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लैपटॉप से लेकर निःशुल्क शिक्षा तक, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) बनी बच्चों का मजबूत सहारा

लखनऊ. कोविड महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए योगी सरकार अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) के तहत अनाथ और बेसहारा बच्चों को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, बल्कि उनके बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। महिला कल्याण विभाग के द्वारा सरकार 8085 बच्चों को लैपटॉप वितरित कर उन्हें डिजिटल शिक्षा से जोड़ चुकी है। डिजिटल युग में यह पहल बच्चों के लिए ज्ञान और अवसरों के नए द्वार खोल रही है। इससे वो ऑनलाइन अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और तकनीकी दक्षता हासिल करने में सक्षम हो रहे हैं। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क प्रदान कर रही हैं। योजना के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए 4 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता भी दी जा रही है। यह पहल बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बन रही है। निःशुल्क शिक्षा के साथ आर्थिक संबल योगी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा अपनी पढ़ाई अधूरी न छोड़े। योजना के अंतर्गत 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रत्येक पात्र बच्चे को 4 हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। यह सहायता बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे किताबें, स्टेशनरी और अन्य जरूरी शैक्षिक संसाधन जुटाने में मदद मिलती है। सरकार का यह प्रयास सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में सामने आया है। प्रतिस्पर्धी माहौल से जुड़ रहे बच्चे लैपटॉप वितरण और आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं के माध्यम से बच्चों को प्रतिस्पर्धी माहौल से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है। शिक्षा आधारित यह मॉडल बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रहा है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनेः निदेशक योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महामारी से प्रभावित कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। निःशुल्क शिक्षा, आर्थिक सहायता और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनें और अपने सपनों को साकार कर सकें। इसलिए प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के पात्र बच्चों को समय पर लाभ प्रदान करने तथा ऐसे बच्चों का नियमित फॉलोअप लेकर उनके सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सी. इंदुमती, निदेशक, महिला कल्याण विभाग

प्रधानमंत्री मोदी ने किया था देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं में शामिल जेवर एयरपोर्ट का शुभारंभ

लखनऊ/नोएडा.  उत्तर प्रदेश के विकास इतिहास में 15 जून 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं की शुरुआत होने जा रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े एविएशन, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी हब के रूप में अपनी नई पहचान की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाएगा। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो 15 जून से एयरपोर्ट पर अपनी सेवाएं शुरू करेगी और इस एयरपोर्ट की पहली लॉन्च कैरियर बनेगी। उद्घाटन दिवस पर पहली उड़ान सुबह 7:05 बजे लखनऊ से रवाना होकर 8:05 बजे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेगी। इसके बाद नोएडा से बेंगलुरु के लिए पहली नियमित वाणिज्यिक उड़ान संचालित की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने किया था उद्घाटन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित विकास मॉडल का भी प्रतीक माना जा रहा है। एयरपोर्ट के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत की कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक विकास के लिए ऐतिहासिक परियोजना बताया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि जेवर एयरपोर्ट विकसित भारत के संकल्प को गति देने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना आज प्रदेश के तेजी से बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर परिदृश्य की पहचान बन चुकी है। योगी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल जेवर एयरपोर्ट गौतमबुद्ध नगर जिले में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल किया जाता है। एयरपोर्ट के लिए लगभग 1334 हेक्टेयर (करीब 3300 एकड़) भूमि का अधिग्रहण किया गया। परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर निर्धारित समय में निर्माण कार्य पूरा कराया। पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता एयरपोर्ट का पहला चरण पूरी तरह तैयार हो चुका है। पहले चरण में यह एयरपोर्ट प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा। डीजीसीए द्वारा 6 मार्च 2026 को एयरपोर्ट को एयरोड्रोम लाइसेंस भी जारी किया जा चुका है। वर्तमान चरण में एक रनवे, अत्याधुनिक टर्मिनल भवन और एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर सहित सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं।  भविष्य में बनेगा दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में से एक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। वर्ष 2031 तक इसकी क्षमता बढ़ाकर तीन करोड़ वार्षिक यात्रियों की जाएगी। वर्ष 2036 तक यह क्षमता पांच करोड़ और वर्ष 2040 तक सात करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी। अंतिम विस्तार के बाद एयरपोर्ट पर पांच रनवे होंगे और इसकी कुल क्षमता 22.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करेगी। पश्चिमी यूपी और एनसीआर का नया एविएशन गेटवे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के तीसरे एयरपोर्ट के रूप में विकसित यह प्रोजेक्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के लाखों यात्रियों के लिए नया विकल्प बनेगा। इंडिगो चरणबद्ध तरीके से एयरपोर्ट को लखनऊ, बेंगलुरु, हैदराबाद, अमृतसर, चंडीगढ़, धर्मशाला, जयपुर, नवी मुंबई, पंतनगर और श्रीनगर सहित 16 से अधिक शहरों से जोड़ेगी। एक लाख रोजगार और निवेश का नया केंद्र राज्य सरकार के अनुसार एयरपोर्ट परियोजना से लगभग एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, हॉस्पिटैलिटी और सेवा क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। आने वाले वर्षों में जेवर क्षेत्र उत्तर भारत के सबसे बड़े औद्योगिक और सेवा क्षेत्र केंद्र के रूप में विकसित होगा।

