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योगी सरकार ने खोले दरवाजे, हर अपवंचित बच्चे को मिल रहा शिक्षा का अधिकार

लखनऊ.  जिन घरों में कभी अच्छी शिक्षा एक सपना थी, वहां अब उम्मीद ने दस्तक दे दी है। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत योगी सरकार ने एक बार फिर यह साबित किया है कि नीतियां कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर बदलाव का माध्यम बन रहीं हैं। वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश में अब तक 1,03,439 बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जा चुका है, जिससे हजारों गरीब और वंचित परिवारों के सपनों को नई दिशा मिली है। आंकड़ों का यह शुरुआती रुझान संकेत दे रहा है कि आने वाले चरणों में यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी, क्योंकि नामांकन प्रक्रिया अभी जारी रहेगी। राज्य के लखनऊ, वाराणसी, बुलंदशहर और बंदायू जनपद नामांकन में आगे हैं। आंकड़ों के अनुसार लखनऊ में 7,952, वाराणसी में 4,957, बुलंदशहर 4154 और बदायूं में 3599 बच्चों का नामांकन हुआ है। अभिभावकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है और वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव समाज के अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों पर पड़ा है। अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को भी निजी विद्यालयों में पढ़ाई के अवसर मिलने लगे हैं, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर की मजबूत नींव रखी जा रही है। यह कदम शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में भी एक परिवर्तनकारी पहल साबित हो रहा है। सरकार की पारदर्शी नीति से हो रहा संभव अपने अधिकारों, सुविधाओं या अवसरों से वंचित बच्चों की शिक्षा को लेकर गंभीर योगी सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया है। ऑनलाइन आवेदन और चयन प्रणाली के माध्यम से पात्र बच्चों को बिना किसी भेदभाव के लाभ मिल रहा है। यही कारण है कि योजना के प्रति आमजन में विश्वास और सहभागिता लगातार बढ़ रही है। बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि जुलाई तक चलने वाली नामांकन प्रक्रिया के दौरान और अधिक पात्र बच्चों को इस योजना से जोड़ा जा सकेगा। आरटीई नामांकन में टॉप 10 जनपद जनपद                        नामांकन लखनऊ                 7952 वाराणसी                4957 बुलंदशहर                4154 बदायूं                      3599 मुरादाबाद                3246 आगरा                     3086 कानपुर नगर            2476 गोरखपुर                  2352 अलीगढ़                  2320 गाजियाबाद             2209

15 अप्रैल तक अकेले लखनऊ में 3,133 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित, उत्तर प्रदेश का अव्वल प्रदर्शन

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देशभर में सोलर इंस्टॉलेशन के मामले में शीर्ष स्थान प्राप्त कर लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में चल रहे रुफटॉप सौर ऊर्जा के क्षेत्र में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत अभियान ने लखनऊ को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बना दिया है। उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा अभिकरण के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के अंतर्गत लखनऊ में अब तक 87,000 से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जो देश के किसी भी जिले में सबसे अधिक हैं। 15 अप्रैल तक लखनऊ में 3,133 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए गए। यह उपलब्धि लखनऊ को सोलर ऊर्जा अपनाने के मामले में देश का अग्रणी जिला बनाती है।  विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में घरेलू गैस के स्थान पर इंडक्शन कुकटॉप के बढ़ते उपयोग तथा इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के कारण बिजली की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, बढ़ते बिजली बिल को नियंत्रित करने की इच्छा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता ने लोगों को तेजी से सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित किया है। रूफटॉप सोलर सिस्टम उपभोक्ताओं को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान कर रहे हैं और उन्हें ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रहे हैं। केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार की सोलर सब्सिडी और सरल आवेदन प्रक्रिया इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साथ ही, डिस्कॉम और संबंधित एजेंसियों के सहयोग से इंस्टॉलेशन प्रक्रिया अधिक तेज और सुगम हो गई है। लखनऊ की यह उपलब्धि अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बन रही है। उत्तर प्रदेश के अन्य शहर भी सोलर इंस्टॉलेशन में तेजी दिखा रहे हैं और राज्य देश के अग्रणी घरेलू रूफटॉप सोलर ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।

