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ट्रेनों में अपराधियों पर नजर रखने के लिए पुलिस ने शुरू किया हाई-टेक सिस्टम

 रामपुर प्लेटफार्म के साथ ट्रेनों में सक्रिय अपराधियों की कुंडली अब कंप्यूटर पर एक क्लिक करते ही खुल जाएगी। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) इन दिनों यक्ष एप में डाटा अपलोड कर अपडेट कर रही है। इस एप में अपराधियों के नाम-पता, फोटो, फिंगर प्रिंट और वॉयस सैंपल के साथ गिरोह का विवरण होगा। रामपुर में जीआरपी थाना प्रभारी ईश्वर चंद ने बताया कि प्रदेश स्तर पर लांच हुआ यक्ष एप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युक्त है। अनुभाग के सभी अपराधियों के नाम, संपूर्ण पता, थाना, उनकी फोटो (सभी प्रकार से खींची हुई), उनके फिंगर प्रिंट के अलावा उनकी आवाज के सैंपल आदि, इसमें अपडेट किए जा रहे हैं। इससे अपराधी अब कहीं भी अपराध करेगा तो उसकी फोटो अपलोड करते ही उसकी पूरी कुंडली ऑनलाइन सामने आ जाएगी। उन्होंने बताया कि एप के जरिये अपराधियों की निगरानी करना जीआरपी के लिए आसान होगा। बीट पुलिसिंग के जरिये अपराधियों की वर्तमान गतिविधियों को एप पर अपडेट करने का काम अंतिम चरण में है। समय-समय पर अपडेट करनी होगी जानकारी थाना प्रभारी ईश्वर चंद ने बताया कि एप पर दी जाने वाली जानकारी समय-समय पर अपडेट की जाएगी। इसकी भी एप में सुविधा दी गई है। यदि अपराधी की मौत हो जाती है या फिर मामले में वह दोषमुक्त हो जाता है तो तत्काल ऐसे अपराधी का डेटा हटा दिया जाएगा। 358 अपराधी पर रहेगी पूरी निगरानी थाना प्रभारी ने बताया कि यक्ष एप पर अभी 358 अपराधी ऐसे हैं, जिनके बारे में जानकारी का डाटा अपलोड किया गया है। इन सभी की इस यक्ष एप से निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही उन अपराधियों के बारे में भी जानकारी एकत्र की जा रही है, जिनके संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल रही है। ऐसे अपराधियों को एप पर अनुपस्थित किया गया है। पुलिस लगातार उनकी जानकारी कर रही है। क्या बोले एसपी रेलवे एसपी रेलवे आशुतोष शुक्ला ने बताया कि जीआरपी भी अब यक्ष एप पर अपराधियों का डाटा फीड कर रही है। इससे अपराधियों पर नजर रखी जा सकेगी। इस एप में अपराधियों के नाम-पता, फोटो, फिंगर प्रिंट और वॉयस सैंपल के साथ गिरोह का पूरा विवरण है।

त्योहारों, बड़े आयोजनों, भर्ती परीक्षाओं और विशेष अवसरों पर रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो: मुख्यमंत्री

