samacharsecretary.com

सीएम योगी का ऐलान- फिर आऊंगा भदोही, विश्वविद्यालय के विधिवत लोकार्पण के साथ लोगो-कुलगीत-थीम गीत और नए भवन के निर्माण को बढ़ाएंगे आगे

भदोही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को संत रविदास नगर भदोही के युवाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगात देते हुए कहा कि अब यहां के नौजवानों की डिग्री पर उनके अपने जिले और अपने विश्वविद्यालय की पहचान होगी। जिले के पीजी कॉलेज को काशी नरेश विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दिए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भदोही के युवाओं की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है। जिले के कॉलेजों को विश्वविद्यालय से जोड़ने की कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है। अब यहां के नौजवानों को मिलने वाली डिग्री पर काशी नरेश विश्वविद्यालय, संत रविदास नगर भदोही का नाम होगा। मुख्यमंत्री ने इसे केवल एक विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं, बल्कि जिले की अपनी शैक्षणिक पहचान स्थापित होने से जोड़ते हुए कहा कि सरकार इस संस्था में बेहतरीन सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगी।  मुख्यमंत्री भदोही, औराई एवं ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्रों में ₹1,340 करोड़ से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, चाभी और नियुक्ति पत्र भी वितरित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि आज जो ये पैसा इन तीर्थों के विकास के लिए खर्च हो पा रहा है, विरासत और पूर्वजों की धरोहर का संरक्षण का कार्य और उसका सुंदरीकरण हो रहा है। 2017 के पहले यह पैसा, इन तीर्थों को नहीं मिलता था। यही पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल के नाम पर जमीनों को कब्जा करने का माध्यम बन जाता था। डबल इंजन की सरकार ने उस कब्जे की प्रवृत्ति को रोका, विरासत का संरक्षण करते हुए तीर्थों के विकास को और आस्था को सम्मान देने का काम किया। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाया और माफिया मुक्त, कर्फ्यू मुक्त उत्तर प्रदेश बना कर, उपद्रव मुक्त उत्तर प्रदेश बना करके अब उत्सव युक्त उत्तर प्रदेश बनाने का काम किया है। विश्वविद्यालय में विकसित की जाएंगी आधुनिक सुविधाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय की सौगात को भदोही की वर्षों पुरानी आकांक्षा से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश में वर्षों से लंबित परियोजनाओं को उनकी सरकार ने फिर से आगे बढ़ाने का काम किया है। इसी क्रम में भदोही के लोग लंबे समय से अपने जिले में विश्वविद्यालय की मांग कर रहे थे। मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय की स्थापना पहले ही की जा चुकी थी, लेकिन भदोही के जनप्रतिनिधियों ने उनसे मिलकर जिले के लिए अलग विश्वविद्यालय की आवश्यकता बताई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार भदोही आने पर उन्होंने यहां विश्वविद्यालय बनाने का वादा किया था। आज उन्हें यह बताते हुए प्रसन्नता है कि काशी नरेश विश्वविद्यालय के रूप में यहां के पीजी कॉलेज को मान्यता दे दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब भदोही के युवाओं को मिलने वाली डिग्री उनके अपने जिले के विश्वविद्यालय के नाम से होगी। उन्होंने कहा कि अपने जिले की पहचान अपने विश्वविद्यालय से, अपनी संस्थाओं से होती है। सरकार काशी नरेश विश्वविद्यालय को केवल नाम तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि यहां बेहतरीन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि विश्वविद्यालय के विकास की आगे की रूपरेखा भी तैयार है। उन्होंने कहा कि वह विश्वविद्यालय के लिए अलग से भदोही आएंगे। तब विश्वविद्यालय का विधिवत लोकार्पण होगा, उसके लोगो, कुलगीत और थीम गीत को आगे बढ़ाया जाएगा तथा नए भवन के निर्माण का शिलान्यास भी कराया जाएगा।  विश्वविद्यालय के बाद मेडिकल कॉलेज की दिशा में भी आगे बढ़ रहा भदोही मुख्यमंत्री ने भदोही के लिए उच्च शिक्षा के साथ स्वास्थ्य शिक्षा की दिशा में भी आगे बढ़ने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ नहीं, बल्कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ की है। भदोही में काशी नरेश विश्वविद्यालय बन चुका है और आने वाले समय में यहां मेडिकल कॉलेज का कार्य भी आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विकास के सारे काम एक-एक कर पूरे किए जा रहे हैं। विकास के साथ विरासत का सम्मान और गरीब कल्याण की योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव के गरीब, युवा, महिला, कारीगर और श्रमिक तक पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने भदोही की बदलती पहचान को उसके विश्व प्रसिद्ध कालीन उद्योग से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि संत रविदास नगर भदोही पहले से कालीन उद्योग के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब तेजी से हो रहे विकास के साथ यह नई पहचान लेकर आगे बढ़ रहा है। इंडिया कारपेट एक्सपो के गोल्डन जुबली आयोजन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें करीब 250 एग्जीबिटर्स और 450 विदेशी खरीदार आए हैं। इनमें 106 खरीदार ब्रिक्स देशों से हैं और कुल 65 देशों से आए खरीदार भदोही के कारीगरों के हुनर को वैश्विक पहचान दे रहे हैं। सरकार कारीगरों को टेक्नोलॉजी, ट्रेड और एक्सपोर्ट की सुविधा देने के साथ कारपेट एक्सपो जैसे आयोजनों के माध्यम से उनके उत्पादों को दुनिया के बाजार तक पहुंचा रही है।  विंध्य एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा संत रविदास नगर मुख्यमंत्री ने भदोही की भौगोलिक स्थिति को विकास की बड़ी संभावना बताते हुए कहा कि एक ओर बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी वाराणसी और दूसरी ओर संगम नगरी प्रयागराज है तथा दोनों के बीच संत रविदास नगर स्थित है। यहां विरासत भी है और डबल इंजन सरकार की गति से विकास भी। उन्होंने बताया कि जब गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार को विंध्य एक्सप्रेसवे के रूप में आगे बढ़ाने की बात आई तो उन्होंने संत रविदास नगर को भी इससे जोड़ने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास एकांगी नहीं हो सकता, विकास सबको साथ लेकर चलता है और इसी भावना के साथ सरकार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने भदोही की पहचान को सद्गुरु संत रविदास की विरासत से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ही यह बात कही गई थी कि कालीन उद्योग के लिए विख्यात भदोही आने वाले समय में समाज को जोड़ने का संदेश देने वाले सद्गुरु रविदास जी महाराज के नाम से भी जाना जाएगा। संत रविदास के समतामूलक समाज के संदेश का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 600 वर्ष पहले उन्होंने ऐसे राज की कामना की थी, जहां सभी को अन्न मिले और बिना भेदभाव के सभी को … Read more

