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अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से 5 साल के दान-खर्च का पूरा हिसाब मांगा गया

अयोध्या अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टियों यानी महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज (अध्यक्ष), श्री चंपत राय (महासचिव) और स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज (कोषाध्यक्ष) को लीगल नोटिस मिला है. 'तीन दिनों में दें सारा ब्योरा' इस नोटिस में ट्रस्ट से कहा गया है कि वे नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर, वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच मिले दान और किए गए खर्च का पूरा और साल-दर-साल ब्योरा दें. इसमें ऑडिट की गई बैलेंस शीट, आय-व्यय का विवरण, ऑडिटर की रिपोर्ट, ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई ज़मीन की जानकारी, बैंक खाते की जानकारी और FCRA के तहत मिले किसी भी विदेशी योगदान का ब्योरा शामिल होना चाहिए. ये नोटिस बिहार के बक्सर से RJD के मौजूदा सांसद सुधाकर सिंह ने उन्हें भेजा है. 'नोटिस पूरी तरह से जनहित में जारी' एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत ने कहा, 'यह नोटिस पूरी तरह से जनहित में जारी किया गया है, न कि किसी राजनीतिक, पक्षपाती या व्यक्तिगत मकसद से. ट्रस्ट भारत और विदेशों में लाखों भक्तों द्वारा दिए गए सार्वजनिक चंदे को एक ट्रस्टी (अमानतदार) के तौर पर संभालता है. जहां जनता का पैसा शामिल हो, वहां पारदर्शिता और जवाबदेही कोई एहसान नहीं है. ये हर दानदाता और आम जनता के प्रति एक जिम्मेदारी है.' इधर, सांसद सुधाकर सिंह ने कहा, 'मेरी चिंता बस यह पक्का करने की है कि भक्तों द्वारा नेक नीयत से दिए गए फंड का हिसाब-किताब पारदर्शी तरीके से हो. ज़मीन की खरीद, ऑडिट की गई जानकारी न देने और खर्च में पारदर्शिता की कमी को लेकर लगातार खबरें और चिंताएं सामने आती रही हैं. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80G के तहत रजिस्टर्ड और जनता का पैसा संभालने वाले ट्रस्ट की यह जिम्मेदारी है कि वह जनता को साफ और वेरिफाई करने लायक हिसाब दें. मुझे उम्मीद है कि ट्रस्टी इसे टकराव का मामला मानने के बजाय ज़रूरी पारदर्शिता के साथ जवाब देंगे.' क्या कुछ है नोटिस में   इस नोटिस में इंडियन ट्रस्ट्स एक्ट, 1882, इनकम टैक्स एक्ट, 1961, उत्तर प्रदेश पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 का ज़िक्र किया गया है. ये कानून पब्लिक धार्मिक ट्रस्ट के ट्रस्टियों पर सही अकाउंटिंग और जानकारी देने की जिम्मेदारी डालते हैं. इसमें मद्रास हाई कोर्ट के हालिया फैसले (आर. थिरुमुरुगन बनाम आर. थेन्नारासु और अन्य, 21 नवंबर 2025) का भी हवाला दिया गया है. इस फैसले में कहा गया था कि किसी पब्लिक धार्मिक संस्था को दिया गया दान ट्रस्टियों की निजी संपत्ति नहीं होता, बल्कि यह समुदाय के फ़ायदे के लिए होता है, और समुदाय को ऑडिट और पारदर्शिता की मांग करने का पूरा अधिकार है. नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर तय समय के अंदर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो मामले को उचित कानूनी मंचों के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा. यह बात फिर से दोहराई जाती है कि जानकारी देने की यह मांग पब्लिक चैरिटेबल फंड और ऑडिट किए गए स्टेटमेंट से जुड़ी है. कानून के तहत, ट्रस्ट के लिए इन्हें बनाए रखना और मांगे जाने पर इन्हें पेश करना अनिवार्य है.

हथकरघा उद्योग को बढ़ावा, उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर

 लखनऊ  बुनकरों को आधुनिक तकनीक वाली मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस संदर्भ में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि लाखों बुनकर परिवारों की आजीविका का भी प्रमुख आधार है। इसलिए विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी बुधवार को पिकप भवन में उन्होंने राज्य हथकरघा निगम, यूपिका, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों तक सभी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए। उन्होंने राज्य हथकरघा निगम एवं यूपिका के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में निर्मित हथकरघा एवं वस्त्र उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप विकसित किया जाए। उत्पादों की ऑनलाइन एवं ऑफलाइन मार्केटिंग को और सुदृढ़ बनाने, ई-कामर्स प्लेटफार्म से जुड़ाव बढ़ाने तथा नए बाजारों की तलाश करने के निर्देश भी दिए। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति, बजट व्यय, निगमों की वित्तीय स्थिति, उत्पादन एवं विपणन संबंधी उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