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश में रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, तकनीक-सक्षम तथा परिणामोन्मुख बनाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश देश का सबसे बड़ा रेल यातायात वाला राज्य है, जहां प्रतिदिन लाखों यात्री रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा, महिला सम्मान, अपराध नियंत्रण और त्वरित पुलिस सहायता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे नेटवर्क में अपराध और असामाजिक गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए तथा जीरो टॉलरेंस की नीति को पूरी दृढ़ता के साथ लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रेलवे परिसरों, प्लेटफॉर्मों और ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए।  जीआरपी के सांगठनिक ढांचे के बारे में डीजी रेलवे ने बताया कि वर्ष 1867 में स्थापित जीआरपी उत्तर प्रदेश वर्तमान में छह अनुभागों, 65 थानों तथा 89 अस्थायी चौकियों के माध्यम से कार्य कर रही है। प्रतिदिन 3031 से अधिक ट्रेनों, लगभग 1550 रेलवे स्टेशनों तथा 30 लाख से अधिक रेल यात्रियों की सुरक्षा का दायित्व जीआरपी निभा रही है।  रेलवे ट्रैक और ट्रेन सुरक्षा की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने रेलवे प्रशासन, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय को और मजबूत करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि रेलवे ट्रैक सुरक्षा के लिए संयुक्त गश्त, ड्रोन एवं सीसीटीवी आधारित निगरानी, डिजिटल सत्यापन, निरीक्षण एप के माध्यम से संदिग्ध व्यक्तियों की जांच, मुखबिर तंत्र को सुदृढ़ बनाने तथा कबाड़ बाजारों एवं संवेदनशील स्थलों की निगरानी जैसे उपाय किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने रेलवे परिसरों और ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि जनजागरूकता, सुरक्षा चौपाल, अभिभावकों और युवाओं की काउंसिलिंग, रेल मित्र नेटवर्क, त्वरित अभियोजन तथा प्रभावी निगरानी के परिणामस्वरूप विभिन्न रेल मंडलों में पत्थरबाजी की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि त्योहारों, बड़े आयोजनों, भर्ती परीक्षाओं और विशेष अवसरों पर रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि प्रवेश एवं निकास नियंत्रण, कतार प्रबंधन, सार्वजनिक घोषणाओं, 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी तथा रेलवे प्रशासन के साथ समन्वय के माध्यम से भीड़ नियंत्रण को प्रभावी बनाया जाए।   मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए निर्देश दिए कि रेलवे नेटवर्क में महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए। मानव तस्करी और गुमशुदा बच्चों की बरामदगी से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इन अभियानों को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत 1 जनवरी 2026 से 26 मई 2026 तक 860 बच्चों को बरामद किया गया। विभिन्न अभियानों के माध्यम से अब तक 2325 व्यक्तियों को उनके परिवारों से मिलाने में सफलता प्राप्त हुई है। बैठक में यह भी बताया गया कि हरदोई जीआरपी थाना उत्तर भारत का पहला आईएसओ 9001 प्रमाणित जीआरपी थाना बन चुका है। अभियोजन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अपराधियों को त्वरित एवं प्रभावी दंड सुनिश्चित करने पर बल दिया। भविष्य की आवश्यकताओं पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने जीआरपी के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक मानव संसाधन की तैनाती और उपकरणों की उपलब्धता के संबंध में राज्य सरकार द्वारा आवश्यक सहयोग के लिए निर्देशित किया साथ ही अन्य आवश्यकताओं के लिए शासन स्तर से रेलवे मंत्रालय और रेलवे बोर्ड से संवाद के निर्देश भी दिए। वर्ष 2027 में प्रस्तावित हरिद्वार अर्धकुंभ की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अभी से व्यापक सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन योजना तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने संबंधित जनपदों और एजेंसियों के बीच समयबद्ध समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

भर्ती परीक्षा के लिए यात्रा करने वाले अभ्यर्थियों को बसों में मिलेगी 50 फीसदी की छूट

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों की भर्ती परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को राज्य परिवहन निगम की बसों में यात्रा के दौरान किराए में 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और सुविधाजनक भर्ती प्रक्रिया उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के विभिन्न जनपदों में आवागमन को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है, जिससे उन्हें आर्थिक राहत मिल सके और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों की भर्ती परीक्षा 08, 09 एवं 10 जून को प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित की जा रही है। इस परीक्षा में लगभग 29 लाख अभ्यर्थियों के सम्मिलित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री के निर्णय के अनुसार परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थी अपना प्रवेश पत्र दिखाकर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में 50 प्रतिशत रियायती किराए का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। यह व्यवस्था परीक्षा अवधि के दौरान अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए लागू रहेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि परीक्षा के सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि अभ्यर्थियों को सुरक्षित, सुगम और अनुकूल वातावरण में परीक्षा देने का अवसर मिल सके।

उत्तर प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने प्रदेश को विशेष गौरव का अवसर प्रदान किया: सीएम योगी

