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‘जय जगत’ का उद्घोष दुनिया के सर्वोच्च स्थान तक पहुँच गया है: राज्यसभा सांसद डा. सुधांशु त्रिवेदी

सी.एम.एस. शिक्षकों ने निकाला ‘चरित्र निर्माण मार्च’, एक करोड़ से अधिक धनराशि के पुरस्कारों से नवाजे गये सी.एम.एस. शिक्षक लखनऊ शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में सिटी मोन्टेसरी स्कूल द्वारा ‘शिक्षक सम्मान समारोह’ का भव्य आयोजन आज सी.एम.एस. गोमती नगर एक्सटेंशन कैम्पस ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। समारोह का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डा. सुधांशु त्रिवेदी, राज्यसभा सांसद, द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर मार्ल्यापण से हुआ। इस अवसर पर अपने संबोधन में डा. त्रिवेदी ने सी.एम.एस. संस्थापक स्व. डा. जगदीश गाँधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सी.एम.एस. द्वारा हस्ताक्षरित ‘जय जगत’ का उद्घोष आज दुनिया के सर्वोच्च स्थान तक पहुँच गया है और सी.एम.एस. छात्र शुभांशु शुक्ला ने अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन पर पहुँचकर इसे साकार कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि भारत सदा से ही जगत गुरू रहा है और हरेक क्षेत्र में भारत ने विश्व का मार्गदर्शन किया है। आज शुभांशु जैसे हजारों सी.एम.एस. छात्र विभिन्न क्षेत्रों में भारत का परचम लहरा रहे हैं। वास्तव में, शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान का नाम नहीं है अपितु इसमें संस्कार, परम्परायें व सद्गुणों का विकास भी शामिल है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि आर्टिफिशियल इन्टेलीजेन्स के इस दौर में छात्रों में जीवन मूल्यों व संस्कारों के विकास पर जोर दें।     इस अवसर पर सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका डा. भारती गाँधी ने विद्यालय के विद्वान शिक्षकों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक ही समाज के भाग्यविधाता हैं। मुझे प्रसन्नता है कि सी.एम.एस. शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को बड़ी मेहनत व ईमानदारी से निभा रहे हैं। इससे पहले, मुख्य अतिथि व अन्य गणमान्य अतिथियों समेत सी.एम.एस. शिक्षकों व कार्यकर्ताओं का हार्दिक स्वागत करते हुए सी.एम.एस. प्रबन्धक प्रो. गीता गाँधी किंगडन ने कहा कि सी.एम.एस. के सभी शिक्षक व अन्य कार्यकर्ता बधाई के पात्र हैं जो बच्चों को पढ़ाई के साथ ही उनका चरित्र निर्माण कर भविष्य निर्माण भी कर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए प्रो. किंगडन ने कहा कि भावी पीढ़ी का सर्वांगीण विकास हम सबकी जिम्मेदारी है। सी.एम.एस. के क्वालिटी अश्योरेन्स एवं इनोवेशन डिपार्टमेन्ट की हेड सुश्री सुस्मिता घोष ने भी शिक्षकों का स्वागत करते हुए सी.एम.एस. शिक्षकों की वर्ष भर की उपलब्धियों पर चर्चा की।      इस भव्य समारोह में सी.एम.एस. शिक्षकों को उनकी अतुलनीय सेवाओं के लिए नगद पुरस्कारों व उपहारों से सम्मानित किया। कुल मिलाकर, सी.एम.एस. के सभी शिक्षकों व कार्यकर्ताओं को एक करोड़ रूपये से अधिक धनराशि के नगद पुरस्कारों व उपहारों से पुरष्कृत कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वर्ष 2024-25 के लिए कक्षा-3 से लेकर कक्षा-9 एवं कक्षा-11 के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को नगद पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिनमें सुश्री अवन्तिका गुप्ता, सुश्री आकांक्षा सिंह, सुश्री अपूर्वा पाण्डेय, सुश्री प्रियंका अग्रवाल, सुश्री निदा मोईन, श्री श्रीकृष्ण एवं श्री अविनाश कुमार शामिल हैं। इस अवसर पर सी.एम.एस. शिक्षकों ने एक से बढ़कर एक शिक्षात्मक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों की इन्द्रधनुषी प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।      सी.एम.एस. के हेड, कम्युनिकेशन्स श्री ऋषि खन्ना ने बताया कि शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में आज सी.एम.एस. के 3000 से अधिक शिक्षक/शिक्षिकाओं व कार्यकर्ताओं ने विशाल ‘चरित्र निर्माण मार्च’ निकालकर युवा पीढ़ी के चरित्र निर्माण की पुरजोर अपील की एवं भावी पीढ़ी को चरित्रिक व मानवीय गुणों से युक्त बनाने का आहवान किया। सी.एम.एस. शिक्षकों का यह विशाल मार्च आज प्रातः गोमती नगर एक्सटेंशन स्थित मकदूमपुर पुलिस स्टेशन से प्रारम्भ हुआ एवं सी.एम.एस. गोमती नगर एक्सटेंशन कैम्पस ऑडिटोरियम पहुँचकर शिक्षक सम्मान समारोह में परिवर्तित हो गया।

शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव और स्किल डेवलपमेंट पर जोर