भीषण गर्मी से बेहाल उत्तर प्रदेश, 20-25 जून के बीच मानसून की दस्तक के आसार

लखनऊ यूपी में भीषण गर्मी और बार-बार आंधी के कारण मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि अभी मौसम में बदलाव नहीं हुआ है। उमस भरी गर्मी और धूल भरी आंधी तो कई इलाकों में चल रही है लेकिन फिर भी मॉनसून आने में अभी समय बताया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अभी गर्मी से राहत मिलने में और कुछ दिन लगेंगे। कई इलाकों में तापमान 45 के पार होने को है। वहीं, अभी तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तक जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों को मानसून में रुकावट का डर मानसून तो लगातार प्रगति कर रहा है लेकिन बारिश कम हो रही है। बिहार तक पहुंचे मानसून के 20-25 जून के बीच यूपी में दाखिल होने की संभावना है। पहले स्पेल में अच्छी बारिश की भी संभावना जताई जा रही है लेकिन विशेषज्ञ मानसून पॉज से डर रहे हैं। यदि मानसून की गति लगातार नहीं बनी रहती है और बीच-बीच लंबा गैप आता है तो स्थितियां प्रतिकूल हो सकती हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की अब तक प्रगति ठीक है, लेकिन सेटेलाइट थ्री डी एस से जो तस्वीरें मिली हैं उसके अध्ययन से मानसून के भविष्य को लेकर चिंता जताई जा रही है। पश्चिमी जेट स्ट्रीम अपने सामान्य रास्ते पर नहीं है बल्कि नीचे दक्षिणी क्षेत्र की ओर है। जो बादल अब तक के मानसून से दिखने चाहिए थे वह नजर नहीं आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जेट स्ट्रीम के नीचे खिसकने से पूर्वी हवाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। इससे जो बादलों के बनने की प्रक्रिया है वह उतनी गति वाली नहीं है जितनी अपेक्षित है। मौसम विशेषज्ञ अल नीनो का खतरा लंबे समय से बता रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो बारिश प्रभावित होगी और मानसून पाज की स्थिति स्वतः बन जाएगी। सीएसए मौसम कृषि तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा का कहना है कि अभी से कुछ कहना जल्दबाजी होगी। मानसून की रफ्तार बनी हुई है। उम्मीद है कि यूपी और कानपुर तक यह समय से पहुंचेगा। इसके बाद का लंबा समय मानसून का है जिसके दौरान स्थितियां स्पष्ट होंगी। मानसून के पहले फिर तपी संगमनगरी, प्रदेश में रही सबसे गर्म एक तरफ जहां लोग बेसब्री से मानसून का इंतजार कर रहे हैं वहीं बुधवार को प्रयागराज प्रदेश में फिर सबसे गर्म जिला रहा। बुधवार को सुबह से ही तेज धूप व लू के थपेड़ों ने लोगों को झुलसाना शुरू कर दिया। लोग सिर से पांव तक खुद को ढंककर बाहर निकले। हालांकि दोपहर साढ़े तीन बजे के बाद बादल छाने लगे। लगभग चार बजे धूल भरी आंधी चली जबकि यमुनापार के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। इससे शाम को तपिश से थोड़ी राहत मिली। बुधवार को अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान रहा। इससे पहले जिले का 46.4 डिग्री सेल्सियस तापमान 28 मई को रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि जून का यह सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान है। मंगलवार की रात का न्यूनतम तापमान 29.5 सेल्सियस रहा, जबकि सोमवार की रात का न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। यानी 24 घंटे में रात के न्यूनतम तापमान में 0.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गयी। रात के तापमान में वृद्धि होने से पंखा, कूलर भी बेअसर रहे। मौसम विभाग के अनुसार 18 से 21 जून तक हीट वेव चलने के आसार हैं।

योगी सरकार में घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता में 2 गीगावाट का ऐतिहासिक आंकड़ा किया पार

बड़ी उपलब्धिः देश के प्रतिष्ठित 2 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्लब में उत्तर प्रदेश हुआ शामिल योगी सरकार में घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता में 2 गीगावाट का ऐतिहासिक आंकड़ा किया पार सोलर विस्तार से उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में आई कमी लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में घरेलू रूफटॉप सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 2 गीगावाट (GW) स्थापित क्षमता का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश के प्रतिष्ठित "2 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्लब में शामिल हो गया है, जहाँ अब तक केवल गुजरात और महाराष्ट्र जैसे अग्रणी राज्यों की उपस्थिति थी।    यह उपलब्धि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रदेश में सौर ऊर्जा को लेकर बढ़ती जनभागीदारी का परिणाम मानी जा रही है। योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अपने घरों की छतों पर सौर संयंत्र स्थापित कर स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा को अपनाया है। इस दौरान यूपी नेडा रविंदर सिंह ने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र में यह उपलब्धि केवल एक सांख्यिकीय मील का पत्थर नहीं है, बल्कि प्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रतीक है। घरेलू रूफटॉप सोलर के विस्तार से उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद मिल रही है।     प्रदेश की इस सफलता में यूपीनेडा के इम्पैनल्ड वेंडर्स, विद्युत विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, बैंकिंग संस्थानों तथा लाखों उपभोक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभिन्न विभागों और संस्थाओं के समन्वित प्रयासों ने सौर ऊर्जा को जन-आंदोलन का स्वरूप देने में योगदान दिया है।      प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश में घरेलू सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। वर्तमान प्रगति को देखते हुए प्रदेश अब देश में शीर्ष राज्यों की श्रेणी में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है। अधिकारियों का मानना है कि यदि वर्तमान गति बनी रही तो आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापना के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों को चुनौती देते हुए नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकता है। उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि राज्य के हरित ऊर्जा भविष्य और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