‘संत रविदास नगर भदोही’ से दलित-राजभर दोनों को संदेश, योगी ने एक नाम में जोड़ी दो विरासत

 भदोही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही को ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम देने की बात दोहराकर इतिहास के साथ राजनीतिक संदेश भी दिया है। संत रविदास का नाम जिले की पहचान में वापस लाने से दलित समाज की आस्था और सम्मान जुड़ा है, वहीं ‘भदोही’ को बरकरार रखने से भार राज से जुड़ी ऐतिहासिक पहचान भी कायम रहेगी। पूर्वांचल के सामाजिक समीकरण में अहम दलित और राजभर समाज के लिहाज से भी इस फैसले के मायने हैं।   मुख्यमंत्री योगी ने पहली बार 29 जुलाई 2026 को वाराणसी में भदोही का नाम बदलने की घोषणा की थी। रविवार को भदोही की धरती से उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जनपद ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ₹1,340 करोड़ से अधिक की 112 परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।   मुलायम ने बनाया जिला, मायावती ने बदला नाम तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग कर भदोही को नया जनपद बनाया। इसके तीन साल बाद 4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के सम्मान में भदोही का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर’ करने का नोटिफिकेशन जारी किया।   करीब 17 साल बाद 6 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैबिनेट की बैठक के माध्यम से ‘संत रविदास नगर’ का नाम बदलकर फिर ‘भदोही’ कर दिया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘संत रविदास नगर’ और ‘भदोही’ दोनों को जिले के नाम में स्थान दिया है।   भार राज्य की राजधानी से जुड़ा भदोही भदोही का इतिहास जिला बनने से सदियों पुराना है। जिला प्रशासन के आधिकारिक इतिहास के अनुसार इसका नाम यहां के ‘भार राज्य’ से पड़ा, जिसने भदोही को अपनी राजधानी बनाया था। क्षेत्र में भार शासकों से जुड़े पुराने टीले और तालाब भी बताए गए हैं।   अकबर के शासनकाल में भदोही को दस्तुर बनाकर इलाहाबाद (प्रयागराज) सरकार में शामिल किया गया। बाद में यह अलग-अलग शासकों के अधीन रहा। वर्ष 1911 में बनारस रियासत का हिस्सा बना और आजादी के बाद वाराणसी जिले में शामिल रहा।   नामकरण में सामाजिक समीकरण का भी संदेश संत रविदास दलित समाज के बड़े आराध्य और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। उनका नाम जिले से दोबारा जुड़ना दलित समाज के लिए सम्मान के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं भार राज से जुड़े ‘भदोही’ नाम को कायम रखना राजभर समाज की ऐतिहासिक विरासत को भी स्थान देता है।   मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में संत रविदास के उस संदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें सभी को अन्न मिलने और छोटे-बड़े के बिना भेदभाव साथ रहने की कल्पना की गई है। इसे उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार की बिना भेदभाव योजनाओं से जोड़ा।   इस तरह करीब तीन दशक में जिले के नाम की यह चौथी महत्वपूर्ण कड़ी है। मुलायम सिंह यादव ने भदोही को अलग जिला बनाया, मायावती ने इसे संत रविदास नगर किया और अखिलेश यादव ने फिर भदोही कर दिया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों नामों को जोड़कर ‘संत रविदास नगर भदोही’ की पहचान सामने रखी है।

