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सलीम की मौत के बाद कासगंज चंदन गुप्ता हत्याकांड में हुई बड़ी घटना

लखनऊ कासगंज के चर्चित चंदन गुप्ता हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषी सलीम की लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई। लखनऊ जिला कारागार के जेलर ने सलीम की मौत की पुष्टि की है। सलीम को इलाज के लिए लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में भर्ती कराया गया था, जहां पुलिस सुरक्षा में उसका इलाज चल रहा था। बुधवार को उसकी हालत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। सलीम, 2018 में कासगंज में तिरंगा यात्रा के दौरान हुई हिंसा में मारे गए चंदन गुप्ता की हत्या का शामिल था। एनआईए स्पेशल कोर्ट, लखनऊ ने सलीम को अन्य 27 दोषियों के साथ इस मामले में दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट का फैसला आने के बाद सलीम ने अन्य दोषियों के साथ आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद से वह जेल में बंद था। गौरतलब है कि कासगंज में 26 जनवरी 2018 को तिरंगा यात्रा निकाली गई थी। चंदन गुप्ता अपने भाई विवेक गुप्ता और अन्य साथियों के साथ तिरंगा यात्रा में शामिल था। जब तिरंगा यात्रा कासगंज के तहसील रोड स्थित जीजीआईसी गेट के पास पहुंची, उसी दौरान विवाद हुआ। आरोप थे कि सलीम, वसीम और नसीम समेत कई लोगों ने रास्ता रोक लिया। जब चंदन ने आपत्ति जताई तो इससे हालात बिगड़ गए और पथराव होने लगा। तिरंगा यात्रा के दौरान गोलीबारी की भी घटना हुई। मुख्य आरोपियों में से एक, सलीम ने चंदन गुप्ता पर गोली चलाई, जिससे उसकी मौत हो गई। हिंसा के कारण शहर में अशांति फैल गई, जिसके कारण एक सप्ताह तक कर्फ्यू लगा रहा और इंटरनेट बंद रहा। मामले में करीब 6 साल की कानूनी लड़ाई के बाद चंदन के परिवार को जनवरी 2025 में न्याय मिला। एनआईए स्पेशल कोर्ट ने चंदन गुप्ता हत्याकांड में 28 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दो लोगों को इस मामले से बरी भी कर दिया, क्योंकि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे।  

मुख्यमंत्री जी ने हादसे में कालकवलित हुए उत्तरप्रदेश के निवासी समस्त मृतक परिजनों को आर्थिक सहायता करने के दिये निर्देश

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जम्मू कश्मीर के वैष्णो देवी यात्रा में हुए प्राकृतिक आपदा की चपेट में आये मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री जी ने कालकवलित हुए उत्तरप्रदेश के निवासी समस्त मृतक परिजनों को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता के दिये निर्देश। मुख्यमंत्री जी ने अधिकारियों को मृतकों के शव उनके घर पहुंचाए जाने की व्यवस्था करने के भी दिये निर्देश।

गंगा के विस्तृत प्रवाह वाले प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश नमामि गंगे कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र रहा