नौकरी से आगे बढ़कर उद्यमिता की ओर UP के युवा, निवेश और तकनीक दे रहे नई उड़ान

लखनऊ आज UP का युवा केवल जॉब खोजने तक लिमिटेड नहीं रहना चाहता। वह अपने शहर में रहकर आगे बढ़ना चाहता है। कोई अपना बिजनेस शुरू करना चाहता है। कोई डिजिटल सर्विस देना चाहता है। कोई लोकल प्रोडक्ट को बड़े मार्केट तक पहुंचाना चाहता है। यही बदलती सोच UP की नई ताकत बन रही है। प्रदेश में इन्वेस्टमेंट आ रहा है। नई इंडस्ट्री के लिए माहौल बन रहा है। AI City Lucknow जैसे स्टेप्स टेक्नोलॉजी से जुड़े युवाओं के लिए नई राह खोल रहे हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान जैसे प्रयास उन युवाओं को सपोर्ट दे रहे हैं, जो अपना काम शुरू करना चाहते हैं। यानी जॉब की तलाश के साथ अब रोजगार बनाने की सोच भी मजबूत हो रही है। इन्वेस्टमेंट आया, अपॉर्च्युनिटी का दरवाजा खुला किसी भी स्टेट में बड़ा इन्वेस्टमेंट केवल फैक्ट्री लगाने तक लिमिटेड नहीं रहता। जहां इंडस्ट्री आती है, वहां कंस्ट्रक्शन का काम बढ़ता है। मशीनों की जरूरत होती है। बिजली, ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग, सिक्योरिटी, टेक्निकल सर्विस और लोकल सर्विसेज की डिमांड बढ़ती है। इसका इम्पैक्ट सीधे युवाओं के मौकों पर पड़ता है। फरवरी 2024 में चौथे ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह में UP में 14,000 प्रोजेक्ट्स की शुरुआत हुई। इन प्रोजेक्ट्स की इन्वेस्टमेंट वैल्यू 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। ये प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन, ग्रीन एनर्जी, IT और ITeS, फूड प्रोसेसिंग, हाउसिंग, रियल एस्टेट, होटल सर्विस, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे सेक्टर्स से जुड़े थे। जब इतने अलग-अलग सेक्टर्स में काम शुरू होता है, तो युवाओं के लिए भी मौके बढ़ते हैं। जहां फैक्ट्री लगती है, वहां ट्रेंड वर्कर्स चाहिए होते हैं। जहां IT सर्विस आती है, वहां कंप्यूटर और डिजिटल स्किल वाले युवाओं की जरूरत बढ़ती है। जहां फूड प्रोसेसिंग बढ़ती है, वहां किसान, पैकेजिंग, सप्लाई और मार्केटिंग से जुड़े काम भी बढ़ते हैं। इन्वेस्टमेंट आया प्रदेश में, काम आया गांव-शहर में, युवाओं को मिली नई राह अपने ही घर में। नए सेक्टर, नई स्किल, नए सपने आज रोजगार का मतलब केवल सरकारी जॉब या बड़ी कंपनी की जॉब नहीं रह गया है। अब काम के नए-नए सेक्टर खुल रहे हैं। कोई युवा मशीन चलाना सीख सकता है। कोई डेटा का काम कर सकता है। कोई पैकेजिंग यूनिट से जुड़ सकता है। कोई डिजिटल मार्केटिंग कर सकता है। कोई ऑनलाइन सर्विस दे सकता है। इन्वेस्टमेंट से बनने वाली इंडस्ट्री को केवल इंजीनियर ही नहीं चाहिए होते। उन्हें अकाउंट्स संभालने वाले लोग चाहिए। लॉजिस्टिक्स टीम चाहिए। टेक सपोर्ट चाहिए। सेल्स और मार्केटिंग वाले युवा चाहिए। मशीन रिपेयर करने वाले लोग चाहिए। छोटे सप्लायर चाहिए। यही वजह है कि बड़ा इन्वेस्टमेंट कई छोटे-छोटे कामों की चेन बनाता है। जब यह चेन बनती है, तो रोजगार का इम्पैक्ट एक फैक्ट्री से आगे बढ़कर पूरे एरिया तक पहुंचता है। फैक्ट्री से काम, सर्विस से नाम, युवा के हाथ में आया नया मुकाम। AI City से प्रदेश को नई स्पीड आज दुनिया में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से आगे बढ़ रहा है। एजुकेशन, खेती, हेल्थ, सिक्योरिटी, इंडस्ट्री, कस्टमर सर्विस और डिजिटल कामों में AI का यूज बढ़ रहा है। ऐसे समय में UP में AI City Lucknow का प्रस्ताव युवाओं के लिए नई दिशा खोल सकता है। Invest UP के अनुसार, AI City को लखनऊ की वृंदावन योजना IT City में डेवलप करने का प्रस्ताव है। इसके पहले फेज की योजना 20+ एकड़ में है। इसमें AI और डीपटेक के लिए इनक्यूबेशन सेंटर, AI वर्कस्पेस, कंप्यूट फैसिलिटी और टेस्टिंग लैब जैसी फैसिलिटीज शामिल हैं। यह केवल बड़ी कंपनीज के लिए मौका नहीं है। इससे उन युवाओं को भी फायदा मिल सकता है, जो टेक्नोलॉजी सीखकर आगे बढ़ना चाहते हैं। आने वाले समय में डेटा एनालिसिस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, AI टेस्टिंग, डिजिटल डिजाइन, ऐप सपोर्ट और टेक सपोर्ट जैसे काम बढ़ सकते हैं। छोटे शहरों से आने वाले युवाओं के लिए यह खास मौका हो सकता है। अगर सही ट्रेनिंग, सही गाइडेंस और सही माहौल मिले, तो वे भी नई टेक्नोलॉजी की दुनिया में अपनी जगह बना सकते हैं। छोटे शहरों के युवा, बड़े सपनों की उड़ान UP की बड़ी ताकत उसके छोटे शहर और कस्बे हैं। यहां के युवा लोकल जरूरतों को अच्छी तरह समझते हैं। उन्हें पता है कि उनके एरिया में किस चीज की डिमांड है। अगर उन्हें पैसों की मदद, डिजिटल स्किल और मार्केट तक पहुंच मिले, तो वे अपने शहर में ही काम शुरू कर सकते हैं। AI City और स्टार्टअप का माहौल टेक्नोलॉजी से जुड़े युवाओं के लिए रास्ता खोलता है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना छोटे एंटरप्राइज शुरू करने वाले युवाओं को सपोर्ट देती है। वहीं बड़े इन्वेस्टमेंट से नई इंडस्ट्री और नई सर्विसेज बनती हैं। जब ये तीनों बातें साथ चलती हैं, तो रोजगार का दायरा बढ़ता है। एक युवा फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू कर सकता है। दूसरा डिजिटल मार्केटिंग या डेटा सर्विस दे सकता है। कोई युवती लोकल प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन बेच सकती है। कोई ट्रेंड युवा मशीन रिपेयर या पैकेजिंग यूनिट चला सकता है। छोटे शहरों से नई शुरुआत, अपने काम से बनी नई पहचान। ऐसे छोटे काम धीरे-धीरे बड़ा इम्पैक्ट बनाते हैं। परिवार की इनकम बढ़ती है। लोकल लोगों को काम मिलता है। गांव और कस्बे की इकॉनमी मजबूत होती है। स्किल से तैयारी, स्टार्टअप से भागीदारी आज के समय में केवल डिग्री काफी नहीं है। युवाओं को स्किल भी चाहिए। डिजिटल समझ भी चाहिए। मार्केट की जानकारी भी चाहिए। कस्टमर से बात करने की क्षमता भी चाहिए। यही बातें किसी युवा को जॉब के साथ-साथ अपना काम शुरू करने के लिए भी तैयार करती हैं। UP स्टार्टअप पॉलिसी में स्टार्टअप इकोसिस्टम, इनक्यूबेशन सेंटर और एंटरप्रेन्योरशिप की सोच को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इससे युवाओं को नए आइडियाज को काम में बदलने की दिशा मिलती है। कोई युवा टेक्नोलॉजी बेस्ड स्टार्टअप शुरू कर सकता है। कोई सर्विस सेक्टर में अपना एंटरप्राइज बना सकता है। कोई लोकल प्रोडक्ट को ब्रांड बनाकर बड़े मार्केट तक ले जा सकता है। कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाकर छोटे कारोबारियों की मदद कर सकता है। जब योजना, ट्रेनिंग और पैसों की मदद साथ मिलती है, तो छोटा आइडिया भी बड़ा काम बन सकता है। इससे युवा केवल रोजगार खोजने वाला नहीं रहता। वह रोजगार बनाने वाला भी बन सकता है। स्किल से … Read more

