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पशु कल्याण की बड़ी पहल: झांसी में पांच एकड़ भूमि पर विकसित होगा गो आश्रय व पशु चिकित्सा केंद्र

झांसी में पांच एकड़ भूमि पर बनेगा गो आश्रय स्थल और पशु चिकित्सा एवं सेवा केंद्र पशुपालन विभाग की भूमि पर निजी संस्था के सहयोग से संचालित होंगी पशु कल्याण गतिविधि मोठ तहसील में 5 एकड़ जमीन पर दया भावना फाउंडेशन बनाएगा पशु चिकित्सा एवं सेवा केंद्र योगी सरकार की कैबिनेट से मंजूरी के बाद एमओयू का रास्ता हुआ साफ झांसी, सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले पशुओं के बेहतर उपचार और देखभाल के लिए झांसी में पशु चिकित्सालय के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में यूपी सरकार की कैबिनेट मीटिंग में बुधवार को मिली मंजूरी के बाद अब पशुपालन विभाग के साथ दया भावना फाउंडेशन नाम की गैर सरकारी संस्था का एमओयू किया जाएगा। दया भावना फाउंडेशन इस पशु चिकित्सालय का निर्माण, पशु आश्रय स्थल का निर्माण और संचालन का काम करेगी। झांसी जिले के मोठ तहसील के ग्राम सभा बम्हरौली में पशुपालन विभाग की पांच एकड़ जमीन पर पशु चिकित्सालय और आश्रय स्थल का निर्माण किया जाएगा। दया भावना फाउंडेशन सोनागिरी की झांसी शाखा पशु चिकित्सालय और आश्रय स्थल का निर्माण करेगी। इसमें पशुओं के उपचार के साथ ही उनके आश्रय की व्यवस्था रहेगी और चारे के उत्पादन आदि की गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी। सारी गतिविधियां फाउंडेशन की ओर से की जाएंगी और जमीन का स्वामित्व पशुपालन विभाग का रहेगा।  पशुपालन विभाग के झांसी मंडल के अपर निदेशक डॉ. अरविंद सागर ने बताया कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब गैर सरकारी संस्था के साथ एमओयू किया जाएगा। निराश्रित, बीमार और दुर्घटना का शिकार होने वाले पशुओं को संरक्षण देने में इससे काफी मदद मिलेगी। इस जमीन का स्वामित्व पशुपालन विभाग के पास रहेगा जबकि पशु चिकित्सालय और आश्रय स्थल के निर्माण और संचालन का काम संस्था करेगी।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने सोशल मीडिया पर चल रहे दुष्प्रचार का किया खंडन, कहा- नियमों का पूरी तरह किया गया पालन

लेखा परीक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों के उल्लंघन के दावों को आयोग ने बताया भ्रामक और तथ्यहीन अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने सोशल मीडिया पर चल रहे दुष्प्रचार का किया खंडन, कहा- नियमों का पूरी तरह किया गया पालन  लेखा परीक्षक एवं सहायक लेखाकार के 1829 पदों के लिए जारी हुआ है विज्ञापन, 609 पदों के आरक्षण निर्धारण की विभाग ने स्वयं की थी पुष्टि आयोग ने कहा, तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का किया जा रहा प्रयास आयोग की अभ्यर्थियों से अपील, भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें लखनऊ  उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने लेखा परीक्षक एवं सहायक लेखाकार के 1829 पदों पर भर्ती को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में प्रसारित किए जा रहे दावों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी सभी प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन किया गया है तथा पदों का विज्ञापन संबंधित विभागों से प्राप्त अधियाचन और उनकी पुष्टि के आधार पर जारी किया गया है। आयोग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार विभिन्न विभागों के नियंत्रणाधीन लेखा परीक्षक एवं सहायक लेखाकार के 1829 रिक्त पदों पर चयन के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया है। विज्ञापन जारी होने के बाद कुछ व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया पर आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय के सहायक लेखाकार के आरक्षित पदों को लेकर आरक्षण नीति के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसे आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय से सहायक लेखाकार के 609 पदों का अधियाचन प्राप्त हुआ था। इन पदों के संबंध में आरक्षण की गणना और श्रेणीवार वर्गीकरण शासन के प्रचलित नियमों एवं आरक्षण व्यवस्था के अनुरूप किए जाने की पुष्टि स्वयं निदेशालय द्वारा की गई थी। विभाग ने यह भी अवगत कराया था कि पदों की श्रेणीवार गणना संवर्ग में सृजित कुल पदों के आधार पर की गई है, जो पूरी तरह नियमसम्मत है। आयोग ने बताया कि कुल 22 अधियाचनों के आधार पर 1829 पदों का विज्ञापन जारी किया गया है, जिसमें आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय के 609 पद भी शामिल हैं। आयोग को प्राप्त प्रत्येक अधियाचन में आरक्षण संबंधी गणना की पुष्टि संबंधित विभागों और निदेशालयों से प्राप्त होने के बाद ही विज्ञापन प्रकाशित किया जाता है। आयोग ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमबद्ध है तथा आरक्षण नीति के उल्लंघन संबंधी दावे निराधार हैं। आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