खाद्य प्रसंस्करण में यूपी ने मारी बड़ी छलांग, महाराष्ट्र-बंगाल पीछे

लखनऊ  समृद्ध कृषि आधार और योगी आदित्यनाथ सरकार की निवेशक-अनुकूल नीतियों के दम पर उत्तर प्रदेश आज पूरे देश में 'खाद्य प्रसंस्करण महाशक्ति' (Food Processing Powerhouse) के रूप में उभर चुका है। बेहतर बुनियादी ढांचा, मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और कुशल कार्यबल की बदौलत प्रदेश में इस समय रिकॉर्ड 3,50,883 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां संचालित हो रही हैं। इस ऐतिहासिक आंकड़े के साथ ही यूपी ने इस क्षेत्र में देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है, जो राज्य की बदलती औद्योगिक तस्वीर का सबसे बड़ा प्रमाण है। 3.5 लाख इकाइयों के साथ महाराष्ट्र-बंगाल को पछाड़ा आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े औद्योगिक राज्यों को मीलों पीछे छोड़ दिया है। जहां यूपी में 3,50,883 इकाइयां काम कर रही हैं, वहीं पश्चिम बंगाल (3,22,590) और महाराष्ट्र (2,29,372) काफी पीछे हैं। देश की कुल 24.59 लाख इकाइयों में अकेले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 14 से 15 प्रतिशत है। मजबूत नीतिगत समर्थन और प्रचुर कच्चे माल की उपलब्धता ने इस सेक्टर को एक नई संजीवनी दी है। रोजगार के अवसर: 2.5 लाख से अधिक श्रमिकों को मिला काम योगी सरकार की कृषि और उद्योग हितैषी नीतियों का सीधा असर रोजगार सृजन पर भी दिख रहा है। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के इस अभूतपूर्व विस्तार से प्रदेश के 2.5 लाख से ज्यादा श्रमिकों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। चूंकि यूपी दूध, गन्ना और सब्जियों के उत्पादन में पहले से ही देश में नंबर-1 है, इसलिए इन उद्यमों को कच्चे माल की कभी कमी नहीं होती, जिससे उत्पादन और रोजगार का चक्र निर्बाध रूप से चल रहा है। कृषि प्रधान यूपी: 9 फसलों के उत्पादन में देश का 'नंबर वन' खाद्य प्रसंस्करण की इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय यूपी की उपजाऊ धरती को जाता है। आम, अमरूद, आलू, मटर, लौकी, सिंघाड़ा, तरबूज, खरबूजा और शिमला मिर्च के उत्पादन में उत्तर प्रदेश पूरे देश में पहले स्थान पर है। देश में उत्पादित होने वाले 336.21 लाख मीट्रिक टन आम में से 61.94 लाख मीट्रिक टन और 50.23 लाख मीट्रिक टन अमरूद में से 11.49 लाख मीट्रिक टन हिस्सा अकेले यूपी का है। आलू और लौकी उत्पादन में बेताज बादशाह सब्जियों के उत्पादन में यूपी का कोई सानी नहीं है। देश के कुल 598.89 लाख मीट्रिक टन आलू उत्पादन में यूपी का योगदान 250.66 लाख मीट्रिक टन है। इसी तरह, भारत में मटर के 72.38 लाख मीट्रिक टन उत्पादन में से यूपी 37.62 लाख मीट्रिक टन उगा रहा है। लौकी और सिंघाड़ा के उत्पादन में भी प्रदेश अव्वल है। राष्ट्रीय फल-सब्जी उत्पादन में यूपी का शानदार योगदान तरबूज, खरबूजा और शिमला मिर्च की खेती में भी यूपी के किसानों ने शानदार काम किया है। कुल मिलाकर, देशभर के 1214.75 लाख मीट्रिक टन फल उत्पादन में यूपी की हिस्सेदारी 14.44 प्रतिशत (175.42 लाख मीट्रिक टन) है। वहीं, देश के कुल 2210 लाख मीट्रिक टन सब्जी उत्पादन में यूपी 19.73 प्रतिशत (435.93 लाख मीट्रिक टन) का योगदान दे रहा है।  