यूपी के कुकरैल में घड़ियाल संरक्षण की सफलता, 1970 से अब तक बड़ी उपलब्धि

लखनऊ यूपी में कभी विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके घड़ियाल आज सफल संरक्षण का घंटा बजा रहे हैं। लखनऊ स्थित कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास केंद्र ने ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसकी गूंज अब देश ही नहीं, विदेश के कई चिड़ियाघरों तक सुनाई दे रही है। कुकरैल के वैज्ञानिक कैप्टिव ब्रीडिंग (बंदी प्रजनन) मॉडल को नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी ने भारत के सबसे सफल संरक्षण प्रोजेक्ट्स में शामिल किया है। यही वजह है कि यहां जन्मे घड़ियाल आज भूटान, पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका (न्यूयॉर्क) और जापान के चिड़ियाघरों में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ये देश भी इस मॉडल को अपनाने की पहल कर रहे हैं। 1970 के दशक में स्थिति बेहद गंभीर थी, जब पूरे देश में केवल 250 से 300 घड़ियाल ही बचे थे। इस संकट को देखते हुए 1975 में कुकरैल पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई। शुरुआत में चंबल नदी (इटावा) से अंडे लाकर वैज्ञानिक तरीके से हैचिंग की गई और घड़ियाल संरक्षण की नींव रखी गई। 1988 से यहां नियमित प्रजनन शुरू हुआ और आज स्थिति यह है कि केंद्र में 466 घड़ियाल मौजूद हैं। हर वर्ष लगभग 140 से 160 नए घड़ियाल यहां जन्म ले रहे हैं। इस वर्ष नमामि गंगे परियोजना के तहत 500 अंडों को हैच करने का लक्ष्य तय किया गया है। नदियों को मिल रहा नया जीवन कुकरैल में जन्म लेने वाले घड़ियालों को ढाई वर्ष तक विशेष देखरेख में रखा जाता है, जिसके बाद उन्हें गंगा, घाघरा, चंबल, गेरुआ और गंडक जैसी नदियों में छोड़ा जाता है। इससे नदियों का पारिस्थितिक संतुलन मजबूत हो रहा है और जैव विविधता को नई ऊर्जा मिल रही है। इसके अलावा दुधवा, कतर्नियाघाट, हस्तिनापुर और महाराजगंज की नदियों में भी घड़ियाल फल-फूल रहे हैं। राज्य ईको-पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, राज्य ईको-पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है और दुर्लभ घड़ियालों को देखने देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं। कुकरैल केंद्र में म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जहां हर साल लगभग दो लाख घरेलू और सैकड़ों विदेशी पर्यटक पहुंच रहे हैं। सनातन परंपरा में देवी गंगा के वाहन मकर के रूप में पूजनीय यह जीव आज उत्तर प्रदेश के प्रयासों से वैश्विक पटल पर नई जिंदगी पा चुका है।  

