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7 जून से 30 जून तक प्रेरणा पोर्टल पर होंगे ऑनलाइन आवेदन, ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं होंगे

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 के लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। प्रदेश के पात्र शिक्षक एवं शिक्षिकाएं 7 जून से 30 जून 2026 तक प्रेरणा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।  प्रेरणा पोर्टल से पूरी होगी ऑनलाइन प्रक्रिया शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। पात्र शिक्षक प्रेरणा पोर्टल पर निर्धारित अवधि के भीतर अपना आवेदन कर सकेंगे। किसी भी प्रकार का ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।  ऐसे शिक्षक होंगे पात्र राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 के लिए केवल नियमित रूप से कार्यरत ऐसे शिक्षक एवं शिक्षिकाएं पात्र होंगे, जिन्होंने न्यूनतम 15 वर्ष की नियमित सेवा पूर्ण कर ली हो तथा जिनकी सेवानिवृत्ति में कम से कम पांच वर्ष का समय शेष हो। संविदा शिक्षक, शिक्षामित्र, सेवानिवृत्त शिक्षक तथा पूर्व में राज्य अथवा राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत शिक्षक इस पुरस्कार के लिए पात्र नहीं होंगे। गुणवत्ता आधारित होगी चयन प्रक्रिया योगी सरकार ने चयन प्रक्रिया को पूरी तरह गुणवत्ता आधारित और पारदर्शी बनाया है। शिक्षकों का मूल्यांकन 100 अंकों की निर्धारित प्रणाली के आधार पर किया जाएगा। इसमें शैक्षणिक उपलब्धियां, विद्यालय विकास में योगदान, छात्र नामांकन वृद्धि, नवाचार आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधनों का उपयोग, छात्र अधिगम स्तर में सुधार, प्रस्तुतीकरण और साक्षात्कार जैसे महत्वपूर्ण मानकों को शामिल किया गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वास्तव में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मान प्राप्त हो। दो चरणों में होगी चयन प्रक्रिया 01 जुलाई से 20 जुलाई तक जनपद चयन समितियां प्राप्त आवेदनों का परीक्षण, सत्यापन और मूल्यांकन करेंगी तथा प्रत्येक जनपद से तीन श्रेष्ठ शिक्षकों का चयन करेंगी। इसके बाद राज्य चयन समिति 01 अगस्त से 14 अगस्त के बीच पुनर्मूल्यांकन, प्रस्तुतीकरण और साक्षात्कार के आधार पर प्रत्येक जनपद से एक उत्कृष्ट शिक्षक का अंतिम चयन करेगी।

विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर कुकरैल में होगा वृहद पौधरोपण, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे शुभारंभ

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुकरैल वन क्षेत्र से इसका शुभारंभ करेंगे। उनके नेतृत्व में पूरे राज्य में एक दिन में 5 करोड़ पौधरोपण किए जाएंगे। इसके लिए सभी विभागों व मंडलों के लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं। पर्यावरण दिवस पर वन विभाग की तरफ से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मुख्य आयोजन होगा, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।  कुकरैल वन क्षेत्र में होगा वृहद पौधरोपण  ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत कुकरैल वन क्षेत्र में वृहद पौधरोपण होगा। सबसे पहले यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पौधरोपण करेंगे। यहां 200 से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। इस कार्यक्रम में वन मंत्री अरुण सक्सेना, प्रभारी मंत्री, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।  जनसहभागिता से प्रदेश मनाएगा उत्सव इसके पश्चात प्रदेश के 17 नगर निगमों, 825 विकास खंडों, 762 नगर निकायों समेत सभी ग्राम पंचायतों में यह अभियान पूरे दिन चलेगा। वन विभाग के संयोजकत्व में ग्राम्य विकास, पंचायती राज, कृषि, उद्यान, नगर विकास आदि विभागों के सहयोग से अमृत सरोवर, तालाबों, सड़कों, एक्सप्रेसवे, नदियों, नहरों आदि के किनारे पौधे लगाए जाएंगे। इसमें विद्यालयों, महाविद्यालयों, स्वयं सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों आदि की भी सहभागिता होगी।  लखनऊ मंडल में 62 लाख, बरेली में 32.21 लाख व प्रयागराज में लगेंगे 32.17 लाख पौधे मंडल – लक्ष्य मेरठ- 19,06,000 सहारनपुर- 14,86,000 आगरा- 24,67,000 अलीगढ़- 18,97,000 मुरादाबाद- 27,60,000 बरेली- 32,21,000 प्रयागराज- 32,17,000 वाराणसी- 24,83,000 मीरजापुर- 28,63,000 गोरखपुर- 24,75,000 बस्ती- 16,01,000 आजमगढ़- 18,93,000 लखनऊ- 62,77,000 अयोध्या- 30,41,000 देवीपाटन- 29,34,000 कानपुर- 31,83,000 झांसी- 31,67,000 चित्रकूट- 31,29,000 ग्राम्य विकास विभाग 3 करोड़ तथा कृषि विभाग लगाएगा 75 लाख पौधे  विभाग – लक्ष्य ग्राम्य विकास विभाग- 3 करोड़  कृषि विभाग- 75 लाख  वन विभाग- 50 लाख  उद्यान विभाग- 50 लाख  पंचायती राज विभाग- 20 लाख  नगर विकास- 5 लाख कुल- 5 करोड़