रेलवे का बड़ा बदलाव: आलमनगर–उतरेटिया होकर चलेंगी कई ट्रेनें, यात्रियों को वैकल्पिक रूट से सफर

 लखनऊ  रेलवे भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए ) ने लखनऊ स्टेशन के एयर कानकोर्स निर्माण कार्य के लिए 14 से 23 जून तक प्लेटफार्म नंबर चार का मेगा ब्लाक लिया है। इस कारण 21 ट्रेनें 14 से 23 जून तक लखनऊ न आकर आलमनगर-ट्रांसपोर्टनगर-उतरेटिया होकर चलेंगी। इन ट्रेनों को आलमनगर और उतरेटिया स्टेशन पर पांच मिनट का ठहराव मिलेगा। यह ट्रेनें आलमनगर-ट्रांसपोर्टनगर होकर चलेंगी     14307 प्रयागराज संगम–बरेली एक्सप्रेस     14241 प्रयागराज संगम–सहारनपुर नौचंदी एक्सप्रेस     14242 सहारनपुर–प्रयागराज संगम नौचंदी एक्सप्रेस     15075 शक्तिनगर–टनकपुर त्रिवेणी एक्सप्रेस     15073 सिंगरौली–टनकपुर त्रिवेणी एक्सप्रेस     15074 टनकपुर–सिंगरौली त्रिवेणी एक्सप्रेस     15076 टनकपुर–शक्तिनगर त्रिवेणी एक्सप्रेस     13037 हावड़ा–देहरादून एक्सप्रेस     13035 हावड़ा–देहरादून एक्सप्रेस     13038 देहरादून–हावड़ा एक्सप्रेस     13036 देहरादून–हावड़ा एक्सप्रेस     13257 दानापुर–आनंद विहार टर्मिनल एक्सप्रेस     13258 आनंद विहार टर्मिनल–दानापुर एक्सप्रेस     14523 बरौनी–अम्बाला कैंट एक्सप्रेस     14524 अम्बाला कैंट–बरौनी एक्सप्रेस     15127 बनारस–नई दिल्ली काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस     15128 नई दिल्ली–बनारस काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस     15119 बनारस–देहरादून जनता एक्सप्रेस     15120 देहरादून–बनारस जनता एक्सप्रेस     14229 प्रयागराज संगम–योगनगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस     14230 योगनगरी ऋषिकेश–प्रयागराज संगम एक्सप्रेस 15 से ऐशबाग तक चलेगी सहारनपुर वंदे भारत  सहारनपुर वंदे भारत एक्सप्रेस 15 जून से ऐशबाग से संचालित होगी। इसी तरह 55061 नकहा जंगल-डालीगंज पैसेंजर का विस्तार भी 15 जून से ऐशबाग तक होगा। 55061 नकहा जंगल-ऐशबाग पैसेंजर डालीगंज से सुबह 9:12 बजे, लखनऊ सिटी से 9:20 बजे छूटकर ऐशबाग 9:55 बजे पहुंचेगी। यह ट्रेन ऐशबाग से शाम पांच बजे छूटकर लखनऊ सिटी से 5: 11 बजे होते हुए नकहा जंगल की ओर रवाना होगी।  