अखिलेश यादव की चाय वाली दुकान पर रेड! खाद्य विभाग की कार्रवाई के बाद शटर डाउन

फतेपुर यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन सियासत अभी से तेज हो गई है। दो महीने पहले जिस दुकान पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चाय पी थी, अब वहां खाद्य विभाग ने छापा मारा है। दुकानदार का आरोप है कि जब से सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उसके यहां चाय पी है तभी से उन्हें परेशान किया जा रहा है। कभी दबंग गाली-गलौज करके मारपीट करते हैं तो भी अधिकारी आए दिन आकर परेशान करते हैं और कई तरह के सवाल-जवाब करते हैं। दुकानदार ने अब चाय की दुकान को बंद कर दिया है। वजह कुछ भी हो लेकिन चाय की दुकान पर खाद्य विभाग की छापेमारी से सियासत गर्माने लगी है। सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र के चौकी चौराहे स्थित एक चाय दुकान पर खाद्य विभाग ने छापेमारी की है। यह वही दुकान है जिसमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीती 20 फरवरी को चाय पी थी। दुकानदार का आरोप है कि जब से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनकी दुकान में चाय पी है। उसके बाद से उनके साथ चीजें ठीक नहीं हो रही है। 15 अप्रैल को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने चौकी चौराहा स्थित शेषमणी यादव की चाय दुकान पर पहुंचकर निरीक्षण किया और चाय पत्ती का नमूना जांच के लिए भेज दिया। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि सपा प्रमुख को चाय पिलाने के चलते दुकानदार को निशाना बनाया गया है, जिससे राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। अफसरों ने दुकानदार के आरोपों को किया खारिज मामला सुर्खियों में आने के बाद सहायक आयुक्त खाद्य राजेश दीक्षित ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए बताया कि यह कार्रवाई एक अप्रैल को आईजीआरएस पोर्टल पर मिली शिकायत के आधार पर की गई थी। उन्होंने बताया कि दुकान का लाइसेंस वर्ष 2028 तक वैध है और विभाग के पास सीधे दुकान सीज करने का प्रावधान भी नहीं है। साथ ही उसी दिन अन्य स्थानों पर भी नियमित जांच अभियान चलाया गया था। बतादें कि 20 फरवरी को अखिलेश यादव जिले में आए थे। यहां उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों के यहां आयोजित शादी कार्यक्रमो में हिस्सा लिया था। चौकी चौराहे से निकलते हुए चाय दुकान में चाय पी थी। इसकी तस्वीरें भी उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर साक्षा की थी। दुकानदार ने बंद क चाय की दुकान, बेटे ने फेसबुक पर लिखी पोस्ट खाद्य विभाग की छापेमारी से परेशान होकर दुकानदार ने चाय क दुकान को बंद कर दिया। इसके बाद उसके बेटे आर्यन ने फेसबुक पर एक भावनात्मक पोस्ट लिखी। जिसमें उसने कहा, मैं आज से अपनी चाय की दुकान बंद कर रहा हूं। मैं एक गरीब फैमिली से हूं। मैं आप सभी से यह कहना चाहता हूं कि जब से हमारी दुकान में यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव जी ने चाय पी है तब से आए दिन दबंगों द्वरा हमारे साथ मारपीट, गाली-गलौज या फिर फूड सैंपल विभाग और अन्य विभाग के अधिकारी परेशान कर रहे हैं। इसी कारण सोशल मीडिया के माध्यम से मैं सारे पत्रकार भाइयों एवं हमारे जिले के कप्तान अंकल को यह बताना चाहता हूं कि मैं आज से अपनी चाय की दुकान बंद रहा हूं क्यों मैं एक गरीब फैमिली से हूं जो कि हम लोग लड़ाई झगड़ा करने वाले लोगों में से नहीं है और न ही हम किसी से लड़ाई कर पाएंगे। हमें इतना ज्यादा परेशान कर दिया गया है कि हम अपना गांव घर दुकान सब छोड़कर जा रहे हैं। आप सभी को धन्यवाद।  

