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जुमे की नमाज से पहले संभल में सुरक्षा सख्त, जामा मस्जिद के पास RAF और PAC

संभल संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा को लेकर तीन सदस्य न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है. ऐसे में शुक्रवार को जुमे की नमाज को लेकर लखनऊ पुलिस मुख्यालय से मुरादाबाद रेंज के कई जिलों में हाई अलर्ट रखा गया है. संभल की जामा मस्जिद में दोपहर 1:30 बजे अदा की जाने वाली नमाज से पहले चारों तरफ रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों का कड़ा पहरा है. स्थानीय पुलिस फोर्स भी तैनात की है. ड्रोन से निगरानी के साथ ही सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखी जा रही है. नमाज के दौरान दी जाने वाली तकरीर पर भी प्रशासन की नजर रहेगी.  दरअसल, गुरुवार को न्यायिक जांच आयोग के द्वारा मुख्यमंत्री योगी को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद आज जुमे की नमाज को लेकर संभल पुलिस-प्रशासन अलर्ट पर है. आज दोपहर को जिले की जामा मस्जिद में नमाज अदा की जाएगी. ऐसे में जामा मस्जिद के मुख्य द्वार के बाहर रैपिड एक्शन फोर्स और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई है. मस्जिद की तरफ जाने वाले रास्तों पर लकड़ी का जाल लगाकर बैरिकेडिंग की गई है.  वहीं, मस्जिद की तरफ जाने वाले रास्तों यानी कि पश्चिमी हिस्से में भी जवान लगाए गए हैं. इसी के साथ जामा मस्जिद के आसपास के इलाके में सीसीटीवी कैमरो से भी निगरानी की जा रही है. हिंसा के बाद से सीसीटीवी कैमरे का कंट्रोल रूम मस्जिद के सामने बनी हुई सत्यव्रत पुलिस चौकी में है.  उधर, न्यायिक आयोग के द्वारा मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपने के बाद जामा मस्जिद के सदर जफर अली ने कहा कि मेरी हिंदू और मुस्लिम भाइयों से अपील है कि शहर में अमन शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखें. उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के आने से मस्जिद में जुमे की नमाज पर कोई ऐसा नहीं पड़ेगा. जिस तरह से हमेशा नमाज होती आई है, उस तरह से आज भी नमाज अदा की जाएगी. 

वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2023-24 के नतीजों में कारखानों से लेकर जीवीए तक हर मोर्चे पर यूपी नंबर वन