लखनऊ हॉकी पुरुष अंडर-18 जूनियर एशिया कप 2026 में भारतीय हॉकी टीम द्वारा स्वर्ण पदक जीतने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खिलाड़ियों को शनिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। जापान के काकामिगाहारा में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने मेजबान जापान को 4-1 से हराकर एशियाई चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश के उन पांच खिलाड़ियों की सराहना की, जिन्होंने टीम इंडिया की इस ऐतिहासिक जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए प्रदेश का मान बढ़ाया है।   भारतीय हॉकी विश्व पटल पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करे, यही मंगलकामना: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स लिखा कि जापान में आयोजित पुरुष अंडर-18 एशिया कप 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर मां भारती को गौरवभूषित करने वाली भारतीय हॉकी टीम एवं समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई! इस ऐतिहासिक विजय में उत्तर प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों केतन कुशवाहा, शाहरुख अली, प्रह्लाद राजभर, राहुल यादव एवं रोमित पाल के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने प्रदेश को विशेष गौरव का अवसर प्रदान किया है। आप सभी ने अपने कौशल, समर्पण और अनुशासन से राष्ट्र का मान बढ़ाया है। टीम के सभी खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ एवं सहयोगी दल का हार्दिक अभिनंदन। विजय की यह स्वर्णिम यात्रा निरंतर नई ऊंचाइयों को स्पर्श करे, भारतीय हॉकी विश्व पटल पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करे, यही मंगलकामना है।  डॉ. आर.पी. सिंह के नेतृत्व में हुई चयन प्रक्रिया गौरतलब है कि, भारतीय टीम के साथ उत्तर प्रदेश के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रजनीश मिश्रा ने कोचिंग स्टाफ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, हॉकी इंडिया के मुख्य चयनकर्ता एवं उत्तर प्रदेश हॉकी के अध्यक्ष डॉ. आर.पी. सिंह के नेतृत्व में हुई चयन प्रक्रिया को भी इस सफलता का अहम आधार माना जा रहा है।

तीन दिनों तक प्रदेश के 75 जिलों में होगी आरक्षी भर्ती परीक्षा, 1183 केंद्रों पर कड़ी निगरानी

लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी (सिपाही) नागरिक पुलिस सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा सोमवार से प्रारंभ हो रही है। यह परीक्षा 8, 9 एवं 10 जून 2026 को प्रदेश के सभी 75 जिलों में आयोजित की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 32,679 पदों के लिए 28,86,797 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। परीक्षा के सफल एवं निष्पक्ष संचालन के लिए प्रदेशभर में 1,183 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित होगी। प्रथम पाली सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक तथा द्वितीय पाली दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक संचालित की जाएगी। अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए निर्धारित समय के अतिरिक्त 5 मिनट अतिरिक्त भी दिए जाएंगे। तीन दिनों में कुल छह पालियों में परीक्षा संपन्न होगी। हर पाली में 4.81 लाख से अधिक परीक्षार्थी डीजी भर्ती बोर्ड एसबी शिरडकर ने बताया कि भर्ती परीक्षा में कुल अभ्यर्थियों की संख्या को देखते हुए प्रत्येक पाली में लगभग 4,81,416 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन, पुलिस विभाग तथा जिला प्रशासन की ओर से व्यापक तैयारियां की गई हैं। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है तथा अभ्यर्थियों की पहचान और प्रवेश प्रक्रिया के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। पारदर्शिता और सुरक्षा पर विशेष जोर परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, स्टैटिक मजिस्ट्रेट, पर्यवेक्षक तथा पुलिस बल की तैनाती की गई है। संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। परीक्षा केंद्रों के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।