योगी सरकार के हरित उत्तर प्रदेश विजन को मिलेगा नया आयाम, बायोप्लास्टिक अपनाने की बड़ी पहल का होगा शुभारंभ

लखनऊ  पर्यावरण संरक्षण, सर्कुलर इकोनॉमी और हरित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने जा रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को लखनऊ छावनी स्थित दिलकुशा लॉन में आयोजित होने वाले "बायोयुग ग्रीन कमांड-2026" में पारंपरिक प्लास्टिक के विकल्प के रूप में बायोप्लास्टिक को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने की पहल का शुभारंभ किया जाएगा। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उत्तर प्रदेश को देश का एथेनॉल हब बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही योगी सरकार अब गन्ना आधारित उद्योगों से निकलने वाले नवाचारों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ रही है। प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन, जैव ऊर्जा और हरित उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों के बीच बायोप्लास्टिक का यह अभियान सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। भारत की अग्रणी इंटीग्रेटेड शुगर एवं एथेनॉल कंपनियों में शामिल बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (बीसीएमएल) और लखनऊ कैंटोनमेंट बोर्ड के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, रक्षा क्षेत्र, शोध संस्थानों और पर्यावरण विशेषज्ञों का संगम देखने को मिलेगा। कार्यक्रम में बायोप्लास्टिक को बड़े पैमाने पर अपनाने की रणनीति, उत्पादन क्षमता, निवेश अवसरों और बाजार विस्तार पर विस्तृत चर्चा होगी। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण दो उच्चस्तरीय पैनल चर्चाएं होंगी। पहली चर्चा "मैंडेट टू मार्केट : अनलॉकिंग द बायोप्लास्टिक्स वैल्यू चेन इन उत्तर प्रदेश" विषय पर केंद्रित होगी, जिसमें राज्य में बायोप्लास्टिक उद्योग के विकास, निवेश संभावनाओं और सरकारी सहयोग पर विमर्श किया जाएगा। वहीं दूसरी चर्चा "फ्रॉम मेस मिशन : बायोप्लास्टिक्स फॉर डिफेंस" में रक्षा क्षेत्र में बायोप्लास्टिक के उपयोग, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय लाभों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।

नीम करोली बाबा सर्किट तथा बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट का होगा विकास

