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योगी सरकार के तहत बेसिक शिक्षा में ऐतिहासिक सुधार, नामांकन से लेकर गुणवत्ता तक बदलाव

योगी सरकार में बदली बेसिक शिक्षा की तस्वीर, नामांकन से लेकर गुणवत्ता तक ऐतिहासिक सुधार  स्कूल चलो अभियान से लाखों बच्चों की वापसी, सरकारी स्कूलों पर बढ़ा भरोसा  ऑपरेशन कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और DBT योजनाओं से शिक्षा व्यवस्था हुई मजबूत  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग ने व्यापक और ठोस बदलाव दर्ज किया है। यह परिवर्तन केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम के रूप में सामने आया है। परिषदीय विद्यालयों में स्कूल चलो अभियान के अंतर्गत नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में 13.22 लाख और 2025-26 में 15.84 लाख बच्चों का नामांकन इसका प्रमाण है। इस वर्ष अप्रैल माह से गतिशील इस अभियान के अंतर्गत 20 अप्रैल तक, यानी मात्र 20 दिनों में ही 8 लाख 79 हजार से अधिक नए बच्चों का नामांकन दर्ज किया जा चुका है, जो परिषदीय शिक्षा को सार्वभौमिक बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। योगी सरकार ने आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा है। अवस्थापना के स्तर पर 1.32 लाख से अधिक विद्यालयों को ऑपरेशन कायाकल्प से जोड़ा गया। 2017-18 में मात्र 36 प्रतिशत स्कूल ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त थे, जो अब बढ़कर 96.30 प्रतिशत हो गए हैं। 75 जनपदों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। तकनीक, प्रशिक्षण और पोषण योजनाओं के साथ शिक्षा को समग्र रूप से मजबूत किया गया है। स्पष्ट है कि योगी सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और परिणाम अब व्यवस्थित रूप में दिख रहे हैं। नामांकन और मुख्यधारा से जुड़ाव प्रदेश में स्कूल चलो अभियान और सर्वे आधारित रणनीति ने शिक्षा से दूर बच्चों को जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई है। वर्ष 2024-25 में 7.73 लाख आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान की गई। इनमें से 2.69 लाख बच्चों को कक्षा-1 में सीधे प्रवेश दिया गया, जबकि 5.04 लाख बच्चों को विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से मुख्यधारा में जोड़ा गया। यह प्रयास केवल आंकड़ों की वृद्धि नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार को धरातल पर लागू करने का उदाहरण है। लगातार बढ़ते नामांकन से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी विद्यालयों के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। निःशुल्क सुविधाएं और छात्र हित सरकार ने आर्थिक बाधाओं को कम करने पर विशेष ध्यान दिया है। प्रतिवर्ष 1.30 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को DBT के माध्यम से यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर, बैग और स्टेशनरी के लिए ₹1200 प्रति छात्र की सहायता दी जाती है। कक्षा 1 से 8 तक सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें और कार्यपुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन उपायों से अभिभावकों का आर्थिक बोझ कम हुआ है और स्कूलों में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हुई। अवस्थापना विकास में बड़ा सुधार ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों की मूलभूत सुविधाओं में व्यापक सुधार हुआ है। 1.32 लाख से अधिक विद्यालय इस अभियान से आच्छादित हुए हैं। हर विद्यालय में डेस्क-बेंच, शौचालय, पेयजल, बिजली और कक्षाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं थे, वहां नए आवासीय विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने की दिशा में काम हो रहा है। मॉडल विद्यालयों से नई दिशा प्रदेश में शिक्षा के नए मानक स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं। 75 जनपदों में 150 विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक शिक्षा दी जाएगी। प्रत्येक विद्यालय पर लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत आ रही है और कुल बजट 4500 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। हर विद्यालय में 1500 से अधिक छात्रों के अध्ययन की व्यवस्था होगी, जिससे कुल 2.25 लाख विद्यार्थी सीधे लाभान्वित होंगे। साथ ही 75 मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय भी विकसित किए जा रहे हैं, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी। यह पहल शिक्षा के मानकों को नई ऊंचाई देने वाली साबित हो रही है। तकनीक आधारित शिक्षा का विस्तार शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल संसाधनों का व्यापक उपयोग किया गया है। हजारों विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और ICT (इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी) लैब स्थापित की गई हैं। 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट वितरित किए गए हैं, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनी है। वर्ष 2024-25 में 4.53 लाख शिक्षकों और शिक्षामित्रों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी आधारित चार दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 2025-26 में 4.33 लाख शिक्षकों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसी क्रम में 1,32,828 परिषदीय विद्यालयों में पुस्तकालय स्थापित कर उन्हें क्रियाशील बनाया गया है। समग्र शिक्षा और पीएम योजना के तहत 2022-23 से 2024-25 तक कुल 25,954 विद्यालयों को स्मार्ट क्लास से आच्छादित किया गया है। 2025-26 में 5,924 अन्य विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित किए गए। इसके साथ ही 880 ब्लॉक संसाधन केंद्रों में आईसीटी लैब स्थापित की जा चुकी हैं तथा 2023-24 और 2024-25 में 5,817 विद्यालयों को आईसीटी लैब से जोड़ा गया है, जबकि 2025-26 में 8,291 विद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापना की गई।  बालिका शिक्षा को मजबूती कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना के तहत 746 विद्यालय संचालित हैं, जिन्हें कक्षा 6 से 12 तक उच्चीकृत किया गया है। इनमें 87,647 बालिकाएं नामांकित हैं। स्मार्ट क्लास, ICT लैब, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों से बालिकाओं का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। यह पहल न केवल शिक्षा, बल्कि सामाजिक सशक्तीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। समावेशी शिक्षा और सामाजिक न्याय दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2024-25 में 29, 241 बच्चों को और 2025-26 में 25,397 बच्चों के दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाए गए। इसके साथ ही सहायक उपकरण, एस्कॉर्ट अलाउंस और छात्रवृत्ति DBT के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। इससे हर बच्चे को शिक्षा के दायरे में लाने का प्रयास सफल होता दिख रहा है। पीएम योजना और आरटीई के तहत अवसर पीएम योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1,722 विद्यालयों को आच्छादित किया गया है, जहां स्मार्ट क्लास, ICT लैब और खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। वहीं आरटीई के तहत 2024-25 में 1.65 लाख और 2025-26 … Read more

नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बाधा डालकर विपक्ष ने उजागर किया अपना महिला-विरोधी चेहरा: मुख्यमंत्री

fमहिला अधिकार के लिए सड़क पर उतरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महिला आरक्षण पर विपक्ष के विश्वासघात के खिलाफ जन आक्रोश पदयात्रा में प्रदेश अध्यक्ष, दोनों उपमुख्यमंत्री, सहयोगी दलों के नेता समेत पूरी सरकार के साथ शामिल हुए सीएम योगी नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बाधा डालकर विपक्ष ने उजागर किया अपना महिला-विरोधी चेहरा: मुख्यमंत्री  विपक्ष का आचरण नारी गरिमा के प्रतिकूल, आक्रोशित महिलाएं दे रहीं सड़कों पर जवाब: सीएम योगी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के दोहरे चरित्र के विरुद्ध महिलाओं के जनाक्रोश को सीएम योगी ने दी आवाज तेज धूप भी नहीं रोक सकी आधी आबादी का आक्रोश, जनाक्रोश पदयात्रा में शामिल हुईं हजारों महिलाएं सपा-कांग्रेस की महिला-विरोधी राजनीति के खिलाफ राजधानी में सीएम योगी के नेतृत्व में उमड़ा जन-सैलाब आक्रोशित महिलाएं बोलीं, ‘सपा की पुरानी बीमारी-आधी आबादी से गद्दारी’ लखनऊ  नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को लोकसभा में विपक्ष द्वारा पारित नहीं होने देने के विरोध में मंगलवार को राजधानी लखनऊ ऐतिहासिक जनाक्रोश का साक्षी बना, जब महिला अधिकार के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं सड़क पर उतरे। उनके नेतृत्व में हजारों महिलाओं का हुजूम मुख्यमंत्री आवास से सिविल हॉस्पिटल होते हुए विधान भवन तक उमड़ पड़ा। इस जनाक्रोश पदयात्रा में सीएम योगी के साथ पूरा मंत्रिमंडल सड़क पर उतरा दिखाई दिया। यह कोई साधारण पदयात्रा या रैली नहीं थी, यह नारी सम्मान और उसके संवैधानिक अधिकारों पर हुए हमले का सीधा और बेहद तीखा जवाब था। विधान भवन के सामने महिलाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को विधानसभाओं एवं लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, किंतु कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके सहित इंडी गठबंधन के दलों द्वारा इसे बाधित करने का प्रयास उनके अलोकतांत्रिक और महिला-विरोधी चेहरे  को उजागर करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इन दलों को अपनी नकारात्मक छवि सुधारने का अवसर दिया गया था, किंतु इन्होंने उसका दुरुपयोग करते हुए महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी अन्याय के विरोध में देशभर में आधी आबादी सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक ढंग से अपना आक्रोश प्रकट कर रही है। लखनऊ में प्रचंड गर्मी के बावजूद हजारों की संख्या में मातृशक्ति की सहभागिता प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के प्रति व्यापक जनसमर्थन और आशीर्वाद का प्रतीक है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश का एक-एक नागरिक आधी आबादी की इस न्यायोचित मांग के साथ मजबूती से खड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में देश ने व्यापक परिवर्तन देखा है, जिसमें ‘महिला, गरीब, युवा और किसान’ इन चार जातियों को केंद्र में रखकर नीतियों का निर्माण किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप देश ने विकास और आत्मनिर्भरता के नए मानक स्थापित किए हैं। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना सहित अनेक योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। स्वच्छ भारत मिशन केवल स्वच्छता का अभियान नहीं, बल्कि नारी गरिमा की रक्षा का सशक्त माध्यम है, वहीं उज्ज्वला योजना केवल ईंधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और स्वावलंबन को सुदृढ़ करने का माध्यम है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं केवल लाभ वितरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवारों को स्वावलंबन की दिशा में अग्रसर करने का सशक्त आधार बन रही हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, घरौनी वितरण जैसे प्रयासों ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी आर्थिक सशक्तीकरण से जोड़ने का कार्य किया है। डबल इंजन की सरकार लगातार कार्य कर रही है, लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन के दल हर योजना का विरोध करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला है और यह व्यवस्था वर्ष 2029 तक लागू हो जाए, इसको लेकर प्रधानमंत्री जी और गृह मंत्री जी ने सभी को आश्वस्त भी किया, इसके बावजूद इन विपक्षी दलों का जो आचरण रहा है, वह नारी गरिमा के प्रतिकूल रहा है। इसी कारण आज देशभर की महिलाएं इन दलों के विरोध में एकजुट होकर आंदोलन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ‘डबल इंजन’ सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना तथा युवा संबंधी अन्य योजनाएं इस दिशा में प्रभावी माध्यम बन रही हैं। मुख्यमंत्री ने आक्रोश पदयात्रा में बड़ी संख्या में सहभागिता के लिए सभी महिलाओं का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। तेज धूप भी नहीं रोक सकी संकल्प, हाथों में तख्तियां-होंठों पर प्रतिकार पूर्वाह्न लगभग 10 बजे मुख्यमंत्री आवास से प्रारंभ हुई इस पदयात्रा के समय भी चुभने वाली तेज धूप थी,  लेकिन महिलाओं का आक्रोश उससे कहीं अधिक धधक रहा था। हाथों में विपक्ष की कुत्सित राजनीति की निंदा करते हुए स्लोगन लिखी हुईं तख्तियां और ‘बहन- बेटियों का अपमान-नहीं सहेगा हिन्दुस्तान, महिला अधिकारों पर वार-सपा-कांग्रेस जिम्मेदार, कांग्रेस का हाथ-नारी शक्ति के खिलाफ, नारी के सम्मान में-एनडीए मैदान में’ जैसे गूंजते नारों के साथ यह रैली विपक्ष की कायरता और राजनीतिक स्वार्थ को बेनकाब करती हुई आगे बढ़ी। हर कदम पर महिलाओं का हुजूम साफ संदेश दे रहा था- आधी आबादी के सम्मान और अधिकारों पर कोई समझौता नहीं, कोई चुप्पी नहीं, कोई माफी नहीं। जनाक्रोश पदयात्रा में हजारों महिलाओं की सहभागिता ने साबित किया कि आधी आबादी इस मुद्दे पर खामोश नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पदयात्रा में केन्द्रीय मंत्री एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक और सहयोगी दलों के नेता सहित मंत्रिमंडल के सदस्यों तथा भाजपा की विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारियों के साथ अग्रिम पंक्ति में चल रहे थे। राजधानी लखनऊ के लिए यह एक अभूतपूर्व दृश्य था। रैली के दौरान पूरे मार्ग पर अनुशासन और उत्साह का अद्वितीय संगम देखने को मिला। युवा, वृद्ध, छात्राएं और कामकाजी महिलाएं, हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को व्यापक सामाजिक … Read more

महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को 2027 में कोई वोट नहीं मिलेगा: केशव प्रसाद मौर्य

एंटी-वुमेन एलाइंस साबित हुआ इंडी एलाइंस सड़क पर निकलकर सपा व कांग्रेस का बैंड बजा रही हैं उत्तर प्रदेश की आक्रोशित बहनें: बृजेश पाठक महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को 2027 में कोई वोट नहीं मिलेगा: केशव प्रसाद मौर्य नारी अधिकारों का हनन करने के बाद खुशियां मनाना दर्शाता है कांग्रेस व सपा की मानसिकता: अरुण सिंह विपक्ष मोदी-विरोध में इतना अंधा हो गया कि हर अच्छी पहल का विरोध कर रहा है: पंकज चौधरी लखनऊ  नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के षड्यंत्र के विरोध में मंगलवार को लखनऊ में ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक व केशव प्रसाद मौर्य, पंचायती राज्यमंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्यसभा सांसद अरुण सिंह और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी समेत हजारों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सभी ने एक सुर में कहा कि 17 अप्रैल को संसद में यह बिल पास होने वाला था, लेकिन कांग्रेस और सपा ने न सिर्फ इसका विरोध किया, बल्कि मतदान में इसे गिराने के बाद तालियां बजाकर खुशी मनाई। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों का हनन बताया और कहा कि 2027 के चुनाव में इन दलों को महिला आक्रोश का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने तो यहां तक कहा कि इंडी एलाइंस अब एंटी-वुमेन एलाइंस साबित हो चुका है। बिल के विरोध का खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ेगा उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि आज प्रदेश की महिला शक्ति सड़कों पर है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की दुरभि संधि और संकीर्ण मानसिकता के कारण नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद में रोकने का काम किया गया है। आज उत्तर प्रदेश की आक्रोशित बहनें सड़क पर निकलकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का बैंड बजाने का काम कर रही हैं। इन पार्टियों को आने वाले चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। हम सब अच्छी तरह जानते हैं कि समाजवादी पार्टी की सरकार जब-जब प्रदेश में होती है, गुंडे-बदमाश खुलेआम बहन-बेटियों को परेशान करने का काम करते हैं। इसीलिए नारे लगते हैं, 'देख सपाई-बिटिया घबराई'। वक्त है कि सब एकजुट होकर सपा व कांग्रेस को महिला शक्ति का अहसास कराएं। मां दुर्गा, मां काली, मां सरस्वती बनकर विपक्षियों को सबक सिखाएं। महिलाओं को आरक्षण दिलाकर रहेंगे: केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी का सूपड़ा साफ होना है। 2027 में बिना महिलाओं के कोई चुनाव जीत सकता है क्या? अगर महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को आने वाले चुनाव में कोई वोट नहीं मिलेगा। इसके लिए तैयार हो जाइए। प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा है कि हम हिम्मत नहीं हारेंगे। हम महिलाओं को आरक्षण दिलाकर रहेंगे। इसी संकल्प के साथ हमें यहां से जन आक्रोश मार्च निकालना है। सपा व कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेंगे राज्यसभा सांसद अरुण सिंह ने कहा कि 17 अप्रैल के दिन देशभर की महिलाओं के मन में एक आकांक्षा थी कि आज जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर निर्णय होगा, तो वह हमारे पक्ष में होगा। वे उत्सव मनाएंगी, खुशियां मनाएंगी और यह दिन देश के इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। लेकिन कांग्रेस व सपा ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन का विरोध किया और उसके विरुद्ध मतदान किया। उन्होंने सिर्फ विरोध ही नहीं किया, बल्कि नारी अधिकारों का हनन करने के बाद तालियां भी बजाईं और खुशियां भी जाहिर कीं। यह कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की मानसिकता को दर्शाता है। उसी के कारण पूरे देश में जन आक्रोश है। इसीलिए इतनी बड़ी संख्या में आप लोग यहां एकत्र हुए हैं, यह बताने के लिए कि सपा व कांग्रेस को हम कभी माफ नहीं करेंगे। 80 प्रतिशत बहुसंख्यक महिलाओं के हितों को ठेस पहुंचाई पंकज चौधरी ने कहा कि नारी का उत्थान व सम्मान, भाजपा की यही पहचान है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी सशक्तीकरण के लिए हमारी सरकार लगातार काम कर रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का मुख्य उद्देश्य देश की माताओं और बहनों को नेतृत्व का अधिकार देना था। ताकि लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटों पर महिलाएं चुनाव लड़ सकें और नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इसके बावजूद सपा और कांग्रेस सहित विपक्ष ने इसमें बाधा डाली। कुछ लोगों ने कहा कि इससे उत्तर और दक्षिण भारत में भेद पैदा हो जाएगा। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मुस्लिम महिलाओं का आरक्षण भी होना चाहिए। हमारे नेताओं ने सदन में इन सभी आपत्तियों का विस्तार से जवाब दिया। विपक्षी दल जहां एक तरफ महिलाओं का सम्मान और सशक्तीकरण की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ नकाब और वोट बैंक के चक्कर में उन्होंने 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक महिलाओं के नाम पर 80 प्रतिशत बहुसंख्यक महिलाओं के हितों को ठेस पहुंचाने का काम किया है।