– थर्मल पावर को न्यूक्लियर पावर में बदलने की जरूरत : विशेषज्ञ – हर गांव में वॉटर एटीएम और स्वच्छ पेयजल पर फोकस – ओडीओपी, मिठाई और दूध उत्पादों के देशव्यापी प्रसार पर जोर – संस्कृति, समाज और परिवार को 2047 के विकास मॉडल में प्रमुखता दिये जाने की जरूरत – बजट का 5% हिस्सा रिसर्च पर खर्च करने का सुझाव लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत @2047” विज़न को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को एक बड़े अभियान की शुरुआत की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में “समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047” अभियान का शुभारंभ हुआ। राजधानी के लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी और विशेषज्ञ जनों ने अपने विचार रखे और प्रदेश को विकसित राज्य बनाने के रोडमैप पर गहन विमर्श किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने 2047 तक उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य बनाने और 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, अनुसंधान, संस्कृति और सामाजिक संरचना पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी प्रेरणा की आवश्यकता प्रो. विघ्नेश कुमार ने सुझाव दिया कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी गाथाओं को इस अभियान का हिस्सा बनाया जाए ताकि समाज में ऊर्जा और विरासत के सम्मान का मोमेंटम लगातार बना रहे। कृषि और शिक्षा व्यवस्था पर जोर डॉ. विजय सिंह निरंजन, पूर्व अधिकारी, ने किसानों के हित में खाद्य का भंडारण सीधे उनके घर पर करने की व्यवस्था का सुझाव दिया। उन्होंने कोचिंग संस्थानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक कोचिंग बंद रहनी चाहिए, ताकि बच्चे नियमित रूप से स्कूल-कॉलेज जा सकें और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो। साथ ही, विभिन्न विभागों द्वारा चलाई जा रही एक समान योजनाओं को एकीकृत कर कार्यकुशलता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। प्रजेंटेशन और जागरूकता का विस्तार रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रंजन द्विवेदी ने सुझाव दिया कि इस पूरे अभियान को क्षेत्रवार प्रस्तुत किया जाए और सोशल मीडिया के जरिए इसका प्रसार होना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। शिक्षा और रिसर्च में क्रांति रिटायर्ड आईएएस आनंद कुमार ने शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ट्यूशन कल्चर को कम करना होगा और स्कूलों में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना होगा। साथ ही, भारतीय संस्कारों को शिक्षा में समाहित करना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में रिसर्च हब और रिसर्च सेंटर बनाने की आवश्यकता भी बताई। बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव रिटायर्ड रेलवे अफसर विजय कुमार दत्त ने कहा कि प्रदेश में 78 हजार किलोमीटर लंबे मार्गों को रेलवे लाइनों के साथ मैप करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि थर्मल पावर प्लांट्स को न्यूक्लियर पावर प्लांट्स में बदलने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। संस्कृति और परंपरा का महत्व संस्कृत प्रोफेसर विपिन त्रिपाठी ने विकास योजना में भारतीय परंपराओं को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि योजना को 12 माह और 12 राशियों से जोड़कर देखा जा सकता है और संस्कृत विद्या को इसमें प्रमुखता दी जानी चाहिए। उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था रिटायर्ड रेलवे अधिकारी शैलेन्द्र कपिल ने सुझाव दिया कि दूध उत्पादों का देशव्यापी प्रसार और मिठाई उद्योग को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की मिठाइयों की प्रसिद्धि को देश के अन्य राज्यों तक पहुंचाना होगा। टाउनशिप और उच्च शिक्षा पूर्व प्रोफेसर ए.के. जयंतली ने बताया कि बैरन लैंड पर छोटे-छोटे टाउनशिप बनाए जाने चाहिए ताकि गांव भी विकसित हों। उन्होंने खेती की जमीन पर शहरीकरण को रोकने, उच्च शिक्षा में “एंड्रोगोगी” पद्धति अपनाने और स्किल डेवलपमेंट पर जोर देने की बात कही। अन्य महत्वपूर्ण सुझाव – ओडीओपी (ODOP) पर फोकस करना। – एम्स की तरह प्राथमिक स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करना। – बच्चों के स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, हर गांव में वॉटर एटीएम की स्थापना। – आपदा राहत और थ्रेट प्रोटेक्शन की योजनाएं। – ग्रामीण क्षेत्रों में शराब के ठेकों पर नियंत्रण। – जनता से संवाद के लिए अधिक समय उपलब्ध कराना। – 2047 विकसित यूपी अभियान में संस्कृति, समाज और परिवार को प्राथमिकता। – पशु-पक्षियों के कल्याण को भी विकास योजना में शामिल करना। – कुल बजट का 5% हिस्सा रिसर्च के लिए निर्धारित करना। – सामाजिक समरसता और क्षेत्रवार विकास को महत्व देना। कार्यक्रम के अंत में विद्वानों ने एक स्वर में कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास की राह शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान, संस्कृति और सामाजिक समरसता से होकर ही गुजरती है। यदि इन बिंदुओं पर ध्यान दिया गया, तो 2047 तक “विकसित उत्तर प्रदेश” का संकल्प अवश्य पूरा होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्रदेव सिंह, मुख्य सचिव दीपक कुमार, प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार, प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद, वरिष्ठ अधिकारीगण, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, अवकाश प्राप्त अधिकारीगण, प्रोफेसर आदि गणमान्य मौजूद रहे।