नई दिल्ली/लखनऊ,  नदियाँ और जल संसाधन सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, और इनका पुनर्जीवन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। नदी पुनर्जीवन और जल संरक्षण में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की अग्रणी पहलों ने इसे वैश्विक जल संवाद में एक प्रमुख आवाज बना दिया है। इस वर्ष स्टॉकहोम वर्ल्ड वॉटर वीक में इसकी भागीदारी भारत की बढ़ती भूमिका को उजागर करती है, जो जल संबंधी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अहम योगदान दे रही है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल वॉटर इंस्टीट्यूट (SIWI) द्वारा वर्ष 1991 से आयोजित यह प्रतिष्ठित आयोजन अब वैश्विक नीति निर्धारकों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए सबसे प्रभावशाली मंच बन चुका है। गंगा के विस्तृत प्रवाह वाले प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश नमामि गंगे कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र रहा है। वाराणसी में रिवरफ्रंट विकास, कानपुर में सीवेज शोधन संयंत्रों की स्थापना तथा छोटे एवं मझौले नगरों में सामुदायिक भागीदारी आधारित पहलें इस अभियान को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रही हैं। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन का केंद्र बिंदु बना "नदी शहरों की पुनर्कल्पना: जलवायु-संवेदी और बेसिन-केंद्रित शहरी विकास", जिसमें राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG), राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (NIUA) और जर्मन विकास सहयोग (GIZ) ने मिलकर नेतृत्व किया। इस सत्र में विशेषज्ञों ने जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण की चुनौतियों के बीच, नदी-केंद्रित विकास ही शहरों को टिकाऊ और सुरक्षित बना सकता है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक श्री राजीव कुमार मित्तल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नमामि गंगे मिशन ने भारत में नदियों के पुनरुद्धार के लिए एक ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव की नींव रखी है। उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत अब तक 40 हजार करोड़ रुपये का भारी निवेश किया जा चुका है, जो गंगा और उसकी सहायक नदियों को उनके प्राचीन रूप में पुनः स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे मिशन एक जीवित उदाहरण है, जो यह साबित करता है कि जब आधुनिक तकनीक और नवाचार का संगम होता है, तो नदियों को पुनः जीवनदायिनी बनाने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि मिशन के अंतर्गत की गई पहलें, जैसे हाइब्रिड एनीटी मॉडल आधारित एसटीपी, सोलर पावर्ड ट्रीटमेंट प्लांट और मृदा जैव प्रौद्योगिकी, वैश्विक मानकों को स्थापित करने में योगदान दे रही हैं। श्री मित्तल ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस कार्यक्रम को एक विशाल जन आंदोलन में बदला गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। वैश्विक सहयोगों की अहमियत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व बैंक, जीआईजेड, सी-गंगा, नीदरलैंड्स और डेनमार्क का सहयोग नदी विज्ञान, जल सुरक्षा और प्रबंधन में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण की समस्याओं का हल केवल नदी-बेसिनों के संरक्षण और प्रबंधन में ही छुपा है। इस संदर्भ में भारत की 'नमामि गंगे' पहल को आदर्श उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे अन्य देशों के लिए अनुकरणीय माना गया। प्रदूषण नियंत्रण, जैविक खेती, आर्द्रभूमि संरक्षण और जलवायु-स्मार्ट शहरी विकास जैसे कदमों ने इस मिशन को वैश्विक स्तर पर प्रेरणा का स्रोत बना दिया है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है जब शहरों को केवल उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि नदी-बेसिनों के सक्रिय संरक्षक के रूप में कार्य करना होगा। जलवायु परिवर्तन के दौर में नदियों का संरक्षण अनिवार्य बन चुका है और इसके लिए नदी-केंद्रित शहरी विकास को अपनाना होगा। सत्र के समापन में यह महत्वपूर्ण संदेश सामने आया – जब शहर मिलकर काम करेंगे और सीमा पार सोचेंगे, तो नदियों को बचाया जा सकता है और उन्हें समृद्ध भी किया जा सकता है। यही स्थिरता और समृद्धि का वास्तविक आधार होगा, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन सुनिश्चित करेगा।