शुद्ध खाद्य पदार्थों के बड़े सप्लाई सेंटर के रूप में विकसित की जाएंगी गोशालाएं

गो संरक्षण विशेष-मेगा कैंपेन चलाकर घर-घर पहुंचाया जाएगा ‘जहर मुक्त भोजन’ शुद्ध खाद्य पदार्थों के बड़े सप्लाई सेंटर के रूप में विकसित की जाएंगी गोशालाएं सीएम योगी के निर्देश पर गो संरक्षण से रोजगार, प्राकृतिक खेती और स्वदेशी ऊर्जा मॉडल तैयार गोशालाओं के आसपास रहने वाले परिवारों तक पहुंचेंगे जहरमुक्त सब्जियां, अनाज और फल गोशालाओं के पांच किलोमीटर दायरे में रहने वाले परिवारों को उत्पाद पहुंचाकर होगी शुरुआत   लखनऊ प्रदेश में ‘जहर मुक्त भोजन’ का मेगा कैंपेन शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत अब लोगों की थाली तक सीधे खेतों से निकला शुद्ध और जहरमुक्त भोजन पहुंचाया जाएगा। इस पूरे महाभियान का केंद्रबिंदु उत्तर प्रदेश की गोशालाएं होंगी, जिन्हें अब सिर्फ गोसंरक्षण ही नहीं, बल्कि शुद्ध खाद्य पदार्थों के बड़े सप्लाई सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में चयनित गोशालाओं के 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले परिवारों को इस महा अभियान से जोड़ा जाएगा। इन परिवारों तक प्राकृतिक खेती से उपजे खाद्यान्न, ताजी सब्जियां, फल और पंचगव्य आधारित उत्पाद सीधे पहुंचाए जाएंगे। गो सेवा आयोग ने इसके लिए ‘फार्म टू कंज्यूमर’ (खेत से सीधे उपभोक्ता तक) मॉडल तैयार किया है। इससे उपभोक्ताओं को सही कीमत पर और किसानों को उनकी उपज का और बेहतर मूल्य मिल सकेगा। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य हर नागरिक को बीमारियों से बचाना और उन्हें ‘जहर मुक्त भोजन’ उपलब्ध कराना है। सबसे पहले चयनित गोशालाओं के आसपास के परिवारों से इसकी शुरुआत होगी। यह मॉडल गोशालाओं को ग्रामीण समृद्धि और सेहत का नया केंद्र बनाएगा। ‘जहर मुक्त भोजन’ मिशन की विशेषताएं  जैविक खाद्य: गोशालाओं के सहयोग से तैयार होने वाली 100% जैविक सब्जियां, फल और अनाज सीधे घरों तक पहुंचेंगे।  पहला टारगेट रेडियस: शुरुआती फेज में गोशाला के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।  मल्टी-प्रोडक्ट बास्केट: अनाज-सब्जियों के अलावा औषधीय उत्पाद, पंचगव्य घी, और शुद्ध दूध भी इस चेन का हिस्सा होंगे।  स्थायी बाजार: केमिकल-फ्री उत्पाद तैयार करने वाले स्थानीय किसानों को अब अपनी फसल बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, गोशालाएं ही उनका बाजार बनेंगी। ग्रामीण स्तर पर पैदा होंगे बंपर रोजगार गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि ‘जहर मुक्त भोजन’ के इस पूरे चक्र को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर स्थानीय युवाओं को प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर बंपर रोजगार पैदा होंगे। प्रदेश में यह प्रयोग देश के सामने 'सेहत और समृद्धि' का एक अनूठा उदाहरण बनने जा रहा है।

राम मंदिर चढ़ावा गबन आरोपों में SIT सक्रिय, ट्रस्ट कर्मचारियों से संपत्ति का हो रहा मिलान

