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‘राजनीति का गिरता स्तर चिंताजनक’ – पीएम मोदी को गाली पर मायावती की प्रतिक्रिया

पटना  बिहार में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मां की गाली से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती भी दुखी हैं। मायावती ने शुक्रवार को कहा कि राजनीति में उच्च पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ अभद्र टिप्‍पणी किया जाना दुखद और चिंतनीय है। मायावती ने 'एक्‍स' पर लिखा कि देश में खासकर राजनीतिक स्वार्थ के कारण राजनीति का गिरता हुआ स्तर अति-दुखद एवं चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि देश में उच्च सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाओं व विशेषकर राजनीति में उच्च पदों पर बैठे लोगों के बारे में जिस प्रकार की अभद्र, अशोभनीय, अमर्यादित व असंसदीय टिप्पणी करके उनकी व देश की छवि को भी धूमिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं वह अत्यंत दुखद व चिंतनीय है। कहा कि इस संबंध में सभी दलों की राजनीति सिद्धांत आधारित और देश और आमजन के हित में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खासकर चुनाव के समय यह प्रक्रिया और भी अधिक विषैली व हिंसक हो जाती है। इसी क्रम में अभी बिहार में भी जो कुछ देखने व सुनने को मिला है वह देश की चिंता को बढ़ाने वाला है। मायावती ने कहा कि बसपा किसी भी प्रकार की दूषित व जहरीली राजनीति के खिलाफ है। भाजपा ने इस मुद्दे पर कहा है कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत 'इंडिया' गठबंधन को जनता द्वारा ''दंडित'' किया जाएगा। सोशल मीडिया पर आई एक वीडियो क्लिप में कुछ लोग 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान दरभंगा में एक मंच से प्रधानमंत्री मोदी को मां की गाली देते सुनाई और दिखाई दे रहे हैं। हालांकि शुक्रवार को पुलिस ने गाली देने वाले को गिरफ्तार कर लिया है। सीएम योगी आक्रोशित इससे पहले सीएम योगी ने इसी लेकर गुस्से का इजहार किया था। योगी ने कहा कि कांग्रेस और आरजेडी के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए प्रयुक्त अभद्र भाषा अत्यंत निंदनीय एवं राजनीतिक मर्यादा का पतन है। INDI गठबंधन के नेताओं द्वारा किया गया यह कृत्य सिर्फ प्रधानमंत्री जी का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारत वासियों की भावनाओं का अपमान है। याद रहे, एक साधारण माँ ने अपने संघर्षों और संस्कारों से ऐसे पुत्र को गढ़ा, जिसने स्वयं को राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया और आज विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में जन-जन के मन में बसते हैं। बिहार की जनता निश्चित ही इस घृणित राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी और भारतीय संस्कृति व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेगी।  

‘पति पत्नी और वो 2’ की टीम पर हमला, स्थानीय लोगों से झड़प में तनाव

प्रयागराज एक्टर आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ की शूटिंग इन दिनों प्रयागराज में चल रही है. वहीं, अब खबर मिल रही है कि फिल्म के सेट पर स्टाफ के साथ कुछ स्थानीय लोगों ने मारपीट किया है. इसका एक वीडियो रेडिट पर तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ की शूटिंग चल रही है. एक गाड़ी पर शूटिंग स्टाफ मौजूद है. तभी दो-तीन लोकल लोग आते हैं और फिल्म के स्टाफ एक व्यक्ति को मारने लगते हैं. इसके बाद दोनों तरफ से मारपीट शुरु हो गई. इस वीडियो को प्रयागराज के स्थानीय व्यक्ति ने ही बनाया है. बता दें कि फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ की शूटिंग के बीच हुई इस मारपीट का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. लोग इस वीडियो पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं. एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘प्रयागराज का नाम रोशन करता हुआ युवा.’ तो एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘बिना सिक्योरिटी के शूटिंग कैसे कर रहे थे?’ आयुष्मान खुराना और सारा अली खान भी शूटिंग पर दिखे फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ के शूटिंग स्टाफ और लोकल के बीच हुए इस झड़प का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. साथ ही एक और वीडियो वायरल है, जिसमें सारा अली खान, आयुष्मान खुराना के ऊपर गुस्सा कर रही हैं, दोनों एक गाड़ी में बैठे हैं. इसके बाद सारा अली खान गाड़ी से नीचे उतर जाती है. वीडियो देखकर लगता है कि यह दोनों फिल्म का सीन शूट कर रहे हैं.