योगी सरकार में यूपी के निर्यात को लगे पंख, कालीन उद्योग बना वैश्विक पहचान

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को निर्यात के मोर्चे पर नई रफ्तार मिली है। प्रदेश का निर्यात अब पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, खाद्य-डेयरी और अन्य क्षेत्रों के उत्पादों ने भी वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत जगह बनाई है। इसी बदलती तस्वीर में पूर्वांचल का कालीन उद्योग भी यूपी की निर्यात पहचान को दुनिया के बाजार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। भदोही में आयोजित 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो इस वैश्विक पहचान का बड़ा मंच बनकर सामने आया है। प्रदेश के निर्यात में बीते वर्षों में आए बदलाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2016-17 में यूपी का निर्यात 84,283 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,01,241 करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी निर्यात मूल्य में करीब ढाई गुना वृद्धि दर्ज हुई। इससे पहले 2012-17 के दौरान निर्यात की औसत वार्षिक वृद्धि दर 4.1 प्रतिशत थी, जो 2017 के बाद बढ़कर लगभग 7.3 प्रतिशत हो गई। इस तरह निर्यात वृद्धि की रफ्तार करीब 1.8 गुना तेज हुई है। भदोही के कालीन की दुनिया में मजबूत पकड़ उत्तर प्रदेश के कालीन उद्योग की बात हो तो संत रविदास नगर (भदोही) का नाम सबसे आगे आता है। वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश के कुल कालीन निर्यात में अकेले भदोही की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से ज्यादा रही। वहीं भदोही-मीरजापुर-वाराणसी का कालीन क्लस्टर मिलकर यूपी के करीब 88 प्रतिशत कालीन निर्यात में योगदान देता है। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारत के कुल हस्तनिर्मित कालीन निर्यात में उत्तर प्रदेश (विशेषकर भदोही-मीरजापुर क्लस्टर) की हिस्सेदारी ऐतिहासिक रूप से 55 से 60 प्रतिशत के बीच रही है। 2017 से पहले नीतिगत उपेक्षा, बिजली संकट, जटिल टैक्स प्रक्रियाओं और बुनियादी ढांचे के अभाव के कारण यह क्लस्टर भारी मंदी झेल रहा था। उस समय यूपी से विनिर्माण या वैश्विक निर्यात में बड़े उछाल की उम्मीद करना 'कल्पना से परे' माना जाता था। निर्यातक और उद्योग राज्य से पलायन कर रहे थे, जबकि आज अकेले भदोही-मीरजापुर-वाराणसी क्लस्टर से करीब ₹5,000 करोड़ का कालीन निर्यात वैश्विक बाजारों (यूएस, यूरोप, मिडिल ईस्ट) में हो रहा है। करीब पांच लाख श्रमिक, कारीगर और बुनकर जुड़े कालीन उद्योग सिर्फ निर्यात का आंकड़ा नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का आधार भी है। भदोही के कालीन उद्योग से करीब पांच लाख श्रमिक, कारीगर और बुनकर जुड़े हैं। हस्तनिर्मित कालीन के क्षेत्र में भारत दुनिया के प्रमुख निर्यातकों में शामिल है और भदोही की पहचान इस वैश्विक कारोबार में खास है। ओडीओपी योजना, टूलकिट वितरण, मुद्रा लोन, आधुनिक लूम और सोलर लूम की व्यवस्था ने स्थानीय कारीगरों/बुनकरों की आय और कार्य परिस्थितियों में बड़ा सुधार किया है। बिचौलियों पर उनकी निर्भरता घटी है और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन से युवाओं का पलायन रुका है। बदली यूपी की एक्सपोर्ट बास्केट 2012-17 के दौरान प्रदेश की निर्यात टोकरी में मात्र चमड़ा, हस्तशिल्प, कालीन-दरी की प्रमुख हिस्सेदारी थी। अब तस्वीर अधिक विविध हो चुकी है। वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक्स 24 प्रतिशत, इंजीनियरिंग 20 प्रतिशत और खाद्य-डेयरी 11 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में शामिल हैं। इससे यूपी के निर्यात आधार के विस्तार का भी पता चलता है। 2017 से पहले यूपी के पारंपरिक हस्तशिल्प को कोई वैश्विक ब्रांडिंग या संगठित बाजार नहीं मिलता था, जबकि आज देश के हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट में यूपी का हिस्सेदारी 16.56 फीसदी है। 'एक जिला, एक उत्पाद' (ओडीओपी) और निर्यात प्रोत्साहन नीति के बाद हस्तशिल्प और संबंधित पारंपरिक उत्पादों का निर्यात दोगुने से अधिक स्तर पर पहुंच चुका है। बेहतर कनेक्टिविटी (पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जेवर एयरपोर्ट), निर्बाध बिजली, और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में शीर्ष रैंकिंग ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है उत्तर प्रदेश आज सिर्फ पारंपरिक हस्तशिल्प ही नहीं, बल्कि मोबाइल/इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस कॉरिडोर और टेक्सटाइल का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है। कारपेट एक्सपो मार्ट से वैश्विक बाजार तक पहुंच भदोही में 7.5 एकड़ में विकसित कारपेट एक्सपो मार्ट का उद्घाटन दिसंबर 2020 में किया गया था। इस अत्याधुनिक मंच ने कालीन कारोबार को वैश्विक खरीदारों से सीधे जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। इसी कड़ी में 4 से 7 अक्टूबर 2026 तक भदोही में 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो आयोजित हो रहा है। इस एक्सपो में लगभग 250 एग्जीबिटर्स और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी बायर्स हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ब्रिक्स देशों के 106 बायर्स भी हैं। ऐसे में भदोही के कालीनों के रंग और हुनर को एक बार फिर दुनिया के बाजार में नई चमक मिलने जा रही है।

आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के कर्मियों को दिया जाएगा तकनीकी प्रशिक्षण, मरीजों को होगी सुविधा

लखनऊ, आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के आठ वर्ष और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर 7 अक्टूबर बुधवार को लखनऊ में राज्य स्तरीय वार्षिक समारोह का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो सकते हैं। समारोह में आयुष्मान भारत और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रदेश में और मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड को एबीडीएम से जोड़ने वाले अस्पतालों को किया जाएगा सम्मानित साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि समारोह के पहले सत्र में एबी-पीएमजेएवाई और एबीडीएम के प्रभावी क्रियान्वयन में बेहतर काम करने वाले जनपदों, अधिकारियों, कर्मचारियों, फील्ड लेवल वर्कर्स, ऑपरेटर्स और अस्पतालों को सम्मानित किया जाएगा। आयुष्मान कार्ड बनाने, अधिक से अधिक पात्र लोगों को योजना का लाभ दिलाने, कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मान दिया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड को एबीडीएम से जोड़ने और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले अस्पतालों और कार्मिकों को भी सम्मानित किया जाएगा। इससे योजना से जुड़े लोगों और अस्पतालों को बेहतर काम करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। योजना से जुड़े अस्पतालों के कर्मियों को दिया जाएगा तकनीकी प्रशिक्षण स्वास्थ्य सचिव रितु माहेश्वरी ने बताया कि समारोह के दूसरे सत्र में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण और हैंड-होल्डिंग सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें अस्पतालों को इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर) तैयार करने और उसे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जोड़ने की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार पीएमजेएवाई के तहत जुड़े अस्पतालों के लिए ईएचआर तैयार करना और उसे एबीडीएम से लिंक करना जरूरी है। प्रदेश में बड़ी संख्या में अस्पताल पहले ही एबीडीएम से जुड़ चुके हैं। हालांकि, कई अस्पतालों में ईएचआर तैयार करने और उसे डिजिटल मिशन से जोड़ने की प्रक्रिया को और मजबूत करने की जरूरत है। तकनीकी सत्र में अस्पतालों को ईएचआर जनरेशन, एबीडीएम इंटीग्रेशन और इससे जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य अस्पतालों को निर्धारित मानकों का पालन करने में मदद करना है, ताकि पात्र अस्पताल गुणवत्ता आधारित प्रोत्साहन का लाभ भी प्राप्त कर सकें। डिजिटल हेल्थ सेवाओं को बढ़ावा दे रही योगी सरकार योगी सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित बनाने पर लगातार जोर दे रही है। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से पात्र लोगों को कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटल विस्तार पर भी ध्यान दिया जा रहा है। योगी सरकार का प्रयास है कि आयुष्मान योजना के तहत उपचार की सुविधा बढ़ाने के साथ अस्पतालों में डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिले। इसके लिए अस्पतालों को ऑनलाइन प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और नियमित हैंड होल्डिंग उपलब्ध कराई जा रही है। आने वाले समय में भी अस्पतालों को इस संबंध में लगातार सहयोग दिया जाएगा, ताकि प्रदेश में आयुष्मान भारत और डिजिटल हेल्थ सेवाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