सिपाही भर्ती परीक्षा 2026: 1183 केंद्रों पर दो-दो पालियों में होगी परीक्षा

लखनऊ यूपी पुलिस में 32,679 हजार पदों पर सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा आठ, नौ व 10 जून को दो-दो पालियों में होगी। प्रदेश में 1183 परीक्षा केंद्रों पर 28.86 लाख महिला व पुरुष अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा केंद्रों पर तीन स्तरीय जांच होगी। अभ्यर्थियों को गेट पर प्रारंभिक, बायोमेट्रिक जांच व ई-केवाईसी के बाद अंदर जाने दिया जाएगा। नकलविहीन व शांतिपूर्ण परीक्षा कराने के लिए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त कराए जा रहे हैं। सभी जिलों में परीक्षा के दौरान यातायात प्रबंधन को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। सभी केंद्रों की गतिविधियों की निगरानी सीसीटीवी कैमरों की लाइव की जाएगी। इसे जिला व पुलिस भर्ती प्रोन्नति बोर्ड के कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। परीक्षा केंद्रों पर तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी भर्ती परीक्षा के दौरान कहीं कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए खासकर एसटीएफ को सक्रिय किया गया। एसटीएफ साल्वर गिरोह पर कड़ी नजर रखने के साथ ही भर्ती परीक्षा के दौरान पहले गड़बड़ी कर चुके दागियों पर भी नजर रखेगी। भर्ती बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार अब तक 12 लाख से अधिक अभ्यर्थी अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर चुके हैं। 10 जून को होने वाली परीक्षा के प्रवेश पत्र भर्ती बोर्ड की वेबसाइट पर सात जून को अपलोड किए जाएंगे। डीजीपी मुख्यालय स्थित सोशल मीडिया सेल को भी सक्रिय किया गया है। किसी भी भ्रामक सूचना का तत्काल खंडन करने के साथ ही गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध तत्काल विधिक कार्रवाई होगी। परीक्षा केंद्र पर हर अभ्यर्थी के आधार सत्यापन व ई-केवाईसी और आइरिस आधारित बायोमेट्रिक जांच के लिए अत्याधुनिक उपकरणों का प्रयोग होगा। हर परीक्षा केंद्र पर एक पुलिस उपाधीक्षक बतौर पर्यवेक्षक मुस्तैद रहेगा। हर जिले के कंट्रोल रूम पर पुलिस उपाधीक्षक को प्रभारी बनाया गया है, जो परीक्षा केंद्र की लाइव फीड की निगरानी अपने देख-रेख में कराएंगे। भर्ती बोर्ड ने पहली बार सभी जिला कंट्रोल रूम प्रभारियों की बैठक कर उन्हें विस्तृत निर्देश दिए हैं। पहले हुई भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की उपस्थिति को देखते हुए इस बार भी लगभग 25 प्रतिशत अभ्यर्थियों के परीक्षा छोड़ने की आशंका है। खास-खास बातें – आरक्षी नागरिक पुलिस व समकक्ष 32,679 हजार पदों पर होगी भर्ती – सभी जिलों में कुल 1183 परीक्षा केंद्र बनाए गए – आठ, नौ व 10 जून को दो-दो पालियों में होगी परीक्षा – लगभग 28.86 लाख अभ्यर्थी लेंगे भाग – महिलाओं के लिए आरक्षित हैं 20 प्रतिशत पद यह भी निर्देश – महिला अभ्यर्थियों की जांच एनक्लोजर में केवल महिला पुलिसकर्मी ही करेंगी। – किसी भी अभ्यर्थी के धार्मिक चिह्न जैसे कलावा, धागा, मंगलसूत्र आदि को हटाना आवश्यकता नहीं। – अभ्यर्थी प्रवेश पत्र, आधार कार्ड, नीले या काले पेन के अलावा कोई सामग्री साथ नहीं ले जा सकेंगे।