नई सड़कों और पुलों को लेकर योगी सरकार की बड़ी तैयारी, बजट और टेंडर प्रक्रिया तेज

लखनऊ  अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश सरकार विकास कार्यों को रफ्तार देने में जुट गई है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडलीय दौरा शुरू कर दिए हैं। इन दौरों में मुख्यमंत्री जन प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। जन प्रतिनिधियों से उनके विधान सभा क्षेत्र में इस वर्ष नई सड़कें व पुल-पुलियों की प्राथमिकता की जानकारी ले रहे हैं। विभाग की तैयारी जुलाई से ही नई योजनाओं के लिए बजट स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को वाराणसी मंडल में जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक मंडलीय दौरे की शुरूआत कर दी। मुख्यमंत्री रविवार को गोरखपुर में गोरखपुर मंडल के जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री का मंडलीय दौरा इसी महीने पूरा हो जाने की उम्मीद है। निर्माण कार्यों की प्राथमिकताएं की जा रहीं तय मंडलीय बैठकों के माध्यम से इस साल विभागीय बजट से नई सड़कें व पुल-पुलियों के निर्माण कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं। जिसके आधार पर पीडब्ल्यूडी निर्माण कार्यों को तेजी से शुरू कराएगा। विभाग के प्रमुख सचिव अजय चौहान के मुताबिक जन प्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर सभी जिलों की कार्ययोजना आ गई है। मुख्यमंत्री की मंडलीय बैठकें पूरी हो जाने के बाद चयनित कार्यों का काम तेजी से शुरू कराया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि जुलाई से ही विभाग चयनित कार्यों के लिए बजट स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया का काम शुरू कर देगा। जिससे सितंबर से धरातल पर युद्धस्तर पर काम शुरू कराया जा सके। आवंटित किए 35156 करोड़ इस वित्तीय वर्ष में पीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्यो के लिए 35,156 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जिसमें से 11,718 करोड़ रुपये से नई सड़कें व पुल-पुलिया बनाई जाएंगी। शेष बजट पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने पर खर्च किया जाएगा। लगभग 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली नई सड़कें व पुल-पुलियों का काम इस वर्ष शुरू किया जाना है। विभाग ने तय किया है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पांच करोड़ रुपये तक की लागत वाली योजनाओं को 50 प्रतिशत धनराशि तथा इससे बड़ी योजनाओं के लिए 20 से 30 प्रतिशत तक बजट जारी किया जाएगा।  