लखनऊ अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा और दान की चोरी को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के संदेह के दायरे में चल रहे चार कर्मचारी जांच के लिए पेश हुए हैं, जो दान गिनने में शामिल थे। लखनऊ मंडल के आयुक्त के नेतृत्व में चल रही एसआईटी जांच के दायरे में वो सारे कर्मचारी हैं, जो रुपये गिनने में शामिल थे। जांच टीम ने ट्रस्ट से कर्मचारियों के नाम, पता वगैरह मांगे थे, ताकि उनकी और उनके निकटतम रिश्तेदारों की मौजूदा संपत्ति और पहले की संपत्ति का मिलान हो सके। इसी प्रक्रिया में मंदिर के कर्मचारियों से पूछताछ चल रही है। पूछताछ के लिए बुलाए गए चार संदिग्ध गणनाकर्मी एसआईटी के सामने पेश हुए और उनके परिजन भी पहुंचे। लेकिन कोई एसआईटी के सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। राम मंदिर परिसर के उत्तरी हिस्से में बने ग्रीन हाउस को एसआईटी ने अपना कैंप कार्यालय बना लिया है। इसी में जांच के लिए जरूर प्रबंध किए गए हैं। एसआईटी को जांच के काम में सहूलियत के लिए करीब डेढ़ दर्जन टेक्निकल स्टाफ उपलब्ध कराया गया है। एडीएम, मंदिर मजिस्ट्रेट समेत पुलिस पदाधिकारी भी एसआईटी के सहयोग के लिए लगाए गए हैं। एसआईटी जांच को लेकर ट्रस्ट से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों पर सबकी नजर है, जिनके ऊपर चढ़ावा चोरी को लेकर सबसे ज्यादा हमले हो रहे हैं। ट्रस्ट के ऐसे पदाधिकारियों में महासचिव चंपत राय के अलावा गोपाल राव, अनिल मिश्रा वगैरह शामिल हैं। अपार संपत्ति जुटाने के आरोपों पर चंपत राय के करीबी टुन्नु यादव ने मंगलवार को वीडियो बयान जारी कर कहा था कि ये संपत्ति मंदिर निर्माण से पहले के हैं। टुन्नु यादव ने ऑटो चलाने से हुई कमाई से घर और उसके किराया से आगे की कमाई का दावा किया था। राम मंदिर चढ़ावा चोरी बोले बृजभूषण शरण सिंह- सरकार पर उठ रही है उंगली इस बीच पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर बुधवार को कहा कि यह अब सिर्फ ट्रस्ट तक सीमित नहीं रह गया है। उंगली केंद्र और प्रदेश सरकार तक उठ रही है। उन्होंने कहा कि अगर राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोग इस मुद्दे को उठा रहे हैं, तो सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। बृजभूषण ने कहा कि इस मामले से बहुत झटका लगा है। यह झटका विनय कटियार और बृजभूषण सिंह ने नहीं लगाया है। पूर्व सांसद ने कहा कि यह झटका ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने ही लगाया है। उन्होंने नृपेंद्र मिश्रा को क्लीन चिट देते हुए कहा कि वह नृपेंद्र मिश्रा को पूरी तरह से से निर्दोष मानते हैं। उन्होंने कहा कि बिना आग के कोई धुआं नहीं निकलता है, जो धुआं निकल रहा है, इसमें कुछ ना कुछ सच्चाई जरूर है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कठोर कार्रवाई होगी और सरकार इसमें ठोस कदम उठाएगी। लोकसभा चुनाव में अयोध्या में भाजपा की हार का जिक्र करते हुए बृजभूषण सिंह ने कहा कि क्या इस बात की विवेचना हुई कि अयोध्या और अगल-बगल की सीट क्यों हारे।

UP 112, मिशन शक्ति और गैंगस्टर एक्शन से बदली पुलिसिंग, सुरक्षा और विकास को मिला बल