यूपी बोर्ड छात्रों के लिए सुनहरा मौका, इम्प्रूवमेंट और कम्पार्टमेंट परीक्षा के आवेदन 27 जून तक

यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों को एक और अवसर, इम्प्रूवमेंट और कम्पार्टमेंट परीक्षा के लिए 27 जून तक आवेदन -योगी सरकार ने दिया असफलता को सफलता में बदलने का मौका, हजारों विद्यार्थियों को मिलेगा दूसरा अवसर – हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षार्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू – 6 जून से 27 जून की मध्यरात्रि तक किए जा सकेंगे आवेदन प्रयागराज/लखनऊ शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को अधिक अवसर उपलब्ध कराने और किसी एक परीक्षा परिणाम को उनके भविष्य की बाधा न बनने देने की दिशा में योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट/कम्पार्टमेंट तथा इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ करने की घोषणा की है। पात्र परीक्षार्थी 6 जून से 27 जून की मध्यरात्रि तक परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकेंगे। पारदर्शी, तकनीक आधारित और विद्यार्थी हितैषी व्यवस्था के माध्यम से योगी सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिससे प्रत्येक छात्र को अपनी क्षमता सिद्ध करने का अवसर मिल सके और उसका शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित रह सके। यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट परीक्षा के अंतर्गत एक विषय में अनुत्तीर्ण विद्यार्थी परीक्षा में सम्मिलित हो सकेंगे, जबकि कम्पार्टमेंट परीक्षा के अंतर्गत दो विषयों में अनुत्तीर्ण परीक्षार्थी किसी एक विषय की परीक्षा देने के पात्र होंगे। इसके लिए परीक्षा शुल्क 256.50 रुपये निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षा में मानविकी, विज्ञान एवं वाणिज्य वर्ग के ऐसे विद्यार्थी, जो किसी एक विषय के किसी एक प्रश्नपत्र में अनुत्तीर्ण हैं, आवेदन कर सकेंगे। व्यावसायिक वर्ग के ट्रेड विषयों के ऐसे परीक्षार्थी भी पात्र होंगे, जो किसी एक प्रश्नपत्र में अनुत्तीर्ण रहे हैं। इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षा का शुल्क 306 रुपये निर्धारित किया गया है। योगी सरकार की मंशा है कि किसी भी विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रगति केवल एक परीक्षा परिणाम के कारण बाधित न हो। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को अपनी त्रुटियों को सुधारने और बेहतर प्रदर्शन का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। यह व्यवस्था उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, जो न्यूनतम अंतर से सफलता से वंचित रह गए हैं। परीक्षार्थियों को निर्धारित शुल्क कोषागार चालान के माध्यम से जमा करना होगा। ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने के बाद उसकी प्रति तथा शुल्क जमा करने के चालान की मूल प्रति डाउनलोड कर अंतिम तिथि के बाद तीन दिनों के भीतर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को पंजीकृत डाक से भेजना अनिवार्य होगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जिन विषयों में लिखित, प्रायोगिक अथवा प्रोजेक्ट कार्य शामिल हैं, उनके लिए निर्धारित नियमों के अनुसार परीक्षा आयोजित की जाएगी। जो परीक्षार्थी किसी विषय के केवल एक भाग में अनुत्तीर्ण हैं, उन्हें उसी भाग की परीक्षा देने की सुविधा होगी। लिखित, प्रायोगिक एवं प्रोजेक्ट परीक्षाओं की तिथियां अलग से घोषित की जाएंगी।

