्थाओं की कार्यपद्धति में आध्यात्मिकता का पुट होना चाहिए। नशा मुक्त परिसर बनाना सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री ने सभी संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देशित किया कि वे अपनी अपनी संस्थाओं के परिसर को हर प्रकार के नशा से मुक्त परिसर बनाना सुनिश्चित करें। नशा चाहे ड्रग का हो या फिर स्मार्टफोन के अत्यधिक प्रभाव का, ये कुप्रवृत्तियां हैं और विद्यार्थियों को इनसे बचाना ही होगा। विकसित भारत के लक्ष्य से खुद को जोड़ें संस्थाएं गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा वे खुद और विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़ें। प्रदेश सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्र और राज्य सरकार के लक्ष्यों के अनुरूप संस्थाएं भी अपने स्तर पर लक्ष्य तय करें जिससे 2047 तक विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि तकनीकी, मेडिकल, पैरामेडिकल, फार्मेसी, कृषि के विद्यार्थियों का ‘विकसित भारत 2047’ में क्या योगदान होगा, इस पर कार्ययोजना बनाकर काम किया जाए। लोक कल्याण और सामाजिक उत्तरदायित्व पर हो फोकस श्री योगी ने कहा कि शिक्षा परिषद की संस्थाओं का फोकस लोक कल्याण पर भी हो। संस्थाओं को अपना सामाजिक उत्तरदायित्व भी निभाना होगा। सांस्कृतिक पुर्नजागरण के साथ देश को विश्वगुरु बनाने में अपना योगदान देना होगा। समाज के एक-एक पैसे का हो सदुपयोग बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सभी संस्थाओं को वित्तीय अनुशासन, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ते रहना है। शताब्दी वर्ष के लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ हमें समाज के एक-एक पैसे का सदुपयोग सुनिश्चित करना होगा। बैठक में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सभी पदाधिकारी, सदस्य और परिषद की सभी संस्थाओं के प्रमुख उपस्थित रहे।