लाठीचार्ज का विरोध: ABVP के समर्थन में सपा छात्र सभा मैदान में उतरी

बाराबंकी  यूपी में बाराबंकी के रामस्वरूप विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) छात्रों पर लाठी चार्ज का मुद्दा गर्माता जा रहा है। इसी बिरोध में समाजवादी पार्टी की छात्र सभा कूद पड़ी है। लखनऊ के राजभवन के ठीक सामने समाजवादी छात्र सभा ने जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में छात्र राजभवन के पास पहुंचे। यहां प्रदर्शन के दौरान उनकी पुलिस से झड़प हो गई। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर उन्हें खदेड़ने की कोशिश की, छात्र माने नहीं, वहीं लेट गए। इस पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इससे पहले एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को पुलिस की ओर से हुए लाठीचार्ज के खिलाफ कई स्थानों पर प्रदर्शन किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। कुछ कार्यकर्ता विधानभवन के सामने पहुंच गए। एक दर्जन से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने कैसरबाग स्थित एबीवीपी अवध प्रांत कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों ने आरोप लगाया कि रामस्वरूप विवि में पुलिस के बीच गुंडे घुसे थे। पहले उन्होंने मारा। उनका जब छात्रों ने विरोध किया तो पुलिस ने जानलेवा हमला कर दिया। छात्रों का आरोप है कि लंबे समय से विश्वविद्यालय छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। लॉ डिग्री की मान्यता नहीं है। ऐसे में लॉ छात्रों के साथ धोखा किया गया है। 2022 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया से संबद्धता के बारे में जानकारी जब ली गई तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। अगर इन सब मामलों पर रिपोर्ट नहीं आती है तो प्रदर्शन और उग्र किया जाएगा। इसके बाद पुलिस कार्यकर्ताओं को खींचकर इको गार्डन ले गई। इस दौरान कई भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए पुलिस के लाठीचार्ज को गलत ठहराया। एनएसयूआई का मिला साथ एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष मध्य क्षेत्र आर्यन मिश्रा ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर पुलिस के लाठीचार्ज का विरोध किया। आर्यन की अगुवाई में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने अस्पताल पहुंचकर एबीवीपी कार्यकर्ताओं का हाल जाना। साथ ही कहा कि राजनीतिक विचारधारा भले ही अलग हो, पर छात्र होने के नाते घायल छात्रों के साथ मजबूती से खड़े हैं। कांग्रेस सांसद ने छात्रों से मुलाकात की बाराबंकी से कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने ट्रामा सेंटर में भर्ती घायल छात्रों का हाल जाना। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की भर्त्सना की तथा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। बर्रबर कार्रवाई करार देते हुए दोषियों को दंडित करने की मांग उठाई। पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। पत्रकारों से बाचतीत में कहा कि जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्ण तरीके से लाठीचार्ज करना निरंकुशता और दमनकारी शासन का परिणाम है। यह शर्मनाक, निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कहना, विरोध दर्ज कराना कहीं से भी गलत नहीं इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष रुद्रदमन सिंह, शहर अध्यक्ष शहजाद आलम मौजूद थे। सपा नेता ने घायल छात्रों का हाल जाना समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने मंगलवार दोपहर को लाठी चार्ज से घायल छात्रों का हाल जाना। वह ट्रामा सेन्टर में कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे। फखरुल ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया और लाठी चार्ज की निंदा की। उन्होंने छात्रों से कहा कि वह उनकी लड़ाई में साथ है। छात्रों का दर्द उनका दर्द है। उनकी पार्टी का दर्द है। उन्होंने छात्रों का उचित इलाज कराने की मांग के साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने को कहा।  

हिंदू लड़की का मुस्लिम युवक से जबरन निकाह, वाराणसी पुलिस ने मौलवी समेत 5 को पकड़ा

वाराणसी  वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र में जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है. इस घटना में 12 साल की एक नाबालिग हिंदू लड़की को अगवा करके मौलवी ने मुस्लिम लड़के से निकाह करा दिया. इस मामले में पुलिस ने देर से ही सही, लेकिन नाबालिग लड़के निहाल, उसकी मां, पिता शरीफ उर्फ राजू, चाचा लालू और मौलवी मोहम्मद हसीन समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है.  पीड़ित पिता नंदू मौर्य लगभग 3 महीने तक थाने-चौकी के चक्कर लगाता रहा, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई. थक-हारकर उन्होंने पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी, जिसके बाद कार्रवाई हुई. मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है.  पीड़ित पिता की आपबीती पीड़ित पिता नंदू मौर्य ने अपनी शिकायत में बताया कि लगभग 3 महीने पहले उनकी 12 साल की बेटी को निहाल नाम का लड़का जबरन अपने घर उठा ले गया था. जब वह अपनी बेटी को वापस लेने गए, तो निहाल, उसके पिता शरीफ, चाचा लालू और कुछ अन्य लोगों ने उन पर हमला कर दिया. उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अब उनके मजहब की हो गई है, उसका निकाह हो चुका है और वह काफिर (नंदू मौर्य) की हत्या करके उसे जहन्नुम भेज देंगे.  पुलिस ने कराया आरोपियों से उठक-बैठक इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उनसे थाने में ही उठक-बैठक करवाई. मौलवी मोहम्मद हसीन ने कबूल किया कि उसने 12 साल की नाबालिग का निकाह कराया था और अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी. सभी पांच आरोपियों पर उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम समेत अन्य कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. देखें वीडियो-  पुलिस कमिश्नर की पहल पर कार्रवाई एसीपी प्रज्ञा पाठक ने बताया कि पुलिस कमिश्नर को शिकायत मिलते ही तुरंत एफआईआर दर्ज की गई और लड़की को बरामद करने के लिए टीम लगा दी गई. टीम ने लड़की को ढूंढ लिया. पूछताछ में पता चला कि निहाल के परिवार ने उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराकर निकाह करवा दिया था. एसीपी ने यह भी बताया कि पीड़ित पिता पहले थाने नहीं आए थे, सीधे पुलिस कमिश्नर के पास गए, जिसके बाद यह कार्रवाई संभव हो पाई. 