काशी के आसमान में वायु सेना का पराक्रम, गंगा तट पर दिखेगा भव्य त्रिशूल फॉर्मेशन

वाराणसी  भारतीय वायु सेना (IAF) इस साल अपना 94वां स्थापना दिवस बड़े ही भव्य अंदाज में मनाने जा रही है. इस बार की सबसे खास बात यह है कि एयर फोर्स डे का फ्लाईपास्ट पहली बार पवित्र नदी गंगा के ऊपर वाराणसी में आयोजित किया जाएगा. काशी विश्वनाथ मंदिर के आसमान में वायु सेना के जेट विमानों की उड़ान देश के लिए एक यादगार क्षण होने वाला है।  वाराणसी भारत की आध्यात्मिक राजधानी मानी जाती है. गंगा नदी और काशी विश्वनाथ मंदिर के ऊपर वायु सेना का फ्लाईपास्ट पहली बार होने जा रहा है. अक्टूबर में होने वाले इस कार्यक्रम की तारीख जल्द ही अंतिम रूप से तय की जाएगी. यह आयोजन IAF की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में होगा।  इससे पहले एयर फोर्स डे के मुख्य समारोह में औपचारिक परेड गाजियाबाद के हिंडन एयर फोर्स स्टेशन में 8 अक्टूबर को होगी. वहीं दूसरा चरण वाराणसी में फ्लाईपास्ट के रूप में मनाया जाएगा. इस बार वायु सेना का प्रयास है कि उत्सव को देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर से बाहर ले जाकर आम जनता तक पहुंचाया जाए।  फ्लाईपास्ट में क्या-क्या शामिल होगा? वाराणसी के आसमान में वायु सेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों के विभिन्न फॉर्मेशन्स दिखाई देंगे. फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स के साथ-साथ भारी परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर भी शामिल होंगे।  एयरबोर्न पैराट्रूपर्स द्वारा प्रेसिजन पैराशूट जंप का प्रदर्शन भी हो सकता है. वायु सेना अपनी पूरी परिचालन क्षमता को प्रदर्शित करेगी. इस प्रदर्शनी का मकसद सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि आम नागरिकों को वायु सेना से जोड़ना और उनमें देशभक्ति की भावना जगाना भी है।  पिछले वर्षों की परंपरा और बदलाव पिछले कुछ वर्षों में भारतीय वायु सेना ने अपनी वर्षगांठ के फ्लाईपास्ट को देश के विभिन्न शहरों में आयोजित किया है. चंडीगढ़, प्रयागराज, भोपाल और गुवाहाटी जैसे शहरों में यह कार्यक्रम हो चुका है. इसका उद्देश्य है कि देश के कोने-कोने के लोग वायु सेना की ताकत और प्रोफेशनरिज्म को करीब से देख सकें।  वाराणसी का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शहर सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद खास है. गंगा के ऊपर विमानों का उड़ना आध्यात्मिकता और आधुनिकता के सुंदर संगम का प्रतीक बन जाएगा।  एयर फोर्स डे का महत्व भारतीय वायु सेना का स्थापना दिवस हर साल 8 अक्टूबर को मनाया जाता है. यह दिन 1932 में IAF की स्थापना की याद दिलाता है. शुरू में रॉयल इंडियन एयर फोर्स के नाम से शुरू हुई यह सेना आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना है।  इस साल 94वें स्थापना दिवस पर आयोजित होने वाला फ्लाईपास्ट न सिर्फ वायु सेना की बढ़ती ताकत को दिखाएगा बल्कि हाल के वर्षों में की गई आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण की उपलब्धियों को भी उजागर करेगा।  वाराणसी में होने वाला यह फ्लाईपास्ट आम जनता के लिए एक दुर्लभ अवसर होगा. हजारों लोग गंगा घाटों और आसपास के इलाकों में जमा होकर आसमान में वायु सेना की शानदार उड़ान देख सकेंगे. वायु सेना का प्रयास है कि इस कार्यक्रम के जरिए युवाओं में रक्षा बलों के प्रति आकर्षण बढ़े और वे करियर के रूप में वायु सेना को चुनें।  अभी अंतिम मंजूरी, तारीख और पूरा कार्यक्रम जल्द ही घोषित किया जाएगा. लेकिन यह तय है कि इस साल का एयर फोर्स डे वाराणसी के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा।  गंगा के पावन किनारे पर पहली बार होने वाला IAF का फ्लाईपास्ट भारतीय वायु सेना की आधुनिक क्षमताओं और देश की सांस्कृतिक विरासत के बीच एक सुंदर सेतु बनेगा. यह कार्यक्रम न सिर्फ वायुयोद्धाओं की निष्ठा और कौशल को सलाम करेगा बल्कि पूरे देश को एकजुट भी करेगा। 

