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भाजपा हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने वाली इकलौती पार्टी, सपा के लिए कार्यकर्ता महत्वपूर्ण नहीं- प्रकाश पाल

सपा के पीडीए का मतलब परिवार, धनबली और अपराधी: प्रकाश पाल ​भाजपा के पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बोले- राज्यसभा प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही सपा का असली चेहरा उजागर भाजपा हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने वाली इकलौती पार्टी, सपा के लिए कार्यकर्ता महत्वपूर्ण नहीं- प्रकाश पाल ​लखनऊ  भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार एवं पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा को लेकर सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी लंबे समय से एक बदनाम ब्रांड रही है। ​राज्यसभा प्रत्याशी घोषित होते ही उजागर हुआ चरित्र सपा पर निशाना साधते हुए प्रकाश पाल ने कहा कि समाजवादी पार्टी अपनी पुरानी छवि के डर से अपना नाम खुलकर लेने से बचती है। इसलिए उसने पीडीए का मुखौटा पहन लिया। राज्यसभा प्रत्याशियों की घोषणा होते ही पार्टी का असली चरित्र जनता के सामने आ गया है। उन्होंने कहा, "सपा की प्राथमिकता में केवल परिवार और धनपशु शामिल हैं। यदि वे किसी तीसरे का चयन करते हैं, तो वह कोई अपराधी ही होता है।" सपा के पीडीए की नई परिभाषा प्रकाश पाल ने सपा के पीडीए की परिभाषा बदलते हुए कहा, "इनके पीडीए में पी से परिवार, डी से धनबली और ए से अपराधी है।" सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर प्रहार करते हुए उन्होंने आगे कहा, "आगामी चुनावों तक इनके पीडीए का नया रूप पैसा देने वाले आओ (पी- पैसा, डी- देने वाले, ए- आओ) ही रहने वाला है।" ​ भाजपा ने सभी वर्गों को दी उचित भागीदारी राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा की चयन प्रक्रिया की प्रकाश पाल ने सराहना की। कहा कि भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा में समाज के हर वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के विजन पर चलते हुए सामान्य वर्ग, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और महिलाओं को समान रूप से भागीदारी दी गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी सरकार की समावेशी नीतियां पूरी तरह स्पष्ट और पारदर्शी हैं।

CM योगी आदित्यनाथ आज HCLTech के कार्यक्रम में होंगे शामिल, ‘टेक्नोलॉजी और टैलेंट’ पर रहेगा फोकस

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एचसीएलटेक के कार्यक्रम में आज होंगे शामिल  पावरिंग टेक्नोलॉजी, टैलेंट एंड ट्रांसफॉर्मेशन इन उत्तर प्रदेश थीम पर आयोजित होगा कार्यक्रम लखनऊ में एचसीएलटेक के 10 साल पूरे होने पर हो रहा समारोह   यूपी में टेक्नोलॉजी, टैलेंट और ट्रांसफॉर्मेशन पर होगा मंथन लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज मंगलवार (06 अक्टूबर) को एचसीएलटेक के लखनऊ में संचालन के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एचसीएल आईटी सिटी में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की थीम पावरिंग टेक्नोलॉजी, टैलेंट एंड ट्रांसफॉर्मेशन इन उत्तर प्रदेश रखी गई है।  सीएम योगी की मौजूदगी में एचसीएलटेक के सफर के साथ उत्तर प्रदेश में आईटी और टेक्नोलॉजी क्षेत्र के विस्तार, रोजगार सृजन और भविष्य में निवेश की योजनाओं पर चर्चा होगी। इस दौरान एचसीएलटेक की अध्यक्ष रोशनी नादर मल्होत्रा और सीओओ राहुल सिंह कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। एचसीएलटेक और एचसीएल फाउंडेशन ने तकनीकी क्षेत्र के साथ सामाजिक सरोकारों में भी भागीदारी की है। फाउंडेशन की पहल के जरिए प्रदेश के 20 जिलों के करीब 3,000 गांवों में आजीविका, कृषि, कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और समावेशन से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए गए हैं।

‘मछली’ की कहानी के बाद यूपी के जंगलों की बारी, नल्ला मुथु बनाएंगे वन्यजीवन पर खास डॉक्यूमेंट्री