न्यायिक आयोग रिपोर्ट के जामा मस्जिद और अन्य क्षेत्रों में कड़ी सुरक्षा, संभल में सतर्कता बढ़ी

संभल संभल दंगे को लेकर न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद जिले में सुरक्षा के दृष्टिकोण से अलर्ट जारी कर दिया गया है। जिला प्रशासन और पुलिस ने किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। खासतौर पर जामा मस्जिद क्षेत्र और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट के सामने आने के बाद कुछ क्षेत्रों में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी, जिसे ध्यान में रखते हुए पहले से ही तैयारियां की गई थीं। जिला प्रशासन ने आम जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है और अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लगातार गश्त की जा रही है और इंटेलिजेंस विंग भी सक्रिय है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है और किसी भी भड़काऊ पोस्ट पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।  

जांच में सामने आया पाकिस्तान का कनेक्शन, धर्मांतरण गिरोह के कारनामे उजागर

बरेली बरेली में पकड़े गए धर्मांतरण गिरोह की जांच में नए तथ्य सामने आ रहे हैं। कट्टरपंथी जाकिर नाइक के अलावा गिरोह के सदस्य पाकिस्तानी धर्मगुरु इंजीनियर अली मिर्जा के भी मुरीद हैं। दूसरे धर्म के लोगों को अपने धर्म से जोड़ने से पहले वे अली मिर्जा जैसे धर्मगुरुओं का भाषण उन्हें सुनाते थे। प्रभात को हामिद बनाने वाले गिरोह के पास से अली मिर्जा से जुड़ा साहित्य मिला है। बरामद सीडी में अली मिर्जा की तकरीर भी है। अली मिर्जा यूट्यूब पर अक्सर भारत के मुद्दों पर चर्चा करता है। कुछ दिन पहले दाढ़ी को लेकर टिप्पणी की थी और संगीत को जायज बताया था। वहां सरकार के खिलाफ बोलने पर उसे गिरफ्तार भी किया गया था। चूंकि अली मिर्जा कट्टरपंथी विचारधारा के विरोध में रहता है, इसलिए उसे पाकिस्तान के साथ ही भारत के समुदाय विशेष के युवा भी फॉलो करते हैं। अधिकारियों को जानकारी मिली है कि शुरुआत में शिकार का ब्रेनवॉश करने के लिए उनको अली मिर्जा की ही तकरीर सुनाई जाती थी। चंगुल में फंसता था शिकार तो सुनाते थे जाकिर के नफरती भाषण अधिकारियों ने बताया कि गिरोह के पास से जाकिर नाईक का भी साहित्य मिला है। इससे ऐसा लग रहा है कि गिरोह के सदस्य धर्मांतरण के लिए पहले शिकार के दिमाग में अली मिर्जा की आधुनिक विचारधारा डालते थे। हिंदू और मुस्लिम धर्म की समानता बताते थे। जब शिकार फंस जाता था तो धीरे-धीरे ब्रेनवॉश कर उसके अंदर जाकिर नाईक की नफरती विचारधारा विकसित करते थे। गिरोह के लोगों को बाकायदा इसके लिए फंडिंग की जाती थी। आरोपी अब्दुल मजीद, सलमान, आरिफ और फहीम कोई बड़ा कारोबार नहीं करते, फिर भी उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर है। पूरे गिरोह को संचालित करने के लिए कहां से फंडिंग हो रही थी? इसकी जांच की जा