उत्तर प्रदेश ने तोड़े सभी रिकार्ड, उद्योग वृद्धि में बना देश का चैम्पियन राज्य वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2023-24 के नतीजों में कारखानों से लेकर जीवीए तक हर मोर्चे पर यूपी नंबर वन प्रदेश के जीवीए में हुई 25.03% की ऐतिहासिक वृद्धि, अखिल भारतीय औसत से दोगुने से भी अधिक प्रदेश में कारखानों की संख्या में 15.91% की वृद्धि, राष्ट्रीय औसत से लगभग 7 गुना अधिक कार्यरत कर्मियों की संख्या में भी 9.37% की वृद्धि जो देश की औसत वृद्धि 5.9% से बेहतर योगी सरकार के विज़न के चलते यूपी में शुरू हुआ औद्योगिक क्रांति का युग सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश की नई औद्योगिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MOSPI) भारत सरकार द्वारा जारी वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2023-24 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश ने कारखानों की संख्या, कार्यरत कर्मियों और सकल मूल्य संवर्धन (GVA) – तीनों ही मोर्चों पर देश के सभी बड़े औद्योगिक राज्यों को पछाड़ दिया है।  औद्योगिक विकास के इस रिकॉर्ड प्रदर्शन ने साबित कर दिया है कि योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब देश की नई औद्योगिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है। जीवीए वृद्धि दर में उत्तर प्रदेश ने तोड़ा रिकॉर्ड वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2023-24 रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश का सकल मूल्य संवर्धन (GVA) वर्ष 2022-23 के ₹1.34 लाख करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹1.67 लाख करोड़ हो गया, यानी इसने 25.03% की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है। यह दर अखिल भारतीय औसत (11.9%) से दोगुने से भी अधिक है। इस तरह उत्तर प्रदेश इस मामले में देश में प्रथम स्थान पर है। कारखानों और रोजगार की संख्या में अभूतपूर्व उछाल रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में कारखानों की संख्या 19,102 (2022-23) से बढ़कर 22,141 (2023-24) हो गई है, जो 15.91% की वृद्धि दर्शाती है। यह वृद्धि राष्ट्रीय औसत (2.7%) से लगभग 7 गुना अधिक है। इसी तरह, कार्यरत कर्मियों की संख्या भी 14.86 लाख से बढ़कर 16.26 लाख तक पहुंच गई है, यानी 9.37% की वृद्धि जो देश की औसत वृद्धि (5.9%) से बहुत आगे है। योगी सरकार के प्रयासों का असर उद्योग वृद्धि में उत्तर प्रदेश के इस उल्लेखनीय प्रदर्शन में योगी सरकार की औद्योगिक नीतियों, निवेश प्रोत्साहन और बेहतर कानून-व्यवस्था को मुख्य कारण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के चलते उत्तर प्रदेश आज देश का औद्योगिक हब बनने की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है। यह उपलब्धि निवेशकों के विश्वास, श्रमिकों की मेहनत और सरकार की पारदर्शी नीतियों का परिणाम है।  टेबल अन्य राज्यों से तुलना में यूपी सबसे आगे राज्य, कारखानों की संख्या, कुल कर्मियों की संख्या, जीवीए उत्तर प्रदेश 15.91% 9.37% 25.03% कर्नाटक 3.27% 1.36% 18.76%  तमिलनाडु 1.15% 7.55% 11.16% महाराष्ट्र 0.35% 6.79% 9.27% गुजरात 7.35% 9.63% 7.51% भारत 2.7% 5.9% 11.9%

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सतत मॉनीटरिंग के बाद प्रभारी मंत्रियों को सौंपी राहत कार्यों की कमान