लखनऊ  रणथंभौर की बाघिन ‘मछली’ की जिंदगी को नौ साल कैमरे में कैद कर दुनिया को उसकी कहानी दिखाने वाले मशहूर वन्यजीव फिल्मकार सुब्बैया नल्ला मुथु अब प्रदेश के जंगलों की अनकही कहानियां दुनिया तक पहुंचाएंगे। बाघों की जिंदगी और जंगल की धड़कन को कैमरे के जरिये कहानी में बदलने वाले नल्ला के अनुभव का लाभ अब प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में लिया जाएगा। इसके लिए आठ अक्टूबर को वन विभाग उनके साथ एमओयू करेगा। एमओयू के तहत दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत, रानीपुर व अमानगढ़ टाइगर रिजर्व आदि में डाक्यूमेंट्री और अन्य फिल्मांकन की दिशा में काम होगा। मुथु को तराई के जंगलों में शूटिंग के लिए तीन वर्ष का समय मिलेगा। बाघों के साथ ही यहां की जैव विविधता, प्राकृतिक आवास, वन्यजीवों के व्यवहार और संरक्षण की चुनौतियों को कहानी का हिस्सा बनाया जा सकता है। दुर्लभ वन्यजीव और समृद्ध जैव विविधता मौजूद यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि तराई के जंगलों में बाघों के साथ हाथी, गैंडा, बारहसिंघा समेत कई दुर्लभ वन्यजीव और समृद्ध जैव विविधता मौजूद है। गौरतलब है कि मुथु के लिए वन्यजीव फिल्मांकन महज कैमरे से वीडियो बनाना नहीं, बल्कि जंगल में लंबे समय तक रहकर उसके किरदारों को समझना रहा है। रणथंभौर की ‘मछली’ पर बनाई गई उनकी फिल्म ‘द वर्ल्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर’ को 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण फिल्म का पुरस्कार मिला। उन्होंने करीब नौ वर्ष तक मछली और उसके वंश की कहानी को कैमरे में दर्ज किया था। वर्ष 2024 में मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में उन्हें वी. शांताराम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी मिला था। पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल कर चुके नल्ला के चर्चित काम में ‘टाइगर डायनेस्टी’, ‘टाइगर क्वीन’ और ‘लाइफ फोर्स’ जैसी वन्यजीव फिल्में शामिल हैं। 1987 से फिल्म निर्माण से जुड़े नल्ला ने 11 सीरीज और 55 डाक्यूमेंट्री बनाने के साथ भारतीय वन्यजीवों पर व्यापक काम किया है। इससे पहले वह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में हाई-स्पीड कैमरा विशेषज्ञ के रूप में भी काम कर चुके हैं।  

लखनऊ में बाढ़ का असर, स्टेडियम के पास जलभराव; IND vs WI मैच में हाई स्कोर या लो स्कोर का खेल?

लखनऊ भारत और वेस्टइंडीज के बीच 5 टी20 मैच की सीरीज का पहला मुकाबला लखनऊ में खेला जाना है। दोनों टीमें यह मैच जीतकर विजयी आगाज करने की कोशिश करेंगी। भारतीय टीम हाल ही में एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीतकर लौटी है और आत्मविश्वास से भरी हुई है। वहीं, वेस्टइंडीज ने वनडे में 350 रन से ज्यादा का लक्ष्य हासिल कर रिकॉर्ड बनाया और कैरिबियाई खिलाड़ी ही पूरे जोश में होंगे। ऐसे में इस मैच में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। लखनऊ में भारत का आखिरी टी20 मैच काफी चर्चा में रहा था। इकाना स्टेडियम में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड की टीम 99 रन पर ऑल आउट हो गई थी। हालांकि, 100 रन के लक्ष्य का पीछा करने में भारत को 119 गेंदें लग गई थीं। अंत में टीम इंडिया ने यह मुकाबला 6 विकेट से जीता था। हालांकि, इस बार लखनऊ में हाई स्कोरिंग मैच देखने को मिल सकता है। स्टेडियम के बाहर भरा पानी मैच से कुछ दिन पहले लखनऊ और उत्तर भारत में काफी बारिश हुई थी। इससे गोमती नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। स्टेडियम के आसपास कुछ जगहों पर पानी भरा हुआ है, लेकिन मैदान में पानी निकलने की अच्छी व्यवस्था है। इससे मैदान पूरी तरह सूखा हुआ है। मैच के दौरान भी इस वजह से कोई परेशानी नहीं होगी। कैसा रहेगा मौसम? लखनऊ में मंगलवार को दिन में हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन शाम में मौसम पूरी तरह से साफ रहेगा। बारिश की संभावना न के बराबर है। हालांकि, यहां उमस बहुत ज्यादा है। ऐसे में रात के समय ओस गिर सकती है। ओस गिरने पर गेंदबाजों और फील्डर को परेशानी होती है। इस वजह से टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करने का फैसला कर सकती है। भारत और वेस्टइंडीज के बीच वनडे सीरीज में भी तीनों मुकाबले लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम ने ही जीते हैं। कैसी है पिच? लखनऊ की पिच से शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को मदद मिल सकती है। मैच से पहले हल्की बारिश की भी संभावना है। अगर बारिश होती है तो नई गेंद से तेज गेंदबाजों को मूवमेंट मिल सकता है। हालांकि, गेंद पुरान होने पर बड़े शॉट खेलना आसान होगा और इस मुकाबले में भी 200 रन के आसपास स्कोर बन सकता है।  