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और ज्ञान विरासत का प्रतिनिधि प्रदेश है। पर्यटन विकास को केवल आधारभूत संरचना निर्माण तक सीमित न रखते हुए उसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और वैश्विक पहचान से जोड़कर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। गुरुवार को पर्यटन विभाग की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को नई गति देने में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। पर्यटन विकास के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, पारंपरिक कला, खानपान, संस्कृति और सेवा क्षेत्र को भी व्यापक अवसर प्राप्त होंगे। भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण से जुड़े ज्ञान भारतम् मिशन की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियां हमारी सभ्यता, दर्शन, विज्ञान और सांस्कृतिक चेतना की अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण और डिजिटलीकरण केवल अभिलेखीकरण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम है। बैठक में अब तक 13 लाख 70 हजार से अधिक पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण और संरक्षण की प्रगति की जानकारी दी गई। पर्यटन नीति-2022 में प्रस्तावित संशोधनों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को निवेश, नवाचार और अनुभव आधारित पर्यटन का अग्रणी केंद्र बनाया जाए। बैठक में नीम करोली बाबा सर्किट तथा बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट के रूप में नए क्षेत्रों के विकास पर चर्चा हुई। साथ ही ‘परंपरा’ विरासत अनुभव केंद्र, कृषि पर्यटन तथा वाइनयार्ड पर्यटन जैसी नई अवधारणाओं को बढ़ावा देने पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन नीति ऐसी हो जो निवेश आकर्षित करे, रोजगार बढ़ाए और पर्यटकों को विशिष्ट अनुभव प्रदान करे। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में नव लोकार्पित ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ और निर्माणाधीन आईएनएस गोमती शौर्य संग्रहालय की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना राष्ट्रभक्ति, सैन्य गौरव और भारत की समुद्री विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि इसका संचालन लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा किया जाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि निर्माणाधीन आईएनएस गोमती शौर्य संग्रहालय में भारतीय नौसेना के गौरवशाली इतिहास, समुद्री शक्ति, नौसैनिक अभियानों, आईएनएस गोमती की यात्रा, नौवहन परंपरा और भारत की समुद्री विरासत को आधुनिक तकनीक, इंटरैक्टिव गैलरियों, सिम्युलेटर, युवा कैडेट एरीना तथा विविध अनुभवात्मक प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना युवाओं में राष्ट्रसेवा, अनुशासन और देशभक्ति की भावना को और सशक्त करेगी। आगरा में निर्माणाधीन छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रनायकों की प्रेरक गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना राष्ट्रीय दायित्व है। संग्रहालय में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, स्वराज्य स्थापना, आगरा आगमन, औरंगजेब के दरबार में उनके अदम्य साहस, आगरा से ऐतिहासिक प्रस्थान, राज्याभिषेक, सैन्य नेतृत्व, हिंदवी स्वराज्य, किलों के विकास तथा सुशासन की अवधारणा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संग्रहालय में मराठा साम्राज्य और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक संबंधों, काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनरुद्धार में अहिल्याबाई होल्कर की भूमिका, तीर्थस्थलों के संरक्षण, प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता संग्राम के नायकों, ब्रज की संस्कृति को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए। नैमिषारण्य के समग्र विकास की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि भारत की वैदिक ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक साधना और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत केंद्र है। इसके विकास में धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के बीच संतुलन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि समग्र मास्टर प्लान के अंतर्गत वेद विज्ञान केंद्र, वेदारण्यम वेलनेस एवं वैदिक थीम पार्क, राजघाट रिवरफ्रंट, व्यास गद्दी, सूत गद्दी, हनुमानगढ़ी, देवदेवेश्वर एवं रुद्रावत मंदिर परिसर, नैमिष हाट, तीर्थयात्री आवास, इंटरप्रिटेशन सेंटर तथा आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है। यह भी बताया गया कि इंटरप्रिटेशन सेंटर में वेदों की जन्मस्थली के रूप में नैमिषारण्य की अवधारणा, प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो, दशावतार विजुअलाइजेशन तथा पारंपरिक ग्राम्य जीवन के अनुभव को प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कार्ययोजना को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए। मिर्जापुर-विंध्याचल क्षेत्र के लिए तैयार किए जा रहे इंटीग्रेटेड मास्टर प्लान की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मां विंध्यवासिनी धाम देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और इसकी विकास योजना भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए। बैठक में त्रिकोण परिक्रमा क्षेत्र के विकास पर भी चर्चा हुई। यह भी बताया गया कि वर्ष 2050 तक संभावित श्रद्धालु संख्या को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के शक्तिपीठों के निकट माता सती की पौराणिक कथा का प्रभावी एवं आकर्षक प्रस्तुतीकरण किया जाए तथा इसके लिए निजी क्षेत्र के सहयोग की संभावनाओं का भी उपयोग किया जाए। बैठक में चित्रकूट स्थित प्राचीन सोमनाथ मंदिर के संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है। संरक्षण कार्यों में मूल स्वरूप, ऐतिहासिक प्रामाणिकता और स्थापत्य विशेषताओं को अक्षुण्ण रखते हुए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन धरोहरों से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।