अब प्रदेश से पलायन नहीं होता, अपनी माटी में हुनर दिखा रहे कारीगर: मुख्यमंत्री

संत रविदास नगर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी अनलिमिटेड पोटेंशियल का प्रदेश था, लेकिन बीच में बीमारू मानसिकता वाली सरकारों ने इसे बीमारू बना दिया था। जिस उत्तर प्रदेश में कभी कारीगर और हस्तशिल्पी रोजी-रोजगार के लिए पलायन पर मजबूर थे, आज उन्हें अपनी ही माटी में हुनर दिखाने का मंच मिल रहा है। 2017 से पहले दंगा-कर्फ्यू और अराजकता से कारोबार बेहाल था, लेकिन अब कोई माफिया खुली जीप में पिस्टल लहराकर नहीं धमका सकता। न ही बेटी और व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगा सकता है। आज कालीन उद्योग को तकनीक, डिजाइन और बाजार के साथ बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षा मिली है। भदोही का कालीन दुनिया के बाजार में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री ने रविवार को संत रविदास नगर, भदोही के कारपेट एक्सपो मार्ट में 4-7 अक्टूबर तक आयोजित इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण का शुभारंभ किया। उन्होंने स्टॉलों पर जाकर कारीगरों व हस्तशिल्पियों के उत्पाद देखे। इस एक्सपो में लगभग 250 एग्जीबिटर्स और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी बायर्स हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ब्रिक्स देशों के 106 बायर्स भी हैं।   ओडीओपी ने कालीन को दिया बड़ा बाजार मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में हताशा और निराशा थी। दंगा, कर्फ्यू, उपद्रव और माफियागिरी के कारण कारोबार का माहौल नहीं था। कारीगर को काम नहीं मिलता था और देशी-विदेशी खरीदार भी नहीं आते थे। सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना में भदोही के कालीन को शामिल कर कारीगरों को तकनीक, डिजाइन और बाजार से जोड़ा। सिल्क क्लस्टर से ₹6,100 करोड़ का निर्यात सीएम ने कहा कि संत रविदास नगर और सिल्क क्लस्टर से ₹6,100 करोड़ का निर्यात हो रहा है। देश के कुल कालीन निर्यात में संत रविदास नगर, मीरजापुर और वाराणसी के सिल्क क्लस्टर की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है। अकेले संत रविदास नगर में 2,500 एमएसएमई यूनिट हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर ₹10 हजार करोड़ है। इस उद्योग से पांच लाख से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिला है।   उन्होंने बताया कि जनपद में निर्मित 90 प्रतिशत कालीन अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन समेत विभिन्न देशों को निर्यात किए जाते हैं। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन को जीआई टैग भी मिला है। कारपेट और टेक्सटाइल क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा, डिजाइनिंग और डाइंग के प्रशिक्षण के लिए भदोही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कारपेट टेक्नोलॉजी स्थापित है।   छह घंटे में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ कालीन उद्योग को मिल रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे का विंध्य एक्सप्रेसवे के रूप में विस्तार होने पर संत रविदास नगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट छह घंटे में पहुंचा जा सकेगा। वहां कार्गो सुविधा से भदोही के कालीन दुनिया के बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। साथ ही वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैंड वाटरवे और वाराणसी में लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी कार्गो सुविधा उपलब्ध है।   अब कोई माफिया नहीं धमका सकता व्यापारी को मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में उपद्रव, कर्फ्यू और दंगे नहीं होते। कोई माफिया खुली जीप में पिस्टल लहराकर किसी को धमका नहीं सकता और बेटी व व्यापारी की सुरक्षा में सेंध नहीं लगा सकता। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था का परिणाम है कि प्रदेश को ₹50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। ₹15 लाख करोड़ के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और साढ़े सात लाख करोड़ रुपये के उद्योग बहुत जल्द धरातल पर उतरने जा रहे है। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं और प्रत्येक यूनिट को पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर दिया जा रहा है।   14 हजार से 35 हजार के पार पहुंचे कारखाने मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में करीब 14 हजार कारखाने थे, जिनकी संख्या अब 35 हजार से अधिक हो गई है। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का निर्माण उत्तर प्रदेश में हो रहा है। देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड पर काम चल रहा है और प्रदेश में 12 निजी औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र जैसी व्यवस्थाओं के जरिये निवेशकों को हरसंभव सुविधाएं दी जा रही हैं।   नए संसद भवन में भी भदोही का कालीन सीएम योगी ने कहा कि भदोही के हुनरमंद हाथों से तैयार कालीन आज दुनिया के बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों की शोभा बढ़ा रहे हैं। देश के नए संसद भवन में बिछा कालीन भी संत रविदास नगर में तैयार हुआ है। जिले के पास जीआई टैग, ओडीओपी प्लेटफार्म, कारपेट एक्सपो मार्ट और मजबूत निर्यात तंत्र है। लखनऊ और हरदोई के बीच एक हजार एकड़ में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल एंप्लॉयमेंट एंड स्किलिंग जोन बनाने की तैयारी है। यहां उद्योगों की मांग के अनुसार स्किल्ड मैनपावर तैयार की जाएगी।   इंटरनेशनल ट्रेड शो से दुनिया ने देखी यूपी की ताकत मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में छह लाख से अधिक विजिटर पहुंचे। डेढ़ लाख से अधिक बी2बी बैठकें हुईं। इसमें 2,400 से अधिक एग्जीबिटर्स और 650 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल हुए। इस अवसर पर सांसद डॉ. विनोद कुमार बिंद, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, औराई विधायक दीनानाथ भास्कर, ज्ञानपुर विधायक विपुल दुबे, सीईपीसी अध्यक्ष कैप्टन मुकेश गोम्बर, उपाध्यक्ष असलम महबूब, एमएसएमई विभाग के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील और इंडिया एक्सपो मार्ट लिमिटेड के चेयरमैन डॉ. राकेश शर्मा आदि मौजूद रहे।

अब पलायन नहीं, अपनी माटी में हुनर दिखा रहे कारीगर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