यूपी में बाढ़ : इस साल 43 जनपदों पर नदियां हुईं नाराज़, योगी सरकार बनी ढाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सतत मॉनीटरिंग के बाद प्रभारी मंत्रियों को सौंपी राहत कार्यों की कमान   इस वर्ष यूपी के 43 जिले बाढ़ से रहे हैं प्रभावित, फिलहाल 18 जिलों में बाढ़ की स्थिति इस वर्ष 9.55 लाख से अधिक जनसंख्या आई बाढ़ की चपेट में, अब केवल 2.46 लाख जनता, जिनका सरकार रख रही पूरा ध्यान   1273 मेडिकल टीमों ने अबतक निभाई सक्रिय भूमिका, 1796 बाढ़ चौकियों ने पहुंचा प्रभावितों को राहत   3579 नावें और मोटरबोट ने बचाव कार्य में लगकर बचाई जिंदगियां   अबतक 43 जनपदों के लिए 1391 शरणालय बनाए गए थे, वर्तमान में 18 जनपदों के लिए 557 संचालित लखनऊ  बढ़ते जलवायु परिवर्तन के इस दौर में नदियों का कोप बढ़ने लगा है। इस वर्ष उत्तर प्रदेश में मानसून के दौरान बरसात और नदियों के प्रकोप ने प्रदेश के 43 जिलों को प्रभावित किया। बावजूद इसके योगी सरकार अपनी जनता के लिए ढाल की तरह खड़ी रही। राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अबतक 116 तहसीलें, 2673 ग्राम और 123 वार्ड जलभराव से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ की चपेट में कुल 9,55,654 से अधिक लोग आए हैं। इस आपदा से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत और बचाव कार्य तेज़ी से संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों को लगातार निर्देशित कर रहे हैं। बीते दिन उन्होंने सभी प्रभारी मंत्रियों को आदेशित किया कि वे अपने-अपने जिलों में बाढ़ राहत कार्यों की कमान खुद संभालें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस संकट की घड़ी में सरकार हर नागरिक के साथ खड़ी है। राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी के मुताबिक अब तक प्रदेश में 1796 बाढ़ चौकियां स्थापित की गईं हैं और 1273 मेडिकल टीमों का गठन किया गया है। 3579 नाव एवं मोटरबोट बचाव कार्य में लगाए गए। वहीं, 1391 बाढ़ शरणालय बनाए गए जिनमें से 557 वर्तमान में संचालित हैं, जहां 79,958 लोग आश्रय लिए हुए हैं। अब तक 1,00,404 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। सरकार ने प्रभावितों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब तक 1,82,216 खाद्यान्न पैकेट और 10,30,534 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। 774 मकान क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें से 637 को सहायता राशि दी गई है, बाकियों को भी जल्द से जल्द सहायता राशि प्रदान करने की कवायद चल रही है। पशुओं के लिए 14,740 क्विंटल भूसा, पीने के पानी की शुद्धता के लिए 92,020 क्लोरीन टैबलेट और स्वास्थ्य की दृष्टि से 3,58,555 ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विषैले जीव-जंतुओं से बचाव के लिए एंटी स्नेक वैनम और एंटी रैबिज टीकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि “आपदा की इस घड़ी में सरकार हर पीड़ित के साथ खड़ी है और किसी को भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।”  इस वर्ष बाढ़ प्रभावित जिलों में…  बलिया, बहराइच, बदायूं, चंदौली, फर्रुखाबाद, गोंडा, गाजीपुर, हरदोई, कानपुर नगर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, प्रयागराज, शाहजहांपुर, उन्नाव, वाराणसी, मऊ, औरैया, अमरोहा, बस्ती, बांदा, बाराबंकी, कन्नौज, हापुड़, बिजनौर, संभल, संत कबीर नगर, गौतमबुद्ध नगर, गोरखपुर, मुरादाबाद, कानपुर देहात, फतेहपुर, अयोध्या, जालौन, आगरा, इटावा, चित्रकूट, हमीरपुर, भदोही, मथुरा और श्रावस्ती समेत 43 जिले शामिल रहे। आज तक की स्थिति फिलहाल प्रदेश में बाढ़ प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 18 रह गई है, इनमें- बलिया, बहराइच, बदायूं, चंदौली, फर्रुखाबाद, गोंडा, गाजीपुर, हरदोई, कानपुर नगर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, प्रयागराज, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं।  अब तक के आंकड़े साफ बताते हैं कि योगी सरकार ने हर स्तर पर तत्परता दिखाते हुए जन-जीवन की रक्षा की है।