पर्यावरण दिवस से योग दिवस तक डबल इंजन सरकार की उपलब्धियां लेकर जनता के बीच जाएंगे मंत्रिगण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार देर शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की कानून-व्यवस्था, आगामी आरक्षी नागरिक पुलिस भर्ती परीक्षा तथा केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले जनभागीदारी आधारित कार्यक्रमों की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसेवा, सुशासन, पर्यावरण संरक्षण, युवाओं के हित और जनकल्याण से जुड़े प्रत्येक कार्यक्रम का क्रियान्वयन संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जनसहभागिता के साथ सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विश्व पर्यावरण दिवस से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस तक आयोजित होने वाले कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन न होकर जनभागीदारी और जनजागरण का व्यापक अभियान बनें। उन्होंने कहा कि 05 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत न्यूनतम 05 करोड़ पौधों का रोपण किया जाए। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मातृत्व के सम्मान और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का भी प्रतीक बने। उन्होंने निर्देश दिए कि पौधों की पर्याप्त उपलब्धता, जियो टैगिंग तथा उनके संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने का लक्ष्य लेकर कार्य किया जाए तथा इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 05 से 21 जून तक की अवधि विकसित भारत एवं विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है। प्रभारी मंत्रियों एवं जनप्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में समाज के प्रबुद्ध वर्ग, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, अभियंताओं, उद्योगपतियों, अधिवक्ताओं, युवा उद्यमियों तथा स्टार्टअप इनोवेटरों के साथ संवाद स्थापित किया जाए। विगत वर्षों में देश और प्रदेश में हुए सकारात्मक परिवर्तनों, सुशासन, आधारभूत संरचना, निवेश, रोजगार और जनकल्याण के क्षेत्रों में प्राप्त उपलब्धियों पर चर्चा की जाए तथा समाज के विभिन्न वर्गों के सुझावों और अपेक्षाओं को भी गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने कहा कि यह संवाद विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में जनसहभागिता को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस अवधि में स्वच्छता को विशेष जनअभियान के रूप में संचालित किया जाए तथा अधिकारीगण स्वयं इसमें सहभागी बनकर समाज को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि 14 से 16 जून तक विकास खंड स्तर पर आयोजित होने वाले जनकल्याण शिविरों एवं स्वास्थ्य मेलों के माध्यम से पात्र लेकिन वंचित लाभार्थियों को सरकार की योजनाओं से जोड़ा जाए। साथ ही प्रत्येक जनपद की विशिष्ट पहचान, उपलब्धियों और आधारभूत संरचना विकास को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनियां भी आयोजित की जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत संकल्प सम्मेलन के माध्यम से प्रबुद्ध नागरिकों और विषय विशेषज्ञों को जोड़ते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों पर सार्थक विमर्श किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि चौपालों का आयोजन कर जनसमस्याओं के समाधान, योजनाओं की समीक्षा तथा शिकायतों के निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था की जाए। नामित मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि प्रवास भी करें, ताकि स्थानीय आवश्यकताओं और चुनौतियों को निकटता से समझकर त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के महानिदेशक ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों की भर्ती परीक्षा 08, 09 एवं 10 जून को प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा में लगभग 29 लाख अभ्यर्थियों के सम्मिलित होने की संभावना है। उन्होंने प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन, परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भर्ती परीक्षा की शुचिता, निष्पक्षता और गोपनीयता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता न होने पाए। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की सहभागिता को देखते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप यातायात प्रबंधन की प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि आमजन को अनावश्यक असुविधा न हो। उन्होंने परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व सभी परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेक्टर मजिस्ट्रेट, स्टेटिक मजिस्ट्रेट एवं केंद्र व्यवस्थापकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी अधिकारी पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने 06 जून को परीक्षा आयोजन का पूर्वाभ्यास कराने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा के दौरान कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें फैलाने अथवा भ्रामक एवं असत्य सूचनाएं प्रसारित करने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसी गतिविधियों की सतत और गहन निगरानी की जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परीक्षा प्रदेश के लाखों युवाओं की आकांक्षाओं और भविष्य से जुड़ी हुई है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी अभ्यर्थी को अनावश्यक कठिनाई या परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि एक भी अभ्यर्थी को धूप में खड़ा न रहना पड़े तथा परीक्षा केंद्रों पर सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए परिवहन विभाग द्वारा रियायती किराये पर अंतर्जनपदीय विशेष बसों का संचालन किया जाए। साथ ही सभी परीक्षा केंद्रों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा वैकल्पिक बिजली व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधिकारी संवेदनशीलता के साथ व्यवस्थाओं की निगरानी करें और अभ्यर्थियों को सुगम, सुरक्षित एवं सकारात्मक परीक्षा वातावरण उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि परीक्षा देने वाले प्रत्येक युवा के मन में व्यवस्था के प्रति संतोष और विश्वास का भाव उत्पन्न हो, यह सभी संबंधित अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