83 लाख की चोरी के खुलासे के बाद बिजली विभाग सख्त, टीमों का होगा गठन

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बिजली विभाग की चेकिंग टीम घर-घर पहुंचेंगी। प्लान तैयार है। जिले में बिजली चोरी पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए बड़े अभियान की तैयारी है। चार दिन पहले ‘हिन्दुस्तान’ अखबार ने बिजली चोरी को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद से जिम्मेदार अधिकारी हरकत में आ गए हैं। बिजली चोरी करने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जल्द ही टीमों का गठन कर कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, पॉवर कॉरपोरेशन के आंकड़ों के अनुसार, जिले में एक दिन में दो लाख 78 हजार और एक महीने में तकरीबन 83 लाख रुपये की बिजली चोरी की जा रही है। बिजली चोरी का यह आंकड़ा चौकाने वाला है क्योंकि बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए तमाम प्रयास करने के बाद भी अगर ऐसा हो रहा है तो कहीं न कहीं व्यवस्था में सेंध लगाने जैसा है। इस मामले को ‘हिन्दुस्तान’ अखबार की ओर से ‘क्यों बत्ती गुल’ अभियान के तहत 9 जून को जिले में एक महीने में हो रही 83 लाख की बिजली चोरी शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। खबर छपने के बाद जिम्मेदारों ने बिजली चोरी को रोकने के लिए नई रणनीति बनानी शुरू कर दी है। अधीक्षण अभियंता प्रशांत कुमार के अनुसार, बिजली चोरी को लेकर महकमा पहले से काफी गंभीर है। समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है, मगर इस बार और सख्ती के साथ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कार्रवाई करने के लिए टीमों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विशेषकर कार्रवाई का फोकस उन इलाकों में रहेगा, जहां पर अधिक बिजली चोरी के मामले सामने आ रहे हैं। बिजली चोरी के लिए चर्चित हैं शहर के ये मुख्य इलाके महकमे के आंकड़ों के अनुसार, शहर के गोड़ियाबाग, घोसी की पुलिया, दौलतबाग, नवाबपुरा, लालबाग, पुराना दसवां घाट, वारसी नगर, मुगलपुरा, बरवलान, सीतापुरी की टीचर्स कॉलोनी, मियां कॉलोनी, जयंतीपुर, रहमतनगर, पीतल बस्ती, असालतपुरा, चक्कर की मिलक हैं, जहां पर सबसे ज्यादा बिजली चोरी के मामले सामने आए हैं, मगर इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि बिजली चोरी के लिए चर्चित इतने क्षेत्र होने के बाद भी पिछले महीने कार्रवाई सिर्फ दो स्थानों पर हुई थी, इससे कहीं न कहीं जिम्मेदारों की सक्रियता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

अयोध्या में उठे सवाल, अब जांच के लिए मैदान में उतरी SIT

अयोध्या   अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों के बाद यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है. मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी और उनके पास से लाखों रुपये बरामद होने के बाद जांच तेज कर दी गई है. उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है. ऐसे में जानिए, इस विवाद की शुरुआत कैसे हुई और अब तक क्या-क्या घटनाक्रम सामने आए हैं? ऐसे हुई विवाद की शुरुआत जून की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा किए गए ऑडिट के दौरान दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने की आशंका सामने आई. इसके बाद मंदिर परिसर और दानपात्र के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई. फुटेज में एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध दिखाई दी, जिसके आधार पर आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की गई. शुरुआत में मामले को गोपनीय रखा गया. 7 जून को अखिलेश यादव की एंट्री से सुर्खियों में आया मामला राम मंदिर चंदा चोरी मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को योगी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके का कि अयोध्या में मंदिर के चढ़ावे को लेकर जो जानकारी सामने आई है, वह गंभीर चिंता का विषय है. अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि यदि डबल इंजन सरकार की निगरानी व्यवस्था इतनी प्रभावी होती और दूरबीन व ड्रोन सही तरीके से काम कर रहे होते, तो विपक्ष को सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि चढ़ावे में चोरी होगी तो उसकी शिकायत भी होगी. इसके बाद अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी योगी सरकार पर निशाना साधा. संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में दान राशि की कथित चोरी बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष व पारदर्शी जांच होनी चाहिए. उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने लाने की बात कही. 10 जून को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कही जांच कराने की मांग अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी की बात बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मानी. कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे के दौरान पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि मामले की जांच सरकार करा रही है. सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो. राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है. 13 जून को CM योगी के आदेश के बाद SIT गठित 13 जून को अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है. अधिकारियों के मुताबिक SIT का गठन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किया गया. यह कदम 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के अनुरोध पर उठाया गया, जिसने इसे "गलत जानकारी को रोकने और सच सामने लाने" के लिए ज़रूरी बताया और आरोप लगाया कि राम मंदिर की छवि खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं. SIT में लखनऊ के डिविज़नल कमिश्नर IAS विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) IPS किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं. राज्य सरकार के अनुसार मंदिर ट्रस्ट ने अयोध्या मंदिर परिसर में दान पेटियों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी. 13 जून को मामले में हुई 2 कर्मचारियों की गिरफ्तारी जांच के दौरान 13 जून को मंदिर में चढ़ावे की राशि गिनने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं. बताया जा रहा है कि कुछ रकम घर की आलमारी में रखी गई थी, जबकि कुछ नकदी गोबर के ढेर में दबाकर छिपाई गई थी. बरामद धनराशि के स्रोत को लेकर फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है. मामले में एक और कर्मचारी को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है. दोनों कर्मचारियों की जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कार्यों की थी. बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों को प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये वेतन मिलता था, लेकिन हाल के महीनों में उनकी संपत्तियों में असामान्य वृद्धि की चर्चा जांच एजेंसियों के रडार पर है. जानकारी के मुताबिक एक कर्मचारी ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की भूमि खरीदी, जबकि दूसरे ने करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया है. 5 दिनों के भीतर दो बार अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र इधर, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी पांच दिनों के भीतर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे. हालांकि उन्होंने कथित धन गबन के मामले पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी तक सीमित है. फिलहाल राम मंदिर की दान राशि से जुड़ा यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अब सभी की निगाहें संभावित SIT जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं.