CM योगी के आदेश पर यूपी के 14 शहरों में चला स्पेशल ऑपरेशन

लखनऊ  यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नगर विकास विभाग ने प्रदेश के विभिन्न नगर निगमों में एक साथ 12 घंटे का विशेष अभियान चलाया. अधिकारियों के मुताबिक इस पहल का मुख्य उद्देश्य नागरिक सुविधाओं में सुधार, स्थानीय समस्याओं का समाधान और जन-जागरूकता बढ़ाना था. यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों के अनुरूप संचालित किया गया. न्यूज एजेंसी की खबर के अनुसार लखनऊ नगर निगम ने आठ जोनों में 32 कर वसूली और शिकायत निवारण शिविर आयोजित किए. अपर नगर आयुक्त और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के नेतृत्व में 1,365 शिकायतों का मौके पर समाधान किया गया. एक दिन में 2.30 करोड़ रुपये का कर संग्रह सुनिश्चित हुआ. इसके अलावा गोरखपुर नगर निगम ने प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाकर दुकानदारों को कपड़े के थैले वितरित किए. साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाई और नियम उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया गया. वाराणसी:नगर निगम की टीम ने कचरा पृथक्करण पहल शुरू की. भरत मिलाप कॉलोनी और महेश नगर कॉलोनी के 86 घरों में घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाया गया. अब अधिकांश घरों में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग डस्टबिन में डाला जा रहा है. मथुरा-वृंदावन नगर निगम ने मछली फाटक के पुराने कूड़ा ढलाव घर का सौंदर्यीकरण किया. राधा अष्टमी के अवसर पर अहिल्या बाई पार्क और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सफाई अभियान चला. स्थानीय निवासी कचरा पृथक्करण और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित हुए. गाजियाबाद में भारी बारिश के दौरान मोहन नगर, शालीमार गार्डन और मोहन नगर बस स्टैंड में जलभराव समाधान किया गया. 20 साल पुराने नालों और पाइपलाइनों की सफाई कर स्थायी समाधान उपलब्ध कराया गया. अयोध्या नगर निगम को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड से 20 इलेक्ट्रॉनिक हॉपर टिपर प्राप्त हुए. इससे डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को गति मिली. प्रत्येक वार्ड में टिपर जीपीएस और रूट मैप के साथ संचालित होगा. वहीं शाहजहांपुर में निगोही रोड पर वर्षों पुराने 150 टन गीले कचरे का निस्तारण कर दीर्घकालीन समस्या का समाधान किया गया. मुरादाबाद में विशेष अभियान के तहत 200 मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया गया. 250 सफाई कर्मियों और आधुनिक उपकरणों की मदद से यह क्षेत्र साफ किया गया. बरेली के वार्ड-53, मोहल्ला रोहली टोला और आशीष रॉयल पार्क कॉलोनी में जल आपूर्ति सुधार की गई. 1,100 मीटर नई पाइपलाइन बिछाकर 200 भवनों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया गया. कानपुर नगर निगम ने सिंगल यूज प्लास्टिक के बहिष्कार और स्वच्छता के लिए तीन नए फुटबॉल ग्राउंड का उद्घाटन किया और फ्रेंडली फुटबॉल मैच आयोजित किया. प्रयागराज बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और एंटी-लार्वा फॉगिंग अभियान चलाया गया. अपशिष्ट पृथक्करण और मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम पर जोर दिया गया. मेरठ नगर आयुक्त ने कान्हा गौशाला का निरीक्षण किया. गौवंश की देखभाल, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन की स्थिति का जायजा लिया गया. यह पहल धार्मिक कर्तव्य के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी मानी गई. फिरोजाबाद नगर निगम ने बारिश के बाद जलभराव की 12 शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया. अलीगढ़: नगर निगम ने लगातार काम करते हुए जलभराव कम करने और खेल सुविधाओं के विकास की तैयारी की. नारंगी लाल स्मार्ट सिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स अगले 2-3 सप्ताह में हस्तांतरित किया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि इस 12 घंटे के विशेष अभियान ने न केवल नागरिक सेवाओं और स्वच्छता में सुधार किया, बल्कि लोगों में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई. नगर निगमों के सहयोग से यह पहल प्रदेशभर में एक मॉडल के रूप में उभरी है.

CM योगी ने छात्रवृत्ति योजना में लापरवाही पर दिखाई सख्ती, दिए कड़े निर्देश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई योजना में हुई भारी लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है. प्रदेश के करीब छह लाख पात्र छात्रों को वर्ष 2024-25 में योजना का लाभ नहीं मिल सका. यह मामला सामने आने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्रवाई के आदेश दिए. इसके तहत अयोध्या, बहराइच, रायबरेली और सीतापुर समेत 14 जिलों के समाज कल्याण अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है. वहीं बरेली में सबसे ज्यादा गड़बड़ी सामने आने पर वहां के बाबू प्रमोद जोशी को निलंबित कर दिया गया है. अधिकारियों की लापरवाही के चलते नहीं आई स्कॉलरशिप जानकारी के मुताबिक सरकार ढाई लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले एससी-एसटी छात्रों और दो लाख रुपये तक आय वाले अन्य वर्गों के छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ शुल्क की भरपाई करती है. लेकिन कई शिक्षण संस्थानों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण छह लाख से अधिक छात्र इस योजना से वंचित रह गए. कहीं अधिकारियों ने डाटा लॉक नहीं किया तो कहीं विश्वविद्यालयों और कॉलेजों ने ऑनलाइन आवेदन ही आगे नहीं बढ़ाए. कार्रवाई की जद में आए अधिकारियों में अलीगढ़ की संध्या रानी बघेल, औरेया की इंदिरा सिंह, अयोध्या के रणविजय सिंह, बहराइच के रमाशंकर, बलिया के दीपक श्रीवास्तव, बरेली के सुधांशु शेखर, बिजनौर के जागेश्वर सिंह, गौतमबुद्धनगर के सतीश कुमार, गाजियाबाद के वेद प्रकाश मिश्रा, कन्नौज के सत्य प्रकाश सिंह, प्रतापगढ़ के नागेंद्र मौर्य, रायबरेली की सृष्टि अवस्थी, सीतापुर के हर्ष मवार और वाराणसी के गिरीश दुबे शामिल हैं. इनके साथ ही कई जिलों के बाबुओं को भी प्रतिकूल प्रविष्टि और चेतावनी दी गई है. छात्रों के खाते में जल्द भेजी जाएगी राशि मुख्यमंत्री योगी ने निर्देश दिए हैं कि दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और निजी शिक्षण संस्थानों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए. मामले को लेकर 14 राज्य विश्वविद्यालयों, 19 निजी विश्वविद्यालयों और कई आईटीआई के संयुक्त निदेशकों पर भी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. सरकार का कहना है कि छात्रों का हक हर हाल में सुरक्षित किया जाएगा और जिन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति व शुल्क भरपाई नहीं मिली है, उनके खाते में जल्द ही राशि भेजी जाएगी. 