3 बिल्डरों को पीछे छोड़ BJP ने जीती बोली, 45 करोड़ में खरीदी बहुमूल्य जमीन

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भाजपा के आलीशान दफ्तर के बाद प्रदेश मुख्यालय बनने का रास्ता साफ हो गया है। यूपी भाजपा ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की नीलामी में तीन बिल्डरों को पछाड़कर 45 करोड़ की बोली लगाई और जीजामई में 5500 वर्ग मीटर की जमीन खरीद ली। एलडीए ने यह जमीन पिछले महीने लखनऊ नगर निगम से 29 करोड़ में ली थी, जिसे बीजेपी ने 45 करोड़ की सबसे ऊंची बोली के साथ खरीद लिया है। एलडीए को इस सौदे से 19 करोड़ का फायदा एक महीने में हो गया। इस नीलामी में तीन बड़े बिल्डर समूहों के साथ भारतीय जनता पार्टी भी शामिल थी। ऑनलाइन नीलामी में भाजपा ने सबसे अधिक कीमत लगाकर भूखंड अपने नाम कर लिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जुलाई में यहां दफ्तर बनाने के काम की शुरुआत कर सकते हैं। पार्टी इस भूखंड पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त छह मंजिला प्रदेश मुख्यालय बनाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित भवन में प्रशासनिक कार्यालय, बैठक कक्ष, सम्मेलन सुविधाएं और अन्य आधुनिक व्यवस्थाएं होंगी। सूत्रों के अनुसार, भवन की सबसे ऊपरी मंजिल पर हेलीपैड भी विकसित करने की योजना है। ताकि राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की आवाजाही सुगम हो सके। जमीन वापसी के बाद बदली पूरी रणनीति यह भूखंड पहले नगर निगम ने दीनदयाल उपाध्याय सेवा न्यास को आवंटित किया था। वर्ष 2020 में नगर निगम ने करीब 5500 वर्गमीटर जमीन 90 वर्ष की लीज पर न्यास को दी थी। बाद में इसे फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव पारित हुआ था, ताकि यहां भाजपा का प्रदेश मुख्यालय बनाया जा सके। लेकिन 7 अप्रैल को न्यास के सदस्य कृष्ण कुमार दीक्षित ने नगर निगम को पत्र भेजकर बजट की कमी का हवाला देते हुए जमीन वापस करने का निर्णय लिया। इसके बाद पूरी प्रक्रिया ने नया मोड़ ले लिया। एलडीए ने डीएम सर्किल रेट के दोगुने पर खरीदी जमीन एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने नगर आयुक्त गौरव कुमार को पत्र भेजकर भूखंड को सर्किल रेट के दोगुने दर पर एलडीए को देने को कहा था। नगर निगम सदन ने भी जमीन एलडीए को देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद एलडीए ने जमीन अपने अधिकार में लेकर नीलामी की प्रक्रिया शुरू की। एलडीए की रणनीति से बढ़ा राजस्व प्रत्यक्ष हस्तांतरण की बजाय नीलामी का रास्ता अपनाने से एलडीए को बड़ा आर्थिक लाभ हुआ। 29 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन 45 करोड़ रुपये में बिकने से प्राधिकरण को 16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिला। अधिकारियों का मानना है कि खुली नीलामी प्रक्रिया अपनाने से भविष्य में किसी कानूनी या प्रशासनिक विवाद की संभावना भी कम होगी। अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष के आने की चर्चा भाजपा सूत्रों के अनुसार नए प्रदेश मुख्यालय के शिलान्यास और निर्माण प्रक्रिया को लेकर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी गंभीर है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के जुलाई में इसका शिलान्यास करने की बात कही जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। खसरा संख्या 196 राजनीतिक गतिविधियों का नया केंद्र जियामऊ स्थित खसरा संख्या 196 का यह भूखंड अब प्रदेश की राजनीति का नया केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यालय बनने के बाद यहां से भाजपा की संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियों का संचालन होगा, जिससे यह परिसर राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक परिसरों में शामिल हो जाएगा।

हाई कोर्ट की राज्य सरकार से जवाब-तलब, पंचायत चुनाव पर OBC आयोग की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

 लखनऊ  पंचायत चुनाव और वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से महत्वपूर्ण जानकारी तलब की है।अदालत ने पंचायत चुनावों से संबंधित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग से संभावित चुनाव कार्यक्रम के बारे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति एके चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने स्थानीय अधिवक्ता ओम प्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। याचिका में राज्य सरकार के 25 मई के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा-12 के अनुसार ग्राम प्रधान का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि से केवल पांच वर्ष का होता है। इसके बावजूद समय पर पंचायत चुनाव न कराकर मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया गया, जिससे उनका कार्यकाल अनिश्चितकाल तक बढ़ गया है। यह व्यवस्था कानून के विपरीत है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यदि किसी कारण से समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराए जा सकते, तो पूर्व व्यवस्था के अनुसार एडीओ पंचायत या किसी अन्य सरकारी अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाए। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चुनाव तैयारियों और आरक्षण प्रक्रिया की स्थिति जानने के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तलब की तथा निर्वाचन आयोग से संभावित चुनाव कार्यक्रम पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