बर्थडे पर अखिलेश का गिफ्ट, 100 रुपए लेते ही लाल हो गईं इकरा हसन के गाल

लखनऊ शामली से सपा सांसद इकरा हसन कल यानि 26 अगस्‍त को जन्‍मदिन था, जिसको लखनऊ के एक 5 स्टार होटल में बनाया गया। इस दौरान अखिलेश यादव भी वहां पहुंचे और उनको ऐसा बर्थडे गिफ्ट दिए कि इकरा हसन हैरान हो गईं। दरअसल, अखिलेश यादव ने 100 रूपये का गिफ्ट दिया था, जिसे लेते हुए वह काफी शर्मा रही थी। बता दें कि उनके जन्मदिन के मौके पर डिंपल यादव और जया बच्चन ने मिलकर केक कटवाया था। जन्मदिन के मौके पर अखिलेश यादव के परिवार के साथ मछली शहर से सासंद और रिंकू सिंह की होने वाली पत्नी प्रिया सरोज भी वहां पर मौजूद थीं। जैसे ही केक सामने आया, सभी सांसद एक स्वर में इकरा हसन को हैप्पी बर्थडे विश करने लगे। वहां मौजूद सांसदों ने तालियां बजाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया। इसी बीच, अखिलेश यादव ने 100 रुपए का नोट निकाला और इकरा को जन्मदिन पर गिफ्ट किया। यह देखकर वहां मौजूद सभी लोग हंसने लगे।   इकरा ने शेयर कीं तस्‍वीरें आपको बता दें कि जन्‍मदिन की तस्‍वीरें अपने X अकाउंट पर शेयर करते हुए इकरा हसन ने सभी का आभार जताया है। उन्‍होंने लिखा- 'मेरे जन्मदिवस के अवसर पर लखनऊ में माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय अखिलेश यादव एवं पार्टी के सभी सम्मानित सांसदों एवं नेताओं द्वारा जो स्नेह, आशीर्वाद और प्यार मुझे मिला, उसके लिए मैं हृदय से आभार व्यक्त करती हूं। आपका यह विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है, जो मुझे समाज और जनता की सेवा के लिए और अधिक समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। आप सभी का स्नेह और आशीर्वाद यूं ही बना रहे, मैं खुदा से यही कामना करती हूं।'

गोरखपुर में अडानी समूह और कोका कोला के प्रमुख बॉटलर ने भी उद्योग लगाने को ली जमीन

योगी सरकार में देश के दिग्गज निवेशकों को भाया गोरखपुर गोरखपुर में अडानी समूह और कोका कोला के प्रमुख बॉटलर ने भी उद्योग लगाने को ली जमीन पेप्सिको का बॉटलिंग प्लांट पहले से उत्पादनरत, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड और श्री सीमेंट्स ने भी मांगी औद्योगिक जमीन वर्तमान वित्तीय वर्ष में 54 नई यूनिट्स के लिए गीडा ने किया 182 एकड़ भूमि का रिकार्ड आवंटन गोरखपुर  दशकों तक जिस गोरखपुर में स्थानीय पूंजीपति भी औद्योगिक निवेश करने से घबराते थे, योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार की प्रोत्साहनपरक नीतियों, कारोबारी सुगमता और शानदार कनेक्टिविटी से अब वहां नामी कंपनियों के आने की होड़ सी दिखती है। निवेशकों की डिमांड के अनुरूप गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) ने न केवल लैंड बैंक समृद्ध किया है बल्कि साल दर साल औद्योगिक भूखंडों का आवंटन भी तेज हुआ है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में तो गीडा ने अब तक 54 नई यूनिट्स के लिए रिकार्ड 182 एकड़ भूमि का आवंटन किया है। इससे 5800 करोड़ रुपये के नए पूंजी निवेश के साथ 8500 लोगों के लिए रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।  लंबे दौर तक पहचान को जूझता रहा गोरखपुर अब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, रोड, रेल और एयर कनेक्टिविटी के मामले में मजबूत होकर औद्योगिक नक्शे पर भी चमक गया है। जिस जिले से उद्यमियों ने मुंह फेर लिया था, वहां 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से औद्योगिक प्रगति का ऐसा माहौल बनना शुरू हुआ कि देश की बड़ी-बड़ी कंपनियां, यहां तक कि मल्टीनेशनल भी इंडस्ट्री लगा रही हैं।  औद्योगिक प्रगति के नए कालखंड में सिर्फ गत पांच साल की बात करें तो इस दौरान गीडा को 9445 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले और इसके जरिये 22922 रोजगार सृजन संभव हुआ। इसमें मल्टीनेशनल ब्रांड पेप्सिको, केयान डिस्टिलरी, ज्ञान डेयरी, टेक्नोप्लास्ट और केंद्रीय भंडारण निगम, कपिला कृषि उद्योग, एपीएल अपोलो ट्यूब्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं।  गोरखपुर में अडानी समूह ने अंबुजा ब्रांड सीमेंट फैक्ट्री की नई यूनिट और कोका कोला के प्रमुख बॉटलर अमृत बॉटलर्स ने भी यूनिट लगाने को जमीन ले ली है। यही नहीं, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड और श्री सीमेंट्स ने भी निवेश की उत्सुकता दिखाते हुए गीडा से औद्योगिक जमीन मांगी है। श्री सीमेंट्स की टीम पहले ही जमीन देखने के लिए दौरा कर चुकी है जबकि रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के प्रतिनिधि मंगलवार को विजिट पर आए थे। अपने पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्र के साथ गीडा ने गोरखपुर के दक्षिणांचल में धुरियापार इंडस्ट्रियल टाउनशिप को भी औद्योगिक हब के रूप में विकसित करना शुरू कर दिया है। गत दिनों यहां दो बड़े औद्योगिक निवेश के लिए भूमि का आवंटन किया जा चुका है। गीडा की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनुज मलिक का कहना है कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में गोरखपुर में निवेश और औद्योगिक विकास का शानदार इको सिस्टम तैयार हुआ है। गीडा द्वारा निवेशकों की मांग और पसंद के अनुरूप जमीन उपलब्ध कराई जा रही है। इसका नतीजा है कि यहां औद्योगिक निवेश लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं को आवंटित जमीन से प्रस्तावित निवेश श्रेयश डिस्टिलरीज               2667 करोड़ रु. अंबुजा सीमेंट (अडानी ग्रुप)    1400 करोड़ रु. अमृत बॉटलर्स (कोका कोला)  800 करोड़ रु. केयान डिस्टिलरीज               600 करोड़ रु. विजन परेन्टल (फार्मास्युटिकल)100 करोड़ रु.   आगामी प्रस्तावित निवेश प्रस्ताव रिलायंस सीपीएल      1000 करोड़ रु. श्री सीमेंट्स                500 करोड़ रु. लाइफकेयर्स हॉस्पिटल   500 करोड़ रु. ईएसआईसी                150 करोड़ रु. डीपीएस                       50 करोड़ रु.