CM योगी की मुस्कान के पीछे छिपा बड़ा इशारा! ‘टोटी चोरी’ वाले बयान से किस पर साधा निशाना?

लखनऊ. पांच जून को सीएम योगी का जन्मदिन था और विश्व पर्यावरण दिवस भी। इस मौके पर लखनऊ में 'एक पेड़ मां के नाम' पौधरोपण महाभियान-2026 के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे सीएम योगी ने विश्व पर्यावरण दिवस को लेकर लोगों को संबोधित किया। सीएम योगी का भाषण जारी ही था कि बोलते-बोलते सीएम योगी कुछ ऐसा कह गए कि वह खुद ही मुस्कुराने लगे। सीएम योगी ने इशारों ही इशारों में विपक्ष पर निशाना भी साध गए। हर घर जल नल योजना का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा, हमने योजना को आगे बढ़ाया तो पता लगा कि कोई टोटी ही चोरी कर ले जा रहा है तो कोई दूसरे तरीके से नुकसान कर रहा है। कहीं नल खुला है तो खुला ही पड़ा है। इतना कहते ही मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुस्कुराहट नजर आ गई। दरअसल सीएम योगी का इशारा सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर था। हालांकि पूरे भाषण में सीएम योगी ने अखिलेश का नाम नहीं लिया। लेकिन अपने भाषण के दौरान टोटी चोरी का जिक्र करते हुए सीएम योगी खुद को मुस्कुराने से रोक नहीं पाए। नौ साल में यूपी में लगाए गए 242 करोड़ पौधे मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने कहा कि नौ वर्षों में प्रदेश के अंदर वन महोत्सव के अवसर पर पौधारोपण के क्रम में अब तक 242 करोड़ पौधरोपण के एक बड़े कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा चुका है। योगी ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने प्रकृति और मातृभूमि के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए 'एक पेड़ मां के नाम' कार्यक्रम की शुरुआत तीन वर्ष पहले की थी। उसी अभियान की कड़ी में आज फिर उप्र में यह आयोजन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा 'जननी और जन्मभूमि के प्रति कृतज्ञता हर नागरिक का दायित्व है। पर्यावरण की रक्षा मातृभूमि के प्रति हमारे सर्वोच्‍च दायित्वों में से एक है।' उन्‍होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा करने के लिए एक ओर वृहद पैमाने पर पौधरोपण करना और दूसरी ओर पर्यावरण संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए कई कदम उठाए गए हैं। एकल उपयोग प्लास्टिक पर रोक लगाने पर जोर देते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, एकल उपयोग प्लास्टिक को हतोत्साहित करने और उसके स्थान पर वैकल्पिक रूप में मिट्टी के बर्तन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। जल संरक्षण के लिए उठाए गए कई कदम सीएम योगी ने विस्तार से बताते हुए कहा कि इसके लिए माटी कला बोर्ड की स्थापना करना, अप्रैल से जून तक हर गांव के तालाब को प्रजापति और कुम्हार समाज के लोगों को निशुल्क मिट्टी उपलब्‍ध कराना, सोलर चाक देना जैसे काम प्रदेश में सफलतापूर्वक किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के लिए भी प्रदेश में अनेक कदम उठाए गए और अनेक मॉडल प्रस्तुत किए गए। उन्होंने कहा कि विकास प्राधिकरण ने निश्चित क्षेत्रफल से बड़े क्षेत्र में बनने वाले आवासीय भवनों व कमर्शियल परिसरों के लिए वर्ष जल संरक्षण को अनिवार्य किया है। मुख्यमंत्री ने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत सभी लोगों से पौधे लगाने और उनका संरक्षण किए जाने की अपील की। सीएम योगी ने एक पेड़ मां के नाम अभियान किया शुरू मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार को कुकरैल रेंज अवध वन प्रभाग में 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने यहां कपूर का पौधा लगाया जबकि वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण सक्सेना ने आंवला, वन राज्यमंत्री केपी मलिक ने नीम तथा विधायक ओपी श्रीवास्तव ने आंवला का पौधा रोपित किया। मुख्यमंत्री ने यहां महर्षि चरक औषधि वन की भी स्थापना की। योगी ने जल संरक्षण पर भी जोर देते हुए कहा कि बरसात के पानी की एक-एक बूंद को सुरक्षित करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि पेड़ को क्षति न पहुंचाएं और हर महत्वपूर्ण आयोजन पर एक पेड़ अवश्य लगाएं।