यूपी में जल संरचनाओं का कायाकल्प, योगी सरकार ने सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण को बनाया मजबूत

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में सिंचाई तंत्र को अभेद्य बनाने और बाढ़ नियंत्रण की व्यवस्था को आधुनिक दिशा देने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जल ही जीवन है' और 'बूंद-बूंद का बेहतर उपयोग' के संकल्प को साकार करते हुए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की जर्जर और दशकों पुरानी जल संरचनाओं का कायाकल्प कर दिया है। प्रदेश के प्रमुख बैराजों, बांधों, हेड रेगुलेटरों और अन्य जल यांत्रिक संरचनाओं के जर्जर गेटों को न केवल बदला गया है, बल्कि 60 से 70 फीट गहरे पानी के भीतर गेट बदलकर राज्य ने एक अभूतपूर्व तकनीकी कीर्तिमान भी स्थापित किया है। ओखला, गोमती और नरौरा बैराज का हुआ आधुनिकीकरण सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग के अनुसार, लंबे समय से देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त हो चुके गेटों को चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है।  गोमती और हिंडन बैराज: लखनऊ स्थित गोमती बैराज के सभी 10 गेट और गाजियाबाद स्थित हिंडन बैराज के सभी 8 गेट सफलतापूर्वक बदले जा चुके हैं। ओखला व नरौरा बैराज: दिल्ली स्थित ओखला बैराज के 27 में से 18 गेट बदले गए हैं, जबकि बुलंदशहर के नरौरा बैराज के 61 में से 13 गेट बदले जा चुके हैं और 48 पर काम जारी है। अन्य प्रमुख संरचनाएं: पीलीभीत के चुक्का हेड रेगुलेटर के सभी 4 गेट, एटा के तातारपुर कनेक्टिंग व हेड रेगुलेटर के 20 गेट, और हरिद्वार के भीमगौड़ा बैराज के 8 खराब गेटों को विभाग की बीआईएस/आईएसओ प्रमाणित बरेली व झांसी कार्यशालाओं में निर्मित नए गेटों से बदला गया है। 70 फीट गहरे पानी के भीतर बदली गई तकनीक, दूर हुई रिसाव की समस्या प्रदेश में पहली बार बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पानी के भीतर स्थित गेटों को बदलने के लिए आधुनिक इंजीनियरिंग और विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद ली गई। गहरे पानी में ऑपरेशन: ललितपुर के माताटीला बांध, मेजा-जरगो लिंक रेगुलेटर और कचनौदा बांध में लगभग 60 से 70 फीट की गहराई पर स्थित अंडर-स्लूइस गेटों को पानी के भीतर ही सफलतापूर्वक बदला गया। चंद्रप्रभा बांध में रिसाव बंद: चंदौली के चंद्रप्रभा बांध में 80 फीट गहराई पर स्थित गेटों से हो रहे रिसाव को गोताखोरों की मदद से स्थायी रूप से रोककर खरीफ और आगामी फसलों के लिए पानी सुरक्षित किया गया।  संभावित आपदाओं के लिए तैयार रखे गए 'स्पेयर गेट' मुख्य अभियंता (यांत्रिक) उपेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार केवल वर्तमान संरचनाओं को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की संभावित आपदाओं और आकस्मिक खराबी से निपटने के लिए एडवांस तैयारी कर रही है।   ओखला बैराज, मौदहा (हमीरपुर), लहचूरा (महोबा), खो बैराज (बिजनौर), घाघरा बैराज (बहराइच) और शारदा बैराज (लखीमपुर खीरी) जैसी अति-संवेदनशील जल संरचनाओं के लिए विशेष स्पेयर गेट तैयार कर सुरक्षित रखे गए हैं। इससे किसी भी आपात स्थिति में बिना समय गंवाए गेट बदला जा सकेगा और जन-धन की संभावित क्षति को रोकते हुए किसानों को निर्बाध सिंचाई का पानी मिलता रहेगा।  