आईआईटी कानपुर के ‘समन्वय’ से उद्योग-अकादमिक जुड़ाव कार्यक्रम में सम्मिलित हुए सीएम योगी

इंडस्ट्री–एकेडमिया समन्वय से भारत बनेगा तकनीक और विकास का केंद्र : मुख्यमंत्री आईआईटी कानपुर के 'समन्वय' से उद्योग-अकादमिक जुड़ाव कार्यक्रम में सम्मिलित हुए सीएम योगी  एआई, साइबर सिक्योरिटी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर मंथन से यूपी और प्रदेश को मिलेगी नई दिशाः मुख्यमंत्री  पिछले 11 वर्षों में हमने भारत को बदलते देखा, यह यात्रा विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा के अनुकूलः सीएम आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और अगले दो वर्षों में तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर: मुख्यमंत्री हर अक्षर, वनस्पति और मनुष्य में कुछ बनने की क्षमता, आईआईटी जैसे संस्थान इन्हें जोड़ने का काम कर रहेः योगी  कानपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को आईआईटी कानपुर के 'समन्वय' से उद्योग-अकादमिक जुड़ाव कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इंडस्ट्री और अकादमिक संस्थानों के सहयोग का मुद्दा केवल शोध और नवाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे आम नागरिक के जीवन स्तर, वैश्विक चुनौतियों और सतत विकास से जुड़ा हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और सस्टेनेबिलिटी जैसे विषयों पर मंथन भारत को न केवल आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाएगा, बल्कि तकनीक और विकास का वैश्विक केंद्र स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इंडस्ट्री–एकेडमिया सहयोग से वैश्विक चुनौतियों का समाधान मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम जिस विषय पर एकत्र हुए हैं, वह केवल इंडस्ट्री–एकेडमिया सहयोग का 'समन्वय' ही नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के सामने खड़ी चुनौतियों से जुड़ा हुआ है। ये चुनौतियां सीधे-सीधे आम नागरिक के जीवन स्तर को प्रभावित करती हैं। इसीलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) जैसे तीन महत्त्वपूर्ण स्तंभों पर तकनीकी सत्र होंगे और चर्चा होगी। कभी 17वीं शताब्दी तक भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। वैश्विक जीडीपी में हमारा योगदान 25 प्रतिशत तक था। लेकिन 150-200 वर्षों में ऐसा क्या कुछ हुआ कि यह लगातार गिरता गया और 1947 तक आते-आते भारत का योगदान केवल 2 प्रतिशत रह गया। सीएम योगी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में हमने भारत को बदलते हुए देखा है। आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अगले दो वर्षों में तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। आगे चलकर हमें दूसरी अर्थव्यवस्था बनने का अवसर भी मिलेगा। यह यात्रा केवल आर्थिक विकास की नहीं है, बल्कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में है।  हर अक्षर, हर वनस्पति और हर मनुष्य में कुछ बनने की क्षमता  आईआईटी कानपुर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईटी कानपुर का गौरवशाली इतिहास है। पिछले छह दशकों में इस संस्थान ने देश को तकनीक की दिशा में बहुत कुछ दिया है। हाल ही में मैंने नोएडा में ड्रोन टेक्नोलॉजी केंद्र का दौरा किया। वहां आईआईटी कानपुर से जुड़े लोग भी मिले। मैंने देखा कि हमारे युवा नई सामरिक चुनौतियों का सामना करने के लिए कैसे तैयार हो रहे हैं। आईआईटी कानपुर भी उसमें अपना योगदान दे रहा है। हमें हमेशा यह विश्वास रखना चाहिए कि हम कर सकते हैं। दुनिया का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय तक्षशिला भी भारत में था। वहीं से चरक और सुश्रुत जैसे आयुर्वेदाचार्य निकले। यही हमारी परंपरा है कि हर अक्षर, हर वनस्पति और हर मनुष्य में कुछ बनने की क्षमता होती है। बस एक जोड़ने वाले की आवश्यकता होती है। मुझे विश्वास है कि आईआईटी जैसे संस्थान वही जोड़ने का काम कर रहे हैं। हर क्षेत्र में यूपी ने स्थापित किए नए मानक  उन्होंने कहा कि 1947 में उत्तर प्रदेश का योगदान राष्ट्रीय जीडीपी में 14 प्रतिशत तक था। लेकिन 2017 तक यह घटकर केवल 7-8 प्रतिशत रह गया। निराशा का माहौल था, उद्योग निवेश नहीं करना चाहते थे, युवा पलायन कर रहे थे। कभी समृद्ध रहा प्रदेश बीमारू कहलाने लगा। पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है। आज प्रदेश, देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। बेहतर सुरक्षा, निवेश, बुनियादी ढांचा और सुशासन के साथ यूपी ने नए मानक स्थापित किए हैं। हर क्षेत्र में परिवर्तन दिखाई दे रहा है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने नेतृत्व किया है। प्रदेश की विधान सभा देश की पहली विधान सभा है, जिसने लगातार 36 घंटे चर्चा कर यह तय किया कि कैसे सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स पूरे किए जा सकते हैं। आज शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जल प्रबंधन हर क्षेत्र में ठोस काम हो रहा है। मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी यह इलाका सूखे, पलायन और डकैतों की समस्या से जूझता था। आज यहां हर घर नल से जल पहुंच रहा है, खेतों तक सिंचाई हो रही है और डिफेंस कॉरिडोर के दो महत्वपूर्ण नोड (चित्रकूट और झांसी) में निवेश आ रहा है। पहले जहां किसान सालाना ₹5000 कमाता था, आज वही किसान ₹50,000 तक कमा रहा है।  साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ करना बाकी  मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण की दिशा में भी प्रदेश ने मिसाल कायम की है। पिछले आठ वर्षों में 240 करोड़ पौधरोपण कर एक नया रिकॉर्ड बनाया गया है। फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट भी मान चुका है कि उत्तर प्रदेश में वन क्षेत्र बढ़ा है। यही सतत विकास की ओर हमारे प्रयासों का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर सुरक्षा आज की सबसे बड़ी चुनौती है। 2017 में केवल दो साइबर थाने थे, वह भी सक्रिय नहीं थे। आज प्रदेश के 75 जिलों में साइबर थाने हैं, 1500 से अधिक थानों में साइबर डेस्क है और राज्य साइबर एवं फॉरेंसिक संस्थान की स्थापना भी हो चुकी है। लेकिन अभी और बहुत कुछ करना बाकी है। इसी दिशा में हम आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर कार्य करना चाहते हैं। मेरा मानना है कि भारत का पहला डीप-टेक भारत 2025 मॉडल तैयार करने में आईआईटी कानपुर इसका केंद्र बने। गौतमबुद्धनगर में हमने इसके लिए कुछ भूमि भी अलॉट की है।  समन्वय से आगे बढ़ें तो भारत फिर से अपना गौरव हासिल कर सकता है  मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योग जगत से भी मेरा आग्रह है कि केवल लाभ कमाने की मानसिकता से आगे न बढ़ें। लाभ का एक बड़ा हिस्सा नवाचार और अनुसंधान में लगाएं। आईआईटी कानपुर इस दिशा में एक मॉडल स्टडी बन सकता है जो इंस्टीट्यूशन को इस बारे में अवगत करा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने 2017 से पहले … Read more