रही है। सभी के खाते खंगाले जा रहे हैं। कुछ दिनों में बड़ा खुलासा हो सकता है। धर्मों की डिबेट दिखाकर देते थे झांसा अब्दुल मजीद के गिरोह के पास ऐसे वीडियो मिले हैं, जिसमें कुरान और बाइबिल के बारे में डिबेट दिखाई जाती थी। डिबेट के अंत में मुस्लिम धर्म को सर्वोपरि दिखाया जाता था और बताया जाता था कि वह देश के सर्वोपरि धर्म का हिस्सा बनने जा रहे हैं। इस दौरान गिरोह के सदस्य अपनी धर्म की लड़की से निकाह कराने का वादा भी करते थे। इससे अवसाद और अकेलेपन के शिकार लोग झांसे में आ जाते थे। गिरोह के निशाने पर ऐसे परिवार या लोग होते थे, जो किन्हीं कारणों से समाज से कट जाते हैं। धर्मांतरण के लिए यह लोग फर्जी प्रमाणपत्र भी बनाकर देते थे। यह प्रमाणपत्र दिल्ली की मस्जिद से दिया जाता था। गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला है। पुलिस टीम इन राज्यों में छापेमारी के लिए रणनीति बना रही है। धर्मांतरण से बची ब्रजपाल उर्फ अब्दुल्ला की दूसरी बहन हादसे में अपाहिज हुए शिक्षक ब्रजपाल को शादी का झांसा देकर गिरोह ने अब्दुल्ला बना दिया। ब्रजपाल के साथ ही उनका पूरा परिवार गिरोह के प्रभाव में आ गया। बहन राजकुमारी का धर्म परिवर्तन कराकर उसे आयशा बना दिया गया। मुस्लिम शख्स से ही उसका निकाह भी करा दिया। बेटी और बेटे के धर्म परिवर्तन करने के बाद घर में अकेली बची मां ऊषा रानी भी ज्यादा दिन तक गिरोह के प्रभाव से न बच सकीं। उन्हें गिरोह ने अमीना नाम दे दिया। ब्रजपाल की दूसरी बहन सीमा इस गिरोह के प्रभाव में आने से बच गई। उसकी शादी पहले ही होने से गिरोह उसे झांसा नहीं दे सका। प्रवक्ता प्रभात उर्फ हामिद के बयान दर्ज गिरोह के शिकार हुए हिंदी प्रवक्ता प्रभात उर्फ हामिद अब बुलंदशहर के जहांगीराबाद स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में वाइस प्रिंसिपल हैं। बृहस्पतिवार को बरेली कोर्ट में प्रभात उर्फ हामिद के बयान दर्ज हुए। प्रभात नेत्रहीन हैं और ब्रेल लिपि में विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। घटनाक्रम के बाद मां अखिलेश कुमारी उन्हें घर अलीगढ़ के क्वार्सी ले गई थीं। प्रभात के बयान की प्रति अब विवेचक को दी जाएगी। विवेचक इसे विवेचना में शामिल करेंगे। माना जा रहा है कि इस गिरोह के संपर्क में रहने से प्रभात के मन पर गहरा असर पड़ा है। एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा ने बताया कि भुता थाने के इंस्पेक्टर क्राइम ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। मुख्य आरोपी व अन्य ने दक्षिण भारत के राज्यों में ज्यादातर कॉल लैंडलाइन नंबरों पर की है। इन नंबरों की तस्दीक की जा रही है। जरूरत पर टीम संबंधित राज्यों में जाकर भी पड़ताल करेगी। धार्मिक नेताओं के भाषणों से गिरोह के सदस्य लोगों का ब्रेनवॉश करते थे। पड़ताल में नए आरोपी सामने आए तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। 