आपदा मित्रों को होमगार्ड स्वयंसेवकों के रूप में तैनाती देने के लिए जनपदवार कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने होमगार्डों के रिक्त पदों पर नए एनरोलमेंट की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए आपदा मित्रों को होमगार्ड स्वयंसेवकों के रूप में तैनाती देने के लिए जनपदवार कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए: मुख्यमंत्री समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष एनरोलमेंट के लिए पुलिस भर्ती एवं प्रशिक्षण बोर्ड की मदद से गठित होगा नया बोर्ड: मुख्यमंत्री एनरोलमेंट नियमों में बदलाव पर मुख्यमंत्री का जोर, अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष करने और लिखित परीक्षा की व्यवस्था पर बल आपदा प्रबंधन का अनुभव या प्रशिक्षण प्राप्त लोगों को होमगार्ड एनरोलमेंट में मिलेगी प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाये रखने, यातायात नियंत्रण तथा आपदा की स्थिति में होमगार्डों की कर्तव्य परायणता सराहनीय: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में होमगार्डों के रिक्त पदों पर नए एनरोलमेंट की प्रक्रिया तत्काल प्रारम्भ करने के निर्देश दिए हैं। बदलते समय और बढ़ते दायित्वों को देखते हुए होमगार्ड एनरोलमेंट से जुड़े नियमों में संशोधन पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष एनरोलमेंट सुनिश्चित करने के लिए पुलिस भर्ती एवं प्रशिक्षण बोर्ड के सहयोग से नया बोर्ड गठित करने के भी निर्देश दिए हैं। गुरुवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था, यातायात नियंत्रण तथा आपदा की परिस्थितियों में होमगार्ड स्वयंसेवकों की भूमिका की सराहना की। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 1,18,348 स्वीकृत पदों के विरुद्ध 71,155 होमगार्ड सक्रिय हैं। अगले दस वर्षों में लगभग 38,000 स्वयंसेवक सेवानिवृत्त होंगे, जबकि मौजूदा बल में पचास वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 51 प्रतिशत से अधिक स्वयंसेवक कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को अधिक अवसर देने और सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पात्रता, परीक्षा और चयन से संबंधित प्रावधानों में सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बल को और अधिक युवा स्वरूप देने के लिए एनरोलमेंट की अधिकतम आयु 30 वर्ष हो। साथ ही, चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा अनिवार्य की जाए, पात्रता मानकों को समयानुकूल बनाया जाए और परीक्षण प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन से संबंधित अनुभव या प्रशिक्षण प्राप्त लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नई एनरोलमेंट व्यवस्था शीघ्र तैयार की जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रिक्तियों की पूर्ति से उत्तर प्रदेश का होमगार्ड संगठन और अधिक प्रशिक्षित, सक्षम और जनसेवा के प्रति समर्पित स्वरूप में सामने आएगा। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि होमगार्ड्स की सेवाएं पुलिस प्रशासन, यातायात प्रबंधन, शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन, खनन, नगरीय निकायों, दूरदर्शन, आकाशवाणी, एफसीआई और विकास प्राधिकरणों सहित विभिन्न क्षेत्रों में ली जा रही हैं। हाल ही में हुए लोकसभा व विधानसभा चुनावों, विभिन्न राज्यों के निर्वाचन कार्य तथा महाकुंभ-2025 जैसे आयोजनों में भी होमगार्ड्स ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि विभाग की समस्त प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है। ड्यूटी आवंटन, भत्तों का भुगतान, अनुग्रह राशि और पेंशन जैसी व्यवस्थाएं अब पूरी तरह ऑनलाइन हो चुकी हैं। होमगार्ड मित्र ऐप जैसी पहल ने कार्यप्रणाली को और अधिक सरल व पारदर्शी बनाया है। प्रशिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए एक केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान और 12 मंडलीय प्रशिक्षण केंद्र सक्रिय हैं, जहां प्रतिवर्ष 15,000 से अधिक स्वयंसेवकों को नियमित और उन्नत प्रशिक्षण दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि नई नामांकन व्यवस्था लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश का होमगार्ड बल और अधिक पेशेवर बनेगा तथा जनता की सेवा में पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करेगा।

दीपोत्सव 2025: अयोध्या में तैयारी जोरों पर, नोडल अधिकारी घोषित

अयोध्या उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव 2025 को लेकर तैयारी जोरशोर चल रही है। इसके लिए यूपी सरकार ने अधिकारियों की टीम भी गठित कर दी है। इसे लेकर एक पत्र भी जारी किया गया है। रामनगरी अयोध्या में आयोजित होने वाले भव्य दीपोत्सव 2025 की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने दीपोत्सव आयोजन की निगरानी और समन्वय के लिए अधिकारियों की टीम गठित कर दी है। जारी आदेश के अनुसार, अरविंद कुमार मिश्रा और डॉ. जितेंद्र प्रताप सिंह को दीपोत्सव के लिए नोडल अधिकारी नामित किया गया है। ये दोनों अधिकारी आयोजन से जुड़े सभी कार्यक्रमों, व्यवस्थाओं और मीडिया समन्वय का कार्य संभालेंगे। यह आदेश सूचना निदेशक विशाल सिंह ने जारी किया है। उत्तर प्रदेश सरकार सूचना एवं जन संपर्क विभाग द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार, अयोध्या में 19 अक्टूबर 2025 को प्रान्तीयकृत दीपोत्सव मेला का आयोजन होगा। बता दें कि पिछले साल 2024 में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार भगवान राम के आगमन पर दीपोत्सव का आयोजन हुआ था। इस दौरान 25 लाख 12 हजार 585 दीये जलाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया। इसके साथ 1 हजार 121 लोगों ने एक साथ सरयू आरती कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम का शुभारंभ पहला दीया जलाकर किया था। सरयू घाट पर लेजर और लाइट शो का आयोजन हुआ था, जिसमें दीयों और रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाता घाट, साउंड-लाइट शो के जरिए रामलीला का वर्णन किया गया। पहली बार 1,121 वेदाचार्यों ने एक साथ सरयू मैया की आरती की थी।