यूपीनेडा ने लॉन्च किया ‘पीएम सूर्य घर’ पोर्टल, योजना की रफ्तार बढ़ाने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग

यूपीनेडा ने लॉन्च किया ‘पीएम सूर्य घर’ पोर्टल, रियल-टाइम मॉनिटरिंग से तेज होगी योजना की रफ्तार योगी सरकार की पारदर्शी शासन व्यवस्था को नई मजबूती, आवेदन से भुगतान तक हर चरण ऑनलाइन ट्रैक 4.80 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कर यूपी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल लखनऊ उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए योगी सरकार लगातार तकनीक का सहारा ले रही है। इसी कड़ी में यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने सोमवार को ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना’ की निगरानी के लिए www.pmsgy.upneda.co.in पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आवेदन से भुगतान तक हर चरण पर रियल-टाइम निगरानी नया पोर्टल योजना के सभी प्रमुख चरणों, आवेदन, स्वीकृति, सोलर संयंत्र की स्थापना और भुगतान की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा प्रदान करता है। इससे न केवल अधिकारियों को कार्य प्रगति की सटीक जानकारी मिलेगी, बल्कि लाभार्थियों को भी अपने आवेदन की स्थिति जानने में आसानी होगी। योगी सरकार के ‘डिजिटल गवर्नेंस’ मॉडल के तहत यह पहल सरकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में सहायक होगी। केंद्र सरकार ने भी सराहा यूपी मॉडल गौरतलब है कि मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (भारत सरकार) ने भी यूपीनेडा द्वारा विकसित इस मॉडल की सराहना की है। मंत्रालय ने केंद्रीय स्तर पर इसी प्रकार का पोर्टल विकसित करने के लिए यूपीनेडा से तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया है। इसके लिए निदेशक इंद्रजीत सिंह द्वारा एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जो केंद्र सरकार को तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। यह पहल उत्तर प्रदेश को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है। सौर ऊर्जा में यूपी की बड़ी उपलब्धि योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना’ के अंतर्गत उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य में अब तक 4.80 लाख से अधिक घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। यह उपलब्धि न केवल प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करती है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।सरकार का उद्देश्य ‘हर घर सोलर’ की परिकल्पना को साकार करना है, जिससे आम नागरिकों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सके। इससे बिजली बिल में कमी, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता जैसे कई लाभ सुनिश्चित हो रहे हैं।

योगी ने बंगाल में तृकां को घेरा, बोले- राम के नाम और दुर्गा पूजा से ममता दीदी को नफरत, सड़कों पर कराती हैं इफ्तार पार्टी