बिजली संकट खत्म! योगी सरकार का बड़ा ऐलान—प्रदेश को मिलेगी 34 हजार मेगावॉट पावर

लखनऊ.  योगी सरकार ने प्रदेशवासियों को भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ऊर्जा विभाग ने इस वर्ष पीक डिमांड को ध्यान में रखते हुए लगभग 34,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई है। इसके लिए सभी नए थर्मल पावर प्लांट यूनिट्स को चालू कर दिया गया है। वहीं, पीक आवर्स में करीब 80 प्रतिशत बिजली की मांग पहले से किए गए एमओयू से पूरी की जाएगी। इसके अलावा अतिरिक्त मांग को बिजली एक्सचेंज के जरिये पूरा किया जाएगा। पीक डिमांड 33 हजार मेगावाट के पार जाने का अनुमान यूपीपीसीएल के एमडी पंकज कुमार ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अप्रैल से सितंर के बीच बिजली की मांग बढ़ेगी। पिछले वर्षों की डिमांड को देखते हुए इस वर्ष जून में पीक डिमांड लगभग 33,375 मेगावाट तक पहुंच सकती है, जो अब तक के उच्चतम स्तरों में से एक होगी। मई और जुलाई में भी मांग 31 से 32 हजार मेगावाट के बीच रहने की संभावना है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए विभाग ने अग्रिम तैयारी करते हुए उत्पादन और आपूर्ति के सभी स्रोतों को सक्रिय कर दिया है। वहीं पीक डिमांड को ध्यान में रखते हुए लगभग 34,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार कर ली गयी है। उन्होंने बताया कि सभी नए थर्मल पावर प्लांट यूनिट्स को चालू कर दिया गया है। घाटमपुर, खुर्जा, पनकी, ओबरा और जवाहरपुर जैसे प्रमुख परियोजनाओं से उत्पादन शुरू हो चुका है। इन परियोजनाओं के चालू होने से प्रदेश की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं घाटमपुर की तीसरी यूनिट 30 अप्रैल तक चालू हो जाएगी, जिससे बिजली आपूर्ति को और मजबूती मिलेगी। 80 प्रतिशत बिजली की मांग पहले से तय एमओयू से होगी पूरी एमडी ने बताया कि पीक आवर्स में करीब 80 प्रतिशत बिजली की मांग पहले से किए गए एमओयू (लॉन्ग टर्म टाई-अप) के जरिए पूरी की जाएगी। इससे अचानक मांग बढ़ने की स्थिति में भी स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके साथ ही शेष मांग को पूरा करने के लिए बिजली एक्सचेंज प्लेटफॉर्म जैसे आईईएक्स, पीएक्सआईएल और एचपीएक्स की मदद ली जाएगी। इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जरूरत के समय अतिरिक्त बिजली खरीदी जाएगी। इससे न केवल मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को कटौती से भी राहत मिलेगी। इसके अलावा कुछ राज्यों के साथ लगभग 4,663 मिलियन यूनिट (एमयू)बिजली की बैंकिंग व्यवस्था की गई है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों से बिजली ली जा सकेगी और बाद में वापस की जाएगी। यह व्यवस्था भी आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मॉनिटरिंग की गई तेज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में उच्च स्तरीय बैठक में बिजली आपूर्ति को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि किसी भी स्थिति में उपभोक्ताओं को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने नियमित समीक्षा बैठकों के जरिए तैयारियों की निगरानी बढ़ा दी है। साथ ही ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि तकनीकी खराबियों के कारण बाधा न आए। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिये। इसके लिए फीडर स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है और लाइन लॉस कम करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। स्मार्ट मीटरिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को भी तेजी से लागू किया जा रहा है।