भदोही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस उत्तर प्रदेश में कभी कारीगर और हस्तशिल्पी रोजी-रोजगार के लिए पलायन को मजबूर थे, आज उन्हें अपनी ही माटी में हुनर दिखाने का मंच मिल रहा है। तकनीक, डिजाइन और बाजार के साथ बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षा मिली है। भदोही का कालीन आज दुनिया के बाजार में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री रविवार को संत रविदास नगर, भदोही के कारपेट एक्सपो मार्ट में चार से सात अक्टूबर तक आयोजित इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण का शुभारंभ करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने फीता काटकर एक्सपो का शुभारंभ किया और स्टॉलों पर जाकर कारीगरों व हस्तशिल्पियों के उत्पाद देखे। एक्सपो में 227 से अधिक एग्जीबिटर्स और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी बायर्स हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ब्रिक्स देशों के 106 बायर्स हैं।   ओडीओपी ने कालीन को दिया बड़ा बाजार मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में हताशा और निराशा थी। दंगा, कर्फ्यू, उपद्रव और माफियागिरी के कारण कारोबार का माहौल नहीं था। कारीगर को काम नहीं मिलता था और देशी-विदेशी खरीदार भी नहीं आते थे। सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में भदोही के कालीन को शामिल कर कारीगरों को तकनीक, डिजाइन और बाजार से जोड़ा। सिल्क क्लस्टर से ₹6,100 करोड़ का निर्यात मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास नगर और सिल्क क्लस्टर से ₹6,100 करोड़ का निर्यात हो रहा है। देश के कुल कालीन निर्यात में संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी के सिल्क क्लस्टर की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है। अकेले संत रविदास नगर में 2,500 एमएसएमई यूनिट हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर ₹10 हजार करोड़ है। इस उद्योग से पांच लाख से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिला है।   उन्होंने बताया कि जनपद में निर्मित 90 प्रतिशत कालीन अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन समेत विभिन्न देशों को निर्यात किए जाते हैं। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन को जीआई टैग भी मिला है। कारपेट और टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी में तकनीकी शिक्षा, डिजाइनिंग और डाइंग के प्रशिक्षण के लिए भदोही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कारपेट टेक्नोलॉजी स्थापित है।   छह घंटे में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ कालीन उद्योग को मिल रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे का विंध्य एक्सप्रेसवे के रूप में विस्तार होने पर संत रविदास नगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट छह घंटे में पहुंचा जा सकेगा। वहां की कार्गो सुविधा से भदोही की कालीन दुनिया के बाजार तक आसानी से पहुंच सकेगी। साथ ही वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैंड वाटरवे और वाराणसी में लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी कार्गो सुविधा उपलब्ध है।   अब कोई माफिया नहीं धमका सकता व्यापारी को मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में उपद्रव, कर्फ्यू और दंगा नहीं होते। कोई माफिया खुली जीप में पिस्टल लहराकर किसी को धमका नहीं सकता और बेटी व व्यापारी की सुरक्षा में सेंध नहीं लगा सकता।   उन्होंने कहा कि प्रदेश को ₹50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। ₹15 लाख करोड़ के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और साढ़े सात लाख करोड़ रुपये के उद्योग बहुत जल्द धरातल पर उतरने जा रहे है। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं और प्रत्येक यूनिट को पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर दिया जा रहा है।   14 हजार से 35 हजार के पार पहुंचे कारखाने मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में करीब 14 हजार कारखाने थे, जिनकी संख्या अब 35 हजार से अधिक हो गई है। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का निर्माण उत्तर प्रदेश में हो रहा है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड पर काम चल रहा है और प्रदेश में 12 निजी औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र जैसी व्यवस्थाओं के जरिये निवेशकों को सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 प्रतिशत हिस्सा है।   नए संसद भवन में भी भदोही का कालीन मुख्यमंत्री ने कहा कि भदोही के हुनरमंद हाथों से तैयार कालीन आज दुनिया के बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों की शोभा बढ़ा रहे हैं। देश के नए संसद भवन में बिछा कालीन भी संत रविदास नगर में तैयार हुआ है। जिले के पास जीआई टैग, ओडीओपी का प्लेटफार्म, कारपेट एक्सपो मार्ट और मजबूत निर्यात तंत्र है।   उन्होंने बताया कि लखनऊ और हरदोई के बीच एक हजार एकड़ में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल एंप्लॉयमेंट एंड स्किलिंग जोन बनाने की तैयारी है। यहां उद्योगों की मांग के अनुसार कुशल मैनपावर तैयार की जाएगी।   इंटरनेशनल ट्रेड शो से दुनिया ने देखी यूपी की ताकत मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में छह लाख से अधिक विजिटर पहुंचे। डेढ़ लाख से अधिक बी2बी बैठकें हुईं। इसमें 2,400 से अधिक एग्जीबिटर्स और 650 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल हुए।   कार्यक्रम में इनकी रही मौजूदगी कार्यक्रम में सांसद डॉ. विनोद कुमार बिंद, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, औराई विधायक दीनानाथ भास्कर, ज्ञानपुर विधायक विपुल दुबे, सीईपीसी अध्यक्ष कैप्टन मुकेश गोम्बर, उपाध्यक्ष असलम महबूब, एमएसएमई विभाग के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील और इंडिया एक्सपो मार्ट लिमिटेड के चेयरमैन डॉ. राकेश शर्मा समेत कारीगर, हस्तशिल्पी, निर्यातक और देश-विदेश से आए खरीदार मौजूद रहे।

जातीय खेमों में लड़ता भारत नहीं, हमें ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ चाहिए: सीएम योगी