गारबेटा में भी योगी-योगी, सड़कों-छतों पर खड़े होकर हजारों लोगों ने किया बुलडोजर बाबा का दीदार योगी ने बंगाल में तृकां को घेरा, बोले- राम के नाम और दुर्गा पूजा से ममता दीदी को नफरत, सड़कों पर कराती हैं इफ्तार पार्टी  सीएम योगी ने गिनाईं यूपी की विशेषताएं, कहा- यूपी की सड़कों से गुजरिए, फिर भी हाथ पर रखे कप से नहीं छलकेगा पानी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल की गारबेटा विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार प्रदीप लोढ़ा के पक्ष में की चुनावी रैली   पश्चिम मेदिनीपुर पश्चिम बंगाल चुनाव में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जबर्दस्त क्रेज दिख रहा है। एक ओर चिलचिलाती धूप में योगी आदित्यनाथ भाजपा प्रत्याशियों के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर उन्हें देखने-सुनने और एक झलक पाने को हजारों की भीड़ उमड़ रही है। सोमवार को गारबेटा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार प्रदीप लोढ़ा के पक्ष में हुई चुनावी रैली में भी यही नजारा दिखा, जब दीवारों, वाहनों और घरों की छतों पर खड़े होकर लोगों ने योगी आदित्यनाथ का भाषण सुना और योगी-योगी की गूंज से उनका बंगाल की धरा पर स्वागत किया। योगी आदित्यनाथ ने भी नौजवानों, किसानों, महिलाओं से आह्वान किया कि जिस बंगाल को कांग्रेस, कम्युनिस्टों और तृणमूल कांग्रेस ने कंगाल किया है, उसे इन पार्टियों की अराजकता से मुक्त कराइए।  तृणमूल की अराजकता से मुक्त अब डबल इंजन सरकार लाने जा रहा पश्चिम बंगाल  सीएम ने बंगाल के राष्ट्रनायकों की धरा बताया, कहा कि जब तुष्टिकरण की पराकाष्ठा और टीएमसी सरकार की गुंडागर्दी चरम पर हो तो नेताजी सुभाष चंद्र बोस याद आते हैं। यहां के नौजवानों के सामने पहचान का संकट आया है। कभी लीडर की भूमिका में रहा बंगाल लूजर की भूमिका में हो गया है। भारत की आर्थिक उन्नति का आधार रहा बंगाल तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस व कम्युनिस्टों के लूटतंत्र का शिकार होकर कंगाल हो गया है। तृणमूल की अराजकता से मुक्त होकर बंगाल भी अब डबल इंजन सरकार का स्वाद चखने जा रहा है।  यूपी में हैं ऐसी सड़कें कि हाथ पर रखे कप से पानी भी नहीं छलकेगा सीएम योगी ने आरोप लगाया कि जयश्रीराम बोलने पर ममता दीदी को परेशानी होती है। सड़कों पर इफ्तार पार्टी कराने वाली ममता दीदी ने राम नाम, दुर्गा पूजा, मूर्ति विसर्जन, शोभायात्रा पर बैन लगा दिया है। 2017 के पहले उत्तर प्रदेश में भी अराजकता, गुंडागर्दी, सड़कों पर नमाज और इफ्तार पार्टी होती थी, लेकिन यूपी में 9 साल से डबल इंजन सरकार चल रही है, तबसे नो कर्फ्यू, नो दंगा है, यूपी में सब चंगा है। वहां किसी के हक पर कोई डकैती नहीं डाल सकता। यूपी में ऐसी सड़कें हैं कि हाथ पर रखे कप से पानी नहीं छलकेगा। यूपी हाईवे स्टेट, एक्सप्रेसवे स्टेट, सर्वाधिक एयरपोर्ट वाला स्टेट, सर्वाधिक रोजगार देने वाला राज्य यूपी बन गया। जहां पहले उपद्रव होता है, वहां अब उत्सव हो रहा है।  बंगाल में राम का नाम लेने से चिढ़ती हैं ममता दीदी और यूपी में बन गया भव्य राम मंदिर सीएम योगी ने कहा कि अब यूपी में सड़कों पर इफ्तारी और नमाज नहीं होती है। मस्जिद से अजान भी नहीं सुनाई देती। यूपी में हर तरफ खुशहाली है। ममता दीदी बंगाल में राम का नाम लेने पर चिढ़ती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आसमान को छूता भव्य राम मंदिर का निर्माण हो गया। हर भारतीय को सीना तानकर खड़े होने और मर्यादा की प्रेरणा देने वाला राम मंदिर बताता है कि आस्था झुकती, रुकती, टूटती नहीं है। बस चुनौती का सामना करने की इच्छाशक्ति हो। वहां विधर्मियों के हौसले पस्त हुए। यूपी में माफिया की हड्डी-पसली को चकनाचूर कर देता है बुलडोजर सीएम ने कहा कि यूपी में गोहत्या, लवजेहाद, लैंडजेहाद नहीं हो सकता। माफिया व गुंडों ने हिमाकत की तो बुलडोजर उसकी हड्डी-पसली को चकनाचूर कर देता है। टीएमसी का मतलब टेरर, माफियाराज व करप्शन है। इसे केवल भाजपा सरकार ही समाप्त कर सकती है। न गोहत्या होने देंगे और न ही हिंदू को बंटने देंगे। उन्नति के लिए बंगाल को भी डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में कार्य करना है।

बेसिक शिक्षा के 32 हजार से अधिक विद्यालय अब बने ‘निपुण’

बेसिक शिक्षा के 32 हजार से अधिक विद्यालय अब ‘निपुण योगी सरकार में बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लगातार प्रयासों का ठोस परिणाम हर स्कूल को ₹50 हजार की सहायता, निपुण स्कूलों के शिक्षकों का सम्मान लखनऊ  योगी सरकार में बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किए जा रहे लगातार प्रयासों का बड़ा परिणाम सामने आया है। निपुण भारत मिशन के तहत किए गए ताजा आकलन में 32,480 प्राथमिक विद्यालय ‘निपुण’ घोषित किए गए हैं। इन विद्यालयों में कक्षा 1 और 2 के कम से कम 80 प्रतिशत बच्चों ने भाषा और गणित में अपेक्षित दक्षता हासिल की है। इन विद्यालयों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) प्रशिक्षुओं के माध्यम से कराए गए इस आकलन को पारदर्शी और जमीनी माना जा रहा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि कड़े मानकों के बावजूद यह परिणाम गुणवत्ता सुधार की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। निपुण रैंकिंग वाले टॉप जिले निपुण रैंकिंग में प्रदेश के कई जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। निपुण आकलन के आधार पर सबसे अधिक निपुण विद्यालयों वाले जिलों में हरदोई (1002 विद्यालय), अलीगढ़ (969 विद्यालय), शाहजहांपुर (916 विद्यालय), महाराजगंज (874 विद्यालय) और खीरी (830 विद्यालय) शीर्ष स्थान पर हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि इन जिलों में बड़ी संख्या में विद्यालयों ने निपुण मानक हासिल किया है और शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के प्रयासों का ठोस असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। पारदर्शी आकलन, डीएलएड प्रशिक्षुओं की भूमिका इस बार आकलन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डीएलएड प्रशिक्षुओं को जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने विद्यालयों में जाकर कक्षा 1 और 2 के छात्रों की सीखने की क्षमता का वास्तविक परीक्षण किया। निपुण भारत मॉनिटरिंग सेंटर के माध्यम से यह रिपोर्ट सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों के पोर्टल पर उपलब्ध करा दी गई है। इससे न सिर्फ योगी सरकार की पारदर्शिता नीति को बल मिला है, बल्कि जवाबदेही भी तय हुई है। शिक्षकों का सम्मान और आर्थिक प्रोत्साहन निपुण घोषित विद्यालयों के लिए सरकार ने विशेष प्रोत्साहन योजना लागू की है। प्रत्येक विद्यालय को ₹50 हजार की धनराशि दी जाती है, जिसका उपयोग शैक्षणिक सामग्री और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को जिला और ब्लॉक स्तर पर सम्मानित किया जाता है। विद्यालय परिसरों में ‘निपुण विद्यालय’ का लोगो भी प्रदर्शित किया जाता है, जिससे उनकी अलग पहचान बनती है। गुणवत्ता सुधार का व्यापक अभियान निपुण परिणामों के पीछे व्यापक तैयारी की भूमिका है। बेसिक स्कूलों के शिक्षकों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी (पढ़ने, लिखने और गणना) आधारित प्रशिक्षण दिया गया है। परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास व ICT लैब विकसित किए गए हैं। 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट वितरण से डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा मिला है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 1.32 लाख विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं सुदृढ़ की गई हैं। स्कूल चलो अभियान के तहत 2024-25 में 13.22 लाख और 2025-26 में 15.84 लाख बच्चों का नामांकन कराया गया। 7.73 लाख आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा गया।  समग्र बदलाव का संकेत 2025-26 में करीब 1.07 लाख परिषदीय विद्यालयों का आकलन किया गया था। कड़े मानकों के बावजूद 32,480 विद्यालयों का निपुण घोषित होना इस बात का संकेत है कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार हुआ है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कम प्रदर्शन वाले विद्यालयों को चिन्हित कर उन्हें निपुण श्रेणी में लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। प्रदेश में बेसिक शिक्षा अब केवल नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि सीखने के परिणामों पर फोकस है। निपुण भारत मिशन के तहत मिले ये परिणाम बताते हैं कि नीति, प्रशिक्षण और निगरानी का समन्वय असर दिखा रहा है। आने वाले समय में और अधिक विद्यालयों को निपुण श्रेणी में लाने की तैयारी है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता को और ऊंचा उठाया जा सके।