एक्सप्रेस वे हादसे में आगरा के अधिकारी की मौत

आगरा आगरा के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और वर्तमान में कलेक्ट्रेट में अपर नगर मजिस्ट्रेट का चार्ज संभाल रहे एसडीएम राजेश जायसवाल की लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर सड़क हादसे में मौत हो गई। एसडीएम अपनी कार से वापस लौट रहे थे। इटावा के पास एक्सप्रेस वे पर दर्दनाक हादसे में उनकी जान चली गई। जानकारी के अनुसार, राजेश जायसवाल की कार  इटावा के पास एक्सप्रेस वे पर अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे की खबर मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। राजेश जायसवाल किरावली में एसडीएम के पद पर तैनात थे। और वर्तमान में कलेक्ट्रेट में अपर नगर मजिस्ट्रेट का चार्ज संभाल रहे थे। हादसे के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। अधिकारियों ने बताया कि हादसे की पूरी जांच की जा रही है। राजेश जायसवाल का निधन प्रशासनिक सेवा में एक प्रमुख नुकसान माना जा रहा है।  

व्यापारियों को बड़ी राहत: योगी सरकार ने खत्म किए सख्त कानून, दंड होगा आर्थिक

लखनऊ उत्तर प्रदेश में औद्योगिक व श्रम सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्योग और व्यापार से जुड़े 13 राज्य अधिनियमों में लगभग 99 प्रतिशत आपराधिक प्रावधान खत्म करने के निर्देश दिए हैं। इसके लागू होते ही यूपी अव्यवहारिक हो चुके आपराधिक प्रावधानों को गैर-आपराधिक श्रेणी में बदलने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। इसके तहत कारावास की सजा के प्रावधान को अधिक आर्थिक दंड व प्रशासनिक कार्रवाई में बदलने की योजना है। बृहस्पतिवार को उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और मजबूत बनाने के लिए नए कदम उठाना जरूरी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जल्द ही सुगम्य व्यापार (प्राविधानों का संशोधन) विधेयक, 2025 लाया जाएगा। इसके अंतर्गत आबकारी अधिनियम, शीरा अधिनियम, वृक्ष संरक्षण अधिनियम, राजस्व संहिता, गन्ना अधिनियम, भूगर्भ जल अधिनियम, नगर निगम अधिनियम, प्लास्टिक कचरा अधिनियम, सिनेमा अधिनियम तथा क्षेत्र व जिला पंचायत अधिनियम सहित कई कानूनों को अधिक व्यावहारिक बनाया जाएगा। श्रम कानूनों के सरलीकरण पर भी विचार श्रम कानूनों के सरलीकरण के प्रस्तावों में फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि बढ़ाने, दुकानों व प्रतिष्ठानों के नियमों में व्यावहारिक बदलाव करने और महिलाओं को अधिक अवसर उपलब्ध कराने जैसे कदम शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निरीक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए स्व-सत्यापन और थर्ड पार्टी ऑडिट की प्रणाली अपनाई जानी चाहिए। निवेशकों के लिए आवेदन व अनुमोदन प्रक्रिया होगी डिजिटल निवेश मित्र 3.0 के तहत निवेशकों की आवेदन व अनुमोदन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सुगम बनाया जाएगा। कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म, पैन-आधारित पहचान, स्मार्ट डैशबोर्ड, बहुभाषी सहायता और एआई चैटबॉट जैसी सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। सीएम ने निवेश मित्र पोर्टल के नए संस्करण को लांच करने के निर्देश दिए।

जुमे की नमाज से पहले संभल में सुरक्षा सख्त, जामा मस्जिद के पास RAF और PAC

संभल संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा को लेकर तीन सदस्य न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है. ऐसे में शुक्रवार को जुमे की नमाज को लेकर लखनऊ पुलिस मुख्यालय से मुरादाबाद रेंज के कई जिलों में हाई अलर्ट रखा गया है. संभल की जामा मस्जिद में दोपहर 1:30 बजे अदा की जाने वाली नमाज से पहले चारों तरफ रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों का कड़ा पहरा है. स्थानीय पुलिस फोर्स भी तैनात की है. ड्रोन से निगरानी के साथ ही सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखी जा रही है. नमाज के दौरान दी जाने वाली तकरीर पर भी प्रशासन की नजर रहेगी.  दरअसल, गुरुवार को न्यायिक जांच आयोग के द्वारा मुख्यमंत्री योगी को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद आज जुमे की नमाज को लेकर संभल पुलिस-प्रशासन अलर्ट पर है. आज दोपहर को जिले की जामा मस्जिद में नमाज अदा की जाएगी. ऐसे में जामा मस्जिद के मुख्य द्वार के बाहर रैपिड एक्शन फोर्स और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई है. मस्जिद की तरफ जाने वाले रास्तों पर लकड़ी का जाल लगाकर बैरिकेडिंग की गई है.  वहीं, मस्जिद की तरफ जाने वाले रास्तों यानी कि पश्चिमी हिस्से में भी जवान लगाए गए हैं. इसी के साथ जामा मस्जिद के आसपास के इलाके में सीसीटीवी कैमरो से भी निगरानी की जा रही है. हिंसा के बाद से सीसीटीवी कैमरे का कंट्रोल रूम मस्जिद के सामने बनी हुई सत्यव्रत पुलिस चौकी में है.  उधर, न्यायिक आयोग के द्वारा मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपने के बाद जामा मस्जिद के सदर जफर अली ने कहा कि मेरी हिंदू और मुस्लिम भाइयों से अपील है कि शहर में अमन शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखें. उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के आने से मस्जिद में जुमे की नमाज पर कोई ऐसा नहीं पड़ेगा. जिस तरह से हमेशा नमाज होती आई है, उस तरह से आज भी नमाज अदा की जाएगी. 

वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2023-24 के नतीजों में कारखानों से लेकर जीवीए तक हर मोर्चे पर यूपी नंबर वन

उत्तर प्रदेश ने तोड़े सभी रिकार्ड, उद्योग वृद्धि में बना देश का चैम्पियन राज्य वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2023-24 के नतीजों में कारखानों से लेकर जीवीए तक हर मोर्चे पर यूपी नंबर वन प्रदेश के जीवीए में हुई 25.03% की ऐतिहासिक वृद्धि, अखिल भारतीय औसत से दोगुने से भी अधिक प्रदेश में कारखानों की संख्या में 15.91% की वृद्धि, राष्ट्रीय औसत से लगभग 7 गुना अधिक कार्यरत कर्मियों की संख्या में भी 9.37% की वृद्धि जो देश की औसत वृद्धि 5.9% से बेहतर योगी सरकार के विज़न के चलते यूपी में शुरू हुआ औद्योगिक क्रांति का युग सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश की नई औद्योगिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MOSPI) भारत सरकार द्वारा जारी वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2023-24 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश ने कारखानों की संख्या, कार्यरत कर्मियों और सकल मूल्य संवर्धन (GVA) – तीनों ही मोर्चों पर देश के सभी बड़े औद्योगिक राज्यों को पछाड़ दिया है।  औद्योगिक विकास के इस रिकॉर्ड प्रदर्शन ने साबित कर दिया है कि योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब देश की नई औद्योगिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है। जीवीए वृद्धि दर में उत्तर प्रदेश ने तोड़ा रिकॉर्ड वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2023-24 रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश का सकल मूल्य संवर्धन (GVA) वर्ष 2022-23 के ₹1.34 लाख करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹1.67 लाख करोड़ हो गया, यानी इसने 25.03% की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है। यह दर अखिल भारतीय औसत (11.9%) से दोगुने से भी अधिक है। इस तरह उत्तर प्रदेश इस मामले में देश में प्रथम स्थान पर है। कारखानों और रोजगार की संख्या में अभूतपूर्व उछाल रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में कारखानों की संख्या 19,102 (2022-23) से बढ़कर 22,141 (2023-24) हो गई है, जो 15.91% की वृद्धि दर्शाती है। यह वृद्धि राष्ट्रीय औसत (2.7%) से लगभग 7 गुना अधिक है। इसी तरह, कार्यरत कर्मियों की संख्या भी 14.86 लाख से बढ़कर 16.26 लाख तक पहुंच गई है, यानी 9.37% की वृद्धि जो देश की औसत वृद्धि (5.9%) से बहुत आगे है। योगी सरकार के प्रयासों का असर उद्योग वृद्धि में उत्तर प्रदेश के इस उल्लेखनीय प्रदर्शन में योगी सरकार की औद्योगिक नीतियों, निवेश प्रोत्साहन और बेहतर कानून-व्यवस्था को मुख्य कारण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के चलते उत्तर प्रदेश आज देश का औद्योगिक हब बनने की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है। यह उपलब्धि निवेशकों के विश्वास, श्रमिकों की मेहनत और सरकार की पारदर्शी नीतियों का परिणाम है।  टेबल अन्य राज्यों से तुलना में यूपी सबसे आगे राज्य, कारखानों की संख्या, कुल कर्मियों की संख्या, जीवीए उत्तर प्रदेश 15.91% 9.37% 25.03% कर्नाटक 3.27% 1.36% 18.76%  तमिलनाडु 1.15% 7.55% 11.16% महाराष्ट्र 0.35% 6.79% 9.27% गुजरात 7.35% 9.63% 7.51% भारत 2.7% 5.9% 11.9%

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सतत मॉनीटरिंग के बाद प्रभारी मंत्रियों को सौंपी राहत कार्यों की कमान