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गायत्री परिवार की प्रतियोगिता में 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं जुड़े। आज का युवा ही भारत का भाग्य विधाता बनने वाला है। हम बिखरा-बंटा, जातीय खेमों में लड़ता भारत नहीं चाहते। ऐसा सोचने वाले पूर्वजों के प्रति श्रद्धा नहीं रखते हैं। हम ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ चाहते हैं, प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी हम सबको ऐसे भारत के लिए कार्य करने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री रविवार को राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मां गायत्री, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य व माता भगवती देवी के चित्रों के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सीएम ने स्मारिका का विमोचन और भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्तर प्रदेश के शीर्ष-10 विद्यालयों को पुरस्कृत भी किया। गायत्री परिवार ने यज्ञों की वेदी पर साथ बैठाकर सर्वसमाज को जोड़ा सीएम ने कहा कि गायत्री परिवार के पास ड़ॉ. प्रणव पंड्या का मार्गदर्शन और डॉ. चिन्मय पंडया जैसे दूरदर्शी नायक हैं। इसलिए परिवार को अगले 100 वर्ष के लिए लक्ष्य तय करना है। गायत्री परिवार को तनावग्रस्त, संघर्ष में उलझी, अस्तित्व के जूझती मानवता के जीवन में नया उजाला लाना है। जब देश पराधीन था और व्यक्ति हताश-निराश था, लोगों को लगता था कि गुलामी नियति बन चुकी है। तब ब्रजभूमि आगरा में जन्म लेकर भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों व परंपरा के प्रति अगाध निष्ठा रखने वाले एक ऋषि का प्रादुर्भाव होता है। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने मथुरा में प्रारंभिक साधना को बढ़ाते हुए हरिद्वार में जिस गायत्री परिवार की स्थापना की, उसने यज्ञों के माध्यम से सर्वसमाज को एक वेदी पर बैठाकर सामाजिक एकता का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। तीन साल में तीन संस्थाएं, सबका लक्ष्य एक मुख्यमंत्री ने कहा कि 1923 में गोरखपुर में गीताप्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई। तीनों के रास्ते, स्थान भले अलग हैं, लेकिन लक्ष्य एक है। तीनों संगठनों ने समाज की सुप्त चेतना को जागृत किया और उन्हें सनातन मूल्यों के साथ जोड़ा। भारत-भारतीयता का अहसास करके युवाओं को देश की आजादी के लिए कार्य करने को प्रेरित किया। आजादी के आंदोलन से जुड़े आचार्य जी सीएम ने कहा कि पं. श्रीराम शर्मा स्वाधीनता संग्राम सेनानी के रूप में आजादी के आंदोलन से जुड़े रहे। आजादी के आंदोलन से जुड़े अनेक ऋषियों ने इसमें सक्रिय योगदान दिया, लेकिन उन्हें लगा कि सफलता के लिए भौतिक ताकत के साथ आध्यात्मिक शक्ति की भी आवश्यकता है, तो साधना के माध्यम से उसे आगे बढ़ाया। विचार पर चलने वाला संगठन तय करता है लंबी दूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि विश्वामित्र द्वारा रचित सृष्टि का पहला मंत्र ‘गायत्री मंत्र’ परमपिता के तेज से जोड़ने का आह्वान करता है। जिसने भी इसकी शक्ति को अंगीकार किया, उसका कल्याण हो गया। पं. श्रीराम शर्मा जी इस संगठन को अपना नाम दे सकते थे, लेकिन उनका मानना था कि व्यक्ति से बड़ा परिवार होता है। इसलिए इसे गायत्री परिवार नाम दिया। व्यक्ति के नाम पर चलने वाला संगठन कुछ वर्षों के बाद धराशायी हो जाता है, लेकिन विचार के नाम पर चलने वाला संगठन लंबी दूरी तय करता है। 100 वर्ष की यह साधना इसका प्रमाण है। शब्द ब्रह्म है, विचार कभी नहीं मरते, इसी का प्रतीक है अखिल विश्व गायत्री परिवार। संकट का मिलकर सामना करता था संयुक्त परिवार सीएम ने कहा कि यज्ञों की वेदी पर ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना से समाज को जोड़ने का काम पवित्र है। पहले संसाधन कम थे, लेकिन परिवार हमारी ताकत था। सभी भाई-उनके बच्चे संयुक्त परिवार की परंपरा में रहते थे। हर कोई मिलकर संकट का सामना करता था। आज परिवार सीमित हो गए। छत भले एक हो, लेकिन पांच परिवारों के मुख अलग-अलग दिशा में हैं। गायत्री परिवार जैसी संस्थाओं के कारण अवश्य स्थिति कुछ संतोषजनक है। दुनिया में बिखर रहे समाज और तबाह हो रहे परिवारों को बचाने के लिए मंत्रालय गठित करना पड़ा। एक मंत्री देख रहा है कि तनाव से बचने के लिए क्या करना है। बिखराव रोकने का दायित्व उठाए गायत्री परिवार मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार की सराहना करते हुए कहा कि इस परिवार की वजह से आज हर बच्चा गायत्री मंत्र सुना देता है। तुतलाती भाषा में बच्चों के मुख से गायत्री मंत्र सुनकर बहुत अच्छा लगता है। समाज में बिखराव को रोकने का दायित्व भी गायत्री परिवार को उठाना पड़ेगा। पं. श्रीराम शर्मा उन महापुरुषों में से हैं, जिन्होंने धर्म को विज्ञान से जोड़ा। धर्म और विज्ञान एक दूसरे के सहयोगी हैं। डॉ. चिन्मय पंड्या भी मॉडर्न मेडिसिन के चिकित्सक हैं, लेकिन अखिल विश्व गायत्री परिवार को आगे बढ़ा रहे हैं। समाज की चेतना व युगनिर्माता हैं शिक्षक सीएम ने शिक्षकों को समाज की चेतना और युगनिर्माता बताया। कहा कि जब शिक्षक जागृत होता है और ईमानदारी से दायित्वों का निर्वहन करता है तो भारत को विश्वगुरु बनने में देर नहीं लगती। जब दुनिया अज्ञानता के अंधकार में थी, तब भारत में श्रेष्ठ आचार्यों की परंपरा ने तक्षशिला व नालंदा जैसे श्रेष्ठ विश्वविद्यालय दिए। गुरुकुल व ऋषि परंपरा का नाम लेकर सीएम ने महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम, महर्षि सांदिपनी-श्रीकृष्ण, चाणक्य-चंद्रगुप्त का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा को फिर से जीवित करने की आवश्यकता है बांटने की प्रवृत्ति भारत माता व पूर्वजों के प्रति अपराध मुख्यमंत्री ने कहा कि गुलामी के दौर में एक तबका समाज को विभाजित तो एक तबका समाज को जोड़ रहा था। बांटने वाले स्वाधीनता का विरोध करते थे और समाज को विभाजित करते थे। आज भी बांटने वाले तत्व क्षेत्र, जाति, भाषा के नाम पर समाज की एकता को छिन्न-भिन्न कर रहे हैं

योगी सरकार की दीपावली पर कर्मचारियों को सौगात! DA बढ़ेगा, ₹3,400 से ₹7,000 तक बोनस की तैयारी

लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्यकर्मियों की दीपावली अधिक रोशन और रंगीन करने की तैयारी कर ली है। सरकार करीब 18 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को दीपावली से पहले महंगाई भत्ता (DA) और बोनस का तोहफा देने की तैयारी कर रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य कर्मियों को दीपावाली से पहले बड़ा तोहफा देने की तैयारी कर ली है। सरकार के इस कदम से राज्यकर्मियों को बढ़ा हुआ डीए और बोनस 3400 से 7000 तक मिल सकता है। इसके साथ ही सरकारी कर्मियों और पेंशनरों को तीन प्रतिशत मंहगाई भत्ता और महंगाई राहत देने की भी तैयारी कर रही है राज्यकर्मियों का बढ़ा हुए भत्ता जुलाई से लागू होगा। राज्य के 2.70 लाख कर्मचारियों को बढ़ा हुआ मानदेय की भी तैयारी है। इसमें श्रेणी के एक के कर्मचारियों को 40,000 रुपया, श्रेणी दो के कर्मचारियों को 25,000, श्रेणी तीन के आउटसोर्स कर्मचारियों को 22,000 हजार रुपए और श्रेणी चार के कर्मचारियों को 20,000 रुपया मिलेगा। सभी का अक्टूबर से बढ़ा हुआ वेतन भी नवंबर में आएगा। सितंबर से बढ़े वेतन की संभावना सचिवालय प्रशासन के अनुसार, सभी विभागों कुल 2.70 लाख कर्मी आउटसोर्स पर हैं। अगर इसमें बिजली विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों को भी जोड़ दिया जाए तो इनकी संख्या लगभग3.50 लाख से अधिक हो जाएगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने दो सितंबर को आउटसोर्स सेवा का पोर्टल शुरू किया था तो माना जा रहा है कि बढ़े हुए मानदेय का लाभ सितंबर से ही मिले। कर्मचारी संगठनों ने किया स्वागत प्रदेश में लंबे समय से आउटसोर्स सेवा में मानदेय को लेकर शिकायतें मिल रहीं थीं, लेकिन अब कमर्चारियों को एक ही पोर्टल सेवा से कई तरह की सुविधाओं का लाभ मिलेगा। बोनस मिलने की तैयारी की सूचना मिलने से भी कर्मचारी और संगठनों में खुशी की लहर है और इसे सरकार की ओर से सकारात्मक कदम बताया है। महिलाओं को 180 दिन का मातृत्व अवकाश यूपीकास की व्यस्थाओं के मुताबिक महिला कर्मियों को अब 180 दिन का मातृत्व अवकाश मिलेगा। सभी कर्मचारियों को हर महीने की पांच तारीख को मानदेय मिलेगा और साथ ही मेडिकल अवकाश भी मिलेगा। कर्मचारियों और उनके परिवार के लोगों को बेहतर चिकित्सा लाभ भी मिलेगा। क्या-क्या मिलेगा महंगाई भत्ता (DA) और डीआर : सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को 3 प्रतिशत बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (DR) देने की तैयारी है, जो जुलाई से लागू हो सकता है। बोनस: अराजपत्रित (Non-gazetted) कर्मचारियों को ₹3,400 से लेकर ₹7,000 तक का बोनस मिल सकता है। बढ़ा हुआ मानदेय: राज्य के लगभग 2.70 लाख कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने की भी तैयारी है। • श्रेणी-1 के कर्मचारियों को: ₹40,000 • श्रेणी-2 के कर्मचारियों को: ₹25,000 • श्रेणी-3 के आउटसोर्स कर्मचारियों को: ₹22,000 • श्रेणी-4 के कर्मचारियों को: ₹20,000 भुगतान का समय: अक्टूबर महीने का बढ़ा हुआ वेतन और बोनस नवंबर में दिए जाने की संभावना है। वित्त विभाग ने इस संबंध में प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित होंगे संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

, भदोही सिल्क क्लस्टर के रूप में संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी को विकसित किया जाएगा। वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान भी जल्द लागू होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण में कालीन उद्योग के निर्यातकों, विक्रेताओं और प्रमुख उद्यमियों से सीधे संवाद के दौरान यह बात कही। उद्यमियों ने कालीन उद्योग के लिए अलग नीति, कारोबार की जरूरतों और महिला उद्यमियों की भागीदारी से जुड़े विषय रखे। मुख्यमंत्री ने एक-एक कर उनकी बात सुनी और उठाए गए मुद्दों पर सरकार की ओर से संज्ञान लेने का भरोसा दिया।   बेहतर कनेक्टिविटी से कारोबार को मिला लाभ मिर्जापुर के कालीन कारोबारी अनिल कुमार ने बेहतर कनेक्टिविटी का जिक्र करते हुए योगी सरकार के कार्यों की सराहना की। उन्होंने प्राचीन शहर मिर्जापुर और वहां के कालीन व्यवसाय से जुड़े विषय भी रखे। मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनकर उठाए गए मुद्दों पर संज्ञान लेने का आश्वासन दिया।   ओडीओपी से मिला लाभ, अब कालीन नीति की मांग इम्तियाज अहमद ने कहा कि ओडीओपी योजना से उद्यमियों को बहुत लाभ मिला है। इसी तर्ज पर कालीन उद्योग के लिए नीति बनाई जाए तो कारोबार को और फायदा होगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि तीसरी बार उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आशीर्वाद मिला है।   हस्तनिर्मित कालीन के लिए अलग व्यवस्था का सुझाव पीयूष कुमार बरनवाल ने कहा कि हस्तनिर्मित कालीन में भारत नंबर वन है। कालीन तैयार होने में अधिक समय लगता है, इसलिए इसे मैन्युफैक्चरिंग श्रेणी से थोड़ा अलग रखते हुए उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखकर नीति बनाई जाए।   मुख्यमंत्री ने इसे अच्छा सुझाव बताते हुए कहा कि उन बुनकरों का अभिनंदन है, जिन्होंने अपने पूर्वजों की धरोहर को जीवित रखा है। उन्होंने भरोसा दिया कि इस सुझाव पर सरकार जरूर संज्ञान लेगी।   महिलाओं को CEPC से जोड़ने की उठी बात आदर्श पूर्णिमा ने कहा कि पहले इंडिया कारपेट एक्सपो दिल्ली में लगता था। तब यह कल्पना भी नहीं की गई थी कि इसका आयोजन भदोही में होगा। अब इतना बड़ा मेला अपने ही जनपद में हो रहा है और मुख्यमंत्री लगातार दूसरी बार कालीन उद्योग का उत्साह बढ़ाने पहुंचे हैं।   उन्होंने कहा कि कालीन उद्योग में बड़ी संख्या में महिला उद्यमी और वर्कर्स हैं, लेकिन CEPC का मौजूदा ढांचा महिलाओं को अपने साथ नहीं जोड़ पाया है। महिलाओं के लिए ऐसा प्रावधान होना चाहिए, जिससे उनकी भागीदारी बढ़े और मनोबल मजबूत हो।   मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए हैं। नारी अब केवल सरकार या सरकारी भरोसे नहीं रहेगी, बल्कि अपने लिए कानून भी बनाएगी। उन्होंने CEPC से महिला उद्यमियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और उनके लिए स्थान आरक्षित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में परिवर्तन का भी भरोसा दिया।