काशी में बदलाव की तैयारी: मीट-मांस बाजार अब शहर की सीमा से बाहर ले जाने की योजना

 वाराणसी यूपी की धार्मिक नगर वाराणसी में अब शहर के भीतर हर गली-मोहल्ले में मीट-मांस और मछली की बिक्री जल्द ही पुरानी बात हो जाएगी। दरअसल, वाराणसी नगर निगम ने शहर को व्यवस्थित और स्वच्छ रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। जिसके तहत अब मीट-मांस व मछली की सभी दुकानें शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित की जाएंगी। महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में शनिवार को मैदागिन स्थित टाउन हॉल भवन में आयोजित सदन की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए रूपरेखा स्पष्ट कर दी गई। बैठक में शहर के चतुर्दिक विकास, अतिक्रमण और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। जिसमें मीट-मछली के बाजारों को शहर के बाहरी छोर पर व्यवस्थित करने का निर्णय सबसे प्रमुख रहा। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सदन को बताया कि इस योजना के प्रथम चरण में पांच स्थानों का चयन किया जा चुका है। ये सभी स्थान शहर की बाहरी सीमाओं के करीब स्थित हैं, जिससे आम जनता को कोई असुविधा न हो। नगर आयुक्त के मुताबिक आगामी दिनों में शहर के भीतर संचालित मीट-मछली की दुकानों को रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाएगा। सदन में पार्षद गुलशन अली ने यह मामला उठाते हुए कहा कि करीब एक वर्ष पूर्व मीट-मांस और मछली की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन उस पर अब तक प्रभावी अमल नहीं हो सका है। उन्होंने व्यवसायियों की पीड़ा को साझा करते हुए कहा कि सावन महीने में शहर की सभी दुकानें बंद करने के आदेश से मीट व्यवसायियों का रोजगार बुरी तरह प्रभावित होता है। इस पर नगर आयुक्त ने आश्वस्त किया कि शहर की बाहरी सीमा में जगह चिह्नित कर ली गई है और जल्द ही इस प्रस्ताव को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

कब्रिस्तान भूमि पर कब्जे का मामला, प्रशासन ने ध्वस्त की मस्जिद

लखनऊ उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने शनिवार को कब्रिस्तान के लिए आरक्षित सरकारी भूमि पर बने कथित अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कसेरुआ गांव स्थित मुस्तफा कादरी मस्जिद को ध्वस्त करना शुरू कर दिया. प्रशासन की मौजूदगी में दो बुलडोजर और एक क्रेन की मदद से कई घंटे तक कार्रवाई चली. संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया और चार थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई. कार्रवाई के दौरान मस्जिद परिसर से "आई लव मोहम्मद" लिखे पोस्टर और हरे रंग का एक झंडा मिलने का दावा भी सामने आया है. पुलिस ने इन सामग्रियों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि बरामद पोस्टरों और झंडे के संबंध में जांच की जा रही है तथा यह पता लगाया जाएगा कि इन्हें वहां किसने रखा था और उनका उद्देश्य क्या था. उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन के अनुसार, गाटा संख्या 409 की भूमि कब्रिस्तान के लिए आरक्षित थी. जनवरी 2026 में राजस्व विभाग की पैमाइश के दौरान यहां मस्जिद निर्माण और कब्जे का मामला सामने आया था. इसके बाद तहसीलदार न्यायालय में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत वाद दायर किया गया. सुनवाई के दौरान मस्जिद समिति को अपने दावे के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया, लेकिन प्रशासन का कहना है कि पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके. संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने बताया कि तहसीलदार न्यायालय द्वारा अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया गया था. इस आदेश को चुनौती देते हुए जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दायर की गई, लेकिन अपील खारिज होने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई. तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा कब्रिस्तान के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग के बाद अभिलेखों की जांच की गई थी, जिसमें आरक्षित भूमि पर निर्माण का मामला सामने आया. प्रशासन का कहना है कि कब्जामुक्त कराई गई भूमि को ग्राम सभा के माध्यम से कब्रिस्तान के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. फिलहाल इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है. प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने तथा अफवाहों से बचने की अपील की है.