तूफान और बारिश के बाद सुहाना हुआ मौसम, अब बढ़ी नमी से लोग बेहाल

लखनऊ यूपी के कई इलाकों में शुक्रवार देर रात तूफान के साथ हुई बारिश से मौसम सुहाना हो गया। रात से शनिवार तड़के तक 19 एमएम वर्षा रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी, लेकिन भारी बारिश की संभावना फिलहाल कम है। तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। पश्चिम यूपी में बारिश का ट्रेंड भी बदल रहा है। पिछले तीन दिनों से दोपहर या शाम के बजाय देर रात बारिश हो रही है। शुक्रवार रात करीब 1:20 बजे शुरू हुई बारिश बाद में तूफानी रूप ले गई। तड़के तक तेज हवाओं के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहा। इसके असर से अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 8.3 डिग्री कम होकर 21.0 डिग्री सेल्सियस रहा। नम हवाओं ने दिन और रात दोनों समय लोगों को राहत पहुंचाई। मौसम विभाग के अनुसार 15, 18 और 19 जून को बादल छाए रहने के साथ हल्की बूंदाबांदी या बौछार पड़ सकती है। अन्य दिनों में आसमान साफ रहने और गर्मी बढ़ने की संभावना है। बादल छाने से बदला मौसम तेज धूप के बीच आसमान में बादलों की आवाजाही और पुरवा हवा चलने से मौसम का मिजाज बदल गया है, जिसस लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन अब उमस ने जन जीवन को बेहाल कर दिया है। मौसम विभाग ने यूपी के अलग-अलग इलाकों में तेज हवा चलने और हल्की बारिश की संभावना व्यक्त किया है। पुरवा हवा चलने से वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ गई है, जिससे सड़कों पर आने-जाने वाले लोग पसीने से लथपथ नजर आने लगे हैं। हालांकि द्वितीय शनिवार को छुटटी होने के कारण दोपहर में सड़क और बाजारों पर आवाजाही आम दिनों की तुलना में बेहद कम दिखी। उमसभरी गर्मी के कारण लोगों के घरों में लगे पंखा और कूलर बेमतलब साबित हो रहे हैं। लोग चिपचिपी गर्मी से बचने के लिए ठंडे पेय का सहारा लेने लगे हैं। मौसम की तल्खी में आई कमी से सब्जी उत्पादकों को राहत मिली है। पिछले दिनों भीषण गर्मी और लू के कारण हरी सब्जियां खेतों में ही झुलस रही थीं। किसान हर दिन सिंचाई करने को लचार थे, बावजूद उत्पाद बेहद कम हो रहा था। आसमान में बादलों की आवाजाही से फसलों को राहत मिली है। भीषण गर्मी के बीच मौसम के मिजाज में आंशिक बदलाव तो आया है, लेकिन लोगों को राहत मिलने के बजाय परेशानी और बढ़ गई है। शनिवार को आसमान में बादलों की आवाजाही के चलते चिलचिलाती धूप से तो कुछ राहत मिली, लेकिन हवा थमने के कारण बढ़ी उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया। उमस भरी इस गर्मी के बीच बिजली विभाग की लापरवाही ने कोढ़ में खाज का काम किया। बार-बार हो रही अघोषित बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या ने लोगो का हाल बेहाल कर दिया।