वाराणसी की दालमंडी में चौड़ीकरण अभियान अंतिम चरण में, 187 भवनों पर कार्रवाई; दिसंबर तक तैयार होगी सड़क

 वाराणसी उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए दालमंडी से होकर बनाए जा रहे सुगम मार्ग के चौड़ीकरण का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है. करीब एक साल पहले शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के तहत दालमंडी इलाके में ध्वस्तीकरण का काम लगभग पूरा हो गया है. सोमवार को पांच और भवनों पर बुलडोजर चलाया गया. इसके साथ ही चौड़ीकरण की जद में आए भवनों को हटाने का काम पूरा होने की बात पीडब्ल्यूडी ने कही है।  दालमंडी में चल रहा यह प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते को पहले के मुकाबले काफी चौड़ा करने के लिए शुरू किया गया था. पीडब्ल्यूडी की ओर से करीब सवा 200 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत दालमंडी इलाके में कुल 187 भवन चौड़ीकरण की जद में आए थे. इन भवनों में छह मस्जिदें भी शामिल थीं।  अब तक 170 से ज्यादा भवनों को जमींदोज किया जा चुका है. पीडब्ल्यूडी के मुताबिक करीब 172 से 173 मकान पूरी तरह डिस्मेंटल किए जा चुके हैं. बचे हुए भवनों पर भी आधे से ज्यादा काम पूरा हो गया था. सोमवार को अंतिम चरण में पांच भवनों को गिराया गया. इसके साथ ही इस प्रोजेक्ट के तहत भवनों को हटाने का काम पूरा हो गया. दालमंडी का इलाका लंबे समय से संकरी गलियों और घनी आबादी के लिए जाना जाता है. इसी इलाके से होकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते को चौड़ा किया जा रहा है. प्रोजेक्ट के तहत करीब 60 फीट चौड़ी और साढ़े 600 मीटर लंबी सड़क तैयार की जानी है।  गलियों के जाल से निकलेगा 60 फीट चौड़ा रास्ता इस चौड़ी सड़क के तैयार होने के बाद मंदिर तक पहुंचने का रास्ता मौजूदा संकरी गलियों के मुकाबले काफी सुगम हो जाएगा. फिलहाल इस पूरे इलाके में चौड़ीकरण की जद में आए भवनों को हटाने का काम लगभग पूरा किया जा चुका है. अब आगे का काम सड़क और उससे जुड़ी सुविधाओं को तैयार करने पर केंद्रित होगा।  दालमंडी चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के तहत कुल 187 भवनों की पहचान की गई थी. इनमें छह मस्जिदें भी शामिल थीं. प्रशासन ने मस्जिद कमेटी के सहयोग से इन मस्जिदों को भी चौड़ीकरण की जरूरत के अनुसार आंशिक या पूर्ण रूप से हटाया है. भवनों को हटाने का काम चरणबद्ध तरीके से किया गया. अब अंतिम चरण में पांच भवनों को भी डिस्मेंटल कर दिया गया. पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक इसके साथ ही डिमोलिशन का अंतिम चरण पूरा हो गया है।  पीडब्ल्यूडी के वाराणसी के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि दालमंडी में डिस्मेंटलिंग का फाइनल चरण सोमवार को था. इस चरण में करीब पांच भवनों को डिस्मेंटल किया गया. उन्होंने बताया कि अब तक 172 से 173 मकान पूरी तरह डिस्मेंटल किए जा चुके हैं. बचे हुए भवनों पर भी आधे से ज्यादा काम पहले ही हो चुका था. केके सिंह के मुताबिक चौड़ीकरण की जद में आए भवनों के लिए अब तक 132 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है. भवनों को हटाने के लिए पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद ली गई।  भवनों को हटाने के बाद अब प्रोजेक्ट के अगले महत्वपूर्ण हिस्से पर काम चल रहा है. अधिकारियों के मुताबिक इलाके में वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम अभी जारी है. यह काम नवंबर महीने में पूरा होने की उम्मीद है. पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम पूरा होने के बाद करीब एक से डेढ़ महीने में प्रोजेक्ट को पूरा कर दिया जाएगा. इस हिसाब से दिसंबर के अंत तक काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए तैयार किया जा रहा सुगम मार्ग पूरा होने की उम्मीद है।  अब वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम दालमंडी चौड़ीकरण का यह प्रोजेक्ट करीब एक साल तक चलने वाला था. अधिकारियों के मुताबिक इसे दिसंबर में पूरा करना बड़ी उपलब्धि होगी. इसके लिए भवनों के ध्वस्तीकरण के साथ-साथ सड़क से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है. केके सिंह ने बताया कि इस काम में प्रशासन का पूरा सहयोग मिला है. इसी सहयोग के चलते ध्वस्तीकरण के काम को अंतिम चरण तक पहुंचाया जा सका है. अब दालमंडी में भवनों को हटाने का काम खत्म हो चुका है और सड़क निर्माण से जुड़े बाकी काम को पूरा करने पर जोर है।  करीब एक साल पहले शुरू हुआ यह काम अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां दालमंडी में चौड़ीकरण की सबसे बड़ी बाधा यानी भवनों को हटाने का काम पूरा हो चुका है. 60 फीट चौड़ी और साढ़े 600 मीटर लंबी सड़क के तैयार होने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाले रास्ते को नया स्वरूप मिलेगा. अधिकारियों की योजना के मुताबिक नवंबर में वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम पूरा होगा और इसके बाद करीब एक से डेढ़ महीने में पूरा प्रोजेक्ट तैयार कर दिसंबर के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। 