बड़े औद्योगिक और श्रम सुधारों की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री

राज्य में जल्द आएगा ’सुगम्य व्यापार (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक  लखनऊ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म के मंत्र के अनुरूप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में औद्योगिक व श्रम सुधारों की दिशा में बड़े कदम उठाना शुरू कर दिए हैं। राज्य में उद्योग और व्यापार से जुड़े 13 राज्य अधिनियमों के लगभग 99 फीसदी आपराधिक प्रावधान समाप्त करने की तैयारी कर रही है। ऐसा होने पर उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जो व्यावहारिकता के दृष्टिकोण से इतने बड़े पैमाने पर आपराधिक प्रावधानों को गैर-आपराधिक श्रेणी में परिवर्तित करेगा। गुरुवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को और सशक्त बनाने के लिए नए कदम उठाना समय की मांग है। साथ ही यह भी उतना ही आवश्यक है कि औद्योगिक विकास के साथ श्रमिकों की सुरक्षा और सुविधा की गारंटी सुनिश्चित हो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘श्रमेव जयते’ के भाव को आत्मसात करते हुए हमें ऐसे सुधार करने होंगे, जो उद्यमियों और श्रमिकों; दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हों। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार शीघ्र ही ‘सुगम्य व्यापार (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2025’ लाने जा रही है। इसके अंतर्गत आबकारी अधिनियम, शीरा अधिनियम, वृक्ष संरक्षण अधिनियम, राजस्व संहिता, गन्ना अधिनियम, भूगर्भ जल अधिनियम, नगर निगम अधिनियम, प्लास्टिक कचरा अधिनियम, सिनेमा अधिनियम तथा क्षेत्र व जिला पंचायत अधिनियम सहित कई कानूनों को अधिक व्यावहारिक स्वरूप दिया जाएगा। इनमें जहां पहले कारावास की सज़ा का प्रावधान था, वहां अब अधिक आर्थिक दंड व प्रशासनिक कार्रवाई को वरीयता देने की योजना है। नए प्रावधानों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनावश्यक दंडात्मक प्रावधानों को समाप्त कर, उनकी जगह पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवस्था लागू करना समय की मांग है। बैठक में अवगत कराया गया कि इस विधेयक पर संबंधित 14 विभागों से राय ली गई है। अधिकांश विभाग सहमत हैं, जबकि कुछ ने आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि आपत्तियों और सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए विधेयक को ऐसा स्वरूप दिया जाए, जो उद्योग और श्रमिकों के हितों में संतुलित हो। बैठक में श्रम कानूनों के सरलीकरण पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावों में फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि बढ़ाने, दुकानों व प्रतिष्ठानों के नियमों में व्यावहारिक बदलाव करने और महिलाओं को अधिक अवसर उपलब्ध कराने जैसे कदम शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निरीक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए स्व-सत्यापन और थर्ड पार्टी ऑडिट की प्रणाली अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से जहां उद्योगों का बोझ कम होगा, वहीं श्रमिकों का हित भी सुरक्षित होगा। सुधारों की शृंखला में ‘निवेश मित्र 3.0’ पर भी विचार-विमर्श हुआ।  इसके तहत निवेशकों की आवेदन व अनुमोदन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सुगम बनाया जाएगा। कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म, पैन-आधारित पहचान, स्मार्ट डैशबोर्ड, बहुभाषी सहायता और एआई चैटबॉट जैसी सुविधाएँ जोड़ी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सेवाओं की समयबद्ध डिलीवरी और निवेशकों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निवेश मित्र पोर्टल का नया संस्करण शीघ्र ही लॉन्च किया जाए, जिससे ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को नई मजबूती मिलेगी।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- बड़े औद्योगिक और श्रम सुधारों की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को और सशक्त बनाने के लिए नए कदम उठाना समय की मांग है और औद्योगिक विकास के साथ श्रमिकों की सुरक्षा और सुविधा की गारंटी सुनिश्चित करना भी जरुरी है। श्री योगी ने गुरुवार को यहां एक उच्च स्तरीय बैठक में कहा “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘श्रमेव जयते’ के भाव को आत्मसात करते हुए हमें ऐसे सुधार करने होंगे, जो उद्यमियों और श्रमिकों; दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हों।” मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार शीघ्र ही ‘सुगम्य व्यापार (प्राविधानों का संशोधन) विधेयक, 2025’ लाने जा रही है। इसके अंतर्गत आबकारी अधिनियम, शीरा अधिनियम, वृक्ष संरक्षण अधिनियम, राजस्व संहिता, गन्ना अधिनियम, भूगर्भ जल अधिनियम, नगर निगम अधिनियम, प्लास्टिक कचरा अधिनियम, सिनेमा अधिनियम तथा क्षेत्र व जिला पंचायत अधिनियम सहित कई कानूनों को अधिक व्यावहारिक स्वरूप दिया जाएगा। इनमें जहाँ पहले कारावास की सज़ा का प्रावधान था, वहां अब अधिक आर्थिक दंड व प्रशासनिक कार्रवाई को वरीयता देने की योजना है। नए प्रावधानों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनावश्यक दंडात्मक प्रावधानों को समाप्त कर, उनकी जगह पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवस्था लागू करना समय की मांग है। बैठक में बताया गया कि इस विधेयक पर संबंधित 14 विभागों से राय ली गई है। अधिकांश विभाग सहमत हैं, जबकि कुछ ने आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि आपत्तियों और सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए विधेयक को ऐसा स्वरूप दिया जाए, जो उद्योग और श्रमिकों के हितों में संतुलित हो। बैठक में श्रम कानूनों के सरलीकरण पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावों में फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि बढ़ाने, दुकानों व प्रतिष्ठानों के नियमों में व्यावहारिक बदलाव करने और महिलाओं को अधिक अवसर उपलब्ध कराने जैसे कदम शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निरीक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए स्व-सत्यापन और थर्ड पार्टी ऑडिट की प्रणाली अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से जहां उद्योगों का बोझ कम होगा, वहीं श्रमिकों का हित भी सुरक्षित होगा। सुधारों की शृंखला में ‘निवेश मित्र 3.0’ पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसके तहत निवेशकों की आवेदन व अनुमोदन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सुगम बनाया जाएगा। कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म, पैन-आधारित पहचान, स्मार्ट डैशबोर्ड, बहुभाषी सहायता और एआई चैटबॉट जैसी सुविधाएँ जोड़ी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सेवाओं की समयबद्ध डिलीवरी और निवेशकों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निवेश मित्र पोर्टल का नया संस्करण शीघ्र ही लॉन्च किया जाए, जिससे ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को नई मजबूती मिलेगी।  