योगी सरकार का बड़ा फैसला: राज्यभर में नई न्यूनतम मजदूरी दरों को मिली कानूनी मंजूरी

योगी सरकार का बड़ा कदम: राज्यभर में नई न्यूनतम मजदूरी दरों को मिली कानूनी मंजूरी प्रदेश सरकार के निर्णय पर राज्यपाल की मुहर, नोटिफिकेशन जारी नोएडा प्रकरण के बाद सरकार का हस्तक्षेप, तीन श्रेणियों में लागू हुई नई मजदूरी दरें उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर अंतरिम राहत लागू गौतमबुद्धनगर-गाजियाबाद प्रथम श्रेणी में, अन्य जिलों का दो वर्गों में विभाजन 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी नई दरें, महंगाई भत्ते के साथ वेतन का निर्धारण श्रमिकों की मांग और उद्योगों की स्थिति के बीच संतुलन बनाने की पहल लखनऊ/गौतमबुद्धनगर  नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हालिया घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन का निर्णय लिया। सरकार के निर्णय पर प्रदेश की राज्यपाल ने भी अपनी मुहर लगाते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसके बाद सरकार द्वारा निर्धारित नई न्यूनतम मजदूरी दरें कानूनी रूप से प्रभावी हो गई हैं। अब यह पूरे प्रदेश में बाध्यकारी रूप से लागू होंगी।  उल्लेखनीय है कि घटनाक्रम के बाद श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन वृद्धि को लेकर गतिरोध खत्म करने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय समिति गठित की थी, जिसने अपनी सिफारिश में के तीन श्रेणियां में वेतन की दरें निर्धारित की हैं। इसके आधार पर राज्य सरकार ने अंतरिम राहत के रूप में नई मजदूरी दरें लागू करते हुए प्रदेश को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है, जिससे क्षेत्रीय परिस्थितियों और जीवन-यापन की लागत के अनुसार संतुलित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदेश को तीन श्रेणियों में बांटा गया। प्रथम श्रेणी में गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद को रखा गया, जहां जीवन-यापन की लागत अपेक्षाकृत अधिक है। यहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,690 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये मासिक न्यूनतम मजदूरी तय की गई है। द्वितीय श्रेणी में नगर निगम वाले अन्य जिलों को शामिल किया गया है, जहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये निर्धारित किए गए हैं। वहीं तृतीय श्रेणी में शेष जिलों को रखा गया है, जहां मजदूरी दरें क्रमशः 12,356 रुपये, 13,590 रुपये और 15,224 रुपये तय की गई हैं। इन सभी दरों में मूल वेतन के साथ परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (वीडीए) शामिल है। दरअसल, वर्ष 2019 और 2024 में प्रस्तावित मजदूरी संशोधन लागू नहीं हो पाए थे, जिसके चलते यह अंतर बढ़ता गया। अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर लंबित पुनरीक्षण को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय न केवल श्रमिकों को राहत देने के लिए है, बल्कि औद्योगिक शांति बनाए रखने और उत्पादन चक्र को सुचारु रखने के लिए भी आवश्यक है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि नई दरें लागू होने के बाद श्रमिकों के हितों में किसी प्रकार की कटौती या अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय उस समय लिया गया जब श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन वृद्धि को लेकर गतिरोध की स्थिति बनी और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने लगीं। श्रमिकों का कहना था कि बढ़ती महंगाई और किराए के दबाव के कारण जीवनयापन कठिन हो गया है, जबकि नियोक्ताओं ने वैश्विक आर्थिक दबाव, बढ़ती लागत और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं का हवाला दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार को सौंपी गई। इसमें अपर मुख्य सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन विभाग एवं श्रमायुक्त, उत्तर प्रदेश को क्रमशः सदस्य और सदस्य सचिव के रूप में नामित किया गया। समिति में कर्मकारों के पांच प्रतिनिधि और नियोक्ताओं के तीन प्रतिनिधि भी सम्मिलित थे। समिति ने मौके पर जाकर श्रमिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से चर्चा की और संतुलित समाधान का प्रस्ताव तैयार किया।

दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026: योगी सरकार के विजन से डेयरी सेक्टर को मिली नई रफ्तार

दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026: योगी सरकार के विजन से डेयरी सेक्टर को नई रफ्तार 50 वर्ष पूरे होने पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में भव्य आयोजन, 5,000 करोड़ के मिले निवेश प्रस्ताव महोत्सव में 10 हजार से अधिक पशुपालकों की रही भागीदारी, 139 लाभार्थियों के खाते में गई धनराशि प्रदेश सरकार की योजनाओं, तकनीक और निवेश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती लखनऊ  लखनऊ में दुग्धशाला विकास विभाग के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026’ न केवल उपलब्धियों का उत्सव रहा, बल्कि योगी आदित्यनाथ सरकार के उस व्यापक विजन का भी प्रदर्शन बना, जिसके केंद्र में डेयरी सेक्टर को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत धुरी बनाना है। दो दिवसीय इस आयोजन में हजारों पशुपालकों, उद्यमियों और निवेशकों की सक्रिय भागीदारी के बीच जहां 5,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी, वहीं योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक के प्रसार और ‘गौ से ग्राहक तक’ की समग्र व्यवस्था को सशक्त करने का स्पष्ट रोडमैप भी सामने आया। महोत्सव में प्रदेशभर से करीब 10 हजार पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और निवेशकों की सक्रिय भागीदारी रही। वहीं वेबकास्टिंग और लाइव यूट्यूब के माध्यम से देश-विदेश के लाखों गोपालकों और उद्यमियों को भी जोड़ा गया, जहां विशेषज्ञों ने योजनाओं, नवीन तकनीकों, स्वदेशी नस्ल के गो पालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। 139 लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से धनराशि हस्तांतरित पशुधन, दुग्ध विकास एवं राजनीतिक पेंशन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कार्यक्रम में विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशुपालकों एवं उद्यमियों को सम्मानित किया। साथ ही वर्ष 2024-25 के नन्द बाबा पुरस्कार के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जनपदों से चयनित 139 लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से धनराशि हस्तांतरित की गई। इस दौरान निजी क्षेत्र के उद्यमियों ने स्टॉल के माध्यम से दुग्ध उत्पादों एवं नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया, जबकि नन्द बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध नीति-2022 से लाभान्वित पशुपालकों, उत्पादकों और निवेशकों की सफलता की कहानियों पर आधारित संग्रह पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। देश में दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है यूपी कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव पशुपालन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य पालन मुकेश कुमार मेश्राम ने अतिथियों एवं पुरस्कार विजेताओं का स्वागत करते हुए स्वदेशी नस्ल के गोपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार बताया और विभागीय योजनाओं के बहुआयामी लाभों से पशुपालकों के जीवन स्तर में आए बदलावों पर प्रकाश डाला। वहीं दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है और इसे बनाए रखने के लिए राज्य सरकार किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य और स्थायी आय उपलब्ध करा रही है। उन्होंने बताया कि नन्द बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध नीति-2022 के माध्यम से ‘गौ से ग्राहक तक’ की सुदृढ़ व्यवस्था विकसित कर गुणवत्तापरक उत्पादन और वैश्विक स्तर के दुग्ध उत्पाद सुनिश्चित किए जा रहे हैं। अब तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में उभरकर सामने आया है, जो न केवल बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन कर रहा है, बल्कि राज्य के सकल मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में लगभग 1.72 लाख करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण योगदान भी दे रहा है। विभाग द्वारा अब तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के 796 एमओयू किए जा चुके हैं, जिनसे 60,000 से अधिक रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5.0 के तहत 2,000 करोड़ रुपये की 72 परियोजनाएं शुरू की गईं, जबकि 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के 59 नए निवेश प्रस्तावों से 13,000 अतिरिक्त रोजगार की संभावना है। वहीं नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत 10,000 से अधिक लाभार्थियों को 84 करोड़ रुपये की अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से वितरित की गई है और 4,000 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियों के जरिए करीब 1.5 लाख दुग्ध उत्पादकों को जोड़ा गया है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रगति दर्ज हुई है। लाभार्थियों ने भी अपने सफल मॉडल प्रस्तुत किए कार्यक्रम में सहकारिता विभाग एवं सीएसए विश्वविद्यालय द्वारा स्वदेशी उन्नत नस्लों के पालन के महत्व पर प्रस्तुति दी गई, जबकि देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों और उद्यमियों ने डेयरी क्षेत्र में अपने अनुभव एवं नवाचार साझा किए। इस दौरान नन्द बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध नीति-2022 के लाभार्थियों ने भी अपने सफल मॉडल प्रस्तुत किए। वहीं मंत्री धर्मपाल सिंह ने दुग्ध स्वर्ण महोत्सव एवं डेयरी एक्सपो में पारस, ज्ञान, नमस्ते इंडिया, अमूल समेत कई प्रमुख निजी डेयरी कंपनियों के स्टॉल का अवलोकन किया, जहां आधुनिक उत्पादों और तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। कुछ कंपनियों ने इस अवसर पर नए उत्पाद भी लॉन्च किए, जबकि विभिन्न मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों ने भी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, राज्यभर में 29 हजार से ज्यादा छापे

पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, राज्यभर में 29 हजार से अधिक छापे योगी सरकार की सख्ती से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की सप्लाई सामान्य एलपीजी वितरण से जुड़े 39 मामलों समेत कुल 220 से अधिक एफआईआर दर्ज 22 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर 261 के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई सरकार की जनता से पैनिक बाइंग न करने की अपील 14 मार्च के बाद से अब तक 51,548 नए पीएनजी कनेक्शन जारी लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए कालाबाजारी पर कड़ा शिकंजा कस दिया है। मुख्य सचिव स्तर से जारी निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर प्रवर्तन कार्रवाई की गई, जिसके तहत 12 मार्च से अब तक 29,607 छापे और निरीक्षण किए गए। इस दौरान एलपीजी वितरण से जुड़े 39 मामलों समेत कुल 220 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि 22 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर 261 के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की गई है। सरकार के अनुसार प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। राज्य के 12,888 पेट्रोल पंपों के माध्यम से लगातार उपभोक्ताओं को ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है। 12 से 16 अप्रैल के बीच प्रतिदिन हजारों किलोलीटर पेट्रोल और डीजल की बिक्री दर्ज की गई, जबकि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 82,000 किलोलीटर पेट्रोल और 1.05 लाख किलोलीटर डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक भंडारण (पैनिक बाइंग) से बचें। एलपीजी की आपूर्ति को लेकर भी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई गई है। प्रदेश के 4,107 गैस वितरकों के माध्यम से उपभोक्ताओं को बुकिंग के अनुसार रिफिल सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही वाणिज्यिक एलपीजी के लिए केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों जैसे होटल, ढाबा, उद्योग और सामुदायिक रसोई को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध आवंटन किया जा रहा है। योगी सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विस्तार को भी तेजी दी है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन उपलब्ध कराए जा सकें। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद विभिन्न विभागों से 117 से अधिक अनुमतियां जारी की जा चुकी हैं। 14 मार्च 2026 के बाद से अब तक 51,548 नए पीएनजी कनेक्शन जारी किए गए हैं, जिससे कुल संख्या बढ़कर 16.09 लाख से अधिक हो गई है। सप्लाई व्यवस्था की निगरानी के लिए खाद्य आयुक्त कार्यालय में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, वहीं जिलों में भी नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं। खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी लगातार फील्ड में जाकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, ताकि किसी भी स्तर पर आपूर्ति बाधित न हो।