योगी सरकार उत्तर प्रदेश को बना रही है विदेशी निवेश का हॉटस्पॉट

विदेश से बड़े निवेश के प्रयास में जुटी योगी सरकार चीन+1 स्ट्रैटेजी के तहत 200 से ज्यादा कंपनियों से की जा रही बातचीत योगी सरकार उत्तर प्रदेश को बना रही है विदेशी निवेश का हॉटस्पॉट भारतीय एंबेसीज और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर किया जा रहा प्रयास  निवेशक हितैशी नीतियों के चलते विदेशी निवेशकों का भी यूपी पर बढ़ रहा भरोसा  लखनऊ  उत्तर प्रदेश में निवेश को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक बड़े अभियान की शुरुआत की है। सरकार का फोकस विदेश से पूंजी लाना और राज्य को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए योगी सरकार चीन+1 स्ट्रैटेजी पर काम कर रही है और अब तक करीब 200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से बातचीत की जा चुकी है। चीन+1 लीड्स को वास्तविक निवेश में बदलने के लिए राज्य सरकार इन देशों में भारत की एंबेसीज और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर प्रयास कर रही है। इसका नतीजा यह है कि निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है और उत्तर प्रदेश तेजी से एक ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। यूपी को मिल रहा विदेशी निवेशकों का भरोसा चीन+1 लीड्स के तहत जिन देशों पर सबसे ज्यादा फोकस है, उनमें अमेरिका, जापान, चीन, फ्रांस, डेनमार्क की कंपनियां शामिल हैं।  इनमें अमेरिका से 30 से ज्यादा, जर्मनी से 30 के करीब, जापान से 20, चीन से 14, स्विट्जरलैंड और फ्रांस से 7-7, डेनमार्क से 6 और स्पेन से 5 कंपनियां शामिल हैं। इन देशों की कंपनियां भी उत्तर प्रदेश में निवेश की इच्छुक हैं। उनकी इच्छा को धरातल पर उतारने के लिए यूपी सरकार विशेष टीम और कंट्री-स्पेसिफिक डेस्क बनाने पर भी विचार कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार इन लीड्स को हर हाल में कम्फर्म निवेश में बदलने के लिए प्रयासरत है और इसके लिए इन देशों में इंडियन एंबेसी की भी मदद ली जा रही है।  पीएलआई स्कीम बनी निवेश की नई ताकत निवेश प्रोत्साहन की पहल के तहत उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कई और भी इनीशिएटिव्स लिए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत भारत सरकार द्वारा अब तक 574 प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से 70 कंपनियां पहले से ही उत्तर प्रदेश में कार्यरत हैं। इसके अलावा 11 कंपनियों के पास नए प्रोजेक्ट्स हैं। 20 कंपनियों ने सीधे यूपी सरकार के साथ एमओयू किया है। वहीं, 473 कंपनियों के साथ सरकार लगातार एक्टिव फॉलो-अप कर रही है। निवेशकों के लिए बनाई गई सुविधा प्रणाली विदेशी निवेशकों को बेहतर सुविधा देने के लिए यूपी सरकार ने एक अभिनव कदम उठाया है। 814 कंपनियों (फॉर्च्यून 500 और इंडिया नेक्स्ट 500 से जुड़ी) के लिए अकाउंट मैनेजर्स नियुक्त किए गए हैं। इन कंपनियों में शिपिंग, शिप बिल्डिंग, टेलीकॉम, रिटेल, पेट्रोकेमिकल्स, इंश्योरेंस और पब्लिक सेक्टर बैंक शामिल हैं। साथ ही गुजरात स्टेट पेट्रोनेट और टीएन न्यूजप्रिंट जैसी स्टेट पीएसयू कंपनियां भी इस मिशन में शामिल हैं। इस पहल के माध्यम से अब तक 50 नए एमओयू साइन किए जा चुके हैं, जबकि 16 नई लीड्स और 282 कंपनियों के साथ चर्चा अभी भी चल रही है। इसलिए विदेशी कंपनियों के लिए यूपी में फायदेमंद है निवेश   उत्तर प्रदेश में निवेश को लेकर विदेशी कंपनियों की रुचि कई वजहों से है। इसमें सबसे बड़ी वजह स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल लीडरशिप है, जिसके तहत सीएम योगी की स्थिर और निर्णायक नीतियां महत्वपूर्ण रही हैं। इसके अलावा, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर – एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट्स, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अलावा, सबसे बड़ा उपभोक्ता राज्य होने का लाभ भी मिलने की संभावना है। यही नहीं, सिंगल विंडो सिस्टम और निवेशक सुविधा केंद्र जैसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार भी अहम भूमिका निभा रहा है।  क्या है चीन+1 स्ट्रैटेजी? चीन+1 स्ट्रैटेजी एक ग्लोबल बिज़नेस स्ट्रैटेजी है, जिसे दुनिया भर की मल्टीनेशनल कंपनियां अपनाती हैं और अब प्रदेश सरकार भी इस पर आगे बढ़ रही है। इसका उद्देश्य यह है कि कंपनियां अपना मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन सिर्फ चीन पर निर्भर न रखकर, एक या अधिक अतिरिक्त देशों में भी सेटअप करती हैं। उत्तर प्रदेश को इससे सबसे बड़ा फायदा मिल सकता है, क्योंकि यहां बड़ी जनसंख्या और वर्कफोर्स उपलब्ध है। सस्ता और स्किल्ड लेबर है। विशाल घरेलू मार्केट है। इसी को देखते हुए सरकार पीएलआई स्कीम और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार के जरिए निवेशकों को आकर्षित कर रही है। स्ट्रैटेजी के तहत कंपनियों से बातचीत कर रही है, ताकि विदेशी निवेश सीधे प्रदेश में आकर लगे।