पीएम आवास योजना-शहरी में यूपी का देशभर में परचम, दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित

लखनऊ विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी में देशभर में अपनी उपलब्धियों का परचम लहराया। 5 अक्टूबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में प्रदेश को दो प्रतिष्ठित श्रेणियों में पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि प्रदेश में जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों को रेखांकित करती है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आवास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और लाभार्थी केंद्रित व्यवस्था को मिली यह राष्ट्रीय मान्यता उत्तर प्रदेश की शहरी विकास यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पीएम आवास योजना-शहरी में यूपी को दो राष्ट्रीय पुरस्कार प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के लाभार्थी आधारित आवास निर्माण (बीएलसी) घटक में उत्तर प्रदेश ने देश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। स्वीकृत आवासों के सापेक्ष सर्वाधिक आवास पूर्ण करने पर प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में प्रथम स्थान मिला है। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत स्वीकृत आवासों की कुल संख्या के सापेक्ष सर्वाधिक प्रतिशत आवासों की ग्राउंडिंग यानी धरातल पर निर्माण कार्य शुरू कराने के मामले में उत्तर प्रदेश को तृतीय स्थान से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में यूपी का प्रतिनिधित्व दोनों प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री तोखन साहू द्वारा प्रदान किए गए। इस अवसर पर केंद्र सरकार के शहरी विकास विभाग के सचिव सत्येंद्र सिंह, डी. तारा और संयुक्त सचिव कुमार रविकांत सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश की ओर से राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) के निदेशक महेंद्र बहादुर सिंह ने पुरस्कार ग्रहण किए। पुरस्कार वितरण समारोह में उत्तर प्रदेश प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे निदेशक सूडा के साथ वित्त नियंत्रक रजनीकांत वर्मा और कार्यक्रम अधिकारी अतुल सिंह चौहान भी उपस्थित रहे। प्रदेश की इस उपलब्धि पर निदेशक सूडा ने विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं।

कोसी में डेयरी सेक्टर का होगा विस्तार, ₹126 करोड़ के निवेश से नए प्लांट; 45 हजार महिलाओं को मिलेगा लाभ