सीएम योगी के सख्त निर्देश पर एक्शन, 761.41 एकड़ जमीन फिर ग्राम सभा के नाम दर्ज होगी

सीएम योगी के निर्देश पर बड़ी कार्रवाईः भोगनीपुर की 761.41 एकड़ भूमि पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश   दो नामी कंपनियों के घोटाले का मामला, थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए वर्ष 2011 में हुआ था भूमि आवंटन   थर्मल पावर प्लांट बनाने के बजाय कंपनियों ने बिना अनुमति बैंकों में गिरवी रख दी थी आवंटित की गई जमीन कंपनियों ने न तो थर्मल पावर प्लांट बनाया और न ही बैंकों का 400 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया तत्कालीन अपर जिलाधिकारी और कुछ बैंक कर्मियों की मिलीभगत से कंपनियों ने लिया था ऋण  भ्रष्टाचार के विरुद्ध योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का असर: नीलामी रुकी, मुकदमा हुआ, अब जमीन भी वापस   कानपुर देहात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश में सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और अनियमितताओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भोगनीपुर भूमि प्रकरण में बड़ा आदेश हुआ है। जिलाधिकारी कानपुर देहात कपिल सिंह की जांच रिपोर्ट और सिफारिश पर मंडलायुक्त कानपुर के. विजयेन्द्र पांडियन ने वर्ष 2011 में थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहीत लगभग 761.41 एकड़ भूमि को पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं।  भोगनीपुर क्षेत्र में 'हिमावत पावर लिमिटेड' और 'मैसर्स लैंको अनपरा पावर लिमिटेड' को थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए वर्ष 2011 में जमीन आवंटित की गई थी। कंपनियों ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया और बिना सरकार की अनुमति के इस सरकारी भूमि को बैंकों में बंधक रख दिया। इन कंपनियों ने तत्कालीन अपर जिलाधिकारी ओ.के. सिंह और कुछ बैंक कर्मियों की मिलीभगत से 400 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण ले लिया लिया। कंपनियों ने न तो प्रोजेक्ट पूरा किया और न ही बैंकों का कर्ज चुकाया, जिसके बाद बैंकों ने इस कीमती भूमि को नीलाम करने की कोशिश शुरू कर दी थी। मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर तत्काल एक्शन जिलाधिकारी कपिल सिंह ने इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए जांच कराई। पता चला कि कंपनियों ने अफसरों के साथ मिलकर राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिला प्रशासन ने तत्काल एक्शन लेते हुए बैंकों द्वारा की जा रही नीलामी पर रोक लगवाई और इसे सरकारी रिकॉर्ड में सुरक्षित कराया। इसके बाद भोगनीपुर की तहसीलदार प्रिया सिंह की तहरीर पर थाना मूसानगर में दोनों कंपनियों, संबंधित बैंकों और पूर्व एडीएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। भूमि को पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश जारी कानपुर देहात के जिलाधिकारी कपिल सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर मंडलायुक्त कानपुर द्वारा भूमि आवंटन निरस्त करते हुए पुनर्ग्रहीत भूमि को पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं, कमिश्नर के. विजयेन्द्र पांडियन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट से यह पूरी तरह साफ है कि जमीन लेने वाली कंपनियों ने पट्टा विलेख की अनिवार्य शर्तों का खुला उल्लंघन किया है।

आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के विकास को मंजूरी

18 शहरों में 1725 एसी इलेक्ट्रिक बसें चलाएगी योगी सरकार जीसीसी मॉडल पर होगा संचालन, नगरीय परिवहन को मिलेगा आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल स्वरूप यात्रियों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं, निजी निवेश से बढ़ेगी सेवा गुणवत्ता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में कुल 24 प्रस्तावों को मिली स्वीकृति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में  आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य नगरीय परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और यात्री सुविधाओं के अनुरूप बनाना है। योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी तथा नोएडा (जेवर सहित) में 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की कुल 1725 एसी ई-बसों का संचालन किया जाएगा। इन बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों द्वारा जीसीसी मॉडल पर किया जाएगा और अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन तिथि से 12 वर्ष होगी। कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कुल 24 प्रस्तावों को कैबिनेट की ओर से स्वीकृति दी गई। जीसीसी मॉडल के अंतर्गत बसों की खरीद, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना, चालक एवं तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता, बसों का संचालन और अनुरक्षण की पूरी जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों की होगी। निर्धारित मानकों के आधार पर उन्हें संचालन एवं अनुरक्षण शुल्क का भुगतान किया जाएगा। योजना के तहत 12 मीटर ई-बस पर 40 लाख रुपये तथा 9 मीटर ई-बस पर 35 लाख रुपये प्रति बस की दर से अनुदान भी दिया जाएगा। परियोजना के लिए आवश्यक डिपो निर्माण हेतु भूमि संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। किराया एवं उपयोगकर्ता शुल्क का निर्धारण राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। इस योजना से सार्वजनिक परिवहन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और यात्रियों को आरामदायक, सुरक्षित एवं समयबद्ध परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही निजी निवेश के माध्यम से सरकारी वित्तीय भार कम होगा तथा प्रदेश के शहरों में आधुनिक शहरी परिवहन तंत्र को नई मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि अभी 15 नगर निगमों में नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है। आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के विकास को मंजूरी प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये जारी होंगे  कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए धनराशि स्वीकृत करने और व्यय संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय से प्रदेश में आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नगरीय विकास को नई गति मिलेगी। प्रदेश सरकार द्वारा तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शहरों के नियोजित विस्तार के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। योजना के संचालन के लिए 6 अप्रैल 2023 को विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। योजना के तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 वर्षों के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इससे विकास प्राधिकरणों और संबंधित एजेंसियों को बड़े पैमाने पर नगरीय अवसंरचना विकसित करने में सुविधा मिलेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 3500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसी के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में प्रस्तावित नए शहरों के विकास हेतु संबंधित अभिकरणों को कुल 355.06 करोड़ रुपये तक की सीड कैपिटल अनुमन्य की गई है। इसके सापेक्ष प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त करने का निर्णय लिया गया है। बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु पर मुआवजा नीति को मंजूरी आश्रितों को समयबद्ध व त्वरित सहायता होगी सुनिश्चित  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश के कारागारों में निरुद्ध बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में मृतक बंदियों के आश्रितों अथवा निकटस्थ परिजनों को मुआवजा भुगतान के लिए "उत्तर प्रदेश बंदी मृत्यु एवं मुआवजा भुगतान नीति" बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। नई नीति का उद्देश्य बंदियों के मानवाधिकारों की रक्षा, कारागार प्रशासन में पारदर्शिता तथा पीड़ित परिवारों को समयबद्ध राहत सुनिश्चित करना है। वर्तमान में बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली की संस्तुतियों के आधार पर मुआवजा भुगतान की व्यवस्था प्रचलित है। हालांकि इस प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर अनुमोदन और औपचारिकताओं के कारण मृतक बंदियों के आश्रितों को मुआवजा मिलने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग जाता था। इसी समस्या के समाधान के लिए योगी सरकार ने एक स्पष्ट और संस्थागत नीति बनाने का निर्णय लिया है। नई नीति के तहत कारागारों में निरुद्ध बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु होने पर उनके आश्रितों अथवा निकटस्थ परिजनों को निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान अधिक त्वरित और सुव्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा। इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे, जिससे सभी मामलों में एक समान और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित हो सके। विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों से स्वीकृत मानचित्रों के विनियमतीकरण को मंजूरी महायोजना विहीन क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति के लिए बनेगी एसओपी  योगी कैबिनेट ने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत किए गए मानचित्रों के विनियमतीकरण तथा विकास क्षेत्र, विस्तारित विकास क्षेत्र एवं विनियमित क्षेत्रों में, जहां अभी महायोजना तैयार नहीं है, वहां मानचित्र स्वीकृति के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। इस निर्णय से लंबे समय से लंबित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विकासात्मक समस्या का समाधान होगा। विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा पूर्व में स्वीकृत किए गए मानचित्रों की वैधता को लेकर जो प्रश्न उठ रहे थे, उन्हें विनियमतीकरण के माध्यम से दूर किया जा सकेगा। इससे आम नागरिकों, भू-स्वामियों और निर्माणकर्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार जिन विकास क्षेत्रों, विस्तारित विकास क्षेत्रों अथवा विनियमित क्षेत्रों की महायोजना अभी तैयार नहीं हुई है, वहां मानचित्र स्वीकृति के लिए एक स्पष्ट और … Read more

सिपाही भर्ती परीक्षा से पहले योगी सरकार का तोहफा, उम्मीदवारों को मिलेगी किराए में रियायत