यूपी में बाढ़ : इस साल 43 जनपदों पर नदियां हुईं नाराज़, योगी सरकार बनी ढाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सतत मॉनीटरिंग के बाद प्रभारी मंत्रियों को सौंपी राहत कार्यों की कमान   इस वर्ष यूपी के 43 जिले बाढ़ से रहे हैं प्रभावित, फिलहाल 18 जिलों में बाढ़ की स्थिति इस वर्ष 9.55 लाख से अधिक जनसंख्या आई बाढ़ की चपेट में, अब केवल 2.46 लाख जनता, जिनका सरकार रख रही पूरा ध्यान   1273 मेडिकल टीमों ने अबतक निभाई सक्रिय भूमिका, 1796 बाढ़ चौकियों ने पहुंचा प्रभावितों को राहत   3579 नावें और मोटरबोट ने बचाव कार्य में लगकर बचाई जिंदगियां   अबतक 43 जनपदों के लिए 1391 शरणालय बनाए गए थे, वर्तमान में 18 जनपदों के लिए 557 संचालित लखनऊ  बढ़ते जलवायु परिवर्तन के इस दौर में नदियों का कोप बढ़ने लगा है। इस वर्ष उत्तर प्रदेश में मानसून के दौरान बरसात और नदियों के प्रकोप ने प्रदेश के 43 जिलों को प्रभावित किया। बावजूद इसके योगी सरकार अपनी जनता के लिए ढाल की तरह खड़ी रही। राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अबतक 116 तहसीलें, 2673 ग्राम और 123 वार्ड जलभराव से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ की चपेट में कुल 9,55,654 से अधिक लोग आए हैं। इस आपदा से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत और बचाव कार्य तेज़ी से संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों को लगातार निर्देशित कर रहे हैं। बीते दिन उन्होंने सभी प्रभारी मंत्रियों को आदेशित किया कि वे अपने-अपने जिलों में बाढ़ राहत कार्यों की कमान खुद संभालें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस संकट की घड़ी में सरकार हर नागरिक के साथ खड़ी है। राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी के मुताबिक अब तक प्रदेश में 1796 बाढ़ चौकियां स्थापित की गईं हैं और 1273 मेडिकल टीमों का गठन किया गया है। 3579 नाव एवं मोटरबोट बचाव कार्य में लगाए गए। वहीं, 1391 बाढ़ शरणालय बनाए गए जिनमें से 557 वर्तमान में संचालित हैं, जहां 79,958 लोग आश्रय लिए हुए हैं। अब तक 1,00,404 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। सरकार ने प्रभावितों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब तक 1,82,216 खाद्यान्न पैकेट और 10,30,534 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। 774 मकान क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें से 637 को सहायता राशि दी गई है, बाकियों को भी जल्द से जल्द सहायता राशि प्रदान करने की कवायद चल रही है। पशुओं के लिए 14,740 क्विंटल भूसा, पीने के पानी की शुद्धता के लिए 92,020 क्लोरीन टैबलेट और स्वास्थ्य की दृष्टि से 3,58,555 ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विषैले जीव-जंतुओं से बचाव के लिए एंटी स्नेक वैनम और एंटी रैबिज टीकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि “आपदा की इस घड़ी में सरकार हर पीड़ित के साथ खड़ी है और किसी को भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।”  इस वर्ष बाढ़ प्रभावित जिलों में…  बलिया, बहराइच, बदायूं, चंदौली, फर्रुखाबाद, गोंडा, गाजीपुर, हरदोई, कानपुर नगर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, प्रयागराज, शाहजहांपुर, उन्नाव, वाराणसी, मऊ, औरैया, अमरोहा, बस्ती, बांदा, बाराबंकी, कन्नौज, हापुड़, बिजनौर, संभल, संत कबीर नगर, गौतमबुद्ध नगर, गोरखपुर, मुरादाबाद, कानपुर देहात, फतेहपुर, अयोध्या, जालौन, आगरा, इटावा, चित्रकूट, हमीरपुर, भदोही, मथुरा और श्रावस्ती समेत 43 जिले शामिल रहे। आज तक की स्थिति फिलहाल प्रदेश में बाढ़ प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 18 रह गई है, इनमें- बलिया, बहराइच, बदायूं, चंदौली, फर्रुखाबाद, गोंडा, गाजीपुर, हरदोई, कानपुर नगर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, प्रयागराज, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं।  अब तक के आंकड़े साफ बताते हैं कि योगी सरकार ने हर स्तर पर तत्परता दिखाते हुए जन-जीवन की रक्षा की है।