छोटे किसानों के लिए खुशखबरी, पेराई सत्र 2025-26 की गन्ना नीति जारी

लखनऊ पेराई सत्र-2025-26 के लिए गन्ना सट्टा एवं आपूर्ति नीति जारी कर दी गई है। इस बार गन्ना समिति के नये किसान सदस्यों को सट्टा पेराई सत्र 2024-25 में संबंधित चीनी मिल की औसत गन्ना आपूर्ति या संबंधित जिले की गन्ना उत्पादकता का 70 प्रतिशत में जो भी अधिक होगा, उसकी सीमा तक गन्ना सट्टा का लाभ दिया जाएगा। नीति में छोटे किसानों और लघु महिला किसानों को भी प्राथमिकता दी गई है। छोटे गन्ना किसानों (81 क्विंटल सट्टाधारक) की पेड़ी गन्ने की पर्चियां एक से तीन पक्ष में और पौधे गन्ने की पर्चियां सात से नौ पक्ष में जारी करने की सुविधा दी गई है। वहीं अति लघु गन्ना किसानों (36 क्विंटल या चार पर्ची बेसिक मोड) और लघु महिला गन्ना किसान (81 क्विंटल या नौ पर्ची बेसिक मोड) को पेड़ी पौधा को 52:48 के अनुपात से मुक्त रखते हुए अति लघु गन्ना किसानों को शत-प्रतिशत पेड़ी गन्ने की पर्चियां प्रथम पक्ष में व पौधे गन्ने की पर्चियां सातवें पक्ष में, जबकि लघु महिला गन्ना किसानों को शत-प्रतिशत पेड़ी गन्ने की पर्चियां एक से तीन पक्ष में व पौधे गन्ना की पर्चियां सात से नौ पक्ष में जारी की जाएंगी। इससे 13.12 लाख छोटे गन्ना किसानों, 3.75 लाख अति लघु गन्ना किसानों व 6,268 लघु महिला गन्ना किसानों के लाभांवित होने का अनुमान है। गन्ना आयुक्त मिनस्ती एस. ने बताया कि गन्ना शोध परिषद की ओर से जारी गन्ना किस्म को.15023 की परिपक्वता के हिसाब से अतिशीघ्र मानते हुए गन्ने की कैलेंडरिंग में प्राथमिकता दी गई है। इसकी पेड़ी की पर्चियां एक से दो पक्ष में और पौधे की पर्चियां सात से आठ पक्ष में अंकित की जाएंगी। इससके चीनी मिलों के चीनी परता में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को शीघ्र गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा। वहीं पेड़ी या शरदकालीन पौधे वाले नये समिति सदस्यों की पर्चियां पहली बार पांचवें पक्ष से 12वें पक्ष में लगाए जाने की सुविधा मिलेगी। जिनके पास पौधा गन्ना है, उनकी पर्चियां पिछले वर्ष की तरह सातवें पक्ष से लगेगीं। वर्तमान में पेराई सत्र 2025-26 के लिए जारी सट्टा नीति के तहत गन्ना किसानों को सामान्यतः कैलेंडर के किसी एक कालम में अधिकतम बेसिक मोड की चार पर्चियां ही अंकित की जाएंगी, लेकिन 2,500 क्विंटल या उससे अधिक बेसिक सट्टा धारक किसान के एक कालम में अधिकतम आठ पर्चियां अंकित की जा सकती हैं। ऐसे किसान जिनके पास शत-प्रतिशत पेड़ी गन्ना है, उनकी 52 प्रतिशत पर्चियां छठवें पखवाड़े तक और शेष 48 प्रतिशत पर्चियां सातवें से 10वें पखवाड़े में लगाई जाएंगीं। पेराई सत्र 2025-26 में यदि किसान मेकेनिकल हार्वेस्टिंग के लिए आवेदन करता है तो उसे पारिवारिक कैलेंडर की सुविधा दी जाएगी। ऐसे पुराने गन्ना किसान सदस्यों, जिन्होंने केवल वर्ष 2024-25 में ही गन्ना आपूर्ति की है, उनके बेसिक कोटा का निर्धारण चीनी मिल की औसत आपूर्ति या उस किसान की पेराई सत्र 2024-2025 की आपूर्ति, दोनों में जो भी अधिक हो, दी जाएगी।