योगी सरकार का फैसला, यूपी पुलिस के चार आईपीएस अफसर बदले गए

लखनऊ  यूपी पुलिस में बुधवार को फिर फेरबदल किया गया। योगी सरकार ने चार आईपीएस अफसरों का तबादला कर दिया। 1996 बैच के आईपीएस अफसर विजय सिंह मीना को अपर पुलिस निदेशक विशेष जांच लखनऊ से अपर निदेशक पीटीसी सीतापुर बनाया गया है। वहीं आईपीएस आरआर 2006 बैच के आकाश कुलहरि पुलिस महानिरीक्षक लोक शिकायत लखनऊ को पुलिस महानिरीक्षक झांसी पर क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। आईपीएस आरआर 2009 बैच के केशव कुमार चौधरी पुलिस महानिरीक्षक झांसी परिक्षेत्र को अपर पुलिस आयुक्त गाजियाबाद बनाया गया है।आईपीएस आरआर 2010 बैच के कल्पना सक्सेना अपर पुलिस आयुक्त गाजियाबाद को पुलिस उपमहानिरीक्षक मेरठ बनाया गया है। वहीं इससे पहले मंगलवार को योगी सरकार ने पुलिस विभाग में पांच फेरबदल किया था। सरकार ने आईपीएस अफसरों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया था जबकि एडीजी प्रशासन प्रशांत कुमार द्वितीय को एडीजी पुलिस मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार दिया। फेरबदल में यूपी पॉवर कारपोरेशन के डीजी एमके बशाल को होमगार्ड विभाग का डीजी बनाया गया। इसी तरह सीतापुर पीटीसी के एडीजी जयनारायण सिंह को एडीजी पॉवर कारपोरेशन बनाया गया। आईजी पीएसी लखनऊ उपेन्द्र कुमार अग्रवाल को आईजी अभिसूचना मुख्यालय की जिम्मेदारी मिली। प्रतीक्षा में चल रहे डीआईजी सतेन्द्र कुमार को डीआईजी पीएसी अनुभाग आगरा बनाया गया। उपेन्द्र कुमार अग्रवाल का पिछले कुछ समय में यह चौथा तबादला किया गया। आपको बता दें कि इससे पहले जुलाई के आखिरी हफ्ते में योगी सरकार ने 10 जिलों के जिलाधिकारी समेत 23 आईएएस अफसरों का तबादला किया था। इस दौरान कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई थी।  