आधार सेवाओं का विस्तार, 22 नए जिलों में यूआईडीएआई केंद्रों का संचालन शुरू

लखनऊ  प्रदेश के 22 और जिलों में आधार सेवा केंद्रों का संचालन शुरू हो गया है। अब इनकी संख्या कुल 32 हो गई है। ये सेवा केंद्र सीधे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की तरफ से संचालित किए जाते हैं। यहां की क्षमता अधिक होती है, जिससे एक दिन में अधिक से अधिक लोगों को आधार सेवा संबंधी सेवा उपलब्ध कराई जाती है। पहले 12 जिलों में ही इस तरह के आधार सेवा केंद्र संचालित हो रहे थे। इसमें लखनऊ, आगरा, गौतमबुद्धनगर, सहारनपुर, कानपुर, गोंडा, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और गाजियाबाद शामिल थे। अब इसमें 22 और जिले जुड़ गए हैं। इसमें अलीगढ़, अयोध्या, हापुड़, मुजफ्फरनगर, रायबरेली, उन्नाव, हाथरस, सीतापुर, बलरामपुर, मथुरा, इटावा, मैनपुरी, गाजीपुर, मऊ, मिर्जापुर, अमेठी, बस्ती और चंदौली है। सुविधा के शुरू होने से इन जिलों व आसपास जिलों के रहने वालों को आधार सुविधाएं बेहतर तरीके से मिल रही हैं। कम समय में काम हो रहा है और एक दिन में अधिक लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कुल 32 जिलों में ये सुविधा शुरू हो चुकी है। 39 जिलों में इस तरह के सेवा केंद्र शुरू करने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए दफ्तर के लिए स्थान चिन्हित कर लिए गए हैं। मैनपॉवर व मशीनें आदि उपलब्ध कराई जा रही हैं। एक दो महीने में इन जिलों में भी आधार सेवा केंद्र शुरू कर दिए जाएंगे। इसलिए इन केंद्रों पर है सहूलियत जिन जिलों में यूआईडीएआई द्वारा संचालित केंद्र नहीं हैं वहा बैंकों व पोस्ट ऑफिसर में आधार संबंधी कार्य होते हैं। वहां की क्षमता कम है लिहाजा कम आवेदन ही स्वीकार किए जाते हैं। यूआईडीएआई से सीधे संचालित केंद्रों पर सभी सुविधाएं हैं। इसलिए इसका लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिलता है।  

पेपर लीक का झांसा देकर छात्रों से ठगी, लखनऊ से आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक कराने का दावा कर छात्रों से पैसे वसूलने वाले एक फर्जी रैकेट का खुलासा हुआ है. यूपी STF ने लखनऊ से ओम कुमार नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि वह टेलीग्राम पर 'पेपर लीक' जैसे चैनल बनाकर परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका देने का झांसा देता था. इसके बदले हर परीक्षार्थी से करीब 2 हजार रुपये लिए जाते थे. सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों छात्र हर साल प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं. इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ लोग उन्हें आसान रास्ता दिखाने का लालच देते हैं. ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश में सामने आया है, जहां टेलीग्राम के जरिए कथित ‘पेपर लीक’ का खेल चलाया जा रहा था. यूपी STF के मुताबिक, आरोपी ओम कुमार को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया. वह मूल रूप से बिहार के पटना जिले का रहने वाला बताया गया है. जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर फर्जी दावा करता था कि उसके पास परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले से मौजूद है. न्यूज एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने टेलीग्राम पर कई चैनल बना रखे थे. इनमें 'पेपर लीक' जैसे नाम इस्तेमाल किए जाते थे ताकि छात्रों को भरोसा हो जाए. UP CNET परीक्षा को लेकर भी कुछ ऐसे चैनल चलाए जा रहे थे. दावा किया जाता था कि परीक्षा से एक दिन पहले असली प्रश्नपत्र और उसके जवाब दिए जाएंगे. इस काम के लिए आरोपी छात्रों से 2 हजार रुपये लेता था. टेलीग्राम चैनल पर QR कोड भेजे जाते थे, जिन पर पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे. STF का कहना है कि कम रकम होने की वजह से कई छात्र जल्दी भरोसा कर लेते थे और शिकायत भी कम करते थे. जांच में सामने आया कि परीक्षा वाले दिन चैनल बंद कर दिए जाते थे. इसके बाद दूसरी परीक्षा के नाम पर नया चैनल बना लिया जाता था. पूछताछ में आरोपी ने माना कि वह साल 2022 से अपने कुछ साथियों के साथ ऐसा कर रहा था. इस मामले की जानकारी मिलने के बाद STF ने जांच शुरू की थी. अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ की ओर से शिकायत भी दर्ज कराई गई थी. इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और मोबाइल से मिले सबूतों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया. फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. साथ ही ऐसे दूसरे गैंगों की भी तलाश की जा रही है, जो सोशल मीडिया पर पेपर लीक की अफवाह फैलाकर छात्रों से पैसे ऐंठते हैं.