सहरसा  पिछड़े कोसी क्षेत्र में आने वाले दिनों में डेयरी से संबंधित कारोबार तेजी से बढ़ेगा। सरकार ने सात निश्चय -3 के तहत एक अरब 26 करोड़ सात लाख की लागत से कोसी दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड के अंतर्गत दही प्लांट, प्रीमियम आईस्क्रीम प्लांट, टोटल मिक्स्ड राशन प्लांट, इंस्टैंट मिल्क चिलिंग प्लांट खोलने की योजना है। इससे कोसी क्षेत्र में डेयरी व दुग्ध व्यवसाय को पंख लगेगा। इससे इलाके के पशुपालक व दुग्ध कारोबारी काफी लाभांवित होंगे, जो पिछड़े कोसी क्षेत्र के विकास का बढ़ा कारण बनेगा। नवीन दुग्ध सहकारी समितियों का भी होगा गठन श्वेत क्रांति-2 पहल के तहत डेयरी किसानों को संगठित बाजार से जोड़ने के लिए नवीन दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जाएगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर बल दिया जाएगा। इस समिति के गठन होने से सहकारी डेयरी के माध्यम से उपभोक्ताओं द्वारा दिए जाने वाले समितियों का अधिकांश हिस्सा सीधे किसानों तक पहुंचेगा। सात निश्चय- 3 से प्राप्त राशि से कोसी प्रमंडल के तीनों जिले में मिल्क चिलिंग प्लांट एवं इंस्टैंट मिल्क चिलिंग सिस्टम की स्थापना होगी। इससे दूध की गुणवत्ता बनी रहेगी और इसे खराब होने से बचाया जा सकेगा। दुग्ध उत्पादन बढ़ने से सशक्त होगी ग्रामीण महिलाएं कोसी प्रमंडल में दुग्ध उत्पादन में जीविका के माध्यम से महिलाएं लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। कौशिकी जीविका महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी महिलाओं द्वारा संचालित है और सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिलों में अपनी सेवाएं दे रही है। वर्तमान में कंपनी से 45,000 दुग्ध उत्पादक जीविका दीदी जुड़ी हुई हैं। यह महिलाएं न केवल दुग्ध उत्पादन करती हैं, बल्कि इसके संग्रह, प्रसंस्करण और विपणन में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। यह कंपनी चालू वित्तीय वर्ष में प्रतिदिन औसतन 76,171 लीटर दूध की खरीद कर रही है महिलाएं अपने पारंपरिक कौशल का उपयोग कर आधुनिक तकनीकों के साथ अपने व्यवसाय को बढ़ावा दे रही हैं। सात निश्चय से विभिन्न तरह के प्लांट की स्थापना से इस कंपनी का भी कारोबार तेजी से फल-फूल सकेगा। ऐसी संभावना है।     कोसी क्षेत्र के विकास में डेयरी व्यवसाय महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। ऐसे में कई महत्वपूर्ण प्लांट की स्थापना से व्यवसाय को पंख लगेगा। इससे इलाके के लोग काफी लाभांवित होंगे। – डॉ. अभिनीत झा, जिला पशुपालन पदाधिकारी, सहरसा  

3 साल से दफन राज खोलेगा अरमान! गुड्डू मुस्लिम की फरारी और शाइस्ता के ठिकानों पर होंगे सवाल