थानेदार का विवादित प्रहार बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर, भड़की प्रतिक्रिया

महाराजगंज  यूपी के महाराजगंज के कोठीभार थाने में बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर भड़के थानेदार धर्मेंद्र सिंह का गुस्सा इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। बजरंग दल कार्यकर्ताओं के साथ नोकझोंक के दौरान उनका एक कथित वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे कहते सुने जा रहे हैं-‘ऐसी नौकरी की ऐसी की तैसी करता हूं, इस्तीफा देकर चला जाऊंगा। दो मिनट लगेगा सबको सही करने में।’ हालांकि मीडिया वायरल हो रहे वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। मिली जानकारी के अनुसार यह विवाद कोठीभार थाना क्षेत्र के ग्राम बिसोखोर के एक मंदिर से जुड़ा है। जहां हर तीन साल पर धार्मिक कथा और पूजा-पाठ का आयोजन होता है। मंगलवार को आयोजन के लिए चंदा जुटाने के दौरान गांव में विवाद हुआ था। इसी को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ता थाने पहुंचे और ईसाई मिशनरियों पर हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। इस दौरान कार्यकर्ताओं और थानेदार धर्मेंद्र सिंह के बीच तीखी बहस हो गई। बताया जा रहा है कि विवाद बढ़ने पर थानेदार गुस्से में आ गए और उन्होंने नौकरी छोड़ने तक की बात कह डाली। वीडियो में पुलिसकर्मी कार्यकर्ताओं को थाने से बाहर निकालते हुए भी नजर आ रहे हैं। घटना के बाद वीडियो वायरल हो गया है और इलाके में खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, ग्रामीणों ने भी इस मामले में तहरीर देकर पूजा-पाठ में बाधा डालने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। थाने से बाहर निकलने के बाद बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने थानेदार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने क्षेत्र में धर्मांतरण होने का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग की। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि धर्मांतरण कराने वालों पर कार्रवाई की बजाए पुलिस उल्टे उन पर ही दबाव बना रही है। वहीं पुलिस कर्मियों का कहना है कि थाने में कार्यकर्ताओं ने जिस तरह के व्यवहार का प्रदर्शन किया वो कहीं से भी उचित नहीं था। बताया जा रहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने धर्मांतरण के कुछ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है।  

दुर्घटना में व्यापारी परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, 2 की मौत, 4 घायल