अवैध कब्जों पर प्रशासन की सख्ती, मंदिर परिसर के निकट मजार पर चला बुलडोजर

 संभल  उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनी 'खेड़े वाले बाबा चमन शाह बाबा दरगाह शरीफ मजार' को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया है. कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यह एक्शन लिया गया।  संभल के बबराला थाना इलाके के बाघऊ गांव में जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई की मौजूदगी में राजस्व विभाग की टीम ने गाटा संख्या 592 की सरकारी ऊसर भूमि पर अवैध रूप से बनी मजार को जमींदोज कर दिया. लेखपाल की जांच रिपोर्ट में 24 वर्ग मीटर क्षेत्र पर अवैध कब्जे की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद ग्राम सभा की शिकायत पर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत यह बड़ी कार्रवाई की गई. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी मनोज रावत और चार थानों की पुलिस फोर्स मौके पर मुस्तैद रही।  पैमाइश में हुई थी अवैध कब्जे की पुष्टि बीते कुछ महीने पहले राजस्व विभाग की टीम, नायब तहसीलदार और एसडीएम विकास चंद्र ने गांव पहुंचकर जमीन की पैमाइश की थी. इसमें मजार बनाकर सरकारी जमीन घेरने की बात साबित हुई, जिसके बाद मजार की देखभाल करने वाले अजीज को नोटिस दिया गया था. तहसीलदार कोर्ट ने इस अवैध निर्माण को हटाने का आदेश जारी किया था।  डीएम कोर्ट से अपील खारिज होते ही एक्शन तहसीलदार कोर्ट के फैसले के खिलाफ मजार कमेटी ने जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसे कोर्ट ने 3 जून को खारिज कर दिया. सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण के लिए विशेष टीम गठित की. सुरक्षा के लिहाज से बबराला थाना प्रभारी निशांत राठी सहित भारी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहे, जिससे कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। 

2024 की हार से सबक, 2027 की जीत का ब्लूप्रिंट: यूपी में BJP का मेगा माइक्रो-मैनेजमेंट प्लान