बिहार के दरभंगा के अतरबेल में कांग्रेस-आरजेडी की रैली में दी गई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भद्दी-भद्दी गालियां

मातृ शक्ति का अपमान करने पर भड़के योगी, कहा- एक साधारण मां ने संघर्ष से गढ़ा राष्ट्रसेवक, आज मोदी विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिहार के दरभंगा के अतरबेल में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल की रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ प्रयोग की गई बेहद अभद्र भाषा की कड़ी निंदा की है। यह कार्यक्रम बिहार यूथ कांग्रेस के नौशाद द्वारा कराया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादा और भारतीय संस्कृति पर सीधा प्रहार बताया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कांग्रेस और आरजेडी के नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के प्रति इस्तेमाल की गई अपमानजनक भाषा न केवल प्रधानमंत्री का अपमान है, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है। योगी आदित्यनाथ ने लिखा, "कांग्रेस और आरजेडी के मंच से आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के लिए प्रयुक्त अभद्र भाषा अत्यंत निंदनीय एवं राजनीतिक मर्यादा का पतन है। यह कृत्य सिर्फ प्रधानमंत्री जी का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों की भावनाओं का अपमान है।" उन्होंने आगे कहा कि एक साधारण मां ने अपने संघर्ष और संस्कारों से ऐसे पुत्र को गढ़ा, जिसने स्वयं को राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित कर दिया और आज वह विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में करोड़ों भारतीयों के हृदय में बसते हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि बिहार की जनता इस तरह की 'घृणित राजनीति' का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी और भारतीय संस्कृति तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेगी।