नासा के वर्ल्ड नाइट मैप में उत्तर प्रदेश की चमक, योगी सरकार की ऊर्जा नीति को मिली वैश्विक पहचान

नासा के वर्ल्ड नाइट मैप में चमका उत्तर प्रदेश, योगी सरकार की ऊर्जा नीति को मिली वैश्विक पहचान वैश्विक मंच पर चमका उत्तर प्रदेश का नाम, हर घर रोशनी की योगी सरकार की नीति को मिली अंतर्राष्ट्रीय मान्यता हर घर रोशनी के संकल्प को अंतर्राष्ट्रीय मुहर, उत्पादन से वितरण तक यूपी बना मॉडल लखनऊ,  नासा द्वारा जारी वर्ल्ड नाइट मैप में उत्तर प्रदेश का दुनिया के सबसे अधिक रोशन क्षेत्रों में प्रमुखता से उभरना प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बनकर सामने आया है। यह केवल रोशनी का दृश्यात्मक आंकलन नहीं, बल्कि योगी सरकार के “सबको बिजली, पर्याप्त बिजली और गुणवत्तापूर्ण बिजली” के संकल्प की वैश्विक पुष्टि है। दरअसल, नासा ने सैटेलाइट तस्वीरों पर आधारित एक नया ग्लोबल मैप जारी किया है, जिसमें दिखाया गया है कि 2014 से 2022 के बीच पृथ्वी पर रात की रोशनी में कैसे बदलाव आया है? वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की तस्वीर बनाने के लिए नौ सालों तक हर रात जमा की गई 16 लाख सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया। नतीजों से पता चला कि शहरी विकास के कारण उत्तरी भारत में, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में रात की रोशनी का स्तर बढ़ गया है। गांव से शहर तक निर्बाध बिजली आपूर्ति उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में बीते वर्षों में जो संरचनात्मक बदलाव किए हैं, उनका प्रभाव अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी दिखाई दे रहा है। गांव से शहर तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नीति, प्रबंधन और तकनीक के स्तर पर व्यापक सुधार किए हैं। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा के मार्गदर्शन में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को नई दिशा मिली है। उत्पादन क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि के साथ-साथ ऊर्जा के विविध स्रोतों को मजबूत किया गया है, जिससे बढ़ती मांग को संतुलित तरीके से पूरा किया जा रहा है। उत्पादन से ट्रांसमिशन तक मजबूत ढांचा प्रदेश में विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हुई है। घाटमपुर तापीय विद्युत परियोजना की तीसरी इकाई का सफल सिंक्रनाइजेशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वहीं ट्रांसमिशन और वितरण प्रणाली में सुधार के तहत नए उपकेंद्र स्थापित किए गए, जर्जर लाइनों का आधुनिकीकरण हुआ और स्मार्ट तकनीकों का उपयोग बढ़ा। इससे बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और निर्बाध हुई है, साथ ही लाइन लॉस में भी उल्लेखनीय कमी आई है। तकनीक और पारदर्शिता से उपभोक्ताओं को लाभ योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल हुआ है। उपभोक्ताओं को अब रियल टाइम खपत की जानकारी मिल रही है, ऑनलाइन सेवाएं आसान हुईं हैं और विद्युत चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि उपभोक्ता संतुष्टि भी मजबूत हुई है। कृषि, उद्योग और निवेश को मिली नई रफ्तार निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुगम हुई है, उद्योगों को स्थिर बिजली मिली है और सेवा क्षेत्र में भी विस्तार देखने को मिला है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश अब निवेश के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य के रूप में उभर रहा है। नासा का वर्ल्ड नाइट मैप उत्तर प्रदेश की ऊर्जा नीति, प्रबंधन क्षमता और विकासोन्मुखी सोच की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति है। यह उपलब्धि आने वाले समय में ऊर्जा क्षेत्र में और अधिक निवेश, नवाचार और आत्मनिर्भरता को गति देगी।

सीएम बोले- ममता दीदी कहती है खेला होवे, लेकिन इस बार खेला खत्म होगा और विकास प्रारंभ होगा