यूपी में अपराधियों पर शिकंजा: बरेली में 84 शातिरों को माफिया घोषित करेगी पुलिस

लखनऊ अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए यूपी पुलिस लगातार ऐक्शन ले रही है। इसी कड़ी में बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने जघन्य अपराधों में शामिल 84 अपराधियों का चिह्नीकरण कराया है, जिन्हें माफिया घोषित किया जाएगा। यह कार्रवाई 30 जून तक पूरी की जाएगी, एडिशनल एसपी को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि अपराध और अपराधियों पर रोकथाम के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इनकी निगरानी के लिए गैंगस्टर, गैंग पंजीकरण, हिस्ट्रीशीट खोलने और माफिया घोषित करने की कार्रवाई भी की जाती है। इसी कड़ी में लूट, चोरी, डकैती, हत्या, मादक पदार्थ तस्करी, गोकशी, जमीनों पर अवैध कब्जे जैसे अपराधों में शामिल 84 अपराधियों का चिह्नीकरण करके माफिया घोषित कराया जा रहा है। इनकी सूची तैयार कराकर सभी थानों को सौंप दी गई है और संबंधित एडिशनल एसपी को 30 जून तक यह कार्रवाई पूरी कराने के निर्देश दिए हैं। 8 अपराधियों के गैंग रजिस्टर्ड हत्या, लूट, डकैती, गोकशी जैसे जघन्य अपराधों में शामिल आठ अपराधियों के गैंग पंजीकृत किए गए हैं। 21 अन्य अपराधियों को गैंग के सदस्य के तौर पर पंजीकृत किया है। जल्दी ही इन सभी के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई भी होगी। किला में परसाखेड़ा के आसिफ का गैंग पंजीकृत कर सोहेल उर्फ सोहिल, बिलाल और रहीमुद्दीन को सदस्य बनाया गया है। अलीगंज में कुंडरिया फैजुल्लपुर के नेकसू उर्फ पूरनलाल के गैंग का पंजीकरण कर भूपराम को सदस्य बनाया है। हाफिजगंज में लमखेड़ा के बाबूराम निराला के गैंग में मुन्नालाल, मैना देवी, बिल्लू यादव उर्फ बलवीर और पुरनापुर के प्रमोद उर्फ पकौड़ी के गैंग में सनी व प्रशांत पटेल को सदस्य बनाया है। मीरगंज में दियोरिया अब्दुल्लागंज निवासी सुहेल को गैंगलीडर और तस्लीम को सदस्य बनाया है। इज्जतनगर में पुरनापुर के मनोज पटेल को गैंग लीडर और गौरव गंगवार, केशव पटेल, शिवम पंडित व अजय पटेल को सदस्य बनाया है। क्योलड़िया में भूड़ा सैदपुर के मुस्तकीम का गैंग पंजीकृत कर अनूप, मुन्ना पुत्र नियामुद्दीन, नईम, मुन्ना पुत्र मोहम्मद उमर व जीशान को सदस्य बनाया है। बारादरी में बड़ेपुरा निवासी विमल को गैंगलीडर और सोहिल खान उर्फ सोहेल व अनिल को सदस्य बनाया गया है। उत्तरी क्षेत्र के सर्वाधिक अपराधी बनेंगे माफिया शहर क्षेत्र के सर्किल प्रथम में तीन, द्वितीय में सात, तृतीय में 16 अपराधी चिह्नित किए गए हैं। उत्तरी क्षेत्र के बहेड़ी सर्किल में 32, नवाबगंज में दो व हाईवे में 13 अपराधी माफिया घोषित होंगे। दक्षिणी क्षेत्र के आंवला सर्किल में तीन, मीरगंज में चार और फरीदपुर में चार अपराधी चिह्नित किए गए हैं। दो साल में पंजीकृत हुए 102 गैंग एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि अपराध पर रोकथाम के लिए शातिर अपराधियों का चिह्नीकरण करके लगातार कार्रवाई कराई जा रही है। इसी कड़ी में आठ शातिर अपराधियों का गैंग पंजीकरण कराया गया है। इससे पूर्व दो साल में करीब 102 गैंग पंजीकृत किए गए हैं। अब जिले में पंजीकृत गैंग की संख्या 503 हो गई है। 84 अन्य अपराधी माफिया घोषित करने के लिए चिह्नित किए गए हैं( क्या बोले एसएसपी बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि अपराध पर रोकथाम के लिए शातिर अपराधियों का चिह्नीकरण करके लगातार कार्रवाई कराई जा रही है। आठ शातिर अपराधियों का गैंग पंजीकरण कराया है। 84 अन्य माफिया घोषित करने के लिए चिह्नित किए गए हैं, जिन पर 30 जून पर कार्रवाई कराई जाएगी।