प्रयागराज प्रयागराज के उमेश पाल हत्याकांड में पांच लाख रुपये का इनामी आरोपी अरमान अब प्रयागराज पुलिस की कस्टडी में है. करीब साढ़े तीन साल तक गया की जेल में बंद रहने के बाद उसे प्रयागराज लाया गया है. अरमान की अहमियत सिर्फ इस वजह से नहीं है कि उस पर उमेश पाल हत्याकांड में शामिल होने का आरोप है, बल्कि पुलिस के मुताबिक वारदात वाले दिन वही बाइक चला रहा था जिस पर बमबाज गुड्डू मुस्लिम बैठा था. इसके अलावा अरमान को अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन का बेहद करीबी बताया जाता रहा है. ऐसे में पुलिस की पूछताछ का फोकस सिर्फ उमेश पाल हत्याकांड तक सीमित रहने के बजाय गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता के लंबे समय से फरार रहने की कड़ी तक पहुंच सकता है।  43 महीने बाद खुला एक ऐसा दरवाजा, जिसके पीछे छिपे हैं कई सवाल 24 फरवरी 2023… प्रयागराज की सड़क पर उमेश पाल और उनके दो सरकारी गनरों की हत्या हुई. कैमरों में कैद हुई तस्वीरों ने पूरे हत्याकांड को समझने की एक अहम कड़ी पुलिस को दी. बम बरसा रहा था गुड्डू मुस्लिम और बाइक चला रहा था अरमान. वारदात के बाद दोनों उसी बाइक से फरार हुए थे. अरमान अतीक अहमद के नेटवर्क से जुड़ा बताया गया और बाद में उसकी तलाश में पांच लाख रुपये का इनाम घोषित हुआ.  लेकिन कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट इसके बाद आया. जिस अरमान को यूपी पुलिस तीन साल से तलाश रही थी, वह यूपी से बाहर किसी नए नाम या पहचान के साथ नहीं, बल्कि बिहार की गया जेल में बंद था. अब उसे पुलिस प्रयागराज लेकर आ रही है।  सबसे बड़ा सवाल, गुड्डू मुस्लिम कहां गया उमेश पाल हत्याकांड के बाद कई आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आए, कुछ मुठभेड़ में मारे गए और कुछ के खिलाफ अदालत में कार्रवाई आगे बढ़ी. लेकिन गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता परवीन अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. गुड्डू मुस्लिम पर पांच लाख रुपये का इनाम है, जबकि शाइस्ता परवीन पर भी इनामी राशि घोषित की गई थी. पुलिस ने दोनों की तलाश में कई राज्यों में दबिश दी, लेकिन उनका पता नहीं चल सका. अब पुलिस के हाथ ऐसा व्यक्ति लगा है जो गुड्डू मुस्लिम के बेहद करीब रहा था. अरमान ने गुड्डू को अपनी बाइक पर बैठाकर उमेश पाल के घर तक पहुंचा था. यानी पुलिस के सामने अब एक ऐसा आरोपी है जो वारदात से ठीक पहले गुड्डू के साथ था और वारदात के बाद उसके साथ ही वहां से निकला था. यही वजह है कि अरमान की पूछताछ इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।  क्या अरमान बता सकता है गुड्डू मुस्लिम का आखिरी ठिकाना  पुलिस के लिए पहला बड़ा सवाल यही हो सकता है कि 24 फरवरी 2023 की वारदात के बाद गुड्डू मुस्लिम कहां गया? दोनों साथ भागे थे. ऐसे में पुलिस यह जानना चाहेगी कि वारदात के बाद दोनों के रास्ते कब और कहां अलग हुए. क्या गुड्डू पहले से तय किसी ठिकाने पर पहुंचा था? किसने उसे वहां पहुंचाने में मदद की? क्या उसके पास पहले से सुरक्षित ठिकानों की पूरी सूची थी? क्या फरारी के दौरान उसे किसी ने आर्थिक या लॉजिस्टिक मदद पहुंचाई? इन सवालों के जवाब अगर अरमान की पूछताछ में मिलते हैं तो जांच की दिशा एक बार फिर बदल सकती है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अरमान के पास वर्तमान में गुड्डू मुस्लिम के बारे में कोई ऐसी जानकारी है या नहीं. यह पुलिस की पूछताछ के बाद ही सामने आएगा. दूसरा बड़ा सवाल हो सकता है कि शाइस्ता की फरारी का नेटवर्क कौन चला रहा था ? अरमान को लेकर एक और बात उसे इस केस में महत्वपूर्ण बनाती है. पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि अरमान शाइस्ता परवीन के बेहद करीब रहता था और उसके मूवमेंट तथा सुरक्षा व्यवस्था में साथ रहता था।  गया का ही रहने वाला है अरमान  उमेश पाल के हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपी शूटर अरमान बिहार के गया जिला के कठोत्तर तालाब का रहने वाला है. और उमेश पाल के हत्या के बाद अरमान उत्तर प्रदेश से गया आ गया. गया शहर के कटारी तालाब के पास एक अंडा व्यवसाय पर गोली चलाने के पुराने मामले में गया कोर्ट में 27 फरवरी 2023 को आत्मसमर्पण कर दिया. जहां से उसको गया के सेंट्रल जेल में 27 फरवरी 2023 को भेज दिया गया था और अभी तक अरमान गया के सेंट्रल जेल में बंद है. प्रयागराज के धूमनगंज थाना की पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि उमेश पाल का हत्याकांड में शामिल आरोपी बिहार के गया जिला के सेंट्रल जेल में बंद है तो उत्तर प्रदेश की पुलिस गया के सेंट्रल जेल पहुंची और गया के सेंट्रल जेल में बंद अरमान से पूछताछ कर उमेश पाल के हत्याकांड में शामिल आरोपी अरमान की पहचान की. यूपी पुलिस ने पांच लाख के इनामी हत्याकांड के आरोपी अरमान को अपने साथ उत्तर प्रदेश ले जाने के लिए कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड के लिए अर्जी भी दी. अब पुलिस उसे लेकर प्रयागराज के लिए रवाना हो चुकी है।  परिवार वालों को एनकाउंटर का डर  वही उमेश पाल के हत्या के आरोपी अरमान के पिता समीम मलिक ने बताया की मेरा बेटा अरमान उत्तर प्रदेश के उमेश पाल हत्या में शामिल था और वहां से भाग कर वह गया आया . गया में एक पुराने मामले भोलू अंडा वाला के केश में गया कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था. मगर तीन -चार साल के बाद उत्तर प्रदेश की पुलिस अरमान को उत्तर प्रदेश ले जाने के लिए आई थी. अब हम लोगों को डर लग रहा है की उत्तर प्रदेश की पुलिस अरमान को ले जाते समय एनकाउंटर न कर दे क्योंकि उत्तर प्रदेश की पुलिस आरोपी के हाथ में बंदूक देकर एनकाउंटर कर देती है. उन्होंने कहा कि उमेश पाल के हत्या के चार आरोपियों को उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है और यह पांचवां आरोपी है तो हमें लग रहा है की इसका भी एनकाउंटर न कर दें. उन्होंने कहा कि अरमान उत्तर प्रदेश में एक बर्फ फैक्ट्री में काम करता था मगर वहां से कुछ लोगों ने उसको … Read more