पश्चिम बंगाल और असम में हुए हालिया विधानसभा चुनाव नतीजों से गदगद भाजपा अब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में न सिर्फ जीत की हैट्रिक लगाने का ख्वाब देख रही है बल्कि बंगाल जैसी प्रचंड जीत की कोशिशों में जुट गई है। हालांकि, यूपी में विधानसभा चुनाव होने में अभी करीब एक साल बाकी हैं, लेकिन पार्टी ने अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं। पश्चिम बंगाल और असम चुनावों में 'माइक्रो-मैनेजमेंट' मॉडल की सफलता से उत्साहित भाजपा अब इसे उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर लागू करने जा रही है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने राज्यभर में लगभग 1.76 लाख "बूथ पालक" नियुक्त करने और जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने का फैसला किया है। हाल ही में राज्य की राजधानी लखनऊ में भाजपा के 98 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने सभी जिला अध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य में 'बंगाल चुनाव मॉडल' को दोहराएं। यानी बंगाल की ही तरह बूथ लेवेल तक प्रबंधन करें। इसके तहत बूथ समितियों, पन्ना प्रमुखों और शक्ति केंद्रों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया गया है। जिलाध्यक्षों को क्या निर्देश? पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने सभी जिला प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे बूथ समितियों, पन्ना प्रमुखों, शक्ति केंद्रों और स्थानीय स्तर के राजनीतिक अभियानों पर नए सिरे से ध्यान देते हुए उत्तर प्रदेश में बंगाल चुनाव मॉडल को अपनाएं। बीजेपी का लक्ष्य आगामी महीनों में राज्य के सभी 1,62,459 विधानसभा बूथों का आकलन करना है, जिसमें 1,918 मंडलों में फैले 27,633 शक्ति केंद्र भी शामिल हैं। इस कवायद में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद बनाए गए लगभग 14,000 नए बूथ भी शामिल होंगे। पार्टी नेताओं ने जिला इकाइयों को निर्देश दिया कि वे तुरंत बूथ समितियां बनाएं और इन नए जुड़े मतदान केंद्रों के लिए बूथ अध्यक्ष और बूथ देखभाल करने वाले (बूथ पालक) नियुक्त करें। बीजेपी का क्या मेगा प्लान? पार्टी ने प्रचंड जीत की रणनीति बनाते हुए चार प्रमुख बातों पर ध्यान दिया है। इसके तहत पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति करने, शक्ति केंद्रों की स्थापना करने, बूथों का वर्गीकरण करने और हाइपर-लोकल लेवेल पर चुनाव प्रचार करने का फैसला किया गया है। बता दें कि पन्ना प्रमुख प्रणाली में हरेक पन्ना प्रमुख को मतदाता सूची के एक पन्ने पर दर्ज 30 से 35 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिनसे वे नियमित संपर्क बनाए रखेंगे। इसके अतिरिक्त शक्ति केंद्र प्रणाली में 5 से 7 बूथों के समूहों को मिलाकर एक शक्ति केंद्र बनाने और उसके लिए एक समन्वयक तैनात किए जाने की योजना है, जो अनिश्चित मतदाताओं को प्रभावित करने का काम करेंगे। हाइपर-लोकल लेवेल पर चुनाव प्रचार इन दोनों उपायों के अलावा सूक्ष्म स्तर तक मतदाताओं को प3भावित करने के लिए भाजपा ने बूथों का वर्गीकरण करने का भी फैसला किया है। इसके तहत सभी बूथों को 'मजबूत', 'प्रतिस्पर्धी' और 'कमजोर' श्रेणियों में बांटा जाएगा ताकि कमजोर क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन और निगरानी तैनात की जा सके। इसके अतिरिक्त भाजपा हाइपर-लोकल लेवेल पर चुनाव प्रचार करने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके तहत स्थानीय मुद्दों के आधार पर बूथ स्तर पर विशेष प्रचार अभियान चलाया जाएगा। लखनऊ से दिल्ली तक बैठकों के दौर में सांगठनिक कामकाज को धार देने के लिए 'जोन वाइज' प्रभारियों की नियुक्ति पर भी विचार चल रहा है। पुरानी गलतियों से सबक सूत्रों ने बताया कि बैठक में 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने पर भी ध्यान दिया गया। इस कड़ी में भाजपा उन 61 विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है, जिन्हें पार्टी ने 2017 में जीता था लेकिन 2022 के चुनावों में हार गई थी। जिला अध्यक्षों को इन क्षेत्रों में बूथवार समीक्षा करने और हार के कारणों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाने को कहा गया है। उन क्षेत्रों में नए सामाजिक समीकरण बनाने के बी निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का मुकाबला करने के लिए भी भाजपा विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिशों में जुट गई है। SIR के मद्देनजर विशेष निर्देश इन सबसे अलग विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को ध्यान में रखते हुए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को खास निर्देश दिया है कि वे उन पात्र मतदाताओं की पहचान करें, जिनके नाम मतदाता सूची से गायब हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने निर्देश दिया है कि कार्यकर्ता फॉर्म-6 के माध्यम से उन मतदाताओं के नाम जुड़वाने में उनकी मदद करें। साफ है कि 2027 के महा रण में भाजपा उत्तर प्रदेश की सत्ता में बने रहने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही।

विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को

लखनऊ विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग की तरफ से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मुख्य महोत्सव होगा, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे। क्लीन यूपी, ग्रीन यूपी के तहत यहां ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ विषय पर राज्य स्तरीय संगोष्ठी भी होगी। इसमें वैज्ञानिक, पर्यावरण विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, उद्योग प्रतिनिधि, युवा संगठन, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं व समाज के प्रतिनिधियों की भी सहभागिता रहेगी। यह जानकारी वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने दी।  उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें उत्तर प्रदेश की अग्रणी पर्यावरणीय पहल, जलवायु परिवर्तन से संबंधित तकनीकी नवाचार, सतत विकास की सफल परियोजनाओं व संरक्षण के उत्कृष्ट उदाहरणों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। कई तकनीक सत्रों में भी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।  कार्यक्रम में सीएम योगी विश्व बैंक के सहयोग से 2741 करोड़ की लागत वाली भारत की पहली एयरशेड आधारित उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट परियोजना की लॉन्चिंग करेंगे। पौधरोपण महाभियान-2026 के अंतर्गत 35 करोड़ पौधरोपण महाभियान के लोगो का अनावरण, उत्तर प्रदेश के रामसर स्थलों के डॉकेट का विमोचन भी होगा।  सीएम योगी उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंध परियोजना की वेबसाइट का अनावरण, वीडियो लॉन्चिंग, लोगो डिजाइन प्रतियोगिता व उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कृत करेंगे। साथ ही वेटलैंड वाले गांवों के प्रधानों को प्रमाण पत्र भी वितरित किया जाएगा।

7 जून से 30 जून तक प्रेरणा पोर्टल पर होंगे ऑनलाइन आवेदन, ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं होंगे