अब टीएमसी का खेल खत्म होगा और बंगाल का विकास शुरू होगा: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल के जॉयपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी विश्वजीत महतो के पक्ष में की जनसभा सीएम बोले- ममता दीदी कहती है खेला होवे, लेकिन इस बार खेला खत्म होगा और विकास प्रारंभ होगा बंगाल की प्रतिभा आज पलायन कर रही है, बंगाल के पुरुषार्थ को कुंद कर दिया गया है: सीएम वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में हमें टीएमसी मुक्त बंगाल चाहिए: योगी जॉयपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के जॉयपुर विधानसभा क्षेत्र में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा प्रत्याशी विश्वजीत महतो के पक्ष में भारी मतदान की अपील की। इस अवसर पर उन्होंने बंगाल की गौरवशाली विरासत, समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और वर्तमान में व्याप्त अराजकता-गुंडागर्दी के बीच स्पष्ट अंतर रखते हुए कहा कि बंगाल की धरा रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और खुदीराम बोस जैसी महान विभूतियों की भूमि रही है। यहां की कुम्हार-प्रजापति समुदाय की मिट्टी की कला, छाऊ नृत्य की विश्वविख्यात परंपरा, कुरमाली-संथाली संस्कृति की आत्मीयता और खजूर रस की मिठास बंगाल की असली पहचान हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ममता दीदी कहती हैं ‘खेला होवे’, लेकिन अब टीएमसी का खेल समाप्त हो चुका है। अब बंगाल का विकास प्रारंभ होगा।  टीएमसी मुक्त बंगाल का मतलब है विकास की शुरुआत मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारा दायित्व है कि विरासत का संरक्षण करते हुए हम विकास करें। बंगाल की धरा प्रेरणा की धरा है। बंगाल की धरा भारत को दिशा देने वाली धरा थी। बंगाल में प्रतिभा थी, लेकिन प्रतिभा पलायन कर रही है। बंगाल में पुरुषार्थ था, लेकिन उसे कुंद कर दिया गया है। बंगाल में वह सब कुछ था जो बंगाल को भारत के अंदर नेतृत्व देने का माद्दा रखता था। लेकिन बंगाल को एक साजिश के तहत पहले कांग्रेस ने, फिर कम्युनिस्टों ने और अब टीएमसी ने अराजकता और गुंडागर्दी का अड्डा बना दिया है। कभी बंगाल की धरती से निकला “वंदे मातरम” भारत की आजादी का अमर मंत्र बन गया था। यह वर्ष वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने का वर्ष है। इस उपलक्ष्य में हमें टीएमसी मुक्त बंगाल चाहिए, क्योंकि टीएमसी मुक्त बंगाल का मतलब है डबल इंजन की भाजपा सरकार और डबल इंजन की भाजपा सरकार का मतलब है, बंगाल में अब विकास शुरू होगा।  ..ताकि मोदी जी द्वारा भेजा गया विकास का पैसा हजम न हो मुख्यमंत्री ने कहा कि जॉयपुर की पावन धरा वीरांगना लाबण्या प्रभा घोष के सुर और बलिदान की साक्षी है। यहां के कुम्हार और प्रजापति समुदाय की अथक मेहनत से निर्मित कलाकृतियां देशभर में प्रसिद्ध हैं, साथ ही खजूर रस की मिठास और विश्वविख्यात छाऊ नृत्य इस भूमि की सांस्कृतिक पहचान हैं। कुरमाली और संथाली संस्कृति की अपनापन व आत्मीयता जॉयपुर की असली ताकत है। यह वही पावन धरा है, जहां से नेताजी सुभाष चंद्र बोस, स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, लाहिड़ी महाशय, स्वामी प्रणवानंद और खुदीराम बोस जैसी विभूतियां निकलीं। लेकिन आज टीएमसी के शासन में दुर्गा पूजा पर रोक, राम भक्तों पर अत्याचार, लव जिहाद-लैंड जिहाद, गौ-हत्या, माफिया राज, उद्योग-धंधों का बंद होना और 30 लाख नौजवानों की बेरोजगारी जैसी समस्याएं बंगाल को ग्रस्त कर रहीं हैं। एक समय देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन रहे बंगाल को कांग्रेस, कम्युनिस्टों और अब टीएमसी ने अराजकता का अड्डा बना दिया है। इसलिए यहां डबल इंजन की भाजपा सरकार की जरूरत है, ताकि मोदी जी द्वारा भेजा गया विकास का पैसा हजम न हो और विरासत का संरक्षण करते हुए बंगाल में फिर से विकास की नई यात्रा शुरू हो सके। अब यूपी की सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाती मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल में आज जो अराजकता, गुंडागर्दी और तुष्टिकरण की स्थिति है, यही स्थिति वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में थी। उस समय यूपी में पर्व-त्योहार से पहले दंगे होते थे, कर्फ्यू लगा रहता था, लव जिहाद-लैंड जिहाद आम थे और गौ-हत्या सरेआम होती थी। लेकिन जब उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की भाजपा सरकार बनी, तो सब बदल गया। आज वहां उपद्रव नहीं, उत्सव है। 65 लाख गरीबों को आवास, करोड़ों शौचालय, 10 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत के तहत ₹5 लाख की स्वास्थ्य सुविधा, 16 करोड़ को राशन और 2 करोड़ को उज्ज्वला योजना के तहत फ्री एलपीजी कनेक्शन मिले हैं। नौजवानों को रोजगार, महिलाओं को सुरक्षा, किसानों के चेहरे पर खुशहाली और कुम्हार समुदाय को मुफ्त मिट्टी व सोलर चाक जैसी सुविधाएं दी गईं हैं। आज यूपी में न कर्फ्यू है, न दंगे। सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाती, मस्जिदों से तेज आवाज नहीं आती। वहां अब एक ही नारा गूंजता है “न गौ माता को कटने देंगे, न हिंदुओं को बंटने देंगे”। हर जाति का हिंदू सुरक्षित और समृद्ध है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन चुका है और प्रयागराज महाकुंभ ने विश्व को आयोजन की मिसाल दी है। यूपी का यह मॉडल साबित करता है कि डबल इंजन सरकार आने से विकास होता है और बंगाल में भी यही बदलाव लाना है।