77 दिन की मोहब्बत और फिर त्रासदी, कानपुर में लव मैरिज के बाद पति-पत्नी की मौत

कानपुर  कानपुर शहर के नौबस्ता इलाके से ऐसी खबर सामने आई जिसने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया. मोहब्बत की कसम खाकर, परिवार की रजामंदी से निकाह करने वाला एक प्रेमी-प्रेमिका का रिश्ता महज़ 77 दिन ही चल पाया. निकाह के ढाई महीने बाद ही पति और पत्नी एक ही दुपट्टे के सहारे फंदे से झूलते मिले. घटना इतनी अचानक और रहस्यमय थी कि परिवारजन, पड़ोसी और पुलिस सभी हैरान रह गए. बाजार से लौटे और मौत को गले लगाया घटना मंगलवार दोपहर की है. मोहम्मद सईद का बेटा साजिद अपनी पत्नी सोफिया को लेकर पास के बाजार गया था. दोनों सामान्य दिख रहे थे, न हंसी-खुशी में कोई कमी और न ही किसी तरह का झगड़ा. आधे घंटे में दोनों घर लौट आए. किसी को अंदाजा भी नहीं था कि बाजार से घर लौटने के बाद वे जीवन से विदा लेने का मन बना चुके हैं. थोड़ी ही देर बाद जब घर का दरवाज़ा खोला गया तो वहां का नज़ारा देखकर सबके पैरों तले जमीन खिसक गई. ऊपर कमरे में साजिद और सोफिया, एक ही दुपट्टे में फंदा लगाकर झूल रहे थे. दोनों को नीचे उतारा गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. घरवालों में चीख-पुकार मच गई और आस-पड़ोस में सन्नाटा पसर गया. परिवार की रजामंदी से हुआ था निकाह मामले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि साजिद और सोफिया का रिश्ता परिवार की रज़ामंदी से ही तय हुआ था. मोहम्मद सईद के छह बेटों में साजिद चौथे नंबर पर था. मोहल्ले में ही रहने वाली सोफिया से उसका लंबे समय से प्रेम संबंध था. सोफिया अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थी. दोनों की मोहब्बत को देखते हुए परिवारों ने विरोध करने के बजाय उनका साथ दिया. 17 जून को दोनों ने पूरे रीति-रिवाज और गवाहों की मौजूदगी में निकाह किया. निकाह की दावत में दोनों परिवारों के लोग शामिल हुए. यही वजह थी कि किसी को कभी शक नहीं हुआ कि यह रिश्ता इतनी जल्दी त्रासदी में बदल जाएगा. परिजन भी हैरान घटना के बाद दोनों परिवार पूरी तरह से सदमे में हैं. सोफिया के पिता ने रोते हुए कहा, हमने तो अपनी बेटी की खुशियों के लिए उसकी पसंद को अपनाया. किसी तरह की कोई मनमुटाव की बात हमारे सामने कभी नहीं आई. वहीं साजिद के पिता मोहम्मद सईद ने बताया,साजिद हमेशा खुश दिखता था. हमने कभी नहीं सोचा था कि वो ऐसा कदम उठा लेगा. क्या बाजार से खरीदी थी दवा पड़ोसियों का कहना है कि घटना से आधा घंटा पहले ही दोनों बाजार गए थे. शक जताया जा रहा है कि संभव है वहां से दोनों ने कोई सुसाइड की दवा खरीदी हो. हालांकि, यह केवल अनुमान है. इस पर अभी कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है. पुलिस की कार्रवाई घटना की जानकारी मिलते ही नौबस्ता थाना पुलिस मौके पर पहुंची. शुरू में परिवारजन पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं थे, लेकिन पुलिस ने समझाया कि जांच के लिए यह जरूरी है. दोनों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं. डीसीपी साउथ डीएन चौधरी ने बताया, साजिद और सोफिया ने ढाई महीने पहले प्रेम विवाह किया था. वे परिवार के साथ ही रह रहे थे. फिलहाल यह मामला सुसाइड का ही प्रतीत हो रहा है. मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगी. मोहल्ले में पसरा मातम इस घटना के बाद पूरे मोहल्ले में मातम का माहौल है. पड़ोसियों का कहना है कि साजिद और सोफिया बहुत अच्छे स्वभाव के थे. दोनों अक्सर साथ दिखाई देते थे. किसी ने कभी यह नहीं सोचा था कि इतनी मोहब्बत करने वाला यह जोड़ा जिंदगी से हार मान लेगा. सवालों के घेरे में वजह इस दर्दनाक घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों ने एक साथ जीवन खत्म करने का फैसला ले लिया? क्या कोई मानसिक दबाव था, या कोई ऐसा राज था जिसे वे बता नहीं पा रहे थे? परिजन और पुलिस दोनों ही इस रहस्य से अनजान हैं. समाजशास्त्रियों का मानना है कि कभी-कभी प्रेम संबंधों में छोटी-छोटी बातों से बड़ा तनाव जन्म ले लेता है, जो भीतर ही भीतर इंसान को तोड़ देता है. मोहब्बत की ऐसी दास्तां, जिसने सबको रुला दिया साजिद और सोफिया की कहानी इस बात की गवाह है कि मोहब्बत का रिश्ता जितना खूबसूरत होता है, उतना ही नाज़ुक भी. जिनके लिए दोनों परिवारों ने अपने दरवाजे खोले, जिन्होंने अपनी पसंद के साथी को पाया, वही जोड़ा आज मौत को गले लगाकर सबको दर्द दे गया.