लखनऊ यूपी जैसे बड़े स्टेट में लॉ एंड ऑर्डर का इम्पैक्ट हर घर, मार्केट, सड़क और रोज के कामकाज पर पड़ता है। अगर क्राइम बढ़ता है, तो लोगों का भरोसा कमजोर होता है। बिजनेसमैन देर तक दुकान खोलने में डर महसूस करता है। महिलाएं बाहर निकलने में अनसेफ महसूस करती हैं। किसान और छोटे कारोबारी भी अपनी रोज की मूवमेंट में डर महसूस करते हैं। इसलिए क्राइम पर कंट्रोल केवल पुलिस का मुद्दा नहीं, बल्कि सोसायटी और विकास दोनों से जुड़ा मुद्दा है। साल 2012 से 2017 के बीच UP में क्राइम और सिक्योरिटी को लेकर कई चिंताएं सामने आईं। हत्या, लूट, डकैती, दंगा, महिला सुरक्षा और ऑर्गनाइज्ड क्राइम जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे। UP पुलिस के Crime in UP 2016 डॉक्यूमेंट में भी 2012 से 2016 के बीच रिकॉर्ड हुए क्राइम में बढ़ोतरी दिखाई गई थी। इस दौर ने यह साफ कर दिया कि इतने बड़े प्रदेश को ऐसा पुलिस सिस्टम चाहिए, जो तेज भी हो और लोगों के करीब भी हो। बाद के सालों में इसी जरूरत को ध्यान में रखकर पुलिसिंग को ज्यादा टेक्नोलॉजी बेस्ड, आसान और रिस्पॉन्सिबल बनाने पर काम हुआ। UP 112 से तेज हेल्प, मिशन शक्ति से महिला सुरक्षा, ऑर्गनाइज्ड क्राइम पर सख्त एक्शन और टेक्नोलॉजी से मॉनिटरिंग जैसे स्टेप्स ने पुलिस सिस्टम को नई दिशा दी। अब गोल केवल इंसिडेंट के बाद एक्शन लेना नहीं रहा। गोल यह भी बना कि हेल्प समय पर पहुंचे, कंप्लेंट आसानी से हो और आम लोगों को भरोसेमंद माहौल मिले। क्राइम की चिंता, आम जीवन पर चोट जब क्राइम बढ़ता है, तो इम्पैक्ट केवल एक परिवार तक नहीं रहता। पूरा एरिया उसका असर महसूस करता है। मार्केट जल्दी बंद होने लगते हैं। रात में मूवमेंट कम हो जाती है। स्कूल, कॉलेज और काम पर जाने वाली महिलाओं और युवाओं के मन में डर बढ़ता है। कई बार डर इतना बढ़ता है कि लोग कंप्लेंट दर्ज कराने से भी बचते हैं। उन्हें लगता है कि कहीं परेशानी और न बढ़ जाए। इसलिए लॉ एंड ऑर्डर की असली ताकत केवल क्राइम के नंबर कम करने में नहीं है। असली ताकत लोगों के मन में भरोसा पैदा करने में है। जब परिवार सेफ महसूस करता है, तो बच्चे पढ़ाई के लिए बाहर निकलते हैं। जब बिजनेसमैन सेफ महसूस करता है, तो मार्केट देर तक चलता है। जब किसान सेफ महसूस करता है, तो वह अपनी फसल मंडी तक भरोसे के साथ ले जाता है। नई पुलिसिंग, जनता से मजबूत कनेक्टिंग उत्तर प्रदेश में बाद के सालों में पुलिसिंग को ज्यादा तेज, टेक्नोलॉजी बेस्ड और जनता के करीब बनाने पर जोर दिया गया। क्राइम पर सख्ती, माफिया पर एक्शन, गैंगस्टर एक्ट के तहत प्रॉपर्टी जब्ती, UP 112 और महिला सुरक्षा जैसे स्टेप्स इसी बदलाव का हिस्सा बने। इस बदलाव का गोल केवल क्रिमिनल्स पर एक्शन लेना नहीं था। गोल यह भी था कि कंप्लेंट जल्दी सुनी जाए, हेल्प समय पर पहुंचे और आम लोगों को लगे कि पुलिस उनके साथ खड़ी है। जब पुलिस सिस्टम लोगों तक आसानी से पहुंचता है, तो भरोसा बढ़ता है। जब भरोसा बढ़ता है, तो लोग कंप्लेंट करने से डरते नहीं। यही बदली पुलिसिंग का बड़ा इम्पैक्ट है। UP 112 से तेज हेल्प, संकट में मिला साथ किसी भी मुश्किल समय में सबसे जरूरी चीज होती है जल्दी हेल्प। सड़क हादसा हो, झगड़ा हो, महिला सुरक्षा से जुड़ी कंप्लेंट हो या कोई और इमरजेंसी हो, तेज पुलिस हेल्प लोगों को बड़ा सपोर्ट देती है। UP 112 इसी जरूरत को पूरा करने वाला सिस्टम है। इसका गोल पुलिस असिस्टेंस को जल्दी से लोगों तक पहुंचाना है। इससे हेल्प केवल बड़े शहरों तक लिमिटेड नहीं रही। गांवों, कस्बों और दूर के इलाकों तक भी इमरजेंसी पुलिस सर्विस पहुंचाने की कोशिश हुई। UP 112 के ऑफिशियल इंट्रोडक्शन डॉक्यूमेंट के अनुसार, इस सिस्टम ने लॉन्च के बाद 4.3 करोड़ से अधिक इंसिडेंट्स पर रिस्पॉन्स दिया। रोज औसतन 90,000 कॉल का जवाब दिया जाता है और करीब 19,500 इंसिडेंट्स पर एक्शन होता है। कॉल पर जवाब, हेल्प का साथ, UP 112 ने आसान की सुरक्षा की राह। यह बताता है कि पुलिस हेल्प अब केवल थाने पर निर्भर नहीं है। कंट्रोल रूम, व्हीकल नेटवर्क और टेक्नोलॉजी की मदद से पुलिसिंग अब प्रदेश स्तर पर जुड़कर काम कर रही है ऑर्गनाइज्ड क्राइम पर वार, भरोसे को आधार ऑर्गनाइज्ड क्राइम किसी भी स्टेट के लिए बड़ी चुनौती होता है। यह केवल एक क्रिमिनल या एक इंसिडेंट तक लिमिटेड नहीं रहता। इसमें जमीन कब्जा, रंगदारी, धमकी, अवैध कमाई और लोकल प्रेशर जैसे कई रूप शामिल होते हैं। ऐसे क्राइम से आम लोगों में डर बढ़ता है। बिजनेसमैन अपने काम को लेकर अनसेफ महसूस करता है। जमीन, बिजनेस और रोजमर्रा के फैसलों पर भी इसका इम्पैक्ट पड़ता है उत्तर प्रदेश में ऐसे क्राइम पर एक्शन के लिए गैंगस्टर एक्ट और प्रॉपर्टी जब्ती जैसे स्टेप्स अपनाए गए। India Code पर उपलब्ध कानून की धारा 14 में ऐसी प्रॉपर्टी जब्त करने का प्रावधान है, जो क्राइम से जुड़ी एक्टिविटीज से कमाई गई मानी जाए। इस तरह के एक्शन का मैसेज साफ है। क्राइम से कमाई गई प्रॉपर्टी सुरक्षित नहीं रहती। इससे क्रिमिनल्स पर फाइनेंशियल प्रेशर बनता है और लोकल लेवल पर डर का माहौल कम करने में मदद मिलती है। क्राइम पर वार, भरोसे को आधार, जनता को मिला सुरक्षित संसार। वीमेन सेफ्टी को सपोर्ट, सोसायटी का भरोसा मजबूत लॉ एंड ऑर्डर की मजबूती तब सबसे ज्यादा दिखती है, जब महिलाएं सेफ महसूस करें। बेटी स्कूल जाए, छात्रा कॉलेज जाए, महिला काम पर जाए या परिवार के साथ मार्केट जाए, हर जगह सुरक्षा का भरोसा जरूरी है। उत्तर प्रदेश पुलिस की महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन 18 अगस्त 2020 को स्थापित किया गया। यह संगठन महिलाओं और बच्चों से जुड़े क्राइम की रोकथाम और सेफ माहौल बनाने के लिए काम करता है। इसके तहत महिला पावर लाइन 1090, महिला सम्मान प्रकोष्ठ, मिशन शक्ति, सेफ सिटी प्रोजेक्ट और ITSSO जैसे कई प्रोग्राम शामिल हैं। मिशन शक्ति ने महिला सुरक्षा को केवल हेल्पलाइन तक लिमिटेड नहीं रखा। इसके जरिए गांवों, वार्डों, स्कूलों, कॉलेजों और पब्लिक प्लेसेज तक अवेयरनेस पहुंचाई गई। मिशन शक्ति 5.0 से जुड़े डिटेल्स के अनुसार, महिला बीट सिस्टम, गांव-गांव कनेक्ट और कंप्लेंट्स के जल्दी … Read more