आपदा मित्रों को होमगार्ड स्वयंसेवकों के रूप में तैनाती देने के लिए जनपदवार कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने होमगार्डों के रिक्त पदों पर नए एनरोलमेंट की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए आपदा मित्रों को होमगार्ड स्वयंसेवकों के रूप में तैनाती देने के लिए जनपदवार कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए: मुख्यमंत्री समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष एनरोलमेंट के लिए पुलिस भर्ती एवं प्रशिक्षण बोर्ड की मदद से गठित होगा नया बोर्ड: मुख्यमंत्री एनरोलमेंट नियमों में बदलाव पर मुख्यमंत्री का जोर, अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष करने और लिखित परीक्षा की व्यवस्था पर बल आपदा प्रबंधन का अनुभव या प्रशिक्षण प्राप्त लोगों को होमगार्ड एनरोलमेंट में मिलेगी प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाये रखने, यातायात नियंत्रण तथा आपदा की स्थिति में होमगार्डों की कर्तव्य परायणता सराहनीय: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में होमगार्डों के रिक्त पदों पर नए एनरोलमेंट की प्रक्रिया तत्काल प्रारम्भ करने के निर्देश दिए हैं। बदलते समय और बढ़ते दायित्वों को देखते हुए होमगार्ड एनरोलमेंट से जुड़े नियमों में संशोधन पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष एनरोलमेंट सुनिश्चित करने के लिए पुलिस भर्ती एवं प्रशिक्षण बोर्ड के सहयोग से नया बोर्ड गठित करने के भी निर्देश दिए हैं। गुरुवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था, यातायात नियंत्रण तथा आपदा की परिस्थितियों में होमगार्ड स्वयंसेवकों की भूमिका की सराहना की। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 1,18,348 स्वीकृत पदों के विरुद्ध 71,155 होमगार्ड सक्रिय हैं। अगले दस वर्षों में लगभग 38,000 स्वयंसेवक सेवानिवृत्त होंगे, जबकि मौजूदा बल में पचास वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 51 प्रतिशत से अधिक स्वयंसेवक कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को अधिक अवसर देने और सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पात्रता, परीक्षा और चयन से संबंधित प्रावधानों में सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बल को और अधिक युवा स्वरूप देने के लिए एनरोलमेंट की अधिकतम आयु 30 वर्ष हो। साथ ही, चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा अनिवार्य की जाए, पात्रता मानकों को समयानुकूल बनाया जाए और परीक्षण प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन से संबंधित अनुभव या प्रशिक्षण प्राप्त लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नई एनरोलमेंट व्यवस्था शीघ्र तैयार की जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रिक्तियों की पूर्ति से उत्तर प्रदेश का होमगार्ड संगठन और अधिक प्रशिक्षित, सक्षम और जनसेवा के प्रति समर्पित स्वरूप में सामने आएगा। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि होमगार्ड्स की सेवाएं पुलिस प्रशासन, यातायात प्रबंधन, शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन, खनन, नगरीय निकायों, दूरदर्शन, आकाशवाणी, एफसीआई और विकास प्राधिकरणों सहित विभिन्न क्षेत्रों में ली जा रही हैं। हाल ही में हुए लोकसभा व विधानसभा चुनावों, विभिन्न राज्यों के निर्वाचन कार्य तथा महाकुंभ-2025 जैसे आयोजनों में भी होमगार्ड्स ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि विभाग की समस्त प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है। ड्यूटी आवंटन, भत्तों का भुगतान, अनुग्रह राशि और पेंशन जैसी व्यवस्थाएं अब पूरी तरह ऑनलाइन हो चुकी हैं। होमगार्ड मित्र ऐप जैसी पहल ने कार्यप्रणाली को और अधिक सरल व पारदर्शी बनाया है। प्रशिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए एक केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान और 12 मंडलीय प्रशिक्षण केंद्र सक्रिय हैं, जहां प्रतिवर्ष 15,000 से अधिक स्वयंसेवकों को नियमित और उन्नत प्रशिक्षण दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि नई नामांकन व्यवस्था लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश का होमगार्ड बल और अधिक पेशेवर बनेगा तथा जनता की सेवा में पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करेगा।