यूपी की प्रशासनिक दक्षता को मिली मान्यता, मिशन कर्मयोगी में दूसरे स्थान पर रहा राज्य

प्रशासनिक दक्षता में यूपी को बड़ी उपलब्धि, मिशन कर्मयोगी में बड़े राज्यों में यूपी को दूसरा पुरस्कार केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों व यूटी के बीच असाधारण प्रदर्शन किया यूपी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से तैयार हुआ कर्मयोगी कार्यबल नई दिल्ली/लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश को सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच असाधारण प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसके अलावा प्रदेश ने मिशन कर्मयोगी के तहत ‘साधना सप्ताह’ के दौरान 5 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले प्रदेशों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में दूसरा पुरस्कार हासिल किया है। नई दिल्ली में एक प्रतिष्ठित समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश के इस शानदार प्रदर्शन के लिए एम. देवराज, प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) उत्तर प्रदेश को सम्मानित किया। यह उपलब्धि सशक्त, कुशल और भविष्य के लिए तैयार उत्तर प्रदेश के निर्माण में मिशन कर्मयोगी की ठोस भूमिका का प्रमाण है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस विजन को भी दर्शाती है, जिसके तहत राज्य में नागरिक-केंद्रित, भविष्य के लिए तैयार और डिजिटली सशक्त ‘कर्मयोगी’ कार्यबल तैयार किया गया है। उत्तर प्रदेश को मिली इस सफलता के पैमाने भी ऐतिहासिक हैं। iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 21.5 लाख से अधिक कर्मचारियों को जोड़ा गया। इसके साथ ही राज्य में रिकॉर्ड 1.25 करोड़ कोर्स पूरे किए गए, जो सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक हैं। कौशल विकास के क्षेत्र में भी योगी सरकार के खाते में जबरदस्त उपलब्धि दर्ज की गई। राज्य ने 10 लाख एआई दक्ष बैज और 16,000 कर्मयोगी उत्कर्ष बैज अर्जित किए, जो यूपी में भविष्य के लिए तैयार कार्यबल को दर्शाते हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश ने क्षमता निर्माण में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर फ्रंटलाइन कर्मचारियों (समूह सी एवं डी) तक,  शासन में हर स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित की।

सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में नकल पर पूरी तरह लगेगा ब्रेक, 4 पालियों में होगी परीक्षा

सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में नकल पर पूरी तरह लगेगा ब्रेक, 4 पालियों में होगी परीक्षा 18 व 19 अप्रैल को 4 पालियों में होगी परीक्षा शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने 53 परीक्षा केंद्रों की तैयारियों की समीक्षा की CCTV कैमरों से लैस रहेंगे परीक्षा केंद्र आयोग की अपील- परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचे अभ्यर्थी लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार नकल विहीन एवं पारदर्शी परीक्षा कराने के अपने संकल्प को लेकर प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में 18 और 19 अप्रैल 2026 को चार पालियों में सम्पन्न होने वाली सहायक आचार्य भर्ती की परीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज ने अपनी सारी तैयारियां पूरी कर ली है।  आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार (पूर्व आईपीएस) ने प्रदेश के 6 प्रमुख जनपद आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर के 53 परीक्षा केंद्रों की तैयारियों की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान पाया गया कि सभी केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त हैं और कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया गया है। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सभी परीक्षा कक्षों और महत्वपूर्ण स्थानों को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है, जिन्हें जिला कंट्रोल रूम और आयोग के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा गया है। आयोग स्तर से इनकी कनेक्टिविटी का परीक्षण भी सफलतापूर्वक कर लिया गया है, जिससे हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा सके। हर जिले में आयोग के एक-एक सदस्य को प्रेक्षक के रूप में तैनात किया गया है, जो मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। इसमें गोरखपुर जिले में डा. कृष्ण चन्द्र वर्मा, प्रयागराज में डा. हरेन्द्र कुमार राय, वाराणसी में विमल कुमार विश्वकर्मा, आगरा में कीर्ति गौतम, मेरठ में प्रो. राधाकृष्ण एवं लखनऊ में योगेन्द्र नाथ सिंह प्रेक्षक नामित किया गया हैं।  साथ ही जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें लगातार परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करेंगी। केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू रहेगी और पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। योगी सरकार के निर्देशों के तहत संदिग्ध और असामाजिक तत्वों पर विशेष नजर रखी जाएगी। नकल कराने या परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित करने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाए जाएंगे। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन समेत किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे समय से परीक्षा केंद्र पहुंचें और प्रवेश पत्र में दिए गए निर्देशों का पालन करें। साथ ही किसी भी अफवाह से बचते हुए केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.upessc.up.gov.in एवं 'X' हैण्डल @upesscprayagraj पर सूचनाओं के संबंध में पुष्टि कर लें। आयोग इस परीक्षा को पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष तथा शुचितापूर्ण ढंग से कराने के लिए कृत संकल्पित है।