संवाद, संकल्प और सफलता के मूलमंत्र के साथ यूपी राइज का हुआ आयोजन

झांसी  संवाद, संकल्प और सफलता के मूलमंत्र के साथ बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में सोमवार को यूपी राइज कार्यक्रम का आयोजन हुआ। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडेय ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। आयोजन में नवाचारी युवाओं ने अपने स्टार्टअप आइडियाज को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के साथ ही आसपास के कई जिलों से आए विद्यार्थियों एवं नवाचारियों ने हिस्सा लिया।  इस मौके पर युवाओं और नवाचारियों को योगी सरकार की उन योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई, जिसके माध्यम से वे अपने स्टार्टअप के लिए आर्थिक मदद या व्यवसाय के लिए ऋण प्राप्त कर सकते है। कार्यक्रम स्थल पर इन योजनाओं में पंजीकरण कराने के लिए संबंधित विभागों की ओर से काउंटर लगाए गए। इस आयोजन में 12 स्टार्टअप्स की टीम ने अपने आइडियाज प्रस्तुत किए। इनमें से अभिषेक और निशांत के स्टार्टअप ऑन मिंट को विनर घोषित किया गया जबकि जबकि जुनैद रिजवान और सागर के स्टार्टअप इक्षू को रनर अवार्ड दिया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में स्टार्टअप फाउंडर, स्टूडेंट, विश्वविद्यालय के शिक्षक, स्टार्टअप मेंटोर, एक्सपर्ट उपस्थित रहे। नवाचारी युवाओं ने अपने आइडिया प्रस्तुत किए जिसे लेकर विशेषज्ञों ने सुझाव दिए और योगी सरकार की योजनाओं के माध्यम से आर्थिक मदद प्राप्त करने के तरीके बताए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कवि मुकुल शर्मा ने युवाओं को अपनी रचनाएं सुनाकर युवाओं का मनोरंजन किया। मेंटोर एवं निर्णायक मंडल के तौर पर कनेक्स्ट मारकॉम के डायरेक्टर अलाय रिजवी, स्टूफिट के सीईओ डॉ सैयद शुजात हैदर जाफरी, इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन काउंसिल के प्रेसिडेंट डॉ नूर आलम खान उपस्थित रहे। इसके अलावा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एम एम सिंह, डॉ संदीप एवं अन्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडेय ने कहा कि विकसित भारत 2047 की संकल्पना को पूरा करने में यूपी राइज जैसे आयोजन मददगार सिद्ध होंगे। युवाओं को अवसरों का लाभ उठाने के लिए तैयार रहना होगा। यह आयोजन अवसर, नवाचार और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा देने का काम करेगा।