माफिया की अवैध संपत्ति पर चला बुलडोजर एक्शन, 1.11 करोड़ की जमीन जब्त; इलाके में चस्पा हुआ नोटिस

 प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माफियाओं और हिस्ट्रीशीटरों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत एक बार फिर बड़ा एक्शन लिया गया है. पुलिस ने कुख्यात माफिया दिलीप मिश्रा की अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई करोड़ों की जमीन को कुर्क कर लिया है. कार्रवाई के दौरान जमीन पर बाकायदा मुनादी कराई गई और कुर्की का नोटिस बोर्ड भी लगा दिया गया।  पुलिस का दावा है कि यह वही जमीन है, जिसे दिलीप मिश्रा ने अपराध की दुनिया से कमाए गए पैसों से खरीदा था. अब इसी जमीन पर पुलिस ने पहुंचकर मुनादी कराई, नोटिस चस्पा किया और कानूनी तौर पर उसे कुर्क कर लिया।  पूरा मामला प्रयागराज के मेजा तहसील क्षेत्र के खीरी थाना इलाके के सिलौंधी कला गांव का है. यहां करीब 1 करोड़ 11 लाख 24 हजार रुपये कीमत की जमीन को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क किया गया है।  पुलिस की जांच में सामने आया कि दिलीप मिश्रा के खिलाफ दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे की विवेचना के दौरान कई ऐसी संपत्तियों का पता चला, जिन्हें कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों से अर्जित धन से खरीदा गया था. इनमें से एक यह जमीन भी थी।  जमीन सीधे दिलीप मिश्रा के नाम पर नहीं थी. पुलिस के मुताबिक, यह संपत्ति उसकी भाभी पुष्पा मिश्रा और पुत्रवधू वीरा मिश्रा के नाम खरीदी गई थी. जांच के बाद पुलिस ने पूरी रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर कोर्ट के सामने रखी. दस्तावेजों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद कोर्ट ने संपत्ति कुर्क करने का आदेश दे दिया।  आदेश मिलने के बाद औद्योगिक थाना पुलिस ने डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव की मौजूदगी में मौके पर पहुंचकर कार्रवाई को अंजाम दिया. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गांव में मुनादी कराकर लोगों को कुर्की की जानकारी दी और जमीन पर नोटिस बोर्ड लगा दिया. साथ ही कोर्ट के आदेश के अनुसार खीरी थाना प्रभारी को इस संपत्ति का प्रशासक नियुक्त किया है।  दिलीप मिश्रा का नाम प्रयागराज के चर्चित माफियाओं में गिना जाता है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, धमकी और गैंगस्टर एक्ट समेत कुल 54 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. वर्तमान में वह जेल में बंद है. दिलीप मिश्रा उस समय भी सुर्खियों में आया था जब उत्तर प्रदेश सरकार के वर्तमान कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर हुए रिमोट कंट्रोल बम हमले के मामले में उसका नाम सामने आया था. इस मामले में भी वह आरोपी रहा है।