बागपत वैष्णो देवी मार्ग पर हुए भूस्खलन में मुजफ्फरनगर के कार्तिक के अलावा बागपत के एक व्यापारी की पत्नी और साली की भी मौत हो गई है। यह परिवार बागपत के खेकड़ा से माता वैष्णो देवी दर्शन के लिए गया था। हादसे में व्यापारी समेत चार लोग घायल हो हैं। घायलों का जम्मू के अस्पताल में उपचार चल रहा है। वहीं हादसे की जानकारी मिलने के बाद से व्यापारी के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिवार के लोग जम्मू के लिए रवाना हो गए हैं। बागपत के खेकड़ा के छोटा बाजार में व्यापारी मयंक गोयल परिवार के साथ रहता है। मयंक गोयल की बाजार में खिलौनों की दुकान है। गत 22 अप्रैल को मयंक की शादी गाजियाबाद निवासी चांदनी से हुई थी। बताया कि तीन दिन पहले मयंक गोयल पत्नी चांदनी, मां गीता गोयल, गाजियाबाद निवासी साढू अमित, साली नीरा ओर साली की बेटी विधि के साथ मां वैष्णो देवी दर्शन के लिए गया था। व्यापारी मयंक गोयल के छोटे भाई वंश गोयल ने बताया कि वैष्णो देवी मार्ग पर अचानक से भूस्खलन हो गया, जिसकी चपेट में पूरा परिवार आ गया। भाभी चांदनी ओर भाभी की बहन नीरा की हादसे में मौत हो गई, जबकि भाई मयंक, मां गीता गोयल, भाई का साढू अमित ओर उनकी बेटी विधि हादसे में घायल हुई है। बताया कि हादसे की सूचना भाई ने फोन पर दी। जिसके बाद परिवार के लोग जम्मू के लिए रवाना हो गए है। वहीं, हादसे की जानकारी मिलने के बाद से व्यापारी के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। खेकड़ा कस्बे में भी शोक की लहर दौड़ी हुई है। मुजफ्फरनगर के कार्तिक की भी गई जान माता वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर हुए भूस्खलन की घटना में मुजफ्फरनगर के 22 वर्षीय कार्तिक की मृत्यु हो गई जबकि उसके माता-पिता और दो बहनें घायल हैं। घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है। घटना की सूचना मिलने पर मंत्री कपिलदेव अग्रवाल मृतक के घर पहुंचकर सांत्वना दी। आगरा धौलपुर के पांच दोस्त भूस्खलन में बहे आगरा और धौलपुर से वैष्णो देवी के दर्शन करने गए पांच दोस्त मंगलवार को हुए भूस्खलन में बह गए। इनमें से दो को बचा लिया गया है, जबकि तीन लापता युवकों की तलाश जारी है। भूस्खलन के बाद लापता युवक आगरा के खेरागढ़ निवासी शिव बंसल (20), उसके दो ममेरे भाई प्रांशु मित्तल और यश मित्तल हैं। साथ गए दो दोस्त दीपक मित्तल और आदित्य परमार को सुरक्षित बचा लिया गया है।खेरागढ़ निवासी विनोद बंसल का बेटा शिव बंसल 23 अगस्त को धौलपुर के सैंपऊ कस्बा निवासी अपने मामा के बेटों व दोस्तों के साथ वैष्णो देवी दर्शन को गया था। दर्शन के बाद मंगलवार को कटरा के पास स्थित अन्य मंदिरों में जाने के लिए टैक्सी लेकर निकले थे। इसी दौरान किशनपुर–डोमेल रोड पर गरनई लोटा के पास भूस्खलन से हुए तेज बहाव में सभी फंस गए। एनडीआरएफ समेत अन्य रेस्क्यू टीम तीनों की तलाश कर रही हैं।  