सीएम योगी के निर्देश पर संभल में बड़ी कार्रवाई, दो गांवों से हटे कब्जे, लैंड बैंक में वृद्धि

सीएम योगी के निर्देश पर संभल में बड़ी कार्रवाई, दो गांवों में हटे कब्जे और लैंड बैंक में निरंतर वृद्धि ग्राम सभा की जमीन से हटे ईदगाह, इमामबाड़ा, मस्जिद-मदरसा संभल  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सार्वजनिक जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के अभियान को तेज करते हुए संभल जिला प्रशासन ने दो गांवों में बड़ी कार्रवाई की। आरक्षित श्रेणी की ग्राम सभा भूमि पर बने अवैध निर्माणों को हटाकर जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा और कहीं भी तनाव की स्थिति नहीं बनने दी गई। बिछौली में आदेश के बाद हटे निर्माण तहसील संभल के ग्राम विछोली में गाटा संख्या 1240 (खाद के गड्ढे हेतु आरक्षित) और गाटा संख्या 1242 (पशुचर भूमि) पर अवैध रूप से इमामबाड़ा और ईदगाह का निर्माण किया गया था। प्रकरण में विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए तहसीलदार न्यायालय ने 31 जनवरी 2026 को बेदखली का आदेश पारित किया था। आदेश के खिलाफ किसी भी स्तर पर अपील न होने पर प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर निर्माण हटवा दिया। बिछौली और मुबारकपुर बन्द में  1.1 हैक्टेयर जमीन खाली इसी क्रम में ग्राम मुबारकपुर बन्द में ग्राम सभा की भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत पर जांच कराई गई। गाटा संख्या 623 और 630 पर मस्जिद और मदरसे का निर्माण पाया गया। प्रशासन ने पहले संबंधित पक्षों को स्वयं निर्माण हटाने का अवसर दिया, लेकिन संसाधनों के अभाव का हवाला देते हुए मुतवल्ली नुसरत अली व अन्य लोगों ने प्रशासन से मदद मांगी। इसके बाद शुक्रवार को प्रशासन की मौजूदगी में अवैध निर्माण हटवाया गया। ‘नियमों के तहत हुई कार्रवाई, अभियान रहेगा जारी’ जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने बताया कि पूरी कार्रवाई धारा 67,राजस्व अभिलेखों और न्यायालय के आदेश के आधार पर की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम सभा, पशुचर, खेल मैदान, खाद के गड्ढे और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पहले संबंधित पक्षों को पूरा अवसर दिया जाता है, इसके बाद ही कार्रवाई होती है। जिले में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और जहां भी अवैध कब्जा मिलेगा, उसे हटाया जाएगा। 3 महीने के टाइम बाउंड पीरियड में पूरी कार्रवाई और 30 दिन के अपील के समय को पूर्ण कर दिया जाता है।