लखनऊ यूपी में सिपाही बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए राहत भरी खबर है. प्रदेश में होने जा रही आरक्षी नागरिक पुलिस भर्ती परीक्षा से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभ्यर्थियों की सुविधाओं को लेकर कई अहम निर्देश दिए हैं. सबसे बड़ा फैसला यह है कि परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए रियायती किराये पर विशेष बसों का संचालन किया जाएगा, ताकि उन्हें परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश की कानून-व्यवस्था, पुलिस भर्ती परीक्षा और आगामी जनभागीदारी कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भर्ती परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि आरक्षी नागरिक पुलिस और समकक्ष पदों की भर्ती परीक्षा 8, 9 और 10 जून को आयोजित होगी. परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में कराई जाएगी।  सबसे अहम बात यह है कि इस भर्ती परीक्षा में करीब 29 लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है. इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासनिक तैयारियां भी युद्धस्तर पर की जा रही हैं. परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन, निगरानी तंत्र और कानून-व्यवस्था को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण मुख्यमंत्री के सामने रखा गया. मुख्यमंत्री ने सभी व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।  धूप में खड़ा नहीं रहेगा कोई अभ्यर्थी बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ऐसा निर्देश दिया, जिसकी चर्चा अब युवाओं के बीच हो रही है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी अभ्यर्थी को धूप में खड़ा रहने की नौबत नहीं आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, छाया, बैठने की व्यवस्था, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध रहनी चाहिए. लाखों युवाओं का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा है, इसलिए प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा देने आने वाला हर अभ्यर्थी व्यवस्था से संतुष्ट होकर वापस जाए. यही सरकार और प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।  बस किराए में छूट, विशेष बसें भी चलेंगी परीक्षा के दौरान सबसे बड़ी समस्या अक्सर यात्रा को लेकर सामने आती है. कई अभ्यर्थियों को अपने जिले से दूसरे जिले में जाकर परीक्षा देनी पड़ती है. ऐसे में परिवहन खर्च और समय दोनों बड़ी चुनौती बन जाते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को निर्देश दिया कि अभ्यर्थियों के लिए अंतर्जनपदीय विशेष बसों का संचालन किया जाए. साथ ही रियायती किराये की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।   सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर सख्ती मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया की लगातार निगरानी की जाए. यदि कोई व्यक्ति अफवाह फैलाने या भ्रामक जानकारी प्रसारित करने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए. सरकार का उद्देश्य है कि अभ्यर्थियों के बीच किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने और परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो।  6 जून को होगा पूर्वाभ्यास मुख्यमंत्री ने परीक्षा से पहले 6 जून को पूर्वाभ्यास कराने के निर्देश भी दिए हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा के दिन किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या सामने न आए. सेक्टर मजिस्ट्रेट, स्टेटिक मजिस्ट्रेट और केंद्र व्यवस्थापकों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्व का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से करे. गर्मी के मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी परीक्षा केंद्रों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. यदि कहीं बिजली बाधित होती है तो उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी पहले से तैयार रखी जाएगी. इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जाएगी. परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती रहेगी और संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी की जाएगी।  पर्यावरण अभियान को भी मिलेगी रफ्तार बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी कार्यक्रमों की भी समीक्षा की. उन्होंने कहा कि 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत प्रदेशभर में कम से कम 5 करोड़ पौधे लगाए जाएं. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पौधों की उपलब्धता, जियो टैगिंग और संरक्षण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल पौधारोपण कार्यक्रम नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मातृत्व सम्मान का प्रतीक अभियान बनना चाहिए. मुख्यमंत्री ने सभी ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जनआंदोलन बनाया जाना चाहिए।  12 साल पूरे होने पर जनसंवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 5 जून से 21 जून तक प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इन कार्यक्रमों में शिक्षाविदों, चिकित्सकों, उद्योगपतियों, वकीलों, युवा उद्यमियों और स्टार्टअप इनोवेटर्स के साथ संवाद किया जाएगा. सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होगी. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि चौपाल लगाने के निर्देश दिए. इन चौपालों में लोगों की समस्याएं सुनी जाएंगी और सरकारी योजनाओं की समीक्षा की जाएगी।  उन्होंने कहा कि मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी गांवों में रात्रि प्रवास भी करें, ताकि स्थानीय समस्याओं को नजदीक से समझा जा सके. बैठक के अंत में मुख्यमंत्री का फोकस एक बार फिर भर्ती परीक्षा पर ही रहा. उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा को पूरी पारदर्शिता, सुरक्षा और संवेदनशीलता के साथ संपन्न कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।