2023 और 2024 में मिली अभूतपूर्व सफलता ने बढ़ाया भरोसा, तीसरे संस्करण से और बड़ी उड़ान की तैयारी

निवेश और निर्यात का बड़ा मंच बना यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो  2023 और 2024 में मिली अभूतपूर्व सफलता ने बढ़ाया भरोसा, तीसरे संस्करण से और बड़ी उड़ान की तैयारी 2024 में बी2बी और बी2सी के माध्यम से 2200 करोड़ रुपए से अधिक के मिले निर्यात ऑर्डर अकेले प्रदर्शनी के माध्यम से उद्यमियों ने की 40 करोड़ रुपए से ज्यादा की रिकॉर्ड सेल प्रदेश के विभिन्न जनपदों से शीर्ष 20 उद्यमियों ने हासिल किया 630 करोड़ से अधिक का निर्यात ऑर्डर 2023 में पहले संस्करण के दौरान भी 1000 करोड़ से अधिक रहा था ओवरऑल बिजनेस वॉल्यूम यूपीआईटीएस 2025 में एक बार फिर‘मेक इन इंडिया’ व ‘लोकल फॉर वोकल’ को मिलेगा वैश्विक मंच लखनऊ  उत्तर प्रदेश का इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) अब राज्य की पहचान को वैश्विक व्यापार मानचित्र पर स्थापित करने का सशक्त जरिया बन गया है। 2023 और 2024 के सफल आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश न केवल घरेलू बाजार में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है। अब तीसरा संस्करण और बड़ी उम्मीदों के साथ आयोजित होने जा रहा है, जहां निवेश और निर्यात के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं। उम्मीद की जा रही है कि यह आयोजन पिछले दोनों संस्करणों से कहीं बड़ा और प्रभावी होगा। न केवल निर्यात और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे बल्कि उत्तर प्रदेश वैश्विक व्यापार जगत में अपनी मजबूत स्थिति को और पुख्ता करेगा। 2023 में मिली ऐतिहासिक शुरुआत यूपीआईटीएस की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी। इस पहले संस्करण में 2000 से अधिक प्रदर्शकों ने प्रदेश की कला, संस्कृति, कृषि और औद्योगिक ताकत को दुनिया के सामने रखा। 60 देशों के 350 विदेशी खरीदारों और करीब 3 लाख विजिटर्स की मौजूदगी में 1000 करोड़ रुपए से अधिक का बिजनेस वॉल्यूम दर्ज हुआ। मुख्यमंत्री के विजन को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रदर्शित करने के लिए शुरू किया गया यह आयोजन स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच दिलाने का बड़ा माध्यम साबित हुआ। 2024 ने दी नई ऊंचाई दूसरा संस्करण 2024 में और भी प्रभावशाली साबित हुआ। वियतनाम को सहयोगी देश के रूप में शामिल करने वाले इस आयोजन में 2122 प्रदर्शक, 70 देशों से आए 350 विदेशी खरीदार और लगभग 5 लाख विजिटर्स ने हिस्सा लिया। बी2बी और बी2सी मॉडल के जरिए 2200 करोड़ रुपए से अधिक के निर्यात ऑर्डर प्राप्त हुए, वहीं प्रदर्शनी के दौरान 40 करोड़ रुपए से ज्यादा की सीधी बिक्री दर्ज की गई। सबसे खास उपलब्धि यह रही कि शीर्ष 20 उद्यमियों को ही 630 करोड़ रुपए से अधिक के निर्यात ऑर्डर मिले। इनमें मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, कानपुर, बागपत, बाराबंकी, मिर्जापुर, मथुरा, संभल और ग्रेटर नोएडा जैसे जिलों के उद्यमी शामिल रहे। ग्लोबल ब्रांडिंग का बना प्रतीक यूपीआईटीएस ने केवल कारोबार ही नहीं बढ़ाया बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ को वैश्विक पहचान देने का भी काम किया। ओडीओपी, स्टार्टअप, एमएसएमई, रोजगार और निर्यात प्रोत्साहन की राज्य सरकार की नीतियों ने इसमें नई ऊर्जा भर दी है। यूपीआईटीएस 2025 को लेकर इस बार खास रणनीति बनाई जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार न केवल परंपरागत उत्पादों को वैश्विक बाजार मिलेगा बल्कि हाई-टेक सेक्टर्स में भी निवेश और निर्यात के बड़े मौके पैदा होंगे।    