विकास और विरासत का संतुलन, योगी सरकार बना रही है नए उत्तर प्रदेश की पहचान

विकास के साथ विरासत का सम्मान, योगी सरकार गढ़ रही नए उत्तर प्रदेश की पहचान एक्सप्रेस-वे से रश्मिरथी पर्व तक, विकास और संस्कृति का संतुलित मॉडल महापुरुषों के सम्मान संग आगे बढ़ता यूपी, योगी सरकार की सकारात्मक पहल लखनऊ  उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ महापुरुषों की विरासत को सम्मान देने की दिशा में योगी सरकार लगातार सकारात्मक पहल कर रही है। प्रदेश में एक ओर जहां एक्सप्रेस-वे, मेडिकल कॉलेज, स्मार्ट सिटी, निवेश और रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रनायकों, संतों, साहित्यकारों और समाज सुधारकों की स्मृतियों को सहेजने के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। यही संतुलित सोच योगी सरकार की कार्यशैली को अलग पहचान दे रही है। प्रेरणास्रोत महापुरुषों से जोड़ रही योगी सरकार सरकार का कहना है कि केवल भौतिक विकास ही पर्याप्त नहीं, बल्कि समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, प्रेरणास्रोत महापुरुषों और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के तहत प्रदेश में समय-समय पर महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर बड़े स्तर पर आयोजन किए जा रहे हैं। इनमें बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, स्वामी विवेकानंद, महाराजा सुहेलदेव, संत रविदास, कबीरदास, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जैसे महान व्यक्तित्वों को सम्मानपूर्वक याद किया जाता है। साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रचिंतन का अनूठा संगम  पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर 24 से 26 अप्रैल तक लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ आयोजित किया जाएगा। राष्ट्रकवि दिनकर की कालजयी कृति रश्मिरथी के हीरक जयंती वर्ष (75 वर्ष) पर हो रहे इस आयोजन में साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रचिंतन का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि होंगे, जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। लोकमान्य तिलक एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्र निर्माण में योगदान पर चर्चा वहीं 24 अप्रैल को ‘रश्मिरथी संवाद’ स्मारिका का लोकार्पण, राष्ट्रीय परिसंवाद तथा ‘रश्मिरथी’ नाटक का मंचन होगा। 25 अप्रैल को स्वामी विवेकानंद के सांस्कृतिक भारत निर्माण में योगदान पर परिसंवाद और नाटक प्रस्तुत किया जाएगा। 26 अप्रैल को लोकमान्य तिलक एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्र निर्माण में योगदान पर चर्चा होगी। साथ ही अटल जी की कविताओं पर आधारित संगीतमय नृत्य नाटिका अटल स्वरांजलि तथा लोकमान्य तिलक नाटक मंचित होगा। योगी सरकार में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मिली ऊंचाई यूपी में ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान, संघर्ष और सामाजिक समरसता की प्रेरणा मिलती है। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में निबंध, वाद-विवाद, कविता पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए नई पीढ़ी को महापुरुषों के विचारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई ऊंचाई मिली है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज, चित्रकूट और नैमिषारण्य जैसे स्थलों का व्यापक विकास किया गया है। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान मजबूत हुई है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

यूपी बना आयुष्मान भारत योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य, एनएचए ने किया सम्मान

आयुष्मान भारत का लाभ देने में यूपी देश में अव्वल, एनएचए ने किया सम्मानित   नेशनल हेल्थ ऑथॉरिटी ने पुणे में आयोजित दो दिवसीय शिविर में किया सम्मानित   प्रदेश को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के उत्कृष्ट संचालन को मिला पुरस्कार   प्रदेश में डिजिटलीकरण और व्यापक नेटवर्क से मरीजों को मिल रही बेहतर सुविधा लखनऊ  योगी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। योगी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना का लाभ शत-प्रतिशत लाभार्थियों को देने एवं धरातल पर उतारने में पूरे देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। इसके लिए नेशनल हेल्थ ऑथॉरिटी (एनएचए) द्वारा पुणे में 17 और 18 अप्रैल को आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में प्रदेश को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के उत्कृष्ट संचालन के लिए सम्मानित किया गया। यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग की सचिव रितु माहेश्वरी और साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और डिजिटलीकरण की दिशा में किये जा रहे प्रयासों का नतीजा है। आयुष्मान से जुड़े अस्पतालों में मिल रही आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की सुविधा साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 6,433 अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध हैं, जिनमें 3,521 निजी और 2,912 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि योगी  ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाने के लिए मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। स्वास्थ्य विभाग की सचिव रितु माहेश्वरी ने बताया कि इन अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे संस्थान शामिल हैं, जहां एबीडीएम-इनेबेल्ड एचएमआईएस(हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) की सुविधा उपलब्ध है, जिससे मरीजों को डिजिटल और पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं। पिछले एक वर्ष में प्रदेश ने उच्च गुणवत्ता वाले अस्पतालों को प्राथमिकता देते हुए सूचीबद्ध करने की नीति अपनाई है।  गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा हुई बेहतर स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि हाल ही में 100 या उससे अधिक बेड वाले 55 बड़े अस्पतालों को योजना से जोड़ा गया है। इन अस्पतालों के शामिल होने से प्रदेश में द्वितीयक और तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है, जिससे गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा और बेहतर हुई है। योगी सरकार ने केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया है। न्यूरोसर्जरी, नियोनेटल केयर, ऑन्कोलॉजी, रेडियोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी और बर्न मैनेजमेंट जैसी विशेष सेवाओं को प्राथमिकता देकर प्रदेश ने स्वास्थ्य सुविधाओं को नई ऊंचाई दी है। इन सुविधाओं के विस्तार से उन मरीजों को भी राहत मिली है, जिन्हें पहले इलाज के लिए बड़े शहरों या अन्य प्रदेश का रुख करना पड़ता था। इसका सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिल रहा है। पहले जहां इन क्षेत्रों में उन्नत चिकित्सा सुविधाएं सीमित थीं, वहीं अब आयुष्मान भारत योजना के तहत बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है, बल्कि गरीब और कमजोर वर्गों के लिए इलाज का आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।