हरियाली बढ़ाने के लिए मनरेगा से पहाड़ियों पर हरित मॉडल विकसित करेगा प्रशासन

सोनभद्र सोनांचल की सूखी और बंजर पहाड़ियां अब हरियाली की नई कहानी लिखने जा रही हैं। इस वर्ष पौधारोपण अभियान को नवाचार से जोड़ते हुए जिले की छह प्रमुख पहाड़ियों को हरित माडल के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। मनरेगा के माध्यम से जुड़वानी पहाड़ी, गड़ही पहाड़ी, अंबेडकर नगर पहाड़ी, रासपहाड़, सरहद पहाड़ी और भवरहवा पहाड़ी पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण कराया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखते हुए स्थायी हरित आवरण तैयार करना है। पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन को साथ लेकर चल रही इस पहल में आधुनिक जल संरक्षण तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। पहाड़ियों की ढलानों पर ट्रेंच (खाई) बनाई जाएंगी, जिनमें वर्षा का पानी संचित होगा। इससे पौधों को लंबे समय तक नमी मिलती रहेगी और भूजल स्तर को भी मजबूती मिलेगी। अभियान में स्थानीय ग्रामीणों और सामुदायिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे पौधों की देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी साझा हो सके। ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था होगी समृद्ध जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने की तैयारी है। इसके तहत प्रत्येक विकास खंड में 10-10 फलोद्यान विकसित किए जाएंगे। इन फलोद्यानों की देखभाल स्वयं सहायता समूहों को सौंपी जाएगी। इससे जहां महिलाओं को रोजगार और आय के अवसर मिलेंगे, वहीं गांवों में फल उत्पादन बढ़ने से पोषण और पर्यावरण दोनों को लाभ पहुंचेगा। यह पहल आने वाले वर्षों में जिले की पहचान को नई हरित दिशा देगी। क्या है ट्रेंच तकनीक पौधारोपण को सफल बनाने में ट्रेंच तकनीक को काफी प्रभावी माना जाता है। इसके अंतर्गत पहाड़ियों पर लंबी और संकरी खाइयां बनाई जाती हैं, जिनमें वर्षा जल एकत्र होता है। धीरे-धीरे यह पानी मिट्टी में समाहित होकर पौधों की जड़ों तक नमी पहुंचाता है। इससे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी पौधों की जीवितता बढ़ती है। साथ ही मिट्टी का कटाव रुकता है और भूजल पुनर्भरण को भी गति मिलती है। हरियाली के साथ बढ़ेगी आजीविका फलोद्यान विकास योजना पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण का भी माध्यम बनेगी। स्वयं सहायता समूहों को फलोद्यानों की देखभाल और प्रबंधन की जिम्मेदारी मिलने से उन्हें नियमित आय का अवसर मिलेगा। आंगनबाड़ी केंद्र व परिषदीय विद्यालयों में इसे भेजा जाएगा। यह माडल हरित विकास और ग्रामीण आर्थिक सुदृढ़ीकरण का संतुलित उदाहरण बन सकता है। जनपद के छह पहाड़ियों पर ट्रेंच बनाकर पौधारोपण किया जाएगा। इसको लेकर सभी तैयारी अपने अंतिम चरण में है। निश्चित रूप से पर्यावरण संरक्षण को लेकर ऐसी पहल की जरूरत है। आमजन भी अधिक से अधिक पौधा रोपण के कार्य में आगे आएं।     चर्चित गौड़, जिलाधिकारी, सोनभद्र