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 के लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। प्रदेश के पात्र शिक्षक एवं शिक्षिकाएं 7 जून से 30 जून 2026 तक प्रेरणा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।  प्रेरणा पोर्टल से पूरी होगी ऑनलाइन प्रक्रिया शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। पात्र शिक्षक प्रेरणा पोर्टल पर निर्धारित अवधि के भीतर अपना आवेदन कर सकेंगे। किसी भी प्रकार का ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।  ऐसे शिक्षक होंगे पात्र राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 के लिए केवल नियमित रूप से कार्यरत ऐसे शिक्षक एवं शिक्षिकाएं पात्र होंगे, जिन्होंने न्यूनतम 15 वर्ष की नियमित सेवा पूर्ण कर ली हो तथा जिनकी सेवानिवृत्ति में कम से कम पांच वर्ष का समय शेष हो। संविदा शिक्षक, शिक्षामित्र, सेवानिवृत्त शिक्षक तथा पूर्व में राज्य अथवा राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत शिक्षक इस पुरस्कार के लिए पात्र नहीं होंगे। गुणवत्ता आधारित होगी चयन प्रक्रिया योगी सरकार ने चयन प्रक्रिया को पूरी तरह गुणवत्ता आधारित और पारदर्शी बनाया है। शिक्षकों का मूल्यांकन 100 अंकों की निर्धारित प्रणाली के आधार पर किया जाएगा। इसमें शैक्षणिक उपलब्धियां, विद्यालय विकास में योगदान, छात्र नामांकन वृद्धि, नवाचार आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधनों का उपयोग, छात्र अधिगम स्तर में सुधार, प्रस्तुतीकरण और साक्षात्कार जैसे महत्वपूर्ण मानकों को शामिल किया गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वास्तव में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मान प्राप्त हो। दो चरणों में होगी चयन प्रक्रिया 01 जुलाई से 20 जुलाई तक जनपद चयन समितियां प्राप्त आवेदनों का परीक्षण, सत्यापन और मूल्यांकन करेंगी तथा प्रत्येक जनपद से तीन श्रेष्ठ शिक्षकों का चयन करेंगी। इसके बाद राज्य चयन समिति 01 अगस्त से 14 अगस्त के बीच पुनर्मूल्यांकन, प्रस्तुतीकरण और साक्षात्कार के आधार पर प्रत्येक जनपद से एक उत्कृष्ट शिक्षक का अंतिम चयन करेगी।

विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर कुकरैल में होगा वृहद पौधरोपण, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे शुभारंभ

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुकरैल वन क्षेत्र से इसका शुभारंभ करेंगे। उनके नेतृत्व में पूरे राज्य में एक दिन में 5 करोड़ पौधरोपण किए जाएंगे। इसके लिए सभी विभागों व मंडलों के लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं। पर्यावरण दिवस पर वन विभाग की तरफ से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मुख्य आयोजन होगा, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।  कुकरैल वन क्षेत्र में होगा वृहद पौधरोपण  ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत कुकरैल वन क्षेत्र में वृहद पौधरोपण होगा। सबसे पहले यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पौधरोपण करेंगे। यहां 200 से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। इस कार्यक्रम में वन मंत्री अरुण सक्सेना, प्रभारी मंत्री, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।  जनसहभागिता से प्रदेश मनाएगा उत्सव इसके पश्चात प्रदेश के 17 नगर निगमों, 825 विकास खंडों, 762 नगर निकायों समेत सभी ग्राम पंचायतों में यह अभियान पूरे दिन चलेगा। वन विभाग के संयोजकत्व में ग्राम्य विकास, पंचायती राज, कृषि, उद्यान, नगर विकास आदि विभागों के सहयोग से अमृत सरोवर, तालाबों, सड़कों, एक्सप्रेसवे, नदियों, नहरों आदि के किनारे पौधे लगाए जाएंगे। इसमें विद्यालयों, महाविद्यालयों, स्वयं सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों आदि की भी सहभागिता होगी।  लखनऊ मंडल में 62 लाख, बरेली में 32.21 लाख व प्रयागराज में लगेंगे 32.17 लाख पौधे मंडल – लक्ष्य मेरठ- 19,06,000 सहारनपुर- 14,86,000 आगरा- 24,67,000 अलीगढ़- 18,97,000 मुरादाबाद- 27,60,000 बरेली- 32,21,000 प्रयागराज- 32,17,000 वाराणसी- 24,83,000 मीरजापुर- 28,63,000 गोरखपुर- 24,75,000 बस्ती- 16,01,000 आजमगढ़- 18,93,000 लखनऊ- 62,77,000 अयोध्या- 30,41,000 देवीपाटन- 29,34,000 कानपुर- 31,83,000 झांसी- 31,67,000 चित्रकूट- 31,29,000 ग्राम्य विकास विभाग 3 करोड़ तथा कृषि विभाग लगाएगा 75 लाख पौधे  विभाग – लक्ष्य ग्राम्य विकास विभाग- 3 करोड़  कृषि विभाग- 75 लाख  वन विभाग- 50 लाख  उद्यान विभाग- 50 लाख  पंचायती राज विभाग- 20 लाख  नगर विकास- 5 लाख कुल- 5 करोड़