वैष्णो देवी त्रासदी में यूपी के 11 भक्तों की जान गई, बारिश बनी तबाही की वजह

लखनऊ  जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में बीते मंगलवार को एक बड़ा हादसा हुआ, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। माता वैष्णो देवी मंदिर के रास्ते पर भूस्खलन की चपेट में आकर 34 लोगों की जान चली गई, जिनमें उत्तर प्रदेश के 11 श्रद्धालु भी शामिल हैं। इस दुखद घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक जताते हुए मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शवों को जल्द से जल्द और सम्मानपूर्वक उनके घर पहुंचाया जाए। कैसे हुआ हादसा? मिली जानकारी के मुताबिक, बीते मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे तेज बारिश के कारण माता वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले रास्ते पर अर्धकुंवारी के पास भयानक भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से बड़े-बड़े पत्थर और मलबा श्रद्धालुओं पर गिर गया। इस हादसे में 34 लोगों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। घायलों का इलाज जम्मू के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। उत्तर प्रदेश के श्रद्धालुओं की पहचान प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक आगरा से 3 लोग, मुजफ्फरनगर से 3 लोग, बरेली से 1 और अन्य जिलों से 4 लोग इस हादसे में मारे गए हैं। बागपत की रहने वाली चांदनी (23) और उनकी बड़ी बहन नीरा (36) भी इस हादसे में मारी गईं। चांदनी की शादी इसी साल अप्रैल में खेकड़ा निवासी मयंक गोयल से हुई थी। नीरा की शादी मेरठ के अमित जौहरी से हुई थी। मयंक, अमित और उनकी 10 साल की बेटी विधि हादसे में बुरी तरह घायल हुए हैं और अस्पताल में इलाज चल रहा है। परिवार वालों को हादसे की खबर एक अस्पताल कर्मचारी के फोन से मिली। फिर वे तुरंत जम्मू के लिए रवाना हुए। योगी सरकार की मदद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया। अधिकारियों को शवों को सम्मानपूर्वक घर भेजने और घायलों को बेहतर इलाज देने के निर्देश दिए। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि उत्तर प्रदेश के कितने लोग इस हादसे से प्रभावित हुए हैं, लेकिन 11 मृतकों की पहचान हो चुकी है।   तेज बारिश और राहत-बचाव कार्य जम्मू में पिछले 4 दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है। पिछले 24 घंटों में 380 मिमी बारिश हुई, जो कि इतिहास में सबसे ज्यादा है। इस बारिश के कारण भूस्खलन, बाढ़ और ट्रैफिक जाम जैसी दिक्कतें खड़ी हो गई हैं। राहत कार्य में जुटे दल: – NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) – भारतीय सेना – स्थानीय प्रशासन – भारतीय वायुसेना ने C-130 विमान से राहत सामग्री भेजी है। – Mi-17 V5 और चिनूक हेलीकॉप्टर भी तैयार रखे गए हैं। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने यात्रियों के लिए नई एडवाइजरी जारी कर दी है और यात्रा को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है।