यूपी में सख्ती: हेलमेट न पहनने वालों को पेट्रोल पंप पर मिलेगा बड़ा झटका

लखनऊ  यूपी में यातायात नियमों को पालन कराने को लेकर योगी सरकार सरकार सख्त है। सरकार पूरे प्रदेश में 1 से 30 सितम्बर तक ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल' विशेष सड़क सुरक्षा अभियान चलाने जा रही है। पेट्रोल पंप बिना हेलमेट के तेल नहीं मिलेगा। यह अभियान जिलाधिकारी के नेतृत्व तथा जिला सड़क सुरक्षा समिति (DRSC) के समन्वय से चलाया जाएगा, ताकि जनपद स्तर पर सभी संबंधित विभाग एक साथ नागरिक सुरक्षा के इस उद्देश्यमूलक प्रयास को आगे बढ़ाएं। इस अवधि में पुलिस, राजस्व/जिला प्रशासन तथा परिवहन विभाग के अधिकारी प्रवर्तन की मुख्य जिम्मेदारी निभाएंगे। योगी सरकार ने आमजन से अपील की है कि वे इन प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूर्ण सहयोग करें। यह पहल पूर्णतः विधिसम्मत एवं जनहितैषी है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 129 दोपहिया चालक तथा पिलियन के लिए हेलमेट को अनिवार्य करती है, जबकि धारा 194D उल्लंघन पर दंड का प्रावधान करती है। सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति द्वारा भी राज्यों को हेलमेट अनुपालन को प्राथमिकता देने का परामर्श दिया गया है। योगी सरकार ने कहा कि ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल' का उद्देश्य दण्डित करना नहीं, बल्कि नागरिकों को कानून के अनुरूप सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है—ईंधन तभी, जब हेलमेट सिर पर हो। परिवहन आयुक्त ने कहा कि अभियान पूरी तरह से सार्वजनिक हित में है। पूर्व के अनुभव बताते हैं कि दोपहिया वाहनस्वामी शीघ्र ही हेलमेट के साथ आने की आदत विकसित कर लेते हैं। इससे ईंधन बिक्री पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। तेल विपणन कंपनियां—IOCL, BPCL और HPCLतथा सभी पेट्रोल पम्प संचालकों से अनुरोध है कि वे इस प्रयास में सक्रिय सहयोग दें। खाद्य एवं रसद विभाग के माध्यम से पेट्रोल पंप स्तर पर आवश्यक समन्वय/निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। सूचना एवं जनसम्पर्क तंत्र जन-जागरूकता के प्रसार में सहयोग करेगा। नागरिक, उद्योग और प्रशासन मिलकर ही सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु एवं गंभीर चोटों को कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर ठोस कदम बढ़ा सकते हैं। उत्तर प्रदेश परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने बताया कि 'नो हेलमेट, नो फ्यूल' दण्ड नहीं, बल्कि सुरक्षा का संकल्प है। यह अभियान 1 से 30 सितम्बर तक जिलाधिकारी के नेतृत्व, DRSC के समन्वय और पुलिस-प्रशासन-परिवहन अधिकारियों के प्रवर्तन के साथ चलेगा। सभी नागरिकों, पेट्रोल पम्प संचालकों और तेल कंपनियों से अपील है कि वे इसमें पूर्ण सहयोग दें। 'हेलमेट पहले, ईंधन बाद में' को नियम बनाएं, क्योंकि हेलमेट पहनना जीवन का सबसे सरल बीमा है।  

वंदे भारत एक्सप्रेस का नया मार्ग, लखनऊ तक के रास्ते में अब ये स्टेशन्स होंगे शामिल

नई दिल्ली लखनऊ तक चलने वाली वंदेभारत एक्सप्रेस अब अयोध्या होते हुए वाराणसी तक जाएगी। पूरी तरह वातानुकूलित इस ट्रेन के संचालन की घोषणा एक माह पूर्व की गई थी। बावजूद इसके, शुरुआती छह दिनों में चेयर कार की लगभग 200 सीटें खाली हैं। वहीं, एग्जिक्यूटिव श्रेणी में 29 अगस्त को सभी सीटें बुक हो चुकी हैं, लेकिन अन्य दिनों में 25 से अधिक सीटें खाली हैं। मेरठ से वाराणसी का किराया रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन के प्रति यात्रियों का अपेक्षित रुझान न मिलने से करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। चेयर कार में 440 और एग्जिक्यूटिव श्रेणी में 52 सीटें हैं। मेरठ से वाराणसी तक किराया क्रमशः 1915 और 3525 रुपये है, जिसमें खानपान का खर्च भी शामिल है।   क्या है यात्रियों की समस्या? यात्रियों का कहना है कि ट्रेन का टाइम टेबल इसकी सबसे बड़ी समस्या है। वर्तमान में यह दिन में 782 किलोमीटर की दूरी 11 घंटे 50 मिनट में तय करती है। सप्ताह में छह दिन चलने वाली इस ट्रेन को लखनऊ और मेरठ आउटर पर प्लेटफार्म उपलब्ध न होने के कारण रोकना पड़ता है। यात्रियों की मांग है कि इसे रात में चलाया जाए और स्लीपर जैसी सोने की सुविधा दी जाए, ताकि सुबह तक गंतव्य पहुंचना संभव हो सके।