जातीय खेमों में लड़ता भारत नहीं, हमें एक भारत-श्रेष्ठ भारत चाहिए: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें बिखरा हुआ और जातीय खेमों में आपस में लड़ता भारत नहीं, बल्कि एक भारत-श्रेष्ठ भारत चाहिए। जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटना राष्ट्र और भारत माता के प्रति अपराध है। गुलामी के दौर में भी एक वर्ग समाज को बांटता था, जबकि दूसरा समाज को जोड़कर स्वाधीनता की हुंकार भरता था। आज भी वही प्रवृत्ति अलग-अलग रूपों में दिखाई दे रही है। ऐसे में शिक्षक समाज की जिम्मेदारी है कि विभाजनकारी ताकतों को सफल न होने दे।   मुख्यमंत्री रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर सभागार में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। गायत्री मंत्र के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।   व्यक्ति नहीं, विचार करता है लंबी यात्रा मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा और माता भगवती देवी को नमन करते हुए कहा कि गायत्री परिवार ने यज्ञ के माध्यम से समाज को जोड़कर सामाजिक एकता का आदर्श प्रस्तुत किया। पंडित श्रीराम शर्मा संगठन को अपना नाम दे सकते थे, लेकिन उन्होंने विचार को प्रधानता दी। व्यक्ति के नाम पर चलने वाले संगठन धराशायी हो जाते हैं, जबकि विचार लंबी यात्रा करता है। गायत्री परिवार की 100 वर्षों की साधना इसका प्रमाण है।   उन्होंने कहा कि 1923 में गीता प्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई। रास्ते अलग थे, लेकिन तीनों ने जनचेतना जगाने और समाज को सनातन मूल्यों, भारत और भारतीयता से जोड़ने का काम किया।   शिक्षक जागृत हुआ तो भारत बनेगा विश्व गुरु मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को समाज की चेतना और युग निर्माता बताते हुए कहा कि शिक्षक जागृत होकर ईमानदारी से दायित्व निभाए तो भारत को विश्व गुरु बनने में देर नहीं लगेगी। भारत की आचार्य और गुरुकुल परंपरा ने तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय दिए। इसी परंपरा ने चाणक्य-चंद्रगुप्त, महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम और महर्षि सांदीपनि-कृष्ण दिए। इस परंपरा को फिर जीवंत करना होगा।   उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा से 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का जुड़ना महत्वपूर्ण है। युवा पीढ़ी का सही मार्गदर्शन कर उसे प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाएंगे तो आज का युवा ही भारत का भाग्य विधाता बनेगा।   समाज के साथ परिवारों को भी जोड़ें मुख्यमंत्री ने कहा कि संयुक्त परिवार भारत की ताकत रहे हैं। परिवार सीमित होने के साथ बिखराव और तनाव बढ़ा है। गायत्री परिवार को समाज के साथ परिवारों को जोड़ने का दायित्व भी निभाना होगा। प्रकृति किसी से भेदभाव नहीं करती, इसलिए समाज में भी भेदभाव का स्थान नहीं होना चाहिए।   नदियों को अविरल-निर्मल बनाना होगा मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 2017 से 2026 तक 275 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। इस वर्ष 35 करोड़ पौधरोपण हुआ। पौधों के संरक्षण और निगरानी की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने नदियों को मानव शरीर की धमनियों जैसा बताते हुए कहा कि जीवनदायिनी नदियों को बचाकर उन्हें अविरल और निर्मल बनाना होगा।   2047 के भारत के लिए कर्तव्य को दें प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के शताब्दी वर्ष के लिए गुलामी की मानसिकता त्यागने, विरासत पर गौरव करने, सामाजिक समता और विकसित भारत के लिए काम करने का संकल्प लेना होगा। हर व्यक्ति अधिकार से अधिक कर्तव्य को महत्व दे तो भारत को दुनिया की कोई ताकत आंख नहीं दिखा सकती। उन्होंने गायत्री परिवार से अगले 100 वर्षों का लक्ष्य तय करने और शिक्षकों से 2047 के विकसित भारत के लिए युवा पीढ़ी को सही दिशा देने का आह्वान किया।   भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के टॉप-10 स्कूल सम्मानित कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के टॉप-10 स्कूलों को सम्मानित किया गया। इनमें सीतापुर के सीतापुर इंटर कॉलेज व आशुतोष बृजभवन लाल इंटर कॉलेज, रायबरेली का चंद्रशेखर मेमोरियल पब्लिक स्कूल, लखनऊ के लखनऊ पब्लिक स्कूल व सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, गाजियाबाद का डॉ. केएन मोदी साइंस एंड वाणिज्य इंटर कॉलेज, अमेठी का शिव प्रताप इंटर कॉलेज, बुलंदशहर का अमर सिंह इंटर कॉलेज, चित्रकूट का चित्रकूट इंटर कॉलेज और मुजफ्फरनगर का एमजी पब्लिक स्कूल शामिल हैं।   शिक्षा में आया बड़ा बदलाव: राजेश्वर सिंह विधायक राजेश्वर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा का बजट बढ़ा है और ड्रॉपआउट दर घटी है। मेरिट से शिक्षकों की नियुक्तियां हुईं और स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधाएं बढ़ी हैं। उन्होंने शिक्षा, सुरक्षा और विकास के क्षेत्र में हुए कार्यों का उल्लेख किया।   नई पीढ़ी में स्थापित हों भारतीय संस्कृति के मूल्य: चिन्मय पंड्या डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, स्वार्थ और संकीर्णता आज मनुष्य के भीतर की चुनौती हैं। धर्म, न्याय, नीति, मूल्य और सदाचार को मजबूत करना होगा। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का उद्देश्य नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति के मूल भाव को स्थापित करना है।   कार्यक्रम में ये रहे मौजूद कार्यक्रम में डॉ. चिन्मय पंड्या, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पूर्व मंत्री एवं विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक राजेश्वर सिंह, केंद्रीय जोन प्रभारी परमानंद द्विवेदी, समन्वयक राम यश तिवारी, गायत्री परिवार के स्वयंसेवक और प्रदेशभर से आए शिक्षक मौजूद रहे